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ज़रूरी है रिश्तों की भी पॉलिशिंग (Healthy And Happy Relationship Goals All Couples Should Create Together)

व़क्त की धूल, समय की परत… हर चीज़ को धीरे-धीरे पुराना, ग़ैरज़रूरी या यूं कहें कि बासी करने लगती है. हमें ऊब-सी होने लगती है, क्योंकि एक ही तरह का रूटीन, एक ही ढर्रे पर चल रही ज़िंदगी में हमें एक्साइटमेंट जैसा कुछ नहीं लगता. यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है. रिश्ते भी धीरे-धीरे रूटीन बन जाते हैं. उनमें वो ऊर्जा व गर्माहट गायब-सी होने लगती है, जो उन्हें हमेशा ज़िंदा रखने के लिए ज़रूरी होती है. ऐसे में जिस तरह से हम चीज़ों को पॉलिश करके नया बनाने की कोशिश करते हैं, ठीक उसी तरह रिश्तों में भी पॉलिशिंग की ज़रूरत होती है. समय-समय पर यह होती रहे, तो रिश्तों की चमक व ताज़गी बनी रहती है, वरना वो उबाऊ लगने लगते हैं.

 Happy Relationship Goals

कुछ नया करें

जब भी आपको महसूस हो कि रिश्ते रूटीन बनते जा रहे हैं, कुछ नया करें. ऐसा कुछ जिससे सामनेवाले को भी महसूस हो कि यह तो हमने सोचा ही नहीं था. इससे नए सिरे से आप उन रिश्तों को जीने लगते हैं. ये नयापन किसी भी तरह से आप ला सकते हैं. चाहें तो सरप्राइज़ेस के ज़रिए या अपनी कोई ऐसी बुरी आदत त्यागकर जिससे पार्टनर को ख़ुशी महसूस हो और उसे लगे कि आपने उसके लिए कुछ किया है.

रोमांटिक लाइफ को रिक्रिएट करें

एक समय के बाद लाइफ से रोमांस लगभग गायब-सा हो जाता है या यूं कहें कि वो बैकफुट पर चला जाता है और ज़िम्मेदारियां फ्रंटफुट पर आ जाती हैं. आप ऐसा होने से रोक सकते हैं. रोमांस के लिए स़िर्फ भावनाएं काफ़ी होती हैं. ज़रूरी नहीं कि आपको महंगे गिफ्ट्स लाने हैं या चांद-तारों पर जाने की बात कहनी है. आप पार्टनर को पल-पल यह महसूस करवा सकते हैं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं. कभी प्यारभरे सरप्राइज़्ड फोन कॉल्स से, कभी मैसेजेस से, कभी ऑफिस से जल्दी आकर, कभी डिनर या मूवी प्लान करके, तो कभी उनकी फेवरेट डिश बनाकर. कई तरी़के हैं, आपको जो सही लगे वो करें, लेकिन करें ज़रूर.

दिल की बात कहने से हिचकिचाएं नहीं

अगर कभी कोई बात आपको परेशान कर रही है या आप पार्टनर के लिए कुछ महसूस कर रहे हैं, तो कम्यूनिकेट करें. दिल की बात सहज तरी़के से कह देने से बॉन्डिंग मज़बूत होती है. दिल ही में रखेंगे, तो बात बढ़ेगी और परेशानियां भी. हर स्तर पर और हर व़क्त कम्यूनिकेशन ज़रूरी है.

शेयर करें

अपनी ख़ुशी, अपने ग़म, अपने अचीवमेंट्स, अपने प्रयास… सब कुछ शेयर करें. रिश्तों में शेयरिंग बेहद ज़रूरी है. इससे एक-दूसरे पर विश्‍वास और बढ़ता है.

सलाह लें और उन्हें मानें भी

ख़ुद को ही सबसे स्मार्ट समझने की ग़लती न करें. पार्टनर की सलाह भी लें और अगर वो सही लगती है, तो उस पर अमल भी करें. इससे पार्टनर को महसूस होगा कि आप उनकी बातों को महत्व देते हैं. इससे आपके रिश्ते में अपनापन और बढ़ेगा.

मदद करें, ज़िम्मेदारियां बांटें

दोनों को एक-दूसरे के कामों में मदद करने की कोशिश करनी चाहिए. इससे काम हल्का होगा और ज़िम्मेदारियां बंटेंगी. हमेशा बातचीत करके तय करें कि कौन किस बात की ज़िम्मेदारी लेगा, ताकि कोई कन्फ्यूज़न न रहे.

पार्टनर को हर्ट करने से बचें

अगर आपको पता है कि आपका व्यवहार या आपकी कोई बात पार्टनर को हर्ट कर सकती है, तो उसे करने से बचें. यदि ग़लती से ऐसा कुछ हो भी जाए, तो माफ़ी मांग लें और भविष्य में ग़लती न दोहराने का वादा भी करें. हो सकता है आपके लिए वह बात मामूली हो, पर पार्टनर को अच्छी न लगे, तो ऐसे में बेहतर है एक-दूसरे के लिए ख़ुद को थोड़ा बदल लें.

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Relationship Goals
कुछ बुरी आदतों को छोड़ने के लिए एक-दूसरे को चैलेंज करें

आप स्मोक करते हैं, जो पत्नी को पसंद नहीं और पत्नी बहुत ज़्यादा ख़र्च करती है, जो आपको पसंद नहीं, तो आप एक-दूसरे को चैलेंज करें कि इस महीने से अपनी-अपनी बुरी आदतों पर काबू पाने की पूरी कोशिश करेंगे. इससे आपको एक मोटिवेशन भी मिलेगी और आपकी बुरी आदतें भी कम होंगी.

फिटनेस को इग्नोर न करें

किसी भी रिश्ते में फिटनेस का भी बहुत बड़ा हाथ होता है. न स़िर्फ आप सेहतमंद रहते हैं, आपका रिश्ता भी हेल्दी होता है. एक-दूसरे के लिए फिटनेस चैलेंज लें. साथ में वॉक, जॉग या एक्सरसाइज़ करें. इससे आप एक-दूसरे के साथ समय भी बिता पाएंगे और हेल्दी भी रहेंगे. फिट रहेंगे, तो अट्रैक्टिव भी लगेंगे.

कुछ चीज़ें नज़रअंदाज़ करना भी सीखें

हम सब एक जैसे नहीं होते. हो सकता है पार्टनर की कोई बात आपको पसंद नहीं आती, तो बार-बार उन्हें टोकने से बेहतर है कि नज़रअंदाज़ करें या फिर प्यार से समझाएं. रिश्तों की मज़बूती के लिए बहुत-सी बातों को इग्नोर करना व एडजस्ट करना भी ज़रूरी होता है. पार्टनर के अलग व्यक्तित्व को सम्मान दें, उन्हें अपने जैसा बनाने की कोशिश में निराशा ही हाथ लगेगी.

सेक्स लाइफ में ऊर्जा बनाए रखने की कोशिश करें

यह बेहद ज़रूरी है. आपकी सेक्स लाइफ पर भी आपका रिश्ता बहुत हद तक निर्भर करता है. पर्सनल हाइजीन से लेकर पार्टनर की ज़रूरतों का ख़्याल रखने तक… कुछ भी आप इग्नोर नहीं कर सकते. सेक्स को मशीनी क्रिया न समझकर प्यार के इज़हार का ज़रिया समझें. आपस में बात करें कि आपको क्या पसंद है, क्या नापसंद है. बेडरूम के डेकोर को चेंज करें, जगह बदलें, ताकि सेक्स लाइफ भी रूटीन बनकर न रह जाए.

– विजयलक्ष्मी

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बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

Breakup Effects
बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

शरीर में दर्द होने पर जैसे आप कोई काम सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, ठीक वैसे ही दिल के टूटने पर भी दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है. ब्रेकअप का संबंध केवल भावनाओं से ही नहीं होता, शरीर से भी होता है, इसलिए ब्रेकअप (Breakup) के दौरान जब व्यक्ति बुरी तरह से आहत होता है, तो उसका दुष्प्रभाव (Side Effects) मन के साथ-साथ शरीर पर भी इस प्रकार से दिखाई देने लगता है-

आंखों में सूजन: जब दिल दुखी होता है, तो आंखों में आंसू आना लाज़िमी है. लोग पूरी-पूरी रात रोते रहते हैं, जिसके कारण अगले दिन आंखों में सूजन आ जाती है. यहां पर एक दिलचस्प बात बता दें कि ब्रेकअप, तलाक़ या किसी अन्य बात से आहत होने के बाद रोने पर जो आंसू निकलते हैं, वो केवल वॉटरी होते हैं, उनमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चोट लगने या अन्य किसी कारण से रोने पर निकलनेवाले आंसुओं में नमक की मात्रा अधिक होती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जब कोई भावनात्मक रूप से आहत होकर रोता है, तो उसकी आंखों में अधिक सूजन आती है.

सीने में दर्द: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जब भी आप किसी बे्रकअप और तलाक़ जैसी गंभीर बात से आहत होते हैं, तो आपको ऐसा महूसस होता है, जैसे- सिर घूम रहा है, चक्कर आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, सीने में हवा पूरी तरह से नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है. इसका कारण है कि भावनात्मक पीड़ा होने के साथ सीने में शारीरिक पीड़ा भी महसूस होती है. कई बार तो ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे किसी ने छाती में मुक्का मारा हो या फिर छाती में भारीपन-सा महसूस होता है.

नींद न आना: ब्रेकअप के बाद अधिकतर लोग नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसका कारण प्यार में नाकाम होना है. परिणामस्वरूप तनाव बढ़ने लगता है. तनाव बढ़ने के कारण कार्टिसोल का उत्पादन शरीर में बढ़ने लगता है और बॉडी क्लॉक पर भी बुरा असर पड़ता है. इन्हीं कारणों से ब्रेकअप के समय लोगों को नींद नहीं आती है.

मांसपेशियों में दर्द: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में हुए एक शोध के अनुसार, बेक्रअप के बाद मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, सिरदर्द बढ़ सकता है और गर्दन में अकड़न आ सकती है. कई बार पैर भी इतने स्थिर (स्टिफ) हो जाते हैं कि सीढ़ियां चढ़ना दूभर हो जाता है. यहां तक कि थोड़ी दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है. इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी साबित हुआ है कि 23% तलाक़शुदा लोगों को कुछ दिन तक चलने में परेशानी हो रही थी और कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द हो रहा था.

पाचन तंत्र में गड़बड़ी: ब्रेकअप के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तऱफ़ डायवर्ट हो जाती है. जब कार्टिसोल की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तरफ़ ज़रूरत से ज़्यादा होती है, तो भूख कम होना, डायरिया और पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं होती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप ब्रेकअप के दौर से गुज़र रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क भूख मिटानेवाले हार्मोन का उत्पादन अधिक करता है.

वज़न बढ़ना: कुछ लोग जब तनावग्रस्त होते हैं, तो उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. इसका कारण है कि तनावग्रस्त होने पर उनके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं और शरीर इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है. परिणामस्वरूप शरीर में शुगर फैट के रूप में एकत्रित होने लगता है और उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. जब वे ब्रेकअप से आहत होते हैं, तो उस समय उनका मन शुगर और फैटवाली चीज़ें खाने का करता है और इन चीज़ों को खाने से वज़न बढ़ता है.

मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव: एक्सपर्टस का मानना है कि जब आप किसी अपने को खो देते हैं, तो दिल में दर्द के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी उसका असर पड़ता है. यानी कि दिल के बुरी तरह से आहत होने पर मस्तिष्क में भी तकलीफ़ होती है.

स्किन संबंधी समस्याएं: ब्रेकअप के बाद तनाव होता ही है. तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसके कारण त्वचा की चमक ख़त्म हो जाती है. अगर आप पहले से ही मुंहासे, सोरायसिस और एग्ज़ीमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो बे्रकअप के बाद आपकी त्वचा की रंगत और भी ख़राब होने लगती है.

दिल संबंधी परेशानियां: कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप के समय व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूटा हुआ होता है, इसलिए उस व़क्त उसे हार्ट संबंधी तकलीफ़ या दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा अधिक होता है. इसका कारण है कि ब्रेकअप के दौरान व्यक्ति के शरीर में एंड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा हुआ होता है.

इम्यूनिटी कमज़ोर होना: ब्रेकअप के दौरान अक्सर मन में नकारात्मक ख़्याल आते हैं. इन नकारात्मक ख़्यालों के कारण अवसाद, अकेलापन, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है.

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Breakup Effects

ब्रेकअप से जुड़े कुछ तथ्य
  • ब्रेकअप के दौरान महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक आहत होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में पुरुषों को नॉर्मल होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते.
  • ब्रेकअप से पहले व्यक्ति अपने रिश्ते के प्रति जितना प्रतिबद्ध होता है, रिश्ता टूटने के बाद उसमें बदलाव की संभावना भी उतनी अधिक होती है. यानी बे्रकअप के बाद व्यक्ति अपने आप को पूरी तरह से बदला हुआ महसूस करता है.
  • सोशल मीडिया रिश्तों टूटने, मानसिक व शारीरिक शोषण और तलाक़ का एक प्रमुख कारण बन गया है.

 

ब्रेकअप के बाद कैसे करें अपनी बॉडी को हील?
  1. ब्रेकअप के बाद सबसे पहले अपना फिज़िकल चेकअप कराएं. फिज़िकल चेकअप के दौरान डॉक्टर से पूछें- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना है? क्या शरीर में रक्तसंचार सुचारू रूप से हो रहा है? कई बार तनाव और अवसाद के कारण इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.
  2. अगर आप किसी भावनात्मक समस्या से परेशान हैं, तो उसे भी अपने डॉक्टर से शेयर करें और उससे निबटने के तरी़के पूछें.
  3. अकेलेपन, अवसाद और तनाव से छुटकारा पाने के लिए किसी अच्छे स्पा में जाकर बॉडी मसाज कराएं. बॉडी मसाज से माइंड और बॉडी दोनों रिलैक्स होती हैं.
  4. ब्रेकअप के बाद बॉडी मसाज कराने से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द और तनाव दूर होता है. अच्छी नींद आती है और एकाग्रता बढ़ती है.
  5. नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रकृति के क़रीब जाएं.
  6. ब्रेकअप में खाना-पीना छोड़ने की बजाय अपनी डायट पर ध्यान दें और हेल्दी फूड हैबिट्स फॉलो करें.
  7. ब्रेकअप के बाद शरीर में होनेवाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए वर्कआउट करें. वर्कआउट और एक्सरसाइज़ करने से एंड्रॉर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जो तनाव और अवसाद को दूर करता है.
  8. योग और प्राणायाम करके अपने अशांत मन को शांत करने का प्रयास करें.
  9. अपने बीते हुए कल को भुलाने के लिए ख़ुद को व्यस्त करें, जैसे- अच्छी किताबें पढ़ें, सकारात्मक सोचवाले दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  10. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डांस, साइकिलिंग, स्विमिंग, फिटनेस क्लास और स्पोर्ट्स खेलें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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