Tag Archives: questions

ब्यूटी प्रॉब्लम्स: मेरा चेहरा ज़्यादा मैच्योर लगने लगा है… (Beauty Problems: I Look Older Than My Age)

I Look Older Than My Age
मेरे बालों की चमक पूरी तरह से ख़त्म हो गई है. मैं अच्छे ब्रान्ड का शैंपू और कंडीशनर यूज़ करती हूं, लेकिन बालों में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा. क्या करूं?

– रमा सिंह, पुणे.

कहीं आप बहुत ज़्यादा गर्म पानी से तो बाल नहीं धोती हैं? अगर ऐसा है, तो यही वजह है कि आपके बालों की चमक खो गई है. आप ठंडे पानी से बालों को धोना शुरू कर दीजिए, क्योंकि ठंडा पानी बालों के क्युटिकल लेयर को सील कर देता है और इससे कंडीशनर भी अच्छा रिज़ल्ट देते हैं.

मैं 28 साल की वर्किंग वुमन हूं. बिज़ी रूटीन की वजह से न तो मैं अपने लुक्स को बेहतर करने के लिए कुछ कर पाती हूं, न ही पार्लर जा पाती हूं. पिछले कुछ समय से मुझे लग रहा है कि मैं बहुत मैच्योर दिखने लगी हूं. ख़ासकर मेरा चेहरा ज़्यादा मैच्योर लगने लगा है. प्लीज़, मार्गदर्शन करें.

– विभा दोशी, सहारनपुर.

आप स्किन को 2-3 बार मॉइश्‍चराइज़ करने की कोशिश करें. जब ऑफिस जाने के लिए तैयार होती हैं, तभी स्किन को मॉइश्‍चराइज़ करें और ऑफिस से आने के बाद भी मॉइश्‍चराइज़र अप्लाई करें. आप बाज़ार में उपलब्ध फेस पैक, ख़ासकर मड पैक बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें, इससे आपके चेहरे का नेचुरल मॉइश्‍चर ख़त्म हो जाएगा. उसकी जगह आप यह होममेड मास्क यूज़ करें- एक केले को मैश करके उसमें गुलाब की पत्तियां और थोड़ा-सा ऑरेंज जूस मिला लें. शाम को घर आकर रोज़ 10 मिनट तक इसे लगाएं.  यह त्वचा को पोषण देकर रिफ्रेश कर देगा. इस मास्क को ज़्यादा मात्रा में बनाकर फ्रिज में स्टोर भी कर सकती हैं.

यह भी पढ़ें: ब्यूटी प्रॉब्लमः सर्दियों में रूखी त्वचा का कैसे रखें ख़्याल?

यह भी पढ़ें: ब्यूटी प्रॉब्लमः घर पर कैसे करें ब्लीच?

घबराएं नहीं, जानें क्यों बंद हुए 500 व 1000 के नोट (Do not Panic- 500 and 1000 notes were down, Learn why?)

Do not Panic

header-image-narendra-modi-1478619531_980x457
सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला किसी आनन-फानन योजना के तहत नहीं है. इसकी तैयारी तो कई महीने पहले से हो रही थी. सरकार के इस फैसले से आम जनता के बीच घबराहट-सी फैल गई है. अगर आप भी इस फैसले से घबरा गए हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ अहम् बातें.

1- क्या है यह स्कीम?
सरकार ने 500 व 1000 के नोटों को 8 नवंबर 2016 की आधी रात से बंद कर दिया. अब किसी भी दुकान, हॉस्पिटल, शॉपिंग मॉल आदि जगहों पर आप इसे यूज़ नहीं कर सकते. यह पूरी तरह से बैन हो चुका है.

2- क्यों लॉन्च की यह स्कीम?
मार्केट में पड़े काले धन की बढ़ते ढेर को कम करने के लिए इस योजना को लागू किया गया है. इससे आम जनता को काफ़ी फ़ायदा मिलेगा.

3- क्या करें आप?
अगर आपने कल रात ही बैंक से अपनी सैलरी निकाली है और आपको 500 व हज़ार के नोट मिले हैं या घर पर पहले से कुछ पैसे रखें हैं, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है. बस आप अपने बैंक में इसे जमा करवा दें. आप पोस्ट ऑफिस में भी इन नोटों को जमा करके उसके बदले 100-100 के नोट ले सकते हैं.

4- कितने दिन का समय है?
पैनिक होने की ज़रूरत नहीं है. आपके पास अभी बहुत समय है. अपने पास पड़े पुराने नोटों को बैंक या पोस्ट ऑफिस में बदलने या जमा करने के लिए अभी आपके पास 50 दिन हैं.

5- क्या नोट जमा करने के बदले कम पैसे मिलेंग?
अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि आपको अपने पुराने नोट जमा करने के बदले में कम पैसा मिलेगा, तो बिल्कुल ग़लत सोच रहे हैं. ऐसा नहीं है. आपको आपके द्वारा दिए गए अमाउंट का पूरा मूल्य मिलेगा.

6- क्या एक-साथ पूरा कैश मिलेगा?
नहीं, एक दिन में पूरा कैश नहीं मिलेगा. एक दिन में केवल 4000 रुपए आपको मिलेंगे.

7- बैंक में अकाउंट नहीं है, तो?
वैसे तो आजकल सभी का बैंक अकाउंट होता है. कुछ लोग पोस्ट ऑफिस में पैसे जमा करते हैं, लेकिन किसी कारणवश अगर आपका बैंक/पोस्ट ऑफिस अकाउंट नहीं है, तो निराश मत होइए. ज़रूरी काग़ज़ात लेकर आप बैंक/पोस्ट ऑफिस जाएं और अपना खाता खुलवाएं. उसके बाद पुराने नोट जमा करवाएं.

8- क्या किसी भी बैंक में पुराने नोट जमा हो सकते हैं?
हां, आप किसी भी बैंक में जाकर पुराने नोटों को देकर उसके बदले पैसा ले सकते हैं.

9- क्या इसका असर इंटरनेट बैंकिंग पर भी है?
जी नहीं, आप किसी को भी इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं. कार्ड पेमेंट में भी कोई बदलाव नहीं है.

10- कैसे करें ज़रूरी चीज़ों का भुगतान?
ये सच है कि सरकार की ये योजना कुछ पल के लिए आपको मुसीबत भरी लगे, लेकिन आगे के लिए बड़ी फ़ायदेमंद है. अगर आपके पास अभी कैश नहीं है और आपको हॉस्पिटल, लैब आदि जगह भुगतान करना है, तो कार्ड से पे करें.

11- क्या है 72 घंटे की स्कीम?
शुरुआती 72 घंटों के लिए सरकारी कंपनियों के अधिकृत पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी स्टेशनों, दूध के बूथों, सरकारी को-ऑपरेटिव स्टोर्स पर पुराने नोट चलेंगे.

12- क्या चेक से पैसे निकाले जा सकेंगे?
हां, आप कैश निकाल सकते हैं. लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 10,000 और ओवर ऑल लिमिट 20,000 एक हफ़्ते में (एटीएम से भी इसी तरह निकाल सकते हैं) ये पहले दो हफ्तों तक है यानी 24 नवंबर 2016 तक लागू है.

13- क्या करें टूरिस्ट?
अगर आप भारत घूमने आए हैं और आपके पास बड़ी नोट है, तो चिंता की बात नहीं. एयरपोर्ट एक्सचेंज काउंटर से नोटों को बदल सकते हैं.

14- कहां करें संपर्क?
ज़्यादा जानकारी के लिए आप आरबीआई की वेबसाइट www.rbi.org.in पर जाएं. इन नंबर्स पर फोन करके भी आप अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं. ये इस प्रकार हैं- 022- 22602201/ 22602944

15- कब आएंगे नए नोट?
10 नवंबर से आएंगे नए नोट.

अधिक फाइनेंस आर्टिकल के लिए यहां क्लिक करें: FINANCE ARTICLES 

 

मनी मैनेजमेंट से जुड़े सवाल-जवाब (Questions & answers related to money managment)

money managment

slide1

आमतौर पर आप कोई प्रोफेशनल मनी मैनजर नहीं है. ऐसे में लाज़मी है कि फायनांस से जुड़े कई सवाल-जवाब आपके भीतर उठते होंगे. तो चलिए, हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब. हो सकता है कि इसमें से आपकी कोई परेशानी हल हो जाए.

मैं 32 वर्षीया वर्किंग वूमन हूं. मैं होम बजट प्लान तो करती हूं, पर प्लान को अमल में नहीं ला पाती. क्या वाक़ई होम बजट प्लानिंग की आवश्यकता होती है? अगर हां, तो बजट प्लान पर स्टिक (अडिग) रहने के लिए कुछ सुझाव दें.

– स्मृति पाठक

हां, बेहतर मनी मैनेजमेंट के लिए होम बजट प्लान करना बेहद ज़रूरी है. जहां तक बात प्लान पर स्टिक यानी अडिग न रह पाने की है तो ऐसा अनरियलिस्टिक प्लान (अव्यावहारिक योजना) बनाने के कारण होता है. अतः ज़रूरी है कि ऐसा प्लान बनाएं जो वास्तविक हो, अमल में लाने जैसा हो. सबसे अहम बात वीकली (साप्ताहिक) बजट प्लान करें.

  • बजट प्लानिंग के दौरान ख़र्च निर्धारित करते समय यह ध्यान दें कि कौन-से ख़र्च अनिवार्य हैं और कौन-से इच्छित?
  • ज़्यादातर अनिवार्य भुगतान पहले ह़फ़्ते में कर देना चाहिए. चौथे ह़फ़्ते कम से कम ख़र्च करें.
  • हर ह़फ़्ते के अंत में यह देखें कि अभी क्या-क्या करना है और उसके लिए आपके पास कितने पैसे बचे हैं? नए ह़फ़्ते की शुरुआत में पिछले ह़फ़्ते के छूटे हुए कामों को प्राथमिकता दें.
  • होम बजट परिवार की ज़रूरत और आय (इनकम) के अनुसार बनाएं.
  • बीच-बीच में बजट प्लान की समीक्षा करें. ज़रूरी हो तो बजट प्लान पर रीवर्क करें.

मैं 32 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. मैं और मेरे पति अपने पैसे शेयर मार्केट में इन्वेस्ट तो करना चाहते हैं, लेकिन हमें मार्केट और उसके उतार-चढ़ाव के बारे में ़ज़्यादा जानकारी नहीं है. साथ ही हम अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई के साथ कोई रिस्क भी नहीं लेना चाहते. क्या शेयर मार्केट में निवेश करने का कोई सुरक्षित तरीक़ा है? कृपया गाइड करें.

– लीना शुक्ला, भिलाई

यदि शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करना चाहती हैं तो ये मान कर चलें कि थोड़ा रिस्क तो आपको लेना ही होगा. यहां आपका पैसा बैंक की एफ़डी की तरह पूरी सुरक्षा की गारंटी तो नहीं दे सकता, लेकिन कम समय में ही बैंक से अच्छे रिटर्न ज़रूर दे सकता है. यदि आपको शेयर मार्केट से संबंधित जानकारी नहीं है तो सीधे बाज़ार में निवेश करना ठीक नहीं होगा. फिर भी यदि आप बाज़ार में निवेश करना चाहती हैं तो, इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प है म्युचुअल ़फंड. यदि मार्केट के बारे में ़ज़्यादा जानकारी न हो तो म्युचुअल ़फंड में निवेश करना बाज़ार में सीधे निवेश करने से बेहतर व अपेक्षाकृत सुरक्षित होता है. इसमें निवेश करने पर आप पैसा ऐसी कंपनी को सौंप देती हैं, जिसके पास बाज़ार के बेहतरीन विशेषज्ञ और जानकार होते हैं. ये विशेषज्ञ आपके पैसों को ऐसी जगह निवेश करते हैं जहां निवेश की गई रकम बढ़ती रहे. फिर भी यह ध्यान रखें कि म्युचुअल ़फंड में निवेश भी बाज़ार के जोखिमों के अधीन ही होता है यानी मार्केट कंडीशन के हिसाब से इसमें भी रिस्क होता है. इनमें कई ऑप्शन्स भी होते हैं, जैसे- ओपन एंडेड या क्लोज़ एंडेड म्युचुअल ़फंड, डिविडेंड या ग्रोथ. इन सब के बारे में पूरी जानकारी हासिल करें और इसके बाद ही निवेश करें. साथ ही सारा पैसा किसी एक ़फंड में लगाने के बजाए अपने पोर्टफ़ोलियो को डाइवर्सिफ़ाई भी करें. कुछ पैसे लॉन्ग टर्म (लंबे समय) तो कुछ शॉर्ट टर्म (कम समय) के लिए इन्वेस्ट करें. इससे आप रिस्क को कवर सकती हैं. मार्केट का आकलन ख़ुद भी करती रहें और इस बात का निर्णय स्व-विवेक से लें कि कौन-से क्षेत्र में विकास हो रहा है. इससे आपको पता चलेगा कि म्युचुअल फंड में भी आपको कहां पैसे निवेश करने चाहिए?

मैं 57 वर्षीय डॉक्टर हूं. मैं पिछले 25 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहा हूं और अगले 5 वर्षों तक प्रैक्टिस करना चाहता हूं. मेरी बेटी विवाह योग्य है, पत्नी हाउस वाइफ़ है. इन सबको ध्यान में रखते हुए मुझे कहां-कहां इनवेस्ट करना चाहिए? कृपया, मार्गदर्शन करें.

– अनुराग कुमार, चेन्नई

आपने अपनी प्राथमिकताओं और बैक ग्राउंड के बारे में बताकर अच्छा किया, किंतु आपने अपने मौजूदा इनवेस्टमेंट पोर्टफ़ोलियो के बारे में नहीं बताया. फिर भी आपकी उम्र, प्राथमिकता और बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए आपको नीचे बताए गए इनवेस्टमेंट्स ज़रूर करने चाहिए.

– आप ख़ुद के और अपनी पत्नी के लिए लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूर ले लें.
– मेडिकल एमर्जन्सीज़ के लिए मेडिक्लेम प्लान का होना आवश्यक है.
– बेटी की शादी को ध्यान में रखते हुए कुछ लिक्विड इनवेेस्टमेंट ज़रूर करें.
– चूंकि आप 5 वर्ष के बाद रिटायर होना चाहते हैं, अतः ऐसी ग्रोथ स्कीम्स में निवेश करें, जिनका मैच्योरिटी पीरियड 5 वर्ष हो. ऐसा करने से आपके पास रिटायरमेंट के बाद एक अच्छी-ख़ासी रकम होगी.
– म्यूचुअल फंड्स और ब्ल्यू चिप सिक्योरिटीज़ में इनवेस्ट करें, क्योंकि इनमें रिटर्न अच्छा मिलता है. साथ ही ये लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट के अच्छे विकल्प साबित होते हैं.

मैं इसी साल एक मल्टी-नेशनल कंपनी से रिटायर हुआ हूं. मुंबई की प्राइम लोकेशन में मेरा एक ़फ़्लैट है. रिटायरमेंट के बाद मुझे मेरे ड्यूज़ के रूप में कुछ पैसे भी मिले हैं. मेरे तीन बेटे हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है. उन्हें यह घर छोटा लगता है और वे चाहते हैं कि मैं यह घर बेच कर व रिटायरमेंट के बाद मिली राशि को मिला कर दूसरा फ़्लैट ख़रीदूं. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या किया जाए. क्या इस  फ़्लैट को बेचना सही निर्णय होगा? गाइड करें.

-अमित कुमार, मुंबई

सबसे पहली बात तो यह है कि आपका ़फ़्लैट और रिटायरमेंट मनी आपकी पर्सनल संपत्ति है और इसे किस तरह इस्तेमाल किया जाए, इसका निर्णय लेने का अधिकार स़िर्फ और स़िर्फ आपको ही है. यदि रिटायरमेंट के बाद आप इस प्राइम लोकेशन पर रहना चाहते हैं तो बेशक़ रहें, लेकिन यदि शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं तो इसे बेच कर उपनगरीय क्षेत्र में ़फ़्लैट ख़रीदा जा सकता है. अपनी इस प्रॉपर्टी को बेचने से पहले पूरी तहक़ीक़ात करें, ताकि आपको इसका सही दाम मिल सके. ़फ़्लैट को बेचने के बाद मिले पैसों से सबसे पहले अपने रहने के लिए एक ़फ़्लैट ख़रीदें. उसकी मेंटेनेंस में लगने वाली राशि बैंक में जमा करा दें. इसके बाद अपने जीवनयापन के लिए लगने वाली राशि को भी अलग निकाल लें. फिर यदि पैसे बचें तो इससे अपने दोनों पुत्रों को उनका घर ख़रीदने में मदद करें.

मैं 35 वर्षीया वकिर्र्ंग वुमन हूं. मैं अपने बेटे और बेटी की शिक्षा के लिए इन्वेस्ट करना चाहती हूं. कृपया बताएं कि बच्चों की शिक्षा के लिए इन्वेस्ट करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

– अनुपमा गुप्ता, मेरठ

बच्चों की शिक्षा के लिए इन्वेस्टमेंट एक मॉडर्न कॉन्सेप्ट है. आजकल लगभग सभी पैरेंट्स इस कॉन्सेप्ट को फ़ॉलो करते हैं. आप अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए इन्वेस्ट करना चाहती हैं यह अच्छी बात है, पर आपने अपने बच्चों की उम्र, उनकी रुचि का क्षेत्र, ़फैमिली इनकम जैसी महत्वपूर्ण बातों के बारे में नहीं बताया. फिर भी बच्चों की शिक्षा के लिए इन्वेस्ट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए,

  • बच्चे की उम्र.
  • माता-पिता की उम्र.
  • बच्चा किस क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है या पैरेंट्स उसे किस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं.
  • पैरेंट्स की आय और उनके रिटायरमेंट की संभावित उम्र.
  • कोई पुश्तैनी संपत्ति जो बच्चे को मिलने वाली हो.
  • परिवार का मौजूदा इन्वेस्टमेंट स्टेटस यानी परिवार द्वारा किए गए निवेश की जानकारी.
    एक बार ये सारी बातें आप पेपर पर लिख लेंगी तो आपको इस बात का अंदाज़ा हो जाएगा कि बच्चों की शिक्षा के लिए कितने पैसों की ज़रूरत होगी. उस ज़रूरत को पूरा कर पाने में आप कितनी सक्षम हैं. यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद किसी फ़ायनेंशियल प्लानर या एक्सपर्ट से मिलें और उसकी सलाह से सही जगह निवेश करें, ताकि बच्चे की शिक्षा के साथ समझौता न करना पड़े.
  • अधिक फाइनेंस आर्टिकल के लिए यहां क्लिक करें: FINANCE ARTICLES 

[amazon_link asins=’0060835575,B0764BT6PF,1476766819,B00ADQMB6W’ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’44c8d7cf-b4b6-11e7-989c-710b5e5f6805′]

वास्तु से जुड़े 20 सवाल-जवाब (20 Questions and answers related to architectural)

architectural

 

4
वास्तुशास्त्र के अनुसार पति-पत्नी को कहां सोना चाहिए?
आपको बिस्तर पर दक्षिण-पश्‍चिम की ओर तथा आपकी पत्नी को दक्षिण-पूर्व की ओर सोना चाहिए.

हमारे बेडरूम की दक्षिण दिशा की दीवार में दरार आ गई है. क्या इससे कोई नुक़सान है?
वैसे तो किसी भी रूम की किसी भी दीवार पर दरार का होना अशुभ माना जाता है, पर दक्षिण दिशा में दरार का रहना उस रूम विशेष में होनेवाले कार्यों में बाधा डालता है, जैसे- आपके बेडरूम की दक्षिण दिशा की दीवार पर दरार काम सुख में कमी एवं वैचारिक मतभेदों को बल दे सकता है.

अक्सर यह सुनने में आता है कि बड़ों को दक्षिण में सिर व उत्तर में पैर रखकर सोना चाहिए. क्या यही नियम बच्चों पर भी लागू होता है?
जी हां, यह नियम सभी पर लागू होता है, पर यदि बच्चे पूर्व की तरफ़ सिर एवं पश्‍चिम की ओर पैर रखें, तो और उत्तम होगा. उत्तर दिशा की तरफ़ कभी भी सिर करके नहीं सोना चाहिए.

हमारे मकान में यदि अज्ञानतावश दक्षिण में ज़्यादा खिड़कियां हों और उत्तर में कम, तो ऐसे में क्या करना चाहिए?
यह स्थिति ठीक नहीं है, इनके दोषों से बचने के लिए दक्षिण की कुछ खिड़कियां बंद करके गहरे नीले रंग के डबल परदे डाल दें.

मैंने सुना है, वास्तु के दोष या गुण से शारीरिक शक्ति पर गहरा असर पड़ता है. यदि यह बात सच है तो कृपया बताएं कि भूमिगत पानी की टंकी यदि उत्तर दिशा में हो, तो कौन-सी शक्ति पर क्या और कौन-सा प्रभाव पड़ता है?
इससे घर के प्रमुख व ज़िम्मेदार व्यक्ति की छठी इन्द्रिय मजबूत होती है और उन्हें उचित पूर्वाभास की शक्ति प्राप्त होती है.

टेरेस पर हम टीवी एंटीना किस दिशा में लगा सकते हैं?
एंटीना दक्षिण-पश्‍चिम कॉर्नर में लगाना ठीक रहेगा.

वास्तु विज्ञान की बड़ी-बड़ी जटिल परिभाषाएं पढ़ने में आती हैं, फिर भी कुछ आधा-अधूरा सा लगता है, एकदम सरल भाषा में बताएं कि वास्तु शास्त्र क्या है?
प्रकृति के अनुरूप रहने का अत्यंत प्रभावशाली ज्ञान-विज्ञान है यह अर्थात् सुख-शांति व समृद्धि देने वाला अद्भुत विज्ञान.

अचानक कांच का टूटना कोई दोष होता है?
कभी किसी वजह से कांच का टूटना दोषपूर्ण नहीं होता है, परन्तु अचानक बार-बार कांच का टूटना या चटकना निश्‍चित ही बड़े दोष का कारण हो सकता है.

खेल के मैदान के लिए सबसे उपयुक्त स्थान कौन-सा है?
पूर्व या उत्तर, विशेष परिस्थिति में पूर्वी-उत्तर के कोने में भी खेल का मैदान बना दें.

हमने उत्तर की दिशा में आईना लगा रखा है, पता नहीं किस कारण से वह बार-बार टूट जाता है?
टूटने का कारण ढूंढ़ें, यदि कोई स्पष्ट कारण समझ में नहीं आए, तो चांदी का एक सिक्का आईने के पीछे दीवार के सहारे लगा दें.

2

कृपया यह बताएं कि नहाते समय हमारा मुंह किस दिशा में होना चाहिए?
वैसे तो नहाते समय मुंह पूर्व, पश्‍चिम और उत्तर की ओर रख सकते हैं, पर यदि आप बाथटब का उपयोग करते हैं, तो उस समय आपका मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए.

बैंक में मुझे एक लॉकर लेना है, कृपया बताएं मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर खुलनेवाला लॉकर लें, इस लॉकर के सामने खिड़की हो, तो उत्तम होगा. ध्यान रहे, सामने कोई द्वार न हो.

क्या एक बिल्डिंग के सभी फ्लैट वास्तु के अनुरूप बन सकते हैं?
जी हां, सारे फ्लैट वास्तु नियमों के आधार पर बन तो सकते हैं, पर उनकी शुभता में कुछ अंतर अवश्य आएगा.

क्या बेडरूम में टेलीफोन रख सकते हैं? यदि हां, तो किस तरफ़ रखें?
टेलीफोन को पश्‍चिम या दक्षिण-पूर्वी कोने में रखना चाहिए.

मैं व्यापारी हूं. पहले माल का उत्पादन बहुत धीमा होता था और मांग ज़्यादा रहती थी, कुछ वास्तुदोष निवारण के बाद उत्पादन तो संतोषजनक हो गया, पर माल की मांग घट गई है. इसका क्या कारण हो सकता है?
निश्‍चित ही आपने कुछ संशोधन किया होगा, पर संशोधन प्रक्रिया में कुछ कमी और ग़लतियां रहने के कारण मांग की गति धीमी पड़ गई है. आप पुनः नए सिरे से वास्तु दोष का परीक्षण कर संशोधन कराएं और मन में विश्‍वास रखें कि सब ठीक हो जाएगा.

बैंक में हमारा लॉकर पश्‍चिम की ओर खुलता है. वास्तु नियमों के हिसाब से क्या यह उचित है?
लॉकर को दक्षिण दीवार के सहारे होना चाहिए और उसे उत्तर या पूर्व की ओर खुलना चाहिए.

प्राकृतिक आपदाएं क्यों आती हैं? क्या किसी देश-प्रदेश के वास्तु से इसका कोई संबंध है?
वास्तु विज्ञान पंच तत्वों एवं विभिन्न ऊर्जा पर आधारित है. जब इन पंच तत्वों एवं ऊर्जाओं के समीकरण में कोई असंतुलन होता है, तो बाढ़, तूफान या अन्य आपदाएं आती हैं. इन तत्वों में हुए असंतुलन का व्यापक प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है. कहते हैं, हर दिशा के कोई न कोई अधिष्ठाता देवता होते हैं, कृपया इसका पूरा विवरण दें कि किस दिशा के कौन-कौन से देवता अधिष्ठाता हैं? दिशा और इनके अधिष्ठाता देवता इस प्रकार हैं- पूर्व दिशा के सूर्य एवं इन्द्र, पश्‍चिम दिशा के वरुण, उत्तर दिशा के सोम एवं कुबेर, दक्षिण दिशा के यम, ईशान के शिव एवं सोम, आग्नेय के ब्रह्मा एवं अग्नि, नैऋत्य के निऋति, वायव्य के वायु हैं.

हम अपने नए ऑफिस की सीलिंग में हल्का गुलाबी रंग कराना चाहते हैं. क्या यह ठीक रहेगा?
सीलिंग में सफेद रंग ही कराएं. भूलकर भी किसी दूसरे रंग के बारे में न सोचें.

मकान की मरम्मत करानी है, उसके लिए मज़दूर आदि हमारे मकान के बाहर अहाते में ही रहेंगे. उन्हें अस्थायी स्थान किस दिशा में देना श्रेष्ठकर होगा?
उनके रहने की व्यवस्था उत्तर-पश्‍चिम में करें.

यदि नींव की मिट्टी में मूंगा रत्न दिखलाई दे, तो यह कैसा लक्षण है?
यह बेहद ही शुभ लक्षण है, क्योंकि वह भूमि अत्यंत शुभ मानी जाएगी.

न्यू जॉब जॉइन करने से पहले ख़ुद से करें कुछ सवाल (Make Yourself Some Questions Before Joining New Job )

joining New Job

 

Questions Before Joining New Job

अच्छी लाइफस्टाइल जीने के लिए आर्थिक मज़बूती बहुत ज़रूरी है. ऐसे में कई बार जॉब जाने की परेशानी का सामना भी आपको करना पड़ता है. बेरोज़गार होने और आर्थिक दिक्क़तों के चलते कोई भी नौकरी करने से पहले अच्छी तरह से उसके बारे में सोचें और ख़ुद से उस नौकरी से जुड़ी इन बातों को पूछें.

पर्सनल वैल्यूज़
आर्थिक तंगी के चलते पार्ट टाइम जॉब के लिए आप कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन फुल टाइम जॉब के लिए आप उसी फर्म को चुनें, जो आपके व्यक्तित्व से मेल खाता हो. ऐसे फर्म को कभी वरियता न दें, जो आपके इंटरेस्ट से मेल न खाता हो और जहां पर ख़ुद आपकी कोई इज़्ज़त न हो. भले ही सैलरी बहुत अच्छी क्यों न हो, लेकिन इस तरह के फर्म में आप ज़्यादा दिन तक काम नहीं कर पाएंगे. बेहतर होगा पहले अपने आप से इस बारे में पूछें फिर कोई निर्णय लें.

कंपनी की रेपोटेशन
स़िर्फ पैसों के लिए किसी भी कंपनी में काम करना भविष्य में बुरा साबित हो सकता है. जिस भी कंपनी से आपको ऑफर लेटर आया है, सबसे पहले उसके बारे में अच्छी तरह से जांच-पड़ताल कर लें. मार्केट में उस कंपनी के बारे में लोगों का क्या कहना है, ये भी आपके लिए बहुत महत्व रखता है. अपनी सीवी को मज़बूत करने और ख़ुद की इज़्ज़त का ख़्याल करते हुए बेस्ट कंपनी का चुनाव करें.

भविष्य का ख़्याल
किसी भी कंपनी में जॉब के लिए आवेदन देने से पहले अपने भविष्य का ख़्याल ज़रूर रखें. अपने लक्ष्य को दिमाग़ में रखकर ही आगे बढ़ें. लॉन्ग टर्म के लिए अगर कंपनी आपके लिए उपयुक्त नहीं रहेगी और आप अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएंगे, तो बेहतर होगा कि कुछ समय और इंतज़ार करें और दूसरी नौकरी की
तलाश करें.

वर्कप्लेस का माहौल
दिन के आठ घंटे जहां आप काम करेंगे उसका माहौल आपके अनुसार न होने पर बहुत जल्द ही काम में मन नहीं लगता और आप नई जॉब की तलाश में लग जाते हैं. नई नौकरी जॉइन करने से पहले वहां काम करनेवालों से ऑफिस के अंदर के माहौल के बारे में पता लगाएं. सब कुछ जानने के बाद ख़ुद ही तय करें कि क्या ऐसे माहौल में आप काम कर पाएंगे?

कैसा है बॉस?
बॉस का असर आपके काम पर बहुत पड़ता है. एक अच्छे बॉस के होने से आपका काम करने में मन लगता है और इसका फ़ायदा आपके साथ आपकी कंपनी को भी होता है, लेकिन बॉस के सही न होने से कई तरह की समस्याओं से गुज़रना पड़ता है. काम का अनियमित समय, एक्स्ट्रा प्रेशर, टारगेट और मेंटल टॉर्चर जैसी कई परेशानियों के चलते प्रायः लोग जॉब छोड़ देते हैं.

सैलरी
किसी भी तरह की नौकरी करने का सबसे मुख्य कारण है कि उससे आपकी आमदनी हो. महीने के आख़िर में आपको कुछ पैसे मिल जाएं, जिससे आपकी ज़रूरतें आसानी से पूरी हो जाएं और भविष्य के लिए कुछ बचत भी कर लें. इसलिए इंटरव्यू देने के बाद और ज्वाइन करने से पहले ख़ुद से एक बार पूछें कि क्या इतनी सैलरी आपके लिए उपयुक्त होगी या फिर इस नौकरी के साथ आपको कहीं और भी कुछ करना पड़ेगा? पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही आगे बढ़ें.

घर से कंपनी की दूरी
कहीं भी जॉब ज्वाइन करने से पहले अमूमन दिमाग़ में ये बात ज़रूर आती है कि रोज़ाना घर से ऑफिस पहुंचने में कितना समय लगेगा. नई नौकरी का ऑफर लेटर हाथ में लेने से पहले आप ये सुनिश्‍चित कर लें कि क्या प्रतिदिन आप इतनी दूरी तय कर पाएंगे, क्या आसानी से और सही समय पर आप प्रतिदिन ऑफिस पहुंच पाएंगे, इस नौकरी को करने में कहीं ट्रैवलिंग में ही आपका बहुत पैसा तो नहीं लग जाएगा जैसी आदि बातों को पहले ही अपने दिमाग़ में सोच लें फिर आगे बढ़ें.

अपनी पसंद
अपनी पसंद का खाना न होने पर जब आप नहीं खाते, तो नौकरी बिना पसंद की कैसे कर सकते हैं. घर की माली हालत ठीक न होने पर भले ही मजबूरी में आप नई नौकरी के लिए हां कर दें, लेकिन कुछ ही समय के बाद आपका वहां मन नहीं लगेगा. इसलिए नई नौकरी के लिए हां करने से पहले एक नहीं, बल्कि सौ बार सोचें फिर हां करें, क्योंकि बार-बार जॉब बदलने से आपकी सीवी कमज़ोर हो जाती है और लोगों में आपकी ग़लत छवि जाती है.

आपकी क्षमता
आप कितने पानी में खड़े हैं, इसकी जानकारी होना बहुत ज़रूरी है. दूसरों के कहने और उनकी ज़ोर-ज़बर्दस्ती से बिना सोचे ही किसी भी तरह के काम को हां न करें. हर इंसान की अपनी व्यक्तिगत क्षमता होती है उससे अधिक काम होने पर तनाव होता है और फिर धीरे-धीरे सेहत बिगड़ने लगती है. इंटरव्यू टेबल पर बैठते ही आप वहां के काम और टार्गेट के बारे में जानना न भूलें.

प्राथमिकता का रखें ख़्याल
अपनी प्राथमिकता को देखते हुए सही जॉब की तलाश करना आपकी ज़िम्मेदारी है. कई बार जॉब संतुष्टि से ज़्यादा पैसों की ज़रूरत ज़्यादा होती है. ऐसे में अगर सैलरी को दिमाग़ में रखकर जॉब सिलेक्शन कर रहे हैं, तो कोई बुरी बात नहीं है.

– श्वेता सिंह