Relationship

बेहतर रिश्ते हमारे जीवन को बेहतर और आसान बनाते हैं, जबकि रिश्ते अगर बेहतर ना हों तो वो परेशानी का सबब बनजाते हैं. ऐसे में ज़रूरी है कि हम अपने रिश्तों को बेहतर बनाने और उन्हें ईमानदारी से निभाने की कोशिश करें. लेकिन रिश्तेबनाना और निभाना भी एक कला है, अगर आप इसमें माहिर नहीं तो आपको खुद को बेहतर बनाना होगा और रिश्ते बनानेव निभाने की कला को सीखना होगा. 

क्या आप लोगों को बहुत ज़्यादा जज करते हैं?

अगर हां, तो जज करना थोड़ा कम कर दीजिए, क्योंकि जज करनेवालों के लोग कम ही क़रीब आते हैं. ना वो ज़्यादा शेयरकरते हैं और ना ही अपनी रियल पर्सनैलिटी दर्शाते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि हमें हर बात पे, हर व्यवहार पे जज कियाजाएगा, हमारे बारे में एक धारण बना ली जाएगी. 

बेहतर होगा किसी के बारे में एक दो घटना या बातों से राय ना बना लें. लोगों को बेनीफिट ऑफ डाउट ज़रूर दें. इससेआपके रिश्ते बेहतर होंगे.

क्या आप सुनते कम और बोलते ज़्यादा है?

अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वो अपनी ही बात रखते हैं और किसी की सुनते नहीं हैं. ऐसे लोगों से अपने भी कुछकहने से कतराने लगते हैं. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए अच्छा श्रोता होना बेहद ज़रूरी है.

कहीं आप दूसरों में हमेशा ग़लतियां और कमियां तो नहीं निकालते?

कई लोगों की आदत होती है खुद को परफ़ेक्ट समझते हैं और समानेवाले को हमेशा सिखाते रहते हैं. ज़रा सी चूक होने परइतना सुनाते हैं कि जैसे उनसे तो कभी गलती हो ही नहीं सकती. …तुमसे एक काम ठीक से नहीं होता, तुमको तो यहज़िम्मेदारी देनी ही नहीं चाहिए थी… कब सीखोगे… इस तरह के वाक्यों के प्रयोगों से जो लोग बचे रहते हैं वो रिश्ते बनाएरखने की कला में माहिर होते हैं.

क्या अपनों के लिए कभी कुछ ख़ास करने की सोचते हैं आप?

सिर्फ़ रूटीन तरीक़े से रिश्ते में बने रहना आपके रिश्ते को बोरिंग बना देगा, रिश्तों को अगर निभाना है तो रूटीन से थोड़ाऊपर उठकर सोचना और करना होगा. कभी सरप्राइज़, कभी कुछ ख़ास प्लान करने में अगर आप माहिर हैं तो रिश्ते निभानेकी कला भी आप बेहतर जानते हैं.

क्या आप किसी के व्यक्तित्व को जैसा वो है वैसा ही अपनाने से कतराते तो नहीं?

हर इंसान अलग होता है. अगर हम ये सोचें कि सब हमारी ही तरह हों तो यह मुमकिन नहीं. किसी में कोई कमी, कमज़ोरीतो किसी में कुछ अलग गुण भी होंगे. अगर हम किसी को उनके व्यक्तित्व के साथ ही अपनाते हैं तो रिश्ते बनाने औरनिभाने की कला में माहिर माने जाएँगे.

दूसरों के बुरे वक़्त में आप साथ निभाते हैं या पीछा छुड़ा लेते हैं?

रिश्तों का मतलब ही होता है साथ निभाना, लेकिन अक्सर ज़्यादातर लोग बुरा दौर आने पर साथ छोड़ देते हैं या कोईबहाना बना देते हैं और जब हमें सबसे ज़्यादा अपनों की ज़रूरत होती तब वो होते ही नहीं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में सेहो तो आपके रिश्ते ना तो टिक पाएँगे और ना ही निभ पाएँगे. यहां तक कि जब आप मुसीबत में होगे तो खुद को अकेला हीपाओगे.

बेहतर होगा कि जब अपनों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो तब हम उनके साथ खड़े रहें. यही रिश्तों की असली ख़ुशी है.

Art Of Relationship

स्वार्थ या अपना काम निकलवाने के लिए तो रिश्ते नहीं बनाते?

कई लोग आजकल यारी दोस्ती ही नहीं, प्यार और शादी भी मतलब के लिए ही करते हैं. पैसों को देखकर या आगे चलकरमुनाफ़े को देखकर रिश्ते बनाते व तोड़ते हैं. अगर आपकी यही सोच है तो आप कभी भी असली सही रिश्ते नहीं बनापाओगे.  मतलब के रिश्तों की उम्र अधिक नहीं होती और ऐसे लोग रिश्ते बनाने और निभाने की कला जानते ही नहीं.

रिश्तों में भावनाओं को महत्व ना देकर अन्य चीज़ों को ज़्यादा ज़रूरी मानते हैं?

पैसा, ज़िम्मेदारी, गुण-अवगुण इत्यादि चीज़ों को अगर आप भावनाओं से ऊपर रखेंगे तो मात खाएँगे. किसी भी रिश्ते मेंप्यार, केयर aur शेयर की भावना सबसे ज़रूरी होती है. अगर आप में इन भावनाओं के लिए सम्मान है तो आप रिश्ते बनानेऔर निभाने की कला जानते हैं.

रिश्तों में ओवर पज़ेसिव या शकी तो नहीं हो?

रिश्तों में बेहद ज़रूरी है कि आपके साथ बंधे लोगों को घुटन ना महसूस हो. अगर आप हर बात पर रोक-टोक करोगे, बहुतअधिक सवाल-जवाब करोगे और सामनेवाले को बांधकर रखने की कोशिश में ही रहोगे तो अच्छे रिश्तों को खो दोगे. शककरना या पज़ेसिव होना एक सीमा तक तो बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन बाद में यह रिश्तों को कमज़ोर बना देते हैं. इसलिए भरोसा करना सीखें.

क्या आप दूसरों का सम्मान नहीं करते?

हर बात पर खुद को बड़ा दिखाने के लिए अक्सर लोग अपनों का ही अपमान कब करने लगते हैं खुद उन्हें भी अंदाज़ा नहींहो पाता. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में से हैं तो संभल जाइए. रिश्तों में छोटे से लेकर बड़ों तक का सम्मान बेहद ज़रूरी है, क्योंकि सम्मान देंगे तो सम्मान पाएँगे और उनका विश्वास भी जीत पाएँगे.

ज़िम्मेदारी से भागते तो नाहीं?

कई लोग अपने हक़ की बात तो बहुत करते हैं लेकिन ज़िम्मेदारी नहीं समझते. ज़िम्मेदारियों को बांटने की कला ही आपकोरिश्ते निभाने की कला में माहिर बनाएगी. सबको साथ लेकर चलना ज़रूरी है और उसके लिए ज़िम्मेदार बनना भी.

Relationship Goals

कैसे माहिर बनें रिश्ते बनाने और निभाने की कला में?

  • ईमानदार रहें, चीट ना करें.
  • पैसों के मामले में छुपाकर या झूठ बोलकर फायदा उठाने की ना सोचें.
  • विश्वास करना सीखें लेकिन आंख बंद करके नहीं.
  • स्वार्थी ना बनें.
  • दूसरों की परवाह दिल से करें.
  • हर रिश्ते को इज़्ज़त दें.
  • क्रोध और अपमान करने से जितना सम्भव को बचें.
  • हिटलर बनकर अपनी ही ना चलाएँ, दूसरों की राय को भी महत्व दें.
  • सामनेवाले को मूर्ख ना तो समझें और ना ही बनाने की कोशिश करें.
  • रिश्तों के लिए समय निकालें और अच्छा समय साथ बिताएँ.
  • समस्या होने पर बातचीत से हल निकालें, ना कि नाराज़ होकर मुंह फुला लें.
  • छोटी छोटी ख़ुशियों को महत्व दें… रिश्तों में ख़ुशियों के लिए बंगला-गाड़ी ज़रूरी नहीं, बल्कि एक-दूसरे क साथज़रूरी होता है.
  • भौतिक चीज़ों की ख्वाहिशों में अपना चैन और सुकून कभी ना खोएँ.
  • करियर और घर दोनों को बैलेंस करना सीखें. 
  • कुछ नियम बनाएँ, जैसे- रोज़ एकसाथ परिवार डिनर करेगा, उस वक़्त आपस की बातें करें ना कि फ़ोन पर रहें औरप्रोफ़ेशनल बातें करें.
  • छुट्टी के दिन सब साथ मिलकर कुछ ख़ास बनाएँ. घर की महिलाओं को आराम दें या उन्हें बाहर ले जाएँ.

अगर आप इन तमाम छोटी छोटी बातों का ख़्याल रखेंगे तो रिश्ते बनाने और उन्हें निभाने की कला जान जाएँगे, क्योंकि येकोई मुश्किल काम नहीं बस थोड़ा सा अपनों के बारे में सोचने भर से रिश्ते ताउम्र के लिए बने रहते हैं.

भोलू शर्मा

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नज़रें मुस्कुराने लगती हैं.. धड़कनें गुनगुनाने लगती हैं.. एकतरफ़ा ही सही मुहब्बत की महफ़िल होती है उस तन्हा दिल में…
यक़ीनन एकतरफ़ा प्यार में एक तरफ़ ही सही, प्यार होता है बेशुमार. प्यार, मीठा एहसास.. जीने का सबब.. इंसान को बहुत ख़ूबसूरत बना देता है प्यार. लेकिन जब एकतरफ़ा प्यार की बात होती है, तो स्थितियां बदल जाती हैं. यहां पर दोनों तरफ़ प्यार में बराबरी की बात नहीं रहती है. यह एकतरफ़ा रहता है मतलब एक ही शख़्स जो शिद्दत से चाह रहा है. कई मामलों में इस ज़ज्बात का पता होता है, तो कई बार अगला इससे अनजान भी रहता है. बड़े ही बेदर्दी से टूटते हैं वो दिल, जो एकतरफ़ा प्यार से जुड़ते हैं.

इस तरह के प्यार-एहसास के कई साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. इस पर एक नज़र डालते हैं-

  • दिल ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि वह मुझे नहीं चाहता/चाहती है. हर पल एक उम्मीद बनी रहती है, जो बाद में नाउम्मीद हो जाती है और निराशा घेरने लगती है.
  • तनाव और अवसाद धीरे-धीरे पैर पसारने लगते हैं. कई बार डिप्रेशन इस कदर बढ़ जाता है कि प्रेम में हारा हुआ इंसान जाने-अनजाने में ग़लत कदम उठाने की तरफ़ भी बढ़ जाता है. ख़ुद का अहित करने से भी नहीं हिचकते.
  • अक्सर टूटे दिलवाले लोग नशे में ग़म को भूलाने की कोशिश करने लगते हैं. शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि लेना शुरू कर देते हैं. ताकि ख़ुद को भुलाए रखें.. उसका ख़्याल ना आए..

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  • एकतरफ़ा प्यार आपके आत्मविश्‍वास पर चोट करता है और उसे बुरी तरह से प्रभावित करता है. जब आप अपने प्यार को नहीं पाते हैं या वह आपको नहीं प्यार करता है.. इस सोच के कारण कहीं-न-कहीं आपका कॉन्फिडेंस लेवल गिरने लगता है.
  • अक्सर ऐसा भी होता है कि उसे पाने की कोशिश में अपने आत्मसम्मान को भी ताक पर रख देते हैं, जिससे आपका स्वाभिमान भी प्रभावित होने लगता है.
  • उपेक्षाओं और अपेक्षाओं के बीच दिल और मन झूलने लगता है. अपने प्यार की उपेक्षा से कहीं-न-कहीं हीनभावना भी पनपने लगती है.
  • प्यार को पाने की कोशिशें असफल होने के कारण कई बार ख़ुद को कम आंकने, नाक़ाबिल समझने की सोच जन्म लेने लगती है.
  • ख़ुदा ना खास्ता जिसे आप चाह रहे और वो किसी और को प्रेम कर रहा या रही है, तब कई बार स्तिथि हिंसक भी हो जाती है. अपने प्यार को पाने का जुनून अक्सर ग़लत भी करवा देता है.
  • अपनों में रहकर भी बेगाने जैसी स्थिति होती है. कुछ भी अच्छा नहीं लगता. अकेले रहने का मन करने लगता है.
  • ज़िंदगी के प्रति बेरुखी-सी हो जाती है. सब कुछ सुना और अधूरा-सा लगने लगता है.
  • किसी काम में मन नहीं लगता. इच्छाएं और ख़ुशी जैसे गुम-सी हो जाती है.
  • बार-बार उस शख़्स का ख़्याल दिलोंदिमाग़ पर हावी रहता है, जिससे कोई भी काम ठीक से नहीं हो पाता. * चाहे ऑफिस हो या बिज़नेस उसे लेकर उतनी गंभीरता नहीं रहती, क्योंकि मन तो अपने प्यार को पाने के जोड़-तोड़ में लगा रहता है.
  • हर घड़ी प्यार के एहसास की लहरें उठती रहती हैं, जिससे किसी भी काम में एकाग्र भी नहीं हो पाते.
  • वैसे इन मामलों में अपवाद भी देखने को मिले हैं यानी कोई टूटकर भी निखर जाता है, तो कोई टूटकर बिखर जाता है.
  • कई बार अपने इस एकतरफ़ा प्यार को प्रेरणा या आदर्श मानते हुए कुछ कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाते हैं, तो कुछ असफल होकर दुखी और ग़मगीन ही बने रहते हैं.

सिनेमा में एकतरफ़ा प्यार का दर्द
फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार को काफ़ी दिखाया गया है. इस फ़ेहरिस्त में देवदास फिल्म को हमेशा याद किया जाता है. देवदास फिल्म में पारो और चंद्रमुखी के बीच देवदास के प्यार को लेकर भले ही खींचतान हो, लेकिन चंद्रमुखी का एकतरफ़ा प्यार इतिहास बन जाता है. लोगों को हमेशा उसके प्रति सहानुभूति से भर देता है. फिल्म ऐ दिल है मुश्किल तो एकतरफ़ा प्यार पर ही आधारित थी. रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और ऐश्वर्या राय बच्चन की उम्दा अदाकारी फिल्म की जान थी. इसमें एकतरफ़ा प्यार के दर्द, तड़प, अनकहे एहसास, सोच को बख़ूबी दर्शाया गया था. इसके अलावा मुकद्दर का सिकंदर, प्यार तूने क्या किया, मस्ती जैसी फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार के एहसास को दिखाने की बेहतरीन कोशिश की गई है.

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वैसे देखा जाए तो प्यार में प्रभाव, अभाव, नफ़ा-नुक़सान नहीं होता है. प्यार तो बस प्यार होता है. अब इस एहसास को आप कैसे जीते हैं, कैसे अपनाते हैं, सब कुछ आप पर निर्भर करता है. चाहे तो अपने एकतरफ़ा प्यार को अपना जुनून बनाकर आगे बढ़ जाए या फिर निराशा के गर्त में चले जाएं. ये सब कुछ व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. तो क्यों ना इसके साइड इफेक्ट्स को पाॅजिटिवनेस में बदलकर मिसाल कायम कर बेमिसाल बना जाए.

– ऊषा गुप्ता

एक ज़माना था जब सास-बहू के रिश्ते में घबराहट, संकोच, डर, न जाने कितनी शंकाएं व आशंकाएं रहती थीं. लेकिन वक़्त के साथ ही हालात बदले और लोगों की सोच भी. अब पहले जैसी डरवाली बात तो बिल्कुल ही नहीं रही. जहां सास ने बहू को बेटी के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है, वहीं बहू भी सास को मां का दर्जा देने लगी हैं. ऐसे तमाम उदाहरण आए दिन देखने को मिलते हैं, जब सास-बहू की मज़ेदार जुगलबंदी दिलों को ख़ुशनुमा कर जाती हैं.


इससे पहले संयुक्त परिवार होने की वजह से मर्यादा, बहुत-सी पाबंदियां और हिचक रहती थी. बहू सास को खुलकर अपनी बात कह नहीं पाती थी और ना ही सास बहू से दोस्ताना व्यवहार ही रख पाती थी. दोनों के बीच प्यारा-सा बंधन होने के बावजूद एक दूरी बनी रहती थी. यही दूरी वजह होती थी उनके क़रीब ना आने की. लेकिन जैसे-जैसे वक़्त और हालात बदलते गए, बहुतों की सोच में क्रांतिकारी परिवर्तन आया. आज बहू अपनी सास से बहुत कुछ शेयर कर लेती है. अपने सुख-दुख का साथी बना लेती है. हर बात को बिना किसी संकोच के कह देती है, फिर चाहे वह खाना-पहनना हो या फिर रिश्तेदारी निभाना.
पहले मन में बहुत से सवाल रहते थे कि अगर ऐसा करूंगी, तो सासू मां क्या कहेंगी.. ससुरालवाले क्या सोचेंगे.. अक्सर कई सारी ग़लतफ़हमियां भी दिलोंदिमाग़ पर हावी रहती थीं, जिससे बहू खुलकर अपनी बात सास से कह नहीं पाती थी.
कहते है ना एक्स्पोज़र का नुक़सान है, तो फ़ायदे भी बहुत है. जिस तरह से आपसी रिश्ते में खुलापन आता गया, धीरे-धीरे रिश्ते मज़बूत होते चले गए. इसमें टीवी और फिल्मों ने भी अहम भूमिका निभाई. यह और बात है कि हम इसे स्वीकार नहीं करते, लेकिन कई बार देखा गया है कि छोटा पर्दा हो या सिनेमा उसका कहीं-ना-कहीं असर लोगों पर होता ही है. रिश्ते प्रभावित होते हैं. फिर वो दोस्ती हो, प्यार-मोहब्बत हो या सास-बहू का रिश्ता ही क्यों ना हो.

क्योंकि सास भी कभी बहू थी…
हमारी एक रिश्तेदार जो दो उच्च पढ़ी-लिखी बहुओं की सास थीं अक्सर कहा करती थीं कि उन्होंने अपनी दोनों बहुओं को पूरी आज़ादी दे रखी है. वह भी आज से नहीं, बल्कि सालों से यह नियम बना दिया है कि बहू को जो करना है.. जैसे करना है.. इसकी पूरी खुली छूट उन्होंने दे रखी है. इसका असर यह हुआ कि बहू ने भी सास के मान और इच्छाओं को सिर आंखों पर रखा. आज वे सहेलियों जैसी रहती हैं. वे कहती हैं कि हम यह क्यों भूल जाते हैं बहू भी किसी की बेटी है. उसके भी कुछ अरमान-इच्छाएं हैं. यह क्यों कहा जाए या फिर मान लिया जाए कि मायके से ससुराल आई है, तो उसे ख़ुद को बदलना ही है. ससुराल को हौव्वा क्यों बना दिया जाता है. बहू को बेटी की तरह ही सुख-सुविधा और स्वतंत्रता मिले, तो ससुराल में किसी बात का तनाव हो ही ना!.. बड़े सुलझे हुए ढंग से उन्होंने अपनी बात को समझाया. साथ ही मज़ाक में यह भी कहा कि हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए… क्योंकि सास भी कभी बहू थी… हम भी कभी बहू थीं, तो हमने जो अनुभव लिए, जो परेशानी झेली, तो हमारी यही कोशिश रहनी चाहिए कि हमारी बहू को उन सब दिक़्क़तों का सामना ना करना पड़े.

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आज जिस तरह से सास-बहू के रिश्ते को नई परिभाषा मिल रही है, उन छोटी-छोटी बातों को देखते-समझते हैं...

  • एक वक़्त था जब सास को बिना कहे या बताएं बहू ससुराल से घर से बाहर निकल नहीं सकती थी. लेकिन अब हालात भिन्न हैं. आज भी बहू सास से पूछती है.. उन्हें बताती है, पर पहले जैसे दबाव और हिचकिचाहट वाला माहौल नहीं रहा.
  • आज बहू अपनी इच्छा के बारे में खुलकर कहती है और सास भी उसे सम्मान देते हुए उसकी ख़्वाहिशों को पूरी करने की कोशिश करती हैं.
  • ख़ुशी होती है कि अब सास-बहू का रिश्ता ना होकर मां-बेटी का रिश्ता बन गया है और इसमें दोनों ही ख़ुश भी हैं और वे इस रिश्ते की ख़ूबसूरती को भी बढ़ाते हैं.
  • अब सास पहले की तरह ताना नहीं मारती और ना ही अधिक दबाव डालती है.
  • जो भी सही-ग़लत है, बहू को खुलकर बताती और समझाती हैं. ध्यान देने के लिए कहती है.
  • ठीक इसी तरह बहू भी सास की बातों को समझते हुए परिवार में तालमेल बिठाती है. सास-बहू के रिश्ते को नया आयाम देती है.
  • पहले ऐसा था कि सास ने जो कह दिया वही होगा, पर आज बहू को लगता है कि नहीं यह काम ऐसे होना चाहिए, तो वो सास को स्पष्ट होकर बताती है कि मां इस तरह से होना चाहिए… मम्मीजी हम लोग ऐसा करें… क्या मम्मा आप तो सब जानती हैं… सब कुछ ऐसे करेंगे, तो शायद बेहतर रहेगा… इत्यादि.
  • स्थितियों को बनाने में दोनों ही अपना समर्पित योगदान देती हैं.

खट्टे-मीठे अनुभव…
फिल्मी हस्तियां भी अपने इस रिश्ते की ख़ूबसूरती को बहुत ही प्यार से जी रही हैं और इसे नई परिभाषा दे रही हैं. इसमें चाहे भाग्यश्री, ऐश्वर्या राय बच्चन, करीना कपूर, शिल्पा शेट्टी हो या समीरा रेड्डी. सभी अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी सास से जुड़े खट्टे-मीठे अनुभव उनके साथ शेयर करती रहती हैं. इन सब में समीरा रेड्डी तो टॉप पर हैं. वह अपनी सास के साथ ऐसे-ऐसे वीडियोज़ बनाती हैं और उसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर डालती हैं कि जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे. उनकी सास भी उतनी ही मॉडर्न और खुले दिल की हैं. वह भी बहू को भरपूर साथ देने से नहीं चूकतीं. फिर चाहे वह कोई रेसिपी बनानी हो, जैसे उन्होंने गोवा की फिश करी की रेसिपी बनाई थी और उसको एक नए अंदाज़ में पेश किया था. या फिर रसोड़े में कौन था… वायरल गाने को ही अपने अंदाज़ में सास-बहू और पोती ने अंजाम दिया था. देखने-सुनने में यह बहुत ही मस्तीभरा मज़ेदार लगता है, क्योंकि जहां बहू मॉडर्न है, तो सास भी कुछ कम नहीं है. सास-बहू में आपसी सामंजस्य और तालमेल ग़ज़ब का है. अब किसी बात का दबाव या बंधन नहीं है कि सास ऐसा कहेगी, वैसा कहेगी. अब मदर इन लॉ की जगह केवल मदर है, वहीं डॉटर इन लॉ बस डॉटर है. सास-बहू दोनों ही अपने रिश्ते को सहजता से जीते हैं और एक नई परिभाषा गढ़ रहे हैं, जिसमें बस प्यार, स्नेह और अपनापन है. यह नई परिभाषा बहुतों को रास भी आ रही है. कह सकते हैं कि वक़्त के साथ हर रिश्ते की भूमिका कमोबेश बदल रही है, उससे सास-बहू का रिश्ता भी अछूता नहीं है. सास ने बहू को बेटी के रूप में स्वीकार किया है. वे हमराज़ कहे या सहेली के तौर पर भी इस रिश्ते को जी रही हैं. वहीं बहू भी सारे संकोच, डर को त्यागकर सास को मां के रूप में स्वीकार कर रही हैं. मां, जिससे हम प्यार भी करते हैं, तो लड़ते भी हैं… जिससे हम शिकायत भी करते हैं, तो रुठते भी हैं. नई परिभाषा के तहत यही मां-बेटी सा अटूट संबंध अब सास-बहू में भी देखने मिल रहा है.

– ऊषा गुप्ता

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Daughter-In-Law And Mother-In-Law

हम सभी चाहते हैं हमारे रिश्तों की उम्र लंबी हो और उसके लिए कोशिश भी करते हैं, लेकिन यह कोशिश एक तरफ़ा हो तो थोड़ा रुकें, सोचें और चीज़ों को बदलें!

ऐसा नहीं होना चाहिए कि रिश्तों में आप वन वे ट्रैफ़िक चाहती रहें और बाक़ियों को इसका ख़याल तक ना आए. इसलिए खुद को परखें इन पहलुओं पर…

क्या आपको सब कैज़ुअली लेते हैं?

बच्चों से लेकर बड़े तक आपके लिए यही धारणा बनाए हुए हैं कि ये जो भी करती है ये तो इसका रुटीन है, इसका फ़र्ज़ है, ज़िम्मेदारी है और वो आपको काफ़ी हल्के में लेने लगते हैं. ना आपके प्रयासों की कभी सराहना होती और ना ही वो सम्मान मिलता. आप हर किसी के ग़ुस्से, फ्रस्ट्रेशन और स्ट्रेस का शिकार होती हैं. आप सबको खाना परोसती हैं लेकिन आपने कब खाया, कितना खाया इसका ख़याल किसी को नहीं आता.

क्या घर से जुड़े बड़े निर्णयों में आपकी राय नहीं ली जाती?

अगर ऐसा है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए. अक्सर पति या घर के अन्य सदस्य भी यही सोचते हैं कि पैसों, सम्पत्ति, ज़मीन या अन्य बड़े लेन देन में सारे निर्णय लेने का हक़ उन्हीं का है, भला पत्नी या घर की महिलाओं का इसमें क्या रोल. वो मानकर चलते हैं कि महिलाओं का काम सिर्फ़ घर के काम और रिश्तों की देखभाल तक ही सीमित होते हैं. उन्हें इतनी समझ ही नहीं कि वो कोई राय दे सकें इसलिए आपसे राय तक नहीं ली जाती.

क्या आपकी छोटी-मोटी ग़लतियों की कोई माफ़ी नहीं?

आपसे कहीं कोई चूक हो जाए हल्की सी भी, जैसे- कभी रोटी जल गई या सब्ज़ी में नमक कम-ज़्यादा हो गया तो हर कोई आपकी गलती पर बिना बोले नहीं रहता. आपको एहसास कराया जाता है कि आज खाना अच्छा नहीं बना, कोई भी यह नहीं सोचता कि आप भी इंसान हैं और गलती तो आपसे भी हो सकती है. उल्टा आपको यह एहसास कराया जाता हेर कि आपको कोई काम ठीक से नहीं आता.

One-Sided Relationship

आपको बराबरी का दर्जा तो दूर, पार्टनर ने मनचाहा प्यार और सम्मान भी नहीं मिलता!

पार्टनर की सोच भी यही होती है कि मेरी पत्नी का काम मेरी सेवा करना है तो भला इसके बदले वो क्यों कुछ चाहेगी… जबकि हर पत्नी चाहती है कि उसका पति ना सिर्फ़ उससे प्यार करे बल्कि उसे सम्मान और समानता की नज़र से भी देखे. कुछ स्पेशल करे, डिनर या मूवी पर ले जाए.

लेकिन इसकी बजाय क्या पति सिर्फ़ सेक्स की ज़रूरत पूरी करने के लिए ही आपके क़रीब आता है? और आप बिना शिकायत यह करती भी हैं तो आप एक तरफ़ा रिश्ते में ही हैं.

आपके स्वास्थ्य और पैसों की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ किया जाता है?

आप बीमार हो जाती हो तो सबको तकलीफ़ तो होती है लेकिन वो तकलीफ़ इस बात की होती है कि आपके बीमार होने से उन्हें असुविधा होने लगती है, इसलिए ऐसा नहीं है कि वो आपकी फ़िक्र के चलते चाहते हैं कि आप जल्दी ठीक हो जाओ बल्कि वो चाहते हैं कि उन्हें वक़्त पर खाना, कपड़े और बाक़ी चीज़ें मिलती रहें इसलिए आपका जल्दी ठीक होना ज़रूरी है. सिर्फ़ स्वास्थ्य ही नहीं आपके पैसों की ज़रूरतों को भी नज़रअंदाज़ किया जाता है और पैसों के कम-ज़्यादा खर्च होने व पैसे माँगने का कारण व हिसाब भी मांगा जाता है.

क्या करें अगर आपका रिश्ता ऐसा है तो?

  • अगर ये तमाम बातें आपके साथ भी होती हैं तो उसमें कहीं ना कहीं आपकी भी गलती है क्योंकि आपको अपना सम्मान पहले खुद करना होगा और अपनों की नज़रों में भी अपने सम्मान के लिए लड़ना होगा.
  • बात करें. हिचकें नहीं.
  • अपनी राय रखें.
  • अगर आप परिवार की ज़रूरतों का ख़याल रखती हैं तो आपकी ज़रूरतों क ख़याल रखना उनकी भी ज़िम्मेदारी है.
  • काम और ज़िम्मेदारियों को खुद ही ओढ़ने की बजाय बाँटें और अपनी अहमियत का एहसास कराने के लिए काम से कभी कभी ब्रेक भी लें.
  • आप क्या चाहती हैं इस पर पार्टनर से बात करें. आपको कौन सी बात बुरी लगती है और कौन सी अच्छी यह बताएँ.
  • जब तक आप चुपचाप सब करती रहेंगी बिना शिकायत के तब तक किसी को खुद एहसास नहीं होगा आपके एफर्ट का, बेहतर है शेयर करें और जहां ज़रूरी लगे अपने हक़ के लिए लड़ें.
  • आप खुद ही सोच लेंगी कि यह तो मेरा फ़र्ज़ है तो भला कैसे काम चलेगा, माना फ़र्ज़ है लेकिन अपने बिना स्वार्थ के किए गए इन प्रयासों को सम्मान और प्यार तो मिलना ही चाहिए. एक तारीफ़, एक मीठी सी बात ही काफ़ी होती है.
  • जो भी मिल रहा है उसे अपना नसीब मानकर ना चलें, बोलें, खुद एहसास करें और फिर औरों को भी कराएं!

अगर इन करणों से आप रिश्तों में घुटन, तनाव और खुद को ठगा हुआ सा महसूस करती हैं तो आप वन वे ट्रैफ़िक ही चला रही हैं, बेहतर होगा इन सब पर बात करें और परिस्थिति को बदलें. अगर आप अपने रिश्ते में एक तरफ़ा गाड़ी चला रही हैं तो इसे बदलने के बारे में ज़रूर सोचें!

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ईगो: किसी भी रिश्ते के लिए ये सबसे बड़ा ज़हरीला तत्व है. ईगो आपको कुछ पलों के लिए तो एक जीत का एहसास ज़रूर दिला सकता है लेकिन इसके बदले आप क्या कुछ हार जाते हैं यह बाद में पता चलता है. ईगो आपके रिश्ते को खोखला कर सकता है क्योंकि धीरे धीरे आपके अपने भी आपसे दूर होने लगते हैं क्योंकि रिश्तों में हमेशा झुककर चलने की, एडजेस्ट करने की और एक-दूसरे को सपोर्ट करने की ज़रूरत होती है लेकिन आपका ईगो आपको यह सब करने से रोकता है. बेहतर होगा ईगो कम और प्यार ज़्यादा रखें.

कम्यूनिकेशन गैप: बातचीत ना करना किसी समस्या का हल नहीं बल्कि यह रिश्तों को और उलझा देता है. एक-दूसरे से शिकायत हो या विवाद हो गया हो तो मन शांत होते ही उस पर बात करें. बात करना ही समाधान है. बात ना करने की आदत धीरे धीरे दूरियाँ बढ़ने लगती हैं और रिश्ते कमज़ोर होने लगते हैं.

ईर्ष्या: आपस में प्रतियोगी ना बनें, आप साथी हैं और एक दूसरे का सहारा भी. एक दूसरे की कामयाबी का जश्न मनाएँ ना कि ईर्ष्या पालें. अक्सर ऐसा देखा गया है कि घर के सदस्य आपस में ही प्रतियोगिता करने लग जाते हैं यह जताने के लिए कि वो श्रेष्ठ हैं या उनकी सोच हमेशा सबसे सही होती है. ऐसे में दूसरे की ज़रा सी गलती पर भी वो उसे सुनाने aur नीचा दिखाने लगते हैं कि मैंने पहले ही कहा था या देखा तुम्हारी समझ aur अक्ल के भरोसे तो कुछ नहीं हो सकता. इस तरह की भावनाएँ नकारात्मकता फैलाती हैं, इनसे बचें.

धोखा: पार्टनर को चीट ना करें और यह धोखा कई तरह का हो सकता है, प्यार का, पैसों का या फिर ज़िम्मेदारी का. रिश्ते से बाहर लोगों को अपना समझना, अपनों के बीच पैसों को लेकर ज़्यादा चालाकी करना, ज़िम्मेदारी से बचने का बहाना खोजना- ये सब धोखा ही है. रिश्ते निभाने के लिए रिश्तों को जीना और ज़िम्मेदारी लेना सीखना पड़ता है. पैसों से ऊपर उठकर सोचना पड़ता है.

झूठ: यह किसी भी रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है. झूठ चाहे कितना भी मीठा हो लेकिन वो सच की जगह कभी नहीं ले सकता. कोशिश करें कि रिश्तों में ईमानदार बने रहें और झूठ को पनपने ही ना दें. अपनी समस्यायएं शेयर करें, छिपाएँ नहीं, शेयर करने से उनका हल निकल सकता है aur छुपाने से वो बढ़ती चली जाती हैं और इसके लिए आपको झूठ पर झूठ भी बोलने पड़ते हैं, जिनका खुलासा होने पर आप पर से अपनों का ही भरोसा उठ जाता है. बेहतर होगा कि सच के साथ रहें और अपने रिश्तों को भी सच्चा बनाएँ.

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करन सिंह ग्रोवर ने जितनी भी बार रिश्ता बनाया उतनी ही बार अपने पार्टनर को चीट किया, चाहे वो श्रद्धा निगम हो या जेनिफर. फ़िलहाल तो करन बिपाशा के साथ शादी कर के सेटल हो गए हैं.

Karan Singh Grover

करन पटेल भी धोखा देने में किसी से कम नहीं. उन्होंने काम्या पंजाबी के संग रिश्ते में रहते हुए अंकिता भार्गव से भी अफेयर किया और फिर अचानक काम्या को छोड़ अंकिता से शादी रचा ली.

Karan Patel

प्रियांक शर्मा जब बिग बॉस मे गए थे तो उनकी पार्टनर थी दिव्या लेकिन शो के दौरान ही बेनाफ्शा उनके दिलो दिमाग़ पर ऐसी छाई कि उन्होंने अपनी गर्लफ़्रेंड को छोड़ दिया और बेन से रिश्ता जोड़ लिया.

Priyank Sharma

एजाज़ खान और अनीता हसनंदानी फेमस कपल थे लेकिन एजाज़ ने कनेडियन सिंगर के लिए अनीता को चीट किया और दोनों अलग हो गए.

Ijaz Khan

कृष्णा अभिषेक और कशमीरा फ़िलहाल अपनी शादी में खुश हैं लेकिन एक वक़्त ऐसा भी आया था जब कृष्णा का अफेयर तनुश्री दत्ता के साथ शुरू हो गया था. कशमीरा को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने कृष्णा को अलटीमेटम दे दिया के वो उनसे शादी करें.

Krishna Abhishek

दीपिका ककड़ भी किसी से पीछे नहीं हैं. जब उन्होंने ससुराल सिमर का शो किया था तब वो शादीशुदा थीं, लेकिन उन्हें अपने रील लाइफ पार्टनर शोएब इतने भाये कि उनसे शादी करने के लिए उन्होंने अपनी शादी तोड़ दी. हलांकि दीपिका हमेशा इस बात से इंकार करती रहीं कि शोएब के कारण उन्होंने अपनी पहली शादी तोड़ी.

Deepika Kakad

अंकित गेरा ने भी अदा खान को अपनी ऑनस्क्रीन पार्टनर रूपल त्यागी के लिए चीट किया.

Ankit Gera

अविनाश सचदेव और रूबिना दिलैक अपने शो छोटी बहू से सबके दिलों पे राज करते थे और दोनों की जोड़ी रियल लाइफ में भी हिट थी लेकिन अविनाश ने कहीं और भी दिल लगा लिया और दोनों अलग हो गए.

Avinash Sachdev

यह भी पढ़ें: वक़्त के साथ कैसे बदल गई मानव की अर्चना, सुशांत से ब्रेकअप के बाद अंकिता लोखंडे में आया था ज़बर्दस्त बदलाव! (Ankita Lokhande’s Stunning Transformation)

टीवी का सबसे मशहूर शो और उसके लीड ऐक्टर व ऐक्ट्रेस सबसे फेमस कपल बन गए थे. पवित्र रिश्ता और मानव-अर्चना घर घर में सबके फेवरेट बन गए थे. अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत ने इसी शो से ना सिर्फ़ दर्शकों का बल्कि एक- दूसरे का भी दिल जीता था. दोनों में प्यार हुआ और लगभग छः साल तक उनका ये रिश्ता टिका रहा. लेकिन जिस वक़्त सबको इंतज़ार था दोनों की शादी का उसी वक़्त दोनों ने अलग होने का फ़ैसला करके सबको चौंका दिया था और अब सुशांत की अचानक मौत ने भी सबको बेहद चौंका दिया.

sushant singh rajput and ankita lokhande

लेकिन अब जाकर यह बात सामने आई कि अंकिता से अलग होने के बाद सुशांत पूरी तरह टूट चुके थे. क्योंकि उन्हें अंकिता जितना प्यार करने वाली व समझनेवाली कोई नहीं मिली. यही वजह है कि दोनों के दोस्त इस बात को कह रहे हैं कि अगर अंकिता सुशांत के साथ होती तो वो जीवित होते. लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है.

sushant singh rajput and ankita lokhande

ब्रेकअप के बाद सुशांत ने कहा था कि यह उनका निजी मामला है और वो वही करते हैं जो उन्हें पसंद है.

वहीं दूसरी ओर अंकिता में भी सुशांत से अलगाव के बाद काफ़ी बदलाव आया था. अलगाव के बाद वो बेहद दुखी थीं और उनके सोशल मीडिया पोस्ट इसकी गवाही देते थे. वो पवित्र रिश्ता के सेट को मिस करने की बात करती थीं और रिश्तों को लेकर भी उन्होंने काफ़ी कुछ लिखा था कि रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने में वो यक़ीन करती हैं ना कि उसका प्रचार करने में.

sushant singh rajput and ankita lokhande

सुशांत की मौत की खबर ने अंकिता को काफ़ी झकझोर दिया है जिससे पता चलता है कि इस रिश्ते में सच में पवित्रता थी और दोनों साथ होते तो बेहतर होता.

sushant singh rajput and ankita lokhande

लेकिन फ़िलहाल तो सच कुछ और ही है. सुशांत से अलग होने के बाद भले ही अंकिता टूट चुकी थीं पर उन्होंने खुद को अच्छी तरह सम्भाल लिया था और उनमें आया था ग़ज़ब का बदलाव. उन्होंने ना सिर्फ़ अपना मेकओवर किया बल्कि अपने करियर पर भी फोकस करना शुरू कर दिया था.

देखते हैं अंकिता के मेकओवर की तस्वीरें.

Ankita Lokhande
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एक वक़्त था जब फ़िल्म इंडस्ट्री में दोनों के इश्क़ के चर्चे काफ़ी गर्म थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि टूट गया इनका रिश्ता?

कहा जाता है कि फ़िल्म थानेदार की शूटिंग के दौरान ही दोनों में दोस्ती हो गई थी और दोनों घंटों फ़ोन पर बातें करते थे. उसके बाद फ़िल्म साजन की शूटिंग के दौरान इनकी दोस्ती प्यार में बदल गई.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

दोनों ही अपने रिश्ते को लेकर काफ़ी संजीदा थे और अपने प्यार को वो शादी की मंज़िल तक ले जाने की ख़्वाहिश भी रखते थे. लेकिन खलनायक फ़िल्म के रिलीज़ से पहले ही मुंबई बम धमाकों के केस में आर्म्स एक्ट के तहत संजय को गिरफ़्तार कर लिया गया था और उन्हें 16 महीने जेल में रहना पड़ा था. उनकी फ़िल्म खलनायक बहुत बड़ी हिट हुई थी लेकिन तब तक माधुरी अपना मन बदल चुकी थीं.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

संजय ने गिरफ़्तारी से पहले माधुरी को काफ़ी फ़ोन किया था लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. यही नहीं, जेल में भी माधुरी उनसे एक बार भी मिलने नहीं पहुंची. वो समझ चुकी थीं कि संजय के साथ उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं होगा और वो तय कर चुकी थीं कि अब उन्हें अपने करियर व निजी जीवन को बेहतर दिशा की ओर ले जाना है.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

संजय के साथ उन्हें कोई भविष्य नज़र नहीं आया और इसी वजह से संजू बाबा के जेल से छूटने के बाद भी माधुरी उनसे नहीं मिलीं. माधुरी ने संजय के साथ भविष्य में कोई भी फ़िल्म करने से भी मना कर दिया.

कहा जाता है कि संजय दत्त लंबे समय तक माधुरी के इस धोखे को भुला नहीं पाए थे. उन्हें इस बात की शिकायत थी कि जिस समय उन्हें माधुरी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी उसी समय उनके प्यार ने उनका साथ छोड़ दिया.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

यही नहीं, उन्हें इस बात का भी ग़म था कि जेल से आने के बाद भी माधुरी ने उन्हें अपनी बात कहने तक का मौक़ा नहीं दिया. बिना बताए ही रिश्ता तोड़ देने से संजय काफ़ी आहत थे लेकिन दूसरी ओर माधुरी भी अपनी जगह ग़लत नहीं थीं क्योंकि संजय ने जो किया उसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी.

Sanjay Dutt And Madhuri Dixit

बहरहाल, अब दोनों ही हैपिली मैरिड हैं और अब दोनों की मुलाक़ात भी होती है तो वो हल्की फुलकी बातें ही करते हैं. दोनों उस दौर से बाहर निकल चुके और अपनी ज़िंदगी में खुश हैं.

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प्रियांक शर्मा(Priyank Sharma) यानी छोटे पर्दे का चॉकलेट बॉय जिनके लाखों फ़ैंस तो तब ही बन गए थे जब वो रोडीज़ में आए थे. उसकेबाद वो स्प्लिट्सविला का हिस्सा बनें और फिर बिग बॉस 11 में शिरकत की. 

प्रियांक शर्मा उस समय अपनी पर्सनल लाइफ़ को लेके भी काफ़ी चर्चा में थे और उनकी गर्लफ़्रेंड बिग बॉस में फ़ैमिलीटास्क में आई भी थीं, उसके बाद उनका ब्रेकअप भी हो गया. उसी दौरान वो एक और हाउस मेट के काफ़ी क़रीब आ गए थे, वो थीं बेनाफ़्शा सूनावाला. 

हाल ही में इन दोनों ने ही अपने प्यार aur रिश्ते को अफ़िशियल कर दिया है और अपने अपने इंस्टाग्राम पर स्वीट सी पिकशेयर की है जिसमें प्रियांक बेनाफ़्शा को किस कर रहे हैं. 

बेनाफ़्शा ने भी कैप्शन दिया है कि मुझे तुम्हारी तरह कोई नहीं रख सकता… इसे अनकनवेनशनल कहूँगी… मेरा प्यारआदतन है.

इनकी इस पोस्ट पर कई सेलेब कॉमेंट भी कर रहे हैं और उनके रिश्ते पर खुश भी हैं.

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रिश्ते में अतिरिक्त प्रयास ना करना: एक समय के बाद हम खुद यह मान लेते हैं कि अब रिश्ते को अतिरिक्त समय देने कीया कुछ स्पेशल करने की ज़रूरत नहीं. हमको लगता है हमारा रिश्ता स्टेबल हो गया और यहीं हम ग़लती करते हैं. धीरे धीरेरिश्ते में बोरियत पनपने लगती है और वो रूटीन सा लगने लगता है. 

क्या करें: रिश्ते को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आपके प्रयास ज़रूरी हैं. हमेशा कुछ नया करते रहें और पार्ट्नर कोस्पेशल फ़ील करवाते रहें.

विवादों को उनसुलझा ही रहने देना: अक्सर कई कपल यह ग़लती करते हैं. उनमें कोई झगड़ा या विवाद हो जाए तो वोउसको सुलझाने की बजाए बात करना बंद कर देंगे हैं और फिर धीरे धीरे उसको टालना शुरू करके फिर से सामान्य होनेलगते हैं. लेकिन वो बात वहीं की वहीं रह जाती है, जो कभीना कभी बैकफ़ायर करती ही है.

क्या करें: बेहतर होगा कि विवाद के बाद जब आप दोनों का ही ग़ुस्सा शांत हो जाए तब उस पर बात की जाए. समस्या कीजड़ तक जाना ज़रूरी है ताकि उसको सुलझाया जा सके aur भविष्य में फिर ऐसा विवाद ना हो.

एक दूसरे की भावनाओं को जानबूझकर आहत करना: अक्सर कपल ऐसा करते हैं. उन्हें लगता है कि अगर पार्टनर उन्हें हर्टकरता है तो वो भी बदला लेंगे. एक दूसरे को ताना देना या कोई ऐसी बात करना जिससे पार्टनर आहत हो ऐसा ना करें. इससे आपका रिश्ता कमज़ोर होगा और विवाद भी बढ़ेंगे. एक दूसरे के घरवालों को लेकर कोई ताना ना दें और ना हीउनका अपमान करें. दूसरों के सामने भी पार्टनर को नीचा ना दिखायें, वरना आपका रिश्ता ज़्यादा नहीं चल पाएगा. 

क्या करें: आप दोनों एक दूसरे को मोटीवेट करने के लिए साथ हो ना कि तकलीफ़ देने के लिए. एक दूसरे की कमज़ोरियोंको स्वीकारें और फिर आगे बढ़ें. सभी को सम्मान दें और आपसी झगड़े में घरवालों को बीच में ना लायें.

रिश्ते के बाहर आकर्षण महसूस करना: पार्टनर से विवाद हुआ तो इसका यह मतलब नहीं कि ऑफ़िस में कॉलीग के सामनेअपनी पर्सनल लाइफ़ का विश्लेषण करने लगें. इस से बचें और इस तरह के अस्थाई बाहरी आकर्षण से भी. 

क्या करें: यह सोचें कि अब तक आपके सुख दुःख में पार्ट नर ने ही साथ दिया है इसलिए उसका सम्मान करें aur मामूलीविवाद के चलते उसकी अच्छाइयों को अनदेखा ना करें. किसी तीसरे के नज़रियर से अपने रिश्ते को जज ना करें.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें: कभी बच्चों के नाम पर, कभी सेक्स को लेकर तो कभी अपनी जान ले लेनी की बात करकेअक्सर कपल भावनायों से खेलते हैं. इससे बचें क्योंकि ऐसा करने पर पार्टनर आप अपना सम्मान खो देंगे. आपकी इनधमकियों को पार्टनर एक समय के बाद नज़रअंदाज़ करने लगता है हो सकता है कि वो बाहर भी रिश्ता क़ायम कर ले.

क्या करें: बातचीत ही समस्या का समाधान है. परिपक्वता दिखायें, ना कि बचपना. पार्टनर की भवनाओं को समझें औरइमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें.

सब ठीक हो जाने के इंतज़ार में कई महिलाएं चुपचाप सब कुछ सहते हुए एब्यूसिव रिलेशनशिप में रहती हैं… लेकिन कई बार उनकी इस चुप्पी का परिणाम इतना घातक होता है कि उसकी भरपाई मुश्किल हो जाती है… घर बचाने की कोशिश में कई बार उनका और बच्चों का भविष्य ख़राब हो जाता है… पेश है, भारत में एब्यूसिव रिलेशनशिप का दंश झेलती महिलाओं पर एक रिपोर्ट.

एब्यूसिव रिलेशनशिप के कारण

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ के अनुसार, एब्यूसिव रिलेशनशिप के कई कारण होते हैं. प्रताड़ित करनेवाले और प्रताड़ित होनेवाले दोनों का बचपन कैसे बीता है, इसका भी उनके व्यवहार पर असर पड़ता है. डॉ. माधवी सेठ के अनुसार एब्यूसिव रिलेशनशिप के ये कारण होते हैं-

  • जो महिलाएं बचपन में अपनी मां को पिता से पिटते या गाली सुनते देखती हैं, तो उन्हें लगता है कि ऐसा होना सामान्य बात है. ऐसे में जब वो इसकी शिकार होती हैं, तो उन्हें इसमें कुछ ग़लत नहीं लगता और वो चुपचाप सब कुछ सहती जाती हैं. उन्हें ये समझ ही नहीं आता कि वो एब्यूसिव रिलेशनशिप में हैं.
  • इसी तरह जो लड़के बचपन में अपने पिता को अपनी मां को पीटते देखते हैं, वो महिलाओं की इज़्ज़त नहीं करते. उन्हें लगता है कि पत्नी को पीटना उनका अधिकार है.
  • कई घरों में आज भी पति के पैर दबाना, सास के पैर दबाना औरत का धर्म माना जाता है. इसी तरह पत्नी या बहू को मारना-पीटना भी अधिकार समझा जाता है.
  • महिलाएं अपने पति में अपने पिता की छवि तलाशती हैं. ऐसे में यदि किसी महिला का पिता उसकी मां को पीटता या गाली देता था, तो उसे भी पति के हाथों पिटना सामान्य-सी बात लगती है.
  • पुरुष भी पत्नी में अपनी मां की छवि तलाशते हैं, इसलिए उन्हें भी अपनी मां जैसी महिला ही पसंद आती है और वे अपनी पत्नी के साथ भी वैसा ही व्यवहार करते हैं, जैसा उनके पिता उनकी मां के साथ करते थे.
  • अधिकतर महिलाएं आर्थिक और भावनात्मक रूप से पुरुष से जुड़ी होती हैं, इसलिए वो पुरुष की हर ज़्यादती बर्दाश्त करती हैं.
  • कई महिलाएं पति की प्रताड़ना इसलिए बर्दाश्त करती हैं, ताकि रिश्ता टूटने से उनके बच्चों का भविष्य ख़राब न हो जाए. वो अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलने से डरती हैं. वो ये मान लेती हैं कि उनका पति ऐसा ही है और अब उन्हें आगे की ज़िंदगी ऐसे ही बितानी है.
  • परिवार, रिश्तेदार और समाज का प्रेशर भी महिलाओं को एब्यूसिव रिलेशनशिप में रहने के लिए बाध्य करता है.
  • कई महिलाएं पति से ज़्यादा काबिल होते हुए, उनसे ज़्यादा कमाते हुए भी एब्यूसिव रिलेशन में रहती हैं. उन्हें लगता है कि उनके थोड़ा-सा सहन करने से यदि घर ठीक से चल रहा है तो कोई बात नहीं. पति सबके सामने उन्हें थप्पड़ भी मार देता है, तो भी वो कुछ नहीं कर पातीं.
  • कई महिलाएं यहां तक कहती हैं कि पति उन्हें मारता है तो क्या हुआ, उन्हें प्यार भी तो करता है. उन्हें लगता है कि पति यदि उन्हें प्यार करता है, तो उसे पत्नी को पीटने का भी अधिकार है.
ख़तरनाक होता है मेंटल एब्यूस

फिज़िकल एब्यूस की तरह कई महिलाएं मेंटल एब्यूस की शिकार भी होती हैं. मेंटल एब्यूस पढ़े-लिखे और पॉलिश्ड लोगों में ज़्यादा पाया जाता है और मेंटल एब्यूस के केसेस ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं, क्योंकि यहां पर प्रताड़ना के कोई निशान नज़र नहीं आते, लेकिन चोट बहुत ज़्यादा पहुंचती है.

  • यदि किसी पुरुष की पत्नी उससे ज़्यादा क़ाबिल है, तो वो मेंटल एब्यूस का सहारा लेता है. वो सबके सामने पत्नी को ज़लील करके या उसका मज़ाक उड़ाकर उसका कॉन्फिडेंस कम कर देता है. किसी क़ाबिल महिला के लिए ये घोषित कर देना कि वो क़ाबिल नहीं है, उस महिला के सेल्फ कॉन्फिडेंस और सेल्फ रिस्पेक्ट के लिए बहुत घातक होता है.
  • पत्नी कहीं पति से आगे न निकल जाए, इसके लिए कई पुरुष अपनी पत्नी को काम करने से रोकते हैं. अपने बचाव में वो पत्नी को ये दलील देते हैं कि हमारे घर में महिलाएं काम नहीं करतीं या तुम्हें काम करने की क्या ज़रूरत है.
  • पति के अचीवमेंट के बारे में महिलाएं तो बढ़-चढ़कर बताती हैं, लेकिन कई पुरुष ऐसा नहीं करते. पत्नी की कामयाबी से उन्हें ईर्ष्या होने लगती है और वो पत्नी को बात-बात में नीचा दिखाने लगते हैं.

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एब्यूसिव रिलेशनशिप के परिणाम
  • पति जब पत्नी को सबके सामने पीटता है, तो इससे उस महिला का कॉन्फिडेंस कम होता है और दूसरों के सामने वो दया का पात्र बन जाती है.
  • आज की पढ़ी-लिखी लड़कियां अब एब्यूसिव रिलेशन बर्दाश्त नहीं करतीं, जिससे उनके रिश्ते लंबे समय तक नहीं टिक पाते. तलाक़ के मामले बढ़ने का एक कारण घरेलू हिंसा भी है.
  • पति से प्रताड़ित महिला यदि इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती है, तो घर की अन्य महिलाएं उसका साथ देने की बजाय उसे ही दोषी ठहराती हैं. ऐसे में कई महिलाएं चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं.
पति द्वारा प्रताड़ित महिलाओं का सच

भारत में पति से प्रताड़ित होनेवाली महिलाओं की संख्या बहुत है और हैरत की बात ये है कि अधिकतर महिलाओं को इससे कोई आपत्ति भी नहीं हैं. ऐसी महिलाओं को लगता है कि पति से पिटना उनकी नियति है और उन्हें ऐसे ही जीना है.

  • वडोदरा के एक ग़ैर सरकारी संगठन ‘सहज’ के अध्ययन के अनुसार, भारत में क़रीब एक तिहाई शादीशुदा महिलाएं पतियों के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं और हैरत की बात ये है कि कई महिलाओं को पति के हाथों पिटाई से कोई गुरेज भी नहीं है.
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस) 4 के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 साल के आयु वर्ग की महिलाओं में से लगभग 27 प्रतिशत ने 15 साल की उम्र से ही हिंसा बर्दाश्त
    की है.
  • इंडियन जर्नल ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में हर तीसरी महिला घरेलू हिंसा की शिकार है.
  • नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के अनुसार, भारत में 37 फ़ीसदी महिलाएं अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में सेक्सुअल, शारीरिक और मानसिक हिंसा सहती हैं. सर्वे से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जो महिलाएं अपने पतियों पर निर्भर हैं, उन्हें दूसरी महिलाओं की अपेक्षा ज़्यादा यातनाएं झेलनी पड़ती हैं.
एब्यूसिव रिलेशनशिप से कैसे उबरें?
  • एब्यूसिव रिलेशनशिप से उबरने के लिए सबसे पहले महिला को इसकी जानकारी होनी चाहिए कि वो जो सहन कर रही है, वो एब्यूसिव व्यवहार है.
  • यदि आपका पति आपको प्रताड़ित करता है, तो पति से इस बारे में शांति से बात करें. उन्हें प्यार से समझाएं कि उनके ऐसे व्यवहार से आपका सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता है और आप दोनों के रिश्ते में तनाव भी बढ़ता है.
  • पैरेंट्स को ये बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि उनका व्यवहार उनके बच्चों के लिए रोल मॉडल बने. पापा मार सकते हैं और मम्मी मार खा सकती है, यदि ये सब बच्चे अपने घर में देखते हैं, तो आगे चलकर वो भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं. अत: बच्चों के सामने कभी भी झगड़ा न करें. घर में सभी एक-दूसरे की रिस्पेक्ट करें, ताकि बच्चे भी आपसे यही सीखें.
  • अपने बेटे को महिलाओं की इज़्ज़त करना सिखाएं.
  • अपनी बेटी को मेंटली और फिज़िकली मज़बूत बनाएं. बेटी को सिखाएं कि चुपचाप मार खाना या प्रताड़ना सहना सही नहीं है.
  • अपने बच्चों को सिखाएं कि कोई भी किसी को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता, फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला.
पुरुष भी होते हैं एब्यूस

ऐसा नहीं है कि स़िर्फ महिलाएं ही पति द्वारा प्रताड़ित होती हैं, पुरुष भी पत्नी द्वारा प्रताड़ित होते हैं. फ़र्क़ स़िर्फ इतना है कि महिलाएं पति को फिज़िकल एब्यूस नहीं करतीं, वो मेंटल एब्यूस करती हैं. जो पुरुष अपनी पत्नी से प्रताड़ित होते हैं, उनकी शिकायत होती है कि उनकी पत्नी उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें दोषी ठहराती हैं, बात-बात में आंसू बहाकर उनसे हर बात मनवा लेती है, उन्हें सेक्स से वंचित रखती है, व़क्त पर खाना नहीं देती, बच्चों को उनके ख़िलाफ़ भड़काती है आदि. कई महिलाएं इतनी मेन्यूपुलेटिव होती हैं कि पुरुष ये समझ ही नहीं पाता कि आख़िर उनकी पत्नी के मन में चल क्या रहा है. ऐसी महिलाएं इतने शातिर तरी़के से पुरुष को प्रताड़ित करती हैं कि लोगों को दोषी भी पुरुष ही लगता है. ऐसी महिलाएं आंसुओं का सहारा लेकर अपना बचाव करती हैं और पुरुष को दोषी ठहरा देती हैं.

– कमला बडोनी

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जो चीज़ हमें सबसे प्यारी होती है, उसे खोने का डर भी हमें उतना ही ज़्यादा होता है. ऐसे में हम अपने उस रिश्ते को इतना संभालकर और दुनिया से बचाकर रखना चाहते हैं कि हमारे मन में हर पल अपने रिश्ते के खो जाने का डर बना रहता है. लेकिन डरकर कोई रिश्ता नहीं जीया जा सकता, अपने रिलेशनशिप फियर्स से बाहर निकलकर ही आप एक हेल्दी रिश्ता जी सकते हैं. रिलेशनशिप फियर्स कौन-कौन से होते हैं और उन्हें कैसे दूर करें? आइए, जानते हैं.

रिश्ता न निभाने का डर

जब आप किसी से बेइंतहा प्यार करते हैं, तो उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहते. ऐसे में आपको हर पल ये डर लगा रहता है कि क्या आपका पार्टनर इस रिश्ते को उम्रभर निभाएगा. कहीं आपको बीच सफ़र में छोड़ तो नहीं देगा.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

जब तक आप अपने रिलेशनशिप को शादी के बंधन में नहीं बांध देते, तब तक कुछ हद तक आपके मन में ये डर होना लाज़मी है, लेकिन अपने डर के कारण पार्टनर पर बेवजह शक करना सही नहीं है. यदि आप अपने इस डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें और अपने रिश्ते को बिना डरे प्यार से जीएं.

धोखा देने का डर

प्यार में धोखा कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरों के रिश्ते में धोखे की बात सुनकर लोग अपने पार्टनर पर भी शक करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि कहीं उनका पार्टनर भी उन्हें धोखा तो नहीं दे देगा. ऐसे में कई बार वो अपने पार्टनर को लेकर इतने पज़ेसिव हो जाते हैं कि जाने-अनजाने उसकी हर हरक़त पर नज़र रखने लगते हैं. उनकी इस हरक़त से पार्टनर को चिढ़ होने लगती है, जिससे उनके रिश्ते में बेवजह तनाव बढ़ने लगता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

प्यार के रिश्ते में विश्‍वास बहुत ज़रूरी है. बेवजह पार्टनर पर शक करना या उस पर नज़र रखना सही नहीं है. अपने पार्टनर को इतना स्पेस ज़रूर दें कि वो उसे आपके साथ घुटन न महसूस हो. आप चाहें तो अपना डर पार्टनर के साथ शेयर करके उनसे इस बारे में खुलकर बात कर सकते हैं.

ज़िम्मेदारी न निभाने का डर

कई लोगों को ये डर रहता है कि उनका पार्टनर क्या अपनी सभी ज़िम्मेदारियां बख़ूबी निभा सकेगा? जब आप किसी को अपना जीवनसाथी बनाते हैं, तो आपके रिश्ते की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में एक-दूसरे का साथ निभाने के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियां निभाना भी उतना ही ज़रूरी हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

कई बार ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ख़ुद आगे बढ़कर ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियां ओढ़ लेता है, फिर जब उससे इतनी सारी ज़िम्मेदारियां नहीं निभाई जातीं, तो वो अपने पार्टनर को गैरज़िम्मेदार साबित करने लगता है. उसे लगता है कि उसने ये ज़िम्मेदारियां यदि अपने पार्टनर के साथ शेयर की, तो क्या उनका पार्टनर ये ज़िम्मेदारियां निभा सकेगा? अत: रिश्ते में बंधने से पहले अपनी ज़िम्मेदारियों के बारे में पार्टनर से बात कर लें, ताकि बाद में आप दोनों के बीच इस बात को लेकर मनमुटाव न हो.

सम्मान न मिलने का डर

दो लोग जब एक रिश्ते में बंधते हैं, तो उनके साथ-साथ दो परिवार भी एक हो जाते हैं. ऐसे में कई बार एक पार्टनर का परिवार दूसरे पर इस कदर हावी रहता है कि उसे वो सम्मान नहीं मिल पाता, जो उसका अधिकार है. कई बार पार्टनर भी एक-दूसरे का सम्मान नहीं करते, जिसके कारण परिवार और दोस्तों के बीच उनकी छवि ख़राब होती है और उनके रिश्ते में भी दरार पड़ने लगती है. किसी भी रिश्ते में सम्मान न मिल पाने का डर सही नहीं है.

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कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

शादी के रिश्ते में दोनों पार्टनर्स को उचित सम्मान मिले, इसका ख़्याल दोनों को रखना चाहिए. यदि आप दोनों ने साथ जीने का ़फैसला किया है, तो एक-दूसरे के सम्मान का ख़्याल भी आपको ही रखना होगा. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको वो सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके आप हक़दार हैं, तो इसके लिए आपको अपने पार्टनर से ज़रूर बात करनी चाहिए.

समझौते का डर

रिश्ता निभाने के लिए दोनों को पार्टनर्स को कई समझौते करने पड़ते हैं. एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना पड़ता है. लेकिन कई बार एक पार्टनर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए राज़ी नहीं होता. ऐसे में दूसरे पार्टनर के लिए रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर भी किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं होते, तो आपका डर वाजिब है. ऐसे में अकेले आपकी कोशिश से कुछ नहीं होगा. आपको अपने पार्टनर से इस बारे में बात करनी होगी कि उन्हें आपकी भावनाओं का भी ध्यान रखना होगा, तभी आपके रिश्ते में प्यार और ख़ुशियां बरकरार रहेंगी.

एक्स से मिलने का डर

यदि आपके पार्टनर का आपसे पहले किसी और से अफेयर था और अब भी उनके बीच बातचीत जारी है, तो आपके मन में डर या शंका होना स्वाभाविक है. इस डर की वजह शक से ज़्यादा पार्टनर को खो देने का भय है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप पार्टनर की हर बात को उनकी एक्स से जोड़ें.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर की अपनी एक्स से फॉर्मल बातचीत है, तो कोई बात नहीं, लेकिन आपको यदि लगता है कि वो फिर उसकी तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं, तो आपको पार्टनर के सामने अपनी शिकायत रखनी चाहिए. रिश्ते में पार्टनर को स्पेस देना ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा स्पेस देने से भी कई बार समस्या बढ़ जाती है.

रिलेशनशिप फियर्स दूर करने के आसान उपाय

अपने रिश्ते से डर को दूर भगाने और प्यार बढ़ाने के लिए आपको ये टिप्स ट्राई करने चाहिए-

  • अपने पार्टनर से हर मुद्दे पर खुलकर बात करें, ताकि आप दोनों के मन में यदि कोई बात हो, तो वो मन में दबी न रह जाए.
  • पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें. अपने परिवार और रिश्तेदारों के सामने कभी अपने पार्टनर का अपमान न होने दें.
  • अपने रिश्ते को भरपूर टाइम दें, ताकि समय के अभाव में आपके पार्टनर का मन कहीं और न लगे.
  • अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी पीछे न हटें, पार्टनर का हमेशा साथ दें.
  • यदि आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपको धोखा दे रहा है, तो कोई भी ़फैसला लेने से पहले पार्टनर को एक मौक़ा ज़रूर दें.
  • पार्टनर पर स़िर्फ अपनी इच्छाएं न थोपें, उनकी इच्छाओं का भी ध्यान रखें.
  • रिश्ते में वफ़ादारी की उम्मीद स़िर्फ पार्टनर से न करें, बल्कि ख़ुद भी अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार रहें.
  • अपने रिश्ते में रोमांस कभी कम न होने दें, इससे आपके रिश्ते में ऊर्जा और प्यार हमेशा बना रहेगा.

– कमला बडोनी

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