relationship goals

रिश्तों का दूसरा नाम सच्चाई और ईमानदारी है और ऐसे में अगर हम यह कहेंगे कि झूठ बोलने से आपके रिश्ते मज़बूत हो सकते हैं तो आपको लगेगा ग़लत सलाह से रहे हैं, लेकिन यहां हम ऐसे झूठ की बात कर रहे हैं जिनसे किसी का नुक़सान नहीं होगा बल्कि सुनने वालों को ये झूठ बेहद पसंद आएगा. 

  • अगर आपकी पत्नी आपसे पूछती है कि क्या मैं पहले से मोटी हो गई हूं तो भले ही यह सच हो कि उनका वज़न बढ़ा हो पर आप कह सकते हैं कि बिल्कुल नहीं, तुम मोटी नहीं हेल्दी हो और पहले से ज़्यादा ख़ूबसूरत लगती हो.
  • इसी तरह अगर आपकी पत्नी पूछे कि यह रंग मुझपर कैसा लग रहा है तो अगर आप कहेंगे कि अच्छा नहीं लग रहामत पहनो तो उनको चिढ़ होगी, बेहतर होगा आप कहें यह तो खूब फब रहा है लेकिन अगर इसकी जगह ये वालापहनोगी तो और भी हसीन लगोगी.
  • अगर पति ने कुछ बनाकर खिलाने की कोशिश की है और स्वाद उतना अच्छा नहीं बन सका तो भी आप ज़रूर कहेंकि कोशिश तो क़ाबिले तारीफ़ है, अगली बार इसमें थोड़ा सा ये मसाला भी ट्राई करना तो टेस्ट कुछ अलग होगा.
  • अगर आपको पति का फ़ोन पर ज़ोर ज़ोर से बात करना नहीं भाता तो सीधे आवाज़ कम करने या यह कहने के कि कितना ज़ोर से बोलते हो, यह कहें- तुम्हारी धीमी आवाज़ बेहद हस्की और सेक्सी साउंड करती है, फिर देखिए अगली बार से वो खुद ही धीमा बोलेंगे.
  • अगर आपको पति का किसी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं या उनके काम करने का तरीक़ा आपको पसंद नहीं तो यहना कहें कि तुम्हें नहीं आता तो मत करो, बल्कि यह कहें कि तुमने पहले ही इतनी मदद कर दी, तो अब यह काम मुझेकरने दो या कहें कि तुम वो वाला काम कर दो क्योंकि वो तुम मुझसे बेहतर करोगे और मैं यह कर लेती हूं… या आप यह भी कह सकती हैं कि तुम थक गए होगे तो तुम आराम कर लो बाक़ी मैं संभाल लेती हूं.
  • अगर पतिदेव की तोंद निकल गई हो तो उनको ताना ना दें और ना ही उनके किसी दोस्त से उनकी तुलना करें बल्किकहें कि कुछ दिन मैं डायटिंग करने की सोच रही हूं अगर आप भी साथ देंगे तो मुझे मोटिवेशन मिलेगा, इसलिए प्लीज़ मुझे फिट होने में मेरी मदद करो और मैं फिट रहूंगी तो आपको भी तो अच्छा लगेगा ना. 
  • इसी तरह अगर पति को लगे कि पत्नी को डायटिंग की ज़रूरत है तो किसी पड़ोसन का उदाहरण देने से बेहतर है किआप कहें कि मेरे कपड़े थोड़े टाइट हो रहे हैं इसलिए सुबह जॉगिंग करने की और डायटिंग की सोच रहा है लेकिन तुम्हें मेरा साथ देना होगा.
Happy And Strong Relationship
  • कभी कभी एक दूसरे की झूठी तारीफ़ में क़सीदे कस दिया करें इससे आप दोनों को ही अच्छा लगेगा. 
  • सिर्फ़ पार्टनर ही नहीं, बाक़ी घरवालों के साथ भी थोड़ा बहुत अच्छावाला झूठ बोलने में हर्ज़ नहीं, इससे उन्हें बेहतरफ़ील होगा जिससे वो खुश रहेंगे और रिश्ते भी मज़बूत होंगे.
  • अगर पतिदेव बच्चों की तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं देते या ज़िम्मेदारी से बचते हैं तो उनसे कहें कि बच्चे अक्सर बोलते हैंकि मुमकिन आपको तो कुछ नहीं आता, पापा ज़्यादा इंटेलीजेंट लगते हैं, इसलिए कल से हम उनसे ही पढ़ेंगे, ऐसाकहने से पतिदेव बच्चों के प्रति ज़िम्मेदारी ज़्यादा ख़ुशी से निभाएंगे और इससे बच्चों के साथ उनकी बॉन्डिंग भी स्ट्रॉंगहोगी. साथ ही आपका एक काम कम हो जाएगा.
  • अगर आपकी पत्नी और आपकी मां की बनती नहि तो पत्नी से कहें कि मां अक्सर तुम्हारे काम और खाने की तारीफ़करती हैं, मां कहती हैं कि बेचारी दिनभर काम में लगी रहती है, थोड़ा भी आराम नहीं मिलता उसको और मैं भी कुछना कुछ बोलती ही रहती हूं लेकिन वो सब सह लेती है. 
  • इसी तरह अपनी मां को भी कहें कि आपकी बहू अक्सर कहती है कि काश मैं भी मम्मी जैसा टेस्टी खाना बना पाती, उनके हाथों में जो स्वाद है वो मेरे में नहीं, वो हर काम सलीके से करती हैं. ऐसी बातों से दोनों के मन में एक दूसरे केप्रति सकारात्मक भाव जागेगा और कड़वाहट दूर होगी.
  • अगर पत्नी को लगता है कि पति और पत्नी के घरवालों की ज़्यादा नहीं बनती तो पत्नी जब भी मायके से आए तोकहे कि मम्मी-पापा हमेशा कहते हैं कि दामाद के रूप में उन्हें बेटा मिल गया है, कितना नेक है, बेटी को खुश रखताहै और किसी तरह की कोई तकलीफ़ नहीं देता वरना आज के ज़माने में कहां मिलते हैं ऐसे लड़के.
  • दूसरी तरफ़ अपने मायकेवालों से कहें आप कि वो हमेशा हमारे घर के संस्कारों की तारीफ़ करते हैं कि तुम्हारे मम्मीपापा ने इतने अच्छे संस्कार दिए हैं कि तुमने मेरा पूरा घर इतने अच्छे से संभाल लिया. इन सबसे आप सभी के बीचतनाव काम और प्यार ज़्यादा बढ़ेगा.
  • इसके अलावा एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि शादी के शुरुआती दौर में कभी भी अपने डार्क सीक्रेट्स किसी सेभी शेयर ना करें, अपने अफ़ेयर्स या फैंटसीज़ आदि के बारे में पार्टनर को जोश जोश में बता ना दें. बाद में भी भले हीआप दोनों में अटूट विश्वास हो पर ये बातें कभी साझा ना करें. पार्टनर भले ही अलग अलग तरीक़ों से पूछने कीकोशिश भी करे तब भी यहां आपके द्वारा बोला गया झूठ आपके रिश्ते को बिगड़ने से बचा सकता है!
  • पिंकु शर्मा

बेहतर रिश्ते हमारे जीवन को बेहतर और आसान बनाते हैं, जबकि रिश्ते अगर बेहतर ना हों तो वो परेशानी का सबब बनजाते हैं. ऐसे में ज़रूरी है कि हम अपने रिश्तों को बेहतर बनाने और उन्हें ईमानदारी से निभाने की कोशिश करें. लेकिन रिश्तेबनाना और निभाना भी एक कला है, अगर आप इसमें माहिर नहीं तो आपको खुद को बेहतर बनाना होगा और रिश्ते बनानेव निभाने की कला को सीखना होगा. 

क्या आप लोगों को बहुत ज़्यादा जज करते हैं?

अगर हां, तो जज करना थोड़ा कम कर दीजिए, क्योंकि जज करनेवालों के लोग कम ही क़रीब आते हैं. ना वो ज़्यादा शेयरकरते हैं और ना ही अपनी रियल पर्सनैलिटी दर्शाते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि हमें हर बात पे, हर व्यवहार पे जज कियाजाएगा, हमारे बारे में एक धारण बना ली जाएगी. 

बेहतर होगा किसी के बारे में एक दो घटना या बातों से राय ना बना लें. लोगों को बेनीफिट ऑफ डाउट ज़रूर दें. इससेआपके रिश्ते बेहतर होंगे.

क्या आप सुनते कम और बोलते ज़्यादा है?

अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वो अपनी ही बात रखते हैं और किसी की सुनते नहीं हैं. ऐसे लोगों से अपने भी कुछकहने से कतराने लगते हैं. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए अच्छा श्रोता होना बेहद ज़रूरी है.

कहीं आप दूसरों में हमेशा ग़लतियां और कमियां तो नहीं निकालते?

कई लोगों की आदत होती है खुद को परफ़ेक्ट समझते हैं और समानेवाले को हमेशा सिखाते रहते हैं. ज़रा सी चूक होने परइतना सुनाते हैं कि जैसे उनसे तो कभी गलती हो ही नहीं सकती. …तुमसे एक काम ठीक से नहीं होता, तुमको तो यहज़िम्मेदारी देनी ही नहीं चाहिए थी… कब सीखोगे… इस तरह के वाक्यों के प्रयोगों से जो लोग बचे रहते हैं वो रिश्ते बनाएरखने की कला में माहिर होते हैं.

क्या अपनों के लिए कभी कुछ ख़ास करने की सोचते हैं आप?

सिर्फ़ रूटीन तरीक़े से रिश्ते में बने रहना आपके रिश्ते को बोरिंग बना देगा, रिश्तों को अगर निभाना है तो रूटीन से थोड़ाऊपर उठकर सोचना और करना होगा. कभी सरप्राइज़, कभी कुछ ख़ास प्लान करने में अगर आप माहिर हैं तो रिश्ते निभानेकी कला भी आप बेहतर जानते हैं.

क्या आप किसी के व्यक्तित्व को जैसा वो है वैसा ही अपनाने से कतराते तो नहीं?

हर इंसान अलग होता है. अगर हम ये सोचें कि सब हमारी ही तरह हों तो यह मुमकिन नहीं. किसी में कोई कमी, कमज़ोरीतो किसी में कुछ अलग गुण भी होंगे. अगर हम किसी को उनके व्यक्तित्व के साथ ही अपनाते हैं तो रिश्ते बनाने औरनिभाने की कला में माहिर माने जाएँगे.

दूसरों के बुरे वक़्त में आप साथ निभाते हैं या पीछा छुड़ा लेते हैं?

रिश्तों का मतलब ही होता है साथ निभाना, लेकिन अक्सर ज़्यादातर लोग बुरा दौर आने पर साथ छोड़ देते हैं या कोईबहाना बना देते हैं और जब हमें सबसे ज़्यादा अपनों की ज़रूरत होती तब वो होते ही नहीं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में सेहो तो आपके रिश्ते ना तो टिक पाएँगे और ना ही निभ पाएँगे. यहां तक कि जब आप मुसीबत में होगे तो खुद को अकेला हीपाओगे.

बेहतर होगा कि जब अपनों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो तब हम उनके साथ खड़े रहें. यही रिश्तों की असली ख़ुशी है.

Art Of Relationship

स्वार्थ या अपना काम निकलवाने के लिए तो रिश्ते नहीं बनाते?

कई लोग आजकल यारी दोस्ती ही नहीं, प्यार और शादी भी मतलब के लिए ही करते हैं. पैसों को देखकर या आगे चलकरमुनाफ़े को देखकर रिश्ते बनाते व तोड़ते हैं. अगर आपकी यही सोच है तो आप कभी भी असली सही रिश्ते नहीं बनापाओगे.  मतलब के रिश्तों की उम्र अधिक नहीं होती और ऐसे लोग रिश्ते बनाने और निभाने की कला जानते ही नहीं.

रिश्तों में भावनाओं को महत्व ना देकर अन्य चीज़ों को ज़्यादा ज़रूरी मानते हैं?

पैसा, ज़िम्मेदारी, गुण-अवगुण इत्यादि चीज़ों को अगर आप भावनाओं से ऊपर रखेंगे तो मात खाएँगे. किसी भी रिश्ते मेंप्यार, केयर aur शेयर की भावना सबसे ज़रूरी होती है. अगर आप में इन भावनाओं के लिए सम्मान है तो आप रिश्ते बनानेऔर निभाने की कला जानते हैं.

रिश्तों में ओवर पज़ेसिव या शकी तो नहीं हो?

रिश्तों में बेहद ज़रूरी है कि आपके साथ बंधे लोगों को घुटन ना महसूस हो. अगर आप हर बात पर रोक-टोक करोगे, बहुतअधिक सवाल-जवाब करोगे और सामनेवाले को बांधकर रखने की कोशिश में ही रहोगे तो अच्छे रिश्तों को खो दोगे. शककरना या पज़ेसिव होना एक सीमा तक तो बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन बाद में यह रिश्तों को कमज़ोर बना देते हैं. इसलिए भरोसा करना सीखें.

क्या आप दूसरों का सम्मान नहीं करते?

हर बात पर खुद को बड़ा दिखाने के लिए अक्सर लोग अपनों का ही अपमान कब करने लगते हैं खुद उन्हें भी अंदाज़ा नहींहो पाता. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में से हैं तो संभल जाइए. रिश्तों में छोटे से लेकर बड़ों तक का सम्मान बेहद ज़रूरी है, क्योंकि सम्मान देंगे तो सम्मान पाएँगे और उनका विश्वास भी जीत पाएँगे.

ज़िम्मेदारी से भागते तो नाहीं?

कई लोग अपने हक़ की बात तो बहुत करते हैं लेकिन ज़िम्मेदारी नहीं समझते. ज़िम्मेदारियों को बांटने की कला ही आपकोरिश्ते निभाने की कला में माहिर बनाएगी. सबको साथ लेकर चलना ज़रूरी है और उसके लिए ज़िम्मेदार बनना भी.

Relationship Goals

कैसे माहिर बनें रिश्ते बनाने और निभाने की कला में?

  • ईमानदार रहें, चीट ना करें.
  • पैसों के मामले में छुपाकर या झूठ बोलकर फायदा उठाने की ना सोचें.
  • विश्वास करना सीखें लेकिन आंख बंद करके नहीं.
  • स्वार्थी ना बनें.
  • दूसरों की परवाह दिल से करें.
  • हर रिश्ते को इज़्ज़त दें.
  • क्रोध और अपमान करने से जितना सम्भव को बचें.
  • हिटलर बनकर अपनी ही ना चलाएँ, दूसरों की राय को भी महत्व दें.
  • सामनेवाले को मूर्ख ना तो समझें और ना ही बनाने की कोशिश करें.
  • रिश्तों के लिए समय निकालें और अच्छा समय साथ बिताएँ.
  • समस्या होने पर बातचीत से हल निकालें, ना कि नाराज़ होकर मुंह फुला लें.
  • छोटी छोटी ख़ुशियों को महत्व दें… रिश्तों में ख़ुशियों के लिए बंगला-गाड़ी ज़रूरी नहीं, बल्कि एक-दूसरे क साथज़रूरी होता है.
  • भौतिक चीज़ों की ख्वाहिशों में अपना चैन और सुकून कभी ना खोएँ.
  • करियर और घर दोनों को बैलेंस करना सीखें. 
  • कुछ नियम बनाएँ, जैसे- रोज़ एकसाथ परिवार डिनर करेगा, उस वक़्त आपस की बातें करें ना कि फ़ोन पर रहें औरप्रोफ़ेशनल बातें करें.
  • छुट्टी के दिन सब साथ मिलकर कुछ ख़ास बनाएँ. घर की महिलाओं को आराम दें या उन्हें बाहर ले जाएँ.

अगर आप इन तमाम छोटी छोटी बातों का ख़्याल रखेंगे तो रिश्ते बनाने और उन्हें निभाने की कला जान जाएँगे, क्योंकि येकोई मुश्किल काम नहीं बस थोड़ा सा अपनों के बारे में सोचने भर से रिश्ते ताउम्र के लिए बने रहते हैं.

भोलू शर्मा

यह भी पढ़ें: रिश्तों में बोझ या बोझिल रिश्ते- क्यों और क्या हैं कारण? (When Relationship Feels Like A Burden)

व़क्त की धूल, समय की परत… हर चीज़ को धीरे-धीरे पुराना, ग़ैरज़रूरी या यूं कहें कि बासी करने लगती है. हमें ऊब-सी होने लगती है, क्योंकि एक ही तरह का रूटीन, एक ही ढर्रे पर चल रही ज़िंदगी में हमें एक्साइटमेंट जैसा कुछ नहीं लगता. यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है. रिश्ते भी धीरे-धीरे रूटीन बन जाते हैं. उनमें वो ऊर्जा व गर्माहट गायब-सी होने लगती है, जो उन्हें हमेशा ज़िंदा रखने के लिए ज़रूरी होती है. ऐसे में जिस तरह से हम चीज़ों को पॉलिश करके नया बनाने की कोशिश करते हैं, ठीक उसी तरह रिश्तों में भी पॉलिशिंग की ज़रूरत होती है. समय-समय पर यह होती रहे, तो रिश्तों की चमक व ताज़गी बनी रहती है, वरना वो उबाऊ लगने लगते हैं.

 Happy Relationship Goals

कुछ नया करें

जब भी आपको महसूस हो कि रिश्ते रूटीन बनते जा रहे हैं, कुछ नया करें. ऐसा कुछ जिससे सामनेवाले को भी महसूस हो कि यह तो हमने सोचा ही नहीं था. इससे नए सिरे से आप उन रिश्तों को जीने लगते हैं. ये नयापन किसी भी तरह से आप ला सकते हैं. चाहें तो सरप्राइज़ेस के ज़रिए या अपनी कोई ऐसी बुरी आदत त्यागकर जिससे पार्टनर को ख़ुशी महसूस हो और उसे लगे कि आपने उसके लिए कुछ किया है.

रोमांटिक लाइफ को रिक्रिएट करें

एक समय के बाद लाइफ से रोमांस लगभग गायब-सा हो जाता है या यूं कहें कि वो बैकफुट पर चला जाता है और ज़िम्मेदारियां फ्रंटफुट पर आ जाती हैं. आप ऐसा होने से रोक सकते हैं. रोमांस के लिए स़िर्फ भावनाएं काफ़ी होती हैं. ज़रूरी नहीं कि आपको महंगे गिफ्ट्स लाने हैं या चांद-तारों पर जाने की बात कहनी है. आप पार्टनर को पल-पल यह महसूस करवा सकते हैं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं. कभी प्यारभरे सरप्राइज़्ड फोन कॉल्स से, कभी मैसेजेस से, कभी ऑफिस से जल्दी आकर, कभी डिनर या मूवी प्लान करके, तो कभी उनकी फेवरेट डिश बनाकर. कई तरी़के हैं, आपको जो सही लगे वो करें, लेकिन करें ज़रूर.

दिल की बात कहने से हिचकिचाएं नहीं

अगर कभी कोई बात आपको परेशान कर रही है या आप पार्टनर के लिए कुछ महसूस कर रहे हैं, तो कम्यूनिकेट करें. दिल की बात सहज तरी़के से कह देने से बॉन्डिंग मज़बूत होती है. दिल ही में रखेंगे, तो बात बढ़ेगी और परेशानियां भी. हर स्तर पर और हर व़क्त कम्यूनिकेशन ज़रूरी है.

शेयर करें

अपनी ख़ुशी, अपने ग़म, अपने अचीवमेंट्स, अपने प्रयास… सब कुछ शेयर करें. रिश्तों में शेयरिंग बेहद ज़रूरी है. इससे एक-दूसरे पर विश्‍वास और बढ़ता है.

सलाह लें और उन्हें मानें भी

ख़ुद को ही सबसे स्मार्ट समझने की ग़लती न करें. पार्टनर की सलाह भी लें और अगर वो सही लगती है, तो उस पर अमल भी करें. इससे पार्टनर को महसूस होगा कि आप उनकी बातों को महत्व देते हैं. इससे आपके रिश्ते में अपनापन और बढ़ेगा.

मदद करें, ज़िम्मेदारियां बांटें

दोनों को एक-दूसरे के कामों में मदद करने की कोशिश करनी चाहिए. इससे काम हल्का होगा और ज़िम्मेदारियां बंटेंगी. हमेशा बातचीत करके तय करें कि कौन किस बात की ज़िम्मेदारी लेगा, ताकि कोई कन्फ्यूज़न न रहे.

पार्टनर को हर्ट करने से बचें

अगर आपको पता है कि आपका व्यवहार या आपकी कोई बात पार्टनर को हर्ट कर सकती है, तो उसे करने से बचें. यदि ग़लती से ऐसा कुछ हो भी जाए, तो माफ़ी मांग लें और भविष्य में ग़लती न दोहराने का वादा भी करें. हो सकता है आपके लिए वह बात मामूली हो, पर पार्टनर को अच्छी न लगे, तो ऐसे में बेहतर है एक-दूसरे के लिए ख़ुद को थोड़ा बदल लें.

यह भी पढ़ें: इन डेली डोज़ेस से बढ़ाएं रिश्तों की इम्यूनिटी (Daily Doses To A Healthy Relationship)

Relationship Goals
कुछ बुरी आदतों को छोड़ने के लिए एक-दूसरे को चैलेंज करें

आप स्मोक करते हैं, जो पत्नी को पसंद नहीं और पत्नी बहुत ज़्यादा ख़र्च करती है, जो आपको पसंद नहीं, तो आप एक-दूसरे को चैलेंज करें कि इस महीने से अपनी-अपनी बुरी आदतों पर काबू पाने की पूरी कोशिश करेंगे. इससे आपको एक मोटिवेशन भी मिलेगी और आपकी बुरी आदतें भी कम होंगी.

फिटनेस को इग्नोर न करें

किसी भी रिश्ते में फिटनेस का भी बहुत बड़ा हाथ होता है. न स़िर्फ आप सेहतमंद रहते हैं, आपका रिश्ता भी हेल्दी होता है. एक-दूसरे के लिए फिटनेस चैलेंज लें. साथ में वॉक, जॉग या एक्सरसाइज़ करें. इससे आप एक-दूसरे के साथ समय भी बिता पाएंगे और हेल्दी भी रहेंगे. फिट रहेंगे, तो अट्रैक्टिव भी लगेंगे.

कुछ चीज़ें नज़रअंदाज़ करना भी सीखें

हम सब एक जैसे नहीं होते. हो सकता है पार्टनर की कोई बात आपको पसंद नहीं आती, तो बार-बार उन्हें टोकने से बेहतर है कि नज़रअंदाज़ करें या फिर प्यार से समझाएं. रिश्तों की मज़बूती के लिए बहुत-सी बातों को इग्नोर करना व एडजस्ट करना भी ज़रूरी होता है. पार्टनर के अलग व्यक्तित्व को सम्मान दें, उन्हें अपने जैसा बनाने की कोशिश में निराशा ही हाथ लगेगी.

सेक्स लाइफ में ऊर्जा बनाए रखने की कोशिश करें

यह बेहद ज़रूरी है. आपकी सेक्स लाइफ पर भी आपका रिश्ता बहुत हद तक निर्भर करता है. पर्सनल हाइजीन से लेकर पार्टनर की ज़रूरतों का ख़्याल रखने तक… कुछ भी आप इग्नोर नहीं कर सकते. सेक्स को मशीनी क्रिया न समझकर प्यार के इज़हार का ज़रिया समझें. आपस में बात करें कि आपको क्या पसंद है, क्या नापसंद है. बेडरूम के डेकोर को चेंज करें, जगह बदलें, ताकि सेक्स लाइफ भी रूटीन बनकर न रह जाए.

– विजयलक्ष्मी

यह भी पढ़ें: पति-पत्नी के रिश्ते में भी ज़रूरी है शिष्टाचार (Etiquette Tips For Happily Married Couples)

Breakup Effects
बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

शरीर में दर्द होने पर जैसे आप कोई काम सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, ठीक वैसे ही दिल के टूटने पर भी दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है. ब्रेकअप का संबंध केवल भावनाओं से ही नहीं होता, शरीर से भी होता है, इसलिए ब्रेकअप (Breakup) के दौरान जब व्यक्ति बुरी तरह से आहत होता है, तो उसका दुष्प्रभाव (Side Effects) मन के साथ-साथ शरीर पर भी इस प्रकार से दिखाई देने लगता है-

आंखों में सूजन: जब दिल दुखी होता है, तो आंखों में आंसू आना लाज़िमी है. लोग पूरी-पूरी रात रोते रहते हैं, जिसके कारण अगले दिन आंखों में सूजन आ जाती है. यहां पर एक दिलचस्प बात बता दें कि ब्रेकअप, तलाक़ या किसी अन्य बात से आहत होने के बाद रोने पर जो आंसू निकलते हैं, वो केवल वॉटरी होते हैं, उनमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चोट लगने या अन्य किसी कारण से रोने पर निकलनेवाले आंसुओं में नमक की मात्रा अधिक होती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जब कोई भावनात्मक रूप से आहत होकर रोता है, तो उसकी आंखों में अधिक सूजन आती है.

सीने में दर्द: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जब भी आप किसी बे्रकअप और तलाक़ जैसी गंभीर बात से आहत होते हैं, तो आपको ऐसा महूसस होता है, जैसे- सिर घूम रहा है, चक्कर आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, सीने में हवा पूरी तरह से नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है. इसका कारण है कि भावनात्मक पीड़ा होने के साथ सीने में शारीरिक पीड़ा भी महसूस होती है. कई बार तो ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे किसी ने छाती में मुक्का मारा हो या फिर छाती में भारीपन-सा महसूस होता है.

नींद न आना: ब्रेकअप के बाद अधिकतर लोग नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसका कारण प्यार में नाकाम होना है. परिणामस्वरूप तनाव बढ़ने लगता है. तनाव बढ़ने के कारण कार्टिसोल का उत्पादन शरीर में बढ़ने लगता है और बॉडी क्लॉक पर भी बुरा असर पड़ता है. इन्हीं कारणों से ब्रेकअप के समय लोगों को नींद नहीं आती है.

मांसपेशियों में दर्द: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में हुए एक शोध के अनुसार, बेक्रअप के बाद मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, सिरदर्द बढ़ सकता है और गर्दन में अकड़न आ सकती है. कई बार पैर भी इतने स्थिर (स्टिफ) हो जाते हैं कि सीढ़ियां चढ़ना दूभर हो जाता है. यहां तक कि थोड़ी दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है. इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी साबित हुआ है कि 23% तलाक़शुदा लोगों को कुछ दिन तक चलने में परेशानी हो रही थी और कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द हो रहा था.

पाचन तंत्र में गड़बड़ी: ब्रेकअप के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तऱफ़ डायवर्ट हो जाती है. जब कार्टिसोल की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तरफ़ ज़रूरत से ज़्यादा होती है, तो भूख कम होना, डायरिया और पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं होती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप ब्रेकअप के दौर से गुज़र रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क भूख मिटानेवाले हार्मोन का उत्पादन अधिक करता है.

वज़न बढ़ना: कुछ लोग जब तनावग्रस्त होते हैं, तो उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. इसका कारण है कि तनावग्रस्त होने पर उनके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं और शरीर इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है. परिणामस्वरूप शरीर में शुगर फैट के रूप में एकत्रित होने लगता है और उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. जब वे ब्रेकअप से आहत होते हैं, तो उस समय उनका मन शुगर और फैटवाली चीज़ें खाने का करता है और इन चीज़ों को खाने से वज़न बढ़ता है.

मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव: एक्सपर्टस का मानना है कि जब आप किसी अपने को खो देते हैं, तो दिल में दर्द के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी उसका असर पड़ता है. यानी कि दिल के बुरी तरह से आहत होने पर मस्तिष्क में भी तकलीफ़ होती है.

स्किन संबंधी समस्याएं: ब्रेकअप के बाद तनाव होता ही है. तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसके कारण त्वचा की चमक ख़त्म हो जाती है. अगर आप पहले से ही मुंहासे, सोरायसिस और एग्ज़ीमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो बे्रकअप के बाद आपकी त्वचा की रंगत और भी ख़राब होने लगती है.

दिल संबंधी परेशानियां: कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप के समय व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूटा हुआ होता है, इसलिए उस व़क्त उसे हार्ट संबंधी तकलीफ़ या दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा अधिक होता है. इसका कारण है कि ब्रेकअप के दौरान व्यक्ति के शरीर में एंड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा हुआ होता है.

इम्यूनिटी कमज़ोर होना: ब्रेकअप के दौरान अक्सर मन में नकारात्मक ख़्याल आते हैं. इन नकारात्मक ख़्यालों के कारण अवसाद, अकेलापन, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

Breakup Effects

ब्रेकअप से जुड़े कुछ तथ्य
  • ब्रेकअप के दौरान महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक आहत होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में पुरुषों को नॉर्मल होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते.
  • ब्रेकअप से पहले व्यक्ति अपने रिश्ते के प्रति जितना प्रतिबद्ध होता है, रिश्ता टूटने के बाद उसमें बदलाव की संभावना भी उतनी अधिक होती है. यानी बे्रकअप के बाद व्यक्ति अपने आप को पूरी तरह से बदला हुआ महसूस करता है.
  • सोशल मीडिया रिश्तों टूटने, मानसिक व शारीरिक शोषण और तलाक़ का एक प्रमुख कारण बन गया है.

 

ब्रेकअप के बाद कैसे करें अपनी बॉडी को हील?
  1. ब्रेकअप के बाद सबसे पहले अपना फिज़िकल चेकअप कराएं. फिज़िकल चेकअप के दौरान डॉक्टर से पूछें- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना है? क्या शरीर में रक्तसंचार सुचारू रूप से हो रहा है? कई बार तनाव और अवसाद के कारण इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.
  2. अगर आप किसी भावनात्मक समस्या से परेशान हैं, तो उसे भी अपने डॉक्टर से शेयर करें और उससे निबटने के तरी़के पूछें.
  3. अकेलेपन, अवसाद और तनाव से छुटकारा पाने के लिए किसी अच्छे स्पा में जाकर बॉडी मसाज कराएं. बॉडी मसाज से माइंड और बॉडी दोनों रिलैक्स होती हैं.
  4. ब्रेकअप के बाद बॉडी मसाज कराने से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द और तनाव दूर होता है. अच्छी नींद आती है और एकाग्रता बढ़ती है.
  5. नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रकृति के क़रीब जाएं.
  6. ब्रेकअप में खाना-पीना छोड़ने की बजाय अपनी डायट पर ध्यान दें और हेल्दी फूड हैबिट्स फॉलो करें.
  7. ब्रेकअप के बाद शरीर में होनेवाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए वर्कआउट करें. वर्कआउट और एक्सरसाइज़ करने से एंड्रॉर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जो तनाव और अवसाद को दूर करता है.
  8. योग और प्राणायाम करके अपने अशांत मन को शांत करने का प्रयास करें.
  9. अपने बीते हुए कल को भुलाने के लिए ख़ुद को व्यस्त करें, जैसे- अच्छी किताबें पढ़ें, सकारात्मक सोचवाले दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  10. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डांस, साइकिलिंग, स्विमिंग, फिटनेस क्लास और स्पोर्ट्स खेलें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

यह भी पढ़ें: पति-पत्नी के रिश्ते में भी ज़रूरी है शिष्टाचार (Etiquette Tips For Happily Married Couples)