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पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

Pahla Affair

पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

पहले प्यार (First Love) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

कई बार दिल के डूबने का अंदाज़ भी निराला होता है कि हम परेशानी की वजह ढूंढ़ने में लंबा अरसा लगा देते हैं. आदेश का ख़त हाथ में है और मैं माज़ी के समंदर में गोते लगा रही हूं. पूरे तीन साल तक जिसके नाम की अंगूठी पहने रही, आज हाथ की उंगली पर उसके निशां उसकी बेवफ़ाई की दास्तां कह रहे हैं.

अब तो हाथ की लकीरें भी मुझे मुंह चिढ़ा रही हैं. धीरे-धीरे रंगीन ख़्वाबों की डोर हाथों से छूटने लगी… अब तो आदेश के साथ बंधे रिश्तों में गांठें-सी पड़ गई हैं. ख़त क्या है, सफ़ाई का एक छोटा-सा मज़मून. मैं आवेश में आ ख़त को मुट्ठी में मरोड़ने लगती हूं. बेबस परिंदे से पन्ने, मेरे हाथों में फड़फड़ा रहे हैं. एक झटके में अपने से यूं रिहा करना, मेरे भीतर एक ज्वालामुखी धधक रहा है.

मन में एक युद्ध छिड़ा है. अरे! तेरे पापा इतने भी नासमझ न थे कि दो दिलों की धड़कन न सुन पाएं. बोलो, विजातीय होने से क्या प्यार की पौध नहीं पनपती. सवालों का बवंडर है, जो मेरा चैन छीन रहा है. अतीत से चाहे जितना भागो, लेकिन माज़ी का भूत पीछा कब छोड़ता है. परछाईं-सा संग-संग डोलता है. उसके हर ख़त का इंतज़ार, हर आहट पर चौंक जाना मेरी आदत-सी बन गई. कहीं और गुल सजाना था, तो इस अभागन की पलकों पर सपनों का फरेबी जाल क्यों बिछाया?

अब लग रहा है जैसे आदी शब्दों की भेड़चाल से सभ्यता का दायरा पार कर, मुझसे किनारे का कोई सिरा ढूंढ़ रहा हो. आज मेरे मन को छूकर निकले वो पल रेत से खिसक रहे हैं.

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मैंने फोन पर आदी से मिलने की आख़िरी इल्तिजा की. मैं उसके चेहरे के बदलते रंगों का जायज़ा लेना चाहती थी. साथ ही मन के किसी कोने में भय का भूत कुंडली मारे बैठा था. अगले दिन बाग में हम दोनों मिले. वह हाथ में भुट्टा लेकर मस्त चाल से मेरी ओर मुड़ा. मैं रुंधे गले से केवल इतना कह पाई, “आदेश! ज़रा सोचो, मुझे मझधार में छोड़ तुम किसी का हाथ थाम नई ज़िंदगी बसा लोगे… मेरा क्या…?”

मेरी आवाज़ भर्रा गई. उसके कांधे पर सिर रखकर मैं सिसक पड़ी. मेरी पीठ थपथपाते हुए उसने कहा, “कुछ करता हूं जूही, प्लीज़ रो मत.”
मैं उदास मन से घर लौटी. मां पूछती रह गई. मैं सोचती रही कि निराधार पुरातन संस्कारों तले दबे रहकर अपने प्यार की आहूति क्यों दी जाए?

मेरे घर उसका अक्सर आना-जाना था. मेरे घर में सब राज़ी थे. मेरे पिता तो थे नहीं, मां बेहद कोमल स्वभाव की थीं. मां अक्सर उसका मनपसंद खाना बनाकर उसे चाव से खिलाती थीं, पर सुना था उसके पिता ज़िद्दी स्वभाव के थे.

एक रोज़ चाचा की मौत की ख़बर सुनकर अचानक हमारा गांव जाना हुआ. वापस लौटे, तो ख़त मिला. उसका विवाह हो चुका था. उसके पिता की चाल थी या उसकी भी सहमति… पता नहीं! पर मेरा पहला प्यार अधूरा ही रह गया…

काश! उस पहले प्यार के नक्शे अपने मन की किताब से मिटा पाती… अब मैं हूं, तन्हाई है… वही परछाईं बन मेरे संग-संग डोलती है.

– मीरा हिंगोरानी

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रिश्तों को आजकल हुआ क्या है? (What Is Wrong With Relationship These Days?)

जिस्मों के रिश्ते हैं, आज की रूहों की यही हक़ीक़तें हैं… जज़्बात ग़ायब हैं, एहसास गुमसुम-से… हसरतें बेहिसाब हैं… वासनाओं पर मर्यादाओं का पहरा अब नहीं है, साथ जीने-मरने की क़समों का इरादा अब नहीं है… ख़ालिस मुहब्बत अब बंधन-सी लगती है, बेपनाह चाहत अब बेड़ियां बन गई हैं… अपने तरी़के से जीने का शग़ल, है हर कोई अपनी ही धुन में मगन… एक-दूसरे के साथ रहता तो है तन, पर न जाने कहां भटका हुआ है यह मन…

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–     इसे मॉडर्न होने की परिभाषा कहें या प्रैक्टिकल सोच, लेकिन सच है कि रिश्तों में अब वो पहले वाली गहराई नहीं रही.

–     ऐसा नहीं है कि लोग जुड़ते नहीं हैं, लेकिन ये जुड़ाव अब क्षणिक होता है.

–     रिश्तों में अब एडजेस्टमेंट करने की जगह न के बराबर बची है, क्योंकि दोनों पार्टनर्स में से किसी को भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करना है.

–     शादी के रिश्ते में एक साथ होते हुए भी अलग-अलग हैं.

–     आज दोनों पार्टनर्स वर्किंग होते हैं, ज़ाहिर है लाइफस्टाइल इतनी बदल गई है कि रिश्तों में भी बदलाव आ गया है. लेकिन ये बदलाव इस कदर हावी हो रहा है कि हम ख़ुद भी सोचते हैं कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

–     डबल इन्कम नो किड्स से लेकर अब नौबत डबल इन्कम नो सेक्स तक पहुंच चुकी है. सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     जो बची-खुची एनर्जी है, वो सोशल मीडिया पर ज़ाया हो रही है.

–     डिनर के टेबल पर सब अपने मोबाइल फोन्स के साथ बैठते हैं. कहने को साथ खाना खा रहे हैं, पर कनेक्टेड कहीं और ही रहते हैं… बच्चे पिक्चर्स क्लिक करके फ्रेंड्स के साथ शेयर करते हैं और बड़े अपने-अपने क्रश या दोस्तों के साथ.

–     पति-पत्नी बेड पर अपने-अपने फोन्स के साथ ही होते हैं… दोनों को परवाह नहीं कि कौन, किससे बात कर रहा है, न ही इस बात की फ़िक्र है कि आपस में इतनी देर से कोई बातचीत उनके बीच नहीं हो रही.

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Relationship Problems

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

नो कमिटमेंट: लोग आकर्षित तो होते हैं, प्यार भी करते हैं, पर कमिटमेंट से डरते हैं. आजकल इतनी जल्दी रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं कि लोग ख़ुद भी यह तय नहीं कर पाते हैं कि इस रिश्ते में उन्हें कब तक रहना है. उन्हें लगता है, जब तक चल रहा है, चलने देते हैं, कोई और मिल गया, तो वहां चले जाएंगे, क्योंकि कौन-सा हमको शादी करनी है. यही वजह है कि रिश्ते नॉन सीरियस होते जा रहे हैं.

कैल्कुलेटिव हो रहे हैं: आजकल रिश्ते ज़रूरी नहीं, बल्कि ज़रूरत के रिश्ते रह गए हैं, जिनसे हमारा स्वार्थ सिद्ध हो, वो उस समय के लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण होते हैं. मतलब निकलने के बाद एक-दूसरे को पहचानते भी नहीं.

प्रैक्टिकल अप्रोच: हम अब प्रैक्टिकल हो गए हैं. हमारे अनुभव भी हमें यही सीख देते हैं कि इमोशनल होना स़िर्फ बेव़कूफ़ी है. बेहतर है, जितना प्रैक्टिकल रहें, उतना फ़ायदा होगा. शहरों में वर्क लाइफ के बाद स़िर्फ वीकेंड में अपने लिए समय मिलता है. उसमें हम अपनों के साथ समय बिताने की बजाय उन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, जिनसे हमें कोई न कोई फ़ायदा हो.

स्पेस के नाम पर बढ़ती दूरियां: ‘स्पेस…’ आजकल यह शब्द काफ़ी घर कर गया है हमारे रिश्तों में भी. हर किसी को स्पेस चाहिए यानी रिश्ते में बंधने के बाद भी कोई बंधन न हो. यह अजीब सोच है, क्योंकि प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे से कुछ छिपाने की ज़रूरत ही नहीं होनी चाहिए. जब सब कुछ साझा है, तो छिपाना क्या है और क्यों है? पर अक्सर कपल्स को कहते सुना है कि हमें स्पेस चाहिए, वरना रिश्ते में दम घुटने लगता है. हां, यह सही है कि कोई सिर पर सवार न रहे हमेशा, न ही हर बात पर टोके, पर स्पेस के नाम पर हर बात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता.

सेक्स, आज नहीं: काम का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि सेक्स के लिए एनर्जी ही नहीं बचती. यहां तक कि अब तो सेक्स की इच्छा भी नहीं होती. ऑफिस में अधिकतर समय गुज़ारने के चलते कलीग्स से इतनी नज़दीकियां बढ़ जाती हैं कि पार्टनर से ज़्यादा आकर्षण उनमें नज़र आने लगता है. ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे से दूरी बनाने लगते हैं. सेक्स के लिए कोई एक क़रीब आना भी चाहे, तो दूसरा बहाना बना देता है कि आज नहीं, बहुत थकान है या सुबह जल्दी उठना है… आदि.

डिजिटल रिश्ते रियल रिश्तों पर हावी: सोशल साइट्स के रिश्ते अब ज़्यादा भाने लगे हैं. उनमें अजीब-सा आकर्षण होता है. टेक्स्ट मैसेजेस, चैटिंग की लत ऐसी लग जाती है कि रियल रिश्ते बोझ लगने लगते हैं और डिजिटल वर्ल्ड की रंगीन दुनिया हसीन लगने लगती है. लेकिन यह कुछ समय का ही नशा होता है, क्योंकि ये रिश्ते हमें ठगते ज़्यादा हैं और संबल कम देते हैं.

कम्यूनिकेशन की कमी: आसपास होते हुए भी आपस में बातचीत का न तो समय है, न ही इच्छा. अपनी-अपनी दुनिया में सभी व्यस्त हैं. एक-दूसरे के सुख-दुख को जानने-समझने की फुर्सत ही नहीं रह गई. धीरे-धीरे रिश्तों में ख़ामोशी पसर जाती है और न जाने कब

एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं. हर रिश्ते की मज़बूती के लिए बेहद ज़रूरी है आपसी बातचीत यानी कम्यूनिकेशन, पर उसकी कमी के चलते रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं और जब तक एहसास होता है, तब तक देर हो चुकी होती है.

– योगिनी भारद्वाज

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सेक्सुअल परफॉर्मेंस बढ़ाने के 10 मैजिक ट्रिक्स (10 Magic Tricks For Best Sexual Performance)

सेक्स लाइफ (Sex Life) शादीशुदा ज़िंदगी की नींव होती है. आपकी सेक्स लाइफ जितनी बेहतर होगी, मैरिड लाइफ उतनी ही ख़ुशगवार और दिलचस्प होगी. पर अक्सर छोटी-छोटी ग़लतियां या छोटी बातों को अनदेखा कर आप पअनी सेक्स लाइफ को ख़ुद बोरिंग बना लेते हैं, लेकिन अगर आप अपनी सेक्स लाइफ को लेकर जागरूक हैं, तो यह आपकी मैरिड लाइफ में मैजिक की तरह काम करेगी. यहां हम आपको सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बढ़ाने (Increase Sexual Performance) के 10 मैजिक ट्रिक्स (Tricks) बता रहे हैं, तो आप भी अपनाएं ये मैजिक ट्रिक्स और अपनी सेक्स लाइफ को इंट्रेस्टिंग बनाएं.

 Best Sexual Performance

1. फोरप्ले पर फोकस करें: ज़्यादातर कपल्स यहीं मार खा जाते हैं. इसमें भी पुरुषों का बड़ा अहम् रोल होता है, क्योंकि महिलाओं को न स़िर्फ मूड में लाने के लिए, बल्कि एक अच्छी शुरुआत के लिए भी फोरप्ले बहुत ज़रूरी है. बेड पर जाने पर थोड़ी देर प्यारभरी छुअन, किसिंग और थोड़ी नॉटी बातें आप दोनों की सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बेस्ट बना देगी.

2. सेक्स बूस्टर फूड्स और वेजीटेबल्स: लहसुन-प्याज़ बेस्ट सेक्स बूस्टर्स माने जाते हैं, इसलिए इन्हें अपने रोज़ाना के खाने में शामिल करें. इसके अलावा केला और तरबूज़ शरीर में ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं, जिससे आपका सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर होता है. ये फल व सब्ज़ियां आपकी सेहत के लिए जितने फ़ायदेमंद हैं, उतनी ही आपकी सेक्स लाइफ के लिए भी.

3. एक्टिव रहें: रोज़ाना 30 मिनट की कार्डियोवैस्कुलर एकसरसाइज़ आपके दिल के साथ-साथ आपकी सेक्स लाइफ को भी बूस्ट करने में बदद करती है. अगर रोज़ाना मुमकिन नहीं, तो हफ़्ते में कम से कम 5 दिन रनिंग या स्विमिंग करें. याद रखें, आप जितने ज़्यादा एक्टिव रहेंगे, आपकी सेक्सुअल परफॉर्मेंस पर उसका उतना ही अच्छा प्रभाव पड़ेगा.

4. हेल्दी फैट्स अपनाएं: ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर ऑलिव ऑयल, एवोकैडो, साल्मन फिश को अपनी डायट में शामिल करें. इसके अलावा अंडा विटामिन बी के गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर में हार्मोंस के लेवल को सुचारू बनाए रखता है. ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर में रक्तसंचार को बेहतर बनाता है, जो सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बूस्ट करने में आपकी मदद करता है.

5. पुरुषों के लिए स्टार्ट-स्टॉप टेकनीक: सेक्स के दौरान पुरुषों को कुछ स्मार्ट टेकनीक्स अपनानी चाहिए. आपको स्टार्ट-स्टॉप टेकनीक अपनानी चाहिए, इसलिए आप अपने प्लेज़र टाइम को बढ़ा सकते हैं.

6. कुछ नया ट्राई करें: सेक्स को रूटीन न बनाएं. हर दिन इसे एक नए नज़रिए और एक्सपीरियंस से देखें. पोज़िशन्स में कुछ नया ट्राई कर सकते हैं. कुछ रोमांटिक करें, कभी-कभार फिल्मी हो जाने में कोई हर्ज़ नहीं.

7. पार्टनर को पैंपर करें: संभोग का मतलब ही होता है कि दोनों पार्टनर उसे समान रूप से भोगें. दोनों को ही उतना प्लेज़र मिलना चाहिए, इस बात का ख़्याल दोनों ही पार्टनर्स को रखना चाहिए. इसके लिए आप पार्टनर को पैंपर ज़रूर करें. पैंपरिंग सभी को अच्छी लगती है. उनकी तारीफ़ करें, कोई सरप्राइज़ गिफ्ट दें, उनकी पसंद को तवज्जो दें. यकीन मानिए आपकी सेक्स लाइफ में बड़ा बदलाव नज़र आएगा. ये मैजिक ट्रिक हमेशा काम करता है.

8. खुलकर बातें करें: हर पार्टनर यह उम्मीद करता है कि उसका पार्टनर उससे कुछ न छिपाए. अपने दिल की सारी बातें उससे शेयर करें. ये सुनने में जितना आसान लगता है, उतना शायद है नहीं, क्योंकि हर व्यक्ति किसी न किसी मनोस्थिति से गुज़रता रहता है, ऐसे में अपने मन की गांठें खोलना सभी के लिए आसान नहीं. पर सेक्स एक्सपर्ट की मानें, तो यह ट्रिक न स़िर्फ आपकी मैरिड लाइफ को मज़बूत बनाएगा, बल्कि आप दोनों की बॉन्डिंग इतनी स्ट्रॉन्ग हो जाएगी कि सेक्स लाइफ अच्छी होनी ही है.

9. स्ट्रेस को भगाओ: अगर अपनी सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले स्ट्रेस को दूर भगाएं. यह आपकी सेहत के साथ-साथ आपकी मैरिड लाइफ के लिए भी एक नुकसानदेह है. ख़ुद को ख़ुश रखने की कोशिश करें. इस बात को अपने दिमाग़ से निकाल दें कि पूरी दुनिया का बोझ आपके ही कंधों पर है. आपके स्ट्रेसफ्री रहने से कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा. इसलिए ख़ुद भी ख़ुश रहें और पार्टनर को भी ख़ुश रखें.

10. एक्सपर्ट एडवाइस लें: अगर आपको लगता है कि ये मैजिक ट्रिक्स भी आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर नहीं बना पा रही हैं, तो तुरंत किसी अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट से मिलें.

– अनीता सिंह

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शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

अगर आपकी नई-नई शादी (New Marriage) हुई है और अचानक से अपने बढ़े हुए वज़न (Increased Weight) को लेकर आपके मन में कई सवाल उठे हैं और आप परेशान हैं, तो परेशान न हों. आपके सभी सवालों के जवाब यहां आपको मिलेंगे कि आख़िर शादी के बाद आपका वज़न इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा है? द ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक शादी के 5 साल के भीतर 82% कपल्स का वज़न 5-10 किलो तक बढ़ जाता है. इसमें महिलाओं का वज़न पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है. लाइफस्टाइल में बदलाव के अलावा और क्या हैं कारण?

Weight Gain After Marriage

1. खानपान की आदतों में बदलाव

आपके मायके और ससुराल के खानपान में अंतर है. मसाले और पकाने की टेक्नीक दोनों जगह अलग है, जिसके कारण आपकी पाचनक्रिया पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा मायके खाने के बाद टहलना, मॉर्निंग वॉक जैसी चीज़ें आपके रूटीन में शामिल थीं, जो यहां नहीं हैं.

2. अक्सर बाहर खाना

शादी के बाद से ही दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां खाने का सिलसिला जो शुरू होता है, वो कई हफ़्तों तक जारी रहता है. इस बीच हनीमून पर आप बेरोक-टोक हर तरह के खाने को एंजॉय करते हैं, जिससे ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं.

3. प्राथमिकताएं बदल जाती हैं

शादी के बाद आप पति और ससुरालवालों की पसंद से खाना बनाती हैं और इंप्रेस करने के चक्कर में ख़ूब घी, तेल, मसाला इस्तेमाल करती हैं. इतनी मेहनत से बनाया खाना ख़राब न हो, इस चक्कर में ओवरईटिंग भी कर लेती हैं. समय के साथ बदली ये प्राथमिकताएं आपका वज़न बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

4. लापरवाह हो जाती हैं

शादी के दिन स्टनिंग दिखने के लिए खाने-पीने पर ध्यान रखना, एक्सरसाइज़ करना, स्ट्रेस न लेना जैसी चीज़ें शादी के बाद लगभग पूरी तरह बदल जाती हैं. न चाहते हुए भी स्ट्रेस आ ही जाता है और बाकी कामों के चलते एक्सरसाइज़ का व़क्त नहीं मिलता. खाने का समय बदल जाता है और कहीं न कहीं यह सोच घर कर जाती है कि अब तो शादी हो गई, अब क्या फ़र्क़ पड़ता है.

5. नींद की कमी

शादी के बाद सोने का समय और पैटर्न दोनों ही बदल जाते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती. नींद की कमी भी वज़न बढ़ने का एक कारण है.

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After Marriage

6. पार्टनर का पैंपर करना

शादी के बाद सभी कपल्स एक-दूसरे पर अपना प्यार न्योछावर करने और ख़ुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते. एक-दूसरे को पैंपर करने के लिए केक, पेस्ट्रीज़, चॉकलेट्स, पिज़्ज़ा, पास्ता जैसी सरप्राइज़ ट्रीट देते रहते हैं. कैलोरीज़ से भरपूर ये फैटी चीज़ें वज़न बढ़ाती हैं.

7. स्ट्रेस ईटिंग करना

शादी के बाद नए माहौल में ढलना थोड़ा मुश्किल होता है, ऐसे में अगर दुल्हन वर्किंग है, तो उसकी ज़िम्मेदारियां और भी बढ़ जाती है. ऑफिस के साथ-साथ घर पर भी अपना बेस्ट देने की कोशिश में हमेशा स्ट्रेस में रहती हैं और स्ट्रेस ईटिंग की शिकार हो जाती है.

8. हार्मोनल बदलाव

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण तेज़ी से वज़न बढ़ता है. इसके अलावा सेक्सुअल एक्टिविटीज़ के कारण होनेवाले हार्मोनल बदलाव भी इसका कारण बनते हैं. हांलाकि कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं, पर वज़न बढ़ाने में हार्मोंस का अहम् रोल होता है, यह सभी मानते हैं.

9. मेटाबॉलिक बदलाव

आजकल ज़्यादातर कपल्स 28-30 साल की उम्र में शादी करते हैं. इस समय शरीर के मेटाबॉलिक रेट में बदलाव आता है, जिससे वज़न पहले के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है.

10. प्रेग्नेंसी

बहुत-सी महिलाएं शादी के बाद ही कंसीव कर लेती हैं, जिससे परिवारवाले उसे पैंपर करने के लिए ओवर न्यूट्रीशियस चीज़ें खिलाते हैं, जिसे  डिलीवरी के बाद भी वो कम नहीं कर पातीं.

वेट कंट्रोल के लिए क्या करें?

– घर में हर कोई खाना खा ले, उसके बाद मैं खाऊंगी वाला एटीट्यूट बदलें. नियमित समय पर खाना खाएं. ओवरईटिंग से बचें.

– अपने लुक्स के प्रति लापरवाह न हों.

– स्ट्रेस ईटिंग से बचने के लिए ख़ुद को ख़ुश रखें.

– एक-दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने के लिए योगा क्लासेस या जिम जॉइन करें.

– अनीता सिंह     

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पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

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पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

क्यों इस तरह अधूरा छोड़कर चले गए तुम मुझे… मुकम्मल होने को बेक़रार था इस बार मेरा तन-मन, तुम्हारे साथ, तुम्हारी उस छुअन की वो सिहरन… तुम्हारा यूं लगातार मुझे देखते रहना… अपने हाथों से मुझे खाना खिलाना… इतना सारा व़क्त हमने एक साथ गुज़ारा… फिर ये कैसी प्यास जगाकर मुझे तन्हा छोड़ दिया… जानती थी कि तुमको तो लौटना जाना है एक दिन अपने लोगों के बीच… अपनों में… पर मेरा क्या… मुझे अपना बनाकर क्यों बेगानों में यूं छोड़ गए?

तुमने तो कहा था कि इस बार जब मैं आऊंगा, तो तुमको अपने साथ ही लेकर जाऊंगा… फिर क्यों इस तरह बिना हमारी ज़िंदगी का फैसला किए तुम चले गए… कितने दिन बीत गए, न तुमने कोई फोन किया, न तुम्हारी कोई ख़बर आई…

मुझे लगने लगा है अब तो जैसे ये रिश्ता, ये प्यार बस एक फरेब था… तुम्हें जो चाहिए था, वो तुमने पा लिया… अब पीछे मुड़कर देखने के लिए क्या बचा था तुम्हारे लिए… अगर मेरी परवाह होती, तो ज़रूर हमारे प्यार का सिलसिला आगे बढ़ता…

मेरी ज़िंदगी तो रुकी हुई है अब भी उसी मोड़ पर, बस किसी तरह धक्का मारकर चला रही हूं… पर अब जो सच सबके सामने आएगा, उसका सामना मैं कैसे करूंगी… मैं प्रेग्नेंट हो गई हूं… और मेरे बच्चे को कौन अपनाएगा? यही सोच-सोचकर परेशान हूं… स़िर्फ रितिका को इस सच के बारे में पता है…

“हैलो, प्रिया… कैसी हो…?”

“रितिका, मैं कैसी हो सकती हूं तुम ही बताओ… मैं कुछ डिसाइड ही नहीं कर पा रही.”

“तुम इस बच्चे को जन्म देने के बारे में सोच भी कैसे सकती हो, जो इंसान तुमको मंझधार में छोड़कर चला गया, तुम उसके बच्चे को दुनिया में लाने के लिए सबसे दुश्मनी ले लोगी?”

“ये बच्चा स़िर्फ उसका ही नहीं, मेरा भी है… पर शायद तुम सच कह रही हो, बस, कल तक मैं कोई न कोई निर्णय ले लूंगी.”

आज ऑफिस में भी मन नहीं लग रहा… डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लेती हूं, भला मैं उस धोखेबाज़ इंसान के लिए अपनी ज़िंदगी दांव पर क्यों लगाऊं…

“प्रिया… सुनो, हैलो… प्रिया शर्मा!”

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अपना नाम सुनकर मैं चौंक गई, पीछे मुड़कर देखा, तो ये क्या… “विक्रम, तुम आज अचानक यूं? मैं तो समझी थी कि तुम अब तक भूल चुके होगे कि प्रिया नाम की भी कोई लड़की थी तुम्हारी ज़िंदगी में…”

“प्रिया, मुझे पता है, तुम मुझे फरेबी, धोखेबाज़ और न जाने क्या-क्या समझ रही होगी… पर मेरी मजबूरी थी…”

“ऐसी क्या मजबूरी थी विक्रम कि तुम एक फोन या एक मैसेज तक नहीं कर पाए?”

“प्रिया, हम किसी कॉफी शॉप में बैठकर बात करें?”

“बात करने के लिए अब बचा ही क्या है… मुझे डॉक्टर के पास जाना है, जो कहना है, यहीं कहो…”

“ठीक है प्रिया, दरअसल मैं जिस कंपनी में जॉब करता था, वहां बहुत बड़ा फ्रॉड हुआ था, जिन्होंने फ्रॉड किया था, उन्होंने मुझे बुरी तरह फंसा दिया था, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले ही उनकी शिकायत कंपनी के ओनर से की थी. मैं छुट्टी पर था, तो उन्होंने मौक़ा देखकर मुझे ही फंसा दिया और पुलिस में शिकायत तक दर्ज करवा दी.

मेरे घर वापस जाते ही पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार कर लिया और मैं इन सबके बीच तुमसे कोई संपर्क न कर सका…
मेरे दोस्तों ने सच्चाई का पता लगाया और पुलिस की जांच के बाद सारा सच सामने आ गया. मैं अगर मुजरिम हूं, तो बस तुम्हारा… और अब तुम्हारा ये मुजरिम तुम्हारे सामने है, जो सज़ा दोगी, मैं सहने को तैयार हूं.”

मेरी आंखों से आंसू बह निकले… कभी-कभी छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियां बड़े-बड़े रिश्ते तोड़ देती हैं…

“प्रिया, क्या सोच रही हो… और तुम डॉक्टर के पास क्यों जा रही हो? सब ठीक तो है न…?”

“विक्रम, आज तुम अगर नहीं आते, तो मुझसे बहुत बड़ा पाप हो जाता… क्या हम कॉफी शॉप पर चलकर बात करें…”

विक्रम और मैंने कॉफी शॉप में ढेर सारी बातें कीं…

“प्रिया, मैं पापा बननेवाला हूं, इससे बड़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है? चलो, आज ही घरवालों से चलकर बात करते हैं… मेरे घर में सभी तैयार हैं, मैं तुम्हारी लिए ही यहां आया था.”

“विक्रम, अगर तुम सही व़क्त पर न आते, तो मैं ख़ुद को कभी माफ़ नहीं कर पाती…”

“अब तो मैं आ गया न… तुम्हारा मुजरिम… तो जो हो सकता था वो मत सोचो, अब जो ख़ुशियां आनेवाली हैं हमारी ज़िंदगी में उनका स्वागत करो…”

– गीता शर्मा

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भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

Domestic Violence
भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

बेटी होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन हमारी सामाजिक सोच ने इसे भी किसी अपराध से कम नहीं बना रखा है… बेटियों को हर बात पर हिदायतें दी जाती हैं, हर पल उसे एहसास करवाया जाता है कि ये जो भी तुम पहन रही हो, खा रही हो, हंस रही हो, बोल रही हो… सब मेहरबानी है हमारी… घरों में इसी सोच के साथ उसका पालन-पोषण होता है कि एक दिन शादी हो जाएगी और ज़िम्मेदारी ख़त्म… ससुराल में यही जताया जाता है कि इज़्ज़त तभी मिलेगी, जब पैसा लाओगी या हमारे इशारों पर नाचोगी… इन सबके बीच एक औरत पिसती है, घुटती है और दम भी तोड़ देती है… भारत के घरेलू हिंसा व उससे जुड़े मृत्यु के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं…

वो कहते हैं तुम आज़ाद हो… तुम्हें बोलने की, मुस्कुराने की थोड़ी छूट दे दी है हमने… वो कहते हैं अब तो तुम ख़ुश हो न… तुम्हें आज सखियों के संग बाहर जाने की इजाज़त दे दी है… वो कहते हैं अपनी आज़ादी का नाजायज़ फ़ायदा मत उठाओ… कॉलेज से सीधे घर आ जाओ… वो कहते हैं शर्म औरत का गहना है, ज़ोर से मत हंसो… नज़रें झुकाकर चलो… वो कहते हैं तुमको पराये घर जाना है… जब चली जाओगी, तब वहां कर लेना अपनी मनमानी… ये कहते हैं, मां-बाप ने कुछ सिखाया नहीं, बस मुफ़्त में पल्ले बांध दिया… ये कहते हैं, इतना अनमोल लड़का था और एक दमड़ी इसके बाप ने नहीं दी… ये कहते हैं, यहां रहना है, तो सब कुछ सहना होगा, वरना अपने घर जा… वो कहते हैं, सब कुछ सहकर वहीं रहना होगा, वापस मत आ… ये कहते हैं पैसे ला या फिर मार खा… वो कहते हैं, अपना घर बसा, समाज में नाक मत कटा… और फिर एक दिन… मैं मौन हो गई… सबकी इज़्ज़त बच गई…!

 

घरेलू हिंसा और भारत…
  • भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस व प्रताड़ना के बाद महिलाओं की मृत्यु की लगभग 40% अधिक आशंका रहती है, बजाय अमेरिका जैसे विकसित देश के… यह ख़तरनाक आंकड़ा एक सर्वे का है.
  • वॉशिंगटन में हुए इस सर्वे का ट्रॉमा डाटा बताता है कि भारत में महिलाओं को चोट लगने के तीन प्रमुख कारण हैं- गिरना, ट्रैफिक एक्सिडेंट्स और डोमेस्टिक वॉयलेंस.
  • 60% भारतीय पुरुष यह मानते हैं कि वो अपनी पत्नियों को प्रताड़ित करते हैं.
  • हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों में भारत अब पहले स्थान पर पहुंच चुका है. हालांकि इस सर्वे और इसका सैंपल साइज़ विवादों के घेरे में है और अधिकांश भारतीय यह मानते हैं कि यह सही नहीं है…
  • 2011 में भी एक सर्वे हुआ था, जिसमें यूनाइटेड नेशन्स के सदस्य देशों को शामिल किया गया था, उसमें पहले स्थान पर अफगानिस्तान, दूसरे पर कांगो, तीसरे पर पाकिस्तान था और भारत चौथे स्थान पर था.
  • भारतीय सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि 2007 से लेकर 2016 के बीच महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में 83% इज़ाफ़ा हुआ है.
  • हालांकि हम यहां बात घरेलू हिंसा की कर रहे हैं, लेकिन ये तमाम आंकड़े समाज की सोच और माइंड सेट को दर्शाते हैं.
  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़, प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट के पास होने के बाद से (2005) अब तक लगभग दस लाख से अधिक केसेस फाइल किए गए, जिनमें पति की क्रूरता और दहेज मुख्य कारण हैं.
मानसिकता है मुख्य वजह
  • हमारे समाज में पति को परमेश्‍वर मानने की सीख आज भी अधिकांश परिवारों में दी जाती है.
  • पति और उसकी लंबी उम्र से जुड़े तमाम व्रत-उपवास को इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि यदि किसी घर में पत्नी इसे न करे, तो यही समझा जाता है कि उसे अपने पति की फ़िक़्र नहीं.
  • इतनी तकलीफ़ सहकर वो घर और दफ़्तर का रोज़मर्रा का काम भी करती हैं और घर आकर पति के आने का इंतज़ार भी करती हैं. उसकी पूजा करने के बाद ही पानी पीती हैं.
  • यहां कहीं भी यह नहीं सिखाया जाता कि शादी से पहले भी और शादी के बाद भी स्त्री-पुरुष का बराबरी का दर्जा है. दोनों का सम्मान ज़रूरी है.
  • किसी भी पुरुष को शायद ही आज तक घरों में यह सीख व शिक्षा दी जाती हो कि आपको हर महिला का सम्मान करना है और शादी से पहले कभी किसी भी दूल्हे को यह नहीं कहा जाता कि अपनी पत्नी का सम्मान करना.
  • ऐसा इसलिए होता है कि दोनों को समान नहीं समझा जाता. ख़ुद महिलाएं भी ऐसा ही सोचती हैं.
  • व्रत-उपवासवाले दिन वो दिनभर भूखी-प्यासी रहकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस करती हैं कि अब उनके पति की उम्र लंबी हो जाएगी.
  • इसे हमारी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यह लिंग भेद का बहुत ही क्रूर स्वरूप है.

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Domestic Violence

कहीं न कहीं लिंग भेद से ही उपजती हैं ये समस्याएं…
  • महिलाओं के ख़िलाफ़ जितने भी अत्याचार होते हैं, चाहे दहेजप्रथा हो, भ्रूण हत्या हो, बलात्कार हो या घरेलू हिंसा… इनकी जड़ लिंग भेद ही है.
  • बेटा-बेटी समान नहीं हैं, यह सोच हमारे ख़ून में रच-बस चुकी है. इतनी अधिक कि जब पति अपनी पत्नी पर हाथ उठाता है, तो उसको यही कहा जाता है कि पति-पत्नी में इस तरह की अनबन सामान्य बात है.
  • यदि कोई स्त्री पलटवार करती है, तो उसे इतनी जल्दी समर्थन नहीं मिलता. उसे हिदायतें ही दी जाती हैं कि अपनी शादी को ख़तरे में न डाले.
  • शादी को ही एक स्त्री के जीवन का सबसे अंतिम लक्ष्य माना जाता है. शादी टूट गई, तो जैसे ज़िंदगी में कुछ बचेगा ही नहीं.
शादी एक सामान्य सामाजिक प्रक्रिया मात्र है…
  • यह सोच अब तक नहीं पनपी है कि शादी को हम सामान्य तरी़के से ले पाएं.
  • जिस तरह ज़िंदगी के अन्य निर्णयों में हमसे भूल हो सकती है, तो शादी में क्यों नहीं?
  • अगर ग़लत इंसान से शादी हो गई है और आपको यह बात समय रहते पता चल गई है, तो झिझक किस बात की?
  • अपने इस एक ग़लत निर्णय का बोझ उम्रभर ढोने से बेहतर है ग़लती को सुधार लिया जाए.
  • पैरेंट्स को भी चाहिए कि अगर शादी में बेटी घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है या दहेज के लिए प्रताड़ित की जा रही है, तो जल्दी ही निर्णय लें, वरना बेटी से ही हाथ धोना पड़ेगा.
  • यही नहीं, यदि शादी के समय भी इस बात का आभास हो रहा हो कि आगे चलकर दहेज के लिए बेटी को परेशान किया जा सकता है, तो बारात लौटाने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए.
  • ग़लत लोगों में, ग़लत रिश्ते में बंधने से बेहतर है बिना रिश्ते के रहना. इतना साहस हर बेटी कर सके, यह पैरेंट्स को ही उन्हें सिखाना होगा.
सिर्फ प्रशासन व सरकार से ही अपेक्षा क्यों?
  • हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम हर समस्या का समाधान सरकार से ही चाहते हैं.
  • अगर घर के बाहर कचरा है, तो सरकार ज़िम्मेदार, अगर घर में राशन कम है, तो भी सरकार ज़िम्मेदार है…
  • जिन समस्याओं के लिए हमारी परवरिश, हमारी मानसिकता व सामाजिक परिवेश ज़िम्मेदार हैं. उनके लिए हमें ही प्रयास करने होंगे. ऐसे में हर बात को क़ानून, प्रशासन व सरकार की ज़िम्मेदारी बताकर अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेना जायज़ नहीं है.
  • हम अपने घरों में किस तरह से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, हम अपने अधिकारों व स्वाभिमान के लिए किस तरह से लड़ते हैं… ये तमाम बातें बच्चे देखते व सीखते हैं.
  • बेटियों को शादी के लिए तैयार करने व घरेलू काम में परफेक्ट करने के अलावा आर्थिक रूप से भी मज़बूत करने पर ज़ोर दें, ताकि वो अपने हित में फैसले ले सकें.
  • अक्सर लड़कियां आर्थिक आत्मनिर्भरता न होने की वजह से ही नाकाम शादियों में बनी रहती हैं. पति की मार व प्रताड़ना सहती रहती हैं. बेहतर होगा कि हम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं और बेटों को सही बात सिखाएं.
  • पत्नी किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है, सास-ससुर को भी यह समझना चाहिए कि अगर बेटा घरेलू हिंसा कर रहा है, तो बहू का साथ दें.
  • पर अक्सर दहेज की चाह में सास-ससुर ख़ुद उस हिंसा में शामिल हो जाते हैं, पर वो भूल जाते हैं कि उनकी बेटी भी दूसरे घर जाए और उसके साथ ऐसा व्यवहार हो, तो क्या वो बर्दाश्त करेंगे?
  • ख़ैर, किताबी बातों से कुछ नहीं होगा, जब तक कि समाज की सोच नहीं बदलेगी और समाज हमसे ही बनता है, तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी.
बेटों को दें शिक्षा…
  • अब वो समय आ चुका है, जब बेटों को हिदायतें और शिक्षा देनी ज़रूरी है.
  • पत्नी का अलग वजूद होता है, वो भी उतनी ही इंसान है, जितनी आप… तो किस हक से उस पर हाथ उठाते हैं?
  • शादी आपको पत्नी को पीटने का लायसेंस नहीं देती.
  • अगर सम्मान कर नहीं सकते, तो सम्मान की चाह क्यों?
  • शादी से पहले हर पैरेंट्स को अपने बेटों को ये बातें सिखानी चाहिए, लेकिन पैरेंट्स तो तभी सिखाएंगे, जब वो ख़ुद इस बात को समझेंगे व इससे सहमत होंगे.
  • पैरेंट्स की सोच ही नहीं बदलेगी, तो बच्चों की सोच किस तरह विकसित होगी?
  • हालांकि कुछ हद तक बदलाव ज़रूर आया, लेकिन आदर्श स्थिति बनने में अभी लंबा समय है, तब तक बेहतर होगा बेटियों को सक्षम बनाएं और बेटों को बेहतर इंसान बनाएं.

– गीता शर्मा

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रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

कहते हैं ‘शब्दों के दांत नहीं होते हैं, लेकिन शब्द जब काटते हैं, तो दर्द बहुत होता है.’ कुछ ऐसी ही कैफ़ियत होती है उनके साथ, जिनके रिश्तेदार कभी अनजाने में, तो कभी जानबूझकर ऐसी बातें या सवाल पूछ बैठते हैं, जो अक्सर उन्हें चुभ जाती हैं या असहज बना देती हैं. इसलिए ज़रूरी है कि रिश्तेदारों से बात करते व़क्त हम कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि बातें बुरी नहीं, बल्कि अच्छी लगें और रिश्ते भी मधुर रहें.

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं इसलिए उन्हें बहुत ही प्यार व सावधानी के साथ संभालकर रखते हैं, क्योंकि रिश्तों में पड़ी छोटी-सी दरार भी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकती है. अक्सर रिश्तेदारों के बारे में सबकुछ जानने की उत्सुकता में लोग ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो आमतौर पर नहीं पूछनी चाहिए. हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, जिसे हर किसी को याद रखनी चाहिए और ऐसी बातें अवॉइड करनी चाहिए, ताकि आपके रिश्ते न प्रभावित हों और न ही दूसरों को दुख पहुंचे.

1. बेटी की शादी की बात

अगर किसी के घर में शादी के लायक बेटी हो, तो मां-बाप को बेटी की शादी कब कर रहे हैं? कब तक घर में बिठाकर रखेंगें, जैसी बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं. भले ही आप यह सवाल अपने होने के अधिकार से पूछते हैं, पर कहीं न कहीं यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगती, क्योंकि जितनी फ़िक़्र आपको है, उससे कहीं ज़्यादा वो इस बात के फ़िक़्रमंद होंगे, क्योंकि वो उनकी बेटी है. आजकल लड़कियों का अपने पैरों पर खड़े होना बहुत ज़रूरी हो गया है, जिसे सभी मां-बाप समझते हैं और यही वजह है कि उन्हें जल्दी शादी के लिए बाध्य भी नहीं करते. इसलिए इस विषय को न छेड़ना ही ज़्यादा अच्छा होगा.

2. गुड न्यूज़ की बात 

शादी को सालभर हुए नहीं कि रिश्तेदार ख़ुश ख़बरी की बात करने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब सुना रहे हैं? यह सवाल आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. जहां एक ओर प्रेग्नेंसी किसी भी व्यक्ति का बहुत ही निजी मामला होता है, जिसकी प्लानिंग का अधिकार पति-पत्नी को है, वहीं दूसरी ओर बदलते समय और लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. हो सकता है, शादी के बाद भी कंसीव न कर पाने के कारण कपल पहले से ही परेशान हो और ऐसे में रिश्तेदारों का बार-बार इस विषय में पूछना उन्हें और परेशान करता हो. एक शुभचिंतक होने के नाते अपने रिश्तेदारों से इस विषय पर ज़्यादा सवाल कभी न करें.

3. फैमिली इन्कम की बातें

घर में कौन कितना कमाता है? यह रिश्तेदारों के लिए हमेशा ही कौतुहल का विषय होता है. दरअसल, सैलरी की जानकारी से वो फैमिली इन्कम का अंदाज़ा लगाते हैं, ताकि दूसरे रिश्तेदारों से तुलना कर सकें. बेटों-बेटी की इन्कम में लोगों को ज़्यादा दिलचस्पी रहती है, ताकि अपने बच्चों से तुलना करके जान सकें कि किसके बच्चे ज़्यादा सफल हैं, ताकि सबके सामने शो ऑफ का एक और मौक़ा मिल सके. हर किसी के फाइनेंशियल हालात दूसरों से अलग होते हैं, ऐसे में ज़्यादातर लोग फैमिली इन्कम के बारे में डिस्कस करना उचित नहीं समझते. इसलिए समझदारी ऐसे विषयों को न छेड़ने में ही है.

4. बेटे की नौकरी की बात

आपके बेटे की नौकरी कहीं लगी कि अभी भी घर पर ही है? ये सवाल उन रिश्तेदारों से अक्सर पूछे जाते हैं, जिनके बच्चे स्ट्रगल कर रहे होते हैं. हर मां-बाप की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे जो भी करें, उसमें उन्हें कामयाबी मिले. अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता, इसलिए ऐसी चुभनेवाली बातें हमेशा अवॉइड करें. अगर आप सचमुच में फ़िक़्रमंद हैं, तो अपनी बात को सही तरी़के से पूछें.

5. रोमांटिक या पर्सनल लाइफ की बातें

पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेदकर पूछना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. ख़ुद को उनका ज़्यादा क़रीबी जताने के चक्कर में रिश्तेदार अक्सर ऐसे सवाल
पूछ बैठते हैं, जिन्हें प्राइवेसी में दख़लंदाज़ी माना जाता है. रोमांस पति-पत्नी के बीच का बहुत ही निजी मामला है. ऐसे सवाल पूछकर आप अपनी इमेज ख़ुद ख़राब करते हैं, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना कोई पसंद नहीं करता. नतीजतन लोग आपसे कतराने लगते हैं. अगर आप नहीं चाहते कि लोग आपके साथ भी ऐसा व्यवहार हो, तो अपने रिश्ते की अहमियत बनाए रखें और ऐसी बातों से हमेशा बचें.

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Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives
6. बहू के मायकेवालों की बातें

हमारा समाज भले ही कितना भी मॉडर्न क्यों न हो जाए, पर बहुओं के लिए लोगों की सोच अभी भी पुरानी ही है. उसके मायकेवालों के बारे में जानना ज़्यादातर रिश्तेदारों का प्रिय शगल होता है. उन्हें हमेशा इस बात की फ़िक़्र लगी रहती है कि बहू  की बहन की शादी हुई या नहीं, उसका भाई काम पर लगा या नहीं और उससे भी ज़्यादा त्योहार या शादी-ब्याह के मौक़ों पर बहू के मायके से कितना सामान आया. तोहफ़ों का लेन-देन हो या फिर अपनों के बारे में तीखी बातें सुनना, किसी भी बहू को पसंद नहीं आता. हर लड़की चाहती है कि ससुराल के लोग उसके परिवार का सम्मान करें और उन्हें भी वही इज़्ज़त मिले, जो दूसरों को मिलती है. एक लड़की के लिए उसका परिवार उसका सम्मान होता है, ऐसे में उन पर तीखे सवाल उसके सम्मान को चोट पहुंचाते हैं, जो आजकल की आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बहुएं बर्दाश्त नहीं करती और यही वजह है कि रिश्तों में मनमुटाव बढ़ने लगता है. ऐसे में रिश्तों को बचाना आपके अपने हाथ में है.

7. प्रॉपर्टी के बंटवारे की बातें

जितनी दिलचस्पी रिश्तेदारों की फैमिली इन्कम में होती है, उतनी ही प्रॉपर्टी के बंटवारे में भी होती है. प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?, किसको क्या देने की सोच रहे हैं?, वसीयत बनाई या नहीं? जैसी बातें लोग केवल परिवार या बेहद क़रीबी लोगों से ही शेयर करते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राइवेट होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग गोपनीय रखना पसंद करते हैं. इसलिए उनकी गोपनियता में कभी सेंध न लगाएं. अगर वो आपको इस लायक समझेंगे, तो ख़ुद ही सारी बातें शेयर करेंगे. पर अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आप ख़ुद से ऐसे निजी मामलों को न कुरेदें. सभी रिश्तेदारों को अपने रिश्तों की सीमा पता होनी चाहिए और यह भी कि किससे क्या पूछना है और क्या नहीं.

8. पुराने हादसों की बातें

रिश्तेदारों से बातचीत करते व़क्त ज़्यादातर लोग औपचारिकता का ध्यान ही नहीं रखते और अक्सर कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग भूलने में ही भलाई समझते हैं. जाने-अनजाने किसी पुराने हादसे या ज़ख़्मों को कुरेदना अच्छी बात नहीं. ऐसी बातों से सभी को बचना चाहिए.

9. दूसरी शादी हो, तो पहली शादी की बातें

हर कोई चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन ख़ुशहाल हो, पर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. अक्सर हादसे ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं और इंसान को अपनी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देना पड़ता है. ऐसे में दोबारा नई गृहस्थी की शुरुआत करनेवालों से कभी भी उनकी पिछली शादी के बारे में नहीं पूछना चाहिए. तुम्हारी पहली शादी क्यों टूटी? जैसे सवाल करके किसी की दुखती रग पर हाथ न रखें.

रिश्तों में लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी है

साइकोलॉजिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी के अनुसार, “दूसरों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की उत्सुकता हर इंसान में होती है. हमारे समाज में बड़े-बुज़ुर्ग छोटों से निजी से निजी सवाल पूछना अपना हक़ समझते हैं और साथ ही यह भी जताने की कोशिश करते हैं कि हमें तुम्हारी कितनी परवाह है. दरअसल, वो ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आस-पास वही देखा है और बचपन से वही सीख पाई है, जबकि आज ज़माना बदल रहा है. नई पीढ़ी कुछ मामलों में दख़लंदाज़ी पसंद नहीं करती है और वो कहीं न कहीं सही भी है, क्योंकि कुछ मामले इतने निजी होते हैं कि उनके बारे में दूसरों द्वारा बार-बार टोका जाना किसी को भी पसंद नहीं होता. इसलिए बदलते ज़माने के साथ आज हमें अपनों की
प्राइवेसी का भी सम्मान करना चाहिए और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी हो गया है. हालांकि अभी भी 1-2% लोग ही हैं, जो सेंसिटिव होते हैं और जिन्हें ऐसी बातें बुरी लगती है, वरना 98% तो मानकर ही चलते हैं कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएंगे और वो इसके लिए तैयार रहते हैं. पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्हें ऐसी बातें बुरी नहीं लगती, पर वो उनसे निपटना सीख जाते हैं.”

जहां ज़्यादातर लोग कौतुहलवश ऐसे सवाल करते हैं, वहीं कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो केवल अपनी महत्ता दिखाने के लिए, दूसरों पर दबाव बनाए रखने व कंट्रोल करने की भावना से ऐसा करते हैं. इसलिए बातों से बढ़कर ये बातें कभी-कभी तानों और कटाक्ष में तब्दील हो जाती हैं. ऐसे लोगों के साथ आपको डील करना सीखना होगा. उनकी बातों पर कभी भी न ग़ुस्सा करें, न अपना मूड ख़राब करें और न ही दुखी हों, क्योंकि यह उनकाव्यक्तित्व है, जिसे आप बदल नहीं सकते. ऐसे सवाल ज़्यादातर महिलाओं से ही पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हें सॉफ्ट टारगेट माना जाता है और जो बातें महिलाओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, वो बच्चों व तलाक़ से जुड़ी होती हैं. इसलिए महिलाएं अपने आप को मना लें कि ऐसा तो होना ही है. ख़ुद को मानसिक तौर पर हमेशा तैयार रखें, ताकि ये बातें न आपको प्रभावित करें, न ही आपके रिश्ते को.

– सुनीता सिंह

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रिश्ते में बर्दाश्त न करें ये 10 बातें (10 Things Never Adjust In A Relationship)

Relationship Goals
रिश्ते में बर्दाश्त न करें ये 10 बातें (10 Things Never Adjust In A Relationship)
माना रिश्ते का मतलब ही होता है एक-दूसरे के साथ एडजेस्ट करना और कुछ बातों को बर्दाश्त भी करना. अपनों से प्यार बनाए रखने के लिए भी यह ज़रूरी है. लेकिन कभी-कभार बात स्वाभिमान की आ जाती है और एक हद से बाहर चली जाती है, तो कुछ बातें हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं करने में ही समझदारी है, वरना पार्टनर आपको कैज़ुअली लेने लगेगा और आपका सम्मान भी नहीं करेगा. कौन-सी हैं ये बातें, आपके लिए जानना ज़रूरी है.

1. एब्यूज़

यह ज़रूरी नहीं कि एब्यूज़ यानी शोषण स़िर्फ शारीरिक ही होता है. यह कई स्तर पर हो सकता है, मौखिक, भावनात्मक, मानसिक, आर्थिक आदि. यदि आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में आपका शोषण हो रहा है, पार्टनर या कोई भी आपको भावनात्मक स्तर पर सपोर्ट नहीं कर रहा, मानसिक यातनाएं दी जा रही हैं, बेवजह गाली-गलौज की जा रही है या आर्थिक स्तर पर परेशान किया जा रहा है, तो बर्दाश्त करने से बेहतर होगा बात करें. अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएं और सामनेवाले को समझाएं कि वो जाने-अंजाने ग़लत कर रहा है.

2. वॉयलेंस

डोमेस्टिक वॉयलेंस वैसे भी अपराध है, फिर भी महिलाएं रिश्ते को बचाए रखने के लिए इसे बर्दाश्त करती हैं. लोगों से इसे छिपाती भी हैं, लेकिन एक स्तर पर जाकर यह सामनेवाली की आदत हो जाती है कि हर छोटी-बड़ी बात पर वो आप पर हाथ उठाना अपना हक़ समझने लगता है. बेहतर होगा देर होने से पहले सतर्क और सजग हो जाएं. हिंसा की किसी भी रिश्ते में कोई जगह नहीं है. यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है, क्योंकि कई पुरुष भी रिश्ते में हिंसा व प्रताड़ना के शिकार होते हैं, उन्हें भी यह डर लगता है कि समाज उनकी बात पर भरोसा नहीं करेगा, लेकिन बेहतर होगा आप भी अपने हक़ के लिए लड़ें और ग़लत बातों को बर्दाश्त न करें.

3. डिसरिस्पेक्ट

आपसे उम्मीद की जाती है कि आप अपने पार्टनर को इज़्ज़त दें, लेकिन बदले में आपको सम्मान व समान दर्जा नहीं मिलता, तो तकलीफ़ होना लाज़िमी है. हो सकता है, अंजाने में ऐसा हो रहा हो, तो सही रास्ता यही है कि अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें, ताकि वो आपके पक्ष को समझ सके और आपको कैज़ुअली न ले. लोगों व रिश्तेदारों के सामने उल्टा-सीधा न कहे. आपको सम्मान व समान दर्जा दे.

4. ग़ैरज़िम्मेदारी

भले ही यह छोटी-सी बात लग रही हो, लेकिन इसके परिणाम रिश्ते के लिए भी गंभीर हो सकते हैं. यदि एक पार्टनर भी ग़ैरज़िम्मेदार है, तो इसकी सज़ा पूरे परिवार को भुगतनी पड़ती है. ग़ैरज़िम्मेदाराना व्यवहार हर जगह तकलीफ़ देता है और दूसरों का वर्कलोड भी बढ़ा देता है. धीरे-धीरे दूसरे पार्टनर को इस व्यवहार से खीझ होने लगती है और रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं. कोशिश करें अपने पार्टनर को समझाने की. बेहतर होगा काम व ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि वो टाल न सके. बीच-बीच में ड्यूटीज़ बदल लें, जिससे बोरियत भी न हो.

5. इग्नोरेंस

आपकी बातों को तवज्जो न देना, महत्वपूर्ण निर्णयों में आपकी राय ही न लेना, आपके कुछ भी कहने पर बात को इग्नोर कर देना या यह कह देना कि तुमको क्या पता इस बारे में… यदि आप यह शुरू से ही बर्दाश्त करते आ रहे हैं, तो संभल जाइए, क्योंकि आगे चलकर आपको अपना अस्तित्व ही रिश्ते में महत्वहीन लगने लगेगा. आपको पार्टनर से बात करनी होगी कि आप इग्नोर्ड फील करते/करती हैं. न स़िर्फ बातें, बल्कि आपकी प्रेज़ेंस को भी यदि इग्नोर किया जाता है, आपको समय नहीं दिया जाता, आपके सुख-दुख के बारे में जानने की कोई ज़रूरत नहीं समझता, तो बर्दाश्त करने की बजाय बात करें.

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Relationship

6. ज़बर्दस्ती

यह ज़बर्दस्ती किसी भी मामले में हो सकती है और अगर यह सेक्स में है, तब तो आपको और भी सतर्क हो जाना चाहिए. रिश्ते में दोनों की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान बेहद ज़रूरी है. यदि आप अपने पार्टनर का सम्मान करते हैं, तो पार्टनर से भी उम्मीद करते होंगे, वो भी उतना ही सम्मान आपको दे. लेकिन जब ऐसा नहीं होता और एक ही पार्टनर हमेशा अपनी इच्छाएं थोपता चला जाता है, तो यह ज़बर्दस्ती घुटन पैदा करती है. घुटने से बेहतर है कम्यूनिकेट करें.

7. अननेचुरल सेक्स

सेक्स हर शादी का अहम् अंग होता है, लेकिन कुछ पुरुष अपने पार्टनर पर अननेचुरल सेक्स के लिए दबाव डालते हैं. दरअसल, वो पोर्न फिल्मों को अपना आदर्श मानते हैं और अपने पार्टनर से उसी तरह के प्रदर्शन की चाह रखते हैं. भारत में एनल सेक्स और ओरल सेक्स ग़ैरक़ानूनी है और अगर आपका पार्टनर कंफर्टेबल नहीं है, तो उस पर दबाव न डालना ही बेहतर होगा. सेक्स में दोनों का सहज रहना ज़रूरी है. यदि कोई समस्या है, तो विशेषज्ञ की राय ली जा सकती है, आप काउंसलर के पास भी जाकर अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरी़के जान सकते हैं.

8. इमोशनल ब्लैक मेलिंग

कई महिलाओं की आदत होती है कि वो अपनी बात मनवाने के लिए इमोशनल ब्लैक मेलिंग का सहारा लेती हैं. वो या तो बच्चों को हथियार बनाती हैं या फिर सेक्स के समय पति पर दबाव डालती हैं. पति न माने, तो सेक्स से मना कर देती हैं. इस तरह की बातें आपको थोड़े समय के लिए भले ही फ़ायदा पहुंचाती हों, पर आगे चलकर आपके रिश्ते को कमज़ोर बनाती हैं.

9. दूसरों की दख़लअंदाज़ी

अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने पार्टनर पर भरोसा न करके कई बार दूसरों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं. उनसे सलाह-मशविरा लेते हैं और अपने सीक्रेट्स और पर्सनल बातें भी उनसे शेयर कर लेते हैं. जबकि कई बार दूसरे भी बेवजह अपनी राय देने चले आते हैं. बेहतर होगा कि अपनी निजी बातों को निजी ही रहने दिया जाए. दूसरों का हस्तक्षेप कई बार परिस्थितियों को और भी जटिल कर देता है. अगर कोई समस्या है या आपसी मतभेद है, तो ख़ुद ही आगे बढ़कर पार्टनर से बात करें, न कि किसी अन्य व्यक्ति के पास अपनी समस्या लेकर जाएं.

10. बेईमानी/एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर/शक

रिश्ते का दूसरा नाम ही लॉयल्टी है. ऐसे में बेईमानी बर्दाश्त कैसे की जा सकती है. हां, कभी कोई भूल हो जाए या इंसान भटक जाए, तो माफ़ कर देना ही एकमात्र रास्ता होता है, लेकिन यदि कोई आपके भरोसे का नाजायज़ फ़ायदा उठाता रहे और आप आंखें मूंद लें यह सोचकर कि रिश्ता टूट जाएगा, तो यह ख़ुद के साथ बेईमानी होगी. बेहतर होगा किसी निर्णय पर पहुंचे. बात करें, समस्या का हल निकालें, लेकिन ख़ुद को न ठगें. वरना पार्टनर आपको हल्के में लेगा. उसकी यह सोच बन जाएगी कि मैं चाहे जो भी करूं, उसे बर्दाश्त कर लिया जाएगा, क्योंकि मेरे बिना उसका गुज़ारा नहीं हो सकेगा. बेहतर होगा, पार्टनर के इस भ्रम को तोड़ें और ख़ुद को भी भ्रमित होने से रोकें. इसी तरह से शक्की पार्टनर के साथ रहना भी बेहद तकलीफ़देह होता है. हर बात पर शक, टोका-टाकी करना रिश्ते में चिड़चिड़ापन पैदा कर देता है. शक करने से बेहतर है कि अपने मन के वहम को बात करके दूर कर लें.

– विजयलक्ष्मी

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पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

उस चेहरे को देखने के बाद गौतम को कभी किसी और चेहरे को देखने की चाह नहीं हुई… उसे पहली बार देखते ही गौतम का मन उसकी ओर जाने लगा था. उसने कभी सोचा भी नहीं था कि कभी कोई पलभर में ही इस तरह अपना हो जाएगा… उसके जीवन की वो सबसे सुहानी और सबसे ख़ूबसूरत सुबह थी… जब वो लड़की अपने कमरे की खिड़की के पास हर बात से बेपरवाह होकर अपनी घनेरी ज़ुल्फ़ों को सुलझाने में व्यस्त थी. उस समय सुबह की शीतल हवा के चंचल झोंके उसके ख़ूबसूरत बालों की महकती ख़ुशबू चुराने की चाह में उन्हें और भी बेतरतीब किए जा रहे थे… उसके भीगे सौंदर्य की लावण्यता और भी निखार पर थी.

फिर अचानक ही गौतम को अपनी ओर देखता पाकर उसकी भृकुटि कुछ तन-सी गई और फिर न जाने क्या सोचकर एकाएक बड़ी मोहक अदा के साथ उसके मदभरे होंठों की लाली एक दिलकश मुस्कान बनकर उसके लबों कर खिल उठी… उस समय गौतम कुछ और भी संशय में पड़ गया था. उसकी आंखों में एक नकली रोष था और अपने एक ख़ास अंदाज़ में वह उसे निरंतर देखे जा रही थी, फिर पलक झपकते ही अचानक वह गायब हो गई.

अभी एक माह पहले ही हमारे घर के ठीक सामनेवाले मकान में एक परिवार रहने आया है. मां ने बताया था कि वे उनके मायके अंबिकापुर से आए हैं. इस परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें शालिनी नाम की बहुत सुंदर उनकी एक बेटी है, जो यहां के आई.आई.एम. कॉलेज में पढ़ रही है. शालिनी की मां के साथ उनका हमेशा एक बहन जैसा अपनापन रहा है और वे दोनों कॉलेज के ज़माने से एक-दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त व सहपाठी रही हैं.

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आज सुबह शालिनी का उसे इस तरह देखने का वो रहस्यमय अंदाज़ अब उसकी समझ में आने लगा था और आज सुबह ही अपने ऑफिस जाने के लिए जब वह घर से निकला, तो उसी समय शालिनी भी बड़े बेबाक अंदाज़ में चलते हुए उसके पास आकर रुकी और अपना दायां हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपना परिचय देते हुए कहा, “मैं शालिनी…” तब गौतम ने भी उसके कोमल हाथ को थामकर तुरंत जवाब दिया, “और मैं गौतम…” तब उसका नाम सुनकर उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, मैंने तो सोचा था आपका नाम अक्षय कुमार या रणबीर कपूर होगा…” तब गौतम ने भी जवाब में कहा, “ज़रूर होता, अगर आपका नाम दीपिका पादुकोण या प्रियंका चोपड़ा होता…” इसके पहले कि वो कुछ कहती, गौतम ने घर की ओर इशारा करते हुए कहा, “जाइए, मां घर पर हैं और आपका इंतज़ार कर रही हैं.” अब गौतम की बारी थी उसे हैरान करने की.

आज ही उसे पता चला था कि शालिनी का प्रतिदिन उसके घर में आना-जाना होता है. गौतम की मम्मी के साथ उसका बड़ा गहरा लगाव था. गौतम की मम्मी शालिनी को बेहद प्यार-दुलार करती हैं. गौतम ने जब अपनी भाभी से शालिनी की बात की, तो उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे देवरजी, मम्मी तो उसे अब मेरी देवरानी बनाने जा रही हैं. वो हम सबकी पहली पसंद है.” बस, अब गौतम को कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं थी… इतने में ही शालिनी के खिलखिलाने की आवाज़ उसे अपनी मम्मी के कमरे से आई और वो हंसी सीधे उसके दिल में उतर गई… उसका पहला प्यार हमेशा के लिए उसका होने जा रहा था… गौतम सोचकर मन ही मन मुस्कुरा उठा!

– दिशा राजवानी

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बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस के लिए अपनाएं ये नॉटी बातें (Must Do Naughty Things For Best Ever Sex Experience)

Naughty Things

बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस के लिए अपनाएं ये नॉटी बातें (Must Do Naughty Things For Best Ever Sex Experience)

उसकी आंखों में शरारतें नज़र आती हैं मुझे, उसकी हर छुअन एक नया रोमांच जगाती है… उंगलियों से कह देती है वो अपने दिल की बातें, सांसों से महकाती मेरी चाहत का जहां… उसके हर क़दम से मेरी दुनिया में नए गुल खिलते हैं… उसकी हर अदा मेरे घर को बनाती है चाहत का आशियाना…  अपनी सेक्स लाइफ में रोमांच लाना चाहते हैं, कुछ शरारतें, कुछ नॉटीनेस और कुछ अदायदी ऐड करें, यकीनन आपको मिलेगा अपनी लाइफ का बेस्ट सेक्स एक्सपीरियंस.

सेक्सी बातें बढ़ाएंगी प्यार का ख़ुमार

बेहतरीन सेक्स के लिए पार्टनर का मूड बनाना बहुत ज़रूरी है और उसके लिए सेक्सी टॉक से अच्छा भला क्या हो सकता है. उनकी ख़ूबसूरती की तो हमेशा तारीफ़ करते रहे हैं जनाब आज तो उनके नूर से चेहरे को हूर कहें, उनकी ज़ुल्फ़ों को सुनहरी छांव, उनकी बाहों को घनघोर घटा और आंखों को नशीले जाम. तारीफ़ स़िर्फ औरतों को नहीं, पुरुषों को भी पसंद है. उनकी तारीफ़ करने बिल्कुल भी कंजूसी न करें. दिल खोलकर उनके केयरिंग और लविंग नेचर की तारीफ़ करें. रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पार्टनर्स को वैसे भी एक-दूसरे की तारीफ़ करते रहना चाहिए, इसके उनकी लाइफ में रोमांस बना रहता है.

रोमांटिक मूवीज़ से शुरू हो रोमांस

हम जानते हैं कि लड़कियों को रोमांटिक मूवीज़ जितनी पसंद होती है, लड़कों को वो उतनी ही नापसंद. पर लड़कों ये रोमांटिक मूवीज़ ही तुम्हें, तुम्हारी पार्टनर के दिल के क़रीब ले जाएगी. रोमांटिक मूवीज़ में कई ऐसे गाने और सीन होते हैं, जहां आप उन्हें अपना प्यार जता सकते हैं. सोचिए ज़रा स़िर्फ आप हैं, आपकी पार्टनर और रोमांटिक मूवी, समा अपनेआप रोमांटिक बन जाएगा. वैसे आपको बता दें कि लड़कियां मूवी देखते व़क्त काफ़ी रोमांटिक महसूस करती हैं. आपकी हल्की-फुल्की शरारतें रोमांस की बेहतरीन शुरुआत करेंगी.

सेक्सी फील करें लिंगरी से

सेक्स एक्सपर्ट की मानें, तो लड़कियां ख़ुद को जितना ज़्यादा कान्फिडेंट फील करेंगी, उनकी सेक्सुअल एक्टिविटीज़ उतनी ही रोमांचक होंगी और उन्हें ऑर्गैज़्म भी जल्दी मिलेगा. अगर आप लिंगरी में रहेंगी, तो ख़ुद को ज़्यादा सेक्सी फील करेंगी, तो आज ही एक सेक्सी लिंगरी ख़रीदिए और अपने पार्टनर को सरप्राइज़ दीजिए. आपका सेक्सी अंदाज़ आपके पार्टनर को यकीनन मदहोश कर देगा.

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Naughty Things
चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी को लाएं बेडरूम में

सेक्स लाइफ के लिए आपको सेक्स बूस्टर फूड्स हमेशा ट्राई करने चाहिए. जब भी लगे कि सेक्स लाइफ में थोड़ी बोरियत आ रही है, तो चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी को अपने बेडरूम में लाएं. ये दोनों ही सेक्स बूस्टर माने जाते हैं. ख़ुद खाने की बजाय एक-दूसरे को खिलाएं. पार्टनर को इससे रिझाएं और ललचाएं. ये तुरंत रोमांटिक मूड बनाने में आपकी मदद करेगा.

शावर लें एक साथ

सभी रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये सबसे बेस्ट सेक्स टिप है. जो पार्टनर्स एक साथ शावर लेते हैं, उनकी सेक्स लाइफ में बोरियत नहीं आती, बल्कि हमेशा रोमांच बना रहता है. कोशिश करें कि एक साथ शावर लेने के बाद टॉवल से एक-दूसरे को सुखवाएं. अपने पार्टनर को सिर से पांव तक देखना काफ़ी रोमांटिक होता है, जो सभी नहीं कर पाते. क्या आपने ट्राई किया है ये सेक्स टिप?

कैंडल्स की रोशनी में हो रोमांस

ज़्यादातर कपल्स लाइट ऑन होने पर सेक्सुअल एक्टिविटी करना कंफर्टेबल फील नहीं करते, पर यही तो असली रोमांच है. अगर आप लाइट्स ऑन रखना चाहते, तो अरोमा कैंडल्स जलाएं. इनकी मद्धम रोशनी और मदहोश करनेवाली ख़ुशबू आप दोनों को रोमांचित कर देगी. अपने बेस्ट ऐबर सेक्स एक्सपीरियंस के लिए एक बार इसे ज़रूर ट्राई करें.

पार्टनर को दें ऑयल मसाज

मसाज से आप रिलैक्स महसूस करते हैं, पर मसाज अगर पार्टनर कर रहा हो, तो रिलैक्स के साथ-साथ आप रोमांच का भी अनुभव करेंगे. पार्टनर्स एक-दूसरे को ऑयल मसाज दें. इसके लिए आप अरोमा ऑयल्स का इस्तेमाल करें. उसकी ख़ुशबू और मसाज आपकी सेक्स लाइफ को इंस्टेंट बूस्ट करेगा.

– अनीता सिंह

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हेल्थ प्रॉब्लम्स प्रभावित करती हैं आपकी सेक्स लाइफ (Health Problems That Affect Your Sex Life)

Sex Life

हेल्थ प्रॉब्लम्स प्रभावित करती हैं आपकी सेक्स लाइफ (Health Problems That Affect Your Sex Life)

बीमारियों के चलते हम न स़िर्फ सेहतमंद ज़िंदगी के सुख से वंचित रह जाते हैं, बल्कि सेक्स क्रिया का सुख भी नहीं भोग पाते हैं. बीमारियों का हमारी सेक्स लाइफ पर क्या असर होता है तथा ये हमारी सेक्स लाइफ को किस तरह प्रभावित करती हैं? आइए, हम आपको बताते हैं.

 

धूल-मिट्टी, प्रदूषण, बदलती लाइफ स्टाइल और बदलते मौसम के चलते आए दिन हमें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है. ये बीमारियां हमारी सेहतमंद ज़िंदगी को प्रभावित करने के साथ ही हमारी सेक्स लाइफ पर भी गहरा असर डालती हैं. जानिए कौन-सी बीमारी से कैसे निपटना चाहिए?

डायबिटीज़

डायबिटीज़ का सेक्स लाइफ पर गहरा असर होता है. यह रोगी की कामेच्छा, परफॉर्मेंस और ऑर्गेज़्म को बुरी तरह से प्रभावित करता है. कई बार डायबिटीज़ के रोगी नपुंसक तक हो जाते हैं. जो लोग इंसुलिन लेते हैं, वो कई बार सेक्स क्रिया के दौरान अधिक उत्तेजना के चलते हाइपोग्लेसेमिया की चपेट में भी आ जाते हैं. सेक्स क्रिया के दौरान चक्कर आना, कंपन, धड़कनों का तेज़ होना, ध्यान केद्रिंत न कर पाना जैसी तकली़फें हाइपोग्लेसेमिया के संकेत हैं.

कैसे निपटें?

यदि हाइपोग्लेसेमिया का कोई भी संकेत नज़र आए, तो तुरंत शुगर की गोलियां लें. सेक्स क्रिया से पहले एक्स्ट्रा स्टार्ची कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड, जैसे-पास्ता, चावल या ब्रेड खाने से बचें. साथ ही शुगर लेवल को भी नियंत्रण में रखें.

कोरोनरी हार्ट डिसीज़

कोरोनरी हार्ट पेशेंट को सेक्स के दौरान सांस लेने में तकलीफ़ या छाती में दर्द होने की संभावना हो सकती है, क्योंकि सेक्स क्रिया को अंजाम देते वक़्त अधिकांशतः कोरोनरी हार्ट डिसीज़ पेशेंट का हार्ट रेट बढ़ने लगता है तथा ब्लड प्रेशर भी हाई हो जाता है. ऐसे में यदि लगातार दो घंटे तक सेक्स क्रिया चलती रहे, तो अटैक आने की संभावना और भी बढ़ जाती है.

कैसे निपटें?

जिन हार्ट पेशेंट को हाल ही में हार्ट अटैक आया हो, उन्हें 3 से 6 सप्ताह तक सेक्स से परहेज़ करना चाहिए. कोरोनरी हार्ट डिसीज़ से पीड़ित रोगी को यदि डायबिटीज़ हो, तो अटैक आने की गुंज़ाइश और अधिक बढ़ जाती है. ऐसे पेशेंट को तभी सेक्स करना चाहिए, जब उनका ब्लड प्रेशर व पल्स रेट नॉर्मल हो. साथ ही ऐसे पेशेंट्स को भोजन के 3 घंटे बाद तक सेक्स से परहेज़ करना चाहिए.

मोटापा

हालांकि मोटापा एक आम समस्या है, लेकिन मोटापा सेक्स लाइफ को काफ़ी हद तक प्रभावित करता है. मोटापा न स़िर्फ संबंधित व्यक्ति की कामेच्छा को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परफॉर्मेंस पर भी गहरा असर डालता है. कई बार मोटे व्यक्ति ऑर्गेज़्म का सुख भी नहीं भोग पाते हैं.

कैसे निपटें?

मोटापा न स़िर्फ आपकी सेक्स लाइफ को प्रभावित करता है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ठीक नहीं है. अतः सबसे पहले मोटापा कम करने की कोशिश करें. तली-भुनी चीज़ों के सेवन से परहेज़ करें. एक्सरसाइज़ एवं योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, ताकि आप सेक्स का भरपूर आनंद उठा सकें.

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Sex Life
अस्थमा

अस्थमा से पीड़ित रोगियों में सेक्स क्रिया के दौरान अधिक उत्तेजना के चलते अस्थमा का अटैक आने की संभावना होती है. कई बार महिलाओं में उनके पार्टनर के सेमिनल फ्लूइड में मौजूद प्रोटीन्स की एलर्जी के कारण भी सेक्स के दौरान अस्थमैटिक अटैक आने का ख़तरा बना रहता है. कई महिलाओं एवं पुरुषों को लैटेक्स एलर्जी के कारण कंडोम यूज़ करने पर अस्थमैटिक अटैक आने की गुंजाइश होती है.

कैसे निपटें?

सेक्स क्रिया से पहले ब्रोंकोडिलेटर थेरेपी लें. इससे आपको आराम मिलेगा. डॉक्टर की सलाह पर उचित एक्सरसाइज़ एवं दवाइयां भी आपको राहत दिलाएंगी.

हाइपोथायरॉइज़्म

हाइपोथायरॉइज़्म से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं, जैसे- अचानक से वज़न का बढ़ना, ज़्यादा गर्मी का एहसास होना आदि. नतीजतन ऐसे व्यक्ति की कामेच्छा भी कम हो जाती है.

कैसे निपटें?

डॉक्टर की मदद से थायरॉइड को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें. इससे आपकी सेक्स लाइफ में संतुलन बना रहेगा.

पीठदर्द

पीठदर्द की वजह से न स़िर्फ आपकी दिनचर्या की गति धीमी हो जाती है, बल्कि आपकी सेक्स लाइफ भी प्रभावित होती है. कई बार सेक्स के दौरान ग़लत पोश्‍चर भी पीठदर्द का कारण बन जाता है, तो कई बार पीठदर्द के चलते सेक्स क्रिया का भरपूर आनंद नहीं लिया जा सकता.

कैसे निपटें?

सही एवं उचित पोश्‍चर में सेक्स क्रिया को अंजाम देने की कोशिश करें. पति-पत्नी दोनों में से जिसे पीठदर्द की शिकायत न हो, उसे टॉप पोजीशन अपनाने को कहें, जैसे- यदि पति को पीठदर्द की शिकायत है, तो पत्नी को तथा पत्नी को पीठदर्द की शिकायत है, तो पति को टॉप पोजीशन लेने को कहें. इसके साथ ही भुजंगासन, शलभासन, सुलभ उत्तासन, सर्पासन आदि आसन करें. इससे पीठदर्द से आराम मिलेगा.

आर्थराइटिस

आर्थराइटिस से पीड़ित रोगी की सेक्स लाइफ भी काफ़ी प्रभावित होती है. सेक्स में अधिक एक्सपेरिमेंट या मुद्राओं का प्रयोग ऐसे व्यक्तियों के लिए घातक साबित होता है तथा नए एक्सपेरिमेंट से उन्हें कई तरह की तकली़फें भी होती हैं.

कैसे निपटें?

सेक्स के दौरान ऐसे आसनों का प्रयोग करें, जिनसे जोड़ों पर अधिक दबाव न पड़े. हो सके तो पार्टनर को ही सेक्स क्रिया के दौरान एक्टिव रहने की सलाह दें.

 

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मायके की तरह ससुराल में भी अपनाएं लव डोज़ फॉर्मूला (Love Dose Formula For Happy Married Life)

Love Dose Formula

कहते हैं लड़कियों से घर गुलज़ार रहता है और उनकी चहक से ही घर में रौनक बनी रहती है, पर यही लड़कियां जब ससुराल जाती हैं, तब क्यों ख़ुद को इतना क्यों बदल लेती हैं कि ससुराल में वही रौनक नहीं दिखाई देती? माना कि यह आपका ससुराल है, यहां कुछ मर्यादाएं हैं, पर इसका यह मतलब नहीं कि आप मायकेवाली नादानियां-शरारतें, लविंग-केयरिंग नेचर यानी अपना लव डोज़ पूरी तरह भूल जाएं. अपने नए घर को भी ख़ुशहाल रखना चाहती हैं, तो मायकेवाला लव डोज़ यहां भी आज़माएं.    

सास को दें मम्मीवाला लव डोज़

सास-बहू का रिश्ता सबसे अनोखा होता है. लोगों की बरसों पुरानी सुनी-सुनाई बातों पर न जाएं, आज व़क्त बदल रहा है, हो सकता है आपकी सास सुलझे विचारों की महिला हो, इसलिए खुले दिल व दिमाग़ के साथ ससुराल जाएं और सास को अपनाएं.

– जिस तरह आप अपनी मम्मी को प्यार करती हैं, कोशिश करें की सास के बात-व्यवहार करते समय वही मां-बेटीवाली आत्मियता झलके.

– शादी से पहले ही जिस तरह होनेवाले पति से हमेशा बात करती हैं, उसी तरह कम से कम हफ़्ते में एक बार सास का हाल-चाल लेती रहीं.

– जिस तरह आप मम्मी को बालों में तेल लगाती हैं, नेल पेंट लगाती हैं, वो कौन-सी साड़ी पहनें यह डिसाइड करती हैं यही सब कुछ आपको अपनी सास के साथ भी तो करना है.

– जिस तरह खाना बनाते समय मम्मी से पूछकर काम करती हैं, उसी तरह सास से पूछकर करें. यहां अपना ईगो आड़े मत आने दें.

– हर स्त्री को सजना-संवरना पसंद होता है, तो कोशिश करें कि कभी-कभार उनके लिए कुछ कोई ब्यूटी प्रोडक्ट या कोई एक्सेसरी लेकर जाएं.

– अपने मम्मी और भाभी को देखकर आपके मन में जो भी आता है कि भाभी को मम्मी के लिए ऐसा करना चाहिए, वो सब आप अपनी सास के लिए ज़रूर करें.

– आपकी सास के लिए सबसे बेस्ट गिफ्ट होगा उनके बेटे का थोड़ा-सा ़फुर्सतवाला समय, तो कभी-कभार दोनों को कहीं शॉपिंग या यूं ही

पानीपूरी ट्रीट के लिए भेजें. दोनों के चेहरे की ख़ुशी आपकी मैरिड लाइफ में लव का डबल डोज़ लगाएगी.

– सास अपनी बहू से यही उम्मीद करती है कि वो उसे समझे, अगर आपको उनकी बात सही नहीं लग रही है, फिर भी तुरंत ना कहने की बजाय, थोड़ी देर बाद अपनी बात समझाकर कहें.

ससुरजी को दें पापावाला लव डोज़

ज़्यादातर घरों में ससुर और बहू का रिश्ता काफ़ी फॉर्मल होता है, लेकिन अगर आपके ससुरजी सुलझे हुए व मॉर्डन सोच के व्यक्ति हैं, तो आपके लिए बेस्ट मौक़ा है अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने का.

– पापा की लाडली बिटिया को ससुर की लाडली बहू बनने के लिए ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत नहीं, बस ईमानदारी से अपने कर्त्तव्य निभाने होंगे.

– जिस तरह आप पापा के घर देर से आने पर उन्हें फोन लगा देती थीं कि कहां हैं और कब तक आएंगे, यही आपको ससुरजी के साथ भी करना है.

– जब भी वो दोस्तों के साथ कहीं बाहर घूमने जा रहे हों, तो उनके लिए स्नैक्स आदि का इंतज़ाम ख़द करके दें. उन्हें अच्छा लगेगा.

– शाम को घर लौटने पर उनकी तबीयत पूछें और कुछ तकलीफ़ होने पर डॉक्टर के पास ले जाएं. याद रखें, उन्हें अकेले डॉक्टर के पास न जाने दें. साथ में ख़ुद जाएं या फिर पति को भेजें. तकलीफ़ में अपनों का साथ सबसे बड़ी दवा है.

– अगर ससुरजी कभी शांत या परेशान दिखें, तो उनकी परेशानी का कारण पूछें. अक्सर पैरेंट्स कोई समस्या बच्चों से बताने में हिचकिचाते हैं कि कहीं वो भी परेशान न हो जाएं.

– पापा के लिए फादर्स डे पर, उनके बर्थडे पर कुछ ख़ास करती थीं, बस यहां भी यही ध्यान रखें कि उनका बर्थडे, उनकी एनीवर्सरी आदि पर उन्हें विश करने के साथ-साथ कुछ ख़ास करें.

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Love Dose Formula

ननद और जेठानी के लिए है बहनवाला लव डोज़     

ननद और जेठानी ससुराल में आपकी हमउम्र व सहेली हैं. उनके साथ आपको वही दोस्ताना रखना है, जो आप अपनी दीदी या छोटी बहन के लिए रखती हैं.

– आपकी शॉपिंग हो या मौज-मस्ती हर जगह ये आपको कंपनी देने के लिए तैयार रहेंगी, बस आपको उन्हें ननद या जेठानी न समझकर एक नई फ्रेंड और बहन समझना है.

– जैसे अपनी बहन के स्पेशल दिन को ख़ास बनाती हैं, उसी तरह इनके दिन को भी ख़ास बनाएं.

– जैसे बहन के लिए कुछ न कुछ लाती रहती हैं और उनके चेहरे की मुस्कान के लिए सरप्राइज़ देती हैं, वही सरप्राइज़ यहां भी जारी रखें.

– उन्हें आपकी पसंदीदा साड़ियां, ड्रेसेज़, झुमके, नेकलेस आदि पहनने के लिए दें. उन्हें अच्छा लगेगा.

– ननद को जो पसंद है, वो उन्हें ज़रूर खिलाएं. अगर वो पिज़्ज़ा खाना चाहती हैं, तो भले ही खाना बनाने में लेट हो जाए, पर उनका मन ज़रूर रखें.

– अपनी दीदी के बच्चों से जितना प्यार करती हैं, उतना ही लाड़-प्यार जेठानी के बच्चों को भी दें. जब भी आप उनके बच्चों के लिए कुछ करेंगी, वो भी बड़ी बहन की तरह आप पर ढेर सारा प्यार लुटाएंगी.

– कभी-कभार स़िर्फ लेडीज़ गैंग बनाकर आप तीनों कहीं घूमने, मूवी या फिर शॉपिंग के लिए जाएं और जैसे बहन से पैसे नहीं लेतीं, बल्कि टिकट ख़ुद ही ख़रीदती हैं, वैसा यहां भी करें.

देवर-जेठ को दें भाईवाला लव डोज़     

ससुराल में देवर और जेठ दो ऐसे लोग हैं, जो आपकी भाई की कमी पूरी करेंगे. जिस तरह भाई आपको जानबूझकर सताता है, चिढ़ाता है, इरिटेट करता है, वही रोल शायद देवर व जेठ निभाएं, तो याद रखें कि उन्हें भी भाईवाला प्यार देना है.

– देवर शरारती होते हैं, जानबूझकर भाभी को सताना, अपने काम उन्हें देना और बिज़ी रखने के लिए कुछ न कुछ करवाने में उन्हें बड़ा मज़ा आता है, ख़ैर इसकी तो आपको आदत है, क्योंकि भाई भी तो यही करता था. जैसे भाई को हैंडल करती थीं, वैसे इन्हें भी हैंडल करें.

– जेठजी को हैंडल करना देवर की तुलना में बहुत आसान है, क्योंकि ये न तो शरारतें करते हैं, न ही आपको सताते हैं, बस इन्हें एक चीज़ से मतलब होता है कि आप उनकी पत्नी को समझें. घर के कामों में हाथ बंटाएं और सबसे घुल-मिलकर रहे.

– जिस तरह आपको अपने भाई की हर पसंद-नापसंद पता होती है, उसी तरह देवर व जेठ की पसंद जानने की कोशिश करें.

– भाई के लिए कुछ करना बहनों को हमेशा ही अच्छा लगता है, तो यही नज़रियां यहां भी रखें और अपने भाइयों की लिस्ट में दो नाम और बढ़ा दें.

दादा-दादी को दें बचपनेवाला लव डोज़

दादी सास हो या दादा ससुर अपने पोते वो जितना प्यार करते हैं, शायद ही कोई करता होगा. उनके लिए बस एक ही चीज़ मायने रखती है कि पोते की बहू भी पोते को उतना ही प्यार करे और पोते की तरह उनसे घुल-मिल जाए.

– दादा-दादी को अपने की शरारतें लुभाती हैं, उनके साथ थोड़ा दुलार दिखाएं, थोड़ी छेड़खानी करें. दादी की ख़ूबसूरती के लिए कॉम्प्लीमेंट दें, तो दादा को उनकी चुस्ती-फुर्ती के लिए.

– दादा-दादी के साथ बैठें, उनसे बातें करें, उनके समय के बारे में पूछें और उनकी सेवा का कोई भी मौका हाथ से जाने न दें.

– उनके लिए उनकी फेवरेट खाने की चीज़ें लाएं, उन्हें नई-नई चीज़ों के बारे में बताएं.

– अगर दादा-दादी कहीं किसी तीर्थस्थान जाना चाहते हैं या अपने दोस्तों की मंडली का आपके सामने अक्सर ज़िक्र करते हैं, तो उनकी उम्मीदों को पूरा करें.

– उनके दोस्तों को घर पर बुलाएं, उनका आदर-सत्कार करें और दादा-दादी की तरफ़ से कोई गिफ्ट ज़रूर दें. उनके साथ-साथ दादा-दादी की ख़ुशी देखने लायक होगी.

– उनसे लाड़-प्यार ही उनके लिए बेस्ट लव डोज़ है. वो हर किसी को पैंपर करते हैं, आप उन्हें पैंपर करें. फिर देखिएगा, कैसे खिल उठेगा उनका तन-मन.

– सुनीता सिंह  

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