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Sex Detox Plan: सेक्सुअल लाइफ को करें रिचार्ज (Sex Detox Plan: Recharge Your Sexual Life)

Recharge Your Sexual Life

जिस तरह हमारी बॉडी को समय-समय पर डिटॉक्स की ज़रूरत होती है, उसी तरह हमें अपने सेक्सुअल रिलेशनशिप को भी डिटॉक्सीफाई करते रहना चाहिए, ताकि रिश्ते में गर्माहट हमेशा बनी रहे.

क्या है डिटॉक्स?

डिटॉक्सीफिकेशन एक प्रोसेस है, जिसके ज़रिए शरीर से टॉक्सिन्स या अनहेल्दी चीज़ों को बाहर निकाला जाता है, जिससे हम एनर्जेटिक, हेल्दी और रिफ्रेशिंग महसूस करते हैं. इसी तरह रिलेशनशिप में भी कई बार टॉक्सिन्स आ जाते हैं, जिससे रिश्तों में बोरियत, ठहराव और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. नतीजा- सेक्सुअल रिश्ते भी प्रभावित होने लगते हैं. सेक्सुअल रिलेशनशिप से इन टॉक्सिन्स को दूर करने के लिए सेक्स डिटॉक्स ज़रूरी है.

कब ज़रूरी है सेक्स डिटॉक्स?

– जब लगे कि रिश्तों में प्यार की गर्मी ख़त्म हो गई है. दोनों को एक-दूसरे के प्रति पहले जैसा आकर्षण महसूस नहीं होता.

– आपका रिश्ता ठंडा हो गया है, उसमें जानने-समझने या हासिल करने के लिए कुछ नया बचा ही नहीं है.

– पति-पत्नी में सिवाय अपने काम और बच्चों के और कोई बात ही नहीं होती.

– आप और आपका साथी साथ रहते हुए भी अपनी अलग ज़िंदगी जीते हैं. दोनों के पास न तो एक-दूसरे के लिए समय होता है और न एक साथ कुछ पल बिताने की इच्छा.

– रिश्तों में आए इस ठहराव का असर आपकी सेक्स लाइफ पर पड़ने लगे. आपको एक-दूसरे में न दिलचस्पी रह गई हो, न आकर्षण.

– सेक्सुअल रिलेशन आप दोनों के लिए एक रूटीन बनकर रह गया हो. जब आपको लगे कि आप दोनों के रिश्ते में अब वो पहले जैसी बात नहीं रही.

– बेडरूम में आप अक्सर ही ‘बहुत थका/थकी हूं’ या ‘बहुत बिज़ी’ हूं का बहाना बनाने लगें.

– आपका बेडरूम आपके लिए इलेक्ट्रॉनिक ऑफिस बन जाए, जहां घर लौटने पर भी आप ऑफिस के काम निपटाने में बिज़ी रहते हों.

– जब एक ही बेडरूम में रहते हुए भी आप दोनों में ख़ामोशी पसरी रहती हो.

– जब लगने लगे कि सेक्स पहले जैसी ख़ुशी और प्लेज़र नहीं देता.अगर ये लक्षण आपके रिश्ते में भी दिखाई दें, तो समझ जाएं कि आपको सेक्स डिटॉक्स की ज़रूरत है. बेवजह रिश्तों को और बोरिंग बनाने की बजाय ज़रूरी है उसकी क्लींज़िंग और उसे डिटॉक्सीफाई करना.

क्या हैं सेक्स लाइफ के टॉक्सिन्स?

स्ट्रेस- ये आपके रिश्ते को अनहेल्दी बना रहे हैं और आपकी सेक्स लाइफ को भी.बिज़ी शेड्यूल और भागदौड़- हम इतने बिज़ी हो गए हैं कि शाम तक हममें इतनी एनर्जी ही नहीं रह जाती कि प्यार के कुछ पल अपने पार्टनर के साथ बिता सकें.

नो एक्सरसाइज़- फिज़िकल एक्टिविटी की कमी से भी सेक्स लाइफ प्रभावित हो रही है. रिसर्च से ये बात साबित हो चुकी है कि फिज़िकली एक्टिव रहनेवाले लोगों की सेक्स लाइफ अच्छी होती है.

अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स– फूड का सीधा असर सेक्स लाइफ पर पड़ता है, लेकिन आजकल लोगों की ईटिंग हैबिट्स अनहेल्दी हो गई हैं, जिससे उनके सेक्स एनर्जी पर असर हो रहा है.

पोल्यूशन- पोल्यूशन ने भी सेक्स लाइफ को प्रभावित किया है. इससे सेक्सुअल एक्टिविटी और ड्राइव दोनों में कमी आई है. एक्सपर्ट के अनुसार पोल्यूशन के बुरे प्रभाव की वजह से सेक्सुअल एक्टिविटी में 30 प्रतिशत कमी आई है.

रिश्तों में ठहराव- सालों तक का साथ और रिश्तों के प्रति उदासीनता, वही सेक्स पोज़ीशन और बोरियत रिश्तों में भी ठहराव ला देती है. नतीज़ा सेक्स लाइफ में पहले जैसा चार्म नहीं रह जाता.

सेक्स डिटॉक्स कैसे करें?

– सेक्स डिटॉक्स का मतलब है कि सेक्सुअल एक्टिविटी से पूरी तरह दूर रहें.

– इससे एक-दूसरे का प्यार पाने की चाहत बढ़ेगी और सेक्स के प्रति दिलचस्पी फिर जागृत होगी.

– इससे आपकी कामेच्छा बढ़ेगी और आप बेहतर ऑर्गे़ज़्म, बेहतर सेक्स का आनंद उठा सकेंगे.

– सेक्स एक्सपर्ट के अनुसार, फॉर्मूला एकदम सिंपल है. कई सालों साथ रहने के बाद प्यार और रिश्ते में भी बोरियत-सी आने लगती है. सेक्स लाइफ भी रूटीन-सी लगने लगती है. ऐसे में सेक्स डिटॉक्स के तहत कुछ दिन सेक्स से दूर रहकर जब फिर से रिश्तों की शुरुआत करेंगे, तो यक़ीन मानिए ये एक नई शुरुआत होगी, जो आपकी सेक्स लाइफ को रिफ्रेश कर देगी.

– सेक्सोलॉजिस्ट के अनुसार, शादी के कुछ सालों बाद ज़्यादातर कपल्स सेक्स लाइफ में प्रॉब्लम की शिकायत लेकर आते हैं. इसमें सेक्स डिज़ायर में कमी से लेकर सेक्सलेेस मैरेज तक की शिकायत होती है. इसका सबसे बेस्ट सोल्यूशन है सेक्स डिटॉक्स यानी सेक्स लाइफ से छोटा-सा ब्रेक.

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3 स्टेप डिटॉक्स

एक तयशुदा समय के लिए सेक्स एक्टिविटी से दूर रहें. एक महीने का समय सेक्स डिटॉक्स के लिए परफेक्ट है.

– इस दौरान आप क्या महसूस कर रहे हैं, इस बारे में अपने पार्टनर से कम्युनिकेट करते रहें.

– इस दौरान अनावश्यक उत्तेजना, परफॉरमेंस प्रेशर, स्ट्रेस, पर्सनल इशूज़, ईगो, पुरानी कड़वी बातें आदि टॉक्सिन्स को अपने दिलोदिमाग़ से बाहर करने की कोशिश करें.

– अपनी हेल्थ पर ध्यान दें, मेडिकली और फिज़िकली फिट रहने की कोशिश करें.

ये कैसे काम करता है

– जो चीज़ पास होकर भी हासिल नहीं होती, उसे पाने की चाह तीव्र हो जाती है. सेक्स डिटॉक्स के मामले में भी यही होता है. दोनों पार्टनर साथ रहते हुए भी सेक्सुअली एक्टिव नहीं होते, तो उनकी सेक्सुअल डिज़ाइयर कई गुना बढ़ जाती है.

– डिटॉक्स पीरियड के बाद कई बार कपल्स वही प्लेज़र महसूस करते हैं, जो शादी के शुरुआती दिनों में करते थे.प एक महीने की दूरी उन्हें एक-दूसरे के और क़रीब लाती है. उन्हें एक-दूसरे की अहमियत पता चलती है. ऐसे में उनका रिश्ता और मज़बूत बनता है.

– डिटॉक्स के बाद पुरुष बेहतर इरेक्शन महसूस करते हैं और महिलाएं भी पहले से ज़्यादा स्ट्रॉन्ग ऑर्गे़ज़्म एंजॉय करती हैं.

– डिटॉक्स आपकी सेक्स लाइफ को और ज़्यादा स्पाइसी बनाता है और जब आप दोबारा सेक्स में इंवॉल्व होते हैं, तो फिर से वही नयापन और एनर्जी महसूस करते हैं, जो शादी के शुरुआती दिनों में करते थे.

रिलेशनशिप टिप्स

सेक्स लाइफ के साथ ही अपने रिश्ते को भी रिन्यू करना ज़रूरी है. इसके लिए ये टिप्स अपनाएं.

– कम्युनिकेशन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है. समय-समय पर एक-दूसरे से बात करते रहें.

– रिलेशनशिप मैनेजमेंट आर्ट सीखें. अपने जीवन को सुनियोजित करें. हर चीज़ की प्लानिंग करें.

– अपनी बिज़ी लाइफ में अपने रिश्ते को कैसे समय देंगे, ये आपको ही प्लान करना होगा.

– वीकेंड में मूवी, पिकनिक या रोमांटिक डिनर डेट प्लान करें.

– ग़लतियां और आपसी विवाद तो होते ही रहते हैं, लेकिन हर बात के लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण न करें. इससे कड़वाहट बढ़ती है.

– रिश्ते में हैप्पी मोमेंट ऐड करना दोनों की ही ज़िम्मेदारी है, इसलिए ज़िंदगी के हर पल को ख़ुशगवार बनाए रखने की कोशिश करें.

– एक-दूसरे को स्पेशल फील कराएं. आप दोनों को एक-दूसरे की कितनी ज़रूरत है और पार्टनर के बिना आप कितने अधूरे हैं, इसका एहसास उन्हें कराएं.

– एक-दूसरे में ख़ामियां निकालकर आपसी द्वेष को ना बढ़ाएं. सराहना करना सीखें और सपोर्टिव बनें.

– रिश्ते को भी रख-रखाव की ज़रूरत होती है, इसलिए समय-समय पर अपने रिश्ते का मेंटनेंस करते रहें, कभी कोई सरप्राइज़ देकर, कभी गिफ्ट्स के ज़रिए, तो कभी बस दो मीठे बोल बोलकर.

– प्रतिभा तिवारी

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आख़िर क्यों बनते हैं अमर्यादित रिश्ते? (Why Do We Have Immoral Relationships In Our Society?)

extramarital affairs

हर रिश्ते की अपनी एक मर्यादा होती है, पर जब कोई रिश्ते की मर्यादा को लांघ देता है और उस रिश्ते को तार-तार कर देता है, तो ऐसे रिश्ते अपनी गरिमा को ही नहीं, विश्‍वास को भी खो बैठते हैैं. आख़िर क्यों बन जाते हैं ऐसे अमर्यादित रिश्ते (Extramarital Affairs)? आइए जानते हैं.में आए दिन अख़बार-टीवी पर पढ़ने-देखने को मिलते हैं कि भाभी-देवर के अनैतिक रिश्ते… अपनी ही भतीजी के साथ चाचा के संबंध… दामाद ने सास के साथ भागकर शादी कर ली… ससुर बहू के साथ बरसों से रिलेशन में है… भतीजे-बुआ समाज को दरकिनार कर लीव इन में रह रहे हैं… ऐसे में दिल में यही ख़्याल आता है कि कहां जा रहा है समाज…? क्या भाई-बहन, माता-पिता के पवित्र रिश्ते भी बेमानी होते जा रहे हैं? ऐसे कई सवाल मन में उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं. इस सिलसिले में हमने सायकोलॉजिस्ट परमिंदर निज्जर से बात की. आइए, इस पर एक नज़र डालते हैं. उनके अनुसार, रिश्तों के कलंकित होने का कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि बहुत-सी छोटी-छोटी बातें होती हैं, जो सोसायटी में ऐसे रिश्ते को जन्म देती हैं.

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– फास्ट लाइफ इसका सबसे बड़ा कारण है. जहां हर कोई सब कुछ जल्दी और शॉर्टकट में चाह रहा है. ऐसे में सही-ग़लत के बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं मिलता.

– इट्स माई लाइफ का फंडा भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. हर कोई अपनी ज़िंदगी को अपने हिसाब से ही जीना चाहता है, जिसमें उसे किसी भी तरह की दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं.

– कई केसेस में देखा गया है कि वे क़रीबी रिश्ते, जो अमर्यादित क़दम उठाते हैं, उनकी वजह उस शख़्स से गहरे तौर पर प्रभावित होना भी है.

– जैसे चाचा को अपनी भतीजी में वे सभी ख़ूबियां दिखाई देती हैं, जो जीवनसाथी में चाहिए होती हैं. और जब वो ख़ासियत कहीं नहीं मिलतीं, तो वे इस रिश्ते में ही बंधकर आगे बढ़ने से नहीं हिचकिचाते.

– बचपन से लड़की ही नहीं, लड़कों के भी अपने रोल मॉडल होते हैं. जब वो उन्हें अपनी सास, चाची, बुआ आदि में दिखते हैं. तब वे सब ऊंच-नीच की परवाह किए बगैर इस रिश्ते को थाम लेते हैं.

– संयुक्त परिवार का टूटना भी इन रिश्तों के पनपने का बड़ा कारण है, क्योंकि जब सब साथ रहते थे, तब हर रिश्ते में अपनापन, संस्कार, उसकी मर्यादा का निर्वाह बचपन से ही होता था. तब ऐसी ग़लती कम ही होती थी.

– पैरेंट्स की बिज़ी लाइफ भी ऐसे रिश्ते के लिए माहौल प्रदान करती है. उस पर पति-पत्नी दोनों ही अति व्यस्त व कामकाजी हैं, तो वे बच्चों को बहुत कम समय ही दे पाते हैं, जिससे उनके भटकने और बिगड़ने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

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रिश्तों की अहमियत को समझें…

– हम चाहे कितने भी मॉडर्न हो जाएं, पर हर रिश्ते की मर्यादा और मापदंड ज्यों का त्यों बना रहेगा. इस बात को समझें और हर रिश्ते को सम्मान दें.

– अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज उसकी अपनी ख़ूबसूरती व सामाजिक स्वीकृति होती है. इससे अलग रिश्ते ग़लत ही होते हैं.ू

– अमर्यादित रिश्ते न जाने कितने डर, शंका-आशंका, अस्थिरता को पैदा करते हैं.

– सामाजिक बहिष्कार और अपनों से दूरियां जीवन को हाशिए पर ले आती हैं.

– ऐसे रिश्तों का अंत अक्सर आत्महत्या, हत्या या फिर मानसिक विक्षिप्तता के रूप में होता है.

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दूर रहना ही समाधान…

– तमाम केसेस को देखते हुए मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे रिश्ते से दूर रहना ही इसका समाधान है.  ू

– यूं तो जीवन में हर किसी के क़दम कभी न कभी डगमगाते ही हैं, पर ऐसे समय में अपनों का साथ, सही काउंसलिंग, धैर्य आदि द्वारा इससे उबरा जा सकता है.

– जब कभी आपको लगे कि आप किसी अमर्यादित रिश्ते की तरफ़ झुक रहे हैं, तब आत्मविश्‍लेषण करें.

– अपने रिश्ते को रिवाइव करें. पार्टनर के साथ कुछ दिन के लिए कहीं घूमने निकल जाएं.

– शादी के दिनों को, जीवनसाथी के साथ बिताए ख़ूबसूरत लम्हों को तरोताज़ा करें.

– पार्टनर से दूर होने के कारणों को ढूंढ़ें और उन्हें सुलझाने की कोशिश करें.

– अपने किसी ख़ास दोस्त/सहेली से सलाह लें. अपनी दुविधा को बताएं.

– रिश्ते जीने का संबल होने चाहिए, न कि हर पल डर व हीनभावना का कारण.

– ख़ुद को अपने किसी शौक़ में इन्वॉल्व करें.

– आपके रिश्ते आपके बच्चों और बड़ों के लिए रोल मॉडल की तरह होते हैं. ये बात हमेशा याद रखें.

– घर-परिवार, बच्चे से जुड़ी अपनी ज़िम्मेदारियों को नए सिरे से उठाएं और ख़ुद को उनसे जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करें.

– आंकड़ों के अनुसार, अमर्यादित रिश्तों का आकर्षण बस जुनून या फिर एक निश्‍चित सीमा तक रहता है. जब वो हैंगओवर उतरता है, तब सिवाय दुख, क्षोभ, पछतावे के कुछ नहीं रहता.

– ऊषा गुप्ता

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समझदारी की सेल्फी से सुधारें बिगड़े रिश्तों की तस्वीर (Smart Ways To Get Your Relationship On Track)

Relationship On Track

चल बेटा सेल्फी ले ले रे… जी हां, ज़माना सेल्फी का है. हम ख़ुद को कैमरे में कैद करने का एक मौक़ा भी नहीं चूकते. हमारी पूरी कोशिश होती है कि हर तस्वीर में हम अच्छे दिखें. तो चलिए, हम भी आपसे सेल्फी लेने के लिए कहते हैं, पर यह सेल्फी होगी आपके व्यवहार की. कितना अच्छा होता अगर कोई ऐसा कैमरा भी होता, जो हमारी सेल्फी में हमारी अंदरूनी ख़ूबसूरती दिखाता या हमारी गलतियां भी दिखाता. आप शायद समझ ही गए होंगे कि यहां बात हो रही है आत्मविश्‍लेषण की.

Relationship On Track
क्यों ज़रूरी है समझदारी की सेल्फी?

अमूमन हमारे जितने मन-मुटाव होते हैं, अधिकतर में हम दूसरों पर सारा दोष मढ़ कर बड़ी आसानी से आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन आगे बढ़ते समय हम यह भूल जाते हैं कि कई सारे रिश्ते पीछे ही छूट गए. हमें ऐसा लगता है कि हमें इन रिश्तों की, सगे-संबंधियों की कोई ज़रूरत ही नहीं, पर क्या आप जानते हैं कि आपकी यही सोच आपकी सबसे बड़ी ग़लती है. और ना स़िर्फ ग़लती है, बल्कि समाज के लिए यह सोच बहुत बड़ा ख़तरा भी है, क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है.

रिश्तों से अपने आपको अलग कर लेना या उनसे दूर जाना हमारे सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. तो यह तो तय है कि रिश्तों को सहेजना बहुत ही आवश्यक है, तो क्यों ना रिश्तों की इस तस्वीर को सुंदर बनाएं.

आजकल किताबी ज्ञान की हम में कोई कमी नहीं, पर याद रखिए किताबें समझदारी नहीं बांटतीं, इसके लिए हमारे अंतर्मन का जागृत होना ज़रूरी है. लेकिन इसे जागृत किया कैसे जाए, यह बहुत आसान नहीं, पर हां मुश्किल भी नहीं. इसके लिए आपको किसी और को नहीं, बल्कि ख़ुद को पहचानने की ज़रूरत है. साथ ही यह कोई एक दिवसीय कार्यक्रम ना होकर निरंतर प्रक्रिया है. आपको बस, करना इतना है कि रोज़ अपनी एक सेल्फी
खींचनी है और यह सेल्फी आप कैसे और कौन-से कैमरे से खीचेंगे, यह हम आपको बताएंगे.

कैसे खींचें समझदारी से सेल्फी?

सच्चाई की फ्लैश लाइट चमकाएं

सच्चाई बहुत ज़रूरी है, क्योंकि झूठ आपको कमज़ोर बनाता है. झूठा अहंकार आपको बार-बार झूठ बोलने पर मजबूर करेगा. इसलिए जब भी किसी से बात करें, तो अपना सच के फ्लैशवाला कैमरा साथ ले जाना ना भूलें. सच बोलना आपको ताक़त देगा. जब कभी आप झूठ का सहारा लेने की कोशिश करें, तो अपने आपको रोक लें. यह स़िर्फ आप कर सकते हैं, क्योंकि केवल आप ही जानते हैं कि आप कब झूठ का सहारा ले रहे हैं. इसके लिए आप ख़ुद को एक छोटी-सी चुनौती भी दे सकते हैं. सोने से पहले किसी काग़ज़ पर दिनभर में आपके द्वारा बोले छोटे से छोटे झूठ की ़फेहरिस्त बनाएं और अगले दिन पिछले दिन से कम झूठ बोलने की कोशिश करें.

अपनी तस्वीर में लाएं अच्छाई की ब्राइटनेस

बेवजह की जलन, दूसरों की नाकामयाबी में ख़ुश होना… ये सभी चीज़ें आपकी अच्छाई को ख़त्म करती है. इस तरह की भावनाएं आपके समझदारी के आईने को धूमिल कर सकती हैं. ये सभी भावनाएं ना स़िर्फ आपके रिश्ते को प्रभावित करती हैं, बल्कि आपके
सोचने-समझने की क्षमता को कमज़ोर करती हैं. जब आपकी अच्छाई चमकेगी, तो आपके अंतर्मन की तस्वीर भी उजली-उजली होगी.
इसके लिए भी एक काम किया जा सकता है. रोज़ कम से कम एक अच्छा काम करें, जैसे- बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद.

दूर करें शिकायतों की उदासी

अपनी सेल्फी में यह ज़रूर ध्यान से देखें कि कहीं आप हमेशा जीवन से शिकायतें तो नहीं करते रहते. जिसे अपने जीवन से हमेशा स़िर्फ शिकायतें ही होती हैं, उसका ख़ुश रहना असंभव है. शिकायतों पर ध्यान केंद्रित करने से अच्छा है कि आप उन उपायों पर ध्यान दें, जिनसे शिकायतों को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा यह ध्यान में रखें कि कुछ भी परफेक्ट नहीं होता. अपने जीवन को कुछ कमियों के साथ स्वीकार करें.

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खींचें हाई डेफिनेशन तस्वीर

जब समझदारी के कैमरे से सेल्फी लेनी है, तो कोशिश करें कि आपकी तस्वीर हाई डेफिनेशन हो यानी छोटी-छोटी बातों में ना फंसें. यही छोटी बातें हमें छोटा बना देती हैं. अपने जीने के स्तर को ऊंचा उठाएं. झगड़े या छोटी-मोटी नोंक-झोंक, मान-अपमान इन चीज़ों से ऊपर उठकर सोचें. अगर यह छोटी बातें तस्वीर से चली जाएं, तो ख़ुशियों के रंग निखरकर आएंगे.

कहीं तस्वीर में शिकन ना आ जाए

अगर आप जल्दी किसी को माफ़ नहीं कर सकते हैं या किसी बुरी घटना को जल्दी भूल नहीं सकते, तो संभल जाएं, आपकी सेल्फी की ख़ूबसूरती ख़तरे में है. तो करना बस इतना है कि जल्दी से अपनी समझदारी के कैमरे को चार्ज करिए और अपने चेहरे पर आई इस शिकन को मिटा दीजिए. दरअसल, दूसरों को माफ़ करना और कुछ क़िस्से-कहानियों को भूल जाना किसी और के लिए नहीं, बल्कि आपके अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है. अंग्रेज़ी में कहते हैं ना ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’ ये चीज़ें ना स़िर्फ आपको ऊपर उठाती हैं, बल्कि कई सारे रिश्तों को फिर से संवारने का एक और मौक़ा भी देती हैं.

माफ़ी मांग लें

जिस तरह माफ़ करके आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, उसी तरह अपनी ग़लती होने पर या कभी-कभी स़िर्फ परिस्थितियों को संभालने के लिए माफ़ी मांगना ज़रूरी है. माफी मांगने को अपने अहम् के साथ ना जोड़ें यानी माफ़ी मांगने से आप छोटे नहीं होते.

संवार लें बिगड़ी हुई तस्वीर

अगर इतनी जद्दोज़ेहद के बाद भी सेल्फी बिगड़ ही जाए, तो उसे वैसा ही मत छोड़ें, बल्कि अपनी समझदारी से उसे ठीक कर लें. कई बार ऐसा होता है कि लाख संभालने के बावजूद कुछ रिश्ते हाथ से फिसलने लगते हैं. ना चाहते हुए भी हममें वह चीज़ें आ जाती हैं, जो हमारे व्यक्तित्व को ख़राब करती हैं. अगर ऐसा होता भी है, तो वहीं पर रुककर पहले आत्मविश्‍लेषण करें. अपने स्वभाव की बुरी आदतों को दूर करने की कोशिश करें और फिर आगे बढ़ें. इस सेल्फी में आपको ख़ूबसूरत तो दिखना है, पर बाहरी मेकअप से नहीं, बल्कि प्राकृतिक निखार से. याद रखिए कि आपको तस्वीर में सुंदर कैमरा या तस्वीर खींचनेवाला नहीं बनाता, बल्कि आप ख़ुुद बनाते हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि जब आप अपने जीवन में ख़ुश ना हों, तो किसी और पर दोष मढ़ने से पहले एक बार ख़ुद को परख लें.

– विजया कठाले निबंधे

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