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क्या आपको याद है आपने अपने अपनों के लिए आख़िरी बार कब और क्या स्पेशल किया था? क्या आपको याद है कि कब आपने उन्हें इत्मीनान से बैठकर बात की थी? कब उनकी तारीफ़ की थी, कब उन्हें थैंक्यू कहा था और कब केयरिंग और प्यारभरे मीठे शब्द कहे थे? नहीं याद आ रहा न… याद आएगा भी कैसे, क्योंकि आप तो यह समझकर बैठे हैं कि सब कुछ तो ठीक ही चल रहा है, तो कुछ ख़ास क्या करना और इसकी ज़रूरत भी क्या है… आप यह भी सोचते होंगे कि जब सामनेवाला कुछ कहना ही नहीं, उसे शिकायत ही नहीं, तो सब ख़ुश ही होंगे या फिर यह भी हो सकता है कि आप अपने रिश्तों के बारे में अब सोचते ही नहीं, क्योंकि आपको न तो ये ज़रूरी लगता और न ही आपको होश है इस बात का… जब आपकी सोच और ज़िंदगी इस मुकाम पर आ जाए, तो समझ जाएं कि आप कुछ खो रहे हैं… आप अपने रिश्तों को लेकर बेहद कैज़ुअल हो रहे हैं… और अगर ऐसा ही चलता रहा, तो एक दिन रिश्ते भी कैज़ुअल होकर दम तोड़ देंगे और आप रिश्तों में होकर भी ख़ुद को तन्हा ही पाएंगे. 
बेहतर होगा अपने रिश्तों को लेकर यह लापरवाही भरा रवैया समय रहते ठीक कर लें, वरना बाद में बहुत देर हो जाएगी… 

Relationship Repair


– अक्सर ऐसा होता है कि शुरू-शुरू में रिश्तों में गर्माहट रहती है, सब कुछ नया लगता है और हम एक्स्ट्रा एफर्ट लेते हैं अपने पार्टनर को ख़ुश करने के लिए, लेकिन समय के साथ-साथ ये सब कम होता जाता है और ज़िम्मेदारियों में या ज़िंदगी की भागदौड़ में हम अपने रिश्तों को भी बेपरवाही व लापरवाही से लेने लगते हैं. 
– हमें लगता है कि सब तो ठीक ही है और इसी के चलते हम आपस में क्वालिटी टाइम तक बिताने का मौका नहीं ढूंढ़ते. 
– ख़ास मौकों पर भी हम ठंडे ही रहते हैं और इसी के चलते हमारे रिश्तों में भी ठंडापन पसरने लगता है. आपको अंदाज़ा भी नहीं हो पाता कि कब आपका वो रिश्ता असंतुलित हो गया, जिसे आप अब तक परफेक्ट समझ रहे थे. 
– अगर हम बेवजह ग़ुस्सा हो जाते हैं, तो अगले दिन सॉरी कहने की भी ज़रूरत नहीं समझते, क्योंकि हमें लगता है कि छोटी-सी ही तो घटना थी, सॉरी कहने की क्या ज़रूरत. 
– आप अपने रिश्ते के प्रति इतने लापरवाह न हो जाएं कि एक-दूसरे की तरफ़ ध्यान ही न दें और धीरे-धीरे रिश्ते में से रोमांस ही गायब हो जाए.
– आजकल हम स्पेस भी चाहते हैं रिश्तों में, लेकिन स्पेस का मतलब रिश्ते के प्रति बेपरवाह हो जाना नहीं होता. 
– आसपास होते हुए भी अगर हम आपस में बातचीत ही न करें, तो वो स्पेस नहीं, बेपरवाही है. या तो आपकी इच्छा ही नहीं होती अब आपस में शेयरिंग की, हालचाल जानने की, तबीयत या किसी तकलीफ़ पर बात करने की, क्योंकि आप सभी अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त हैं. एक-दूसरे के सुख-दुख को जानने-समझने की ़फुर्सत ही नहीं रह गई. धीरे-धीरे रिश्तों में ख़ामोशी पसर जाती है और न जाने कब एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं. 
– हमारे इसी कैज़ुअल रवैये के चलते हमें पता भी नहीं चलता और हमारे बीच कम्यूनिकेशन गैप हमारे इस हद तक बढ़ जाता है कि यदि आगे चलकर हम कुछ सवाल करते भी हैं, तो सामनेवाले को वो दख़लअंदाज़ी लगने लगता है, क्योंकि उसको आदत ही नहीं इसकी. 
– एक और वजह है कि हम अपने रिश्तों के प्रति लापरवाह हो रहे हैं, वो यह कि अब सोशल साइट्स के रिश्ते ज़्यादा भाने लगे हैं. डिजिटल वर्ल्ड की 
रंगीन दुनिया हसीन लगने लगती है. डिनर टेबल पर सब अपने मोबाइल फोन्स के साथ बैठते हैं. कहने को साथ खाना खा रहे हैं, पर कनेक्टेड कहीं और ही रहते हैं… लेकिन ध्यान रहे कि ये रिश्ते हमें ठगते ज़्यादा हैं और संबल कम देते हैं. उनके आकर्षण इतना न खो जाएं कि रियल रिश्ते बोझ लगने लगें या आप उनके प्रति बेपरवाह होने लगें. 
– आप अगर यह समझते हैं कि हमारे बीच प्यार है, तो उसके इज़हार की ज़रूरत ही क्या है या फिर इतना अरसा हमने साथ गुज़ार लिया तो अब फॉर्मैलिटी क्यों करना, लेकिन यह सोच ग़लत है, प्यार जताना फॉर्मैलिटी नहीं है. प्यार है, तो उसका इज़हार भी ज़रूरी है. 
– अगर आप अपनों के लिए कुछ ख़ास नहीं करते या उनकी दिनचर्या व रोज़मर्रा की बातों में दिलचस्पी ही नहीं लेते, तो उन्हें यही लगेगा आपको तो उनकी किसी भी बात से कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ता और दूसरी तरफ़ यह भी हो सकता है कि वो ग़लत राह पर भी चले जाएं, क्योंकि उन्हें यही लगने लगता है कि अब आपको कोई दिलचस्पी नहीं इस रिश्ते में तो भला वो ही क्यों वन वे ट्रैफिक चलाएं.
– क्या कभी समय से पहले घर आकर स़िर्फ अपनों के साथ बातें करने और उनका हालचाल जानने के लिए व़क्त निकाला है? शरीर से तो साथ रहते हैं, लेकिन मन दूर होते चले जाते हैं. 
– कहीं ऐसा तो नहीं कि आप अपने पार्टनर के साथ एक बेड पर तो होते हो, लेकिन आप दोनों ही अपने-अपने फोन में बिज़ी रहते हो. आप दोनों को परवाह नहीं कि कौन, किससे बात कर रहा है, न ही इस बात की फिक्र है कि आपस में इतनी देर से आप दोनों के बीच कोई बातचीत क्यों नहीं हो रही? जब इस तरह का ठंडापन आने लगता है, तो वो आपके कैज़ुअल रवैये का ही नतीजा होता है. इसका सीधा असर आपकी सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है, इसलिए इतने भी बेपरवाह न हो जाएं कि रिश्ते से रोमांस और फिर सेक्स गायब होने लगे. 

Relationship Repair Tips

क्या करें, क्या न करें?
– सबसे पहले अपना कैज़ुअल अप्रोच बदलें, थोड़ा सोचें और अगर आपको लग रहा है कि आपका रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा, तो उसके कारणों पर आपस में बैठकर चर्चा करें और समाधान भी निकालें.
– रिश्ते की गर्मी बनाए रखने के लिए रोमांटिक बातें करें. 
– एक-दूसरे के लिए,  निजी पलों को जीने के लिए व़क्त समय निकालें, डेट्स प्लान करें, क्योंकि ऐसा न हो कि आप दोनों ही अपने-अपने फ्रेंड्स सर्कल के साथ ही पार्टी करते रह जाएं और यह भी याद न रहे कि आख़िरी बार आप दोनों ने साथ में व़क्त कब गुज़ारा था?
– छोटी-छोटी कोशिशें करें, आई लव यू और सॉरी कहें. गिफ्ट्स दें. सरप्राइज़ प्लान करें. 
– टेक्स्ट मैसेज करें, फोन पर रोमांटिक बातें करें. 
– अगर पार्टनर की तबीयत नासाज़ हो, तो ऑफिस से छुट्टी लेकर उनके साथ रहें, डॉक्टर के पास साथ जाएं. उन्हें कुछ बनाकर खिलाएं या बाहर से मंगवाएं. 
– तारीफ़ करें, क्योंकि प्रशंसा सभी को अच्छी लगती है. उनके प्रयास को सराहें और उन्हें एहसास कराएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी क्या और कितनी अहमियत है.
– अब तक जो उन्होंने आप के लिए किया उसके लिए उनसे कहें कि आप क्या महसूस करते हैं, उनके बिना आपका जीवन कितना अधूरा और बेरंग है. 
– उनकी पसंद का भी ख़्याल रखते हुए पहनें-ओढ़ें. 
– कॉम्प्लीमेंट्स दें… ये तमाम छोटे-छोटे प्रयास बड़ा असर दिखाते हैं, लेकिन इन प्रयासों को करने के लिए आपको यह महसूस तो होना ज़रूरी है कि हां, आप अपने रिश्तों को वाकई कैज़ुअली लेने लगे हैं. 
– न स़िर्फ पार्टनर बल्कि हर रिश्ते पर ये नियम लागू होता है, चाहे पैरेंट्स हों, भाई-बहन, दोस्ती या अन्य दोस्त… ज़रूरत से ज़्यादा कैज़ुअल अप्रोच आपके बीच दूरियां ही बढ़ाएगी.


– गोल्डी शर्मा 

कभी कभार गुस्सा आना नॉर्मल बात है, लेकिन अगर गुस्सा आपके पार्टनर का स्वभाव बन जाए तो इसका असर रिश्ते पर भी पड़ने लगता है. ऐसे पार्टनर को हैंडल करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ ख़ास बातों का ख़्याल रखना.

– ये जानने की कोशिश करें कि आपके पार्टनर किस बात से गुस्सा आता है. ज़ाहिर है बिना वजह तो कोई नहीं भड़कता. उन बातों और स्थितियों पर ग़ौर करें और उनका आकलन करें, ताकि आप जान सकें कि उनको कब और क्यों गुस्सा आता है. कोशिश करें कि वैसे हालात बनें ही न, जिनसे आपके पार्टनर को ग़ुस्सा आता है.

– हो सकता है आपकी कुछ आदतें और व्यवहार आपके पार्टनर को पसंद न हों और उससे वो बार बार गुस्सा होते हों. बेशक उन आदतों व व्यवहार को बदलें न, पर कोशिश करें कि पार्टनर के सामने वे काम या बातें न करें, जिनसे उन्हें गुस्सा आता हो.

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– ऐसे लोगों की आदत होती है कि हमेशा दूसरों की कमियां गिनाते रहते हैं. दूसरों पर आरोप लगाना और कॉन्ट्रोवर्सी क्रिएट करना ऐसे लोगों की आदत होती है. बेहतर है कि आप उनकी गैरजरूरी बातों का कोई जवाब ना ही दें.

– उन्हें सुनें, भले ही वो गुस्से में खुद को व्यक्त करें तो भी उनकी बातों को अनदेखा न करें. कई लोग इसी वजह से डिप्रेशन में रहते हैं कि उन्हें सुनने-समझनेवाला कोई नहीं है. अगर आप जब वह गुस्से में हों तो मानसिक स्थिति को समझकर उनकी बात सुन लेंगे, तो हो सकता है कि धीरे धीरे उनका गुस्सा कम हो जाए.

– उनसे बात करें. उनके खराब व्यवहार के बारे में उनसे डिसकस करें. उन्हें बताएं कि उनका इस तरह के व्यवहार से आपको कितनी तकलीफ होती है. इससे उन्हें भी अपने खराब व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी.

– गलती हो तो ग़लती मान लें. इससे भी आपके पार्टनर का गुस्सा कम हो जाएगा. जब भी बात ग़लती की हो, तो अपने ईगो को एक तरफ़ रख दें. इससे बात तुरंत संभल जाएगी.

– जब भी पार्टनर को गुस्सा आए तो रियेक्ट करने या उसे चुप कराने की कोशिश की बजाय उसे थोड़ा टाइम दें, ताकि वो खुद शांत हो सके. बीच में बोलने या रियेक्ट करने से बात और बढ़ेगी ही.

– वह जो भी कहना चाहते हैं, उन्हें वह कहने का मौक़ा दें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें. उनकी ओपिनियन को महत्व दें, तो हो सकता है उन्हें गुस्सा आए ही न.

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– बेवजह के डिस्कशन में ना पड़ें. जब गुस्से में वो किसी तरह का डिस्कशन करना चाहें तो उस डिस्कशन का हिस्सा ही ना बनें. इससे आप उस पूरी स्थिति से अलग हो जाएंगे.

– धैर्य न खोएं. जब पार्टनर गुस्से में हो तो उसे रोकने या टोकने का मतलब होगा उसके ग़ुस्से को और बढ़ाना. बेहतर यही होगा कि अपना धैर्य न खोएं. हो सके तो उसके सामने से हट जाएं या दूसरे कमरे में चले जाएं.



रिश्तों का दूसरा नाम सच्चाई और ईमानदारी है और ऐसे में अगर हम यह कहेंगे कि झूठ बोलने से आपके रिश्ते मज़बूत हो सकते हैं तो आपको लगेगा ग़लत सलाह से रहे हैं, लेकिन यहां हम ऐसे झूठ की बात कर रहे हैं जिनसे किसी का नुक़सान नहीं होगा बल्कि सुनने वालों को ये झूठ बेहद पसंद आएगा. 

  • अगर आपकी पत्नी आपसे पूछती है कि क्या मैं पहले से मोटी हो गई हूं तो भले ही यह सच हो कि उनका वज़न बढ़ा हो पर आप कह सकते हैं कि बिल्कुल नहीं, तुम मोटी नहीं हेल्दी हो और पहले से ज़्यादा ख़ूबसूरत लगती हो.
  • इसी तरह अगर आपकी पत्नी पूछे कि यह रंग मुझपर कैसा लग रहा है तो अगर आप कहेंगे कि अच्छा नहीं लग रहामत पहनो तो उनको चिढ़ होगी, बेहतर होगा आप कहें यह तो खूब फब रहा है लेकिन अगर इसकी जगह ये वालापहनोगी तो और भी हसीन लगोगी.
  • अगर पति ने कुछ बनाकर खिलाने की कोशिश की है और स्वाद उतना अच्छा नहीं बन सका तो भी आप ज़रूर कहेंकि कोशिश तो क़ाबिले तारीफ़ है, अगली बार इसमें थोड़ा सा ये मसाला भी ट्राई करना तो टेस्ट कुछ अलग होगा.
  • अगर आपको पति का फ़ोन पर ज़ोर ज़ोर से बात करना नहीं भाता तो सीधे आवाज़ कम करने या यह कहने के कि कितना ज़ोर से बोलते हो, यह कहें- तुम्हारी धीमी आवाज़ बेहद हस्की और सेक्सी साउंड करती है, फिर देखिए अगली बार से वो खुद ही धीमा बोलेंगे.
  • अगर आपको पति का किसी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं या उनके काम करने का तरीक़ा आपको पसंद नहीं तो यहना कहें कि तुम्हें नहीं आता तो मत करो, बल्कि यह कहें कि तुमने पहले ही इतनी मदद कर दी, तो अब यह काम मुझेकरने दो या कहें कि तुम वो वाला काम कर दो क्योंकि वो तुम मुझसे बेहतर करोगे और मैं यह कर लेती हूं… या आप यह भी कह सकती हैं कि तुम थक गए होगे तो तुम आराम कर लो बाक़ी मैं संभाल लेती हूं.
  • अगर पतिदेव की तोंद निकल गई हो तो उनको ताना ना दें और ना ही उनके किसी दोस्त से उनकी तुलना करें बल्किकहें कि कुछ दिन मैं डायटिंग करने की सोच रही हूं अगर आप भी साथ देंगे तो मुझे मोटिवेशन मिलेगा, इसलिए प्लीज़ मुझे फिट होने में मेरी मदद करो और मैं फिट रहूंगी तो आपको भी तो अच्छा लगेगा ना. 
  • इसी तरह अगर पति को लगे कि पत्नी को डायटिंग की ज़रूरत है तो किसी पड़ोसन का उदाहरण देने से बेहतर है किआप कहें कि मेरे कपड़े थोड़े टाइट हो रहे हैं इसलिए सुबह जॉगिंग करने की और डायटिंग की सोच रहा है लेकिन तुम्हें मेरा साथ देना होगा.
Happy And Strong Relationship
  • कभी कभी एक दूसरे की झूठी तारीफ़ में क़सीदे कस दिया करें इससे आप दोनों को ही अच्छा लगेगा. 
  • सिर्फ़ पार्टनर ही नहीं, बाक़ी घरवालों के साथ भी थोड़ा बहुत अच्छावाला झूठ बोलने में हर्ज़ नहीं, इससे उन्हें बेहतरफ़ील होगा जिससे वो खुश रहेंगे और रिश्ते भी मज़बूत होंगे.
  • अगर पतिदेव बच्चों की तरफ़ ज़्यादा ध्यान नहीं देते या ज़िम्मेदारी से बचते हैं तो उनसे कहें कि बच्चे अक्सर बोलते हैंकि मुमकिन आपको तो कुछ नहीं आता, पापा ज़्यादा इंटेलीजेंट लगते हैं, इसलिए कल से हम उनसे ही पढ़ेंगे, ऐसाकहने से पतिदेव बच्चों के प्रति ज़िम्मेदारी ज़्यादा ख़ुशी से निभाएंगे और इससे बच्चों के साथ उनकी बॉन्डिंग भी स्ट्रॉंगहोगी. साथ ही आपका एक काम कम हो जाएगा.
  • अगर आपकी पत्नी और आपकी मां की बनती नहि तो पत्नी से कहें कि मां अक्सर तुम्हारे काम और खाने की तारीफ़करती हैं, मां कहती हैं कि बेचारी दिनभर काम में लगी रहती है, थोड़ा भी आराम नहीं मिलता उसको और मैं भी कुछना कुछ बोलती ही रहती हूं लेकिन वो सब सह लेती है. 
  • इसी तरह अपनी मां को भी कहें कि आपकी बहू अक्सर कहती है कि काश मैं भी मम्मी जैसा टेस्टी खाना बना पाती, उनके हाथों में जो स्वाद है वो मेरे में नहीं, वो हर काम सलीके से करती हैं. ऐसी बातों से दोनों के मन में एक दूसरे केप्रति सकारात्मक भाव जागेगा और कड़वाहट दूर होगी.
  • अगर पत्नी को लगता है कि पति और पत्नी के घरवालों की ज़्यादा नहीं बनती तो पत्नी जब भी मायके से आए तोकहे कि मम्मी-पापा हमेशा कहते हैं कि दामाद के रूप में उन्हें बेटा मिल गया है, कितना नेक है, बेटी को खुश रखताहै और किसी तरह की कोई तकलीफ़ नहीं देता वरना आज के ज़माने में कहां मिलते हैं ऐसे लड़के.
  • दूसरी तरफ़ अपने मायकेवालों से कहें आप कि वो हमेशा हमारे घर के संस्कारों की तारीफ़ करते हैं कि तुम्हारे मम्मीपापा ने इतने अच्छे संस्कार दिए हैं कि तुमने मेरा पूरा घर इतने अच्छे से संभाल लिया. इन सबसे आप सभी के बीचतनाव काम और प्यार ज़्यादा बढ़ेगा.
  • इसके अलावा एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि शादी के शुरुआती दौर में कभी भी अपने डार्क सीक्रेट्स किसी सेभी शेयर ना करें, अपने अफ़ेयर्स या फैंटसीज़ आदि के बारे में पार्टनर को जोश जोश में बता ना दें. बाद में भी भले हीआप दोनों में अटूट विश्वास हो पर ये बातें कभी साझा ना करें. पार्टनर भले ही अलग अलग तरीक़ों से पूछने कीकोशिश भी करे तब भी यहां आपके द्वारा बोला गया झूठ आपके रिश्ते को बिगड़ने से बचा सकता है!
  • पिंकु शर्मा

बेहतर रिश्ते हमारे जीवन को बेहतर और आसान बनाते हैं, जबकि रिश्ते अगर बेहतर ना हों तो वो परेशानी का सबब बनजाते हैं. ऐसे में ज़रूरी है कि हम अपने रिश्तों को बेहतर बनाने और उन्हें ईमानदारी से निभाने की कोशिश करें. लेकिन रिश्तेबनाना और निभाना भी एक कला है, अगर आप इसमें माहिर नहीं तो आपको खुद को बेहतर बनाना होगा और रिश्ते बनानेव निभाने की कला को सीखना होगा. 

क्या आप लोगों को बहुत ज़्यादा जज करते हैं?

अगर हां, तो जज करना थोड़ा कम कर दीजिए, क्योंकि जज करनेवालों के लोग कम ही क़रीब आते हैं. ना वो ज़्यादा शेयरकरते हैं और ना ही अपनी रियल पर्सनैलिटी दर्शाते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि हमें हर बात पे, हर व्यवहार पे जज कियाजाएगा, हमारे बारे में एक धारण बना ली जाएगी. 

बेहतर होगा किसी के बारे में एक दो घटना या बातों से राय ना बना लें. लोगों को बेनीफिट ऑफ डाउट ज़रूर दें. इससेआपके रिश्ते बेहतर होंगे.

क्या आप सुनते कम और बोलते ज़्यादा है?

अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वो अपनी ही बात रखते हैं और किसी की सुनते नहीं हैं. ऐसे लोगों से अपने भी कुछकहने से कतराने लगते हैं. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए अच्छा श्रोता होना बेहद ज़रूरी है.

कहीं आप दूसरों में हमेशा ग़लतियां और कमियां तो नहीं निकालते?

कई लोगों की आदत होती है खुद को परफ़ेक्ट समझते हैं और समानेवाले को हमेशा सिखाते रहते हैं. ज़रा सी चूक होने परइतना सुनाते हैं कि जैसे उनसे तो कभी गलती हो ही नहीं सकती. …तुमसे एक काम ठीक से नहीं होता, तुमको तो यहज़िम्मेदारी देनी ही नहीं चाहिए थी… कब सीखोगे… इस तरह के वाक्यों के प्रयोगों से जो लोग बचे रहते हैं वो रिश्ते बनाएरखने की कला में माहिर होते हैं.

क्या अपनों के लिए कभी कुछ ख़ास करने की सोचते हैं आप?

सिर्फ़ रूटीन तरीक़े से रिश्ते में बने रहना आपके रिश्ते को बोरिंग बना देगा, रिश्तों को अगर निभाना है तो रूटीन से थोड़ाऊपर उठकर सोचना और करना होगा. कभी सरप्राइज़, कभी कुछ ख़ास प्लान करने में अगर आप माहिर हैं तो रिश्ते निभानेकी कला भी आप बेहतर जानते हैं.

क्या आप किसी के व्यक्तित्व को जैसा वो है वैसा ही अपनाने से कतराते तो नहीं?

हर इंसान अलग होता है. अगर हम ये सोचें कि सब हमारी ही तरह हों तो यह मुमकिन नहीं. किसी में कोई कमी, कमज़ोरीतो किसी में कुछ अलग गुण भी होंगे. अगर हम किसी को उनके व्यक्तित्व के साथ ही अपनाते हैं तो रिश्ते बनाने औरनिभाने की कला में माहिर माने जाएँगे.

दूसरों के बुरे वक़्त में आप साथ निभाते हैं या पीछा छुड़ा लेते हैं?

रिश्तों का मतलब ही होता है साथ निभाना, लेकिन अक्सर ज़्यादातर लोग बुरा दौर आने पर साथ छोड़ देते हैं या कोईबहाना बना देते हैं और जब हमें सबसे ज़्यादा अपनों की ज़रूरत होती तब वो होते ही नहीं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में सेहो तो आपके रिश्ते ना तो टिक पाएँगे और ना ही निभ पाएँगे. यहां तक कि जब आप मुसीबत में होगे तो खुद को अकेला हीपाओगे.

बेहतर होगा कि जब अपनों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो तब हम उनके साथ खड़े रहें. यही रिश्तों की असली ख़ुशी है.

Art Of Relationship

स्वार्थ या अपना काम निकलवाने के लिए तो रिश्ते नहीं बनाते?

कई लोग आजकल यारी दोस्ती ही नहीं, प्यार और शादी भी मतलब के लिए ही करते हैं. पैसों को देखकर या आगे चलकरमुनाफ़े को देखकर रिश्ते बनाते व तोड़ते हैं. अगर आपकी यही सोच है तो आप कभी भी असली सही रिश्ते नहीं बनापाओगे.  मतलब के रिश्तों की उम्र अधिक नहीं होती और ऐसे लोग रिश्ते बनाने और निभाने की कला जानते ही नहीं.

रिश्तों में भावनाओं को महत्व ना देकर अन्य चीज़ों को ज़्यादा ज़रूरी मानते हैं?

पैसा, ज़िम्मेदारी, गुण-अवगुण इत्यादि चीज़ों को अगर आप भावनाओं से ऊपर रखेंगे तो मात खाएँगे. किसी भी रिश्ते मेंप्यार, केयर aur शेयर की भावना सबसे ज़रूरी होती है. अगर आप में इन भावनाओं के लिए सम्मान है तो आप रिश्ते बनानेऔर निभाने की कला जानते हैं.

रिश्तों में ओवर पज़ेसिव या शकी तो नहीं हो?

रिश्तों में बेहद ज़रूरी है कि आपके साथ बंधे लोगों को घुटन ना महसूस हो. अगर आप हर बात पर रोक-टोक करोगे, बहुतअधिक सवाल-जवाब करोगे और सामनेवाले को बांधकर रखने की कोशिश में ही रहोगे तो अच्छे रिश्तों को खो दोगे. शककरना या पज़ेसिव होना एक सीमा तक तो बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन बाद में यह रिश्तों को कमज़ोर बना देते हैं. इसलिए भरोसा करना सीखें.

क्या आप दूसरों का सम्मान नहीं करते?

हर बात पर खुद को बड़ा दिखाने के लिए अक्सर लोग अपनों का ही अपमान कब करने लगते हैं खुद उन्हें भी अंदाज़ा नहींहो पाता. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में से हैं तो संभल जाइए. रिश्तों में छोटे से लेकर बड़ों तक का सम्मान बेहद ज़रूरी है, क्योंकि सम्मान देंगे तो सम्मान पाएँगे और उनका विश्वास भी जीत पाएँगे.

ज़िम्मेदारी से भागते तो नाहीं?

कई लोग अपने हक़ की बात तो बहुत करते हैं लेकिन ज़िम्मेदारी नहीं समझते. ज़िम्मेदारियों को बांटने की कला ही आपकोरिश्ते निभाने की कला में माहिर बनाएगी. सबको साथ लेकर चलना ज़रूरी है और उसके लिए ज़िम्मेदार बनना भी.

Relationship Goals

कैसे माहिर बनें रिश्ते बनाने और निभाने की कला में?

  • ईमानदार रहें, चीट ना करें.
  • पैसों के मामले में छुपाकर या झूठ बोलकर फायदा उठाने की ना सोचें.
  • विश्वास करना सीखें लेकिन आंख बंद करके नहीं.
  • स्वार्थी ना बनें.
  • दूसरों की परवाह दिल से करें.
  • हर रिश्ते को इज़्ज़त दें.
  • क्रोध और अपमान करने से जितना सम्भव को बचें.
  • हिटलर बनकर अपनी ही ना चलाएँ, दूसरों की राय को भी महत्व दें.
  • सामनेवाले को मूर्ख ना तो समझें और ना ही बनाने की कोशिश करें.
  • रिश्तों के लिए समय निकालें और अच्छा समय साथ बिताएँ.
  • समस्या होने पर बातचीत से हल निकालें, ना कि नाराज़ होकर मुंह फुला लें.
  • छोटी छोटी ख़ुशियों को महत्व दें… रिश्तों में ख़ुशियों के लिए बंगला-गाड़ी ज़रूरी नहीं, बल्कि एक-दूसरे क साथज़रूरी होता है.
  • भौतिक चीज़ों की ख्वाहिशों में अपना चैन और सुकून कभी ना खोएँ.
  • करियर और घर दोनों को बैलेंस करना सीखें. 
  • कुछ नियम बनाएँ, जैसे- रोज़ एकसाथ परिवार डिनर करेगा, उस वक़्त आपस की बातें करें ना कि फ़ोन पर रहें औरप्रोफ़ेशनल बातें करें.
  • छुट्टी के दिन सब साथ मिलकर कुछ ख़ास बनाएँ. घर की महिलाओं को आराम दें या उन्हें बाहर ले जाएँ.

अगर आप इन तमाम छोटी छोटी बातों का ख़्याल रखेंगे तो रिश्ते बनाने और उन्हें निभाने की कला जान जाएँगे, क्योंकि येकोई मुश्किल काम नहीं बस थोड़ा सा अपनों के बारे में सोचने भर से रिश्ते ताउम्र के लिए बने रहते हैं.

भोलू शर्मा

यह भी पढ़ें: रिश्तों में बोझ या बोझिल रिश्ते- क्यों और क्या हैं कारण? (When Relationship Feels Like A Burden)

रिश्ते जीने का संबल, जीने का सबब, एक सहारा या यूं कहें कि एक साथ… रिश्तों को शब्दों के दायरे में परिभाषित नहींकिया जा सकता, उन्हें तो सिर्फ़ भावनाओं में महसूस किया जा सकता है. लेकिन बात आजकल के रिश्तों की करें तो उनमेंना भावनायें होती हैं और ना ही ताउम्र साथ निभाने का माद्दा, क्योंकि आज रिश्ते ज़रूरतों और स्वार्थ पर निर्भर हो चुके हैं. यही वजह है कि रिश्तों में बेहिसाब बोझ बढ़ते जा रहे हैं और हर रिश्ता बोझिल होता जा रहा है. ऐसे में इनके करणों को जानना बेहद ज़रूरी है.

सबसे पहले जानते हैं रिश्तों में आख़िर बोझ क्यों है? 

  • रिश्तों में बोझ होने की सबसे बड़ी वजह है कि रिश्ते अब दिल से नहीं जुड़े हुए हैं.
  • रिश्ते मजबूरी बन चुके हैं. 
  • रिश्तों में स्वार्थ सबसे ऊपर हो चुका है.
  • रिश्ते भावनाविहीन हो रहे हैं.
  • मशीनी हो रहे हैं एहसास.
  • संवेदना ग़ायब हो रही है.
  • हम से ज़्यादा मैं की सोच हावी हो रही है.
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किस तरह के बोझ हैं और क्यों बोझिल हो गए हैं रिश्ते? 

  • ज़िम्मेदारी का बोझ: लोग ज़िम्मेदारियों से डरने लगे हैं और इन्हें निभाने से कतराते हैं. इन्हें लेने से बचते हैं. हर किसीको लगता है कि वो अपनी ज़िम्मेदारी किसी और को दे दे और खुद सिर्फ़ अपने लिए जिए. जहां इस तरह की सोचपनपने लगती है वहां रिश्ते बोझिल ही लगते हैं.
  • कमिटमेंट का बोझ: लोग कमिटमेंट से बचना चाहते हैं क्योंकि वो खुद नहीं जानते कि इन रिश्तों को वो कब तकनिभा सकेंगे और ना जाने कब वो रस्ता बदल दें. लोगों का स्वार्थ इस हद तक बढ़ चुका है कि वो वही रिश्ते निभानाचाहते हैं जिन रिश्तों से उन्हें किसी तरह का कोई फायदा हो. अगर पार्टनर से कोई फायदा होता नज़र नहीं आता तोवो उसको छोड़ दूसरे का दामन थामने से भी नहीं कतराते. इसी तरह अगर माता-पिता, भाई-बहन से भी लगाव नहीं हैतो वो भी उन्हें बोझ लगने लगते हैं और वो उनसे भी दूरी बनाने लगते हैं.
  • पैसों का बोझ: आर्थिक तंगी भी रिश्तों में बोझ बढ़ाती है और इस वजह से रिश्ते और बोझिल लगने लगते हैं. पैसासबकी ज़रूरत है और पैसों की तंगी से रिश्तों में भी मनमुटाव होने लगते हैं. तनाव बढ़ता है और सारे रिश्ते बोझिल हीलगने लगते हैं.
  • करियर का बोझ: कॉम्पटीशन के इस दौर में करियर को ऊपर ले जाना, वर्क और होम लाइफ को बैलेंस करनाआसान नहीं. जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उनके रिश्तों में बोझ बढ़ता जाता है.
  • समाजिक दबाव का बोझ: हम जिस समाज में रहते हैं वहां समाज और आस पास के लोगों के बारे में कुछ ज़्यादा हीसोचा जाता है. ऐसे में हम चाहकर भी अपने मन का नहीं कर पाते क्योंकि हर बात और हर निर्णय पर हमको यहीसमझाया जाता है कि हमारे समाज में ऐसा नहीं चलता या फिर लोग क्या कहेंगे. इस तरह के माहौल में ज़ाहिर हैदम घुटता है और हर बात बोझिल ही लगती है.
  • स्टेटस का बोझ: आज की तारीख़ में कुछ हो ना हो स्टेटस होना बहुत ज़रूरी है. और जबसे सोशल मीडिया कीहमारी लाइफ़ में एंट्री हुई है तबसे तो यह बोझ बढ़ता ही जा रहा है. हर कोई इसी होड़ में रहता है कि हमारी लाइफ़कितनी कूल है, दूसरों को दिखाने के लिए अब हर चीज़ होती है. ब्रांडेड मोबाइल से लेकर हर बात का सेलिब्रेशनजैसे बस दिखावे की चीज़ ही बनकर रह गई. हर वक़्त खुश और हैपनिंग लाइफ़ का टैग लेकर घूमना आज कीसबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. ये तमाम चीज़ें रियल लाइफ़ रिश्तों को खोखला बनाती हैं और आप उन्हें भूलकरडिजिटल रिश्तों की नक़ली दुनिया में खोते चले जाते हैं.
  • खुश दिखने का बोझ: आप खुश हों या ना हों लेकिन आज की तारीख़ में आपका खुश दिखना ज़रूरी है, क्योंकिकिसी को फ़ुर्सत भी नहीं आपके दुखों को जानने और समझने की. ऐसे में मन ही मन में घुटने के बाद भी आपको ढोंगकरना पड़ता है कि आप की ज़िंदगी बेहद हसीन है.
Relationship Problems

रिश्तों में बोझ को बढ़ाते हैं यह पहलू

  • पार्टनर या अन्य सदस्य जब साथ ना दें और सारी ज़िम्मेदारी किसी एक पर आ जाए.
  • ज़िम्मेदारी निभाने के बावजूद तारीफ़ या सहयोग ना मिले.
  • अपना दांव कुछ भूलकर भी अपने रिश्तों को सब कुछ देने के बाद भी किसी का सहयोग ना मिले.
  • अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ना होने पर भी बहुत कुछ बर्दाश्त करना पड़ता है जिससे रिश्तों में बोझ बढ़ता है.
  • अपनों से ही सम्मान ना मिलने पर भी बहुत कुछ बदल जाता है.
  • आपको निर्णय लेने की आज़ादी ना हो या आपकी राय को अहमियत ही ना दी जाए तब भी बोझिल लगता है हररिश्ता.
Relationship Problems

क्या किया जाए कि रिश्ते बोझिल ना लगें

  • बात करें: कम्यूनिकेट करना किसी भी रिश्ते के लिए सबसे ज़रूरी और सबसे अहम् है. बात ना करना किसी भीसमस्या का समाधान नहीं. इससे परेशानी और बढ़ेगी. बेहतर होगा कि आपसी बात चीत से मन का बोझ हल्का करें, अपनी परेशानियों को अपनो से साझा करें. उनकी परेशानियों को जाने. 
  • स्वार्थी ना बनें: रिश्तों में सिर्फ़ अपने बारे में नहीं सोचा जाता, रिश्तों का मतलब ही है एकजुट होकर सबके लिएसोचना. स्वार्थ की भावना भले ही आपको कुछ समय के लिए ख़ुशी दे देगी लेकिन आगे चलकर आप एकदम अकेलेपड़ जायेंगे. स्वार्थ छोड़कर देखें, आपको अपने रिश्ते ही इतने प्यारे लगेंगे कि बोझ अपने आप हल्का लगने लगेगा.
  • शेयर करें: शेयरिंग की भावना से रिश्ते गहरे और मज़बूत बनते हैं. सुख-दुःख हो, कामयाबी या असफलता सब कुछशेयर करें. इससे आपकी ख़ुशियाँ और हौसला दोनों बढ़ेंगे और रिश्ते बोझ कम संबल अधिक लगेंगे.
  • जिम्मेदारियाँ साझा करें: ज़िम्मेदारियों से भागने की बजाए उन्हें साझा करें. रिश्तों में सबकी जिम्मेदारियाँ बनती हैंऔर जो कुछ भी निभाना होता है मिलकर ही बेहतर तरीक़े से निभाया जा सकता है. सामने से खुद आगे बढ़कर कहेंकि यह काम मुझ पर छोड़ दें, फिर देखिए रिश्तों से बोझ अपने आप कम होगा और रिश्ते बोझिल नहीं प्यारे लगेंगे.
  • काम बांट लें: घर या बाहर दोनों जगह का काम बांट लें. सब मिलकर करेंगे तो ज़िंदगी और रिश्ते दोनों आसान लगनेलगेंगे. जो काम आप बेहतर कर पायें वो आप लें और दूसरों को भी उनकी क्षमता के अनुसार काम दें.
  • आर्थिक ज़िम्मेदारी भी बांटे: रिश्तों में ज़रूरी है कि आर्थिक ज़िम्मेदारियों का भी बंटवारा हो. आप अगर यह सोचरखेंगे कि मैं अपने पैसे बचा लूं और सामने वाला ही अकेला खर्च करे तो यह सही नहीं. आपको कुछ ख़र्चों कीज़िम्मेदारी खुद ब खुद ख़ुशी ख़ुशी लेनी चाहिए. इससे अपनापन बढ़ेगा और रिश्ते बोझ नहीं लगेंगे.
Relationship Tips
  • दिल को खोल लें: दिल को खुला रखें ताकि ज़िंदगी जी खोल के जी सकें. अगर आपको किसी चीज़ की कमी भीहोगी तो अपनों के साथ वो कमी महसूस नहीं होगी. चाहे पैसों की कमी हो या सुविधाओं की अगर अपने साथ हैं तोज़िंदगी की राह आसान हो जाती है. अगर आप अपने रिश्तों का ख़याल रखेंगे तो बुरे समय में रिश्ते आपका ख़यालरखेंगे.
  • अपनी सोच बदलें, फ़ायदे-नुक़सान के तराज़ू में रिश्तों को ना तोलें: रिश्तों में कभी भी फ़ायदा या नुक़सान की सोचके साथ आगे नहीं बढ़ा जा सकता. रिश्तों को सिर्फ़ प्यार से ही सींचा जा सकता है वर्ना हर रिश्ता बोझ ही लगेगा. किसने क्या किया इस सोच से ऊपर उठकर यह सोचें कि अपनों को कैसे और क़रीब लाया जाए.
  • चीट ना करें, सबको सम्मान दें: सम्मान देंगे तो सम्मान मिलेगा. चीटिंग की रिश्तों में कोई जगह नहीं होती. पार्टनर कोधोखा ना दें. घर में भी सबकी राय को महत्व दें. सबसे राय लें. किसी को कम ना आंके. कई बार एक बच्चा भी बड़ीसे बड़ी समस्या का आसान रास्ता सुझा देता है.
  • ईगो ना रखें: अहंकार हर रिश्ते को मिटा देता है. अपनों से भला कैसा ईगो? खुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरों को मूर्खसमझने की गलती ना करें. आप अकेले रहेंगे तो बोझ बढ़ेगा, बेहतर है सबको साथ लेकर चलें. नकारात्मक सोचऔर भावनाओं को त्याग दें.

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बॉलीवुड के क्यूट कपल के नाम से मशहूर रितेश देशमुख और जेनिलिया डिसूज़ा देशमुख न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि सभी कपल्स के लिए आदर्श उदहारण हैं. लगभग 10 सालों तक एक-दूसरे के बेस्ट फ्रेंड रहने के बाद 2012 में दोनों ने खुद को शादी के बंधन में बांध लिया था. उनके दो बेटे हैं- रियान और राहिल, जिनकी दोनों मिलकर बेहतरीन परवरिश कर रहे हैं. पिछले 8 सालों में उन्होंने हमें कई बार कपल गोल्स दिए हैं. हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए क्या मंत्र देते हैं दोनों, आइये जानते हैं.

Riteish Deshmukh And Genelia D'souza

जब हो एक दूसरे की कमी का एहसास

रितेश ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि अपनी पहली फिल्म तुझे मेरी कसम की शूटिंग खत्म होने के बाद मुझे जेनिलिया की कमी खलती थी और यही हाल उसका भी था. हमें एक दूसरे की इतनी आदत हो गयी थी कि दूर रहना मुश्किल हो गया था. रितेश कहते हैं कि अगर आपको ये कमी महसूस हो रही है, तो समझ जाएं कि आप उस इंसान से बहुत प्यार करते हैं. अक्सर कपल्स जब एक साथ होते हैं तो कभी ये प्रॉब्लम तो कभी वो डिस्कस करते रहते हैं और एक-दूसरे के साथ का अनमोल समय गंवा देते हैं. आप ऐसा न करें.

हैप्पी वाईफ हैप्पी लाइफ

रितेश देशमुख कहते हैं कि शादीशुदा ज़िन्दगी को खुशहाल बनाने का यही एक सीक्रेट फॉर्मूला है. हर पति को चाहिए कि वो अपनी पत्नी की खुशियों, इच्छा और ख़्वाबों को पूरा करने की कोशिश करे. ज़रूरी नहीं कि आप हमेशा कुछ बड़ा करें, छोटी छोटी चीज़ों से भी आप पत्नी को ख़ुश रख सकते हैं, अगर उसे सिरदर्द है, तो तेल मालिश कर दें या बाम लगा दें. इतना करने भर से वो खुश रहेगी.

एक दूसरे का साथ एंजॉय करें

जेनिलिया कहती हैं कि पति-पत्नी के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप एक दूसरे का साथ एंजॉय करें. अगर आप दोनों एक दूसरे की कंपनी एंजॉय करते हैं, तो आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं. आपका घर ही आपका हनीमून स्पॉट होगा. चाहें तो ट्राई करके देखें कि आप दोनों 24 घंटे सिर्फ एक दूसरे के साथ रह सकते हैं या नहीं. अगर आप दोनों 24 घंटे साथ रह सकते हैं, तो पूरी ज़िंदगी आप ख़ुशहाली से जियेंगे.

Riteish Deshmukh with his two sons
Riteish Deshmukh And his  sons

केयरिंग है सबसे बड़ा मंत्र

जेनेलिया कहती हैं कि रितेश दुनिया के सबसे अच्छे पिता हैं. हमारे दोनों बेटे उनसे बहुत प्यार करते हैं और बहुत सम्मान भी देते हैं. उन्हें देखकर मुझे लगता है कि मुझे भी पैरेंटिंग के बारे में उनसे बहुत कुछ सीखना है. वो जिस तरह मेरी और बच्चों की केयर करते हैं, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. एक औरत को इससे ज़्यादा क्या चाहिए कि उसका पति, उसका और उसके बच्चों का ख़्याल रखता है. हर पति को रितेश से यह सीखना चाहिए.

Riteish Deshmukh with if family

ससुराल को अपनाएं पूरे दिल से

जेनिलिया कहती हैं कि जब एक परिवार आपको पूरे दिल से अपनाता है, तो यह आपका कर्तव्य है कि आप भी ससुराल को पूरे दिल से अपनाएं. जेनिलिया अपनी सास के साथ अक्सर फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं, जिसे देखकर अंदाज़ा लग जाता है कि उन दोनों की बॉन्डिंग कितनी अच्छी है.

Riteish Deshmukh And Genelia D'souza

एक दूसरे को अपनाना सीखें

नए शादीशुदा जोड़ों को स्पेशल टिप देते हुए रितेश कहते हैं कि शादी के पहले हम अकेले होते हैं, इसलिए कैसे रहते है ज़्यादा मायने नहीं रखता, लेकिन शादी के बाद अपनी आधी आलमारी किसी को दे देना, उसके साथ बेड शेयर करना, खाने-पीने और आने जाने और रिश्ते नाते निभाना सब शादीशुदा ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है, इसलिए ऐसे में आपको एक दूसरे को स्वीकार करना सीखना आना चाहिए. एक दूसरे के साथ आप उनके परिवार और संस्कृति को भी अपनाते हैं, जैसे हमने दोनों के रीति रिवाज से शादी की, महाराष्ट्रियन और क्रिश्चियन तरीके से. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो ईगो प्रॉब्लम्स होंगी.

– अनीता सिंह

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दादी-नानी या माता-पिता के समय की अरेंज मैरिज की सफलता का फ़ॉर्मूला आज के दौर में फिट नहीं बैठता. मॉडर्न युग में क्या हैं सफल अरेंज मैरिज के मंत्र, आइए जानते हैं. कहते हैं शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और हर किसी के लिए कोई न कोई जीवनसाथी ज़रूर होता है. पर आज की युवापीढ़ी इस कथन में अधिक विश्‍वास नहीं करती. वह तो लव मैरिज को अधिक महत्व देती है. लेकिन मेट्रो सिटीज़ व खुले विचारोंवाले परिवारों को छोड़ दें, तो आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं और वैवाहिक जीवन भी सफल होता है. तो आइए, सफल अरेंज मैरिज के इन मंत्रों को जानें.

Relationship Mantra

1. शादी को सफल बनाने का मूल मंत्र है- प्यार, विश्‍वास, समझौता और सामंजस्य. धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझें, एडजस्ट होने के लिए व़क़्त और स्पेस दें. फिर देखें, किस तरह रिश्तों में मज़बूती आती है.

2. अरेंज मैरिज में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. अतः घबराहट होना स्वाभाविक है. यदि आप भी ऐसा महसूस करती हैं, तो कारण जानने की कोशिश करें. कई बार किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने की कल्पना, नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने का डर, वहां के तौर-तरीक़ों की चिंता आदि से मन डरता है. मन की घबराहट को पार्टनर के साथ शेयर करें. उसके ज़रिए परिवार के बारे में जानने की कोशिश करें. पार्टनर के साथ सहज हो जाने पर परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी नहीं होगी.

3. अरेंज मैरिज का अर्थ है- ज़्यादा ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा अपेक्षाएं. दोनों ही पार्टनर्स पर उन सारी बातों पर खरा उतरने का दबाव रहता है. दबाव ज़रूर लें, लेकिन इतना नहीं कि आपसी तालमेल ही गड़बड़ाने लगे.

4. जरूरी नहीं कि पार्टनर को आपकी हर पसंद-नापसंद में रुचि हो या आप दोनों के विचार एक जैसे हों. कभी-कभी विपरीत स्वभाववाले पार्टनर्स भी बहुत ख़ुश रहते हैं.

5. हो सकता है नए परिवार की सोच आपके जीवन मूल्यों को सही न माने और आपको लगातार बताया जाए कि इस परिवार में ऐसा ही होता है. निश्‍चय ही ऐसे माहौल में आप परेशान हो जाएं, घुटन भी हो, पर रिलैक्स! शादी में सामंजस्य व अनुकूलता भी होती है. ऐसी स्थिति में पार्टनर से सही शब्दों के चुनाव के साथ सौम्य लहजे में बात करें. उन्हें अपनी उलझन बताएं, ताकि परिवार के किसी भी सदस्य को नाराज़ किए बिना समस्या का हल निकल आए.

6. शुरू-शुरू में पार्टनर या परिवार के सदस्यों की किसी भी बात, कमेंट या व्यवहार को दिल पर न लें. न ही जैसे को तैसा वाली पॉलिसी अपनाएं, बल्कि जो लोग परेशानियां पैदा करते हैं, उनसे संभलकर रहें. सूझबूझ से स्थिति को संभालें. निश्‍चय ही ऐसा व्यवहार आप दोनों को ख़ुशियां देगा. एक-दूसरे के क़रीब लाएगा.

7. परिवार में होनेवाली हर छोटी-छोटी बात की शिकायत पार्टनर से न करें, न ही बात-बात पर आंसू बहाएं. याद रहे, वो भी आपकी तरह ही ज़्यादा नहीं, तो थोड़ी-बहुत दुविधा से गुज़र रहा है.

8. प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है. अरेंज मैरिज में भी कभी तो देखते ही प्यार हो जाता है और कभी साथ चलते-चलते प्यार हो जाता है, वो भी ऐसा कि जीवन के हर आंधी-तूफ़ान से जूझने की ताक़त बन जाता है. प्यार देंगे, तो प्यार मिलेगा भी.

9. प्यार की नींव है विश्‍वास. पार्टनर पर विश्‍वास करें और उनके भरोसे को भी बनाए रखें. धैर्य से काम लें. पार्टनर या परिवार के सदस्यों की ग़लतियों के प्रति क्षमाशील बनें. जो बीज हम बोते हैं, वही फल हमें मिलता है.

10. शादी एक कमिटमेंट है, जहां आप अपनी बेफ़िक़्र दुनिया से निकलकर ज़िम्मेदारी, कमिटमेंट, त्याग, समझौतों के भंवर में घूमते रहते हैं. लेकिन यही बातें विवाह को मज़बूत बनाती हैं.

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Relationship Mantra

11. हो सकता है आप अपने नए परिवार के मुक़ाबले आर्थिक रूप से ज़्यादा संपन्न परिवार से हों, ज़्यादा स्मार्ट या हर तरह से बेहतर हों. लेकिन याद रहे, शादी किसी मुक़ाबले का प्लेटफॉर्म नहीं है. अतः तुलनात्मक विचारधारा को आड़े न लाएं. अब यह परिवार आपका है, इसे बेहतर बनाने में सहयोग दें.

12. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए संवाद सबसे मुख्य है. कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें. एक झूठ आपको मुसीबत में डाल सकता है. एक बार आपका झूठ पकड़ा गया, तो फिर से वह विश्‍वास पाना असंभव हो जाता है.

13. विवाह की सफलता के लिए दोनों परिवारों को जोड़कर रखना भी आपका व आपके पार्टनर का काम है. यह तभी संभव है जब दोनों परिवारों के प्रति स्नेह व आदर का समान भाव हो.

14. रिश्तों को बनाए रखने में मुस्कुराहट बड़ा काम करती है. आप ख़ुद भी आनंदित होते हैं और दूसरों का मन भी जीत लेते हैं.

15. इन सारी बातों के अलावा कुछेक व्यक्तिगत बातें भी हो सकती हैं, जिन्हें अपने ढंग से सुलझाकर विवाह को सफल बनाया जा सकता है.

– प्रसून भार्गव

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रिश्तों (Relationships) की ख़ुशबू… प्यार के लम्हे… अपनों का साथ… ये सभी मिलकर ही तो एक ईंट-पत्थर से बने मकान को घर बनाते हैं, लेकिन जब इन घरौंदों में भावनाएं पिघलने लगें, अपनों का साथ छूटने लगे… तब रिश्ते भी बिखरने लगते हैं…

Home Relationship

एहसान दोनों का ही था मकान पर… छत ने जता दिया और नींव ने छुपा लिया… कुछ ऐसे ही होते हैं रिश्ते व भावनाएं, जिनके बगैर जीवन का कोई अर्थ नहीं, आख़िर क्यों वे एक दौर आने पर ठहरने से लग जाते हैं. आपसी समझ व अपनापन कम होने लगता है.

एक-दूसरे के प्रति नाराज़गी व उदासी इस कदर बढ़ जाती है कि साथ रहना दूभर हो जाता है. रिश्तों की दरार को भरना मुश्किल हो जाता है. तब बस, यही सोच रहती है कि किसी भी तरह अलग हो जाएं हम, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि कुछ अरसे बाद मन पछताता है और दिल वहीं लौटना चाहता है, जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं… जैसे- बचपन, पुराना घर, मासूमियत, पुराने दोस्त, क्योंकि उम्र चाहे जितनी भी हो, सुना है दिल पर कभी झुर्रियां नहीं पड़तीं… पर रिश्तों पर पड़ी गांठ अपनों को दूर कर ही देती है.

कभी ज़रूरतें जुदा कर देती हैं…

श्रीवास्तवजी की बड़ी ख़्वाहिश थी कि बड़ा-सा घर लें और परिवार के साथ इकट्ठे रहें. इसके लिए तमाम जोड़-तोड़ करते हुए आख़िरकार उन्होंने घर ले ही लिया. पत्नी व दोनों बेटों के साथ रहने लगे, लेकिन धीरे-धीरे बहुत कुछ बदलने लगा. बेटों की अपनी ख़्वाहिशें, ज़रूरतें इतनी बड़ी होती चली गईं कि वे दूसरे शहरों में चले गए. बड़े अरमान से श्रीवास्तवजी ने घर लिया था, जो अब सूने दरो-दीवारवाला खाली मकान रह गया है. यहां चूक तो किसी से नहीं हुई. बस, प्राथमिकताएं सबकी अलग-अलग थीं.

घर का वजूद क्यों है?

आख़िर इंसान घर क्यों बनाता है? अपनी व परिवार की सुरक्षा, मज़बूत स्थिति, साथ और ठहराव के लिए ही ना! वरना कइयों की तो पूरी ज़िंदगी बीत जाती है अपना एक घर बनाने में, लेकिन घर की भी एक ख़ूबसूरत परिभाषा होती है, पहचान होती है, जिससे वो घर कहलाता है. वो है प्यार, अपनापन, सहयोग, एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देना आदि.

छोटी-छोटी बातों की ख़ुशियां, छोटी-ब़ड़ी उपलब्धियों से जुड़े यादगार पल ही तो एक गारे-सीमेंट से बने मकान को मोहब्बतभरा घर बना देते हैं, क्योंकि वहां पर माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी, बच्चों, रिश्तेदारों से जु़ड़े जाने कितने प्यारभरे लम्हे होते हैं. बचपन की शरारतें, नोक-झोंक, ख़ुशी-ग़म के पल, उम्मीदें, महत्वाकांक्षाएं, प्यार की सौग़ात… अनगिनत भावनाओं का समंदर अपने में संजोए व समेटे होता है घर…

व़क्त बेवफ़ाई कर गया…

आज कमबख़्त व़क्त ही तो नहीं है हम सभी के पास. हर कोई अपनी-अपनी ख़्वाहिशों की उलझनों में उलझा-सा है. कहीं बच्चे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले जाते हैं, तो कहीं नौकरी की ख़ातिर बेटे दूर हो जाते हैं और मजबूर पैरेंट्स अपने ही घर में तन्हा रह जाते हैं. फिर भी एक आस व विश्‍वास रहता है कि एक दिन वे लौटकर आएंगे,

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जैसे- उम्मीदें तैरती रहती हैं.. कश्तियां डूब जाती हैं… कुछ घर सलामत रहते हैं, आंधियां जब भी आती हैं.. बचा ले जो हर तूफ़ां से, उसे आस कहते हैं… बड़ा मज़बूत है ये धागा, जिसे विश्‍वास कहते हैं… पैरेंट्स का विश्‍वास ही तो होता है, जो उन्हें हर पल, यह उम्मीद बंधाता रहता है कि उनका मकान फिर से घर बन जाएगा… अपनों की चहल-पहल से घर का हर ज़र्रा रौशन हो जाएगा…

मैं मकान हूं, घर नहीं…

पढ़ाई, नौकरी, ज़रूरतों से भरी भागती ज़िंदगी ने हमें एक ऐसा खिलाड़ी बना दिया है, जो हर रोज़ बस दौड़ रहा है. घर से ऑफिस, स्कूल-कॉलेज, क्लासेस, बिज़नेस… यानी हम सभी बस सुबह से शाम एक अनजानी-अनकही-सी प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए बस भाग रहे हैं और घर रात बिताने का ज़रिया-सा बनता जा रहा है. यानी जहां पर हम रात को पहुंचते हैं और सुबह फिर से निकल जाते हैं सफ़र के लिए. तभी तो कभी भावनाओं से रचे-बसे घर को भी आख़िर कहना पड़ जाता है कि- ‘जनाब मैं घर नहीं मकान हूं. वो तो बहुत पुरानी बात हुई जब मुझे ‘घर’ कहा जाता था… सभी मेरे पास थे. हंसी के कहकहे, शरारतों की अठखेलियां होती थीं, खाने-खिलाने का लंबा दौर चलता था, तीज-त्योहारों की रौनक़ होती थी,

अपने-पराए सभी मिल जाते थे… बड़ा बेशक़ीमती व़क्त था वो और मेरा वजूद भी इतरा उठता था अपनी ख़ुशक़िस्मती पर.’ घर का यह अनकहा दर्द बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है. आख़िर ये कहां आ गए हम!.. क्यों नहीं हमें ़फुर्सत अपनों के संग व़क्त गुज़ारने की? एक बार ज़रूर सोचिएगा इसके बारे में.

गुरुर में इंसान को इंसान नहीं दिखता..

जैसे अपने ही छत से अपना मकान नहीं दिखता…

सच, कुछ ऐसे ही हालात बन जाते हैं, जब हम अपने ही घर के अस्तित्व को अनदेखा करने लगते हैं. बहुत कुछ पाने की इच्छा ने हमें इस कदर स्वार्थी बना दिया है कि हम छोटी-छोटी ख़ुशियों को दरकिनार कर नाम-शौहरत के चक्कर में उलझते चले जा रहे हैं. ऐसे में रिश्ते भी प्राइस टैग की तरह हो गए हैं. यदि आपके पास पैसा है, तो आपकी कई ग़लतियां कोई मायने नहीं रखतीं, क्योंकि पैसों के बोझ तले वे दब जाती हैं. धन-दौलत व रुतबा हमें इस कदर अभिमानी बना देता है कि हमें अपने आगे कुछ दिखाई नहीं देता. दूसरों को नसीहत देना, उन पर उंगली उठाना, ख़ुद को श्रेष्ठ समझना हमारी फ़ितरत में शुमार हो जाता है. सबसे बेख़बर हम अपनी ही मदहोशी में रहते हैं.

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मनोवैज्ञानिक परमिंदर निज्जर का यह मानना है कि घर को लेकर हर किसी की सोच अलग-अलग होती है, जैसे-

* किसी के लिए घर सुरक्षा है, जहां पर वे ख़ुद को सुरक्षित महसूस करते हैं.

* कुछ के लिए घर सुकून व आराम करने का ठिकाना है.

* कुछ लोगों के लिए होटल जैसा है, जहां वे कुछ समय ख़ासकर रात बिताकर सुबह निकल जाते हैं.

* अधिकतर लोगों के लिए उनकी पहचान है घर, क्योंकि वहां पर उनकी नेमप्लेट है, जिस पर उनकी पहचान है.

* लेकिन इन सब चाहतों व ज़रूरतों के तले कहीं न कहीं घर के होने का सच्चा वजूद दफ़न-सा हो जाता है.

* हम यह क्यों भूल जाते हैं कि हमारे बचपन, लड़कपन की खट्ठी-मीठी यादों का पलछिन है घर.

* माता-पिता के त्याग-प्रेम, संघर्ष, अरमान, ख़ुशी, आशाओं का साक्षी है घर.

* रिश्तों की सोंधी ख़ुशबू, अपनों के

हास-परिहास का केंद्र बिंदु है घर.

* आज फिर ज़रूरत है मकान को घर बनाने की. रिश्तों को एक नए सिरे से सजाने की.

* कोशिश करें ज़िंदगी को रिवाइव करने की, ताकि बेनूर से घरौंदे को प्यारभरे एहसास से सींच सकें.

* ख़ुद को टटोलें, देखें कहां पर हैं हम? क्यों हमें इतनी जल्दबाज़ी, भागदौड़ है?

* अपनों को भरपूर समय दें, वरना ऐसा भी व़क्त आएगा, जब सब कुछ होगा, पर अपने न होंगे.

* रिश्ते हैं, अपने हैं, तो ज़िंदगी ख़ूबसूरत है और जीने का सबब भी है.

* ऐसी कामयाबी, नाम-शौहरत किस काम की, जहां अपनोें का साथ न हो.

तो आओ, फिर से अपने आशियाने को एक नए सिरे से सजाएं, अपनों के प्यार व साथ से भरपूर घर बनाएं…

– ऊषा गुप्ता

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ख़ामोशियां जब बात करती हैं, तो उनमें मुहब्बत की आवाज़ छिपी होती है… ये ख़ामोशियां मन को लुभाती हैं, ये ख़ामोशियां कभी-कभी बहुत भाती हैं, ये ख़ामोशियां गुदगुदाती हैं… लेकिन जब आपका रिश्ता (Relationship) ही ख़ामोश होने लगे, तब ये ख़ामोशियां रुलाती हैं… जी हां, आज के दौर की हक़ीक़त यही है कि हमारे रिश्तों में ख़ामोशी पसरने लगी है… हमारे संबंधों में अजीब-सी वीरानी पनप रही है… आख़िर क्यों साइलेंट मोड (Silent Mode) पर जा रहे हैं हमारे रिश्ते?

Relationships Problems

पहचानें रिश्तों की ख़ामोशियों को…

–     आप दोनों पास-पास होते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

–     डिनर टेबल हो या चाय का समय, आप दोनों के पास एक-दूसरे से बात करने के लिए कुछ होता ही नहीं.

–     अब न पहले की तरह फोन या मैसेजेस करते हैं, न ही सरप्राइज़ेस प्लान करते हैं.

–     बेडरूम में भी न रोमांस की जगह बची है, न ही पर्सनल बातों की.

–     सेक्स लाइफ भी पहले की तरह नहीं रही.

–     बात भले ही न होती हो, लेकिन वो कनेक्शन भी फील नहीं होता, जो पहले हुआ करता था.

–     एक-दूसरे के प्रति इतने कैज़ुअल हो गए हैं कि किसी के होने न होने से ज़्यादा फ़र्क़ ही नहीं पड़ता अब.

–     लड़ाई-झगड़े, वाद-विवाद भी अब नहीं होते.

–     आख़िरी बार साथ-साथ कहां बाहर गए थे या कौन-सी मूवी देखी थी, वो तक याद नहीं.

–     एक-दूसरे के साथ अब ज़िद भी नहीं करते.

–     पार्टनर की पसंद-नापसंद को अब तवज्जो नहीं दी जाती.

–     इसी तरह की कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जो यह महसूस करने के लिए काफ़ी हैं कि रिश्ते में ख़ामोशी ने जगह बना ली है.

क्या हैं वजहें?

–     लाइफस्टाइल फैक्टर बड़ी वजह है. पार्टनर्स बिज़ी रहते हैं.

–     समय की कमी भी एक कारण है, क्योंकि एक-दूसरे के साथ समय कम बिता पाते हैं.

–     प्राथमिकताएं बदल गई हैं. करियर, दोस्त, बाहरी दुनिया ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

–     सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है. यहां का आकर्षण आपसी रिश्तों को काफ़ी प्रभावित करता है.

–    लोग अंजाने लोगों से कनेक्ट करके जो एक्साइटमेंट महसूस करते हैं, जो नयापन उन्हें लगता है, वो आपसी रिश्तों में नहीं महसूस होता. ये रिश्ते उन्हें बोझिल और उबाऊ लगने लगते हैं.

–     आजकल डिनर का टेबल हो या बेडरूम, शारीरिक रूप से वहां मौजूद भले ही हों, मानसिक व भावनात्मक रूप से वो कहीं और ही होते हैं.

–     कभी खाने की पिक्चर्स क्लिक करके शेयर करते हैं, तो कभी सेल्फी को कितने लाइक्स और कमेंट्स मिले, इस पर पूरा ध्यान रहता है.

–     ऐसे में रिश्तों के लिए समय ही नहीं रहता और न ही एनर्जी बचती है.

–     ऑफिस से थकने के बाद सोशल साइट्स उनके लिए रिफ्रेश होने का टॉनिक बन जाती हैं, जहां अपना बचा-खुचा समय व ऊर्जा बर्बाद करने के बाद किसी और चीज़ के लिए कुछ नहीं बचता.

–     इसके अलावा ऑफिस में भी कलीग्स के साथ दोनों समय ज़्यादा बिताते हैं, जिससे उनसे इमोशनल रिश्ता बन जाता है, जो अपने रिश्ते से कहीं ज़्यादा कंफर्टेबल और आकर्षक लगने लगता है.

–     पार्टनर्स को लगता है कि कलीग्स उन्हें बेहतर समझते हैं, बजाय पार्टनर के.

–    कई बार ये रिश्ते भावनात्मक रिश्तों से भी आगे बढ़कर शारीरिक संबंधों में बदल जाते हैं.

–     एक बार इस तरह के रिश्ते में बंध गए, तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल लगता है.

–     शुरुआत में अच्छा और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन आगे चलकर ज़िंदगी में बड़ी परेशानी हो सकती है.

–     ऐसे में अपने पार्टनर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती, उसकी हर बात बेवजह की रोक-टोक लगने लगती है और फिर आपसी प्यार लगभग ख़त्म ही हो जाता है, रिश्ता एकदम ख़ामोश हो जाता है.

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Relationships Problems
कैसे बचाएं रिश्तों को?

–     सबसे पहले तो यह जानें कि समय रहते इस ख़ामोशी की आहट को पहचान लिया जाए.

–     अगर आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में सब कुछ सामान्य नहीं है, तो पार्टनर से बात करें.

–    सोशल मीडिया, टीवी, फोन और लैपटॉप्स के यूज़ के भी नियम बनाएं.

–     हफ़्ते में एक बार आउटिंग के लिए जाएं. मूवी प्लान करें या डिनर.

–     एक-दूसरे के ऑफिस में सरप्राइज़ विज़िट दें.

–     कभी यूं ही बिना काम के भी फोन या मैसेज कर लिया करें.

–     कभी-कभार स़िर्फ एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ही कैज़ुअल लीव ले लिया करें. इससे एक्साइटमेंट बना रहता है.

–    एक-दूसरे के लिए शॉपिंग या कुकिंग करें.

–     सोशल साइट्स पर भी एक-दूसरे से कनेक्टेड रहें, ताकि आप दोनों को ही पता रहे कि रिश्ते के बाहर आप सोशल मीडिया पर कैसे बिहेव करते हैं.

–     अपने पार्टनर के प्रति कैज़ुअल अप्रोच से बचें. शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कैज़ुअल हो जाते हैं, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

–     पार्टनर को यह महसूस करवाएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी कितनी अहमियत है.

–    उन्हें स्पेशल फील कराने का प्रयास बीच-बीच में करते रहें.

–     यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों हर पल, हर घड़ी बातें ही करते रहें, लेकिन वो कनेक्शन बना रहे, वो नीरस-सी ख़ामोशी न पनपे इसकी कोशिश ज़रूर होनी चाहिए.

–     समस्या चाहे जितनी भी गंभीर हो, कम्यूनिकेशन से बेहतर समाधान कोई नहीं है. बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन और कनेक्शन बना रहे और आपका रिश्ता साइलेंट मोड पर कभी न आए.

–     अपनी सेक्स लाइफ को साइलेंट मोड पर कभी न आने दें. उसमें ऊर्जा बनी रहे, इसकी कोशिश होती रहनी चाहिए.

–     जब भी लगे कि सेक्स लाइफ बोरिंग हो रही है, तो कभी रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर, तो कभी बेडरूम डेकोर चेंज करके, रोमांटिक गानों के साथ पार्टनर का स्वागत करें. इससे आप दोनों को ही नयापन महसूस होगा.

–     नई पोज़ीशन्स ट्राई करें या सेक्स की लोकेशन चेंज करें. वीकेंड पर कोई होटल बुक करके साथ में समय बिताएं.

– विजयलक्ष्मी

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जिस्मों के रिश्ते हैं, आज की रूहों की यही हक़ीक़तें हैं… जज़्बात ग़ायब हैं, एहसास गुमसुम-से… हसरतें बेहिसाब हैं… वासनाओं पर मर्यादाओं का पहरा अब नहीं है, साथ जीने-मरने की क़समों का इरादा अब नहीं है… ख़ालिस मुहब्बत अब बंधन-सी लगती है, बेपनाह चाहत अब बेड़ियां बन गई हैं… अपने तरी़के से जीने का शग़ल, है हर कोई अपनी ही धुन में मगन… एक-दूसरे के साथ रहता तो है तन, पर न जाने कहां भटका हुआ है यह मन…

Relationships

–     इसे मॉडर्न होने की परिभाषा कहें या प्रैक्टिकल सोच, लेकिन सच है कि रिश्तों में अब वो पहले वाली गहराई नहीं रही.

–     ऐसा नहीं है कि लोग जुड़ते नहीं हैं, लेकिन ये जुड़ाव अब क्षणिक होता है.

–     रिश्तों में अब एडजेस्टमेंट करने की जगह न के बराबर बची है, क्योंकि दोनों पार्टनर्स में से किसी को भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करना है.

–     शादी के रिश्ते में एक साथ होते हुए भी अलग-अलग हैं.

–     आज दोनों पार्टनर्स वर्किंग होते हैं, ज़ाहिर है लाइफस्टाइल इतनी बदल गई है कि रिश्तों में भी बदलाव आ गया है. लेकिन ये बदलाव इस कदर हावी हो रहा है कि हम ख़ुद भी सोचते हैं कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

–     डबल इन्कम नो किड्स से लेकर अब नौबत डबल इन्कम नो सेक्स तक पहुंच चुकी है. सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     जो बची-खुची एनर्जी है, वो सोशल मीडिया पर ज़ाया हो रही है.

–     डिनर के टेबल पर सब अपने मोबाइल फोन्स के साथ बैठते हैं. कहने को साथ खाना खा रहे हैं, पर कनेक्टेड कहीं और ही रहते हैं… बच्चे पिक्चर्स क्लिक करके फ्रेंड्स के साथ शेयर करते हैं और बड़े अपने-अपने क्रश या दोस्तों के साथ.

–     पति-पत्नी बेड पर अपने-अपने फोन्स के साथ ही होते हैं… दोनों को परवाह नहीं कि कौन, किससे बात कर रहा है, न ही इस बात की फ़िक्र है कि आपस में इतनी देर से कोई बातचीत उनके बीच नहीं हो रही.

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Relationship Problems

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

नो कमिटमेंट: लोग आकर्षित तो होते हैं, प्यार भी करते हैं, पर कमिटमेंट से डरते हैं. आजकल इतनी जल्दी रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं कि लोग ख़ुद भी यह तय नहीं कर पाते हैं कि इस रिश्ते में उन्हें कब तक रहना है. उन्हें लगता है, जब तक चल रहा है, चलने देते हैं, कोई और मिल गया, तो वहां चले जाएंगे, क्योंकि कौन-सा हमको शादी करनी है. यही वजह है कि रिश्ते नॉन सीरियस होते जा रहे हैं.

कैल्कुलेटिव हो रहे हैं: आजकल रिश्ते ज़रूरी नहीं, बल्कि ज़रूरत के रिश्ते रह गए हैं, जिनसे हमारा स्वार्थ सिद्ध हो, वो उस समय के लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण होते हैं. मतलब निकलने के बाद एक-दूसरे को पहचानते भी नहीं.

प्रैक्टिकल अप्रोच: हम अब प्रैक्टिकल हो गए हैं. हमारे अनुभव भी हमें यही सीख देते हैं कि इमोशनल होना स़िर्फ बेव़कूफ़ी है. बेहतर है, जितना प्रैक्टिकल रहें, उतना फ़ायदा होगा. शहरों में वर्क लाइफ के बाद स़िर्फ वीकेंड में अपने लिए समय मिलता है. उसमें हम अपनों के साथ समय बिताने की बजाय उन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, जिनसे हमें कोई न कोई फ़ायदा हो.

स्पेस के नाम पर बढ़ती दूरियां: ‘स्पेस…’ आजकल यह शब्द काफ़ी घर कर गया है हमारे रिश्तों में भी. हर किसी को स्पेस चाहिए यानी रिश्ते में बंधने के बाद भी कोई बंधन न हो. यह अजीब सोच है, क्योंकि प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे से कुछ छिपाने की ज़रूरत ही नहीं होनी चाहिए. जब सब कुछ साझा है, तो छिपाना क्या है और क्यों है? पर अक्सर कपल्स को कहते सुना है कि हमें स्पेस चाहिए, वरना रिश्ते में दम घुटने लगता है. हां, यह सही है कि कोई सिर पर सवार न रहे हमेशा, न ही हर बात पर टोके, पर स्पेस के नाम पर हर बात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता.

सेक्स, आज नहीं: काम का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि सेक्स के लिए एनर्जी ही नहीं बचती. यहां तक कि अब तो सेक्स की इच्छा भी नहीं होती. ऑफिस में अधिकतर समय गुज़ारने के चलते कलीग्स से इतनी नज़दीकियां बढ़ जाती हैं कि पार्टनर से ज़्यादा आकर्षण उनमें नज़र आने लगता है. ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे से दूरी बनाने लगते हैं. सेक्स के लिए कोई एक क़रीब आना भी चाहे, तो दूसरा बहाना बना देता है कि आज नहीं, बहुत थकान है या सुबह जल्दी उठना है… आदि.

डिजिटल रिश्ते रियल रिश्तों पर हावी: सोशल साइट्स के रिश्ते अब ज़्यादा भाने लगे हैं. उनमें अजीब-सा आकर्षण होता है. टेक्स्ट मैसेजेस, चैटिंग की लत ऐसी लग जाती है कि रियल रिश्ते बोझ लगने लगते हैं और डिजिटल वर्ल्ड की रंगीन दुनिया हसीन लगने लगती है. लेकिन यह कुछ समय का ही नशा होता है, क्योंकि ये रिश्ते हमें ठगते ज़्यादा हैं और संबल कम देते हैं.

कम्यूनिकेशन की कमी: आसपास होते हुए भी आपस में बातचीत का न तो समय है, न ही इच्छा. अपनी-अपनी दुनिया में सभी व्यस्त हैं. एक-दूसरे के सुख-दुख को जानने-समझने की फुर्सत ही नहीं रह गई. धीरे-धीरे रिश्तों में ख़ामोशी पसर जाती है और न जाने कब

एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं. हर रिश्ते की मज़बूती के लिए बेहद ज़रूरी है आपसी बातचीत यानी कम्यूनिकेशन, पर उसकी कमी के चलते रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं और जब तक एहसास होता है, तब तक देर हो चुकी होती है.

– योगिनी भारद्वाज

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पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

पुरुषों की ऐसी कई आदतें हैं, जो उनसे जुड़े लोगों को पसंद नहीं आतीं और आगे चलकर यही आदतें झगड़े का कारण भी बनती हैं, ख़ासतौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में. फिर धीरे-धीरे छोटे-छोटे झगड़ों से ही रिश्ते में तनाव आने लगता है और रिश्ते बिगड़ जाते हैं. आइए, संक्षेप में इसके बारे में जानते हैं.

Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship

– पुरुषों में ईगो यानी अहंकार ख़ूब होता है. वे अपने अहंकार के आगे भावनाओं की कद्र बहुत कम करते हैं. उनकी इस आदत से उनकी पार्टनर बहुत दुखी रहती है और बार-बार ऐसा होने पर वह अपने रिश्ते में घुटन महसूस करने लगती है.

– ऐसे कई पुरुष होते हैं, जो अपनी बात पर कायम नहीं रहते. वे आज कुछ कहते हैं और बाद में उनका स्टेटमेंट कुछ और हो जाता है. इससे रिश्तों में दरार पड़ते देर नहीं लगती.

– ऐसे पुरुषों पर महिलाएं कम ही विश्‍वास करती हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कल वह अपनी बात से मुकर जाएंगे.

– यह मानी हुई बात है कि जब रिश्ते में विश्‍वास ही न हो, तो वह टिकेगा कैसे. ऐसे में पत्नियां तो अपने ऐसे पतियों की किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेती हैं और अपनी बातें शेयर करने से भी कतराती हैं.

– क्योंकि पति की बात-बात पर पलट जाने की आदत पत्नी के मन में संशय के बीज बो देती है और रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है.

– ऐसे पुरुषों की भी कमी नहीं है, जो अपने घर-परिवार को बिल्कुल वक़्त नहीं देते. उन्हें लगता है कि पैसे कमाकर घर में दे देना ही बहुत है. जबकि परिवार को उनके साथ समय बिताने की अधिक ज़रूरत होती है. ऑफिस से घर आकर वे मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर पर चिपक जाते हैं, जो सही नहीं है.

– मनोवैज्ञानिक शामा गुप्ता कहती हैं कि पुरुषों का घर को समय न देना, उससे जुड़े सभी रिश्तों को प्रभावित करता है, विशेषतौर पर जीवनसाथी से. तब वह इस बात को लेकर झगड़ती रहती है या अपनी एक अलग दुनिया बना लेती है और ज़्यादा समय बाहर गुज़ारना शुरू कर देती है. इसका परिणाम अक्सर अलगाव के रूप में दिखाई देता है.

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– पुरुषों की ज़रूरत से ज़्यादा कंट्रोल करने की आदत से भी रिश्तों में दम घुटने की नौबत आ जाती है.

– साथ ही पुरुषों का बेहद ख़्याल रखने की आदत से भी रिश्ते ख़राब होने लगते हैं.

– शामा गुप्ता कहती हैं कि पार्टनर को भी हक़ है कि वह ख़ुद कुछ निर्णय ले सके और तय कर सके कि उसे क्या करना है. पुरुष का प्रोटेक्टिव होना अच्छी बात है, पर वह इतना भी ख़्याल न रखे कि पार्टनर उसके बिना कुछ कर ही न पाए. इस तरह तो उसका वजूद ही डगमगाने लगता है और कई बार विद्रोह की नौबत आ जाती है.

– अधिकतर पुरुषों की वीकेंड पर देर तक सोने और नहीं नहाने की आदत होती है, जिससे पत्नी परेशान हो जाती है. यह क्या बात हुई कि हर चीज़ बेड पर ही चाहिए. बेड पर ही चाय, कॉफी, लंच और डिनर लेते हैं. दिनभर टीवी पर न्यूज़ और क्रिकेट देखते रहते हैं. और यदि आपने उन्हें नहाने के लिए कह दिया, तो समझो आपने उनका वीकेंड ख़राब कर दिया.

– कई पति इतने लापरवाह होते हैं कि वे अपना गीला तौलिया बिस्तर पर, गंदे मोज़े सोफे के नीचे डाल देते हैं. पत्नी अगर उनके बैग से लंच बॉक्स न निकाले, तो वह बाहर निकलेगा ही नहीं. और न जाने क्या-क्या करते हैं. घर को सजाकर रखनेवाली व व्यवस्थित तरी़के से रहनेवाली सफ़ाई पसंद पत्नी को अपने पति की ये आदत बिल्कुल भी पसंद नहीं आती है.

– पार्टनर ग़लती करे, तो उससे माफ़ी मंगवाए बिना न रहनेवाले पुरुष अपनी ग़लती को कभी मानने को तैयार नहीं होते. पुरुषों की यह ग़लती स्वीकार नहीं करने की आदत से भी महिलाओं को बहुत परेशानी होती है.

– कई पुरुषों की आदत होती है कि लड़ाई-झगड़ा होने पर पुरानी बातों को लेकर ताने-उलाहने देने लगते हैं. उनकी कुरेदने की यह आदत रिश्तों में कड़वाहट ला देती है. अतः यह ज़रूरी है कि हर पुरुष उपरोक्त सभी बातों पर ध्यान दें और उनमें उचित सुधार लाएं, जिससे रिश्तों की डोर मज़बूत बनी रहे.

– सुमन वत्स

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हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

‘अब रिश्तों में वो पहलेवाली मिठास नहीं रही, सब प्रैक्टिकल हो गए हैं…’ आजकल यह जुमला आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. वैसे तो रिश्ते निभानेवालों पर निर्भर करते हैं, जो बदलती लाइफस्टाइल में भी रिश्तों को निभाने के गुर सीख लेते हैं. लेकिन अगर आपको भी ऐसा ही लगने लगा है कि आपके रिश्ते कमज़ोर होने लगे हैं, तो उन्हें ज़रूरत है सुरक्षा कवच की, जो उन्हें मज़बूती प्रदान करें. तो आइए देखें, क्या हैं वो रिश्तों के सुरक्षा कवच? 

Smart Tips to Protect Your Relationship

 

हेल्दी कम्यूनिकेशन

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि रिश्तों में बातचीत होती रहनी चाहिए. भले ही लड़ाईझगड़ा हो, पर ख़ामोशी नहीं आनी चाहिए, वरना रिश्तों का दम घुटने लगता है. हेल्दी कम्यूनिकेशन आपके रिश्तों को मज़बूत बनाए रखता है.

हमेशा फेस टु फेस यानी आंखों में आंखें डालकर बात करें. इधरउधर देखते हुए अपनी बात कभी न कहें.

रिश्तों को हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो बातचीत की पहल ख़ुद करें.

बातों के साथ बॉडी लैंग्वेज का भी हमेशा ख़्याल रखें.

आपकी बातों और चेहरे की भावभंगिमाओं में तारतम्य होना चाहिए. ऐसा न हो कि आप कुछ कह रहे हैं और आपका चेहरा कुछ और.

बातचीत करते समय अगर सामनेवाला कुछ कह रहा है, तो उसकी बात काटकर अपनी बात कहने की कोशिश न करें. सामनेवाले को पूरा सुनें, फिर बोलें.

हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए बोलने से ज़्यादा सुनना ज़रूरी है, इसलिए शांति से दूसरे की बात सुनें.

जब दो से ज़्यादा लोग बातचीत कर रहे हों, तो नॉन वर्बल सिग्नल्स का भी ख़्याल रखें.

बात करते समय ऊंची या एग्रेसिव आवाज़ में बात न करें, वरना ऐसा लगेगा कि आप सामनेवाले की बात को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.

अक्सर लोग सामनेवाले की बात समझने की बजाय उनसे ख़ुद को समझने की उम्मीद करते हैं. हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए ज़रूरी है कि आप पहले ख़ुद दूसरे को समझें, तभी किसी से उम्मीद करें.

टेक्नोलॉजी का भरपूर फ़ायदा उठाएं. कम्यूनिकेशन के लिए फ्री मैसेजिंग ऐप्स, वीडियो कॉलिंग आदि का इस्तेमाल करें.

याद रहे, अगर 80% कोशिश आप करेंगे, तो 20% पहल वहां से भी होगी. इसलिए हेल्दी रिश्ते के लिए आप क्या कर रहे हैं, इस पर ध्यान दें.

अगर आपने कोई बात ग़लत कह दी हो, तो तुरंत ‘सॉरी’ कह दें. रिश्तों में जितना सहज रहें, उतना अच्छा है.

हेल्दी बाउंड्रीज़

हेल्दी रिश्तों के लिए आज़ादी के साथसाथ हेल्दी बाउंड्रीज़ भी ज़रूरी हैं. रिश्तों की मर्यादा रिश्तों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा कवच का काम करते हैं.

हर रिश्ते में अगर प्राइवेसी का ख़्याल रखा जाए, तो रिश्ते कमज़ोर नहीं होते. एकदूसरे की भावनाओं को समझना ही रिश्ते को मज़बूती प्रदान करता है.

हर रिश्ते की अपनी एक बाउंड्री होती है, जिसे हम पर्सनल स्पेस कहते हैं. घर के हर मेंबर को उसका पर्सनल स्पेस एंजॉय करने का पूरा हक़ है.

रिश्ते कितने ही गहरे क्यों न हों, ठेस लगनेवाली बातें कभी न कहें.

कुछ रिश्तों को हम फॉर ग्रांटेड लेते हैं, पर आप ऐसा न करें. सभी को वही मानसम्मान दें, जिसकी आप ख़ुद के लिए उम्मीद रखते हैं.

रिश्तों में प्यार बढ़ाने के लिए हंसीमज़ाक बहुत ज़रूरी है, पर जानबूझकर मज़ाक उड़ाना आपके रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है.

हेल्दी रिश्तों के लिए थोड़ीबहुत शरारतें और टांगखिंचाई चलती है, पर ध्यान रहे कि उससे कोई आहत न हो जाए.

अपने मायके की बुराई से महिलाएं बहुत जल्दी चिढ़ जाती हैं, इसलिए जानबूझकर वहां की कभी बुराई न करें.

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हेल्दी रिलेशनशिप बूस्टर्स

किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए क्वालिटी टाइम बहुत मायने रखता है. अपने रिश्ते को हेल्दी बनाए रखने के लिए आपको भी अपनी फैमिली के साथ भरपूर क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए. साथ ही ध्यान रखें कुछ और ज़रूरी बातों का.

एकदूसरे से रियलिस्टक यानी वास्तविक अपेक्षाएं रखें. आपके परिवार की आर्थिक स्थिति आपसे बेहतर कौन जान सकता है, इसलिए पैरेंट्स, पार्टनर या फिर भाईबहन से ऐसी अवास्तविक उम्मीदें न पालें.

रिश्तों की मज़बूती फ्लेक्सिबिलिटी पर भी निर्भर करती है, इसलिए अगर घर का कोई सदस्य कुछ नया बदलाव ला रहा है, तो बेवजह विरोध न करें. पहले मामले को समझें, तभी कुछ कहें.

बेहतर रिश्तों के लिए परिवार में सभी से पॉज़िटिव टच बनाए रखें, बातें करें, साथ में किताब पढ़ें, टीवी देखें, जो करना

है करें, पर अपनेअपने मोबाइल में बिज़ी न रहें.

अगर आपके परिवार में किसी को गाने का शौक़ है, तो कभीकभार साथ में अंताक्षरी खेलें.

महीनेदो महीने में मिलकर कहीं घूमने जाएं. आपके साथसाथ आपके रिश्ते भी रिफ्रेश होंगे.

अगर आपके पार्टनर, भाईबहन या फिर मांपिताजी को किसी चीज़ का शौक़ है या वो किसी की मदद करना चाहते हैं, तो उनकी मदद करें.

हफ़्ते में एक दिन फैमिली कुकिंग टाइम बनाएं, जहां घर का हर सदस्य किचन में मदद करेगा. साथ में काम करने

से एकदूसरे के लिए मन में कड़वाहट नहीं आती.

घर के सभी मेंबर्स मिलकर कोई कॉमेडी शो देखें. इससे घर का माहौल भी हल्काफुल्का रहता है.

रिश्तों में औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ न करें, जो भी करें पूरे दिल से करें, जैसेअगर किसी मामले में बड़ों की राय ले रहे हैं, तो सोचसमझकर उसे अमल में भी लाएं, वरना उन्हें लगेगा कि आपने स़िर्फ औपचारिकता के लिए पूछा था.

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हेल्दी लव लैंग्वेजेज़

ये आपके रिश्ते के लिए ऑक्सीजन का काम करते हैं. प्यार और अपनेपन के बिना कोई रिश्ता फलफूल नहीं सकता. यह आपके रिश्ते का एक महत्वपूर्ण कवच है, जो उसे मुरझाने से बचाता है.

परिवार में रोज़ाना एकदूसरे से ये तीन लाइनें कहेंआई लव यू, आई नीड यू, आई रिस्पेक्ट यूये चंद लाइनें आपके रिश्ते में ईगो और निगेटिविटी को हावी नहीं होने देतीं.

चाहे पार्टनर्स हों या फिर दूर रह रहे बच्चे या पैरेंट्स, रोज़ाना 2 मिनट फॉर्मूला अपनाएं. हर रोज़ 2 मिनट फोन पर बात करें और इस दौरान कोई दूसरा काम न करें, बल्कि स़िर्फ उसकी सुनें और अपनी कहें.

थैंक्यू’ और ‘सॉरी’ जैसे मैजिकल शब्द लव लैंग्वेज का हिस्सा हैं. अगर कोई आपके लिए कुछ भी ख़ास करता है, तो उसे थैंक्यू कहने में बिल्कुल कंजूसी न करें.

सरप्राइज़ेस सभी को अच्छे लगते हैं. कभीकभार बिना किसी ओकेज़न के ही एक ख़ूबसूरत गिफ्ट अगर किसी को मिले, तो वो बेशक ख़ुश हो जाएगा.

रिश्ते में सच्चाई और ईमानदारी जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी है केयरिंग. यह लव लैंग्वेज आपके अपनों को आपके प्यार से रूरू कराती है.

एकदूसरे के लिए अपनी भावनाओं का ज़िक्र करें. ऐसा ज़्यादातर पैरेंट्स करते हैं कि बच्चों को भले ही कितना प्यार क्यों न करें, कभी उनसे बताते नहीं. माना प्यार बोलकर जताया नहीं जाता, पर कभीकभी यह सुनना अच्छा लगता है.

जब भी मौक़ा मिले, अपने पैरेंट्स को यह बताने से कभी न चूकें कि उन्होंने आपके लिए बहुत कुछ किया है. आज आपकी ख़ुशहाली का सारा श्रेय उन्हीं को जाता है.

अगर किसी की तबियत ख़राब है, तो उसकी दवा ख़त्म होने से पहले दवा लाकर रखना, कोई खाने का शौक़ीन है, तो उसकी फेवरेट डिश लेकर जाना, संगीत के शौक़ीनों के लिए फेवरेट सिंगर का कलेक्शन देना, जैसी छोटीछोटी बातें आपके रिश्ते को ख़ुशहाल बनाती हैं.

रिश्तों को मज़बूत बनाए रखने के लिए मेंटेनेंस की भी ज़रूरत पड़ती है. अपने प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से रिश्तों को मेंटेन करते रहें.

सुनीता सिंह

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