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गुम होता प्यार… तकनीकी होते एहसास… (This Is How Technology Is Affecting Our Relationships?)

अभी कुछ दशकों पहले तक हाल यह था कि त्योहारों की आहट सुनाई देते ही घर-परिवार, समाज- हर जगह रौनक़ की झालरें लहराने लगती थीं, ख़ुशी, उमंग और ऊर्जा से भरे चेहरों की चमक व उत्साह यहां-वहां बिखर जाता था. क्या करना है, कहां जाना है, किसे क्या उपहार देने हैं और रसोई में से कितने पकवानों की ख़ुुशबू आनी चाहिए- सबकी सूची बनने लगती थी. महीनों पहले से बाज़ार के चक्कर लगने लगते थे और ख़रीददारी का लंबा सिलसिला  चलता था.

Technology and Relationships

समय बदला, हमारी परंपराओं, संस्कृति और सबसे ज़्यादा हमारी सोच पर तकनीक ने घुसपैठ कर ली. हर समय किसी-न-किसी रूप में तकनीक हमारे साथ रहने लगी और फिर वह हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. अब आलम यह है कि त्योहारों का आगमन होता है, तो माहौल में चहल-पहल बेशक दिखाई देती है, पर उसमें से उमंगवाला अंश गायब हो गया है और तनावभरा एक शोर यहां-वहां बिखरा सुनाई देता है. दूसरों से बढ़-चढ़कर दिखावा करने की होड़ ने त्योहारों के महत्व को जैसे कम कर दिया है. त्योहार अब या तो अपना स्टेटस दिखाने के लिए, दूसरों पर रौब जमाने के लिए कि देखो हमने कितना ख़र्च किया है, मनाया जाता है या फिर एक परंपरा निभाने के लिए कि बरसों से ऐसा होता आया है, इसलिए मनाना तो पड़ेगा.

फॉरवर्डेड मैसेजेस का दौर

पहले लोग त्योहारों की शुभकामनाएं अपने मित्र-संबंधियों के घर पर स्वयं जाकर देते थे. बाज़ारवाद के कारण पहले तो इसका स्थान बड़े और महंगे ग्रीटिंग कार्ड्स ने लिया, फिर ई-ग्रीटिंग्स ने उनकी जगह ली. ग्रीटिंग कार्ड या पत्र के माध्यम से अपने हाथ से लिखकर जो बधाई संदेश भेजे जाते थे, उसमें एहसास की ख़ुशबू शामिल होती थी, लेकिन उसकी जगह अब फेसबुक और व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजे जाने लगे हैं. ये मैसेज भी किसी के द्वारा फॉरवर्ड किए हुए होते हैं, जो आगे फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. कई बार तो बिना पढ़े ही ये मैसेजेस फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. उनमें न तो कोई भावनाएं होती हैं, न ही भेजनेवाले की असली अभिव्यक्ति. ये तो इंटरनेट से लिए मैसेज ही होते हैं. इसी से पता लगाया जा सकता है कि तकनीक कितनी हावी हो गई है हम पर, जिसने संवेदनाओं को ख़त्म कर दिया है.

रिश्तों की गढ़ती नई परिभाषाएं

परस्पर प्रेम और सद्भाव, सामाजिक समरसता, सहभागिता, मिल-जुलकर उत्सव मनाने की ख़ुुशी, भेदभावरहित सामाजिक शिष्टाचार आदि अनेक ख़ूबियों के साथ पहले त्योहार हमारे जीवन को जीवंत बनाते थे और नीरसता या एकरसता को दूर कर स्फूर्ति और उत्साह का संचार करते थे, पर आजकल परिवार के टूटते एकलवाद तथा बाज़ारवाद ने त्योहारों के स्वरूप को केवल बदला नहीं, बल्कि विकृत कर दिया है. सचमुच त्योहारों ने संवेदनशील लोगों के दिलों को भारी टीस पहुंचाना शुरू कर दिया है.

सोशल मीडिया के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने जहां हमारी एकाग्रता को भंग किया है, वहीं सामाजिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं. फोन कर बधाई देना भी अब जैसे आउटडेटेड हो गया है. बेवजह क्यों किसी को फोन कर डिस्टर्ब किया जाए, इस सोच ने मैसेज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाकर सामाजिकता की अवधारणा पर ही प्रहार कर दिया है. लोगों का मिलना-जुलना जो त्योहारों के माध्यम से बढ़ जाता था, उस पर विराम लग गया है. ज़ाहिर है जब सोशल मीडिया बात कहने का ज़रिया बन गया है, तो रिश्तों की संस्कृति भी नए सिरे से परिभाषित हो रही है.

हो गई है सामाजिकता ख़त्म

‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है’, यह वाक्य हमें बचपन से रटाया गया, परंतु तकनीक ने शायद अब हमें असामाजिक बना दिया है. सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व ने मनुष्य की सामाजिकता को ख़त्म कर दिया है. देखा जाए, तो सोशल मीडिया आज की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है. व्हाट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और न जाने क्या-क्या? स़िर्फ एक टच पर दुनिया के इस हिस्से से उस हिस्से में पहुंचा जा सकता है. देश-दुनिया की दूरियां सिमट गई हैं, लेकिन रिश्तों में दूरियां आ गई हैं.

संवादहीनता और अपनी बात शेयर न करने से आपसी जुड़ाव कम हो गया है और इसका असर त्योहारों पर पड़ा है. माना जाता था कि त्योहारों पर सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते थे. एक-दूसरे से गले मिलकर, मिठाई खिलाकर मन की सारी कड़वाहट ख़त्म हो जाती थी. पर अब किसी के घर जाना समय की बर्बादी लगने लगा है, इसलिए बहुत ज़रूरी है तो ऑनलाइन गिफ़्ट ख़रीद कर भेज दिया जाता है.

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Technology and Relationships
रसोई से नहीं उठती ख़ुशबू

आजकल प्रत्येक क्षेत्र में बाज़ारवाद हावी हो रहा है. इस बनावटी माहौल में भावनाएं गौण हो गई हैं. ऑनलाइन संस्कृति ने अपने हाथों से उपहार को सजाकर, उसे स्नेह के धागे से बांधकर और अपनी प्यार की सौग़ात के रूप में अपने हाथों से देने की परंपरा को पीछे धकेल दिया है. बाज़ार में इतने विकल्प मौजूद हैं कि ख़ुद कुछ करने की क्या ज़रूरत है.

एक समय था कि त्योहारों पर घर में न जाने कितने तरह के पकवान बनाए जाते थे. न जाने कितने नाते-रिश्तेदारों के लिए लड्डू, मठरी, नमकपारे, नमकीन, बर्फी, गुलाब जामुन और न जाने कितने डिब्बे पैक होते थे और यह भी तय किया जाता था कि कौन किसके घर जाएगा.

पर एकल परिवारों ने त्योहारों की रौनक़ को अलग ही दिशा दे दी. महंगाई की वजह से त्योहार फ़िज़ूलख़र्ची के दायरे में आ गए हैं. ऐसे में मिठाइयां या अन्य चीज़ें बनाने का कोई औचित्य दिखाई नहीं पड़ता. पहले के दौर में संयुक्त परिवार हुआ करते थे और घर की सारी महिलाएं मिलकर पकवान घर पर ही बना लिया करती थीं. लेकिन अब न लोगों के पास इन सबके लिए व़क्त है और न ही आज की हेल्थ कॉन्शियस पीढ़ी को वह पारंपरिक मिठाइयां पसंद ही आती हैं.

कोई घर पर आ जाता है, तो झट से ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर उनकी आवभगत करने की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाता है. कौन झंझट करे खाना बनाने का. यह सोच हम पर इसीलिए हावी हो पाई है, क्योंकि तकनीक ने जीवन को आसान बना दिया है. बस फ़ोन पर एक ऐप डाउनलोड करने की ही तो बात है. फिर खाना क्या, गिफ़्ट क्या, घर को सजाने का सामान भी मिल जाएगा और घर आकर लोग आपका हर काम भी कर देंगे. यहां तक कि पूजा भी ऑनलाइन कर सकते हैं. डाक से प्रसाद भी आपके घर पहुंच जाएगा. हो गया फेस्टिवल सेलिब्रेशन- कोई थकान नहीं हुई, कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी- तकनीक के एहसास ने मन को झंकृत कर दिया. बाज़ार से आई मिठाइयों ने मुंह का स्वाद बदल दिया और बाज़ारवाद ने उपहारों की व्यवस्था कर रिश्तों को एक साल तक और सहेजकर रख दिया- नहीं हैं इनमें जुड़ाव का कोई अंश तो क्या हुआ, एक मैसेज जगमगाते दीयों का और भेज देंगे और त्योहार मना लेंगे.

– सुमन बाजपेयी

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पहला अफेयर: पहले प्यार की ख़ुशबू (Pahla Affair: Pahle Pyar Ki Khushbu)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: पहले प्यार की ख़ुशबू (Pahla Affair: Pahle Pyar Ki Khushbu)

आज भी मेरे हाथों पर तेरे प्यार की मेहंदी का रंग बरक़रार है. वह सिंदूरी शाम. डूबते सूरज की पहली लाली, वो तेरा छत पर पतंग की डोर थाम बार-बार मुझे देख मुस्कुराना….वह मुस्कुराहट आज भी मेरे मन के भीतोें पर रंगीन चित्रों-सी उकरी है. तेरा वो दिलकश क़ातिलाना अंदाज़, बार-बार मुड़कर मुझे निहारना, मुझसे नज़रें मिलाना फिर चुराना सब कुछ याद है मुझे.

याद है तुम्हें, एक दिन अचानक शाम के धुंधलके में तुमने गली के मोड़ पर मेरा हाथ पकड़कर कहा था, ङ्गङ्घशालू मैं तुम्हें तहेदिल से चाहता हूं. मैं तुम्हारे दिल की बात सुनना चाहता हूं.फफ लगा था जैसे गोली की आवाज़ से कई परिंदे पंख फड़फड़ाकर उड़ चले हों. मेरा दिल ज़ोर से धड़क उठा था. मैं सुरमई अंधेरों की गुलाबी खनक में खो-सी गई थी. हाथ छुड़ाकर भागने की कोशिश में मेरी चुन्नी का कोना तुम्हारे हाथ में आ गया था. वही कमबख़्त कोना जैसे तुम्हारी ज़िंदगी का मक़सद बन गया.

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बहुत चाहा तुम्हारा दामन थाम ज़िंदगी का ख़ुशनुमा सफ़र तय करूं, लेकिन क़िस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था- मेरे पिता की असमय दिल के दौरे से मौत ने सब कुछ ख़त्म कर दिया. मैं टूटकर बिखर गई, हमारी मोहब्बत बिखर गई.

पिता ने मरते समय मां से वचन लिया था- मैं उनके बताए लड़के से विवाह करने को मज़बूर कर दी गई. वह एक लम्हा, तुम्हारा मेरा हाथ थामना मेरे लिए क़ातिलाना साबित हुआ. मां की आंखों में तैरती बेबसी की नावें और तुम्हारी आंखों में मोहब्बत का बेइंतहा समंदर मेरे लिए ज़िंदगी कशमकश का दरिया बन गई. तुम्हारी यादों की गहरी खाइयों में मैं गिरती चली गई.

याद है, मैंने तुम्हें ख़त लिखा था, यदि मेरा विवाह अन्यत्र हुआ तो मैं आत्महत्या कर लूंगी. छत पर तुमने जो पुर्जा फेंका था, आज वही मेरे पास तुम्हारी धरोहर है-

मेरी अपनी शालू,
ज़िंदगी जीने का नाम है, वे बुज़दिल होते हैं, जो ज़िंदगी से हार मान मौत को गले लगा लेते हैं. तुम्हें अभी ज़िंदगी की कई बहारें देखनी हैं. प्यार तो कुर्बानी मांगता है. अगर तुम्हें कुछ हो गया तो मैं किसके सहारे जीऊंगा, बोलो.
तुम्हारा पहला प्यार,
पीयूष

हमारे पहले प्यार की ख़ुशबूओं से लबालब वह पुर्ज़ा आज भी मेरे पास तुम्हारी अमानत है, जैसे- वह काग़ज़ का टुकड़ा न होकर छोटा-सा टिमटिमाता जुगनू हो, जो मेरी ज़िंदगी का रहबर बना है. शायद इसी के सहारे ही मैं ज़िंदगी के बीहड़ बियाबान जंगल लताड़ती आगे बढ़ती रही हूं. अब तो मैंने ज़िंदगी की हर मुश्किल से लड़ना सीख लिया है.

कांप उठती हूं मैं ये
सोचकर तनहाई में
मेरे चेहरे पे कहीं
पहला प्यार न
पढ़ ले कोई

– मीरा हिंगोरानी

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इन लव फूड्स से बनाएं अपनी सेक्स लाइफ को और भी स्पाइसी (Spice Up Your Sex Life With These Love Foods)

यूं तो आपने अनेक तरह के फूड के बारे में सुना होगा, जैसे- चाइनीज़ फूड, मुगलई फूड, इटालियन फूड, थाई फूड आदि. लेकिन क्या आपने ‘लव फूड’ (Love Food) के बारे में सुना है? आइए, ऐसे ही कुछ लव रेसिपीज़, लव फ्रूट्स और ड्रिंक्स के बारे में जानें मुंबई की डायटीशियन ममता शर्मा से.

Love Foods

लव रेसिपीज़

अ‍ॅायस्टर ड्रमस्टिक करी: ड्रमस्टिक यानी सहिजन में लव फीलिंग्स को बढ़ाने की ख़ूबियां होती हैं और अ‍ॅायस्टर के साथ ड्रमस्टिक मिलकर रोमांटिक फीलिंग्स को दोगुना कर देती है.

खीर: दूध और ड्राय़फ्रूट्स से बनी इस स्वीट डिश का मीठा टेस्ट मूड को हल्का करता है. ड्राय़फ्रूट्स का ए़फ्रोडिसियक (प्यार की कामना) नेचर दूध के साथ मिलकर लव फीलिंग्स को बढ़ाता है.

हलवा: सूजी या बेसन और ड्रायफ्रूट्स से बनी इस स्वीट डिश से लव हार्मोन रिलीज़ होने में मदद मिलती है और रोमांटिक फीलिंग्स बढ़ती है.

आइस्क्रीम विद नट्स: आइस्क्रीम में मिले नट्स- बादाम, अखरोट आदि रोमांटिक फीलिंग्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं.

चीज़ केक विद स्ट्रॉबेरी: स्ट्रॉबेरी को चीज़ केक के साथ मिलाकर भी रोमांटिक फूड के रूप में सर्व किया जाता है.

स्ट्रॉबेरी विद चॅाकलेट: स्ट्रॉबेरी के साथ चॅाकलेट मिलाकर सर्व करना सबसे अधिक रोमांटिक माना जाता है. चॅाकलेट इंसान के मूड को हल्का-फुल्का बनाता है, जबकि स्ट्रॉबेरी उत्तेजना को बढ़ाता है. इसलिए स्ट्रॉबेरी को शैंपेन के साथ सर्व करते हैं. इसे किसी अन्य ड्रिंक के साथ सर्व नहीं किया जाता.

चॅाकलेट: यह इंसान के मूड को जॅाली और फ्रेश करती है. इसलिए इसको ‘मूड चेंजिंग फूड’ भी कहते हैं. इससे व्यक्ति के अंदर रोमांटिक फीलिंग्स बढ़ती है.

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Sex Foods
लव फ्रूट्स

स्ट्रॉबेरी: इसमें विटामिन ‘सी’ होता है, जो एंटी-अ‍ॅाक्सीडेंट का काम करता है. यह एंटी-अ‍ॅाक्सीडेंट शरीर की मांसपेशियों और टिशू के लिए आवश्यक होता है.

केला: केले में पोटैशियम और विटामिन ‘बी’ होता है, जो सेक्सुअल हार्मोन बनाने में मदद करता है.

पपीता: इसमें ऐसे केमिकल होते हैं, जो फीमेल हार्मोन के प्रोडक्शन में मदद करतेे हैं और ये हार्मोन रोमांटिक फीलिंग्स बढ़ाने में सहायक होते हैं.

एवोकेडो: इसके आकार की वजह से इसे लव फूड कहते हैं. इसमें विटामिन ई और बी6 होता है, जो रोमांटिक फीलिंग्स और एनर्जी के लिए ज़रूरी है.

अंजीर: मॅाडेस्टी और सेक्सुअलिटी का प्रतीक है अंजीर. इसमें बहुत अधिक मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जो स्वस्थ शरीर और लव फीलिंग्स के लिए अनिवार्य हैं.

रसबेरी: गुलाब की फैमिली का होने के कारण इसे ‘फ्रूट अ‍ॅाफ़ लव’ भी कहते हैं. इसमें फ़ायबर, विटामिन ‘सी’ और मैग्नीज़ होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने और रोमांटिक फीलिंग्स को बढ़ाने के लिए ज़रूरी होते हैं. इसका प्रयोग केक, शेक और आइस्क्रीम में किया जाता है

अनार: इसको फ़र्टिलिटी का प्रतीक मानते हैं. इसका प्रयोग कस्टर्ड और शेक के साथ किया जाता है. इसमें आयरन होता है, जो मेल हार्मोन के लिए अनिवार्य होता है.

लव वेजीटेबल्स

स्वीट पोटैटो: इसमें पोटैशियम होता है, जो महिलाओं में रोमांटिक फीलिंग्स को बढ़ाने में सहायक होता है. इसे ज़्यादा नमक के साथ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि नमक पोटैशियम के असर को कम कर देता है.

ड्रायफ्रूट्स

पाइन नट्स: इसको न्यूट्रीशन का ‘पावर हाउस’ कहते हैं, क्योंकि इसकी न्यूट्रीशियस वैल्यू बहुत अधिक होती है. इसका सेवन भी प्यार की भावनाओं को बढ़ाता है.

अखरोट: इसमें आर्जीनीन होता है. यह एक अमीनो एसिड है, जो मेल हार्मोन के प्रोडक्शन में मदद करता है. इसका प्रयोग केक, शेक आदि में किया जाता है.

बादाम: इसमें आयरन, मैग्नीज़ और विटामिन्स होते हैं, जो लव फीलिंग्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं.

– अभिषेक शर्मा

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शादीशुदा ज़िंदगी में कैसा हो पैरेंट्स का रोल? (What Role Do Parents Play In Their Childrens Married Life?)

कहते हैं, घर की ख़ुशहाली व आपसी रिश्तों की मज़बूती में पैरेंट्स का आशीर्वाद, सहयोग व प्यार काफ़ी मायने रखता है. लेकिन जब बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी में पैरेंट्स का सहयोगपूर्ण रवैया दख़लअंदाज़ी-सा लगने लगे, तो उनकी भूमिका सोचनीय हो जाती है. ऐसे में क्या करें पैरेंट्स? आइए, जानते हैं.

Childrens Married

आज के बदले माहौल में पति-पत्नी की विचारधारा काफ़ी बदल गई है. शादी के बाद पति-पत्नी अलग घर बसाना चाहते हैं. स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता दोनों ही उनके लिए अहम् हैं. सब कुछ वो ख़ुद ही करना चाहते हैं. लेकिन ऐसे एकल परिवारों में भी समय-असमय पैरेंट्स या बुज़ुर्गों की ज़रूरत आन ही पड़ती है और पैरेंट्स को भी उनकी मदद  करनी पड़ती है, फिर चाहे वो ख़ुशी से हो या कर्त्तव्यबोध के कारण. ऐसी स्थिति आज के पैरेंट्स को दुविधा में डाल रही है. वे समझ नहीं पाते हैं कि आत्मनिर्भर बच्चों की ज़िंदगी में उनका क्या स्थान है? उनकी क्या भूमिका
होनी चाहिए?

अधिकतर पैरेंट्स के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. उनकी हर संभव मदद करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है, तब पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं. बच्चों को अपनी ज़िंदगी ख़ुद संभालनी चाहिए. पैरेंट्स से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

देखा गया है कि पैरेंट्स को जब विवाहित बच्चों की ज़िंदगी में परेशानियां व असुविधाएं दिखाई देती हैं, तब कभी तो वे तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं और कभी-कभी उन्हें समय व हालात के भरोसे छोड़ अपना हाथ खींच लेते हैं. ख़ासकर तब, जब ज़रूरत आर्थिक मदद की होती है.

काफ़ी समय पहले कोलकाता की एक एज्युकेशन रिसर्च संस्था अल्फा बीटा ओमनी ट्रस्ट द्वारा एक सर्वे किया गया था, जिसमें लगभग 200 पैरेंट्स से बातचीत की गई थी. 150 से भी ज़्यादा पैरेंट्स का कहना था- यदि संभव हो और सहूलियत हो, तो हर प्रकार की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे तो हमेशा ही हमारे लिए बच्चे रहेंगे. साथ ही उनका मानना था कि शादीशुदा ज़िंदगी का शुरुआती दौर कई बार मुश्किलों व असंतुलन से भरा होता है. कई प्रकार के पारिवारिक व भावनात्मक एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. कभी-कभी अनचाहे आर्थिक संकट भी ज़िंदगी को कठिन बना देते हैं. ऐसे में आर्थिक सहायता से ज़िंदगी आसान व ख़ुशहाल हो सकती है. दूसरे मत के अनुसार, शादी तभी की जानी चाहिए, जब व्यक्ति शादी के बाद आनेवाली हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, आर्थिक रूप से सुरक्षित व ठोस हो. बच्चों को पढ़ाना-लिखाना, ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार करना पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है. उसके बाद पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी ख़त्म. फिर तो बच्चों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पैरेंट्स की देखभाल करें.

समाजशास्त्री डॉ. कामेश्‍वर भागवत का मानना है कि पैरेंट्स हमेशा ही पैरेंट्स रहते हैं. अपने बच्चों की ज़िंदगी में हमेशा ही उनकी भूमिका बनी रहती है. कभी मुख्य, तो कभी सहयोगी के तौर पर. इसलिए न तो पूरी तरह इनसे अलग हों और न ही रोज़मर्रा की हर बात में अपनी राय दें. यानी रास्ता बीच का होना चाहिए. वैसे भी भारतीय परिवार एक कड़ी की तरह जुड़े रहते हैं, एक तरफ़ हम अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पैरेंट्स के साथ जुड़े रहकर उनके प्रति दायित्व निभाते हैं. दरअसल शेयरिंग व केयरिंग की भावना ही परिवार है. पैरेंट्स का रोल कभी ख़त्म नहीं होता है, बस उनका स्वरूप बदल जाता है. आर्थिक योगदान के अलावा भी विवाहित बच्चों के जीवन में पैरेंट्स की एक सुखद भूमिका हो सकती है.

–    पति-पत्नी यदि अकेले व समर्थ हैं, तो भी उन्हें अपने पैरेंट्स के भावनात्मक सहयोग, उनके प्यार व आशीर्वाद की ज़रूरत होती है.

–    पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो बच्चे की सुरक्षा व देखभाल की ज़िम्मेदारी लेकर आप उन्हें चिंतामुक्त कर सकते हैं. पैरेंट्स की मदद से वे लोग अपना काम बेहतर तरी़के से कर सकेंगे.

–   तकलीफ़ या बीमारी के दौरान आपका समय व अनुभव उनके लिए किसी वरदान से कम न होगा.

–   तनाव व संघर्ष के दौरान आपका भावनात्मक सहयोग व ज़िंदगी के अनुभव उन्हें संबल व हौसला प्रदान कर सकते हैं.

–   बच्चों को स्कूल से लाना व छोड़ना प्रायः ग्रैंड पैरेंट्स को भी अच्छा लगता है और ग्रैंड चिल्ड्रेन भी दादा-दादी का साथ एंजॉय करते हैं.

–   बच्चों में आध्यात्मिक व नैतिक गुणों तथा शिक्षा की शुरुआत भी ग्रैंड पैरेंट्स द्वारा बेहतर रूप से होती है.

–   आज अकेला बच्चा हर समय टीवी, कंप्यूटर, प्ले स्टेशन जैसे गैजेट्स से चिपका रहता है, ऐसे में आपका साथ व मार्गदर्शन  उसे समय का बेहतर उपयोग करना सिखा सकता है.

–    बच्चे जिज्ञासु होते हैं, उनकी जिज्ञासा ग्रैंड पैरेंट्स बहुत अच्छी तरह से शांत कर सकते हैं.

–    इन बातों के अलावा आपके विवाहित बच्चों की और भी अनेक व्यक्तिगत समस्याएं व ज़रूरतें हो सकती हैं, जिनका समाधान आपकी सहयोगी भूमिका से हो सकता है और बच्चों की विवाहित ज़िंदगी ख़ुशहाल हो सकती है.

–    आर्थिक सहायता निश्‍चय ही जटिल व निजी मामला है. इससे हालात सुधर भी सकते हैं और पैरेंट्स बुढ़ापे में स्वयं को सुरक्षित भी कर सकते हैं.

याद रखें, बच्चे आपके ही हैं, फिर भी पराए हो चुके हैं. एक नए बंधन में बंध चुके हैं. एक नई दुनिया बसा रहे हैं. तो बस, पास रहकर भी दूर रहें और दूर रहकर भी अपने स्पर्श का एहसास उन्हें कराते रहें.

आपकी सहयोगी भूमिका आपके शादीशुदा बच्चों को कैसी लग रही है, यह जानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें-

–    क्या बच्चे आपकी मदद से ख़ुश हैं? आपकी भूमिका को सराहते हैं? आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं? यदि नहीं, तो आप मदद नहीं दख़ल दे रहे हैं.

–     अब आपके बच्चे अकेले नहीं हैं, उनकी ज़िंदगी उनके जीवनसाथी के साथ जुड़ी है. क्या उनके साथी को भी आपका रोल पसंद है? यदि नहीं, तो एक दूरी बनाना बेहतर होगा.

–     मदद के दौरान क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका फ़ायदा उठाया जा रहा है या आपको इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसी स्थिति कुंठा को जन्म देती है.

–     मदद के दौरान होनेवाला आपका ख़र्च आपको परेशानी में तो नहीं डाल रहा है? यदि ऐसा है तो हाथ रोक लें, वरना पछतावा होगा.

–     उनकी व्यस्तता को कम करने के लिए, उनकी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी को जीना न छोड़ें. अपनी दिनचर्या, अपनी हॉबीज़ पर भी ध्यान दें.

–     बिना मांगे, आगे बढ़कर ख़ुद को ऑफ़र न करें, न ही उनकी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी करें, वरना रिश्ते बिगड़ सकते हैं, आपके साथ भी और आपस में उनके भी.

–     हर व़क़्त उनकी ज़िंदगी में झांकने की कोशिश न करें. जब वो शेयर करना चाहें, तो खुले मन से आत्मीयता बरतें.

–     अपनी चिंताओं व कुंठाओं का रोना भी हर व़क़्त उनके सामने न रोएं. चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों या पारिवारिक रिश्तों की कड़वाहट.

–     बदलते समय के साथ अपने व्यवहार व सोच में परिवर्तन लाएं, ताकि बच्चे आपसे खुलकर बात कर सकें.

 

– प्रसून भार्गव

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दिलीप कुमार-मधुबाला- एक अधूरी प्रेम कहानी, जो कोर्ट में जाकर ख़त्म हुई! (Tragic Love Story: How Dilip Kumar Confessed His Love For Madhubala In A Courtroom)

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Dilip Kumar and Madhubala
बॉलीवुड (Bollywood) की कुछ लव स्टोरीज़ (Love Stories) ऐसी होती हैं, जो हमारे लिए एक पहेली बन जाती हैं. उन्हीं में से एक लव स्टोरी थी- दिलीप कुमार और मधुबाला की. सिल्वर स्क्रीन की ब्यूटी क्वीन ने जब बॉलीवुड के इस किंग को पहली बार देखा, तब से ही दोनों एक-दूसरे के लिए स्पेशल फील करने लगे थे. फिल्म सेट पर हुई यह मुलाकात अब रियल लाइफ की प्रेम कहानी में तब्दील होने लगी थी. मधुबाला ने दिलीप कुमार की हिचकिचाहट को देखते हुए खुद ही पहल की और उन्हें प्रपोज़ किया. दिलीप तो बस इसी पल के इंतज़ार में थे. दोनों ने एक-साथ कई हिट फिल्में की और दोनों की जोड़ी को भी लोग पसंद करते थे, लेकिन मधुबाला के पिता को यह प्रेम रास नहीं आया.

]मधुबाला के पिता उन्हें शुरू से ही काफ़ी अनुशासन में रखते थे. वो शूटिंग के व़क्त हमेशा सेट्स पर उनके साथ साये की तरह रहते थे. दिलीप कुमार को मधुबाला के पिता का यह रवैया पसंद नहीं था. दिलीप मधुबाला से शादी करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह शर्त थी कि मधुबाला शादी के बाद फिल्में व अपने पिता से भी दूरी बना लें. मधुबाला को यह बात पसंद नहीं आई.

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मधुबाला के पिता मधुबाला के करियर से संबंधित फैसले ख़ुद ही लेते थे. उन्होंने फिल्म नया दौर के दौरान दिलीप कुमार के साथ आउटडोर शूटिंग पर मधुबाला को जाने से रोक दिया था. नतीजा, मधुबाला की जगह यह फिल्म वैजंतीमाला की मिल गई और यह विवाद इतना बढ़ा कि मामला कोर्ट तक जा पहुंचा.

मधुबाला के पिता ने फिल्म के निर्देशक बी आर चोपड़ा पर केस कर दिया, क्योंकि उन्हें चोपड़ा का यह रवैया पसंद नहीं आया कि एक विज्ञापन के ज़रिये मधु को फिल्म से बाहर व वैजंतीमाला को फिल्म में लेने की बात कही गई थी.
कोर्ट में गवाही के दौरान दिलीप कुमार को भी बुलाया गया और दिलीप ने भी बी आर चोपड़ा के पक्ष में ही गवाही दी.

इस दौरान मधु व दिलीप के प्रेम की बात भी सबके सामने आई और कोर्ट में ही दिलीप कुमार ने यह स्वीकारा की वो मधु से प्यार करते हैं, लेकिन इस घटना ने दोनों को अलग व दूर कर दिया था.

यहां तक कि फिल्म मुग़ले आज़म की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच बातचीत तक बंद थी, हालांकि फिल्म पूरी हुई व हिट भी, लेकिन एक सच्ची मोहब्बत की दास्तान हमेशा के लिए अधूरी ही रह गई.

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क्यों घट रहा है पुरुषों में स्पर्म काउंट? (What Are The Reasons For Low Sperm Count In Men?)

पिछले 40 सालों में पुरुषों (Men) के स्पर्म काउंट (Sperm Count) में काफ़ी गिरावट आई है और यह गिरावट दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है. ऐसा नहीं है कि स़िर्फ भारतीय पुरुष ही इसके शिकार हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के पुुरुषों को प्रभावित कर रहा है. क्या हैं इसके कारण और बचाव के उपाय, आइए जानते हैं. 

Low Sperm Count In Men

क्या कहते हैं आंकड़े?

–     वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (WHO) के अनुसार, पिछले 40 सालों में पूरी दुनिया के पुरुषों के स्पर्म काउंट और क्वालिटी में भारी कमी आई है.  पहले हर सैंपल में जो स्पर्म काउंट 60 मिलियन होता था, अब वो महज़ 20 मिलियन रह गया है.

–     हमारे देश में हर साल 12-18 मिलियन कपल्स इंफर्टिलिटी के शिकार हो रहे हैं, जिसमें 50% पुरुष शामिल हैं.

–     आज यह स्थिति आ गई है कि हर छह में से एक कपल इंफर्टिलिटी का शिकार हो रहा है.

–     साथ ही यह बहुत गंभीर बात है कि हर साल पुरुषों के स्पर्म काउंट में 2% की कमी देखी जा रही है. ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही सालों में इंफर्टिलिटी एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाएगी.

क्यों घट रहा है स्पर्म काउंट?

हमारी बदलती लाइफस्टाइल और वर्क कल्चर ने बहुत कुछ बदल दिया है. जिस तेज़ी से पुरुषों के स्पर्म काउंट में कमी आ रही है, उसके लिए बहुत हद तक ये चीज़ें ही ज़िम्मेदार हैं. इसके अलावा और क्या हैं इस कमी के कारण, आइए देखते हैं.

–     दिन-ब-दिन बढ़ता मोटापा

–     अनहेल्दी लाइफस्टाइल

–     फिज़िकल एक्टिविटी की कमी

–     बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनना

–     वर्कप्लेस पर बढ़ता प्रेशर

–     स्मोकिंग और अल्कोहल

–     बहुत ज़्यादा इमोशनल स्ट्रेस

–     हार्मोंस का असंतुलन

–     इनडोर व आउटडोर पोल्यूशन

–     लगातार लैपटॉप पर काम करने से टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ता है, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन पर असर पड़ता है.

–     कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी ऐसा हो सकता है.

–     पर्यावरण में बढ़ती गर्मी इसका एक और कारण है.

पहचानें इसके लक्षण

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आता है, तो तुरंत किसी एक्सपर्ट सेे संपर्क करें. याद रखें, स्पर्म काउंट की समस्या को जितनी जल्दी सुलझाएंगे, ज़िंदगी उतनी आसान होगी. ग़ौर करें इन लक्षणों पर.

–     इजैकुलेशन में द़िक्क़त महसूस होना.

–     बहुत कम सीमेन का निकलना.

–     इरेक्टाइल डिस्फंक्शन.

–     सेक्सुअल डिज़ायर में कमी.

–     साथ ही बार-बार सांस संबंधी समस्या होना.

–     चेहरे और शरीर पर बालों का बढ़ना.

–     इंफर्टिलिटी से जूझ रहे पुरुषों के सूंघने की शक्ति में भी कमी देखी जाती है.

क्या है सामान्य स्पर्म काउंट?

आमतौर पर एक मि.ली. सीमेन में 15 मिलियन या फिर हर सैंपल में 39 मिलियन स्पर्म काउंट सामान्य माना जाता है. दूसरे शब्दों में कहें, तो एक मि.ली. सीमेन में 10 मिलियन से कम स्पर्म काउंट असामान्य माना जाता है और ऐसे पुरुषों को इंफर्टिलिटी का इलाज कराना पड़ता है.

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Low Sperm Count In Men
कैसे बढ़ाएं स्पर्म काउंट?

–     रोज़ाना 30-45 मिनट्स की फिज़िकल एक्टीविटी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करती है.

–    एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, वेट लॉस और स्पर्म काउंट की बढ़ोत्तरी में डायरेक्ट लिंक देखा गया है. बेहतर होगा कि वेट लॉस पर ध्यान दें.

–     स्मोकिंग ब्लड वेसल्स को डैमेज करती है, जिससे गुप्तांगों में भी ब्लड फ्लो में द़िक्क़त आती है. साथ ही ये आपकी कामोत्तेजना को भी प्रभावित करती है, इसलिए बेहतर होगा कि जल्द-से-जल्द स्मोकिंग छोड़ दें.

–     लो स्पर्म काउंट के बारे में अपने डॉक्टर को बताएं, हो सकता है उनके द्वारा दी गई दवाइयों के कारण ऐसा हो रहा हो.

–     बढ़ते हुए स्ट्रेस के कारण शरीर रिप्रोडक्शन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाता है, इसलिए ़तनाव को कम करने की कोशिश करें.

–     ताज़े फल, सब्ज़ियां और साबूत अनाज अपने डायट में शामिल करें. कोशिश करें कि जंक फूड या पैक्ड फूड ज़्यादा न खाएं.

–     द जर्नल रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी एंड एंडोक्रेनोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, पुरुषों के विटामिन डी और कैल्शियम के लेवल और स्पर्म काउंट का सीधा संबंध है, इसलिए अगर विटामिन डी की कमी रही, तो कपल को कंसीव करने में द़िक्क़त महसूस होती है. अपने शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम का लेवल बनाए रखें.

–     रेग्युलर एक्सरसाइज़ और अच्छी नींद से भी स्पर्म काउंट बढ़ता है.

–     लंबे समय तक एक ही जगह पर न बैठें. इससे पुरुष गुप्तांग में गर्मी बढ़ जाती है, जो स्पर्म प्रोडक्शन में रुकावट पैदा कर सकता है.

–     कोशिश करें कि ज़्यादा-से -ज्यादा हेल्दी फैट्स लें. ओमेगा3 और ओमेगा6 इसमें काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है. आप चाहें, तो ओमेगा3 के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं.

अपनाएं ये फर्टिलिटी फूड्स

अंडा: स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए यह बेस्ट फूड माना जाता है. अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन ई होता है, जो स्पर्म को फ्री रैडिकल्स से बचाते हैं.

केला: विटामिन ए, बी1 और सी के गुणों से भरपूर केला स्पर्म प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है. इसमें ब्रोमेलेन नामक नेचुरल एंटी इंफ्लेमेट्री एंज़ाइम होता है, जो स्पर्म की गुणवत्ता और गतिशीलता कोे बढ़ाता है.

पालक: फॉलिक एसिड के गुणों से भरपूर पालक हेल्दी स्पर्म काउंट बढ़ाने में उपयोगी साबित होता है. अगर आपके शरीर में फॉलिक एसिड की कमी होगी, तो अनहेल्दी स्पर्म बनेंगे, जो आपके किसी काम नहीं आएंगे.

मेथी: लो स्पर्म काउंट और कामोत्तेजना को बढ़ानेवाला यह पारंपरिक घरेलू नुस्ख़ा है. एक शोध के मुताबिक़, लगातार 12 हफ़्तों तक मेथी के सेवन से स्पर्म काउंट और सीमेन में बढ़ोत्तरी देखी गई है.

अनार: यह एक बेहतरीन फर्टिलिटी बूस्टर माना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स ब्लड फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं. यह स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों में लाभदायक है.

लहसुन: यह एक बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर है. विटामिन बी6 और सेलेनियम के गुणों से भरपूर लहसुन स्पर्म प्रोडक्शन को बढ़ाता है.

ब्रोकोली: इसमें मौजूद फॉलिक एसिड फर्टिलिटी दूर करने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, अगर रोज़ खाने में इसे शामिल किया जाए, तो आपका स्पर्म काउंट 70% तक बढ़ सकता है.

डार्क चॉकलेट: रात के खाने के बाद अगर आप और आपके पार्टनर स़िर्फ एक टुकड़ा डार्क चॉकलेट खाएं, तो स्पर्म काउंट की समस्या जल्द ही ख़त्म हो जाएगी. इसमें मौजूद एल-आर्जिनाइन स्पर्म प्रोडक्शन में काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.

अखरोट: ब्रेन फूड के नाम से मशहूर अखरोट स्पर्म काउंट बढ़ाने में भी मदद करता है. ओमेगा3 फैटी एसिड्स से भरपूर अखरोट स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाने में मददगार साबित होता है.

टमाटर: बेहतरीन फर्टिलिटी फूड्स में शुमार टमाटर इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है. इसमें मौजूद लाइकोपीन स्पर्म की बनावट और गतिशीलता में काफ़ी मदद करता है. अपने रोज़ाना के खाने में टमाटर शामिल करें.

गाजर: बीटा कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर गाजर स्पर्म को फ्री रैडिकल्स से बचाती है, जिससे स्पर्म जल्दी नष्ट नहीं होते. यह उनकी गतिशीलता बढ़ाने में भी सहायक होती है.

अश्‍वगंधा: सालों से हमारे देश में इसे आयुर्वेदिक दवा के रूप में लिया जाता रहा है. अश्‍वगंधा न स़िर्फ टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को बढ़ाता है, बल्कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को भी दूर करता है.

कद्दू के बीज: अमीनो एसिड्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर कद्दू के बीज पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ाते हैं. यह हेल्दी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे उनकी गतिशीलता भी बढ़ जाती है.

– सुनीता सिंह

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पहला अफेयर: रहें न रहें हम… (Pahla Affair: Rahen Na Rahen Hum)

Love Kahaniya

पहला अफेयर: रहें न रहें हम… (Pahla Affair: Rahen Na Rahen Hum)

हमारा पहला प्यार अधूरा ही रहा किसी सपने की मानिंद, पर फिर भी उसकी रेशमी छुअन है जो दिल के किसी कोने में छुपी है मेरी जीवनशक्ति बनकर. बात 8 वर्ष पहले की है. मैं दिल्ली से ग्रेजुएशन फ़ाइनल ईयर की परीक्षा देने के बाद देहरादून ङ्गपर्यावरण संरक्षण वर्कशॉपफ में भाग लेने आई थी. मेरा अंतर्मुखी कवि मन देहरादून के प्राकृतिक सौंदर्य का साथ पा रोमांचित हो उठा. हर शाम को लेक्चर अटेंड करने के बाद मैं राजपुर की वादियों में पहुंच जाती.

वहीं प्रकृति को निहारते मेरी मुलाक़ात हुई थी श्यामल से. वह डॉक्टर था. कानपुर में प्रैक्टिस करता था और लंबी छुट्टी पर देहरादून आया था. देखने में सुदर्शन और मासूम, पर बेहद शरारती. एक पल चुप नहीं बैठता था, पर दिल बेहद साफ़था उसका.

हम जल्दी ही अच्छे दोस्त बन गए. हम दोनों के विपरीत स्वभावों के बावजूद हमें बांध रखा था हमारे प्रकृति प्रेम, गज़लों-शायरी के शौक़ और शायद एक अनकही-सी समझ ने. श्यामल को क़रीब से जानकर लगा कि वह उतना सतही नहीं जितना लगता था. जीवन को बहुत करीब से देखा-समझा था उसने.

कभी-कभी उसकी खनकती हंसी में एक उदासी की ख़ुशबू भी आ जाती थी. तब लगता था जैसे उसने कोई आंसू कहीं छुपा रखा है. मैंने उससे इस बारे में पूछा भी, पर वो हर बार बात टाल जाता. वो अपने बारे में जल्दी बात नहीं करता था. बस, कभी-कभी यूं ही लगता कि वो कुछ कहना चाहता था, पर ख़ामोशी ही अपनी ज़ुबां आप बन जाती.

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धीरे-धीरे मेरे जाने का दिन क़रीब आ रहा था. कई बार एक अजीब-सा एहसास होता कि मैं श्यामल को ही नहीं, ख़ुद को भी पीछे छोड़ जा रही हूं. जिस दिन मुझे वापस जाना था, उस दिन श्यामल मेरे लिए पीले गुलाब के फूल लाया था. साथ में एक चिट थी जिस पर लिखा था-
आपसे मिलकर तमन्ना इतनी रही, एक बार फिर मिलें अगर ज़िंदगी रही… पढ़कर मैं तड़प उठी थी और श्यामल से वादा लिया था कि वो जल्दी ही मुझसे मिलने दिल्ली आएगा. उसने उदास आंखों से वादा कर दिया.

फिर मैं दिल्ली आ गई, पर श्यामल की यादें ज़ेहन में ताज़ा थीं बिल्कुल महकते गुलाबों की तरह. पर उसका न फ़ोन आया, न कोई चिट्ठी. मैं मोबाइल ट्राई करती तो वो भी ऑफ़ मिलता. मैं बहुत बेचैन थी. तभी एक दिन श्यामल की बहन का फ़ोन आया. उसने जो बताया उससे तो जैसे मेरी दुनिया ही बिखर गई.

श्यामल कैंसर के लास्ट स्टेज पर था, जब मुझसे मिला. उसने कहा था कि उसके आख़िरी दिनों में मेरी मुस्कान ने ही
उसे मौत को हंसते-हंसते गले लगाने की ताक़त दी थी. ज़िंदगी से मौत के बीच का सफ़र ख़ुशगवार बनाने के लिए उसने मेरा शुक्रिया अदा किया था.

श्यामल चला गया था और मेरे पास ज़िंदगी गुज़ारने के लिए थी उसकी शायरी और ढेरों महकती यादें. उसके बाद मैं देहरादून में नौकरी ढूंढ़ यहीं बस गई, उसकी मौजूदगी के एहसास के साए में ज़िंदगी बिताने की ख़्वाहिश लिए. बस, अक्सर फ़िज़ां में उसका एक शेर कौंध जाता है.

रोओ कुछ इस तरह कि अश्क़ न बहें, दर्द सहो इस तरह कि ज़ख़्म न रहे
लबों पे आह, आंखों में पानी, रोको कुछ इस तरह कि कोई ग़म न कहे

– दीपाशिखा श्रीवास्तव

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सफल अरेंज मैरिज के एक्सक्लूसिव 15 मंत्र (15 Exclusive Relationship Mantra For Successful Arrange Marriage)

दादी-नानी या माता-पिता के समय की अरेंज मैरिज की सफलता का फ़ॉर्मूला आज के दौर में फिट नहीं बैठता. मॉडर्न युग में क्या हैं सफल अरेंज मैरिज के मंत्र, आइए जानते हैं. कहते हैं शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और हर किसी के लिए कोई न कोई जीवनसाथी ज़रूर होता है. पर आज की युवापीढ़ी इस कथन में अधिक विश्‍वास नहीं करती. वह तो लव मैरिज को अधिक महत्व देती है. लेकिन मेट्रो सिटीज़ व खुले विचारोंवाले परिवारों को छोड़ दें, तो आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं और वैवाहिक जीवन भी सफल होता है. तो आइए, सफल अरेंज मैरिज के इन मंत्रों को जानें.

Relationship Mantra

1. शादी को सफल बनाने का मूल मंत्र है- प्यार, विश्‍वास, समझौता और सामंजस्य. धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझें, एडजस्ट होने के लिए व़क़्त और स्पेस दें. फिर देखें, किस तरह रिश्तों में मज़बूती आती है.

2. अरेंज मैरिज में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. अतः घबराहट होना स्वाभाविक है. यदि आप भी ऐसा महसूस करती हैं, तो कारण जानने की कोशिश करें. कई बार किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने की कल्पना, नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने का डर, वहां के तौर-तरीक़ों की चिंता आदि से मन डरता है. मन की घबराहट को पार्टनर के साथ शेयर करें. उसके ज़रिए परिवार के बारे में जानने की कोशिश करें. पार्टनर के साथ सहज हो जाने पर परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी नहीं होगी.

3. अरेंज मैरिज का अर्थ है- ज़्यादा ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा अपेक्षाएं. दोनों ही पार्टनर्स पर उन सारी बातों पर खरा उतरने का दबाव रहता है. दबाव ज़रूर लें, लेकिन इतना नहीं कि आपसी तालमेल ही गड़बड़ाने लगे.

4. जरूरी नहीं कि पार्टनर को आपकी हर पसंद-नापसंद में रुचि हो या आप दोनों के विचार एक जैसे हों. कभी-कभी विपरीत स्वभाववाले पार्टनर्स भी बहुत ख़ुश रहते हैं.

5. हो सकता है नए परिवार की सोच आपके जीवन मूल्यों को सही न माने और आपको लगातार बताया जाए कि इस परिवार में ऐसा ही होता है. निश्‍चय ही ऐसे माहौल में आप परेशान हो जाएं, घुटन भी हो, पर रिलैक्स! शादी में सामंजस्य व अनुकूलता भी होती है. ऐसी स्थिति में पार्टनर से सही शब्दों के चुनाव के साथ सौम्य लहजे में बात करें. उन्हें अपनी उलझन बताएं, ताकि परिवार के किसी भी सदस्य को नाराज़ किए बिना समस्या का हल निकल आए.

6. शुरू-शुरू में पार्टनर या परिवार के सदस्यों की किसी भी बात, कमेंट या व्यवहार को दिल पर न लें. न ही जैसे को तैसा वाली पॉलिसी अपनाएं, बल्कि जो लोग परेशानियां पैदा करते हैं, उनसे संभलकर रहें. सूझबूझ से स्थिति को संभालें. निश्‍चय ही ऐसा व्यवहार आप दोनों को ख़ुशियां देगा. एक-दूसरे के क़रीब लाएगा.

7. परिवार में होनेवाली हर छोटी-छोटी बात की शिकायत पार्टनर से न करें, न ही बात-बात पर आंसू बहाएं. याद रहे, वो भी आपकी तरह ही ज़्यादा नहीं, तो थोड़ी-बहुत दुविधा से गुज़र रहा है.

8. प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है. अरेंज मैरिज में भी कभी तो देखते ही प्यार हो जाता है और कभी साथ चलते-चलते प्यार हो जाता है, वो भी ऐसा कि जीवन के हर आंधी-तूफ़ान से जूझने की ताक़त बन जाता है. प्यार देंगे, तो प्यार मिलेगा भी.

9. प्यार की नींव है विश्‍वास. पार्टनर पर विश्‍वास करें और उनके भरोसे को भी बनाए रखें. धैर्य से काम लें. पार्टनर या परिवार के सदस्यों की ग़लतियों के प्रति क्षमाशील बनें. जो बीज हम बोते हैं, वही फल हमें मिलता है.

10. शादी एक कमिटमेंट है, जहां आप अपनी बेफ़िक़्र दुनिया से निकलकर ज़िम्मेदारी, कमिटमेंट, त्याग, समझौतों के भंवर में घूमते रहते हैं. लेकिन यही बातें विवाह को मज़बूत बनाती हैं.

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Relationship Mantra

11. हो सकता है आप अपने नए परिवार के मुक़ाबले आर्थिक रूप से ज़्यादा संपन्न परिवार से हों, ज़्यादा स्मार्ट या हर तरह से बेहतर हों. लेकिन याद रहे, शादी किसी मुक़ाबले का प्लेटफॉर्म नहीं है. अतः तुलनात्मक विचारधारा को आड़े न लाएं. अब यह परिवार आपका है, इसे बेहतर बनाने में सहयोग दें.

12. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए संवाद सबसे मुख्य है. कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें. एक झूठ आपको मुसीबत में डाल सकता है. एक बार आपका झूठ पकड़ा गया, तो फिर से वह विश्‍वास पाना असंभव हो जाता है.

13. विवाह की सफलता के लिए दोनों परिवारों को जोड़कर रखना भी आपका व आपके पार्टनर का काम है. यह तभी संभव है जब दोनों परिवारों के प्रति स्नेह व आदर का समान भाव हो.

14. रिश्तों को बनाए रखने में मुस्कुराहट बड़ा काम करती है. आप ख़ुद भी आनंदित होते हैं और दूसरों का मन भी जीत लेते हैं.

15. इन सारी बातों के अलावा कुछेक व्यक्तिगत बातें भी हो सकती हैं, जिन्हें अपने ढंग से सुलझाकर विवाह को सफल बनाया जा सकता है.

– प्रसून भार्गव

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शादी से पहले दिमाग़ में आनेवाले 10 क्रेज़ी सवाल (10 Crazy Things Which May Bother You Before Marriage)

सगाई से शादी (Marriage) तक का समय लड़के-लड़की दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण होता है. भावी जीवन को लेकर जहां मन में कई रूमानी ख़्वाब व ख़्वाहिशें होती हैं, तो कुछ अनकही आशंकाएं और ऊटपटांग सवाल भी दिलोदिमाग़ में गूंजते रहते हैं. कौन-से हैं वे ऊटपटांग या क्रेज़ी सवाल, आइए जानते हैं.

Marriage Problems

लड़कियों के दिमाग़ में आनेवाले सवाल

शादी से पहले हर लड़की के मन में अपने भावी जीवन को लेकर एक तस्वीर बसी होती है, जहां सब कुछ बहुत रोमांटिक और परफेक्ट होता है, पर शादी से पहले मन में कुछ के्रज़ी सवाल भी कुलबुलाते हैं. कभी उसकी आदतों को लेकर, तो कभी अपनी. हो सकता है, आपके दिमाग़ में भी ये सवाल आए हों.

  1. क्या ये मेरे नखरे उठा पाएगा?

–    आमतौर पर लड़कियां नखरीली ही होती हैं, पर वो सभी से नखरे नहीं करतीं. उन्हें अच्छी तरह पता होता है कि कौन उनके नखरे बर्दाश्त कर सकता है और कौन नहीं.

–     बात जब शादी की होती है, तो उनके दिमाग़ में यह सवाल ज़रूर आता है कि क्या ये (भावी पति) मेरे नखरे उठा पाएगा? इसका जवाब जानने के लिए वो कभी-कभी अटपटी हरकतें भी करती हैं, जैसे- अपनी सहूलियत की जगह और समय के मुताबिक़ लड़के को मिलने बुलाना, ज़िद करके कुछ ख़रीदवाना, खाने-पीने में ज़िद करना आदि.

– यक़ीनन आपने भी शादी से पहले अपने मंगेतर के साथ ऐसी कोई ज़िद ज़रूर की होगी. इसमें कुछ ग़लत भी नहीं है. हर लड़की शादी से पहले श्योर होना चाहती है कि उसने जिस लड़के से शादी का निर्णय लिया है, वो पूरी तरह सही है या नहीं.

  1. नाराज़ हो गया, तो कैसे मनाऊंगी?

– शादी के रिश्ते में हंसी-मज़ाक, नोंक-झोंक और ताने-उलाहने तो आम बात हैं, पर कभी-कभी हंसी-मज़ाक या शरारत भारी भी पड़ जाती है, ऐसे में आपको उन्हें मनाने के लिए भी अभी से तैयार रहना होगा.

–  ‘रूठे-रूठे पिया मनाऊं कैसे…’  अच्छाजी मैं हारी चलो मान जाओ ना…’ ‘देखो रूठा ना करो, बात नज़रों की सुनो…’ जैसे कुछ एवरग्रीन बॉलीवुड गाने यहां आपकी मदद करेंगे. उन्हें गाकर सुनाएं या फिर गाना उन्हें व्हाट्सऐप कर दें. आपकी इस अदा पर वो ज़्यादा देर नाराज़ नहीं रह पाएंगे.

– थोड़ा रोमांटिक हो जाएं, तो गुलाब का फूल या चॉकलेट या फिर एक प्यारा-सा लव लेटर आपका काम बख़ूबी कर देंगे.

  1. क्या मुझे अपना ब्लैंकेट शेयर करना पड़ेगा?

रिंकू बचपन से अपने ब्लैंकेट को लेकर बहुत पज़ेसिव थी. कोई और अगर उसे इस्तेमाल कर ले, तो वो हंगामा कर देती थी, लेकिन जब उसकी शादी तय हुई, तो सबसे पहले उसके दिमाग़ में जो क्रेज़ी सवाल आया, वो ब्लैंकेट का ही था. हालांकि उसने इसका तोड़ निकाला. पति को इतने प्यार से अपनी बात समझाई कि उन्होंने कभी उसके और उसके ब्लैंकेट के बीच आने की कोशिश नहीं की.

–     रिंकू की तरह ही बहुत-सी लड़कियां अपनी चीज़ों को लेकर पज़ेसिव रहती हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि शादी के बाद आपको हर जगह एडजस्टमेंट्स करने पड़ें. इस बारे में अपने पार्टनर से खुलकर बातें करें.

–     किसी भी चीज़ को लेकर मन में कोई शंका न रखें. जो भी क्रेज़ी सवाल मन में आएं, पार्टनर से डिस्कस कर लें.

  1. कहीं मम्मी से मेरी शिकायत कर दी तो?

–     लड़कियों को अपनी रेप्युटेशन सबसे ज़्यादा प्यारी होती है. ख़ासकर शादी के बाद ससुराल में वो चाहती हैं कि हर कोई उनकी तारी़फ़ करे.

–     ऐसे में मम्मी से अपनी शिकायत को लेकर वो सबसे ज़्यादा डरती हैं और यह बात सब लड़कों को पता होती है, तभी तो शादी के बाद ज़्यादातर पति यही धमकी देते हैं कि मम्मीजी को बता दूं…

–     ग़लतियां तो सभी से होती हैं, आपसे भी होंगी ही, इसलिए इसे हौवा न बनाएं. बस, अपनी सासूमां को पटाकर रखें. ऐसे में वो ही आपकी ढाल बनेंगी.

  1. कहीं मेरी पहचान खो न जाए?

–     सबसे पहले तो इस बात को अपने दिमाग़ से निकाल दें कि शादी आपकी पहचान आपसे छीन लेगी, बल्कि शादी के बाद तो आपको कई नए रिश्ते, नाम और पहचान मिलती है.

–     अगर मायके के निक नेम से ससुराल में कोई नहीं बुलाता, तो उदास न हों. पतिदेव ने आपको कोई लव नेम और ननद-देवर ने कुछ नए निक नेम दिए होंगे, तो उन्हें एंजॉय करें.

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Marriage Tips

लड़कों के दिमाग़ में आनेवाले सवाल

शादी के नाम से जितना डर लड़कियों को लगता है, उससे कम लड़कों को नहीं लगता. उनके मन में भी शादी को लेकर कई टेढ़े-मेढ़े सवाल आते रहते हैं.

  1. क्या मैं भी जोरू का ग़ुलाम बन जाऊंगा?

–     लड़कों में जोरू के ग़ुलाम का ऐसा हौवा है कि कोई भी अपनी पहचान इस रूप में नहीं चाहता.

–     होनेवाली पत्नी की देखभाल और  इच्छाओं का ख़्याल रखना आपकी ज़िम्मेदारी है, पर उसे तवज्जो देने में दूसरों को अनदेखा न करें.

–     एक अच्छा बेटा होने के साथ-साथ आपको एक अच्छा दामाद भी बनना चाहिए, पर इस चक्कर में बेटे की ज़िम्मेदारियों को न भूल जाएं.

  1. नाराज़ होकर मायके चली गई तो?

–    यह सवाल अक्सर उनके दिमाग़ में आता है, जिनकी ससुराल उसी शहर में होती है. कहीं कुछ गड़बड़ हो गई और यह बोरिया-बिस्तर लेकर मायके चली गई, तो मैं क्या करूंगा?

–    जाने का सवाल तो तब पैदा होगा, जब कोई गड़बड़ होगी. रिश्ते में प्यार और अपनापन बनाए रखें, यक़ीनन आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा.

–     शादी के पहले से ही उनके विचारों और पसंद-नापसंद को जानने की कोशिश करें.

–     अगर कभी ग़लती हो भी गई, तो ‘सॉरी’ कहने में झिझकें नहीं.

  1. कहीं मुझे ममाज़ बॉय न समझे?

–    आमतौर पर जो लड़के अपनी हर छोटी-बड़ी ज़रूरतों के लिए मां पर पूरी तरह आश्रित होते हैं, उनके मन में यह सवाल ज़रूर आता है.

–     अगर आप यह टैग नहीं चाहते, तो थोड़ा इंडिपेंडेंट बन जाएं और शादी से पहले ही अपने कुछ काम ख़ुद करना शुरू कर दें.

–     खाने के बाद थाली उठाकर बेसिन में रखना, कपड़े वॉशिंग मशीन में डालना, अपनी आलमारी को व्यवस्थित रखना, जो चीज़ जहां से उठाई, उसे वहीं वापस रखना जैसी आदतें सभी लड़कों में होनी चाहिए.

  1. मेरी चीज़ों पर कब्ज़ा न कर ले?

–     पति-पत्नी पार्टनर्स होते हैं यानी आपकी सभी चीज़ों पर पत्नी का पूरा हक़ होता है. शादी से पहले ही इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाएं.

–     एकाधिकार की भावना को छोड़कर शेयरिंग करना सीखें.

–     अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि शादी के बाद भी आपका कमरा बैचलर जैसा रहेगा, तो यह ज़्यादती ही होगी.

–     शादी से पहले ही कमरे की सजावट और डेकोर के बारे में अगर होनेवाली पत्नी से बात करें, तो उसे अच्छा फील होगा.

  1. अपने दोस्तों से मिलाना चाहिए या नहीं?

–   अपने दोस्तों के बारे में लड़कों को अच्छे से पता होता है, स़िर्फ उनकी ख़ूबियां ही नहीं कमियां भी वो बख़ूबी जानते हैं, इसीलिए बात जब होनेवाली पत्नी को दोस्तों से मिलाने की होती है, तो वो सोच में पड़ जाते हैं, मिलाऊं या नहीं?

–     दोस्तों से मिलाया और उन्होंने शेखी बघारने के चक्कर में कोई पोल खोल दी, तो ज़िंदगीभर ताने सुनने पड़ सकते हैं.

–     आप बेहिचक पूरी टोली को होनेवाली पत्नी से मिलाएं. अगर कुछ दोस्त शादीशुदा हैं, तो यक़ीनन आपकी रेप्यूटेशन का पूरा ख़्याल रखेंगे और जमकर तारीफ़ भी करेंगे.

– संतारा सिंह 

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कैसे निपटें इन 5 मॉडर्न रिलेशनशिप चैलेंजेस से? (How To Manage These 5 Modern Relationship Challenges?)

मॉडर्न लाइफस्टाइल (Modern Lifestyle) ने हेल्थ और जीवन के साथ रिश्तों को भी प्रभावित किया है और कई चुनौतियां (Challenges) खड़ी कर दी हैं. आख़िर क्या हैं ये मॉडर्न रिलेशनशिप चैलेंजेज़ और इन्हें कैसे हैंडल करें? आइए जानें.

Relationship Challenges

चैलेंज 1ः लॉन्ग डिस्टेंस मैरेज

आजकल वर्किंग कपल का ज़माना है. चाहे इसे परिवार की ज़रूरत कहें या मॉडर्न सोसायटी का रिवाज़. जब तक पति-पत्नी एक ही शहर में नौकरी कर रहे हैं,  तब तक तो ठीक है. लेकिन किसी कारण से यदि दोनों को अलग-अलग शहरों में रहना पड़े तो  जटिलताएं आ सकती हैं, क्योंकि अलग शहरों में रहने से पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां बढ़ती हैं और संवादहीनता भी.

ऐसी परिस्थितियों में पति-पत्नी की जो एक-दूसरे से अपेक्षाएं होती हैं, वे पूरी नहीं हो पातीं, क्योंकि दोनों बहुत कम समय के लिए एक-दूसरे से मिलते हैं और इतने कम समय में दोनों एक-दूसरे को समझने के बजाय अपनी-अपनी अपेक्षाओं को पूरा करने की मांग करते हैं और असंतुष्ट रहते हैं.

कैसे निपटें?

– रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लॉन्ग डिस्टेंस मैरेज में अपेक्षाएं ़ज़्यादा होती हैं. ऐसे कपल्स स़िर्फ छुट्टियों में ही मिलते हैं. इसलिए दोनों को मानसिक रूप से ज़्यादा परिपक्व होना पड़ेगा. आपको स़िर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपने पार्टनर की मुश्किलों को भी समझना पड़ेगा.

–  ह़फ़्ते में कम से कम 2 दिन साथ में बिताएं. जब भी दोनों साथ में हों तो ऑफ़िस की बातें न करें.

– दिन में जब भी समय मिले, अपने पार्टनर से बात करें.

– पार्टनर से बात करके छुट्टियों की प्लानिंग पहले ही कर लें, ताकि समय बरबाद न हो.

चैलेंज 2ः सेक्स के लिए व़क़्त नहीं

मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रमोद गुप्ता बताते हैं, “सेक्स वैवाहिक जीवन का प्राण है. इससे पति-पत्नी शारीरिक और मानसिक स्तर पर  एक-दूसरे से जुड़ते हैं. यही जुड़ाव दोनों के बीच में एक पुल का काम करता है.” आजकल नौकरियों के अलग-अलग समय, लॉन्ग डिस्टेंस मैरेज, अति व्यस्तता, तनाव आदि के कारण पति-पत्नी को सेक्स के लिए समय नहीं मिल पाता. यदि इच्छा होते हुए भी सेक्स के लिए समय न मिले तो दोनों को ही शारीरिक और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं.

कैसे निपटें?

–  पति-पत्नी सेक्स को लेकर संकोच न करें.

– पार्टनर से अपनी सेक्स संबंधी इच्छाओं और सेक्स के टाइम मैनेजमेंट को लेकर खुलकर बात करें.

– दिन में दो-तीन घंटे नहीं, पर छोटे-छोटे लम्हे तो आप चुरा ही सकते हैं.

– सेक्स के लिए दो चीज़ें ज़रूरी हैं-सेक्स की इच्छा होना और समय. सेक्स-इच्छा के लिए ज़रूरी है हमेशा प्रेजेंटेबल रहना, साथ ही ऑफ़िस के तनाव को अपने और पार्टनर के बीच में न आने दें.

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Relationship Challenges
चैलेंज 3ः बच्चों को व़क़्त न दे पाना

पति-पत्नी की सबसे बड़ी समस्या है- बच्चों के लिए समय न दे पाना. ज्यादातर कपल्स अपने करियर और जॉब की वजह से बच्चे की प्लानिंग नहीं कर पाते हैं. यदि प्लान करते भी हैं तो उन्हें बच्चे की परवरिश के लिए समय नहीं मिलता. पैरेंट्स द्वारा बच्चों के साथ व़क़्त न बिताने पर कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए ज़रूरी है कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं. ये स़िर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बेहतर होगा.

कैसे निपटें?

– पति-पत्नी जब पूरी तरह से तैयार हों तभी बच्चे की प्लानिंग करें.

– ऑफ़िस से आने के बाद बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताएं.

– बच्चों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछें. उनके साथ खेलें, घूमने जाएं.

– बच्चों को टीवी, वीडियो गेम्स या फिर इंटरनेट की लत से बचाएं.

चैलेंज 4ः ऑफ़िस रोमांस

पार्टनर के पास समय न होने, ऑफ़िस का तनाव आदि कारणों से आजकल ऑफ़िसरोमांस व विवाहेेतर संबंध बनते देर नहीं लगती. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, वर्कप्लेस पर अ़फेयर होने पर लोग मानसिक तौर पर तरोताज़ा महसूस करते हैं. पर यह क्षणिक होता है, जिसके कारण आगे चलकर मानसिक अवसाद भी उत्पन्न होता है.

कैसे निपटें?

– अगर अपनी शादी बचाना चाहते हैं तो आपको ही ख़ुद पर नियंत्रण रखना होगा.

– अपने पार्टनर के प्रति वफ़ादार रहें.

– ऑफ़िस रोमांस को रोकने के लिए पार्टनर से खुलकर बातें करें, उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करें.

– ऑफ़िस के काम से समय निकालकर अपने पार्टनर से फ़ोन पर बातें करें, ताकि उन्हें दूसरों की ज़रूरत महसूस ही न हो.

चैलेंज 5ः मनी मैटर्स

बढ़ती महंगाई और अच्छी लाइफ़ स्टाइल दोनों के लिए पैसा ज़रूरी है. इसलिए कपल्स का वर्किंग होना भी ज़रूरी है, पर पति-पत्नी के झगड़े अक्सर पैसे को लेकर ही होते हैं, जैसे- घर का बजट, इन्वेस्टमेंट प्लानिंग आदि, क्योंकि उन्हें अपने वर्तमान के साथ भविष्य को भी सुरक्षित करना होता है.

कैसे निपटें?

– मनी मैटर्स को पति-पत्नी अपने रिश्ते के बीच में न आने दें.

– घर के बजट और महीने के ख़र्च दोनों एक साथ बैठकर तय करें.

– ख़र्चों की प्राथमिकता तय करें और मनी मैटर्स को लेकर एक-दूसरे से कुछ भी न छिपाएं.

– विजया कठाले निबंधे

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सेक्स- क्या करें जब पति कहे ‘ना’? (What To Do If Your Husband Is Uninterested In Sex?)

सेक्सुअल रिलेशन (Sexual Relations) के प्रति उदासीनता, इससे बचना या कटे-कटे रहना… यदि इस तरह का व्यवहार आपके पति करें, तो सचेत हो जाएं. उनकी ‘ना’ के पीछे छिपे कारणों को जानने और उन्हें दूर करने की कोशिश करें, ताकि आपकी सेक्स लाइफ़ में ठहराव न आने पाए.

Uninterested In Sex

पुरुष प्रधान समाज में पुरुष की ख़ुद को  महिलाओं से बेहतर, सक्षम, मज़बूत या सुपीरियर बनाए रखने की प्रवृत्ति रही है. ये बातें कमोबेश हर जगह देखने को मिलती हैं, फिर चाहे वो सेक्स ही क्यों न हो. सेक्स एक अंतरंग विषय होने के बावजूद इसमें पुरुष ख़ुद को श्रेष्ठ बनाए रखने या दिखाने की पूरी कोशिश करता है. जहां सेक्स की पहल ज़्यादातर पुरुषों की तरफ़ से ही होती थी, वहीं अब महिलाएं भी पहल करने से नहीं चूकतीं. लेकिन ऐसे बहुत कम मौ़के होते हैं, जब पत्नी के आग्रह पर पुरुष सेक्स से इंकार कर दे. ऐसा क्यों होता है? इसके क्या कारण हो सकते हैं? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

शारीरिक व मानसिक थकान

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. दीपक के. जुमानी के अनुसार, “आमतौर पर भारतीय पद्धति में पति सेक्स के लिए इंकार नहीं करते. पत्नी को तो इंकार करने का अधिकार भी है पीरियड्स वगैरह के दिनों में. लेकिन कई बार पारिवारिक व सामाजिक ज़िम्मेदारियों का प्रेशर पति को सेक्स के लिए ‘ना’ कहने को मजबूर करता है. हो सकता है उनके इंकार के पीछे शारीरिक व मानसिक थकावट हो, जिसकी वजह से उन्हें सेक्स की इच्छा नहीं होती या फिर इसके बारे में सोचने तक का समय नहीं मिलता.

पत्नी में सेक्सुअल फैंटेसी का अभाव

एक सर्वे के अनुसार, भारतीय पुरुष जो सपने देखते हैं, उनमें सेक्स संबंधित ऑब्जेक्ट की भरमार होती है. इस तरह से धीरे-धीरे उनमें एक सेक्सुअल फैंटेसी विकसित हो जाती है. महिलाएं शर्म-संकोच के कारण अपनी सेक्स संबंधी इच्छाओं को नहीं बतातीं, न ही सेक्स क्रिया में ़ज़्यादा खुल पाती हैं. यानी पत्नी से पति की सेक्सुअल फैंटेसी न पूरी हो, तो धीरे-धीरे पति का सेक्स में इंटरेस्ट कम होता जाता है.

कम्यूनिकेशन गैप

अक्सर पति-पत्नी के बीच अहम् के कारण या अन्य वजहों से आपसी संवाद की कमी जैसी समस्या आ ही जाती है. उस पर पति का पत्नी को उपभोग की वस्तु मानना स्थिति को और भी जटिल बना देता है. महिलाएं प्यार व भावनाओं को अधिक महत्व देती हैं, जबकि पुरुष शारीरिक आकर्षण को. ऐसे में टकराव और कम्यूनिकेशन गैप ब़ढ़ना स्वाभाविक है, जिससे पति सेक्स के प्रति उदासीन होने लगते हैं.

आदत और बीमारियां

डॉ. हितेश कहते हैं कि सोसायटी में स्ट्रेस लेवल बढ़ रहा है. अल्कोहल, धूम्रपान, अधिक दवाइयां लेने की आदत आम हो रही है. साथ ही ऐसी कई बीमारियां भी होती हैं, जिनसे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इससे नई-नई शारीरिक समस्याएं उभरती हैं और पति-पत्नी की सेक्सुअल लाइफ़ भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहती. धीरे-धीरे रिश्तों में ठहराव व नीरसता की स्थिति पैदा होने लगती है.

विवाहेतर संबंध

उम्र बढ़ने के साथ पति की शारीरिक क्षमता कम हो जाती है और इस कमज़ोरी को वह स्वीकार नहीं करता. ऐसे में अगर कोई दूसरी स्त्री उसकी ओर आकर्षित होती है, तो उसे एक मानसिक संतुष्टि मिलती है कि वह अब भी सक्षम है. धीरे-धीरे यह आकर्षण भावनात्मक लगाव में बदलने लगता है और पति अपनी पत्नी से दूर भागने लगता है.

सेक्सोलॉजिस्ट्स के अनुसार, बचपन में जिन बच्चों का सेक्सुअल एब्यूज़ यानी यौन शोषण होता है, वे शादी के बाद शारीरिक संबंधों से दूर भागने लगते हैं.

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Sex Problems

क्या करें?

जहां चाह है, वहां राह निकल ही आती है. यदि पति सेक्स से दूर भागे, तो यह समस्या शारीरिक से ज़्यादा मनोवैज्ञानिक है और मौजूदा हालात ही इनके लिए ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं. पर एक समझदार पत्नी इन हालात को बख़ूबी हैंडल कर सकती है.

–  शायद आप अपने पति की इच्छा व पसंद का ध्यान नहीं रखतीं. इस पर गौर करें, जैसे- वे आपको किस पहनावे में देखना पसंद करते हैं, आपकी कौन-सी अदा के वे दीवाने हैं आदि.

–  सेक्सुअल रिलेशन में अधिक शर्म-संकोच को न आने दें. पति को जो बातें, क्रियाएं अच्छी लगें, वो ज़रूर करें. प्राइवेट कंपनी में कार्यरत सॉ़फ़्टवेयर इंजीनियर की पत्नी का कहना है, “मैं अपने पारिवारिक संस्कारों की वजह से पति के सामने ज़्यादा खुल नहीं पाती थी. धीरे-धीरे मुझे पता चला कि मेरे पति सेक्स से दूर भाग रहे हैं, तब सेक्सोलॉजिस्ट से सलाह-मशवरा करके मैंने ख़ुद को बदला. अब मेरे पति बेहद ख़ुश रहते हैं और हम दोनों अपनी सेक्सुअल लाइफ़ पूरी तरह एंजॉय करते हैं.”-

–  पति-पत्नी दोनों ही आपसी बातचीत के लिए थोड़ा समय ज़रूर निकालें. एक-दूसरे की भावनाओं को समझें. पारिवारिक ज़िम्मेदारियों का निर्वाह मिल-बांटकर करें, ताकि दोनों अपने शौक़ व अपनी इच्छाओं को एक-दूसरे के साथ शेयर कर सकें. डॉ. हितेश के अनुसार, “पति का सेक्स से इंकार अधिकतर मामलों में कम्यूनिकेशन गैप से ही पैदा होता है. इस गैप को कम करना दोनों की ज़िम्मेदारी है.”

– पति-पत्नी के रिश्ते में डर व शक को न आने दें. एक-दूसरे पर विश्‍वास प्यार बढ़ाता है और दोनों को सेक्सुअल रिलेशन के लिए भी उत्साहित करता है. इन सभी बातों का ख़याल रखेंगी तो पति की ‘ना’ को ‘हां’ में बदलते देर नहीं लगेगी. हैप्पी सेक्सुअल लाइफ़!

– लक्ष्मी यादव

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तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

Pyar Ki Kahaniya

तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

दस साल बीत गए… तुम्हारा चेहरा आज भी मेरी आंखों में बसा है. उस दिन के बाद न तो तुम मिले और न ही तुम्हारा कोई अता-पता. तुम्हें तो शायद मैं याद भी न हूं, पर मुझे तुम्हारी कत्थई आंखों की कशिश हर रोज़ शाम को गेटवे ऑफ इंडिया की तरफ़ खींच ले जाती है. क़दम ख़ुद-ब-ख़ुद तुम्हारे लिए चल पड़ते हैं. हर बार तुम्हें देखने और मिलने की एक उम्मीद जन्म लेती है, परंतु फिर मेरी शाम खाली हाथ लौट जाती है. वो पहली नज़र के प्रेम का एहसास आज भी मेरे अंदर सांसें ले रहा है.

कैसे भूल जाऊं वो 26 नवंबर का ताज होटल पर अटैकवाला दिन, जो इतिहास के पन्नों में एक काले, मनहूस दिन के रूप में अंकित हो चुका है. उस दिन न जाने कितनों ने अपनों को खोया था और कितनों ने अपनी जान गंवाई थी. विपरीत इसके मेरे लिए तो वो मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत, यादगार दिन था, जिसने मुझे प्यार जैसे ख़ूबसूरत एहसास से रू-ब-रू करवाया था. एकतरफ़ा ही सही, प्यार तो है.

याद है मुझे आज भी उस दिन का रोंगटे खड़े कर देनेवाला एक-एक लम्हा, जब मैंने और मेरी सहेलियों ने गेट वे ऑफ इंडिया घूमने का प्रोग्राम बनाया था. समुद्र की लहरें अपने मस्त अंदाज़ में साहिल से अठखेलियां करने में मग्न थीं कि अचानक आतंकवादियों ने मुंबई के ताज होटल पर हमला कर दिया था. थोड़ी देर पहले तक जो समां रोमांचक लग रहा था, वो करुणा से भरी चीखों, गोलियों की आवाज़ों और मदद की गुहारों में परिवर्तित हो चुका था. इसी भगदड़ में मेरी सभी सहेलियां मुझसे बिछड़ गई थीं.

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मैंने बड़ी मुश्किल से डरते-डरते एक बेंच के पीछे आश्रय लिया था. दहशत के मारे पूरा शरीर कांपने लग गया था. आंसुओं से भरी आंखें किसी तरह की मदद की खोज में थीं. पुलिस ने होटल के बाहर पूरी तरह घेराबंदी कर ली थी. जो लोग बाहर फंसे हुए थे, पुलिस उन्हें किसी तरह सुरक्षित निकालने की कोशिश में थी. मौत को इतने क़रीब देखकर मेरी शक्ति और हिम्मत जवाब देने लगी. बेहोशी मुझे अपनी आगोश में लेने को थी कि तभी किसी की मज़बूत बांहों ने मुझे थाम लिया. वो मज़बूत-गर्म बांहें तुम्हारी थीं. मेरी बेहोशी से भरी धुंधली आंखों से मुझे स़िर्फ तुम्हारी कत्थई आंखें दिखाई दे रही थीं.

“देखो, संभालो अपने आप को. बेहोश मत होना. हम किसी भी तरह यहां से सुरक्षित बाहर निकल जाएंगे…” यह कहते-कहते तुम किसी तरह मुझे होश में लाए. आंखें खुलते ही तुम्हारा चेहरा दिखा, जो मेरी आंखों में उतर गया. तुमने मुझे धीरे-धीरे पुलिस की तरफ़ चलने का इशारा किया. मैं तो तुम्हें देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठी थी. बस, तुम्हारे भरोसे एक कठपुतली बन तुम्हारा हाथ पकड़कर चल पड़ी थी साथ.

किसी तरह हम पुलिस के पास पहुंच ही गए और उन्होंने तुरंत हमें वहां से सुरक्षित बाहर निकाल दिया. मेरे लिए तुम एक फ़रिश्ता बनकर आए थे. बस, यहीं तक था हमारा साथ. सुरक्षित बाहर आते ही तुम मुझे एक टैक्सी में बैठाकर, मेरा हाथ छोड़कर मेरी नज़रों से ओझल हो गए. कहां चले गए… पता नहीं. अपना नाम, पता, सब कुछ अपने साथ ले गए. तुम तो चले गए, किंतु अपना चेहरा, अपनी कत्थई आंखें सदा के लिए मेरी आंखों में, मेरी सांसों में छोड़ गए.

आज भी मेरी शामें तुमसे मिलने के एक अटूट भरोसे पर, गेटवे ऑफ इंडिया की उसी बेंच पर तुम्हारी कत्थई आंखों के इंतज़ार में गुज़रती हैं.

– कीर्ति जैन

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