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यूं रीस्टार्ट करें अपनी डिजिटल लाइफ (Restart Your Digital Life Now)

हमारी वर्क लाइफ (Work Life) हो या पर्सनल लाइफ (Personal Life) सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है. रोज़ नए-नए ऐप्स हमें बहुत कुछ सिखाने के लिए आतुर रहते हैं. हमारी डिजिटल लाइफ दिन-ब-दिन एडवांस होती जा रही है, तो क्यों न इस साल बची-खुची कसर भी पूरी कर दें और नए साल में अपनी डिजिटल लाइफ (Digital Life) को रीस्टार्ट करके ख़ुद को दें बेस्ट न्यू ईयर गिफ्ट. 

Digital Life

रीस्टार्ट करें डिजिटल लाइफ

अभी कुछ दिन पहले ही एक बहुत सुंदर-सी पंक्ति पढ़ी, जिसमें लिखा था- ‘सेल्फी ने झूठा ही सही, मगर लोगों को मुस्कुराना सिखा दिया.’ पढ़कर लगा भले ही हम डिजिटल लाइफ को कुछ भी कहें, पर आज यह हमारी पहचान बन चुकी है.

–   ऑनलाइन दुनिया में हमारा अपना एक डिजिटल आईडी कार्ड है ये डिजिटल लाइफ. फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर, स्नैप चैट जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हमारी डिजिटल लाइफ की झलक देखने को मिलती है.

–     कभी ख़ुशी-कभी ग़म, कभी नखरे, कभी जलन, कभी भावुक होना, तो कभी ग़ुस्सा करना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमारी डिजिटल लाइफ कई रंगों से गुज़रती है. भले ही सोशल मीडिया पर बहुत कुछ बनावटी होता है, पर हमारी असल ज़िंदगी की एक झलक तो सभी को मिल ही जाती है.

चेहरे पर मुस्कान लाती है डिजिटल लाइफ

ज़रा सोचिए आजकल हमारे चेहरे पर मुस्कान कब आती है-

–     जब कोई अपना हमें व्हाट्सऐप पर याद करता है.

–     जब कोई दोस्त फेसबुक की फोटो पर ईमोजी या कमेंट शेयर करता है.

–    कोई रिश्तेदार अपनी बहुत पुरानी फोटो शेयर करता है, जिसमें हम भी हों.

–    कोई आपके स्टेटस की तारीफ़ करता है.

–     कोई वीडियो कॉल करके कुछ स्पेशल शेयर करता है.

हमारी डिजिटल लाइफ ने हमें एक नया जहां दे दिया है, जहां लोग अपनी लाइफ को उस नज़रिए से सबके सामने रखते हैं, जैसा वो दिखना चाहते हैं. अपनी हसरतों को सबके सामने रखने का प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया ने ही तो दिया है. इस डिजिटल लाइफ को नए साल में यूं रीस्टार्ट करें.

अपलोड करें फ्रेशनेस

–     एक और नया साल अपने साथ कई नए मौ़के लेकर आया है, तो इस बार इन्हें अपने हाथ से न जाने दें. फेसबुक पर अपने बचपन या स्कूल के दिनों के पुराने दोस्तों को ढूंढ़ें. नए साल में पुराने दोस्तों का साथ आपकी डिजिटल लाइफ में नई फ्रेशनेस भर देगा.

–    अब तक आप सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बहुत कम शेयर करते थे, जैसे- महीने में एक बार प्रोफाइल पिक्चर चेंज करना, सालों तक एक ही कवर लगाए रखना आदि, शुरुआत यहीं से करें.

–    बीच-बीच में कभी कुछ स्टेटस डाल दें. कभी कोई बात, कभी कोई फोटो हमें बहुत अच्छी लगती है. उसे दूसरों के साथ शेयर करेंगे, तो उसके रिएक्शन हमें अलग ही ख़ुशी देते हैं.

–     नई-नई कम्यूनिटीज़ से जुड़ें, ताकि आपको कुछ नया जानने को मिले.

–     अपनी हॉबी से जुड़े पेजेज़ को लाइक और फॉलो करें, ताकि हर दिन आप अपनी हॉबी से जुड़े रहें.

–    अगर आपको लगता है कि कई सालों से आपका एक ही पासवर्ड है, जो दूसरों को भी पता है, तो नए साल में उसे भी नया कर दें. यह आपकी डिजिटल सेफ्टी के लिए भी बहुत ज़रूरी है.

डिजिटल कचरा साफ़ करें

–     फेसबुक के ऐसे दोस्तों को ब्लॉक कर दें, जिनकी पोस्ट आपको अच्छा फील नहीं कराती.

–     थोड़ा समय निकालकर अपनी फ्रेंड्स लिस्ट देखें और ग़ैरज़रूरी दोस्तों को लिस्ट से छांट दें. थोड़ा डिजिटल कचरा आपकी लाइफ से साफ़ हो जाएगा.

–    ऐसे कुछ लोग होते हैं, जिन्हें हम कॉमन फ्रेंड के ज़रिए जानते हैं और वो अक्सर अपनी फोटो डालकर भी 20 लोगों को टैग कर देते हैं. ऐसे लोगों से दूरी ही अच्छी.

–     व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर न जाने कैसे-कैसे फोटोज़ और वीडियोज़ आते रहते हैं, इसलिए ऐप में जाकर ऑटो डाउनलोड बंद कर दें, ताकि उन्हें बैठकर डिलीट न करना पड़े.

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Digital Life
अपडेट करें स्टाइल और ट्रेंड

–     इस साल अपनी डिजिटल लाइफ को थोड़ा अलग बनाएं. पुराने और बोरिंग स्टाइल को कहें बाय-बाय.

–   डिजिटल लाइफ के प्रोफाइल से लेकर अपने पर्सनल प्रोफाइल तक में कुछ नया करें.

–     नया साल आपके लिए एक नया मौक़ा लेकर आया है, लीक से हटकर कुछ अलग करने के लिए. रोज़मर्रा के अपने बोरिंग रूटीन को बदलने के लिए.

–     नए साल में नए-नए गैजेट्स और स्मार्टफोन्स भी आपको लुभाएंगे, तो अपने स्मार्टफोन को अपडेट करने का समय भी आ गया है.

–     जो कुछ भी करें, यह याद रखें कि आपको अपनी लाइफ को बेहतरीन बनाना है.

रीचार्ज करें पर्सनल लाइफ

हमारी डिजिटल लाइफ सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं है. हमारी पर्सनल और वर्क लाइफ में भी यह काफ़ी मायने रखती है.

–     इस धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसे यह पता हो कि वो ईश्‍वर से कितने सालों का रीचार्ज करवा के आया है, पर इतना यक़ीन है कि यह अनलिमिटेड नहीं है. तो हर पल ख़ुश रहें और अपनों को भी ख़ुश रखें, क्योंकि ख़ुशियां ही आपकी ज़िंदगी को रीचार्ज करती हैं.

–    हेल्थ और फिटनेस सबसे ज़रूरी है, इसलिए एक अच्छा-सा फिटनेस ऐप डाउनलोड करें. योग व एक्सरसाइज़ न स़िर्फ आपकी सेहत को रीचार्ज करेंगे, बल्कि आपकी डिजिटल लाइफ भी अपडेट हो जाएगी.

–     लाइफ को रीचार्ज करने का बेस्ट तरीक़ा है, ऐसे लोगों के साथ रहें, जो आपसे प्यार करते हैं और इसके लिए व्हाट्सऐप से बेहतर क्या हो सकता है.

–    व्हाट्सऐप की मदद से आप अपनों से 24 घंटे जुड़े रहते हैं. दिल में जो आया शेयर कर दिया, आपके अपनों के लिए इससे अच्छा क्या होगा कि आप उनसे 24ु7 जुड़े रहेंगे.

–    हर रोज़ कुछ नया सीखने की कोशिश करें. आप चाहें, तो कुछ ऐप्स डाउनलोड करें और उनके नोटिफिकेशन आपको हर रोज़ कुछ न कुछ नया सिखाएंगे. यूट्यूब और पिनट्रेस्ट पर भी आपको बहुत कुछ रोज़ाना सीखने को मिलेगा.

–     गेम्स आपकी क्रिएटिविटी और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाते हैं. इसलिए नए साल में कुछ ऐसे डिजिटल और आउटडोर गेम्स को अपनी लाइफ में शामिल करें, जो डीस्ट्रेस करने के साथ-साथ आपके माइंड को शार्प भी बनाएंगे.

–     डायटिंग कर रहे हैं, तो ऐसा ऐप डाउनलोड करें, जो आपको बता सके कि आपने कितनी कैलोरीज़ खाई. इससे आप सचेत हो जाएंगे.

–    पढ़ने के शौक़ीन हैं, तो बुक्स के बहुत से ऐप्स ऑनलाइन मौजूद हैं. बस, उन्हें डाउनलोड करें और अपनी मनपसंद कहानियों व उपन्यास में खो जाएं.

–     कोई बिरला ही होगा, जिसे म्यूज़िक का शौक़ न हो. नए साल में अपने मनपसंद गानों का मज़ा लेना चाहते हैं, तो कोई म्यूज़िक ऐप डाउनलोड करें.

अपग्रेड करें वर्क लाइफ

–     बिज़नेस प्लान बनाना हो या लेटेस्ट प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने के लिए भी आइडियाज़ की ज़रूरत हो, डिजिटल वर्ल्ड में ये चीज़ें चुटकी बजाते हो जाती हैं.

–     ऑफिस के काम को मैनेज करने के लिए आपका स्मार्टफोन आपकी काफ़ी मदद कर सकता है. दरअसल, आप अपनी फील्ड से संबंधित ज़रूरी ऐप्स डाउनलोड करके भी अपनी वर्क लाइफ को अपग्रेड कर सकते हैं.

– संतारा सिंह

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पैरेंट्स की 5 ग़लतियां

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बदलती लाइफस्टाइल में बड़ों के साथ ही बच्चे भी तनावग्रस्त होते जा रहे हैं. पढ़ाई की टेंशन और पीयर प्रेशर के साथ ही बच्चों के तनाव का एक कारण पैरेंट्स का प्रेशर भी होता है. बच्चे को ख़ुश और स्ट्रेस फ्री रखने के लिए पैरेंट्स को किन ग़लतियों से बचना चाहिए? बता रही हैं कंचन सिंह.

जरा याद कीजिए अपना बचपन, 4-5 साल की उम्र में आप क्या करते थे? पड़ोस/गली के बच्चों के साथ धमा-चौकड़ी मचाते होंगे, शायद ही आपके माता-पिता छड़ी लेकर होमवर्क करवाने के लिए आपके सिर पर खड़े रहते होंगे… अल्फाबेट्स और पोएम के बारे में भी शायद ही आपको कुछ पता होगा… मगर आजकल के बच्चों को वो सुकून नसीब नहीं है. डेढ़-दो साल की उम्र से ही प्ले स्कूल, फिर नर्सरी, केजी यानी पढ़ाई का सिलसिला शुरू हो जाता है. इतना ही नहीं, इसी उम्र से बाकी बच्चों से बेहतर करने के लिए पैरेंट्स भी उन पर दबाव डालना शुरू कर देते हैं. यदि आप भी ऐसा करते हैं, तो अब ख़ुद को थोड़ा बदलिए और फ़र्क़ देखिए.

मिस्टेक 1- आजकल के पैरेंट्स की सबसे बड़ी ग़लती है बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम न बिताना. कई घरों में तो डिनर टेबल पर भी बच्चे पैरेंट्स के साथ नहीं बैठते, क्योंकि उस व़क्त वो किसी और काम में बिज़ी रहते हैं. ऐसे में माता-पिता को पता ही नहीं चलता कि उनके बच्चे की ज़िंदगी में क्या चल रहा है.
क्या करें? बड़े शहरों व मेट्रो सिटीज़ में कामकाजी होने के चलते पैरेंट्स के पास बच्चों के लिए ज़्यादा व़क्त नहीं रहता. ऐसे में कम से कम डिनर साथ में करने की आदत डालें ताकि खाना खाते समय ही सही, पर आप बच्चे के साथ हों और उससे बातचीत कर सकें. आप बच्चे से जितना ज़्यादा बात करेंगे आपका रिश्ता उतना ही मज़बूत बनेगा और कोई समस्या होने पर बच्चा बेझिझक आपसे बोल सकेगा.

मिस्टेक 2- एग्ज़ाम में अच्छे मार्क्स लाने पर गिफ्ट के रूप में अधिकतर पैरेंट्स बच्चों को मोबाइल, आइपैड या उसकी कोई भी पसंदीदा चीज़ दे देते हैं. ये सुनने में भले ही अच्छा लगे, मगर पैरेंट्स का ये तरीक़ा सही नहीं है. ज़्यादातर पैरेंट्स स़िर्फ मार्क्स देखते हैं, कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चे ने तो अपनी तरफ़ से पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई की, मगर अच्छे नंबर नहीं आए. ज़रा सोचिए, ऐेसे में आपके लाड़ले/लाड़ली के दिल पर क्या बीतेगी.
क्या करें? बच्चे ने जो हासिल किया उसके लिए उपहार देने की बजाय लक्ष्य को पाने के लिए उसके द्वारा की गई मेहनत की तारीफ़ करें और उसका हौसला बढ़ाएं. भले ही वो अपने लक्ष्य में सौ फीसदी सफल न रहा हो, मगर उसने अपनी तरफ़ से कोशिश तो की. अतः अगली बार उसे उसकी कोशिश के लिए इनाम दें, न कि रिज़ल्ट के लिए.

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मिस्टेक 3- अक्सर पैरेंट्स अपने बच्चे की तुलना उसके दोस्तों या भाई-बहन से करते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वो बच्चे को बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, मगर इसका उल्टा असर होता है. बार-बार ऐसा करने पर बच्चे को लगता है कि उसकी कोई अहमियत नहीं है और वो ख़ुद को अयोग्य समझने लगता है.
क्या करें? हर बच्चा अलग होता है और हर किसी की अपनी क्षमता/योग्यता होती है. पैरेंट्स होने के नाते आपको उसकी क्षमताओं का ध्यान रखते हुए उसे प्रोत्साहित करना चाहिए. साथ ही उसे इस बात का भी एहसास कराएं कि वो जैसा भी है. आपके लिए सबसे ख़ास है. दूसरों से उसकी तुलना करने की आदत छोड़ दीजिए.

मिस्टेक 4- घर और ऑफिस के काम के बाद आप भी थोड़ा रिलैक्स होकर ख़ुद को रिचार्ज करते होंगे यानी अपना कोई पसंदीदा काम, जैसे- म्यूज़िक सुनना, गेम खेलना, बुक पढ़ना आदि. इससे आप फ्रेश महसूस करते हैं और दोबारा नई ऊर्जा के साथ काम कर पाते हैं. इसी तरह बच्चों को भी ख़ुद को रिचार्ज करने के लिए थोड़ा खाली समय चाहिए, जिसमें स्कूल/ट्यूशन के होमवर्क से अलग वो अपना मनपसंद काम कर सकें. वैसे आजकल के बच्चों के पास समय की बहुत कमी है, क्योंकि स्कूल/ट्यूशन से आने के बाद वो अपने गैजेट्स में बिज़ी हो जाते हैं. अतः पैरेंट्स को हमेशा बच्चे के पीछे नहीं पड़ना चाहिए.
क्या करें? हर पैरेंट्स की ये ज़िम्मेदारी है कि बच्चे की बाकी ज़रूरतों का ध्यान रखने के साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि उनके लाड़ले/लाड़ली को हर रोज़ थोड़ा समय उनके मनमुताबिक काम के लिए भी मिलना चाहिए. इस खाली समय में वो चाहें तो बाहर खेलने जाएं, म्यूज़िक सुनें या फिर दोस्तों के साथ टाइम पास करें. यदि आपको लगे कि बच्चा तनाव की वजह से ठीक से सो नहीं पा रहा है, तो सोने के क़रीब एक घंटे पहले से ही उसे मोबाइल, लैपटॉप, आइपैड आदि से दूर रहने को कहें. गैजेट्स के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों की नींद और सेहत प्रभावित होती है, ये बात कई रिसर्च से भी साबित हो चुकी है.

मिस्टेक 5- एग्ज़ाम पीरियड में बच्चों का तनावग्रस्त होना आम बात है, मगर तनाव का असर यदि उनके व्यवहार पर बहुत ज़्यादा और लंबे समय तक दिखने लगे, तो इसका मतलब है कि आपका बच्चा उस सिच्युएशन से अच्छी तरह डील नहीं कर पा रहा है. स्ट्रेस के कारण बच्चे बहुत थके हुए दिखते हैं, खाना नहीं खाते, उदास और रोने जैसी शक्ल बनाए रहते हैं. साथ ही उन्हें सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है. अतः पैरेंट्स को इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करने की ग़लती नहीं करनी चाहिए.
क्या करें? बच्चे को समझाएं कि एग्ज़ाम उनकी ज़िंदगी का एक हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं. यदि वो अच्छे ग्रेड नहीं ला पाते, तो इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. अगली बार वो फिर कोशिश कर सकते हैं या उनके पास और भी विकल्प रहेंगे. अतः एग्ज़ाम की तैयारी रिलैक्स होकर करें, तनाव लेकर नहीं. यदि समस्या ज़्यादा गंभीर लगे तो काउंसलर की मदद लें.