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प्यार, सेक्स, कमिटमेंट… कितना बदला रिश्ता! (Love, Sex, Commitment- Changing Concepts Of Relationship)

एक लफ़्ज़, जिसकी पाकीज़गी को शिद्दत से महसूस किया जाता था… प्यार! एक एहसास, जिसे मुहब्बत के ख़ूबसूरत स्वरूप के रूप में साकार किया जाता था… सेक्स! एक अनकहा साथ, जिसे ताउम्र ही नहीं, सात जन्मों का बंधन कहा जाता था… कमिटमेंट! लेकिन समय के साथ और बदलते परिवेश ने इन तमाम शब्दों की परिकल्पना और हक़ीक़त को पूरी तरह से बदल डाला है. आज के संदर्भ में प्यार का मतलब आकर्षण! आज की तारीख़ में सेक्स का मतलब शारीरिक भूख! आज के युग में कमिटमेंट का मतलबमहज़ बेव़कूफ़ी!

Relationship

बदलते समाज की बदलती तस्वीर...

जी हां, यही सच्चाई है कि रिश्तों को सार्थक व पूर्ण करते इन तीनों शब्दों का अर्थ आज पूरी तरह बदल चुका है. बीते व़क्त की बात करें, तो काफ़ी कुछ सहज था. सबके काम व ज़िम्मेदारियां भी बंटी हुई थीं. रिश्तों को लेकर भी मर्यादा व अनुशासन था. प्यार को पवित्र अर्थों में देखा जाता था. जिससे प्यार किया, उसके साथ ही सेक्स करने की बात सोची जाती थी और उसी के साथ शादी के बंधन में बंधकर ज़िंदगीभर उस रिश्ते को प्यार से निभाने का संकल्प भी लिया जाता था.

लेकिन आज ऐसा नहीं है. प्यार को लोग महज़ आकर्षण समझते हैं, जो तब तक ही निभाया जाता है, जब तक कि यह आकर्षण एक-दूसरे के प्रति बरक़रार रहता है. सेक्स के लिए भी अब कमिटेड रिश्ते में बंधने की ज़रूरत नहीं है. सेक्स तो शरीर की डिमांड है, जब ज़रूरत हो, तब कर लो. अगर पार्टनर साथ नहीं है, तो जो मन को भा जाए, उसके साथ कर लो. यही हाल कमिटमेंट का है कि रिश्ते तो बनाते हैं लोग, पर नो गारंटीवाले रिश्ते. कब तक चलेंगे, कह नहीं सकते.

इन रिश्तों और शब्दों के मायने बदलने के कई कारण हैं…

–     हमारा समाज बदल चुका है और उसी के साथ लोगों की सोच भी.

–     अब लोग कमिटमेंट करना ही नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें ख़ुद नहीं पता होता कि रिश्ता कब तक चलेगा और कितना टिकेगा.

–     लाइफ फास्ट हो गई है और इस बदलती लाइफस्टाइल का सबसे ज़्यादा असर हमारे रिश्तों पर ही पड़ रहा है.

–     पहले एक-दूसरे के लिए पार्टनर्स एडजेस्टमेंट्स करते थे, अपनी चाहतों को छोड़कर पार्टनर की ख़्वाहिश को पूरा करने की कोशिशें करते थे. उसके सपनों में ही अपने ख़्वाबों को साकार होता देखते थे… और यह सब वो ख़ुशी-ख़ुशी करते थे.

–     वहीं अब सभी लोग सेल्फ सेंटर्ड होते जा रहे हैं. अपनी ख़ुशी, अपने सपने, अपनी ख़्वाहिशें… भले ही वो रिश्ते में भी हों, पर वहां भी अपनी-अपनी अलग ज़िंदगी ही जी रहे होते हैं.

–     स्पेस के नाम पर एक तय दूरी बनाए रखते हैं. कोई किसी के फोन को, ईमेल को या लैपटॉप को खोल नहीं सकता.

–     एक-दूसरे के पासवर्ड्स नहीं पता होते. एक-दूसरे के सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता होता.

–     ऐसे में कमिटमेंट और प्यार की जगह ही कहां बचती है.

–     रही सेक्स की बात, तो अब सेक्स को लेकर भी बहुत कैज़ुअल हो गए हैं. आजकल ज़रूरी नहीं कि पार्टनर के साथ ही सेक्स हो.

–     ज़रूरी नहीं कि शादी के बाद ही सेक्स हो.

–     क्योंकि शादी तक कौन इंतज़ार करे और क्या पता शादी कब और किससे हो?

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Couple Goals

–     ऐसे में सेक्स के एहसास से अछूता क्यों रहा जाए?

–     एक्सपोज़र इतना बढ़ गया है कि आजकल सब कुछ आसानी से उपलब्ध है.

–     बच्चों की परवरिश के तौर-तरी़के भी बदल गए हैं.

–     पैरेंट्स की सोच बदल गई है, तो भला संस्कार भी पहले जैसे कैसे रहेंगे, उनमें भी बदलाव लाज़िमी है.

–     फ्री सेक्स का कॉन्सेप्ट आज की जेनरेशन को ज़्यादा सुविधाजनक लगता है, जिसमें न प्यार की भावनाओं का पहरा और न ही कमिटमेंट का बंधन.

–     भावनाएं और कमिटमेंट में बहनेवालों को आज की तारीख़ में बेव़कूफ़ समझा जाता है और इनसे परे जो लोग हैं, उन्हें स्मार्ट कहा जाता है.

–     ऐसा नहीं है कि स़िर्फ लड़के ही ऐसी सोच रखते हैं, लड़कियां भी इसी तरह की सोच को तवज्जो देती हैं.

–     वो भी प्रैक्टिकल होने और लाइफ के प्रति प्रैक्टिकल अप्रोच रखने में ही ज़्यादा विश्‍वास करती हैं.

–     उनके लिए भी करियर और पैसा, प्यार और कमिटमेंट से ज़्यादा महत्वपूर्ण है. वो रिश्तों में भी भावनाएं नहीं अपनी सुविधाएं ढूंढ़ती हैं.

–     अपनी मर्ज़ी से जीने का शग़ल, न कोई कमिटमेंट, न कोई स्ट्रगल… हां, स्ट्रगल अगर करियर और पैसों के लिए हो, तो कोई बात नहीं, पर रिश्तों के लिए यह वेस्ट ऑफ टाइम है.

–     रिश्ता निभे तो ठीक, वरना उसे लंबे समय तक ढोना समझदारी नहीं.

–     पर रिश्ता निभाने के लिए दोनों ही तरफ़ से कोई अतिरिक्त प्रयास की गुंजाइश आज नहीं है.

–     पहले लड़कियां यह प्रयास करती थीं और आज भी कुछ लोग हैं, जो पूरी तरह प्रैक्टिकल नहीं हुए हैं, पर अब जब लड़कियों के भी प्रयास कम हो गए, तो रिश्तों से प्यार और कमिटमेंट गायब हो गया.

–     लड़कों की ओर से न पहले प्रयास होते थे और न आज ही कोशिशें होती हैं.

–     तो प्यार और कमिटमेंट के बिना अब स़िर्फ सेक्स ही रह गया है, वो भी जब मूड हो और जिसके साथ मूड हो.

–     एक ही पार्टनर के साथ अब सेक्स उबाऊ लगने लगा है. लोग अपनी लाइफ में स्पाइस ऐड करने के लिए शादी के बाहर भी सेक्स करने से परहेज़ नहीं करते.

–     शादी में तो वैसे भी एक्साइटमेंट नहीं रह गया. कुछ समय बाद सब कुछ रूटीन लगने लगता है और फिर उस पर डबल इंकम नो सेक्स का बढ़ता कॉन्सेप्ट, क्योंकि पार्टनर के साथ सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     ऐसे में जब सेक्स का मन हो, तो जो मिले उसके साथ कर लो.

–     ऐसा भी है कि पहले समाज का एक डर और परिवार का बंधन भी था, जो लोगों को मनमानी से रोकता था. यही अनुशासन कहलाता था.

–     पर आज यह डर भी ख़त्म होता जा रहा है, क्योंकि घर, परिवार, पैरेंट्स और समाज ने भी इस बदलाव को कुछ हद तक स्वीकार कर लिया है.

–     यूं भी हर कोई आत्मनिर्भर है, तो वो किसी भी रोक-टोक को अनुशासन न समझकर अपनी निजी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी मानते हैं.

–     सभी का यही कहना होता है कि यह उनकी ज़िंदगी है, चाहे जैसे जीएं.

–     सोशल मीडिया ने भी बहुत हद तक इन रिश्तों और शब्दों के मायनों को बदलने में भूमिका निभाई है. लोग ऑफिस के बाद अब सबसे ज़्यादा यहीं बिज़ी रहते हैं और यहीं सुकून तलाशते हैं. जहां डिजिटल वर्ल्ड और फेक रिश्ते उन्हें ज़्यादा आकर्षित करते हैं. ऐसे में रियल वर्ल्ड के रिश्ते बोरिंग लगने लगते हैं और वहां प्यार और कमिटमेंट की जगह कम ही रह जाती है.

–     ऐसे में प्यार, सेक्स और कमिटमेंट का यह बदलता स्वरूप कुछ समय तक तो यूं ही रहनेवाला है.

यह स्वरूप अब भले ही सुविधाजनक लग रहा होगा, पर भविष्य में इसका ख़ामियाज़ा तो सभी को भुगतना पड़ेगा. जहां कहने को अपना कोई नहीं होगा, ऐसा कोई शख़्स कहीं नज़र नहीं आएगा, जिसके कंधे पर सुकून से सिर रखकर अपने ग़म भुला सकें. व्यावसायिक और ज़िंदगी की चुनौतियों के बीच कभी न कभी तो यह एहसास होगा ही कि कोई ऐसा हो, जिसे अपना कह सकें. जिसके साथ प्यार भी हो, कमिटमेंट भी और सेक्स भी उसी के साथ हो, क्योंकि प्यार और रिश्ते का सही मायनों में भी यही अर्थ होता है, बाकी सब व्यर्थ और अनर्थ ही है.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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साइलेंट मोड पर होते रिश्ते… (Communication Gap In Relationships)

ख़ामोशियां जब बात करती हैं, तो उनमें मुहब्बत की आवाज़ छिपी होती है… ये ख़ामोशियां मन को लुभाती हैं, ये ख़ामोशियां कभी-कभी बहुत भाती हैं, ये ख़ामोशियां गुदगुदाती हैं… लेकिन जब आपका रिश्ता (Relationship) ही ख़ामोश होने लगे, तब ये ख़ामोशियां रुलाती हैं… जी हां, आज के दौर की हक़ीक़त यही है कि हमारे रिश्तों में ख़ामोशी पसरने लगी है… हमारे संबंधों में अजीब-सी वीरानी पनप रही है… आख़िर क्यों साइलेंट मोड (Silent Mode) पर जा रहे हैं हमारे रिश्ते?

Relationships Problems

पहचानें रिश्तों की ख़ामोशियों को…

–     आप दोनों पास-पास होते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

–     डिनर टेबल हो या चाय का समय, आप दोनों के पास एक-दूसरे से बात करने के लिए कुछ होता ही नहीं.

–     अब न पहले की तरह फोन या मैसेजेस करते हैं, न ही सरप्राइज़ेस प्लान करते हैं.

–     बेडरूम में भी न रोमांस की जगह बची है, न ही पर्सनल बातों की.

–     सेक्स लाइफ भी पहले की तरह नहीं रही.

–     बात भले ही न होती हो, लेकिन वो कनेक्शन भी फील नहीं होता, जो पहले हुआ करता था.

–     एक-दूसरे के प्रति इतने कैज़ुअल हो गए हैं कि किसी के होने न होने से ज़्यादा फ़र्क़ ही नहीं पड़ता अब.

–     लड़ाई-झगड़े, वाद-विवाद भी अब नहीं होते.

–     आख़िरी बार साथ-साथ कहां बाहर गए थे या कौन-सी मूवी देखी थी, वो तक याद नहीं.

–     एक-दूसरे के साथ अब ज़िद भी नहीं करते.

–     पार्टनर की पसंद-नापसंद को अब तवज्जो नहीं दी जाती.

–     इसी तरह की कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जो यह महसूस करने के लिए काफ़ी हैं कि रिश्ते में ख़ामोशी ने जगह बना ली है.

क्या हैं वजहें?

–     लाइफस्टाइल फैक्टर बड़ी वजह है. पार्टनर्स बिज़ी रहते हैं.

–     समय की कमी भी एक कारण है, क्योंकि एक-दूसरे के साथ समय कम बिता पाते हैं.

–     प्राथमिकताएं बदल गई हैं. करियर, दोस्त, बाहरी दुनिया ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

–     सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है. यहां का आकर्षण आपसी रिश्तों को काफ़ी प्रभावित करता है.

–    लोग अंजाने लोगों से कनेक्ट करके जो एक्साइटमेंट महसूस करते हैं, जो नयापन उन्हें लगता है, वो आपसी रिश्तों में नहीं महसूस होता. ये रिश्ते उन्हें बोझिल और उबाऊ लगने लगते हैं.

–     आजकल डिनर का टेबल हो या बेडरूम, शारीरिक रूप से वहां मौजूद भले ही हों, मानसिक व भावनात्मक रूप से वो कहीं और ही होते हैं.

–     कभी खाने की पिक्चर्स क्लिक करके शेयर करते हैं, तो कभी सेल्फी को कितने लाइक्स और कमेंट्स मिले, इस पर पूरा ध्यान रहता है.

–     ऐसे में रिश्तों के लिए समय ही नहीं रहता और न ही एनर्जी बचती है.

–     ऑफिस से थकने के बाद सोशल साइट्स उनके लिए रिफ्रेश होने का टॉनिक बन जाती हैं, जहां अपना बचा-खुचा समय व ऊर्जा बर्बाद करने के बाद किसी और चीज़ के लिए कुछ नहीं बचता.

–     इसके अलावा ऑफिस में भी कलीग्स के साथ दोनों समय ज़्यादा बिताते हैं, जिससे उनसे इमोशनल रिश्ता बन जाता है, जो अपने रिश्ते से कहीं ज़्यादा कंफर्टेबल और आकर्षक लगने लगता है.

–     पार्टनर्स को लगता है कि कलीग्स उन्हें बेहतर समझते हैं, बजाय पार्टनर के.

–    कई बार ये रिश्ते भावनात्मक रिश्तों से भी आगे बढ़कर शारीरिक संबंधों में बदल जाते हैं.

–     एक बार इस तरह के रिश्ते में बंध गए, तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल लगता है.

–     शुरुआत में अच्छा और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन आगे चलकर ज़िंदगी में बड़ी परेशानी हो सकती है.

–     ऐसे में अपने पार्टनर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती, उसकी हर बात बेवजह की रोक-टोक लगने लगती है और फिर आपसी प्यार लगभग ख़त्म ही हो जाता है, रिश्ता एकदम ख़ामोश हो जाता है.

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कैसे बचाएं रिश्तों को?

–     सबसे पहले तो यह जानें कि समय रहते इस ख़ामोशी की आहट को पहचान लिया जाए.

–     अगर आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में सब कुछ सामान्य नहीं है, तो पार्टनर से बात करें.

–    सोशल मीडिया, टीवी, फोन और लैपटॉप्स के यूज़ के भी नियम बनाएं.

–     हफ़्ते में एक बार आउटिंग के लिए जाएं. मूवी प्लान करें या डिनर.

–     एक-दूसरे के ऑफिस में सरप्राइज़ विज़िट दें.

–     कभी यूं ही बिना काम के भी फोन या मैसेज कर लिया करें.

–     कभी-कभार स़िर्फ एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ही कैज़ुअल लीव ले लिया करें. इससे एक्साइटमेंट बना रहता है.

–    एक-दूसरे के लिए शॉपिंग या कुकिंग करें.

–     सोशल साइट्स पर भी एक-दूसरे से कनेक्टेड रहें, ताकि आप दोनों को ही पता रहे कि रिश्ते के बाहर आप सोशल मीडिया पर कैसे बिहेव करते हैं.

–     अपने पार्टनर के प्रति कैज़ुअल अप्रोच से बचें. शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कैज़ुअल हो जाते हैं, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

–     पार्टनर को यह महसूस करवाएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी कितनी अहमियत है.

–    उन्हें स्पेशल फील कराने का प्रयास बीच-बीच में करते रहें.

–     यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों हर पल, हर घड़ी बातें ही करते रहें, लेकिन वो कनेक्शन बना रहे, वो नीरस-सी ख़ामोशी न पनपे इसकी कोशिश ज़रूर होनी चाहिए.

–     समस्या चाहे जितनी भी गंभीर हो, कम्यूनिकेशन से बेहतर समाधान कोई नहीं है. बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन और कनेक्शन बना रहे और आपका रिश्ता साइलेंट मोड पर कभी न आए.

–     अपनी सेक्स लाइफ को साइलेंट मोड पर कभी न आने दें. उसमें ऊर्जा बनी रहे, इसकी कोशिश होती रहनी चाहिए.

–     जब भी लगे कि सेक्स लाइफ बोरिंग हो रही है, तो कभी रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर, तो कभी बेडरूम डेकोर चेंज करके, रोमांटिक गानों के साथ पार्टनर का स्वागत करें. इससे आप दोनों को ही नयापन महसूस होगा.

–     नई पोज़ीशन्स ट्राई करें या सेक्स की लोकेशन चेंज करें. वीकेंड पर कोई होटल बुक करके साथ में समय बिताएं.

– विजयलक्ष्मी

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इन 10 तरीक़ों से महिलाएं करती हैं फ्लर्ट (10 Smart Techniques Of Women Flirting)

इशारों-इशारों में किसी का दिल ले लेना तो हर किसी के बस की बात नहीं, मगर इन्हीं इशारों के ज़रिए थोड़े-से ख़ुशगवार पल चुरा लिए जाएं तो क्या बुरा है? जी हां, फ्लर्टिंग (Flirting) की कला न स़िर्फ आपको ऐसे ख़ुशनुमा पलोें को जीने का मौक़ा देती है, बल्कि रिफ्रेश भी कर देती है और इस कला में अब महिलाएं (Women) भी किसी से पीछे नहीं. बस, उनका तरीक़ा पुरुषों से थोड़ा अलग होता है.

Flirting Techniques For Women

आमतौर पर यही समझा जाता है कि पुरुष ही फ्लर्टिंग में माहिर होते हैं और बस लड़कियों को देखते ही फ्लर्ट करने लगते हैं. उन्हें रिझाने के लिए तरह-तरह की बातें और इशारे भी करने लगते हैं, लेकिन हक़ीक़त यह है कि महिलाएं पुरुषों के मुक़ाबले 5 गुना ज़्यादा ऐसे सेक्सी बॉडी सिग्नल्स देती हैं, जिससे पुरुषों को ये इशारा मिल जाए कि वो उन्हें पसंद करती हैं. शोध में वैज्ञानिकों ने यह बात मानी है कि फ्लर्ट करने में महिलाएं भी पुरुषों के मुक़ाबले कहीं पीछे नहीं हैं. महिलाएं भले ही शब्दों के ज़रिए फ्लर्ट न करें, लेकिन वो अपनी बॉडी लैंग्वेज और सिग्नल्स से बहुत कुछ बयां कर देती हैं. तो आइए, उन संकेतों को पहचानें, जो महिलाएं फ्लर्ट करने के लिए इस्तेमाल करती हैं, ताकि पुरुष भी समझें उनकी फ्लर्टिंग लैंग्वेज को.

1. अगर किसी पुरुष से बातचीत के दौरान महिला उसके क़रीब आती है, तो इसका मतलब है कि वो उसे पसंद कर रही है.

2. अगर वो बार-बार अपने बालों को ठीक करे या अपनी लटों में उंगलियां घुमाने लगे तो सीधा संकेत है कि आप उसे आकर्षक लग रहे हैं.

3. हो सकता है वो अपने हाथों को रब करे या अपने शरीर को टच करे, जैसे- गर्दन पर या बांहों पर हाथ फेरे इत्यादि. ये संकेत है कि आप उस शाम उसे कॉफी के लिए आमंत्रित करेंगे, तो आपको निराश नहीं होना पड़ेगा.

4. अगर कोई महिला फ़्लर्ट कर रही हो, तो उसकी आंखेें भी बहुत कुछ कहती हैं. वो आपसे ज़्यादा देर तक आई कॉन्टेक्ट रखेगी और फिर नज़रों को ख़ास अंदाज़ में झुका लेगी.

5. आपसे हर बार सामना होने पर मुस्कुराकर आपका स्वागत करेगी.

6. अगर वो आपको पसंद करती है, तो आप जैसे ही उसे देखेंगे, वो अपने कपड़े ठीक करने लगेगी. अपने टॉप को या कुर्ते के बटन को ठीक करने लगेगी.

7. फ्लर्टिंग में माहिर महिलाएं यह अच्छी तरह से जानती हैं कि पुरुषों को किस तरह से आकर्षित करके अपने दिल की बात उन तक पहुंचानी है.

8. अगर बैठने के दौरान वो आपके कंधे या पैर पर अपना हाथ रख दे या आसपास होने पर ग़लती से बॉडी टच करने का आभास दे, तो ये आपके लिए ग्रीन सिग्नल है.

9. अगर वो फ्लर्टिंग की कला में माहिर है, तो वो बहुत ही स्मार्टली स़िर्फ उतनी ही स्किन रिवील करेगी, जिससे आपका ध्यान उसकी तरफ़ आकर्षित हो और उसके बाद आप ख़्यालों की दुनिया में खो जाएं.

10. फ्लर्ट करनेवाली महिलाएं अपनी आवाज़ का भी बखूबी इस्तेमाल करती हैं. वो आपके कानों के पास आकर सेक्सी अंदाज़ में धीरे से बात करेंगी, ताकि आप ये समझ जाएं कि आप उसे आकर्षक लग रहे हैं.

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Flirting Techniques For Women
क्या कहती हैं महिलाएं फ्लर्टिंग के बारे में?

– फ्लर्टिंग आपको फ्रेश और रोमांटिक बनाए रखती है.

– इससे आपको कॉन्फ़िडेंस मिलता है.

– अगर कोई आपको आकर्षक लग रहा है तो उससे फ्लर्ट करने में बुराई ही क्या है?

– फ्लर्टिंग में दोनों पक्षों के लिए फ़ील गुड फैक्टर जुड़ा होता है.

– हो सकता है, फ्लर्टिंग से शुरुआत हुई बात रोमांटिक रिश्ते में बदल जाए.

– फ्लर्टिंग हमेशा हेल्दी होनी चाहिए.

– कभी-कभार लोग इससे आपके चरित्र को जज करने लगते हैं, ऐसे में फ्लर्टिंग थोड़ा संभलकर और उसके साथ ही करनी चाहिए, जो आप ही की तरह ओपन

मांइडेड हो.

– फ्लर्टिंग ग़लत मकसद से नहीं की जानी चाहिए. फ्लर्टिंग का इरादा स़िर्फ दोस्ती करना और सामने वाले को ख़ुश व अच्छा महसूस कराना होता है.

– फ्लर्टिंग करते वक़्त भी ख़ास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है, क्योंकि फ्लर्टिंग एक कला है. ऐसे में आपका अप्रोच पॉज़ीटिव होना चाहिए.

– अगर कोई पसंद है या किसी का व्यक्तित्व आकर्षक लग रहा है, तो उसकी तरफ़ मुस्कुराकर देखने में क्या बुराई है?

– हां, इशारा इस तरह का न हो कि सामनेवाला कुछ ग़लत समझ बैठे.

– किसी की स्टाइल पसंद हो, तो उसे कॉम्प्लिीमेंट ज़रूर दें.

– हालांकि महिलाओं का एक वर्ग ऐसा भी है, जो फ्लर्टिंग के ज़्यादा पक्ष में नहीं है, उनका मानना है-

– भले ही आपके इरादे कितने भी नेक हों, लेकिन फ्लर्ट करनेवाली महिलाओं को हमारे समाज में अच्छा नहीं समझा जाता.

– इससे आपके चरित्र पर भी सवाल उठ सकते हैैं.

– आपका ग़लत फ़ायदा उठाया जा सकता है.

– हो सकता है कोई भी आपको फिर गंभीरता से न लेकर स़िर्फ मज़े के लिए आपसे बात करे या मित्रता रखे.

– कभी-कभार मज़े के लिए की गई फ्लर्टिंग ख़तरनाक भी हो सकती है. सामनेवाले के इरादे कितने नेक हैं, यह कैसे जाना जा सकता है?

– फ्लर्टिंग करते-करते भावनात्मक लगाव होना भी संभव है, ऐसे में बहुत-सी बातों पर ग़ौर करते हुए ही फ्लर्टिंग की जानी चाहिए, वरना रिश्तों में उलझनें पैदा हो सकती हैं.

– दरअसल पुरुष महिलाओं के फ्लर्टिंग के अंदाज़ को दोस्ती या कुछ और ही समझ बैठते हैं और उनके इशारों को ग़लत दिशा में ले जाते हैं. यही वजह है कि वो दोस्ती और प्यार के बीच उलझ जाते हैं.

ऐसे में बेहतर होगा कि पहले फ्लर्टिंग की कला को जानें, समझें और तभी आगे बढ़ें, क्योंकि फ्लर्टिंग में कोई बुराई नहीं है, लेकिन फ्लर्टिंग अपने आप में एक कला है और किसी भी कला का असर तभी नज़र आता है, जब आप उसमें माहिर हो जाएं.

– गीता शर्मा

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पहला अफेयर: काला खट्टा (Pahla Affair: Kaala Khatta)

Pyar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: काला खट्टा (Pahla Affair: Kaala Khatta)

रेस्टोरेंट की सीट पर बैठते ही उसने हमेशा की तरह कहा, “एक काला खट्टा.” हैरानी तब हुई जब पीछे से भी कुछ जानी-पहचानी आवाज़ ने कहा, “एक काला खट्टा.” कुछ ख़ास बात नहीं थी, लेकिन उसे उत्सुकता हो आई. उसका ऑर्डर टेबल पर सज गया था, लेकिन वो उस आवाज़ को देखने का लोभ न छोड़ सकी और हाथ धोने के बहाने उठ खड़ी हुई. जब वो पास से गुज़री, तो एक ताना मिश्रित नारी स्वर उसे सुनाई दिया, “पता नहीं, तुम कब बाज़ आओगे ऐसी बचकानी चीज़ें खाने से…” और वो चाट खाने में व्यस्त हो गई. उसका पति धीरे-धीरे काला खट्टा चूस रहा था.

बेशक उम्र के निशान साफ़ नज़र आ रहे थे, लेकिन वो सोमेश ही था. उसके बचपन का स्कूल के समय का साथी. एक ही स्कूल और पास-पास घर. दोनों इकट्ठे ही खाते-पीते. ख़ासकर काला खट्टा एक ही स्टिक से चूसते. सोमेश को आज एक अरसे बाद इस तरह अचानक देखकर बीती बातों में दिल खोने लगा. बचपन का वो ज़माना फिर याद आने लगा, जहां दोनों एक साथ स्कूल
आते-जाते, एक ही साथ खेलते. बचपन की नादानियां, खट्टी-मीठी नोक-झोंक दोनों को कब एक-दूसरे के क़रीब ले आई, इसका एहसास ही नहीं हो पाया.

बचपन के छूमंतर होते ही जवानी में क़दम रखते ही लड़कियों पर हज़ारों तरह के पहरे लगना कोई नई बात नहीं है. भले ही ज़माना कितना ही मॉडर्न हो जाए, बहुत आगे पहुंच जाए, लेकिन समाज व परिवार की लक्ष्मण रेखा पार करना सबके बूते की बात नहीं होती. अब बात-बात पर उसे टोका जाने लगा था कि वो बच्ची नहीं है, जवान हो चुकी है. सोमेश के साथ इस तरह आना-जाना या समय बिताना ठीक नहीं. समाज और परिवार के लोग क्या कहेंगे? लेकिन उसके मन में प्यार की कोंपल फूट चुकी थी और सोमेश की आंखों की भाषा भी वो समझती थी. उसके मन में छिपे प्यार को और सोमेश की आंखों में साफ़ नज़र आते इक़रार को दोनों ही बख़ूबी समझते थे.

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अब बचपन की वो बेफ़िक्री नहीं थी, एक अजीब-सी झिझक और हया दोनों के बीच पसर गई थी. एक-दूसरे को देखकर धड़कनें तेज़ हो जाना, चोरी-चोरी एक-दूसरे को छुप-छुपकर निहारना और जब आंखों से आंखें टकरा जाएं, तो अजीब-सी सिहरन और मदहोशी का एहसास होना… ये सब प्यार की ही तो निशानियां थीं… पहले प्यार की ख़ुशबू, एक अलग-सा जादू… दोनों को ही इस अनोखे एहसास ने छू लिया था.

चाहत तो दोनों की ही थी कि एक-दूसरे के हो जाएं हमेशा के लिए. एक पवित्र बंधन में बंध जाएं और खुलकर सबको कह सकें कि हां, हमें मुहब्बत है… और हम अपनी मुहब्बत को रिश्ते का नाम देना चाहते हैं, लेकिन दरिया गहरा था और वो सोहनी नहीं थी, जो कच्चे घड़े से दरिया पार कर लेती. पहला प्यार एक कसक बनकर रह गया.

पीछे वाली सीट खाली हो चुकी थी और उसकी प्लेट का काला खट्टा भी बह गया था, उसकी आंखों के आंसुओं की तरह…

– विमला गुगलानी

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जानें वो 10 कारण जो आपको ऑर्गैज़्म से वंचित रख रहे हैं? (10 Reasons You’re Not Having An Orgasm)

सेक्स (Sex) और रोमांस (Romance) का इतना एक्सपोज़र होने के बावजूद आज भी बहुत-सी ऐसी महिलाएं (Women) है, जो ऑर्गैज़्म (Orgasm) से वंचित रह जाती हैं. ऑर्गैज़्म न आने के कई कारण हैं, पर ज़्यादातर मामलों में देखा गया है कि महिलाएं ख़ुद इसके लिए कोई ख़ास कोशिश नहीं करतीं. ऑर्गैज़्म एक ऐसा एहसास है, जो न स़िर्फ महिलाओं को आत्मिक सुख का एहसास कराता है, बल्कि उन्हें पूर्णता का एहसास भी कराता है. अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को और रोमानी बनाना चाहती है, तो ऑर्गैज़्म बहुत ज़रूरी है. तो फिर ऐसा क्या है, जो आपको इस एहसास से वंचित रख रहा है, आइए जानते हैं.

Reasons Of Not Having An Orgasm

1. आप डेस्क जॉब करती हैं

लगातार बैठकर काम करनेवाली महिलाओं की पेल्विक मसल्स शॉर्ट होने लगती हैं, जिससे उन्हें पेल्विक पेन होता है. पेल्विक पेन आपके ऑर्गैज़्म में बाधा बनता है. इसके लिए मैरिज काउंसलर और सेक्स थेरेपस्टिस्ट काम के दौरान हर आधे घंटे में अपनी सीट से उठने की सलाह देते हैं. बीच-बीच में ये ब्रेक आपकी पेल्विक मसल्स को मज़बूती प्रदान करते हैं.  स्न्वैट्स और बटरफ्लाई एक्सरसाइज़ेस पेल्विक मसल्स की मज़बूती के लिए बेस्ट हैं.

2. बहुत ज़्यादा हाई हील्स पहनती हैं

हाई हील्स पहनना न स़िर्फ आपके पैरों में दर्द का कारण बनता है, बल्कि यह आपको ऑर्गैज़्म से भी वंचित रख सकता है. दरअसरल, पैरों की सोअस मसल्स पेल्विक नर्व्स से जुड़ी होती हैं, जिनके डैमेज होने से ऑगैऱ्ज्मवाला सिग्नल आप तक जल्दी नहीं पहुंचता. इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने सोअस मसल्स को ध्यान में रखते हुए बहुत ज़्यादा हाई हील्स न पहनें और न ही बहुत ज़्यादा देर तक पहनें.

3. पानी कम पीती हैं

पानी की कमी से न स़िर्फ रोज़मर्रा की हेल्थ प्रॉब्लम्स, जैसे- कब्ज़ और थकान की समस्या होती है, बल्कि यह आपके ऑर्गैज़्म को भी प्रभावित करता है. आपके शरीर में मौजूद अरॉउज़ल टिश्यूज़ को बेहतर ढंग से काम करने के लिए फ्लूइड की ज़रूरत होती है, जिसकी पूर्ति शरीर को हाइड्रेटेड रखकर ही की जा सकती है. अगर आप डिहाइड्रेशन का शिकार हैं, तो आपके लिए ऑगैऱ्ज्म पाना और भी मुश्किल हो जाता है. इसलिए कोशिश करें कि रोज़ाना 7-8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं.

4. सेक्स के दौरान चुप रहना

शायद आपको यह बात पता नहीं होगी कि सेक्स के दौरान की चुप्पी आपको ऑर्गैज़्म से वंचित रख सकती है. अगर सेक्स के दौरान आप आवाज़ नहीं करतीं या सिसकारी नहीं भरतीं, तो ऑर्गैज़्म मिलने में आपको काफ़ी व़क्त लगता है. अगर सेक्स के दौरान आप आवाज़ करती हैं, तो आपको ऑर्गैज़्म जल्दी और लंबे समय तक मिलता है.

 

5. दवाइयां हैं ज़िम्मेदार

दवाइयों में मौजूद प्रोलैक्टिन एक ऐसा तत्व है, जो आपकी सेक्स ड्राइव को कमज़ोर बनाता है. इसके लगातार इस्तेमाल से महिलाओं में सेक्स में रुचि कम हो जाती है. अगर आप भी लंबे समय से ब्लड प्रेशर की दवाइयां, बर्थ कंट्रोल पिल्स या फिर एंटीडिप्रेसेंट का इस्तेमाल कर रही हैं, तो समझ जाएं कि आपके और आपके ऑर्गैज़्म के बीच कौन दुश्मन बनकर खड़ा है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सेक्स थेरेपिस्ट महिलाओं को लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

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Orgasm
6. ऑक्सीटॉसिन लेवल बहुत कम है

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऑर्गैज़्म के लिए ‘फील गुड’ या ‘लव हार्मोन’ कहा जानेवाला ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का लेवल बहुत मायने रखता है. अगर आपके शरीर में इसका लेवल कम है, तो आपको ऑर्गैज़्म मिलने में मुश्किल होती है. ऑक्सीटॉसिन की कमी का कारण स्ट्रेस है, जो आजकल अमूनन हर किसी को परेशान करता है. पार्टनर के साथ ज़्यादा से ज़्यादा व़क्त बिताना, किसिंग और हगिंग इस हार्मोन के प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करता है.

7. ब्लैडर का फुल रहना

जिस तरह सेक्स के बाद यूरिन पास करना आपको यूरिनरी ट्रैक्ट से बचा सकता है, ठीक उसी तरह सेक्स से पहले ब्लैडर खाली करके आप ऑर्गैज़्म जल्दी पा सकती हैं. ब्लैडर फुल होने पर ऑर्गैज़्म की फीलिंग जल्दी नहीं आती. ख़ासतौर से महिलाएं संबंध बनाने से पहले यूरिन पास करें, ताकि ब्लैडर खाली रहे और आप उस व़क्त को एंजॉय कर सकें.

8. आप मास्टरबेशन नहीं करतीं

आज भी बहुत-सी महिलाएं इसे ग़लत मानती हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेक्स लाइफ और उनके ऑर्गैज़्म पर पड़ता है. मास्टरबेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जसिके ज़रिए आप ख़ुद को संतुष्ट करती हैं. मास्टरबेशन के दौरान आपकी फैंटसीज़ चरम पर होती हैं और आप खुद को संतुष्ट करने के लिए अपनी बॉडी को बेहतर समझती हैं, जो पार्टनर के साथ सेक्स करते वक़्त आपको ऑर्गैज़्म दिलाने में आपको मदद करता है. एक्सपर्ट भी सप्ताह में एक बार मास्टरबेशन की सलाह देते हैं.

9. पार्टनर को अपनी फैंटसीज़ नहीं बतातीं

यह भी एक कारण है कि आप ऑर्गैज़्म तक नहीं पहुंच पातीं. आप क्या चाहती हैं, क्या नहीं चाहती इस बारे में पार्टनर को खुलकर्र नहीं बतातीं। आपको दर है कि कहीं वो आपको ग़लत न समझ ले. पर ज़रूरी नहीं ऐसा हो. हो सकता है उसे अच्छा लगे कि आपने अपने दिल की बात उनसे कही. जब आपकी फैंटसीज़ पूरी होंगी, तो आपको ऑर्गैज़्म मिलना ही है.

10.  दिमाग़ ही दुश्मन है

आपने अपने दिमाग में यह बात बिठा ली है कि ऑर्गज़्म आपके लिए नहीं बना है. अगर शादी के इतने सालों में इसका एहसास नहीं हुआ तो, अब कभी नहीं होगा. लेकिन ऐसा है नहीं, हो सकता है, आपने इसके लिए कोशिश ही नहीं की. महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले ऑर्गैज़्म मिलने में थोड़ा समय लगता है और यह बात बहुत काम पुरुषों को पता होती है. महिलाओं को भी उस सुख का एहसास हो इसके लिए महिलाओं को ही पहल करनी होगी. आप टॉप पोज़िशन ट्राय करें आपको इसका जल्द एहसास होगा.

 

 – अनीता सिंह   

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रिश्तों में मिठास बनाए रखने के 50 मंत्र (50 Secrets For Happier Family Life)

ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाते हैं रिश्ते, अपनेपन का एहसास कराते हैं रिश्ते, कभी पल में जुड़ जाते हैं रिश्ते, जीने का सबब होते हैं ये रिश्ते… रिश्तों के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती. ऐसे में अगर इसमें अपनेपन की मिठास घुल जाए, तो ज़िंदगी और भी ख़ुशगवार बन जाती है. आइए, जानें रिश्तों में मिठास बनाए रखने के 50 मंत्र.

Secrets For Happier Family Life

1. सबसे पहले रिश्ते की ज़रूरतों को समझें, जो रिश्ता आप निभाने जा रहे हैं, वह कितना अहम् है आपके लिए इस बात को समझें.

2. दूसरी ज़रूरी चीज़ यह है कि आप अपने रिश्तों को समय दें. यह काफ़ी पुराना मंत्र है, पर है सौ फ़ीसदी कारगर. साथ समय बिताने के लिए आप साथ फ़िल्म देख सकते हैं, बाहर खाना खाने जा सकते हैं, साथ टीवी देख सकते हैं या फिर बातें कर सकते हैं.

3. स्पर्श का जादू… क्या आपने इसके बारे में सुना है? यह वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हो चुका है कि स्पर्श किसी भी रिश्ते में जादू का काम करता है. अगर बच्चा बीमार है, तो डॉक्टर भी यह सलाह देते हैं कि पैरेंट्स बच्चे को अपना स्पर्श दें. स्पर्श सभी रिश्तों में बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए समय-समय पर जहां ज़रूरी हो, अपने स्पर्श का जादू चलाते रहें.

4. जब अपने मित्रों या रिश्तेदारों के साथ हों, तो औपचारिक भाषा का प्रयोग न करें. अनौपचारिक भाषा या बातचीत से आप और क़रीब आते हैं. उदाहरण के तौर पर, “आप कैसे हैं?” की जगह आप पूछ सकते हैं, “बहुत दिनों के बाद आपसे मुलाक़ात हुई, क्या हालचाल हैं?”

5. उपहार किसी भी रिश्ते में नई जान डाल सकते हैं. बिगड़ी बात बना सकते हैं. उपहार सस्ता हो या फिर महंगा, यह महत्वपूर्ण नहीं है. आप उसे किस भावना से दे रहे हैं, वो महत्वपूर्ण है. उपहार बताते हैं कि आप अपनों का कितना ख़्याल रखते हैं. यदि उपहार अनपेक्षित रूप से और बिना किसी स्वार्थ के दिया जाए, तो आनंद दुगुना हो जाता है.

6. आप अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों के लिए एक छोटी-सी पार्टी या समारोह का आयोजन कर सकते हैं. उस पार्टी की थीम ़फैमिली रख दीजिए.

7. थोड़ा समय निकालकर अपने माता-पिता, भाई-बहनों आदि के साथ बैठकर अपने पुराने फ़ोटो एलबम देखें. अपने सगे-संबंधियों के साथ बिताए गए समय की ये तस्वीरें आज उनसे आपके रिश्ते को ज़रूर मज़बूत बनाएंगे.

8. साथ खाना ज़रूर खाएं. बेहतर रिश्तों के लिए दिन में कम से कम एक बार साथ खाना बहुत ज़रूरी है. खाने के टेबल पर परिवार से जुड़ी बातें ही करें.

9. रिश्तों में आपकी तरफ़ से अगर अपेक्षाएं कम और ज़िम्मेदारी का बोध ज़्यादा होगा, तो रिश्ते अपने आप मधुर होते जाएंगे.

10. हफ़्ते में कम से कम एक बार अपने सभी रिश्तेदारों से फ़ोन या इंटरनेट से बात करें.

11. किसी भी रिश्ते को निभाते समय अपना अहंकार या ईगो बीच में न आने दें.

12. अपनी प्रा़ेफेशनल लाइफ़ को ऑफ़िस तक ही सीमित रखें. उसे अपने घर के भीतर न लाएं.

13. जब आप अपने परिवारजनों के साथ हों, तो कंप्यूटर, टीवी या फ़ोन का इस्तेमाल कम से कम करें.

14. किसी भी परिस्थिति में रिश्तों के बीच संवादहीनता न आने दें. चुप्पी रिश्ते को ख़त्म कर देती है. यदि कोई रिश्ता बिगड़ रहा हो, तो उसे बातचीत से ठीक करें.

15. किसी से बात करते समय या अपनी बात किसी के समक्ष प्रस्तुत करते समय इस चीज़ का ख़ास ख़्याल रखें कि हर किसी का आत्मसम्मान होता है और उसे आप ग़लती से भी चोट न पहुंचाएं.

16. अच्छे श्रोता बनें. एक अच्छे रिश्ते के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि सामनेवाले की बातों को धैर्य के साथ सुना व समझा जाए.

17. किसी भी रिश्तेदार से मिलते समय मन में कोई हीनभावना या किसी बात का गर्व न आने दें.

18. यदि आप अपने रिश्तेदारों और मित्रोें को नाम से याद रखें और किसी समारोह में नाम से संबोधित करें, तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा.

19. अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों के जन्मदिन, शादी की सालगिरह आदि की तारीख़ याद रखकर उन्हें बधाई ज़रूर दें.

20. यदि आप समय-समय पर बड़ों को आदर और छोटों को प्यार देते रहेंगे, तो रिश्ते मज़बूत होते जाएंगे.

21. हर रिश्ते की अपनी समस्याएं होती हैं, पर किसी भी हाल में आपको क‘ोधित नहीं होना है. अपने जज़्बातों और ग़ुस्से पर नियंत्रण रखें.

22. आज की सबसे बड़ी समस्या है आर्थिक परेशानियां. लेकिन यह ध्यान रहे कि आपकी आर्थिक परेशानियां किसी भी रिश्ते और ख़ासकर पति-पत्नी के रिश्ते को हताहत न करें, क्योंकि आपकी परेशानियां, तो देर-सवेर सुलझ ही जाएंगी, पर रिश्ते नहीं.

23. रिश्तों में क्षमादान बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए माफ़ करना और अपने किसी ग़लत व्यवहार के लिए माफ़ी मांगना भी सीखें.

24. अपशब्दों या लड़ाई-झगड़े से दूर रहेें.

25. ख़ुद अपने हाथों से पूरे परिवार की पसंद का खाना बनाएं.

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Happy Family Life

26. सारे तीज-त्योहार सभी रस्मों-रिवाज़ व परंपराओें के साथ परिवारवालों के साथ मनाएं.

27. परिवारजनों या रिश्तेदारों में किसी को कोई विशेष उपलब्धि मिली हो, तो उसे सराहना न भूलें.

28. सभी परिवारवाले मिलकर साल में एक बार साथ घूमने ज़रूर जाएं.

29. छुट्टीवाले दिन सभी घरवाले मिलकर कि‘केट, कैरम या कोई और गेम खेल सकते हैं.

30. अगर संभव हो, तो घर में कोई पालतू जानवर रखें, जिसकी देखभाल परिवार के सभी लोग मिलकर करें.

31. घर के बच्चों में भी रिश्तों को निभाने के संस्कार डालें.

32. यदि आपको अपने परिवार से प्यार है, तो अपनी इस भावना को सबके सामने जाहिर होने दें.

33. परिवार में अपने रिश्ते को मज़बूत करने के लिए आप अपने परिवार के इतिहास पर एक शोध कर सकते हैं, जैसे- आपके पूर्वज कौन थे? वह कहां से आए थे? आज आपके क़रीबी रिश्तेदार कहां-कहां स्थित हैं आदि. और फिर ये सारी जानकारियां आप परिवार को गेट-टुगेदर पर दे सकते हैं.

34. घर के सारे काम एक-दूसरे के साथ बांटकर करें. इससे काम करने में मज़ा भी आएगा और आपसी रिश्ते भी मज़बूत होंगे.

35. परिवार के प्रत्येक सदस्य को प्राइवेसी मिलनी चाहिए, फिर चाहे वह छोटा हो या बड़ा.

36. रिश्ता कितना भी गहरा क्यों न हो, पर किसी के निजी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए.

37. अपने रिश्तों में विश्‍वास पैदा करें.

38. किसी भी रिश्ते में दोस्ती का एक रिश्ता ज़रूर रखें.

39. आपके घर आनेवाले रिश्तेदारों का स्वागत पूरे दिल से करें. अपने तनाव अपनी परेशानियों को उनके सामने जाहिर न हेाने दें.

40. अपने आपको रिश्ते के हर उतार-चढ़ाव और हर परिस्थिति में ढालने के लिए तैयार रखेें.

41. अपने प्रियजनों के बुरे वक़्त में उनका साथ ज़रूर दें.

42. पूर्वानुमान लगाना सीखें कि आपकी पत्नी या पति, आपके माता-पिता आपसे क्या चाहते हैं? उनकी आपसे क्या अपेक्षाएं हैं? और उनके कहे बिना उसे पूरा कर उन्हें सरप्राइज़ देें.

43. आप जैसे हैं, घरवालों और रिश्तेदारों के सामने भी वैसे ही रहें. कुछ और बनने या दिखाने का प्रयत्न न करें. इससे भविष्य में आप मुश्किल में पड़ सकते हैं.

44. किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए आपका ख़ुद का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है, इसलिए अपनी सेहत का ख़ास ख़्याल रखें.

45. अपनी बुरी परिस्थितियों व दुखों का रोना किसी के सामने न रोएं. हमेशा रोनेवाले व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता.

46. अपने हर रिश्ते में पूरी ईमानदारी बरतें.

47. किसी से भी मिलते समय सकारात्मकता से मिलें. उस व्यक्ति के लिए कोई भी कड़वाहट मन में न रखें.

48. किसी रिश्ते को निभाते समय अगर पूर्व में आपसे कोई ग़लती हुई हो, तो उसे हमेशा याद रखें, ताकि आप उसे दोहराएं ना.

49. दूसरों से वैसा ही व्यवहार करें, जैसा कि आपको अपने लिए अपेक्षित है. आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि जैसा बोएंगे वैसा ही काटेंगे.

50. रिश्तों में कभी रूखापन न आने दें. अपने प्रेम की आर्द्रता से इसे समय-समय पर सींचते रहें. यदि आपसे कोई रूठा है, तो उसे मनाने में ज़रा भी देर न लगाएं, क्योंकि वही तो आपका अपना है, जिसे आप बहुत प्यार करते हैं.

– विजया कठाले निबंधे

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पहला अफेयर: अधूरा एहसास… अधूरा प्यार… (Pahla Affair: Adhura Ehsas… Adhura Pyar)

Pahla Affair

पहला अफेयर: अधूरा एहसास… अधूरा प्यार… (Pahla Affair: Adhura Ehsas… Adhura Pyar)

हर बात अच्छी थी तुम्हारी, क्योंकि तुम में हर वो बात थी, जो किसी भी लड़की को आकर्षित कर सकती थी. कम से कम मुझे तो यही लगता था. यही वहज थी कि मैं भी बिना डोर की पतंग की तरह तुम्हारी ओर खिंचती चली गई. मुहब्बत का वो शुरुआती आकर्षण, वो कशिश, वो एहसास… बेहद ख़ुबसूरत पल थे वो. बेहद हसीन दिन… कॉलेज का लास्ट ईयर था. तुमने इसी साल कॉलेज में एडमिशन लिया था और कुछ ही दिनों में तुम लड़कियों के मोस्ट फेवरेट बन गए थे. तुम्हारा स्टाइल, एटीड्यूड और स्टडीज़ से लेकर हर एक्टिविटीज़ में सबसे आगे रहना… सब दीवानी थीं तुम्हारी ही.

उन सबके बीच तुमने मुझे चुना था. मैं ख़ुद को सबसे ख़ुशनसीब समझ रही थी. वैलेंटाइन डे के दिन तुमने मुझे प्रपोज़ किया और मेरे पास भी इंकार करने का कोई कारण नहीं था. अब तो बस दिन-रात तुम्हारा ही ख़्याल…

इसी बीच हमें कुछ सालों के लिए जुदा होना था, क्योंकि तुम हायर स्टडीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे और मुझे जॉब मिल गया था. हमने वादा किया था एक-दूसरे से कि इंतज़ार करेंगे और सही व़क्त आने पर शादी भी, शायद इसीलिए ये दूरियां भी खल नहीं रही थीं इतनी.

तुम्हारा रोज़ कॉल आता. वीडियो कॉल पर ढेरों बातें होतीं. तुम अक्सर पूछते कि मेरे ऑफिस में कौन-कौन है… मैं कहां जा रही हूं… क्या कर रही हूं… और मैं भी अपनी सारी बातें तुमसे शेयर करती. हमारे दिन-रात के अंतर का भी हमारी बातचीत पर असर नहीं पड़ता था. तुम देर रात तक जागते थे, मुझसे बात करने के लिए.

उस दिन, तुम शायद नशे में थे, जब मैंने तुम्हें अपनी ऑफिस की पार्टी के बारे में बताया था, क्योंकि तुम्हारा ऐसा रूप मैंने पहले कभी नहीं देखा था. तुमने मुझे, अपनी प्रिया को इतना बुरा-भला कह दिया कि मुझे विश्‍वास ही नहीं हो रहा था अपने कानों पर. तुमने मेरे चरित्र पर सवाल उठाए कि ऑफिस पार्टी में दूसरों के साथ डान्स क्यों किया… इतना बन-ठन के क्यों गई… मेरे लिए काफ़ी शॉकिंग था तुम्हारा यह बर्ताव, पर मैंने अपने दिल को यही कहकर समझा लिया कि तुम दूर हो, इसीलिए ओवर पज़ेसिव हो रहे हो. साथ ही तुम नशे में भी थे.
ख़ैर, दो-तीन दिन की नाराज़गी के बाद तुमने माफ़ी मांगी और सब कुछ नॉर्मल हो गया. लेकिन फिर कुछ दिनों बाद तुम्हारे वही सवालात… कि फोन क्यों नहीं उठाया, मेरा फोन था, तुम समझती क्या हो, नौकरी करके मुझ पर एहसान नहीं कर रही… और भी न जाने क्या-क्या… उसके बाद तो ये सिलसिला रूटीन ही बन गया था… तुम हर रोज़ किसी न किसी बात को लेकर मुझे बुरा-भला कहते और अगले दिन माफ़ी मांग लेते.

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अगले महीने तुम छुट्टियों में इंडिया आनेवाले थे. मुझे लगा मिलकर बात करेंगे, तो शायद मैं तुम्हें बेहतर ढंग से समझा सकूं. तुम आए, हम मिले भी, पर मुझे कहीं न कहीं यह एहसास हो रहा था कि तुम्हारा पुरुष अहम् तुम्हें सहज नहीं रहने दे रहा था मेरे साथ. तुम्हें लगता था कि तुम जो बोलो वही हो, तुम जब बोलो, तभी हो, क्यों? “क्योंकि मैं बोल रहा हूं, क्या इतना काफ़ी नहीं है?” यही जवाब होता तुम्हारा.
जब मन करता मेरा फोन उठाकर चेक करना, सोशल मीडिया पर किस-किस से पिक्चर लाइक की है, उसका नाम देखकर उसके बारे में सवाल करना… उसके बाद सोशल मीडिया से दूर रहने की सलाह देना… और मैं भी हर बात मानती चली गई, क्योंकि मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती थी. पर अक्सर मन में सोचती थी कि मेरा राज ऐसी सोच रखता है. इस मॉडर्न ज़माने में, ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, फिर भी ऐसी सोच?

उस दिन जब तुम वापस लौट रहे थे, मन बहुत उदास था. तुमसे लिपटकर रो रही थी मैं और तुमने मुझे सहलाते हुए कहा, “प्रिया, रोने की क्या बात है, तुम्हारे तो यहां भी बहुत सारे दोस्त हैं. उनस मन बहला लेना.”

“ये क्या बकवास है…”

“अरे, ठीक ही ता है. फ्रेंड्स तो होते ही इसलिए हैं. इतना सीरियस होने की क्या बात है.”

ख़ैर, तुम चले गए. तुम्हारी स्टडीज़ कंप्लीट होने को थी और अब तुम हमेशा के लिए इंडिया आनेवाले थे. हम शादी करनेवाले थे. तुम आए, हमारी सगाई भी हो गई. एंगेजमेंट में तुम्हारे दोस्त मेरे साथ हंसी-मज़ाक कर रहे थे. पार्टी ख़त्म होने पर मैंने तुमसे गौतम के बारे में पूछा भी था कि काफ़ी हंसमुख लड़का है. और तुमने कहा, “हां, पसंद है, तो नंबर दे देता हूं. बुला लेना रात को. चाहो तो बेड भी शेयर कर लेना.”

मैं पत्थर बनी वहीं खड़ी रही. सारी रात सोचती रही… कहां, क्या ग़लत हो रहा है मुझसे? क्या मैं यह सब डिज़र्व करती हूं?

“अरे, प्रिया सुबह-सुबह, क्या बात है?”

“हां राज, तुमसे ज़रूरी बात करनी थी. तुम्हें कुछ देना चाहती हूं.”

“क्या लाई हो मेरे लिए स्वीटहार्ट?”

“ये एंगेजमेंट रिंग, इसे अपने पास ही रखो और जब तुम्हें कोई ऐसी लड़की मिल जाए, तो तुम्हारी घटिया सोच के साथ निभा सके, तब उसे यह पहना देना.” और मैं चली आई वहां से. मेरे परिवारवाले भी मेरे इस फैसले से सहमत थे. तुमने भी उसके बाद कोई फोन या माफ़ी नहीं मांगी, क्योंकि मैं जानती थी, तुम्हारा ईगा इतना बड़ा है कि कोई लड़की तुम्हें ठुकरा दे, यह तुमसे बर्दाश्त नहीं होगा.

मेरा पहला प्यार भले ही अधूरा था, उसमें दर्द था, लेकिन मैंने सही समय पर उसे अधूरा छोड़ने का जो फैसला लिया, उससे मैं ख़ुश थी. ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं, इंसान को परखने से कहीं ज़्यादा उसे समझने में व़क्त लग जाता है. ऊपरवाले ने मेरे लिए भी कोई न कोई सही और सच्चा इंसान ज़रूर चुन रखा होगा. जब वो मुझे मिल जाएगा, तो दोबारा प्यार करने से परहेज़ नहीं करूंगी, क्योंकि मुझे प्यार से शिकायत नहीं, प्यार की भावना पर पूरा भरोसा है मुझे, क्योंकि प्यार ग़लत नहीं होता, ग़लत स़िर्फ इंसान होता है.

– गीता शर्मा

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बढ़ती उम्र, बदलती सेक्स की चाहत (Does Sex Drive Decreases With Age?)

बदलाव जीवन का नियम है और इसे टाला नहीं जा सकता. बदलाव के साथ ख़ुद को ढालना आसान नहीं होता है, परंतु हर किसी को कभी-न-कभी बदलाव को अपनाना ही पड़ता है. यही बात बढ़ती उम्र (Age) के साथ सेक्स, सेक्स डिज़ायर (Sex Desire) और सेक्सुअल परफॉर्मेंस (Sexual Performance) पर भी लागू होती है. बढ़ती उम्र के साथ सेक्सुअल डिज़ायर और सेक्सुअल परफॉर्मेंस में क्या-क्या बदलाव (Changes) आते हैं और उनका किस तरह सामना करना चाहिए, यह जानने के लिए हमने मुंबई की सेक्स स्पेशलिस्ट डॉ. एस. लता से बातचीत की.

 Sex Drive
सेक्स डिज़ायर और उम्र

सेक्स डिज़ायर उम्र के साथ घटने लगती है, परंतु लोग इस बात पर बहुत कम ध्यान देते हैं और अधिकतर समय उसका कारण जानने या ‘पहले जैसी सेक्स की ताक़त कैसे वापस पाएं’ यह सोचने में लगाते हैं. उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्त्री और पुरुष दोनों में शारीरिक बदलाव होते हैं, जैसे- त्वचा की संवेदनशीलता कम होना, बालों का स़फेद होना, हार्मोनल बदलाव, उम्र  से संबंधित बीमारियां, पुरुषों में सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की कमी होना और स्त्रियों में मेनोपॉज़ का होना. जब लोग उम्र के 40वें वर्ष में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें तरह-तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं, जैसे- आर्थराइटिस, डायबिटीज़, दिल की बीमारी, कमर दर्द आदि, जिसका सीधा असर सेक्स जीवन पर पड़ता है. ये सभी बीमारियां ऐसी हैं, जो सेक्स की इच्छा को कम करती हैं.

महिलाओं में सेक्सुअल डिज़ायर कम होने के कारण

शारीरिक व मानसिक कारण

महिलाओं में उम्र के साथ-साथ सेक्स हार्मोन, एस्ट्रोजेन की कमी हो जाती है, जिससे उनमें सेक्स की इच्छा कम हो जाती है. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के वेजाइना की वॉल पतली और ड्राई हो जाती है, जिससे सेक्स के दौरान बहुत दर्द होता है. यह भी एक कारण होता है कि महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ सेक्स की इच्छा कम हो जाती है.

सामाजिक दबाव

भारतीय समाज में आज भी महिलाओं पर इतनी बंदिशें हैं कि वे खुलकर सेक्स के बारे में बात तक करने से घबराती हैं. उम्र बढ़ने पर सामाजिक दबाव और बढ़ जाता है. महिलाएं हमेशा सोचती हैं कि अब इस उम्र में सेक्स करना ठीक नहीं, बच्चे बड़े हो गए हैं, समाज क्या कहेगा? यह भी एक कारण है कि उनमें उम्र बढ़ने के साथ सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.

बीमारियां और दवाइयां

उम्र बढ़ने के साथ कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जैसे- ब्लड प्रेशर, मानसिक दबाव, नींद न आना. इन सब से बचने के लिए तरह-तरह की दवाइयां लेनी पड़ती हैं. उन दवाइयों का असर भी सेक्स जीवन को प्रभावित करता है. इनमें से ब्लड प्रेशर की दवाइयां और मानसिक तनाव की दवाइयों का प्रयोग महिलाएं अधिक करती हैं.

लाइफ़स्टाइल

शहरों में महिलाओं की बदलती लाइफ़स्टाइल का असर भी सेक्स पर पड़ता है. बड़े शहरों में रहनेवाली महिलाएं काम करती हैं, सिगरेट-शराब पीने से भी बहुत-सी महिलाएं परहेज़ नहीं करतीं और अक्सर बाहर का खाना खाती हैं. इन सबका असर शरीर और सेक्स की इच्छा पर पड़ता है.

लुक्स

उम्र बढ़ने के साथ-साथ लुक्स में भी काफ़ी बदलाव आते हैं. इस बात का भी असर सेक्स लाइफ़ पर पड़ता है. शारीरिक आकर्षण कम हो जाने से महिलाओं में सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, क्योंकि महिलाएं अपने लुक्स को लेकर काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं.

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Sex Problems

पुरुषों में सेक्सुअल डिज़ायर कम होने के कारण

हार्मोनल बदलाव

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में भी हार्मोनल बदलाव आते हैं, जिसमें सेक्स हार्मोन, एंड्रोजन, टेस्टोस्टेरॉन में कमी हो जाती है, जो पुरुषों में सेक्स डिज़ायर के लिए ज़रूरी है. इसकी कमी होने से उनमें सेक्स की इच्छा में कमी आती है.

इरेक्टाइल डिस़्फंक्शन

उम्र बढ़ने के साथ हार्मोंस में कमी के कारण पुरुषों में इरेक्शन की समस्या हो जाती है. इरेक्शन ठीक से न होने से सेक्स करने में असमर्थता की वजह से सेक्स की इच्छा में भी कमी आ जाती है.

मानसिक दबाव

पुरुष अधिकतर कई तरह का दबाव अपने ऊपर लेते हैं, जैसे- काम का दबाव, परिवार का दबाव, बच्चों की पढ़ाई का दबाव और उनकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अपनी समस्याएं बहुत कम शेयर करते हैं. ऐसे में ये दबाव उन्हें शरीर से कमज़ोर कर देते हैं. इसके अलावा मानसिक तनाव के कारण भी उनकी सेक्स लाइफ़ प्रभावित होती है.

पार्टनर के सहयोग की कमी

उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं में सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, जिससे वो अपने साथी पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाती हैं, इससे उनका वैवाहिक जीवन नीरस हो जाता है और पुरुषों में भी सेक्स की चाह कम होने लगती है. इसलिए यह ज़रूरी है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ अपने साथी की तरफ़ ध्यान भी दें. एक-दूसरे की ज़रूरत के हिसाब से बदलाव लाएं, ताकि सेक्स की चाहत बनी रहे.

बच्चे होना

बच्चे होने पर पत्नी ज़्यादातर बच्चों को ही पूरा अटेंशन देने लगती है और पति से उसका जुड़ाव कम हो जाता है. इसके अलावा अधिकतर महिलाओं की सोच होती है कि बच्चे बड़े हो रहे हैं और बढ़ते बच्चों के सामने सेक्स करना ग़लत है. बस उनकी ये सोच उन्हें सेक्स से दूर कर देती है.

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Sex Desire

कैसे लें बढ़ती उम्र के साथ सेक्स का आनंद?

सेक्स के आनंद को उम्र के साथ कम न होने देना हमारे अपने हाथ में होता है. यदि कुछ बातों का ध्यान रखें, तो उम्र बढ़ने के बावजूद सेक्स की इच्छा को बनाए रखा जा सकता है.

एक्सपेरिमेंट करें

बढ़ती उम्र में पहले की तरह सेक्स करना बहुत मुश्किल होता है, इसलिए सेक्स करने के लिए अलग आसन और कुछ नए तरी़के अपनाने चाहिए. इससे सेक्स का आनंद भी बढ़ता है और सेक्स करने की इच्छा भी बनी रहती है.

सलाह लें

सेक्स की इच्छा में कमी आने पर आप स्पेशलिस्ट से सलाह लें, काउंसलर की मदद लें. उनके बताए उपाय काफ़ी कारगर साबित होंगे.

फ़िटनेस पर ध्यान दें

न स़िर्फ स्वास्थ्य की दृष्टि से, बल्कि सेक्स के नज़रिए से भी फ़िटनेस बहुत ज़रूरी है. ख़ुद को फ़िट रखेंगे, तो बीमारी दूर रहेगी, ऊर्जावान महसूस करेंगे और सेक्स की चाहत जागेगी. साथ ही आपका शारीरिक आकर्षण भी बरक़रार रहेगा, जो आपके पार्टनर को आपकी ओर खींच लाएगा.

– अभिषेक शर्मा

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क्या होता है जब प्रेमिका बनती है पत्नी? (After Effects Of Love Cum Arrange Marriage)

शादी (Marriage) से पहले की दुनिया किसी भी लड़के-लड़की के लिए किसी हसीन ख़्वाब से कम नहीं होती है. तब उनका दिल केवल सतरंगी सपने ही देखना चाहता है. हक़ीक़त का सामना करने की चाह उनके मन में होती ही नहीं. उस समय तो साथी से वे जितनी बार भी मिलते हैं, वह ख़ास ही लगता है. न तो तब उसमें कोई कमी नज़र आती है और न ही उसके असली रूप से रू-ब-रू होने का मौक़ा मिलता है, क्योंकि जब भी वे दोनों एक-दूसरे से मिलते हैं, तो अच्छे होने का आवरण ओढ़े रहते हैं.

 Love Cum Arrange Marriage

वैसे भी शादी से पहले प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे से कम समय के लिए ही मिल पाते हैं, पर शादी के बाद दोनों साथ में अधिक समय बिताते हैं, तो कुछ भी छिपा पाना असंभव हो जाता है और सारी परतें एक-एक करके खुल जाती हैं. इसलिए दोनों को लगता है कि शादी के बाद उनका साथी बदल गया है. एक-दूसरे को जानने-समझने का अवसर शादी के बाद ही उन्हें मिल पाता है. शादी से पहले की बेफ़िक्री और मौज-मस्ती पर ज़िम्मेदारियों का बोझ आ पड़ता है.

सामने आता है असली रूप

विवाह के बाद अगर बारिश में भीगने से बीमार होने का डर सताने लगता है, तो एक-दूसरे को कोर्टशिप के समान फूल, बुके, गिफ्ट आदि देना फ़िज़ूलख़र्ची लगने लगती है. शादी होते ही उन्हें अपने इस रिश्ते को संभालने का एहसास घेर लेता है, जबकि पहले तो यह ख़्याल तक नहीं आता कि संबंध टूट गया, तो क्या होगा, क्योंकि तब किसी तरह की वचनबद्धता से वे बंधे नहीं होते हैं, स़िर्फ एक रोमांचक दौर का आनंद उठा रहे होते हैं.

अपोलो हॉस्पिटल के मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप वोहरा के अनुसार, डेटिंग के दौरान प्रेमी-प्रेमिका को हर चीज़ में रोमांच व एक्साइटमेंट नज़र आता है. उनके अंदर नयापन हासिल करने की चाह भी रहती है. उस समय उन्हें एक-दूसरे का व्यवहार कभी खटकता भी हो, तो भी वे प्यार में डूबे होने के कारण उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं. हालांकि हक़ीक़त तो यह है कि दोनों की कोशिश ही यह रहती है कि साथी पर उनका अच्छा प्रभाव पड़े, इसलिए जिस तरह वे अपने सजने-संवरने पर ध्यान देते हैं, वैसे ही अपनी बातों में मिठास घोले रहने का प्रयत्न करते हैं. लेकिन विवाह के बाद हमेशा ही अच्छे बने रहना संभव नहीं हो पाता है, बल्कि नज़दीकियां उन्हें अपना असली स्वभाव सामने लाने पर विवश कर देती हैं और फिर शुरू हो जाता है, तानों-उलाहनों व एक-दूसरे को बदलने व अपनी इच्छा थोपने का दौर.

प्रसिद्ध नृत्यांगना शोवाना नारायण कहती हैं, “बहुत ही कम कपल इस बात को समझते हैं कि जब प्रेमी-प्रेमिका पति-पत्नी बन जाते हैं, तो बहुत-सी चीज़ें बदल जाती हैं. यह समझना आवश्यक है कि जीवन केवल फूलों की बगिया ही नहीं है, उसमें कांटे भी होते हैं. वैसे भी हमेशा रोमांस करते रहने से बोरियत पैदा होने लगती है, इसलिए बहुत ही ईमानदारी से अपने साथी को वह जैसा है, उस रूप में उसे अपना लेना चाहिए.”

उम्मीदों पर खरा न उतरना

प्रेमी-प्रेमिका शादी होते ही एक-दूसरे को अपनी सुविधा व पसंद के अनुसार बदलने में जुट जाते हैं. जब साथी उनकी उम्मीदों व अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता, तो तनाव उन्हें घेर लेता है और वे एक-दूसरे पर दोषारोपण करने लगते हैं.

डॉ. वोहरा कहते हैं कि जब पति प्रेमिका से पत्नी बनी की तुलना करने लगता है, तो उसे लगता है कि वह ऐसी तो नहीं थी. पहले उसकी जिन बातों पर वह फ़िदा रहता था, अब उनको लेकर ही वह नाराज़ रहने लगता है. वैसे भी पति बनते ही उसके अंदर पत्नी पर अधिकार जमाने की भावना जन्म ले लेती है. वह किससे बात करती है, किससे मिलती है, सब जानने की उत्सुकता उसको एक प्रहरी बनने को उकसाती है. ऐसे में जब वह उसकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो मन-मुटाव उत्पन्न होते देर नहीं लगती. फिर तो सारा रोमांस केवल बीते दिनों की याद बनकर रह जाता है.

टेलर मेड भूमिका

अधिकार भावना के आते ही पति पार्टनर को अपने हिसाब से चलने के लिए बाध्य करने लगता है. डेटिंग के समय साथी को प्रभावित करने की कोशिश भी लगभग समाप्त हो जाती है. पहले उनके अंदर स़िर्फ प्रेमी या प्रेमिका को अपना बनाने की चाह होती है और वे अपने मन में गढ़ी साथी की कल्पनाओं के आधार पर ही व्यवहार करते हैं. अपनी अपेक्षाओं के अनुसार वह साथी की छवि बना लेते हैं, लेकिन शादी होते ही वह छवि जब टूटती है, तो वे मानने लगते हैं कि उनका पार्टनर बदल गया है.

असल में विवाह होते ही वे एक टेलर मेड भूमिका निभाने को मजबूर हो जाते हैं. प्रेमिका पत्नी बनते ही एक गृहिणी का रूप ले लेती है, जिसकी वजह से उसके पूरे व्यक्तित्व में बदलाव आ जाता है. कामकाजी महिलाओं को घर के

साथ-साथ नौकरी के दायित्वों को पूरा करना होता है. ऐसे में हाथों में हाथ डाले देर रात घूमना तो संभव नहीं हो पाता है, न ही ज़िम्मेदारियां उन्हें ऐसा करने देती हैं. उन्हें एक रूटीन के साथ जीना ही होता है, फिर शादी से पहले के रोमांस के पल या घंटों एक-दूसरे की आंखों में आंखें डाले बैठे रहना बचकाना लगने लगता है.

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 Love Cum Arrange Marriage
नियंत्रण की चाह

कई बार जिस प्रेमी को पहले प्रेमिका का अलग अंदाज़ आकर्षित करता था, वही अंदाज़ नज़दीकियों के बढ़ने के साथ अखरने लगता है. ‘तुम ऐसी होगी, मैंने कभी सोचा भी नहीं था…’ जैसे जुमले पति की ज़ुबान से फिसलने लगते हैं. फिर वह साथी पर हावी होने, अपनी मनमानी जताने की कोशिश करता है. पत्नी किसी से हंसकर बात कर लेती है या घर आने में उसे देर हो जाती है, तो सवालों के साथ-साथ उस पर शक करने में भी पति को हिचकिचाहट नहीं होती. यह बदला व्यवहार शादी को युद्ध क्षेत्र में बदल देता है और उन्हें एक-दूसरे से शादी करने का अफ़सोस होने लगता है.

धीरे-धीरे ये छोटी-छोटी बातें उनके जीवन में ज़हर घोलने लगती हैं. विवाह से पहले, जो प्रेमी अपनी प्रेमिका को सिवाय मॉडर्न ड्रेसेस, स्कर्ट आदि के अलावा अन्य किसी ड्रेस में देखना पसंद तक नहीं करता था, वही पति बनते ही उसे साड़ी में एक आदर्श बहू के रूप में जब देखना चाहता है, तो प्रेमिका के लिए इस बदलाव को सहज अपनाना आसान नहीं होता है. वह सोचती है कि शादी से पहले तो कितने सपने दिखाए थे, पर अब तो वह उस पर केवल अधिकार ही जमाना चाहता है.

इन बातों पर ध्यान दें…

–     बेहतर तो यही होगा कि पति-पत्नी के रिश्ते में बंधते ही दोनों नई स्थितियों व ज़िम्मेदारियों को परिपक्वता से संभाल लें.

–     इस तरह न अपेक्षाएं रहेंगी और न ही नियंत्रण करने की चाह जन्मेगी.

–    यह सोचना कि अब उनके बीच प्यार नहीं रहा है, ग़लत है. प्यार उनके बीच तब भी बरक़रार होता है, केवल अभिव्यक्ति के तरी़के व अवसर कम हो जाते हैं.

–    परिवार बनने के साथ सोच और माहौल में बदलाव आना स्वाभाविक ही है. यह बदलाव व्यावहारिकता का प्रतीक होता है और जो कपल ऐसा नहीं करते, उन्हें बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

–     आवश्यकता है कि प्यार को बरक़रार रखते हुए अपने साथी की भावनाओं का सम्मान करें.

–     पहले अगर वह आपकी बात मान लेता था, तो कोई वजह नहीं कि शादी के बाद न माने.

–     पति-पत्नी के रिश्ते में ताज़गी व रूमानियत बनाए रखनी हो, तो ज़रूरी है कि दोनों अपने संबंधोंं में ईगो न आने दें.

–     पहले की तरह हफ़्ते में दो दिन न सही, महीने में एक बार तो खाना बाहर खाया ही जा सकता है.

–    यह सच है कि कोर्टशिप के दिनों की मस्ती बनी रहे, यह संभव नहीं है, लेकिन एक-दूसरे को बदलने या नियंत्रित करने की कोशिश करने की बजाय पति-पत्नी की भूमिका में भी भरपूर लगाव व रूमानियत को तो बनाए ही रखा जा सकता है.

– सुमन बाजपेयी

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पहला अफेयर: मुझे माफ़ कर देना… (Pahla Affair: Mujhe Maaf Kar Dena)

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पहला अफेयर: मुझे माफ़ कर देना… (Pahla Affair: Mujhe Maaf Kar Dena)

न जाने क्यों वो आज भी बहुत याद आती है. तीन साल बीत गए, पर बीते दिनों की याद मन में हलचल ही पैदा करती है. प्रेम अद्भुत होता है. जीवन में कब और किससे हो जाए कोई नहीं जानता. किसी के लिए मनमोहक एहसास, तो किसी के लिए जीने का सबब. मेरे लिए मेरा प्यार उसकी नफ़रत है. उसकी ज़िंदगी में मेरी कोई जगह नहीं, फिर भी न जाने कौन-सा तार है, जो मुझे उसकी ओर खींच ही लेता है. बार-बार माफ़ी मांगता हूं, क्योंकि उसका दिल बुरी तरह ज़ख़्मी हुआ है.

फेसबुक पर पहली मुलाक़ात हुई थी. फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले उसका प्रोफाइल चेक किया. भोली-भाली मासूम-सी लगी थी. तीखे नयन-नक्श किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफ़ी थे. धीरे-धीरे बातचीत होने लगी. कभी-कभी लगता कि बातों-बातों में कुछ कहना चाहती है. अब मुझे उसकी आदत हो गई.

एक दिन उसने सीधे सरल शब्दों में प्यार का इज़हार करते हुए कहा, “मैं तुम्हें प्यार करती हूं, मैं नहीं जानती कि तुम्हारे दिल में क्या है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि तुम भी मुझे प्यार करो. प्यार कोई सौदा नहीं कि प्यार के बदले प्यार मिले, ये वो रूहानी एहसास, जो दिल से महसूस किया जाता है, जो मैंने तुम्हारे प्रति पाया.”

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मैं तो जैसे इसी इंतज़ार में था. बिना कुछ सोचे-समझे ‘हां’ कह दिया. एक दिन मन में विचार आया कि जब ज़िंदगी उसके साथ
गुज़ारनी है, तो क्यों न रू-ब-रू हुआ जाए. जब मैंने उसे इस बारे में कहा, तो वह तुरंत तैयार हो गई. जब पहली बार उससे मिला तो मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई. इतना बड़ा धोखा. उस व़क्त तो मैं कुछ कह नहीं पाया, पर उससे दूरियां बनानी शुरू कर दीं.

मेरे और उसके बीच एक दीवार खड़ी हो गई थी. एक व्हील चेयर पर बैठी लड़की और एक अति महत्वाकांक्षी लड़के के बीच बनी ये
दीवार, जिसके नीचे प्यार, सपने सब दब गए. मन ही मन सोचता मैंने

जल्दबाज़ी कर दी. मेरा और उसका क्या मेल? मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था कि मैं एक विकलांग लड़की के साथ प्यार करूंगा. कभी-कभी लगता कि मेरे सारे दोस्त मुझ पर हंस रहे हैं, ये दुनिया ताना दे रही है. मैं घबराकर आंखें बंद कर लेता हूं. मैं मन ही मन प्रश्‍न करता हूं कि मुझसे ग़लती कहां हो गई.

एक दिन मैंने उसके सामने मन की बात रखी कि अब आगे जाना संभव नहीं होगा. “क्या एक विकलांग लड़की प्यार नहीं कर सकती. क्या मेरा प्यार मेरे पैरों की तरह कमज़ोर था?” उसकी आंखों में आंसू उतर आए. मेरे पास कोई जवाब नहीं था. उसके बाद उसने मुझे अनफ्रेंड कर दिया, कभी कोई मैसेज नहीं किया. यहां तक कि उसने अपना अकाउंट भी डिलीट कर दिया. बिना कुछ कहे, बिना कोई शिकायत के वो मेरी ज़िंदगी से चली गई. आख़िरी बार उसकी बातों में जो उदासी छलकी थी उसे भुला नहीं पाया.

सच में ग़लती मेरी थी. उसके प्रोफाइल पर लगे फोटोग्राफ्स पर ध्यान नहीं दिया. क्यों कभी नहीं पूछा कि वो क्या करती है… मोहब्बत का कोई दायरा नहीं होता, पर मैं न जाने किस दिशा में भटक गया. आज मैं अपनी ग़लती के लिए क्षमाप्रार्थी हूं और बार-बार माफ़ी मांगता हूं कि मुझे माफ़ कर दो…

– शोभा रानी गोयल

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10 मैजिकल फूड्स जो बनाएंगे आपकी सेक्स लाइफ को पावरफुल (10 Magical Foods That Will Rev Up Your Sex Life)

अगर आप अपनी यौन क्षमता (Sexual Ability) को बढ़ाना (Increase) चाहते हैं, तो अब आपको कोई दवाई लेने की ज़रूरत नहीं है. हम आपको वियाग्रा से बेहतर और असरदार आहार बताएंगे, जिनके नियमित सेवन से आप अपनी यौन क्षमता को दोगुना बढ़ा सकते हैं.

Sex Foods

आज के इस आधुनिक दौर में तनाव व काम के दबाव के चलते अधिकांश लोगों की कामेच्छा में कमी आने लगी है, जिसके चलते वे बेड पर अपने पार्टनर के सामने परफॉर्म नहीं कर पाते हैं. अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से पीड़ित हैं तो अपने डायट में कुछ चीज़ों को शामिल करके आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बना सकते हैं.

केसर

केसर कामेच्छा को बढ़ाने का एक कारगर घरेलू नुस्खा है. केसर वाला दूध सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में मदद करता है. दरअसल, केसर एस्ट्रोजेन, सेरोटोनिन और मूड बनाने वाले हार्मोन्स को बढ़ाता है, जिससे तनाव, स्ट्रेस कम होता है और मूड बेहतर होता है.

पिस्ता-बादाम

बादाम में भरपूर मात्रा में विटामिन ई पाया जाता है जो यौन इच्छा को बढ़ाने वाले हार्मोन्स को रिलीज़ करता है. बादाम के साथ पिस्ते का सेवन एक हेल्दी विकल्प हो सकता है. इसमें मौजूद कॉपर, मैग्नीशियम और ज़िंक यौन उत्तेजना को बढ़ाने में मदद करते हैं. नियमित तौर पर बादाम और पिस्ते के सेवन से स्पर्म काउंट और क्वालिटी बढ़ती है.

केला

केले को फाइबर का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है. इसमें घुलनशील फाइबर होता है जो यौन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है. केले में मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स सेक्स पावर को बढ़ाकर उसे बेहतर बनाते हैं. अगर आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाना चाहते हैं तो अपने डायट में केले को ज़रूर शामिल करें.

तरबूज

तरबूज में फाइटोन्यूट्रीएंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इसके अलावा इसमें बीटा कैरोटीन, लाइकोपीन जैसे तत्व होते हैं, जिससे फील गुड हार्मोन्स का स्तर बढ़ता है और बिस्तर पर साथी के साथ परफॉर्मेंस में सुधार आता है.

स्ट्रॉबेरी

स्वाद के साथ-साथ स्ट्रॉबेरी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए भी जाना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है. इसके नियमित सेवन से फर्टिलिटी बेहतर होती है. कई रिसर्च में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि पुरुषों में फर्टिलिटी बढ़ाने में विटामिन सी काफ़ी महत्वपूर्ण होता है.

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अंडे

अंडे प्राकृतिक रूप से यौन शक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं. अंडे में विटामिन बी5 और बी6 होते हैं जो सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इसमें अत्यधिक मात्रा में पाए जाने वाले प्रोटीन के कारण पुरुषों में स्टेमिना बढ़ता है और शारीरिक कमज़ोरी दूर होती है. अपनी  सेक्स  लाइफ को बेहतर बनाने के लिए अपने डेली डायट में अंडे को ज़रूर शामिल करें.

कॉफी

कॉफी का अधिक मात्रा में सेवन सेहत और आपकी सेक्स लाइफ के लिए घातक हो सकता है, लेकिन संतुलित मात्रा में कॉफी पीने से कामोत्तेजना में बढ़ोत्तरी होती है. कई रिसर्च में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि दिन भर में 2-3 कप कॉफी पीने से पुरुषों में लिबिडो बढ़ता है.

डार्क चॉकलेट

डार्क चॉकलेट एक ऐसा सुपरफूड है जो न स़िर्फ कामेच्छा को बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि इससे सेक्स लाइफ भी बेहतर होती है. दरअसल, इसमें एल-आर्जिनिन और अमिनो एसिड होता है जो सेक्स ड्राइव को प्राकृतिक तरी़के से बढ़ाने में मदद करता है.

हरी सब्ज़ियां

अगर आप अपनी नीरस सेक्स लाइफ में रोमांच लाकर इसे बेहतर बनाना चाहते हैं तो पौष्टिक तत्वों, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर हरी सब्ज़ियों का सेवन करें. पालक, सरसों, ब्रोकोली जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन करने से पुरुषों की फर्टिलिटी और स्पर्म क्वॉलिटी बेहतर होती है.

हरी मिर्च

स्वाद में तीखी हरी मिर्च सेहत के साथ-साथ आपकी सेक्स लाइफ में भी रोमांस का तड़का लगाने में मदद कर सकती है. हरी मिर्च का सेवन करने से पुरुषों के प्राइवेट पार्ट्स के आसपास के अंगों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और कामोत्तेजना बढ़ती है. इसलिए आज ही से अपने डायट में हरी मिर्च को शामिल कर लें.

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कैसे जानें, यू आर इन लव? (How To Know If You’re In Love?)

दिल भूल नहीं सकता तुम्हें… धड़कनों की ज़रूरत हो तुम… तुमसे है मेरी दुनिया हसीं… मेरी मोहब्बत, मेरी ज़िंदगी हो तुम… प्यार में हाल-ए-दिल कुछ ऐसे ही बयां होते हैं. पर क्या यही प्यार है? आख़िर दिल कैसे जाने कि वो उनके लिए बेक़रार है? प्यार एहसास है… प्यार आवाज़ है… प्यार ख़ामोशी है, जहां नज़रें बिन कहे ही बहुत कुछ बयां कर जाती हैं. पर कई बार इन जज़्बात को समझ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में आप कैसे जानेंगे कि यू आर इन लव? आइए, कुछ ऐसे एहसास व ख़यालात के बारे में जानें.

Love Goals

–          आज फिर महकी हुई रात में जलना होगा, आज फिर सीने में उलझी हुई सांसें होंगी, आज फिर जागते गुज़रेगी तेरे ख़्वाबों में रात, आज फिर चांद की पेशानी से उठेगा धुआं… जब प्यार होता है तो दिल का हाल-ए-दिल कुछ यूं ही होता है.

–          सुबह उठते ही नींद की ख़ुमारी में भी उनका ख़्याल आ जाए. उनसे मिलने के लिए दिल बेताब हो जाए. दिल में उनके यादोंं की झलक-सी रहती है, इन हवाओं में हर पल उनकी महक-सी रहती है…

–          उनसे मिलना, बातें करना अच्छा लगने लगे. हर वक़्त मिलने की बेक़रारी रहे. ख़्यालों में उनका ही साथ हो, तब समझें यू आर इन लव. दिल को इंतज़ार है हमेशा बस उनके आने का उनसे मिलने की अब एक कसक-सी रहती है…

–         जब एहसास हो कि ज़िंदगी उनके बिना वीरान है और उनके होने से ही दिल गुलज़ार है.

–         उनके लिए कुछ भी करना आपको एक अनकही ख़ुशी दे जाए.

–          ज़रूरी कामों के दौरान भी आपका ध्यान किसी ख़ास पर आकर रुक जाए और घंटों बाद एहसास हो कि क्या करने बैठी थी और क्या कर रही हूं. बार-बार उन्हीं का ख़्याल दिलो-दिमाग़ पर हावी रहे.

–          जब भीड़ में भी आप तन्हा महसूस करें, क्योंकि वो आपके आसपास नहीं है.

– जब कभी आपके साथ कुछ ख़ास हो और आपको महसूस हो कि काश! वो भी मेरे साथ होता. आप अपने हर जज़्बात व एहसास को उसके साथ शेयर करना चाहें.

– जब आपकी सारी सोच बस, उसके ही इर्द-गिर्द घूमने लगे, आप उसे ख़ुुश करने की तरक़ीबें सोचने लगें. ये सोचें कि जब मैं ये कहूंगी तो वो क्या कहेगा? मेरी बातें सुनकर वह किस तरह मुस्कुराएगा-हंसेगा, तो मान लें कि आपको प्यार हो गया है.

– आप दुनिया को ऐसी ख़ूबसूरत जगह समझने लगें, जहां किसी के साथ, किसी के लिए ख़ुशी से रह सकते हैं.

– जब किसी की नज़रें तुम्हारे लिए बेक़रार रहती हैं. वो नज़र तुम्हें ऐसे देखती है कि तुम पर सब कुछ न्योछावर कर दे.

– जब आप अपने बारे में कम, किसी ख़ास के बारे में ज़्यादा सोचें. उसकी पसंद-नापसंद का ख़ास ख़्याल रखें. अपना नुक़सान करके भी उसका अच्छा करने की चाह हो. उसकी ख़ुशियों के लिए अपनी ख़ुशियों को कुर्बान करने लगें.

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Relationships Goals
हर दुआ में शामिल तेरा प्यार है, धड़कनों को तुझसे ही दरकार है…

*          जब आपको उसकी ख़ूबियों के साथ उसकी कमियां भी अच्छी लगने लगें और आप उसमें किसी सुधार की चाह किए बगैर उसे उसी रूप में स्वीकारने को तैयार हों.

*          आपको उसका हंसना-मुस्कुराना, छेड़ना, ग़ुस्सा करना, रूठना-मनाना सब कुछ अच्छा लगने लगे.

*          किसी के आंख का कतरा एक दर्द बनकर दिल में भर आता है. और इस एहसास को स़िर्फ जिया जा सकता है, जब ये कहना बहुत मुश्किल हो जाए.

*          जब हर मुलाक़ात में नएपन का एहसास हो और मन ख़ुशियों से भरा रहे.

*          जब किसी के साथ बिताए गए एक-एक पल को आपका ज़ेहन कैमरे की तरह रिकॉर्ड करे और ये सारी तस्वीरें फ़िल्म की तरह एक बार नहीं, बार-बार चलती हों तो मान लें यू आर इन लव.

हर एक शह है मोहब्बत के नूर से रोशन ये रोशनी जो ना हो, ज़िंदगी अधूरी है…

– संजय श्रीवास्तव

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