relationship. happy family

रिश्तों का दूसरा नाम सच्चाई और ईमानदारी है और ऐसे में अगर हम यह कहेंगे कि झूठ बोलने से आपके रिश्ते मज़बूत हो सकते हैं तो आपको लगेगा ग़लत सलाह से रहे हैं, लेकिन यहां हम ऐसे झूठ की बात कर रहे हैं जिनसे किसी का नुक़सान नहीं होगा बल्कि सुनने वालों को ये झूठ बेहद पसंद आएगा. 

  • अगर आपकी पत्नी आपसे पूछती है कि क्या मैं पहले से मोटी हो गई हूं तो भले ही यह सच हो कि उनका वज़न बढ़ा हो पर आप कह सकते हैं कि बिल्कुल नहीं, तुम मोटी नहीं हेल्दी हो और पहले से ज़्यादा ख़ूबसूरत लगती हो.
  • इसी तरह अगर आपकी पत्नी पूछे कि यह रंग मुझपर कैसा लग रहा है तो अगर आप कहेंगे कि अच्छा नहीं लग रहामत पहनो तो उनको चिढ़ होगी, बेहतर होगा आप कहें यह तो खूब फब रहा है लेकिन अगर इसकी जगह ये वालापहनोगी तो और भी हसीन लगोगी.
  • अगर पति ने कुछ बनाकर खिलाने की कोशिश की है और स्वाद उतना अच्छा नहीं बन सका तो भी आप ज़रूर कहेंकि कोशिश तो क़ाबिले तारीफ़ है, अगली बार इसमें थोड़ा सा ये मसाला भी ट्राई करना तो टेस्ट कुछ अलग होगा.
  • अगर आपको पति का फ़ोन पर ज़ोर ज़ोर से बात करना नहीं भाता तो सीधे आवाज़ कम करने या यह कहने के कि कितना ज़ोर से बोलते हो, यह कहें- तुम्हारी धीमी आवाज़ बेहद हस्की और सेक्सी साउंड करती है, फिर देखिए अगली बार से वो खुद ही धीमा बोलेंगे.
  • अगर आपको पति का किसी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं या उनके काम करने का तरीक़ा आपको पसंद नहीं तो यहना कहें कि तुम्हें नहीं आता तो मत करो, बल्कि यह कहें कि तुमने पहले ही इतनी मदद कर दी, तो अब यह काम मुझेकरने दो या कहें कि तुम वो वाला काम कर दो क्योंकि वो तुम मुझसे बेहतर करोगे और मैं यह कर लेती हूं… या आप यह भी कह सकती हैं कि तुम थक गए होगे तो तुम आराम कर लो बाक़ी मैं संभाल लेती हूं.
  • अगर पतिदेव की तोंद निकल गई हो तो उनको ताना ना दें और ना ही उनके किसी दोस्त से उनकी तुलना करें बल्किकहें कि कुछ दिन मैं डायटिंग करने की सोच रही हूं अगर आप भी साथ देंगे तो मुझे मोटिवेशन मिलेगा, इसलिए प्लीज़ मुझे फिट होने में मेरी मदद करो और मैं फिट रहूंगी तो आपको भी तो अच्छा लगेगा ना. 
  • इसी तरह अगर पति को लगे कि पत्नी को डायटिंग की ज़रूरत है तो किसी पड़ोसन का उदाहरण देने से बेहतर है किआप कहें कि मेरे कपड़े थोड़े टाइट हो रहे हैं इसलिए सुबह जॉगिंग करने की और डायटिंग की सोच रहा है लेकिन तुम्हें मेरा साथ देना होगा.
Happy And Strong Relationship
  • कभी कभी एक दूसरे की झूठी तारीफ़ में क़सीदे कस दिया करें इससे आप दोनों को ही अच्छा लगेगा. 
  • सिर्फ़ पार्टनर ही नहीं, बाक़ी घरवालों के साथ भी थोड़ा बहुत अच्छावाला झूठ बोलने में हर्ज़ नहीं, इससे उन्हें बेहतरफ़ील होगा जिससे वो खुश रहेंगे और रिश्ते भी मज़बूत होंगे.
  • अगर पतिदेव बच्चों की तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं देते या ज़िम्मेदारी से बचते हैं तो उनसे कहें कि बच्चे अक्सर बोलते हैंकि मुमकिन आपको तो कुछ नहीं आता, पापा ज़्यादा इंटेलीजेंट लगते हैं, इसलिए कल से हम उनसे ही पढ़ेंगे, ऐसाकहने से पतिदेव बच्चों के प्रति ज़िम्मेदारी ज़्यादा ख़ुशी से निभाएंगे और इससे बच्चों के साथ उनकी बॉन्डिंग भी स्ट्रॉंगहोगी. साथ ही आपका एक काम कम हो जाएगा.
  • अगर आपकी पत्नी और आपकी मां की बनती नहि तो पत्नी से कहें कि मां अक्सर तुम्हारे काम और खाने की तारीफ़करती हैं, मां कहती हैं कि बेचारी दिनभर काम में लगी रहती है, थोड़ा भी आराम नहीं मिलता उसको और मैं भी कुछना कुछ बोलती ही रहती हूं लेकिन वो सब सह लेती है. 
  • इसी तरह अपनी मां को भी कहें कि आपकी बहू अक्सर कहती है कि काश मैं भी मम्मी जैसा टेस्टी खाना बना पाती, उनके हाथों में जो स्वाद है वो मेरे में नहीं, वो हर काम सलीके से करती हैं. ऐसी बातों से दोनों के मन में एक दूसरे केप्रति सकारात्मक भाव जागेगा और कड़वाहट दूर होगी.
  • अगर पत्नी को लगता है कि पति और पत्नी के घरवालों की ज़्यादा नहीं बनती तो पत्नी जब भी मायके से आए तोकहे कि मम्मी-पापा हमेशा कहते हैं कि दामाद के रूप में उन्हें बेटा मिल गया है, कितना नेक है, बेटी को खुश रखताहै और किसी तरह की कोई तकलीफ़ नहीं देता वरना आज के ज़माने में कहां मिलते हैं ऐसे लड़के.
  • दूसरी तरफ़ अपने मायकेवालों से कहें आप कि वो हमेशा हमारे घर के संस्कारों की तारीफ़ करते हैं कि तुम्हारे मम्मीपापा ने इतने अच्छे संस्कार दिए हैं कि तुमने मेरा पूरा घर इतने अच्छे से संभाल लिया. इन सबसे आप सभी के बीचतनाव काम और प्यार ज़्यादा बढ़ेगा.
  • इसके अलावा एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि शादी के शुरुआती दौर में कभी भी अपने डार्क सीक्रेट्स किसी सेभी शेयर ना करें, अपने अफ़ेयर्स या फैंटसीज़ आदि के बारे में पार्टनर को जोश जोश में बता ना दें. बाद में भी भले हीआप दोनों में अटूट विश्वास हो पर ये बातें कभी साझा ना करें. पार्टनर भले ही अलग अलग तरीक़ों से पूछने कीकोशिश भी करे तब भी यहां आपके द्वारा बोला गया झूठ आपके रिश्ते को बिगड़ने से बचा सकता है!
  • पिंकु शर्मा
Father-in-law And Son-in-law

जी हां सही पढ़ा आपने अक्सर सभी रिश्तों की बात की जाती है, जैसे- माता-पिता, भाई-बहन, बेटी-बहू आदि. लेकिन ससुर-दामाद का रिश्ता ऐसा है, जिस पर बहुत कम बातें होती हैं. शायद इसकी अहमियत को समझ नहीं पाए हम लोग. दरअसल, ससुर-दामाद का भी उतना ही ख़ूबसूरत रिश्ता होता है, जितना पिता-पुत्र का होता है. बस, ज़रूरत है इसे समझने और जानने की.
“पापा को कहो कि वे हमारे साथ रहें. उनकी उदासी, दुख मुझसे देखा नहीं जाता…” जब अमित ने रोमा को ऐसा कहा, तो आंखें भर आई रोमा की. उसकी मां का हाल ही में देहांत हुआ था. रोमा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी है. उसे अपने पैरेंट्स की हमेशा चिंता लगी रहती है. यह रोमा की ख़ुशक़िस्मती थी कि ससुराल अच्छा मिला था और उसके पति भी उतने ही समझदार और सुलझे विचारोंवाले थे. अमित की भी अपने इन लाॅ से बहुत मधुर संबंध है. सास के जाने के बाद ससुरजी की उदासी और एकाकीपन उनसे देखा नहीं गया.. और उन्होंने रोमा से पापा को साथ रहने की बात कही.
कहीं ना कहीं वर्षों से चली आ रही परंपराओं के वशीभूत ससुर व दामाद वो प्यार और सहजता नहीं दिखा पाते, जो बेटे-बेटी, सास-बहू या अन्य रिश्तों में देखने को मिलती है. अमूनन लड़कों की बचपन से ही कुछ इस तरह परवरिश की जाती है कि बेटे, भाई ही नहीं, बल्कि दामाद के रूप में भी वे विशेष हैं. उस पर समाज में दामाद की छवि को भी महिमामंडित किया जाता रहा है. इससे दामाद को लगता है कि वो बेहद महत्वपूर्ण हस्ती है. दामाद यानी ख़ास, ससुराल पक्ष के लिए सर्वेसर्वा.
लेकिन वक़्त बदला, हालात बदले, साथ ही लोगों की सोच में भी परिवर्तन आया. अब हर रिश्ते में एक नया एहसास और सुखद बदलाव होने लगा है. और ससुर-दामाद के रिश्ते में भी नई ख़ूबसूरती दिखने लगी है. अब दोनों के बीच रिश्तेदारी कम दोस्ती ने अधिक जगह बना ली है. ससुर पिता की तरह नहीं एक दोस्त की तरह दामाद से मिलते हैं. बातचीत करते हैं. कई बार तो यह भी देखा गया है कि ससुर-दामाद कितने ही राज़ की बातें भी आपस में शेयर करते हैं…
कई मौक़ों पर इस रिश्ते में अधिक गहराई और अपनापन भी विकसित हुआ है. अब दामाद पहले की तरह ससुर के साथ चुपचाप बैठे नहीं रहते. वे खुलकर अपनी बात रखते हैं. ससुराल में भी सास और ससुर उनकी बातों, भावनाओं को समझते हैं. इसीलिए तो ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां पर बेटियां इकलौती होती हैं, शादी के बाद उनकी भी इच्छा रहती है कि वह भी अपने माता-पिता की सेवा कर सके. ऐसे में जो दामाद समझदार होते हैं, बहुत मदद करते हैं. कई बार तो यह भी देखने मिलता है कि दामाद ने अपने अकेले रह रहे ससुर को अपने साथ ही रहने की गुज़ारिश की. क्योंकि जहां इकलौती बेटियां होती हैं और माता-पिता उम्र के तीसरे पड़ाव पर संघर्ष कर रहे होते हैं या कोई बीमारी या तकलीफ़ या मां का देहांत और तन्हा पिता के लिए बेटी का दर्द बढ़ता जाता हैं. ऐसे में समझदार दामाद आगे बढ़ ससुर का हमदर्द बन रहे हैं. उनके जीवन में ख़ुशियां भरने की कोशिश करते हैं. कई मौक़े ऐसे आते हैं कि कहीं जाना हुआ, विदेश में घूमना-फिरना, तो अब परिवार के साथ ससुरालवालों भी शामिल हो जाते हैं. इन यादगार लम्हों में ससुर-दामाद ख़ुशी के कई अनकहे एहसास को संजोते हैं.

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नहीं रही संकोच की दीवार…
ऐसा भी वक़्त था जब दामाद और ससुर में एक संकोच रहता था. लेकिन लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव आ रहे हैं. अब ऐसी बात नहीं है. आज इस रिश्ते में संकोच और दूरी की जगह ट्रांसपेरेंसी आ गई है.. दोस्ताना व्यवहार पैर पसारने लगा है. इसके कई उदाहरण देखने को मिलते है.
फिल्मी सितारों में भी ससुर-दामाद के मधुर एहसास से भरे कई बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलते हैं. इसमें सबसे ऊपर था ऋषि कपूर का अपनी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी के पति भारत साहनी से ससुर-दामाद का प्यारभरा रिश्ता. दोनों की बॉन्डिंग इतनी ख़ूबसूरत थी कि जब ऋषि कपूर का देहांत हुआ था, तब उनके दामाद ने कई इमोशनल नोट सोशल मीडिया पर शेयर किए थे. तब लोगों को पता चला था कि दोनों ससुर-दामाद से बढ़कर एक अच्छे दोस्त थे. उन भावपूर्ण लम्हों को याद करते हुए ऋषि के दामाद की आंखें भर आई थीं. इसी तरह फिल्म इंडस्ट्री के कई ससुर-दामाद की मशहूर जोड़िया रही हैं. रजनीकांत के दामाद धनुष की अपने फादर इन लॉ से बड़ी लविंग बॉन्डिंग है. अभिनेता शरमन जोशी भी अपने ससुर प्रेम चोपड़ा के लाडले हैं.
आज की पीढ़ी अपने पिता के समकक्ष अपने ससुर को भी रखती है. वह उन्हें उतने ही प्यार-सम्मान देते हैं, जो अपने पिता को देते हैं, पर इन दिनों सम्मान के अलावा उनके प्रति एक दोस्ताना व्यवहार भी ख़ूब विकसित होता जा रहा है. ऐसे कई उदाहरण देखने मिलते हैं जैसे कि टंडनजी की फैमिली में हुआ. जब उनके दामाद को घर ख़रीदने के लिए पैसों की ज़रूरत थी, तब स्वाभिमानी दामाद को ससुर ने मनाते हुए ना केवल आर्थिक मदद की, बल्कि उसे एहसास कराया कि यदि उनके ख़ुद के बेटे को सहायता की आवश्यकता होती तो क्या वे नहीं करते. वे उन्हें अपना ससुर नहीं बल्कि दोस्त समझे, जिससे वो अपनी हर बात, परेशानी खुलकर कह सकते हैं.

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ऐसा है अब ये रिश्ता…
अब दामाद वह होता है, जो ससुर से संकोच व हिचकिचाहट नहीं रखता.
वो अपनी हर बात खुलकर कहता है उनसे.
दोस्ताना व्यवहार रखता है.
ससुर-दामाद अब काफ़ी सुलझे विचारों के हो गए हैं. दामाद अपने ससुर के दर्द को जानने लगा है कि उन्होंने अपनी बेटी की नहीं, बल्कि जिगर का टुकड़ा दिया है.
वो उनकी भावनाओं की कद्र करता है.
सुख में ही नहीं दुख में भी ससुर और ससुरालवालों का साथ देता है.
दामाद का प्यार भरा ख़ूबसूरत रिश्ता बन गया है ससुर से.
आज जहां दामाद ससुर के लिए बेटे का फर्ज़ अदा कर रहा है, वहीं ससुर भी उस पर अपना स्नेह और प्यार उड़ेल रहे हैं. साथ ही इस रिश्ते के प्रति लोगों का नज़रिया भी बदलने लगा है. अब वह पहले जैसी हिचक-दूरियां नहीं रही, सच बहुत ख़ूबसूरत है यह रिश्ता भी.

– ऊषा गुप्ता

Father-in-law And Son-in-law

हम सभी चाहते हैं हमारे रिश्तों की उम्र लंबी हो और उसके लिए कोशिश भी करते हैं, लेकिन यह कोशिश एक तरफ़ा हो तो थोड़ा रुकें, सोचें और चीज़ों को बदलें!

ऐसा नहीं होना चाहिए कि रिश्तों में आप वन वे ट्रैफ़िक चाहती रहें और बाक़ियों को इसका ख़याल तक ना आए. इसलिए खुद को परखें इन पहलुओं पर…

क्या आपको सब कैज़ुअली लेते हैं?

बच्चों से लेकर बड़े तक आपके लिए यही धारणा बनाए हुए हैं कि ये जो भी करती है ये तो इसका रुटीन है, इसका फ़र्ज़ है, ज़िम्मेदारी है और वो आपको काफ़ी हल्के में लेने लगते हैं. ना आपके प्रयासों की कभी सराहना होती और ना ही वो सम्मान मिलता. आप हर किसी के ग़ुस्से, फ्रस्ट्रेशन और स्ट्रेस का शिकार होती हैं. आप सबको खाना परोसती हैं लेकिन आपने कब खाया, कितना खाया इसका ख़याल किसी को नहीं आता.

क्या घर से जुड़े बड़े निर्णयों में आपकी राय नहीं ली जाती?

अगर ऐसा है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए. अक्सर पति या घर के अन्य सदस्य भी यही सोचते हैं कि पैसों, सम्पत्ति, ज़मीन या अन्य बड़े लेन देन में सारे निर्णय लेने का हक़ उन्हीं का है, भला पत्नी या घर की महिलाओं का इसमें क्या रोल. वो मानकर चलते हैं कि महिलाओं का काम सिर्फ़ घर के काम और रिश्तों की देखभाल तक ही सीमित होते हैं. उन्हें इतनी समझ ही नहीं कि वो कोई राय दे सकें इसलिए आपसे राय तक नहीं ली जाती.

क्या आपकी छोटी-मोटी ग़लतियों की कोई माफ़ी नहीं?

आपसे कहीं कोई चूक हो जाए हल्की सी भी, जैसे- कभी रोटी जल गई या सब्ज़ी में नमक कम-ज़्यादा हो गया तो हर कोई आपकी गलती पर बिना बोले नहीं रहता. आपको एहसास कराया जाता है कि आज खाना अच्छा नहीं बना, कोई भी यह नहीं सोचता कि आप भी इंसान हैं और गलती तो आपसे भी हो सकती है. उल्टा आपको यह एहसास कराया जाता हेर कि आपको कोई काम ठीक से नहीं आता.

One-Sided Relationship

आपको बराबरी का दर्जा तो दूर, पार्टनर ने मनचाहा प्यार और सम्मान भी नहीं मिलता!

पार्टनर की सोच भी यही होती है कि मेरी पत्नी का काम मेरी सेवा करना है तो भला इसके बदले वो क्यों कुछ चाहेगी… जबकि हर पत्नी चाहती है कि उसका पति ना सिर्फ़ उससे प्यार करे बल्कि उसे सम्मान और समानता की नज़र से भी देखे. कुछ स्पेशल करे, डिनर या मूवी पर ले जाए.

लेकिन इसकी बजाय क्या पति सिर्फ़ सेक्स की ज़रूरत पूरी करने के लिए ही आपके क़रीब आता है? और आप बिना शिकायत यह करती भी हैं तो आप एक तरफ़ा रिश्ते में ही हैं.

आपके स्वास्थ्य और पैसों की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ किया जाता है?

आप बीमार हो जाती हो तो सबको तकलीफ़ तो होती है लेकिन वो तकलीफ़ इस बात की होती है कि आपके बीमार होने से उन्हें असुविधा होने लगती है, इसलिए ऐसा नहीं है कि वो आपकी फ़िक्र के चलते चाहते हैं कि आप जल्दी ठीक हो जाओ बल्कि वो चाहते हैं कि उन्हें वक़्त पर खाना, कपड़े और बाक़ी चीज़ें मिलती रहें इसलिए आपका जल्दी ठीक होना ज़रूरी है. सिर्फ़ स्वास्थ्य ही नहीं आपके पैसों की ज़रूरतों को भी नज़रअंदाज़ किया जाता है और पैसों के कम-ज़्यादा खर्च होने व पैसे माँगने का कारण व हिसाब भी मांगा जाता है.

क्या करें अगर आपका रिश्ता ऐसा है तो?

  • अगर ये तमाम बातें आपके साथ भी होती हैं तो उसमें कहीं ना कहीं आपकी भी गलती है क्योंकि आपको अपना सम्मान पहले खुद करना होगा और अपनों की नज़रों में भी अपने सम्मान के लिए लड़ना होगा.
  • बात करें. हिचकें नहीं.
  • अपनी राय रखें.
  • अगर आप परिवार की ज़रूरतों का ख़याल रखती हैं तो आपकी ज़रूरतों क ख़याल रखना उनकी भी ज़िम्मेदारी है.
  • काम और ज़िम्मेदारियों को खुद ही ओढ़ने की बजाय बाँटें और अपनी अहमियत का एहसास कराने के लिए काम से कभी कभी ब्रेक भी लें.
  • आप क्या चाहती हैं इस पर पार्टनर से बात करें. आपको कौन सी बात बुरी लगती है और कौन सी अच्छी यह बताएँ.
  • जब तक आप चुपचाप सब करती रहेंगी बिना शिकायत के तब तक किसी को खुद एहसास नहीं होगा आपके एफर्ट का, बेहतर है शेयर करें और जहां ज़रूरी लगे अपने हक़ के लिए लड़ें.
  • आप खुद ही सोच लेंगी कि यह तो मेरा फ़र्ज़ है तो भला कैसे काम चलेगा, माना फ़र्ज़ है लेकिन अपने बिना स्वार्थ के किए गए इन प्रयासों को सम्मान और प्यार तो मिलना ही चाहिए. एक तारीफ़, एक मीठी सी बात ही काफ़ी होती है.
  • जो भी मिल रहा है उसे अपना नसीब मानकर ना चलें, बोलें, खुद एहसास करें और फिर औरों को भी कराएं!

अगर इन करणों से आप रिश्तों में घुटन, तनाव और खुद को ठगा हुआ सा महसूस करती हैं तो आप वन वे ट्रैफ़िक ही चला रही हैं, बेहतर होगा इन सब पर बात करें और परिस्थिति को बदलें. अगर आप अपने रिश्ते में एक तरफ़ा गाड़ी चला रही हैं तो इसे बदलने के बारे में ज़रूर सोचें!

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हमारी लाइफस्टाइल बहुत तेज़ी से बदली है. अब वक़्त के साथ क़दम मिलाकर चलने के लिए पति-पत्नी दोनों का काम करना ज़रूरी हो गया है. वर्किंग विमेन के साथ समस्या और बढ़ी है. ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि घर पर भी काम बांट लिए जाएं, ताकि दोनों के लिए ज़िंदगी आसान हो जाए. केवल पति ही नहीं, यदि बच्चे हैं, तो उन्हें भी घर की छोटी-छोटी ज़िम्मेदारियां निभाना सिखाएं. इससे न केवल आपको आराम मिलेगा, बल्कि घर भी सुचारु रूप से चलेगा और वे ज़िम्मेदार भी बनेंगे. सबसे पहले पति को सहयोगी बनाने की मुहिम चलाएं.

Husband to Help More

प्यार से सिखाएं हर काम

– सबसे पहले तो यह ज़रूरी है कि आप प्यार से उन्हें सिखाएं.
– याद रखें कि हमारे पुरुष प्रधान समाज में ऐसे पति कम नहीं जो देर से घर पहुंचते हैं और खाना खाकर सीधे सोने चले जाते हैं. समझदार पत्नियां अच्छी तरह जानती हैं कि उन्हें घरेलू कार्यों में पति की मदद कैसे लेनी है.
– बजाय यह आदेश देने के कि बिस्तर लगा दो, प्यार से निवेदन करें कि प्लीज़ थोड़ी-सी मदद कर दें बिस्तर ठीक करने में, जिससे सोनू सो सके. देखिए वे इंकार नहीं करेंगे.

– घर का कुछ सामान मंगाना हो, तो पूछिए कि क्या कार में पेट्रोल है? नहीं तो आप अभी डलवा लें, वरना सुबह ऑफिस के लिए लेट हो जाएंगे. जाते हुए फिर प्लीज़ कहकर आवश्यक सामान लाने की गुज़ारिश करें.

आलोचना से बचें

– यदि वे घर के किसी भी काम में आपका सहयोग कर रहे हैं, तो उन्हें न तो सही तरीक़ा बताकर लज्जित करें, न ही आलोचना करें.
– चाय बनाकर लाने पर तारीफ़ करें, भले ही चाय अच्छी न बनी हो या चाय बनाते समय कुछ ग़लती हो गई हो, तो भी ग़लती की तरफ़ इशारा न करें. यह न बताएं कि चाय उबलकर नीचे ज़मीन पर गिर गई या पत्ती कचरे के डिब्बे में नहीं डाली.
– यदि ख़ामियां निकालेंगी, तो आगे से इस सहयोग से भी वंचित रहना होगा, यह जान लीजिए.

विकल्प दें

– ऐसा नहीं कि जो काम आपने उन्हें करने को कह दिया, वे वही करें. यदि उन्हें चाय बनानी नहीं आती, तो कोई दूसरा काम उनसे करा सकती हैं.
– बच्चों की यूनिफॉर्म प्रेस करने या बच्चे के होमवर्क की

ज़िम्मेदारी सौंपें.

– अधिकतर पुरुषों को बिजली की मरम्मत या घर की देखभाल जैसे काम पसंद आते हैं. आप उनसे इस तरह के काम करवा
सकती हैं.
– पहले पंद्रह दिन बाहर के कामों की ज़िम्मेदारी आप निभाएं. बाद के पंद्रह दिन की ज़िम्मेदारी पति को दें. बाहर के काम पुरुषों को पसंद होते हैं.
– जिस काम को करने में उनकी रुचि बिल्कुल नहीं, उसे कराने से बचें. आपका काम उन्हें चिढ़ाना नहीं, उनसे सहयोग लेना है.
मिलकर काम करें
– मिल-जुलकर काम करने से न केवल काम आसान होता है, बल्कि प्यार भी बढ़ता है. दोनों को एक-दूसरे के क़रीब रहने का मौक़ा मिलता है. साथ-साथ ख़रीददारी करने जाएं.
– आप बर्तन साफ़ करें, तो पति से कहें कि वो बर्तनों को पोंछकर व्यवस्थित तरी़के से सही जगह पर रख दें.
– आप खाना बना रही हैं, तो उनसे टेबल लगाने को कहें. आप देखेंगी कि जल्दी ही यह दिनचर्या आप दोनों को अच्छी लगने लगेगी और काम करना व घर चलाना भी आसान हो जाएगा.

कभी-कभी असहयोग भी करें

– कोई भी समझदारी काम नहीं आ रही हो, तो चिंता न करें. सीधा-सा उपाय है, वही करें, जो आपके पति कर रहे हैं.
– ऑफिस से देर से घर जाएं. उनकी तरह व्यवहार करें. घर जाकर बहुत काम होने का रोना रोएं और एक कप चाय की गुज़ारिश करें.
– इस बदइंतज़ामी का असर अगले दिन की झल्लाहट पर नज़र आएगा.
– मुश्किल ज़रूर है, लेकिन जैसे स्वास्थ्य लाभ के लिए कड़वी गोली खानी पड़ती है, वैसे ही जीवन को सुखमय बनाने के लिए ये उपाय हैं. उनके ग़ुस्सा होने पर अपना धैर्य बनाए रखें.
– याद रखें कि आपको उनसे लड़ना या जीतना नहीं, उनसे सहयोग लेना है. नियंत्रण कठिन लगे, तो चुपचाप घर से निकल पड़ें. उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए बिना बहुत शांति से अपनी बात कहें और बताएं कि अकेले घर चलाना कितना मुश्किल है, इसलिए सहायता करो.
– हर रोज़ बाहर से खाना ऑर्डर करना आसान नहीं है. कहीं न कहीं, देर-सबेर आपकी बात समझने के सिवाय उनके पास और कोई चारा नहीं रहेगा.

थोड़ा-सा समय दें

– धैर्य रखें, लेकिन दृढ़ रहें. याद रखें कि रातोंरात कुछ नहीं बदलता, थोड़ा समय लगेगा. जीवनभर की आदतें बदलने में समय तो लगेगा ही.
– एक्सपर्ट का कहना है कि इस सहयोग की आदत को विवाह के आरंभिक दिनों से ही डाल देना ठीक रहता है. यह भी हो सकता है कि आपके बदलावों से परेशान होकर वे आपकी ख़ुशामद करें या उपहार आदि देकर फुसलाने की कोशिश करें, मगर बातों में न आएं. आपके पसीजते ही सारी कोशिशें नाकाम हो जाएंगी.
– हार मत मानें, कोशिश जारी रखें. इन प्रयासों से जल्दी ही सफलता हाथ लगेगी, जो भविष्य में आपकी गृहस्थी के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी.

– अमृता प्रकाश

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