RD Burman

संगीत जगत के लेजंड राहुल देव बर्मन यानी आर.डी. बर्मन ने बॉलीवुड को संगीत का ऐसा सुनहरा दौर दिया, जिस पर आज भी लोग झूम उठते हैं. 60 से लेकर 80 के दशक तक आर.डी. बर्मन ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गानों के साथ दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था. आर.डी. बर्मन की ज़िंदगी जितनी दिलचस्प थी, उतनी ही दिलचस्प थी उनकी लव स्टोरी. कैसे शुरू हुई आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की म्यूज़िकल लव स्टोरी? आज (27 जून) आर.डी. बर्मन यानी पंचम दा का जन्मदिन है. आइए, हम आपको बताते हैं उनकी ज़िंदगी और उनकी लव स्टोरी से जुडी कुछ दिलचस्प बातें.

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ऐसे शुरू हुई थी आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की म्यूज़िकल लव स्टोरी
आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की पहली मुलाकात एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई थी, जहां आर.डी. बर्मन के पिता एस डी बर्मन ने दोनों को मिलवाया था. तब तक आशा भोसले ने इंडस्ट्री में अच्छी खासी पहचान बना ली थी, जबकि आरडी बर्मन मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के टीएनज बेटे थे. करीब 10 साल बाद वो मौका आया जब आरडी बर्मन ने फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के लिए आशा भोसले से गाने के लिए संपर्क किया. तब तक पंचम दा और आशा भोसले दोनों की ही पहली शादी टूट चुकी थी. पंचम दा अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से अलग हो गए थे. उस वक्त पंचम दा अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से इतना परेशान हो चुके थे कि घर छोड़कर होटल में रहने चले गए थे. आशा भोसले जी की भी पहली शादी सुखद नहीं थी. आशा जी अपने पति गणपतराव भोसले से बिल्कुल खुश नहीं थीं. और फिर एक दिन आशा जी ने अपने बच्चों के साथ अपनी बहन के घर की ओर रुख कर लिया. उसी दौरान आशा जी लगातार पंचम दा के लिए गाने गा रही थीं. पंचम दा का संगीत और आशा जी की सुरीली आवाज उन्हें एक-दूसरे के करीब ला रहे थे. कई सालों तक बिना कुछ कहे दोनों के एहसास संगीत में घुलते-मिलते रहे. उस वक़्त दोनों ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने दिए थे. पंचम दा का आशा जी को प्रपोज़ करने का अंदाज़ भी बहुत निराला था. आशा जी ने एक खास बातचीत के दौरान बताया था कि शादी के लिए प्रपोज़ करते वक्त भी पंचम दा ने म्यूजिक का सहारा लिया था. उन्होंने आशा जी से कहा कि मेरे सुरों को तुम ही समझ सकती हो. पंचम दा की इस बात को आशा जी समझ गई थीं और उन्होंने शादी के लिए हां कर दी थी. लेकिन आरडी बर्मन और आशा भोसले की शादी का रास्ता इतना आसान नहीं था. आशा जी उम्र में पंचम दा से बड़ी थीं इसलिए पंचम दा की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं, उन्होंने इस शादी के लिए साफ मना कर दिया था. आशा जी से शादी के लिए आरडी बर्मन को लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन आखिरकार दो प्यार करने वाले एक हो ही गए. आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की म्यूज़िकल लव स्टोरी बहुत लंबी नहीं थी. शादी के 14 साल बाद ही पंचम दा 54 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए. पंचम दा के चले जाने के बाद आशा जी बिल्कुल टूट गई थीं, कई सालों बाद वो सामान्य हो पाई थीं.

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उस वक्त आशा भोलसे सिर्फ पंचम दा के लिए ही रिकॉर्डिंग करती थीं
फिर एक समय ऐसा भी आया, जब आशा भोलसे सिर्फ पंचम दा के लिए ही रिकॉर्डिंग करती थीं. वर्ष 1981 में जब म्यूजिशियन कल्याण सेन ने फिल्म ‘मुन्नी बाई’ के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए आशा भोलसे को अप्रोच किया और गाने की रिकॉर्डिंग के लिए उनके पीए बाबू भाई के जरिए आशा जी की रजामंदी भी मिल गई, साथ ही 5 हजार रुपए फीस तक तय हो चुकी थी, ऐसे में जब कल्याण सेन अपनी पूरी टीम के साथ रिकॉर्डिंग के लिए पहुंचे, तो बाबू भाई ने कहा कि आशा जी के दांत में दर्द है आप बाद में आना. बता दें कि आशा जी उसी दिन अपने पति आर डी बर्मन के लिए रिकॉर्डिंग कर रही थीं. जब इस बात की खबर कल्याण सेन को मिली, तो वो रोते हुए आर डी बर्मन के ऑफिस पहुंच गए. कल्याण सेन की बातें सुनते ही पंचम दा ने आशा जी को कसकर डांट लगाई और अपनी रिकॉर्डिंग कैंसिल करवा दी.

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ऐसा था पंचम दा का संगीत का सफर
बॉलीवुड में पहली बार फिल्म ‘छोटे नवाब’ में म्यूजिक की शुरूआत करने वाले आर डी बर्मन को राजेश खन्ना स्टारर फिल्म ‘अमर प्रेम’ के गानों से म्यूजिक इंडस्ट्री के साथ-साथ दुनियाभर में पहचान मिली. इस फिल्म में ‘चिंगारी कोई भड़के’, ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ जैसे गानों को दर्शक आज भी गुनगुनाते हैं. आर डी बर्मन को भले ही संगीत विरासत में मिला हो, मगर बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अपनी खुद की स्टाइल इजाद कर ली और नए जमाने के संगीतकार बन गए. कई लोग उन्हें आने वाली पीढ़ी का संगीतकार भी कहते थे. आरडी बर्मन के म्यूजिक के लिए एक्सपेरिमेंट्स काफी चर्चित हैं. बताया जाता है कि वे बारिश की बूंदों के साउंड की रिकॉर्डिंग के लिए घंटों बाल्कनी में बैठे रहते थे, रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे सोडा बॉटल तक को इंस्ट्रूमेंट की तरह यूज करते थे. पंचम दा अलग तरह का खुद का म्यूजिक बना सकें इसके लिए वो अपने म्यूजिशंस की पीठ तक बजाकर देखते थे. जैज, कैबरे, डिस्को और ओपरा म्यूजिक से भारतीय सिनेमा को समृद्ध करने वाले आरडी बर्मन को उनके चाहने वाले कभी नहीं भूल सकते. उनके रोमांटिक गानों को आज भी कोई टक्कर नहीं दे सकता. तुम आ गये हो नूर आ गया है, मुसाफिर हूँ यारों, सर जो तेरा चकराए, मेरा कुछ सामान, चिंगारी जो भड़के, ओ मेरे दिल के चैन, ये जो मोहब्बत है, बड़े अच्छे लगते हैं, रोज़ रोज़ आखों तले, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा जैसे कई सुपरहिट गाने पंचम दा ने बॉलीवुड को दिए हैं और ये गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं.

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आप भी सुनिए आरडी बर्मन के ये सुपरहिट गाने:

तुम आ गये हो नूर आ गया है

ओ मेरे दिल के चैन

चिंगारी जो भड़के

बड़े अच्छे लगते हैं

एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

rd-burman_759_express-archive-photo (1)संगीत के जादूगर पंचम दा को आज भी म्यूज़िक इंडस्ट्री का गुरु माना जाता है. म्यूज़िक के साथ जो एक्सपेरिमेंट्स उन्होंने किए हैं, वो शायद ही किसे ने किए होंगे. संगीतकार एस. डी बर्मन के बेटे आर.डी.बर्मन यानी पंचम दा संगीत की दुनिया में तब क्रांति ले आए, जब उन्होंने गानों में अलग तरह की आवाज़ें, म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स से अलग-अलग तरह की धुनें बनाने लगे. पंचम दा ने ऐसा संगीत बनाया, जिसकी कल्पना किसेे ने नहीं की थी. महज़ नौ साल की उम्र में अपना पहला गाना कंपोज़ करने वाले पंचम दा ने कैबरे को भी अपने गाने के ज़रिए एक नई पहचान दी. उन्होंने अपने 33 साल के करियर में हर तरह का संगीत बनाया और आज की जेनेरेशन के लिए एक मिसाल कायम कर गए. बॉलीवुड में पंचम दा के नाम से मशहूर आर.डी.बर्मन को यह नाम दिया अशोक कुमार ने, जब उन्होंने बर्मन साहब को संगीत के पांचों सुर सा रे गा मा पा… गाते हुए सुना. उनकी आख़िरी फिल्म रही 1942 ए लव स्टोरी, जिसके गानों ने सबके दिलों को एक बार फिर छू लिया था. 4 जनवरी 1994 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके गाने हमेशा उनकी याद दिलाते रहेंगे.

आज पंचम दा की बर्थ एनीवर्सरी है. आइए, उन्हें याद करते हुए उनके कुछ बेहतरीन गाने देखते हैं.

फिल्म- इजाज़त

फिल्म- अलग-अलग

फिल्म- हरे रामा हरे कृष्णा

फिल्म- कटी पतंग

फिल्म- अमर प्रेम

फिल्म- आंधी

फिल्म- हम किसी से कम नहीं

https://www.youtube.com/watch?v=OK_CO9BEa6k

फिल्म- कारवां

फिल्म- शोले

फिल्म- आप की कसम

https://www.youtube.com/watch?v=XkKUpvkzTgg