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ब्रेकअप का पुरुषों पर क्या होता है असर? (How Men Deal With Breakups)

दिल के रिश्ते का हर एहसास ख़ास होता है… दिल मिलने पर जितनी ख़ुशी होती है, दिल टूटने पर दर्द भी उतना ही ज़्यादा होता है… कहते हैं, पुरुष अपने दिल का दर्द ज़ाहिर नहीं करते… तो फिर दिल टूटने का पुरुषों पर क्या होता है असर?

How Men Deal With Breakups

ब्रेकअप का पुरुषों पर ये होता है असर
ब्रेकअप का अलग-अलग पुरुषों पर अलग असर होता है. ब्रेकअप का दर्द शायद सभी पुरुषों को एक-सा हो, लेकिन इस दर्द से उबरने के लिए हर पुरुष अपना अलग तरीका खोज निकालता है. आमतौर पर ब्रेकअप का पुरुषों पर ये असर होता है:

1) ख़ुद को नशे में डुबो देना
ब्रेकअप के बाद अक्सर कई पुरुष अपना दर्द और अपने एक्स को भुलाने के लिए बहुत ज़्यादा सिगरेट-शराब पीने लगते हैं. इसका असर उनकी पर्सनल, प्रोफेशनल और सोशल लाइफ पर भी पड़ने लगता है. ज़्यादा शराब पीकर कई पुरुष दूसरों से झगड़ा या गाली-गलौज भी करने लगते हैं. घर वालों के समझाने पर उन्हें भी भला-बुरा कह देते हैं. ब्रेकअप का दर्द उन्हें इतना आहत करता है कि वो न तो अपने करियर पर फोकस कर पाते हैं और न ही उनका किसी चीज़ में मन लगता है.

2) लोगों से मिलने से कतराना
ब्रेकअप को कई पुरुष अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते हैं. उन्हें लगता है कि किसी से मिलने पर यदि किसी ने उनसे उनके रिलेशनशिप के बारे में पूछ लिया, तो वे उसे क्या जवाब देंगे. ब्रेकअप के बाद पुरुष अपने रिश्ते के बारे में डिस्कस नहीं करना चाहतेे इसलिए वो लोगों से मिलने से कतराने लगते हैं.

3) सच्चाई स्वीकार न कर पाना
कई पुरुष ये बात स्वीकार ही नहीं पाते कि कोई महिला उन्हें लाइफ पार्टनर बनाने से इनकार कर सकती है. ब्रेकअप की बात सोचते ही उनके अहम् को ठेस लगती है इसलिए वो ये ये सच्चाई स्वीकारना ही नहीं चाहते कि किसी महिला ने उनका दिल तोड़ा है. इस बात का उनकी पर्सनैलिटी पर भी गहरा असर होता है. ऐसे लोग समझ ही नहीं पाते कि अब उन्हें आगे क्या करना है.

4) सारा दोष महिला पार्टनर से सिर मढ़ देना
कई पुरुष ये बात मानना ही नहीं चाहते कि उनके ब्रेकअप के लिए वो भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं, जितना कि उनकी महिला पार्टनर. वो हर किसी से यही कहते फिरते हैं कि उनकी पाटर्नर इस रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने लायक ही नहीं थी इसलिए उन्हें मजबूरन उससे रिश्ता तोड़ना पड़ा.

5) बिज़ी रहने की एक्टिंग करना
ब्रेकअप हो जाना कई पुरुषों को अपनी बेइज़्ज़ती लगती है इसलिए वो इस बात से डरते रहते हैं कि कोई उनसे उनके ब्रेकअप के बारे में न पूछ लें. दोस्तों और करीबियों के सवालों से बचने के लिए वो बिज़ी रहने की एक्टिंग करने लगते हैं. कई बार ऐसे लोग ख़ुद को काम में इतना डुबो देते हैं कि उन्हें अपने बारे में सोचने तक का समय नहीं मिल पाता.

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Breakups

6) घंटों जिम में बिताना
कई पुरुष ब्रेकअप के बाद जिम में अधिक समय बिताते हैं. ऐसा वो इसलिए करते हैं ताकि अपना ग़ुस्सा और फ्रस्ट्रेशन जिम में जाकर रिलीज़ कर सकें. उन्हें किसी से मिलने या बात करने की इच्छा नहीं होती इसलिए वो जिम में ख़ुद को थकाकर अपना ग़ुस्सा शांत करते हैं. ब्रेकअप के बाद जो पुरुष जिम में अधिक समय बिताते हैं, कई बार वो अपनी क्षमता से अधिक एक्सरसाइज़ करके ख़ुद को नुक़सान तक पहुंचा देते हैं.

7) किसी भी महिला पर विश्‍वास न करना
ब्रेकअप के बाद कई पुरुषों का महिलाओं पर से विश्‍वास उठ जाता है. दिल का रिश्ता टूटने का उन पर इतना बुरा प्रभाव पड़ता है कि वो फिर किसी महिला पर विश्‍वास ही नहीं कर पाते. ऐसे पुरुषों को फिर से दिल लगाने में बहुत दिक्कत होती है. जब तक कोई महिला उनका विश्‍वास न जीत ले, वो तब तक महिलाओं से दूर ही रहते हैं.

8) मल्टीपल पार्टनर बनाना
दिल टूटने का अलग-अलग पुरुषों पर अलग असर होता है. दिल टूटने पर कई पुरुष महिलाओं से दूर रहते हैं, तो कई पुरुष मल्टीपल पार्टनर बना लेते हैं यानी एक साथ एक से ज़्यादा महिला पार्टनर के साथ रोमांस करने लगते हैं. मल्टीपल पार्टनर बनाने वाले पुरुष शादी के रिश्ते में नहीं बंधना चाहते, वो बस महिला पार्टनर का साथ चाहते हैं, उन्हें लाइफ पार्टनर नहीं बनाना चाहते.

9) डेटिंग ऐप्स का सहारा लेना
ब्रेकअप के दर्द से उबरने के लिए कई पुरुष डेटिंग ऐप्स का सहारा लेने लगते हैं. ऐसे पुरुष अपना अधिकतर समय डेटिंग ऐप्स में बिताने लगते हैं. वो डेटिंग ऐप्स के माध्यम से कई लड़कियों से मिलते-जुलते हैं और अपना ग़म दूर करने की कोशिश करते हैं.

10) सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना
सोशल मीडिया अकेलापन दूर करने का आसान माध्यम बन गया है. सोशल मीडिया का सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि आप अपने मोबाइल स्क्रीन पर उंगलियां फिराते हुए कई लोगों से जुड़ सकते हैं. आपको न उनसे मिलने की ज़रूरत है और न ही उन्हें अपना चेहरा दिखाने की ज़रूरत है. ऐसे में अकेलेपन के शिकार कई लोग सोशल मीडिया पर अपना अधिकतर समय बिताते हैं. अपने करीबियों से मिलने-जुलने के बजाय उन्हें घर बैठे अजनबियों से बातें करना अच्छा लगने लगता है. वो सोशल मीडिया की आभासी दुनिया अपना ग़म भुलाने की कोशिश करते रहते हैं.

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How To Deal With Breakups
 ब्रेकअप के दर्द से कैसे उबरें पुरुष?
हालांकि दिल टूटने के दर्द से उबरना आसान नहीं, लेकिन ज़िंदगी में आगे बढ़ना भी ज़रूरी है. ब्रेकअप के दर्द से उबरने के लिए क्या करें पुरुष? आइए, जानते हैं.

1) शी-टॉक्स शुरू करें 
जिस तरह हम अपने शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकालने के लिए डीटॉक्स करते हैं, उसी तरह अपने पुराने रिश्ते से बाहर निकलने के लिए शी-टॉक्स शुरू करें. इसके लिए अपने एक्स से जुड़ी सभी यादों को ख़ुद से दूर करें. सोशल मीडिया पर उसे अनफ्रेंड करें, उसका नंबर डिलीट कर दें, इस तरह आप बार-बार उसे देखने या उसके बारे में जानने से बच पाएंगे और अपना ध्यान अपने काम पर लगा पाएंगे.

2) पुरानी यादों को जला दें
करीना कपूर और शाहिद कपूर की फिल्म जब वी मेट का वो सीन आपको याद होगा, जब शाहिद कपूर अपने एक्स की यादें मिटाने के लिए करीना कपूर से उसकी तस्वीर को जलाकर कमोड में फ्लश करने को कहते हैं, ताकि करीना उसकी यादों को भुला सके. आप भी ऐसा कर सकते हैं. बार-बार अपने एक्स की फोटो देखकर दुखी होने के बजाय उसकी फोटो को जलाकर अपने दिल को समझाएं कि अब वो आपकी ज़िंदगी में नहीं है.

3) एक्स से दोस्ती न रखें
कई लोग रिश्ता ख़त्म होने के बाद भी दोस्त बने रहना चाहते हैं. ऐसा करना तब सही होता है, जब आप अपनी दोस्ती को स़िर्फ दोस्ती की नज़र से देखें, लेकिन आपके मन में यदि अब भी अपने एक्स के लिए वही भावनाएं हैं, तो बेहतर होगा कि आप उससे दोस्ती भी न रखें. अपने एक्स को भुलाने के लिए आप उससे दूर ही रहें.

ये प्यार इतना कॉम्प्लिकेटेड क्यों है? देखें वीडियो:

4) ख़ुद को नशे से दूर रखें
ब्रेकअप के दर्द को भुलाने के लिए यदि आप भी ख़ुद को नशे में डुबो देते हैं, तो ये आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है. नशा करने की बजाय अपने शौक के लिए व़क्त निकालें, वो चीज़ें करें जो आपको अच्छी लगती हैं.

5) महिलाओं से दूर न भागें
यदि एक महिला ने आपका दिल तोड़ा है, तो इसका ये मतलब नहीं कि सभी महिलाएं ऐसी ही होती हैं. अत: महिलाओं से कतराएं नहीं, बल्कि उनसे बात करें. यदि कोई महिला दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाए, तो ख़ुद को एक और चांस दें और जीवन में आगे बढ़ें.

6) ख़ुद से प्यार करें
हर इंसान का ये फर्ज़ है कि वो दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुद से प्यार करें. यदि आप ख़ुद से प्यार करेंगे, तभी आप दूसरों से भी उतना ही प्यार कर सकेंगे. हमेशा जीवन का सकारात्मक पहलू देखें. एक रिश्ता टूट जाने से ज़िंदगी ख़त्म नहीं होती. आज यदि आपका दिल टूटा है, तो इस बात पर विश्‍वास रखें कि आपके जीवन में इससे भी अच्छा लाइफ पार्टनर आने वाला है. ज़िंदगी एक बार मिलती है इसलिए उसे खुलकर जीएं. आप बस ख़ुद से प्यार करें, आपके जीवन में प्यार की कभी कमी नहीं होगी.

– कमला बडोनी

पहला अफेयर: हार्डवेयरवाला प्यार (Pahla Affair: Hardwarewala Pyar)

Pyar Ki Kahaniya
पहला अफेयर: हार्डवेयरवाला प्यार (Pahla Affair: Hardwarewala Pyar)

उन दिनों मैं डीएन कॉलेज से इंफॉर्मेशन ब्रांच में बी.ई. कर रही थी. हमारे कॉलेज में संजय भी था, जो कंप्यूटर साइंस में था. आते-जाते अक्सर वह दिख जाता था और इधर-उधर निगाह बचाकर मुझे देखता था. लेकिन मैं ध्यान नहीं देती थी और बाहर निकल जाती थी. इस पर वो मुझे हसरतभरी निगाह से देखता था.

बी.ई. के छठे सेमिस्टर चल रहे थे. मेरा घर कॉलेज से काफ़ी दूर था. मैं बस का इंतज़ार कर रही थी, लेकिन बसें देर से चल रही थीं. मुझे एग्ज़ाम के लिए देर होने की चिंता सताने लगी कि तभी हेलमेट पहने एक बाइक सवार मेरे पास आकर रुका और कहने लगा, “पेपर का समय हो गया है, अगर इसी तरह खड़ी रहीं, तो आज का पेपर गया समझो.”

मैंने जब ग़ौर से देखा, तो मालूम हुआ कि वो तो संजय है. मैं उसके साथ बैठने में हिचकिचाने लगी. तब उसने कहा, “अरे भई, हम कोई भूत नहीं हूं, चलो जल्दी बैठो, पेपर शुरू होने में 10 मिनट ही बचे हैं.” अब मैं उसकी बाइक पर बैठ गई. बीच-बीच में कभी ब्रेक लगाने पर मेरा शरीर उससे छू जाता, तो अजीब-सी सिहरन होने लगती. मेरा मुंह सूख रहा था. मैंने ख़ुद को संभाला और पेपर देने चली गई.

इसके बाद संजय से मुलाक़ातें बढ़ने लगीं और धीरे-धीरे एहसास होने लगा कि पहला प्यार इसे ही कहते हैं. संजय बिहार से था और उसकी भाषा व बोलने के अंदाज़ पर मुझे कभी-कभी हंसी आ जाती थी. एक दिन वो बोला, “वो ऐसा है कि हमने ज़्यादा किसी से प्यार-व्यार नहीं किया, इसलिए मालूम नहीं कि ये कैसा होता है, पर अपना प्यार तो एकदम हार्डवेयरवाला है. पक्का मतलब एकदम पक्का.” तब मैंने हंसते हुए कहा, “अपन तो सॉफ्टवेयरवाले हैं और प्यार के मामले में भी एकदम सॉफ्ट हैं.”

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अब हम लोग कॉलेज के पास की झील के किनारे बैठकर भविष्य के सपने बुनते रहते… एक बार वो तुकबंदी करते हुए कहने लगा… “जब फूल खिलता है, तो ख़ुशबू फैल जाता है… जब तुम हंसता है, तो बहार आ जाता है.” उसकी इस तुकबंदी पर मुझे ज़ोर से हंसी आ गई और मैंने भी हंसते हुए कहा, “ जब तुम तुकबंदी करता है, तो आंसू आ जाता है… यह ख़ुशी का है या ग़म का पता नहीं लग पाता है.” फिर काफ़ी देर तक हम हंसते रहे और मैंने सोचा कि व़क्त यहीं रुक जाए और यूं ही हंसते-खिलखिलाते ज़िंदगी गुज़र जाए.

बी.ई. पूरा होने के बाद संजय पटना चला गया. बीच-बीच में हमारी बातें होती रहती थीं और इसी बीच संजय ने बताया कि उसका सिलेक्शन आर्मी में हो गया है, संजय काफ़ी मेहनती था, जो ठान लेता, वो करता ही था. उसे दूर-दराज़ के इलाकों में कंप्यूटर इंस्टॉलेशन का काम सौंपा गया था. एक दिन मेरे मोबाइल पर उसका मैसेज आया- हम लोगों को अपने काम पर ले जानेवाला ट्रक खाई में गिर गया है, अस्पताल में पड़ा हूं, ऐसा लगता है ज़िंदगी ज़्यादा नहीं है. तुम अपनी ज़िंदगी सॉफ्टवेयर-सी रखना, मेरे जैसी हार्डवेयर नहीं.

आज मैं एक बैंक में कार्यरत हूं, लेकिन संजय के बिना ज़िंदगी वीरान है. उसका प्यार मेरा संबल है, पर उसके बिना ज़िंदगी सॉफ्ट नहीं, हार्डवेयर-सी है. अकेले जीवन गुज़ारते हुए बस उसका चेहरा और बातें ही सहारा हैं.

– संतोष श्रीवास्तव

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कहीं डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी में अंतर आपके रिश्ते को बिगाड़ तो नहीं रहा? (Difference In Digital and Real Personality May Affect Your Relationship)

Difference In Digital and Real Personality

कहीं डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी (Difference In Digital and Real Personality) में अंतर आपके रिश्ते को बिगाड़ तो नहीं रहा?

सोशल मीडिया की दस्तक ने हमारी निजी ज़िंदगी को बहुत प्रभावित किया है. अधिकांश व़क्त हम यहां जो भी कुछ देखते हैं, करते हैं, वह हक़ीक़त से बिल्कुल विपरीत होता है. डिजिटल दुनिया की जो हमारी पर्सनैलिटी है, वह रियल लाइफ से अक्सर मेल नहीं खाती है. क्यों ऐसा करते हैं हम? और क्या है इसकी वजह? इसी के बारे में जानने की हमने यहां कोशिश की है.

Difference In Digital and Real Personality

लीला एक हाउसवाइफ हैं. वे बताती हैं कि पति के शोरूम और बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद मैं खाली व़क्त में इंटरनेट, व्हाट्सऐप और फेसबुक पर समय बिताती थी. मेरे दोस्तों की संख्या सैकड़ों में थी. घर पर रहूं, तो लैपटॉप और बाहर निकली, तो मोबाइल में उंगलियां चलती ही रहती थीं. कुछ महीनों बाद यह स्थिति बन गई कि हमारा दांपत्य जीवन प्रभावित होने लगा. मैं बच्चों की केयर और परिवार की ज़िम्मेदारियों से दूर भागने लगी. पति की नाराज़गी और पैरेंट्स के समझाने पर मुझे आभास हुआ कि मैं ग़लत कर रही हूं. मुझे इससे निकलने में काफ़ी व़क्त लगा. लीला मात्र एक उदाहरण है, कमोबेश आज हर दूसरा व्यक्ति डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी के बीच उलझा हुआ है.

निजी ज़िंदगी हो रही है प्रभावित

आज के दौर में हम सोशल मीडिया को पसंद या नापसंद तो कर सकते हैं, लेकिन उसे नज़रअंदाज नहीं कर सकते. आज लोग इंसानों के साथ कम और सोशल साइट्स ज़्यादा समय बिता रहे हैं. इस पर रिश्ते बनने से ज़्यादा बिगड़ने लगे हैं.

आपको बता दें कि 55 से 60 फ़ीसदी लोगों का तलाक़ आज के समय में सोशल साइट्स की वजह से हो रहा है. यह खुलासा अमेरिका के क़ानूनी फर्म के सर्वे में किया गया है. इसमें बताया गया है कि आजकल रिश्ते जल्द टूटने की वजह सोशल साइट्स के प्रति लोगों का एडिक्शन है.

आपके दोस्त अपनी लव लाइफ की शानदार तस्वीरें पोस्ट कर सकते हैं, लेकिन आपको इस बात का एहसास भी नहीं होता कि उनकी निजी यानी ऑफलाइन ज़िंदगी कितनी भयानक हो सकती है. उन्हें देखकर आपको भी लगता है कि आप भी अपने साथी के साथ ऐसी फोटो खिंचवाकर पोस्ट करें. हो सकता है आपका साथी ऐसा करने के ख़िलाफ़ हो या फिर आपके रिश्ते में थोड़ीबहुत तल्ख़ी हो, लेकिन इसके बावजूद आप चाहते हैं कि दुनिया को बताएं कि आप एक हैप्पी कपल हैं.

डिजिटल पर्सनैलिटी की बड़ी उम्मीदें 

डिजिटल पर्सनैलिटी बड़ी उम्मीदों को जन्म देती है. हो सकता है कि रियल लाइफ में आपकी लव लाइफ बहुत दिलचस्प या संतोषजनक न हो, पर डिजिटल लाइफ पर आप अपनी लव लाइफ को सबसे बेहतरीन और दिलचस्प दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. अक्सर कपल्स जिन स्माइली और इमोशंस का इस्तेमाल डिजिटल लाइफ में अपना प्रेम ज़ाहिर करने के लिए करते हैं, उनका रियल लाइफ में मतलब तभी होता है, जब हक़ीक़त की ज़िंदगी में भी आप अपने साथी को प्यार करते हैं. दिखावटी प्रेम जो डिजिटल दुनिया में चलता है, वह रियल ज़िंदगी में कई बार नज़र तक नहीं आता है. लेकिन इससे उत्पन्न उम्मीदें आपके रिश्तों में सेंध लगाकर उन्हें बिगाड़ सकती हैं.

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मन-मुटाव का बनता कारण

बच्चे हों या बड़े, घर, कॉलेज, ऑफिस, ड्राइविंग यहां तक कि देर रात बिस्तर तक में आराम नहीं है. जिसे देखो, वही उलझा है डिजिटल दुनिया के रिश्तों में. जिनमें भले ही सच्चाई की संभावना न के बराबर हो, लेकिन सभी चैटिंग, फोटो शेयरिंग और कमेंट्स में सुकून और अपने सवालों के उत्तर ढूंढ़ने में लगे हैं. संवाद और एकदूसरे के संपर्क में रहने के नएनए तकनीकी तरीक़ों में बुरी तरह उलझी है आज की ज़िंदगी. टीनएजर्स ही नहीं, उम्रदराज़ लोगों की संख्या भी कम नहीं है, तकनीक के इस जाल में. शायद यही वजह है कि क़रीबी और सामाजिक रिश्ते गौण हो रहे हैं और लोग अवास्तविक दुनिया के सागर में डूब रहे हैं.

प्रभावित हो रही है सेक्स लाइफ

मनोवैज्ञानिक शमा अग्निहोत्री कहती हैं, आपके जीवनसाथी के साथ के अंतरंग पलों के दौरान स्मार्टफोन पर आई एक बेव़कूफ़ीभरी पोस्ट का नोटिफिकेशन आपसी रिश्तों में दरार पैदा करने के लिए काफ़ी है. युवा जोड़ों, विशेषकर

नौकरीपेशा की संख्या एकाएक तेज़ी से बढ़ी है और इनकी सेक्स लाइफ पर जिस तरह से डिजिटल दुनिया की वजह से असर पड़ा है, वह संबंधों में मनमुटाव उत्पन्न कर रहा है. सोशल मीडिया पर मित्रों के लगातार अपडेट्स के चलते लोग अपने जीवनसाथी के साथ क्वालिटी टाइम बिताने में असफल हो रहे हैं. यही नहीं, दूसरों को देखकर यह जीवनसाथी में बेमतलब की कमियां ढूंढ़ने को भी उकसा रहा है.

हक़ीक़त से अलग है यह दुनिया

जब आपको अपने बेडरूम की चारदीवारी के अंदर प्रेम नहीं मिलता, तो आप इसे कहीं बाहर खोजने लगते हैं. रिश्तों की ख़त्म होती गर्माहट और ऑनलाइन दुनिया में आसानी से मेलजोल बढ़ाने से अपने लिए एक नया साथी तलाशना काफ़ी आसान हो गया है. साथ ही यह आपको एक ग़लत क़दम उठाने में भी ज़्यादा व़क्त नहीं लगने देता, जिसके चलते आप अपने निजी रिश्तों को भी दांव पर लगा देते हैंसच तो यह है कि हम अपनी रियल पर्सनैलिटी से दूर होते जा रहे हैं और एक दिखावटी दुनिया का हिस्सा बन रहे हैं. उस दिखावटी दुनिया में हमारी सोच, हमारी मानसिकता और पर्सनैलिटी हमारी रियल पर्सनैलिटी से एकदम भिन्न होती है. लेकिन हम अपनी स्वाभाविक भावनाओं को ताक पर रख ऑनलाइन वीडियो या पोस्ट को पढ़ ख़ुश हो जाते हैं.

ज़िंदगी सोशल मीडिया नहीं

समाजशास्त्री नीरू यादव का मानना है कि एक ऑनलाइन वीडियो को देखकर अकेले हंसने में उतना मज़ा कहां है, जो आप अपने जीवनसाथी के साथ बैठकर एक पुराने चुटकुले पर उठा सकते हैं. सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का केवल एक हिस्सा भर है, जबकि हमारी ज़िंदगी सोशल मीडिया का हिस्सा बिल्कुल भी नहीं है, इसलिए इस दूरी को बरकरार रखने की कोशिश करते हुए चीज़ों की प्राथमिकता तय करनी होगी.

यह समझना ज़रूरी है कि आपकी फ़िक्र करनेवाला या आपको प्यार करनेवाला इंसान आपके आसपास होगा.

वे जो आपकी पोस्ट पर लाइक और कमेंट करते हैं, वे केवल आपको दिखावटी प्यार ही मैसेज कर भेज सकते हैं.

अपने साथी की अहमियत समझें और उन्हें केवल उनके लिए (जो आपकी निजी ज़िंदगी की सार्वजनिक रूप में चर्चा करते हैं) दूर न जाने दें.

ड्रीमवर्ल्ड में जीते लोग

डिजिटल और रियल पर्सनैलिटी एक ही इंसान द्वारा निभाए जानेवाले दो तरह के क़िरदार हैं. फेसबुक पर हम ऐसी ही चीज़ें पोस्ट करते हैं, जो हम लोगों को दिखाना चाहते हैं यानी हम एक में जी रहे होते हैं. वहां हमारी एक अलग छवि बनती है और उस छवि के अनुरूप ही हमारे पोस्ट होते हैं भले ही असल ज़िंदगी में हम वैसे न भी हों.

Difference In Digital and Real Personality

सार्वजनिक न बनाएं अपनी ज़िंदगी

जब हम डिजिटल की दिखावटी दुनिया में प्रवेश करते हैं, तो हम दूसरों की अच्छी चीज़ों को देखकर हीनभावना से ग्रस्त हो जाते हैं और फिर ख़ुद को उनके बराबर दिखाने के लिए या उनसे बेहतर दिखाने के लिए अपनी एक झूठी छवि सोशल मीडिया पर पेश करते हैं.

असल में हम भूल जाते हैं कि जो कुछ सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है, वह वास्तविकता नहीं है. वह किसी व्यक्ति की ज़िंदगी का एक लम्हा भर है, जिसे उसने सोशल मीडिया पर शेयर किया. ज़िंदगी की वास्तविक छवि इससे अलग हो सकती है. हमारी ख़ुशी दूसरों पर निर्भर करने लगती है. यह इसलिए भी ख़तरनाक है, क्योंकि हम हर चीज़ का सर्टिफिकेट दूसरों से लेने लगते हैं.

किसी पल को आपने एंजॉय किया या नहीं, यह प्राथमिकता होने की बजाय प्राथमिकता यह हो जाती है कि उस पल की तस्वीर को सोशल मीडिया पर कितना रिस्पॉन्स मिल रहा है. उदाहरण के लिए यदि आप किसी जगह डिनर पर गए, तो आपको इस बात की ख़ुशी होनी चाहिए की डिनर टेस्टी था और आपने इसे अपने फैमिली/दोस्तों के साथ एंजॉय किया. न कि यह कि आपकी डिनरवाली तस्वीर पर 100 लाइक्स आए.

सच यह है कि आपकी डिजिटल पर्सनैलिटी आपको अपने वास्तविक संबंधों को मज़बूत करने की बजाय आपको एक ऐसी नकली दुनिया का आदी बना देती है, जिसमें आप अपने विचारों की अभिव्यक्ति उतने बेहतर तरी़के से नहीं कर पाते, जितना आप वास्तविक दुनिया में कर सकते हैं.

आप अपनी असल ज़िंदगी का मज़ा लेना ही भूलने लगते हैं. कई ख़ूबसूरत जगहों पर घूमते हुए वहां की ख़ूबसूरती का मज़ा लेने की बजाय लोग सेल्फी लेने और फोन से तस्वीरें खींचने में व्यस्त हो जाते हैं, जो उन्हें उस वास्तविक पलों को जीने से रोक देता है. ऐसे में आप अपने साथी का साथ क्या एंजॉय कर पाएंगे, तो रिश्तों पर आंच आना स्वाभाविक ही है.

अपनी जिंदगी के हर पहलू को सार्वजनिक करना कहां तक ठीक है. यह समझने की ज़रूरत है कि असल ज़िंदगी साढ़े पांच इंच की स्क्रीन में नहीं है, बल्कि उसके बाहर है.

सुमन बाजपेयी

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शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट क्यों भूल रहे हैं हम? (Failing to understand the concept of marriage forever)

Marriage forever concept

कुछ रस्में, सात फेरे, सात वचन और एक बंधन, वो भी जन्म-जन्मांतर (Marriage forever concept) का! शादी को लेकर हर किसी की अपनी अपेक्षाएं और उम्मीदें होती हैं, कुछ पूरी होती हैं, तो कुछ नहीं भी. शत-प्रतिशत संतुष्टि तो हमें किसी भी रिश्ते से नहीं मिलती, लेकिन क्या हम उन रिश्तों को तोड़ने का निर्णय इतनी आसानी से लेते हैं, जितनी आसानी से आज हम शादी को तोड़ने का निर्णय लेने लगे हैं? चूंकि इस रिश्ते से बाहर आने का एक विकल्प हमें नज़र आता है तलाक़ के रूप में, तो फिर समस्या चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो, हम समझौता नहीं करते. तलाक़ के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं. यहां हम उन मामलों का ज़िक्र नहीं कर रहे, जहां तलाक़ लेना ही एकमात्र रास्ता रह जाता है, लेकिन जहां शादी को बचाए रखने के कई रास्ते खुले होते हैं, वहां भी अब हमारी कोशिशें कम ही होती हैं उसे बचाने की. पहले माना जाता था कि शादी जन्म-जन्मांतर (Marriage forever concept) का साथ है, लेकिन अब एक जन्म भी निभाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट ही हम भूल चुके हैं. क्या वजहें हैं कि ऐसा हो रहा है?

Marriage forever concept

– रिश्ता निभाना या उससे जुड़ी ज़िम्मेदारियां पूरी करना आजकल के कपल्स को बोझ लगता है. उन्हें लगता है कि हम क्यों सामनेवाले के अनुसार अपनी ज़िंदगी जीएं, हम क्यों एडजेस्ट करें… आदि. जब रिश्ते में इस तरह के विचार आने लगते हैं, तो उसे तोड़ने के रास्ते हमें ज़्यादा आसानी से नज़र आने लगते हैं.

– शादी एक बंधन और ज़िम्मेदारी है. कोई चाहे या न चाहे, इसमें त्याग-समर्पण करना ही पड़ता है. लेकिन इस तरह की भावनाएं व बातें आजकल हमें आउटडेटेड लगती हैं. हम अब रिश्तों में भी प्रैक्टिकल होते जा रहे हैं, जिससे भावनाएं गौण और स्वार्थ की भावना महत्वपूर्ण होती जा रही है.

– कपल्स आजकल अपने ईगो को अपने रिश्ते से भी बड़ा मानते हैं. पति-पत्नी दोनों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं होता. आपसी टकराव बढ़ने के साथ-साथ मनमुटाव भी बढ़ता जाता है और नतीजा होता है- रिश्ते का अंत.

– आजकल लोग शादी तो करते हैं, लेकिन कई शर्तों के साथ और जहां कहीं भी उन्हें लगता है कि उनकी आज़ादी या लाइफस्टाइल में उनकी शादी एक बेड़ी या बंधन बन रही है, वहीं उसे तोड़ने का निर्णय आसानी से ले लेते हैं.

Marriage forever concept

और भी हैं वजहें…

– लड़कियां भी आत्मनिर्भर हो रही हैं, जिस वजह से वो कोई भी निर्णय लेने से हिचकिचाती नहीं.

– घरवालों का सपोर्ट भी अब उन्हें मिलता है, पहले जहां उन्हें रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करने से संबंधित कई तरह की सीख व नसीहतें दी जाती थीं, वहीं अब समझौता न करने की बात समझाई जाती है. हालांकि जहां बात लड़की या लड़के के स्वाभिमान व अस्तित्व की रक्षा से जुड़ी हो और जहां शोषण हो रहा हो, तो वहां शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट (Marriage forever concept) भूलना ही पड़ता है, लेकिन यहां हम उन छोटी-छोटी बातों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिन्हें बड़ा मुद्दा बनाकर शादी जैसे महत्वपूर्ण बंधन को तोड़ने का सिलसिला बढ़ रहा है.

– छोटी-छोटी तक़रार भी हमें इतनी हर्ट करती है कि हम उसे अपने स्वाभिमान से जोड़ने लगते हैं. सहनशीलता अब लोगों में बहुत कम हो गई है, यह भी एक बड़ी वजह है कि रिश्ते ताउम्र नहीं टिकते और जल्दी टूट जाते हैं.

– वहीं दूसरी ओर रिश्ता बनाए रखने व उसमें बने रहने के लिए सारे समझौते करने की अपेक्षा अब भी स्त्रियों से ही की जाती है. व़क्त व दौर जब बदल रहा है, तो अपेक्षाओं के इस दायरे में पुरुषों को भी लाना ही होगा. रिश्ता बनाए रखने की जितनी ज़िम्मेदारी स्त्रियों की होती है, उतनी ही पुरुषों की भी होती है. इस परिपाटी को अब तक बदलने की दिशा में कोई सार्थक प्रयास भी नहीं किए गए. इस ओर भी ध्यान देना ज़रूरी है.

– शादी जैसे रिश्तों को आजकल की जनरेशन बहुत कैज़ुअली लेती है. यदि इसके प्रति थोड़ा सम्मान व गंभीरता दिखाएं, तो रिश्ते की मज़बूती बढ़ेगी. समय व समाज में बदलाव के साथ-साथ रिश्तों के समीकरण व मायने भी अब बदल रहे हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं होना चाहिए कि हम रिश्तों को इतने हल्के में लें कि उन्हें आसानी से तोड़(Marriage forever concept) सकें.

Marriage forever concept

क्या किया जा सकता है?

– शादी जैसे रिश्ते के प्रति थोड़ी गंभीरता व सम्मान रखना बेहद ज़रूरी है.

– अपने रिश्ते को और अपने पार्टनर को कैज़ुअली न लें.

– छोटी-छोटी बातों को बड़े झगड़े में न बदलें. सहन करना, एडजस्ट करना हर रिश्ते की मांग होती है. इसे अपने ईगो से जोड़कर न देखें.

– अपने मन-मस्तिष्क में रिश्ता तोड़ने जैसे विचार न लाएं. आपस में बहस के दौरान भी इस तरह की बातें मुंह से न निकालें.

– किन्हीं मुद्दों या बातों पर मनमुटाव हो, तो बातचीत ही पहला रास्ता है विवादों को सुलझाने का.

– पहल करने से कोई भी छोटा नहीं होता. रिश्ते को बचाने में अगर आपकी पहल काम आ सकती है, तो अपने झूठे दंभ की ख़ातिर पहल करने से पीछे न हटें. अलग होने के बाद भी ज़िंदगी आसान नहीं होती, गंभीरता से हर पहलू पर विचार करें.

– माफ़ करना सीखें और सॉरी बोलना भी.

– अपने पार्टनर की कद्र करें. भावनात्मक रूप से यदि आपसे कोई जुड़ा है, तो उसे जितना हो सके, आहत या दुखी करने से बचें. आपस में एक-दूसरे के प्रति सम्मान तो हर रिश्ते की ज़रूरत होती है.

– आजकल छोटी-छोटी बातों पर रिश्ता तोड़ देने का जो ट्रेंड बन गया है, उसके परिणाम बेहद घातक होते हैं. कम उम्र में ही तनाव, अकेलापन, डिप्रेशन व अनहेल्दी लाइफ स्टाइल का शिकार होकर अपनी ही ज़िंदगी को लोग बहुत कठिन बना लेते हैं.

– इस बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि रिश्ते व भौतिक चीज़ों में बहुत फ़र्क़ होता है. रिश्तों को कपड़ों या गाड़ियों की तरह बार-बार बदलकर सुकून नहीं मिल सकता. रिश्तों में भावनाएं होती हैं और कोई कितना भी प्रैक्टिकल क्यों न हो जाए, रिश्ता टूटने पर आहत होता ही है. जब भावनाएं आहत होती हैं, तो ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो जाती है.

– विजयलक्ष्मी

नपुंसक बना सकती है आपकी यह आदत ( This Habit Can Make You Impotent)

10 अलर्ट्स जो बताएंगे कि आपका पार्टनर सही है या ग़लत (10 Alerts to tell you your partner is perfect or not)

 10 अलर्ट्स जो बताएंगे कि आपका पार्टनर (Fraud partner alerts) सही है या ग़लत

  1. बहुत शो ऑफ करता हो

भले ही आपका साथी रईस न हो, पर महंगे शौक़ रखता हो और उनका हर जगह प्रदर्शन भी करता हो. ख़ुद को हाई प्रोफाइल कहलाना उसे बेहद पसंद हो. उधार लेकर भी अपने शौक़ पूरे करता हो और पैसों के लिए ग़लत काम करने से भी हिचकिचाता ना हो. ऐसे लोग स़िर्फ अपने बारे में सोचते हैं और आज में जीते हैं. ऐसा साथी आपके वर्तमान और भविष्य दोनों को ख़तरे में डाल सकता है, अगर समय रहते आपको इसका पता चल गया है, तो समझ जाएं कि यह इंसान आपके लिए सही नहीं है.

2. हमेशा फिज़िकल क्लोज़नेस चाहता हो

अक्सर उसकी तारीफ़ों में आपकी ख़ूबसूरती की बजाय बॉडी पार्ट्स की तारीफ़ छिपी रहती है. साथ घूमने जाने या मिलने के लिए एकांत या सुनसान जगह ही चुनता हो. मौक़ा पाते ही आपको हाथ लगाने, चूमने या स्पर्श करने से चूकता न हो. आपको हमेशा बॉडी रिवीलिंग ड्रेसेज़ गिफ्ट करता हो और पहनने की फ़रमाइश भी करता हो. फोन पर ज़्यादातर नॉटी व वल्गर मैसेजेस भेजता हो, तो सावधान हो जाइए. आपको उसकी ऐसी हरक़तों पर पैनी नज़र रखनी चाहिए, ताकि कोई भी ़फैसला लेने से पहले पूरी तरह आश्‍वस्त रहें.

3. आपसे अक्सर पैसे उधार लेता हो

ज़माना बेशक कामकाजी महिलापुरुष का हो, पर जो पुरुष अपनी गर्लफ्रेंड, प्रेमिका या मंगेतर से पैसे उधार मांगता रहता हो, उससे सावधान रहिए. यहां हम कभीकभार का ज़िक्र नहीं कर रहे हैं, पर अगर ऐसा अक्सर होता है, तो ज़रूर सोचनेवाली बात है. क्या गारंटी है कि शादी के बाद वो पूरी तरह से आप पर आश्रित नहीं होगा. हर महिला चाहती है कि उसका पति स्वावलंबी हो, पर अगर वो शुरू से ही आप पर निर्भर है, तो अभी भी व़क्त है.

4. आपसे बातें छिपाता हो

काफ़ी समय के रिश्ते के बाद भी यदि वो आपसे बातें छिपाए, कुछ पूछने पर टालमटोल करे, खुलकर अपने घरपरिवार के बारे में न बताए, मोबाइल न छूने दे, तो सावधान हो जाइए, दाल में कुछ काला है. अगर आपका मंगेतर विदेश में काम करता है, तो अपने स्थानीय मित्रों या रिश्तेदारों के ज़रिए उसके बारे में पता लगाएं. सोशल नेटवर्किंग साइट्स भी इसमें आपकी मदद कर सकती हैं. इस तरह तहक़ीक़ात करने पर उसे बुरा लगेगा, इस डर से अपने भविष्य को ख़तरे में न डालें.

5. अचानक अजीब ढंग से व्यवहार करता हो

अचानक यूं ही किसी दिन अपनी सगाई की अंगूठी उतार दी, आपको टाइम देकर वहां आना भूल गया या सार्वजनिक स्थान पर आपको बेइज़्ज़त कर दिया या आपसे ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देता हो, तो चिंता की बात है. इसके अलावा आप पर ध्यान न देना, आपको अनदेखा करना, आपमें दिलचस्पी न लेना आदि दोहरा चरित्र या व्यवहार ख़तरे की घंटी है. ख़ुद को ऊंचा उठाने के लिए अक्सर दूसरों को नीचा दिखाना कुछ लोगों की आदत होती है.

6. आपके सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ और

दोहरापन और चुगलखोरी किसी भी रिश्ते में दरार डाल सकते हैं. आप ही सोचिए आपके सामने अच्छा और पीठ पीछे बुरा कहनेवाला भला आपका अपना कैसे बन सकता है. अगर आपका साथी भी ऐसा करता है, तो वो यक़ीनन इस रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं है.

7. सैलरी या फाइनेंशियल कंडीशन्स के बारे में छुपाता हो

किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए पारदर्शिता बहुत ज़रूरी है. आपका होनेवाला लाइफ पार्टनर अगर आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के बारे में सहीसही नहीं बताता या छुपाता हो या बहाने बनाता हो, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए. कुछ लोग दिखावे के लिए कभी लोन, तो कभी क्रेडिट कार्ड से ख़र्च करके इम्प्रेस करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में यह बहुत ज़रूरी है कि आपको उसकी परचेज़िंग पावर पता हो, वरना शादी के बाद आप उसके क्रेडिट कार्ड के बिल चुकाती रह जाएंगी.

 

8. दोस्तों को शक की नज़र से देखता हो

उसकी भले ही कितनी लड़कियां दोस्त क्यों न हों, पर आपके दोस्तों या पुरुष सहकर्मियों को शक की नज़र से देखता हो. अपने दोस्तों के साथ काफ़ी फ्री रहता हो और वेस्टर्न व मॉडर्न तरीक़ों से पेश आता हो, पर आपके लिए ‘पज़ेसिवनेस’ वाला जुमला सुनाते हुए आपके मेल कलीग्स को शक की नज़र से देखता हो, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि शक्की लोगों के साथ जीवन बिताना आसान नहीं है.

9. आपसे ऑबसेस्ड हो

यदि आपका साथी आपको दिलोजान से चाहता हो और उसके सिवा आप पर किसी और का हक़ नहीं और आपकी थोड़ीसी भी जुदाई को जीनेमरने का सवाल बना लेता हो, हर व़क्त स़िर्फ आपके साथ रहना चाहता हो या फिर ओवरपज़ेसिव हो रहा हो, आपको बिल्कुल आज़ादी न देता हो, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि किसी कारणवश यदि यह रिश्ता टूट गया, तो वो किसी भी सीमा तक जा सकता है. अक्सर ऐसे जुनूनी पुरुष असफल होने पर कुछ भी कर सकते हैं. पज़ेसिव होना आम बात है, पर ऑब्सेशन सही नहीं. यह आपको समझना होगा.

10. साथी की कई बातें आपको अजीब लग सकती हैं. हमेशा दिल से काम मत लीजिए, ऐसे मामलों में दिमाग़ से भी काम लेना ज़रूरी हो जाता है. जहां थोड़ा भी संशय हो, तसल्ली कर लीजिए. साथी को बुरा लगेगा, ये मत सोचिए, अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिए और सोचसमझकर निर्णय लीजिए. अगर थोड़ीसी सावधानी आपको ज़िंदगीभर के पछतावे से बचा सकती है, तो सावधानी ज़रूर बरतें और इन अलर्ट्स पर ध्यान दें.

पूनम मेहता

5 शिकायतें हर पति-पत्नी एक दूसरे से करते हैं (5 Biggest Complaints Of Married Couples)