Tag Archives: Relationship

एब्यूसिव रिलेशनशिप में क्यों रहती हैं महिलाएं? (Why Women Stay In Abusive Relationship?)

सब ठीक हो जाने के इंतज़ार में कई महिलाएं चुपचाप सब कुछ सहते हुए एब्यूसिव रिलेशनशिप में रहती हैं… लेकिन कई बार उनकी इस चुप्पी का परिणाम इतना घातक होता है कि उसकी भरपाई मुश्किल हो जाती है… घर बचाने की कोशिश में कई बार उनका और बच्चों का भविष्य ख़राब हो जाता है… पेश है, भारत में एब्यूसिव रिलेशनशिप का दंश झेलती महिलाओं पर एक रिपोर्ट.

एब्यूसिव रिलेशनशिप के कारण

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ के अनुसार, एब्यूसिव रिलेशनशिप के कई कारण होते हैं. प्रताड़ित करनेवाले और प्रताड़ित होनेवाले दोनों का बचपन कैसे बीता है, इसका भी उनके व्यवहार पर असर पड़ता है. डॉ. माधवी सेठ के अनुसार एब्यूसिव रिलेशनशिप के ये कारण होते हैं-

  • जो महिलाएं बचपन में अपनी मां को पिता से पिटते या गाली सुनते देखती हैं, तो उन्हें लगता है कि ऐसा होना सामान्य बात है. ऐसे में जब वो इसकी शिकार होती हैं, तो उन्हें इसमें कुछ ग़लत नहीं लगता और वो चुपचाप सब कुछ सहती जाती हैं. उन्हें ये समझ ही नहीं आता कि वो एब्यूसिव रिलेशनशिप में हैं.
  • इसी तरह जो लड़के बचपन में अपने पिता को अपनी मां को पीटते देखते हैं, वो महिलाओं की इज़्ज़त नहीं करते. उन्हें लगता है कि पत्नी को पीटना उनका अधिकार है.
  • कई घरों में आज भी पति के पैर दबाना, सास के पैर दबाना औरत का धर्म माना जाता है. इसी तरह पत्नी या बहू को मारना-पीटना भी अधिकार समझा जाता है.
  • महिलाएं अपने पति में अपने पिता की छवि तलाशती हैं. ऐसे में यदि किसी महिला का पिता उसकी मां को पीटता या गाली देता था, तो उसे भी पति के हाथों पिटना सामान्य-सी बात लगती है.
  • पुरुष भी पत्नी में अपनी मां की छवि तलाशते हैं, इसलिए उन्हें भी अपनी मां जैसी महिला ही पसंद आती है और वे अपनी पत्नी के साथ भी वैसा ही व्यवहार करते हैं, जैसा उनके पिता उनकी मां के साथ करते थे.
  • अधिकतर महिलाएं आर्थिक और भावनात्मक रूप से पुरुष से जुड़ी होती हैं, इसलिए वो पुरुष की हर ज़्यादती बर्दाश्त करती हैं.
  • कई महिलाएं पति की प्रताड़ना इसलिए बर्दाश्त करती हैं, ताकि रिश्ता टूटने से उनके बच्चों का भविष्य ख़राब न हो जाए. वो अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलने से डरती हैं. वो ये मान लेती हैं कि उनका पति ऐसा ही है और अब उन्हें आगे की ज़िंदगी ऐसे ही बितानी है.
  • परिवार, रिश्तेदार और समाज का प्रेशर भी महिलाओं को एब्यूसिव रिलेशनशिप में रहने के लिए बाध्य करता है.
  • कई महिलाएं पति से ज़्यादा काबिल होते हुए, उनसे ज़्यादा कमाते हुए भी एब्यूसिव रिलेशन में रहती हैं. उन्हें लगता है कि उनके थोड़ा-सा सहन करने से यदि घर ठीक से चल रहा है तो कोई बात नहीं. पति सबके सामने उन्हें थप्पड़ भी मार देता है, तो भी वो कुछ नहीं कर पातीं.
  • कई महिलाएं यहां तक कहती हैं कि पति उन्हें मारता है तो क्या हुआ, उन्हें प्यार भी तो करता है. उन्हें लगता है कि पति यदि उन्हें प्यार करता है, तो उसे पत्नी को पीटने का भी अधिकार है.
ख़तरनाक होता है मेंटल एब्यूस

फिज़िकल एब्यूस की तरह कई महिलाएं मेंटल एब्यूस की शिकार भी होती हैं. मेंटल एब्यूस पढ़े-लिखे और पॉलिश्ड लोगों में ज़्यादा पाया जाता है और मेंटल एब्यूस के केसेस ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं, क्योंकि यहां पर प्रताड़ना के कोई निशान नज़र नहीं आते, लेकिन चोट बहुत ज़्यादा पहुंचती है.

  • यदि किसी पुरुष की पत्नी उससे ज़्यादा क़ाबिल है, तो वो मेंटल एब्यूस का सहारा लेता है. वो सबके सामने पत्नी को ज़लील करके या उसका मज़ाक उड़ाकर उसका कॉन्फिडेंस कम कर देता है. किसी क़ाबिल महिला के लिए ये घोषित कर देना कि वो क़ाबिल नहीं है, उस महिला के सेल्फ कॉन्फिडेंस और सेल्फ रिस्पेक्ट के लिए बहुत घातक होता है.
  • पत्नी कहीं पति से आगे न निकल जाए, इसके लिए कई पुरुष अपनी पत्नी को काम करने से रोकते हैं. अपने बचाव में वो पत्नी को ये दलील देते हैं कि हमारे घर में महिलाएं काम नहीं करतीं या तुम्हें काम करने की क्या ज़रूरत है.
  • पति के अचीवमेंट के बारे में महिलाएं तो बढ़-चढ़कर बताती हैं, लेकिन कई पुरुष ऐसा नहीं करते. पत्नी की कामयाबी से उन्हें ईर्ष्या होने लगती है और वो पत्नी को बात-बात में नीचा दिखाने लगते हैं.

यह भी पढ़ें:  किस महीने में हुई शादी, जानें कैसी होगी मैरिड लाइफ? (Your Marriage Month Says A Lot About Your Married Life)

एब्यूसिव रिलेशनशिप के परिणाम
  • पति जब पत्नी को सबके सामने पीटता है, तो इससे उस महिला का कॉन्फिडेंस कम होता है और दूसरों के सामने वो दया का पात्र बन जाती है.
  • आज की पढ़ी-लिखी लड़कियां अब एब्यूसिव रिलेशन बर्दाश्त नहीं करतीं, जिससे उनके रिश्ते लंबे समय तक नहीं टिक पाते. तलाक़ के मामले बढ़ने का एक कारण घरेलू हिंसा भी है.
  • पति से प्रताड़ित महिला यदि इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती है, तो घर की अन्य महिलाएं उसका साथ देने की बजाय उसे ही दोषी ठहराती हैं. ऐसे में कई महिलाएं चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं.
पति द्वारा प्रताड़ित महिलाओं का सच

भारत में पति से प्रताड़ित होनेवाली महिलाओं की संख्या बहुत है और हैरत की बात ये है कि अधिकतर महिलाओं को इससे कोई आपत्ति भी नहीं हैं. ऐसी महिलाओं को लगता है कि पति से पिटना उनकी नियति है और उन्हें ऐसे ही जीना है.

  • वडोदरा के एक ग़ैर सरकारी संगठन ‘सहज’ के अध्ययन के अनुसार, भारत में क़रीब एक तिहाई शादीशुदा महिलाएं पतियों के हाथों हिंसा की शिकार होती हैं और हैरत की बात ये है कि कई महिलाओं को पति के हाथों पिटाई से कोई गुरेज भी नहीं है.
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस) 4 के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 साल के आयु वर्ग की महिलाओं में से लगभग 27 प्रतिशत ने 15 साल की उम्र से ही हिंसा बर्दाश्त
    की है.
  • इंडियन जर्नल ऑफ कम्यूनिटी मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में हर तीसरी महिला घरेलू हिंसा की शिकार है.
  • नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के अनुसार, भारत में 37 फ़ीसदी महिलाएं अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में सेक्सुअल, शारीरिक और मानसिक हिंसा सहती हैं. सर्वे से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जो महिलाएं अपने पतियों पर निर्भर हैं, उन्हें दूसरी महिलाओं की अपेक्षा ज़्यादा यातनाएं झेलनी पड़ती हैं.
एब्यूसिव रिलेशनशिप से कैसे उबरें?
  • एब्यूसिव रिलेशनशिप से उबरने के लिए सबसे पहले महिला को इसकी जानकारी होनी चाहिए कि वो जो सहन कर रही है, वो एब्यूसिव व्यवहार है.
  • यदि आपका पति आपको प्रताड़ित करता है, तो पति से इस बारे में शांति से बात करें. उन्हें प्यार से समझाएं कि उनके ऐसे व्यवहार से आपका सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता है और आप दोनों के रिश्ते में तनाव भी बढ़ता है.
  • पैरेंट्स को ये बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि उनका व्यवहार उनके बच्चों के लिए रोल मॉडल बने. पापा मार सकते हैं और मम्मी मार खा सकती है, यदि ये सब बच्चे अपने घर में देखते हैं, तो आगे चलकर वो भी ऐसा ही व्यवहार करते हैं. अत: बच्चों के सामने कभी भी झगड़ा न करें. घर में सभी एक-दूसरे की रिस्पेक्ट करें, ताकि बच्चे भी आपसे यही सीखें.
  • अपने बेटे को महिलाओं की इज़्ज़त करना सिखाएं.
  • अपनी बेटी को मेंटली और फिज़िकली मज़बूत बनाएं. बेटी को सिखाएं कि चुपचाप मार खाना या प्रताड़ना सहना सही नहीं है.
  • अपने बच्चों को सिखाएं कि कोई भी किसी को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता, फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला.
पुरुष भी होते हैं एब्यूस

ऐसा नहीं है कि स़िर्फ महिलाएं ही पति द्वारा प्रताड़ित होती हैं, पुरुष भी पत्नी द्वारा प्रताड़ित होते हैं. फ़र्क़ स़िर्फ इतना है कि महिलाएं पति को फिज़िकल एब्यूस नहीं करतीं, वो मेंटल एब्यूस करती हैं. जो पुरुष अपनी पत्नी से प्रताड़ित होते हैं, उनकी शिकायत होती है कि उनकी पत्नी उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें दोषी ठहराती हैं, बात-बात में आंसू बहाकर उनसे हर बात मनवा लेती है, उन्हें सेक्स से वंचित रखती है, व़क्त पर खाना नहीं देती, बच्चों को उनके ख़िलाफ़ भड़काती है आदि. कई महिलाएं इतनी मेन्यूपुलेटिव होती हैं कि पुरुष ये समझ ही नहीं पाता कि आख़िर उनकी पत्नी के मन में चल क्या रहा है. ऐसी महिलाएं इतने शातिर तरी़के से पुरुष को प्रताड़ित करती हैं कि लोगों को दोषी भी पुरुष ही लगता है. ऐसी महिलाएं आंसुओं का सहारा लेकर अपना बचाव करती हैं और पुरुष को दोषी ठहरा देती हैं.

– कमला बडोनी

यह भी पढ़ें: न्यूली मैरिड के लिए मॉडर्न ज़माने के सात वचन (7 Modern Wedding Vows For Newly Married)

कैसे दूर करें अपने रिलेशनशिप फियर्स?(How To Overcome Relationship Fears?)

जो चीज़ हमें सबसे प्यारी होती है, उसे खोने का डर भी हमें उतना ही ज़्यादा होता है. ऐसे में हम अपने उस रिश्ते को इतना संभालकर और दुनिया से बचाकर रखना चाहते हैं कि हमारे मन में हर पल अपने रिश्ते के खो जाने का डर बना रहता है. लेकिन डरकर कोई रिश्ता नहीं जीया जा सकता, अपने रिलेशनशिप फियर्स से बाहर निकलकर ही आप एक हेल्दी रिश्ता जी सकते हैं. रिलेशनशिप फियर्स कौन-कौन से होते हैं और उन्हें कैसे दूर करें? आइए, जानते हैं.

रिश्ता न निभाने का डर

जब आप किसी से बेइंतहा प्यार करते हैं, तो उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहते. ऐसे में आपको हर पल ये डर लगा रहता है कि क्या आपका पार्टनर इस रिश्ते को उम्रभर निभाएगा. कहीं आपको बीच सफ़र में छोड़ तो नहीं देगा.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

जब तक आप अपने रिलेशनशिप को शादी के बंधन में नहीं बांध देते, तब तक कुछ हद तक आपके मन में ये डर होना लाज़मी है, लेकिन अपने डर के कारण पार्टनर पर बेवजह शक करना सही नहीं है. यदि आप अपने इस डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें और अपने रिश्ते को बिना डरे प्यार से जीएं.

धोखा देने का डर

प्यार में धोखा कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरों के रिश्ते में धोखे की बात सुनकर लोग अपने पार्टनर पर भी शक करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि कहीं उनका पार्टनर भी उन्हें धोखा तो नहीं दे देगा. ऐसे में कई बार वो अपने पार्टनर को लेकर इतने पज़ेसिव हो जाते हैं कि जाने-अनजाने उसकी हर हरक़त पर नज़र रखने लगते हैं. उनकी इस हरक़त से पार्टनर को चिढ़ होने लगती है, जिससे उनके रिश्ते में बेवजह तनाव बढ़ने लगता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

प्यार के रिश्ते में विश्‍वास बहुत ज़रूरी है. बेवजह पार्टनर पर शक करना या उस पर नज़र रखना सही नहीं है. अपने पार्टनर को इतना स्पेस ज़रूर दें कि वो उसे आपके साथ घुटन न महसूस हो. आप चाहें तो अपना डर पार्टनर के साथ शेयर करके उनसे इस बारे में खुलकर बात कर सकते हैं.

ज़िम्मेदारी न निभाने का डर

कई लोगों को ये डर रहता है कि उनका पार्टनर क्या अपनी सभी ज़िम्मेदारियां बख़ूबी निभा सकेगा? जब आप किसी को अपना जीवनसाथी बनाते हैं, तो आपके रिश्ते की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में एक-दूसरे का साथ निभाने के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियां निभाना भी उतना ही ज़रूरी हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

कई बार ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ख़ुद आगे बढ़कर ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियां ओढ़ लेता है, फिर जब उससे इतनी सारी ज़िम्मेदारियां नहीं निभाई जातीं, तो वो अपने पार्टनर को गैरज़िम्मेदार साबित करने लगता है. उसे लगता है कि उसने ये ज़िम्मेदारियां यदि अपने पार्टनर के साथ शेयर की, तो क्या उनका पार्टनर ये ज़िम्मेदारियां निभा सकेगा? अत: रिश्ते में बंधने से पहले अपनी ज़िम्मेदारियों के बारे में पार्टनर से बात कर लें, ताकि बाद में आप दोनों के बीच इस बात को लेकर मनमुटाव न हो.

सम्मान न मिलने का डर

दो लोग जब एक रिश्ते में बंधते हैं, तो उनके साथ-साथ दो परिवार भी एक हो जाते हैं. ऐसे में कई बार एक पार्टनर का परिवार दूसरे पर इस कदर हावी रहता है कि उसे वो सम्मान नहीं मिल पाता, जो उसका अधिकार है. कई बार पार्टनर भी एक-दूसरे का सम्मान नहीं करते, जिसके कारण परिवार और दोस्तों के बीच उनकी छवि ख़राब होती है और उनके रिश्ते में भी दरार पड़ने लगती है. किसी भी रिश्ते में सम्मान न मिल पाने का डर सही नहीं है.

यह भी पढ़ें:  किस महीने में हुई शादी, जानें कैसी होगी मैरिड लाइफ? (Your Marriage Month Says A Lot About Your Married Life)

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

शादी के रिश्ते में दोनों पार्टनर्स को उचित सम्मान मिले, इसका ख़्याल दोनों को रखना चाहिए. यदि आप दोनों ने साथ जीने का ़फैसला किया है, तो एक-दूसरे के सम्मान का ख़्याल भी आपको ही रखना होगा. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको वो सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके आप हक़दार हैं, तो इसके लिए आपको अपने पार्टनर से ज़रूर बात करनी चाहिए.

समझौते का डर

रिश्ता निभाने के लिए दोनों को पार्टनर्स को कई समझौते करने पड़ते हैं. एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना पड़ता है. लेकिन कई बार एक पार्टनर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए राज़ी नहीं होता. ऐसे में दूसरे पार्टनर के लिए रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर भी किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं होते, तो आपका डर वाजिब है. ऐसे में अकेले आपकी कोशिश से कुछ नहीं होगा. आपको अपने पार्टनर से इस बारे में बात करनी होगी कि उन्हें आपकी भावनाओं का भी ध्यान रखना होगा, तभी आपके रिश्ते में प्यार और ख़ुशियां बरकरार रहेंगी.

एक्स से मिलने का डर

यदि आपके पार्टनर का आपसे पहले किसी और से अफेयर था और अब भी उनके बीच बातचीत जारी है, तो आपके मन में डर या शंका होना स्वाभाविक है. इस डर की वजह शक से ज़्यादा पार्टनर को खो देने का भय है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप पार्टनर की हर बात को उनकी एक्स से जोड़ें.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर की अपनी एक्स से फॉर्मल बातचीत है, तो कोई बात नहीं, लेकिन आपको यदि लगता है कि वो फिर उसकी तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं, तो आपको पार्टनर के सामने अपनी शिकायत रखनी चाहिए. रिश्ते में पार्टनर को स्पेस देना ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा स्पेस देने से भी कई बार समस्या बढ़ जाती है.

रिलेशनशिप फियर्स दूर करने के आसान उपाय

अपने रिश्ते से डर को दूर भगाने और प्यार बढ़ाने के लिए आपको ये टिप्स ट्राई करने चाहिए-

  • अपने पार्टनर से हर मुद्दे पर खुलकर बात करें, ताकि आप दोनों के मन में यदि कोई बात हो, तो वो मन में दबी न रह जाए.
  • पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें. अपने परिवार और रिश्तेदारों के सामने कभी अपने पार्टनर का अपमान न होने दें.
  • अपने रिश्ते को भरपूर टाइम दें, ताकि समय के अभाव में आपके पार्टनर का मन कहीं और न लगे.
  • अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी पीछे न हटें, पार्टनर का हमेशा साथ दें.
  • यदि आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपको धोखा दे रहा है, तो कोई भी ़फैसला लेने से पहले पार्टनर को एक मौक़ा ज़रूर दें.
  • पार्टनर पर स़िर्फ अपनी इच्छाएं न थोपें, उनकी इच्छाओं का भी ध्यान रखें.
  • रिश्ते में वफ़ादारी की उम्मीद स़िर्फ पार्टनर से न करें, बल्कि ख़ुद भी अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार रहें.
  • अपने रिश्ते में रोमांस कभी कम न होने दें, इससे आपके रिश्ते में ऊर्जा और प्यार हमेशा बना रहेगा.

– कमला बडोनी

यह भी पढ़ें: न्यूली मैरिड के लिए मॉडर्न ज़माने के सात वचन (7 Modern Wedding Vows For Newly Married)

पहला अफेयर: तुम कभी तो मिलोगे (Pahla Affair: Tum Kabhi To Miloge)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम कभी तो मिलोगे (Pahla Affair: Tum Kabhi To Miloge)

आज फिर मेघों से रिमझिम वर्षा रूपी नेह बरस रहा है. दूर-दूर तक मेरी प्रिय तन्हाई पसरी हुई है. एकाएक रेडियो पर बज रहे गीत पर ध्यान चला गया-
छोटी-सी ये दुनिया पहचाने रास्ते, तुम कहीं तो मिलोगे, कभी तो मिलोगे..

मेरा दिल यूं ही भर आया. कितने साल गुज़र गए आपसे बिछड़े हुए, पर मेरा पागलपन आज भी आपके साथ गुज़ारे उन सुखद पलों की अनमोल स्मृतियां संजोए हुए है.

अल्हड़ उम्र के वो सुनहरे भावुक दिन… चांदनी रात में जागना, अपनी ही बनाई ख़यालों की दुनिया में खो जाना, यही सब कुछ अच्छा लगता था तब. शरत्चंद,विमल-मित्र, शिवानी आदि के उपन्यासों को प़ढ़ना तब ज़रूरी शौक़ों में शामिल थे. को-एज्युकेशन के बावजूद अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण मैं क्लास में बहुत कम बोलती थी.

उन दिनों कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे थे. आप तब मेरे पास आए थे और एक फ़िल्मी गीत के दूसरे अन्तरे को पूरा करने का आग्रह किया था. उसी गीत को गाने पर आपको प्रथम पुरस्कार मिला था. मेरे बधाई देने पर आपने कितनी आसानी से कह दिया था कि यह गीत तो मैंने तुम्हारे लिए ही गाया था. उसके बाद तो मैं आपसे नज़रें चुराती ही फिरती थी. लेकिन अक्सर ऐसा लगता जैसे आपकी ख़ामोश निगाहें हमेशा मेरा पीछा करती रहती हैं.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: काश, तुम समझे होते (Pahla Affair: Kash Tum Samjhe Hote)

फिर परीक्षा के दिनों में जब मुझे एकाएक बुखार हो गया था, तो आपने बिना परीक्षा की चिंता किए मुझे अस्पताल में भर्ती करवाया था और मेरे माता-पिता के आने तक मेरी पूरी देखभाल की थी.

और जाड़ों में जब हमारी पिकनिक गई थी और मुझे आपके स्कूटर पर पीछे बैठना पड़ा था, उस दिन आपकी पीठ की ओर उन्मुख हो, मैंने जी भर कर बातें की थीं. हम पिकनिक स्पॉट पर सबसे देर से पहुंचे थे, आपका वाहन उस दिन चींटी की ऱफ़्तार से जो चल रहा था.

लेकिन तभी आपके चिकित्सक पिता की विदेश में नियुक्ति हुई और आपका परिवार विदेश चला गया. आपने अपनी मां से आपको यहीं छोड़ने के लिए बहुत अनुरोध भी किया, लेकिन आपका प्रयास असफल रहा. अपने मां-बाप के सामने अपनी पसंद ज़ाहिर करने की आपकी उस व़क़्त न उम्र थी न हालात. और आप अनेक सुनहरे सपने मेरी झोली में डाल सात समंदर पार के राजकुमार बन गए. कुछ वर्षों तक आपके स्नेहिल पत्र मुझे ढा़ंढस बंधाते रहे. फिर एकाएक इस छोटी-सी दुनिया की विशाल भीड़ में आप न जाने कहां खो गये. आपके परिवार की भी कोई खोज-ख़बर नहीं मिली. उन दिनों गल्फ वार (खाड़ी युद्ध) चल रहा था. अनेक प्रवासी-भारतीय गुमनामी के अंधेरे में खो
चुके थे.

मैं अपने प्यार की अजर-अमर सुधियों की शीतल छांव तले जीवन गुज़ारती रही. मुझे ऐसा रोग हो चुका है जिसको प्रवीण चिकित्सक भी समझ पाने में असमर्थ हैं. मुझे अटूट विश्‍वास है कि मेरे जीवन के मंदिर की लौ बुझने से पहले आप ज़रूर मिलेंगे और आपका उजला, हंसता- मुस्कुराता चेहरा ही मेरे जीवन के इंतज़ार को सार्थक बनाएगा. मेरे जीवन का सार बच्चन जी की इन पंक्तियों में है-

स्वागत के साथ ही विदा की होती देखी तैयारी
बंद लगी होने खुलते ही मेरी जीवन मधुशाला

– डॉ. महिमा श्रीवास्तव

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: धूप का टुकड़ा (Pahla Affair: Dhoop Ka Tukda)

The Psychology Of Relationships: मुझे दोस्त बनाने में संकोच होता है (I Hesitate To Make Friends)

Psychology Of Relationships
मैं फाइनल ईयर की छात्रा हूं. इंदौर में पली-बढ़ी हूं. आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई आई हूं. यहां सब कुछ बहुत एडवांस्ड है. लोग काफ़ी खुले विचारों के हैं. मुझे यहां दोस्त बनाने में भी संकोच होता है. बहुत अकेला महसूस करती हूं. सोचती हूं, वापस इंदौर चली जाऊं.
– रोमा त्रिपाठी, मुंबई.

बदलाव कभी आसान नहीं होता. हमें एक रूटीन जीवन जीने की आदत होती है और उसमें थोड़ा भी बदलाव हमें परेशान कर देता है, पर बदलाव ही संसार का नियम है. जिस चीज़ से हमें डर लगता है या तक़लीफ़ होती है, उससे भागने की बजाय उसका सामना करना उचित है. अपनी सोच बदलें, लोगों और चीज़ों को देखने का नज़रिया बदलें. ख़ुद को भी थोड़ा आत्मविश्‍वासी बनाने का प्रयास करें. लोगों से मिलना-जुलना शुरू करें. धीरे-धीरे संकोच समाप्त हो जाएगा और देखते-देखते आप भी मुंबईकर बन जाएंगी, क्योंकि ये शहर किसी को अजनबी नहीं रहने देता. सबको गले लगाकर अपना बना लेता है, लेकिन थोड़ी कोशिश तो आपको भी करनी होगी. अपनी झिझक दूर करें और यह सोचना बिल्कुल छोड़ दें कि आप किसी छोटे या दूसरे शहर से आई हैं, क्योंकि हर शहर की अपनी ख़ूबियां व ख़ूबसूरती होती है.

मैं 35 साल की नौकरीपेशा महिला हूं. कुछ दिनों से अजीब-सी परेशानी में हूं. मेरा मैनेजर मुझे ग़लत तरी़के से परेशान करके, नौकरी छीन लेने की और मुझे बदनाम करने की धमकी दे रहा है. समझ में नहीं आ रहा है, क्या करूं? घर में बताऊं, तो सब नौकरी छोड़कर घर पर बैठने की सलाह देंगे.
– बबीता शर्मा, पुणे.

आप अकेले ही इस समस्या से नहीं जूझ रहीं, काफ़ी महिलाओं को इन बदतमीज़ियों से गुज़रना पड़ता है. आपको आवाज़ उठानी होगी और हिम्मत करनी होगी. आजकल दफ़्तरों में स्पेशल कमिटी होती है. आप उन पर भरोसा कर सकती हैं और मदद ले सकती हैं, पर भविष्य में दोबारा कोई आपके साथ ऐसा ना करे, उसके लिए सतर्क रहें. अपने कम्यूनिकेशन और पर्सनैलिटी में बदलाव लाएं. कॉन्फिडेंट बनें और पूरी तत्परता से अपने साथ हो रहे अन्याय व शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं. अपने अन्य सीनियर्स से भी बात करें और यदि सही राह दिखानेवाला न मिले, तो कोई कठोर कदम उठाने से पीछे न हटें. क़ानून का सहारा लें.

मेरी उम्र 32 साल है. मैं पिछले सात सालों से एक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हूं. जब भी शादी की बात करती हूं, वह कोई न कोई बहाना बनाकर मुझे समझा लेते हैं. घरवाले शादी के लिए दबाव डाल रहे हैं, पर मैं किसी और से शादी करने की सोच भी नहीं सकती. क्या करूं?
– नेहा सिंह, प्रयागराज.

आप कब तक इस तरह समय गंवाएंगी? घरवालों की चिंता स्वाभाविक है. आपको अपने प्रेमी से साफ़-साफ़ बात करनी होगी और एक अल्टीमेटम देना होगा. कहीं ऐसा न हो कि वो आपके भरोसे का फ़ायदा उठा रहा हो, इसलिए अपने बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दें. ख़ुद पर विश्‍वास रखें. आपका जीवन और आपका भविष्य बहुत महत्वपूर्ण और क़ीमती है, किसी भी तरह से उससे समझौता करना नादानी होगी. समय रहते सही फैसला लें.

 

यह भी पढ़े: लव गेम: पार्टनर से पूछें ये नॉटी सवाल (Love Game: Some Naughty Questions To Ask Your Partner)

Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

यह भी पढ़ें: The Psychology Of Relationships: टीनएज बेटी के व्यवहार से डर लगता है (Afraid Of Teenage Daughters Behavior)

पहला अफेयर: काश, तुम समझे होते (Pahla Affair: Kash Tum Samjhe Hote)

Pahla Affair

पहला अफेयर: काश, तुम समझे होते (Pahla Affair: Kash Tum Samjhe Hote)

कभी-कभी अचानक कहे शब्द ज़िंदगी के मायने बदल देते हैं. इसका एहसास पहली बार मुझे तब हुआ जब अचानक एक दिन आदित्य को अपने सामने मेरे जवाब के इंतज़ार में खड़े पाया. मेरी हालत देखकर बोला, ङ्गङ्घदया, ऑफ़िस से जाने के पूर्व सारी औपचारिकताएं होते-होते एक-दो दिन तो लग ही जाएंगे, जाने से पहले तुम्हारा जवाब सुनना चाहता हूं.फफ कहने के साथ वह मुड़ा और मेरे मन-मस्तिष्क में झंझावत पैदा कर गया.

वो तो चला गया, लेकिन मेरी आंखों के सामने वह दृश्य दौड़ गया, जब एक दिन ऑफ़िस में अंतर्जातीय विवाह को लेकर हो रही चर्चा के दौरान मैंने भी घोषणा कर दी थी कि यूं तो मेरे घर में अंतर्जातीय विवाह के लिए सख़्त मनाही है, लेकिन मैं घरवालों के विरुद्ध जा सकती हूं, बशर्ते लड़का क्लास वन ऑफ़िसर हो.

मुझे सपने में भी इस बात का गुमान न था कि आदित्य मेरे कहे को इतनी संजीदगी से ले लेगा. यूं तो मुझे इस बात का मन-ही-मन एहसास था कि आदित्य के मन में मेरे लिए एक ख़ास जगह है और सच कहूं तो मैं भी उसके सौम्य, सरल व परिपक्व व्यक्तित्व के चुंबकीय आकर्षण में बंधने लगी थी. लेकिन जैसे ही घरवालों के दृष्टिकोण की याद आती, मैं अपने मन को समझा देती कि हमेशा मनचाही मुराद पूरी नहीं होती. इसीलिए आदित्य की लाख कोशिश के बावजूद मैं उससे एक निश्‍चित दूरी बनाए रखती और बातों के दौरान उसे घरवालों के विरोध से सचेत करती रहती.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: उसकी यादें दिल में समाए हूं (Pahla Affair: Uski Yaden Dil Mein Samaye Hoon)

लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता था. जब मुझे पता लगा कि उसने ज़ोर-शोर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है तो एक अनजाने भय से मैं कांप उठी. उसकी मेहनत रंग लाई और पी. सी. एस. की परीक्षा को अंतिम रूप से पास कर, जब उसने हाथ मांगा तो मैं एक अजीब-सी उलझन में फंस गई. बड़ी कशमकश में थी मैं- मेरे सामने भावी जीवन का निर्णय पत्र था, उसमें हां या ना की मुहर लगानी थी.

ऑफ़िस वालों से विदा लेने से पूर्व वो मेरे पास आया, लेकिन मेरी आंखों से छलकते आंसुओं ने उसके प्रश्‍न का जवाब स्वयं दे दिया. मैं बहुत कुछ कहना चाह रही थी, पर ज़ुबां साथ नहीं दे रही थी. मेरी ख़ामोशी वो बर्दाश्त न कर सका. आख़िरकार वह छटपटा कर कह उठा, दया, मुझे कमज़ोर मत बनाओ, तुम तो मेरी शक्ति हो. आज मैं जो कुछ भी हूं, स़िर्फ तुम्हारी वजह से हूं. हमेशा ख़ुश रहना. ईश्‍वर करे, कोई दुख तुम्हारे क़रीब भी न फटके. इतना कह कर वह थके क़दमों से बाहर निकल गया. उसे जाते हुए देखती रही मैं. चाहती थी उससे कहना कि जीवन पर सबसे पहले जीवन देनेवाले का अधिकार होता है, इस फलसफे को कैसे झुठला सकती थी. लेकिन कहते हैं ना- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता.

आज माता-पिता की इच्छा के फलस्वरूप अपने आशियाने में ख़ुश भी हूं, पर सीने में दबी पहले प्यार की चोट आज भी ये एहसास कराती है कि पहले तोलो, फिर बोलो. आज भी लगता है जैसे पहले प्यार की दस्तक अब भी मन- मस्तिष्क में अपनी गूंज दे रही हो.

– दया हीत

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर- हस्ताक्षर! (Pahla Affair: Hastakshar)

कुकिंग थेरेपी: हेल्दी रहने का बेस्ट फॉर्मूला (Cooking Therapy: Benefits Of Cooking)

Benefits Of Cooking

कुकिंग थेरेपी: हेल्दी रहने का बेस्ट फॉर्मूला (Cooking Therapy: Benefits Of Cooking)

खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना कई लोगों के शौक में शुमार होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि खाना बनाने का यह शौक आपको हेल्दी भी रखता है, इसीलिए इसे कुकिंग थेरेपी का नाम दिया गया है. साइंटिस्ट्स अब यह दावे के साथ कहते हैं कि कुकिंग दरअसल एक थेरेपी है, जो आपको हेल्दी रखती है और आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाती है.

साइंस के अनुसार कुकिंग दरअसल मेडिटेशन सेशन की तरह है: क्या कभी आपने इस ओर ध्यान दिया है कि स्ट्रेस से भरा दिन और आपकी थकान घर पर आने के बाद कुछ अच्छा पकाने की सोच मात्र से ही कम हो जाती है. बहुत बार ऐसा होता है कि आप कुछ स्वादिष्ट या अपना मनपसंद खाना बनाने की तैयारी करने की सोचते हैं और उसे बनाने के बाद जो संतुष्टि आपको मिलती है, उससे आपके दिनभर की थकान व तनाव दूर होता है. आप भले ही नियमित रूप से खाना न भी बनाते हों, लेकिन यदि आप ऐसा करते हैं, तो पाएंगे कि कुकिंग सेशन एक तरह से आपके लिए मेडिटेशन का काम करता है.

थेरेपिस्ट कुकिंग को मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए प्रयोग में लाते हैं: डिप्रेशन, घबराहट, तनाव आदि के इलाज में अब बहुत-से सायकोलॉजिस्ट व थेरेपिस्ट कुकिंग कोर्सेस को थेरेपी की तरह यूज़ करने लगे हैं, क्योंकि जो व़क्त आप कुकिंग में लगाते हो, उससे आपका ध्यान नकारात्मक स्थितियों व बातों से हट जाता है और आप रिलैक्स महसूस करते हैं.

क्रिएटिव बनाती है आपको कुकिंग: एक्सपर्ट्स ने अपने शोधों में यह भी पाया है कि कुकिंग आपको क्रिएटिव बनाती है, क्योंकि आप अपने अनुसार रेसिपी को बनाने के नए-नए तरी़के सोचते हो, नया स्वाद क्रिएट करने की कोशिश करते हो, जिससे आपकी भी क्रिएटिविटी बढ़ती है. दूसरे, कुकिंग आपको पूरे माहौल में कंट्रोल का अनुभव महसूस कराती है. आपको लगता है कि अब आप अपने अनुसार स्वाद में बदलाव ला सकते हो और जब आपको तारी़फें मिलती हैं, तो आप पॉज़िटिव महसूस करते हो.

कुकिंग और मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा कनेक्शन है न्यूट्रिशन: जब आप कुकिंग करते हो, तो आप अपने पोषण, डायट व हेल्थ के प्रति अपने आप ही सचेत हो जाते हो. आपके हाथ में होता है कि कितना ऑयल डालना है, कितना नमक, कितने मसाले और आपका ब्रेन यही सोचने लगता है कि किस तरह से अपनी डिश को आप और हेल्दी बना सकते हो. इससे आपको संतुष्टि महसूस होती है कि आपका खाना हेल्दी है, क्योंकि आप अपने खाने की क्वालिटी को कंट्रोल करते हो.

कुकिंग जो ख़ुशी देती है, वो घर के अन्य काम नहीं देते: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही आप कुकिंग का शौक न रखते हों, लेकिन आप जब कुकिंग करते हैं, तो यह फ़र्क़ ज़रूर महसूस करते हैं कि खाना बनाने से जो ख़ुशी व संतुष्टि का अनुभव होता है, वह बिस्तर ठीक करने, कपड़े धोने या अन्य कामों से नहीं होता. इसके पीछे की वजह यह है कि कुकिंग अपने आप में रिवॉर्डिंग एक्सपीरियंस होता है, क्योंकि कहीं-न-कहीं सबकॉन्शियस माइंड में भी यह बात रहती है कि खाना बनाने के बाद आपको इसका स्वाद भी मिलेगा. खाना बनाने के दौरान जो ख़ुशबू आती है, उसे बनता देखने का जो अनुभव होता है और यहां तक कि फल व सब्ज़ियों को काटने-छीलने के दौरान उनके रंग व आकार हमें आकर्षित करते हैं, वो मस्तिष्क में पॉज़िटिव वाइब्रेशन्स पैदा करते हैं.

यह भी पढ़ें: जानें महिलाओं के सुरक्षा क़ानून के बारे में (Women’s Rights And Self Defence Laws In India)

पार्टनर के साथ कुकिंग आपके रिश्ते को भी बेहतर बनाती है: जब आप साथ में खाना बनाते हो या फिर घर के कोई भी सदस्य मिल-जुलकर खाना बनाने में हाथ बंटाते हैं, तो अपने आप उनके मतभेद कम होने लगते हैं. वो नकारात्मक बातों को एक तरफ़ रखकर खाना बेहतर बनाने व उसे परोसने की तरफ़ ध्यान देने लगते हैं. ऐसे में यदि आप अपने पार्टनर के साथ किचन में काम करेंगे, तो आपके रिश्ते भी बेहतर बनेंगे. आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता पाओगे, जिससे कम्यूनिकेशन बेहतर होगा. यदि खाने में आप दोनों की पसंद-नापसंद एक नहीं है, तब भी आपके विवाद को कम करने में कुकिंग एक थेरेपी की तरह काम करेगी, क्योंकि वहां आप एक-दूसरे के बारे में सोचोगे कि चलो आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाते हैं या फिर आज तुम्हारी फेवरेट डिश तैयार करते हैं, पर कल तुम मेरी फेवरेट डिश बनाने में मेरी मदद करोगे… आदि.

कुकिंग से बढ़ते व बेहतर होते हैं आपके कनेक्शन्स: आपके जन्मदिन पर आपके पड़ोस में रहनेवाली दोस्त आपके लिए गिफ्ट लाती है और दूसरी ओर आपकी सास आपके लिए अपने हाथों से आपका मनपसंद खाना बनाती है, तो ज़ाहिर है आपके मन को सास का खाना बनाना ज़्यादा छुएगा, क्योंकि उन्होंने आपके बारे में सोचा और ख़ुद मेहनत करके आपके लिए खाना तैयार किया. इसी तरह आप देखेंगी कि अपनी बेस्ट फ्रेंड को यदि आप अपने हाथों से कुछ बनाकर देती हैं, तो उसकी ख़ुशी दोगुनी हो जाती है. इस तरह से कुकिंग आपके कनेक्शन्स को बेहतर बनाती है. इसलिए कुक करें और कनेक्टेड रहें.

मस्तिष्क को शांत करती है कुकिंग: साइंटिस्ट्स कहते हैं कि कुकिंग के समय आपको कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होगा. उस व़क्त आपकी चिंताएं दूर हो जाती हैं और आपका मस्तिष्क शांति का अनुभव करता है, क्योंकि आपका पूरा ध्यान अपने टास्क पर लग जाता है, जिससे कई तरह की चिंताएं व दबाव की तरफ़ ध्यान नहीं जाता और आप बेहतर महसूस करते हैं. यही नहीं कुकिंग की प्रैक्टिस आपके शरीर को भी रिलैक्स करती है. कुकिंग के समय आप फ्लो में आ जाते हो, जिससे व्यर्थ के डर, चिंताओं व तनाव से उपजा दर्द, शरीर की ऐंठन व थकान भी दूर हो जाती है.

दूसरों के लिए कुछ करने का अनुभव बेहतर महसूस कराता है: ज़ाहिर-सी बात है कि आप खाना अपने लिए नहीं बनाते, बल्कि पूरे परिवार के लिए बनाते हैं. ऐसे में उनकी पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर उनके लिए कुछ अच्छा करने का अनुभव आपको कुकिंग से मिलता है. कुकिंग के ज़रिए आप अपनी भावनाएं व केयर भी सामनेवाले को ज़ाहिर कर सकते हैं. यह एक तरह से मूक प्रदर्शन है प्यार व देखभाल का.

भावनाओं का प्रभाव भी होता है कुकिंग में: आप जिस भाव से खाना बनाते हैं, उसका असर आपके खाने में नज़र आता है. लेकिन खाना बनाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके खाने को तारीफ़ ज़रूर मिले, इसलिए जब आप बच्चों के लिए कुछ ख़ास बनाते हो, तो उनके स्वाद व पोषण का ध्यान रखते हो, लेकिन जब आप बुज़ुर्गों के लिए कुछ बनाते हो, तो स्वाद के अलावा उनकी उम्र व सेहत का भी ख़्याल रखते हो. उन्हें क्या नहीं खाना चाहिए, इस तरफ़ भी आपका पूरा ध्यान रहता है.

कुकिंग से आप पैसे भी बचाते हो: होटल या बाहर से कुछ अनहेल्दी मंगाकर खाना आपको वो संतुष्टि नहीं देगा, जो अपने हाथों से कुछ हेल्दी बनाकर खाना देता है और इसके साथ ही आप अपने पैसे भी बचाते हो. हेल्थ और वेल्थ साथ-साथ सेव होने का एहसास आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाता है और आपकी सेहत को भी.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: बेस्ट ऐप्स, जो शादी के दिन को बनाएंगे ख़ास (Best Apps That Will Make The Wedding Day Special)

 

योग से बचाएं अपने टूटते रिश्ते को (How Yoga Can Strengthen Your Relationship?)

आज जिस तेज़ी से हमारे देश में तलाक़ के मामले बढ़ रहे हैं, भविष्य में स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है. योग के ज़रिए इस गंभीर समस्या को किस तरह सुलझाया जा सकता है, इसी विषय में हमें जानकारी दी द योगा इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर डॉ. हंसाजी जयदेव योगेंद्र ने.

Strengthen Relationship

क्यों तेज़ी से टूट रहे हैं रिश्ते?

आज वर्किंग कपल्स को एकल परिवारों में रहते हुए दोहरी ज़िम्मेदारी निभानी पड़ रही है, काम का बढ़ता बोझ, स्ट्रेस, घर में बड़े-बुज़ुर्गों की अनुपस्थिति और डबल इंकम नो किड्स के बढ़ते मामले रिश्तों में तनाव बढ़ा रहे हैं.

योग से रिश्तों का कनेक्शन

डॉ. हंसाजी योगेंद्र कहती हैं कि आज भी बहुत-से लोगों में यह भ्रांति है कि योग का अर्थ केवल योगासन है, जबकि यह अष्टांग योग है, जिसमें आसन स़िर्फ एक अंग है. योग जीवन जीने का संपूर्ण विज्ञान है. योग के ज़रिए आप एक सुुलझे हुए, शांतचित्त और सकारात्मक दृष्टिकोणवाले व्यक्ति बनते हैं, जो स्वयं के साथ-साथ अपने रिश्तों की अहमियत को भी समझता है.

समझें रिश्तों का योग

शांत मन से समझें ख़ुद को: जब आप अपने होनेवाले जीवनसाथी से मिलते हैं, तब उसे जानने-समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन अगर आप ख़ुद के बारे में ही नहीं जानते, तो उसे भला कैसे समझ पाएंगे. योग आपको ख़ुद से रू-ब-रू कराता है. दरअसल, जब आप योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन करते हैं, तब आपको आंतरिक शांति का एहसास होता है. जब आपका मन शांत होता है, तब विचारों की पारदर्शिता बढ़ जाती है और आप ख़ुद के साथ-साथ जीवनसाथी को भी बेहतर समझ पाते हैं, इसलिए  योग को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं.

सांसों की तरह स्वीकारें एक-दूसरे को

शादी करते ही हम क्यों भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति अलग होता है. उसके विचार, व्यवहार, आदतें सब कुछ भिन्न होती हैं. ऐसे में अपने ईगो की संतुष्टि के लिए वो एक-दूसरे को बदलने की कोशिश करते हैं. प्राणायाम हमें सिखाता है कि जिस तरह हर सांस अलग व महत्वपूर्ण होती है, उसी तरह हर व्यक्ति भी यूनीक होता है. जिस तरह प्राणायाम करते समय आप सांसों की लय पर ध्यान देते हैं, उसी तरह अपने पार्टनर की ख़ुशियों और इच्छाओं पर ध्यान दें.

पॉज़िटिव अप्रोच की सक्सेस स्टोरी

नरेंद्र अपनी पत्नी विनीता की लेट लतीफ़ी से परेशान है. नरेंद्र उसे समय पर तैयार रहने की हिदायत देता, तो विनीता उसे ज़्यादा तवज्जो न देती. पत्नी की आदत से परेशान नरेंद्र ने इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश की, तो पता चला कि विनीता आर्टिस्ट फैमिली से है, जहां सभी अपने मूड के मुताबिक़ काम करते हैं. विनीता ने बचपन से जो देखा, वही उसकी आदत में शुमार हो गया. विनीता को बदलने की बजाय नरेंद्र ने अपना अप्रोच बदला. कभी-कभी वो ऑफिस से सीधा फंक्शन में पहुंच जाता और विनीता को वहीं मिलने के लिए कहता. विनीता जब देरी से पहुंचती, तो उस पर झुंझलाने की बजाय, वो सभी से कहता कि मेरी पत्नी का देरी से आने का मतलब है कि एक ख़ूबसूरत पेंटिंग पूरी होने के कगार पर है.

तनाव को रिश्ते पर हावी न होने दें

शादीशुदा ज़िंदगी में ज़्यादातर समस्याएं छोटी-छोटी बातों पर दुखी होने, आत्मविश्‍वास की कमी, एनर्जी लेवल की कमी, फाइनेंशियल व सेक्सुअल प्रॉब्लम्स के कारण होेती हैं. रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि योग स्ट्रेस लेवल को कम करता है. दरअसल, यह शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन को कम करता है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करते हैं और आपका एनर्जी लेवल भी बूस्ट होता है. यह आपके नर्वस सिस्टम को भी स्थिर बनाता है. नियमित रूप से आधा घंटा योगासन और मेडिटेशन करें.

विश्‍वास है विवाह का आधार

अक्सर छोटी-छोटी बातें शक का कारण बनती हैं और रिश्ते ग़लतफ़हमी का शिकार हो जाते हैं. योग में उत्तानासन या पादहस्तासान, ऐसा आसन है, जिसमें आप विश्‍वास के साथ समर्पण करने की कला सीखते हैं. जब हम रिश्तों में विश्‍वास के साथ पार्टनर के सामने समर्पण करते हैं, तो जजमेंटल नहीं होते और रिश्ते में प्यार और विश्‍वास गहरा होता है. समर्पण का अर्थ झुकना नहीं, बल्कि पार्टनर को अपने नज़रिए को समझाने का पूरा मौक़ा देना है. एक-दूसरे के प्रति समर्पण बहुत-सी ग़लतफ़हमियों से आपके रिश्ते को बचाता है.

यह भी पढ़ें: किस महीने में हुई शादी, जानें कैसी होगी मैरिड लाइफ? (Your Marriage Month Says A Lot About Your Married Life)

Relationship Goals
हैप्पी हार्मोंस से रिश्ते को बनाएं हैप्पी

आज ज़्यादातर लोग अपने वैवाहिक रिश्ते में दुखी व असंतुष्ट हैं, क्योंकि वो ख़ुद से ही ख़ुश और संतुष्ट नहीं हैं. बेसिक नियम है कि जब हम ख़ुश रहते हैं, ख़ुद से प्यार करते हैं, तभी दूसरों को ख़ुशी और प्यार दे सकते हैं. आपको जानकर ख़ुशी होगी कि रोज़ाना योग करने से हमारे मस्तिष्क के केमिकल कंपोज़िशन्स बेहतर होते हैं. शरीर में सेराटोनिन और डोपामाइन कहे जानेवाले ‘हैप्पी हार्मोंस’ की बढ़ोत्तरी होती है, जिससे हम ख़ुश रहते हैं. योग को अपनाकर अपने रिश्ते को ख़ुशहाल बनाएं.

‘हम्म’ से करें बेहतर कम्यूनिकेशन

रिश्ता पति-पत्नी का हो, दोस्ती का या भाई-बहन का, ग़लत कम्यूनिकेशन रिश्ते को बिगाड़ सकता है. योग कहता है कि शब्द हमारे विचारों से आते हैं और विचार मस्तिष्क से, इसलिए अगर मस्तिष्क शांत रहेगा, तो विचार अपने आप अच्छे आएंगे. बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए कपल्स नियमित रूप से ब्रीदिंग टेक्नीक ‘हम्म’ का उपयोग करें. शांत स्थान पर रूमाल से नाक और मुंह को ढंककर ‘हम्म’ की आवाज़ निकालें.

संतुलानासन से बनाएं बैलेंस: गृहस्थी की गाड़ी को सफलतापूर्वक चलाने के लिए

पति-पत्नी नामक दोनों पहियों का तालमेल और संतुलन बेहद ज़रूरी है. अगर दो में से एक भी डगमगाया, तो गाड़ी भटक जाएगी. कभी भावनात्मक, तो कभी आर्थिक तनाव इस संतुलन को बिगाड़ सकता है. योग का एक महत्वपूर्ण आसन संतुलानासन हमें बैलेंस करना सिखाता है. यह मस्तिष्क को एकाग्र करके धैर्य सिखाता है, जिससे विपरीत परिस्थिति में भी हम तुरंत घबराते नहीं.

वर्तमान में जीने की कला अपनाएं

रोज़ाना योग की प्रैक्टिस हमें वर्तमान में जीने की प्रेरणा देती है. अपने सांसों की लय को समझते हुए हम वर्तमान में अपनी सेहत के प्रति और भी जागरूक होते हैं. वर्तमान में जीने की यह टेक्नीक रिश्तों को और भी ख़ुशगवार बना देती है. अतीत में हुई बहस और ईगो की लड़ाई या फिर कड़वी यादों को भूलकर जब कपल्स वर्तमान पर फोकस करते हैं, तब उनके रिश्ते में स़िर्फ प्यार और संतुष्टि का भाव होता है.

भावनाओं को बनाएं प्रोडक्टिव

बचपन से दबी इच्छाएं और बुरी आदतें अक्सर वैवाहिक रिश्ते में परेशानियां पैदा करती हैं. यह नकारात्मक रूप से आपकी शादीशुदा ज़िंदगी को प्रभावित करता है. इसके लिए मेडिटेशन का सहारा लें. मेडिटेशन आपके कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड के बीच बने दरवाज़े को खोलता है. सबकॉन्शियस माइंड के ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंचकर हम वहां मौजूद अनचाही आदतों और दबी हुई भावनाओं को प्रोडक्टिव तरी़के से इस्तेमाल करना सीखते हैं.

ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन की सक्सेस स्टोरी

शादी के बाद एक दिन महेश ने अपनी पत्नी रोमा को बताया कि उसे कभी-कभी बहुत ग़ुस्सा आता है, तो रोमा ने कहा कि यह तो नॉर्मल है, लेकिन उस समय आप दूसरों से क्या उम्मीद करते हैं? तो महेश ने कहा, मुझे लगता है कि सब चुप रहें. कोई कुछ न बोले. तुम एक वादा करो कि जब भी मुझे ग़ुस्सा आए, तो तुम चुप रहना, उसके बदले तुम जो गिफ्ट मांगोगी मिल जाएगा. रोमा राज़ी हो गई, पर उसने भी एक शर्त रखी कि ग़ुस्सा तो मुझे भी कभी-कभार आता है और मैं चाहती हूं कि जब ऐसा हो, तब आप वहां से हट जाएं. आप वॉक पर चले जाना. दोनों में जो तय हुआ था, वैसा ही हुआ. शादी की 50वीं सालगिरह पर जब किसी ने उनकी सफल शादी और ख़ुशहाली का राज़ पूछा, तो महेश ने कहा कि मैं बहुत वॉक करता हूं, इसलिए हेल्दी और ख़ुश हूं, वहीं रोमा ने कहा कि मुझे ज़िंदगी में जो चाहिए सब मिल जाता है, तो भला ग़म किस बात का.

पार्टनर के प्रति शुक्रगुज़ार हों

ज़्यादातर कपल्स की यही शिकायत होती है कि पार्टनर उनको ग्रांटेड लेते हैं या अहमियत नहीं देते. जब हम योगासन करते हैं, तो हम में कृतज्ञता की भावना विकसित होती है, जिससे हम ख़ुश व सेहतमंद रहते हैं. कृतज्ञता की इसी भावना को जब हम वैवाहिक जीवन में उतारते हैं, तब पार्टनर से मिली हर लम्हे की ख़ुशी के लिए हम उनके शुक्रगुज़ार होते हैं. कृतज्ञता रिश्तों की गुणवत्ता को बढ़ाती है.

हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए योग

बेहतरीन सेक्स लाइफ के लिए आपका हेल्दी और हैप्पी रहना ज़रूरी है. जब आप रोज़ाना योग करते हैं, तो आपका शरीर फ्लेक्सिबल होता है, बॉडी टोन होती है, मसल्स स्ट्रॉन्ग होती हैं और न स़िर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी आप फिट रहते हैं. ऐसे में आपकी सेक्स लाइफ रोमांटिक और दिलचस्प बनी रहती है.

– अनीता सिंह

यह भी पढ़ें: राशि के अनुसार चुनें लाइफ पार्टनर (Who Is Your Life Partner Based On Your Zodiac Sign?)

पहला अफेयर: उसकी यादें दिल में समाए हूं (Pahla Affair: Uski Yaden Dil Mein Samaye Hoon)

Pahla Affair Kahaniya

पहला अफेयर: उसकी यादें दिल में समाए हूं (Pahla Affair: Uski Yaden Dil Mein Samaye Hoon)

वह अक्सर कहा करता था… मैं आकाश की ऊंचाई को छूना चाहता हूं. इन बादलों में गुम हो जाने पर मैं उस मधुर आवाज़ का इंतज़ार करूंगा, जो तुम मुझे बुलाने के लिए दोगी. तुम गाओगी… न जाओ सैंया, छुड़ाके बहियां, कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूंगी… और मैं गाऊंगा… सारंगा तेरी याद में नैन हुए बेचैन, मधुर तुम्हारे मिलन बिना दिन कटते न ही रैन… इसी तरह की अठखेलियों में हंसते-गाते हमारे दिन बीत रहे थे. सौरभ बहुत ही ज़िंदादिल इंसान था. मैंने उसे जितने क़रीब से देखा था, उससे ऐसा आभास होने लगा था कि हम दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं और एक-दूसरे के लिए ही हमारा जन्म हुआ है.

उन दिनों सौरभ और मैं रविन्द्र कॉलेज में बी.ए. अंतिम वर्ष में प़ढ़ते थे. सौरभ एयरविंग में सीनियर डिविज़न में था तथा कॉलेज की विंग का कैप्टन था. बुधवार और शनिवार को एयरविंग की परेड होती थी. उस ड्रेस में वो बहुत अच्छा लगता था और सुबह आते ही मुझे सैल्यूट करता था. उसकी इस हरकत पर पूरी क्लास में हंसी का फव्वारा फूट पड़ता था.

सौरभ कहता था, अवनि, तुम्हारे प्रति एक अनजाना-सा आकर्षण महसूस करता हूं मैं. एक किताब में भी पढ़ा था मैंने कि यूं तो दुनिया में करोड़ों स्त्री-पुरुष हैं, लेकिन किसी विशेष के प्रति हमारा आकर्षण इसलिए होता है, क्योंकि कुछ हार्मोन्स हमें आकर्षित करने के लिए प्रेरित करते हैं- और उससे आकर्षित होने को ही हम कहते हैं कि मुझे उससे प्यार हो गया है. दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, उसके इंतज़ार में दिन-रात एक हो जाते हैं.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना (Pahla Affair: Pahle Pyar Ki Akhri Tamanna)

फिर सौरभ ने एयरविंग के माध्यम से एयरक्राफ्ट की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी. वह छोटे प्लेन उड़ाने लगा था. उसका सपना पायलेट बनकर वायुसेना में जाने का था, जहां वह हिमालय की ऊंची-ऊंची वादियों में उड़ सके. लेकिन जब भी वो प्लेन उड़ाने जाता, मेरा दिल बहुत डरता. एक अनजाने भय से मैं कांप जाती.

इसी बीच हमारे फाइनल ईयर की परीक्षाएं ख़त्म हो गई थीं. सौरभ ने वायु सेना में जाने के लिए फॉर्म भरा था, जिसमें उसका सिलेक्शन भी हो गया था. उस समय वो बहुत ख़ुश था. और बोला था, ङ्गङ्घबस मेरी ट्रेनिंग पूरी हुई, नौकरी लगी कि इसके बाद हमारी शादी पक्की समझो.फफ हमारे घरवालों को भी हमारी पसंद पर कोई ऐतराज़ नहीं था.

उसके जाने के बाद रात-रात मैं सौरभ की कुशलता की कामना किया करती थी. हर पल मन बोझिल-सा रहता था, किसी काम में मन नहीं लगता था.

दिसंबर की ठंडी सुबह थी वो. फ़ोन की घंटी लगातार बज रही थी, बेमन से मैंने फ़ोन का रिसीवर उठाया. फ़ोन कानपुर से था. सौरभ के पिताजी बोल रहे थे, अवनि, एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान सौरभ का प्लेन क्रेश हो गया है… इसके आगे कुछ सुुनने की मेरी हिम्मत नहीं हुई और रिसीवर मेरे हाथ से छूट गया.

सौरभ हम सबसे बहुत ऊंचाई पर पहुंच गया था. इस आकाश, इस ब्रह्मांड से भी ऊपर. एक सुखद स्वप्न की तरह कॉलेज की यादें अब केवल यादें ही रह गई हैं. सौरभ की ज़िंदादिली, हंसमुख स्वभाव इतने सालों के बाद भी ज़ेहन में अपना सुरक्षित स्थान बनाये हुए है.

– अवनि

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: ख़्वाब (Pahla Affair: Khwab)

किस महीने में हुई शादी, जानें कैसी होगी मैरिड लाइफ? (Your Marriage Month Says A Lot About Your Married Life)

रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ नवंबर में शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल रहते हैं, जबकि वैलेन्टाइन्स डे के दिन शादी करनेवाले 18-36% कपल्स के तलाक़ हो जाते हैं. आपकी शादी किस महीने में हुई है और आपकी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी होगी, आइए जानते हैं.

Married Life

जनवरी

इस महीने में जिन लोगों की शादी होती है, उन पर कुंभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनका दांपत्य जीवन ख़ुशहाल रहता है. दोनों पार्टनर्स में आपसी समझ काफ़ी अच्छी रहती है. दोनों एक-दूसरे के प्रति वफ़ादार होते हैं. समय-समय पर इन कपल्स को रोमांटिक सरप्राइज़ेस और गिफ्ट्स मिलते ही रहते हैं.

लव टिप: हर रिश्ता उसे निभानेवाले पर निर्भर करता है, इसलिए अपने रिश्ते को ख़ुशहाल बनाए रखने के लिए अपना सौ प्रतिशत दें.

फरवरी

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स की शादीशुदा ज़िंदगी को आप ‘इमोशनल जर्नी’ कह सकते हैं, क्योंकि दोनों ही पार्टनर्स एक-दूसरे के प्रति इमोशनल होते हैं. आप पर मीन राशि का प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण आप एक-दूसरे के प्रति सारी ज़िम्मेदारियां निभाते हैं. कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि पति या पत्नी में से एक बहुत वफ़ादार होता है, पर दूसरा उतना वफ़ादार नहीं होता और रिश्ता बिखर जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबॉर्न में हुई स्टडी में पता चला है कि जो लव बर्ड्स वैलेंटाइन्स डे के दिन शादी करते हैं, उनके रिश्ते के टूटने के चांसेस 18 से 36% होता है.

लव टिप: जब भी आपको लगे कि रिश्ता कमज़ोर पड़ रहा है, तभी एक रोमांटिक हनीमून प्लान करें. अपने रिश्ते को ट्रैक पर लाने का इससे बेहतर उपाय नहीं हो सकता.

मार्च

अगर आपकी शादी इस महीने में हुई है, तो आपकी शादी पर मेष राशि का प्रभाव पड़ता है. आपका रिश्ता काफ़ी उतार-चढ़ाव के दौर से गुज़रता है, जहां अच्छे समय के साथ-साथ आप दोनों बुरा समय भी देखते हैं. कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपको अपने पार्टनर का रवैया ही समझ में न आए. कल जिस बात पर वो आपसे सहमत थे, आज उसी चीज़ के लिए आपकी बहस हो जाए. छोटी-छोटी बातों पर इनकी बहस हो सकती है.

लव टिप: इतना याद रखें कि नोक-झोंक हर रिश्ते में होती है, इसलिए उसे मन में रखकर न बढ़ाएं. एक-दूसरे के व्यक्तित्व व विचारों को समझने का प्रयास ही आपके रिश्ते को मज़बूत बनाएगा.

अप्रैल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह महीना विवाह के लिए सबसे अनुकूल समय लेकर आता है. तभी तो आज भी ज़्यादातर शादियां अप्रैल के महीने में होती हैं. इस महीने शादी करनेवालों पर वृषभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी सेक्स लाइफ भी काफ़ी रोमांटिक होती है. वृषभ के प्रभाव के कारण कुछ पार्टनर्स में से एक बहुत डॉमिनेटिंग होता है, पर दूसरे के कूल होने के कारण रिश्ता आसानी से निभ जाता है.

लव टिप: अपने प्यार को जताने में ज़रा भी कंजूसी न करें. कभी चॉकलेट्स, कभी फूल, तो कभी प्रेमपत्र के ज़रिए समय-समय पर अपने प्यार को जताते रहें.

मई

इस महीने शादी करनेवालों पर मिथुन राशि का प्रभाव पड़ता है. जैसा कि इस राशि की ख़ूबी है, दो पहलू या दो रूप होने की, इस ख़ूबी का असर आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने शादी करनेवालों के रिश्ते के सफल होने की जितनी गुंजाइश होती है, उतनी ही गुंजाइश इसके असफल होने की भी होती है. मतलब या तो आप जन्म-जन्मांतर तक साथ निभानेवाले कपल बनते हैं या फिर जल्द ही अपनी-अपनी नई राह चुन लेते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि दो में से एक साथी का स्वभाव बहुत बुरा हो या फिर बहुत ही अच्छा हो.

लव टिप: अपने रिश्ते को सफल या असफल बनाना आप दोनों के हाथ में है. सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शादी को पूरे दिल से निभाएं. कभी कुछ बुरा लगे, तो भी रिश्ते को बचाने की पूरी कोशिश करें.

यह भी पढ़ें: राशि के अनुसार चुनें लाइफ पार्टनर (Who Is Your Life Partner Based On Your Zodiac Sign?)

Married Life
जून

प्यार-दुलार के साथ-साथ दया भाव इन कपल्स में कूट-कूटकर भरा होता है, तभी तो लोग इनकी सफल शादी और प्यार की मिसालें देते हैं. अगर आपकी शादी इस महीने हुई है, तो आप पर कर्क राशि का प्रभाव पड़ता है. ये कपल्स एक-दूसरे के साथ एक-दूसरे के परिवार को भी बख़ूबी संभालते हैं. इसके अलावा अपनी आनेवाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने की पूरी कोशिश करते हैं. कुल-मिलाकर कहें, तो ये सबसे ज़िम्मेदार और केयरिंग कपल्स होते हैं.

लव टिप: जब भी पार्टनर आपके या परिवार के लिए कुछ ख़ास करता है, तो उसके प्रयासों की सराहना करें. उन्हें जताएं कि वो आपके लिए कितने बहुमूल्य हैं.

जुलाई

इस महीने शादी करनेवालों पर सिंह राशि का प्रभाव पड़ता है. आप दोनों ही अपने रिश्ते को सफल बनाने के लिए अपना सौ प्रतिशत देते हैं और उसमें पूरी तरह सफल भी होते हैं. इस राशि का ऐसा प्रभाव है कि आप एक-दूसरे के प्रति हमेशा आकर्षण महसूस करते हैं. एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं. आपका शाही अंदाज़ आप अपने पार्टनर कोे भी देते हैं, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी रौनक़ से भरपूर होती है. आप अपने शादीशुदा रिश्ते से हमेशा संतुष्ट रहते हैं.

लव टिप: सेक्स लाइफ को बूस्ट करने के लिए हमेशा बेडरूम में कुछ नया ट्राई करें. आप चाहें, तो दोनों किसी एडवेंचर ट्रिप पर भी जा सकते हैं. यह आपके रिश्ते में नई जान डाल देगा.

अगस्त

एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ इस महीने शादी करनेवाले कपल्स को बच्चे बहुत पसंद होते हैं, इसीलिए वो दो से ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं. इन्हें बड़ा परिवार  अच्छा लगता है. इस महीने शादी करनेवालों पर कन्या राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी ज़िंदगी में कई परेशानियां भी आती हैं, पर दोनों मिलकर उनका समाधान निकाल लेते हैं. अगर ये एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखें, तो इनका रिश्ता बहुत मज़बूत साबित होता है.

लव टिप: पतियों के लिए बहुत ज़रूरी है कि ‘तुम’ या ‘मैं’ की बजाय ‘हम’ शब्द का इस्तेमाल ज़्यादा करें. ‘हमें ऐसा करना चाहिए, हमारे लिए यह सही होगा…’ जैसे वाक्यों का ज़्यादा उपयोग करें. पत्नी को कभी अलग-थलग पड़नेवाली भावना का एहसास न होने दें.

यह भी पढ़ें: न्यूली मैरिड के लिए मॉडर्न ज़माने के सात वचन (7 Modern Wedding Vows For Newly Married)

Married Life
सितंबर

अगर आपकी शादी भी इस महीने में हुई है, तो आप पर तुला राशि का प्रभाव रहता है. तुला की ख़ूबियों के कारण ये कपल काफ़ी बैलेंस्ड रहते हैं और इसीलिए ‘परफेक्ट कपल’ कहलाते हैं. इनके बीच शायद ही कभी बड़ा झगड़ा होता हो. हर तरह के विवाद को ये आपसी सहमति से सुलझाते हैं. दोनों के बीच का तालमेल ही इनकी ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का राज़ है.

लव टिप: हर रोज़ रोमांस के लिए थोड़ा समय निकालें. एक-दूसरे को यूं ही निहारना, बांहों में भरना, चुपके से किस कर लेना… इन छोटी-छोटी शरारतों से लाइफ में रोमांस बनाए रखें.

अक्टूबर

इस महीने शादी करनेवालों के वैवाहिक जीवन पर वृश्‍चिक राशि का प्रभाव पड़ता है. वृश्‍चिक राशि के गुणों के प्रभाव के कारण इनकी सेक्स लाइफ बेहद रोमांटिक होती है. ये कपल एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार और आकर्षण को बिल्कुल छिपाते नहीं. ज़िंदगी को खुलकर जीने के इनके फलस़फे का असर इनकी सक्सेसफुल मैरिड लाइफ में नज़र आता है. इनकी एक और ख़ूबी है कि ये किसी भी विपरीत परिस्थिति में पार्टनर को अकेला नहीं छोड़ते.

लव टिप: ‘तुम कितनी अच्छी हो…’ ‘मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं…’ ‘मैं समझता हूं…’ ‘मुझे माफ़ कर दो…’ ‘थैंक यू जी…’ ये वो वाक्य हैं, जो आपके रिश्ते में मिठास भरते हैं. रोज़ाना इन शब्दों का इस्तेमाल करें और देखें, किस तरह आपकी मैरिड लाइफ में मिठास बनी रहती है.

नवंबर

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल या यूं कहें ‘हैप्पीएस्ट कपल’ माने जाते हैं. इन पर धनु राशि का प्रभाव होता है, जिसके कारण ये काफ़ी संवेदनशील होते हैं. एक-दूसरे की कमियों और ख़ामियों को समझकर रिश्ता निभा लेना ही इनके रिश्ते की ख़ूबी है. ये कपल अपने प्यार को पहली प्राथमिकता देते हैं.

लव टिप:  रोज़ाना ऑफिस से आने के बाद एक-दूसरे को गले लगाएं. शादी के पहलेवाले रोमांच को बनाए रखने के लिए शादी के बाद भी हर महीने या दो महीने में डेट पर ज़रूर जाएं. प्यार के ख़ूबसूरत एहसास से अपने रिश्ते को सराबोर रखें.

दिसंबर

इस महीने शादी करनेवालों पर मकर राशि का प्रभाव रहता है. ऐसा देखा गया है कि सबसे रोमांटिक कपल्स दिसंबर में शादी करते हैं. सुरक्षित भविष्य की चाह में ये सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को बहुत तवज्जो देते हैं, जिससे कभी-कभी एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते, पर प्यार हमेशा इनकी पहली प्राथमिकता बना रहता है.

लव टिप: उतार-चढ़ाव हर क्षेत्र में लगा रहता है, इसलिए फाइनेंस संबंधी मामलों में कभी ज़िद न करें.  रोज़ाना 10 मिनट का ‘वी टाइम’ ज़रूर निकालें. एक-दूसरे से दिनभर की बातें और क़िस्से शेयर करें.

– संतारा सिंह

यह भी पढ़ें: शादी के दिन दूल्हा-दुल्हन न करें ये 18 ग़लतियां (18 Common Mistakes Brides And Grooms Must Avoid)

पहला अफेयर: पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना (Pahla Affair: Pahle Pyar ki Akhri Tamanna)

Pahla Affair

पहला अफेयर: पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना (Pahla Affair: Pahle Pyar ki Akhri Tamanna)

कहते हैं, इंसान कितना भी चाहे, पर वो अपने पहले प्यार को कभी नहीं भुला पाता. पहले प्यार का एहसास, उसकी यादें उम्रभर जेहन में ज़िंदा रहती हैं. उम्र के किस मोड़ पर, कब कोई अपना-सा लगे कोई नहीं जानता. मुझे भी कहां पता था कि आज से बीस बरस पीछे छूट गई उन यादों की गलियों में मुझे फिर से भटकना पड़ेगा, जिन्हें मैं पीछे छोड़ आई थी.

आज उनके अचानक मिले इस संक्षिप्त पत्र ने फिर से मुझे उनके क़रीब पहुंचा दिया है. उनसे मेरी मुलाक़ात कॉलेज फंक्शन में हुई थी. वो मेरे सीनियर थे. मुलाक़ातें धीरे- धीरे दोस्ती में बदलीं और दोस्ती कब प्यार में बदल गयी, पता ही नहीं चला.

एक दिन वो मेरे पास आए और अपने प्यार का इज़हार कर दिया. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूं. दिल के ज़ज़्बात ज़बान तक लाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. कैसे कहती उनसे कि उनके सिवा कोई ख़यालों में आता ही नहीं, उनके अलावा किसी और को चाहा ही नहीं. पर बात दिल की दिल में ही रह गयी, मैं उनसे कुछ नहीं कह पायी. मेरे जवाब न देने की स्थिति में उन्होंने अपना फ़ोन नंबर देते हुए कहा कि वो मेरे फ़ोन का इंतज़ार करेंगे.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुमसा कोई न मिला (Pahla Affair: Tumsa Koi Na Mila)

घर पहुंच कर आईने के सामने न जाने कितनी बार ख़ुद को उनके जवाब के लिए तैयार किया, पर दिल की बात ज़बान तक नहीं ला सकी. मैं जितना ही उनके बारे में सोचती, उतना ही ख़ुुद को उनके क़रीब महसूस करती.
लेकिन मेरे प्यार के परवान चढ़ने से पहले ही उसे मर्यादाओं की बेड़ी में जकड़ जाना पड़ा. माता- पिता ने रिश्ता पक्का करने के साथ-साथ शादी की तारीख़ भी पक्की कर दी. मुझमें विरोध करने का साहस नहीं था, इसलिए चुपचाप घरवालों की मर्ज़ी से शादी कर ली- जवाब देना तो दूर, आख़िरी बार उन्हें देखना तक नसीब न हुआ.

शादी के बाद ज़िम्मेदारियों के बोझ तले कभी- कभार पहले प्यार की यादें ताज़ा हो भी जातीं तो मैं उन्हें ख़ुुद पर हावी न होने देती. पति-ससुराल वालों से कोई शिकायत नहीं थी, फिर भी हमेशा ये लगता कि कहीं कुछ छूट गया है. पति बहुत प्यार करते, लेकिन फिर भी मेरे मन में किसी और का ख़याल रहता. मगर तक़दीर का लिखा कौन टाल पाया है. आज इतने सालों बाद अचानक उनका पत्र आया है जिसमें लिखा है-
प्रिये,
सदा ख़ुुश रहो. मैंने तुम्हारा बहुत इंतज़ार किया,पर अब और न कर सकूंगा, क्योंकि शरीर ने साथ न देने का ़फैसला कर दिया है. व़क़्त बहुत कम है, आख़िरी बार तुम्हें देखने की तमन्ना है. हो सके तो आ जाओ.
तुम्हारा-आकाश

पत्र पढ़कर मुझे अपने कायर होने का एहसास हो रहा है. मुझमें तो अब भी साहस नहीं कि मैं दुनिया वालों को क्या, उन्हें ही बता सकूं कि मैं उन्हें कितना प्यार करती हूं. आज एक बार फिर मुझे औरत होने का हर्जाना चुकाना है, अपने पहले प्यार की आख़िरी तमन्ना भी पूरी न करके. शायद ङ्गमेरी सहेलीफ के माध्यम से ही उन्हें मेरा जवाब मिल जाए- और उनकी ज़िंदगी से पहले उनका इंतज़ार ख़त्म
हो जाए.

– दीपमाला सिंह

यह भी पढ़ें: तुम्हारी कत्थई आंखें (Pahla Affair: Tumhari Kathai Ankhen)

The Psychology Of Relationships: टीनएज बेटी के व्यवहार से डर लगता है (Afraid Of Teenage Daughters Behavior)

Psychology Of Relationships

रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)

मेरी बेटी की उम्र 28 साल है. वो नौकरी करती है. पिछले कुछ समय से उसकी शादी की बात चल रही है. कई रिश्ते भी आए, पर उसे कोई पसंद ही नहीं आता. पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा है. उससे पूछती हूं, तो कहती है कि सही समय पर, सही लड़का मिल जाएगा, तब कर लूंगी शादी. जल्दबाज़ी में ग़लत निर्णय नहीं लेना चाहती. लेकिन लोग बातें करते हैं, जिससे मैं बहुत परेशान रहती हूं.

– शिल्पा शुक्ला, उत्तर प्रदेश.

आज की जनरेशन शादी देर से ही करती है. उनकी प्राथमिकताएं अब बदल गई हैं. एक तरह से शादी की उम्र क़रीब 30 साल हो गई है. बच्चे पढ़-लिखकर कुछ बनकर ही शादी करने की सोचते हैं. अपनी बेटी का साथ दीजिए और धीरज रखिए. सही समय पर सब ठीक होगा. लोग क्या कहते हैं, उस पर ज़्यादा ध्यान न दें. यह आपकी बेटी की ज़िंदगी का सवाल है. अपनी बेटी पर भरोसा रखें. वो सही समय आने पर सही निर्णय ले लेगी. उसके कारण ज़्यादा परेशान होकर अपनी सेहत और घर का माहौल ख़राब न करें.

यह भी पढ़े: रिश्तों में बदल रहे हैं कमिटमेंट के मायने… (Changing Essence Of Commitments In Relationships Today)

मेरे पिताजी ने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया है. अब वे सारा दिन घर पर रहते हैं, लेकिन वो बहुत चिड़चिड़े से हो गए हैं. बात-बात पर बहस और ग़ुस्सा करते हैं. ज़िद्दी हो गए हैं, जिससे घर का माहौल ख़राब रहने लगा है. समझ में नहीं आता कि उन्हें कैसे हैंडल करें, क्योंकि वो बड़े हैं, तो उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते.

– राकेश सिन्हा, पटना.

आप उनके मन की स्थिति समझने की कोशिश करें. हो सकता है, उन्हें भी दिनभर घर पर बैठे रहना अच्छा न लगता हो या यह भी हो सकता है कि उन्हें कोई और परेशानी हो, जो वे आप लोगों से कह न पा रहे हों. थोड़ा धीरज से काम लें. उनका विश्‍वास जीतें. उनसे प्यार से पेश आएं. उन्हें
सुबह-शाम वॉक पर ले जाएं. सोशल एक्टिविटीज़, योगा इत्यादि के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें घर के काम की भी ज़िम्मेदारी दें. घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में उन्हें शामिल करें. उनकी राय को महत्व दें. उन्हें महसूस न होने दें कि अब वो काम पर नहीं जाते या कुछ करते नहीं हैं. आप सब का प्यार, सम्मान और सहानुभूति उन्हें शांत रहकर कुछ और करने के लिए प्रोत्साहित करेगी.

मेरी बेटी की उम्र 14 साल है. स्कूल जाती है. आजकल उसका स्वभाव कुछ अलग-सा हो गया है. हर समय मोबाइल पर लगी रहती है. कोई बात सुनती नहीं है. पैरेंट्स तो जैसे उसके दुश्मन हैं. डर लगता है, कहीं कोई ग़लत राह न पकड़ ले.
– कोमल सिंह, पानीपत.

इस उम्र में बच्चों का यह व्यवहार स्वाभाविक है. उन्हें परिजनों से ज़्यादा उनके दोस्त अच्छे लगते हैं. उन्हें लगता है पैरेंट्स की सोच पुरानी व दकियानूसी है. बच्चों की ख़ुशी का उन्हें ख़्याल नहीं है… आदि. बेहतर होगा आप भी उनके साथ दोस्तों की तरह पेश आएं. उनके साथ समय बिताएं, उनकी एक्टिविटीज़ में सकारात्मक तौर पर शामिल हों. हंसी-मज़ाक करें. हर बात पर टोकना या लेक्चर देना उन्हें पसंद नहीं आएगा. उनका विश्‍वास जीतें. लेकिन साथ ही उन पर नज़र भी रखें, उनके फ्रेंड सर्कल की जानकारी रखें, पर उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश न करें. घर का हल्का-फुल्का दोस्ताना माहौल उन्हें घर से और आपसे बांधे रखेगा.

Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

यह भी पढ़े: लव गेम: पार्टनर से पूछें ये नॉटी सवाल (Love Game: Some Naughty Questions To Ask Your Partner)

पहला अफेयर: ख़ामोशियां चीखती हैं… (Pahla Affair: Khamoshiyan Cheekhti Hain)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: ख़ामोशियां चीखती हैं… (Pahla Affair: Khamoshiyan Cheekhti Hain)

हमारी दोस्ती का आग़ाज़, शतरंज के मोहरों से हुआ था. जब शबीना अपने प्यादे से मेरे वज़ीर को शह देती, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता… और कहीं मेरा ऊंट उसके प्यादे को भगा-भगाकर बेहाल कर देता, तब उसके ग़ुस्सैल चेहरे की मायूसी देखती बनती.

आज उसकी वही बचकाना हरक़तें याद आती हैं, तो मन से एक हूक उठती है. एक साथ घूमना-फिरना, मौज-मस्ती के वो दिन… न जाने कहां गुम हैं? नहीं जानता वो दोस्ताना हाथ क्यों पीछे हट गया. उफ़़्फ्! व़क्त की गर्द ने मुझे अपनी आग़ोश में लपेट लिया है.
जब-जब मैंने गंभीर हो उसके भविष्य के बारे में कुछ कहा, तो उसने हर बात हंसकर हवा में उड़ा दी. जैसे कोई जासूसी किताब पढ़ रही हो. मैं नादान कहां पढ़ पाया उसके भीतरी निबंध!

न जाने कितने ख़त लिख-लिख पानी में बहाए हैं और कितने किताबों में ़कैद हैं. जो उसकी सहेली शमीम के हाथ भेजे, उनका भी कोई जवाब न आया. व़क्त मुट्ठी से रेत-सा कैसे फिसलता रहा… मैं कहां जान पाया! बस, उसकी चुप्पी अंदर-ही-अंदर सालती है.

शमीम की बातों ने मेरा पूरा वजूद हिला दिया. शमीम से जाना कि उसने किसी अमीर साहिबज़ादे से दोस्ती कर ली है. इस ख़बर ने तो जैसे मेरे जीवन में सूनामी-सा बवंडर ला खड़ा किया.

“जब भंवर में आ गई कश्ती मेरी, नाख़ुदा ने क्यों किनारा कर लिया…”

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मंज़िल (Pahla Affair: Manzil)

हिम्मत जुटाकर एक दिन मैंने फोन घुमाया… उधर से मर्दाना आवाज़ थी, “हैलो, अरे तुम… राशिद! कहो कैसे फोन किया?”

मैं जल्द ही बोला, “अब्बाजान आदाब! ज़रा सबीना से बात कराएंगे?”

उनके अब्बा की आवाज़ अटकी, “उनसे मिलने कोई आया है. वे गुफ़्तगू में मशग़ूल हैं.”

“आप कहें राशिद का फोन था.” मेरी बात काट उन्होंने खट से फोन रख दिया. कुछ समय मुझ पर बेख़ुदी का आलम रहा, फिर एक दिन

मैंने रात को फोन घुमाया. उधर से सबीना की आवाज़ थी,“कौन?”

“हम हैं राशिद! अरे, इतनी जल्दी आवाज़ भी भूल गई.”

उसने तरकश से ज़हर बुझा तीर छोड़ा, “सुनो, मैंने अपनी ज़िंदगी का मक़सद पा लिया है. अच्छा होगा, तुम भी अपनी कश्ती का रुख मोड़ दो…” और खटाक से फोन कट गया.

उसका फेंका हुआ वह एक जुमला मेरा जिगर चाक-चाक कर गया. उफ़़्फ्! हुस्न पर इतना ग़ुरूर? जी चाहा सबीना को पकड़कर पूछूं कि ये सुनहरे सपनों का जाल क्यों बिछाया? इतने रंगीन नज़ारों की सैर क्यों कराई? यूं शतरंज के मोहरे-सा उठाकर पटकना कहां की वफ़ादारी है? वाह! क्या दोस्ती निभाई!

अब तो हर तरफ़ दमघोंटू माहौल है… उसकी बेवफ़ाई का कारण अब तक नहीं जान पाया और अगर उसने तय ही कर रखा था कि साथ नहीं निभाना, तो मन से, भावनाओं से क्यों ऐसा खेलकर चली गई. साफ़-साफ़ कह देती कि बस दोस्ती रखनी है, उसके बाद हमारे रास्ते अलग हैं… क्यों मुझे मुहब्बत की हसीन दुनिया दिखाई और क्यों मैं उसकी आंखों को ठीक से पढ़ नहीं पाया. अब तो बस, मैं हूं और मेरी तन्हाई! ये ख़ामोशियां अब चीखने लगी हैं. मेरे पहले प्यार का यह हश्र होगा… नहीं जानता था. अब तो ये ख़ामोशियां ही मुझसे बतियाती हैं… मेरा मन बहलाती हैं…!

कहीं दूर से एक आवाज़ आ रही है…

“धीरे-धीरे अंदर आना… बिल्कुल शोर न करना तुम…
तन्हाई को थपकी देकर… मैंने अभी सुलाया है…”

– मीरा हिंगोरानी

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… (Pahla Affair: Khila Gulab Ki Tarah Mera Badan)