Relationship

करन सिंह ग्रोवर ने जितनी भी बार रिश्ता बनाया उतनी ही बार अपने पार्टनर को चीट किया, चाहे वो श्रद्धा निगम हो या जेनिफर. फ़िलहाल तो करन बिपाशा के साथ शादी कर के सेटल हो गए हैं.

Karan Singh Grover

करन पटेल भी धोखा देने में किसी से कम नहीं. उन्होंने काम्या पंजाबी के संग रिश्ते में रहते हुए अंकिता भार्गव से भी अफेयर किया और फिर अचानक काम्या को छोड़ अंकिता से शादी रचा ली.

Karan Patel

प्रियांक शर्मा जब बिग बॉस मे गए थे तो उनकी पार्टनर थी दिव्या लेकिन शो के दौरान ही बेनाफ्शा उनके दिलो दिमाग़ पर ऐसी छाई कि उन्होंने अपनी गर्लफ़्रेंड को छोड़ दिया और बेन से रिश्ता जोड़ लिया.

Priyank Sharma

एजाज़ खान और अनीता हसनंदानी फेमस कपल थे लेकिन एजाज़ ने कनेडियन सिंगर के लिए अनीता को चीट किया और दोनों अलग हो गए.

Ijaz Khan

कृष्णा अभिषेक और कशमीरा फ़िलहाल अपनी शादी में खुश हैं लेकिन एक वक़्त ऐसा भी आया था जब कृष्णा का अफेयर तनुश्री दत्ता के साथ शुरू हो गया था. कशमीरा को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने कृष्णा को अलटीमेटम दे दिया के वो उनसे शादी करें.

Krishna Abhishek

दीपिका ककड़ भी किसी से पीछे नहीं हैं. जब उन्होंने ससुराल सिमर का शो किया था तब वो शादीशुदा थीं, लेकिन उन्हें अपने रील लाइफ पार्टनर शोएब इतने भाये कि उनसे शादी करने के लिए उन्होंने अपनी शादी तोड़ दी. हलांकि दीपिका हमेशा इस बात से इंकार करती रहीं कि शोएब के कारण उन्होंने अपनी पहली शादी तोड़ी.

Deepika Kakad

अंकित गेरा ने भी अदा खान को अपनी ऑनस्क्रीन पार्टनर रूपल त्यागी के लिए चीट किया.

Ankit Gera

अविनाश सचदेव और रूबिना दिलैक अपने शो छोटी बहू से सबके दिलों पे राज करते थे और दोनों की जोड़ी रियल लाइफ में भी हिट थी लेकिन अविनाश ने कहीं और भी दिल लगा लिया और दोनों अलग हो गए.

Avinash Sachdev

यह भी पढ़ें: वक़्त के साथ कैसे बदल गई मानव की अर्चना, सुशांत से ब्रेकअप के बाद अंकिता लोखंडे में आया था ज़बर्दस्त बदलाव! (Ankita Lokhande’s Stunning Transformation)

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टीवी का सबसे मशहूर शो और उसके लीड ऐक्टर व ऐक्ट्रेस सबसे फेमस कपल बन गए थे. पवित्र रिश्ता और मानव-अर्चना घर घर में सबके फेवरेट बन गए थे. अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत ने इसी शो से ना सिर्फ़ दर्शकों का बल्कि एक- दूसरे का भी दिल जीता था. दोनों में प्यार हुआ और लगभग छः साल तक उनका ये रिश्ता टिका रहा. लेकिन जिस वक़्त सबको इंतज़ार था दोनों की शादी का उसी वक़्त दोनों ने अलग होने का फ़ैसला करके सबको चौंका दिया था और अब सुशांत की अचानक मौत ने भी सबको बेहद चौंका दिया.

sushant singh rajput and ankita lokhande

लेकिन अब जाकर यह बात सामने आई कि अंकिता से अलग होने के बाद सुशांत पूरी तरह टूट चुके थे. क्योंकि उन्हें अंकिता जितना प्यार करने वाली व समझनेवाली कोई नहीं मिली. यही वजह है कि दोनों के दोस्त इस बात को कह रहे हैं कि अगर अंकिता सुशांत के साथ होती तो वो जीवित होते. लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है.

sushant singh rajput and ankita lokhande

ब्रेकअप के बाद सुशांत ने कहा था कि यह उनका निजी मामला है और वो वही करते हैं जो उन्हें पसंद है.

वहीं दूसरी ओर अंकिता में भी सुशांत से अलगाव के बाद काफ़ी बदलाव आया था. अलगाव के बाद वो बेहद दुखी थीं और उनके सोशल मीडिया पोस्ट इसकी गवाही देते थे. वो पवित्र रिश्ता के सेट को मिस करने की बात करती थीं और रिश्तों को लेकर भी उन्होंने काफ़ी कुछ लिखा था कि रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने में वो यक़ीन करती हैं ना कि उसका प्रचार करने में.

sushant singh rajput and ankita lokhande

सुशांत की मौत की खबर ने अंकिता को काफ़ी झकझोर दिया है जिससे पता चलता है कि इस रिश्ते में सच में पवित्रता थी और दोनों साथ होते तो बेहतर होता.

sushant singh rajput and ankita lokhande

लेकिन फ़िलहाल तो सच कुछ और ही है. सुशांत से अलग होने के बाद भले ही अंकिता टूट चुकी थीं पर उन्होंने खुद को अच्छी तरह सम्भाल लिया था और उनमें आया था ग़ज़ब का बदलाव. उन्होंने ना सिर्फ़ अपना मेकओवर किया बल्कि अपने करियर पर भी फोकस करना शुरू कर दिया था.

देखते हैं अंकिता के मेकओवर की तस्वीरें.

Ankita Lokhande
Ankita Lokhande
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एक वक़्त था जब फ़िल्म इंडस्ट्री में दोनों के इश्क़ के चर्चे काफ़ी गर्म थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि टूट गया इनका रिश्ता?

कहा जाता है कि फ़िल्म थानेदार की शूटिंग के दौरान ही दोनों में दोस्ती हो गई थी और दोनों घंटों फ़ोन पर बातें करते थे. उसके बाद फ़िल्म साजन की शूटिंग के दौरान इनकी दोस्ती प्यार में बदल गई.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

दोनों ही अपने रिश्ते को लेकर काफ़ी संजीदा थे और अपने प्यार को वो शादी की मंज़िल तक ले जाने की ख़्वाहिश भी रखते थे. लेकिन खलनायक फ़िल्म के रिलीज़ से पहले ही मुंबई बम धमाकों के केस में आर्म्स एक्ट के तहत संजय को गिरफ़्तार कर लिया गया था और उन्हें 16 महीने जेल में रहना पड़ा था. उनकी फ़िल्म खलनायक बहुत बड़ी हिट हुई थी लेकिन तब तक माधुरी अपना मन बदल चुकी थीं.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

संजय ने गिरफ़्तारी से पहले माधुरी को काफ़ी फ़ोन किया था लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. यही नहीं, जेल में भी माधुरी उनसे एक बार भी मिलने नहीं पहुंची. वो समझ चुकी थीं कि संजय के साथ उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं होगा और वो तय कर चुकी थीं कि अब उन्हें अपने करियर व निजी जीवन को बेहतर दिशा की ओर ले जाना है.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

संजय के साथ उन्हें कोई भविष्य नज़र नहीं आया और इसी वजह से संजू बाबा के जेल से छूटने के बाद भी माधुरी उनसे नहीं मिलीं. माधुरी ने संजय के साथ भविष्य में कोई भी फ़िल्म करने से भी मना कर दिया.

कहा जाता है कि संजय दत्त लंबे समय तक माधुरी के इस धोखे को भुला नहीं पाए थे. उन्हें इस बात की शिकायत थी कि जिस समय उन्हें माधुरी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी उसी समय उनके प्यार ने उनका साथ छोड़ दिया.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

यही नहीं, उन्हें इस बात का भी ग़म था कि जेल से आने के बाद भी माधुरी ने उन्हें अपनी बात कहने तक का मौक़ा नहीं दिया. बिना बताए ही रिश्ता तोड़ देने से संजय काफ़ी आहत थे लेकिन दूसरी ओर माधुरी भी अपनी जगह ग़लत नहीं थीं क्योंकि संजय ने जो किया उसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

बहरहाल, अब दोनों ही हैपिली मैरिड हैं और अब दोनों की मुलाक़ात भी होती है तो वो हल्की फुलकी बातें ही करते हैं. दोनों उस दौर से बाहर निकल चुके और अपनी ज़िंदगी में खुश हैं.

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प्रियांक शर्मा(Priyank Sharma) यानी छोटे पर्दे का चॉकलेट बॉय जिनके लाखों फ़ैंस तो तब ही बन गए थे जब वो रोडीज़ में आए थे. उसकेबाद वो स्प्लिट्सविला का हिस्सा बनें और फिर बिग बॉस 11 में शिरकत की. 

प्रियांक शर्मा उस समय अपनी पर्सनल लाइफ़ को लेके भी काफ़ी चर्चा में थे और उनकी गर्लफ़्रेंड बिग बॉस में फ़ैमिलीटास्क में आई भी थीं, उसके बाद उनका ब्रेकअप भी हो गया. उसी दौरान वो एक और हाउस मेट के काफ़ी क़रीब आ गए थे, वो थीं बेनाफ़्शा सूनावाला. 

हाल ही में इन दोनों ने ही अपने प्यार aur रिश्ते को अफ़िशियल कर दिया है और अपने अपने इंस्टाग्राम पर स्वीट सी पिकशेयर की है जिसमें प्रियांक बेनाफ़्शा को किस कर रहे हैं. 

बेनाफ़्शा ने भी कैप्शन दिया है कि मुझे तुम्हारी तरह कोई नहीं रख सकता… इसे अनकनवेनशनल कहूँगी… मेरा प्यारआदतन है.

इनकी इस पोस्ट पर कई सेलेब कॉमेंट भी कर रहे हैं और उनके रिश्ते पर खुश भी हैं.

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रिश्ते में अतिरिक्त प्रयास ना करना: एक समय के बाद हम खुद यह मान लेते हैं कि अब रिश्ते को अतिरिक्त समय देने कीया कुछ स्पेशल करने की ज़रूरत नहीं. हमको लगता है हमारा रिश्ता स्टेबल हो गया और यहीं हम ग़लती करते हैं. धीरे धीरेरिश्ते में बोरियत पनपने लगती है और वो रूटीन सा लगने लगता है. 

क्या करें: रिश्ते को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आपके प्रयास ज़रूरी हैं. हमेशा कुछ नया करते रहें और पार्ट्नर कोस्पेशल फ़ील करवाते रहें.

विवादों को उनसुलझा ही रहने देना: अक्सर कई कपल यह ग़लती करते हैं. उनमें कोई झगड़ा या विवाद हो जाए तो वोउसको सुलझाने की बजाए बात करना बंद कर देंगे हैं और फिर धीरे धीरे उसको टालना शुरू करके फिर से सामान्य होनेलगते हैं. लेकिन वो बात वहीं की वहीं रह जाती है, जो कभीना कभी बैकफ़ायर करती ही है.

क्या करें: बेहतर होगा कि विवाद के बाद जब आप दोनों का ही ग़ुस्सा शांत हो जाए तब उस पर बात की जाए. समस्या कीजड़ तक जाना ज़रूरी है ताकि उसको सुलझाया जा सके aur भविष्य में फिर ऐसा विवाद ना हो.

एक दूसरे की भावनाओं को जानबूझकर आहत करना: अक्सर कपल ऐसा करते हैं. उन्हें लगता है कि अगर पार्टनर उन्हें हर्टकरता है तो वो भी बदला लेंगे. एक दूसरे को ताना देना या कोई ऐसी बात करना जिससे पार्टनर आहत हो ऐसा ना करें. इससे आपका रिश्ता कमज़ोर होगा और विवाद भी बढ़ेंगे. एक दूसरे के घरवालों को लेकर कोई ताना ना दें और ना हीउनका अपमान करें. दूसरों के सामने भी पार्टनर को नीचा ना दिखायें, वरना आपका रिश्ता ज़्यादा नहीं चल पाएगा. 

क्या करें: आप दोनों एक दूसरे को मोटीवेट करने के लिए साथ हो ना कि तकलीफ़ देने के लिए. एक दूसरे की कमज़ोरियोंको स्वीकारें और फिर आगे बढ़ें. सभी को सम्मान दें और आपसी झगड़े में घरवालों को बीच में ना लायें.

रिश्ते के बाहर आकर्षण महसूस करना: पार्टनर से विवाद हुआ तो इसका यह मतलब नहीं कि ऑफ़िस में कॉलीग के सामनेअपनी पर्सनल लाइफ़ का विश्लेषण करने लगें. इस से बचें और इस तरह के अस्थाई बाहरी आकर्षण से भी. 

क्या करें: यह सोचें कि अब तक आपके सुख दुःख में पार्ट नर ने ही साथ दिया है इसलिए उसका सम्मान करें aur मामूलीविवाद के चलते उसकी अच्छाइयों को अनदेखा ना करें. किसी तीसरे के नज़रियर से अपने रिश्ते को जज ना करें.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें: कभी बच्चों के नाम पर, कभी सेक्स को लेकर तो कभी अपनी जान ले लेनी की बात करकेअक्सर कपल भावनायों से खेलते हैं. इससे बचें क्योंकि ऐसा करने पर पार्टनर आप अपना सम्मान खो देंगे. आपकी इनधमकियों को पार्टनर एक समय के बाद नज़रअंदाज़ करने लगता है हो सकता है कि वो बाहर भी रिश्ता क़ायम कर ले.

क्या करें: बातचीत ही समस्या का समाधान है. परिपक्वता दिखायें, ना कि बचपना. पार्टनर की भवनाओं को समझें औरइमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें.

सब ठीक हो जाने के इंतज़ार में कई महिलाएं चुपचाप सब कुछ सहते हुए एब्यूसिव रिलेशनशिप में रहती हैं… लेकिन कई बार उनकी इस चुप्पी का परिणाम इतना घातक होता है कि उसकी भरपाई मुश्किल हो जाती है… घर बचाने की कोशिश में कई बार उनका और बच्चों का भविष्य ख़राब हो जाता है… पेश है, भारत में एब्यूसिव रिलेशनशिप का दंश झेलती महिलाओं पर एक रिपोर्ट.

एब्यूसिव रिलेशनशिप के कारण

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ के अनुसार, एब्यूसिव रिलेशनशिप के कई कारण होते हैं. प्रताड़ित करनेवाले और प्रताड़ित होनेवाले दोनों का बचपन कैसे बीता है, इसका भी उनके व्यवहार पर असर पड़ता है. डॉ. माधवी सेठ के अनुसार एब्यूसिव रिलेशनशिप के ये कारण होते हैं-

  • जो महिलाएं बचपन में अपनी मां को पिता से पिटते या गाली सुनते देखती हैं, तो उन्हें लगता है कि ऐसा होना सामान्य बात है. ऐसे में जब वो इसकी शिकार होती हैं, तो उन्हें इसमें कुछ ग़लत नहीं लगता और वो चुपचाप सब कुछ सहती जाती हैं. उन्हें ये समझ ही नहीं आता कि वो एब्यूसिव रिलेशनशिप में हैं.
  • इसी तरह जो लड़के बचपन में अपने पिता को अपनी मां को पीटते देखते हैं, वो महिलाओं की इज़्ज़त नहीं करते. उन्हें लगता है कि पत्नी को पीटना उनका अधिकार है.
  • कई घरों में आज भी पति के पैर दबाना, सास के पैर दबाना औरत का धर्म माना जाता है. इसी तरह पत्नी या बहू को मारना-पीटना भी अधिकार समझा जाता है.
  • महिलाएं अपने पति में अपने पिता की छवि तलाशती हैं. ऐसे में यदि किसी महिला का पिता उसकी मां को पीटता या गाली देता था, तो उसे भी पति के हाथों पिटना सामान्य-सी बात लगती है.
  • पुरुष भी पत्नी में अपनी मां की छवि तलाशते हैं, इसलिए उन्हें भी अपनी मां जैसी महिला ही पसंद आती है और वे अपनी पत्नी के साथ भी वैसा ही व्यवहार करते हैं, जैसा उनके पिता उनकी मां के साथ करते थे.
  • अधिकतर महिलाएं आर्थिक और भावनात्मक रूप से पुरुष से जुड़ी होती हैं, इसलिए वो पुरुष की हर ज़्यादती बर्दाश्त करती हैं.
  • कई महिलाएं पति की प्रताड़ना इसलिए बर्दाश्त करती हैं, ताकि रिश्ता टूटने से उनके बच्चों का भविष्य ख़राब न हो जाए. वो अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलने से डरती हैं. वो ये मान लेती हैं कि उनका पति ऐसा ही है और अब उन्हें आगे की ज़िंदगी ऐसे ही बितानी है.
  • परिवार, रिश्तेदार और समाज का प्रेशर भी महिलाओं को एब्यूसिव रिलेशनशिप में रहने के लिए बाध्य करता है.
  • कई महिलाएं पति से ज़्यादा काबिल होते हुए, उनसे ज़्यादा कमाते हुए भी एब्यूसिव रिलेशन में रहती हैं. उन्हें लगता है कि उनके थोड़ा-सा सहन करने से यदि घर ठीक से चल रहा है तो कोई बात नहीं. पति सबके सामने उन्हें थप्पड़ भी मार देता है, तो भी वो कुछ नहीं कर पातीं.
  • कई महिलाएं यहां तक कहती हैं कि पति उन्हें मारता है तो क्या हुआ, उन्हें प्यार भी तो करता है. उन्हें लगता है कि पति यदि उन्हें प्यार करता है, तो उसे पत्नी को पीटने का भी अधिकार है.
ख़तरनाक होता है मेंटल एब्यूस

फिज़िकल एब्यूस की तरह कई महिलाएं मेंटल एब्यूस की शिकार भी होती हैं. मेंटल एब्यूस पढ़े-लिखे और पॉलिश्ड लोगों में ज़्यादा पाया जाता है और मेंटल एब्यूस के केसेस ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं, क्योंकि यहां पर प्रताड़ना के कोई निशान नज़र नहीं आते, लेकिन चोट बहुत ज़्यादा पहुंचती है.

  • यदि किसी पुरुष की पत्नी उससे ज़्यादा क़ाबिल है, तो वो मेंटल एब्यूस का सहारा लेता है. वो सबके सामने पत्नी को ज़लील करके या उसका मज़ाक उड़ाकर उसका कॉन्फिडेंस कम कर देता है. किसी क़ाबिल महिला के लिए ये घोषित कर देना कि वो क़ाबिल नहीं है, उस महिला के सेल्फ कॉन्फिडेंस और सेल्फ रिस्पेक्ट के लिए बहुत घातक होता है.
  • पत्नी कहीं पति से आगे न निकल जाए, इसके लिए कई पुरुष अपनी पत्नी को काम करने से रोकते हैं. अपने बचाव में वो पत्नी को ये दलील देते हैं कि हमारे घर में महिलाएं काम नहीं करतीं या तुम्हें काम करने की क्या ज़रूरत है.
  • पति के अचीवमेंट के बारे में महिलाएं तो बढ़-चढ़कर बताती हैं, लेकिन कई पुरुष ऐसा नहीं करते. पत्नी की कामयाबी से उन्हें ईर्ष्या होने लगती है और वो पत्नी को बात-बात में नीचा दिखाने लगते हैं.

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एब्यूसिव रिलेशनशिप के परिणाम
  • पति जब पत्नी को सबके सामने पीटता है, तो इससे उस महिला का कॉन्फिडेंस कम होता है और दूसरों के सामने वो दया का पात्र बन जाती है.
  • आज की पढ़ी-लिखी लड़कियां अब एब्यूसिव रिलेशन बर्दाश्त नहीं करतीं, जिससे उनके रिश्ते लंबे समय तक नहीं टिक पाते. तलाक़ के मामले बढ़ने का एक कारण घरेलू हिंसा भी है.
  • पति से प्रताड़ित महिला यदि इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती है, तो घर की अन्य महिलाएं उसका साथ देने की बजाय उसे ही दोषी ठहराती हैं. ऐसे में कई महिलाएं चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं.
पति द्वारा प्रताड़ित महिलाओं का सच

भारत में पति से प्रताड़ित होनेवाली महिलाओं की संख्या बहुत है और हैरत की बात ये है कि अधिकतर महिलाओं को इससे कोई आपत्ति भी नहीं हैं. ऐसी महिलाओं को लगता है कि पति से पिटना उनकी नियति है और उन्हें ऐसे ही जीना है.

  • वडोदरा के एक ग़ैर सरकारी संगठन ‘सहज’ के अध्ययन के अनुसार, भारत में क़रीब एक तिहाई शादीशुदा महिलाएं पतियों के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं और हैरत की बात ये है कि कई महिलाओं को पति के हाथों पिटाई से कोई गुरेज भी नहीं है.
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस) 4 के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 साल के आयु वर्ग की महिलाओं में से लगभग 27 प्रतिशत ने 15 साल की उम्र से ही हिंसा बर्दाश्त
    की है.
  • इंडियन जर्नल ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में हर तीसरी महिला घरेलू हिंसा की शिकार है.
  • नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के अनुसार, भारत में 37 फ़ीसदी महिलाएं अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में सेक्सुअल, शारीरिक और मानसिक हिंसा सहती हैं. सर्वे से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जो महिलाएं अपने पतियों पर निर्भर हैं, उन्हें दूसरी महिलाओं की अपेक्षा ज़्यादा यातनाएं झेलनी पड़ती हैं.
एब्यूसिव रिलेशनशिप से कैसे उबरें?
  • एब्यूसिव रिलेशनशिप से उबरने के लिए सबसे पहले महिला को इसकी जानकारी होनी चाहिए कि वो जो सहन कर रही है, वो एब्यूसिव व्यवहार है.
  • यदि आपका पति आपको प्रताड़ित करता है, तो पति से इस बारे में शांति से बात करें. उन्हें प्यार से समझाएं कि उनके ऐसे व्यवहार से आपका सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता है और आप दोनों के रिश्ते में तनाव भी बढ़ता है.
  • पैरेंट्स को ये बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि उनका व्यवहार उनके बच्चों के लिए रोल मॉडल बने. पापा मार सकते हैं और मम्मी मार खा सकती है, यदि ये सब बच्चे अपने घर में देखते हैं, तो आगे चलकर वो भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं. अत: बच्चों के सामने कभी भी झगड़ा न करें. घर में सभी एक-दूसरे की रिस्पेक्ट करें, ताकि बच्चे भी आपसे यही सीखें.
  • अपने बेटे को महिलाओं की इज़्ज़त करना सिखाएं.
  • अपनी बेटी को मेंटली और फिज़िकली मज़बूत बनाएं. बेटी को सिखाएं कि चुपचाप मार खाना या प्रताड़ना सहना सही नहीं है.
  • अपने बच्चों को सिखाएं कि कोई भी किसी को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता, फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला.
पुरुष भी होते हैं एब्यूस

ऐसा नहीं है कि स़िर्फ महिलाएं ही पति द्वारा प्रताड़ित होती हैं, पुरुष भी पत्नी द्वारा प्रताड़ित होते हैं. फ़र्क़ स़िर्फ इतना है कि महिलाएं पति को फिज़िकल एब्यूस नहीं करतीं, वो मेंटल एब्यूस करती हैं. जो पुरुष अपनी पत्नी से प्रताड़ित होते हैं, उनकी शिकायत होती है कि उनकी पत्नी उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें दोषी ठहराती हैं, बात-बात में आंसू बहाकर उनसे हर बात मनवा लेती है, उन्हें सेक्स से वंचित रखती है, व़क्त पर खाना नहीं देती, बच्चों को उनके ख़िलाफ़ भड़काती है आदि. कई महिलाएं इतनी मेन्यूपुलेटिव होती हैं कि पुरुष ये समझ ही नहीं पाता कि आख़िर उनकी पत्नी के मन में चल क्या रहा है. ऐसी महिलाएं इतने शातिर तरी़के से पुरुष को प्रताड़ित करती हैं कि लोगों को दोषी भी पुरुष ही लगता है. ऐसी महिलाएं आंसुओं का सहारा लेकर अपना बचाव करती हैं और पुरुष को दोषी ठहरा देती हैं.

– कमला बडोनी

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जो चीज़ हमें सबसे प्यारी होती है, उसे खोने का डर भी हमें उतना ही ज़्यादा होता है. ऐसे में हम अपने उस रिश्ते को इतना संभालकर और दुनिया से बचाकर रखना चाहते हैं कि हमारे मन में हर पल अपने रिश्ते के खो जाने का डर बना रहता है. लेकिन डरकर कोई रिश्ता नहीं जीया जा सकता, अपने रिलेशनशिप फियर्स से बाहर निकलकर ही आप एक हेल्दी रिश्ता जी सकते हैं. रिलेशनशिप फियर्स कौन-कौन से होते हैं और उन्हें कैसे दूर करें? आइए, जानते हैं.

रिश्ता न निभाने का डर

जब आप किसी से बेइंतहा प्यार करते हैं, तो उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहते. ऐसे में आपको हर पल ये डर लगा रहता है कि क्या आपका पार्टनर इस रिश्ते को उम्रभर निभाएगा. कहीं आपको बीच सफ़र में छोड़ तो नहीं देगा.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

जब तक आप अपने रिलेशनशिप को शादी के बंधन में नहीं बांध देते, तब तक कुछ हद तक आपके मन में ये डर होना लाज़मी है, लेकिन अपने डर के कारण पार्टनर पर बेवजह शक करना सही नहीं है. यदि आप अपने इस डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें और अपने रिश्ते को बिना डरे प्यार से जीएं.

धोखा देने का डर

प्यार में धोखा कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरों के रिश्ते में धोखे की बात सुनकर लोग अपने पार्टनर पर भी शक करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि कहीं उनका पार्टनर भी उन्हें धोखा तो नहीं दे देगा. ऐसे में कई बार वो अपने पार्टनर को लेकर इतने पज़ेसिव हो जाते हैं कि जाने-अनजाने उसकी हर हरक़त पर नज़र रखने लगते हैं. उनकी इस हरक़त से पार्टनर को चिढ़ होने लगती है, जिससे उनके रिश्ते में बेवजह तनाव बढ़ने लगता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

प्यार के रिश्ते में विश्‍वास बहुत ज़रूरी है. बेवजह पार्टनर पर शक करना या उस पर नज़र रखना सही नहीं है. अपने पार्टनर को इतना स्पेस ज़रूर दें कि वो उसे आपके साथ घुटन न महसूस हो. आप चाहें तो अपना डर पार्टनर के साथ शेयर करके उनसे इस बारे में खुलकर बात कर सकते हैं.

ज़िम्मेदारी न निभाने का डर

कई लोगों को ये डर रहता है कि उनका पार्टनर क्या अपनी सभी ज़िम्मेदारियां बख़ूबी निभा सकेगा? जब आप किसी को अपना जीवनसाथी बनाते हैं, तो आपके रिश्ते की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में एक-दूसरे का साथ निभाने के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियां निभाना भी उतना ही ज़रूरी हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

कई बार ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ख़ुद आगे बढ़कर ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियां ओढ़ लेता है, फिर जब उससे इतनी सारी ज़िम्मेदारियां नहीं निभाई जातीं, तो वो अपने पार्टनर को गैरज़िम्मेदार साबित करने लगता है. उसे लगता है कि उसने ये ज़िम्मेदारियां यदि अपने पार्टनर के साथ शेयर की, तो क्या उनका पार्टनर ये ज़िम्मेदारियां निभा सकेगा? अत: रिश्ते में बंधने से पहले अपनी ज़िम्मेदारियों के बारे में पार्टनर से बात कर लें, ताकि बाद में आप दोनों के बीच इस बात को लेकर मनमुटाव न हो.

सम्मान न मिलने का डर

दो लोग जब एक रिश्ते में बंधते हैं, तो उनके साथ-साथ दो परिवार भी एक हो जाते हैं. ऐसे में कई बार एक पार्टनर का परिवार दूसरे पर इस कदर हावी रहता है कि उसे वो सम्मान नहीं मिल पाता, जो उसका अधिकार है. कई बार पार्टनर भी एक-दूसरे का सम्मान नहीं करते, जिसके कारण परिवार और दोस्तों के बीच उनकी छवि ख़राब होती है और उनके रिश्ते में भी दरार पड़ने लगती है. किसी भी रिश्ते में सम्मान न मिल पाने का डर सही नहीं है.

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कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

शादी के रिश्ते में दोनों पार्टनर्स को उचित सम्मान मिले, इसका ख़्याल दोनों को रखना चाहिए. यदि आप दोनों ने साथ जीने का ़फैसला किया है, तो एक-दूसरे के सम्मान का ख़्याल भी आपको ही रखना होगा. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको वो सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके आप हक़दार हैं, तो इसके लिए आपको अपने पार्टनर से ज़रूर बात करनी चाहिए.

समझौते का डर

रिश्ता निभाने के लिए दोनों को पार्टनर्स को कई समझौते करने पड़ते हैं. एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना पड़ता है. लेकिन कई बार एक पार्टनर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए राज़ी नहीं होता. ऐसे में दूसरे पार्टनर के लिए रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर भी किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं होते, तो आपका डर वाजिब है. ऐसे में अकेले आपकी कोशिश से कुछ नहीं होगा. आपको अपने पार्टनर से इस बारे में बात करनी होगी कि उन्हें आपकी भावनाओं का भी ध्यान रखना होगा, तभी आपके रिश्ते में प्यार और ख़ुशियां बरकरार रहेंगी.

एक्स से मिलने का डर

यदि आपके पार्टनर का आपसे पहले किसी और से अफेयर था और अब भी उनके बीच बातचीत जारी है, तो आपके मन में डर या शंका होना स्वाभाविक है. इस डर की वजह शक से ज़्यादा पार्टनर को खो देने का भय है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप पार्टनर की हर बात को उनकी एक्स से जोड़ें.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर की अपनी एक्स से फॉर्मल बातचीत है, तो कोई बात नहीं, लेकिन आपको यदि लगता है कि वो फिर उसकी तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं, तो आपको पार्टनर के सामने अपनी शिकायत रखनी चाहिए. रिश्ते में पार्टनर को स्पेस देना ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा स्पेस देने से भी कई बार समस्या बढ़ जाती है.

रिलेशनशिप फियर्स दूर करने के आसान उपाय

अपने रिश्ते से डर को दूर भगाने और प्यार बढ़ाने के लिए आपको ये टिप्स ट्राई करने चाहिए-

  • अपने पार्टनर से हर मुद्दे पर खुलकर बात करें, ताकि आप दोनों के मन में यदि कोई बात हो, तो वो मन में दबी न रह जाए.
  • पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें. अपने परिवार और रिश्तेदारों के सामने कभी अपने पार्टनर का अपमान न होने दें.
  • अपने रिश्ते को भरपूर टाइम दें, ताकि समय के अभाव में आपके पार्टनर का मन कहीं और न लगे.
  • अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी पीछे न हटें, पार्टनर का हमेशा साथ दें.
  • यदि आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपको धोखा दे रहा है, तो कोई भी ़फैसला लेने से पहले पार्टनर को एक मौक़ा ज़रूर दें.
  • पार्टनर पर स़िर्फ अपनी इच्छाएं न थोपें, उनकी इच्छाओं का भी ध्यान रखें.
  • रिश्ते में वफ़ादारी की उम्मीद स़िर्फ पार्टनर से न करें, बल्कि ख़ुद भी अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार रहें.
  • अपने रिश्ते में रोमांस कभी कम न होने दें, इससे आपके रिश्ते में ऊर्जा और प्यार हमेशा बना रहेगा.

– कमला बडोनी

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Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम कभी तो मिलोगे (Pahla Affair: Tum Kabhi To Miloge)

आज फिर मेघों से रिमझिम वर्षा रूपी नेह बरस रहा है. दूर-दूर तक मेरी प्रिय तन्हाई पसरी हुई है. एकाएक रेडियो पर बज रहे गीत पर ध्यान चला गया-
छोटी-सी ये दुनिया पहचाने रास्ते, तुम कहीं तो मिलोगे, कभी तो मिलोगे..

मेरा दिल यूं ही भर आया. कितने साल गुज़र गए आपसे बिछड़े हुए, पर मेरा पागलपन आज भी आपके साथ गुज़ारे उन सुखद पलों की अनमोल स्मृतियां संजोए हुए है.

अल्हड़ उम्र के वो सुनहरे भावुक दिन… चांदनी रात में जागना, अपनी ही बनाई ख़यालों की दुनिया में खो जाना, यही सब कुछ अच्छा लगता था तब. शरत्चंद,विमल-मित्र, शिवानी आदि के उपन्यासों को प़ढ़ना तब ज़रूरी शौक़ों में शामिल थे. को-एज्युकेशन के बावजूद अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण मैं क्लास में बहुत कम बोलती थी.

उन दिनों कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे थे. आप तब मेरे पास आए थे और एक फ़िल्मी गीत के दूसरे अन्तरे को पूरा करने का आग्रह किया था. उसी गीत को गाने पर आपको प्रथम पुरस्कार मिला था. मेरे बधाई देने पर आपने कितनी आसानी से कह दिया था कि यह गीत तो मैंने तुम्हारे लिए ही गाया था. उसके बाद तो मैं आपसे नज़रें चुराती ही फिरती थी. लेकिन अक्सर ऐसा लगता जैसे आपकी ख़ामोश निगाहें हमेशा मेरा पीछा करती रहती हैं.

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फिर परीक्षा के दिनों में जब मुझे एकाएक बुखार हो गया था, तो आपने बिना परीक्षा की चिंता किए मुझे अस्पताल में भर्ती करवाया था और मेरे माता-पिता के आने तक मेरी पूरी देखभाल की थी.

और जाड़ों में जब हमारी पिकनिक गई थी और मुझे आपके स्कूटर पर पीछे बैठना पड़ा था, उस दिन आपकी पीठ की ओर उन्मुख हो, मैंने जी भर कर बातें की थीं. हम पिकनिक स्पॉट पर सबसे देर से पहुंचे थे, आपका वाहन उस दिन चींटी की ऱफ़्तार से जो चल रहा था.

लेकिन तभी आपके चिकित्सक पिता की विदेश में नियुक्ति हुई और आपका परिवार विदेश चला गया. आपने अपनी मां से आपको यहीं छोड़ने के लिए बहुत अनुरोध भी किया, लेकिन आपका प्रयास असफल रहा. अपने मां-बाप के सामने अपनी पसंद ज़ाहिर करने की आपकी उस व़क़्त न उम्र थी न हालात. और आप अनेक सुनहरे सपने मेरी झोली में डाल सात समंदर पार के राजकुमार बन गए. कुछ वर्षों तक आपके स्नेहिल पत्र मुझे ढा़ंढस बंधाते रहे. फिर एकाएक इस छोटी-सी दुनिया की विशाल भीड़ में आप न जाने कहां खो गये. आपके परिवार की भी कोई खोज-ख़बर नहीं मिली. उन दिनों गल्फ वार (खाड़ी युद्ध) चल रहा था. अनेक प्रवासी-भारतीय गुमनामी के अंधेरे में खो
चुके थे.

मैं अपने प्यार की अजर-अमर सुधियों की शीतल छांव तले जीवन गुज़ारती रही. मुझे ऐसा रोग हो चुका है जिसको प्रवीण चिकित्सक भी समझ पाने में असमर्थ हैं. मुझे अटूट विश्‍वास है कि मेरे जीवन के मंदिर की लौ बुझने से पहले आप ज़रूर मिलेंगे और आपका उजला, हंसता- मुस्कुराता चेहरा ही मेरे जीवन के इंतज़ार को सार्थक बनाएगा. मेरे जीवन का सार बच्चन जी की इन पंक्तियों में है-

स्वागत के साथ ही विदा की होती देखी तैयारी
बंद लगी होने खुलते ही मेरी जीवन मधुशाला

– डॉ. महिमा श्रीवास्तव

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Psychology Of Relationships
मैं फाइनल ईयर की छात्रा हूं. इंदौर में पली-बढ़ी हूं. आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई आई हूं. यहां सब कुछ बहुत एडवांस्ड है. लोग काफ़ी खुले विचारों के हैं. मुझे यहां दोस्त बनाने में भी संकोच होता है. बहुत अकेला महसूस करती हूं. सोचती हूं, वापस इंदौर चली जाऊं.
– रोमा त्रिपाठी, मुंबई.

बदलाव कभी आसान नहीं होता. हमें एक रूटीन जीवन जीने की आदत होती है और उसमें थोड़ा भी बदलाव हमें परेशान कर देता है, पर बदलाव ही संसार का नियम है. जिस चीज़ से हमें डर लगता है या तक़लीफ़ होती है, उससे भागने की बजाय उसका सामना करना उचित है. अपनी सोच बदलें, लोगों और चीज़ों को देखने का नज़रिया बदलें. ख़ुद को भी थोड़ा आत्मविश्‍वासी बनाने का प्रयास करें. लोगों से मिलना-जुलना शुरू करें. धीरे-धीरे संकोच समाप्त हो जाएगा और देखते-देखते आप भी मुंबईकर बन जाएंगी, क्योंकि ये शहर किसी को अजनबी नहीं रहने देता. सबको गले लगाकर अपना बना लेता है, लेकिन थोड़ी कोशिश तो आपको भी करनी होगी. अपनी झिझक दूर करें और यह सोचना बिल्कुल छोड़ दें कि आप किसी छोटे या दूसरे शहर से आई हैं, क्योंकि हर शहर की अपनी ख़ूबियां व ख़ूबसूरती होती है.

मैं 35 साल की नौकरीपेशा महिला हूं. कुछ दिनों से अजीब-सी परेशानी में हूं. मेरा मैनेजर मुझे ग़लत तरी़के से परेशान करके, नौकरी छीन लेने की और मुझे बदनाम करने की धमकी दे रहा है. समझ में नहीं आ रहा है, क्या करूं? घर में बताऊं, तो सब नौकरी छोड़कर घर पर बैठने की सलाह देंगे.
– बबीता शर्मा, पुणे.

आप अकेले ही इस समस्या से नहीं जूझ रहीं, काफ़ी महिलाओं को इन बदतमीज़ियों से गुज़रना पड़ता है. आपको आवाज़ उठानी होगी और हिम्मत करनी होगी. आजकल दफ़्तरों में स्पेशल कमिटी होती है. आप उन पर भरोसा कर सकती हैं और मदद ले सकती हैं, पर भविष्य में दोबारा कोई आपके साथ ऐसा ना करे, उसके लिए सतर्क रहें. अपने कम्यूनिकेशन और पर्सनैलिटी में बदलाव लाएं. कॉन्फिडेंट बनें और पूरी तत्परता से अपने साथ हो रहे अन्याय व शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं. अपने अन्य सीनियर्स से भी बात करें और यदि सही राह दिखानेवाला न मिले, तो कोई कठोर कदम उठाने से पीछे न हटें. क़ानून का सहारा लें.

मेरी उम्र 32 साल है. मैं पिछले सात सालों से एक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हूं. जब भी शादी की बात करती हूं, वह कोई न कोई बहाना बनाकर मुझे समझा लेते हैं. घरवाले शादी के लिए दबाव डाल रहे हैं, पर मैं किसी और से शादी करने की सोच भी नहीं सकती. क्या करूं?
– नेहा सिंह, प्रयागराज.

आप कब तक इस तरह समय गंवाएंगी? घरवालों की चिंता स्वाभाविक है. आपको अपने प्रेमी से साफ़-साफ़ बात करनी होगी और एक अल्टीमेटम देना होगा. कहीं ऐसा न हो कि वो आपके भरोसे का फ़ायदा उठा रहा हो, इसलिए अपने बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दें. ख़ुद पर विश्‍वास रखें. आपका जीवन और आपका भविष्य बहुत महत्वपूर्ण और क़ीमती है, किसी भी तरह से उससे समझौता करना नादानी होगी. समय रहते सही फैसला लें.

 

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Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

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Pahla Affair

पहला अफेयर: काश, तुम समझे होते (Pahla Affair: Kash Tum Samjhe Hote)

कभी-कभी अचानक कहे शब्द ज़िंदगी के मायने बदल देते हैं. इसका एहसास पहली बार मुझे तब हुआ जब अचानक एक दिन आदित्य को अपने सामने मेरे जवाब के इंतज़ार में खड़े पाया. मेरी हालत देखकर बोला, ङ्गङ्घदया, ऑफ़िस से जाने के पूर्व सारी औपचारिकताएं होते-होते एक-दो दिन तो लग ही जाएंगे, जाने से पहले तुम्हारा जवाब सुनना चाहता हूं.फफ कहने के साथ वह मुड़ा और मेरे मन-मस्तिष्क में झंझावत पैदा कर गया.

वो तो चला गया, लेकिन मेरी आंखों के सामने वह दृश्य दौड़ गया, जब एक दिन ऑफ़िस में अंतर्जातीय विवाह को लेकर हो रही चर्चा के दौरान मैंने भी घोषणा कर दी थी कि यूं तो मेरे घर में अंतर्जातीय विवाह के लिए सख़्त मनाही है, लेकिन मैं घरवालों के विरुद्ध जा सकती हूं, बशर्ते लड़का क्लास वन ऑफ़िसर हो.

मुझे सपने में भी इस बात का गुमान न था कि आदित्य मेरे कहे को इतनी संजीदगी से ले लेगा. यूं तो मुझे इस बात का मन-ही-मन एहसास था कि आदित्य के मन में मेरे लिए एक ख़ास जगह है और सच कहूं तो मैं भी उसके सौम्य, सरल व परिपक्व व्यक्तित्व के चुंबकीय आकर्षण में बंधने लगी थी. लेकिन जैसे ही घरवालों के दृष्टिकोण की याद आती, मैं अपने मन को समझा देती कि हमेशा मनचाही मुराद पूरी नहीं होती. इसीलिए आदित्य की लाख कोशिश के बावजूद मैं उससे एक निश्‍चित दूरी बनाए रखती और बातों के दौरान उसे घरवालों के विरोध से सचेत करती रहती.

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लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता था. जब मुझे पता लगा कि उसने ज़ोर-शोर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है तो एक अनजाने भय से मैं कांप उठी. उसकी मेहनत रंग लाई और पी. सी. एस. की परीक्षा को अंतिम रूप से पास कर, जब उसने हाथ मांगा तो मैं एक अजीब-सी उलझन में फंस गई. बड़ी कशमकश में थी मैं- मेरे सामने भावी जीवन का निर्णय पत्र था, उसमें हां या ना की मुहर लगानी थी.

ऑफ़िस वालों से विदा लेने से पूर्व वो मेरे पास आया, लेकिन मेरी आंखों से छलकते आंसुओं ने उसके प्रश्‍न का जवाब स्वयं दे दिया. मैं बहुत कुछ कहना चाह रही थी, पर ज़ुबां साथ नहीं दे रही थी. मेरी ख़ामोशी वो बर्दाश्त न कर सका. आख़िरकार वह छटपटा कर कह उठा, दया, मुझे कमज़ोर मत बनाओ, तुम तो मेरी शक्ति हो. आज मैं जो कुछ भी हूं, स़िर्फ तुम्हारी वजह से हूं. हमेशा ख़ुश रहना. ईश्‍वर करे, कोई दुख तुम्हारे क़रीब भी न फटके. इतना कह कर वह थके क़दमों से बाहर निकल गया. उसे जाते हुए देखती रही मैं. चाहती थी उससे कहना कि जीवन पर सबसे पहले जीवन देनेवाले का अधिकार होता है, इस फलसफे को कैसे झुठला सकती थी. लेकिन कहते हैं ना- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता.

आज माता-पिता की इच्छा के फलस्वरूप अपने आशियाने में ख़ुश भी हूं, पर सीने में दबी पहले प्यार की चोट आज भी ये एहसास कराती है कि पहले तोलो, फिर बोलो. आज भी लगता है जैसे पहले प्यार की दस्तक अब भी मन- मस्तिष्क में अपनी गूंज दे रही हो.

– दया हीत

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Benefits Of Cooking

कुकिंग थेरेपी: हेल्दी रहने का बेस्ट फॉर्मूला (Cooking Therapy: Benefits Of Cooking)

खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना कई लोगों के शौक में शुमार होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि खाना बनाने का यह शौक आपको हेल्दी भी रखता है, इसीलिए इसे कुकिंग थेरेपी का नाम दिया गया है. साइंटिस्ट्स अब यह दावे के साथ कहते हैं कि कुकिंग दरअसल एक थेरेपी है, जो आपको हेल्दी रखती है और आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाती है.

साइंस के अनुसार कुकिंग दरअसल मेडिटेशन सेशन की तरह है: क्या कभी आपने इस ओर ध्यान दिया है कि स्ट्रेस से भरा दिन और आपकी थकान घर पर आने के बाद कुछ अच्छा पकाने की सोच मात्र से ही कम हो जाती है. बहुत बार ऐसा होता है कि आप कुछ स्वादिष्ट या अपना मनपसंद खाना बनाने की तैयारी करने की सोचते हैं और उसे बनाने के बाद जो संतुष्टि आपको मिलती है, उससे आपके दिनभर की थकान व तनाव दूर होता है. आप भले ही नियमित रूप से खाना न भी बनाते हों, लेकिन यदि आप ऐसा करते हैं, तो पाएंगे कि कुकिंग सेशन एक तरह से आपके लिए मेडिटेशन का काम करता है.

थेरेपिस्ट कुकिंग को मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए प्रयोग में लाते हैं: डिप्रेशन, घबराहट, तनाव आदि के इलाज में अब बहुत-से सायकोलॉजिस्ट व थेरेपिस्ट कुकिंग कोर्सेस को थेरेपी की तरह यूज़ करने लगे हैं, क्योंकि जो व़क्त आप कुकिंग में लगाते हो, उससे आपका ध्यान नकारात्मक स्थितियों व बातों से हट जाता है और आप रिलैक्स महसूस करते हैं.

क्रिएटिव बनाती है आपको कुकिंग: एक्सपर्ट्स ने अपने शोधों में यह भी पाया है कि कुकिंग आपको क्रिएटिव बनाती है, क्योंकि आप अपने अनुसार रेसिपी को बनाने के नए-नए तरी़के सोचते हो, नया स्वाद क्रिएट करने की कोशिश करते हो, जिससे आपकी भी क्रिएटिविटी बढ़ती है. दूसरे, कुकिंग आपको पूरे माहौल में कंट्रोल का अनुभव महसूस कराती है. आपको लगता है कि अब आप अपने अनुसार स्वाद में बदलाव ला सकते हो और जब आपको तारी़फें मिलती हैं, तो आप पॉज़िटिव महसूस करते हो.

कुकिंग और मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा कनेक्शन है न्यूट्रिशन: जब आप कुकिंग करते हो, तो आप अपने पोषण, डायट व हेल्थ के प्रति अपने आप ही सचेत हो जाते हो. आपके हाथ में होता है कि कितना ऑयल डालना है, कितना नमक, कितने मसाले और आपका ब्रेन यही सोचने लगता है कि किस तरह से अपनी डिश को आप और हेल्दी बना सकते हो. इससे आपको संतुष्टि महसूस होती है कि आपका खाना हेल्दी है, क्योंकि आप अपने खाने की क्वालिटी को कंट्रोल करते हो.

कुकिंग जो ख़ुशी देती है, वो घर के अन्य काम नहीं देते: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही आप कुकिंग का शौक न रखते हों, लेकिन आप जब कुकिंग करते हैं, तो यह फ़र्क़ ज़रूर महसूस करते हैं कि खाना बनाने से जो ख़ुशी व संतुष्टि का अनुभव होता है, वह बिस्तर ठीक करने, कपड़े धोने या अन्य कामों से नहीं होता. इसके पीछे की वजह यह है कि कुकिंग अपने आप में रिवॉर्डिंग एक्सपीरियंस होता है, क्योंकि कहीं-न-कहीं सबकॉन्शियस माइंड में भी यह बात रहती है कि खाना बनाने के बाद आपको इसका स्वाद भी मिलेगा. खाना बनाने के दौरान जो ख़ुशबू आती है, उसे बनता देखने का जो अनुभव होता है और यहां तक कि फल व सब्ज़ियों को काटने-छीलने के दौरान उनके रंग व आकार हमें आकर्षित करते हैं, वो मस्तिष्क में पॉज़िटिव वाइब्रेशन्स पैदा करते हैं.

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पार्टनर के साथ कुकिंग आपके रिश्ते को भी बेहतर बनाती है: जब आप साथ में खाना बनाते हो या फिर घर के कोई भी सदस्य मिल-जुलकर खाना बनाने में हाथ बंटाते हैं, तो अपने आप उनके मतभेद कम होने लगते हैं. वो नकारात्मक बातों को एक तरफ़ रखकर खाना बेहतर बनाने व उसे परोसने की तरफ़ ध्यान देने लगते हैं. ऐसे में यदि आप अपने पार्टनर के साथ किचन में काम करेंगे, तो आपके रिश्ते भी बेहतर बनेंगे. आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता पाओगे, जिससे कम्यूनिकेशन बेहतर होगा. यदि खाने में आप दोनों की पसंद-नापसंद एक नहीं है, तब भी आपके विवाद को कम करने में कुकिंग एक थेरेपी की तरह काम करेगी, क्योंकि वहां आप एक-दूसरे के बारे में सोचोगे कि चलो आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाते हैं या फिर आज तुम्हारी फेवरेट डिश तैयार करते हैं, पर कल तुम मेरी फेवरेट डिश बनाने में मेरी मदद करोगे… आदि.

कुकिंग से बढ़ते व बेहतर होते हैं आपके कनेक्शन्स: आपके जन्मदिन पर आपके पड़ोस में रहनेवाली दोस्त आपके लिए गिफ्ट लाती है और दूसरी ओर आपकी सास आपके लिए अपने हाथों से आपका मनपसंद खाना बनाती है, तो ज़ाहिर है आपके मन को सास का खाना बनाना ज़्यादा छुएगा, क्योंकि उन्होंने आपके बारे में सोचा और ख़ुद मेहनत करके आपके लिए खाना तैयार किया. इसी तरह आप देखेंगी कि अपनी बेस्ट फ्रेंड को यदि आप अपने हाथों से कुछ बनाकर देती हैं, तो उसकी ख़ुशी दोगुनी हो जाती है. इस तरह से कुकिंग आपके कनेक्शन्स को बेहतर बनाती है. इसलिए कुक करें और कनेक्टेड रहें.

मस्तिष्क को शांत करती है कुकिंग: साइंटिस्ट्स कहते हैं कि कुकिंग के समय आपको कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होगा. उस व़क्त आपकी चिंताएं दूर हो जाती हैं और आपका मस्तिष्क शांति का अनुभव करता है, क्योंकि आपका पूरा ध्यान अपने टास्क पर लग जाता है, जिससे कई तरह की चिंताएं व दबाव की तरफ़ ध्यान नहीं जाता और आप बेहतर महसूस करते हैं. यही नहीं कुकिंग की प्रैक्टिस आपके शरीर को भी रिलैक्स करती है. कुकिंग के समय आप फ्लो में आ जाते हो, जिससे व्यर्थ के डर, चिंताओं व तनाव से उपजा दर्द, शरीर की ऐंठन व थकान भी दूर हो जाती है.

दूसरों के लिए कुछ करने का अनुभव बेहतर महसूस कराता है: ज़ाहिर-सी बात है कि आप खाना अपने लिए नहीं बनाते, बल्कि पूरे परिवार के लिए बनाते हैं. ऐसे में उनकी पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर उनके लिए कुछ अच्छा करने का अनुभव आपको कुकिंग से मिलता है. कुकिंग के ज़रिए आप अपनी भावनाएं व केयर भी सामनेवाले को ज़ाहिर कर सकते हैं. यह एक तरह से मूक प्रदर्शन है प्यार व देखभाल का.

भावनाओं का प्रभाव भी होता है कुकिंग में: आप जिस भाव से खाना बनाते हैं, उसका असर आपके खाने में नज़र आता है. लेकिन खाना बनाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके खाने को तारीफ़ ज़रूर मिले, इसलिए जब आप बच्चों के लिए कुछ ख़ास बनाते हो, तो उनके स्वाद व पोषण का ध्यान रखते हो, लेकिन जब आप बुज़ुर्गों के लिए कुछ बनाते हो, तो स्वाद के अलावा उनकी उम्र व सेहत का भी ख़्याल रखते हो. उन्हें क्या नहीं खाना चाहिए, इस तरफ़ भी आपका पूरा ध्यान रहता है.

कुकिंग से आप पैसे भी बचाते हो: होटल या बाहर से कुछ अनहेल्दी मंगाकर खाना आपको वो संतुष्टि नहीं देगा, जो अपने हाथों से कुछ हेल्दी बनाकर खाना देता है और इसके साथ ही आप अपने पैसे भी बचाते हो. हेल्थ और वेल्थ साथ-साथ सेव होने का एहसास आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाता है और आपकी सेहत को भी.

– गीता शर्मा

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आज जिस तेज़ी से हमारे देश में तलाक़ के मामले बढ़ रहे हैं, भविष्य में स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है. योग के ज़रिए इस गंभीर समस्या को किस तरह सुलझाया जा सकता है, इसी विषय में हमें जानकारी दी द योगा इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर डॉ. हंसाजी जयदेव योगेंद्र ने.

Strengthen Relationship

क्यों तेज़ी से टूट रहे हैं रिश्ते?

आज वर्किंग कपल्स को एकल परिवारों में रहते हुए दोहरी ज़िम्मेदारी निभानी पड़ रही है, काम का बढ़ता बोझ, स्ट्रेस, घर में बड़े-बुज़ुर्गों की अनुपस्थिति और डबल इंकम नो किड्स के बढ़ते मामले रिश्तों में तनाव बढ़ा रहे हैं.

योग से रिश्तों का कनेक्शन

डॉ. हंसाजी योगेंद्र कहती हैं कि आज भी बहुत-से लोगों में यह भ्रांति है कि योग का अर्थ केवल योगासन है, जबकि यह अष्टांग योग है, जिसमें आसन स़िर्फ एक अंग है. योग जीवन जीने का संपूर्ण विज्ञान है. योग के ज़रिए आप एक सुुलझे हुए, शांतचित्त और सकारात्मक दृष्टिकोणवाले व्यक्ति बनते हैं, जो स्वयं के साथ-साथ अपने रिश्तों की अहमियत को भी समझता है.

समझें रिश्तों का योग

शांत मन से समझें ख़ुद को: जब आप अपने होनेवाले जीवनसाथी से मिलते हैं, तब उसे जानने-समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन अगर आप ख़ुद के बारे में ही नहीं जानते, तो उसे भला कैसे समझ पाएंगे. योग आपको ख़ुद से रू-ब-रू कराता है. दरअसल, जब आप योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन करते हैं, तब आपको आंतरिक शांति का एहसास होता है. जब आपका मन शांत होता है, तब विचारों की पारदर्शिता बढ़ जाती है और आप ख़ुद के साथ-साथ जीवनसाथी को भी बेहतर समझ पाते हैं, इसलिए  योग को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं.

सांसों की तरह स्वीकारें एक-दूसरे को

शादी करते ही हम क्यों भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति अलग होता है. उसके विचार, व्यवहार, आदतें सब कुछ भिन्न होती हैं. ऐसे में अपने ईगो की संतुष्टि के लिए वो एक-दूसरे को बदलने की कोशिश करते हैं. प्राणायाम हमें सिखाता है कि जिस तरह हर सांस अलग व महत्वपूर्ण होती है, उसी तरह हर व्यक्ति भी यूनीक होता है. जिस तरह प्राणायाम करते समय आप सांसों की लय पर ध्यान देते हैं, उसी तरह अपने पार्टनर की ख़ुशियों और इच्छाओं पर ध्यान दें.

पॉज़िटिव अप्रोच की सक्सेस स्टोरी

नरेंद्र अपनी पत्नी विनीता की लेट लतीफ़ी से परेशान है. नरेंद्र उसे समय पर तैयार रहने की हिदायत देता, तो विनीता उसे ज़्यादा तवज्जो न देती. पत्नी की आदत से परेशान नरेंद्र ने इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश की, तो पता चला कि विनीता आर्टिस्ट फैमिली से है, जहां सभी अपने मूड के मुताबिक़ काम करते हैं. विनीता ने बचपन से जो देखा, वही उसकी आदत में शुमार हो गया. विनीता को बदलने की बजाय नरेंद्र ने अपना अप्रोच बदला. कभी-कभी वो ऑफिस से सीधा फंक्शन में पहुंच जाता और विनीता को वहीं मिलने के लिए कहता. विनीता जब देरी से पहुंचती, तो उस पर झुंझलाने की बजाय, वो सभी से कहता कि मेरी पत्नी का देरी से आने का मतलब है कि एक ख़ूबसूरत पेंटिंग पूरी होने के कगार पर है.

तनाव को रिश्ते पर हावी न होने दें

शादीशुदा ज़िंदगी में ज़्यादातर समस्याएं छोटी-छोटी बातों पर दुखी होने, आत्मविश्‍वास की कमी, एनर्जी लेवल की कमी, फाइनेंशियल व सेक्सुअल प्रॉब्लम्स के कारण होेती हैं. रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि योग स्ट्रेस लेवल को कम करता है. दरअसल, यह शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन को कम करता है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करते हैं और आपका एनर्जी लेवल भी बूस्ट होता है. यह आपके नर्वस सिस्टम को भी स्थिर बनाता है. नियमित रूप से आधा घंटा योगासन और मेडिटेशन करें.

विश्‍वास है विवाह का आधार

अक्सर छोटी-छोटी बातें शक का कारण बनती हैं और रिश्ते ग़लतफ़हमी का शिकार हो जाते हैं. योग में उत्तानासन या पादहस्तासान, ऐसा आसन है, जिसमें आप विश्‍वास के साथ समर्पण करने की कला सीखते हैं. जब हम रिश्तों में विश्‍वास के साथ पार्टनर के सामने समर्पण करते हैं, तो जजमेंटल नहीं होते और रिश्ते में प्यार और विश्‍वास गहरा होता है. समर्पण का अर्थ झुकना नहीं, बल्कि पार्टनर को अपने नज़रिए को समझाने का पूरा मौक़ा देना है. एक-दूसरे के प्रति समर्पण बहुत-सी ग़लतफ़हमियों से आपके रिश्ते को बचाता है.

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Relationship Goals
हैप्पी हार्मोंस से रिश्ते को बनाएं हैप्पी

आज ज़्यादातर लोग अपने वैवाहिक रिश्ते में दुखी व असंतुष्ट हैं, क्योंकि वो ख़ुद से ही ख़ुश और संतुष्ट नहीं हैं. बेसिक नियम है कि जब हम ख़ुश रहते हैं, ख़ुद से प्यार करते हैं, तभी दूसरों को ख़ुशी और प्यार दे सकते हैं. आपको जानकर ख़ुशी होगी कि रोज़ाना योग करने से हमारे मस्तिष्क के केमिकल कंपोज़िशन्स बेहतर होते हैं. शरीर में सेराटोनिन और डोपामाइन कहे जानेवाले ‘हैप्पी हार्मोंस’ की बढ़ोत्तरी होती है, जिससे हम ख़ुश रहते हैं. योग को अपनाकर अपने रिश्ते को ख़ुशहाल बनाएं.

‘हम्म’ से करें बेहतर कम्यूनिकेशन

रिश्ता पति-पत्नी का हो, दोस्ती का या भाई-बहन का, ग़लत कम्यूनिकेशन रिश्ते को बिगाड़ सकता है. योग कहता है कि शब्द हमारे विचारों से आते हैं और विचार मस्तिष्क से, इसलिए अगर मस्तिष्क शांत रहेगा, तो विचार अपने आप अच्छे आएंगे. बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए कपल्स नियमित रूप से ब्रीदिंग टेक्नीक ‘हम्म’ का उपयोग करें. शांत स्थान पर रूमाल से नाक और मुंह को ढंककर ‘हम्म’ की आवाज़ निकालें.

संतुलानासन से बनाएं बैलेंस: गृहस्थी की गाड़ी को सफलतापूर्वक चलाने के लिए

पति-पत्नी नामक दोनों पहियों का तालमेल और संतुलन बेहद ज़रूरी है. अगर दो में से एक भी डगमगाया, तो गाड़ी भटक जाएगी. कभी भावनात्मक, तो कभी आर्थिक तनाव इस संतुलन को बिगाड़ सकता है. योग का एक महत्वपूर्ण आसन संतुलानासन हमें बैलेंस करना सिखाता है. यह मस्तिष्क को एकाग्र करके धैर्य सिखाता है, जिससे विपरीत परिस्थिति में भी हम तुरंत घबराते नहीं.

वर्तमान में जीने की कला अपनाएं

रोज़ाना योग की प्रैक्टिस हमें वर्तमान में जीने की प्रेरणा देती है. अपने सांसों की लय को समझते हुए हम वर्तमान में अपनी सेहत के प्रति और भी जागरूक होते हैं. वर्तमान में जीने की यह टेक्नीक रिश्तों को और भी ख़ुशगवार बना देती है. अतीत में हुई बहस और ईगो की लड़ाई या फिर कड़वी यादों को भूलकर जब कपल्स वर्तमान पर फोकस करते हैं, तब उनके रिश्ते में स़िर्फ प्यार और संतुष्टि का भाव होता है.

भावनाओं को बनाएं प्रोडक्टिव

बचपन से दबी इच्छाएं और बुरी आदतें अक्सर वैवाहिक रिश्ते में परेशानियां पैदा करती हैं. यह नकारात्मक रूप से आपकी शादीशुदा ज़िंदगी को प्रभावित करता है. इसके लिए मेडिटेशन का सहारा लें. मेडिटेशन आपके कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड के बीच बने दरवाज़े को खोलता है. सबकॉन्शियस माइंड के ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंचकर हम वहां मौजूद अनचाही आदतों और दबी हुई भावनाओं को प्रोडक्टिव तरी़के से इस्तेमाल करना सीखते हैं.

ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन की सक्सेस स्टोरी

शादी के बाद एक दिन महेश ने अपनी पत्नी रोमा को बताया कि उसे कभी-कभी बहुत ग़ुस्सा आता है, तो रोमा ने कहा कि यह तो नॉर्मल है, लेकिन उस समय आप दूसरों से क्या उम्मीद करते हैं? तो महेश ने कहा, मुझे लगता है कि सब चुप रहें. कोई कुछ न बोले. तुम एक वादा करो कि जब भी मुझे ग़ुस्सा आए, तो तुम चुप रहना, उसके बदले तुम जो गिफ्ट मांगोगी मिल जाएगा. रोमा राज़ी हो गई, पर उसने भी एक शर्त रखी कि ग़ुस्सा तो मुझे भी कभी-कभार आता है और मैं चाहती हूं कि जब ऐसा हो, तब आप वहां से हट जाएं. आप वॉक पर चले जाना. दोनों में जो तय हुआ था, वैसा ही हुआ. शादी की 50वीं सालगिरह पर जब किसी ने उनकी सफल शादी और ख़ुशहाली का राज़ पूछा, तो महेश ने कहा कि मैं बहुत वॉक करता हूं, इसलिए हेल्दी और ख़ुश हूं, वहीं रोमा ने कहा कि मुझे ज़िंदगी में जो चाहिए सब मिल जाता है, तो भला ग़म किस बात का.

पार्टनर के प्रति शुक्रगुज़ार हों

ज़्यादातर कपल्स की यही शिकायत होती है कि पार्टनर उनको ग्रांटेड लेते हैं या अहमियत नहीं देते. जब हम योगासन करते हैं, तो हम में कृतज्ञता की भावना विकसित होती है, जिससे हम ख़ुश व सेहतमंद रहते हैं. कृतज्ञता की इसी भावना को जब हम वैवाहिक जीवन में उतारते हैं, तब पार्टनर से मिली हर लम्हे की ख़ुशी के लिए हम उनके शुक्रगुज़ार होते हैं. कृतज्ञता रिश्तों की गुणवत्ता को बढ़ाती है.

हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए योग

बेहतरीन सेक्स लाइफ के लिए आपका हेल्दी और हैप्पी रहना ज़रूरी है. जब आप रोज़ाना योग करते हैं, तो आपका शरीर फ्लेक्सिबल होता है, बॉडी टोन होती है, मसल्स स्ट्रॉन्ग होती हैं और न स़िर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी आप फिट रहते हैं. ऐसे में आपकी सेक्स लाइफ रोमांटिक और दिलचस्प बनी रहती है.

– अनीता सिंह

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