Tag Archives: relationship tips

सफल अरेंज मैरिज के एक्सक्लूसिव 15 मंत्र (15 Exclusive Relationship Mantra For Successful Arrange Marriage)

दादी-नानी या माता-पिता के समय की अरेंज मैरिज की सफलता का फ़ॉर्मूला आज के दौर में फिट नहीं बैठता. मॉडर्न युग में क्या हैं सफल अरेंज मैरिज के मंत्र, आइए जानते हैं. कहते हैं शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और हर किसी के लिए कोई न कोई जीवनसाथी ज़रूर होता है. पर आज की युवापीढ़ी इस कथन में अधिक विश्‍वास नहीं करती. वह तो लव मैरिज को अधिक महत्व देती है. लेकिन मेट्रो सिटीज़ व खुले विचारोंवाले परिवारों को छोड़ दें, तो आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं और वैवाहिक जीवन भी सफल होता है. तो आइए, सफल अरेंज मैरिज के इन मंत्रों को जानें.

Relationship Mantra

1. शादी को सफल बनाने का मूल मंत्र है- प्यार, विश्‍वास, समझौता और सामंजस्य. धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझें, एडजस्ट होने के लिए व़क़्त और स्पेस दें. फिर देखें, किस तरह रिश्तों में मज़बूती आती है.

2. अरेंज मैरिज में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. अतः घबराहट होना स्वाभाविक है. यदि आप भी ऐसा महसूस करती हैं, तो कारण जानने की कोशिश करें. कई बार किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने की कल्पना, नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने का डर, वहां के तौर-तरीक़ों की चिंता आदि से मन डरता है. मन की घबराहट को पार्टनर के साथ शेयर करें. उसके ज़रिए परिवार के बारे में जानने की कोशिश करें. पार्टनर के साथ सहज हो जाने पर परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी नहीं होगी.

3. अरेंज मैरिज का अर्थ है- ज़्यादा ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा अपेक्षाएं. दोनों ही पार्टनर्स पर उन सारी बातों पर खरा उतरने का दबाव रहता है. दबाव ज़रूर लें, लेकिन इतना नहीं कि आपसी तालमेल ही गड़बड़ाने लगे.

4. जरूरी नहीं कि पार्टनर को आपकी हर पसंद-नापसंद में रुचि हो या आप दोनों के विचार एक जैसे हों. कभी-कभी विपरीत स्वभाववाले पार्टनर्स भी बहुत ख़ुश रहते हैं.

5. हो सकता है नए परिवार की सोच आपके जीवन मूल्यों को सही न माने और आपको लगातार बताया जाए कि इस परिवार में ऐसा ही होता है. निश्‍चय ही ऐसे माहौल में आप परेशान हो जाएं, घुटन भी हो, पर रिलैक्स! शादी में सामंजस्य व अनुकूलता भी होती है. ऐसी स्थिति में पार्टनर से सही शब्दों के चुनाव के साथ सौम्य लहजे में बात करें. उन्हें अपनी उलझन बताएं, ताकि परिवार के किसी भी सदस्य को नाराज़ किए बिना समस्या का हल निकल आए.

6. शुरू-शुरू में पार्टनर या परिवार के सदस्यों की किसी भी बात, कमेंट या व्यवहार को दिल पर न लें. न ही जैसे को तैसा वाली पॉलिसी अपनाएं, बल्कि जो लोग परेशानियां पैदा करते हैं, उनसे संभलकर रहें. सूझबूझ से स्थिति को संभालें. निश्‍चय ही ऐसा व्यवहार आप दोनों को ख़ुशियां देगा. एक-दूसरे के क़रीब लाएगा.

7. परिवार में होनेवाली हर छोटी-छोटी बात की शिकायत पार्टनर से न करें, न ही बात-बात पर आंसू बहाएं. याद रहे, वो भी आपकी तरह ही ज़्यादा नहीं, तो थोड़ी-बहुत दुविधा से गुज़र रहा है.

8. प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है. अरेंज मैरिज में भी कभी तो देखते ही प्यार हो जाता है और कभी साथ चलते-चलते प्यार हो जाता है, वो भी ऐसा कि जीवन के हर आंधी-तूफ़ान से जूझने की ताक़त बन जाता है. प्यार देंगे, तो प्यार मिलेगा भी.

9. प्यार की नींव है विश्‍वास. पार्टनर पर विश्‍वास करें और उनके भरोसे को भी बनाए रखें. धैर्य से काम लें. पार्टनर या परिवार के सदस्यों की ग़लतियों के प्रति क्षमाशील बनें. जो बीज हम बोते हैं, वही फल हमें मिलता है.

10. शादी एक कमिटमेंट है, जहां आप अपनी बेफ़िक़्र दुनिया से निकलकर ज़िम्मेदारी, कमिटमेंट, त्याग, समझौतों के भंवर में घूमते रहते हैं. लेकिन यही बातें विवाह को मज़बूत बनाती हैं.

यह भी पढ़े: लव गेम: पार्टनर से पूछें ये नॉटी सवाल (Love Game: Some Naughty Questions To Ask Your Partner)

Relationship Mantra

11. हो सकता है आप अपने नए परिवार के मुक़ाबले आर्थिक रूप से ज़्यादा संपन्न परिवार से हों, ज़्यादा स्मार्ट या हर तरह से बेहतर हों. लेकिन याद रहे, शादी किसी मुक़ाबले का प्लेटफॉर्म नहीं है. अतः तुलनात्मक विचारधारा को आड़े न लाएं. अब यह परिवार आपका है, इसे बेहतर बनाने में सहयोग दें.

12. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए संवाद सबसे मुख्य है. कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें. एक झूठ आपको मुसीबत में डाल सकता है. एक बार आपका झूठ पकड़ा गया, तो फिर से वह विश्‍वास पाना असंभव हो जाता है.

13. विवाह की सफलता के लिए दोनों परिवारों को जोड़कर रखना भी आपका व आपके पार्टनर का काम है. यह तभी संभव है जब दोनों परिवारों के प्रति स्नेह व आदर का समान भाव हो.

14. रिश्तों को बनाए रखने में मुस्कुराहट बड़ा काम करती है. आप ख़ुद भी आनंदित होते हैं और दूसरों का मन भी जीत लेते हैं.

15. इन सारी बातों के अलावा कुछेक व्यक्तिगत बातें भी हो सकती हैं, जिन्हें अपने ढंग से सुलझाकर विवाह को सफल बनाया जा सकता है.

– प्रसून भार्गव

यह भी पढ़े: शादी से पहले दिमाग़ में आनेवाले 10 क्रेज़ी सवाल (10 Crazy Things Which May Bother You Before Marriage)

घर को मकां बनाते चले गए… रिश्ते छूटते चले गए… (Home And Family- How To Move From Conflict To Harmony)

रिश्तों (Relationships) की ख़ुशबू… प्यार के लम्हे… अपनों का साथ… ये सभी मिलकर ही तो एक ईंट-पत्थर से बने मकान को घर बनाते हैं, लेकिन जब इन घरौंदों में भावनाएं पिघलने लगें, अपनों का साथ छूटने लगे… तब रिश्ते भी बिखरने लगते हैं…

Home Relationship

एहसान दोनों का ही था मकान पर… छत ने जता दिया और नींव ने छुपा लिया… कुछ ऐसे ही होते हैं रिश्ते व भावनाएं, जिनके बगैर जीवन का कोई अर्थ नहीं, आख़िर क्यों वे एक दौर आने पर ठहरने से लग जाते हैं. आपसी समझ व अपनापन कम होने लगता है.

एक-दूसरे के प्रति नाराज़गी व उदासी इस कदर बढ़ जाती है कि साथ रहना दूभर हो जाता है. रिश्तों की दरार को भरना मुश्किल हो जाता है. तब बस, यही सोच रहती है कि किसी भी तरह अलग हो जाएं हम, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि कुछ अरसे बाद मन पछताता है और दिल वहीं लौटना चाहता है, जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं… जैसे- बचपन, पुराना घर, मासूमियत, पुराने दोस्त, क्योंकि उम्र चाहे जितनी भी हो, सुना है दिल पर कभी झुर्रियां नहीं पड़तीं… पर रिश्तों पर पड़ी गांठ अपनों को दूर कर ही देती है.

कभी ज़रूरतें जुदा कर देती हैं…

श्रीवास्तवजी की बड़ी ख़्वाहिश थी कि बड़ा-सा घर लें और परिवार के साथ इकट्ठे रहें. इसके लिए तमाम जोड़-तोड़ करते हुए आख़िरकार उन्होंने घर ले ही लिया. पत्नी व दोनों बेटों के साथ रहने लगे, लेकिन धीरे-धीरे बहुत कुछ बदलने लगा. बेटों की अपनी ख़्वाहिशें, ज़रूरतें इतनी बड़ी होती चली गईं कि वे दूसरे शहरों में चले गए. बड़े अरमान से श्रीवास्तवजी ने घर लिया था, जो अब सूने दरो-दीवारवाला खाली मकान रह गया है. यहां चूक तो किसी से नहीं हुई. बस, प्राथमिकताएं सबकी अलग-अलग थीं.

घर का वजूद क्यों है?

आख़िर इंसान घर क्यों बनाता है? अपनी व परिवार की सुरक्षा, मज़बूत स्थिति, साथ और ठहराव के लिए ही ना! वरना कइयों की तो पूरी ज़िंदगी बीत जाती है अपना एक घर बनाने में, लेकिन घर की भी एक ख़ूबसूरत परिभाषा होती है, पहचान होती है, जिससे वो घर कहलाता है. वो है प्यार, अपनापन, सहयोग, एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देना आदि.

छोटी-छोटी बातों की ख़ुशियां, छोटी-ब़ड़ी उपलब्धियों से जुड़े यादगार पल ही तो एक गारे-सीमेंट से बने मकान को मोहब्बतभरा घर बना देते हैं, क्योंकि वहां पर माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी, बच्चों, रिश्तेदारों से जु़ड़े जाने कितने प्यारभरे लम्हे होते हैं. बचपन की शरारतें, नोक-झोंक, ख़ुशी-ग़म के पल, उम्मीदें, महत्वाकांक्षाएं, प्यार की सौग़ात… अनगिनत भावनाओं का समंदर अपने में संजोए व समेटे होता है घर…

व़क्त बेवफ़ाई कर गया…

आज कमबख़्त व़क्त ही तो नहीं है हम सभी के पास. हर कोई अपनी-अपनी ख़्वाहिशों की उलझनों में उलझा-सा है. कहीं बच्चे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले जाते हैं, तो कहीं नौकरी की ख़ातिर बेटे दूर हो जाते हैं और मजबूर पैरेंट्स अपने ही घर में तन्हा रह जाते हैं. फिर भी एक आस व विश्‍वास रहता है कि एक दिन वे लौटकर आएंगे,

यह भी पढ़ेसर्वगुण संपन्न बनने में खो न दें ज़िंदगी का सुकून (How Multitasking Affects Your Happiness)

जैसे- उम्मीदें तैरती रहती हैं.. कश्तियां डूब जाती हैं… कुछ घर सलामत रहते हैं, आंधियां जब भी आती हैं.. बचा ले जो हर तूफ़ां से, उसे आस कहते हैं… बड़ा मज़बूत है ये धागा, जिसे विश्‍वास कहते हैं… पैरेंट्स का विश्‍वास ही तो होता है, जो उन्हें हर पल, यह उम्मीद बंधाता रहता है कि उनका मकान फिर से घर बन जाएगा… अपनों की चहल-पहल से घर का हर ज़र्रा रौशन हो जाएगा…

मैं मकान हूं, घर नहीं…

पढ़ाई, नौकरी, ज़रूरतों से भरी भागती ज़िंदगी ने हमें एक ऐसा खिलाड़ी बना दिया है, जो हर रोज़ बस दौड़ रहा है. घर से ऑफिस, स्कूल-कॉलेज, क्लासेस, बिज़नेस… यानी हम सभी बस सुबह से शाम एक अनजानी-अनकही-सी प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए बस भाग रहे हैं और घर रात बिताने का ज़रिया-सा बनता जा रहा है. यानी जहां पर हम रात को पहुंचते हैं और सुबह फिर से निकल जाते हैं सफ़र के लिए. तभी तो कभी भावनाओं से रचे-बसे घर को भी आख़िर कहना पड़ जाता है कि- ‘जनाब मैं घर नहीं मकान हूं. वो तो बहुत पुरानी बात हुई जब मुझे ‘घर’ कहा जाता था… सभी मेरे पास थे. हंसी के कहकहे, शरारतों की अठखेलियां होती थीं, खाने-खिलाने का लंबा दौर चलता था, तीज-त्योहारों की रौनक़ होती थी,

अपने-पराए सभी मिल जाते थे… बड़ा बेशक़ीमती व़क्त था वो और मेरा वजूद भी इतरा उठता था अपनी ख़ुशक़िस्मती पर.’ घर का यह अनकहा दर्द बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है. आख़िर ये कहां आ गए हम!.. क्यों नहीं हमें ़फुर्सत अपनों के संग व़क्त गुज़ारने की? एक बार ज़रूर सोचिएगा इसके बारे में.

गुरुर में इंसान को इंसान नहीं दिखता..

जैसे अपने ही छत से अपना मकान नहीं दिखता…

सच, कुछ ऐसे ही हालात बन जाते हैं, जब हम अपने ही घर के अस्तित्व को अनदेखा करने लगते हैं. बहुत कुछ पाने की इच्छा ने हमें इस कदर स्वार्थी बना दिया है कि हम छोटी-छोटी ख़ुशियों को दरकिनार कर नाम-शौहरत के चक्कर में उलझते चले जा रहे हैं. ऐसे में रिश्ते भी प्राइस टैग की तरह हो गए हैं. यदि आपके पास पैसा है, तो आपकी कई ग़लतियां कोई मायने नहीं रखतीं, क्योंकि पैसों के बोझ तले वे दब जाती हैं. धन-दौलत व रुतबा हमें इस कदर अभिमानी बना देता है कि हमें अपने आगे कुछ दिखाई नहीं देता. दूसरों को नसीहत देना, उन पर उंगली उठाना, ख़ुद को श्रेष्ठ समझना हमारी फ़ितरत में शुमार हो जाता है. सबसे बेख़बर हम अपनी ही मदहोशी में रहते हैं.

यह भी पढ़े: रिश्तेदारों से क्यों कतराने लगे हैं बच्चे? (Why Do Children Move Away From Relatives?)

मनोवैज्ञानिक परमिंदर निज्जर का यह मानना है कि घर को लेकर हर किसी की सोच अलग-अलग होती है, जैसे-

* किसी के लिए घर सुरक्षा है, जहां पर वे ख़ुद को सुरक्षित महसूस करते हैं.

* कुछ के लिए घर सुकून व आराम करने का ठिकाना है.

* कुछ लोगों के लिए होटल जैसा है, जहां वे कुछ समय ख़ासकर रात बिताकर सुबह निकल जाते हैं.

* अधिकतर लोगों के लिए उनकी पहचान है घर, क्योंकि वहां पर उनकी नेमप्लेट है, जिस पर उनकी पहचान है.

* लेकिन इन सब चाहतों व ज़रूरतों के तले कहीं न कहीं घर के होने का सच्चा वजूद दफ़न-सा हो जाता है.

* हम यह क्यों भूल जाते हैं कि हमारे बचपन, लड़कपन की खट्ठी-मीठी यादों का पलछिन है घर.

* माता-पिता के त्याग-प्रेम, संघर्ष, अरमान, ख़ुशी, आशाओं का साक्षी है घर.

* रिश्तों की सोंधी ख़ुशबू, अपनों के

हास-परिहास का केंद्र बिंदु है घर.

* आज फिर ज़रूरत है मकान को घर बनाने की. रिश्तों को एक नए सिरे से सजाने की.

* कोशिश करें ज़िंदगी को रिवाइव करने की, ताकि बेनूर से घरौंदे को प्यारभरे एहसास से सींच सकें.

* ख़ुद को टटोलें, देखें कहां पर हैं हम? क्यों हमें इतनी जल्दबाज़ी, भागदौड़ है?

* अपनों को भरपूर समय दें, वरना ऐसा भी व़क्त आएगा, जब सब कुछ होगा, पर अपने न होंगे.

* रिश्ते हैं, अपने हैं, तो ज़िंदगी ख़ूबसूरत है और जीने का सबब भी है.

* ऐसी कामयाबी, नाम-शौहरत किस काम की, जहां अपनोें का साथ न हो.

तो आओ, फिर से अपने आशियाने को एक नए सिरे से सजाएं, अपनों के प्यार व साथ से भरपूर घर बनाएं…

– ऊषा गुप्ता

यह भी पढ़ेबच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के 11 आसान तरी़के (10+ Ways To Spend Quality Time With Your Kids)

साइलेंट मोड पर होते रिश्ते… (Communication Gap In Relationships)

ख़ामोशियां जब बात करती हैं, तो उनमें मुहब्बत की आवाज़ छिपी होती है… ये ख़ामोशियां मन को लुभाती हैं, ये ख़ामोशियां कभी-कभी बहुत भाती हैं, ये ख़ामोशियां गुदगुदाती हैं… लेकिन जब आपका रिश्ता (Relationship) ही ख़ामोश होने लगे, तब ये ख़ामोशियां रुलाती हैं… जी हां, आज के दौर की हक़ीक़त यही है कि हमारे रिश्तों में ख़ामोशी पसरने लगी है… हमारे संबंधों में अजीब-सी वीरानी पनप रही है… आख़िर क्यों साइलेंट मोड (Silent Mode) पर जा रहे हैं हमारे रिश्ते?

Relationships Problems

पहचानें रिश्तों की ख़ामोशियों को…

–     आप दोनों पास-पास होते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

–     डिनर टेबल हो या चाय का समय, आप दोनों के पास एक-दूसरे से बात करने के लिए कुछ होता ही नहीं.

–     अब न पहले की तरह फोन या मैसेजेस करते हैं, न ही सरप्राइज़ेस प्लान करते हैं.

–     बेडरूम में भी न रोमांस की जगह बची है, न ही पर्सनल बातों की.

–     सेक्स लाइफ भी पहले की तरह नहीं रही.

–     बात भले ही न होती हो, लेकिन वो कनेक्शन भी फील नहीं होता, जो पहले हुआ करता था.

–     एक-दूसरे के प्रति इतने कैज़ुअल हो गए हैं कि किसी के होने न होने से ज़्यादा फ़र्क़ ही नहीं पड़ता अब.

–     लड़ाई-झगड़े, वाद-विवाद भी अब नहीं होते.

–     आख़िरी बार साथ-साथ कहां बाहर गए थे या कौन-सी मूवी देखी थी, वो तक याद नहीं.

–     एक-दूसरे के साथ अब ज़िद भी नहीं करते.

–     पार्टनर की पसंद-नापसंद को अब तवज्जो नहीं दी जाती.

–     इसी तरह की कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जो यह महसूस करने के लिए काफ़ी हैं कि रिश्ते में ख़ामोशी ने जगह बना ली है.

क्या हैं वजहें?

–     लाइफस्टाइल फैक्टर बड़ी वजह है. पार्टनर्स बिज़ी रहते हैं.

–     समय की कमी भी एक कारण है, क्योंकि एक-दूसरे के साथ समय कम बिता पाते हैं.

–     प्राथमिकताएं बदल गई हैं. करियर, दोस्त, बाहरी दुनिया ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

–     सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है. यहां का आकर्षण आपसी रिश्तों को काफ़ी प्रभावित करता है.

–    लोग अंजाने लोगों से कनेक्ट करके जो एक्साइटमेंट महसूस करते हैं, जो नयापन उन्हें लगता है, वो आपसी रिश्तों में नहीं महसूस होता. ये रिश्ते उन्हें बोझिल और उबाऊ लगने लगते हैं.

–     आजकल डिनर का टेबल हो या बेडरूम, शारीरिक रूप से वहां मौजूद भले ही हों, मानसिक व भावनात्मक रूप से वो कहीं और ही होते हैं.

–     कभी खाने की पिक्चर्स क्लिक करके शेयर करते हैं, तो कभी सेल्फी को कितने लाइक्स और कमेंट्स मिले, इस पर पूरा ध्यान रहता है.

–     ऐसे में रिश्तों के लिए समय ही नहीं रहता और न ही एनर्जी बचती है.

–     ऑफिस से थकने के बाद सोशल साइट्स उनके लिए रिफ्रेश होने का टॉनिक बन जाती हैं, जहां अपना बचा-खुचा समय व ऊर्जा बर्बाद करने के बाद किसी और चीज़ के लिए कुछ नहीं बचता.

–     इसके अलावा ऑफिस में भी कलीग्स के साथ दोनों समय ज़्यादा बिताते हैं, जिससे उनसे इमोशनल रिश्ता बन जाता है, जो अपने रिश्ते से कहीं ज़्यादा कंफर्टेबल और आकर्षक लगने लगता है.

–     पार्टनर्स को लगता है कि कलीग्स उन्हें बेहतर समझते हैं, बजाय पार्टनर के.

–    कई बार ये रिश्ते भावनात्मक रिश्तों से भी आगे बढ़कर शारीरिक संबंधों में बदल जाते हैं.

–     एक बार इस तरह के रिश्ते में बंध गए, तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल लगता है.

–     शुरुआत में अच्छा और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन आगे चलकर ज़िंदगी में बड़ी परेशानी हो सकती है.

–     ऐसे में अपने पार्टनर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती, उसकी हर बात बेवजह की रोक-टोक लगने लगती है और फिर आपसी प्यार लगभग ख़त्म ही हो जाता है, रिश्ता एकदम ख़ामोश हो जाता है.

यह भी पढ़ें: रिश्तों में मिठास बनाए रखने के 50 मंत्र (50 Secrets For Happier Family Life)

Relationships Problems
कैसे बचाएं रिश्तों को?

–     सबसे पहले तो यह जानें कि समय रहते इस ख़ामोशी की आहट को पहचान लिया जाए.

–     अगर आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में सब कुछ सामान्य नहीं है, तो पार्टनर से बात करें.

–    सोशल मीडिया, टीवी, फोन और लैपटॉप्स के यूज़ के भी नियम बनाएं.

–     हफ़्ते में एक बार आउटिंग के लिए जाएं. मूवी प्लान करें या डिनर.

–     एक-दूसरे के ऑफिस में सरप्राइज़ विज़िट दें.

–     कभी यूं ही बिना काम के भी फोन या मैसेज कर लिया करें.

–     कभी-कभार स़िर्फ एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ही कैज़ुअल लीव ले लिया करें. इससे एक्साइटमेंट बना रहता है.

–    एक-दूसरे के लिए शॉपिंग या कुकिंग करें.

–     सोशल साइट्स पर भी एक-दूसरे से कनेक्टेड रहें, ताकि आप दोनों को ही पता रहे कि रिश्ते के बाहर आप सोशल मीडिया पर कैसे बिहेव करते हैं.

–     अपने पार्टनर के प्रति कैज़ुअल अप्रोच से बचें. शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कैज़ुअल हो जाते हैं, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

–     पार्टनर को यह महसूस करवाएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी कितनी अहमियत है.

–    उन्हें स्पेशल फील कराने का प्रयास बीच-बीच में करते रहें.

–     यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों हर पल, हर घड़ी बातें ही करते रहें, लेकिन वो कनेक्शन बना रहे, वो नीरस-सी ख़ामोशी न पनपे इसकी कोशिश ज़रूर होनी चाहिए.

–     समस्या चाहे जितनी भी गंभीर हो, कम्यूनिकेशन से बेहतर समाधान कोई नहीं है. बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन और कनेक्शन बना रहे और आपका रिश्ता साइलेंट मोड पर कभी न आए.

–     अपनी सेक्स लाइफ को साइलेंट मोड पर कभी न आने दें. उसमें ऊर्जा बनी रहे, इसकी कोशिश होती रहनी चाहिए.

–     जब भी लगे कि सेक्स लाइफ बोरिंग हो रही है, तो कभी रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर, तो कभी बेडरूम डेकोर चेंज करके, रोमांटिक गानों के साथ पार्टनर का स्वागत करें. इससे आप दोनों को ही नयापन महसूस होगा.

–     नई पोज़ीशन्स ट्राई करें या सेक्स की लोकेशन चेंज करें. वीकेंड पर कोई होटल बुक करके साथ में समय बिताएं.

– विजयलक्ष्मी

यह भी पढ़ें: इन 10 तरीक़ों से महिलाएं करती हैं फ्लर्ट (10 Smart Techniques Of Women Flirting)

रिश्तों को आजकल हुआ क्या है? (What Is Wrong With Relationship These Days?)

जिस्मों के रिश्ते हैं, आज की रूहों की यही हक़ीक़तें हैं… जज़्बात ग़ायब हैं, एहसास गुमसुम-से… हसरतें बेहिसाब हैं… वासनाओं पर मर्यादाओं का पहरा अब नहीं है, साथ जीने-मरने की क़समों का इरादा अब नहीं है… ख़ालिस मुहब्बत अब बंधन-सी लगती है, बेपनाह चाहत अब बेड़ियां बन गई हैं… अपने तरी़के से जीने का शग़ल, है हर कोई अपनी ही धुन में मगन… एक-दूसरे के साथ रहता तो है तन, पर न जाने कहां भटका हुआ है यह मन…

Relationships

–     इसे मॉडर्न होने की परिभाषा कहें या प्रैक्टिकल सोच, लेकिन सच है कि रिश्तों में अब वो पहले वाली गहराई नहीं रही.

–     ऐसा नहीं है कि लोग जुड़ते नहीं हैं, लेकिन ये जुड़ाव अब क्षणिक होता है.

–     रिश्तों में अब एडजेस्टमेंट करने की जगह न के बराबर बची है, क्योंकि दोनों पार्टनर्स में से किसी को भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करना है.

–     शादी के रिश्ते में एक साथ होते हुए भी अलग-अलग हैं.

–     आज दोनों पार्टनर्स वर्किंग होते हैं, ज़ाहिर है लाइफस्टाइल इतनी बदल गई है कि रिश्तों में भी बदलाव आ गया है. लेकिन ये बदलाव इस कदर हावी हो रहा है कि हम ख़ुद भी सोचते हैं कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

–     डबल इन्कम नो किड्स से लेकर अब नौबत डबल इन्कम नो सेक्स तक पहुंच चुकी है. सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     जो बची-खुची एनर्जी है, वो सोशल मीडिया पर ज़ाया हो रही है.

–     डिनर के टेबल पर सब अपने मोबाइल फोन्स के साथ बैठते हैं. कहने को साथ खाना खा रहे हैं, पर कनेक्टेड कहीं और ही रहते हैं… बच्चे पिक्चर्स क्लिक करके फ्रेंड्स के साथ शेयर करते हैं और बड़े अपने-अपने क्रश या दोस्तों के साथ.

–     पति-पत्नी बेड पर अपने-अपने फोन्स के साथ ही होते हैं… दोनों को परवाह नहीं कि कौन, किससे बात कर रहा है, न ही इस बात की फ़िक्र है कि आपस में इतनी देर से कोई बातचीत उनके बीच नहीं हो रही.

यह भी पढ़ें:  शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

Relationship Problems

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

नो कमिटमेंट: लोग आकर्षित तो होते हैं, प्यार भी करते हैं, पर कमिटमेंट से डरते हैं. आजकल इतनी जल्दी रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं कि लोग ख़ुद भी यह तय नहीं कर पाते हैं कि इस रिश्ते में उन्हें कब तक रहना है. उन्हें लगता है, जब तक चल रहा है, चलने देते हैं, कोई और मिल गया, तो वहां चले जाएंगे, क्योंकि कौन-सा हमको शादी करनी है. यही वजह है कि रिश्ते नॉन सीरियस होते जा रहे हैं.

कैल्कुलेटिव हो रहे हैं: आजकल रिश्ते ज़रूरी नहीं, बल्कि ज़रूरत के रिश्ते रह गए हैं, जिनसे हमारा स्वार्थ सिद्ध हो, वो उस समय के लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण होते हैं. मतलब निकलने के बाद एक-दूसरे को पहचानते भी नहीं.

प्रैक्टिकल अप्रोच: हम अब प्रैक्टिकल हो गए हैं. हमारे अनुभव भी हमें यही सीख देते हैं कि इमोशनल होना स़िर्फ बेव़कूफ़ी है. बेहतर है, जितना प्रैक्टिकल रहें, उतना फ़ायदा होगा. शहरों में वर्क लाइफ के बाद स़िर्फ वीकेंड में अपने लिए समय मिलता है. उसमें हम अपनों के साथ समय बिताने की बजाय उन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, जिनसे हमें कोई न कोई फ़ायदा हो.

स्पेस के नाम पर बढ़ती दूरियां: ‘स्पेस…’ आजकल यह शब्द काफ़ी घर कर गया है हमारे रिश्तों में भी. हर किसी को स्पेस चाहिए यानी रिश्ते में बंधने के बाद भी कोई बंधन न हो. यह अजीब सोच है, क्योंकि प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे से कुछ छिपाने की ज़रूरत ही नहीं होनी चाहिए. जब सब कुछ साझा है, तो छिपाना क्या है और क्यों है? पर अक्सर कपल्स को कहते सुना है कि हमें स्पेस चाहिए, वरना रिश्ते में दम घुटने लगता है. हां, यह सही है कि कोई सिर पर सवार न रहे हमेशा, न ही हर बात पर टोके, पर स्पेस के नाम पर हर बात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता.

सेक्स, आज नहीं: काम का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि सेक्स के लिए एनर्जी ही नहीं बचती. यहां तक कि अब तो सेक्स की इच्छा भी नहीं होती. ऑफिस में अधिकतर समय गुज़ारने के चलते कलीग्स से इतनी नज़दीकियां बढ़ जाती हैं कि पार्टनर से ज़्यादा आकर्षण उनमें नज़र आने लगता है. ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे से दूरी बनाने लगते हैं. सेक्स के लिए कोई एक क़रीब आना भी चाहे, तो दूसरा बहाना बना देता है कि आज नहीं, बहुत थकान है या सुबह जल्दी उठना है… आदि.

डिजिटल रिश्ते रियल रिश्तों पर हावी: सोशल साइट्स के रिश्ते अब ज़्यादा भाने लगे हैं. उनमें अजीब-सा आकर्षण होता है. टेक्स्ट मैसेजेस, चैटिंग की लत ऐसी लग जाती है कि रियल रिश्ते बोझ लगने लगते हैं और डिजिटल वर्ल्ड की रंगीन दुनिया हसीन लगने लगती है. लेकिन यह कुछ समय का ही नशा होता है, क्योंकि ये रिश्ते हमें ठगते ज़्यादा हैं और संबल कम देते हैं.

कम्यूनिकेशन की कमी: आसपास होते हुए भी आपस में बातचीत का न तो समय है, न ही इच्छा. अपनी-अपनी दुनिया में सभी व्यस्त हैं. एक-दूसरे के सुख-दुख को जानने-समझने की फुर्सत ही नहीं रह गई. धीरे-धीरे रिश्तों में ख़ामोशी पसर जाती है और न जाने कब

एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं. हर रिश्ते की मज़बूती के लिए बेहद ज़रूरी है आपसी बातचीत यानी कम्यूनिकेशन, पर उसकी कमी के चलते रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं और जब तक एहसास होता है, तब तक देर हो चुकी होती है.

– योगिनी भारद्वाज

यह भी पढ़ें:  मायके की तरह ससुराल में भी अपनाएं लव डोज़ फॉर्मूला (Love Dose Formula For Happy Married Life)

पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship

पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

पुरुषों की ऐसी कई आदतें हैं, जो उनसे जुड़े लोगों को पसंद नहीं आतीं और आगे चलकर यही आदतें झगड़े का कारण भी बनती हैं, ख़ासतौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में. फिर धीरे-धीरे छोटे-छोटे झगड़ों से ही रिश्ते में तनाव आने लगता है और रिश्ते बिगड़ जाते हैं. आइए, संक्षेप में इसके बारे में जानते हैं.

Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship

– पुरुषों में ईगो यानी अहंकार ख़ूब होता है. वे अपने अहंकार के आगे भावनाओं की कद्र बहुत कम करते हैं. उनकी इस आदत से उनकी पार्टनर बहुत दुखी रहती है और बार-बार ऐसा होने पर वह अपने रिश्ते में घुटन महसूस करने लगती है.

– ऐसे कई पुरुष होते हैं, जो अपनी बात पर कायम नहीं रहते. वे आज कुछ कहते हैं और बाद में उनका स्टेटमेंट कुछ और हो जाता है. इससे रिश्तों में दरार पड़ते देर नहीं लगती.

– ऐसे पुरुषों पर महिलाएं कम ही विश्‍वास करती हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कल वह अपनी बात से मुकर जाएंगे.

– यह मानी हुई बात है कि जब रिश्ते में विश्‍वास ही न हो, तो वह टिकेगा कैसे. ऐसे में पत्नियां तो अपने ऐसे पतियों की किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेती हैं और अपनी बातें शेयर करने से भी कतराती हैं.

– क्योंकि पति की बात-बात पर पलट जाने की आदत पत्नी के मन में संशय के बीज बो देती है और रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है.

– ऐसे पुरुषों की भी कमी नहीं है, जो अपने घर-परिवार को बिल्कुल वक़्त नहीं देते. उन्हें लगता है कि पैसे कमाकर घर में दे देना ही बहुत है. जबकि परिवार को उनके साथ समय बिताने की अधिक ज़रूरत होती है. ऑफिस से घर आकर वे मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर पर चिपक जाते हैं, जो सही नहीं है.

– मनोवैज्ञानिक शामा गुप्ता कहती हैं कि पुरुषों का घर को समय न देना, उससे जुड़े सभी रिश्तों को प्रभावित करता है, विशेषतौर पर जीवनसाथी से. तब वह इस बात को लेकर झगड़ती रहती है या अपनी एक अलग दुनिया बना लेती है और ज़्यादा समय बाहर गुज़ारना शुरू कर देती है. इसका परिणाम अक्सर अलगाव के रूप में दिखाई देता है.

यह भी पढ़ें: आख़िर क्यों बनते हैं अमर्यादित रिश्ते?

यह भी पढ़ें: ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स

– पुरुषों की ज़रूरत से ज़्यादा कंट्रोल करने की आदत से भी रिश्तों में दम घुटने की नौबत आ जाती है.

– साथ ही पुरुषों का बेहद ख़्याल रखने की आदत से भी रिश्ते ख़राब होने लगते हैं.

– शामा गुप्ता कहती हैं कि पार्टनर को भी हक़ है कि वह ख़ुद कुछ निर्णय ले सके और तय कर सके कि उसे क्या करना है. पुरुष का प्रोटेक्टिव होना अच्छी बात है, पर वह इतना भी ख़्याल न रखे कि पार्टनर उसके बिना कुछ कर ही न पाए. इस तरह तो उसका वजूद ही डगमगाने लगता है और कई बार विद्रोह की नौबत आ जाती है.

– अधिकतर पुरुषों की वीकेंड पर देर तक सोने और नहीं नहाने की आदत होती है, जिससे पत्नी परेशान हो जाती है. यह क्या बात हुई कि हर चीज़ बेड पर ही चाहिए. बेड पर ही चाय, कॉफी, लंच और डिनर लेते हैं. दिनभर टीवी पर न्यूज़ और क्रिकेट देखते रहते हैं. और यदि आपने उन्हें नहाने के लिए कह दिया, तो समझो आपने उनका वीकेंड ख़राब कर दिया.

– कई पति इतने लापरवाह होते हैं कि वे अपना गीला तौलिया बिस्तर पर, गंदे मोज़े सोफे के नीचे डाल देते हैं. पत्नी अगर उनके बैग से लंच बॉक्स न निकाले, तो वह बाहर निकलेगा ही नहीं. और न जाने क्या-क्या करते हैं. घर को सजाकर रखनेवाली व व्यवस्थित तरी़के से रहनेवाली सफ़ाई पसंद पत्नी को अपने पति की ये आदत बिल्कुल भी पसंद नहीं आती है.

– पार्टनर ग़लती करे, तो उससे माफ़ी मंगवाए बिना न रहनेवाले पुरुष अपनी ग़लती को कभी मानने को तैयार नहीं होते. पुरुषों की यह ग़लती स्वीकार नहीं करने की आदत से भी महिलाओं को बहुत परेशानी होती है.

– कई पुरुषों की आदत होती है कि लड़ाई-झगड़ा होने पर पुरानी बातों को लेकर ताने-उलाहने देने लगते हैं. उनकी कुरेदने की यह आदत रिश्तों में कड़वाहट ला देती है. अतः यह ज़रूरी है कि हर पुरुष उपरोक्त सभी बातों पर ध्यान दें और उनमें उचित सुधार लाएं, जिससे रिश्तों की डोर मज़बूत बनी रहे.

– सुमन वत्स

यह भी पढ़ें: क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार?

हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

Smart Tips to Protect Your Relationship

हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

‘अब रिश्तों में वो पहलेवाली मिठास नहीं रही, सब प्रैक्टिकल हो गए हैं…’ आजकल यह जुमला आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. वैसे तो रिश्ते निभानेवालों पर निर्भर करते हैं, जो बदलती लाइफस्टाइल में भी रिश्तों को निभाने के गुर सीख लेते हैं. लेकिन अगर आपको भी ऐसा ही लगने लगा है कि आपके रिश्ते कमज़ोर होने लगे हैं, तो उन्हें ज़रूरत है सुरक्षा कवच की, जो उन्हें मज़बूती प्रदान करें. तो आइए देखें, क्या हैं वो रिश्तों के सुरक्षा कवच? 

Smart Tips to Protect Your Relationship

 

हेल्दी कम्यूनिकेशन

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि रिश्तों में बातचीत होती रहनी चाहिए. भले ही लड़ाईझगड़ा हो, पर ख़ामोशी नहीं आनी चाहिए, वरना रिश्तों का दम घुटने लगता है. हेल्दी कम्यूनिकेशन आपके रिश्तों को मज़बूत बनाए रखता है.

हमेशा फेस टु फेस यानी आंखों में आंखें डालकर बात करें. इधरउधर देखते हुए अपनी बात कभी न कहें.

रिश्तों को हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो बातचीत की पहल ख़ुद करें.

बातों के साथ बॉडी लैंग्वेज का भी हमेशा ख़्याल रखें.

आपकी बातों और चेहरे की भावभंगिमाओं में तारतम्य होना चाहिए. ऐसा न हो कि आप कुछ कह रहे हैं और आपका चेहरा कुछ और.

बातचीत करते समय अगर सामनेवाला कुछ कह रहा है, तो उसकी बात काटकर अपनी बात कहने की कोशिश न करें. सामनेवाले को पूरा सुनें, फिर बोलें.

हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए बोलने से ज़्यादा सुनना ज़रूरी है, इसलिए शांति से दूसरे की बात सुनें.

जब दो से ज़्यादा लोग बातचीत कर रहे हों, तो नॉन वर्बल सिग्नल्स का भी ख़्याल रखें.

बात करते समय ऊंची या एग्रेसिव आवाज़ में बात न करें, वरना ऐसा लगेगा कि आप सामनेवाले की बात को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.

अक्सर लोग सामनेवाले की बात समझने की बजाय उनसे ख़ुद को समझने की उम्मीद करते हैं. हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए ज़रूरी है कि आप पहले ख़ुद दूसरे को समझें, तभी किसी से उम्मीद करें.

टेक्नोलॉजी का भरपूर फ़ायदा उठाएं. कम्यूनिकेशन के लिए फ्री मैसेजिंग ऐप्स, वीडियो कॉलिंग आदि का इस्तेमाल करें.

याद रहे, अगर 80% कोशिश आप करेंगे, तो 20% पहल वहां से भी होगी. इसलिए हेल्दी रिश्ते के लिए आप क्या कर रहे हैं, इस पर ध्यान दें.

अगर आपने कोई बात ग़लत कह दी हो, तो तुरंत ‘सॉरी’ कह दें. रिश्तों में जितना सहज रहें, उतना अच्छा है.

हेल्दी बाउंड्रीज़

हेल्दी रिश्तों के लिए आज़ादी के साथसाथ हेल्दी बाउंड्रीज़ भी ज़रूरी हैं. रिश्तों की मर्यादा रिश्तों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा कवच का काम करते हैं.

हर रिश्ते में अगर प्राइवेसी का ख़्याल रखा जाए, तो रिश्ते कमज़ोर नहीं होते. एकदूसरे की भावनाओं को समझना ही रिश्ते को मज़बूती प्रदान करता है.

हर रिश्ते की अपनी एक बाउंड्री होती है, जिसे हम पर्सनल स्पेस कहते हैं. घर के हर मेंबर को उसका पर्सनल स्पेस एंजॉय करने का पूरा हक़ है.

रिश्ते कितने ही गहरे क्यों न हों, ठेस लगनेवाली बातें कभी न कहें.

कुछ रिश्तों को हम फॉर ग्रांटेड लेते हैं, पर आप ऐसा न करें. सभी को वही मानसम्मान दें, जिसकी आप ख़ुद के लिए उम्मीद रखते हैं.

रिश्तों में प्यार बढ़ाने के लिए हंसीमज़ाक बहुत ज़रूरी है, पर जानबूझकर मज़ाक उड़ाना आपके रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है.

हेल्दी रिश्तों के लिए थोड़ीबहुत शरारतें और टांगखिंचाई चलती है, पर ध्यान रहे कि उससे कोई आहत न हो जाए.

अपने मायके की बुराई से महिलाएं बहुत जल्दी चिढ़ जाती हैं, इसलिए जानबूझकर वहां की कभी बुराई न करें.

ये भी पढें: रिश्ते से डिलीट करें इन 10 आदतों को

Smart Tips to Protect Your Relationship

हेल्दी रिलेशनशिप बूस्टर्स

किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए क्वालिटी टाइम बहुत मायने रखता है. अपने रिश्ते को हेल्दी बनाए रखने के लिए आपको भी अपनी फैमिली के साथ भरपूर क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए. साथ ही ध्यान रखें कुछ और ज़रूरी बातों का.

एकदूसरे से रियलिस्टक यानी वास्तविक अपेक्षाएं रखें. आपके परिवार की आर्थिक स्थिति आपसे बेहतर कौन जान सकता है, इसलिए पैरेंट्स, पार्टनर या फिर भाईबहन से ऐसी अवास्तविक उम्मीदें न पालें.

रिश्तों की मज़बूती फ्लेक्सिबिलिटी पर भी निर्भर करती है, इसलिए अगर घर का कोई सदस्य कुछ नया बदलाव ला रहा है, तो बेवजह विरोध न करें. पहले मामले को समझें, तभी कुछ कहें.

बेहतर रिश्तों के लिए परिवार में सभी से पॉज़िटिव टच बनाए रखें, बातें करें, साथ में किताब पढ़ें, टीवी देखें, जो करना

है करें, पर अपनेअपने मोबाइल में बिज़ी न रहें.

अगर आपके परिवार में किसी को गाने का शौक़ है, तो कभीकभार साथ में अंताक्षरी खेलें.

महीनेदो महीने में मिलकर कहीं घूमने जाएं. आपके साथसाथ आपके रिश्ते भी रिफ्रेश होंगे.

अगर आपके पार्टनर, भाईबहन या फिर मांपिताजी को किसी चीज़ का शौक़ है या वो किसी की मदद करना चाहते हैं, तो उनकी मदद करें.

हफ़्ते में एक दिन फैमिली कुकिंग टाइम बनाएं, जहां घर का हर सदस्य किचन में मदद करेगा. साथ में काम करने

से एकदूसरे के लिए मन में कड़वाहट नहीं आती.

घर के सभी मेंबर्स मिलकर कोई कॉमेडी शो देखें. इससे घर का माहौल भी हल्काफुल्का रहता है.

रिश्तों में औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ न करें, जो भी करें पूरे दिल से करें, जैसेअगर किसी मामले में बड़ों की राय ले रहे हैं, तो सोचसमझकर उसे अमल में भी लाएं, वरना उन्हें लगेगा कि आपने स़िर्फ औपचारिकता के लिए पूछा था.

ये भी पढें:पति की इन 7 आदतों से जानें कितना प्यार करते हैं वो आपको

हेल्दी लव लैंग्वेजेज़

ये आपके रिश्ते के लिए ऑक्सीजन का काम करते हैं. प्यार और अपनेपन के बिना कोई रिश्ता फलफूल नहीं सकता. यह आपके रिश्ते का एक महत्वपूर्ण कवच है, जो उसे मुरझाने से बचाता है.

परिवार में रोज़ाना एकदूसरे से ये तीन लाइनें कहेंआई लव यू, आई नीड यू, आई रिस्पेक्ट यूये चंद लाइनें आपके रिश्ते में ईगो और निगेटिविटी को हावी नहीं होने देतीं.

चाहे पार्टनर्स हों या फिर दूर रह रहे बच्चे या पैरेंट्स, रोज़ाना 2 मिनट फॉर्मूला अपनाएं. हर रोज़ 2 मिनट फोन पर बात करें और इस दौरान कोई दूसरा काम न करें, बल्कि स़िर्फ उसकी सुनें और अपनी कहें.

थैंक्यू’ और ‘सॉरी’ जैसे मैजिकल शब्द लव लैंग्वेज का हिस्सा हैं. अगर कोई आपके लिए कुछ भी ख़ास करता है, तो उसे थैंक्यू कहने में बिल्कुल कंजूसी न करें.

सरप्राइज़ेस सभी को अच्छे लगते हैं. कभीकभार बिना किसी ओकेज़न के ही एक ख़ूबसूरत गिफ्ट अगर किसी को मिले, तो वो बेशक ख़ुश हो जाएगा.

रिश्ते में सच्चाई और ईमानदारी जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी है केयरिंग. यह लव लैंग्वेज आपके अपनों को आपके प्यार से रूरू कराती है.

एकदूसरे के लिए अपनी भावनाओं का ज़िक्र करें. ऐसा ज़्यादातर पैरेंट्स करते हैं कि बच्चों को भले ही कितना प्यार क्यों न करें, कभी उनसे बताते नहीं. माना प्यार बोलकर जताया नहीं जाता, पर कभीकभी यह सुनना अच्छा लगता है.

जब भी मौक़ा मिले, अपने पैरेंट्स को यह बताने से कभी न चूकें कि उन्होंने आपके लिए बहुत कुछ किया है. आज आपकी ख़ुशहाली का सारा श्रेय उन्हीं को जाता है.

अगर किसी की तबियत ख़राब है, तो उसकी दवा ख़त्म होने से पहले दवा लाकर रखना, कोई खाने का शौक़ीन है, तो उसकी फेवरेट डिश लेकर जाना, संगीत के शौक़ीनों के लिए फेवरेट सिंगर का कलेक्शन देना, जैसी छोटीछोटी बातें आपके रिश्ते को ख़ुशहाल बनाती हैं.

रिश्तों को मज़बूत बनाए रखने के लिए मेंटेनेंस की भी ज़रूरत पड़ती है. अपने प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से रिश्तों को मेंटेन करते रहें.

सुनीता सिंह

ये भी पढें: रिलेशनशिप हेल्पलाइनः कैसे जोड़ें लव कनेक्शन?

न भूलें रिश्तों की मर्यादा (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship)

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

हेल्दी रिश्ते की शुरुआत ही मानसम्मान और मर्यादा से होती है. किसी व्यक्ति का सलीके से किया गया व्यवहार ही हमें उसकी ओर आकर्षित करता है. जब तक रिश्ते (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship) में मानमर्यादा बनी रहती है, तब तक रिश्ते मज़बूत व हेल्दी बने रहते हैं, लेकिन जब हम अपनी हद पार करने लगते हैं, तो रिश्तों में दरार आने लगती है. अगर आपके रिश्ते में आ गई है खटास, तो देखें कि कहीं आपने अपने रिश्तों की मर्यादा तो नहीं लांघी?

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

क्या है रिश्तों की मर्यादा?

सायकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि रिश्तों में बाउंड्रीज़ का मतलब किसी को कंट्रोल करना या बंदिशें लगाना नहीं, बल्कि ख़ुद को व अपने रिश्ते को सुरक्षित रखने के लिए एक दायरा बनाना है. दूसरे शब्दों में कहें, तो हर रिश्ते का मानसम्मान बनाए रखना ही मर्यादा है और अपने आप को मयार्दित रखना ही हर रिश्ते की कामयाबी का मूलमंत्र है.

क्यों ज़रूरी है रिश्तों में मर्यादा?

रिश्तों में बाउंड्रीज़, लक्ष्मणरेखा, मर्यादा या हद जो भी कह लें, रिश्ते की गरिमा को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होती है.

इससे रिश्तों में प्यार व सम्मान बना रहता है.

परिवार के सभी लोग जब अपनीअपनी मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, तो घर में सौहार्द का माहौल बना रहता है.

जब दूसरे आपकी इच्छाओं और पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं, तो आप भी उनकी पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं.

किसी के आत्मसम्मान को चोट नहीं पहुंचती.

कोई बेवजह दूसरों की सोच का शिकार नहीं होता.

रिश्तों में ग़लतफ़हमियां पैदा नहीं होतीं.

यह भी पढ़ें:  क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार?
तीन तरह की होती हैं रिश्तों की बाउंड्रीज़

फिज़िकल बाउंड्री: किसी से बात करते समय एक सेफ डिस्टेंस बनाए रखना ही फिज़िकल बाउंड्री है. कुछ लोग आदतन दूसरों को छूकर बात करते हैं, जो हर किसी को पसंद नहीं आता. ऐसे लोगों से बात करने से लोग कतराते हैं. कपल्स को भी बड़ों के सामने इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उससे बड़े असहज हो जाएं.

अगर कोई आपका बहुत क़रीबी भी है, फिर भी बात करते व़क्त फिज़िकली बहुत ज़्यादा क्लोज़ न जाएं.

हर किसी के साथ एक सेफ डिस्टेंस मेंटेन करें.

अगर आपको भी दूसरों को छूकर बात करने की आदत है, तो उसे सुधार लें.

इमोशनल बाउंड्री: हर रिश्ते का एक इमोशनल लेवल होता है. किसी भी रिश्ते में इतनी मर्यादा रखें कि वो आप पर इमोशनली हावी न हो सके.

अगर किसी की कही कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो इसका मतलब है कि आपने उस व्यक्ति को इमोशनली ख़ुद पर बहुत ज़्यादा हावी कर लिया है.

हर कोई हर किसी के बारे में कुछ न कुछ कहता रहता है, इसलिए आपको उसके बारे में इतना नहीं सोचना चाहिए.

मज़ाक बनाने और गॉसिप के लिए लोग अक्सर उनको टारगेट करते हैं, जो इमोशनली कमज़ोर होते हैं. आपको अपनी इमोशनल बाउंड्री ख़ुद बनानी होगी.

पतिपत्नी को भी एकदूसरे की इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

डिजिटल बाउंड्री: आजकल की डिजिटल लाइफ में डिजिटल बाउंड्री का सम्मान बहुत ज़रूरी हो गया है. अगर आप सोशल मीडिया पर हर बार बिना पूछे किसी को टैग करते हैं, चेक इन में उसे मेंशन करते हैं, तो ध्यान रखें कि आप उसकी डिजिटल बाउंड्री क्रॉस कर रहे हैं.

बिना किसी की मर्ज़ी के उसके मोबाइल में तांकझांक करना, इस मर्यादा को भंग करता है.

घरवाले या रिश्तेदार अपने मोबाइल में क्या रखते हैं, क्या देखते हैं यह जानने के लिए उनका मोबाइल चेक करना ग़लत है.

जो लोग अपनी फोटो डालकर अपने 20 दोस्तों को टैग कर देते हैं या भगवान की फोटो डालकर 50 लोगों को टैग कर देते हैं, डिजिटल बाउंड्री क्रॉस करनेवाले ऐसे दोस्तों को लोग अक्सर ब्लॉक कर देते हैं.

यह भी पढ़ें: अपने दरकते रिश्ते को दें एक लव चांस

पार्टनर्स परखें अपने रिश्ते की मर्यादा

हर रिश्ते की तरह पतिपत्नी के रिश्ते में भी मर्यादा बहुत मायने रखती है. जब पार्टनर्स एकदूसरे को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं या एकदूसरे की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ अपनी इच्छाओं की पूर्ति शुरू कर देते हैं, तब रिश्ते बिखरने लगते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि हर कपल अपने रिश्ते को इस कसौटी पर परखे

क्या आप अपनी बात खुलकर व ईमानदारी के साथ पार्टनर से शेयर कर पाते हैं?

क्या आप एकदूसरे की बात सुनते हैं?

एकदूसरे की भावनाओं को सम्मान देते हैं?

एकदूसरे से प्यार व सम्मान से बात करते हैं?

क्या एकदूसरे को स्पेस देते हैं?

अपने पार्टनर की हॉबीज़, करियर और इच्छाओं का ख़्याल रखते हैं?

जीवन में आगे बढ़ने के लिए एकदूसरे को सपोर्ट करते हैं?

चाहे जो हो जाए, रिश्ते की मर्यादा का ख़्याल रखते हैं?

कुछ भी हो जाए, पार्टनर से अपशब्द या बुरा व्यवहार नहीं करते?

अगर ऊपर दिए गए ज़्यादातर सवालों के जवाब हांहैं, तो आपका रिश्ता हेल्दी है, लेकिन अगर आपका स्कोर कम है, तो आपको अपने रिश्ते की ओर ध्यान देने की ज़रूरत है.

काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं कि ज़रूरी नहीं कि हर बार रिश्तों में दरार या खटास का कारण मर्यादा का भंग होना ही हो, क्योंकि जो आपके लिए मर्यादा है, ज़रूरी नहीं सामनेवाले के लिए भी वही मर्यादा हो. दरअसल, हर किसी के लिए इसके मायने

अलगअलग होते हैं. अलगअलग परिवेश में पलेबढ़े होने के कारण पार्टनर्स के लिए भी इसके मायने अलग होते हैं, लेकिन कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखकर आप भी अपने रिश्ते की एलओसी को बनाए रख सकते हैं.

हैप्पी रिलेशनशिप टिप्स

पतिपत्नी के रिश्ते की मर्यादा की डोर उन दोनों के हाथ में होती है. अगर आप भी मर्यादा की इन लकीरों का पालन करें, तो आपका रिश्ता भी हमेशा मज़बूत बना रहेगा.

हंसीमज़ाक और शरारतें करें, पर दूसरों के सामने अपने पार्टनर का कभी मज़ाक न बनाएं.

मायके में या ससुराल में कभी भी पार्टनर को ताना न मारें.

अगर किसी ने आपसे पार्टनर की शिकायत की है, तो सबके सामने दोषी ठहराने की बजाय अकेले में बात कर सच्चाई जानने की कोशिश करें.

अगर आपको कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो बैठकर बात करें, न कि कठघरे में खड़ा करें.

अगर पार्टनर से उम्मीद करते हैं कि वो अपनी सारी बातें शेयर करे, तो आपको भी उनसे कुछ नहीं छिपाना चाहिए.

पार्टनर अपनी इच्छाएं कभी न थोपें, चाहे वो पहननेओढ़ने या खानेपीने के मामले में ही क्यों न हों.

 रिश्ते में बहुत ज़्यादा जकड़न घुटन का कारण बनने लगती है, इसलिए पार्टनर को पर्याप्त स्पेस भी दें.

जब पतिपत्नी एकदूसरे का सम्मान करते हैं, तो बाकी लोग भी उनके रिश्ते को सम्मान की नज़र से देखते हैं.

किसी भी परिस्थिति में पार्टनर की बात को सुनने का धैर्य रखें. बिना पूरी बात सुने, कभी भी रिएक्ट न करें.

आप दोनों को ही अपनेअपने रिश्ते की मज़बूती के लिए प्यार, विश्‍वास और समर्पण को बनाए रखना होगा.

याद रखें कि प्यार का मतलब बंधन नहीं आज़ादी होता है, इसलिए अपने पार्टनर की प्राइवेसी का हमेशा ख़्याल रखें.

मर्यादा से जुड़ी ये सारी बातें अन्य रिश्तों में भी लागू होती हैं, चाहे वो भाईबहन हो, देवरभाभी, जीजासाली, मांबेटे या पितापुत्री.

अनीता सिंह

यह भी पढ़ें: किस राशिवाले किससे करें विवाह?

हेल्दी रिलेशनशिप के लिए छोड़ें भावनाओं की ‘कंजूसी’ (Express Yourself For A Healthy Relationship)

Healthy Relationship

बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

Healthy Relationship

क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

यह भी पढ़ें: क्या आपके हार्मोंस आपके रिश्ते को प्रभावित कर रहे हैं?

तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

यह भी पढ़ें: ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स

Healthy Relationship

कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: दिल क्यों दिया…

 

हेल्दी रिश्ते के लिए 7 हेल्दी हैबिट्स (7 Healthy Habits For Healthy Relationship)

हेल्दी रिश्ते, हेल्दी हैबिट्स, Healthy Habits, For Healthy Relationship

रिश्ते की अच्छी सेहत के लिए स़िर्फ प्यार, विश्‍वास, समर्पण और अंतरंगता ही काफ़ी नहीं, आपकी कुछ आदतें भी रिश्ते की सेहत सुधारने में कारगर साबित हो सकती हैं. यक़ीन नहीं होता, तो आज़माकर देख लीजिए. हेल्दी रिश्ते के लिए कौन-सी आदतें अपनाना है ज़रूरी? आइए, जानते हैं.

 

हेल्दी रिश्ते, हेल्दी हैबिट्स, Healthy Habits, For Healthy Relationship

आज के दौर में जब शादीशुदा रिश्ते चट मंगनी पट ब्याह वाली कहावत के इतर चट ब्याह पट डिवोर्स की राह पर चल पड़े हैं, ऐसे में रिश्तों की सलामती और मज़बूती के लिए सबसे ज़रूरी है कपल्स का एक साथ समय बिताना, मगर पति-पत्नी दोनों के वर्किंग होने की वजह से अधिकांश कपल्स के पास एक-दूसरे के लिए वीकेंड के अलावा और कभी समय ही नहीं रहता. ये समय की कमी रिश्तों की कड़ी को कमज़ोर बना रही है. ऐसे में ज़रूरी है कि कपल्स थोड़ी स्मार्टनेस दिखाकर एक-दूसरे के साथ ज़्यादा समय बिताने के अन्य विकल्प तलाशें. व़क्त के हिसाब से ख़ुद में थोड़ा बदलाव करके और कुछ आदतों को अपनाकर आप अपने रिश्ते की डोर को कमज़ोर होने से बचा सकते हैं.

ये भी पढें: ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स

1. साथ करें सुबह की सैर

पूरे दिन तो आपको साथ रहने का समय नहीं मिलने वाला, तो क्यों न सुबह की शुरुआत साथ-साथ करें. माना सुबह उठने के बाद आपके पास ढेरों काम रहते हैं, लेकिन आप यदि सुबह थोड़ा जल्दी उठें और पार्टनर के साथ मॉर्निंग वॉक पर जाएं, तो सुबह की ताज़ी हवा में की गई कुछ देर की चहलक़दमी आपको पूरे दिन फ्रेश रखेगी. सुबह की सैर से जहां सेहत दुरुस्त रहेगी, वहीं मूड फ्रेश रहने से आप अपना काम भी मन लगाकर करेंगी और सुबह-सुबह पार्टनर के साथ बिताए ये कुछ पल आप दोनों को एक-दूसरे के क़रीब लाएंगे.

2. साथ खाना बनाने का है अपना मज़ा

वर्किंग कपल्स दिन में तो अपने-अपने काम में व्यस्त रहने के कारण साथ खाना नहीं खा पाते और रात में भी थके होने की वजह से अक्सर होटल में खा लेते हैं या फिर घर पर ही पार्सल मंगवा लेते हैं. आप ऐसी ग़लती न करें, क्योंकि घर का बना खाना न स़िर्फ सेहत, बल्कि आपके रिश्ते के लिए भी हेल्दी होता है. ऑफिस से आने के बाद दोनों पार्टनर यदि साथ मिलकर खाना बनाते हैं, तो इससे न स़िर्फ एक पार्टनर का बोझ हल्का हो जाता है, बल्कि खाने का स्वाद और रिश्ते की सेहत दोनों अच्छी हो जाती है. यक़ीन न हो, तो इस नुस्ख़े को आज़माकर देख लीजिए.

[amazon_link asins=’B01BYEXL2O,B01LZC74N7,B01NBUYZN0′ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’337c3677-b8b1-11e7-a461-cf06b5a2e98d’]
3. मिलकर करें प्लानिंग

बात चाहे हॉलिडे प्लान करने की हो, फायनांशियल प्लानिंग या फिर लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ख़ुद में बदलाव लाने की, अकेले ये सब करने की बजाय इसमें हमसफ़र को भी शामिल करें. साथ मिलकर प्लानिंग करने से पार्टनर को भी अच्छा महसूस होगा कि आप उन्हें अहमियत देेते हैं और आप दोनों ज़्यादा व़क्त साथ बिता पाएंगे. छुट्टियों आदि की प्लानिंग साथ मिलकर करने से दोनों एक-दूसरे को अपने आइडियाज़ बता सकते हैं, जिससे छुट्टियां मज़ेदार बन सकती हैं.

4. न छुपाएं दिल की बात

यदि आप अपने रिश्ते में किसी बात को लेकर बहुत परेशान हैं या आपको किसी चीज़ की कमी महसूस हो रही है, तो बिना किसी झिझक के पार्टनर से इस बारे में बात करें. अपने रिश्ते की भलाई के लिए हमसफ़र से बात करने में कोई बुराई नहीं है. आपकी समस्या जानने के बाद ही तो वो उसे हल करने के बारे में सोचेंगे. यदि आप कहेंगे ही नहीं, तो पार्टनर को पता कैसे चलेगा. हां, एक बात का ध्यान रखें कि बात करने का ये मतलब कतई नहीं है कि आप हमेशा उनसे हर बात के लिए शिकायत करने लगें.

5. बेड पर साथ जाएं 

आपकी पत्नी रात में डिनर के बाद यदि किचन का काम समेटती रहती है और आप बेडरूम में आराम फरमाते हैं, तो अपनी ये आदत बदल लीजिए. यदि आप किचन में उनकी मदद नहीं कर रहे हैं, तो भी सोने की बजाय अपना कुछ और काम कर लीजिए और पत्नी का काम ख़त्म होने पर साथ ही बिस्तर पर जाएं. ऐसा करने पर उन्हें भी अच्छा लगेगा और आपके रिश्ते की ताज़गी भी बनी रहेगी.

 

 6. कमरे को रखें साफ़-सुथरा

क्या कभी आपने महसूस किया है कि किसी गंदी जगह जाने पर आपको बुरा महसूस होता है और ख़ूबसूरत, साफ़-सुथरी जगह/घर में आने पर आपको सुकून और ख़ुशी का अनुभव होता है. दरअसल, गंदा और अस्त-व्यस्त कमरा न स़िर्फ स्ट्रेस बढ़ाता है, बल्कि इससे निगेटिव एनर्जी निकलती है, जो सेहत और रिश्ते दोनों के लिए अच्छी नहीं है. इसके विपरीत यदि कमरा साफ़-सुथरा व व्यवस्थित है, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आपको मानसिक शांति मिलेगी. ज़ाहिर है, जब आप रिलैक्स और अच्छा महसूस करेंगे, तो पार्टनर के साथ रिश्ता भी बेहतर बनेगा.

 

7. मैं सही हूं, तुम ग़लत

अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वो किसी भी क़ीमत पर झुकने को तैयार नहीं होते. कई बार ख़ुद को सही साबित करने के लिए वो पार्टनर की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से भी पीछे नहीं हटते, मगर वो ये भूल जाते हैं कि भले ही बहस करके पार्टनर से जीत जाएं और ख़ुद को सही साबित कर दें, लेकिन असल में तो ये उनकी हार ही है, क्योंकि उन्होंने हमसफ़र का दिल तोड़ा. अतः बेहतर होगा कि कुछ चीज़ों को यूं ही छोड़ दिया जाए, बजाय उन्हें लेकर सही/ग़लत पर बहस करने के, क्योंकि रिश्ते में सही और ग़लत देखने की बजाय भावनाएं ज़्यादा अहमियत रखती हैं.

फैक्ट फाइल

– शिकागो यूनिवर्सिटी द्वारा किए एक अध्ययन के मुताबिक़, यदि एक पार्टनर बहुत ज़्यादा सकारात्मक है, तो ऐसे कपल्स के बीच टकराव अन्य कपल्स की अपेक्षा बहुत कम होता है.

– एक अन्य अध्ययन के अनुसार, ज़्यादातर कपल्स के बीच मनमुटाव व झगड़े की सबसे बड़ी वजह पैसा और संवादहीनता होती है.

– कई सर्वे में ये बात साबित हुई है कि जो कपल्स शादी के रिश्ते के साथ ही अपने दोस्तों के साथ रिश्ता निभाते हैं और अपनी हॉबी के लिए समय निकालते हैं, वो उन कपल्स से ज़्यादा ख़ुश रहते हैं जिनकी लाइफ स़िर्फ पार्टनर के इर्द-गिर्द ही घूमती है.

– अध्ययन बताते हैं कि अपनी ज़िंदगी में नई चीज़ें ट्राई करने वाले कपल्स दूसरे कपल्स से ज़्यादा ख़ुश रहते हैं.

ये भी पढें: बेहतर रिश्ते के लिए पति-पत्नी जानें एक-दूसरे के ये 5 हेल्थ फैक्ट्स

कब और क्यों लें रिश्तों से डिजिटल ब्रेक? (How To Know When To Take A Digital Break In Your Relationship?)

Digital Break In Your Relationship

यह सच है कि दुनिया डिजिटल (Digital Break In Your Relationship) होती जा रही है. डिजिटल होना अब न स़िर्फ हमारे शौक़ तक जुड़ा रह गया है, बल्कि हमारी ज़रूरत बन चुका है. ऐसे में हम पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो चुके हैं. लेकिन कहीं न कहीं इन सबसे हमारे रिश्ते ज़रूर प्रभावित हो रहे हैं. चाहे समय की कमी हो या रिश्तों में पसर रहा ठंडापन- डिजिटल वर्ल्ड की परिधि ने हमें इस कदर घेर लिया है कि हम चाहकर भी उससे बाहर नहीं आ पा रहे. क्या करें, कैसे करें और कब करें… ताकि हमारे रिश्ते बने रहें और रिश्तों में ख़ुशियां भी कायम रहें.

 

Digital Break In Your Relationship

कब लें डिजिटल ब्रेक? (Digital Break In Your Relationship)

– हर व़क्त अपने मोबाइल से चिपके रहना आजकल हम सभी की आदत बन चुकी है, लेकिन इसका असर हमारे रिश्तों पर बहुत अधिक पड़ता है. ऐसे में जब आपके अपने बार-बार इस बात की शिकायत करने लगें, तब समझ जाएं कि आपको डिजिटल ब्रेक की ज़रूरत है.
– जब आपको कुछ हेल्थ सिग्नल्स मिलने लगें, जैसे- सिरदर्द, मसल्स में ऐंठन, मितली, धुंधलापन, चिड़चिड़ापन, आलस, एसिडिटी या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं.
– जब आप जाने-अनजाने हर कुछ सेकंड्स में अपना फोन बार-बार चेक करने के आदी हो चुके हों.
– जब आप घर पर आने के बाद भी अपने फोन या लैपटॉप से ही चिपके रहते हों.
– जब आप परिवार के साथ डिनर पर भी अपने फोन पर अपडेट्स करते रहते हों.
– जब आप शारीरिक रूप से तो सबके साथ बैठे हों, पर मानसिक तौर पर अपनी ही डिजिटल दुनिया में हों.
– जब आपस में बोलचाल व हंसी-मज़ाक कम हो रहा हो.

ये भी पढें: रिश्तों में रोमांस बढ़ाने के लिए ट्राई करें ये फन एक्टिविटीज़

– जब आप बाहरी लोगों के कुछ ज़्यादा ही नज़दीक हो रहे हों.
– जब आपको अपने ही परिवारवालों की दिनचर्या व समस्याएं पता ही न हों और डिजिटल दुनिया के दोस्तों की हरेक बात पर आप कमेंट करने में बिज़ी रहते हों.
– ये तमाम लक्षण बताते हैं कि आपको अगर अपनी सेहत व अपने रिश्ते बचाने हैं, तो अब डिजिटल ब्रेक की ज़रूरत है.

 

Digital Break In Your Relationship

क्यों लें ब्रेक?

– अपने रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए.
– अपने रिश्तों में आए ठंडेपन को दूर करने के लिए.
– अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए, क्योंकि बहुत अधिक डिजिटल वर्ल्ड में बिज़ी रहना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. इससे कई समस्याएं हो सकती हैं.
– अपनों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए, क्योंकि अक्सर आजकल हर कोई यही कहता है कि समय नहीं है, लेकिन ग़ौर किया जाए, तो समय का रोना हम स़िर्फ अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए ही रोते हैं.
– बेहतर होगा कि अपने समय को आप ख़ुद संतुलित करें और अपनी डिजिटल व पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखें.
– छुट्टी के दिन फोन व लैपटॉप से ब्रेक लें. फैमिली के साथ बाहर जाएं, चाहे शॉपिंग हो, पिकनिक हो या मूवी… फिर देखें कि आप कितना रिफ्रेश महसूस करते हैं.
– एक सामान्य ज़िंदगी जीने के लिए और अपने रिश्तों को भी सामान्य व ख़ुशहाल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि आप डिजिटल ब्रेक लें.

ये भी पढें: फास्ट ट्रैक पर स्लो होती ज़िंदगी

– ख़ुद को परखने के लिए कि कहीं आप इस तकनीकी दुनिया के मायाजाल में बुरी तरह घिर तो नहीं गए? आप कितने आदी हो गए हैं और कहीं आपको लत तो नहीं लग गई इस दुनिया की… यह जानने के लिए भी ज़रूरी है कि आप ब्रेक लेकर देखें और ज़रूरतानुसार ख़ुद को संभाले.
– आप जो करेंगे, आपके बच्चे भी वही करेंगे, तो परिवार व बच्चों में अनुशासन बनाए रखने के लिए भी यह क़दम उठाना ज़रूरी है. आपके बच्चे आपको आदर्श मानते हैं, तो उनके सामने सही, संतुलित व परिपक्व पैरेंट के रूप में ही ख़ुद को प्रस्तुत करना होगा, ताकि वे भी आगे चलकर बेहतर भविष्य बना सकें.
– अगर आपको कहीं भी यह महसूस हो रहा है कि डिजिटल दुनिया के कुछ रिश्ते आपकी निजी ज़िंदगी के रिश्तों पर हावी हो रहे हैं या आपको भटका रहे हैं, तो सावधान व सतर्क हो जाएं और ख़ुद को वहां से अलग कर लें.
– इस तरह के रिश्ते आपको बड़ी मुसीबत में भी फंसा सकते हैं, आजकल तो इस तरह की कई ख़बरें भी आम हो गई हैं, चाहे देश से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियां हों या फिर व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित नाजायज़ चीज़ें- आप कब इन सबके बीच फंसते चले जाते हैं, शायद आपको ख़ुद भी अंदाज़ा नहीं हो पाता. इसलिए बेहतर होगा कि अपने दिलो-दिमाग़ पर काबू रखें और जो भी करें, सोच-समझकर करें.
– अपनी निजी बातें या तस्वीरें किसी अंजान के साथ शेयर करने से बचें.
– अपने प्रोफेशनल व पर्सनल सीक्रेट्स किसी को न बताएं.
– कुल मिलाकर सतर्क रहें और पूरी तरह से डिजिटल वर्ल्ड पर निर्भर न रहें. उसके बाहर भी आपकी एक दुनिया है, रिश्ते हैं, जो बेहद ख़ूबसूरत हैं.

– योगिनी भारद्वाज

सेविंग्स स़िर्फ पैसों की ही नहीं, रिश्तों की भी करें (Save Not only Money but Relationship Too)

Save Not only Money but Relationship

अक्सर हम शुरुआत से ही ज़िंदगी में बचत को काफ़ी अहमियत देते आए हैं. हमें बचपन में भी बचत के कई फ़ायदों के बारे में बताया व समझाया जाता है… इन सबमें भी पैसों की बचत का ख़ास महत्व है. पैसे बचाने ज़रूरी होते हैं, क्योंकि बुरे व़क्त में जब कोई काम नहीं आता, तब ये पैसे ही हमारे काम आते हैं… वगैरह… वगैरह!

Save Not only Money but Relationship

वैसे पैसे बचाना कोई बुरी बात भी नहीं है, आज के दौर में जहां पैसों का इतना महत्व है, तो यह और भी ज़रूरी हो जाता है, लेकिन कहीं न कहीं इस चक्कर में हम अपने रिश्तों को भूलते चले जाते हैं. पैसे तो बचा लिए, लेकिन क्या रिश्ते बचाए? क्या उन्हें बचाने के इतने प्रयास किए, जितने पैसे बचाने के लिए किए? क्या रिश्तों को उतनी अहमियत दी, जितनी पैसों को दी…?
जवाब यही होता है कि नहीं, लेकिन बेहतर यही होगा कि व़क्त रहते हम संभल जाएं और पैसों के साथ-साथ अपने रिश्तों को भी बचाएं.

 

क्यों ज़रूरी है रिश्ते बचाना?

– जिस तरह से आड़े व़क्त में हमें लगता है कि पैसे ही काम आएंगे, उसी तरह बुरे व़क्त में पैसों से भी कहीं ज़्यादा हमारे रिश्ते काम आते हैं.
– वो हमें आर्थिक मदद के साथ-साथ मानसिक संबल भी देते हैं.
– हमें सहारा देते हैं.
– भावनात्मक रूप से हमें मज़बूत बनाते हैं.
– जो ख़ुशियां पैसों से नहीं मिलतीं, वो हमें रिश्तों से मिलती हैं.
-अपनों के साथ व़क्त बिताना, हंसना-खेलना हमें हेल्दी और ख़ुश रखता है.
– आपसी प्यार व सामंजस्य से ज़िंदगी आसान हो जाती है और हर संघर्ष का सामना हम बेहतर तरी़के से कर पाते हैं.
– फैमिली में ख़ुशियां व ग़म बांटने से आप डिप्रेशन का शिकार नहीं होते और अगर होते भी हैं, तो उससे बाहर आसानी से निकल आते हैं.

Save Not only Money but Relationship

कैसे करें रिश्तों की बचत?

– अपनों को व़क्त दें, आपका समय वो काम कर सकता है, जो महंगे से महंगा तोहफ़ा भी नहीं कर पाएगा.
– उन्हें यह महसूस कराएं कि आपको उनकी कद्र भी है और ज़रूरत भी.
– उनकी अहमियत आपकी ज़िंदगी में कितनी है, यह उन्हें हर पल महसूस होना चाहिए.
– चाहे कितने भी बिज़ी क्यों न हों, उन्हें फोन करके हालचाल पूछें, जो लोग दूर रहते हैं, उनसे मिलने ज़रूर जाएं.

ये भी पढें: रिश्तों में अपेक्षाओं का घटता-बढ़ता दायरा

– साथ में घूमने जाएं, छुट्टियां प्लान करें.
– कभी भी रिश्तों के बीच पैसों को न आने दें. इसके लिए आपको कुछ प्लानिंग करनी होगी.
– चाहे पैरेंट्स हों, भाई-बहन हों या फिर पार्टनर आपको पैसों के मामले में कुछ निर्णय लेने होंगे, ताकि वो आपके रिश्तों के बीच न आए.
– सब लोग मिलकर अपना बजट प्लान करें और किन-किन फ़िज़ूलख़र्ची से बचा जा सकता है, इसकी भी लिस्ट बनाएं.
– अपने-अपने बैंक अकाउंट्स पर ध्यान दें. पार्टनर्स को चाहिए कि वो एक जॉइंट अकाउंट भी रखें और अपना सेपरेट अकाउंट भी रखें.
– जॉइंट अकाउंट में जो भी लेन-देन हो, उसे बांट लें और ध्यान रहे कि आपस में एक-दूसरे को ज़रूर इंफॉर्म करें, वरना ये ज़रा-सी बात झगड़े की वजह बन सकती है.
– अपने रिश्तों की बचत में आपसी बातचीत भी महत्वपूर्ण पहलू है. बिना कम्यूनिकेशन के हेल्दी रिलेशन संभव नहीं.
– कई बार स़िर्फ कम्यूनिकेशन गैप की वजह से ही बिना कारण ही रिश्तों में दूरियां पैदा होने लगती हैं, तो आप इस बात का ध्यान रखें कि अपने किसी भी रिश्ते में कम्यूनिकेशन की कमी को दरार की वजह न बनने दें.
– पर्सनल स्पेस ज़रूर दें. ऐसा न हो कि रिश्तों में आपको घुटन महसूस होने लगे. जिस तरह आप पैसों की सेविंग्स के लिए बजट बनाते हैं, उसी तरह से रिश्तों की सेविंग्स के लिए भी कुछ रूल्स बनाएं.
– कुछ पैसे आप स़िर्फ अपने शौक़ पूरा करने के लिए यूं ही ख़र्च कर देते हैं, तो उसी तरह से अपने रिश्तों को भी कहीं न कहीं खुला छोड़ें, सामनेवाले को उसकी मर्ज़ी से भी कुछ चीज़ें करने दें, ताकि वो घुटन महसूस न करे.
– सेल का हमेशा आप इंतज़ार करते हैं, जहां कुछ चीज़ों में आपको छूट मिलती है, इसी तरह से रिश्तों में भी कभी न कभी कुछ नियम तोड़कर कुछ चीज़ों की छूट दें एक-दूसरे को, जैसे- आज की शाम तुम अपने फ्रेंड्स के साथ स्पेंड करो, चाहे मूवी देखो या पार्टी करो… या फिर आज का दिन तुम अपनी पसंद की डिशेज़ बनाओ या आज खाना घर पर न बनाकर बाहर से मंगाओ, वो भी अपनी पसंद का… ये छोटी-छोटी छूट रिश्तों में बड़ी बचत करती हैं.
– केयरिंग और शेयरिंग की आदत कभी न छोड़ें, क्योंकि अक्सर हम यह महसूस करते हैं कि एक समय के बाद हम रिश्तों को कैज़ुअली लेने लगते हैं और भले ही हम मन ही मन अपनों की फ़िक्र करें, लेकिन उसे दर्शाना ज़रूरी नहीं समझते. हमें लगता है कि सामनेवाले को तो पता ही है कि हमें उनकी फ़िक्र है, लेकिन यह ध्यान में रखें कि कभी-कभी प्यार दिखाना और ज़ाहिर करना भी ज़रूरी हो जाता है.
– रोज़ नहीं, लेकिन बीच-बीच में ऐसा कुछ ज़रूर करें कि आपके अपनों को लगे कि आपको उनकी कितनी परवाह है और आप उनसे कितना प्यार करते हो.
– इस तरह रिश्तों की बचत करते आप बहुत कुछ कमा सकते हैं.

ये भी पढें: पति-पत्नी की खट्टी-मीठी शिकायतें

– विजयलक्ष्मी

हैप्पी लाइफ के लिए दबाएं ज़िंदगी का रिफ्रेश बटन(25 Easy Ways to Refresh Your Life)

Easy Ways to Refresh Your Life

अगर आप भी हर रोज़ ही ज़िंदगी से नाख़ुश रहने लगे हैं, तो यही समय है अपनी ज़िंदगी से स्ट्रेस और निगेटिविटी को डिलीट करें और ख़ुशहाल ज़िंदगी का रिफ्रेश (Easy Ways to Refresh Your Life) बटन दबाएं.

Easy Ways to Refresh Your Life

छोटे-छोटे रिफ्रेशिंग बटन्स

– बचपन में जिन चीज़ों से आपको ख़ुशी मिलती थी, कभी-कभार उन चीज़ों को दोबारा करें, जैसे- झूला झूलना, फनी वीडियोज़ देखना, पेंटिंग करना आदि.
– टीनएज के दौरान जो फेवरेट गाने या वीडियोज़ थे, उन्हें सुनें या देखें.
– स्कूल या कॉलेज के व़क्त का फोटो अलबम निकालकर देखें. पुरानी यादें ताज़ा होने से चेहरे पर मुस्कुराहट अपने आप आ जाती है.
– सुबह या शाम जब भी व़क्त मिले, थोड़ी देर टहलें. टहलने से न स़िर्फ तनाव दूर होता है, बल्कि सेहत भी दुरुस्त रहती है.
– आप जिस इलाके में रहते हैं, कभी यूं ही उसे देखने निकल जाएं, देखें तो आख़िर वहां क्या-क्या है? ऐसा करने से न सिर्फ़ आपका रूटीन बदलेगा, बल्कि आपकी लाइफ में फ्रेशनेस भी आएगी.
– मूड बदलने के लिए म्यूज़िक से बेहतर भला क्या हो सकता है. अपने मनपसंद गाने सुनें और अपने फेवरेट सिंगर का कलेक्शन अपने फोन में रखें.
– अगर आपको डांस करना पसंद है, तो यह बहुत अच्छा तरीक़ा हो सकता है, लाइफ में फ्रेशनेश लाने का. जब भी, जहां भी मौक़ा मिले, मेक योर मूव्स.
– आपको जो भी पसंद हो, चाय, कॉफी या जूस कप में लेकर सोफे पर बैठ जाएं. घूंट-घूंट पीकर उसके स्वाद का आनंद लें. अक्सर हम जल्दबाज़ी में खाते-पीते हैं, जिससे छोटी-छोटी ख़ुशियों को एंजॉय नहीं कर पाते. यक़ीन मानिए, आपको बहुत अच्छा फील होगा.
– लाइफ को रिफ्रेश करने के लिए योग एक बहुत अच्छा ऑप्शन है. योग व मेडिटेशन आपके मस्तिष्क को शांत रखेगा, जिससे आप अच्छा महसूस करेंगे. अगर रोज़ाना मुमकिन न हो, तो हफ़्ते में तीन दिन ज़रूर ट्राई करें. योग हमेशा एक्सपर्ट्स की देखरेख में करना चाहिए, इसलिए ख़ुद से कोशिश करने की बजाय योगा क्लासेस जॉइन करें.
– रोज़ाना की बोरिंग लाइफ के रूटीन को तोड़ने के लिए कमरे में सेंटेड कैंडल जलाएं और जो जी चाहे, वो करें. आप चाहें, तो किताब पढ़ सकते हैं या तो गाने सुन सकते हैं या फिर अपनी फेवरेट मूवी दोबारा देख सकते हैं. ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी लाइफ को रिफ्रेश कर देंगे.
– रोज़ाना हमारी ज़िंदगी में कुछ न कुछ ख़ास होता है, पर ग़ुस्से और चिड़चिड़ेपन के कारण हम उसे अनदेखा कर देते हैं. रात को सोने से पहले दो मिनट का समय निकालकर वो तीन बातें लिखें, जिसके लिए आप शुक्रगुज़ार हैं. ऐसा करने से आपको दिन के सफल होने का एहसास होगा और आप सुकून से सो पाएंगे और अगली सुबह ख़ुशी महसूस होगी.

ये भी पढें: सफल शादी के 25+ Amazing बेनीफिट्स

– ज़िंदगी का रिफ्रेश बटन दबाने के लिए छुट्टी का दिन सबसे बेस्ट है. उस दिन ख़ुद को सुबह देर तक सोने की आज़ादी दें. हफ़्तेभर की थकान मिटाने का यह सबसे अच्छा तरीक़ा है. एक बार आपकी थकान दूर हो गई, तो आप ख़ुद हल्का और ख़ुश महसूस करेंगे.
– अगर आपको पौधों का शौक़ है, तो कोई ख़बसूरत-सा पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें. अगर बालकनी या गार्डन नहीं है, तो कोई इंडोर प्लांट लगाएं. बढ़ता हुआ पौधा आपकी लाइफ में रोज़ाना रिफ्रेशमेंट भरेगा.
– रोज़मर्रा के रूटीन को तोड़ने के लिए बाहर से अपनी फेवरेट डिश मंगवाएं या बाहर डिनर पर जाएं.
– अगर कुछ अलग करना चाहते हैं, तो अपनी मां की फेवरेट रेसिपी बनाकर मां को खिलाएं. उनके चेहरे की चमक आपकी लाइफ में ताज़गी भर देगी.
– कहते हैं, किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. अगर लाइफ बोरिंग हो गई है, तो कोई कहानी या प्रेरणादायी किताबें मंगाकर पढ़ें, इससे आपकी सोच बदलेगी और ज़िंदगी की तरफ़ देखने का नज़रिया बदलेगा.
– अपनी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के लिए सरप्राइज़ प्लान करें. अचानक उनके ऑफिस पहुंचकर डिनर पर ले जाएं या घर पर बुके या कोई गिफ्ट भेजकर उसे ख़ुश कर दें.
– किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार से फोन पर बात करें, जिससे आपने कई महीनों से बात न की हो. हो सकता है आपका यह फोन कॉल आपकी लाइफ को इंट्रेस्टिंग बना दे.

कुछ नया ट्राई करें

– कुछ दिनों की छुट्टी पर घूमने चले जाएं. कोई ऐसी जगह चुनें, जहां आप कभी नहीं गए. और ऐसी जगह पर अकेले जाएं, ताकि नई जगह पर नए-नए लोगों से मिल सकें. नए दोस्त हमारी ज़िंदगी में अक्सर बदलाव लाते हैं.
– कोई नई हॉबी ट्राई करें. बचपन से आपके दिल में कोई न कोई ऐसी हॉबी होगी, जिसे आप सीखना चाहते थे, तो उसे अभी करें.
– अगर अपनी जॉब से आप बोर हो चुके हैं या कई सालों से एक ही जगह काम करने के कारण ऊब गए हैं, तो तुरंत नई जॉब ढूंढ़कर वहां से निकल जाएं.
– किसी एनजीओ से जुड़कर उनके लिए कुछ काम करें. अपने फ्री टाइम में दूसरों की मदद करने से भी आपकी ज़िंदगी में फ्रेशनेस आएगी. किसी की मदद करनेवाली फीलिंग्स इंसान को हमेशा ख़ुश और उत्साहित रखती हैं.
– अपने घर के इंटीरियर को चेंज करें. घर में छोटे-मोटे बदलाव करने से भी लाइफ में बड़े बदलाव आते हैं. माहौल बदलेगा, तो आपका मूड अपने आप बदलेगा.
– कुकिंग का शौक़ है, तो कोई रेसिपी सीखें और घरवालों को खिलाकर वाहवाही लूटें.
– एक बात याद रखें, जितना हो सकता है, उतना ही काम करें, चाहे घर हो या ऑफिस. जिन कामों के कारण आपको बेवजह का तनाव हो रहा है, उन्हें किसी और को करने के लिए दे दें.
– सकारात्मक सोच की शक्ति बढ़ाएं. नुक़सान होने पर घबराएं नहीं, बल्कि सोचें कि जो हो रहा है, उसके पीछे ज़रूर कुछ अच्छाई छिपी है.

ये भी पढें: 40 Secrets शादी को सक्सेसफुल बनाने के 

– अनीता सिंह