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किस महीने में हुई शादी, जानें कैसी होगी मैरिड लाइफ? (Your Marriage Month Says A Lot About Your Married Life)

रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ नवंबर में शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल रहते हैं, जबकि वैलेन्टाइन्स डे के दिन शादी करनेवाले 18-36% कपल्स के तलाक़ हो जाते हैं. आपकी शादी किस महीने में हुई है और आपकी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी होगी, आइए जानते हैं.

Married Life

जनवरी

इस महीने में जिन लोगों की शादी होती है, उन पर कुंभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनका दांपत्य जीवन ख़ुशहाल रहता है. दोनों पार्टनर्स में आपसी समझ काफ़ी अच्छी रहती है. दोनों एक-दूसरे के प्रति वफ़ादार होते हैं. समय-समय पर इन कपल्स को रोमांटिक सरप्राइज़ेस और गिफ्ट्स मिलते ही रहते हैं.

लव टिप: हर रिश्ता उसे निभानेवाले पर निर्भर करता है, इसलिए अपने रिश्ते को ख़ुशहाल बनाए रखने के लिए अपना सौ प्रतिशत दें.

फरवरी

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स की शादीशुदा ज़िंदगी को आप ‘इमोशनल जर्नी’ कह सकते हैं, क्योंकि दोनों ही पार्टनर्स एक-दूसरे के प्रति इमोशनल होते हैं. आप पर मीन राशि का प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण आप एक-दूसरे के प्रति सारी ज़िम्मेदारियां निभाते हैं. कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि पति या पत्नी में से एक बहुत वफ़ादार होता है, पर दूसरा उतना वफ़ादार नहीं होता और रिश्ता बिखर जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबॉर्न में हुई स्टडी में पता चला है कि जो लव बर्ड्स वैलेंटाइन्स डे के दिन शादी करते हैं, उनके रिश्ते के टूटने के चांसेस 18 से 36% होता है.

लव टिप: जब भी आपको लगे कि रिश्ता कमज़ोर पड़ रहा है, तभी एक रोमांटिक हनीमून प्लान करें. अपने रिश्ते को ट्रैक पर लाने का इससे बेहतर उपाय नहीं हो सकता.

मार्च

अगर आपकी शादी इस महीने में हुई है, तो आपकी शादी पर मेष राशि का प्रभाव पड़ता है. आपका रिश्ता काफ़ी उतार-चढ़ाव के दौर से गुज़रता है, जहां अच्छे समय के साथ-साथ आप दोनों बुरा समय भी देखते हैं. कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपको अपने पार्टनर का रवैया ही समझ में न आए. कल जिस बात पर वो आपसे सहमत थे, आज उसी चीज़ के लिए आपकी बहस हो जाए. छोटी-छोटी बातों पर इनकी बहस हो सकती है.

लव टिप: इतना याद रखें कि नोक-झोंक हर रिश्ते में होती है, इसलिए उसे मन में रखकर न बढ़ाएं. एक-दूसरे के व्यक्तित्व व विचारों को समझने का प्रयास ही आपके रिश्ते को मज़बूत बनाएगा.

अप्रैल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह महीना विवाह के लिए सबसे अनुकूल समय लेकर आता है. तभी तो आज भी ज़्यादातर शादियां अप्रैल के महीने में होती हैं. इस महीने शादी करनेवालों पर वृषभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी सेक्स लाइफ भी काफ़ी रोमांटिक होती है. वृषभ के प्रभाव के कारण कुछ पार्टनर्स में से एक बहुत डॉमिनेटिंग होता है, पर दूसरे के कूल होने के कारण रिश्ता आसानी से निभ जाता है.

लव टिप: अपने प्यार को जताने में ज़रा भी कंजूसी न करें. कभी चॉकलेट्स, कभी फूल, तो कभी प्रेमपत्र के ज़रिए समय-समय पर अपने प्यार को जताते रहें.

मई

इस महीने शादी करनेवालों पर मिथुन राशि का प्रभाव पड़ता है. जैसा कि इस राशि की ख़ूबी है, दो पहलू या दो रूप होने की, इस ख़ूबी का असर आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने शादी करनेवालों के रिश्ते के सफल होने की जितनी गुंजाइश होती है, उतनी ही गुंजाइश इसके असफल होने की भी होती है. मतलब या तो आप जन्म-जन्मांतर तक साथ निभानेवाले कपल बनते हैं या फिर जल्द ही अपनी-अपनी नई राह चुन लेते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि दो में से एक साथी का स्वभाव बहुत बुरा हो या फिर बहुत ही अच्छा हो.

लव टिप: अपने रिश्ते को सफल या असफल बनाना आप दोनों के हाथ में है. सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शादी को पूरे दिल से निभाएं. कभी कुछ बुरा लगे, तो भी रिश्ते को बचाने की पूरी कोशिश करें.

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जून

प्यार-दुलार के साथ-साथ दया भाव इन कपल्स में कूट-कूटकर भरा होता है, तभी तो लोग इनकी सफल शादी और प्यार की मिसालें देते हैं. अगर आपकी शादी इस महीने हुई है, तो आप पर कर्क राशि का प्रभाव पड़ता है. ये कपल्स एक-दूसरे के साथ एक-दूसरे के परिवार को भी बख़ूबी संभालते हैं. इसके अलावा अपनी आनेवाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने की पूरी कोशिश करते हैं. कुल-मिलाकर कहें, तो ये सबसे ज़िम्मेदार और केयरिंग कपल्स होते हैं.

लव टिप: जब भी पार्टनर आपके या परिवार के लिए कुछ ख़ास करता है, तो उसके प्रयासों की सराहना करें. उन्हें जताएं कि वो आपके लिए कितने बहुमूल्य हैं.

जुलाई

इस महीने शादी करनेवालों पर सिंह राशि का प्रभाव पड़ता है. आप दोनों ही अपने रिश्ते को सफल बनाने के लिए अपना सौ प्रतिशत देते हैं और उसमें पूरी तरह सफल भी होते हैं. इस राशि का ऐसा प्रभाव है कि आप एक-दूसरे के प्रति हमेशा आकर्षण महसूस करते हैं. एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं. आपका शाही अंदाज़ आप अपने पार्टनर कोे भी देते हैं, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी रौनक़ से भरपूर होती है. आप अपने शादीशुदा रिश्ते से हमेशा संतुष्ट रहते हैं.

लव टिप: सेक्स लाइफ को बूस्ट करने के लिए हमेशा बेडरूम में कुछ नया ट्राई करें. आप चाहें, तो दोनों किसी एडवेंचर ट्रिप पर भी जा सकते हैं. यह आपके रिश्ते में नई जान डाल देगा.

अगस्त

एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ इस महीने शादी करनेवाले कपल्स को बच्चे बहुत पसंद होते हैं, इसीलिए वो दो से ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं. इन्हें बड़ा परिवार  अच्छा लगता है. इस महीने शादी करनेवालों पर कन्या राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी ज़िंदगी में कई परेशानियां भी आती हैं, पर दोनों मिलकर उनका समाधान निकाल लेते हैं. अगर ये एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखें, तो इनका रिश्ता बहुत मज़बूत साबित होता है.

लव टिप: पतियों के लिए बहुत ज़रूरी है कि ‘तुम’ या ‘मैं’ की बजाय ‘हम’ शब्द का इस्तेमाल ज़्यादा करें. ‘हमें ऐसा करना चाहिए, हमारे लिए यह सही होगा…’ जैसे वाक्यों का ज़्यादा उपयोग करें. पत्नी को कभी अलग-थलग पड़नेवाली भावना का एहसास न होने दें.

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सितंबर

अगर आपकी शादी भी इस महीने में हुई है, तो आप पर तुला राशि का प्रभाव रहता है. तुला की ख़ूबियों के कारण ये कपल काफ़ी बैलेंस्ड रहते हैं और इसीलिए ‘परफेक्ट कपल’ कहलाते हैं. इनके बीच शायद ही कभी बड़ा झगड़ा होता हो. हर तरह के विवाद को ये आपसी सहमति से सुलझाते हैं. दोनों के बीच का तालमेल ही इनकी ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का राज़ है.

लव टिप: हर रोज़ रोमांस के लिए थोड़ा समय निकालें. एक-दूसरे को यूं ही निहारना, बांहों में भरना, चुपके से किस कर लेना… इन छोटी-छोटी शरारतों से लाइफ में रोमांस बनाए रखें.

अक्टूबर

इस महीने शादी करनेवालों के वैवाहिक जीवन पर वृश्‍चिक राशि का प्रभाव पड़ता है. वृश्‍चिक राशि के गुणों के प्रभाव के कारण इनकी सेक्स लाइफ बेहद रोमांटिक होती है. ये कपल एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार और आकर्षण को बिल्कुल छिपाते नहीं. ज़िंदगी को खुलकर जीने के इनके फलस़फे का असर इनकी सक्सेसफुल मैरिड लाइफ में नज़र आता है. इनकी एक और ख़ूबी है कि ये किसी भी विपरीत परिस्थिति में पार्टनर को अकेला नहीं छोड़ते.

लव टिप: ‘तुम कितनी अच्छी हो…’ ‘मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं…’ ‘मैं समझता हूं…’ ‘मुझे माफ़ कर दो…’ ‘थैंक यू जी…’ ये वो वाक्य हैं, जो आपके रिश्ते में मिठास भरते हैं. रोज़ाना इन शब्दों का इस्तेमाल करें और देखें, किस तरह आपकी मैरिड लाइफ में मिठास बनी रहती है.

नवंबर

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल या यूं कहें ‘हैप्पीएस्ट कपल’ माने जाते हैं. इन पर धनु राशि का प्रभाव होता है, जिसके कारण ये काफ़ी संवेदनशील होते हैं. एक-दूसरे की कमियों और ख़ामियों को समझकर रिश्ता निभा लेना ही इनके रिश्ते की ख़ूबी है. ये कपल अपने प्यार को पहली प्राथमिकता देते हैं.

लव टिप:  रोज़ाना ऑफिस से आने के बाद एक-दूसरे को गले लगाएं. शादी के पहलेवाले रोमांच को बनाए रखने के लिए शादी के बाद भी हर महीने या दो महीने में डेट पर ज़रूर जाएं. प्यार के ख़ूबसूरत एहसास से अपने रिश्ते को सराबोर रखें.

दिसंबर

इस महीने शादी करनेवालों पर मकर राशि का प्रभाव रहता है. ऐसा देखा गया है कि सबसे रोमांटिक कपल्स दिसंबर में शादी करते हैं. सुरक्षित भविष्य की चाह में ये सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को बहुत तवज्जो देते हैं, जिससे कभी-कभी एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते, पर प्यार हमेशा इनकी पहली प्राथमिकता बना रहता है.

लव टिप: उतार-चढ़ाव हर क्षेत्र में लगा रहता है, इसलिए फाइनेंस संबंधी मामलों में कभी ज़िद न करें.  रोज़ाना 10 मिनट का ‘वी टाइम’ ज़रूर निकालें. एक-दूसरे से दिनभर की बातें और क़िस्से शेयर करें.

– संतारा सिंह

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पहला अफेयर: पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना (Pahla Affair: Pahle Pyar ki Akhri Tamanna)

Pahla Affair

पहला अफेयर: पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना (Pahla Affair: Pahle Pyar ki Akhri Tamanna)

कहते हैं, इंसान कितना भी चाहे, पर वो अपने पहले प्यार को कभी नहीं भुला पाता. पहले प्यार का एहसास, उसकी यादें उम्रभर जेहन में ज़िंदा रहती हैं. उम्र के किस मोड़ पर, कब कोई अपना-सा लगे कोई नहीं जानता. मुझे भी कहां पता था कि आज से बीस बरस पीछे छूट गई उन यादों की गलियों में मुझे फिर से भटकना पड़ेगा, जिन्हें मैं पीछे छोड़ आई थी.

आज उनके अचानक मिले इस संक्षिप्त पत्र ने फिर से मुझे उनके क़रीब पहुंचा दिया है. उनसे मेरी मुलाक़ात कॉलेज फंक्शन में हुई थी. वो मेरे सीनियर थे. मुलाक़ातें धीरे- धीरे दोस्ती में बदलीं और दोस्ती कब प्यार में बदल गयी, पता ही नहीं चला.

एक दिन वो मेरे पास आए और अपने प्यार का इज़हार कर दिया. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूं. दिल के ज़ज़्बात ज़बान तक लाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. कैसे कहती उनसे कि उनके सिवा कोई ख़यालों में आता ही नहीं, उनके अलावा किसी और को चाहा ही नहीं. पर बात दिल की दिल में ही रह गयी, मैं उनसे कुछ नहीं कह पायी. मेरे जवाब न देने की स्थिति में उन्होंने अपना फ़ोन नंबर देते हुए कहा कि वो मेरे फ़ोन का इंतज़ार करेंगे.

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घर पहुंच कर आईने के सामने न जाने कितनी बार ख़ुद को उनके जवाब के लिए तैयार किया, पर दिल की बात ज़बान तक नहीं ला सकी. मैं जितना ही उनके बारे में सोचती, उतना ही ख़ुुद को उनके क़रीब महसूस करती.
लेकिन मेरे प्यार के परवान चढ़ने से पहले ही उसे मर्यादाओं की बेड़ी में जकड़ जाना पड़ा. माता- पिता ने रिश्ता पक्का करने के साथ-साथ शादी की तारीख़ भी पक्की कर दी. मुझमें विरोध करने का साहस नहीं था, इसलिए चुपचाप घरवालों की मर्ज़ी से शादी कर ली- जवाब देना तो दूर, आख़िरी बार उन्हें देखना तक नसीब न हुआ.

शादी के बाद ज़िम्मेदारियों के बोझ तले कभी- कभार पहले प्यार की यादें ताज़ा हो भी जातीं तो मैं उन्हें ख़ुुद पर हावी न होने देती. पति-ससुराल वालों से कोई शिकायत नहीं थी, फिर भी हमेशा ये लगता कि कहीं कुछ छूट गया है. पति बहुत प्यार करते, लेकिन फिर भी मेरे मन में किसी और का ख़याल रहता. मगर तक़दीर का लिखा कौन टाल पाया है. आज इतने सालों बाद अचानक उनका पत्र आया है जिसमें लिखा है-
प्रिये,
सदा ख़ुुश रहो. मैंने तुम्हारा बहुत इंतज़ार किया,पर अब और न कर सकूंगा, क्योंकि शरीर ने साथ न देने का ़फैसला कर दिया है. व़क़्त बहुत कम है, आख़िरी बार तुम्हें देखने की तमन्ना है. हो सके तो आ जाओ.
तुम्हारा-आकाश

पत्र पढ़कर मुझे अपने कायर होने का एहसास हो रहा है. मुझमें तो अब भी साहस नहीं कि मैं दुनिया वालों को क्या, उन्हें ही बता सकूं कि मैं उन्हें कितना प्यार करती हूं. आज एक बार फिर मुझे औरत होने का हर्जाना चुकाना है, अपने पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना भी पूरी न करके. शायद ङ्गमेरी सहेलीफ के माध्यम से ही उन्हें मेरा जवाब मिल जाए- और उनकी ज़िंदगी से पहले उनका इंतज़ार ख़त्म
हो जाए.

– दीपमाला सिंह

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पहला अफेयर: ख़ामोशियां चीखती हैं… (Pahla Affair: Khamoshiyan Cheekhti Hain)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: ख़ामोशियां चीखती हैं… (Pahla Affair: Khamoshiyan Cheekhti Hain)

हमारी दोस्ती का आग़ाज़, शतरंज के मोहरों से हुआ था. जब शबीना अपने प्यादे से मेरे वज़ीर को शह देती, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता… और कहीं मेरा ऊंट उसके प्यादे को भगा-भगाकर बेहाल कर देता, तब उसके ग़ुस्सैल चेहरे की मायूसी देखती बनती.

आज उसकी वही बचकाना हरक़तें याद आती हैं, तो मन से एक हूक उठती है. एक साथ घूमना-फिरना, मौज-मस्ती के वो दिन… न जाने कहां गुम हैं? नहीं जानता वो दोस्ताना हाथ क्यों पीछे हट गया. उफ़़्फ्! व़क्त की गर्द ने मुझे अपनी आग़ोश में लपेट लिया है.
जब-जब मैंने गंभीर हो उसके भविष्य के बारे में कुछ कहा, तो उसने हर बात हंसकर हवा में उड़ा दी. जैसे कोई जासूसी किताब पढ़ रही हो. मैं नादान कहां पढ़ पाया उसके भीतरी निबंध!

न जाने कितने ख़त लिख-लिख पानी में बहाए हैं और कितने किताबों में ़कैद हैं. जो उसकी सहेली शमीम के हाथ भेजे, उनका भी कोई जवाब न आया. व़क्त मुट्ठी से रेत-सा कैसे फिसलता रहा… मैं कहां जान पाया! बस, उसकी चुप्पी अंदर-ही-अंदर सालती है.

शमीम की बातों ने मेरा पूरा वजूद हिला दिया. शमीम से जाना कि उसने किसी अमीर साहिबज़ादे से दोस्ती कर ली है. इस ख़बर ने तो जैसे मेरे जीवन में सूनामी-सा बवंडर ला खड़ा किया.

“जब भंवर में आ गई कश्ती मेरी, नाख़ुदा ने क्यों किनारा कर लिया…”

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हिम्मत जुटाकर एक दिन मैंने फोन घुमाया… उधर से मर्दाना आवाज़ थी, “हैलो, अरे तुम… राशिद! कहो कैसे फोन किया?”

मैं जल्द ही बोला, “अब्बाजान आदाब! ज़रा सबीना से बात कराएंगे?”

उनके अब्बा की आवाज़ अटकी, “उनसे मिलने कोई आया है. वे गुफ़्तगू में मशग़ूल हैं.”

“आप कहें राशिद का फोन था.” मेरी बात काट उन्होंने खट से फोन रख दिया. कुछ समय मुझ पर बेख़ुदी का आलम रहा, फिर एक दिन

मैंने रात को फोन घुमाया. उधर से सबीना की आवाज़ थी,“कौन?”

“हम हैं राशिद! अरे, इतनी जल्दी आवाज़ भी भूल गई.”

उसने तरकश से ज़हर बुझा तीर छोड़ा, “सुनो, मैंने अपनी ज़िंदगी का मक़सद पा लिया है. अच्छा होगा, तुम भी अपनी कश्ती का रुख मोड़ दो…” और खटाक से फोन कट गया.

उसका फेंका हुआ वह एक जुमला मेरा जिगर चाक-चाक कर गया. उफ़़्फ्! हुस्न पर इतना ग़ुरूर? जी चाहा सबीना को पकड़कर पूछूं कि ये सुनहरे सपनों का जाल क्यों बिछाया? इतने रंगीन नज़ारों की सैर क्यों कराई? यूं शतरंज के मोहरे-सा उठाकर पटकना कहां की वफ़ादारी है? वाह! क्या दोस्ती निभाई!

अब तो हर तरफ़ दमघोंटू माहौल है… उसकी बेवफ़ाई का कारण अब तक नहीं जान पाया और अगर उसने तय ही कर रखा था कि साथ नहीं निभाना, तो मन से, भावनाओं से क्यों ऐसा खेलकर चली गई. साफ़-साफ़ कह देती कि बस दोस्ती रखनी है, उसके बाद हमारे रास्ते अलग हैं… क्यों मुझे मुहब्बत की हसीन दुनिया दिखाई और क्यों मैं उसकी आंखों को ठीक से पढ़ नहीं पाया. अब तो बस, मैं हूं और मेरी तन्हाई! ये ख़ामोशियां अब चीखने लगी हैं. मेरे पहले प्यार का यह हश्र होगा… नहीं जानता था. अब तो ये ख़ामोशियां ही मुझसे बतियाती हैं… मेरा मन बहलाती हैं…!

कहीं दूर से एक आवाज़ आ रही है…

“धीरे-धीरे अंदर आना… बिल्कुल शोर न करना तुम…
तन्हाई को थपकी देकर… मैंने अभी सुलाया है…”

– मीरा हिंगोरानी

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हेल्दी है मास्टरबेशन, जानें इसके 10 हेल्थ बेनीफिट्स (10 Amazing Health Benefits Of Masturbation)

मास्टबेशन (Masturbation) यानी हस्तमैथुन को लेकर पुराने समय से कई भ्रांतियां चली आ रही हैं, जैसे- यह पाप है, हस्तमैथुन करनेवाले अंधे हो सकते हैं, नपुंसक हो सकते हैं, उन्हें मुंहासे ज़्यादा होते हैं और यहां तक कि कुछ लोगों में यह भ्रम इस कदर बैठा है कि उन्हें लगता है कि मास्टरबेशन करनेवाले मानसिक रोगी हो सकते हैं या फिर वे अपने यौनांगों को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. पर ये सब महज़ ग़लत भ्रांतियां हैं. सेक्सोलॉजिस्ट और सेक्स एक्सपर्ट्स की मानें, तो मास्टरबेशन आपके लिए काफ़ी हेल्दी है. यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है.

Health Benefits Of Masturbation

1. स्ट्रेस फ्री महसूस करते हैं

जब ऑर्गैज़्म आता है, तो शरीर में एंडॉर्फिन तेज़ी से बढ़ते हैं. ये एक तरह के न्यूरोट्रांसमीटर्स होते हैं, जो हम में पॉज़िटिव एहसास जगाकर हमें ख़ुशी देते हैं. ज़रूरी नहीं कि हर बार मास्टरबेट करने पर आपको ऑर्गैज़्म मिले, लेकिन उससे ज़्यादा ज़रूरी है उस एक्ट की ख़ुशी, जो आपको स्ट्रेस फ्री करता है.

2. डिप्रेशन सेे बचाता है

तनाव और निराशा अक्सर डिप्रेशन का कारण बनते हैं, लेकिन जब आप ख़ुद को अच्छा फील कराना चाहते हैं, तो यह आपको डिप्रेशन से बचाता है. शहरों में बहुत-से लोग अकेलेपन के कारण डिप्रेशन के शिकार होने लगते हैं, ऐसे में ख़ुद से साथ बिताया यह क्वालिटी समय आपको डिप्रेशन से बचाता है.

3. इम्यूनिटी बढ़ाता है

बहुत-से हेल्थ एक्सपर्ट इस बात को दावे के साथ पेश करते हैं कि मास्टरबेशन आपके इम्यून सिस्टम को भी स्ट्रॉन्ग बनाता है. दरअसल, एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि ऑर्गैज़्म के बाद शरीर में व्हाइट सेल्स की मात्रा बढ़ जाती है, जो हमें बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं.

4. पेल्विक फ्लोर स्ट्रॉन्ग होता है

मास्टरबेशन एक छोटे-से एक्सरसाइज़ सेशन जैसा होता है, इसलिए इसके करने से पेल्विक फ्लोर मज़बूत होता है, जो महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द से राहत दिलाता है.

5. देता है सुकूनभरी गहरी नींद

यह जितना आपको ख़ुशी का एहसास दिलाता है, उतना ही थका भी देता है, जिससे आपको तुरंत बहुत अच्छी नींद आती है. गहरी नींद हमारे शरीर को अच्छी तरह रिकवर होने में मदद करती है. संपूर्ण शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है.

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Health Benefits Of Masturbation
6. हेल्दी हार्ट का सौग़ात

मास्टरबेशन के दौरान जब हम एक्साइटेड हो जाते हैं, तो शरीर में रक्तसंचार बढ़ जाता है. ख़ासतौर से हृदय और यौनांगों में रक्तसंचार बढ़ जाता है, जो हेल्दी हार्ट के लिए बहुत ज़रूरी है. मास्टरबेशन एक तरह की एक्सरसाइज़ है, जो हमें हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है.

7. एसटीडी का ख़तरा नहीं

मास्टरबेशन का यह एक और फ़ायदेमंद पहलू है कि इससे आप सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ से बचे रहते हैं, इसीलिए यह सेफ माना जाता है. साथ ही आपको प्रेग्नेंसी होने का किसी तरह का डर भी नहीं रहता.

8. ख़ुद से प्यार करना सीखते हैं आप

जब आप अपने साथ क्वालिटी समय बिताते हैं, तो ख़ुद के बारे में अच्छा महसूस करते हैं. आप ख़ुद से प्यार करना सीखते हैं. यह एहसास आपका आत्मविश्‍वास बढ़ाता है, जिससे आप हमेशा ख़ुशगवार महसूस करते हैं.

9. पार्टनर से सेक्स एक्सपीरियंस होता है बेहतर

मास्टरबेशन कामोत्तेजना की भावना को बढ़ाता है, जिससे आपकी सेक्स लाइफ और बेहतर होती है. पार्टनर के प्रति आपका आकर्षण और भी बढ़ जाता है, इसीलिए बहुत-से सेक्सोलॉजिस्ट पार्टनर्स से स़िर्फ सेक्स न करके मास्टरबेशन की सलाह भी देते हैं.

10. आपका आत्मविश्‍वास बढ़ता है

जब आप ख़ुश रहते हैं, तो ख़ुद के बारे में पॉज़िटिव महसूस करते हैं, जो आपको हेल्दी और फिट रखने में मदद करता है. आत्मविश्‍वास की कमी अच्छे-ख़ासे रिश्ते को बिगाड़ सकती है, इसलिए आत्मविश्‍वासी रहकर आप जीवन के हर क्षेत्र में तऱक्क़ी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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पहला अफेयर: मंज़िल (Pahla Affair: Manzil)

Pahla Affair

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पहला अफेयर: मंज़िल (Pahla Affair: Manzil)

आज भी दिल का एक कोना सुरक्षित है उसके लिए, जो मेरे लिए केवल एक एहसास है. बात उन दिनों की है, जब मैंने उम्र की दहलीज़ पर सत्रहवां सावन पार किया था और उसे पहली बार अपने नज़दीक से गुज़रते देखा था. एक साधारण-सा लंबा, गोरा शख़्स, गहरी आंखें, घनी पलकें मानो समा जाऊं और वो उन पलकों में मुझे छुपा ले. उसके चेहरे पर ग़ज़ब की मासूमियत थी. उसके चौड़े सीने पर सशक्त बाजू मन में ये अरमान जगा जाते कि वो मुझे अपनी बांहों में कस ले और मेरा रोम- रोम खिल उठे.

वहीं से सिलसिला शुरू हुआ उसके गुज़रने का और मेरा चुपके से उसे निहारने का. वो एक ख़्वाब था मेरे लिए, लेकिन एक लंबे अंतराल के बाद हमने साथ- साथ कुछ घंटों की दूरी तय की थी. फिर क्या था- वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया. लगभग रोज़ ही फ़ोन पर बातें होतीं. उसे अपनी ज़िंदगी में यूं शामिल कर लेने के बाद कब मैं उससे प्यार कर बैठी, कुछ ख़बर नहीं. उसके बाद तो जैसे मेरी दुनिया ही बदल गयी.
लेकिन समय के साथ मेरा प्यार एक अनकहा दर्द बनकर मेरी नस- नस में दौड़ने लगा. उसके साथ होकर भी मैं ख़ुद को अकेला महसूस करने लगी. उसने भी कभी कुछ नहीं कहा. आख़िर ऐसा क्यों होता है, जब हम किसी से प्यार करने लगते हैं तो ज़ुबां ख़ामोश हो जाती है और आंखें बोलने लगती हैं. पर आंखों की भाषा भी तो कोई समझे. भीतर-ही-भीतर टूटकर बिखर रही थी. मेरी एक सहेली ने उस तक मेरे दिल की बात पहुंचा दी.

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मैं बहुत ख़ुश थी उस दिन, जब वो मुझसे मिलने आ रहा था.पहली बार मैंने उसे अपने बहुत क़रीब महसूस किया था. रोम-रोम खिल उठा था मेरा, जब उसकी गर्म हथेलियों को मैंने अपने ब़र्फ से ठंडे हाथों पर महसूस किया था. उसने कहा- देखिये, मैं आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि मेरी नज़र में उसी को प्यार करोे, जिसे ताउम्र अपने पास रखो. लेकिन मैं अपने परिवार की मर्यादाओं की मज़बूत जंजीरों को अपने प्यार के लिए नहीं तोड़ सकता. अच्छा होगा कि प्यार की छोटी-सी ज़िंदगी की जगह दोस्ती की लंबी उम्र को स्वीकारा जाए. आपमें बहुत प्रतिभाएं हैं और मैं आपको आसमां की बुलंदियों पर देखना चाहता हूं.

उसके प्यार को भुलाना तो ख़ैर मेरे वश में नहीं, लेकिन उसकी ख़्वाहिश को मैंने ज़िंदगी का मक़सद बना लिया. समय गुज़र रहा था, हम दोनों ही अपने कैरियर को बुलंदियों तक पहुंचाने में मसरूफ़ थे. मगर तब भी हर व़क़्त उसकी यादें दिल के दरवाज़े पर दस्तक दे ही जाती थीं. अब उसके बगैर उस शहर में रहना मुश्किल हो रहा था. फिर ख़ुद से समझौता कर मैंने उसे अपना फैसला सुना दिया- प्रकाश, मैं जोधपुर पढ़ने जा रही हूं. मेरा स्वर इतना भारी था कि वाक्य पूरा होने से पहले ही मेरी आंखें भर आईं- और उसने मेरे आंसुओं को अपनी हथेली में क़ैद कर शुभकामनाओं के साथ मुझे विदा किया.

और मैं चली आई. ईश्‍वर से बस इतनी प्रार्थना है कि इस जनम में ना सही अगले जनम में उसका नाम मेरी हथेली पर लिखना.
आज इस बात को दो साल गुज़र गये- मैं अपनी मंज़िल के बहुत नज़दीक हूं. लेकिन आज भी तन्हाई में अतीत के पन्नों को पलटती हूं तो मेरा प्रकाश मुझे प्रकाशित कर देता है- और थक- हार कर मैं फिर अपनी मंज़िल की तरफ़ बढ़ जाती हूं.

– शमिता त्रिपाठी

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पहला अफेयर: ख़ूबसूरत फरेब (Pahla Affair: Khoobsurat Fareb)

Pyaar Ki Kahani

पहला अफेयर: ख़ूबसूरत फरेब (Pahla Affair: Khoobsurat Fareb)

घर में आर्थिक तंगी से मेरी पढ़ाई छूट गई थी. बस, गुज़र-बसर हो रही थी किसी तरह. तभी मकान का आधा हिस्सा एक सरकारी ऑफिस को किराए पर दिया, तो आमदनी का कुछ ठोस ज़रिया हो गया. फिर एक दिन एक आकर्षक युवक को जीप से उतरते देखा, तो बस देखती ही रह गई. पता चला, ये साहब हैं, आलोक नाम है.

कोई काम तो था नहीं, उधर ताक-झांककर मन बहला लेती, पकड़ी जाती, तो मैं झेंप जाती और वो मुस्कुरा देते. बीस दिन बीते होंगे, मैं अचानक बहुत बीमार हो गई. डॉक्टर ने तुरंत ज़िला अस्पताल ले जाने को कहा.

आस-पड़ोस के तमाम हितैषी जमा थे, पर सर्द आधी रात, सभी तरह-तरह की सलाहें देकर बहाने बनाने लगे. अम्मा हताश-निराश होकर रोने लगीं, तभी उधर से पूछा गया, “मांजी, क्या बात हो गई?” नीम बेहोशी में आगे नहीं जान सकी मैं कि क्या और कैसे हुआ. सुबह आंख खुली, तो ख़ुद को अस्पताल में पाया. साहब थके-थके-से सामने बैठे थे. लगा कि रातभर सोये नहीं थे.

उन्होंने पूछा, “अब कैसी हो?” मैंने कहा, “हां, अब आराम है. मेरे कारण आपको बहुत कष्ट हुआ.” वे बोले, “क्यों? रात अगर मुझे कुछ हो जाता, तो क्या तुम मेरी मदद नहीं करतीं?” यह सुनकर अच्छा लगा था. तीन दिन बाद अपना सहारा देकर उन्होंने जीप से घर उतारा तो उन्हीं पड़ोस के हितैषी जनों में चर्चा का आधार भी बन गई.

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पड़ोस में रहते हुए उन्हें मेरे घर में दो वर्ष के भीतर घटित विपदा व दीनदशा की सारी जानकारी हो चुकी थी. अब कभी-कभी आंगन के बीच की दीवार पर कुछ देर बातें भी होने लगीं, जिससे मेरी ताका-झांकी तो बंद हो गई, लेकिन रातों की नींद और चैन गायब हो गया था. और जब एक दिन मुझे बुलाकर मेरा इंटरमीडिएट का फॉर्म भरवा दिया, पढ़ाई शुरू कराई, तो मैं शीशे में बार-बार ख़ुद को निहारती कुंआरे सपनों को संवारती रहती. इंटर पास हो गई, तो उसी ऑफिस में नौकरी भी मिल गई. मेरा बीए का फॉर्म भी भराया गया. अब मकान के किराए व मेरे वेतन से घर को बहुत सहारा हो गया. पुराने घाव भर से गए.

नज़दीकियां प्यार को जन्म देती हैं. ऑफिस में काम बताते, डिक्टेशन देते हुए उनकी आंखों की तरलता में अपने लिए जिज्ञासा देखती और वो अपने पद की मर्यादा व गरिमा से बंधे मेरा मन टटोला करते. मैं हिम्मत करके कुछ कहना चाहती, किंतु कस्बई संकीर्ण संस्कार घर की पुरानी चौखट लांघ ही न पाते.

नानी का निधन हो गया. सुबह छुट्टी मांगने उधर गई, तो मेरे दोनों हाथ पकड़कर पूछा, “कुछ और नहीं कहोगी?” दरिद्रता कृपण भी तो होती है. मैं ठूंठ-सी खड़ी रही, न एतराज़ कर पाई और न उस अनुपम प्यार का प्रतिदान कर अपना व उनका असमंजस ही मिटा पाई. लौटकर आई, तो बड़े बाबू ने एक पत्र देकर बताया, “साहब को दो वर्ष की ट्रेनिंग पर विदेश भेजा गया है.”

पत्र पढ़ा- ‘आरती, इतने दिन साथ रहे. अच्छा लगा. कभी-कभी सफ़र में कुछ ऐसा छूट जाता है, जिसकी भरपाई नहीं हो पाती और वो तुम हो आरती. याद है, अस्पताल से आते ही तुमने कहा था कि अगर रात आप न होते, तो मरी कहानी ख़त्म ही थी. उस कहानी को मैंने आगे बढ़ाना चाहा, पर तुम्हारा अंतर्मन पढ़ न पाया. हो सकता है, तुम्हारे मन में वैसा कुछ न रहा हो, जैसा मैं सोचता रहा. तभी तो जाते समय तुमने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. तुमसे मिल न सका, नौकरी की मजबूरी जानती हो. तुम्हें दुख तो होगा और मुझे तुम्हारी याद आया करेगी. पथराई आंखों से पत्र पकड़े संज्ञा-शून्य-सी बैठी रह गई थी.

कैसा दुख? ग़रीब को तो दुख की आदत होती है. सुख कभी आता भी है, तो अधिक देर ठहरता नहीं. मैं तो स्त्री थी. उपकारों के बोझ से दबी. वे तो पुरुष थे. सबल व समर्थ भी. मेरी दीनदशा से मर्माहत हो मुझसे कौन-सा रिश्ता बनाए रहे, तो जता न सके? तब भी नहीं, जब हमारे प्यार की चर्चा कस्बे में फैली. तब भी इतना ही बोले, “आरती हवन करते हाथ भले ही न जलें, आंच तो आती ही है.” फिर न कोई वादा, न सांत्वना. अपने फर्ज़ से वो तो ़फुर्सत पा गए और मैं ख़ूबसूरत फरेब का ताना-बाना बुनती रह गई.

– आरती सिंह

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पहला अफेयर: लम्हे तुम्हारी याद के (Pahla Affair: Lamhe Teri Yaad Ke)

Love Stories

पहला अफेयर: लम्हे तुम्हारी याद के (Pahla Affair: Lamhe Teri Yaad Ke)

प्यार, यूं तो इस शब्द से हर शख़्स वाकिफ़ होता है, पर इसका एहसास तो होता है तब, जब किसी का इंतज़ार यूंं ही करते रहना अच्छा लगने लगता है. प्यार का एहसास मुझे इस रूप में होगा, मैंने कभी सोचा भी न था. ज़िंदगी की बीस बहारें यूूं ही गुज़र गईं और इस बहार ने मेरी ज़िंदगी के मायने ही बदल दिए.

हमने घर हाल में ही बदला था. कुछ दूर मोड़ पर जाकर ही उनका घर था. एक संपूर्ण व्यक्तित्व – सुंदर, बोलने में इतनी आत्मीयता कि कोई भी प्रभावित हुए बिना रह न सके. देखते-देखते कब बातें शुरू हुईं और कब एक अजनबी अपनों से बढ़कर मेरे इतने क़रीब आ गया, पता ही नहीं चला.

हर सुबह एक नई उमंग लेके आती और हर शाम नए ख़्वाब. उनके बिना कुछ भी सोच पाना मुमकिन न था. दिल के एक कोने में जीवनसाथी की तस्वीर उनके रूप में परिपूर्ण थी. उनकी आंखों में छिपी चाहत को मैंने कई बार महसूस किया, पर उन्होंने कभी कुछ कहा नहीं. वैसे तो निगाहों की भाषा काफ़ी होती है मोहब्बत के इज़हार के लिए, पर शायद वज़ूद के लिए शब्द भी ज़रूरी हैं, इसलिए शब्दों के सहारे मैंने अपनी इच्छाएं उनके सामने रख दीं. वो सुनते रहे और चुप रहे, पर जब उनका मौन टूटा तो मेरी ज़िंदगी, मेरा वज़ूद सब बिखर कर रह गया.

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‘कृति मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूं. तुमने मेरी ज़िंदगी को एक नई दिशा दी है, पर एक सच्चाई जिसे मैं तुम्हें खोने के डर से आज तक नहीं बता पाया कि मैं एक शादीशुदा पुरुष हूं. तुम्हारे साथ, तुम्हारे प्यार और अपनेपन ने मुझे अंदर तक छू लिया. मेरी भावनाएं, मेरी इच्छाएं जो अब तक अधूरी थीं, तुमने उन सबको परिपूर्ण किया है. तुम्हारे साथ ने ही मुझे प्यार का एहसास कराया है. तुम ही मेरी ज़िंदगी का पहला प्यार हो, जिसे मैं हमेशा चाहूंगा, पर तुम्हारे इस साथ में मैं अपने यथार्थ को भूल गया था और उससे भाग रहा था. तुम्हें खोने के डर ने मुझे बहुत स्वार्थी बना दिया था, इसलिए चाहकर भी मैं तुम्हें आज तक ये नहीं बता पाया और जाने-अनजाने में तुम्हारी भावनाओं को आहत किया. काश! हमारी ज़िंदगी हमारी सोच की तरह आसान होती और जो हम चाहते, हमें मिल जाता. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना…’ इतना कहकर वो चले गए.

सब कुछ रेत की तरह हाथों से निकल गया. उनके इस झूठ ने मेरी ज़िंदगी के मायने ही बदल दिए. सच है पहला प्यार कभी भी भुलाया नहीं जा सकता. सब कुछ जानते हुए आज भी मैं उनसे बेइंतहा मोहब्बत करती हूं और वो लम्हे जो हमने साथ गुज़ारे थे, वो अनमोल पल आज भी मेरी स्मृतियों में यूं ही कायम हैं और हमेशा रहेंगे.

हंसना तो बड़ी शै है, रोने भी नहीं देते
लम्हे तुम्हारी याद के, कुछ ऐसे भी आते हैं

– कृति

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पहला अफेयर: पहले प्यार की ख़ुशबू (Pahla Affair: Pahle Pyar Ki Khushbu)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: पहले प्यार की ख़ुशबू (Pahla Affair: Pahle Pyar Ki Khushbu)

आज भी मेरे हाथों पर तेरे प्यार की मेहंदी का रंग बरक़रार है. वह सिंदूरी शाम. डूबते सूरज की पहली लाली, वो तेरा छत पर पतंग की डोर थाम बार-बार मुझे देख मुस्कुराना….वह मुस्कुराहट आज भी मेरे मन के भीतोें पर रंगीन चित्रों-सी उकरी है. तेरा वो दिलकश क़ातिलाना अंदाज़, बार-बार मुड़कर मुझे निहारना, मुझसे नज़रें मिलाना फिर चुराना सब कुछ याद है मुझे.

याद है तुम्हें, एक दिन अचानक शाम के धुंधलके में तुमने गली के मोड़ पर मेरा हाथ पकड़कर कहा था, ङ्गङ्घशालू मैं तुम्हें तहेदिल से चाहता हूं. मैं तुम्हारे दिल की बात सुनना चाहता हूं.फफ लगा था जैसे गोली की आवाज़ से कई परिंदे पंख फड़फड़ाकर उड़ चले हों. मेरा दिल ज़ोर से धड़क उठा था. मैं सुरमई अंधेरों की गुलाबी खनक में खो-सी गई थी. हाथ छुड़ाकर भागने की कोशिश में मेरी चुन्नी का कोना तुम्हारे हाथ में आ गया था. वही कमबख़्त कोना जैसे तुम्हारी ज़िंदगी का मक़सद बन गया.

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बहुत चाहा तुम्हारा दामन थाम ज़िंदगी का ख़ुशनुमा सफ़र तय करूं, लेकिन क़िस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था- मेरे पिता की असमय दिल के दौरे से मौत ने सब कुछ ख़त्म कर दिया. मैं टूटकर बिखर गई, हमारी मोहब्बत बिखर गई.

पिता ने मरते समय मां से वचन लिया था- मैं उनके बताए लड़के से विवाह करने को मज़बूर कर दी गई. वह एक लम्हा, तुम्हारा मेरा हाथ थामना मेरे लिए क़ातिलाना साबित हुआ. मां की आंखों में तैरती बेबसी की नावें और तुम्हारी आंखों में मोहब्बत का बेइंतहा समंदर मेरे लिए ज़िंदगी कशमकश का दरिया बन गई. तुम्हारी यादों की गहरी खाइयों में मैं गिरती चली गई.

याद है, मैंने तुम्हें ख़त लिखा था, यदि मेरा विवाह अन्यत्र हुआ तो मैं आत्महत्या कर लूंगी. छत पर तुमने जो पुर्जा फेंका था, आज वही मेरे पास तुम्हारी धरोहर है-

मेरी अपनी शालू,
ज़िंदगी जीने का नाम है, वे बुज़दिल होते हैं, जो ज़िंदगी से हार मान मौत को गले लगा लेते हैं. तुम्हें अभी ज़िंदगी की कई बहारें देखनी हैं. प्यार तो कुर्बानी मांगता है. अगर तुम्हें कुछ हो गया तो मैं किसके सहारे जीऊंगा, बोलो.
तुम्हारा पहला प्यार,
पीयूष

हमारे पहले प्यार की ख़ुशबूओं से लबालब वह पुर्ज़ा आज भी मेरे पास तुम्हारी अमानत है, जैसे- वह काग़ज़ का टुकड़ा न होकर छोटा-सा टिमटिमाता जुगनू हो, जो मेरी ज़िंदगी का रहबर बना है. शायद इसी के सहारे ही मैं ज़िंदगी के बीहड़ बियाबान जंगल लताड़ती आगे बढ़ती रही हूं. अब तो मैंने ज़िंदगी की हर मुश्किल से लड़ना सीख लिया है.

कांप उठती हूं मैं ये
सोचकर तनहाई में
मेरे चेहरे पे कहीं
पहला प्यार न
पढ़ ले कोई

– मीरा हिंगोरानी

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इन लव फूड्स से बनाएं अपनी सेक्स लाइफ को और भी स्पाइसी (Spice Up Your Sex Life With These Love Foods)

यूं तो आपने अनेक तरह के फूड के बारे में सुना होगा, जैसे- चाइनीज़ फूड, मुगलई फूड, इटालियन फूड, थाई फूड आदि. लेकिन क्या आपने ‘लव फूड’ (Love Food) के बारे में सुना है? आइए, ऐसे ही कुछ लव रेसिपीज़, लव फ्रूट्स और ड्रिंक्स के बारे में जानें मुंबई की डायटीशियन ममता शर्मा से.

Love Foods

लव रेसिपीज़

अ‍ॅायस्टर ड्रमस्टिक करी: ड्रमस्टिक यानी सहिजन में लव फीलिंग्स को बढ़ाने की ख़ूबियां होती हैं और अ‍ॅायस्टर के साथ ड्रमस्टिक मिलकर रोमांटिक फीलिंग्स को दोगुना कर देती है.

खीर: दूध और ड्राय़फ्रूट्स से बनी इस स्वीट डिश का मीठा टेस्ट मूड को हल्का करता है. ड्राय़फ्रूट्स का ए़फ्रोडिसियक (प्यार की कामना) नेचर दूध के साथ मिलकर लव फीलिंग्स को बढ़ाता है.

हलवा: सूजी या बेसन और ड्रायफ्रूट्स से बनी इस स्वीट डिश से लव हार्मोन रिलीज़ होने में मदद मिलती है और रोमांटिक फीलिंग्स बढ़ती है.

आइस्क्रीम विद नट्स: आइस्क्रीम में मिले नट्स- बादाम, अखरोट आदि रोमांटिक फीलिंग्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं.

चीज़ केक विद स्ट्रॉबेरी: स्ट्रॉबेरी को चीज़ केक के साथ मिलाकर भी रोमांटिक फूड के रूप में सर्व किया जाता है.

स्ट्रॉबेरी विद चॅाकलेट: स्ट्रॉबेरी के साथ चॅाकलेट मिलाकर सर्व करना सबसे अधिक रोमांटिक माना जाता है. चॅाकलेट इंसान के मूड को हल्का-फुल्का बनाता है, जबकि स्ट्रॉबेरी उत्तेजना को बढ़ाता है. इसलिए स्ट्रॉबेरी को शैंपेन के साथ सर्व करते हैं. इसे किसी अन्य ड्रिंक के साथ सर्व नहीं किया जाता.

चॅाकलेट: यह इंसान के मूड को जॅाली और फ्रेश करती है. इसलिए इसको ‘मूड चेंजिंग फूड’ भी कहते हैं. इससे व्यक्ति के अंदर रोमांटिक फीलिंग्स बढ़ती है.

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Sex Foods
लव फ्रूट्स

स्ट्रॉबेरी: इसमें विटामिन ‘सी’ होता है, जो एंटी-अ‍ॅाक्सीडेंट का काम करता है. यह एंटी-अ‍ॅाक्सीडेंट शरीर की मांसपेशियों और टिशू के लिए आवश्यक होता है.

केला: केले में पोटैशियम और विटामिन ‘बी’ होता है, जो सेक्सुअल हार्मोन बनाने में मदद करता है.

पपीता: इसमें ऐसे केमिकल होते हैं, जो फीमेल हार्मोन के प्रोडक्शन में मदद करतेे हैं और ये हार्मोन रोमांटिक फीलिंग्स बढ़ाने में सहायक होते हैं.

एवोकेडो: इसके आकार की वजह से इसे लव फूड कहते हैं. इसमें विटामिन ई और बी6 होता है, जो रोमांटिक फीलिंग्स और एनर्जी के लिए ज़रूरी है.

अंजीर: मॅाडेस्टी और सेक्सुअलिटी का प्रतीक है अंजीर. इसमें बहुत अधिक मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जो स्वस्थ शरीर और लव फीलिंग्स के लिए अनिवार्य हैं.

रसबेरी: गुलाब की फैमिली का होने के कारण इसे ‘फ्रूट अ‍ॅाफ़ लव’ भी कहते हैं. इसमें फ़ायबर, विटामिन ‘सी’ और मैग्नीज़ होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने और रोमांटिक फीलिंग्स को बढ़ाने के लिए ज़रूरी होते हैं. इसका प्रयोग केक, शेक और आइस्क्रीम में किया जाता है

अनार: इसको फ़र्टिलिटी का प्रतीक मानते हैं. इसका प्रयोग कस्टर्ड और शेक के साथ किया जाता है. इसमें आयरन होता है, जो मेल हार्मोन के लिए अनिवार्य होता है.

लव वेजीटेबल्स

स्वीट पोटैटो: इसमें पोटैशियम होता है, जो महिलाओं में रोमांटिक फीलिंग्स को बढ़ाने में सहायक होता है. इसे ज़्यादा नमक के साथ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि नमक पोटैशियम के असर को कम कर देता है.

ड्रायफ्रूट्स

पाइन नट्स: इसको न्यूट्रीशन का ‘पावर हाउस’ कहते हैं, क्योंकि इसकी न्यूट्रीशियस वैल्यू बहुत अधिक होती है. इसका सेवन भी प्यार की भावनाओं को बढ़ाता है.

अखरोट: इसमें आर्जीनीन होता है. यह एक अमीनो एसिड है, जो मेल हार्मोन के प्रोडक्शन में मदद करता है. इसका प्रयोग केक, शेक आदि में किया जाता है.

बादाम: इसमें आयरन, मैग्नीज़ और विटामिन्स होते हैं, जो लव फीलिंग्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं.

– अभिषेक शर्मा

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पहला अफेयर: रहें न रहें हम… (Pahla Affair: Rahen Na Rahen Hum)

Love Kahaniya

पहला अफेयर: रहें न रहें हम… (Pahla Affair: Rahen Na Rahen Hum)

हमारा पहला प्यार अधूरा ही रहा किसी सपने की मानिंद, पर फिर भी उसकी रेशमी छुअन है जो दिल के किसी कोने में छुपी है मेरी जीवनशक्ति बनकर. बात 8 वर्ष पहले की है. मैं दिल्ली से ग्रेजुएशन फ़ाइनल ईयर की परीक्षा देने के बाद देहरादून ङ्गपर्यावरण संरक्षण वर्कशॉपफ में भाग लेने आई थी. मेरा अंतर्मुखी कवि मन देहरादून के प्राकृतिक सौंदर्य का साथ पा रोमांचित हो उठा. हर शाम को लेक्चर अटेंड करने के बाद मैं राजपुर की वादियों में पहुंच जाती.

वहीं प्रकृति को निहारते मेरी मुलाक़ात हुई थी श्यामल से. वह डॉक्टर था. कानपुर में प्रैक्टिस करता था और लंबी छुट्टी पर देहरादून आया था. देखने में सुदर्शन और मासूम, पर बेहद शरारती. एक पल चुप नहीं बैठता था, पर दिल बेहद साफ़था उसका.

हम जल्दी ही अच्छे दोस्त बन गए. हम दोनों के विपरीत स्वभावों के बावजूद हमें बांध रखा था हमारे प्रकृति प्रेम, गज़लों-शायरी के शौक़ और शायद एक अनकही-सी समझ ने. श्यामल को क़रीब से जानकर लगा कि वह उतना सतही नहीं जितना लगता था. जीवन को बहुत करीब से देखा-समझा था उसने.

कभी-कभी उसकी खनकती हंसी में एक उदासी की ख़ुशबू भी आ जाती थी. तब लगता था जैसे उसने कोई आंसू कहीं छुपा रखा है. मैंने उससे इस बारे में पूछा भी, पर वो हर बार बात टाल जाता. वो अपने बारे में जल्दी बात नहीं करता था. बस, कभी-कभी यूं ही लगता कि वो कुछ कहना चाहता था, पर ख़ामोशी ही अपनी ज़ुबां आप बन जाती.

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धीरे-धीरे मेरे जाने का दिन क़रीब आ रहा था. कई बार एक अजीब-सा एहसास होता कि मैं श्यामल को ही नहीं, ख़ुद को भी पीछे छोड़ जा रही हूं. जिस दिन मुझे वापस जाना था, उस दिन श्यामल मेरे लिए पीले गुलाब के फूल लाया था. साथ में एक चिट थी जिस पर लिखा था-
आपसे मिलकर तमन्ना इतनी रही, एक बार फिर मिलें अगर ज़िंदगी रही… पढ़कर मैं तड़प उठी थी और श्यामल से वादा लिया था कि वो जल्दी ही मुझसे मिलने दिल्ली आएगा. उसने उदास आंखों से वादा कर दिया.

फिर मैं दिल्ली आ गई, पर श्यामल की यादें ज़ेहन में ताज़ा थीं बिल्कुल महकते गुलाबों की तरह. पर उसका न फ़ोन आया, न कोई चिट्ठी. मैं मोबाइल ट्राई करती तो वो भी ऑफ़ मिलता. मैं बहुत बेचैन थी. तभी एक दिन श्यामल की बहन का फ़ोन आया. उसने जो बताया उससे तो जैसे मेरी दुनिया ही बिखर गई.

श्यामल कैंसर के लास्ट स्टेज पर था, जब मुझसे मिला. उसने कहा था कि उसके आख़िरी दिनों में मेरी मुस्कान ने ही
उसे मौत को हंसते-हंसते गले लगाने की ताक़त दी थी. ज़िंदगी से मौत के बीच का सफ़र ख़ुशगवार बनाने के लिए उसने मेरा शुक्रिया अदा किया था.

श्यामल चला गया था और मेरे पास ज़िंदगी गुज़ारने के लिए थी उसकी शायरी और ढेरों महकती यादें. उसके बाद मैं देहरादून में नौकरी ढूंढ़ यहीं बस गई, उसकी मौजूदगी के एहसास के साए में ज़िंदगी बिताने की ख़्वाहिश लिए. बस, अक्सर फ़िज़ां में उसका एक शेर कौंध जाता है.

रोओ कुछ इस तरह कि अश्क़ न बहें, दर्द सहो इस तरह कि ज़ख़्म न रहे
लबों पे आह, आंखों में पानी, रोको कुछ इस तरह कि कोई ग़म न कहे

– दीपाशिखा श्रीवास्तव

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सुहागरात में काम आएंगे ये सुपर सेक्स टिप्स (Super Sex Tips For Your First Night)

शादी के बंधन में बंधनेवाले हर कपल के मन में सुहागरात को लेकर कई हसीन ख़्वाब पलते रहते हैं. नई ज़िंदगी की पहली रात को लेकर वैसे तो ज़्यादातर लोग एक्साइटेड रहते हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं, जिनके मन में संकोच और आशंकाएं भी होती हैं. इसमें कोई ग़लत बात नहीं है. यह बिल्कुल सामान्य है. सुहागरात को लेकर दिमाग़ में स़िर्फ सेक्स का ख़्याल आता है, लेकिन अगर कोई कपल सही तरी़के से सेक्सुअल रिलेशन नहीं बना पाता, तो उन्हें लगता है कि उनमें ही कोई कमी है, जबकि ऐसा बहुत-से कपल्स के साथ होता है. सेक्स एक कला है, जो तर्जुबे से सीखी जाती है, इसलिए सुहागरात के नाम पर स्ट्रेस न लें. हम यहां इसी से जुड़े कुछ सुपर सेक्स टिप्स दे रहे हैं, ताकि आपकी सेक्स लाइफ सुपर रोमांंटिक बनी रहे.

Sex Tips For First Night

– दिनभर शादी की रस्मों के कारण ज़्यादातर कपल्स थक जाते हैं और रात को इन्वॉल्व नहीं हो पाते. हो सकता है आपके साथ भी ऐसा हुआ हो, इसलिए रात को ही संबंध बनाना है, इसके लिए जल्दबाज़ी न करें. थकान मिटाने के लिए भरपूर नींद लें और सुबह उठकर अपने प्यार से अपने पार्टनर को सराबोर कर दें.

– सुहागरात रोमांटिक हो, इसके लिए आपको शादी के दिन ही थोड़ी फ्लर्टिंग करनी होगी. एक-दूसरे को छेड़ें, इशारों में बातें करें और देखिए कैसे आपका मूड सेट होता है.

– सुहागरात है, इसलिए स़िर्फ आपकी चलेगी, ऐसा न सोचें. अपने पार्टनर की पसंद-नापसंद के बारे में जानें और उसे तवज्जो दें. याद रखें, ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी की नींव सुहागरात को ही पड़ती है, इसलिए अपने पार्टनर को बिल्कुल भी ऐसा महसूस न होने दें कि आप अपनी भावनाएं उन पर थोप रहे हैं.

– सुहागरात से पहले अगर कुछ सेक्स बुक्स पढ़ेंगे, तो आपको अपने पार्टनर को ख़ुश करने के कई बेहतरीन आइडियाज़ भी मिल जाएंगे. पर कोई भी सेक्स बुक न पढ़ें. बुक स्टोर से अच्छी किताब ख़रीदें और उसे समझें.

– बेड पर आते ही एक्शन की उम्मीद किए बिना एक-दूसरे से बातें करें. पहली रात को लेकर एक-दूसरे ने क्या सोच रखा था, इस बारे में बात करें.

– पार्टनर को इंप्रेस करने के लिए आप सेक्सी लिंगरी ट्राई कर सकती हैं. आजकल मार्केट में बहुत सेक्सी लिंगरीज़ मिलती हैं. इनका इस्तेमाल करके आप अपने पार्टनर को सरप्राइज़ दे सकते हो.

– ख़ासतौर से महिलाओं को रिलैक्स रहने की ज़रूरत है. नई जगह और नए लोगों के बीच उनके मन में कई भावनाएं आती रहती हैं, ऐसे में सेक्सुअल रिलेशन के बारे में वो सोच भी नहीं पातीं, लेकिन अगर आप रिलैक्स रहेंगी, तो बेहतर महसूस करेंगी और अपने पार्टनर के साथ अच्छी तरह रेस्पॉन्ड करेंगी.

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Sex Tips For Wedding Night

– बॉलीवुड फिल्मों जैसी सुहागरात की कल्पना करेंगे, तो अपने साथ-साथ अपने पार्टनर को भी निराश करेंगे. ख़ुद पर परफेक्ट सेक्सुअल रिलेशन का दबाव न बनाएं. बस, पार्टनर को प्यार से छू लें, वो ख़ुद निहाल हो जाएगा.

– पहली बार सेक्सुअल रिलेशन बनाने में असहजता होती ही है, इसलिए लुब्रिकेंट अपने पास ज़रूर रखें. यह आपको रिलेशन बनाने में मदद करेगा.

– अगर आप पहली ही बार में ऑर्गैज़्म की उम्मीद कर रही हैं, तो शायद ऐसा न हो. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपने सेक्स एंजॉय नहीं किया. अपने पार्टनर को पा लेने की ख़ुशी कपल्स के चेहरे पर साफ़ दिखाई देती है. इसलिए ऑर्गैज़्म को दिमाग़ से निकाल दें और स़िर्फ पार्टनर पर ध्यान लगाएं.

– भले ही सुहागरात में संबंध बने या ना बने, फिर भी यह रात आप दोनों पूरी जिंदगी नहीं भूलेंगे. इसलिए हंसे, मुस्कुराएं, खिलखिलाएं और एक-दूसरे को जीवनभर के लिए अपना बना लें.

– अनीता सिंह

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पहला अफेयर: हार्डवेयरवाला प्यार (Pahla Affair: Hardwarewala Pyar)

Pyar Ki Kahaniya
पहला अफेयर: हार्डवेयरवाला प्यार (Pahla Affair: Hardwarewala Pyar)

उन दिनों मैं डीएन कॉलेज से इंफॉर्मेशन ब्रांच में बी.ई. कर रही थी. हमारे कॉलेज में संजय भी था, जो कंप्यूटर साइंस में था. आते-जाते अक्सर वह दिख जाता था और इधर-उधर निगाह बचाकर मुझे देखता था. लेकिन मैं ध्यान नहीं देती थी और बाहर निकल जाती थी. इस पर वो मुझे हसरतभरी निगाह से देखता था.

बी.ई. के छठे सेमिस्टर चल रहे थे. मेरा घर कॉलेज से काफ़ी दूर था. मैं बस का इंतज़ार कर रही थी, लेकिन बसें देर से चल रही थीं. मुझे एग्ज़ाम के लिए देर होने की चिंता सताने लगी कि तभी हेलमेट पहने एक बाइक सवार मेरे पास आकर रुका और कहने लगा, “पेपर का समय हो गया है, अगर इसी तरह खड़ी रहीं, तो आज का पेपर गया समझो.”

मैंने जब ग़ौर से देखा, तो मालूम हुआ कि वो तो संजय है. मैं उसके साथ बैठने में हिचकिचाने लगी. तब उसने कहा, “अरे भई, हम कोई भूत नहीं हूं, चलो जल्दी बैठो, पेपर शुरू होने में 10 मिनट ही बचे हैं.” अब मैं उसकी बाइक पर बैठ गई. बीच-बीच में कभी ब्रेक लगाने पर मेरा शरीर उससे छू जाता, तो अजीब-सी सिहरन होने लगती. मेरा मुंह सूख रहा था. मैंने ख़ुद को संभाला और पेपर देने चली गई.

इसके बाद संजय से मुलाक़ातें बढ़ने लगीं और धीरे-धीरे एहसास होने लगा कि पहला प्यार इसे ही कहते हैं. संजय बिहार से था और उसकी भाषा व बोलने के अंदाज़ पर मुझे कभी-कभी हंसी आ जाती थी. एक दिन वो बोला, “वो ऐसा है कि हमने ज़्यादा किसी से प्यार-व्यार नहीं किया, इसलिए मालूम नहीं कि ये कैसा होता है, पर अपना प्यार तो एकदम हार्डवेयरवाला है. पक्का मतलब एकदम पक्का.” तब मैंने हंसते हुए कहा, “अपन तो सॉफ्टवेयरवाले हैं और प्यार के मामले में भी एकदम सॉफ्ट हैं.”

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अब हम लोग कॉलेज के पास की झील के किनारे बैठकर भविष्य के सपने बुनते रहते… एक बार वो तुकबंदी करते हुए कहने लगा… “जब फूल खिलता है, तो ख़ुशबू फैल जाता है… जब तुम हंसता है, तो बहार आ जाता है.” उसकी इस तुकबंदी पर मुझे ज़ोर से हंसी आ गई और मैंने भी हंसते हुए कहा, “ जब तुम तुकबंदी करता है, तो आंसू आ जाता है… यह ख़ुशी का है या ग़म का पता नहीं लग पाता है.” फिर काफ़ी देर तक हम हंसते रहे और मैंने सोचा कि व़क्त यहीं रुक जाए और यूं ही हंसते-खिलखिलाते ज़िंदगी गुज़र जाए.

बी.ई. पूरा होने के बाद संजय पटना चला गया. बीच-बीच में हमारी बातें होती रहती थीं और इसी बीच संजय ने बताया कि उसका सिलेक्शन आर्मी में हो गया है, संजय काफ़ी मेहनती था, जो ठान लेता, वो करता ही था. उसे दूर-दराज़ के इलाकों में कंप्यूटर इंस्टॉलेशन का काम सौंपा गया था. एक दिन मेरे मोबाइल पर उसका मैसेज आया- हम लोगों को अपने काम पर ले जानेवाला ट्रक खाई में गिर गया है, अस्पताल में पड़ा हूं, ऐसा लगता है ज़िंदगी ज़्यादा नहीं है. तुम अपनी ज़िंदगी सॉफ्टवेयर-सी रखना, मेरे जैसी हार्डवेयर नहीं.

आज मैं एक बैंक में कार्यरत हूं, लेकिन संजय के बिना ज़िंदगी वीरान है. उसका प्यार मेरा संबल है, पर उसके बिना ज़िंदगी सॉफ्ट नहीं, हार्डवेयर-सी है. अकेले जीवन गुज़ारते हुए बस उसका चेहरा और बातें ही सहारा हैं.

– संतोष श्रीवास्तव

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