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रिश्तों में ईमानदारी और सच्चाई बेहद ज़रूरी होती है लेकिन कभी कभी कुछ झूठ भी आपके रिश्ते की गर्मी को बनाए रखतेहैं. यह ज़रूरी है कि ये झूठ बेहद समझदारी व सूझबूझ से कहे जायें. तो क्या हैं ये प्यारे झूठ आइए जानें-

  • आज बेहद ख़ूबसूरत लग रही हो. हर पति को अपनी पत्नी से यह ज़रूर कहते रहना चाहिए. बीच बीच में इस तरहकी बातें मन को गुदगुदा देती हैं.
  • आपकी आवाज़ फोन पर बेहद सेक्सी लगती है. पत्नी इस तरह की बातों से पति को अच्छा महसूस करवा सकती हैं.
  • यह रंग बहुत खिलता है तुम पर. आप दोनों ही यह कह सकते हैं फिर भले ही वो रंग आपको नपसंद हो पर आपकायह कहना उन्हें बेहतर महसूस कराएगा और आपके और क़रीब लाएगा.
  • तुम्हारा हाथों में ग़ज़ब का स्वाद है और आज तो खाना और भी लाजवाब है. भले ही खाना सामान्य ही बना हो परआपकी तारीफ़ उन्हें यह महसूस कराएगी कि वो आपके लिए ख़ास हैं और आप उनके काम की कद्र करते हैं.
  • आप कितनी ज़िम्मेदारी से सब कुछ संभाल लेते हैं. भले ही ऐसा ना हो पर अगर वो आपकी मदद करने की कोशिशकरते हैं और जिम्मेदारियाँ बाँटते हैं तो उनकी तारीफ़ ज़रूर करें.
  • कितनी मेहनत करती हो तुम. भले ही पत्नी ने कुछ अलग से ना किया हो लेकिन इस तरह की बातें उनका हौसलाबढ़ाती हैं. तो कहने में क्या हर्ज है.
  • आप कितना प्यार करते हैं मुझसे और उतना ही सम्मान भी. मेरी नज़रों में आपकी इज़्ज़त दिन ब दिन बढ़ती ही जारही है. ऐसा कहने से वो सच में आपसे और ज़्यादा प्यार करेंगे और रिश्ते में कोशिश भी अधिक करेंगे.
  • ये सफ़ेद बाल भी आप पर खूब फबते हैं. वक़्त के साथ भले ही बालों का रंग उड़ जाए लेकिन आपके इस तरह केप्यारे झूठ रिश्तों के रंगों को उड़ने नहीं देंगे. 
  • तुम घर कितने अच्छे से संभालती हो और रिश्तों को भी. इस घर को तुमने वाक़ई खूबसूरत बना दिया. ऐसा कहने सेवो ज़रूर आपके बाक़ी रिश्तों की और भी परवाह करने लगेंगी, चाहे आपके माता-पिता हों या भाई-बहन.
  • मेरे पेरेंट्स को इतना प्यार और सम्मान देने के लिए शुक्रिया. भले ही आप इस संदर्भ में उनसे इत्तेफ़ाक ना रखतीं होंलेकिन ऐसा कहने से उनका व्यवहार और बेहतर होगा और वो अधिक कोशिश करेंगे कि आपकी बातों पर खरेउतरें. 
  • बच्चे कह रहे थे पापा इतना अच्छा पढ़ाते हैं कि ट्यूशन की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी. ऐसा कहने से वो बच्चों की पढ़ाईके प्रति और ज़िम्मेदार होंगे aur पर्सनल इनटरेस्ट लेने लगेंगे. आपकी एक ज़िम्मेदारी थोड़ी हल्की हो जाएगी. 
  • आप जब भी सब्ज़ियाँ लाते हो वो ताज़ा भी होती हैं और पैसे भी कम लगते हैं, लगता है आपको मार्केटिंग की समझमुझसे अच्छी है. इस तरह से वो हर शाम सब्ज़ियाँ भी ख़रीदेंगे और उन्हें यह करने में मज़ा भी आएगा.

तो इस तरह आप दोनों ही अपने अपने तरीक़े से रिश्ते में  सामंजस्य बेहतर बना सकते हैं और अपने रिश्तों की डोर को aur मज़बूत कर सकते हैं.

कहीं चाहतें हैं, कहीं राहतें हैं… कहीं दर्द है, तो कहीं बंदिशें… दवा भी हैं ये और दुआ भी… मीठी बारिश भी हैं और ठंडी हवा भी… दरअसल रिश्तों के ताने-बानों में हर वो एहसास शामिल होते हैं, जो हमारे जीने का मक़सद बनते हैं और हमें आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं. ऐसे में तेज़ी से किसी अनजानी व अनदेखी दिशा में भाग रहे हम सभी के लिए बेहद ज़रूरी है कि थोड़ा ठहरें और अपने रिश्तों को जीएं, ताकि प्यार और दुलार की ऑयलिंग से उनकी सर्विसिंग होती रहे.

Effective techniques for strong relationship

क्यों ज़रूरी है relationship टेक्नीक्स?

– हर रिश्ता, चाहे बच्चों और पैरेंट्स के बीच का हो, भाई-बहन का हो, पति-पत्नी या फिर अन्य दोस्त व रिश्तेदार हों, सभी हमसे समय और अटेंशन की डिमांड करते हैं, जो आज की तारीख़ में हमारे पास है ही नहीं.
– वक़्त की कमी के चलते हम अपने रिश्तों को पूरी तरह से जी नहीं पाते. छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हम महरूम रह जाते हैं और साथ ही अपने साथ जुड़े लोगों को भी उनसे दूर रखते हैं. ऐसे में रिश्तों में शिकायतें पैदा होनी शुरू हो जाती हैं.
– हर वक़्त अगर हम यही रोना रोते रहेंगे कि समय नहीं मिलता, तो एक दिन हमारे रिश्तों के पास हमारे लिए समय नहीं होगा.
– चाहे हम कितने ही क़ामयाब हो जाएं या कितना ही ऊंचा मुक़ाम हासिल कर लें, अपनों के साथ की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है, वरना जीवन में एकाकीपन हमें निराशा की गर्त में धकेल सकता है. यदि समय रहते रिश्तों को सहेजने की ओर हम ध्यान नहीं देंगे, तो जब हमें उन रिश्तों की ज़रूरत होगी, तो शायद हमारे आस-पास कोई नहीं होगा.
– आपसी मेलजोल और एक साथ समय बिताने से न स़िर्फ रिश्ते मज़बूत होते हैं, बल्कि हमारा हौसला और आत्मविश्‍वास भी बना रहता है. हम अपने अंदर सकारात्मकता का अनुभव करते हैं.
– आपको अपनों की परवाह है, उनकी ज़रूरत है, उन्हें इस बात का एहसास कराने के लिए भी रिश्तों की सर्विसिंग ज़रूरी है.
कैसे करें रिश्तों की सर्विसिंग?
– कम्युनिकेशन हर रिश्ते की नींव होती है. बहुत ज़रूरी है कि आपसी बातचीत और अपनों के साथ कुछ बातें शेयर करने का वक़्त ज़रूर निकाला जाए.
– ज़रूरी है शेयरिंग और केयरिंग भी. अपने जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी जब हम अपनों से शेयर करते हैं, तो अपनेपन का एहसास और बढ़ जाता है. चाहे हमारे दोस्त हों या रिश्तेदार, उन्हें यह महसूस होता है कि हमारे जीवन में उनका कितना महत्व है.
– इसी तरह से केयरिंग भी ज़रूरी है. ऑफिस में व्यस्त दिनचर्या के बीच भी समय निकालकर घर पर फोन करके हालचाल पूछना एक अच्छा आइडिया हो सकता है.
– अगर घर में कोई बीमार है, तो एक-दो बार हालचाल पूछने पर उन्हें यह एहसास होगा कि आपको सचमुच उनकी
परवाह है.
– विशेष अवसरों पर समय निकालकर फैमिली गेट-टुगेदर या पिकनिक वगैरह आयोजित करते रहें.
– अगर कोई ख़ास अवसर है, तो गिफ्ट ले जाना न भूलें.
– सबकी सालगिरह की तारीख़ रिमाइंडर पर सेट कर लें, ताकि आप अपनों के उन ख़ास दिनों को भूल न पाएं और आपकी शुभकामनाएं उनकी ख़ुशी को और बढ़ा दें.
– जिनसे आप प्यार करते हैं, उन पर विश्‍वास करना सीखें. विश्‍वास पर ही हर रिश्ते की गहराई टिकी होती है. अगर कोई आपसे यह उम्मीद रखता है कि आप उन्हें समझें, उन्हें हर बार सही-ग़लत के तराज़ू में तौलकर न देखें, तो आप उनका विश्‍वास न तोड़ें.
– रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रयास लगातार करते रहें.
– हर किसी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें लगाकर न रखें. यह सच है कि हर रिश्ते से हमारी कई उम्मीदें जुड़ी होती हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी ध्यान रखें कि आपकी उम्मीदें कितनी सही हैं और सामनेवाला उन्हें किन मजबूरियों के चलते पूरी नहीं कर पा रहा. अगर आप अपनों से यह आशा करते हैं कि वो आपकी उम्मीदों पर खरे उतरें, तो ख़ुद से भी सवाल पूछें कि क्या आप भी उनकी सारी उम्मीदों पर उतने ही खरे उतरते हैं?
– सरप्राइज़ दें. कभी-कभी ऑफिस से जल्दी आकर फैमिली के साथ वक़्त बिताएं या फिर मूवी या डिनर प्लान करके सबको चौंका दें.
– एक रिश्ते को निभाने में ऐसा न हो कि दूसरे रिश्तों को नज़रअंदाज़ कर दें. ज़िंदगी में हर रिश्ते की अपनी ख़ास जगह और अहमियत होती है. इस बात को समझें और हर रिश्ते में संतुलन बनाए रखें.
– शादी के बाद दोस्तों को भूल न जाएं. कुछ लोग शादी के बाद स़िर्फ अपनी फैमिली लाइफ में बिज़ी हो जाते हैं, तो कुछ पहले की ही तरह यार-दोस्तों की महफ़िल का मज़ा लेकर फैमिली को भूल जाते हैं. ये दोनों ही रवैया ग़लत है. संतुलन बनाए रखें. याद रखें, दोस्त भी ज़रूरी हैं.
– तारीफ़ करने से पीछे न हटें. किसी की प्रशंसा में कहे दो शब्द भी आपके रिश्ते को नई ऊर्जा से भर सकते हैं.
– रिश्तों को ईगो की भेंट न चढ़ने दें. अपने अहम् को अपने रिश्तों के बीच में न आने दें, वरना रिश्तों के सच्चे सुख से वंचित रह जाएंगे.
– अगर जाने-अनजाने आपने किसी को आहत कर दिया हो, तो अपनी ग़लती स्वीकारें और सॉरी कहकर मनमुटाव दूर कर लें.
– घर-परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि कल को पैसों और संपत्ति को लेकर आपस में कोई विवाद न हो. एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि पैसे कमाना फिर भी आसान है, लेकिन प्यार, अपनापन और रिश्ते कमाना उतना ही मुश्किल, इसलिए रिश्तों के महत्व को समझें.

इन बातों का भी ध्यान रखें

– अपने रिश्तों की ज़रूरतों को पहचानें.
– फैंटेसाइज़ करें यानी कल्पना में जीने का मज़ा ज़रूर लें, लेकिन हक़ीक़त की ज़मीं को ध्यान में रखकर.
– अपने डरोें से भागें नहीं, बल्कि अपनों के साथ उन्हें शेयर करें.
– बिना बोले भी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. कई बार बहुत कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, ऐसे में सामनेवाले की भावनाओं को समझने की क्षमता ही आपके रिश्तों की मज़बूती दर्शाती है.
– ज़िम्मेदारियां लेने से घबराएं नहीं.
– दोषारोपण से बचें. बेवजह के वाद-विवाद और एक-दूसरे को दोष देने की बजाय अपने ग़ुस्से पर नियंत्रण रखें और बातों या बहस को यह सोचकर हल्के में लें कि ये रिश्तों का ही हिस्सा है.

– गीता शर्मा

 

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