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रिश्तों में बदल रहे हैं कमिटमेंट के मायने… (Changing Essence Of Commitments In Relationships Today)

कभी वो ख़्वाब हो जाता है, कभी हक़ीक़त… कभी चाहत बन जाता है, कभी इबादत… मुहब्बत नाम है उसका, इश्क़ अंजाम है उसका… पर व़क्त के साथ-साथ वो कुछ-कुछ बदल जाता है… ताउम्र का साथ है यूं तो, पर अब वो क़समें नहीं हैं, चल रहे हैं हाथों में डाले हाथ, पर अब वो रस्में नहीं हैं…

Relationships Tips

व़क्त के साथ-साथ बहुत कुछ बदलता है, जीवन के प्रति नज़रिया, हमारा दृष्टिकोण, चीज़ों और लोगों को परखना हो या फिर रिश्तों को… हर बात के मायने समय के साथ बदल जाते हैं और आज की तारीख़ में, जहां समाज में इतना सब कुछ बदल रहा है, तो इसका सबसे ज़्यादा असर हमारे रिश्तों पर ही पड़ा है.

हम अक्सर कहते हैं कि रिश्तों में वो पहले जैसी बात नहीं. लेकिन सच तो यह है कि बदले हम हैं, रिश्ते नहीं. दरअसल, रिश्ते तो वही हैं, लेकिन हमारा नज़रिया उनके प्रति अब पहले जैसा नहीं रहा. यही वजह है कि रिश्तों में जो सबसे अहम् कड़ी होती थी- कमिटमेंट, उसके भी मायने बदल गए हैं. कैसे? आइए जानें.

जन्म-जन्मांतर का साथ, पुरानी हो गई अब ये बात: पहले सात फेरों को हम इस जन्म का ही नहीं, सात जन्मों का बंधन मान लेते थे. लेकिन अब यह सोच पुरानी हो चुकी है. रिश्तों को भी हम कैज़ुअली लेने लगे हैं. निभ गया तो ठीक, वरना रास्ते अलग. शादी जैसे रिश्ते की गंभीरता को भी हमने खो दिया है.

प्रैक्टिकल अप्रोच

रिश्तों को लेकर हम सभी काफ़ी इमोशनल होते हैं, लेकिन अब लोग इनके प्रति भी प्रैक्टिकल अप्रोच रखने लगे हैं. बात-बात पर न तो अब भावुक होते हैं और न ही हर चीज़ में इमोशनल फैक्टर ढूंढ़ते हैं. पार्टनर का खाने पर इंतज़ार करना, उसके साथ ही मूवी देखने जाना या उसकी पसंद को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनना… ये तमाम बातें आज की तारीख़ में आपको इमोशनल फूल ही साबित करती हैं.

स्पेस देना

अब लोग स्पेस के नाम पर थोड़ी-बहुत चीटिंग भी कर लेते हैं. इसमें उनको कोई बुराई नज़र नहीं आती. न तो एक-दूसरे को हर बात बतानी होती है, न ही एक-दूसरे के पासवर्ड्स पता होने ज़रूरी हैं. एक पार्टनर को लगता है कि अगर मैंने अपने पार्टनर की पर्सनल लाइफ में ज़्यादा दख़लअंदाज़ी की, तो वो भी करेगा. इसलिए सेफ यही है कि न तो एक-दूसरे के मैसेज चेक करें और न ही एक-दूसरे का सोशल मीडिया अकाउंट.

कम्यूनिकेशन का तरीक़ा बदल गया है

अब साथ बैठकर डिनर के टेबल पर रोज़ की दिनचर्या डिसकस नहीं होती, पति एक कमरे में लैपटॉप पर रहता है, पत्नी टीवी के सामने अपने मोबाइल पर व्यस्त रहती है. हैरानी की बात नहीं है कि एक ही घर में एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर ही मैसेज भेजकर बातें कर लेते हैं. फेस-टु-फेस कम्यूनिकेशन लगभग ख़त्म होता जा रहा है. फोन और मैसेजेस ही सबसे बड़ा ज़रिया हैं.

शादी अब ज़रूरी नहीं

पहले अगर दो लोग प्यार करते थे, तो ज़ाहिर है उनकी मंज़िल शादी ही होती थी, लेकिन अब शादी के बारे में शायद बहुत बाद में सोचा जाता है, प्यार भी जब तक है, तब तक ठीक है, मनमुटाव हुआ, तो आसानी से लोग रास्ता बदल देते हैं. दूसरी ओर, लड़कियां भी अब शादी का कमिटमेंट रिश्तों में नहीं ढूंढ़तीं. दरअसल, सभी लोग एक्सपेरिमेंट करते हैं, अगर कामयाबी मिली, तो शादी भी हो ही जाएगी और यदि नहीं, तो ग़लत रिश्ते में बंधने से बच जाएंगे, इसी सोच के साथ आगे बढ़ते हैं.

फ्लर्टिंग से अब परहेज़ नहीं

अगर पार्टनर को पता है कि उसका पार्टनर अपनी कलीग या ऑनलाइन दोस्तों से फ्लर्ट करता है, तब भी वो इसे ग़लत नहीं मानती. इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा समझकर लाइट मोड पर नज़रअंदाज़ कर देती है, क्योंकि इतनी-सी बात के लिए रिश्ते में अनबन को जगह क्यों देना. लोगों की सोच बदल रही है, उन्हें लगता है कि फ्लर्टिंग में कोई बुराई नहीं, यह स्ट्रेस को कम करने का मात्र एक तरीक़ा है, जो आपको रिफ्रेश कर देती है.

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Relationships Goals
परफेक्शन अब ज़रूरी नहीं

शुरू से ही हमारे समाज में पार्टनर को लेकर यही सोच बनी हुई है कि वो हर लिहाज़ से परफेक्ट होना चाहिए, उसमें कोई बुराई या ऐब नहीं होना चाहिए, लेकिन अब ऐसा नहीं है. लोग न तो एक-दूसरे को बदलने की सोचते हैं और न ही उस तरह से जज करते हैं. अगर पार्टनर में कोई कमी भी है, तो उसे अपना लेते हैं, क्योंकि दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं होता.

हमेशा साथ-साथ नहीं हैं

हर निर्णय पार्टनर से पूछकर ही करना, हर चीज़ और हर बात शेयर ही करना, मूवी, डिनर, पार्टीज़ साथ करना… नहीं, अब ऐसा नहीं है. पहले ये तमाम बातें कमिटमेंट का हिस्सा थीं, पर अब नहीं. अब दोनों वर्किंग होते हैं और वर्किंग न भी हो, तो अपनी सुविधा व समयानुसार ही चीज़ें प्लान करते हैं, जिसमें ज़रूरी नहीं कि वो दोनों हमेशा साथ ही रहें. कभी अपने फ्रेंड्स के साथ, तो कभी कलीग्स के साथ पार्टनर्स अपना वीकेंड, हॉलीडेज़ या बाकी फन एक्टिविटीज़ प्लान कर लेते हैं. इसमें दोनों ही कंफर्टेबल फील करते हैं और बुरा नहीं मानते. उन्हें यह ज़्यादा आसान लगता है, क्योंकि हमेशा एक-दूसरे के सिर पर सवार रहने से बेहतर उन्हें लगता है कि एक-दूसरे को पर्सनल स्पेस दिया जाए.

इस बदलाव के क्या मायने हैं?

क्या ये बदलाव सही है या ग़लत? ये तो बहस का मुद्दा है, क्योंकि एक तरफ़ जहां प्रैक्टिकल होने के चक्कर में भावनाएं ख़त्म हो रही हैं, वहीं रिश्ते टूटने का दर्द भी कम होने लगा है अब लोगों को. फ्लर्टिंग, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स, डिजिटल रिश्ते, बढ़ते तलाक़ आदि इस बदलाव के ही साइड इफेक्ट्स हैं. लेकिन इस बदलाव को रोका नहीं जा सकता, पर हां, निजी तौर पर हर कोई यह प्रयास कर सकता है कि हम अपने रिश्तों में ईमानदार रहें, क्योंकि रिश्तों का दूसरा नाम ही बंधन और अनुशासन होता है. यदि आपको यह अनुशासन और बंधन पसंद नहीं, तो बेहतर होगा कि रिश्तों में बंधें ही नहीं. आज़ाद रहें, अकेले रहें… क्योंकि इस तरह के रिश्ते ही साथी होते हुए भी अकेलेपन को और बढ़ाते हैं. यही वजह है कि आज हर कोई साथी के होते हुए भी कहीं-न-कहीं ख़ुद को अकेला पाता है.

ज़िंदगी के किसी मोड़ पर तो आकर ठहरना होता ही है, लेकिन यह ठहराव अब रिश्तों में नहीं नज़र आता, ऐसे में आप उस मोड़ पर नितांत अकेले रह जाते हैं, जहां सबसे ज़्यादा आपको प्यार, अपनेपन और साथ की ज़रूरत
होती है.

बेहतर होगा कि रिश्तों में समय, कम्यूनिकेशन, कमिटमेंट और प्यार इंवेस्ट करें, ताकि आपका रिलेशनशिप बैंक बैलेंस कभी खाली न हो.

– विजयलक्ष्मी

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9 बातें जो ला सकती हैं दांपत्य जीवन में दरार (9 Things That Can Break Your Relationship)

कहते हैं पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का होता है, तो फिर क्यों सात जन्मों का यह रिश्ता पलभर में टूट जाता है? क्यों जीवनभर का साथ पलभर का साथ बनकर रह जाता है? ज़रा-सी नासमझी, ज़रा-सी लापरवाही क्यों दो चाहनेवालों को अजनबी बना देती है? कहीं जाने-अनजाने आप भी इसी दौर से तो नहीं गुज़र रहीं हैं?

Things That Break Relationship

शादी के पहले एक-दूसरे को समझना ज़रूरी

शादी तय होने के बाद लड़के और लड़की के बीच कम्युनिकेशन बेहद ज़रूरी है. इससे धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के स्वभाव को समझने लगते हैं, विचारों को जानने लगते हैं. जब आपसी समझ होगी तभी आपसी तालमेल संभव है. लेकिन अभी भी कई परिवार ऐसे हैं, जहां लड़के  और लड़की को शादी के पहले मिलने और बातें करने की आज़ादी नहीं है. आगे चलकर इससे एक-दूसरे के  साथ सामंजस्य बैठाने में काफ़ी परेशानी होती है. वे एक-दूसरे के स्वभाव को समझ नहीं पाते, इसलिए बात-बात पर तू-तू, मैं-मैं होती रहती है. यहां तक कि कई बार शादी टूटने की भी नौबत आ जाती है.

शादी के बाद दूरी

बड़े पैकेज से प्रभावित हो मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनेवाली रीना को उसके पति राजीव ने घर से दूर बैंगलोर जाने की इजाज़त तो दे दी, पर कुछ ही महीनों के बाद उनमें अनबन होने लगी. प्यार और विश्‍वास में कमी आने लगी. दूर रहकर रिश्ते को मेंटेन करना मुश्किल हो गया. आख़िर एक दिन रीना को अपनी शादी बचाने के लिए जॉब ट्रांसफ़र करवाने का फैसला लेना ही पड़ा. आज के ज़माने में पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी होते हैं. ऐसे में अगर उनमें से किसी एक को भी अपने करियर के लिए एक-दूसरे से दूर रहना पड़े तो इसमें वे ग़लत नहीं समझते. लेकिन इस दूरी से धीरे-धीरे रिश्ते में भी दूरियां आने लगती हैं. आपसी प्यार डगमगाने लगता है. मोबाइल और इंटरनेट के ज़रिए संपर्क तो हो सकता है, पर संबंध बहुत ज़्यादा समय तक टिका रहे या पहले जैसा विश्‍वास बना रहे, ये मुश्किल है. बल्कि ऐसे रिश्तों में किसी तीसरे के आने की ज़्यादा संभावना होती है. ऐसे में शादी के टूटने की संभावना ़ज़्यादा होती है.

ऑफ़िस में अधिक वर्क लोड

एडवर्टाइज़िंग कंपनी में काम करनेवाली सुहासिनी मेनन कहती है, “मेरे लिए अपने परिवार से बढ़कर कुछ भी नहीं है. लेकिन जब काम के लिए ऑफ़िस में ज़्यादा समय देना पड़ता है तो मुसीबत हो जाती है. कभी-कभार ऐसा हो तब तो मेरे पति सब कुछ मैनेज कर लेते हैं. लेकिन यदि ज़्यादा दिनों तक ये सिलसिला चल जाए तो मेरे पति बर्दाश्त नहीं करते. हम चाहे बाहर की कितनी ही ज़िम्मेदारियां संभाल लें, लेकिन घर व पति को समय न दें तो गृहस्थी की गाड़ी डगमगा जाती है.”  आजकल पति-पत्नी दोनों के कामकाजी होने से उनकी पर्सनल लाइफ़ पर भी प्रभाव पड़ता है. कामकाज के बोझ तले रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं. इसलिए ऑफ़िस व घर को बैलेंस करके चलने में ही समझदारी है.

 घर की ज़िम्मेदारी का ज़्यादा बोझ

रिश्तों को पनपाने के लिए उन्हें प्यार से सींचना पड़ता है. सुबह से शाम तक यदि आप घर-किचन  आदि को सजाने-संवारने में ही बिता देंगी या दिनभर बच्चों व अन्य काम से ही ़फुर्सत नहीं मिलेगी तो पति के साथ समय बिताने के लिए व़क़्त ही कहां होगा. इससे बेहतर तो यह है कि आप अपने पति के साथ काम बांट लें. इससे आप पर सारा बोझ भी नहीं पड़ेगा और काम की ज़िम्मेदारी साथ निभाने से आपसी प्यार भी बढ़ेगा. इस बारे में सोनी कहती है, “ मेरे पति राजीव ने कभी भी ऐसा नहीं सोचा कि घर का काम पत्नी को ही करना चाहिए. मुझ पर घर और बाहर दोनों की ज़िम्मेदारियां हैं और वो इस बात को अच्छी तरह समझते हैं. वो मुझसे पहले घर पहुंच जाते हैं और मुझे ऑफ़िस से निकलने में देर हो जाती है. जब घर पहुंचती हूं तो वे सब्ज़ी वगैरह काटकर रखते हैं और बच्चे को भी संभाल लेते हैं. आने के बाद मैं बाकी काम निपटा लेती हूं, इस तरह ऑफ़िस से आने के बाद हम दोनों सोने के पहले एक-दो घंटे स़िर्फ अपनी दिनभर की बातों को शेयर करने के लिए रखते हैं. मुझे लगता है कि  एक-दूसरे के लिए व़क़्त निकालने से रिश्तों में और मिठास व निकटता आती है.”

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Things That Break Relationship
व्यस्तता को रिश्ते पर हावी न होने दें

आज की लाइफ़ इतनी व्यस्त हो गई है कि  एक-दूसरे के लिए समय निकालना ही मुश्किल हो गया है. पत्नी-पत्नी दोनों कामकाजी हों या न हों, दोनों ही हालात में यह स्थिति होने लगी है. इसलिए एक-दूसरे के लिए समय निकालें. सप्ताहांत में बाहर घूमने जाएं, कोई फ़िल्म देखें या फिर साथ में शॉपिंग पर जाएं. आप चाहें तो रोज़ाना मॉर्निंग वॉक पर साथ जाएं. हर तरह की बातें शेयर करें. हर पल को भरपूर जीएं. इससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी की उम्र बढ़ जाएगी. एक-दूसरे को समय न देने से हर बात की ग़लतफ़हमियां बढ़ती चली जाती हैं, जो बाद में रिश्ते को प्रभावित करती हैं.

 आलोचनाओं से बचें

शादी की है तो रिश्ता निभाना सीखें. एक-दूसरे में मीन-मेख न निकालें. न ही किसी के सामने अपने पार्टनर की आलोचना करें. इससे उनके अहम को ठेस लगती है. यदि आपको एक-दूसरे से शिकायत है तो मिलकर आपसी शिकायत दूर करें. सरेआम उनकी बुराई करके दूसरोें के  सामने अपने पति को शर्मसार न करें, न ही इस पवित्र रिश्ते का तमाशा बनाएं. अच्छाई और बुराई सब में होती है, आप में भी तो होगी. इसलिए अपने पार्टनर की अच्छाइयों को देखें, बुराई को नहीं. उनके काम की सराहना करें. प्यार देंगे तो बदले में प्यार मिलेगा.

 शक करने से बचें

दोस्त बनाना कोई ग़लत बात नहीं. आजकल ऑफ़िस में लड़के और लड़कियांं साथ काम करते हैं. इसलिए अपने पति की सहकर्मी को लेकर कभी शक न पालें. शक ऐसा कीड़ा है, जो एक बार रिश्ते में लग गाए तो शादीशुदा ज़िंदगी को ख़त्म कर देता है. लेकिन साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि कहीं आपकी लापरवाही किसी गैर व्यक्ति को आपके दांपत्य  में सेंध लगाने की आज़ादी न दे दे. आंख बंद करके अपने पार्टनर पर भरोसा भी न करें. ऐसे मामले में समझदारी बरतें.

सेक्स को नज़रअंदाज़ न करें

माना कि  पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार ज़रूरी है, पर प्यार की पूर्णता के लिए सेक्स भी ज़रूरी है. अपनी सेक्सुअल इच्छाओं को खुलकर अभिव्यक्त करें. एक-दूसरे से निःसंकोच बात करें. आजकल के पति-पत्नी कामकाजी होने के कारण इतने ़ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें सेक्स के लिए भी समय नहीं मिलता. इससे धीरे-धीरे उनके बीच दूरियां बढ़ती चली जाती हैं.

अहम् का टकराव

रिश्ते में प्यार पालें, अहम् नहीं. छोटी-छोटी बातों को ईगो की वजह न बना लें. किसी बात पर अगर कहा-सुनी हो जाए तो उस बात को अनावश्यक खींचें नहीं. शांत मन से सोचें और फिर बात करने की पहल करें. कभी-कभी छोटी-सी बात भी तिल का ताड़ बन जाती है. बेहतर होगा कि  बड़ी से बड़ी बातों को भी समझदारी से हल करें. सुरभि कहती है, “मेरे और विवेक के बीच ज़रा-ज़रा-सी बात को लेकर झगड़े हो जाते हैं, लेकिन विवेक हर बात को आसानी से संभाल लेता है, पर जब किसी बात पर उसे बहुत ़ज़्यादा ग़ुस्सा आ जाए और वह पहल न करे तो मैं समझ जाती हूं कि  मामला गंभीर है. तब मैं यह नहीं देखती कि  कौन सही है और कौन ग़लत. बस, किसी तरह उसे मना लेती हूं. बाद में शांति से बैठकर दोनों अपनी ग़लती का एहसास कर लेते हैं और फिर ख़ूब हंसते भी हैं अपनी बेवकूफ़ियों पर. इस तरह हम अपनी ही ग़लतियों का मज़ाक उड़ाकर अहम् को भी हवा में उड़ा देते हैं. शायद यही है हमारे पऱफेक्ट मैरेज का राज़.”

– सुमन शर्मा

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