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15 इफेक्टिव रेज़ोल्यूशन हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए (15 Most Effective Resolution for Happy Married Life)

Married Life

कल थे अजनबी, आज हमसफ़र हैं… दिलों की नज़दीकियां हैं, तो सोच के फ़ासले भी कम नहीं… क्यों न कुछ ऐसा करें, कुछ तुम बढ़ो, कुछ हम बढ़ें… इसके लिए आपको कुछ रिज़ोल्यूशन यानी संकल्प भी बनाने होंगे, ताकि वैवाहिक जीवन ताउम्र ख़ुशहाल बना रहे.

 

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ज़िंदगी के सफ़र में आपके हाथों में किसी का हाथ हो और हर क़दम किसी का साथ मिल जाए, तो ज़िंदगी कितनी ख़ुशगवार हो जाती है. अब इसे प्रकृति का नियम कहें या हमारी ज़रूरत, लेकिन ज़िंदगी जीने के लिए हर किसी को एक साथी की ज़रूरत होती है. और यदि अपने जीवनसाथी के साथ ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन बिताना है, तो कुछ रिज़ोल्यूशन भी बनाने होंगे. यहां पर हम आपको ऐसे ही 15 रिज़ोल्यूशन बता रहे हैं, जिन्हें निभाने के बाद आपके रिश्तों में जीवनभर मिठास बनी रहेगी.

1. शादी के सातों वचन निभाने का रिज़ोल्यूशनः अपनी शादी के दिन को कभी न भूलें. यह आपको हमेशा याद दिलाएगा कि आपने शादी के समय क्या वचन लिए थे. उन सातों वचनों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहें. ख़ुद से वादा करें कि मैं अपने साथी के साथ किए गए विवाह की वजह अर्थात् प्रेम को कभी नहीं भूलूंगा या भूलूंगी. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि अपनी शादी का वीडियो साथ बैठकर देखें.

2. कम्युनिकेशन बनाए रखने का संकल्पः संवाद स़िर्फ शादीशुदा रिश्ते के लिए ही नहीं, बल्कि हर रिश्ते के लिए जादू का काम करता है. रिलेशनशिप एक्सपर्ट रेवा जोशी बताती हैं कि संवादहीनता वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी समस्या है. यदि आप अपने पार्टनर से नाराज़ हैं या उनसे आपकी कुछ अपेक्षाएं हैं, तो अपने साथी से प्रत्यक्ष बात करें. उनसे जुड़ी अपनी शिकायतें उनसे ही शेयर करें. उन्हें किसी और के साथ न बांटें, वरना आप दोनों के बीच में ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी. वैवाहिक जीवन में छोटे-मोटे झगड़े-शिकायतें सामान्य हैं और इन्हें बातचीत द्वारा ही सुलझाया जा सकता है, पर संवादहीनता धीरे-धीरे आपके रिश्ते मेें बिखराव उत्पन्न कर देती है.

3. अपने साथी को समय देनाः आज की जीवनशैली में यह रिज़ोल्यूशन सबसे महत्वपूर्ण है, वहीं इसे निभा पाना शायद आपके लिए सबसे ज़्यादा मुश्किल होगा. शहरी कपल्स की यह बहुत बड़ी समस्या है. यह सच्चाई है कि करियर व पैसे की भागदौड़ में दोनों को साथ बैठकर बातें करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, लेकिन शायद आप नहीं जानते कि आप इसकी क्या क़ीमत चुका रहे हैं? आप दोनों के बीच समय की कमी मीलों के फ़ासले बना रही है. स़िर्फ साथी को समय देना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसे क्वालिटी टाइम देना भी ज़रूरी है. अर्थात् जब आप अपने साथी के साथ हों, तब आप अपने तनावों के साथ न बैठें,बल्कि अपना पूरा ध्यान उसी पर केंद्रित करें. पार्टनर को ऑफ़िस ड्रॉप करें, उसे लेने जाएं या छुट्टी का पूरा दिन साथ बिताएं. अपने हर पल में अपने साथी को शामिल करने की कोशिश करें.

4. झगड़ों के समय संयम न खोनाः झगड़े वैवाहिक जीवन का अभिन्न अंग हैं, पर झगड़े के समय अपना संयम और विवेक न खोएं. ज़्यादातर समस्याएं इसलिए होती हैं, क्योंकि झग़ड़ते समय हम क्या कह रहे हैं, इस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता है. लेकिन बाद में जब झगड़ा ख़त्म हो जाता है या यूं कहें कि हम शांत हो जाते हैं, तो हमें अपने किए पर पछतावा होता है. झगड़ते समय साथी या उसके रिश्तेदारों को अपशब्द न कहें, न ही किसी प्रकार की मार-पीट करें. नोंक-झोंक आपके रिश्ते में नमक का काम करती है, जो आपके रिश्ते का स्वाद बढ़ाती है, पर अगर नमक ज़रूरत से ज़्यादा पड़ जाए, तोे पूरा स्वाद ख़राब हो जाता है.

5. स्पर्श का जादू चलाने का वादाः व्यस्तता के बावजूद छोटे-छोटे पल चुराकर अपने साथी को स्पर्श करना न भूलें. यकीन मानिए, आपकी इस तरह की शरारतों का पार्टनर कभी भी बुरा नहीं मानेंगे, बल्कि मन ही मन ख़ुश होंगे. याद रखिए, आपके द्वारा दिया गया एक आलिंगन या उंगलियों की छुअन आपके साथी को आपके प्यार के बंधन में बांधे रखेगी और हर तनाव से मुक्त कर नया आत्मविश्‍वास पैदा करेगी.

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6. मान-सम्मान देनाः आप हमेशा अपने साथी से मान-सम्मान की अपेक्षा करते हैं, पर इसके लिए आपको सबसे पहले अपने साथी को भी आदर देना होगा. उसकी भावनाओं का सम्मान करना होगा. उससे जुड़े अन्य लोगों का भी सम्मान करना होगा.

7. ग़लती को माफ़ करनाः यदि आपका साथी अपनी किसी ग़लती को स्वीकारने आपके पास आया है, तो कभी भी उसे रिजेक्ट करने या उस पर ग़ुस्सा करने की ग़लती न करें, क्योंकि आपके ऐसा करने पर वह फिर कभी भी आपसे सच कहने या माफ़ी मांगने की हिम्मत नहीं कर पाएगा. उसे समझें और माफ़ कर दें. यह न भूलें कि क्षमा करके जीवन में आगे बढ़ जाने में ही समझदारी है.

8. अभिमान न करनाः वैवाहिक जीवन में अभिमान या ईगो कभी न आने दें. चाहे आप अपने साथी से ज़्यादा कमाते हों, ज़्यादा सुपीरियर हों, ज़्यादा पढ़े-लिखे हों, पर किसी बात का ईगो न पालें, न ही घमंड करें. ईगो प्रेम और विश्‍वास को ख़त्म कर देता है.

9. शक न करनाः यदि आपके साथी का कोई स्त्री या पुरुष मित्र है, तो परेशान न हों. अगर किसी वजह से पार्टनर को ऑफ़िस से आने में देरी हो जाए, तो तुरंत अपने शक की सुई उसे न चुभोएं. रिएक्ट करने से पहले देरी से आने की वजह सुन लें. शक करना बहुत आसान है, पर विश्‍वास करना बहुत ही मुश्किल, लेकिन याद रखें विश्‍वास आपको ख़ुशहाल ज़िंदगी की ओर ले जाएगा.

10. अपमान न करनाः आप दोनों के रिश्ते के उतार-चढ़ाव नितांत निजी हैं. उसे बाकी लोगों के सामने न आने दें. अपने साथी को कभी किसी के सामने अपमानित न करें. ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे उनका स्वाभिमान आहत हो. आपको एक-दूसरे का साथ देना है, न कि लोगों के सामने एक-दूसरे को नीचा दिखाना है. यदि आप अपने साथी को उनकी किसी ग़लती का एहसास कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें लोगों के सामने शर्मिंदा न करें, बल्कि अकेले में बताएं.

11. ज़िम्मेदारियों से न बिदकने का संकल्पः शादीशुदा ज़िंदगी में स़िर्फ पति-पत्नी ही नहीं होते, बल्कि धीरे-धीरे कई सारी ज़िम्मेदारियां भी आ जाती हैं, जैसे- बच्चों की ज़िम्मेदारी, माता-पिता की ज़िम्मेदारी आदि. ऐसी कोई भी ज़िम्मेदारी आने पर पीछे न हटें, बल्कि उन्हें निभाने में अपने साथी का साथ दें.

12. छुट्टियों पर जानाः अपनी व्यस्त जीवनशैली से कुछ समय निकालकर कुछ दिन अपने साथी के साथ छुट्टियों पर ज़रूर जाएं. सेकंड हनीमून प्लान करने में भी कोई बुराई नहीं है.

13. पार्टनर को नज़रअंदाज़ न करनाः अपने जीवन के हर छोटे-बड़े ़फैसले में अपने साथी को शामिल करें. कहीं पर या कभी भी उसे नज़रअंदाज़ न करें. उन्हें बताएं कि आपके लिए वे कितने महत्वपूर्ण हैं.

14. बहुत प्यार करने का वादाः याद रखिए, चाहे जितने झगड़े या वाद-विवाद हों, दिन के आख़िर में जीत आपके प्यार की होनी चाहिए. अपने आपसी मतभेद सोने से पहले सुलझाने की कोशिश करें. कभी भी अपने झगड़ों के साथ सोने न जाएं. याद रहे, आपके प्रेम से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है.

15. सारे रिज़ोल्यूशन निभाने का रिज़ोल्यूशनः यह संकल्प सबसे ज़रूरी है. हमेशा ख़ुद से किए हर वादे या संकल्प को याद रखें और उसे पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करें.

– विजया कठाले निबंधे

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रिलेशनशिप हेल्पलाइनः कैसे जोड़ें लव कनेक्शन?(Relationship helpline)

Relationship Tips

हेल्दी रिलेशनशिप आपकी ज़िंदगी को बेहतर बनाता है… आपकी सेहत, दिलोदिमाग़ के लिए टॉनिक का काम करता है, लेकिन इसके लिए रिश्तों को हैंडल करने का तरीक़ा सीखना होगा. कहीं कुछ दुविधा हो तो मेरी सहेली की ये रिलेशनशिप हेल्पलाइन (Relationship helpline) आपकी मदद करेगी, जो ले आई है रिश्तों को बेहतर बनाने के ढेरों ईज़ी टिप्स.

Relationship helpline

न करें ये ग़लतियां

– रिश्ते में बंधते ही एक-दूसरे को बदलने की मुहिम न छेड़ दें. ये सोच बदल दें कि अब पार्टनर को आपके अनुसार ही चलना होगा. इससे मन-मुटाव बढ़ सकता है.

– अगर पार्टनर को थोड़ा बदलना चाहती भी हैं, जो उनके हित में हो, तो इसकी शुरुआत आलोचना से न करें. उन्हें प्यार से समझाएं. साथ ही एक ही रात में बदलाव की उम्मीद न करें.
– इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं होता. इसलिए अपने पार्टनर से भी परफेक्शन की उम्मीद न करें. ध्यान रखें कि दूसरों को उनकी कमियों के साथ स्वीकारना ही सच्चा प्यार है.
– रिश्ते में कम्युनिकेशन गैप न आने दें. रिश्तों में ख़ामोशी आप दोनों के रिश्ते के लिए ख़ामोश दुश्मन की तरह है. इसलिए हर हाल में कम्युनिकेशन बनाए रखें.
– ऐसे कई मुद्दे हो सकते हैं, जिस पर आप दोनों के विचार नहीं मिलेंगे. ऐसे मुद्दों पर अनावश्यक बहस करने या अपनी बात मनवाने की ज़िद करने से बचें. इससे रिश्ते में बेवजह स्ट्रेस बढ़ता है.
– समय की कमी का रोना न रोएं. अगर आपको लगता है कि आपके बिज़ी शेड्यूल की वजह से रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं, तो फ़ौरन कोई सोल्यूशन निकालें और रिश्ते को समय देने की कोशिश करें.
– हर बात पर टोकें नहीं, न ही मीनमेख निकालें. खाना अच्छा नहीं बना, तुम तो कोई काम ढंग से नहीं करते, चलते कैसे हो, खाते कैसे हो, मेरी कोई बात नहीं सुनते… हमेशा शिकायतें ही न करें. इससे रिश्तों में चिढ़ बढ़ती है.
– हर व़क्त मोबाइल, टीवी या सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ही बिज़ी न रहें, न फैमिली को अनदेखा करें. हर हाल में बैलेंस बनाए रखें, तभी रिश्तों में भी बैलेंस बना रहेगा.

जोड़ें लव कनेक्शन: कुछ ईज़ी टिप्स

– एक-दूसरे को कमियों-ख़ूबियों के साथ स्वीकार करें.
– ध्यान रखें कि आप जो भी समय साथ बिता रहे हैं, वो क्वांटिटी टाइम न हो, बल्कि क्वालिटी टाइम हो.
– रिश्तों के बीच ईगो न आने दें. इससे रिश्तों में दूरियां आते देर नहीं लगती.
– ज़िम्मेदारियां लेने से घबराएं नहीं और उन्हें पूरी ईमानदारी के साथ निभाएं. बेहतर होगा कि अपनी ज़िम्मेदारियां बांट लें. अगर एक ही पार्टनर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारियां होंगी, तो फ्रस्ट्रेशन बढ़ेगा और ये फ्रस्ट्रेशन रिश्ते में भी नज़र आएगा.
– शेयरिंग रिश्ते को मज़बूत बनाती है. अपनी भावनाएं, अपने आइडियाज़, विचार शेयर करें, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि शेयरिंग के नाम पर स़िर्फ शिकायतें ही करने न बैठ जाएं. इससे रिश्ते में कड़वाहट और खीझ बढ़ती है.
– छोटी-छोटी ख़ुशियां बांटना भी सीखें. ज़िंदगी के हर पल को एंजॉय करें. किसी बड़ी ख़ुशी के इंतज़ार में न बैठे रहें. ज़िंदगी की हर छोटी-बड़ी ख़ुशियों का लुत्फ़ उठाएं.
– पार्टनर की कोई बात अच्छी लगने पर उनकी तारीफ़ करें. उन्हें कॉम्प्लीमेंट देेंं.
– चाहे घर के छोटे-मोटे काम हों या बच्चों की पढ़ाई- हर काम में एक-दूसरे को कोऑपरेट करें, ख़ासकर वर्किंग कपल्स के लिए तो ये बेहद ज़रूरी है. इससे सामंजस्य बढ़ता है और आपसी रिश्ता मज़बूत होता है.
– नो सेक्स की स्थिति न आने दें. ये रिश्ते के लिए ख़तरनाक हो सकता है.
– पति-पत्नी के बीच भी शिष्टाचार ज़रूरी है. इसलिए बातचीत में हमेशा शिष्टाचार बनाए रखें.

लड़ाई-झगड़े को केयरफुली हैंडल करें

– छोटे-मोटे झगड़े और मतभेद तो हर पति-पत्नी में होते ही हैं, लेकिन ग़ुस्से में इतना आपा न खो दें कि आपके मुंह से बुरे शब्द निकल जाएं.
– लड़ाई-झगड़े या रूठने-मनाने को बात मनवाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल न करें. ध्यान रखें, पार्टनर को कंट्रोल करना प्यार नहीं है. ऐसा करने से आप दोनों में दूरियां ही बढ़ेंगी.
– हर बार पार्टनर से ही झुकने की अपेक्षा न करें. एक बार आप भी झुककर देखें. सारे झगड़े मिनटों में सुलझ जाएंगे.
– अगर ज़्यादा स्ट्रेस में हों, तो पार्टनर पर चिल्लाकर या उनसे झगड़कर स्ट्रेस रिलीज़ करने को आदत न बनाएं. अपना स्ट्रेस कम करने के लिए पार्टनर को स्ट्रेस देना किसी भी हाल में आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं.

हर फैसले साथ लें

– ये सच है कि शादी के बाद भी आपकी अपनी ज़िंदगी होती है, कुछ ़फैसले आपके अपने होते हैं, फिर भी ऐसे ़फैसले, जिसका असर दोनों पर पड़ता हो, उन्हें अकेले न लें.
– जैसे नौकरी बदलना, लोन लेना या किसी बड़ी चीज़ की ख़रीददारी- इनफैसलों में अपने पार्टनर को भी शामिल करें.
– इसी तरह बच्चे की पढ़ाई, शादी या परिवार से संबंधित फैसले भी मिलकर ही लें.
– अगर किसी फैसले में पार्टनर आपकी सलाह चाहता है और आप उस फैसले से सहमत न हों, तो उसे बहस का मुद्दा न बनाएं. ख़ुशी-ख़ुशी हर फैसले में शामिल हों.
– ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं. फाइनेंशियल या फैमिली प्रॉब्लम भी आ सकती है, ऐसी स्थितियों में एक
साथ मिलकर सोल्यूशन निकालने की कोशिश करें.
– सबसे ज़रूरी बात- लाइफ है तो प्रॉब्लम्स आएंगी ही, रिश्तों में भी और जीवन में भी. इन प्रॉब्लम्स का सोल्यूशन निकालने का तरीक़ा आपको सीखना होगा. और इसके लिए आप दोनों को टीम की तरह काम करना होगा यानी मिल-जुलकर सोल्यूशन निकालना होगा, तभी रिश्ता मज़बूत होगा.

रखें इन छोटी बातों का ख़्याल

– कॉम्प्रोमाइज़ करना भी सीखें. कई स्थितियों में सहनशीलता भी ज़रूरी होती है. इसलिए सहनशीलता न खोएं.
– पार्टनर की कुछ आदतों और ग़लतियों को अपनाना भी सीखें.
– हर हाल में पार्टनर पर विश्‍वास बनाए रखें. उसकी इच्छाओं का सम्मान करें.
– कोई भी पार्टनर ख़ुद को सुपीरियर बताने की कोशिश न करे.
– परिवार के प्रति ज़िम्मेदार बनें. हर वादे को दिल से निभाएं.
– पार्टनर के लक्ष्य को पूरा सपोर्ट करें. ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए उसे प्रोत्साहित करें.
– पार्टनर की फैमिली या फ्रेंड्स के प्रति उपेक्षित रवैया न अपनाएं. उन्हें उचित सम्मान दें.

– श्रेया तिवारी

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पारंपरिक रिश्तों के बदल रहे हैं मायने (Changing Culture of Relationship)

Changing Culture of Relationship

Changing Culture of Relationship
ग्लोबल हुई है सोचः यह सच है कि विकास और आधुनिकता की तीव्र लहर ने सबसे ज़्यादा असर अगर किसी पर डाला है, तो वे हैं हमारे आपसी रिश्ते (Changing Culture of Relationship). इंटरनेट, तकनीक, एक्सपोज़र और बढ़ती महत्वाकांक्षाएं- ये तमाम ऐसे पहलू हैं, जिन्होंने इंसान की सोच को बदलाव की ओर उन्मुख किया है. हर चीज़ एक क्लिक पर उपलब्ध होने के कारण दुनिया सिमट गई है.

बदलाव को खुले दिल से स्वीकारा जा रहा हैः रिश्तों के बीच जो एक समय में व्यापक दूरियां हुआ करती थीं, वे अब कम हो गई हैं और किसी-किसी रिश्ते (Changing Culture of Relationship) में तो ख़त्म ही हो गई हैं. सोच के ग्लोबल होने के साथ-साथ पति-पत्नी, भाई-बहन, सास-बहू, ससुर-बहू, मां-बेटी, पिता-पुत्र/पुत्री- कहने का अर्थ यह है कि हर तरह के पारंपरिक रिश्तों में एक बदलाव आया है, जिसे हम सबने खुले दिल से स्वीकारा भी है.
पिता-पुत्र/पुत्री का रिश्ता: एक ज़माना था जब बच्चों के लिए पिता किसी तानाशाह से कम नहीं होते थे. बच्चों कोकोई बात अपने पिता तक पहुंचानी होती थी, तो वे मां के माध्यम से पहुंचाते थे. सुखद बात तो यह है कि इस रिश्ते में एक बहुत ही प्यारा बदलाव देखने को मिल रहा है. बच्चे अपने पिता से अब दूरी बनाकर नहीं चलते. उनके बीच अब एक मित्रवत् व्यवहार कायम हो गया है. वे अपनी हर बात पिता से शेयर करने लगे हैं. इस रिश्ते में अब हंसी-मज़ाक भी होता है और रूठना-मनाना भी. इस रिश्ते में अब डर की जगह एक बेबाकी और प्यार ने ले ली है.

सास-बहू का रिश्ता: यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसे लेकर सबसे ज़्यादा डर और अनिश्‍चितता बनी रहती थी. बहू को सास के नाम से डर लगता था और सास को बहू के अस्तित्व से, पर अब न तो टिपिकल सास का ज़माना रहा है और न ही सास के दबदबे को चुनौती देनेवाली बहू का. शिक्षित और वर्किंग सास न स़िर्फ अब बहू को अपनी तरह से जीने की आज़ादी देती है, बल्कि उसके साथ हर तरह से एडजस्ट करने की कोशिश भी करती है. वह उसकी इच्छाओं को समझती है और उसे मनचाहा करने के लिए बढ़ावा भी देती है. इसी तरह बहू का व्यवहार भी सास के प्रति बदल गया है. वह उसे मां की तरह सम्मान भी देती है और एक दोस्त का दर्जा भी. दोनों के रिश्ते में जो खुलापन इस समय देखने को मिल रहा है, वह सराहनीय है.

पति-पत्नी का रिश्ता: जीवन के इस सबसे महत्वपूर्ण रिश्ते (Changing Culture of Relationship) में जो बदलाव आया है, उसने तो वैैवाहिक समीकरणों को भी परिवर्तित कर दिया है. पति अब पत्नी को डॉमीनेट नहीं करता, न ही उसे अपने से कमतर समझता है. पहले माना जाता था कि घर के दायित्वों को पूरा करना पत्नी का काम है. अब पति घर के कामों में तो पत्नी को सहयोग देता ही है, साथ ही बेबी सिटिंग भी करता है. बच्चा बीमार हो, तो ज़रूरत के हिसाब से वह छुट्टी लेता है और पत्नी काम पर जाती है. आपसी रिश्तों में अब पहले की तरह घुटन नहीं रही है, बल्कि दोनों एक-दूसरे को स्पेस देते हैं. पति अपनी पत्नी के काम से जुड़ी कमिटमेंट्स को समझता है और उसे बात-बात पर टोकता भी नहीं है. पति-पत्नी अब दोस्तों की तरह व्यवहार करने लगे हैं.

भाई-बहन का रिश्ता: हालांकि इस रिश्ते में सदा ही एक मधुरता रही है, फिर भी बहनें भाई से डरा करती थीं, लेकिन इस रिश्ते (Changing Culture of Relationship) में भी अब मित्रता ने जगह ले ली है. वे एक-दूसरे के साथ अपनी बातें शेयर करते हैं और समस्या का हल भी मिलकर ढूंढ़ते हैं. बहन भी अब इतनी सक्षम हो गई है कि वह अपने भाई की रक्षा कर सके, उसे गाइड कर सके और वह ऐसा करती भी है.

दोस्ती का रिश्ता: दोस्ती के रिश्ते में अब व्यापक परिवर्तन आ गया है. केवल पुरुष-पुरुष ही नहीं, स्त्री-पुरुष की दोस्ती में भी परिवर्तन आया है. चैटिंग, पार्टी और साथ घूमना आम बात हो गई है. इस खुलेपन की वजह से, जहां संकीर्णता पर उन्होंने प्रहार किया है, वहीं दूसरी ओर इन रिश्तों के बीच व्याप्त हिचक टूटने से बहुत सारी परेशानियां भी कम हुई हैं. वे एक-दूसरे के मददगार साबित हो रहे हैं.

बदलाव का अन्य पहलू भी हैतमाम पारंपरिक रिश्तों में आए बदलाव का प्रभाव पॉ़ज़िटिव ही हुआ है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है. इस बदलाव के कई अन्य पहलू भी हैं.

  • रिश्तों में आए खुलेपन ने सीमाएं तोड़ने को विवश किया है, जिससे मर्यादाएं आहत हुई हैं.
  • हमारी संवेदनशीलता में कमी आई है, जिसकी वजह से लोग एक-दूसरे को फॉर ग्रांटेड लेने लगे हैं.
  • सहज होना अच्छा है, पर इतना नहीं कि उससे दूसरे की भावनाएं आहत हों.
  • रिश्ता चाहे जो हो, वह अत्यधिक नाज़ुक और संवेदनशील होता है. केवल निभाना ही नहीं, उसे संभालना भी आवश्यक है.
  • दिल की बात खुलकर कहें, पर रिश्तों में ऐसा खुलापन न आए, जो अश्‍लीलता या बेशर्मी की झलक दिखाए.
  • हालांकि बदलते परिवेश में रिश्तों के मायने बदले अवश्य हैं, पर रिश्तों की अहमियत पहले जितनी ही है.
  • हर स्थिति में अपने रिश्ते को सदाबहार रखने का एक ही मंत्र है, हर रिश्ते को समुचित आदर देना.

– सुमन बाजपेयी

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