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कभी देर रात आने पर ऑफिस में काम का बहाना, तो संडे के दिन भी घर से मीटिंग के नाम पर निकलने जैसे न जाने कितने झूठ (Reasons why men lie) शायद आपके पार्टनर भी आपसे कहते होंगे, लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि वो ऐसा क्यों करते हैं? अब कोई बेवजह तो झूठ बोलेगा नहीं. आमतौर पर पुरुषों के झूठ बोलने की क्या हैं वजहें?

Reasons why men lie

पत्नी को इंप्रेस करने के लिए

हर बार पुरुष स़िर्फ अपनी ग़लती छुपाने के लिए ही झूठ बोलें ये ज़रूरी नहीं है. कई बार वो अपनी प्यारी पत्नी को इंप्रेस करने या उसे ख़ुश करने के लिए भी झूठ बोलते हैं. राहुल कहते हैं, ङ्गङ्घकई बार पत्नी से वादा करने के बाद भी जब घर पहुंचने में देर हो जाती है, तो जाते ही मैं सबसे पहले बड़े रोमांटिक अंदाज़ में उसकी तारीफ़ करने लगता हूं, भले ही वो उस व़क्त अच्छी न लग रही हो, मगर उसे ख़ुश करने के लिए झूठ बोलने में मुझे कोई हर्ज़ नहीं.फफ वैसे पुरुष स़िर्फ पत्नी से ही झूठ बोलते हैं, ऐसा नहीं है. कई बार अपनी महिला साथी या कलीग को इंप्रेस करने के लिए भी वो झूठ का सहारा लेते हैं.

 

ताकि पत्नी बुरा न मान जाए

कई पुरुष ख़ुद को बहुत रफ एंड टफ दिखाते हैं, मगर दिल से अपनी हमसफ़र की बहुत केयर करते हैं. ऐसे में जब कभी उन्हें ऐसा लगता है कि उनके किसी सच से पत्नी आहत हो जाएगी, तो सच की बजाय वो झूठ बोलना बेहतर समझते हैं, क्योंकि इनके लिए पत्नी की ख़ुशी ज़्यादा मायने रखती है, सच या झूठ नहीं.

 

अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए

पुरुषों को ये बात कतई बर्दाश्त नहीं होती कि कोई उनका ईगो हर्ट करे. उनके लिए उनका ईगो सबसे पहले आता है, जिसके लिए वो झूठ बोलने से भी परहेज़ नहीं करते. अभिनव को बहुत दिनों से बार-बार एक लड़की का कॉल आता था, वो उससे फोन पर लंबी बातें भी किया करता था, मगर जब पत्नी इस बारे में कुछ कहती, तो बोलता, ङ्गअरे, मैं तो कुछ नहीं कहता, वही पीछे पड़ी हुई है.फ जबकि सच तो ये है कि अभिनव अपनी उस कलीग को पिछले काफ़ी समय से मूवी/डिनर पर साथ चलने के लिए मस्का लगा रहा है, मगर वो मान नहीं रही. अब भला कोई लड़की इनकार करे, तो उनका मेल ईगो तो हर्ट होगा ही ना!

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शांति बनाए रखने के लिए

कई बार घर की शांति बनाए रखने के लिए भी जनाब को झूठ का सहारा लेना पड़ता है. मसलन, पत्नी के मायकेवाले या दोस्तों से जुड़ी कोई सच्चाई जिससे पत्नी को बुरा लगे, उन्होंने कह दी, तो उस दिन घर में पूरे दिन महाभारत होना तय है. ऐसे में वो कड़वे सच की बजाय मीठा झूठ बोलकर घर की शांति बनाए रखने की कोशिश करते हैं.

 

ज़रूरी नहीं समझते हर बात बताना

कुछ पुरुष ऐसे भी हैं, जो पत्नी को हर बात बताना ज़रूरी नहीं समझते. कभी फायनांस तो कभी नौकरी से संबंधित मामलों में यदि पत्नी कुछ पूछती है, तो वो उससे सच छुपा जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ये चीज़ें पत्नी को बताना ज़रूरी नहीं है या फिर उसे ये समझ नहीं आएगा, इसलिए कुछ झूठ बोलकर उसे टाल देते हैं.

 

नहीं होता पत्नी पर विश्‍वास

अधिकांश पुरुषों को महिलाओं पर विश्‍वास नहीं होता है. उन्हें लगता है कि महिलाओं के पेट में कोई बात नहीं पचती, इसलिए कई बार सीक्रेट रखी जानेवाली कई बातें वो पत्नी को नहीं बताते या उस बारे में झूठ बोल देते हैं. इसके अलावा पुरुष अपने पास्ट यानी बीते हुए कल से जुड़ी बातों के बारे में भी झूठ बोलते हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि यदि पत्नी को उनकी किसी एक्स के बारे में पता चलेगा, तो उनका जीना मुश्किल हो जाएगा.

 

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– कंचन सिंह

हर साल 1 दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस (World Aids Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना, एड्स पीड़ित लोगों के लिए फंड जुटाना और इससे जुड़े मिथ्स को दूर कर इस बीमारी के प्रति लोगों को एजुकेट करना है.

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एड्स क्या है?
– एड्स बीमारी एचआईवी वायरस से होती है.
– यह वायरस इंसान के इम्यून सिस्टम को कमज़ोर कर देता है.
– एचआईवी पाज़िटिच प्रेग्नेंट स्त्री से उसके बच्चे, असुरक्षित सेक्स और इंफेक्टेड इंजेक्शन के यूज़ से होता है.
कारण
– इसका मुख्य कारण है एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति से अनसेफ सेक्स.
– इश्रेेव ढीरपीर्षीीळेप यानी एचआईवी से संक्रमित रक्त चढाए जाने पर
– एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सुई का इस्तेमाल करने पर.
– एचआईवी पीड़ित गर्भवती महिला के शिशु को भी इसके इंफेक्शन का ख़तरा रहता है.
– इसके अलावा ब्लड या शरीर के अन्य फ्लूइड जैसे वीर्य के दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने पर, एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के ब्लड, उस्तरा या टूथ ब्रश के इस्तेमाल से भी इसका ख़तरा रहता है.

 

एड्स के लक्षण
शुरुआत में वैसे एड्स के कोई ख़ास लक्षण नहीं दिखते. हां, दूसरी बीमारियों में होनेवाले लक्षण इसमें ज़रूर दिखते हैं, आमतौर पर टर्मिनल स्टेज में इसके लक्षण कमज़ोरी के रूप में नज़र आने लगते हैं.
– मरीज़ का वज़न घट जाता है.
– एक मीने से ज़्यादा समय तक उसे डायरिया रहती है.
– मरीज़ को लगातार बुख़ार बना रहता है.
– रोगी को लगातार खांसी रहती है.
– वह सिरदर्द से भी परेशान रहता है.
– स्किन इंफेक्शन भी हो जाता है.
– हरपीज, ग्लैंड्स वृद्धि व दस्त शिकायत होती है
– मरीज़ के गले की ग्रंथियों में सूजन आ जाती है.
– मुंह में खुजली होती रहती है.
– रात में सोते समय बहुत ज़्यादा पसीना आने लगता है.
हालांकि ये सभी लक्षण दूरी बीमारियों में भी नज़र आते हैं, इसलिए अलर्ट रहना चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से हर ऐंगल से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करवा लेनी चाहिए.
उपचार
इसके लिए सबसे पहले ज़रूरी है सारे टेस्ट्स करवाना
एड्स से संबंधित टेस्ट्स
– एलीसा टेस्ट
– वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
– एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन(पीसीआर)
– सीडी-4 काउंट
कैसे करते हैं उपचार
इसके उपचार के लिए कई दवाओं को इस्तेमाल किया जाता है. एचआईवी के उपचार का मुख्य उद्देश्य एड्स के विषाणु को ख़त्म करना, इम्युन सिस्टम को मज़बूत करना और लोगों के मन को डर को दूर करना होता है.

 

कैसे करें बचाव
फिर भी उपचार से बेहतर है सावधानी बरतें.
– अपने पार्टनर के प्रति वफादार रहें.
– एक से अधिक पार्टनर के साथ सेक्स संबंध न रखें.
– अनसेफ सेक्स से बचें.
– हॉस्पिटल में हमेशा नई सीरिंज इस्तेमाल करने को कहें.
– बाहर शेविंग आदि करवाने से बचें. अगर बाहर शेव करा ही रहे हैं, तो नए ब्लेड का इस्तंमाल करने को कहें.
– अगर ब्लड चढवाने की ज़रूरत हो तो पहले कंफर्म कर लें कि जो ब्लड आपको चढाया जा रहा है, वो इंफेक्टेड न हो.
ये सिर्फ मिथक हैं, न करें इन पर यक़ीन
– एड्स के संक्रमण को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी हैं. इन पर विश्‍वास न करें.
– एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति को छूने, गले लगने या हाथ मिलाने से संक्रमण नहीं होता.
– एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना खाने या उनके साथ रहने से.
– छींकने या खांसने से.
– मच्छर के काटने से.
– आंसू या थूक से भी एड्स फैलने के ख़तरे का कोई प्रमाण नहीं मिला है.

 

क्या एड्स हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा?
कल्पना कीजिए, दुनिया में एड्स बीमारी ही न हो. यानी धरती पर कोई भी व्यक्ति एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव से पीड़ित न हो. जी हां, अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में एड्स के उन्मूलन के लिए गेटिंग टू जीरो अभियान शुरू किया गया है और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में ये मिशन चलाया जाएगा.
चूंकि एचआईवी पॉज़िटिव अथवा एड्स जेनेटिक बीमारी नहीं है, इसलिए अगर इस बीमारी का इनफेक्शन पूरी तरह रुक जाए यानी कोई नया व्यक्ति इससे इनफेक्टेड न हो तो 25-30 साल बाद दुनिया में एड्स का नामोनिशान भी नहीं रह जाएगा.

 

एड्स के मरीज़ों के लिए सरकार की पहल
एड्स के बारे में लोगों के मन में ग़लत धारणाएं होती हैं. इसका बड़ा दुष्प्रभाव यह होता है कि समाज एड्स मरीज़ों को भय की नज़र से देखता है. वैसे भी यौन विषयों पर बातचीत भारतीय समाज में वर्जित है. ऐसे में यौन संक्रमण से फैलनेवाली इस बीमारी के प्रति भी लोगों का नकारात्मक रुख होता है. इस भयावह स्थिति से निपटने का महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक बदलाव लाना था, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने एचआईवी-एड्स संशोधन बिल-2014 को मंजूरी दी है.
कह सकते हैं कि जो लोग, संगठन या अस्पताल अब तक एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव मरीज़ों को हेय दृष्टि से देखते या उनके साथ पक्षपात या उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करते रहे हैं, उनकी शामत आने वाली है. ऐसा करनै वाले व्यक्ति को अब तीन महीने से लेकर दो साल तक की जेल की सज़ा सुनिश्चित करने के लिए क़ानून बन रहा है. कहने का मतलब देर से ही सही समाज में उपेक्षित तब़के को सरकार का साथ मिल ही गया.
दरअसल, जब किसी को पता चलता है कि अमुक व्यक्ति एचआईवी पॉज़िटिव या एड्स से पीड़ित है, तब उसके प्रति हर किसी की धारणा ही बदल जाती है. लोग हर कोई उस व्यक्ति को हेय दृष्टि से देखने लगता है. इस पक्षपात और उपेक्षा का ख़ौफ़ इस कदर है कि कई लोग यह पता चलने पर कि उन्हें एड्स हो गया है, मौत का वरण कर लेते हैं. बहरहाल, एचआईवी-एड्स मरीज़ों को सरकार का संबल मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन बदनसीब लोगों के प्रति ,माज की धारणा बदलेगी, क्योंकि सरकार की ओर से एड्स या एचआईवी पॉज़िटिव के मरीज़ों के साथ भेदभाव करने वाले पर सख़्त सज़ा और ज़ुर्माने का प्रावधान किया गया है.
संसद में पेश किए जाने वाले बिल के मुताबिक, एचआइवी से संक्रमित लोगों की सूचना का रिकॉर्ड रखने वाले संस्थानों को डेटा सुरक्षा संबंधी क़दम उठाने होंगे. 18 वर्ष से कम आयु के एचआइवी संक्रमित या पीड़ित मरीज़ को शेयरिंग होम में रहने और घर की सुविधाओं का अधिकार है. बिल में एड्स मरीज़ों और उनके साथ रहने वाले के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने की वकालत करने या उनसे संबंधित सूचना प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.
विधेयक में बच्चों और नाबालिग एड्स संक्रमितों को भी संरक्षण मुहैया देने की कोशिश की पूरी कोशिश की गई है. एचआईवी-एड्स मरीजों को संपत्ति रखने का अधिकार होगा और 18 वर्ष से कम उम्र के मरीज़ों को अपने घर में रहने का समान अधिकार होगा. नौकरी पाने और शैक्षणिक संस्थानों में मरीज़ को अपनी बीमारी के बारे में बताना ज़रूरी नहीं होगा. अगर मरीज़ जानकारी देता भी है तो उसका नाम सार्वजनिक करने वाले के लिएसज़ा और जुर्माना के प्रावधान है.