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पति की ग़लत आदतों को यूं छुड़ाएं (Make Your Husband Quit His Bad Habits)

पति की ग़लत आदतों को यूं छुड़ाएं (Make Your Husband Quit His Bad Habits)
आप उन्हें बेपनाह प्यार करती हैं, पर उनकी ग़लत आदतों से भी परेशान रहती हैं. तो क्यों न कुछ ऐसा करें कि वे सुधर भी जाएं और आपसी प्यार भी बना रहे.

ख़ुशहाल पारिवारिक जीवन में पतिपत्नी के आपसी प्यार व सहयोग का काफ़ी महत्व होता है. ऐसे में पत्नी जहां हर ज़िम्मेदारियों को निभाती है, तो वह अपने पति से भी यह उम्मीद रखती है कि वे भी इसमें उसका भरपूर साथ दें और पतिदेव करते भी हैं. लेकिन इसके बावजूद पतियों की कुछ ऐसी आदतें होती हैं, जिनसे पत्नियां परेशान रहती हैं. वे पति की इन ग़लत आदतों को छुड़ाने की भरसक कोशिश भी करती हैं. इस विषय में वीडिटर्ना डॉट इन के फाउंडर सनीष सुकुमारन ने हमें कई उपयोगी जानकारियां दीं.

अल्कोहल व स्मोकिंग की आदत

यह समस्या तक़रीबन अधिकतर घरों में देखने को मिलती है. पत्नी चाहे लाख सेहत की दुहाई दे, पर पतिदेव के कान पर जूं तक नहीं रेंगती. पुरुषों की यह प्रवृत्ति रही है कि वे शराब व सिगरेट को अपनी शान समझते हैं. लेकिन जब इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है, तब उनकी ज़िंदगी ही नहीं, पारिवारिक स्थिति भी डांवाडोल होने लगती है.

स्मार्ट ट्रिक्स

पति को शराब व सिगरेट से होनेवाले दुष्प्रभाव से अवगत कराएं.

ऐसे कई परिवारों के उदाहरण दे सकती हैं, जिनका घर इसके कारण बर्बाद हो गया.

अपने व बच्चों के प्रति प्यार का वास्ता देकर भी इसे छुड़ाने का प्रयास कर सकती हैं.

पति को प्यार से समझाएं कि इससे उनकी सेहत ही नहीं, बल्कि परिवार की भी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है.

शेविंग न करना

अधिकतर पुरुषों की आदत होती है कि वे शेविंग कम ही करते हैं या नियमित रूप से नहीं करते. उनकी इस आदत से पत्नियां अक्सर चिढ़ती हैं. कई तो ऐसे भी होते हैं कि शादीफंक्शन आदि में भी शेविंग करके जाना ज़रूरी नहीं समझते.

स्मार्ट ट्रिक्स

पति को हाइजीन के महत्व के बारे में समझाएं.

पार्टनर को कहें कि रेग्युलर शेविंग करने से उनकी सेहत ही नहीं, बल्कि पर्सनैलिटी भी निखरती है.

आज के ज़माने में प्रेज़ेंटेबल होना कितना ज़रूरी है. अप टु डेट रहेंगे, तो ऑफिस में भी इम्प्रेशन बना रहेगा.

इस इमोशनल कार्ड को भी इस्तेमाल करना न भूलें कि उनका क्लीन शेव रहना आपको बेहद पसंद है.

पर्सनल बातें शेयर न करना

यह हर कोई जानता है कि अधिकतर पतियों की यह आदत होती है कि वे अपनी पत्नी को हर बात नहीं बताते. ख़ासतौर पर दोस्तों से जुड़ी बातें या किसी के साथ कोई लेनदेन हो या फिर किसी की मदद ही क्यों न की हो. ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि घर में कोई विवाद या कलह न हो, लेकिन वे नहीं जानते कि इसी वजह से भविष्य में उन्हें कई मुसीबतों का सामना भी करना पड़ सकता है.

स्मार्ट ट्रिक्स

आप पति को समझा सकती हैं कि उनका ऐसा करना ठीक नहीं है. पतिपत्नी के रिश्ते में पारदर्शिता का होना बेहद

ज़रूरी है.

कल को कोई धोखा दे दे या फिर कोई उनसे ही किसी बात को लेकर पूछताछ करे, तो उनके लिए उस स्थिति को हैंडल करना मुश्किल हो सकता है.

कई बार बहुतसी बातें अपने तक ही रखने से कई अनजानी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

इससे आपकी सेहत भी प्रभावित हो सकती है और आप खुलकर ज़िंदगी को नहीं जी पाते हैं.

रात को घर देरी से आना

माना आज की फास्ट व बिज़ी लाइफ में वर्कलोड बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन पतियों द्वारा अक्सर ओवरटाइम करना, घंटों ऑफिस में समय बिताना, वक़्त पर घर न आना पत्नियों की परेशानी का सबब बनने के साथसाथ उन्हें शंकित भी करने लगता है.

स्मार्ट ट्रिक्स

* पति को समय पर आने के लिए आग्रह करें या फिर कहें कि उनके आने के बाद ही परिवार के सभी डिनर एक

साथ करेंगे.

* आपको और परिवार को समय देने के महत्व को समझाएं.

* काम का महत्व अपनी जगह है और परिवार का अपनी जगहइस पहलू को विस्तार से समझाएं.

* टाइम मैनजमेंट करना सिखाएं. कई बार पति महोदय की लापरवाही और ढुलमुल रवैया भी देरी से आने का कारण

होता है.

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अपनों को छोड़ दूसरों को अधिक महत्व देना

पतियों की यह ख़ास आदत होती है कि घर की मुर्गी दाल बराबर यानी अपने घरपरिवार के लोगों के गुणों को कम आंकेंगे और दूसरों के परिवार, ख़ासकर अपने दोस्तों व उनके परिवार की जी भरकर तारीफ़ करेंगे. उनके गुणों की बखान करेंगे.

स्मार्ट ट्रिक्स

* मुसीबत आने पर अपने ही काम आते हैं, इसे पति महोदय को समझाएं.

* बारबार दूसरों के सामने अपने परिवार को कमतर आंकना ख़ुद उनके व्यक्तित्व पर भी प्रश्‍नचिह्न लगाता है.

* पति को आगाह करें कि इससे आप व बच्चे हतोत्साहित होते हैं. कभीकभी आपमें हीनभावना भी पनपने लगती है.

* पार्टनर को बताएं कि बच्चे पिता को महत्व कम देने लगे हैं. उनके दिलोदिमाग़ में यह बात घर कर गई है कि पापा को तो बस अपने दोस्तों के ही बीवीबच्चे अच्छे लगते हैं. अतः पति को इन सभी बातों से अवगत कराएं और उनका व्यवहार बैलेंस रखने के लिए कहें.

इन्हें भी आज़माएं

* पतिपत्नी एकदूसरे के साथ अधिक समय बिताएं.

* पति को क्रोध में व चिढ़कर नहीं, बल्कि संयम व प्रेम से समझाएं.

* हालात व स्थिति के अनुसार पति को उनकी ज़िम्मेदारियों का एहसास करवाएं.

* घरपरिवार व अपनों के महत्व को

समझाएं. ध्यान रहे पहले परिवार, बाक़ी सब बाद में.

* बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं, पति की ग़लत आदतों का बच्चों पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है. इस पहलू पर पति महोदय का ध्यान आकर्षित करें.

* मास्टर स्ट्रोक तो यही होगा कि पत्नी पति को अपनी आदत बना लें, तब उन्हें आपके सिवा किसी और में दिलचस्पी कम

ही होगी.

परमिंदर निज्जर

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पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी (Pahla Affair: Aainewali Almaari)

Pahla Affair, Aainewali Almaari

Pahla Affair, Aainewali Almaari

पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी (Pahla Affair: Aainewali Almaari)

पहले प्यार का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर

आज फिर दोपहर में फुर्सत होते ही ड्रेसिंग रूम में जाकर अलमारी के सामने खड़ी हो गई. कितने घर बदल गए, घर का पूरा फर्नीचर बदल गया, नहीं बदला कुछ, तो यह अलमारी और इससे मेरा प्यार… अपने पहले प्यार की तरंगित मधुर स्मृतियों को क्या कोई अपने आप से दूर कर पाया है? इसके धुंधला चुके आईने में अब भी तुम्हारा प्रतिबिंब झलकता है. इसके भीतर आज भी दो कुंआरे दिलों के प्रेम की प्रथम अनछुई अनुभूति धड़कती है.

सोलह-सत्रह बरस की, ख़्वाबों में खोई रहनेवाली उम्र थी वो. जब एक दिन ढलती सांझ के रंगों में अपने मन की तूलिका से कुछ अनगढ़ से चित्र गढ़ती मैं छत पर खड़ी थी कि तभी पड़ोसवाली छत पर किसी के आने की आहट सुनकर उत्सुकता से उधर देखा. बगलवाला मकान कई दिनों से खाली था, दो-तीन दिन हुए कोई आया था, लेकिन पहचान नहीं हुई थी. देखा, 20-22 बरस का एक लड़का खड़ा था.

पता नहीं उम्र का तकाज़ा था या प्रकृति ने ही कोई संकेत किया था कि आंखें बरबस ही उस ख़ूबसूरत चेहरे पर अटक गईं. ढलती शाम की लालिमा उसके सुंदर, गोरे चेहरे पर छाई थी और तभी उसका ध्यान मेरी तरफ़ गया. मैंने फ़ौरन अपनी आंखें झुका लीं. दिल ज़ोर से धड़क उठा. देर तक मैं छत पर ही खड़ी रही, मन हवा में किसी के साथ को महसूस कर रोमांचित हो रहा था.

स्कूल आते-जाते अक्सर वो दिखाई देता. मेरी आंखें झुक जातीं, हाथ-पैर कांप जाते, चाल लड़खड़ा जाती और वो हौले से मुस्कुरा देता. मेरी शामें अब छत पर ही गुज़रने लगीं और वो तो मुझसे पहले ही छत पर मिलता, दरवाज़े पर नज़रें गड़ाए हुए. दिल से दिल तक प्रेम शायद कुछ तार जोड़ने लग गया था. जल्द ही दोनों घरों के बीच घनिष्ठता हो गई और हमारे बीच भी. हां, दिल की बातें अब भी बस आंखों तक ही सीमित रहती थीं. साल कब बीत गया पता ही नहीं चला.

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एक दिन घर के सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां गए हुए थे कि तभी वो आ गया. यूं एकांत में पहली बार उसके साथ… तभी उसने एक किताब मांगी और मैं कमरे में चली आई. वो भी आकर मेरे पीछे ही खड़ा हो गया. हम दोनों के दिल इतनी ज़ोरों से धड़क रहे थे कि हमें एक-दूसरे की धड़कनें सुनाई दे रही थीं. तभी उसने मेरा दुपट्टा उठाया और मेरे सिर पर ओढ़ा दिया. मैंने सामने आईने में देखा, वो मुस्कुरा रहा था, उसकी आंखों में जैसे सारी क़ायनात का प्यार उमड़ आया था. कितना पवित्र, पावन प्रणय निवेदन था. बिना बोले भी सब कुछ तो कह दिया था. जैसे संपूर्ण अधिकारों के साथ मुझे अपने जीवन में शामिल कर लिया था. मौन घोषणा कर दी थी ईश्‍वर के सामने कि मैं स़िर्फ उसकी हूं. मैं देर तक आईने में हम दोनों की छवि निहारती प्रार्थना करती रही कि यह बंधन सात जन्मों तक अटूट रहे. आईना हम दोनों के प्रणय और युगल छवि का मौन साक्षी बन गया.

किंतु 35 बरस पहले की रूढ़ियों ने हमारे प्यार को विवाह में परिणत नहीं होने दिया और टूटा मन लेकर वह शहर छोड़कर ऐसा गया कि फिर कभी नहीं मिला.

जब विवाह हुआ, तो पिताजी से बस यह अलमारी ही मांग ली थी. आज भी पहले प्यार की वह मधुर छवि इस आईने में ज्यों की त्यों मुस्कुराती हुई दिखाई देती है.

– डॉ. विनीता राहुरीकर

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इंटरनेट ने छीनी ज़िंदगी की फ़ुर्सत … (Internet Has Taken Over Our Lives)

disadvantages of internet
न जाने कितने ही पल यूं ही तारों को तकते-तकते साथ गुज़ारे थे हमने… न जाने कितनी ही शामें यूं ही बेफिज़ूल की बातें करते-करते बिताई थीं हमने… न जाने कितनी ऐसी सुबहें थीं, जो अलसाते हुए एक-दूजे की बांहों में संवारी थी हमने… पर अब न वो रातें हैं, न वो सुबह, न वो तारे हैं और न वो बातें… क्योंकि अब वो पहले सी फ़ुर्सत कहां, अब वो पहले-सी मुहब्बत कहां…!

disadvantages of internet

जी हां, हम सबका यही हाल है आजकल, न व़क्त है, न ही फ़ुर्सतक्योंकि ज़िंदगी ने जो रफ़्तार पकड़ ली है, उसे धीमा करना अब मुमकिन नहीं. इस रफ़्तार के बीच जो कभीकभार कुछ पल मिलते थे, वो भी छिन चुके हैं, क्योंकि हमारे हाथों में, हमारे कमरे में और हमारे खाने के टेबल पर भी एक चीज़ हमारे साथ रहती है हमेशा, जिसे इंटरनेट कहते हैं. ज़ाहिर है, इंटरनेट किसी वरदान से कम नहीं. आजकल तो हमारे सारे काम इसी के भरोसे चलते हैं, जहां यह रुका, वहां लगता है मानो सांसें ही रुक गईं. कभी ज़रूरी मेल भेजना होता है, तो कभी किसी सोशल साइट पर कोई स्टेटस या पिक्चर अपडेट करनी होती हैऐसे में इंटरनेट ही तो ज़रिया है, जो हमें मंज़िल तक पहुंचाता है. लेकिन आज यही इंटरनेट हमारे निजी पलों को हमसे छीन रहा है. हमारे फुर्सत के क्षणों को हमसे दूर कर रहा है. हमारे रिश्तों को प्रभावित कर रहा है. किस तरह छिन रहे हैं फ़ुर्सत के पल?

किस तरह छिन रहे हैं फ़ुर्सत के पल?

चाहे ऑफिस हो या स्कूलकॉलेज, पहले अपनी शिफ्ट ख़त्म होने के बाद का जो भी समय हुआ करता था, वो अपनों के बीच, अपनों के साथ बीतता था.

आज का दिन कैसा रहा, किसने क्या कहा, किससे क्या बहस हुईजैसी तमाम बातें हम घर पर शेयर करते थे, जिससे हमारा स्ट्रेस रिलीज़ हो जाता था.

 लेकिन अब समय मिलते ही अपनों से बात करना या उनके साथ समय बिताना भी हमें वेस्ट ऑफ टाइम लगता है. हम जल्द से जल्द अपना मोबाइल या लैपटॉप लपक लेते हैं कि देखें डिजिटल वर्ल्ड में क्या चल रहा है.

कहीं कोई हमसे ज़्यादा पॉप्युलर तो नहीं हो गया है, कहीं किसी की पिक्चर को हमारी पिक्चर से ज़्यादा कमेंट्स या लाइक्स तो नहीं मिल गए हैं…?

और अगर ऐसा हो जाता है, तो हम प्रतियोगिता पर उतर आते हैं. हम कोशिशों में जुट जाते हैं फिर कोई ऐसा धमाका करने की, जिससे हमें इस डिजिटल वर्ल्ड में लोग और फॉलो करें.

भले ही हमारे निजी रिश्ते कितने ही दूर क्यों न हो रहे हों, उन्हें ठीक करने पर उतना ध्यान नहीं देते हम, जितना डिजिटल वर्ल्ड के रिश्तों को संजोने पर देते हैं.

 

आउटडेटेड हो गया है ऑफलाइन मोड

आजकल हम ऑनलाइन मोड पर ही ज़्यादा जीते हैं, ऑफलाइन मोड जैसे आउटडेटेडसा हो गया है.

यह सही है कि इंटरनेट की बदौलत ही हम सोशल साइट्स से जुड़ पाए और उनके ज़रिए अपने वर्षों पुराने दोस्तों व रिश्तेदारों से फिर से कनेक्ट हो पाए, लेकिन कहीं न कहीं यह भी सच है कि इन सबके बीच हमारे निजी रिश्तों और फुर्सत के पलों ने सबका ख़ामियाज़ा भुगता है.

शायद ही आपको याद आता हो कि आख़िरी बार आपने अपनी मॉम के साथ बैठकर चाय पीते हुए स़िर्फ इधरउधर की बातें कब की थीं? या अपने छोटे भाईबहन के साथ यूं ही टहलते हुए मार्केट से सब्ज़ियां लाने आप कब गए होंगे?

बिना मोबाइल के आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ कब डायनिंग टेबल पर बैठे थे?

अपनी पत्नी के साथ बेडरूम में बिना लैपटॉप के, बिना ईमेल चेक करते हुए कब यूं ही शरारतभरी बातें की थीं?

याद नहीं आ रहा नआएगा भी कैसे? ये तमाम ़फुर्सत के पल अब आपने सूकून से जीने जो छोड़ दिए हैं.

अपने बच्चे के लिए घोड़ा बनकर उसे हंसाने का जो मज़ा है, वो शायद अब एक जनरेशन पहले के पैरेंट्स ही जान पाएंगे, क्योंकि आजकल स़िर्फ पिता ही नहीं, मम्मी भी इंटरनेट के बोझ तले दबी हैं.

वर्किंग वुमन के लिए भी अपने घर पर टाइम देना और फुर्सत के साथ परिवार के साथ समय बिताना कम ही संभव हो गया है.

लेकिन फिर भी कहीं न कहीं वो मैनेज कर रही हैं, पर जहां तक पुरुषों की बात है, युवाओं का सवाल है, तो वो पूरी तरह इंटरनेट की गिरफ़्त में हैं और वहां से बाहर निकलना भी नहीं चाहते.

यही नहीं, आजकल जिन लोगों के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता या फिर जो लोग सोशल साइट्स पर नहीं होते, उन पर लोग हैरान होते हैं और हंसते हैं, क्योंकि उन्हें आउटडेटेड व बोरिंग समझा जाता है.

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स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है

रिसर्च बताते हैं कि सोशल साइट्स पर बहुत ज़्यादा समय बिताना एक तरह का एडिक्शन है. यह एडिक्शन ब्रेन के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरेक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है.

यही वजह है कि इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल करनेवालों में स्ट्रेस, निराशा, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन पनपने लगता है. उनकी नींद भी डिस्टर्ब रहती है. वो अधिक थकेथके रहते हैं. ऐसे में ज़िंदगी का सुकून कहीं खोसा जाता है.

इन सबके बीच आजकल सेल्फी भी एक क्रेज़ बन गया है, जिसके चलते सबसे ज़्यादा मौतें भारत में ही होने लगी हैं.

लोग यदि परिवार के साथ कहीं घूमने भी जाते हैं, तो उस जगह का मज़ा लेने की बजाय पिक्चर्स क्लिक करने के लिए बैकड्रॉप्स ढूंढ़ने में ज़्यादा समय बिताते हैं. एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम गुज़ारने की जगह सेल्फी क्लिक करने पर ही सबका ध्यान रहता है, जिससे ये फुर्सत के पल भी यूं ही बोझिल होकर गुज़र जाते हैं और हमें लगता है कि इतने घूमने के बाद भी रिलैक्स्ड फील नहीं कर रहे.

मूवी देखने या डिनर पर जाते हैं, तो सोशल साइट्स के चेकइन्स पर ही ध्यान ज़्यादा रहता है. इसके चलते वो ज़िंदगी की ़फुर्सत से दूर होते जा रहे हैं.

सार्वजनिक जगहों पर भी लोग एकदूसरे को देखकर अब मुस्कुराते नहीं, क्योंकि सबकी नज़रें अपने मोबाइल फोन पर ही टिकी रहती हैं. रास्ते में चलते हुए या मॉल मेंजहां तक भी नज़र दौड़ाएंगे, लोगों की झुकी गर्दन ही पाएंगे. इसी के चलते कई एक्सीडेंट्स भी होते हैं.

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इंटरनेट की देन: पोर्न साइट्स भी पहुंच से दूर नहीं

 आजकल आसानी से पोर्न वीडियोज़ देखे जा सकते हैं. चाहे आप किसी भी उम्र के हों. इंटरनेट के घटते रेट्स ने इन साइट्स की डिमांड और बढ़ा दी है. बच्चों पर जहां इस तरह की साइट्स बुरा असर डालती हैं, वहीं बड़े भी इसकी गिरफ़्त में आते ही अपनी सेक्स व पर्सनल लाइफ को रिस्क पर ला देते हैं. इसकी लत ऐसी लगती है कि वो रियल लाइफ में भी अपने पार्टनर से यही सब उम्मीद करने लगते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि इन वीडियोज़ को किस तरह से बनाया जाता है. इनमें ग़लत जानकारियां दी जाती हैं, जिनका उपयोग निजी जीवन में संभव नहीं.

– यही नहीं, अक्सर एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर्स भी आजकल ऑनलाइन ही होने लगे हैं. चैटिंग कल्चर लोगों को इतना भा रहा है कि अपने पार्टनर को चीट करने से भी वो हिचकिचाते नहीं. इससे रिश्ते टूट रहे हैं, दूरियां बढ़ रही हैं.

कुछ युवतियां अधिक पैसा कमाने के चक्कर में इन साइट्स के मायाजाल में फंस जाती हैं. बाद में उन्हें ब्लैकमेल करके ऐसे काम करवाए जाते हैं, जिससे बाहर निकलना उनके लिए संभव नहीं होता.

इंटरनेट फ्रॉड के भी कई केसेस अब आम हो गए हैं, ये तमाम बातें साफ़तौर पर यही ज़ाहिर करती हैं कि इंटरनेट ने वाक़ई ज़िंदगी की फुर्सत छीन ली है…!

योगिनी भारद्वाज

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पहला अफेयर: मेरा प्यार ही मेरी प्रेरणा बन गया… (Pahla Affair: Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya)

Pahla Affair, Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya

Pahla Affair, Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya

पहला अफेयर: मेरा प्यार ही मेरी प्रेरणा बन गया… (Pahla Affair: Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya)

पहले प्यार का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर

सच्चे प्यार का एहसास भटके हुए को सही राह दिखाता है. कभी किसी की कमज़ोरी नहीं बनता, बल्कि किसी की ताक़त बन उसे जीने की प्रेरणा देता है. ऐसी प्रेरणा, जो उसके जीवन को किसी मुक़ाम तक पहुंचाए. मीना भी मेरे जीवन की वह प्रेरणा है, जिसने  मुझे नई राह दिखाई. इस मुक़ाम तक पहुंचने में मेरी प्रेरणा बनी.

बात उन दिनों की है, जब मैं कॉलेज में पढ़ता था. मीना नाम की बेहद ख़ूबसूरत लड़की मेरी क्लास में पढ़ती थी. उसकी नीली, झील-सी आंखों में ऐसी कशिश थी कि मैं उसमें बंधता जा रहा था. धीरे-धीरे आलम यह हो गया कि उसे देखे बिना मेरा दिन कटना मुश्किल होता जा रहा था. पढ़ने में मेरा मन बिल्कुल नहीं लगता था. बस, हर पल आंखों में उसी की तस्वीर रहती थी. सच पूछो तो मैं उसके प्यार में अंधा हो गया था.

एक दिन मीना से मैंने अपने प्यार का इज़हार कर ही दिया. मेरी बात का कोई उत्तर दिए बिना वो चली गई. अगले दिन उसने क्लास में खड़े होकर कहा, “आज सर नहीं आए, तो क्यों न एक परिचर्चा पर विचार-विमर्श हो जाए.” पूरी क्लास ने एक स्वर में कहा, “आइडिया अच्छा है. पर विषय तो बताओ?”

मीना बोली, “हमारी कॉलेज लाइफ़ और प्यार. अब आप लोग इस पर अपने विचार व्यक्त करें.” पीछे की बेंच पर बैठे लड़के चिल्लाए, “बहुत ज़रूरी है प्यार लाइफ़ में…”

नेहा नाम की एक दबंग लड़की बोली, “प्यार का मतलब बकवास है. इसका फेवर वे लोग ही करेंगे, जो कॉलेज को मौज-मस्ती का अड्डा मानते हैं.” यह सुनकर लड़के होहल्ला मचाने लगे. यह सुनकर मीना ने सबको शांत किया और क्लास के सबसे बुद्धिमान लड़के
राकेश की ओर मुखातिब होकर बोली, “तुम अपने विचार व्यक्त करो.”

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राकेश बोला, “प्यार वह ख़ूबसूरत एहसास है, जिसके बिना ज़िंदगी जीना संभव नहीं. सबसे पहला और अद्भुत प्यार तो वात्सल्य होता है, जो जन्म से ही हमें माता-पिता से मिलता है. यह प्यार निस्वार्थ और निष्कपट होता है, जो जीवन के अंतिम पड़ाव तक हमें संरक्षण प्रदान करता है. प्यार का दूसरा रूप है- स्नेह. यह हमें अपने भाई-बहनों, गुरुजनों, मित्रों-रिश्तेदारों से मिलता है. यह प्यार हमें अपने गुणों और अच्छे व्यवहार के कारण मिलता है. हां, यदि परिचर्चा का विषय प्रेमी-प्रेमिका वाले प्यार सेे है, तो उससे तो तौबा-तौबा, क्योंकि अभी हमारे पढ़ने की उम्र है. बीता व़क़्त तरकश से निकले तीर की तरह होता है, जो दोबारा लौटकर नहीं आता. कॉलेज लाइफ़ का एक-एक दिन क़ीमती है. हमें ऐसे प्यार के चक्कर में न पड़कर अपना भविष्य संवारना चाहिए.”

मीना के चेहरे पर एक विशेष प्रकार की संतुष्टि थी, वो मेरी तरफ़ मखातिब होकर बोली, “ओमेशजी, क्या आप भी राकेशजी के विचारों से सहमत हैं?” मेरे मुंह से बस इतना ही निकला, “हां, पूरी तरह से.”

उस दिन यदि मीना ने मुझे सही राह न दिखाई होती, तो मैं आज जिस मुक़ाम पर खड़ा हूं, वहां तक कभी न पहुंच पाता. पहले प्यार के एहसास जब याद आते हैं, तो आज भी आंखें उसके प्रति श्रद्धा से झुक जाती हैं.

– डॉ. ओ. पी. दास गुप्ता

 

 

आपको नपुंसक बना सकती हैं ये 10 आदतें (10 Habits That Can Make You Impotent)

causes of impotence
आपको नपुंसक बना सकती हैं ये आदतें (Habits That Can Make You Impotent)

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile dysfunction) बहुत से पुरुषों की समस्या है, पर उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनकी रोज़मर्रा की आदतें ही उनकी सेक्स लाइफ को बिगाड़ रही है. आप भी जानें इसके कारन, लक्षण और निवारण. 

causes of impotence

पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार की ताज़गी को हमेशा बरक़रार रखने में शारीरिक संबंधों की बहुत अहम् भूमिका होती है, लेकिन बदलते लाइफस्टाइल के चलते अधिकांश पुरुष इरेक्टाइल डिसफंक्शन के शिकार होते जा रहे हैं. यह एक ऐसी समस्या है जो पुरुषों में आत्मविश्‍वास की कमी और अधूरेपन को दर्शाती है. क्या है इरेक्टाइल डिसफंक्शन, कैसे होती है ये समस्या और इसका निवारण कैसे होता है? चलिए जानते हैं.

क्या है इरेक्टाइल डिसफंक्शन?

संभोग के दौरान पेनिस का उत्तेजित न होना या फिर कामोत्तेजना को देर तक बनाए रखने में असमर्थता, यह यौन क्रिया की एक ऐसी स्थिति है जिसे स्तंभन दोष, नपुंसकता, शीघ्रपतन या फिर इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहा जाता है. इरेक्टाइल डिसफंक्शन का अर्थ है पेनिस में तनाव न आना या तनाव का बरक़रार न रह पाना. इस स्थिति को इंपोटेंसी भी कहा जाता है जो 65 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में बेहद आम है. इरेक्टाइल डिसफंक्शन की यह समस्या 40 वर्ष के क़रीब 5 फ़ीसदी पुरुषों में पाई जाती है जो उम्र के साथसाथ बढ़ती है. यह समस्या व्यक्ति के साथ उसके पार्टनर की सेक्सुअल लाइफ को भी प्रभावित करती है इसलिए समय पर इसका इलाज कराना अति आवश्यक है.

कारण

संभोग के दौरान आनंद की चरमसीमा तक पहुंचने के लिए लगातार पर्याप्त इरेक्शन का होना ज़रूरी है. अगर ऐसा नहीं होता है तो यह स्थिति आपके लिए चिंताजनक साबित हो सकती है. हालांकि यह बीमारी पुरुषों में कई कारणों से हो सकती है इसलिए इसके कारणों को जानना बहुत ज़रूरी है.

1- धूम्रपान

अगर आपको धूम्रपान करने की आदत है तो फिर ये आदत आपको इरेक्टाइल डिसफंक्शन का शिकार बना सकती है. सिगरेट पीने की वजह से शरीर में ठीक तरह से बल्ड सर्कुलेशन नहीं हो पाता है, जिससे बेड पर आपके परफॉर्मेंस में कमी आ सकती है.

2- शराब

अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से धमनियों में ख़ून का दौरा कम हो जाता है जिससे पेनिस तक पर्याप्त मात्रा में ख़ून की सप्लाई नहीं हो पाती है. ऐसे में व्यक्ति नपुंसक हो सकता है या इरेक्टाइल डिसफंक्शन का शिकार हो सकता है.

3- दवाइयां

अगर आप हाई ब्लड प्रेशर या फिर तनाव को दूर करने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं तो यह आदत आपके बेड लाइफ के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है.

4- तनाव

तनाव या डिप्रेशन पुरुषों की सेक्स लाइफ के लिए बेहद ख़तरनाक माना जाता है. यह धीरेधीरे बीमारी फैलाता है इसलिए तनाव या डिप्रेशन से ख़ुद को दूर रखना चाहिए.

5- मोटापा

बढ़ते वज़न या फिर मोटापे का सीधा असर पुरुषों के लिंग पर पड़ता है और मेल

हार्मोन्स का प्रोडक्शन धीमी गति से होने लगता है. इससे पहले कि मोटापा आपकी सेक्स लाइफ का दुश्मन बने, आपको अपने वज़न को कंट्रोल करने को लेकर सीरियस हो जाना चाहिए.

6- हाई कोलेस्ट्रॉल

हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से रक्त की धमनियां पूरी तरह से ब्लॉक भी हो सकती हैं जिससे ख़ून की सप्लाई धीमी पड़ जाती है. अगर ऐसा होता है तो फिर इसका दुष्परिणाम पुरुषों के प्राइवेट पार्ट को भुगतना पड़ सकता है.

7- हृदय रोग

बदलते लाइफ स्टाइल की वजह से दिल की बीमारी एक बड़ी बीमारी बनकर उभरी है. हृदय रोग व्यक्ति के शारीरिक संबंध का सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है और आपको इरेक्टाइल डिसफंक्शन का शिकार बना सकता है.

8- डायबिटीज़

कुछ साल पहले डायबिटीज़ होने की औसत आयु 40 वर्ष हुआ करती थी जो अब घटकर 25 से 30 साल हो चुकी है. डायबिटीज़ के कारण ख़ून की धमनियों और तंत्रिकाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या हो सकती है.

9- बढ़ती उम्र

जैसेजैसे उम्र बढ़ती है व्यक्ति की यौन इच्छाओं में भी कमी आने लगती है. जो पुरुष यौन क्रिया में इच्छा नहीं रखते या फिर जिन्हें उत्तेजना नहीं होती, वे नपुंसक होते हैं लेकिन जो पुरुष उत्तेजित होते हैं लेकिन घबराहट के मारे जल्दी शांत हो जाते हैं, वे आंशिक नपुंसक होते हैं.

10- हाइपरलिपिडिमिया

हाइपरलिपिडिमिया एक बीमारी है. यह तब होता है जब आपके ख़ून में बहुत अधिक लिपिड (वसा) होता है यानी कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स. इस बीमारी के कारण आपको इरेक्टाइल डिसफंक्शन या नपुंसकता की समस्या हो सकती है.

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लक्षण

काम क्रिया के दौरान अगर शीघ्रपतन की समस्या होती है तो यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है.

संभोग के दौरान अगर उत्तेजना में कमी हो तो यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन या नपुंसकता का लक्षण हो सकता है.

समय से पहले स्खलन और विलंब स्खलन भी नपुंसकता यानी इरेक्टाइल डिसफंक्शन का लक्षण है.

पर्याप्त उत्तेजना के बाद भी संभोग सुख प्राप्त करने में असमर्थता इस बीमारी का लक्षण हो सकता है.

अगर ये समस्याएं दो या उससे अधिक महीने से हो रही हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर ले लेना चाहिए.

निवारण

इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी शीघ्रपतन की समस्या से पीड़ित व्यक्ति अपनी ख़राब सेक्स परफॉर्मेंस को लेकर शर्मिंदगी महसूस करता है, लेकिन समय पर सही उपचार करके इस समस्या से निजात पाना भी आसान है.

1- दवाइयां

पेनिस के मसल्स में ब्लड फ्लो बढ़ाने और उन्हें आराम देने के लिए डॉक्टर्स सिल्डेनाफिल (ीळश्रवशपरषळश्र), टैडलफिल (ींरवरश्ररषळश्र), वर्डेनफिल र्(ींरीवशपरषळश्र) अवानाफिल (र्रींरपरषळश्र) जैसी दवाएं मरीज़ को देते हैं. समस्या की गंभीरता के आधार पर दी जानेवाली इन दवाओं का सेवन सेक्स से क़रीब आधे घंटे पहले किया जाता है. हालांकि हार्ट डिजीज़ और प्रोस्टेट के मरीज़ों को इन दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए.

2- काउंसलिंग

तनाव, चिंता या फिर अन्य वैवाहिक समस्याएं अगर आपकी इस बीमारी का कारण हैं तो काउंसलिंग के ज़रिए इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है. आमतौर पर ऐसा उन लोगों के साथ होता है, जिन्हें सेक्स का कम अनुभव होता है लेकिन अपनी

परफॉर्मेंस की चिंता बहुत ज़्यादा होती है.

3- इंजेक्शन

इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या से निपटने के लिए मरीज़ को एक ख़ास इंजेक्शन दिया जाता है, जिसे पापवेरिन (रिर्रिींशीळपश) इंजेक्शन कहा जाता है. यह रक्त वाहिकाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं. इस इंजेक्शन को शरीर में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए सीधे लिंग में लगाया जाता है.

4- जीवनशैली में बदलाव

जीवनशैली में बदलाव लाकर भी इस समस्या से काफ़ी हद तक राहत मिल सकती है. अपने डायट में हरी सब्ज़ियों, डेयरी प्रोडक्ट्स, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर चीज़ों को शामिल करें. इसके साथ ही धूम्रपान, शराब और अवैध दवाइयों का सेवन करने से बचें और अपने शरीर के वज़न को कंट्रोल करें.

5- एक्सरसाइज़

ब्रिटेन के विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन के अनुसार, पेल्विक एरिया की एक्सरसाइज़ करने से क़रीब 40फ़ीसदी पुरुषों में इरेक्टाइल की समस्या नॉर्मल हो गई है. तेज़ चलना, स्विमिंग और हफ़्ते में तीन बार कार्डियो करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और पेल्विक हिस्से में ब्लड फ्लो बढ़ता है. इटली और इथियोपिया में हुए एक अध्ययन के अनुसार, एरोबिक्स से भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन में सुधार हो सकता है.

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हर लड़की ढूंढ़ती है पति में ये 10 ख़ूबियां (10 Qualities Every Woman Look For In A Husband)

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भावी पति को लेकर हर लड़की की पसंद अलग-अलग हो सकती है, पर ऐसी कुछ बातें व विशेषताएं होती हैं, जिन्हें हर लड़की अपने होनेवाले पति में ढूंढ़ती है. आइए, उन दिलचस्प पहलुओं के बारे में जानते हैं.

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1. तक़रीबन हर तीसरी लड़की की यह ख़्वाहिश ज़रूर होती है कि उसका हसबैंड स्मार्ट व गुड लुकिंग हो. वे गुण पर कम, रूप पर अधिक आकर्षित होती हैं, इसलिए उनकी इस खोज में सुंदर लड़का होना टॉप मोस्ट डिमांड पर होता है.

2. हर किसी के लिए रिश्ते में केयरिंग नेचर का होना सर्वोपरि होता है. यही लड़कियों में भी देखा गया है. उनकी शिद्दत से यह चाह रहती है कि उनका पति उनका ख़्याल रखे. उन्हें लाड़ करे, एक तरह से पैंपर करे. यानी लड़कियां केयरिंग नेचर के लड़के को अधिक महत्व देती हैं.

3. हर लड़की यह ज़रूर देखती है कि उसका पति कमाऊ हो यानी अच्छी नौकरी या फिर बिज़नेस करता हो. भावी जीवन में मज़बूत आर्थिक स्थिति का होना उनके लिए बहुत ज़रूरी होता है. वे अपने भविष्य को सुनिश्‍चित करने के लिए अच्छे सेटल्ड यानी नौकरीपेशा लड़कों को अधिक पसंद करती हैं.

4. वैसे आजकल की लड़कियां ख़ुशमिज़ाज लड़कों को भी अधिक महत्व देती हैं. उनका यह मानना है कि लड़का ज़िंदादिल व हंसमुख होगा, तो ज़िंदगी मज़े से हंसतेहंसते कट जाएगी.

5. यदि पतिदेव घूमने के शौक़ीन हैं, तो पत्नी के लिए ज़िंदगी का सफ़र मौजमस्ती के साथ गुज़ारना आसान हो जाता है. इसलिए लड़कियों की यह दिली ख़्वाहिश होती है कि उनके भावी पति को घूमने का शौक़ ज़रूर हो, ताकि वे भी समयसमय पर घूमतेफिरते ज़िंदगी के लुत्फ़ उठा सकें.

6. लड़कियां मैनर्स व एटीकेट्स को भी गंभीरता से लेती हैं. जो लड़के शालीन स्वभाव के होते हैं और जगह व व्यक्ति के अनुसार उन्हें उचित मानसम्मान देते हैं, ऐसे व्यक्तित्ववाले लड़के उन्हें अधिक आकर्षित करते हैं.

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7. लड़कियां अपने पार्टनर में इमोशनल फैक्टर को भी ख़ूब देखती हैं. यदि पति संवेदनशील होंगे, तभी तो पत्नी की भावनाओं व दुखदर्द को भलीभांति समझ सकेंगे. यही ख़्याल उन्हें अपने पार्टनर में इमोशंस को देखने के लिए मजबूर करता है.

8. रिश्तों की कद्र करनेवाले और जीवनसाथी को पर्याप्त समय देनेवाले लड़के की ख़्वाहिश भी लड़कियों में होती है. यदि पतिदेव ऑफिस के कामों व टूर में ही बिज़ी रहेंगे, तो भला पत्नी को कितना वक़्त दे पाएंगे. इसलिए जो पुरुष रिश्तों की गरिमा को बनाए रखते हैं और पार्टनर को भी क्वालिटी टाइम देते रहते हैं, ऐसे पार्टनर पत्नी को बेहद पसंद आते हैं.

9. पत्नी का सम्मान करनेवाले और उसकी बातों को भी अहमियत देनेवाले साथी की चाह भी ख़ूब होती है. अधिकतर घरों में देखा गया है कि पति महाशय घरेलू मामलों को छोड़कर अन्य आर्थिक मामलों मेंं पत्नी को उतना तवज्जो नहीं देते, जितना कि देना चाहिए. ऐसे में लड़कियां यह ज़रूर चाहती हैं कि घरबाहर हर मामले में पति उनकी बातों को भी अहमियत दें. ऐसे शख़्स से वे बहुत अधिक प्रभावित होती हैं.

10. व्यक्तिगत स्पेस देनेवाले पार्टनर को हर लड़की पसंद करती है. उन्हें ऐसे पति पसंद हैं, जो हर समय पत्नी पर रोकटोक नहीं लगाते, जासूसी नहीं करते, उनकी सहेलियों से मिलने की पूरी आज़ादी देते हैं, मायके जाने पर अधिक पाबंदी नहीं लगाते.

भावना अमित

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दूसरों की ज़िंदगी में झांकना कहीं आपका शौक़ तो नहीं? (Why Do We Love To Gossip?)

Why Do We Love To Gossip

Why Do We Love To Gossip

अरे सुनो, वो जो पड़ोस की वर्माजी की बेटी है न, वो रोज़ देर रात को घर लौटती है, पता नहीं ऐसा कौनसा काम करती है…?

गुप्ताजी की बीवी को देखा, कितना बनठन के रहती हैं, जबकि अभीअभी उनके जीजाजी का देहांत हुआ है…!

सुनीता को देख आज बॉस के साथ मीटिंग है, तो नए कपड़े और ओवर मेकअप करके आई है

इस तरह की बातें हमारे आसपास भी होती हैं और ये रोज़ की ही बात है. कभी जानेअनजाने, तो कभी जानबूझकर, तो कभी टाइमपास और फन के नाम पर हम अक्सर दूसरों के बारे में अपनी राय बनातेबिगाड़ते हैं और उनकी ज़िंदगी में ताकझांक भी करते हैं. यह धीरेधीरे हमारी आदत और फिर हमारा स्वभाव बनता जाता है. कहीं आप भी तो उन लोगों में से नहीं, जो इस तरह का शौक़ रखते हैं?

क्यों करते हैं हम ताकझांक?

ये इंसानी स्वभाव का हिस्सा है कि हम जिज्ञासावश लोगों के बारे में जानना चाहते हैं. ये जिज्ञासा जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती है, तो वो बेवजह की ताकझांक में बदल जाती है.

अक्सर अपनी कमज़ोरियां छिपाने के लिए हम दूसरों में कमियां निकालने लगते हैं. यह एक तरह से ख़ुद को भ्रमित करने जैसा होता है कि हम तो परफेक्ट हैं, हमारे बच्चे तो सबसे अनुशासित हैं, दूसरों में ही कमियां हैं.

कभीकभी हमारे पास इतना खाली समय होता है कि उसे काटने के लिए यही चीज़ सबसे सही लगती है कि देखें आसपास क्या चल रहा है.

दूसरों के बारे में राय बनाना बहुत आसान लगता है, हम बिना सोचेसमझे उन्हें जज करने लगते हैं और फिर हमें यह काम मज़ेदार लगने लगता है.

इंसानी स्वभाव में ईर्ष्या भी होती है. हम ईर्ष्यावश भी ऐसा करते हैं. किसी की ज़्यादा कामयाबी, काबिलीयत हमसे बर्दाश्त नहीं होती, तो हम उसकी ज़िंदगी में झांककर उसकी कमज़ोरियां ढूंढ़ने की कोशिश करने लगते हैं और अपनी राय बना लेते हैं.

इससे एक तरह की संतुष्टि मिलती है कि हम कामयाब नहीं हो पाए, क्योंकि हम उसकी तरह ग़लत रास्ते पर नहीं चले, हम उसकी तरह देर रात तक घर से बाहर नहीं रहते, हम उसकी तरह सीनियर को रिझाते नहींआदि.

कहीं न कहीं हमारी हीनभावना भी हमें इस तरह का व्यवहार करने को मजूबर करती है. हम ख़ुद को सामनेवाले से बेहतर व श्रेष्ठ बताने के चक्कर में ऐसा करने लगते हैं.

हमारा पास्ट एक्सपीरियंस भी हमें यह सब सिखाता है. हम अपने परिवार में यही देखते आए होते हैं, कभी गॉसिप के नाम पर, कभी ताने देने के तौर पर, तो कभी सामनेवाले को नीचा दिखाने के लिए उसकी ज़िंदगी के राज़ या कोई भी ऐसी बात जानने की कोशिश करते हैं. यही सब हम भी सीखते हैं और आगे चलकर ऐसा ही व्यवहार करते हैं.

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Why Do We Love To Gossip

कहां तक जायज़ है यूं दूसरों की ज़िंदगी में झांकना?

इसे जायज़ तो नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन चूंकि यह इंसानी स्वभाव का हिस्सा है, तो इसे पूरी तरह से बंद भी नहीं किया जा सकता.

 किसी की ज़िंदगी में झांकने का अर्थ है आप उसकी प्राइवेसी में दख़लअंदाज़ी कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल ग़लत है.

न स़िर्फ ये ग़लत है, बल्कि क़ानूनन जुर्म भी है.

हमें यह नहीं पता होता कि सामनेवाला किन परिस्थितियों में है, वो क्या और क्यों कर रहा है, हम महज़ अपने मज़े के लिए उसके सम्मान के साथ खिलवाड़ करने लगते हैं.

ये शिष्टाचार के ख़िलाफ़ भी है और एक तरह से इंसानियत के ख़िलाफ़ भी कि हम बेवजह दूसरों की निजी ज़िंदगी में झांकें.

जिस तरह हम यह मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी पर हमारा हक़ है, किसी और को हमारे बारे में राय कायम करने या ग़लत तरह से प्रचार करने का अधिकार नहीं है, उसी तरह ये नियम हम पर भी तो लागू होते हैं.

लेकिन अक्सर हम अपने अधिकार तो याद रखते हैं, पर अपनी सीमा, अपने कर्त्तव्य, अपनी मर्यादा भूल जाते हैं.

यदि हमारे किसी भी कृत्य से किसी के मानसम्मान, स्वतंत्रता या मर्यादा को ठेस पहुंचती है, तो वो जायज़ नहीं.

किसने क्या कपड़े पहने हैं, कौन कितनी देर रात घर लौटता है या किसके घर में किसका आनाजाना लगा रहता हैइन तमाम बातों से हमें किसी के चरित्र निर्माण का हक़ नहीं मिल जाता है.

हम जब संस्कारों की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने ही संस्कार देखने चाहिए. क्या वो हमें यह इजाज़त देते हैं कि दूसरों की ज़िंदगी में इतनी

ताकाझांकी करें?

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Why Do We Love To Gossip

कैसे सुधारें ये ग़लत आदत?

किसी के बारे में फ़ौरन राय न कायम कर लें और न ही उसका प्रचारप्रसार आसपड़ोस में करें.

बेहतर होगा यदि इतना ही शौक़ है दूसरों के बारे में जानने का, तो पहले सही बात का पता लगाएं.

ख़ुद को उस व्यक्ति की जगह रखकर देखें.

उसकी परवरिश से लेकर उसकी परिस्थितियां व हालात समझने का प्रयास करें.

दूसरों के प्रति उतने ही संवेदनशील बनें, जितने अपने प्रति रहते हैं.

अपनी ईर्ष्या व हीनभावना से ऊपर उठकर लोगों को देखें.

यह न भूलें कि हमारे बारे में भी लोग इसी तरह से राय कायम कर सकते हैं. हमें कैसा लगेगा, यदि कोई हमारी ज़िंदगी में इतनी ताकझांक करे?

सच तो यह है कि वर्माजी की बेटी मीडिया में काम करती है, उसकी लेट नाइट शिफ्ट होती है, इसीलिए देर से आती है.

गुप्ताजी की बीवी सजसंवरकर इसलिए रहती है कि उसकी बहन ने ही कहा था कि उसके जीजाजी बेहद ज़िंदादिल और ख़ुशमिज़ाज इंसान थे और वो नहीं चाहते थे कि उनके जाने के बाद कोई भी दुखी होकर उनकी याद में आंसू बहाये, बल्कि सब हंसीख़ुशी उन्हें याद करें. इसलिए सबने यह निर्णय लिया कि सभी उनकी इच्छा का सम्मान करेंगे.

– सुनीता का सच यह था कि आज उसकी शादी की सालगिरह भी है, इसलिए वो नए कपड़े और मेकअप में नज़र आ रही है.

ये मात्र चंद उदाहरण हैं, लेकिन इन्हीं में कहीं न कहीं हम सबकी सच्चाई छिपी है. बेहतर होगा हम बेहतर व सुलझे हुए इंसान बनें, क्योंकि आख़िर हमसे ही तो परिवार, परिवार से समाज, समाज से देश और देश से दुनिया बनती है. जैसी हमारी सोच होगी, वैसी ही हमारी दुनिया भी होगी. अपनी दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सोच को भी बेहतर बनाना होगा.

विजयलक्ष्मी

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बेहतर रिश्तों के लिए करें इन हार्मोंस को कंट्रोल (Balance Your Hormones For Healthy Relationship)

Balance Your Hormones, For Healthy Relationship

हमारे शरीर में हार्मोंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पुरुषों व महिलाओं में ऐसे कई हार्मोंस पाए जाते हैं, जिनका प्रभाव उनकी सेहत के साथसाथ रिश्तों पर भी पड़ता है, इसलिए इसे कंट्रोल में रखना बेहद ज़रूरी है. आइए, इसके बारे में संक्षेप मेें जानते हैंएस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टोस्टेरॉन, थायरॉइड, कार्टिसोल, इंसुलिन आदि हार्मोंस हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाओं व ग्रन्थियों से निकलनेवाले केमिकल्स हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्से में मौजूद कोशिकाओं या ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं. हेल्थियंस की लाइफस्टाइल मैनेजमेंट कंसल्टेंट डॉ. स्नेहल सिंह ने इसके बारे में हमें विस्तृत जानकारी दी.

Balance Your Hormones, For Healthy Relationship

हमारे शरीर में कुल 230 तरह के हार्मोंस होते हैं, जो शरीर में अलगअलग कार्यों को संतुलित करते हैं. ये एक केमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं, लेकिन एक ग़लत मैसेज हार्मोंस को असंतुलित कर सकता है, इसलिए इस पर ध्यान देना ज़रूरी है. इनका सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज़्म, इम्यून सिस्टम, रिप्रोडक्टिव सिस्टम, शरीर के विकास, मूड आदि पर पड़ता है. डॉ. स्नेहल के अनुसार, हार्मोंस असंतुलन से रिश्तों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. आजकल की भागतीदौड़ती ज़िंदगी में विभिन्न बीमारियों ने हर किसी की ज़िंदगी को प्रभावित किया है. ऐसे में भागदौड़, तनाव, थकान व खानपान के साथसाथ हार्मोंस भी रोज़मर्रा की दिनचर्या व रिश्तों को प्रभावित करते हैं.

हार्मोंस और रिश्ते

हार्मोंस की कार्यशैली या इसकी प्रणाली जटिल होती है. जब यह संतुलन में रहते हैं, तो सब कुछ अच्छा रहता है और चीज़ें जैसे चमत्कारी तौर पर काम करती हैं, लेकिन हार्मोंस असंतुलन उतना ही प्रतिकूल प्रभाव डालता है. असंतुलन से अजीब मूड स्विंग्स होते हैं. स़िर्फ स्त्रियों में ही नहीं, पुरुष भी हार्मोंस असंतुलन से प्रभावित होते हैं, जो सेक्सुअल लाइफ को भी प्रभावित करते हैं.

हार्मोनल संतुलन पीरियड के पहले के सिंड्रोम, बाद के डिप्रेशन, मेनोपॉज़ या एंड्रोपॉज़ को मैनेज करने के लिए ही नहीं, बल्कि बेहतर रिश्तों के लिए भी आवश्यक है. रिश्तों को प्रभावित करनेवाले मुख्य हार्मोंस में ऑक्सीटोसिन, टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन शामिल हैं.

ऑक्सीटॉसिन

ऑक्सीटॉसिन, जिसे आमतौर पर लव हार्मोन कहा जाता है, आपको प्यार का एहसास देता है, जिसके चलते आप रिश्तों में बेहतर कनेक्टिविटी महसूस करते हैं. व्यक्ति को ख़ुशी और संतुष्टि का एहसास करानेवाला यह फीलगुड हार्मोन है. अपर्याप्त ऑक्सीटॉसिन नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिसके चलते चिड़चिड़ापन, अलगाव की भावना, अनिद्रा और असंतुष्ट सेक्स लाइफ आदि समस्याएं होने लगती हैं. सामान्य ऑक्सीटॉसिन का स्तर रिश्तों में ख़ुशियां देता है, जो बेहतर रिश्तों के लिए अच्छा है.

टेस्टोस्टेरॉन

टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों में मर्दानगी (मैस्कूलिनिटी की ज़रूरत पूरी करता है, जिससे वे रिलेशनशिप एंजॉय करते हैं. कम टेस्टोस्टेरॉन का स्तर मूड की समस्याएं, चिड़चिड़ापन और ईगो को जन्म देता है. ये नकारात्मक भावनाएं निजी संबंधों को प्रभावित करती हैं. बढ़ती उम्र, तनाव, पुरानी बीमारियां और हार्मोंस की समस्याएं पुरुषों में कम टेस्टोस्टेरॉन का कारण बन सकती हैं. यह सेक्सुअल रिलेशन और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करते हैं.

एस्ट्रोजेन

युवावस्था में महिलाओं में एस्ट्रोजेन का स्तर बढ़ जाता है, जो उनके विकास, यौन गतिविधि और फर्टिलिटी को प्रभावित करता है, जबकि मेनोपॉज़ के दौरान इसका स्तर घटता है. एस्ट्रोजेन का स्तर सामान्य होने पर महिलाओं में सेक्स की इच्छा जागती है और वे अपने साथी के साथ अच्छे संबंधों का आनंद ले सकती हैं, लेकिन जब एस्ट्रोजेन का स्तर कम होता है, तो इससे योनि में सूखापन और सेक्स ड्राइव में कमी आती है. ऐसे में उनको चिड़चिड़ापन होता है. दूसरी तरफ़ कुछ महिलाओं में एस्ट्रोजेन का स्तर अधिक होता है, जिससे रिश्ते और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, सिरदर्द, थकान आदि शिकायतें होती हैं, जिसका उनके रिश्तों पर ख़राब असर होता है.

प्रोजेस्टेरॉन

प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन का स्तर गर्भावस्था और मातृत्व के शुरुआती दिनों में सबसे अच्छा होता है. यह गर्भवती महिलाओं में अन्य संबंधों की तुलना में बच्चे की देखभाल करने की इच्छा को अधिक बढ़ाता है. इसके कारण बच्चे के जन्म के आरंभिक कुछ वर्षों के दौरान कपल्स में यौन आकर्षण कम हो जाता है.

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यूं रखें हार्मोंस को नियंत्रित…

ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्मोंस को बैलेंस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

ओमेगा 3 फैटी एसिड फिश, अलसी के बीज, अखरोट, सोयाबीन, टोफू, ऑलिव ऑयल आदि में मिलता है. यदि आप चाहें, तो डॉक्टर की सलाह पर ओमेगा 3 की गोलियां भी ले सकती हैं.

विटामिन डी पिट्यूटरी ग्लैंड को प्रभावित करता है. इसकी कमी से पैराथायरॉइड हार्मोंस असंतुलित होने लगता है. रोज़ाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक एक्सरसाइज़ करें, जिससे हार्मोंस को संतुलित होने में मदद मिलेगी.

इसके अलावा नियमित रूप से योग, प्राणायाम, जॉगिंग, स्विमिंग भी कर सकती हैं.

एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल नेचुरल तरी़के से हाइपोथायरॉइडिज़्म को संतुलित करता है. साथ ही ब्लड शुगर ठीक करने के साथ वज़न को भी संतुलित रखता है. इसे 2-3 टीस्पून नियमित रूप से लेना चाहिए.

एक टीस्पून मेथीदाना एक कप गरम पानी में 20 मिनट के लिए भिगोकर रखें, फिर छानकर दिनभर में तीन बार पीएं. यदि मेथीदाना की तासीर गरम होने के कारण आपको सूट न करे, तो इसकी जगह सौंफ ले सकते हैं.

तुलसी बॉडी के कार्टिसोल के लेवल को ठीक करता है. इसका लेवल बढ़ने पर थायरॉइड, ओवरीज़ व अग्नाशय प्रभावित होते हैं. इसके अलावा मूड भी स्विंग होता रहता है, जिसे संतुलित करने के लिए तुलसी की पत्तियों का सेवन सबसे बेहतरीन उपाय है.

इसके अलावा आप तुलसी को उबालकर दिनभर में तीन कप पी सकते हैं.

अश्‍वगंधा भी हार्मोंस को संतुलित करता है. साथ ही थकान व तनाव भी मिटाता है. डॉक्टर की सलाह पर ही इसे लें. वैसे कुछ दिनों तक 300 एमजी अश्‍वगंधा ले सकते हैं.

हार्मोंस को संतुलित रखने का सबसे बेहतर उपाय यही है कि संतुलित भोजन करें, वज़न पर नियंत्रण रखें और बेवजह का तनाव न लें.

अपने भोजन में फल, अंकुरित अनाज, हरी सब्ज़ियां, दालें आदि नियमित रूप से लें.

भरपूर नींद लें. ख़ुश रहें. बेवजह किसी बात को दिल में न रखें. तनमन जितना हल्का रहेगा, शरीर उतना ही संतुलित व फिट रहेगा.

न्यूट्रीशियस फूड हार्मोंस को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

जंक व ऑयली फूड, स्टेरॉयड व अधिक एंटीबायोटिक्स न लें.

ज़्यादा चाय, कॉफी, अल्कोहल और चॉकलेट आदि कैफीन मिली हुई चीज़ें खाने से बचें.

पनीर, दूध से बनी और मीट जैसी फैटवाली चीज़ें कम लें.

दवाइयों के अलावा योग व प्राणायाम द्वारा भी हार्मोंस को नियंत्रण में रख सकते हैं. इसके लिए अनुलोमविलोम प्राणायाम, उज्जयी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, शवासन, कपालभाति, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, धनुरासन, मंडूकासन, पश्‍चिमोत्तान आसन आदि करें.

पुरुष हार्मोंस को कंट्रोल करने के लिए अश्‍वगंधा चूर्ण 1 चम्मच रात में खाना खाने के आधा घंटे बाद दूध और मिश्री में ले सकते हैं.

इसके अलावा वे सर्दियों में अश्‍वगंधारिष्ट और अमृतारिष्ट 3-3 चम्मच भोजन के बाद दिन में दो बार एक कप गुनगुने दूध के साथ ले सकते हैं.

महिलाएं यदि अशोकारिष्ट 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें, तो पीरियड नियमित रहते हैं.

साल में तीन महीने अशोकारिष्ट व दशमूलारिष्ट 3-3 चम्मच पानी के साथ भोजन के दो घंटे बाद दिन में दो बार लें, पर ध्यान रहे, इसे प्रेग्नेंसी में न लें.

ऊषा गुप्ता

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पहला अफेयर: रूठ गया वसंत… (Pahla Affair: Rooth Gaya Vasant)

Pahla Affair, Rooth Gaya Vasant

 

पहला अफेयर: रूठ गया वसंत… (Pahla Affair: Rooth Gaya Vasant)

क्यों रूठा हमसे बसंत
हमने तो सुदूर नीलांबर के इंद्रधनुष में
प्यार के कुछ रंग भरने चाहे थे
ज़माने की आंधी चली कुछ ऐसी
ज़िंदगी में हमेशा के लिए पतझड़ छा गया

फिर वसंत आ गया. बसंत का यह मौसम दिल में एक अजीब-सी हूक जगा देता है. कॉलेज के वो दिन आंखों के सामने घूम जाते हैं, जो मेरी ज़िंदगी में बहार लेकर आए थे.

मेरे लिए यह शहर भी अजनबी था और यहां के लोग भी. मैंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था. कॉन्वेंट स्कूल के सख़्त अनुशासन के पश्‍चात् यहां का सहशिक्षा वाला वातावरण उन्मुक्त प्रतीत हुआ. शुरू-शुरू में थोड़ी मुश्किलें ज़रूर आईं, पर जल्दी ही मैंने नए माहौल में अपने आप को ढाल लिया, कई साथी भी बन गए.

कॉलेज में सांस्कृतिक सप्ताह का आयोजन होनेवाला था. मेरे एक सहपाठी ने मुझसे उसके साथ युगल गान प्रतियोगिता में भाग लेने का अनुरोध किया. मैंने उससे स्पष्ट कहा कि मुझे गीत-संगीत सुनने का शौक़ तो बहुत है, किंतु मैं स्वयं अच्छा नहीं गा पाती हूं, इसलिए वह कोई और पार्टनर चुन ले. गायन प्रतियोगिता वाले दिन उस छात्र को जब एक ख़ूबसूरत छात्रा के साथ स्टेज पर गाते देखा तो न जाने क्यों कुछ अच्छा नहीं लगा. मुझे ईर्ष्या का अनुभव हुआ. फिर तो मैं भी नृत्य, नाटक, लेखन आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगी और इसके लिए अनेक पुरस्कार भी जीते. धीरे-धीरे मैंने उस लड़के से दोस्ती भी बढ़ा ली.

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हम दोनों में ख़ूब पटने लगी. एक गहरे आकर्षण के मोहपाश में हम बंधते चले गए. जूही-चंपा व गुलमोहर से हरी-भरी कॉलेज की बगिया हमारी मुलाक़ातों की मौन साक्षी बनी. एक-दूसरे के साथ के सिवाय हमें कुछ अच्छा ही नहीं लगता. साथ उठते-बैठते, लड़ते-झगड़ते कब हम भावी जीवन के मधुर स्वप्न देखने लगे, पता ही नहीं चला. मगर ख़्वाब देखते हुए शायद हम ये भूल गए कि हमारे समाज में जाति-पाति, वर्ग-भेद बहुत गहरा पैठा हुआ है.

परिवार की रज़ामंदी तो दूर, हमारे प्रेम पथ पर दुखों के कांटे बिछा दिए उन्होंने. जीवनभर अपने प्रियजनों से अलगाव झेलने का सामर्थ्य नहीं था हममें, न ही आर्थिक रूप से हम सक्षम थे कि समाज से दूर अपनी नई दुनिया बसा पाते. कठोर यथार्थ के दानव ने हमारा स्वप्न-लोक नष्ट कर दिया. हमारे ख़्वाब अधूरे रह गए. मेरा राजकुमार स़फेद घोड़े पर सवार हो मुझे ब्याहने नहीं आ पाया. अश्रुओं का अथाह सागर अंदर ही शुष्क हो गया. मैंने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया और मेरे इस निश्‍चय को कोई नहीं डिगा पाया.
मेरा प्यार कहां है, कैसा है, यह जानने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाई मैं. नेह के गुलाबों की सुरभित पंखुड़ियां मेरी स्मृतियों की क़िताब के पृष्ठों के बीच आज भी दबी हुई हैं. कभी अनजाने में मेरे पहले और अंतिम प्यार ने गीत गाते हुए जीवन की सच्चाई बयां कर दी थी.

जीवन के सफ़र में राही
मिलते हैं बिछड़ जाने को
और दे जाते हैं यादें
तन्हाई में तड़पाने को.

– डॉ. महिमा

जानें सेक्स से जुड़े दिलचस्प सर्वे (Interesting Sex Survey)

Interesting Sex Survey
सफल सेक्स लाइफ़ पर हुए रिसर्च के अनुसार सेक्स लाइफ एंजॉय करने के लिए डेली एक्सरसाइज़ और हेल्दी डायट बहुत ज़रूरी है. आइए जानते हैं कुछ इंटरेस्टिंग सेक्स रिसर्च की रिपोर्ट्स की संक्षिप्त जानकारी.

Interesting Sex Survey

– एक सर्वे के अनुसार, 60% पुरुष चाहते हैं कि सेक्स के लिए औरत पहल करे.

सप्ताह में दो या तीन बार सेक्स करनेवाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है.

सेक्स के दौरान हार्ट अटैक से मरनेवाले पुरुषों में से 85% पुरुष ऐसे होते हैं, जो अपनी पत्नी को धोखा दे रहे होते हैं.

जिन लोगों को अनिद्रा की शिकायत हो, उनके लिए सेक्स से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता, क्योंकि सेक्स के बाद अच्छी नींद आती है. रिसर्च के अनुसार, ये नींदवाली दूसरी दवाओं की तुलना में 10 गुना ज़्यादा कारगर है.

हर पुरुष हर सात सेकंड में कम से कम एक बार सेक्स के बारे में ज़रूर सोचता है.

20% पुरुषों को ओरल सेक्स से आनंद आता है, जबकि 6% महिलाओं को ये महज़ फोरप्ले का हिस्सा लगता है.

अमेरिका में 12-15 साल के किशारों में ओरल सेक्स का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और मज़ेदार बात तो ये है कि वो इसे सेक्सुअल क्रिया मानते ही नहीं.

25 % महिलाएं सोचती हैं कि पुरुष रुपएपैसे से सेक्सी बनता है.

ज़्यादा सेक्स करनेवाले पुरुषों की दाढ़ी अपेक्षाकृत तेज़ी से बढ़ती है.

लेटेक्स कंडोम की औसत लाइफ़ 2 साल होती है.

रोमांटिक उपन्यास पढ़नेवाली औरतें ऐसे उपन्यास न पढ़नेवाली औरतों की तुलना में सेक्स का ज़्यादा आनंद उठा

सकती हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर्स के मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार, पुरुष किसी भी दूसरे रंग के मुक़ाबले लाल रंग के परिधान में महिलाओं की ओर ज़्यादा आकर्षित

होते हैं.

हाल ही में हुए शोध के अनुसार, जिन महिलाओं में इमोशनल इंटेलिजेन्स (अपनी भावनाओं को समझने के साथसाथ अपने आसपास रहनेवाले लोगों की भावनाओं व ज़रूरतों की समझ) बेहतर होती है, वे सेक्स में उतनी ही अच्छी पार्टनर साबित होती हैं.

अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं को सेक्स के लिए उत्तेजित होने में कम से कम 20 मिनट का समय लगता है, परंतु शोध से पता चला है कि किसी पुरुष की कल्पना और फोरप्ले से उत्तेजित होने में उन्हें मात्र 10 मिनट लगता है.

पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही एक दिन में कई बार ऑगैऱ्ज्म का अनुभव कर सकते हैं.

अगर किसी महिला में सेक्स उत्तेजना उत्पन्न नहीं होती, तो एक बार ङ्गबर्थ कंट्रोल पिल्सफ को बदलकर देखें, क्योंकि कई बार अलगअलग पिल्स में पाए जानेवाले हार्मोंस सेक्स की उत्तेजना को प्रभावित करते हैं. इन्हें बदलने से समस्या हल हो सकती है.

कई बार सीमेन (वीर्य) से ब्लीच जैसी गंध आती है. इससे कोई हानि नहीं है. यह प्राकृतिक डिसइं़फेक्टेंट होता है एवं स्पर्म्स को योनि में पाए जानेवाले एसिड के बुरे प्रभाव से बचाता है.

एंकलबोन के नीचे एड़ी में सर्कुलर मसाज करने से सेक्सुअल उत्तेजना बढ़ती है.

पुरुष रात्रि की नींद के दौरान औसतन 4 या 5 बार इरेक्शन अनुभव करते हैं.

रिसर्च द्वारा पता चला है कि जो लड़कियां साइकिल रेस में हिस्सा लेती हैं या हर हफ़्ते 100 मील साइकिल चलाती हैं, उनकी बाह्य जननेंद्रियों का सेंसेशन कम हो जाता है.

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पेनिस की लंबाई का ऑर्गैज़्म से कोई संबंध नहीं होता, क्योंकि योनि का केवल 1/3 भाग ही संवेदनशील होता है. अगर सेक्स पोज़ीशन सही हो, तो छोटा पेनिस भी ऑर्गैज़्म दे सकता है.

जर्मन शोधकर्ताओं के अनुसार, सुरक्षित रिलेशनशिप में महिलाओं की सेक्सुअल इच्छा कम हो जाती है. 4-5 साल साथसाथ रहने के बाद महिलाएं पुरुषों की इच्छानुसार सेक्स करती हैं.

ऐसे पुरुष, जिनके अनेक स्रियों से संबंध होते हैं, वे सेक्स को बहुत महत्वपूर्ण तो समझते हैं, परंतु अपने रिलेशनशिप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते.

एक सर्वे के अनुसार, सेक्स के लिए कपल्स की सबसे पसंदीदा जगह बेडरूम के अलावा कार होती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रॉम्प में हुए रिसर्च के अनुसार, नीली आंखोंवाले पुरुष अक्सर नीली आंखोंवाली स्री को ही पसंद करतेे हैं. यदि उनका बच्चा भूरी आंखोंवाला हुआ, तो वे सोचते हैं कि उनकी पत्नी ने उनके साथ धोखा किया है. वैसे आनुवांशिकता का नियम भी यही कहता है.

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महिलाएं पीरियड्स के दौरान या उसके ठीक पहले ज़्यादा सुखद ऑर्गैज़्म का अनुभव करती हैं. ऐसा उनके पेल्विक एरिया में रक्तसंचार के बढ़ने के कारण होता है.

सेक्स के दौरान पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज़्यादा कल्पनाशील हो जाती हैं. इस तरह की सेक्सुअल फेंटेसी से उन्हें संतुष्टि तो मिलती ही है, आपसी संबंध भी मज़बूत होते हैं.

जो पुरुष ज़्यादातर सेक्सुअल फेंटेसी में रहते हैं, वे अपने रोमांटिक रिलेशनशिप से कम संतुष्ट रहते हैं.

कई पुरुषों में स्खलन (इजाक्युलेशन) के बाद भी पेनिस में इरेक्शन रहता है, जो बहुत दर्दनाक होता है. इसे प्रीएटिसिज़्म कहते हैं.

एक रिसर्च के अनुसार, कॉलेज के दौरान जो लड़के सेक्स में लिप्त रहते हैं, वे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं, जबकि सेक्स न करनेवाले विद्यार्थी नॉर्मल रहते हैं.

 कुछ महिलाओं को सीमेन (वीर्य) से एलर्जी होती है. सीमेन में मौजूद प्रोटीन के कारण उनके जननांग एवंं शरीर के अन्य हिस्सों पर जलन व खुजली की समस्या हो जाती है.

अध्ययन बताते हैं कि सेक्स से सिरदर्द व जा़ेडों का दर्द दूर होता है. वास्तव में ऑर्गैज़्म के तुरंत बाद ऑक्सीटोसिन हार्मोन का लेवल 5 गुना बढ़ जाता है, जिससे एंडॉरफिन हार्मोन का स्राव होता है. यह दर्द को दूर भगाता है.

सामान्यतः ऐसा समझा जाता है कि प्रेग्नेंसी से सेक्स की इच्छा मर जाती है, परंतु ऐसा नहीं है. गर्भावस्था के दौरान ज़्यादातर महिलाओं की सेक्स की इच्छा या तो बढ़ जाती है या पहले जैसी ही होती है.

रिसर्च के अनुसार, सिगरेट नहीं पीनेवालों की सेक्स की इच्छा, आनंद व संतुष्टि सिगरेट पीनेवालों की अपेक्षा ज़्यादा होती है.

जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च के अनुसार, कपल्स सामान्य तौर पर फोरप्ले में 11 से 13 मिनट लगाते हैं.

एक सर्वे के अनुसार, हफ़्ते में 3 या 4 बार सेक्स करने की इच्छा रखनेवाले पुरुषों व महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.

जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.

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शादीशुदा से प्यार अब परहेज़ नहीं (Having An Affair With Married Man?)

Having An Affair With Married Man
बदलते ज़माने के दौर में बहुत कुछ बदला है. पर सबसे अधिक जीने के नज़रिए में बदलाव आया है. एक व़क़्त था, जब शादीशुदा के प्यार के बारे में ख़्याल को भी ग़लत माना जाता था, पर अब ऐसा नहीं रहा. आइए, इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालें.

Having An Affair With Married Man

  • एक का हो गया, वह दूसरे का नहीं हो सकता. एक ज़माने में लोग ऐसा ही सोचते थे. इसीलिए एकदो दशक पहले तक ऐसी घटनाएं कम ही देखने को मिलती थीं कि किसी लड़की को शादीशुदा पुरुष से प्यार हो जाए. उस ज़माने में लड़कियों के बुनियादी स्त्रियोचित गुणों में सौतिया डाह का स्थान सर्वोपरि था. यह कल्पना करना मुश्किल था कि अविवाहित लड़की किसी अन्य स्त्री के पति के साथ प्यार की पींगे बढ़ा सकती है.
  • लेकिन स्त्री और पुरुष की इस बनावट और उनके संबंधों की बुनावट में पिछले कुछ अरसे से काफ़ी बदलाव आया है. आज लड़कियां न केवल शादीशुदा पुरुष को प्यार के क़ाबिल समझ रही हैं, बल्कि समाज भी ऐसे संबंधों पर ऐतराज़ करता नज़र नहीं आ रहा. समाज और जीवन के ये फ़लस़फे यूं ही नहीं बदल गए. इनके लिए देशदुनिया में हो रहे तमाम परिवर्तन ज़िम्मेदार हैं.

लड़कियों का कामकाजी होनाः शादीशुदा पुरुष के प्रति लड़की के झुकाव, लगाव और प्यार की सबसे बड़ी वजह आज के ज़माने में लड़कियों का कामकाजी होना है. किसी ऑफ़िस में काम करती लड़की सुबह 10 से शाम 5 बजे तक का समय अपने पुरुष सहकर्मी के साथ बिताती है. लंबे समय तक साथ काम करना, चाय पीना, लंच करना, हंसीमज़ाक जैसी रोज़मर्रा की घटनाएं चाहेअनचाहे दिलों को क़रीब लाती हैं. काम के दौरान एकदूसरे का सहयोग करने, सीखनेसिखाने, सुखदुख बांटने का सिलसिला कब प्यार में तब्दील हो जाता है, पता ही नहीं चलता. इसके अलावा करियर की सीढ़ियां चढ़ने की चाहत भी प्यार का चोला पहनकर आती है.

सीरियल, हॉलीवुड व बॉलीवुड का असरः भारतीय महिलाओं की मनःस्थिति में आए इस बदलाव में धारावाहिकों की भी ख़ास भूमिका रही है. आजकल हर धारावाहिक में मसाला डालने के लिए जो तानेबाने बुने जाते हैं, उनमें विवाहित पुरुषों से रिश्ते बनानेवाली नायिकाओं ने आम युवतियों को भी प्रेरित किया है. आज लड़कियां शादी से पहले अथवा शादी के बाद भी अपनी मर्ज़ी से ऐसा कोई क़दम उठाने में नहीं झिझक रही हैं.

भारतीय महिलाओं के मन को इस रूप में ढालने में दूसरी सबसे अहम् भूमिका बॉलीवुड और हॉलीवुड के सितारों की भी रही है. नायकनायिकाओं को अपनी पसंद की ज़िंदगी जीने और अपनी पसंद की स्त्री/पुरुष को चुनने की आज़ादी ने धारावाहिकों में चल रही काल्पनिक कहानियों पर सच्चाई की मुहर लगा दी है. बदलाव आपके सामने है. आज से दो दशक पहले कोई युवती शादीशुदा पुरुष के साथ संबंध बनाकर अपने घर तो क्या, दूर किसी शहर में भी रहने की नहीं सोच सकती थी जबकि आज ऐसे रिश्ते के बावजूद लड़कियां अपने परिवार में ही रह रही हैं और कहीं से भी विरोध के स्वर उठते नहीं दिखते.

ग्लोबलाइज़ेशन व सूचना क्रांतिः सूचना क्रांति और वैश्‍वीकरण ने सारी दुनिया को एक गांव की शक्ल दे डाली है. दुनिया की सारी संस्कृतियां एकदूसरे को काफ़ी नज़दीक से देख रही हैं. टीवी चैनलों पर दूरदराज़ की ख़बरें पलभर में हर जगह पहुंच जाती हैं. ऐसे में पश्‍चिमी सभ्यता के खुलेपन का असर भारतीय समाज पर भी पड़ा है और भारतीय युवाओं और युवतियों के मन में भी खुली हवा में सांस लेने की चाहत जागी है. वह अपनी पसंद के पुरुष के साथ जीवन जीना चाहती है. वह पुरुष अविवाहित है या विवाहित, इससे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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Having An Affair With Married Man
बड़े धोखे हैं इस राह में

नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत जयचंद विवाहित है. उसकी पत्नी और बच्चे गांव में हैं. वह और उसके साथ काम करनेवाली वर्षा एक ही बिल्डिंग में रहते हैं. एक ही ऑफ़िस में साथसाथ काम करते हुए और एक ही बिल्डिंग में रहते हुए वर्षा न जाने कब जयचंद के मोहपाश में बंधकर उससे प्रेम करने लगी, वह जयचंद को अपना सर्वस्व मानने लगी. लेकिन क्या ऐसा जयचंद के साथ भी है? क्या वह भी वर्षा को उसी शिद्दत के साथ चाहता है? नहीं! वर्षा अब यह अच्छी तरह जान चुकी है. जिस प्रेम ने उसके अंदर कभी उमंगें भरी थीं, वह अब एक बोझ बनकर रह गया है. वर्षा इस असहनीय स्थिति से छुटकारा पाना तो चाहती है, लेकिन जयचंद से अलग होकर जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. इसलिए इस कशमकश भरे रिश्ते को प्यार के नाम पर निभाए जा रही है.

यह मात्र एक वर्षा और जयचंद की कहानी नहीं है. ऐसी न जाने कितनी वर्षाएं अपने प्यार से न जाने कितने जयचंदों की दुनिया हरीभरी कर रही हैं. लेकिन क्या उनकी अपनी दुनिया हरीभरी है, वे ख़ुद भी आश्‍वस्त होकर नहीं कह सकती हैं.

ज़ाहिर है, शादीशुदा पुरुष से प्यार की राह पर ख़तरे तो हर क़दम पर हैं, लेकिन ज़िंदगी की अजीब दास्तां का क्या ठिकाना? वह ऐसे मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां कोई ऐसा मिल जाए, जो हो तो चुका हो किसी और का, पर बना आपके लिए है. ऐसे में क्या करेंगी आप? क्या ज़िंदगी जीने के लिए कभीकभी ख़तरों से नहीं खेलना पड़ता?

भ्रमित जीवन की शिकार

दरअसल अविवाहित लड़कियां अपने प्यार को चाहे जितना सच्चा मानें, ख़ुद को चाहे जितना स्मार्ट समझें, शादीशुदा पुरुष की निगाह में वे बस इच्छाओं की पूर्ति का एक साधन होती हैं. अपनी समझ से जब वे प्यार कर रही होती हैं, तब वस्तुतः वे शिकार बन रही होती हैं. इसके कई कारण हैं

कम उम्र वाली लड़कियों की चाहत होती है कि पुरुष उन पर ध्यान दें, उनके काम की प्रशंसा करें, उनकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ करें. शादीशुदा पुरुष की अनुभवी आंखें उनकी इन चाहतों को बख़ूबी भांप जाती हैं. मन में तरहतरह के मंसूबे बांधे हुए पुरुष बाहरी तौर पर तो अच्छा बनते हुए व मदद करते हुए बड़े सहज भाव से लड़की की इच्छाएं पूरी करता है, पर साथ ही प्यार के नाम पर इसकी क़ीमत भी वसूलता जाता है.

स्त्री पुरुष से अपना पूरा वजूद, सारी भावनाएं जोड़ लेती है, लेकिन पुरुष इसका बस दिखावा करता है. स्त्री के दिल व भावनाओं से खेलते हुए पुरुष की असल ज़रूरत महज जिस्मानी होती है. स्त्री को इसका पता तब चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है. उसके सारे सपने चूरचूर हो जाते हैं और वह डिप्रेशन से घिर जाती है.

अपने प्रेम या यूं कहें कि प्रेमी की ख़ातिर स्त्री को जितना सहना पड़ता है, उसके मुक़ाबले शादीशुदा पुरुष को कोई त्याग नहीं करना पड़ता. प्रेम का खुलासा होने पर लड़की को परिवार, पैरेंट्स की नाराज़गी के साथ समाज की तोहमत और बदनामी भी झेलनी पड़ती है, जिससे आगे चलकर शादी में अड़चनें भी आती हैं. इतना सब कुछ झेलने के बाद आख़िर स्त्री को मिलता क्या है? दोहरी ज़िंदगी जीनेवाले फरेबी पुरुष का दिखावटी और झूठा प्रेम. ऐसा प्रेम जो दूर से तो नज़र आता है, लेकिन नज़दीक जाने पर मृगमरीचिका साबित होता है.

इंडियन साइको सोशल फ़ाउंडेशन की सायकोलॉजिस्ट डॉ. समीक्षा कौर शादीशुदा पुरुषों से बढ़ते प्यार के लिए करियर को लेकर आई जागरूकता और इसके कारण शादी में देर, दहेज व वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भागने की प्रवृत्ति को मानती हैं. वे इसे परिस्थितिवश हुआ समझौता करार देती हैं और कहती हैं, ”जहां तक पुरुषों की बात है, तो पार्टनर से विचारों में तालमेल का अभाव, पत्नी का गैरज़िम्मेदाराना रवैया जैसी चीज़ें उन्हें दूसरी स्त्री, ख़ासकर अपनी कलीग की ओर खींचते है. वहीं युवतियों में करियर को लेकर आई जागरूकता व वैवाहिक जीवन के झंझटों से दूर स्वच्छंद जीवन जीने की चाह ने ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं. करियर की भागमभाग में युवतियों को मानसिक, शारीरिक तृप्ति के लिए सुरक्षित बांहों की तलाश होती है, जहां उनकी महत्वाकांक्षाएं प्रभावित न होती हों. ऐसे में उन्हें साथ में काम करनेवाले विवाहित पुरुष ज़्यादा उपयुक्त दिखते हैं.”

डॉ. कौर ऐसे संबंधों में ठगे जाने की बात को भी स्वीकारती हैं. ”स्त्री पहले प्यार करती है और बाद में शारीरिक संबंधों के लिए तैयार होती है, जबकि पुरुष पहले शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में वह भावनात्मक रूप से जुड़ भी सकता है, नहीं भी. ऐसी युवतियां ऐसे क़दम उठा तो लेती हैं, लेकिन उनकी सुख की तलाश ख़त्म नहीं होती, क्योंकि उनकी कल्पना में जो प्रेम होता है, वह दूसरी स्त्री के रूप में कभी हासिल नहीं होता. उन्हें सौतिया डाह तो नहीं होता, मगर अपने साथी की पत्नी को नीचा दिखाने की चाह ज़रूर होती है. ऐसे संबंधों को अब मौन सामाजिक स्वीकृति भी मिल चुकी है. अभिभावक तो नहीं, पर भाईबहन ऐसी बातें आपस में शेयर कर ही लेते हैं. कुछ मामलों में मांबाप भी इन संबंधों को स्वीकार कर लेते हैं.”

संजय श्रीवास्तव

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OMG विराट को मिल गई है गुड न्यूज़… Congratulations! (Is Anushka Sharma Pregnant? Virat’s Tweet Has Gone Viral)

Is Anushka Sharma Pregnant, Virat’s Tweet

Is Anushka Sharma Pregnant, Virat’s Tweet

OMG विराट को मिल गई है गुड न्यूज़… विराट बनने वाले हैं पापा? Congratulations! (Is Anushka Sharma Pregnant? Virat’s Tweet Has Gone Viral)

आख़िर विराट को भी गुड न्यूज़ मिल ही गई… हाल ही में विराट ने एक ट्वीट किया, जिससे ये अन्दाज़ लगाना बिलकुल भी मुश्किल नहीं के वो और अनुष्का बेहद ख़ुश हैं क्यूँकि उनके लिए ये बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है… विराट ने ट्वीट में लिखा है- अभी बहुत कुछ हो रहा है, जल्द है आपको जानकारी दूंगा…

आख़िर हर पति-पत्नी यही तो चाहते हैं कि उनका परिवार ख़ुशियों से भरा हो… घर में नई ख़ुशियाँ आयें… तो आप भी विराट-अनुष्का की इस नई ख़ुशख़बरी में शामिल हो जायें और उन्हें बधाई दें… अगर आपको ये लग रहा है कि ये ख़बर ग़लत है तो हम आपको देंगे पूरे सबूत!

सबसे पहले विराट-अनुष्का को congratulations! हमारी तरफ़ से भी!

इस ख़बर की पुष्टि करने के लिए बस थोड़ा सा नीचे स्क्रोल करें और ख़ुद ही देखें विराट-अनुष्का की दुनिया को ख़ुशियों से भरने कौन क्यूट नन्हा मेहमान आ रहा है… और हमें इसका पता कैसे चला…

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मूर्खों का दिवस मुबारक हो… April Fool!

बुरा ना मानो आज तो हक़ बनता है… वैसे भी हमारी ख़बर झूठी नहीं… अब आपको बताते हैं कि क्या है ये ख़ुशख़बरी…

विराट ने दरअसल पिछले दिनों एक ट्वीट किया था कि अभी बहुत कुछ हो रहा है, जल्द है आपको जानकारी दूंगा… बस फिर क्या था
फैंस ने अंदाज़ा लगा लिया कि अनुष्का प्रेग्नेंट है. जी हां, यही नहीं, फैंस ने विराट को बधाइयां भी देनी शुरू कर दी.
जबकि सच ये है कि विराट ने अपने नए एंडोर्समेंट के बारे में यह ट्वीट किया था, जिसे लोगों ने अपने ही ढंग से समझ लिया.