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कैसे निपटें इन 5 मॉडर्न रिलेशनशिप चैलेंजेस से? (How To Manage These 5 Modern Relationship Challenges?)

मॉडर्न लाइफस्टाइल (Modern Lifestyle) ने हेल्थ और जीवन के साथ रिश्तों को भी प्रभावित किया है और कई चुनौतियां (Challenges) खड़ी कर दी हैं. आख़िर क्या हैं ये मॉडर्न रिलेशनशिप चैलेंजेज़ और इन्हें कैसे हैंडल करें? आइए जानें.

Relationship Challenges

चैलेंज 1ः लॉन्ग डिस्टेंस मैरेज

आजकल वर्किंग कपल का ज़माना है. चाहे इसे परिवार की ज़रूरत कहें या मॉडर्न सोसायटी का रिवाज़. जब तक पति-पत्नी एक ही शहर में नौकरी कर रहे हैं,  तब तक तो ठीक है. लेकिन किसी कारण से यदि दोनों को अलग-अलग शहरों में रहना पड़े तो  जटिलताएं आ सकती हैं, क्योंकि अलग शहरों में रहने से पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां बढ़ती हैं और संवादहीनता भी.

ऐसी परिस्थितियों में पति-पत्नी की जो एक-दूसरे से अपेक्षाएं होती हैं, वे पूरी नहीं हो पातीं, क्योंकि दोनों बहुत कम समय के लिए एक-दूसरे से मिलते हैं और इतने कम समय में दोनों एक-दूसरे को समझने के बजाय अपनी-अपनी अपेक्षाओं को पूरा करने की मांग करते हैं और असंतुष्ट रहते हैं.

कैसे निपटें?

– रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लॉन्ग डिस्टेंस मैरेज में अपेक्षाएं ़ज़्यादा होती हैं. ऐसे कपल्स स़िर्फ छुट्टियों में ही मिलते हैं. इसलिए दोनों को मानसिक रूप से ज़्यादा परिपक्व होना पड़ेगा. आपको स़िर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपने पार्टनर की मुश्किलों को भी समझना पड़ेगा.

–  ह़फ़्ते में कम से कम 2 दिन साथ में बिताएं. जब भी दोनों साथ में हों तो ऑफ़िस की बातें न करें.

– दिन में जब भी समय मिले, अपने पार्टनर से बात करें.

– पार्टनर से बात करके छुट्टियों की प्लानिंग पहले ही कर लें, ताकि समय बरबाद न हो.

चैलेंज 2ः सेक्स के लिए व़क़्त नहीं

मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रमोद गुप्ता बताते हैं, “सेक्स वैवाहिक जीवन का प्राण है. इससे पति-पत्नी शारीरिक और मानसिक स्तर पर  एक-दूसरे से जुड़ते हैं. यही जुड़ाव दोनों के बीच में एक पुल का काम करता है.” आजकल नौकरियों के अलग-अलग समय, लॉन्ग डिस्टेंस मैरेज, अति व्यस्तता, तनाव आदि के कारण पति-पत्नी को सेक्स के लिए समय नहीं मिल पाता. यदि इच्छा होते हुए भी सेक्स के लिए समय न मिले तो दोनों को ही शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं.

कैसे निपटें?

–  पति-पत्नी सेक्स को लेकर संकोच न करें.

– पार्टनर से अपनी सेक्स संबंधी इच्छाओं और सेक्स के टाइम मैनेजमेंट को लेकर खुलकर बात करें.

– दिन में दो-तीन घंटे नहीं, पर छोटे-छोटे लम्हे तो आप चुरा ही सकते हैं.

– सेक्स के लिए दो चीज़ें ज़रूरी हैं-सेक्स की इच्छा होना और समय. सेक्स-इच्छा के लिए ज़रूरी है हमेशा प्रेजेंटेबल रहना, साथ ही ऑफ़िस के तनाव को अपने और पार्टनर के बीच में न आने दें.

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Relationship Challenges
चैलेंज 3ः बच्चों को व़क़्त न दे पाना

पति-पत्नी की सबसे बड़ी समस्या है- बच्चों के लिए समय न दे पाना. ज्यादातर कपल्स अपने करियर और जॉब की वजह से बच्चे की प्लानिंग नहीं कर पाते हैं. यदि प्लान करते भी हैं तो उन्हें बच्चे की परवरिश के लिए समय नहीं मिलता. पैरेंट्स द्वारा बच्चों के साथ व़क़्त न बिताने पर कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए ज़रूरी है कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं. ये स़िर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बेहतर होगा.

कैसे निपटें?

– पति-पत्नी जब पूरी तरह से तैयार हों तभी बच्चे की प्लानिंग करें.

– ऑफ़िस से आने के बाद बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं.

– बच्चों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछें. उनके साथ खेलें, घूमने जाएं.

– बच्चों को टीवी, वीडियो गेम्स या फिर इंटरनेट की लत से बचाएं.

चैलेंज 4ः ऑफ़िस रोमांस

पार्टनर के पास समय न होने, ऑफ़िस का तनाव आदि कारणों से आजकल ऑफ़िसरोमांस व विवाहेेतर संबंध बनते देर नहीं लगती. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, वर्कप्लेस पर अ़फेयर होने पर लोग मानसिक तौर पर तरोताज़ा महसूस करते हैं. पर यह क्षणिक होता है, जिसके कारण आगे चलकर मानसिक अवसाद भी उत्पन्न होता है.

कैसे निपटें?

– अगर अपनी शादी बचाना चाहते हैं तो आपको ही ख़ुद पर नियंत्रण रखना होगा.

– अपने पार्टनर के प्रति वफ़ादार रहें.

– ऑफ़िस रोमांस को रोकने के लिए पार्टनर से खुलकर बातें करें, उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करें.

– ऑफ़िस के काम से समय निकालकर अपने पार्टनर से फ़ोन पर बातें करें, ताकि उन्हें दूसरों की ज़रूरत महसूस ही न हो.

चैलेंज 5ः मनी मैटर्स

बढ़ती महंगाई और अच्छी लाइफ़ स्टाइल दोनों के लिए पैसा ज़रूरी है. इसलिए कपल्स का वर्किंग होना भी ज़रूरी है, पर पति-पत्नी के झगड़े अक्सर पैसे को लेकर ही होते हैं, जैसे- घर का बजट, इन्वेस्टमेंट प्लानिंग आदि, क्योंकि उन्हें अपने वर्तमान के साथ भविष्य को भी सुरक्षित करना होता है.

कैसे निपटें?

– मनी मैटर्स को पति-पत्नी अपने रिश्ते के बीच में न आने दें.

– घर के बजट और महीने के ख़र्च दोनों एक साथ बैठकर तय करें.

– ख़र्चों की प्राथमिकता तय करें और मनी मैटर्स को लेकर एक-दूसरे से कुछ भी न छिपाएं.

– विजया कठाले निबंधे

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सेक्स- क्या करें जब पति कहे ‘ना’? (What To Do If Your Husband Is Uninterested In Sex?)

सेक्सुअल रिलेशन (Sexual Relations) के प्रति उदासीनता, इससे बचना या कटे-कटे रहना… यदि इस तरह का व्यवहार आपके पति करें, तो सचेत हो जाएं. उनकी ‘ना’ के पीछे छिपे कारणों को जानने और उन्हें दूर करने की कोशिश करें, ताकि आपकी सेक्स लाइफ़ में ठहराव न आने पाए.

Uninterested In Sex

पुरुष प्रधान समाज में पुरुष की ख़ुद को  महिलाओं से बेहतर, सक्षम, मज़बूत या सुपीरियर बनाए रखने की प्रवृत्ति रही है. ये बातें कमोबेश हर जगह देखने को मिलती हैं, फिर चाहे वो सेक्स ही क्यों न हो. सेक्स एक अंतरंग विषय होने के बावजूद इसमें पुरुष ख़ुद को श्रेष्ठ बनाए रखने या दिखाने की पूरी कोशिश करता है. जहां सेक्स की पहल ज़्यादातर पुरुषों की तरफ़ से ही होती थी, वहीं अब महिलाएं भी पहल करने से नहीं चूकतीं. लेकिन ऐसे बहुत कम मौ़के होते हैं, जब पत्नी के आग्रह पर पुरुष सेक्स से इंकार कर दे. ऐसा क्यों होता है? इसके क्या कारण हो सकते हैं? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

शारीरिक व मानसिक थकान

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. दीपक के. जुमानी के अनुसार, “आमतौर पर भारतीय पद्धति में पति सेक्स के लिए इंकार नहीं करते. पत्नी को तो इंकार करने का अधिकार भी है पीरियड्स वगैरह के दिनों में. लेकिन कई बार पारिवारिक व सामाजिक ज़िम्मेदारियों का प्रेशर पति को सेक्स के लिए ‘ना’ कहने को मजबूर करता है. हो सकता है उनके इंकार के पीछे शारीरिक व मानसिक थकावट हो, जिसकी वजह से उन्हें सेक्स की इच्छा नहीं होती या फिर इसके बारे में सोचने तक का समय नहीं मिलता.

पत्नी में सेक्सुअल फैंटेसी का अभाव

एक सर्वे के अनुसार, भारतीय पुरुष जो सपने देखते हैं, उनमें सेक्स संबंधित ऑब्जेक्ट की भरमार होती है. इस तरह से धीरे-धीरे उनमें एक सेक्सुअल फैंटेसी विकसित हो जाती है. महिलाएं शर्म-संकोच के कारण अपनी सेक्स संबंधी इच्छाओं को नहीं बतातीं, न ही सेक्स क्रिया में ़ज़्यादा खुल पाती हैं. यानी पत्नी से पति की सेक्सुअल फैंटेसी न पूरी हो, तो धीरे-धीरे पति का सेक्स में इंटरेस्ट कम होता जाता है.

कम्यूनिकेशन गैप

अक्सर पति-पत्नी के बीच अहम् के कारण या अन्य वजहों से आपसी संवाद की कमी जैसी समस्या आ ही जाती है. उस पर पति का पत्नी को उपभोग की वस्तु मानना स्थिति को और भी जटिल बना देता है. महिलाएं प्यार व भावनाओं को अधिक महत्व देती हैं, जबकि पुरुष शारीरिक आकर्षण को. ऐसे में टकराव और कम्यूनिकेशन गैप ब़ढ़ना स्वाभाविक है, जिससे पति सेक्स के प्रति उदासीन होने लगते हैं.

आदत और बीमारियां

डॉ. हितेश कहते हैं कि सोसायटी में स्ट्रेस लेवल बढ़ रहा है. अल्कोहल, धूम्रपान, अधिक दवाइयां लेने की आदत आम हो रही है. साथ ही ऐसी कई बीमारियां भी होती हैं, जिनसे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इससे नई-नई शारीरिक समस्याएं उभरती हैं और पति-पत्नी की सेक्सुअल लाइफ़ भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहती. धीरे-धीरे रिश्तों में ठहराव व नीरसता की स्थिति पैदा होने लगती है.

विवाहेतर संबंध

उम्र बढ़ने के साथ पति की शारीरिक क्षमता कम हो जाती है और इस कमज़ोरी को वह स्वीकार नहीं करता. ऐसे में अगर कोई दूसरी स्त्री उसकी ओर आकर्षित होती है, तो उसे एक मानसिक संतुष्टि मिलती है कि वह अब भी सक्षम है. धीरे-धीरे यह आकर्षण भावनात्मक लगाव में बदलने लगता है और पति अपनी पत्नी से दूर भागने लगता है.

सेक्सोलॉजिस्ट्स के अनुसार, बचपन में जिन बच्चों का सेक्सुअल एब्यूज़ यानी यौन शोषण होता है, वे शादी के बाद शारीरिक संबंधों से दूर भागने लगते हैं.

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Sex Problems

क्या करें?

जहां चाह है, वहां राह निकल ही आती है. यदि पति सेक्स से दूर भागे, तो यह समस्या शारीरिक से ज़्यादा मनोवैज्ञानिक है और मौजूदा हालात ही इनके लिए ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं. पर एक समझदार पत्नी इन हालात को बख़ूबी हैंडल कर सकती है.

–  शायद आप अपने पति की इच्छा व पसंद का ध्यान नहीं रखतीं. इस पर गौर करें, जैसे- वे आपको किस पहनावे में देखना पसंद करते हैं, आपकी कौन-सी अदा के वे दीवाने हैं आदि.

–  सेक्सुअल रिलेशन में अधिक शर्म-संकोच को न आने दें. पति को जो बातें, क्रियाएं अच्छी लगें, वो ज़रूर करें. प्राइवेट कंपनी में कार्यरत सॉ़फ़्टवेयर इंजीनियर की पत्नी का कहना है, “मैं अपने पारिवारिक संस्कारों की वजह से पति के सामने ज़्यादा खुल नहीं पाती थी. धीरे-धीरे मुझे पता चला कि मेरे पति सेक्स से दूर भाग रहे हैं, तब सेक्सोलॉजिस्ट से सलाह-मशवरा करके मैंने ख़ुद को बदला. अब मेरे पति बेहद ख़ुश रहते हैं और हम दोनों अपनी सेक्सुअल लाइफ़ पूरी तरह एंजॉय करते हैं.”-

–  पति-पत्नी दोनों ही आपसी बातचीत के लिए थोड़ा समय ज़रूर निकालें. एक-दूसरे की भावनाओं को समझें. पारिवारिक ज़िम्मेदारियों का निर्वाह मिल-बांटकर करें, ताकि दोनों अपने शौक़ व अपनी इच्छाओं को एक-दूसरे के साथ शेयर कर सकें. डॉ. हितेश के अनुसार, “पति का सेक्स से इंकार अधिकतर मामलों में कम्यूनिकेशन गैप से ही पैदा होता है. इस गैप को कम करना दोनों की ज़िम्मेदारी है.”

– पति-पत्नी के रिश्ते में डर व शक को न आने दें. एक-दूसरे पर विश्‍वास प्यार बढ़ाता है और दोनों को सेक्सुअल रिलेशन के लिए भी उत्साहित करता है. इन सभी बातों का ख़याल रखेंगी तो पति की ‘ना’ को ‘हां’ में बदलते देर नहीं लगेगी. हैप्पी सेक्सुअल लाइफ़!

– लक्ष्मी यादव

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तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

Pyar Ki Kahaniya

तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

दस साल बीत गए… तुम्हारा चेहरा आज भी मेरी आंखों में बसा है. उस दिन के बाद न तो तुम मिले और न ही तुम्हारा कोई अता-पता. तुम्हें तो शायद मैं याद भी न हूं, पर मुझे तुम्हारी कत्थई आंखों की कशिश हर रोज़ शाम को गेटवे ऑफ इंडिया की तरफ़ खींच ले जाती है. क़दम ख़ुद-ब-ख़ुद तुम्हारे लिए चल पड़ते हैं. हर बार तुम्हें देखने और मिलने की एक उम्मीद जन्म लेती है, परंतु फिर मेरी शाम खाली हाथ लौट जाती है. वो पहली नज़र के प्रेम का एहसास आज भी मेरे अंदर सांसें ले रहा है.

कैसे भूल जाऊं वो 26 नवंबर का ताज होटल पर अटैकवाला दिन, जो इतिहास के पन्नों में एक काले, मनहूस दिन के रूप में अंकित हो चुका है. उस दिन न जाने कितनों ने अपनों को खोया था और कितनों ने अपनी जान गंवाई थी. विपरीत इसके मेरे लिए तो वो मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत, यादगार दिन था, जिसने मुझे प्यार जैसे ख़ूबसूरत एहसास से रू-ब-रू करवाया था. एकतरफ़ा ही सही, प्यार तो है.

याद है मुझे आज भी उस दिन का रोंगटे खड़े कर देनेवाला एक-एक लम्हा, जब मैंने और मेरी सहेलियों ने गेट वे ऑफ इंडिया घूमने का प्रोग्राम बनाया था. समुद्र की लहरें अपने मस्त अंदाज़ में साहिल से अठखेलियां करने में मग्न थीं कि अचानक आतंकवादियों ने मुंबई के ताज होटल पर हमला कर दिया था. थोड़ी देर पहले तक जो समां रोमांचक लग रहा था, वो करुणा से भरी चीखों, गोलियों की आवाज़ों और मदद की गुहारों में परिवर्तित हो चुका था. इसी भगदड़ में मेरी सभी सहेलियां मुझसे बिछड़ गई थीं.

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मैंने बड़ी मुश्किल से डरते-डरते एक बेंच के पीछे आश्रय लिया था. दहशत के मारे पूरा शरीर कांपने लग गया था. आंसुओं से भरी आंखें किसी तरह की मदद की खोज में थीं. पुलिस ने होटल के बाहर पूरी तरह घेराबंदी कर ली थी. जो लोग बाहर फंसे हुए थे, पुलिस उन्हें किसी तरह सुरक्षित निकालने की कोशिश में थी. मौत को इतने क़रीब देखकर मेरी शक्ति और हिम्मत जवाब देने लगी. बेहोशी मुझे अपनी आगोश में लेने को थी कि तभी किसी की मज़बूत बांहों ने मुझे थाम लिया. वो मज़बूत-गर्म बांहें तुम्हारी थीं. मेरी बेहोशी से भरी धुंधली आंखों से मुझे स़िर्फ तुम्हारी कत्थई आंखें दिखाई दे रही थीं.

“देखो, संभालो अपने आप को. बेहोश मत होना. हम किसी भी तरह यहां से सुरक्षित बाहर निकल जाएंगे…” यह कहते-कहते तुम किसी तरह मुझे होश में लाए. आंखें खुलते ही तुम्हारा चेहरा दिखा, जो मेरी आंखों में उतर गया. तुमने मुझे धीरे-धीरे पुलिस की तरफ़ चलने का इशारा किया. मैं तो तुम्हें देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठी थी. बस, तुम्हारे भरोसे एक कठपुतली बन तुम्हारा हाथ पकड़कर चल पड़ी थी साथ.

किसी तरह हम पुलिस के पास पहुंच ही गए और उन्होंने तुरंत हमें वहां से सुरक्षित बाहर निकाल दिया. मेरे लिए तुम एक फ़रिश्ता बनकर आए थे. बस, यहीं तक था हमारा साथ. सुरक्षित बाहर आते ही तुम मुझे एक टैक्सी में बैठाकर, मेरा हाथ छोड़कर मेरी नज़रों से ओझल हो गए. कहां चले गए… पता नहीं. अपना नाम, पता, सब कुछ अपने साथ ले गए. तुम तो चले गए, किंतु अपना चेहरा, अपनी कत्थई आंखें सदा के लिए मेरी आंखों में, मेरी सांसों में छोड़ गए.

आज भी मेरी शामें तुमसे मिलने के एक अटूट भरोसे पर, गेटवे ऑफ इंडिया की उसी बेंच पर तुम्हारी कत्थई आंखों के इंतज़ार में गुज़रती हैं.

– कीर्ति जैन

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9 बातें जो ला सकती हैं दांपत्य जीवन में दरार (9 Things That Can Break Your Relationship)

कहते हैं पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का होता है, तो फिर क्यों सात जन्मों का यह रिश्ता पलभर में टूट जाता है? क्यों जीवनभर का साथ पलभर का साथ बनकर रह जाता है? ज़रा-सी नासमझी, ज़रा-सी लापरवाही क्यों दो चाहनेवालों को अजनबी बना देती है? कहीं जाने-अनजाने आप भी इसी दौर से तो नहीं गुज़र रहीं हैं?

Things That Break Relationship

शादी के पहले एक-दूसरे को समझना ज़रूरी

शादी तय होने के बाद लड़के और लड़की के बीच कम्युनिकेशन बेहद ज़रूरी है. इससे धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के स्वभाव को समझने लगते हैं, विचारों को जानने लगते हैं. जब आपसी समझ होगी तभी आपसी तालमेल संभव है. लेकिन अभी भी कई परिवार ऐसे हैं, जहां लड़के  और लड़की को शादी के पहले मिलने और बातें करने की आज़ादी नहीं है. आगे चलकर इससे एक-दूसरे के  साथ सामंजस्य बैठाने में काफ़ी परेशानी होती है. वे एक-दूसरे के स्वभाव को समझ नहीं पाते, इसलिए बात-बात पर तू-तू, मैं-मैं होती रहती है. यहां तक कि कई बार शादी टूटने की भी नौबत आ जाती है.

शादी के बाद दूरी

बड़े पैकेज से प्रभावित हो मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनेवाली रीना को उसके पति राजीव ने घर से दूर बैंगलोर जाने की इजाज़त तो दे दी, पर कुछ ही महीनों के बाद उनमें अनबन होने लगी. प्यार और विश्‍वास में कमी आने लगी. दूर रहकर रिश्ते को मेंटेन करना मुश्किल हो गया. आख़िर एक दिन रीना को अपनी शादी बचाने के लिए जॉब ट्रांसफ़र करवाने का फैसला लेना ही पड़ा. आज के ज़माने में पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी होते हैं. ऐसे में अगर उनमें से किसी एक को भी अपने करियर के लिए एक-दूसरे से दूर रहना पड़े तो इसमें वे ग़लत नहीं समझते. लेकिन इस दूरी से धीरे-धीरे रिश्ते में भी दूरियां आने लगती हैं. आपसी प्यार डगमगाने लगता है. मोबाइल और इंटरनेट के ज़रिए संपर्क तो हो सकता है, पर संबंध बहुत ज़्यादा समय तक टिका रहे या पहले जैसा विश्‍वास बना रहे, ये मुश्किल है. बल्कि ऐसे रिश्तों में किसी तीसरे के आने की ज़्यादा संभावना होती है. ऐसे में शादी के टूटने की संभावना ़ज़्यादा होती है.

ऑफ़िस में अधिक वर्क लोड

एडवर्टाइज़िंग कंपनी में काम करनेवाली सुहासिनी मेनन कहती है, “मेरे लिए अपने परिवार से बढ़कर कुछ भी नहीं है. लेकिन जब काम के लिए ऑफ़िस में ज़्यादा समय देना पड़ता है तो मुसीबत हो जाती है. कभी-कभार ऐसा हो तब तो मेरे पति सब कुछ मैनेज कर लेते हैं. लेकिन यदि ज़्यादा दिनों तक ये सिलसिला चल जाए तो मेरे पति बर्दाश्त नहीं करते. हम चाहे बाहर की कितनी ही ज़िम्मेदारियां संभाल लें, लेकिन घर व पति को समय न दें तो गृहस्थी की गाड़ी डगमगा जाती है.”  आजकल पति-पत्नी दोनों के कामकाजी होने से उनकी पर्सनल लाइफ़ पर भी प्रभाव पड़ता है. कामकाज के बोझ तले रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं. इसलिए ऑफ़िस व घर को बैलेंस करके चलने में ही समझदारी है.

 घर की ज़िम्मेदारी का ज़्यादा बोझ

रिश्तों को पनपाने के लिए उन्हें प्यार से सींचना पड़ता है. सुबह से शाम तक यदि आप घर-किचन  आदि को सजाने-संवारने में ही बिता देंगी या दिनभर बच्चों व अन्य काम से ही ़फुर्सत नहीं मिलेगी तो पति के साथ समय बिताने के लिए व़क़्त ही कहां होगा. इससे बेहतर तो यह है कि आप अपने पति के साथ काम बांट लें. इससे आप पर सारा बोझ भी नहीं पड़ेगा और काम की ज़िम्मेदारी साथ निभाने से आपसी प्यार भी बढ़ेगा. इस बारे में सोनी कहती है, “ मेरे पति राजीव ने कभी भी ऐसा नहीं सोचा कि घर का काम पत्नी को ही करना चाहिए. मुझ पर घर और बाहर दोनों की ज़िम्मेदारियां हैं और वो इस बात को अच्छी तरह समझते हैं. वो मुझसे पहले घर पहुंच जाते हैं और मुझे ऑफ़िस से निकलने में देर हो जाती है. जब घर पहुंचती हूं तो वे सब्ज़ी वगैरह काटकर रखते हैं और बच्चे को भी संभाल लेते हैं. आने के बाद मैं बाकी काम निपटा लेती हूं, इस तरह ऑफ़िस से आने के बाद हम दोनों सोने के पहले एक-दो घंटे स़िर्फ अपनी दिनभर की बातों को शेयर करने के लिए रखते हैं. मुझे लगता है कि  एक-दूसरे के लिए व़क़्त निकालने से रिश्तों में और मिठास व निकटता आती है.”

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Things That Break Relationship
व्यस्तता को रिश्ते पर हावी न होने दें

आज की लाइफ़ इतनी व्यस्त हो गई है कि  एक-दूसरे के लिए समय निकालना ही मुश्किल हो गया है. पत्नी-पत्नी दोनों कामकाजी हों या न हों, दोनों ही हालात में यह स्थिति होने लगी है. इसलिए एक-दूसरे के लिए समय निकालें. सप्ताहांत में बाहर घूमने जाएं, कोई फ़िल्म देखें या फिर साथ में शॉपिंग पर जाएं. आप चाहें तो रोज़ाना मॉर्निंग वॉक पर साथ जाएं. हर तरह की बातें शेयर करें. हर पल को भरपूर जीएं. इससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी की उम्र बढ़ जाएगी. एक-दूसरे को समय न देने से हर बात की ग़लतफ़हमियां बढ़ती चली जाती हैं, जो बाद में रिश्ते को प्रभावित करती हैं.

 आलोचनाओं से बचें

शादी की है तो रिश्ता निभाना सीखें. एक-दूसरे में मीन-मेख न निकालें. न ही किसी के सामने अपने पार्टनर की आलोचना करें. इससे उनके अहम को ठेस लगती है. यदि आपको एक-दूसरे से शिकायत है तो मिलकर आपसी शिकायत दूर करें. सरेआम उनकी बुराई करके दूसरोें के  सामने अपने पति को शर्मसार न करें, न ही इस पवित्र रिश्ते का तमाशा बनाएं. अच्छाई और बुराई सब में होती है, आप में भी तो होगी. इसलिए अपने पार्टनर की अच्छाइयों को देखें, बुराई को नहीं. उनके काम की सराहना करें. प्यार देंगे तो बदले में प्यार मिलेगा.

 शक करने से बचें

दोस्त बनाना कोई ग़लत बात नहीं. आजकल ऑफ़िस में लड़के और लड़कियांं साथ काम करते हैं. इसलिए अपने पति की सहकर्मी को लेकर कभी शक न पालें. शक ऐसा कीड़ा है, जो एक बार रिश्ते में लग गाए तो शादीशुदा ज़िंदगी को ख़त्म कर देता है. लेकिन साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि कहीं आपकी लापरवाही किसी गैर व्यक्ति को आपके दांपत्य  में सेंध लगाने की आज़ादी न दे दे. आंख बंद करके अपने पार्टनर पर भरोसा भी न करें. ऐसे मामले में समझदारी बरतें.

सेक्स को नज़रअंदाज़ न करें

माना कि  पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार ज़रूरी है, पर प्यार की पूर्णता के लिए सेक्स भी ज़रूरी है. अपनी सेक्सुअल इच्छाओं को खुलकर अभिव्यक्त करें. एक-दूसरे से निःसंकोच बात करें. आजकल के पति-पत्नी कामकाजी होने के कारण इतने ़ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें सेक्स के लिए भी समय नहीं मिलता. इससे धीरे-धीरे उनके बीच दूरियां बढ़ती चली जाती हैं.

अहम् का टकराव

रिश्ते में प्यार पालें, अहम् नहीं. छोटी-छोटी बातों को ईगो की वजह न बना लें. किसी बात पर अगर कहा-सुनी हो जाए तो उस बात को अनावश्यक खींचें नहीं. शांत मन से सोचें और फिर बात करने की पहल करें. कभी-कभी छोटी-सी बात भी तिल का ताड़ बन जाती है. बेहतर होगा कि  बड़ी से बड़ी बातों को भी समझदारी से हल करें. सुरभि कहती है, “मेरे और विवेक के बीच ज़रा-ज़रा-सी बात को लेकर झगड़े हो जाते हैं, लेकिन विवेक हर बात को आसानी से संभाल लेता है, पर जब किसी बात पर उसे बहुत ़ज़्यादा ग़ुस्सा आ जाए और वह पहल न करे तो मैं समझ जाती हूं कि  मामला गंभीर है. तब मैं यह नहीं देखती कि  कौन सही है और कौन ग़लत. बस, किसी तरह उसे मना लेती हूं. बाद में शांति से बैठकर दोनों अपनी ग़लती का एहसास कर लेते हैं और फिर ख़ूब हंसते भी हैं अपनी बेवकूफ़ियों पर. इस तरह हम अपनी ही ग़लतियों का मज़ाक उड़ाकर अहम् को भी हवा में उड़ा देते हैं. शायद यही है हमारे पऱफेक्ट मैरेज का राज़.”

– सुमन शर्मा

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रिश्तों में ज़रूरी है टाइम इंवेस्टमेंट (Time Investment Is Most Important For Successful Relationships)

हम सभी एक-दूसरे को समय न होने की दुहाई देते हैं, पर क्या कभी आपने एक पल के लिए भी यह सोचा है कि आपने जिस समय की सुई से ख़ुद को बांध लिया है, वही सुई आपके रिश्तों को किस कदर भेद रही है? यदि यूं ही चलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं, जब इससे मिले ज़ख़्मों का दर्द न केवल हमारे रिश्तों में नज़र आएगा, बल्कि समाज में नासूर बनकर उभरेगा. ऐसा न हो, इसलिए रिश्तों को समय देना बेहद ज़रूरी है.

Successful Relationships Tips

– सुबह की का़ॅफी के बाद नाश्ता, नाश्ते के बाद ऑफ़िस, ऑफ़िस के बाद रात का खाना और फिर इतने लंबे थके-हारे दिन के बाद गहरी नींद तो बहुत ही ज़रूरी है… क्यों आपका टाइम टेबल भी कुछ इसी तरह है ना? स़िर्फ आपकी ही नहीं, बल्कि आजकल अमूमन सभी की सुबह से शाम इसी तरह होती है. आज के टाइम टेबल में अगर सबसे ज़्यादा किसी चीज़ की कमी है, तो वह है समय की.

– आज हम में से किसी के पास वक़्त नहीं है. हम केवल अपने लिए जी रहे हैं. अगर किसी और का काम करना हो या फिर किसी से मिलने जाना हो, तो हम तुरंत कह देते हैं कि भई अभी टाइम नहीं है. बाकी रिेश्तेदारों की छोड़िए, आजकल तो पति-पत्नी को भी एक-दूसरे से मिलने की फुर्सत नहीं मिलती. कई पति-पत्नी तो वीक एंड पर ही मिल पाते हैं.

– इन सबके बावजूद क्या यह सच नहीं कि आज भी आप अपने घर के मिट्टी का वह आंगन नहीं भूली होंगी, जिसके बीचोंबीच तुलसी का एक पौधा हुआ करता था, जिसकी देखभाल बड़े जतन व प्यार से मां किया करती थी. मां रोज़ उस आंगन को साफ़ कर उस पर सुंदर-सी रंगोली बनाती थी. बस, समझ लीजिए कि हमारे रिश्ते भी उसी आंगन व तुलसी के पौधे के समान हैं, जिन्हें हमारे समय और जतन की ज़रूरत है. जितना अच्छा समय हम अपने प्रियजनों के साथ बिताएंगे, उतने ही हमारे रिश्ते मज़बूत होते जाएंगे. लेकिन आज शायद हम रिश्तों के बीच आती इन दूरियों को न तो समझ पा रहे हैं और न ही रिश्तों को उतनी गंभीरता से ले रहे हैं. जिस तरह हर चीज़ को अच्छा रहने के लिए रख-रखाव की ज़रूरत होती है, उसी प्रकार हमारे रिश्तों को सहेजने के लिए प्यार के कुछ लम्हों की ज़रूरत होती है. अगर रिश्तों को समय न दिया जाए, तो उनमें दूरियां बढ़ती ही जाएंगी. ये दूरियां भावनात्मक, वैचारिक और पति-पत्नी के मामले में शारीरिक भी हो सकती हैं.

क्यों ज़रूरी है रिश्तों की ठंडी छांव?

हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि रिश्ते कोई डेली सोप सीरियल नहीं हैं, जिसमें बीच-बीच में कमर्शियल बे‘क आए. मनोवैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति के जीवन में उसके सभी रिश्ते स्वस्थ हैं, तो उसका जीवन काफ़ी ख़ुशहाल होगा, क्योंकि इससे उसका मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्तर अच्छा होता है.

आज की दौड़ती-भागती दिनचर्या में रिश्तों को समय देने जैसे मुद्दे को दक़ियानूसी करार दिया जाता है. सभी रिश्तों को बोझ समझते हैं, पर ज़रा सोचिए क्या आप अपने परिजनों व परिवार के साथ बिताया अच्छा समय हमेशा याद करना चाहते हैं या नहीं? आप उसे हमेशा याद करते हैं, क्योंकि उस अच्छे समय की यादें आपको सुकून देती हैं. क्या आपको अपने ऑफ़िस की किसी मीटिंग या कोई ऑफ़िशियल टूर याद करके ऐसा सुकून मिला है? आप बताएं या न बताएं आपका जवाब ज़रूर ना ही होगा. उसका कारण है कि वहां आप चाहे जितना समय बिताएं, पर वहां कोई रिश्ता नहीं है. तो याद रखें, दिल का चैन और सुकून हमेशा रिश्ते ही देते हैं.

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रिश्ते और हमारे तीज-त्योहार

आपको लगेगा कि इसका रिश्तों को टाइम देने से क्या संबंध है?  लेकिन संबंध है. यदि आपको पता हो, तो हमारे त्योहारों में किसी न किसी रिश्ते से जुड़ा कोई न कोई रिवाज़ है. अगर करवाचौथ है, तो पति-पत्नी और सास बहू का त्योहार, यदि रक्षाबंधन है, तो भाई-बहन का त्योहार. स़िर्फ इतना ही नहीं, हमारे यहां ऐसे अनगिनत तीज-त्योहार, समारोह व रिवाज़ हैं, जिसमें परिवारजनों और प्रियजनों का साथ और उपस्थिति अनिवार्य होती है. समाज में ऐसी व्यवस्था इसलिए भी की गई है, ताकि आप अपने परिवार, अपनों के साथ समय बिता सकें. इससे रिश्तों में हमारा विश्‍वास और आस्था बनी रहती है. आज हम इन सभी चीज़ों से कतराते हैं, अपना जी चुराते हैं. रिश्तों से होनेवाली अमृतवर्षा से डरिए मत. एक बार इसमें भीगकर देखिए, आपके सारे तनाव, आपकी सारी चिंताएं धुल जाएंगी.

रिश्तों को लेकर रहें सकारात्मक

रिश्तों को क्वालिटी टाइम देने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि आपकी उस रिश्ते में मन से आस्था होनी चाहिए. कोई भी रिश्ता नकारात्मक नहीं होता और रिश्ता है, तो अपेक्षाएं भी होंगी और अगर अपेक्षाएं हैं, तो मनमुटाव भी होंगे ही. यदि आप इन सभी चीज़ों को स्वीकार कर लें, तो छोटे-मोटे मनमुटाव कभी भी आपके मन में लकीर या दरार नहीं बन पाएंगे. मन में हमेशा यह सकारात्मक सोच रहने दें कि रिश्ते आपकी ज़रूरत हैं और इन्हें निभाना आपकी प्राथमिकता है.

रिश्तों को समय न देने के परिणाम

– हम सभी की यह प्रवृत्ति होती है कि जब तक किसी भयानक परिणाम की चिंता या भय हमारे मन में न हो, तब तक हम परिस्थितियों को सुधारने की कोई कोशिश नहीं करते, फिर चाहे समस्या ग्लोबल वॉर्मिंग की हो या फिर स्वाइन फ्लू जैसी कोई बड़ी बीमारी की. जब तक समस्या विकट रूप न ले ले, तब तक हम उस पर ध्यान ही नहीं देते. आज हमारे रिश्ते भी इसी जद्दोज़ेहद से गुज़र रहे हैं. यदि जल्द ही कुछ न किया गया, तो समस्या गंभीर हो जाएगी.

– आज हम भाग रहे हैं. हमें ज़रा रुकने की फुर्सत नहीं है, लेकिन कहीं ऐसा न हो जाए कि जीवन की सांझ में हमारे पास बहुत सारा समय तो हो, पर शायद रिश्ते हमारे साथ ना हों. क्या आप रह पाएंगे अकेले? नहीं, क्योंकि हम सामाजिक प्राणी हैं. अकेले रहना न तो हमारा स्वभाव है और न ही हमारे संस्कार. अकेलापन अपने आपमें एक बहुत बड़ी बीमारी है, जो उम‘ के किसी भी पड़ाव पर आपको अपने शिकंजे में ले सकती है. हम अपने दुख, अपनी ख़ुुशियां अकेले या ख़ुद से नहीं बांट सकते. इसी कमी को रिश्ते पूरा करते हैं.

– रिश्ते हमारे खालीपन को भरते हैं. हमें संबल देते हैं. ये अच्छे समय में जहां हमारी ख़ुुशियों को दुगुना करते हैं, वहीं मुश्किल घड़ी में हमारे दुखों को अपने कंधों पर उठा लेते हैं. यदि आज की नफा-नुक़सान की भाषा में समझाया जाए, तो आज रिश्तों में किया गया थोड़ा-सा टाइम इंवेस्टमेंट कम समय में आपको ज़्यादा रिटर्न देगा. यह एक ऐसा निवेश है, जो कभी आपको नुक़सान नहीं देगा. तो रिश्तों में अपना समय निवेश करें और जीवनभर के लिए फ़ायदे में रहें. यदि आज आप पैसे के साथ थोड़े-बहुत रिश्ते भी कमा लें, तो यह पूंजी आपको जीवनभर काम आएगी.

कैसा हो टाइम इंवेस्टमेंट?
  • महीने में एक बार रिश्तेदारों या परिवार का गेट-टुगेदर ज़रूर रखें.
  • रात का खाना नियमित रूप से सभी साथ मिलकर खाएं.
  • बच्चों को सबके साथ मिल-जुलकर रहना सिखाएं.
  • अपनी अच्छी-बुरी बातों को सभी के साथ बांटें.
  • समय-समय पर सभी एक साथ घूमने जाएं.

– विजया कठाले निबंधे

ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स (Side Effects Of Office Romance)

कहते हैं इश्क़ और मुश्क छिपाए नहीं छिपते… और इश्क़ यदि ऑफिस कलीग से हो जाए, तो इसकी ख़बर आग की तरह पूरे ऑफिस में फैल जाती है… और फिर शुरू होता है ऑफिस रोमांस (Office Romance) के साइइ इफेक्ट्स (Side Effects) का सिलसिला…

Side Effects Of Office Romance

बढ़ते कॉम्पटीशन ने ऑफिस में काम के घंटे बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण लोग अपना ज़्यादातर समय ऑफिस में ही बिताते हैं. ऐसे में लंबे समय तक साथ काम करते हुए अपने सहकर्मी से प्यार हो जाना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है. साथ काम करते हुए हम कलीग से अपने सुख-दुख बांटते हैं, एक-दूसरे की रुचियों को जानते हैं. ऐसे में जब कोई मनचाहा सहकर्मी मिलता है, तो उसके प्रति आकर्षण बढ़ जाता है. हम उसके साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताना पसंद करते हैं और ऐसा करते हुए अक्सर कलीग से प्यार हो जाता है. लेकिन ऑफिस रोमांस की राह इतनी आसान नहीं है. यदि आपको अपने सहकर्मी से इश्क़ हो जाए, तो ये एहसास आपके लिए जितना रूमानी होगा, उतनी ही मुश्किलें भी खड़ी कर सकता है.

हां, वो मुश्किल दौर था मेरे लिए…

28 वर्षीया सुहानी ने बताया, वो मेरी पहली जॉब थी और मैं अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थी. फिर एक प्रोजेक्ट में मुझे रोहित के साथ काम करने का मौक़ा मिला. रोहित का सुलझा हुआ व्यवहार और अपने काम के प्रति लगन मुझे बहुत पसंद आई. मैं रोहित से काम को लेकर कई सवाल पूछती और वो पूरे धैर्य के साथ मेरे हर सवाल का जवाब देता. शायद रोहित को भी अब मेरा साथ अच्छा लगने लगा था. फिर प्रोजेक्ट पूरा होने की ख़ुशी में रोहित ने मुझे ट्रीट दी और उसी दिन अपने प्यार का इज़हार भी कर लिया. मैं तो जैसे तैयार बैठी थी रोहित का साथ पाने के लिए. रोहित का साथ पाकर मुझे ऑफिस और भी अच्छा लगने लगा था, लेकिन उसके बाद हम ऑफिस में नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पाते थे. हमारा प्यार हमारी बॉडी लैंग्वेज से झलकने लगा था. हम रोज़ सुबह साथ ऑफिस आते और शाम को भी ऑफिस से जल्दी निकलने के बहाने तलाशते. ऑफिस में भी लंच ब्रेक, टी ब्रेक के बहाने बाहर निकल जाते. ऑफिस टाइम में एक-दूसरे को मैसेज करते. धीरे-धीरे हमारे इश्क़ के चर्चे पूरे ऑफिस में चर्चा का विषय बन गए. रोहित सीनियर था, इसलिए वो अपना काम संभाल लेता था, लेकिन मेरे काम में अब शिकायतें आने लगी थीं. बॉस और सीनियर्स से अब मुझे वॉर्निंग मिलने लगी थी. ऑफिस में हम दोनों की इमेज ख़राब होने लगी थी. मैं समझ गई थी कि अब हमें एक ऑफिस में काम नहीं करना चाहिए. इससे पहले कि बात और बिगड़ जाती, मैंने दूसरी नौकरी तलाश ली. ये हम दोनों के लिए मुश्किल ज़रूर था, लेकिन हमारे रिश्ते के लिए यही सही फैसला था.

ऑफिस रोमांस की वजहें

ऑफिस कलीग से प्यार हो जाने की कई वजहें हैं और ऐसा होना स्वाभाविक है. आमतौर पर इन वजहों से ऑफिस रोमांस शुरू होता है:

लंबे समय तक साथ काम करना

आजकल काम के घंटे बढ़ते जा रहे हैं और शिफ्ट ड्यूटी, नाइट शिफ्ट में साथ काम करते हुए सहकर्मी आपस में भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं. ऐसे में उनके बीच अफेयर या रोमांस होना आम बात है.

समानताएं

एक ही प्रोफेशन में काम करनेवाले लोगों की कई आदतें और पसंद-नापसंद भी आपस में मेल खाती हैं, इसलिए ऐसे व्यक्ति से प्रभावित होना या उससे प्यार हो जाना स्वाभाविक है. साथ काम करते हुए ऐसे सहकर्मी कई बार एक-दूसरे के इतने क़रीब आ जाते हैं कि उन्हें प्यार हो जाता है और फिर वो एक-दूसरे से दूर नहीं रह पाते.

भावनात्मक लगाव

भावनात्मक लगाव हमें किसी से भी हो सकता है. साथ काम करते हुए कुछ लोगों से हम बहुत ज़्यादा घुल-मिल जाते हैं, ऐसे में उस शख़्स से प्यार हो जाना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है.

ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स

ऑफिस कलीग से प्यार हो जाना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन आप जब ऑफिस के काम और अपने इस रिश्ते को सही तरह से बैलेंस नहीं कर पाते, तब ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स दिखने शुरू हो जाते हैं.

काम पर होता है असर

जब ऑफिस में दो लोगों के बीच रोमांस चल रहा होता है, तो वो हर पल साथ रहना चाहते हैं. साथ रहने के बहाने तलाशने के लिए वो बार-बार टी ब्रेक लेते हैं या आपस में मैसेज करते रहते हैं. इससे उनका काम पर से ध्यान हटता है और इसका उनके परफॉर्मेंस पर असर होता है.

एक साथ छुट्टी लेना

दो प्यार करनेवाले हमेशा मिलने के बहाने तलाशते रहते हैं और जब किसी को अपने ऑफिस कलीग से प्यार हो जाता है, तो वो भी डेट पर जाने के बहाने तलाशते रहते हैं. ऐसे में दोनों के एक साथ छुट्टी लेने से ऑफिस के काम पर असर पड़ता है.

ब्रेकअप का दर्द

ज़रूरी नहीं कि ऑफिस की हर लव स्टोरी सक्सेसफुल ही हो, ऐसे में जब दोनों का ब्रेकअप होता है, तो उनका काम में मन नहीं लगता. वो ऑफिस में एक-दूसरे को देखकर डिस्टर्ब हो जाते हैं. इससे भी ऑफिस का ही नुक़सान होता है.

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Office Romance Effects
कैसे बचें ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स से?

कॉलेज के बाद ऑफिस ही एक ऐसी जगह है, जहां पर सबसे ज़्यादा अफेयर होते हैं. ऑफिस में हमउम्र सहकर्मी के प्रति आकर्षित होना आम बात है. लेकिन जब आपको ऑफिस में किसी से प्यार हो जाए, तो आपको ऑफिस के नियमों का पालन करते हुए अपनी लव स्टोरी को आगे बढ़ाना चाहिए. ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें.

* ऑफिस में भले ही आपका अपने कलीग के साथ अफेयर चल रहा हो, लेकिन काम के समय स़िर्फ अपने काम पर ध्यान दें. अपने इस ख़ास रिश्ते के लिए ऑफिस के पहले और बाद का समय रखें.

* काम के समय आपस में मैसेज द्वारा या इशारों में बात न करें. इससे आपका काम प्रभावित होगा और ऑफिस में आपकी इमेज भी ख़राब होगी.

* आपके अफेयर की ख़बर आपके अन्य सहकर्मियों या बॉस तक न पहुंचे तो ही अच्छा है, वरना आपकी हर गतिविधि पर नज़र रखी जाएगी और हर बात को आपके अफेयर से जोड़कर देखा जाएगा. इससे आपकी नौकरी ख़तरे में पड़ सकती है.

* बार-बार टी ब्रेक के बहाने या लंच के लिए बाहर न जाएं, रोज़ ऐसा करने से आपके अफेयर की बात सबको पता चल जाएगी और फिर आपके ब्रेक लेने पर भी पाबंदी लग सकती है.

* डेट पर जाने का प्रोग्राम छुट्टी के दिन बनाएं. ऑफिस में एक साथ दोनों की ग़ैरहाज़िरी से एक तो आपके अफेयर के बारे में सबको पता चल जाएगा और इससे ऑफिस का काम भी प्रभावित होगा.

* अपने पर्सनल रिश्ते को ऑफिस के काम पर हावी न होने दें. यदि किसी बात पर डिबेट चल रहा हो, तो बिना सोचे-समझे स़िर्फ अपने पार्टनर का सपोर्ट न करें, वो जहां पर ग़लत हों, वहां पर उनका विरोध अवश्य करें.

ऑफिस रोमांस के आंकड़े
सुहानी और रोहित की कहानी आपको लगभग हर ऑफिस में मिल जाएगी, क्योंकि एक साथ काम करने वाले सहकर्मियों के बीच प्यार हो जाना कोई नई बात नहीं है. एक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 58 प्रतिशत लोगों का ये मानना है कि वे या तो ऑफिस रोमांस में शामिल रहे हैं या उन्हें ऐसा करने में कोई आपत्ति नहीं है.
ऑफिस रोमांस के फ़ायदे

माना ऑफिस रोमांस आपके काम या जॉब के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन आप यदि समझदारी से काम लें और काम पर फोकस करते हुए अपने रिश्ते को भी बैलेंस करते जाएं, तो ऑफिस रोमांस आपके लिए एक सुखद अनुभव हो सकता है. ऑफिस रोमांस के अपने ही फ़ायदे हैं-

* रोज़ ऑफिस आने का मन करता है.

* आप ऑफिस में ख़ुश रहते हैं, इसलिए काम अच्छा करते हैं

* ऑफिस के काम में आपका मन लगता है.

* आप ऑफिस में हमेशा प्रेज़ेंटेबल रहते हैं.

* पार्टनर पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए आप हर काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

* वर्क प्रेशर में भी ख़ुशी से मिल-जुलकर काम करते हैं.

* ऑफिस अफेयर की वजह से आप घर की समस्याएं ऑफिस तक नहीं लाते.

– कमला बडोनी

 

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पहला अफेयर: उड़ती हवा का वो झोंका जीना सिखा गया (Pahla Affair: Udti Hawa Ka Wo Jhonka Jeena Sikha Gaya)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: उड़ती हवा का वो झोंका जीना सिखा गया (Pahla Affair: Udti Hawa Ka Wo Jhonka Jeena Sikha Gaya)

 

उससे मेरी मुलाक़ात तब हुई, जब मैं जीवन में निराशा के दौर से गुज़र रही थी. मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिली, मेरे सपने चकनाचूर हो गए. एक डॉक्टर की बेटी को ही मेडिकल में एडमिशन नहीं मिले, तो लोग क्या कहेंगे, यही सोचकर जीवन को समाप्त करने के लिए अस्पताल की छठी मंज़िल पर चढ़ गई. कूदने के लिए जैसे ही कदम बढ़ाया, एक आवाज़ से टकराई, “कोहरे की गाढ़ी चादर अगर सूरज को कुछ देर ढक लेती है, तो न कोहरा महान बनता है और न ही सूरज की शक्ति क्षीण होती है. कुदरत ने सभी को अवसर दिए हैं और वह आज़माइश भी करती है, लेकिन हक़ीक़त तो हक़ीक़त है, दुख-सुख, अच्छे-बुरे… ज़िंदगी जैसी भी मिले, उसके हर लम्हे को एंजॉय करो.”

“कौन हो तुम?”

“एक हवा का झोंका.”

जवाब देकर वह चला गया, पर मेरे दिल पर दस्तक दे गया. आत्महत्या का ख़्याल तो जाने कहां गुम हो गया, रातभर उसके बारे में सोचती रही. उसके ख़्यालों में खोई हुई रात गुज़री. दूसरे दिन वह स़फेद कोट पहनकर मरीज़ों को हिदायत दे रहा था… “दवाई समय पर खाओ, ऐसे एक्सरसाइज़ करना… खाने में ये खाना समझे…”

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पापा ने शायद नया डॉक्टर अपॉइंट किया है. उसकी आवाज़ में दीवानगी घुली हुई थी, जो मुझे दीवाना बनाकर उसकी तरफ़ खींच रही थी. दिन हो या रात, क्लीनिक में उनके हाथ बंटाने के बहाने मैं वहां बनी रहती. वो अपरिचित कभी मुझे ड्रेसिंग करता मिलता, कभी किसी बच्चे के साथ खेलता हुआ, कभी किसी बुज़ुर्ग के साथ किसी चुटकुले पर हंसता हुआ या तितली के पीछे भागता दिखाई देता. एक ऐसा ज़िंदादिल इंसान, जो अपने चारों ओर हंसी की चादर ओढ़े रहता. उससे भला दिल कैसे न लगता. उसने ज़िंदगी के प्रति मेरा नज़रिया ही बदल दिया था. उसने ही असफलता को सफलता में बदलने की सलाह दी और इस बार मैं सफल हो गई.

उस दिन पापा ने पूछ ही लिया इस परिवर्तन के पीछे क्या राज़ है? मैंने भी दिल का हाल पापा को बता दिया. पापा एकदम गंभीर हो गए. फिर बोले, “मैं भी बहुत ख़ुश होता ऐसा दामाद पाकर, पर मेरे बच्चे, वो कैंसर पेशेंट है. ख़ुश रहने के लिए वह कभी बच्चा, कभी डॉक्टर और न जाने क्या-क्या रूप धरता है. उसके जीवन के कुछ ही दिन शेष हैं.”

मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई. मैं जिसे डॉक्टर समझती थी, वो मरीज़ निकला. मेरे प्यार की इतनी कम उम्र, अभी-अभी तो सीखा था कि… मैं क्या करूं यही सोच रही थी कि ख़बर मिली हवा का झोंका अब नहीं रहा. मैं टूट गई. तेहरवीं की रस्म पर पापा मुझे उसके घर ले गए, उसकी तस्वीर पर स़फेद फूलों की माला चढ़ी हुई थी. वह तस्वीर में भी खिलखिला रहा था. ऐसा लगा जैसे मुझे कह रहा हो कि इस मासूम खिलखिलाहट में मेरे प्यार को हमेशा अपने मन और जीवन में संभालकर रखना और यूं ही चहचहाते रहना. उस रोज़ मैंने अपने दामन में प्यार की मीठी ख़ुशबू को ताउम्र के लिए समेट लिया.

20 वर्ष गुज़र गए. आज भी उसके लबों की मुस्कुराहट मेरे मन में बसी है. उसकी हंसी को उसी के अंदाज़ में डॉक्टर बनकर दूसरों के जीवन में बिखेरने की कोशिश में हूं. जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए, पर उसके द्वारा सुझाया गया हल जीवन में पतवार बन गया. ओ उड़ती हवा के झोंके, तुम्हारी कमी को कोई पूरा न कर सका, पर मैंने जीवन के हर लम्हे में तुम्हें पा लिया.

– शोभा रानी गोयल

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ज़रूरी है रिश्तों की भी पॉलिशिंग (Healthy And Happy Relationship Goals All Couples Should Create Together)

व़क्त की धूल, समय की परत… हर चीज़ को धीरे-धीरे पुराना, ग़ैरज़रूरी या यूं कहें कि बासी करने लगती है. हमें ऊब-सी होने लगती है, क्योंकि एक ही तरह का रूटीन, एक ही ढर्रे पर चल रही ज़िंदगी में हमें एक्साइटमेंट जैसा कुछ नहीं लगता. यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है. रिश्ते भी धीरे-धीरे रूटीन बन जाते हैं. उनमें वो ऊर्जा व गर्माहट गायब-सी होने लगती है, जो उन्हें हमेशा ज़िंदा रखने के लिए ज़रूरी होती है. ऐसे में जिस तरह से हम चीज़ों को पॉलिश करके नया बनाने की कोशिश करते हैं, ठीक उसी तरह रिश्तों में भी पॉलिशिंग की ज़रूरत होती है. समय-समय पर यह होती रहे, तो रिश्तों की चमक व ताज़गी बनी रहती है, वरना वो उबाऊ लगने लगते हैं.

 Happy Relationship Goals

कुछ नया करें

जब भी आपको महसूस हो कि रिश्ते रूटीन बनते जा रहे हैं, कुछ नया करें. ऐसा कुछ जिससे सामनेवाले को भी महसूस हो कि यह तो हमने सोचा ही नहीं था. इससे नए सिरे से आप उन रिश्तों को जीने लगते हैं. ये नयापन किसी भी तरह से आप ला सकते हैं. चाहें तो सरप्राइज़ेस के ज़रिए या अपनी कोई ऐसी बुरी आदत त्यागकर जिससे पार्टनर को ख़ुशी महसूस हो और उसे लगे कि आपने उसके लिए कुछ किया है.

रोमांटिक लाइफ को रिक्रिएट करें

एक समय के बाद लाइफ से रोमांस लगभग गायब-सा हो जाता है या यूं कहें कि वो बैकफुट पर चला जाता है और ज़िम्मेदारियां फ्रंटफुट पर आ जाती हैं. आप ऐसा होने से रोक सकते हैं. रोमांस के लिए स़िर्फ भावनाएं काफ़ी होती हैं. ज़रूरी नहीं कि आपको महंगे गिफ्ट्स लाने हैं या चांद-तारों पर जाने की बात कहनी है. आप पार्टनर को पल-पल यह महसूस करवा सकते हैं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं. कभी प्यारभरे सरप्राइज़्ड फोन कॉल्स से, कभी मैसेजेस से, कभी ऑफिस से जल्दी आकर, कभी डिनर या मूवी प्लान करके, तो कभी उनकी फेवरेट डिश बनाकर. कई तरी़के हैं, आपको जो सही लगे वो करें, लेकिन करें ज़रूर.

दिल की बात कहने से हिचकिचाएं नहीं

अगर कभी कोई बात आपको परेशान कर रही है या आप पार्टनर के लिए कुछ महसूस कर रहे हैं, तो कम्यूनिकेट करें. दिल की बात सहज तरी़के से कह देने से बॉन्डिंग मज़बूत होती है. दिल ही में रखेंगे, तो बात बढ़ेगी और परेशानियां भी. हर स्तर पर और हर व़क्त कम्यूनिकेशन ज़रूरी है.

शेयर करें

अपनी ख़ुशी, अपने ग़म, अपने अचीवमेंट्स, अपने प्रयास… सब कुछ शेयर करें. रिश्तों में शेयरिंग बेहद ज़रूरी है. इससे एक-दूसरे पर विश्‍वास और बढ़ता है.

सलाह लें और उन्हें मानें भी

ख़ुद को ही सबसे स्मार्ट समझने की ग़लती न करें. पार्टनर की सलाह भी लें और अगर वो सही लगती है, तो उस पर अमल भी करें. इससे पार्टनर को महसूस होगा कि आप उनकी बातों को महत्व देते हैं. इससे आपके रिश्ते में अपनापन और बढ़ेगा.

मदद करें, ज़िम्मेदारियां बांटें

दोनों को एक-दूसरे के कामों में मदद करने की कोशिश करनी चाहिए. इससे काम हल्का होगा और ज़िम्मेदारियां बंटेंगी. हमेशा बातचीत करके तय करें कि कौन किस बात की ज़िम्मेदारी लेगा, ताकि कोई कन्फ्यूज़न न रहे.

पार्टनर को हर्ट करने से बचें

अगर आपको पता है कि आपका व्यवहार या आपकी कोई बात पार्टनर को हर्ट कर सकती है, तो उसे करने से बचें. यदि ग़लती से ऐसा कुछ हो भी जाए, तो माफ़ी मांग लें और भविष्य में ग़लती न दोहराने का वादा भी करें. हो सकता है आपके लिए वह बात मामूली हो, पर पार्टनर को अच्छी न लगे, तो ऐसे में बेहतर है एक-दूसरे के लिए ख़ुद को थोड़ा बदल लें.

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Relationship Goals
कुछ बुरी आदतों को छोड़ने के लिए एक-दूसरे को चैलेंज करें

आप स्मोक करते हैं, जो पत्नी को पसंद नहीं और पत्नी बहुत ज़्यादा ख़र्च करती है, जो आपको पसंद नहीं, तो आप एक-दूसरे को चैलेंज करें कि इस महीने से अपनी-अपनी बुरी आदतों पर काबू पाने की पूरी कोशिश करेंगे. इससे आपको एक मोटिवेशन भी मिलेगी और आपकी बुरी आदतें भी कम होंगी.

फिटनेस को इग्नोर न करें

किसी भी रिश्ते में फिटनेस का भी बहुत बड़ा हाथ होता है. न स़िर्फ आप सेहतमंद रहते हैं, आपका रिश्ता भी हेल्दी होता है. एक-दूसरे के लिए फिटनेस चैलेंज लें. साथ में वॉक, जॉग या एक्सरसाइज़ करें. इससे आप एक-दूसरे के साथ समय भी बिता पाएंगे और हेल्दी भी रहेंगे. फिट रहेंगे, तो अट्रैक्टिव भी लगेंगे.

कुछ चीज़ें नज़रअंदाज़ करना भी सीखें

हम सब एक जैसे नहीं होते. हो सकता है पार्टनर की कोई बात आपको पसंद नहीं आती, तो बार-बार उन्हें टोकने से बेहतर है कि नज़रअंदाज़ करें या फिर प्यार से समझाएं. रिश्तों की मज़बूती के लिए बहुत-सी बातों को इग्नोर करना व एडजस्ट करना भी ज़रूरी होता है. पार्टनर के अलग व्यक्तित्व को सम्मान दें, उन्हें अपने जैसा बनाने की कोशिश में निराशा ही हाथ लगेगी.

सेक्स लाइफ में ऊर्जा बनाए रखने की कोशिश करें

यह बेहद ज़रूरी है. आपकी सेक्स लाइफ पर भी आपका रिश्ता बहुत हद तक निर्भर करता है. पर्सनल हाइजीन से लेकर पार्टनर की ज़रूरतों का ख़्याल रखने तक… कुछ भी आप इग्नोर नहीं कर सकते. सेक्स को मशीनी क्रिया न समझकर प्यार के इज़हार का ज़रिया समझें. आपस में बात करें कि आपको क्या पसंद है, क्या नापसंद है. बेडरूम के डेकोर को चेंज करें, जगह बदलें, ताकि सेक्स लाइफ भी रूटीन बनकर न रह जाए.

– विजयलक्ष्मी

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पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

वो ख़्वाब था बिखर गया, ख़्याल था मिला नहीं, मगर ये दिल को क्या हुआ… ये क्यों बुझा, पता नहीं… हरेक दिन उदास दिन, तमाम शब उदासियां… किसी से क्या बिछड़ गए कि जैसे कुछ बचा नहीं… जीवन से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद भी यादों की रहगुज़र पर जलता एक दीया है पहला प्यार, जिसकी झिलमिलाती यादों में कसक होती है, जो तन्हाई में दिल को उदास कर देती है, तो महफिल में भी नज़रें किसी को तलाशने लगती हैं. सब होने के बाद भी कुछ खोने का एहसास होता है. वो जज़्बात, जिन्हें इज़हार की मोहलत न मिली, जहां नज़रों ने नज़रों की ज़ुबां से दिल की बात सुन ली, लेकिन जब दिलों के फैसले दिमाग से किए जाते हैं, तो जुदाई ही मिलती है.

वो बीएससी करके कोचिंग में टीचर थे और मैं बारहवीं की स्टूडेंट, जो फिज़िक्स की प्रॉब्लम सॉल्व करना तो सीख गई, लेकिन दर्दे दिल में उलझकर रह गई. फिर तो जो समझ में आता था, उन्हें देखकर वो भी भूल जाया करती थी. कोचिंग के फेयरवेल पार्टी में उनका सुनाया वो शेर शायद उनके दिल की सदा थी. कुछ ऐसा था उन आंखों में कि मैंने कोचिंग जाना छोड़ दिया और घर पर ही परीक्षा की तैयारी करने लगी. सब ने बहुत समझाया कि परीक्षा तो हो जाने दो, लेकिन मैंने ना कर दिया. आखिरी पेपर के बाद कुछ इरादा करके मैं कोचिंग गई. वहां जाने पर पता चला कि वो तो शाखे-दिल पर गुलों की बहार की आस दिखाकर मुझे तन्हा छोड़कर जा चुके हैं. क्यों? कोई जवाब नहीं.

व़क्त अपनी रफ्तार से चलता रहा. विवाह, परिवार, सर्विस… इन सबके बीच कुछ खो देने का गम उतना ज़्यादा नहीं था, क्योंकि उसे पाया ही कब था. लेकिन फिर भी एक बार मिलने की ख़्वाहिश थी. लगता था महफिल में, मेले में कभी वो मेरे सामने आ जाएंगे. स्कूल में जब भी विदाई पार्टी होती, मुझे वो आखिरी मुलाकात याद आती.

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लेकिन गुज़रा व़क्त इस तरह सामने आ जाएगा, मैंने कभी सोचा न था. स्कूल में नए लेक्चरार से परिचय कराने के लिए प्रिंसिपल ने पूरे स्टाफ को बुलाया. पूरे 12 साल बाद उन्हें देखा था. आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था. वही ग्रेसफुल चेहरा, आंखों में चमक, ठहरा हुआ प्रभावी अंदाज़… नज़रें हटाना मुशिकल था, कहीं फिर खो न जाएं. गुस्सा था या डर, मैं उनके सामने आने से कतराने लगी. लेकिन एक स्कूल में होते हुए ऐसा नामुमकिन था. एक दिन पता चला कि अभी तक उन्होंने शादी नहीं की. क्यों? किसकी खातिर? जानना चाहती थी, लेकिन हम सब एक मर्यादा में बंधे थे.

शिक्षक दिवस पर छात्रों की फरमाइश पर उन्होंने कुछ शेर और गजल सुनाई- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता… वे कभी दिल के करीब थे. इसलिए उनके दर्द को मैं महसूस कर सकती थी. लेकिन कुछ सवालों के जवाब अभी पाने बाकी थे. अब हम दोस्त बन चुके थे.

“आपने शादी क्यों नहीं की?” एक बार फिर मैं पूछ बैठी.

“तुमसा कोई न मिला.” दिल की बात बताने में बिल्कुल भी नहीं झिझके थे.

“तो चोरों की तरह क्यों चले गए थे?”

“सब कुछ हमारे चाहने से नहीं होता. तक़दीर का फैसला हमें मानना पड़ता है.”

“कायरता को मजबूरी ना कहिए.” मैं गुस्से में बोली.

“तुम जानना चाहती हो, तो सुनो, तुम्हारे भैया मेरे दोस्त थे, फिर भी उनको सच्चाई बताकर तुम्हारा हाथ मांगा था, लेकिन उन्होंने जवाब दिय- ये तुम्हारी मर्ज़ी तक ही ठीक है, यदि मेरी बहन ने हां की, तो उसे गोली मार दूंगा, क्योंकि टीचर का दर्जा हर हाल में सम्मानीय होता है. अगर इस तरह शादियां होने लगीं, तो माहौल ही बिगड़ जाएगा. मैं उनको समझाने में नाकाम रहा, इसलिए खामोशी से चला गया. लेकिन फिर कोई और इस दिल में जगह न बना पाया.”

उनके शब्दों में उनकी बेबसी झलक रही थी, लेकिन अब मैंने उनका जहां मुकम्मल कराने का इरादा कर लिया था. अपनी मर्ज़ी उन्हें बता दी है. ज़िंदगी की ख़ुशियों पर उनका भी हक है. मुझे उम्मीद है कि इस दोस्ती के रिश्ते की वो लाज रखेंगे और इस शादी के लिए ना नहीं कहेंगे. बस, आप सभी की दुआओं की ज़रूरत है.

– शहाना सिद्दीकी

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बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

Breakup Effects
बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

शरीर में दर्द होने पर जैसे आप कोई काम सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, ठीक वैसे ही दिल के टूटने पर भी दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है. ब्रेकअप का संबंध केवल भावनाओं से ही नहीं होता, शरीर से भी होता है, इसलिए ब्रेकअप (Breakup) के दौरान जब व्यक्ति बुरी तरह से आहत होता है, तो उसका दुष्प्रभाव (Side Effects) मन के साथ-साथ शरीर पर भी इस प्रकार से दिखाई देने लगता है-

आंखों में सूजन: जब दिल दुखी होता है, तो आंखों में आंसू आना लाज़िमी है. लोग पूरी-पूरी रात रोते रहते हैं, जिसके कारण अगले दिन आंखों में सूजन आ जाती है. यहां पर एक दिलचस्प बात बता दें कि ब्रेकअप, तलाक़ या किसी अन्य बात से आहत होने के बाद रोने पर जो आंसू निकलते हैं, वो केवल वॉटरी होते हैं, उनमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चोट लगने या अन्य किसी कारण से रोने पर निकलनेवाले आंसुओं में नमक की मात्रा अधिक होती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जब कोई भावनात्मक रूप से आहत होकर रोता है, तो उसकी आंखों में अधिक सूजन आती है.

सीने में दर्द: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जब भी आप किसी बे्रकअप और तलाक़ जैसी गंभीर बात से आहत होते हैं, तो आपको ऐसा महूसस होता है, जैसे- सिर घूम रहा है, चक्कर आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, सीने में हवा पूरी तरह से नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है. इसका कारण है कि भावनात्मक पीड़ा होने के साथ सीने में शारीरिक पीड़ा भी महसूस होती है. कई बार तो ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे किसी ने छाती में मुक्का मारा हो या फिर छाती में भारीपन-सा महसूस होता है.

नींद न आना: ब्रेकअप के बाद अधिकतर लोग नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसका कारण प्यार में नाकाम होना है. परिणामस्वरूप तनाव बढ़ने लगता है. तनाव बढ़ने के कारण कार्टिसोल का उत्पादन शरीर में बढ़ने लगता है और बॉडी क्लॉक पर भी बुरा असर पड़ता है. इन्हीं कारणों से ब्रेकअप के समय लोगों को नींद नहीं आती है.

मांसपेशियों में दर्द: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में हुए एक शोध के अनुसार, बेक्रअप के बाद मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, सिरदर्द बढ़ सकता है और गर्दन में अकड़न आ सकती है. कई बार पैर भी इतने स्थिर (स्टिफ) हो जाते हैं कि सीढ़ियां चढ़ना दूभर हो जाता है. यहां तक कि थोड़ी दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है. इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी साबित हुआ है कि 23% तलाक़शुदा लोगों को कुछ दिन तक चलने में परेशानी हो रही थी और कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द हो रहा था.

पाचन तंत्र में गड़बड़ी: ब्रेकअप के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तऱफ़ डायवर्ट हो जाती है. जब कार्टिसोल की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तरफ़ ज़रूरत से ज़्यादा होती है, तो भूख कम होना, डायरिया और पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं होती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप ब्रेकअप के दौर से गुज़र रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क भूख मिटानेवाले हार्मोन का उत्पादन अधिक करता है.

वज़न बढ़ना: कुछ लोग जब तनावग्रस्त होते हैं, तो उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. इसका कारण है कि तनावग्रस्त होने पर उनके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं और शरीर इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है. परिणामस्वरूप शरीर में शुगर फैट के रूप में एकत्रित होने लगता है और उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. जब वे ब्रेकअप से आहत होते हैं, तो उस समय उनका मन शुगर और फैटवाली चीज़ें खाने का करता है और इन चीज़ों को खाने से वज़न बढ़ता है.

मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव: एक्सपर्टस का मानना है कि जब आप किसी अपने को खो देते हैं, तो दिल में दर्द के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी उसका असर पड़ता है. यानी कि दिल के बुरी तरह से आहत होने पर मस्तिष्क में भी तकलीफ़ होती है.

स्किन संबंधी समस्याएं: ब्रेकअप के बाद तनाव होता ही है. तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसके कारण त्वचा की चमक ख़त्म हो जाती है. अगर आप पहले से ही मुंहासे, सोरायसिस और एग्ज़ीमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो बे्रकअप के बाद आपकी त्वचा की रंगत और भी ख़राब होने लगती है.

दिल संबंधी परेशानियां: कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप के समय व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूटा हुआ होता है, इसलिए उस व़क्त उसे हार्ट संबंधी तकलीफ़ या दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा अधिक होता है. इसका कारण है कि ब्रेकअप के दौरान व्यक्ति के शरीर में एंड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा हुआ होता है.

इम्यूनिटी कमज़ोर होना: ब्रेकअप के दौरान अक्सर मन में नकारात्मक ख़्याल आते हैं. इन नकारात्मक ख़्यालों के कारण अवसाद, अकेलापन, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है.

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Breakup Effects

ब्रेकअप से जुड़े कुछ तथ्य
  • ब्रेकअप के दौरान महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक आहत होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में पुरुषों को नॉर्मल होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते.
  • ब्रेकअप से पहले व्यक्ति अपने रिश्ते के प्रति जितना प्रतिबद्ध होता है, रिश्ता टूटने के बाद उसमें बदलाव की संभावना भी उतनी अधिक होती है. यानी बे्रकअप के बाद व्यक्ति अपने आप को पूरी तरह से बदला हुआ महसूस करता है.
  • सोशल मीडिया रिश्तों टूटने, मानसिक व शारीरिक शोषण और तलाक़ का एक प्रमुख कारण बन गया है.

 

ब्रेकअप के बाद कैसे करें अपनी बॉडी को हील?
  1. ब्रेकअप के बाद सबसे पहले अपना फिज़िकल चेकअप कराएं. फिज़िकल चेकअप के दौरान डॉक्टर से पूछें- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना है? क्या शरीर में रक्तसंचार सुचारू रूप से हो रहा है? कई बार तनाव और अवसाद के कारण इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.
  2. अगर आप किसी भावनात्मक समस्या से परेशान हैं, तो उसे भी अपने डॉक्टर से शेयर करें और उससे निबटने के तरी़के पूछें.
  3. अकेलेपन, अवसाद और तनाव से छुटकारा पाने के लिए किसी अच्छे स्पा में जाकर बॉडी मसाज कराएं. बॉडी मसाज से माइंड और बॉडी दोनों रिलैक्स होती हैं.
  4. ब्रेकअप के बाद बॉडी मसाज कराने से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द और तनाव दूर होता है. अच्छी नींद आती है और एकाग्रता बढ़ती है.
  5. नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रकृति के क़रीब जाएं.
  6. ब्रेकअप में खाना-पीना छोड़ने की बजाय अपनी डायट पर ध्यान दें और हेल्दी फूड हैबिट्स फॉलो करें.
  7. ब्रेकअप के बाद शरीर में होनेवाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए वर्कआउट करें. वर्कआउट और एक्सरसाइज़ करने से एंड्रॉर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जो तनाव और अवसाद को दूर करता है.
  8. योग और प्राणायाम करके अपने अशांत मन को शांत करने का प्रयास करें.
  9. अपने बीते हुए कल को भुलाने के लिए ख़ुद को व्यस्त करें, जैसे- अच्छी किताबें पढ़ें, सकारात्मक सोचवाले दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  10. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डांस, साइकिलिंग, स्विमिंग, फिटनेस क्लास और स्पोर्ट्स खेलें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

प्रेम, प्यार, रोमांस, इश्क़, मुहब्बत… चाहत से लबरेज़ ये शब्द सुनते ही आंखों में अपने आप कई सपने पलने लगते हैं… गालों पर हया की एक लालिमा-सी छा जाती है… मुझे भी इस इश्क़ के रोग ने छू लिया था. 23 साल की थी मैं. नई-नई नौकरी लगी थी. मेरे साथ ही मेरे सहपाठी अभिनव ने भी जॉइन किया था. अभिनव के विभाग में ही उसका एक

शर्मीला-सा दोस्त था पल्लव. अभिनव से मेरा काफ़ी दोस्ताना व्यवहार था, उसी बीच पल्लव का मुझे चुपचाप देखना, आंखें झुकाकर बातें करना और बहुत ही सली़के से व्यवहार करना बेहद भाने लगा था. पल्लव की यही बातें मुझे बार-बार अभिनव के विभाग की ओर जाने को मजबूर कर देती थीं.

आख़िर मेरी क़िस्मत भी रंग लाई और पल्लव का ट्रांसफर मेरे ही विभाग में हो गया. बेहद ख़ुश थी मैं, हद तो तब हो गई, जब हम दोनों को एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने का मौक़ा मिला. अब धीरे-धीरे हमें क़रीब आने का मौक़ा मिला. दोस्ती गहरी हुई और फिर ये दोस्ती प्यार में बदल ही गई. पल्लव ने भी अपने प्यार का इज़हार इशारों-इशारों में कर ही दिया. हां, हमने आपस में कोई वादे नहीं किए थे, पर हमारे प्यार को मंज़िल मिलेगी, यह विश्‍वास हम दोनों को ही था.

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लेकिन नियति पर कब किसी का ज़ोर चला है. मैंने विभागीय परीक्षा दी थी और उसके लिए भी पल्लव ने ही मुझे प्रोत्साहन दिया था. हमने साथ-साथ तैयारी की. दुर्भाग्यवश पल्लव परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया और मैं पास हो गई थी. विभाग में रिक्त पद होने के कारण मेरा अधिकारी पद पर चयन हो गया था. अगली विभागीय परीक्षा को अभी समय था, मैंने पल्लव का हौसला बढ़ाया, लेकिन अब कार्यक्षेत्र में हमारे बीच दूरी बढ़ गई थी और धीरे-धीरे ये दूरियां हमारे संबंधों में भी बढ़ने लगी थीं. मैंने कई कोशिशें कीं, लेकिन पल्लव के मन में हीनभावना ने घर कर लिया था. वो मुझसे नज़रें चुराने लगा था. दूरी बनाए रखने के प्रयास करने लगा था. कुछ पूछती तो यही कहता कि मैं तुम्हारे लायक ही नहीं.

शायद पल्लव जान-बूझकर मुझसे दूर जाना चाहता था. मेरे सामने दूसरी लड़कियों से बातें करता… मेरा सामना तक नहीं करता था अब वो. मैंने फिर कोशिश की, तो उसने कहा, “मैं चाहता हूं तुम मुझे भूल जाओ, मुझसे घृणा करो, क्योंकि मेरा-तुम्हारा कोई मुक़ाबला नहीं. तुम्हें मुझसे बेहतर जीवनसाथी मिलेगा.”

ख़ैर, घर पर भी मेरी शादी की बातें होने लगी थीं और फिर मैंने भी पल्लव के लिए कोशिशें करनी बंद कर दीं, क्योंकि उसने ख़ुद मुझसे दूर जाने का निर्णय कर लिया था. मेरी शादी हो गई. पति के रूप में बेहद शालीन और प्यार करनेवाला साथी ज़रूर मिला, लेकिन मेरा पहला प्यार तो पल्लव था. कुछ समय बाद पता चला कि पल्लव के पिताजी ने काफ़ी दहेज लेकर एक लड़की से उसकी शादी कर दी. मेरा पहला प्यार दम तोड़ चुका था.

कई वर्षों बाद किसी समारोह में अचानक हमारा आमना-सामना हुआ. साधारण-सी औपचारिक बात के बाद हम दोनों अपनी-अपनी राह
चल दिए…

यूं ही अपने-अपने सफ़र में गुम… कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… मेरा पहला प्यार स़िर्फ एक छोटे-से मेल ईगो की बलि चढ़ गया था, काश! पल्लव तुमने अपना वो झूठा ईगो छोड़ दिया होता… काश!… लेकिन अब कोई फ़ायदा नहीं यह सोचने का, क्योंकि नियति को यही मंज़ूर था!

– अलका कुलश्रेष्ठ

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पति-पत्नी के रिश्ते में भी ज़रूरी है शिष्टाचार (Etiquette Tips For Happily Married Couples)

मुहब्बत की शबनम का बस एक क़तरा था और प्यास बड़ी… अब चाहत का पूरा समंदर है सामने पर प्यास नहीं… प्यार और विश्‍वास के रिश्ते जितने गहरे होते हैं, उतने ही नाज़ुक भी! ये मुहब्बत, ये रिश्ते और ये चाहतें बनी रहें, इसके लिए ज़रूरी है आपसी सम्मान और संवाद में शालीनता, सहजता और शिष्टता. बेतकल्लुफ़ी को हम भले ही क़रीब होने का इशारा समझें, लेकिन सच तो यह है कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी शिष्टाचार ज़रूरी है, वरना रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है.

Etiquette Tips For Couples

सुनने में ये अजीब लगता है कि भला पति-पत्नी के बीच ये शिष्टाचार या मैनर्स जैसी औपचारिकताएं क्यों? लेकिन अगर हम अपने आस-पास नज़र दौड़ाएं, तो यही पाएंगे कि बहुत-से छोटे-मोटे झगड़े, बहुत-सी उलझनें और आपसी मन-मुटाव इसी वजह से होते हैं, क्योंकि हम आपस में अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल करने लगते हैं या फिर इतने बेतकल्लुफ़ हो जाते हैं कि एक-दूसरें को अनजाने में ही अपमानित करने लगते हैं. ऐसे में कुछ बातों का ख़्याल रखा जाए, तो न स़िर्फ आपका रिश्ता गहरा होगा, बल्कि एक-दूसरे के लिए सम्मान और प्यार भी बढ़ेगा.

– एक-दूसरे की बातों पर ध्यान न देना और अक्सर उन्हें ही अनसुना कर देना बैड मैनर माना जाता है. इससे यह संदेश जाता है कि अपने पार्टनर की बातें या उसके विचार आपके लिए ज़्यादा मायने नहीं रखते. इससे बचें.

– हर बात में टोकना भी धीरे-धीरे रिश्तों में तनाव उत्पन्न कर सकता है. अगर आप पार्टनर की किसी बात से असहमत हैं, तो प्यार से भी उसे दर्शाया जा सकता है.

– आपसी बातचीत में शब्दों का चयन भी बहुत मायने रखता है. सॉरी, थैंक्यू और प्लीज़ जैसे मैजिक वर्ड्स का इस्तेमाल न स़िर्फ गुड मैनर्स को दर्शाता है, बल्कि रिश्ते को मज़बूत भी बनाता है.

– अगर घर पर कोई मेहमान या रिश्तेदार हों,  तो उनके सामने आपसी व्यवहार में सहजता और प्यार झलकना चाहिए.

– एक-दूसरे की मदद करना बेहद ज़रूरी है. आपसी काम में जितना संभव हो, एक-दूसरे की मदद करें और अगर पार्टनर का काम कम नहीं कर सकते, तो उसे बढ़ाने की ग़लती तो बिल्कुल न करें.

– ताने देने से बचेें. मज़ाक करना अलग बात है, लेकिन मज़ाक उड़ाने और ताने देने से रिश्ते प्रभावित होते हैं, क्योंकि इससे आत्मसम्मान को ठेस पहुंच सकती है.

– एक-दूसरे के परिवार को लेकर कोई भी ग़लत बात न करें या छींटाकशी न करें. उनका सम्मान करना सीखें, तभी आप दोनों के बीच भी सम्मान बना रहेगा.

– ग़ुस्से में बात करने से बचें. जब भी आप ग़ुस्से में हों, तो कोशिश करें कि पहले ग़ुस्सा शांत हो जाए, फिर –

– जितना हो सके बहस से बचें, लेकिन अगर बहस हो ही जाए तो अशिष्ट या असभ्य भाषा का प्रयोग न करें. न ही रिश्ते ख़त्म करने की धमकी दें. ग़ुस्से में इस्तेमाल किए गए अपशब्दों का असर भावी जीवन पर पड़ सकता है. इससे यह संदेश जाएगा कि कहीं न कहीं मन में यह विचार दबे हैं, जो बाहर आ गए.

– बदले की भावना मन में न रखें. पिछली बातों  का या पहले हुए किसी अपमान का बदला लेने की भावना मन में न पालें. यह भी अशिष्ट व असभ्य व्यवहार में आता है. जहां प्यार और सम्मान होगा, वहां बदले की भावना होनी ही नहीं चाहिए.

– अक्सर शादी के बाद पार्टनर्स टेबल मैनर्स ज़्यादा फॉलो नहीं करते, लेकिन यह भी मैनरिज़्म का हिस्सा है.

– खाते समय आवाज़ न करें. धीरे-धीरे चबा-चबाकर खाएं और मुंह बंद कर के खाएं.

– खाते वक़्त गंभीर या विवादास्पद मुद्दे पर बात करने से बचें.

– लाइट और अच्छे मूड में खाना खाएं. फ़ोन या पेपर पढ़ते हुए खाना न खाएं.

– फ़ोन मैनर्स का भी ख़्याल रखें. बेवजह एक-दूसरे के मैसेज या मेल्स चेक न करें.

– फ़ोन पर ज़ोर-ज़ोर से बातें न करें.

– अगर पार्टनर के नाम पर कोई लेटर, कुरियर, पार्सल या गिफ़्ट आया है, तो उसे ख़ुद खोलना  ग़लत है. आप अपने पार्टनर के आने का इंतज़ार करें. बिना बताए किसी का पैकट खोलना  शिष्टाचार में नहीं आता.

– समय की पाबंदी भी गुड मैनर्स में आती है. पार्टनर्स आपस में एक-दूसरे को इंतज़ार करवाते वक़्त यह नहीं सोचते कि इसका क्या असर पड़ेगा. लेकिन हर किसी के समय और इंतज़ार की क़ीमत होती है, यह समझना ज़रूरी है.

– स्पेस ज़रूर दें. किसी भी रिश्ते में स्पेस बहुत ज़रूरी है और यह भी मैनर्स का ही हिस्सा है.

– आपस में शेयरिंग और केयरिंग की भावना भी ज़रूरी है. एक-दूसरे को सपोर्ट करें, आपस में कंपीट न करें. कई कपल्स ये भूल जाते हैं कि वो सहभागी और साथी हैं, न कि प्रतियोगी या प्रतिद्वंद्वी. ऐसे में एक-दूसरे की तरक़्क़ी पर वे ख़ुश होने की बजाय ईर्ष्या की भावना मन में पैदा कर लेते हैं.

– किसी एक की क़ामयाबी दूसरे की भी सफलता है, उसे बधाई दें और सेलिब‘ेट करें.

– एक-दूसरे की तारीफ़ ज़रूर करें और समय-समय पर सरप्राइज़ेस भी दें.

– गीता शर्मा

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