Tag Archives: real

नम्रता ही असली कामयाबी है (Modesty Is The Real Success)

Jeene ki kala

नम्रता से आप क्या हासिल कर सकते हैं, इसका बेहतरीन उदाहरण हैं सचिन तेंदुलकर, मदर टेरेसा, अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियां, जिनके नम्र स्वभाव ने लाखों दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाई है. आप कितने भी ज्ञानी, कितने भी क़ाबिल क्यों न हों, यदि आप में नम्रता नहीं है, तो आप लोगों का दिल जीतने में कभी क़ामयाब नहीं हो सकते. अतः सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी नम्र बने रहें, तभी आप सही मायने में क़ामयाब कहलाएंगे.

नम्रता मान देती है, योग्यता स्थान देती है.
                                          – अज्ञात

नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के आभूषण होते हैं.
                                                – तिरुवल्लुवर

नम्रता सारे गुणों का दृढ़ स्तंभ है.
                         – कन्फ्यूशस

विनम्रता एक आध्यात्मिक शक्ति है.
                      – रवींद्रनाथ ठाकुर

प्रार्थना नम्रता की पुकार है.
              – महात्मा गांधी

महान पुरुष की पहली पहचान उसकी नम्रता है.
                                              – अज्ञात

नम्रता की ऊंचाई का नाप नहीं.
                     – विनोबा भावे

विनम्रता शरीर की अंतरात्मा है.
      – एडीसन

कठोरता से अधिक शक्तिशाली नम्रता है.
                                       – अज्ञात

विनम्रता एक गुण है और यह गुण अतिथियों में स्वाभाविक रूप से होता है.
                                                                            – मैक्स बीरबोह्म

[amazon_link asins=’8192910962,8183225098,9352770145,8192910911′ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’a83301aa-b7e8-11e7-95a3-2b5edc298a4c’]

दंगल पर दंगल: आख़िर क्यों आमिर ख़ान को कोर्ट में खींच सकते हैं गीता फोगट के कोच सोंधी? (Real coach Sodhi disappointed… he may take legal action against Film Dangal)

dangal

dangal

आमिर की फिल्म दंगल बॉक्स ऑफिस पर कमाई करने के साथ-साथ दर्शकों का प्यार भी जीत रही है, लेकिन कोई है, जो इस फिल्म से बहुत निराश है. ग़ुस्सा इस क़दर है कि वो आमिर स्टारर इस फिल्म को कोर्ट में भी घसीट सकता है. आख़िर कौन है वो और क्यों दंगल को असली अखाड़े में खींचना चाहता है.

दंगल वालों ने चीटिंग की!
जी हां, वो कोई और नहीं, बल्कि गीता फोगट के रियल लाइफ कोच प्याराराम सोंधी हैं. दंगल देखने के बाद सोंधी आमिर ख़ान समेत फिल्म के बाकी मेकर्स से काफ़ी नाराज़ दिखे. सोंधी का कहना है कि फिल्म की शूटिंग पर गए थे, लेकिन इस तरह के किसी सीन की बात मेकर्स ने नहीं की. इस तरह से फिल्म में दिखाए गए कई सीन पूरी तरह से ग़लत हैं.

आख़िर किस सीन को लेकर भड़के सोंधी?
दरअसल, फिल्म के एक सीन में गीता फाइनल खेलने जाती हैं, तो कोच गीता के पिता महावीर फोगट को कमरे में बंद करवा देते हैं. कोच नहीं चाहते थे कि गीता की सफलता का श्रेय उनके पिता को मिले. सोंधी की माने, तो ऐसा कुछ भी नहीं था. फोगट परिवार से उनका रिश्ता बहुत अच्छा है और इस तरह की बात नहीं थी. ऐसा फिल्म को और रोचक बनाने के लिए दिखाया गया है. इसी तरह फिल्म के एक सीन में गीता फोगट के कोच के रूप में प्रमोद कदम को दिखाया गया है, जबकि सोंधी की माने, तो उस समय वो ही फोगट के कोच थे.

फोगट फैमिली क्या कहती है?
अगर बात फोगट सिस्टर्स और फैमिली की की जाए, तो उनका कहना अलग है. वो तो फिल्म देखने के बाद ही कहने लगे थे कि फिल्म का 99% भाग उनकी रियल लाइफ से जुड़ा है. उनकी ज़िंदगी में जो हुआ, वही दिखाया गया है.

हालांकि सोंधी की इस बात पर अभी आमिर ख़ान और फोगट फैमिली को ओर से कोई रिऐक्शन नहीं आया है. सोंधी फिल्म से इस क़दर नाराज़ हैं कि वो लीगल ऐक्शन लेने के बारे में भी सोच रहे हैं. वैसे हमें नहीं पता कि इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है, लेकिन इतना तो ज़रूर है कि फिल्म के एक अन्य सीन को लेकर भी विवाद चल रहा था, जिसमें गीता फोगट के फाइनल फाइट को फिल्म में संघर्षपूर्ण बताया गया है, जबकि असल में वो शानदार तरी़के से जीत दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल जीती थीं.

श्वेता सिंह 

असली ‘फुंसुख वांगडु’ को मिला अवॉर्ड, ‘3 इडियट्स’ का किरदार इनसे था इंस्पायर्ड (The Real Phunsuk Wangdu wins prestigious Rolex Award)

Sonam Wangchuk

असली फुंसुख वांगडु को सम्मानित किया गया रोलेक्स अवॉर्ड से. हम बात कर रहे हैं लद्दाख के इंजिनियर सोनम वांगचुक की. मॉडर्न एजुकेशन और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए सोनम कई सराहनीय काम कर रहे हैं. उन्होंने एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख नाम का संगठन बनाया है, जहां सौर ऊर्जा का पूरा इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा ही कुछ आपने फिल्म 3 इडियट्स में भी देखा था. आमिर खान भी लद्दाख में एक ऐसा ही स्कूल चलाते नज़र आए थे. दरअसल आमिर ने जो फुंसुख वांगडु का किरदार निभाया था, वो सोनम वांगचुक से इंस्पायर्ड था. आमिर फिल्म में उन बच्चों की प्रतिभा को संवारने का काम करते नज़र आए थे, जिन्हें पैसों के अभाव में आगे बढ़ने का मौक़ा नहीं मिलता. लद्दाख के 50 साल के सोनम भी यही काम करते हैं. वांगचुक ने जब शिक्षा के लिए काम करना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि भाषा की वजह से बच्चे सवालों के जवाब पता होने के बावजूद उसका जवाब नहीं दे पाते थे, इसलिए उन्होंने स्थानीय भाषा में ही बच्चों की शिक्षा के लिए कोशिश करनी शुरू कर दी. वांगचुक सहित पूरी दुनिया से 140 लोगों को ये रोलेक्स अवॉर्ड दिया जाना है.

– प्रियंका सिंह