relationship and romance

समय के साथ रिश्ते (relationship) मज़बूत होने चाहिए लेकिन अक्सर होता उल्टा है, वक्त बीतने के साथ-साथ हमारे रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं और जब तक हमें एहसास होता है तब तक देर हो चुकी होती है. बेहतर होगा समय रहते अपने रिश्तों को समय (quality time) दें ताकि वो मज़बूत बने रहें. 

  • वक्त देने का मतलब ये नहीं कि बस आप हाथों में हाथ डाले दिन-रात चिपके रहें, बल्कि जब भी ज़रूरत हो तो सामनेवाले को येभरोसा रहे कि आप उनके साथ हो. 
  • रिश्ते में अकेलापन महसूस न हो. अक्सर ऐसा होता है कि किसी के साथ रहते हुए भी हम अकेलापन महसूस करते हैं, क्योंकिरिश्तों से हम जिस सहारे की उम्मीद करते हैं वो नहीं मिलता. ऐसे में मन में यही ख़याल आता है कि ऐसे रिश्ते से तो हम अकेले हीअच्छे थे. इसलिए बेहतर होगा अपने रिश्तों में ऐसा अकेलापन और ठंडापन न आने दें.
  • साथ-साथ होकर भी दूर-दूर न हों. हो सकता है आप शारीरिक रूप से साथ हों लेकिन अगर मन कहीं और है, ख़याल कहीं और हैतो ऐसे साथ का कोई मतलब नहीं. इसलिए जब भी साथ हों पूरी तरह से साथ हों,
  • पास-पास बैठे होने पर भी एक-दूसरे के बीच खामोशी न पसरी हो. क्या आपका रिश्ता उस हालत में आ चुका है जहां आपकेबीच कहने-सुनने को कुछ बचा ही नहीं? ये ख़ामोशी दस्तक है कि आप अपने रिश्तों को अब समय दें और इस ख़ामोशी को तोड़ें.
  • अपनी-अपनी अलग ही दुनिया में मशगूल न हों. आप अपने-अपने कामों और दोस्तों में व्यस्त हैं लेकिन अपनों के लिए ही अपनेसमय का एक छोटा सा हिस्सा भी न हो आपके पास तो दूरियां आनी लाज़मी है. इससे बचें. अपनी दुनिया में अपनों को भीशामिल रखें और उनके लिए हमेशा आपकी दुनिया में एक ख़ास जगह होनी ही चाहिए.
  • अपने कामों में इतना मसरूफ न हों कि रिश्तों के लिए वक्त ही न हो.माना आज की लाइफ़ स्टाइल आपको बिज़ी रखती हैलेकिन क्या आप इतने बिज़ी हैं कि अपने रिश्तों तक के लिए समय नहीं बचता आपके पास? जी नहीं, ऐसा नहीं होता बस हमारीप्राथमिकताएं बदल गई होती हैं. 
  • लेकिन ध्यान रखें कि अपने रिश्तों को अपनी प्राथमिकता की सूची में सबसे ऊपर की जगह दें वरना हर तरफ़ से अकेले हो जाएंगे.
  • अपनी डिजिटल दुनिया में अलग सी अपनी दुनिया न बसा लें. सोशल मीडिया पर आपके दोस्त होंगे, उनसे चैटिंग भी होती होगीलेकिन ध्यान रखें कि ये दुनिया एक छलावा है और हक़ीक़त से कोसों दूर. यहां धोखा खाने की गुंजाइश सबसे ज़्यादा होती है. आपको जब ज़रूरत होगी या जब आप मुसीबत में होंगे तो आपके अपने रियल लाइफ़ के रिश्ते ही आपके साथ होंगे न किडिजिटल दुनिया के रिश्ते. इसलिए एक सीमित तक ही डिजिटल दुनिया से जुड़ें.
  • रिश्तों को क्वांटिटी की बजाय क्वालिटी टाइम दें. दिन-रात साथ रहने को साथ होना नहीं कहा जा सकता बल्कि जब भी साथ होंतो पूरी तरह से साथ हों. एक-दूसरे को स्पेशल फ़ील कराएं. कुछ स्पेशल करें. यूं ही बैठकर कभी पुरानी बातें याद करें, कभीएक-दूसरे को रोमांटिक गाना गाकर सुनाएं या कभी कोई अपनी सीक्रेट फैंटसीज़ के बारे में बताएं. साथी की फ़िक्र हो, ज़िम्मेदारीका एहसास हो, दूर रहने पर भी कनेक्शन फ़ील हो, हाल-चाल जानों- यही मतलब है क्वालिटी का.
  • दूर होकर भी पास होने का एहसास जगाएं. ऑफ़िस में हों या टूर पर रोमांस और कम्यूनिकेशन कम न हो. आप कैसे और कितनाएक-दूसरे को मिस करते हो ये बताएं. आपकी दोनों एक-दूसरे की लाइफ़ में कितना महत्व रखते हैं ये फ़ील कराएं.
  • फ़ोन पर बात करें या मैसेज करें. माना आप काम में बिज़ी हैं पर फ़ोन करके तो हाई-हेलो कर ही सकते हैं. लंच टाइम में तो कॉलकर ही सकते हैं. फ़ोन नहीं तो मैसेज ही करें पर कनेक्टेड रहें.
  • रात को साथ बैठकर खाना खाएं. दिनभर तो वक्त नहीं मिलता लेकिन रात का खाना तो साथ खाया ही जा सकता है. और खानाखाते वक्त मूड हल्का रखें, पॉज़िटिव मूड के साथ पॉज़िटिव बातें करें.
  • दिनभर की बातें बताएं, शेयर करें. सोने से पहले रोज़ दस-पंद्रह मिनट का वक्त दिनभर की बातें करने, बताने और शेयरिंग के लिए रखें.
  • केयरिंग की भावना जगाएं. प्यार और रोमांस अपनी जगह है लेकिन केयर की अपनी अलग ही जगह होती है रिश्तों में. बीमारी मेंडॉक्टर के पास खुद ले जाना, घर का काम करना, अपने हाथों से खाना खिलाना- ये तमाम छोटी-छोटी चीजें रिश्तों को मज़बूतबनाती हैं.
  • तबीयत का हाल पूछें, कोई परेशानी हो तो उसका सबब जानें. ज़रूरी नहीं कि बीमारी में ही हाल पूछा जाए, कभी यूं ही हल्कासिर दर्द होने पर भी पूछा जा सकता है कि आराम आया या नहीं… फ़िक्रमंद होना ठीक है पर इस फ़िक्र को दर्शाना भी ज़रूरी है.
  • काम और ज़िम्मेदारियां बांटें. रिश्तों में एक-दूसरे का बोझ हल्का करना बेहद ज़रूरी है. 
  • वीकेंड को स्पेशल बनाएं. बाहर से खाना मंगावाएं या डिनर पर जाएं. मूवी प्लान करें या यूं ही वॉक पर जाएं. 
  • फैमिली हॉलिडेज़ प्लान करें. ये आपको ही नहीं आपके रिश्तों को भी रिफ़्रेश कर देती हैं. ज़रूरी नहीं किसी बड़ी या महंगी जगहपर ही जाया जाए. आसपास के किसी रिज़ॉर्ट या हॉलिडे होम में भी क्वालिटी वक्त बिताया जा सकता है.
  • बात करें, परेशनियां बांटें, राय लें. सामनेवाला परेशान लग रहा है तो खुद अंदाज़ा लगाने से बेहतर है बात करें और उनकी परेशानीया मन में क्या चल रहा है ये जानें और उसे दूर करने में मदद करें.
  • काम की ही तरह अपने रिश्तों को भी अहमियत दें और उनके लिए भी अलग से समय निकालें. 
  • धोखा न दें और रिश्तों में झूठ न बोलें. 
  • सम्मान दें और ईर्ष्या व ईगो से दूर रहें. 
  • सेक्स लाइफ़ को इग्नोर न करें. इसे स्पाइसी बनाए रखने के लिए कुछ नया ज़रूर ट्राई करते रहें. लेकिन सेक्स मशीनी क्रिया नहो, उसमें प्यार और भावनाओं का होना सबसे ज़रूरी है.
  • भोलू शर्मा 

आजकल हर रिश्ते में एक शब्द ज़रूरत ज़्यादा ही ऐड हो गया है और वो है स्पेस. पैरेंट्स कुछ पूछें तो हम स्पेस का हवाला देते हैं, भाई-बहन एक-दूसरे के सामान को हाथ लगाएं तो हम स्पेस को हथियार बना लेते हैं और अब ये स्पेस नाम का भूत पति-पत्नी के रिश्ते में भी घुस आया है. किसी भी सवाल से बचने के लिए हम कह देते हैं प्लीज़ थोड़ा स्पेस दो. आख़िर रिश्तों में स्पेस कितना ज़रूरी है और कितना नहीं? और कहीं इस स्पेस की आड़ में पार्टनर आपसे छल तो नहीं कर रहे? इन बातों पर गौर करना ज़रूरी है.

  • ये माना कितना भी करीबी रिश्ता हो उसमें एक मर्यादा होनी ही चाहिए लेकिन ये मर्यादा या सीमा तय कौन करेगा?
  • हम अपनी सुविधानुसार इसको बार-बार बदलते रहते हैं.
  • स्पेस ज़रूरी है ताकि रिश्ते में दम न घुटे, लेकिन इतनी ज़्यादा छूट न हो कि रिश्ता ही दम तोड़ दे.
  • दोस्तों से बात करने, मिलने-जुलने और पार्टी करने की छूट सही है.
  • सहेलियों संग मौज-मस्ती, हॉलिडे, मूवी, शॉपिंग पर ज़रूर जाना चाहिए. इसे ज़रूरी स्पेस कहेंगे.
  • अपने परिवार के लिए अपनी मर्ज़ी से कोई निर्णय लेने या कुछ अच्छा करने की छूट ज़रूरी है.
  • अपने पैसों को एक हद तक खर्च करने की भी छूट ठीक है.
  • लेकिन अपने निर्णय हर बार थोप देना ग़लत है, ये सामनेवाले के स्पेस में दख़ल है.
  • आपका पार्टनर आपकी ही मर्ज़ी से और आपकी ही पसंद का खाए, पहने और आपके अनुसार ही दिनचर्या रखे… ये भी स्पेस में दख़ल है.
  • आप जब भी फ़ोन करे उसे उठाना ही होगा चाहे वो काम में ही व्यस्त क्यों न हो और न उठाने पर उससे सौ सवाल व शक करें- ये भी स्पेस में दख़ल है. इनसे आपका रिश्ता कमज़ोर व घुटन भरा होगा. क्योंकि आप अपने पार्टनर को वाक़ई में स्पेस नहीं दे रहे.
  • लेकिन एक-दूसरे से बातें छिपाना स्पेस नहीं, चोरी है.
  • अपने-अपने फ़ोन को सिर्फ़ इसलिए लॉक करना कि कहीं पार्टनर चेक न कर ले, स्पेस नहीं छल है.
  • अपने सोशल मीडिया को छिपाना या उसका पासवर्ड न बताना भी स्पेस नहीं कपट है.
  • आख़िर पति-पत्नी का रिश्ता इतना करीबी होता है कि उसमें छुपाने जैसा कुछ होना ही नहीं चाहिए.
  • ये माना हर पल एक-दूसरे के सिर पर सवार रहना या बस सवाल ही करते रहना ग़लत है, वहां ज़रूर आप अपने स्पेस की मांग कर सकते हैं.
  • अगर पार्टनर बिना वजह शक या जासूसी ही करे तब भी स्पेस की ज़रूरत जायज़ है.
  • लेकिन कई बार इसी स्पेस के नाम पर लोग रिश्तों को छलते हैं. ऐसे में आपको भी सतर्क रहना होगा कि कहीं आपके साथ तो ऐसा नहीं हो रहा?

कहीं स्पेस के नाम पर आपके साथ छलावा तो नहीं हो रहा?

  • अरे तुमने मेरे फ़ोन को हाथ क्यों लगाया, इतनी समझ नहीं कि किसी का फ़ोन ऐसे नहीं देखते… अगर आपका पार्टनर ऐसा कहे तो समझ जाएं कि वो कुछ छिपा रहा है.
  • अगर वो सोशल मीडिया पर काफ़ी वक्त बिताता है और आपसे अपना अकाउंट हाइड करके रखता है तो ज़रूर दाल में कुछ काला है.
  • अपने लैपटॉप का पासवर्ड बदलता रहता है कि कहीं आप ओपन न कर लें तो ये भी ग़लत है.
  • अक्सर ऑफ़िस से देर घर आता है और वीकेंड में भी बहाने बनाकर बाहर जाता है तो ये सही नहीं.
  • आपके द्वारा कुछ भी सवाल करने पर यही कहता है कि पर्सनल स्पेस में दखल मत दो तो वो स्पेस की आड़ में धोखा कर रहा है.
  • क्या पार्टनर ज़रूरत से ज़्यादा घर से बाहर वक्त बिताने लगा?
  • क्या उसका फ़ोन अक्सर नॉट रीचेबल मिलने लगा?
  • क्या आपके साथ वक्त कम बिताने लगा?
  • अपने में ही खोया रहने लगा और अपने लुक्स व फ़िटनेस को लेकर ज़्यादा अलर्ट हो गया?
  • फ़ोन को लॉक रखने लगा और बार-बार पासवर्ड बदलने लगा?
  • आपके सवालों से खीजने लगा और हर सवाल पर बस स्पेस की बात कहने लगा?
  • मुझे मेरा स्पेस चाहिए, तुम्हारे हर सवाल का जवाब नहीं… इतने सवाल मत करो… क्या इस तरह की बातें करने लगा?
  • आपसे कतराने व सवालों से बचने लगा और गोल-मोल उलझे से जवाब देने लगा?
  • ये तमाम बातें इशारा करती हैं कि स्पेस की मांग आख़िर क्यों बढ़ रही है…

क्या करें जब बात स्पेस की हो?

  • आपको पार्टनर को ये बताना होगा कि ये स्पेस में दखल नहीं आपका हक़ है.
  • आपको पूरा हक़ है ये जानने का कि वो सोशल मीडिया पर किसके साथ चैट करते हैं और किस तरह के दोस्त बनाते हैं.
  • क्या आप उनके इस बर्ताव से कम्फ़र्टेबल हो? अगर कहीं कुछ असहज लगे तो आपका सवाल करना बनता है.
  • आपको उनके फ़ोन को छूने का और पासवर्ड जानने का भी पूरा हक़ है.
  • स्पेस का मतलब ये नहीं कि कोई आपस में सवाल-जवाब ही न हों.
  • रिश्ते में जवाबदेही बनती है. स्पेस की आड़ में कोई बच नहीं सकता इससे.
  • बेहतर होगा कि आप दोनों मिलकर अपना स्पेस तय करें जिसमें दोनों सहज हों और कोई छल-कपट न हो.
  • ऐसा न हो कि बस हर बात पर एक की ही मर्ज़ी चले.
  • अपनी पसंद दूसरे पर न थोपें.
  • अगर पार्टनर आपकी किसी आदत से परेशान है, जैसे- ज़रूरत से ज़्यादा शॉपिंग, फ़िज़ूलखर्ची, ज़्यादातर घर से बाहर रहना और वो अगर इसको लेकर आपसे सवाल करे और आपको अपनी आदतों को बदलने को कहे तो ये स्पेस में दख़ल नहीं बल्कि उनका हक़ है.
  • इसी तरह किसी अन्य बुरी आदत या लत पर टोकना-समझाना भी ग़लत नहीं.एक-दूसरे को समझाएं भी, सपोर्ट भी करें, बेहतर करने की दिशा में साथ भी दें, पर एक-दूसरे को अपनी प्रॉपर्टी समझना और उसको अपने अनुसार ही चलाना ग़लत है.
  • एक-दूसरे के प्रति विश्वास बढ़ाएं ताकि स्पेस मांगने की नौबत ही न आए.
  • भरोसा करें और भरोसा जीतें ताकि स्पेस नाम का शब्द आपके रिश्ते के बीच न आए.
  • पिंकी शर्मा

भीगते मौसम में रिश्तों की गर्माहट और सुहानी लगती है लेकिन वक़्त के साथ-साथ रिश्ते ठंडे पड़ते जाते हैं और उनकी गर्माहट खोने लगती है. तो क्यों न इस बारिश में अपने रिश्तों की खोई गर्माहट वापस पाने की कोशिश करें और बनाएं उनको लीक प्रूफ ताकि वो बने रहें मज़बूत और टिकाऊ.

रिश्तों को बचाएं इन दरारों और दीमकों से और प्यार से सींचें अपने रिश्तों को 

ईगो में न डूबने दें अपने रिश्तों को: रिश्तों में हमेशा प्यार और अपनापन ज़रूरी होता है, लेकिन हम अपने अहम के चलते उनको कमज़ोर और खोखला बना देते हैं. रिश्ते लीकप्रूफ तभी होंगे जब हम झुककर चलेंगे. अपनों की ख़ातिर झुकने में आख़िर बुराई ही क्या है? गलती न होने पर भी अगर एक सॉरी कह देने से काम बनता है तो हर्ज़ ही क्या है? अपनों को कभी-कभार थैंक यू कह देने से उनके चेहरों पर मुस्कान खिल जाती है तो कह देने में भी भलाई है. ईगो आपको सिर्फ़ अहंकारी और तनहा ही करेगा. बेहतर होगा इसे रिश्तों में पनपने न दें.

क्या करें: अपनों की ख़ुशी में खुद भी खुश होकर देखें. ज़िंदगी हल्की और आसान लगेगी. खुद को सबसे श्रेष्ठ और दूसरों को कम आंकने का भ्रम मन में न पालें. इंसानी कमज़ोरियां सभी में होती हैं और आप व आपके अपने भी इससे अछूते नहीं. हर बार आपकी ही बात सही है और वो ही फ़ाइनल है इस सोच से उबरें. दूसरों की सोच, उनके सुझाव व निर्णयों को भी महत्व दें.

क्रोध की आंधी से बचाएं अपने रिलेशनशिप को: ग़ुस्सा इंसानी स्वभाव का हिस्सा है और ये स्वाभाविक है लेकिन ग़ुस्से मेंअपने रिश्तों को नुक़सान पहुंचाने से हमेशा बचें. कभी वाद-विवाद में ऐसी कोई बात न कह दें जिससे सामने वाला हर्ट हो जाए और ग़ुस्से में कही कोई छोटी सी बात हमेशा के लिए मन में घर कर जाए. वक़्त के साथ यही छोटी सी बात रिश्तों में सुराख़ कर सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि उसे लीकेज से बचाया जाए.

क्या करें: जब कभी झगड़ा या विवाद हो तो दिमाग़ ठंडा रखने की कोशिश करें और अपना आपा न खोएं. बेहतर होगा किउस वक़्त कम बोलें और अपना ध्यान अन्य बात या काम पर लगाएं. जब मन शांत हो जाए तब अपने विवादों को सुलझाएं. क्योंकि क्रोध में चीज़ें अलग दिखती हैं और सच्चाई कोसों दूर. जब दिमाग़ ठंडा हो जाता है तब पता चलता है कि ये तो ज़रा सी बात थी जिस पर हम बेवजह आग-बबूला हो रहे थे.

अविश्वास के झोंकों को हावी न होने दें: किसी भी बात को लेकर अविश्वास पैदा हो तो उसे फ़ौरन बातचीत से दूर कर लें क्योंकि एक बार ये मन में घर कर जाए तो यही अविश्वास धीरे-धीरे शक बन जाता है और जैसाकि कहते हैं शक का तोकोई इलाज होता ही नहीं है. बेहतर होगा समय रहते इस अविश्वास को दूर करें और भरोसा करना सीखें.

क्या करें: बात करें, अपने मन की शंकाओं को डिसकस करें और एक ही दिशा में अपनी सोच के घोड़े न दौड़ाएं. शेयर करें क्योंकि शेयरिंग से ही केयरिंग बढ़ती है और शक-शंकाएं दूर होती हैं. 

धोखे के तूफ़ान से रिश्तों को ख़राब न करें: धोखा किसी भी तरह का हो सकता है. ज़रूरी नहीं कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर ही हो, पैसों को लेकर या झूठ बोलना भी एक तरह का धोखा ही है. रिश्तों में चीटिंग की कोई जगह नहीं होती.

क्या करें: बस धोखा न दें. झूठ और फ़रेब न करें. रिश्तों की बुनियाद सच्चाई पर ही टिकी होती है. सच चाहे जितना कड़वा हो कभी रिश्तों में उसे छिपाएं नहीं. पैसों को भी कभी अपने रिश्तों व उनकी सच्चाई पर हावी न होने दें. अपनी समस्या और अपना मन अपनों के साथ बांटें इससे रिश्ते मज़बूत होंगे. किसी बाहरवाले से कोई बात पता चले और आप झूठे साबित हों उससे बेहतर है खुद ही सच का सामना करें. 

ईर्ष्या के सैलाब को समय रहते पहचानें: अपनों से भला कैसी जलन? लेकिन अक्सर साथ रहते-रहते ये भावना खुद ब खुद पैदा हो जाती है और हमें नकारात्मक बनाने लगती है. अपनों की ही तारीफ़ और उनकी कामयाबी हमसे बर्दाश्त नहीं होती और हम कुढ़ने लगते हैं. 

क्या करें: अपनों में अपनी झलक देखें. उनके हुनर को सराहें और कामयाबी में खुद की कामयाबी को देखें. रिश्तों का तोमतलब ही यही होता है. कभी किसी और के सामने अपनों को नीचा दिखाने, ताने देने या उनको कमतर दर्शाने की कोशिशन करें. उनकी कमज़ोरियों को बाहर लाकर खुद को बेहतर साबित करना आपके रिश्ते की नींव को खोखला ही करेगा. 

इस मॉनसून ऐसा क्या करें कि रिश्ते लीकप्रूफ़ हो जाएं? 

  • सबसे पहले इस रोमांटिक मौसम में अपने रिश्तों में रोमांच और रोमांस वापस लाकर उस पर प्यार की सील लगाएं.
  • अपनी सेक्स लाइफ़ रिवाइव करें. 
  • अपनी ज़िंदगी से बोरियत हटाएं और ताज़गी लाएं.
  • छोटे-छोटे एफ़र्ट्स लें. 
  • बारिश में एक साथ भीगने का आनंद उठाएं.
  • साथ बेठकर चाय-पकौड़े खाएं. 
  • जोक्स सुनाएं. 
  • पुरानी यादों को ताज़ा करें.
  • ड्राइव पर भी जा सकते हैं.
  • डिजिटल लाइफ़ से थोड़ा ब्रेक लें और रियल वर्ल्ड में ज़्यादा वक़्त बिताएं.
  • बारिश के गाने सुनें और सुनाएं. बरसात के गानों पर अंताक्षरी भी खेली जा सकती है.
  • अपने अन्य रिश्तों में भी केयरिंग का डोज़ बढ़ाएं और उन्हें लीकप्रूफ़ बनाएं. 
  • बस इतना ही काफ़ी है बरसात के इस प्यारे मौसम को और भी प्यारा और प्यार भरा बनाने के लिए.
  • गीता शर्मा 

शादी के कुछ समय बाद ही हम अपने रिश्ते को लेकर काफ़ी ढीला रवैया अपनाने लगते हैं, जिससे धीर-धीरे रिश्ता बोरिंग होने लगता है और हमारा अप्रोच काफ़ी कैज़ुअल. रिश्ते में से प्यार, स्पाइस और रोमांस ग़ायब सा होने लगता है, ऐसे में पता ही नहीं चलता कब रिश्ता हमसे दूर होकर छूटने लगता है, बेहतर होगा अपने रिश्ते को यहां तक पहुंचने ही न दिया जाए और उसको स्लो होने से बचाएं. यहां हम कुछ स्मार्ट तरीक़े बता रहे हैं जिससे आपका रिश्ता हमेशा बना रहेगा फ़्रेश और सुपर फ़ास्ट.

दोस्त बनें: शादी के बाद पति-पत्नी की बजाय दोस्तों की तरह सोचें और व्यवहार करें. अक्सर ऐसा होता है जो बातें हम पार्टनर से शेयर नहीं कर पाते वो दोस्तों से करते हैं, तो क्यों न आप ही एक-दूसरे के बेस्ट फ़्रेंड बन जाएं? शेयर और केयर करें और अपने पार्टनर का विश्वास जीत लें ताकि वो एक सच्चे दोस्त की तरह आपसे खुलकर हर बात करें.

लवर हैं आप: अपने रिश्ते को एक तरफ़ रख कर अपने अंदर के लवर को हमेशा जगाए रखें. डेट पर जाएं. सर्प्राइज़ दें, गिफ़्ट्स दें, कॉम्प्लिमेंट देने से न हिचकिचाएं. इससे आपका रिश्ता फ़्रेश रहेगा.

एडवेंचर एड करें: अपनी मैरिड लाइफ़ में थोड़ा स्पाइस लाने के लिए इसमें एडवेंचर का होना भी ज़रूरी है. आप एक एडवेंचरस ट्रिप प्लान कर सकते हैं, जैसे- आप दोनों एक-दूसरे से एकदम अनजान बन जाएं. एक पार्टनर घर से थोड़ा पहले निकलकर रास्ते में इंतज़ार करे और दूसरे पार्टनर की गाड़ी की देख लिफ़्ट मांगे, उसके बाद एकदम अजनबियों की तरह ऐसे बातें करें जैसे आपकी ये पहली मुलाक़ात है. फिर एक होटेल में अलग-अलग रुकें, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद पूछें, बातें करें… इससे पार्टनर की ऐसी कई दिलचस्प बातों के बारे में आपको पता चलेगा जिससे अब तक आप दोनों अनजान थे.

लव गेम्स खेलें: कुछ फन वाले लव गेम्स खेलें, जैसे- एक-दूसरे की आंखों में बिना पलकें झपकाए देखें, कौन पहले पलक झपकता है वो आउट होगा… अडल्ट सवाल-जवाब वाला क्विज़ खेलें… दोनों ये बेट लगाएं कि कौन बेटर किसर है और फिर एक-दूसरे को किस करें… ट्रूथ ऑर डेयर भी खेल सकते हैं… एक-दूसरे की वाइल्ड और वियर्ड फैंटसीज़ के बारे में पूछें… आप नेट पर भी सर्च कर सकते हैं गेम्स के बारे में.

अपनी सेक्स लाइफ़ में मसाला ऐड करें: बोरिंग सेक्स लाइफ़ में मसाला लाएं. न्यू सेक्स पोज़ीशन ही नहीं बल्कि न्यू प्लेसेज़ पर भी सेक्स ट्राई करें. अडल्ट मूवी साथ देखें. रूम और खुद को तैयार करें और रोमांटिक बनाएं, डर्टी टॉक्स करें. अपनी बॉडी को लेकर कॉन्शियस न हों बल्कि कॉन्फ़िडेन्स के साथ प्यार करें.

आज फिर उसे देखा… अपने हमसफ़र के साथ, उसकी बाहों में बाहें डाले झूम रही थी… बड़ी हसीन लग रही थी और उतनीही मासूम नज़र आ रही थी… वो खुश थी… कम से कम देखने वालों को तो यही लग रहा था… सब उनको आदर्श कपल, मेड फ़ॉर ईच अदर… वग़ैरह वग़ैरह कहकर बुलाते थे… अक्सर उससे यूं ही दोस्तों की पार्टीज़ में मुलाक़ात हो जाया करतीथी… आज भी कुछ ऐसा ही हुआ. 

मैं और हिना कॉलेज में एक साथ ही थे. उसे जब पहली बार देखा था तो बस देखता ही रह गया था… नाज़ों से पली काफ़ीपैसे वाली थी वो और मैं एक मिडल क्लास लड़का. 

‘’हाय रौनक़, मैं हिना. कुछ रोज़ पहले ही कॉलेज जॉइन किया है, तुम्हारे बारे में काफ़ी सुना है सबसे. तुम कॉलेज में काफ़ीपॉप्युलर हो, पढ़ने में तेज़, बाक़ी एक्टिविटीज़ में भी बहुत आगे हो… मुझे तुम्हारी हेल्प चाहिए थी…’’

“हां, बोलिए ना.”

“मेरा गणित बहुत कमजोर है, मैंने सुना है तुम काफ़ी स्टूडेंट्स की हेल्प करते हो, मुझे भी पढ़ा दिया करो… प्लीज़!”

“हां, ज़रूर क्यों नहीं…” बस फिर क्या था, हिना से रोज़ बातें-मुलाक़ातें होतीं, उसकी मीठी सी हंसी की खनक, उसके सुर्ख़गाल, उसके गुलाबों से होंठ और उसके रेशम से बाल… कितनी फ़ुर्सत से गढ़ा था ऊपरवाले ने उसे… लेकिन मैं अपनी सीमाजानता था… सो मन की बात मन में ही रखना मुनासिब समझा. 

“रौनक़, मुझे कुछ कहना है तुमसे.” एक दिन अचानक उसने कहा, तो मुझे लगा कहीं मेरी फ़ीलिंग्स की भनक तो नहीं लगगई इसे, कहीं दोस्ती तो नहीं तोड़ देगी मुझसे… मन में यही सवाल उमड़-घुमड़ रहे थे कि अचानक उसने कहा, “मुझे अपनाहमसफ़र मिल गया है… और वो तुम हो रौनक़, मैं तुमसे प्यार करती हूं!” 

मेरी हैरानी की सीमा नहीं थी, लेकिन मैंने हिना को अपनी स्थिति से परिचित कराया कि मैं एक साधारण परिवार कालड़का हूं, उसका और मेरा कोई मेल नहीं, पर वो अपनी बात पर अटल थी.

बस फिर क्या था, पहले प्यार की रंगीन दुनिया में हम दोनों पूरी तरह डूब चुके थे. कॉलेज ख़त्म हुआ, मैंने अपने पापा केस्मॉल स्केल बिज़नेस से जुड़ने का निश्चय किया जबकि हिना चाहती थी कि मैं बिज़नेस की पढ़ाई के लिए उसके साथविदेश जाऊं, जो मुझे मंज़ूर नहीं था. 

“रौनक़ तुम पैसों की फ़िक्र मत करो, मेरे पापा हम दिनों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे.” 

“नहीं हिना, मैं अपने पापा का सहारा बनकर इसी बिज़नेस को ऊंचाई तक के जाना चाहता हूं, तुम्हें यक़ीन है ना मुझ पर? मैं यहीं रहकर तुम्हारा इंतज़ार करूंगा.”

ख़ैर भारी मन से हिना को बाय कहा पर कहां पता था कि ये बाय गुडबाय बन जाएगा. हिना से संपर्क धीरे-धीरे कम होनेलगा था. वो फ़ोन भी कम उठाने लगी थी मेरा. मुझे लगा था कोर्स में व्यस्त होगी, लेकिन एक दिन वो लौटी तो देखा उसकीमांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र था… मेरी आंखें भर आई… 

“रौनक़, मुझे ग़लत मत समझना, जय से मेरी मुलाक़ात अमेरिका में हुई, उसने मुझे काफ़ी सपोर्ट किया, ये सपोर्ट मुझेतुमसे मिलना चाहिए था पर तुम्हारी सोच अलग है. जय का स्टैंडर्ड भी मुझसे मैच करता है, बस मुझे लगा जय और मैं एकसाथ ज़्यादा बेहतर कपल बनेंगे… पर जब इंडिया आई और ये जाना कि तुम भी एक कामयाब बिज़नेसमैन बन चुके हो, तोथोड़ा अफ़सोस हुआ कि काश, मैंने जल्दबाज़ी न की होती…” वो बोलती जा रही थी और मैं हैरान होता चला जा रहा था… “रौनक़, वैसे अब भी कुछ बिगड़ा नहीं है, हम मिलते रहेंगे, जय तो अक्सर टूर पर बाहर रहते हैं तो हम एक साथ अच्छाटाइम स्पेंड कर सकते हैं…” 

“बस करो हिना, वर्ना मेरा हाथ उठ जाएगा… इतनी भोली सूरत के पीछा इतनी घटिया सोच… अच्छा ही हुआ जो वक़्त नेहमें अलग कर दिया वर्ना मैं एक बेहद स्वार्थी और पैसों से लोगों को तोलनेवाली लड़की के चंगुल से नहीं बच पाता… तुममेरी हिना नहीं हो… तुम वो नहीं, जिससे मैंने प्यार किया था, तुमको तो मेरी सोच, मेरी मेहनत और आदर्शों से प्यार हुआकरता था, इतनी बदल गई तुम या फिर नकाब हट गया और तुम्हारी असली सूरत मेरे सामने आ गई, जो बेहद विद्रूप है! तुम मुझे डिज़र्व करती ही नहीं हो… मुझे तो धोखा दिया, जय की तो होकर रहो! और हां, इस ग़लतफ़हमी में मत रहना किमैं तुम जैसी लड़की के प्यार में दीवाना बनकर उम्र भर घुटता रहूंगा, शुक्र है ऊपरवाले ने मुझे तुमसे बचा लिया…”

“अरे रौनक़, यार पार्टी तो एंजॉय कर, कहां खोया हुआ है…?” मेरे दोस्त मार्टिन ने टोका तो मैं यादों से वर्तमान में लौटा औरफिर डान्स फ़्लोर पर चला गया, तमाम पिछली यादों को हमेशा के लिए भुलाकर, एक नई सुनहरी सुबह की उम्मीद केसाथ!

  • गीता शर्मा 

“आप मेरी सीट पर बैठे हैं मिस्टर… “ 

“जी शशिकांत… यही नाम है मेरा और हां, सॉरी आपकी विंडो सीट है आप यहां बैठ जाइए , मैं अपनी साइड सीट पर बैठजाता हूं!”

“शुक्रिया”

“वेल्कम मिस…?”

“जी नेहा नाम है मेरा…” पता नहीं क्यों उस मनचले टाइप के लड़के से मैं भी फ़्रेंडली हो गई थी. मैं बस के रास्ते से मसूरी जारही थी और उसकी सीट भी मेरी बग़ल में ही थी, रास्तेभर उसकी कमेंट्री चल रही थी… 

“प्रकृति भी कितनी ख़ूबसूरत होती है, सब कुछ कितना नपा-तुला होता है… और एक हम इंसान हैं जो इस नाप-तोल को, प्रकृति के संतुलन को बस बिगाड़ने में लगे रहते हैं… है ना नेहा… जी”

मैं बस मुस्कुराकर उसकी बातों का जवाब दे देती… मन ही मन सोच रही थी कब ये सफ़र ख़त्म होगा और इससे पीछाछूटेगा… इतने में ही बस अचानक रुक गई, पता चला कुछ तकनीकी ख़राबी आ गई और अब ये आगे नहीं जा सकेगी… शाम ढल रही थी और मैं अकेली घबरा रही थी… 

“नेहा, आप घबराओ मत, मैं हूं न आपके साथ…” शशि मेरी मनोदशा समझ रहा था लेकिन था तो वो भी अनजान ही, आख़िर इस पर कैसे इतना भरोसा कर सकती हूं… ऊपर से फ़ोन चार्ज नहीं था… 

“नेहा आप मेरे फ़ोन से अपने घरवालों को कॉल कर सकती हैं, वर्ना वो भी घबरा जाएंगे…” शशि ने एक बार फिर मेरे मनको भांप लिया था… 

मैंने घर पर बात की और शशि ने भी उनको तसल्ली दी, शशि फ़ौज में था… तभी शायद इतना ज़िंदादिल था. किसी तरहशशि ने पास के छोटे से लॉज में हमारे ठहरने का इंतज़ाम किया. 

मैं शांति से सोई और सुबह होते ही शशि ने कार हायर करके मुझे मेरी मंज़िल तक पहुंचाया… 

“शुक्रिया दोस्त, आपने मेरी बहुत मदद की, अब आप अंदर चलिए, चाय पीकर ही जाना…” मैंने आग्रह किया तो शशि नेकहा कि उनको भी अपने घर जल्द पहुंचना है क्योंकि शाम को ही उनको एक लड़की को देखने जाना है रिश्ते के लिए… 

“कमाल है, आपने पहले नहीं बताया, मुबारक हो और हां जल्दी घर पहुंचिए…” मैंने ख़ुशी-ख़ुशी शशि को विदा किया. 

“नेहा, बेटा जल्दी-जल्दी फ्रेश होकर अब आराम कर ले, शाम को तुझे लड़केवाले देखने आनेवाले हैं…” मम्मी की आवाज़सुनते ही मैं भी जल्दी से फ्रेश होकर आराम करने चली गई.

शाम को जब उठी तो देखा घर में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था… 

“मम्मी-पापा क्या हुआ? आप लोग ऐसे उदास क्यों बैठे हो?”

“नेहा, पता नहीं बेटा वो लड़केवाले अब तक नहीं आए और उनके घर पर कोई फ़ोन भी नहीं उठा रहा…” पापा ने कहा तोमैंने उनको समझाया, “इतनी सी बात के लिए परेशान क्यों हो रहे हो, नेटवर्क प्रॉब्लम होगा और हो सकता है किसी वजहसे वो न आ पाए हों… कल या परसों का तय कर लेंगे…” ये कहकर मैं अपने रूम में आ गई तो देखा फ़ोन चार्ज हो चुकाथा. ढेर सारे मैसेज के बीच कुछ तस्वीरें भी थीं जो पापा ने मुझे भेजी थीं… ओपन किया तो मैं हैरान थी… ये तो शशि कीपिक्स हैं… तो इसका मतलब शशि ही मुझे देखने आनेवाले थे… मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई लेकिन थोड़ी देर बाद ही येख़ुशी मातम में बदल गई जब शशि के घर से फ़ोन आया कि रास्ते में शशि की कैब पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें वोशहीद हो गए थे… 

मेरी ख़ुशियां मुझे मिलने से पहले ही बिछड़ गई थीं… मैंने शशि के घर जाने का फ़ैसला किया, पता

चला कि उन्होंने मेरी तस्वीरें देख कर मुझे पसंद भी कर लिया था और हमारी उस छोटी सी मुलाक़ात के बाद अपनेघरवालों को हां भी कह दिया था, मुझे सरप्राइज़ करने के लिए मुझे इसकी भनक नहीं लगने दी थी. 

आज मैं भी एक आर्मी ऑफ़िसर हूं और शशि व अपनी फ़ैमिली का पूरा ख़याल रख रही हूं, शशि के हर सपने को साकारकरने की कोशिश में हूं और हां, मैं दुखी नहीं हूं क्योंकि मैं जानती हूं शशि मेरे साथ हैं… उस छोटी सी मुलाक़ात ने मेरीज़िंदगी, मेरे जीने का मक़सद ही बदल दिया था… उस छोटी सी मुलाक़ात ने मुझे प्यार करना और प्यार निभाना एक पल मेंसिखा दिया था… 

  • गीता शर्मा 

हर रिश्ते की अपनी खूबसूरती होती है और उसी के साथ-साथ हर रिश्ते की अपनी मर्यादा भी होती है. कहते हैं रिश्ता तभीज़्यादा टिकाऊ होता है जब आप उसमें कुछ छूट यानी स्पेस या आज़ादी देते हैं और वहीं ये भी सच है कि कुछ ज़्यादा हीकैज़ुअल अप्रोच आपके रिश्ते के लिए घातक भी साबित हो सकती है. पति-पत्नी का रिश्ता भी ऐसा ही प्यारा सा रिश्ता है, जिसमें विश्वास, दोस्ती और मर्यादा का समन्वय ज़रूरी होता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए इसमें दोस्ती का पुट ज़्यादा होना चाहिए या फिर शिष्टाचार का पालन ज़्यादा करना चाहिए?

  • पति-पत्नी के बीच दोस्ताना व्यवहार अच्छा तो है लेकिन सात फेरों के बंधन में बंधने के बाद वो रिश्ता थोड़ा बदलजाता है. 
  • इस रिश्ते को सम्मान और लिहाज़ से सींचना पड़ता है.
  • इसमें विश्वास की नींव डालनी पड़ती है. 
  • इसमें प्यार और दोस्ती भी निभानी पड़ती है. 
  • ऐसे में आप या हम कोई एक दायरा नहीं बना सकते कि क्या कम हो और क्या ज़्यादा, क्योंकि हर कपल अलग होता है. उसकी सोच और अपने रिश्ते से उम्मीद भी अलग ही होती है. 
  • हां इतना ज़रूर हम तय कर सकते हैं कि इस रिश्ते में दोस्ती कब और कैसे निभाई जाए और शिष्टाचार का पालन कब और कितना किया जाए.
  • ज़ाहिर से बात है कि अगर आप दोनों दोस्त नहीं बनेंगे तो आपका रिश्ता महज़ औपचारिक बनकर रह जाएगा, जिसमें एक झिझक और संकोच हमेशा बना रहेगा. 
  • ऐसे में न खुलकर दिल की बात शेयर कर सकेंगे, न एक साथ मिलकर हंस सकेंगे और न दोस्तों की तरह शिकायतेंकर सकेंगे, इसलिए दोस्ती पहला स्टेप है पति-पत्नी के रिश्ते की बुनयाद को मज़बूती देने की तरफ़. 
  • एक दोस्त की तरह उनका दुःख बांटें, उनका विश्वास जीतें. पता है लोग अपने प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी से जोबातें शेयर करने से झिझकते हैं वो बातें वो खुलकर अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं, इसकी वजह जानते हैं? क्योंकि लगभग सभी का ये मानना है कि दोस्त हमें जज नहीं करते, वो हमें और हमारी कमज़ोरियों को बेहतर तरीक़ेसे समझते हैं.
  • यही वजह है कि आपको सबसे पहले अपने पार्टनर को हर बात पर जज करना, परखना बंद करना होगा और उसकीजगह उनको समझना शुरू करना होगा, ताकि आप ही एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन जाएं.
  • अगर पति को कोई कलीग खूबसूरत और स्टाइलिश लगती है तो वो खुलकर कह सके बिना इस डर के कि आप इसआधार पर उनके चरित्र को जज न करें बल्कि ये सोचें कि ये तो इंसानी फ़ितरत है, आपके पार्टनर आपसे शेयर तोकर रहे हैं.
  • इसी तरह अगर पत्नी भी अपने किसी मेल दोस्त या कलीग की सराहना करती है तो पति को उसे स्पोर्टिंगली लेना चाहिए. 
  • आपका रिश्ता ऐसा होना चाहिए जिसमें छोटी-छोटी बातों से आपको परखे जाने का डर न हो. इन बातों से आपके रिश्ते पर असर न हो. इस तरह से दोस्ती का एक रिश्ता आपको क़ायम करना चाहिए. 
  • वहीं दूसरी ओर ये भी न हो कि रिश्ते में आप दोनों इतने बेपरवाह हो जाएं कि बस सिर्फ़ दोस्त ही बनकर रह जाएं. 
  • शिष्टाचार का मतलब ये न निकालें कि रिश्ते को औपचारिक बना लें. 
  • लेकिन हां, एक-दूसरे का सम्मान करें. 
  • दूसरों के सामने एक-दूसरे को बेवजह टोकें नहीं. 
  • सॉरी, थैंक्यू और प्लीज़ जैसे मैजिक वर्ड्स का इस्तेमाल न स़िर्फ शिष्टता दर्शाता है, बल्कि रिश्ते को मज़बूत भी बनाता है.
  • इसलिए आपसी बातचीत में शब्दों का चयन भी बहुत मायने रखता है.
  • ध्यान रहे आप एक-दूसरे के पार्टनर हैं न कि गार्जियन, इसलिए स्कूलिंग न करें एक-दूसरे की.
  • एक-दूसरे की सलाह लें, हर छोटे-बड़े मसले पर. 
  • शेयर करें, केयर करें. 
  • पार्टनर की राय का सम्मान करें. 
  • एक-दूसरे से परिवार वालों को भी रेस्पेक्ट दें. 
  • दूसरों के सामने बहुत ज़्यादा सवाल-जवाब न करें, अगर कहीं कोई संदेह है तो अकेले में बात करें. 
  • एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाना भी शिष्टाचार है और शादी में ये बहुत ज़रूरी है.
  • अपनों से बात करते वक़्त हम अक्सर अपने शब्दों के चयन पर ध्यान नहीं देते. हम यह सोचते हैं कि अपनों के साथ क्या औपचारिकता करना और इसी सोच के चलते हम अक्सर शिष्टता भूल जाते हैं. 
  • चाहे अपने हों या अन्य लोग, तमीज़ से, प्यार से बात करेंगे, तो सभी को अच्छा ही लगेगा. अपनों के साथ तो और भीसतर्क रहना चाहिए, क्योंकि हमारे द्वारा कहा गया कोई भी कटु शब्द उन्हें ज़्यादा हर्ट कर सकता है, जिससे मन-मुटाव हो सकता है.
  • गलती होने पर माफ़ी मांगने से पीछे न हटें. अपने ईगो को एक तरफ़ रखकर यही सोचें कि गलती किसी से भी होसकती है, अगर आपसे भी हुई है तो पार्टनर से माफ़ी मांगें. 
  • इसके अलावा खाने-पीने से संबंधित शिष्टाचार भी ज़रूरी है. बहुत ज़्यादा आवाज़ करके या जल्दी-जल्दी न खाएं. 
  • पर्सनल हाईजीन यानी खुद को साफ़-स्वच्छ रखना भी शिष्टता में आता है. अपने पार्टनर और रिश्ते के प्रति इतनेबेपरवाह न हो जाएं कि अपनी ओर ध्यान ही न दें. पार्टनर भले ही कहें नहीं लेकिन उनको भी ये पसंद नहीं आएगा, इसलिए पर्सनल हाईजीन से लेकर ओरल हाईजीन का भी ख़याल रखें. 
  • कुल मिलाकर दोस्ती और शिष्टाचार के बीच एक सामंजस्य, समन्वय और संतुलन ही रिश्ते की सफलता की चाभी है.
  • हनी शर्मा 

शाम को मैं कॉलेज से आज जल्दी ही निकल गई. आर्ट गैलरी में मेरे पसंदीदा चित्रकार आदित्य के चित्रों की एकल प्रदर्शनी लगी है, तो मैं अपने आप को रोक न सकी. कुछ सालों से मैं आदित्य जी के चित्रों को पत्र-पत्रिकाओं में देखती आ रही हूं और उनके चित्रों ने गहराई तक मेरे मन को प्रभावित किया है. कार आर्ट गैलरी की ओर जा रही थी और मन तीस वर्षपूर्व की ओर भाग रहा था. पता नहीं क्यों आज मुझे अपने पहले प्यार उदय की बहुत याद आ रही है.

उन दिनों मैं अपने मामाजी के घर रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी. बचपन में ही मैं अपने माता-पिता को खो चुकी थी. निसंतान मामा-मामी ने ही मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया था. उदय नाम का युवक मामाजी के घर के ऊपरी हिस्से में किराए पर रहने आया था. वह कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. हमारे बीच कोई बातचीत नहीं होती थी, बस आते-जाते नज़रें टकरा जाती थी और हल्की-सी मुस्कान दोनों के चेहरे पर दौड़ जाती थी. उसके गंभीर और शांत चेहरे पर कुछ बात ज़रूर थी, जो मुझे बरबस अपनी ओर खींच रही थी. एक बार देखने के बाद घंटों उसका चेहरा आंखों के सामने घूमता रहता था. 

सर्दी के दिन थे. उस दिन कॉलेज की छुट्टी थी. रंग-बिरंगे फूलों से लदी क्यारियों के बीच लॉन में मैं सफेद शाल ओढ़े गुनगुनी धूप में बैठी हुई थी. “रंगीन गुलों के बीच सफेद परी कौन आ गई” आवाज़ सुनकर मैं चौंक गई.

पलटकर देखा उदय खड़ा मुसकुरा रहा था. पहली बार उसकी आवाज़ सुनी थी और वह भी गुदगुदाने वाली. मैंने भी मौका नहीं छोड़ा  “कोचिंग से शायरी सीखकर आ रहे हो क्या?”

“शायरी कोचिंग में नहीं सिखाई जाती मैडम, वो तो ज़ुबान पर आ ही जाती है.” उसकी इस बात पर ठहाका लगाकर हम दोनों ही हंसने लगे. किसी इंटरव्यू की तैयारी करना है कहकर वह तुरंत चला गया. ऐसा लगा हमारे बीच संकोच और झिझक की दीवार अब टूट चुकी है. लेकिन अफसोस कि वही हमारी आखिरी मुलाकात थी. मामाजी ने शायद हमें हंसतेहुए देख लिया था. उसका उन्होंने न जाने क्या अर्थ समझा और उदय से क्या कहा मालूम नहीं, दूसरे दिन सबेरे मुझे पताचला उदय कमरा खाली करके जा चुका है. उसका इस तरह से चले जाना मुझे असह्य पीड़ा दे गया. मैं मन ही मन उसे चाहने लगी थी. वह मेरा पहला प्यार था. उसे मैं कभी भुला नहीं पाई. मेरा मन किसी और से शादी करने को तैयार नहींहुआ. मैंने जीवन भर अविवाहित रहने का फैसला किया. 

आर्ट गैलरी के गेट पर जैसे ही कार पहुंची मेरा फ्लैश बैक चलचित्र भी अवरुद्ध हो गया. प्रदर्शनी में चित्रकार आदित्य जीकी एक से बढ़कर एक पेंटिंग लगी हुई थी. हर पेंटिंग मन को लुभा रही थी. 

मुझे जब पता चला आदित्य जी थोड़ी देर पहले दर्शकों के बीच यहीं थे और अभी बाहर लॉन में बैठे हैं तो मैं उनसे मिलनेलॉन की ओर गई. आदित्य जी किसी पुस्तिका में डूबे हुए थे. मेरे ‘नमस्ते’ की आवाज़ सुनकर उन्होंने पुस्तक को बंद कर मेरी ओर नज़र उठाकर देखा.

“अरे… आप… उदय…” मैंने चौंककर वहीं चेयर पर बैठते हुए कहा.

“हां. उदयादित्य. तुम तो मुझे केवल उदय के नाम से जानती हो ना . कैसी हो काम्या? मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि तुम से कभी मुलाकात होगी.”

“हां मुझे भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा है कि जिस आदित्य के चित्रों की मैं दीवानी हूं वो तुम हो.”

“तुम्हारे घर से जाने के बाद मेरा यूपीएससी में सेलेक्शन हो गया था. कई उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्य करने के बाद मैंसमयपूर्व रिटायरमेंट लेकर स्वतंत्र रूप से चित्रकारी करने लगा.”

“और परिवार?”

” मैंने विवाह नहीं किया. मैं अपने चित्रों में ही किसी को ढूंढता रहा. और तुम?”

“मैं भी. मामा-मामी नहीं रहे. कॉलेज में प्रिंसिपल हूं. तीस साल से किसी की यादें मेरे साथ हैं.” 

शरारत पूर्वक उदय ने मेरे हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा, “अब देर किस बात की. प्यार की कोई उम्र नहीं होती है. नएजीवन की शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है.”

मैंने भी उदय के हाथों को कसकर पकड़ लिया.  प्यार की मंज़िल हमें मिल ही गई.

  • ललिता अय्यर

कॉलेज का वो दौर, वो दिन आज भी याद आते हैं मुझे. 18-19 की उम्र में भला क्या समझ होती है. मैं अपने बिंदास अंदाज़में मस्त रहती थी. कॉलेज में हम चार दोस्तों का ग्रुप था. उसमें मैं अकेली लड़की थी, लेकिन मुझे लड़कों के साथ रहने परभी कभी कुछ अटपटा नहीं लगा. उनमें से सिद्धार्थ तो सीरियस टाइप का था,पर  दूसरा था सुबीर, जो कुछ ज़्यादा ही रोमांटिक था. उसे मेरे बाल और कपड़ों की बड़ी चिंता रहती. लेकिन अजीब से रोमांटिक अंदाज़ में उसके बात करने से मुझेबड़ी चिढ़ होती थी.

लेकिन इन सबसे अलग था हमारे ग्रुप का वो तीसरा लड़का, नाम नहीं लिखना चाहती, पर हां, सुविधा के लिए अवनि कहसकते हैं.

करीब चार साल तक हमारा साथ रहा, लेकिन पढ़ाई और घर के सदस्यों के हाल चाल जानने तक तक ही हमारी बातचीतसीमित थी.

आगे भी एक साल ट्रेनिंग के दौरान भी हम साथ थे, लेकिन हमारे डिपार्टमेंट अलग थे और काफ़ी दूर-दूर थे.

वो दौर ऐसा था कि लड़के-लड़कियों का आपस में बात करना समाज की नज़रों में बुरा माना जाता था, लेकिन अवनिआधे घंटे के लंच टाइम में भी पांच मिनट निकाल कर मुझसे मिलने ज़रूर आता था, बस थोड़ी इधर-उधर की बातें करके चला जाता.

फिर वो समय भी आ गया जब साल भर की ट्रेनिंग भी ख़त्म होने को आई और अवनि को उसके भाई ने नौकरी के लिएअरब कंट्री में बुला लिया था. उसकी कमी खल तो रही थी लेकिन हमारे बीच सिर्फ़ एक दोस्ती का ही तो रिश्ता था. वो जबभी अपने पैरेंट्स से मिलने इंडिया आता तो मुझसे भी ज़रूर मिलकर जाता.

मेरे घर में सभी लोग उससे बड़े प्यार से मिलते थे, वो था ही इतना प्यारा. निश्छल आंखें और बिना किसी स्वार्थ के दोस्तीनिभाना- ये खूबी थी उसकी. मैं अक्सर सोचती कि हम दोनों के बीच कुछ तो ख़ास और अलग है, एक लगाव सा तो ज़रूरहै, वही लगाव उसे भारत आते ही मुझ तक खींच लाता था.

वो जब भी आता मेरी लिए बहुत सारे गिफ़्ट्स भी लाता. उसे पता था कि मेकअप का शौक़ तो मुझे था नहीं, इसलिए वो मेरे लिए परफ़्यूम्स, चॉक्लेट्स और भी न जाने क्या-क्या लाता. 

इसी बीच उसकी शादी भी तय हो गई और जल्द ही उसने सात फेरे ले लिए.

मैं खुश थी उसके लिए, लेकिन उसकी शादी में मैं नहीं जा पाई. हां, अगले दिन ज़रूर गिफ्ट लेकर अवनि और उसकी पत्नीसे मिली.

इसके बाद उससे अगली मुलाकात तब हुई, जब वो अपने एक साल के बेटे को लेकर मुझसे मिलने आया. 

कुछ समय बाद मेरी भी शादी हो गई. वो भी मेरी शादी में नहीं आ पाया. फिर मैं भी घर-परिवार में इतनी खो गई कि कुछसोचने का वक़्त ही नहीं मिला. लेकिन दिल के किसी कोने में, यादों की धुंधली परतों में उसका एहसास कहीं न कहीं था. मुझे याद आया कि आख़री बार जब उससे मिली थी तो जाते समय उसने एक फिल्मी ग़ज़ल सुनाई, जिसका कुछ-कुछअर्थ था कि मैं अपना वादा पूरा नहीं कर पाया, इसलिए मुझे फिर जन्म लेना होगा… 

उसे सुनकर मैं भी अनसुलझे से सवालों में घिरी रही. अब घर-गृहस्थी में कुछ राहत पाने के बाद यूं ही अवनि का ख़यालआया और मन में हूक सी उठी. मैंने एक दिन सोशल मीडिया पर अवनि को ढूंढ़ने की कोशिश की और मैं कामयाब भी होगई. हमारे बीच थोड़ी-बहुत बात हुई और जब मैंने उससे पूछा कि इतने वक़्त से कहां ग़ायब थे, न कोई संपर्क, न हाल-चाल पूछा, मेरी इस बात पर उसने कहा, “तुम्हारी याद तो बहुत आई, पर मैंने सोचा तुम अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो, तोबेवजह डिस्टर्ब क्यों करना.”

मैं हैरान रह गई उसकी यह बात सुनकर कि अवनि इतनी भावुक बात भी कर सकता है? फिर काफ़ी दिन तक हमारी बातनहीं हुई.

एक दिन मैं अपने लैपटॉप पर कुछ देख रही थी कि अचानक अवनि का मैसेंजर पर वीडियो कॉल आया, क्योंकि अरब देशों में व्हाट्सएप्प कॉल पर बैन है. 

कॉल लिया तो देखा वो किसी अस्पताल में के बेड पर था और ढेर सारी नलियां शरीर पर लगी हुई थीं.

कहने लगा, “कैसा लगता है जब आदमी अस्पताल में अकेला होता है… किसी बेहद अपने की याद आती है…” उस समय भी वह मुस्कुरा रहा था. लेकिन उसकी आंखें बंद सी हो रही थीं. 

मैंने घबराकर पूछा, “क्या हुआ तुम्हें?” इससे पहले वो कुछ बोलता कॉल डिसकनेक्ट हो गई.

बाद में मैसेज में पूछने पर उसका जवाब आया कि मैं कुछ ठीक हूं. कोविड से रिकवर हो रहा हूं. जल्दी ही तुमसे मिलुंगा…

लेकिन वो नहीं आया, बस उसकी खबर ही आई… अभी हफ्ते भर पहले पता चला कि वो संसार छोड़ गया.

न जाने क्यों उसके चले जाने से ज़िंदगी का, दिल का एक कोना खाली और तनहा हो गया. लेकिन कुछ सवाल वो छोड़गया और मैं खुद से ही पूछ रही थी कि क्या वो मुझसे प्यार करता था… अस्पताल में अकेले में ज़िंदगी के आख़री पलों मेंउसे मेरी ही याद आई. क्या ये प्यार था?

ये सवाल मेरे मन में आज भी रह-रहकर आता है, लेकिन इसका जवाब देने वाला दूर, बहुत दूर जा चुका है…!

अलका कुलश्रेष्ट

मैं अपनी चचेरी बहन के पास अस्पताल में बैठी थी. उसका छोटा-सा एक्सीडेंट हुआ था और पांव में फ़्रैक्चर हो जाने कीवजह से वह तीन-चार दिनों के लिए एडमिट थी. मैं उसके पास कुर्सी पर बैठी कोर्स की किताब पढ़ रही थी कि तभी उसकेस्कूल के दोस्त उससे मिलने आए. दो लड़कियां और तीन लड़के. कुछ ही देर में बाकी सब तो चले गए लेकिन रश्मि काएक दोस्त, जिसका नाम जतिन था रुक गया. हम तीनों बातें करने लगे. बातों के सिलसिले में पूरी दोपहर कब निकल गईपता ही नहीं चला. दूसरे दिन फिर आने का वादा करके वह घर चला गया.

 उसके जाने के बाद मैं यूं ही उसके बारे में सोचने लगी… बिखरे बालों वाला वह बहुत सीधा-सादा, भोला-सा लगा मुझे. रात में चाची रश्मि के पास रुकी और मैं घर चली गई. सुबह नहाकर जब वापस आई तो देखा जतिन महाराज पहले से ही वहां बैठे थे. चाची के चले जाने के बाद हम तीनों फिर गप्पे मारने लगे. एक आम और साधारण-सा चेहरा होने के बाद भीएक अजब-सी, प्यारी-सी रूमानियत थी जतिन के चेहरे पर और उसकी बातों में कि दिल और आंखें बरबस उसकी ओर खींची चली जाती थी. चार दोपहरें कब निकल गई पता नहीं चला. रश्मि को अभी डेढ़ महीना घर पर ही रहना था. इस बीच उसके बाकी दोस्तों के साथ ही जतिन भी घर आता रहा. वह स्कूल में होने वाली पढ़ाई की जानकारी रश्मि को देकर उसकी मदद करता और खाली समय में हम तीनों खूब बातें करते और मस्ती करते. अब तो जतिन से मेरी भी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी. जिस दिन वह नहीं आता वो दिन खाली-खाली-सा लगता और मैं बेसब्री से उसका इंतजार करती. रश्मि भी हंसी-हंसी में उसे ताना मारती, “तुम मुझसे मिलने थोड़े ही आते हो, तुम तो चेतना से मिलने आते हो…”

तब जतिन एक शर्मीली-सी हंसी भरी नज़र मुझ पर डाल कर सिर झुका लेता.

बारहवीं पास होते ही मैं डेंटल कॉलेज में पढ़ने दूसरे शहर चली गई और जतिन भी आगे की पढ़ाई करने दूसरे शहर चला गया, लेकिन फोन पर हम बराबर संपर्क में बने रहते. कभी-कभी रात की ट्रेन से सफर करके जतिन मुझसे मिलने आता. दिन भर हम साथ में घूमते, लंच करते और रात की ट्रेन से वह वापस चल आ जाता. पढ़ाई खत्म होने तक हम दोनों को ही इस बात का एहसास हो चुका था कि हम दोस्ती से आगे बढ़ चुके हैं. हम एक-दूसरे से प्यार करने लगे हैं और अब अलग नहीं रह सकते. हम दोनों ही अपनी एक अलग रूमानी दुनिया बसा चुके हैं, जहां से लौटना अब संभव नहीं था. कितनी खूबसूरत थी वह दुनिया, बिल्कुल जतिन की दिलकश मुस्कुराहट की तरह और उसकी आंखों में झलकते प्यार सेसराबोर जिसमें मैं पूरी तरह भीग चुकी थी.

नौकरी मिलते ही जतिन ने अपने घर में इस बारे में बात की. उसके माता-पिता अपने इकलौते बेटे की खुशी के लिए सहर्षतैयार हो गए, लेकिन मेरे पिताजी ने दूसरी जाति में शादी से साफ इनकार कर दिया. यहां तक कि जतिन के घर आने पर अपनी बंदूक तान दी. महीनों घर में तनाव बना रहा, लेकिन मैं जतिन के अतिरिक्त किसी और से शादी करने के लिए किसी भी हालत में तैयार न थी. महीनों बाद सब के समझाने पर पिताजी थोड़े नरम हुए. उन्होंने पंडित जी से कुंडली मिलवाई तोपंडित जी ने मुझे मंगली बता कर कहा कि यदि यह शादी हुई, तो लड़की महीने भर में ही विधवा हो जाएगी. साथ ही लड़के की कुंडली में संतान योग भी नहीं है.

घर में सब पर वज्रपात हो गया. अब तो शादी की बिल्कुल ही मनाही हो गई. चार-पांच पंडितों ने यही बात की. अलबत्ता जतिन के घर वाले अब भी अपने बेटे की खुशी की खातिर इस शादी के लिए तैयार थे. बहुत संघर्षों और विवादों के बाद आखिरकार हमारी शादी हो ही गई.

आज कुंडली के सभी ग्रह-नक्षत्रों को, मंगल-अमंगल को परास्त करके हमारी शादी को 14 साल हो गए हैं और हमारी 12 साल की एक बहुत ही प्यारी बिटिया भी है. प्यार सच्चा हो तो हर मंगल को हराकर अंधेरे में भी रिश्ते का दीया जला देता है. जतिन आज भी उसी प्यारी रूमानी मुस्कुराहट के साथ मुझे बाहों में लेकर गुनगुनाता है, “तेरा साथ है तो मुझे क्या कमीहै अंधेरों में भी मिल रही रोशनी है…”

 – विनीता राहुरीकर

कभी सोचा नही था यूं किसी से प्यार हो जाएगा… ये कहां जानती थी कि खुद का दिल खुद का नही रह जाता… दिल के हाथों मजबूर होना पड़ता है, ये तब समझ में आया, जब मुझे प्यार का मतलब समझ में आया. उससे मेरी पहली मुलाकात कैंसर हॉस्पिटल में हुई थी. मै वहां नर्स थी और वो कैंसर पेशेंट. वह हॉस्पिटल में अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दिन काट रहा था. एक दिन मैंने देखा वो वह गुनाहों का देवता उपन्यास पढ़ रहा था… “यह मेरा पंसदीदा उपन्यास है.” मैंने इंजेक्शन तैयार करते हुए कहा.

उसने उपन्यास को एक तरफ रखते हुए कहा, “अरे, आप लोग भी रोमांस से भरी किताबें पढ़ते हैं.” मैंने उसे घूरते हुए देखा.
“नहीं, वो आप लोग इंसानों की चीरफाड़… मुझे लगा आप लोग निष्ठुर होते हो. पेशेंट कितना भी चीखे आप जलने वाली दवा ज़ख्मों पर लगाते ही हो.”
“वो इसलिए कि मरीज़ ठीक हो जाए… कभी-कभी कठोर बनना पड़ता है.”
“आप लोग प्यार-व्यार जानते हो ये नहीं सोचा था…” वह मेरे चेहरे पर नज़रें गड़ाते हुए बोला.
मै मुस्करा कर रह गई.
दूसरे दिन मैं जब उसका चेकअप कर रही थी, तो वो पूछ बैठा- “आपके पास अमृता इमरोज़ हों, तो देना… मैं पढ़ना चाहता हूं. कल लौटा दूंगा.”
जिसके जीवन के अगले पल का भरोसा नहीं, वो आने वाले कल की उम्मीद लगाए बैठा है… मैं अनायास ही मुस्करा दी. 
“आपकी मुस्कराहट ओस के मोती जैसी है”उसने तारीफ करते हुए कहा.
उस दिन मेरी नाइट ड्यूटी थी. मैंने उसे उपन्यास पढ़ने को दिया, वह इतना खुश हुआ था, जैसे मचलते बच्चे को चॉकलेट का मिल गई हो.
वह फ़ौरन पढ़ने बैठ गया. मैं बीच-बीच में उसके वॉर्ड में जाकर उसे देखती, पर वो पढ़ने में ही तल्लीन था. “रात के दो बजे गए, अब सो जाओ.”
“कुछ दिन बाद चिर निंद्रा में सोना ही है, क्यों न कुछ देर जाग लूं.” मेरे पास उसकी बात का जवाब नहीं था. दो कप कॉफ़ी लेकर मैं उसके पास पहुंची. “मुझे भी नींद नहीं आ रही है, चलो कॉफ़ी पीते हैं.” वह कॉफ़ी पीते-पीते बोला, “प्यार भी अजीब चीज़ है.”
“उपन्यास का जादू चढ़ा है या किसी से प्यार किया है” मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा.
“एक आरज़ू, एक जुस्तजू, एक ख्वाब, एक नशा… न जाने कितने नाम होते हैं प्यार के. चाहा जो मिल जाए, तो ज़िंदगी से शिकायत कैसी? मै प्यार करता था उससे. मुझे कैंसर है यह बात पता चलते ही वह किनारा कर गई. सच तो है प्यार की परिणति प्यार ही हो ये ज़रूरी नहीं. मैं प्यार नहीं पा सका, पर उसका एहसास मेरे आसपास आज भी मौजूद है. मैं प्रेम कहानियों को जीना चाहता था. वो ख्वाहिश आपने पूरी कर दी.”

Pahla Affair

मैं कुछ दिनों से उसके लिए अलग-सा महसूस करने लगी. मुझे उससे एक अजीब-सा लगाव हो गया था. उसके बगैर कुछ खालीपन लगने लगा था. कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि इस तरह किसी से मुझे प्यार हो जाएगा. मैं खुद को समझाने लगी थी, पर उसकी बातें, उसकी मुस्कुराहट,  उसका एहसास मुझे बैचेन कर रहा था. उस दिन जब मैं हॉस्पिटल पहुंची, तो पता चला वो नहीं रहा. दिल बैठ गया… पर ये तो होना ही था. फिर भी मुझे बुरा लग रहा था. रह-रहकर मुझे उसकी याद आ रही थी. कुछ देर बाद वॉर्ड बॉय ने एक लेटर थमाते हुए कहा, “मरने से पहले उन्होंने यह पत्र आपको देने को कहा था.”
मैंने जल्दी से पत्र खोला, लिखा था…

‘प्रिय दोस्त,
         ख्वाहिशों की कोई उम्र नहीं होती, इन चंद दिनों में मेरे मन में आपके प्रति प्यार एक अलग-सा लगाव, कशिश या सच कहूं तो प्यार जाग गया था. चाहा था कि आपके दिल का एक कोना मेरे लिए, मेरी मुहब्बत से गुलज़ार हो और मेरे प्यार की खुशबू से आपका तन-मन महके, हर लम्हा सुकून से भरा हो, ख्यालों में प्यार की ख़ामोशी हो… और भी न जाने क्या-क्या… पर ऐसा हो न सका. मेरा पास वक्त नहीं है, फिर भी मुझे अफसोस नहीं…  आपके साथ गुज़ारे इन पलों की याद और आपके प्यार की महक साथ लिये जा रहा हूं. शुक्रिया! मेरी ज़िंदगी के आखिरी पलों को खुशनुमा बनाने के लिए.
         – तुम्हारा प्यारा दोस्त
ख़त पढ़ते-पढ़ते मेरी आंखें भीग गईं. उसके प्यार की धरोहर मैंने सहेज ली. उसकी बातें मेरे दिल में गूंज रही थी… प्यार की परिणति प्यार तो नहीं. मैं भी… मैं भी तुमसे प्यार करती हूं मेरे दोस्त… सदा के लिए अलविदा! तुम हमेशा मेरे दिल में, मेरी यादों में रहोगे. 

– शोभा रानी गोयल

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हम अक्सर अपने सबसे करीबी रिश्तों को ही गंभीरता से नहीं लेते. एक वक़्त के बाद हम उनके प्रति लापरवाह या यूं कहेंकि बेपरवाह से हो जाते हैं और यहीं से शुरुआत होने लगती है समस्याओं की. धीरे-धीरे कम्यूनिकेशन कम होने लगता गई, नीरसता बढ़ती जाती है और एक रोज़ अचानक महसूस होता है कि रिश्ते में रहकर भी आप अकेले हैं. जब रिश्ते इसदहलीज़ तक पहुंच जाते हैं तो उनको टूटने में भी ज़्यादा वक़्त नहीं लगता.

बेहतर होगा कि ऐसी नौबत ही क्यों आने दें कि रिश्ता टूटने के कगार तक पहुंच जाए. क्यों न अपने रिश्ते को हमेशातारोताज़ा बनाए रखा जाए, लेकिन उसके लिए थोड़ी सी कोशिश करनी होगी, तो इन टिप्स को आज़माएं और अपने रिश्तेको रिफ्रेश करें…

  • रिश्ता भले ही पुराना हो गया हो, लेकिन उसमें कुछ नया हमेशा ट्राई करते रहें.
  • रिश्ते में अगर आप नया नहीं करेंगे वो वो बोरिंग होने लगेगा. 
  • आप हर दिन जैसे बाक़ी कामों के लिए समय निकालते हैं उसी तरह अपने पार्टनर और अपने रिश्ते के लिए भी रोज़वक़्त निकालें. 
  • इस वक़्त को आप सिर्फ़ अपने और अपने पार्टनर के लिए रखें. उसमें आप चाहें तो बैठकर चाय या कॉफ़ी पिएं, बातेंकरें, दिनभर की छोटी-बड़ी घटनाओं का ज़िक्र करें. 
  • ध्यान रहे इस वक़्त में आप शिकायतें न करें, सिर्फ़ पॉज़िटिव बातें करें.
  • शेयर करने से ही रिश्तों में भावनाएं और गर्माहट बनी रहेगी. 
  • हमेशा शिकायतें ही न करते रहें. इससे नकारात्मकता फैलती है.
  • हंसी-मज़ाक़ करें.
  • कॉम्प्लिमेंट दें. 
  • एक-दूसरे को छेड़ें, मूड लाइट करें.
  • रोमांस को ज़िंदगी से ग़ायब न होने दें. 
  • छोटी-छोटी कोशिशें रिश्तों में बड़ी मज़बूती लाती है. 
  • जिस तरह पार्टनर की खूबियों को अपनाते हैं वैसे ही उसकी कमियों को भी अपनाना सीखें. 
  • अपने हिसाब से किसी को भी बदलने के लिए फ़ोर्स न करें. 
  • ना ही बात-बात पर तानें दें. 
  • एक-दूसरे को स्पेस भी दें, हमेशा सिर पर सवार न रहें.
  • हर छोटे-बड़े फ़ैसले में पार्टनर की राय भी ज़रूर लें.
  • वीकेंड पर पिकनिक या आउटिंग की प्लानिंग करें. इससे रूटीन में थोड़ा बदलाव और नयापन आएगा.
  • थोड़ा-बहुत झूठ भी बोलें, एक-दूसरे की झूठी तारीफ़ भी करें. ओवर रोमांटिक होने से रिश्ते में एक ताज़गी बनी रहतीहै.
  • एक-दूसरे को गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड की तरह ट्रीट करें न कि पति-पत्नी की तरह.
  • गिफ़्ट्स दें, सर्प्राइज़ प्लान करें. 
  • एक साथ जॉगिंग पर जाएं या शाम को वॉक पर जाएं. 
  • कोई हॉबी क्लास जॉइन करें.
  • हर जगह बच्चों को लेकर जाने की ज़रूरत नहीं. सिर्फ़ आप दोनों रोमांटिक डेट पर जाएं.
  • सेकंड हनीमून भी अच्छा आइडिया है. 
  • अपने पैरेंट्स या दोस्तों को बहुत ज़्यादा अपनी निजी ज़िंदगी में दख़ल न देने दें. 
  • सुनें सबकी पर करें अपने मन की. 
  • अपने रिश्ते को लेकर हमेशा पॉज़िटिव रहें. भले ही कुछ अनबन हो जाए आपस में लेकिन उसे रिश्ते का एक अंगमानकर स्वीकार लें. 
  • अगर सॉरी या थैंक यू कहने से काम बनता है तो झिझकें नहीं.
  • अपने रिश्ते को अपनी प्राथमिकता बनाएं, न कि अपने ईगो को. 
  • अपने पार्टनर की ख़ुशी को तवज्जो दें न कि अपने अहम की तुष्टि को. 
Tips To Refresh Your Relationship
  • रिश्ते में नफ़ा-नुक़सान न सोचें, रिश्ते अपने आप में हमारी सबसे पहली ख़ुशी होनी चाहिए. 
  • अगर लंच साथ नहीं कर पाते तो कोशिश करें कि ब्रेकफ़ास्ट और डिनर साथ करें. भले ही सुबह थोड़ा जल्दी उठनापड़े. 
  • जब साथ हों तो वाक़ई में साथ रहें, अपने-अपने फ़ोन से ब्रेक ले लें.
  • कभी एक प्यारभरा किस तो कभी अपने हाथों से कुछ स्पेशल बनाकर खिलाना वो जादू कर जाता है जो बड़े से बड़ाऔर महंगा तोहफ़ा भी नहीं कर पाता.
  • अपने रिश्ते को रिफ्रेश करने के लिए बहुत ज़रूरी है कि अपनी सेक्स लाइफ़ को भी रोमांचित और रिवाइव करें. 
  • अपने घर का माहौल लाइट और रोमांटिक रखें. 
  • बेडरूम का डेकोर भी रोमांटिक हो.
  • सेक्स को लेकर कुछ नया करें, कभी वीकेंड में स्वीट बुक करें तो कभी घर में ही नई जगह या नई पोज़ीशन ट्राई करें.
  • पार्टनर को ये फ़ील कराएं कि वो आज भी आपको उतना ही अट्रैक्टिव लगते हैं जितना पहले. 
  • कभी फ़ोन पर हस्की वॉइस में बात करें.
  • आई लव यू कहें या मैसेज करें. 
  • नॉटी बातें करने से झिझकें नहीं. 
  • कभी भी ये न सोचें कि अब बच्चे बड़े हो गए या वो मिडल एज में आ गए तो रोमांस करना सही नहीं.
  • रोमांस की कोई एज नहीं होती, आप जब तक अपना दिल जवां और मूड ज़िंदादिल रखेंगे आपका रिश्ता उतना हीफ्रेश रहेगा.
  • अपने रिश्ते को बेहतर करने के लिए एक अच्छा ऑप्शन ये भी है कि आप एक-दूसरे की जिम्मेदारियां बांटें, ताकिपार्टनर को लगे कि आप उनका साथ निभाने और बोझ कम करने के लिए हमेशा उनके साथ हैं.
  • इसी तरह अपने पार्टनर को हर्ट करने से बचें. कड़वा न बोलें और अगर ग़ुस्से में कुछ मुंह से निकल भी जाए तो दिमाग़ठंडा होने पर माफ़ी मांग लें. 
  • इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें. ये रवैया रिश्ते में ज़हर भर देता है, क्योंकि अपनों के साथ सौदेबाज़ी नहीं की जाती. उन्हें डरा-धमकाकर अपना काम नहीं निकलवाया जाता.
  • अगर आप ऐसा कुछ करते हैं तो फ़ौरन अपना ये ऐटिट्यूड बदल दें. 
  • रोमांटिक म्यूज़िक सुनें वो भी साथ में या पुराने ऐल्बम निकालें, तस्वीरें देख कर बीते वक़्त को रिवाइव करें. पुरानीयादें ताज़ा करें.
Tips To Refresh Your Relationship
  • अपने पुराने दोस्तों के साथ पार्टी रखें. पुरानी रोमांटिक सिचूएशन्स को और दिनों को रिक्रीएट करें. 
  • हाईजीन और फिटनेस का ध्यान ज़रूर रखें. 
  • ना सिर्फ़ बॉडी हाईजीन या प्राइवट पार्ट्स की बल्कि ओरल हाईजीन और फिटनेस भी उतनी ही ज़रूरी है. 
  • ये न सिर्फ़ आपको हेल्दी रखती हैं बल्कि आपके रिश्ते को भी हेल्दी और फ्रेश रखती है.
  • पार्टनर को या उसकी बातों को इग्नोर न करें या हल्के में न लें.
  • माइंड गेम्स या पावर गेम्स न खेलें, रिश्तों में मैनिप्युलेशन आपके रिश्ते को तोड़ सकता है. 
  • पार्टनर को कंट्रोल में करने के उपाय न सोचें बल्कि उसका साथ देने की बात पर ज़ोर दें.
  • अक्सर घरवाले या दोस्त-रिश्तेदार भी सलाह देते हैं कि ऐसा करोगे तो पार्टनर क़ाबू में रहेगा, आपकी हर बातमानेगा… दिन-रात आपको ही याद करेगा. इन चक्करों में न पड़ें, क्योंकि आपको लाइफ़ पार्टनर चाहिए न कि कोईरोबोट या गुड्डा-गुड़िया जो आपके इशारों पर नाचे.
  • इन सबसे भले ही थोड़े समय के लिए आपको पार्टनर का अटेंशन मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक यह करेंगे, तोपार्टनर की दिलचस्पी आप में कम हो जाएगी. रिश्ते में ठंडापन व ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी. जिससे रिश्ता टूट सकता है. 
  • इसी तरह पार्टनर की तारीफ़ या कामयाबी से जलें नहीं बल्कि गर्व करें. 
  • अगर पार्टनर थका हुआ है तो सेक्स के लिए ज़ोर न दें बल्कि एक हॉट मसाज देकर उसका मूड फ्रेश कर दें.
  • चीट न करें और झूठ बोलने से बचें, क्योंकि झूठ रिश्तों को खोखला कर देता है, जिससे पार्टनर आप पर भरोसा नहींरख पाता. 
  • अपने साथी को अपने दोस्तों व ऑफ़िस कलीग से खुलकर मिलवाएं.
Tips To Refresh Your Relationship
  • अपने रिश्ते से उम्मीद और अपेक्षा सभी रखते हैं लेकिन ये ध्यान रहे कि ये अपेक्षाएं अनरीयलिस्टिक न हों.
  • संयम और विश्वास रिश्ते में बेहद ज़रूरी हैं, आपका रिश्ता तभी तक ताज़ा रहेगा जब तक कि आप संयम औरविश्वास से काम लेंगे, क्योंकि संयम होगा तो नकारात्मकता नहीं पनपेगी और विश्वास होगा तो साथ बना रहेगा.
  • रिश्ते को रिफ्रेश करने का एक और जादुई उपाय है- टच थेरेपी. जी हां, प्यार भरी, केयर से भरपूर हल्की से छुअन भीरिश्ते को रोमांचित कर जाती है.
  • कभी सामान पकड़ाते समय हल्के से हाथ छू लिया, कभी नज़रों से ही प्यार से ही देख कर छू लिया, कभी किचन मेंकाम करती पत्नी को पीछे से आकर अचानक कमर से पकड़ किया तो कभी काम में डूबे पतिदेव के बालों मेंउंगलियों का कोमल स्पर्श दे दिया… ये तमाम बातें रिश्तों और रिश्ते में प्यार की ताज़गी को बनाए रखती हैं.
  • साथ रह रहे हैं तो एक-दूसरे की हेल्थ के बारे में अपडेटेड रहें, एक-दूसरे के घरवालों की भी हेल्थ का पता रखें औरज़रूरत के वक्त साथ खड़े रहें. एक-दूसरे के घरवालों का पूरा सम्मान भी करें, इसका सीधा असर आपके रिश्तों परपड़ेगा और वो पॉज़िटिव और फ्रेश बना रहेगा. 
  • गोल्डी शर्मा
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