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सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

 Social Media Relationships
सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

डिजिटल (Digital) होती दुनिया में रिश्ते (Relationships) भी डिजिटल हो चुके हैं. अब तो पति-पत्नी भी आसपास बैठकर सोशल मीडिया (Social Media) के ज़रिए ही एक-दूसरे से बात करते हैं. वहीं दूसरी ओर रियल लाइफ से दूर अब हमारे डिजिटल रिश्ते (Digital Relationships) भी बहुत सारे बन गए हैं, जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण भी हो गए हैं, क्योंकि उनमें अलग तरह का आकर्षण है. वहां रोक-टोक नहीं है, वहां हर बात जायज़ है… ऐसे में हमें वो भाते हैं और बहुत ज़्यादा लुभाते हैं.

–    सोशल मीडिया एडिक्शन की तरह है, यह बात शोधों में पाई गई है. यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.

–    यहां पनपे रिश्ते शुरुआत में बेहद आकर्षक और ख़ूबसूरत लगते हैं, क्योंकि सबकुछ एकदम नया लगता है.

–    अंजान लोग दोस्त बनते हैं और उनके बारे में सबकुछ जानने को आतुर हो जाते हैं.

–    न स़िर्फ उनके बारे में हम जानना चाहते हैं, बल्कि अपने बारे में भी सबकुछ बताने को उतावले रहते हैं.

–    यहां हमें इस बात का आभास तक नहीं होता कि इनमें से कौन, कितना सच बोल रहा होता है? अपने बारे में कौन किस तरह की जानकारी साझा कर रहा होता है और उनका इरादा क्या होता है.

–    डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का होता है. यहां कोई भी आपको आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है.

–    दरअसल, जो सोशल मीडिया के रिश्ते हमें इतने भाते हैं, वो उतने ही अधूरे होते हैं. कई बार तो साल-दो साल गुज़रने के बाद पता चलता है कि जिससे हम बात कर रहे थे, वो तो ये था ही नहीं.

–    इतने फेक अकाउंट्स, इतनी फेक आईडीज़, इतना दिखावटी अंदाज़… पर यही सब हमें इतना रियल लगता है कि अपने रिश्तों में दूरियां बढ़ाकर हम इन नक़ली रिश्तों के क़रीब जाते हैं.

–    एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और डिप्रेशन महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है. यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा की गई थी.

–    आपसी रिश्तों में हम पर बहुत सारी ज़िम्मेदारियां और जवाबदेही होती है, जबकि सोशल मीडिया रिलेशन इन सबसे मुक्त होते हैं, तो ऐसे में ज़ाहिर है ये रिश्ते हमें अच्छे लगने लगते हैं.

–    इन रिश्तों का मायाजाल ऐसा होता है कि हम इन्हें अपने पल-पल की ख़बर देना चाहते हैं और अपनी लाइफ को बहुत हैप्पनिंग दिखाना चाहते हैं, जबकि रियल रिश्तों में हमारी दिलचस्पी कम होने लगती है.

–    हम भले ही डिजिटल रिश्तों में अपनी ख़ुशियां ढूंढ़ने की कोशिश करें, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ये सबसे अधूरे रिश्ते होते हैं, क्योंकि ये झूठ की बुनियाद पर अधिक बने होते हैं.

–    इनमें कई आवरण और नक़ाब होते हैं, जो परत दर परत धीरे-धीरे खुलते हैं और कभी-कभार तो हमें पता भी नहीं चलता और हम फरेब के मायाजाल में फंसते चले जाते हैं.

–    रियल रिश्तों में हमारा कम्यूनिकेशन कम होने लगता है और प्यार की गर्माहट भी घटती चली जाती है. जब तक होश आता है, तब तक बहुत कुछ हाथ से निकल चुका होता है.

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इस तरह छलता है सोशल मीडिया का रिश्ता…

मुंबई की रहनेवाली 35 वर्षीया आशा यूं तो अपनी  ज़िंदगी से और शादी से ख़ुश थी, पर कहीं न कहीं उसे सोशल मीडिया की ऐसी लत लग गई थी कि वो वहां अपनी ज़िंदगी के अधूरेपन को कम करने की कोशिशों में जुट गई थी. उसे हमेशा शिकायत रहती थी कि उसका पति उसे पूरा समय नहीं दे पाता. वो उसको पहले की तरह पैंपर नहीं करता… ऐसे में वो एक लड़के के संपर्क में आई. उसका नाम राजेश था. उसकी राजेश से रोज़ बातें होने लगीं. ये बातें अब इतनी बढ़ गई थीं कि मुलाक़ात करने का मन बनाया.

आशा का 5 साल का बेटा भी था, पर उसने किसी तरह अपने पति से झूठ कहा कि वो ऑफिस की तरफ़ से ट्रेनिंग के लिए दूसरे शहर जा रही है. वो राजेश के साथ होटल में रहने गई, तो उसे पता चला कि वो अकेला नहीं आया. उससे मिलने उसके साथ उसके दो दोस्त भी हैं.

ये पहला झटका जो आशा को लगा. उसके बाद राजेश ने उसे समझाया कि वो सब अलग कमरे में रहेंगे. आशा मान गई. राजेश उसको शहर में साथ घूमने के लिए कहता, तो आशा मना करती, क्योंकि इसी शहर में वो पति से झूठ बोलकर रह रही है, तो एक डर था मन में कि कहीं कोई देख न ले.

अगले ही दिन राजेश के साथ आशा की बहस हो गई. आशा को महसूस होने लगा कि राजेश की सोच बहुत पिछड़ी हुई है. वो चैटिंग में भले ही मीठी-मीठी बातें करता था, पर अब

रू-ब-रू उससे मिलकर अलग ही व्यक्तित्व सामने आ रहा है. राजेश का सोचना था कि जो वो बोले, आशा को आंख मूंदकर वही करना चाहिए.

आशा आत्मनिर्भर महिला थी. उसे इस तरह के व्यवहार की आदत भी नहीं थी, क्योंकि उसका पति बेहद सुलझा हुआ और शालीन था. अब आशा को महसूस हुआ कि उससे इस झूठे, अधूरे-से रिश्ते के लिए अपनी शादी को दांव पर लगा दिया. आशा को यह भी डर था कि कहीं राजेश उसे ब्लैकमेल न करे, पर उसने राजेश से बात करके अपने सारे रिश्ते ख़त्म किए और अपने घर लौट आई.

इस घटना ने आशा को बुरी तरह हिला दिया, लेकिन उसे यह बात समझ में आ गई कि रियल और डिजिटल रिश्तों में कितना अंतर होता है.

पति भले ही व्यस्तता के चलते समय न दे पाते हों, पर वो एक भले इंसान हैं और आशा का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, जबकि राजेश एक दंभी पुरुष था, जो स़िर्फ आशा का फ़ायदा उठाना चाहता था.

कुछ इसी तरह का केस मालिनी का भी था, लेकिन वहां मालिनी के पति ने उसका झूठ पकड़ लिया था और मालिनी का तलाक़ हो गया था. उसके बाद जिस लड़के की वजह से मालिनी ने पति से फरेब किया था, उस लड़के ने भी मालिनी से पल्ला झाड़ लिया. जबकि मालिनी का कहना है कि वो पहले कहता था कि दोनों शादी कर लेंगे.

इस तरह के तमाम वाकये इस तरह के रिश्ते के अधूरेपन और रियल रिश्तों में बढ़ती दूरियों का संकेत देते हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि संतुलन व सामंजस्य बनाकर ही हर चीज़ का इस्तेमाल किया जाए, वरना जो चीज़ वरदान है, उसे हम ख़ुद ही अपने लिए अभिशाप बना लेंगे.

– शौर्य सिंह

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रिश्तों में बढ़ रहा है जासूसी का चलन (Why People Are Hiring Detectives To Spy On Their Loved Ones)

Detective Rajani Pandit

जनम-जनम का बंधन कहा जाने वाला शादी का रिश्ता कई बार कुछ क़दम भी साथ नहीं चल पाता… कई बार बाद में पता चलता है कि ये शादी नहीं साजिश थी… शादी जैसे पवित्र रिश्ते में जब मिलता है धोखा, तो क्या होता है… ऐसे ही कुछ पेचीदा सवालों के जवाब जानने के लिए हम मिले देश की पहली महिला जासूस रजनी पंडित (Detective Rajani Pandit) से. रजनी पंडित (Detective Rajani Pandit) ने हमें बताया कि रिश्तों में बढ़ती धोखाधड़ी के कारण अब रिश्तों में जासूसी का ट्रेंड बढ़ गया है. जब रिश्ते में कहीं कोई गड़बड़ी नज़र आने लगती है, तो लोग उसकी सच्चाई जानने के लिए जासूसी का सहारा लेते हैं.

Detective Rajani Pandit

क्यों बढ़ रही है रिश्तों में जासूसी?
डिटेक्टिव रजनी पंडित (Detective Rajani Pandit) के अनुसार, कई लोग अपने रिश्तों के प्रति ईमानदार नहीं होते. उन्हें किसी की भावनाओं से कोई लेना देना नहीं होता. वो बड़ी ख़ामोशी से अपने रिश्तों को धोखा देते रहते हैं. लेकिन जब उन पर शक की सूई घूमने लगती है, तो सच्चाई उजागर करने के लिए जासूसी का सहारा लिया जाता है. डिटेक्टिव रजनी पंडित ने हमारे साथ रिश्तों में जासूसी के कुछ अजीबोगरीब केस कुछ इस तरह शेयर किए:

Detective Rajani Pandit

सोशल मीडिया का प्यार
62 वर्ष की एक बुजुर्ग महिला के पति का देहांत हो चुका था. फिर सोशल मीडिया पर अपने हमउम्र एक विदेश में रहने वाले पुरुष से उनकी दोस्ती हो गई. दोनों घंटों चैट करते रहते थे. विदेश में रहनेवाले उस पुरुष ने बताया कि उसका वहां बहुत बड़ा बिज़नेस है, लेकिन बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं इसलिए वो बहुत अकेलापन महसूस करते हैं. महिला की स्थिति भी कुछ ऐसी ही थी, उनके बच्चे विदेश में रहते थे इसलिए उनकी ज़िंदगी में भी बहुत अकेलापन था. जल्दी ही दोनों को महसूस होने लगा कि अब उन्हें साथ रहना चाहिए. महिला उनके साथ काफ़ी जुड़ाव महसूस करने लगी थी. वो उनके लिए काफ़ी महंगे गिफ्ट भी भेजा करती थी.
हां, जब बदले में उसे कोई गिफ्ट न मिलता तो उसे अजीब ज़रूर लगता, लेकिन उन्होंने सोचा, हर किसी का अपना स्वभाव होता है. शायद उन्हें गिफ्ट लेना-देना पसंद न हो. फिर एक बार पुरुष ने कहा कि वो उनसे मिलने इंडिया आ रहे हैं. वो उनसे मिलने के लिए बहुत ख़ुश थीं. फिर पुरुष ने उनसे एक बड़ा अमाउंट बैंक से निकालकर रखने को कहा. पूछने पर कहा कि मेरे लिए इतना अमाउंट यहां से लाना मुश्किल है इसलिए फिलहाल तुम निकाल लो. बाद में मैं तुम्हारे अकाउंट में ट्रांसफर कर दूंगा.

…और फिर शुरू हुई जासूसी
उन्हें ये बात बड़ी अजीब लगी कि इतना बड़ा बिज़नेसमैन पैसे क्यों नहीं ला सकता. उन्हें शक हुआ, तो उन्होंने ये बात डिटेक्टिव रजनी पंडित से शेयर की. जब रजनी की टीम ने उनकी छानबीन की, तो पता चला सोशल मीडिया पर जो फोटो थी, उससे इस आदमी का चेहरा मैच नहीं करता. वो 30-35 साल का युवा था और उसने उस बुजुर्ग महिला से पैसे ऐंठने के लिए वो फोटो लगा रखी थी.

क्या सबक लें?
अगर सही समय पर वो सतर्क न होतीं, तो वो उन्हें बेवकूफ़ बनाकर उनसे न जाने कितने पैसे ठग लेता. रजनी पंडित की टीम ने उस महिला से कहा कि आप उस आदमी की पुलिस कंप्लेंट करो, लेकिन उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि मेरे बेटे-बहू के सामने मेरी बेइज़्ज़ती हो जाएगी. इसलिए उन्होंने बात को वहीं दबा दिया. समाज के डर से महिलाएं आगे नहीं आतीं, अपने हक़ के लिए आवाज़ नहीं उठातीं, इसीलिए दोषियों का हौसला बढ़ता है और वे बार-बार क्राइम (अपराध) करते हैं.

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लव, शादी और धोखा
अभिषेक का तलाक़ हो चुका था इसलिए माता-पिता ने उसके लिए दूसरी लड़की ढूंढ़ी और सबकी रजामंदी से उसकी दूसरी शादी हो गई. शादी के कुछ ही समय बाद अभिषेक को अपनी पत्नी के अ़फेयर की बात पता चली. सुनकर वो हैरान रह गया. उसने पत्नी से जब इस बारे में बात की, तो पत्नी ने कहा कि उसने माता-पिता के प्रेशर में आकर उससे शादी की, उसका शादी से पहले ही अफेयर चल रहा है. उसने अभिषेक से कहा कि वो उससे तलाक़ चाहती है. पत्नी की बातें सुनकर अभिषेक और परेशान हो गया. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे. क्या वो एक बार फिर से तलाक़ ले? लेकिन बार-बार तलाक़ लेने से लोग उसे ही दोषी समझेंगे, ये सोचकर अभिषेक ने चुप रहना ही सही समझा.

…और फिर शुरू हुई जासूसी
पत्नी की हरकतें जब हद से ज़्यादा बढ़ने लगीं, तो अभिषेक ने जासूस रजनी पंडित से कॉन्टेक्ट किया. अभिषेक की पत्नी की जासूसी करने से पता चला कि उसका बॉयफ्रेंड बहुत नशा करता है और उससे अक्सर पैसे मांगता है. वो उसे अभिषेक से तलाक लेकर मोटी रकम बसूलने को कहता है.

क्या सबक लें?
सोच-समझकर रिश्ता तय करें. शादी के बाद तलाक लेने में बहुत मुश्किल होती है, दोनों परिवार डिस्टर्ब हो जाते हैं इसलिए शादी तय करते समय दोनों पक्षों पूरी जांच-पड़ताल कर लें.

Detective Rajani Pandit

जब टूटता है विश्‍वास
शाह परिवार को बहू के रूप में रुचिता बहुत पसंद थी. हां, रुचिता का मोटापा उनकी चिंता का कारण था, लेकिन उन्हें उसका व्यवहार इतना पसंद था कि उन्होंने शादी से पहले उसका वेट लॉस ट्रीटमेंट करवाया, ताकि उनके घर आकर या उनके रिश्तेदारों के बीच उठने-बैठने में उसे किसी तरह हीनभावना न हो. रुचिता ने भी ससुराल वालों के अनुरूप ख़ुद का मेकओवर किया. उसने फैशन डिज़ाइनिंग का कोर्स किया था इसलिए ससुराल वालों ने उसे बुटीक खोलकर दिया. लेकिन मेकओवर के बाद रुचिता का कॉन्फिडेंस इतना ज़्यादा बढ़ गया कि वो न स़िर्फ ज़रूरत से ज़्यादा छोटे कपड़े पहनने लगी, बल्कि शराब भी पीने लगी थी. साथ ही वो काम का हवाला देकर देर रात घर आने लगी.

…और फिर शुरू हुई जासूसी
बहू में आये इस बदलाव को देखकर ससुराल वालों को शक हुआ और उन्होंने रुचिता की जासूसी करवाई. तब पता चला कि उसकी दोस्ती अच्छे लोगों के साथ नहीं है. वो देर रात तक ऐसे लोगों के साथ घूमती-फिरती है, जिनके लिए रोज़ पार्टी, शराब और जिस्मानी रिश्ता आम बात है.

क्या सबक लें?
किसी पर भी आंख मूंदकर विश्‍वास न करें. यदि परिवार के किसी सदस्य में अचानक ऐसे बदलाव नज़र आएं, जो अजीबोगरीब हों, तो इस बात को नज़रअंदाज़ न करें. इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, सचेत होना ज़रूरी है.

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जब बीवी करे ब्लैकमेल
वैभव शादी के बाद बीवी को लेकर विदेश गया. कुछ समय तक तो सबकुछ नॉर्मल था. नियमित रूप से वो अपने माता-पिता को इंडिया में फोन करता था, फिर अचानक सब बंद हो गया. वैभव कहां है, क्या कर रहा है, उसकी पत्नी कैसी है… कोई ख़बर नहीं.

…और फिर शुरू हुई जासूसी
जब बेटे की कोई ख़बर न मिली, तो वैभव के माता-पिता ने जासूस रजनी पंडित की टीम से उसके बारे में पता करने को कहा. रजनी पंडित की टीम ने जब वहां जाकर पता किया तो पता चला कि वैभव अपने माता-पिता को भी अपने साथ बुलाना चाहता था. उनके पेपरवर्क की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसकी बीवी ऐसा नहीं चाहती थी इसलिए उसने वैभव को धमकी दी कि यदि उसने अपने पैरेंट्स को बुलाया, तो वो उसे तलाक़ दे देगी. पत्नी के डर से वैभव ने घर फोन करना ही छोड़ दिया.

क्या सबक लें?
डरकर न रहें. अपनी बात परिवार के साथ शेयर करें. यदि आपका पति या पत्नी आप पर ग़लत काम के लिए दबाव डालें, तो पहले उन्हें समझाने की कोशिश करें. इससे भी बात न बने, तो काउंसलर या एक्सपर्ट का सहारा लें.

रिश्तों में जासूसी के ऐसे कई केस अब एक्सपर्ट्स के पास आ रहे हैं और रिश्तों में जासूसी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. बदलती लाइफ स्टाइल ने रिश्तों के मायने बदल दिए हैं. अब रिश्तों में न पहले जैसा समर्पण नज़र आता है और न विश्‍वास इसीलिए रिश्तों में जासूसी का ट्रेंड बढ़ रहा है.

– कमला बडोनी

पहला अफेयर: खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… (Pahla Affair: Khila Gulab Ki Tarah Mera Badan)

Pahla Affair

पहला अफेयर: खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… (Pahla Affair: Khila Gulab Ki Tarah Mera Badan)

पहले प्यार (First Love) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

एक अरसे बाद तुम्हें देखा, ज़्यादा नहीं बदले थे तुम… पर हमारा रिश्ता बदल चुका था. वो प्यार का रिश्ता, वो मुहब्बत, वो चाहत अब कहीं मन म दबकर दम तोड़ चुकी थी.

बेइंतहा चाहती थी मैं तुम्हें, पर पता नहीं क्यों तुम पर भरोसा शुरू से ही नहीं था. तुम्हारा वो अजीब-सा व्यवहार… कभी बेहद प्यार और अपनापन, तो कभी अजनबियों सा बर्ताव. हर बार पूछने पर कहते कि एक नई लड़की से दोस्ती हुई है… उसी से बात करता हूं… मैं तुम्हें समझाती कि फ्लर्ट करना एक हद तक ठीक है, लेकिन अगर तुम हमारे रिश्ते को लेकर संजीदा हो, तो यह सब कहां तक जायज़ है और तुम हंसकर कहते, बता तो देता हूं न तुम्हें सबकुछ… ख़ैर इसी तरह से दिन गुज़र रहे थे. पर कुछ समय से महसूस कर रही थी कि तुम कुछ ज़्यादा ही इग्नोर कर रहे थे मुझे. पूछने पर वही टालने वाला अंदाज़… लेकिन मैं अपने रिश्ते को एक नाम देना चाहती थी, पर तुम्हारे साथ कितनी दूर तक जा सकती थी यही सोचकर एक ़फैसला लिया…

“विकास, मुझे नहीं लगता कि तुम मुझे लेकर सीरियस हो. मैं इस रिश्ते को अब और आगे नहीं ले जा सकती…”

“रितिका, मैं टूट जाऊंगा तुम्हारे बिना… ये सब मेरा मस्ती-मज़ाक, इसे इतना सीरियसली क्यों ले रही हो…?”

“मुझे कंमिटमेंट चाहिए, पर मुझे नहीं लगता कि तुम कभी भी ज़िंदगी में एक सच्चे लाइफ पार्टनर बनकर मेरा साथ दे सकोगे. बस, ये आख़िरी मुलाक़ात है हमारी, इसे फाइनल गुड बाय समझो.”

“रितिका, प्यार का रिश्ता इतनी आसानी से स़िर्फ गुड बाय कहने से नहीं टूट जाता. मैं ताउम्र तुमसे प्यार करता रहूंगा और तुम्हारा इंतज़ार भी.”

मैं चली आई थी वहां से. शहर भी छोड़ दिया था. नए शहर में दिन गुज़र रहे थे, पर तुम्हारी यादें पीछा नहीं छोड़ रही थीं. लेकिन व़क्त हर ज़ख़्म को भर देता है और तुम्हारी सोशल साइट्स देखकर कभी लगा भी नहीं कि तुम मुझे मिस करते हो. शायद तुम भी यही चाहते थे.
आज फिर उसी शहर में पूरे 3 साल बाद आना हुआ. तुम्हें पता चला, तो तुमने मिलने की गुज़ारिश की. मैंने भी हां कर दी कि चलो एक दोस्त के नाते ही मिल लेने में हर्ज़ ही क्या है… तुम्हारा घर वैसे भी मेरे होटल रुम के पास ही था.

डोर बेल बजाते हुए हाथ कांप रहे थे. बहुत कुछ चल रहा था मन में. तुमको देखकर सोचा नहीं था धड़कनें इतनी तेज़ हो जाएंगी. क्या मैं अब भी तुम्हें भुला नहीं पाई? क्या अब भी प्यार करती हूं तुमसे? नहीं, मुझे नहीं लगता… पर ये हाल क्यों है फिर दिल का… तुमने वही शर्ट पहनी थी, जो मैंने तुम्हारे बर्थडे पर गिफ्ट की थी.

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“कैसी हो रितु? बहुत क्यूट लग रही हो, हमेशा की तरह…”

“मैं ठीक हूं, तुम कैसे हो?”

“तुम्हारे बिना कैसा हो सकता हूं मैं? एकदम तन्हा और अधूरा हूं. तुम्हारी छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियां हमारे रिश्ते को कहां ले आईं देख रही हो न?”

“मेरी ग़लतफ़हमियां या तुम्हारी आदतें और लापरवाहियां?”

“चलो, मान लिया मैं ही ग़लत था, पर आज भी इन आंखों को तुम्हारा ही इंतज़ार रहता है. मेरी ज़िंदगी में अगर कोई और होता, तो क्यों इस तरह तुम्हारे क़दमों में झुका रहता?”

“तुम्हारी सोशल साइट्स को देखकर तो नहीं लगता कि तुम्हें मेरा इंतज़ार है.”

“रितु, सोशल साइट्स को क्यों तुमने प्यार को परखने का पैमाना मान लिया है. क्या मेरी आंखों में नहीं दिखता तुम्हें?”

“घर काफ़ी अच्छा सजाया है तुमने.”

“तुम्हारे बिना ये घर नहीं स़िर्फ ईंट-पत्थरों का मकान है, रितु मेरी ज़िंदगी में वापस आ जाओ, मेरे इस मकान को घर बना दो प्लीज़…”
यह कहते हुए तुमने मेरा हाथ थाम लिया. तुम्हारी उस छुअन में अजीब-सी कशिश थी. उस गर्माहट में खो सी गई थी मैं. मेरे बदन में सिहरन-सी होने लगी थी. मैंने झटके से हाथ छुड़ा लिया. तुम फिर मेरे क़रीब आए और मुझे गले से लगा लिया. मैं चाहकर भी ख़ुद को तुमसे अलग नहीं कर पाई… तुमने वही मेरा पसंदीदा गाना प्ले कर रखा था… न जाने क्या हुआ, जो तूने छू लिया… खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… उस मदहोशी के आलम में किसी भी शिकवे-शिकायत की जगह नहीं थी, बस बेपनाह प्यार था. अब हमें दो से एक होना था. इसी ख़्याल ने मुझे और भी निखार दिया था…

– गीता शर्मा

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कैसे जीतें पति का दिल? (How To Win Your Husband’s Heart?)

तुम्हारा साथ, प्यार की बात,  तुम्हारा हाथ, जन्मभर का साथ,  धड़कनों की ज़रूरत हो तुम, 

तुमसे है मेरी दुनिया हसीं, मेरी मोहब्बत, मेरी ज़िंदगी हो तुम…

यह एहसास हर पति (Husband) को अपनी पत्नी (Wife) के क़रीब ले आता है. प्यार-अपनापन, केयर और सहयोग से किसी का भी दिल जीता जा सकता है. लेकिन जब बात पति की हो, तो मामला थोड़ा नाज़ुक होता है. यह दिल अपने-पराए और आम लोगों के दिलों से थोड़ा अलग और ख़ास होता है. इसलिए इसे जीतने की कला भी थोड़ी ख़ास होनी चाहिए. सबसे पहले पुरुषों के कम्यूनिकेशन कोड को समझने की कोशिश करें.

Win Your Husband's Heart

– कहते हैं, प्यार से दुश्मनों का भी दिल जीता जा सकता है.  रोज़ाना कुछ समय, चाहे फिर घर-बाहर हो या फोन पर ही, उनसे  प्यार से दो मीठे बोल ज़रूर बोलें. इससे जहां दिनभर प्यार की ख़ुमारी बनी रहती है, वहीं रिश्तों में भी ताज़गी रहती है.

–   कोशिश करें कि सुबह की चाय या ब्रेकफास्ट उनके साथ लें. इससे जहां दिनभर के प्लान्स पर बातेें हो जाती हैं, वहीं उन्हें यह एहसास गुदगुदा देता है कि आप उनके साथ का एक पल भी मिस नहीं करना चाहतीं. हां, यदि आप कामकाजी हैं, तो उनके साथ ही ऑफिस के लिए निकल भी सकती हैं.

–    किधर जा रहे हैं?… वहां क्यों जाना है? आपका वो दोस्त ठीक नहीं… वहां पर आपका क्या काम है… बात-बात पर रोक-टोक, सवालों की झड़ी, शिकायतों का पुलिंदा न खोल दें.

–    हर किसी से अपने पति की शिकायतें करती न फिरें. यदि आपको लगता है कि आपके वैवाहिक जीवन में कुछ समस्या है तो भरोसेमंद बड़े-बुज़ुर्ग या फिर काउंसलर की मदद ले सकती हैं.

–    काम से लौटने पर हमेशा मुस्कुराहट के साथ पति का स्वागत करें. इतना भर करना, उनकी आधी थकान दूर कर देगा.

–    शादी-ब्याह हो या फंक्शन-पार्टी, अपनी तैयारी के साथ-साथ पार्टनर का भी ख़्याल रखें, जैसे- वे क्या पहनेंगे, कौन-सा वॉच-शू उन पर स्मार्ट लगेगा, उन्होंने हेयर कट या

शेविंग प्रॉपर किया है या नहीं.

–    स्वादिष्ट भोजन बनाकर भी उनका दिल जीता जा सकता है. वैसे भी कहते हैं कि पति का दिल जीतने के लिए लज़ीज़ व्यंजन से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता.

–    तक़रीबन हर पति ममाज़ बॉय होते हैं. वे अपनी पत्नी में अपनी मां की ख़ूबियों को तलाशते हैं. यदि आपके पति भी ऐसे हैं, तो अपनी सास से उनकी पसंद के बारे में पूछकर अपनी कुछ आदतें बदलें. सास से उनकी पसंदीदा डिशेज़ बनाना सीखें और सभी को खिलाएं.

–    पति को हमेशा अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती रहें.

–    यदि कभी वे ख़राब मूड में हैं, तो उन्हें तमाम सवाल पूछकर और डिस्टर्ब न करें. उन्हें कूल होने के लिए थोड़ा व़क्त दें और बाद में बात करें.

–    यदि पति टूरिंग जॉब करते हैं, तो जब भी टूर से आएं, तो उन्हें कुछ न कुछ सरप्राइज़ ज़रूर दें. यह कुछ भी हो सकता है, जैसे- आप उनकी पसंद की साड़ी पहन उनके साथ घूमने-फिरने की प्लानिंग कर सकती हैं, उनकी फेवरेट मूवी उन्हें दिखा सकती हैं, उन्हें बाहर खाने काशौक़ है, तो किसी ख़ास रेस्टॉरेंट में डिनर प्लान कर सकती हैं.

–    कई पुरुष स्पोर्ट्स के क्रेज़ी होते हैं, जबकि पत्नियां स्पोर्ट्स कम ही पसंद करती हैं. यदि आपके पति क्रिकेट फैन हैं, तो अधिक नहीं, पर कुछ बेसिक क्रिकेट की जानकारी ज़रूर रखें. उनके साथ बैठकर मैच देखें. ये सारी बातें उन्हें ख़ुशी देने के साथ उत्साहित भी करेंगी. उनके शौक़ और पसंद में आपका दिलचस्पी लेना, उन्हें बेहद अच्छा लगेगा.

–    सेक्सुअल रिलेशन के समय उन्हें किस बात से ख़ुशी मिलती है, क्या अच्छा लगता है, अंतरंग पलों में वे आपसे क्या ख़्वाहिश रखते हैं, इन बातों को समझें और उन्हें अमल में लाएं.

–    पति के लिए कोई स्पेशल ईवनिंग अरेंज करें, जिसमें केवल आप दोनों हों और कोई नहीं, बच्चे भी नहीं.

–    ससुराल के लोगों का, फिर चाहे वो सास-ससुर, देवर-ननद… कोई भी हो, सभी के साथ उचित व्यवहार करें. उनके जन्मदिन या शादी की सालगिरह आदि पर गिफ्ट या सरप्राइज़ पार्टी ज़रूर दें. आपका यह अपनापन पति के दिल को छू जाएगा. उन्हें यह देखकर बेहद अच्छा लगेगा कि आपको उनके साथ-साथ परिवार के हर सदस्य का ख़्याल रहता है.

–    ननद-देवर या अन्य पारिवारिक सदस्यों, रिश्तेदारों को छोटे-छोटे त्योहारों पर घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें. ससुरालवालों के प्रति आपका अपनापन देख पति को  ख़ुशी होगी.

–    जब कभी पति के साथ कहीं बाहर या फिर पारिवारिक फंक्शन आदि में जाएं, तो इस तरह से तैयार हों कि दोनों आइडियल कपल लगें. “मेड फॉर इच अदर.” कॉर्डिनेशन कुछ इस तरह का हो.

–    हरदम प्यार ही प्यार और अच्छी-अच्छी बातें ही हों, यह ज़रूरी नहीं है. कई बार खट्टी-मीठी तक़रार, नोक-झोंक पति-पत्नी को और भी क़रीब ले आती है. ये न भूलें कि रूठने-मनाने का दौर आपसी मिठास को और भी बढ़ाता है.

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Couple Goals

–    दिनभर की भागदौड़ और काम की आपाधापी में रोमांस के पल भी ज़रूर चुराएं. प्यार भरे लव नोट्स, रोमांटिक बातें, लव-केयर मैसेजेस, हंसी-मज़ाक कपल्स की लाइफ को ख़ुशनुमा और एवरग्रीन बनाते हैं. इन बातों की गहराई को समझें.

–    कभी-कभी एक-दूसरे के शौक़ और पसंद के साथ जीने का भी अलग मज़ा होता है. बदलाव के लिए पति की हॉबीज़ को भी अपनाया जा सकता है. यह जहां उन्हें सुखद आश्‍चर्य में भर देगा, वहीं प्यार से सराबोर भी कर देगा.

–    कभी भी नारी सुलभ कोमलता को खोने न दें. पुरुषों को स्त्रियों का प्रेमपूर्ण ममतामयी व्यवहार आकर्षित करता है.

–    यदि आपके पति हाइजीन आदि का विशेष ध्यान रखते हैं, तो आप भी इस बात का ख़्याल रखें. घर को साफ़- सुथरा रखें. साथ ही ख़ुद को भी.

–    जब कभी लगे कि पार्टनर लो फील कर रहे हैं… ऐसे समय में उन्हें प्रोत्साहित करें. उनकी प्रशंसा करें, उनकी अच्छी बातों को उभारें, कॉम्प्लीमेंट दें. इन सब से उनका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा.

–    उन्हें जताएं कि वे दुनिया के सबसे अच्छे पार्टनर हैं. ऐसा सभी पत्नियों को करना चाहिए, इससे रिश्ता मज़बूत होता है.

–    पति को घर की छोटी-छोटी ज़िम्मेदारियां सौंपें. उन्हें पूरा करने पर ‘धन्यवाद’ भी ज़रूर कहें. इससे उन्हें और भी काम करने का प्रोत्साहन मिलेगा और मिल-जुलकर काम करने से रिश्तों में अधिक मधुरता आएगी.

–    पति के साथ जब किसी पार्टी-फंक्शन में या लोगों के बीच हों, तो मैनर्स-एटीकेट्स का ध्यान रखें. अधिक ज़ोर से हंसने-बोलने से बचें.

–    जब भी पार्टनर बात करे, तो उन्हें ध्यान से सुनें. उनकी बात को काटकर अपनी ही समस्याएं न बताने लगें.

–    अधिक शॉपिंग या फ़िज़ूलख़र्ची से बचें. इससे समय व पैसों की बर्बादी होती है.

–    जब वे थके हों और नींद में हों, तो उनसे कोई भी महत्वपूर्ण या विवादित मुद्दे पर विचार-विमर्श न करें. सही समय पर चर्चा करें.

–    पति के अधिकारों का सम्मान करें.

अंततः सभी बातों का निचोड़ इतना भर है कि प्यार-विश्‍वास और केयरिंग नेचर द्वारा जहां आप अपने पति के दिल के क़रीब रहेंगी, वहीं हमेशा उनकी स्वीटहार्ट भी बनी रहेंगी.

– ऊषा गुप्ता

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पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

Pahla Affair

पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

पहले प्यार (First Love) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

कई बार दिल के डूबने का अंदाज़ भी निराला होता है कि हम परेशानी की वजह ढूंढ़ने में लंबा अरसा लगा देते हैं. आदेश का ख़त हाथ में है और मैं माज़ी के समंदर में गोते लगा रही हूं. पूरे तीन साल तक जिसके नाम की अंगूठी पहने रही, आज हाथ की उंगली पर उसके निशां उसकी बेवफ़ाई की दास्तां कह रहे हैं.

अब तो हाथ की लकीरें भी मुझे मुंह चिढ़ा रही हैं. धीरे-धीरे रंगीन ख़्वाबों की डोर हाथों से छूटने लगी… अब तो आदेश के साथ बंधे रिश्तों में गांठें-सी पड़ गई हैं. ख़त क्या है, सफ़ाई का एक छोटा-सा मज़मून. मैं आवेश में आ ख़त को मुट्ठी में मरोड़ने लगती हूं. बेबस परिंदे से पन्ने, मेरे हाथों में फड़फड़ा रहे हैं. एक झटके में अपने से यूं रिहा करना, मेरे भीतर एक ज्वालामुखी धधक रहा है.

मन में एक युद्ध छिड़ा है. अरे! तेरे पापा इतने भी नासमझ न थे कि दो दिलों की धड़कन न सुन पाएं. बोलो, विजातीय होने से क्या प्यार की पौध नहीं पनपती. सवालों का बवंडर है, जो मेरा चैन छीन रहा है. अतीत से चाहे जितना भागो, लेकिन माज़ी का भूत पीछा कब छोड़ता है. परछाईं-सा संग-संग डोलता है. उसके हर ख़त का इंतज़ार, हर आहट पर चौंक जाना मेरी आदत-सी बन गई. कहीं और गुल सजाना था, तो इस अभागन की पलकों पर सपनों का फरेबी जाल क्यों बिछाया?

अब लग रहा है जैसे आदी शब्दों की भेड़चाल से सभ्यता का दायरा पार कर, मुझसे किनारे का कोई सिरा ढूंढ़ रहा हो. आज मेरे मन को छूकर निकले वो पल रेत से खिसक रहे हैं.

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मैंने फोन पर आदी से मिलने की आख़िरी इल्तिजा की. मैं उसके चेहरे के बदलते रंगों का जायज़ा लेना चाहती थी. साथ ही मन के किसी कोने में भय का भूत कुंडली मारे बैठा था. अगले दिन बाग में हम दोनों मिले. वह हाथ में भुट्टा लेकर मस्त चाल से मेरी ओर मुड़ा. मैं रुंधे गले से केवल इतना कह पाई, “आदेश! ज़रा सोचो, मुझे मझधार में छोड़ तुम किसी का हाथ थाम नई ज़िंदगी बसा लोगे… मेरा क्या…?”

मेरी आवाज़ भर्रा गई. उसके कांधे पर सिर रखकर मैं सिसक पड़ी. मेरी पीठ थपथपाते हुए उसने कहा, “कुछ करता हूं जूही, प्लीज़ रो मत.”
मैं उदास मन से घर लौटी. मां पूछती रह गई. मैं सोचती रही कि निराधार पुरातन संस्कारों तले दबे रहकर अपने प्यार की आहूति क्यों दी जाए?

मेरे घर उसका अक्सर आना-जाना था. मेरे घर में सब राज़ी थे. मेरे पिता तो थे नहीं, मां बेहद कोमल स्वभाव की थीं. मां अक्सर उसका मनपसंद खाना बनाकर उसे चाव से खिलाती थीं, पर सुना था उसके पिता ज़िद्दी स्वभाव के थे.

एक रोज़ चाचा की मौत की ख़बर सुनकर अचानक हमारा गांव जाना हुआ. वापस लौटे, तो ख़त मिला. उसका विवाह हो चुका था. उसके पिता की चाल थी या उसकी भी सहमति… पता नहीं! पर मेरा पहला प्यार अधूरा ही रह गया…

काश! उस पहले प्यार के नक्शे अपने मन की किताब से मिटा पाती… अब मैं हूं, तन्हाई है… वही परछाईं बन मेरे संग-संग डोलती है.

– मीरा हिंगोरानी

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रिश्तों को आजकल हुआ क्या है? (What Is Wrong With Relationship These Days?)

जिस्मों के रिश्ते हैं, आज की रूहों की यही हक़ीक़तें हैं… जज़्बात ग़ायब हैं, एहसास गुमसुम-से… हसरतें बेहिसाब हैं… वासनाओं पर मर्यादाओं का पहरा अब नहीं है, साथ जीने-मरने की क़समों का इरादा अब नहीं है… ख़ालिस मुहब्बत अब बंधन-सी लगती है, बेपनाह चाहत अब बेड़ियां बन गई हैं… अपने तरी़के से जीने का शग़ल, है हर कोई अपनी ही धुन में मगन… एक-दूसरे के साथ रहता तो है तन, पर न जाने कहां भटका हुआ है यह मन…

Relationships

–     इसे मॉडर्न होने की परिभाषा कहें या प्रैक्टिकल सोच, लेकिन सच है कि रिश्तों में अब वो पहले वाली गहराई नहीं रही.

–     ऐसा नहीं है कि लोग जुड़ते नहीं हैं, लेकिन ये जुड़ाव अब क्षणिक होता है.

–     रिश्तों में अब एडजेस्टमेंट करने की जगह न के बराबर बची है, क्योंकि दोनों पार्टनर्स में से किसी को भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करना है.

–     शादी के रिश्ते में एक साथ होते हुए भी अलग-अलग हैं.

–     आज दोनों पार्टनर्स वर्किंग होते हैं, ज़ाहिर है लाइफस्टाइल इतनी बदल गई है कि रिश्तों में भी बदलाव आ गया है. लेकिन ये बदलाव इस कदर हावी हो रहा है कि हम ख़ुद भी सोचते हैं कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

–     डबल इन्कम नो किड्स से लेकर अब नौबत डबल इन्कम नो सेक्स तक पहुंच चुकी है. सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     जो बची-खुची एनर्जी है, वो सोशल मीडिया पर ज़ाया हो रही है.

–     डिनर के टेबल पर सब अपने मोबाइल फोन्स के साथ बैठते हैं. कहने को साथ खाना खा रहे हैं, पर कनेक्टेड कहीं और ही रहते हैं… बच्चे पिक्चर्स क्लिक करके फ्रेंड्स के साथ शेयर करते हैं और बड़े अपने-अपने क्रश या दोस्तों के साथ.

–     पति-पत्नी बेड पर अपने-अपने फोन्स के साथ ही होते हैं… दोनों को परवाह नहीं कि कौन, किससे बात कर रहा है, न ही इस बात की फ़िक्र है कि आपस में इतनी देर से कोई बातचीत उनके बीच नहीं हो रही.

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Relationship Problems

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

नो कमिटमेंट: लोग आकर्षित तो होते हैं, प्यार भी करते हैं, पर कमिटमेंट से डरते हैं. आजकल इतनी जल्दी रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं कि लोग ख़ुद भी यह तय नहीं कर पाते हैं कि इस रिश्ते में उन्हें कब तक रहना है. उन्हें लगता है, जब तक चल रहा है, चलने देते हैं, कोई और मिल गया, तो वहां चले जाएंगे, क्योंकि कौन-सा हमको शादी करनी है. यही वजह है कि रिश्ते नॉन सीरियस होते जा रहे हैं.

कैल्कुलेटिव हो रहे हैं: आजकल रिश्ते ज़रूरी नहीं, बल्कि ज़रूरत के रिश्ते रह गए हैं, जिनसे हमारा स्वार्थ सिद्ध हो, वो उस समय के लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण होते हैं. मतलब निकलने के बाद एक-दूसरे को पहचानते भी नहीं.

प्रैक्टिकल अप्रोच: हम अब प्रैक्टिकल हो गए हैं. हमारे अनुभव भी हमें यही सीख देते हैं कि इमोशनल होना स़िर्फ बेव़कूफ़ी है. बेहतर है, जितना प्रैक्टिकल रहें, उतना फ़ायदा होगा. शहरों में वर्क लाइफ के बाद स़िर्फ वीकेंड में अपने लिए समय मिलता है. उसमें हम अपनों के साथ समय बिताने की बजाय उन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, जिनसे हमें कोई न कोई फ़ायदा हो.

स्पेस के नाम पर बढ़ती दूरियां: ‘स्पेस…’ आजकल यह शब्द काफ़ी घर कर गया है हमारे रिश्तों में भी. हर किसी को स्पेस चाहिए यानी रिश्ते में बंधने के बाद भी कोई बंधन न हो. यह अजीब सोच है, क्योंकि प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे से कुछ छिपाने की ज़रूरत ही नहीं होनी चाहिए. जब सब कुछ साझा है, तो छिपाना क्या है और क्यों है? पर अक्सर कपल्स को कहते सुना है कि हमें स्पेस चाहिए, वरना रिश्ते में दम घुटने लगता है. हां, यह सही है कि कोई सिर पर सवार न रहे हमेशा, न ही हर बात पर टोके, पर स्पेस के नाम पर हर बात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता.

सेक्स, आज नहीं: काम का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि सेक्स के लिए एनर्जी ही नहीं बचती. यहां तक कि अब तो सेक्स की इच्छा भी नहीं होती. ऑफिस में अधिकतर समय गुज़ारने के चलते कलीग्स से इतनी नज़दीकियां बढ़ जाती हैं कि पार्टनर से ज़्यादा आकर्षण उनमें नज़र आने लगता है. ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे से दूरी बनाने लगते हैं. सेक्स के लिए कोई एक क़रीब आना भी चाहे, तो दूसरा बहाना बना देता है कि आज नहीं, बहुत थकान है या सुबह जल्दी उठना है… आदि.

डिजिटल रिश्ते रियल रिश्तों पर हावी: सोशल साइट्स के रिश्ते अब ज़्यादा भाने लगे हैं. उनमें अजीब-सा आकर्षण होता है. टेक्स्ट मैसेजेस, चैटिंग की लत ऐसी लग जाती है कि रियल रिश्ते बोझ लगने लगते हैं और डिजिटल वर्ल्ड की रंगीन दुनिया हसीन लगने लगती है. लेकिन यह कुछ समय का ही नशा होता है, क्योंकि ये रिश्ते हमें ठगते ज़्यादा हैं और संबल कम देते हैं.

कम्यूनिकेशन की कमी: आसपास होते हुए भी आपस में बातचीत का न तो समय है, न ही इच्छा. अपनी-अपनी दुनिया में सभी व्यस्त हैं. एक-दूसरे के सुख-दुख को जानने-समझने की फुर्सत ही नहीं रह गई. धीरे-धीरे रिश्तों में ख़ामोशी पसर जाती है और न जाने कब

एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं. हर रिश्ते की मज़बूती के लिए बेहद ज़रूरी है आपसी बातचीत यानी कम्यूनिकेशन, पर उसकी कमी के चलते रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं और जब तक एहसास होता है, तब तक देर हो चुकी होती है.

– योगिनी भारद्वाज

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सेक्सुअल परफॉर्मेंस बढ़ाने के 10 मैजिक ट्रिक्स (10 Magic Tricks For Best Sexual Performance)

सेक्स लाइफ (Sex Life) शादीशुदा ज़िंदगी की नींव होती है. आपकी सेक्स लाइफ जितनी बेहतर होगी, मैरिड लाइफ उतनी ही ख़ुशगवार और दिलचस्प होगी. पर अक्सर छोटी-छोटी ग़लतियां या छोटी बातों को अनदेखा कर आप पअनी सेक्स लाइफ को ख़ुद बोरिंग बना लेते हैं, लेकिन अगर आप अपनी सेक्स लाइफ को लेकर जागरूक हैं, तो यह आपकी मैरिड लाइफ में मैजिक की तरह काम करेगी. यहां हम आपको सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बढ़ाने (Increase Sexual Performance) के 10 मैजिक ट्रिक्स (Tricks) बता रहे हैं, तो आप भी अपनाएं ये मैजिक ट्रिक्स और अपनी सेक्स लाइफ को इंट्रेस्टिंग बनाएं.

 Best Sexual Performance

1. फोरप्ले पर फोकस करें: ज़्यादातर कपल्स यहीं मार खा जाते हैं. इसमें भी पुरुषों का बड़ा अहम् रोल होता है, क्योंकि महिलाओं को न स़िर्फ मूड में लाने के लिए, बल्कि एक अच्छी शुरुआत के लिए भी फोरप्ले बहुत ज़रूरी है. बेड पर जाने पर थोड़ी देर प्यारभरी छुअन, किसिंग और थोड़ी नॉटी बातें आप दोनों की सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बेस्ट बना देगी.

2. सेक्स बूस्टर फूड्स और वेजीटेबल्स: लहसुन-प्याज़ बेस्ट सेक्स बूस्टर्स माने जाते हैं, इसलिए इन्हें अपने रोज़ाना के खाने में शामिल करें. इसके अलावा केला और तरबूज़ शरीर में ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं, जिससे आपका सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर होता है. ये फल व सब्ज़ियां आपकी सेहत के लिए जितने फ़ायदेमंद हैं, उतनी ही आपकी सेक्स लाइफ के लिए भी.

3. एक्टिव रहें: रोज़ाना 30 मिनट की कार्डियोवैस्कुलर एकसरसाइज़ आपके दिल के साथ-साथ आपकी सेक्स लाइफ को भी बूस्ट करने में बदद करती है. अगर रोज़ाना मुमकिन नहीं, तो हफ़्ते में कम से कम 5 दिन रनिंग या स्विमिंग करें. याद रखें, आप जितने ज़्यादा एक्टिव रहेंगे, आपकी सेक्सुअल परफॉर्मेंस पर उसका उतना ही अच्छा प्रभाव पड़ेगा.

4. हेल्दी फैट्स अपनाएं: ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर ऑलिव ऑयल, एवोकैडो, साल्मन फिश को अपनी डायट में शामिल करें. इसके अलावा अंडा विटामिन बी के गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर में हार्मोंस के लेवल को सुचारू बनाए रखता है. ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर में रक्तसंचार को बेहतर बनाता है, जो सेक्सुअल परफॉर्मेंस को बूस्ट करने में आपकी मदद करता है.

5. पुरुषों के लिए स्टार्ट-स्टॉप टेकनीक: सेक्स के दौरान पुरुषों को कुछ स्मार्ट टेकनीक्स अपनानी चाहिए. आपको स्टार्ट-स्टॉप टेकनीक अपनानी चाहिए, इसलिए आप अपने प्लेज़र टाइम को बढ़ा सकते हैं.

6. कुछ नया ट्राई करें: सेक्स को रूटीन न बनाएं. हर दिन इसे एक नए नज़रिए और एक्सपीरियंस से देखें. पोज़िशन्स में कुछ नया ट्राई कर सकते हैं. कुछ रोमांटिक करें, कभी-कभार फिल्मी हो जाने में कोई हर्ज़ नहीं.

7. पार्टनर को पैंपर करें: संभोग का मतलब ही होता है कि दोनों पार्टनर उसे समान रूप से भोगें. दोनों को ही उतना प्लेज़र मिलना चाहिए, इस बात का ख़्याल दोनों ही पार्टनर्स को रखना चाहिए. इसके लिए आप पार्टनर को पैंपर ज़रूर करें. पैंपरिंग सभी को अच्छी लगती है. उनकी तारीफ़ करें, कोई सरप्राइज़ गिफ्ट दें, उनकी पसंद को तवज्जो दें. यकीन मानिए आपकी सेक्स लाइफ में बड़ा बदलाव नज़र आएगा. ये मैजिक ट्रिक हमेशा काम करता है.

8. खुलकर बातें करें: हर पार्टनर यह उम्मीद करता है कि उसका पार्टनर उससे कुछ न छिपाए. अपने दिल की सारी बातें उससे शेयर करें. ये सुनने में जितना आसान लगता है, उतना शायद है नहीं, क्योंकि हर व्यक्ति किसी न किसी मनोस्थिति से गुज़रता रहता है, ऐसे में अपने मन की गांठें खोलना सभी के लिए आसान नहीं. पर सेक्स एक्सपर्ट की मानें, तो यह ट्रिक न स़िर्फ आपकी मैरिड लाइफ को मज़बूत बनाएगा, बल्कि आप दोनों की बॉन्डिंग इतनी स्ट्रॉन्ग हो जाएगी कि सेक्स लाइफ अच्छी होनी ही है.

9. स्ट्रेस को भगाओ: अगर अपनी सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले स्ट्रेस को दूर भगाएं. यह आपकी सेहत के साथ-साथ आपकी मैरिड लाइफ के लिए भी एक नुकसानदेह है. ख़ुद को ख़ुश रखने की कोशिश करें. इस बात को अपने दिमाग़ से निकाल दें कि पूरी दुनिया का बोझ आपके ही कंधों पर है. आपके स्ट्रेसफ्री रहने से कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा. इसलिए ख़ुद भी ख़ुश रहें और पार्टनर को भी ख़ुश रखें.

10. एक्सपर्ट एडवाइस लें: अगर आपको लगता है कि ये मैजिक ट्रिक्स भी आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर नहीं बना पा रही हैं, तो तुरंत किसी अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट से मिलें.

– अनीता सिंह

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शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

अगर आपकी नई-नई शादी (New Marriage) हुई है और अचानक से अपने बढ़े हुए वज़न (Increased Weight) को लेकर आपके मन में कई सवाल उठे हैं और आप परेशान हैं, तो परेशान न हों. आपके सभी सवालों के जवाब यहां आपको मिलेंगे कि आख़िर शादी के बाद आपका वज़न इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा है? द ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक शादी के 5 साल के भीतर 82% कपल्स का वज़न 5-10 किलो तक बढ़ जाता है. इसमें महिलाओं का वज़न पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है. लाइफस्टाइल में बदलाव के अलावा और क्या हैं कारण?

Weight Gain After Marriage

1. खानपान की आदतों में बदलाव

आपके मायके और ससुराल के खानपान में अंतर है. मसाले और पकाने की टेक्नीक दोनों जगह अलग है, जिसके कारण आपकी पाचनक्रिया पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा मायके खाने के बाद टहलना, मॉर्निंग वॉक जैसी चीज़ें आपके रूटीन में शामिल थीं, जो यहां नहीं हैं.

2. अक्सर बाहर खाना

शादी के बाद से ही दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां खाने का सिलसिला जो शुरू होता है, वो कई हफ़्तों तक जारी रहता है. इस बीच हनीमून पर आप बेरोक-टोक हर तरह के खाने को एंजॉय करते हैं, जिससे ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं.

3. प्राथमिकताएं बदल जाती हैं

शादी के बाद आप पति और ससुरालवालों की पसंद से खाना बनाती हैं और इंप्रेस करने के चक्कर में ख़ूब घी, तेल, मसाला इस्तेमाल करती हैं. इतनी मेहनत से बनाया खाना ख़राब न हो, इस चक्कर में ओवरईटिंग भी कर लेती हैं. समय के साथ बदली ये प्राथमिकताएं आपका वज़न बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

4. लापरवाह हो जाती हैं

शादी के दिन स्टनिंग दिखने के लिए खाने-पीने पर ध्यान रखना, एक्सरसाइज़ करना, स्ट्रेस न लेना जैसी चीज़ें शादी के बाद लगभग पूरी तरह बदल जाती हैं. न चाहते हुए भी स्ट्रेस आ ही जाता है और बाकी कामों के चलते एक्सरसाइज़ का व़क्त नहीं मिलता. खाने का समय बदल जाता है और कहीं न कहीं यह सोच घर कर जाती है कि अब तो शादी हो गई, अब क्या फ़र्क़ पड़ता है.

5. नींद की कमी

शादी के बाद सोने का समय और पैटर्न दोनों ही बदल जाते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती. नींद की कमी भी वज़न बढ़ने का एक कारण है.

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After Marriage

6. पार्टनर का पैंपर करना

शादी के बाद सभी कपल्स एक-दूसरे पर अपना प्यार न्योछावर करने और ख़ुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते. एक-दूसरे को पैंपर करने के लिए केक, पेस्ट्रीज़, चॉकलेट्स, पिज़्ज़ा, पास्ता जैसी सरप्राइज़ ट्रीट देते रहते हैं. कैलोरीज़ से भरपूर ये फैटी चीज़ें वज़न बढ़ाती हैं.

7. स्ट्रेस ईटिंग करना

शादी के बाद नए माहौल में ढलना थोड़ा मुश्किल होता है, ऐसे में अगर दुल्हन वर्किंग है, तो उसकी ज़िम्मेदारियां और भी बढ़ जाती है. ऑफिस के साथ-साथ घर पर भी अपना बेस्ट देने की कोशिश में हमेशा स्ट्रेस में रहती हैं और स्ट्रेस ईटिंग की शिकार हो जाती है.

8. हार्मोनल बदलाव

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण तेज़ी से वज़न बढ़ता है. इसके अलावा सेक्सुअल एक्टिविटीज़ के कारण होनेवाले हार्मोनल बदलाव भी इसका कारण बनते हैं. हांलाकि कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं, पर वज़न बढ़ाने में हार्मोंस का अहम् रोल होता है, यह सभी मानते हैं.

9. मेटाबॉलिक बदलाव

आजकल ज़्यादातर कपल्स 28-30 साल की उम्र में शादी करते हैं. इस समय शरीर के मेटाबॉलिक रेट में बदलाव आता है, जिससे वज़न पहले के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है.

10. प्रेग्नेंसी

बहुत-सी महिलाएं शादी के बाद ही कंसीव कर लेती हैं, जिससे परिवारवाले उसे पैंपर करने के लिए ओवर न्यूट्रीशियस चीज़ें खिलाते हैं, जिसे  डिलीवरी के बाद भी वो कम नहीं कर पातीं.

वेट कंट्रोल के लिए क्या करें?

– घर में हर कोई खाना खा ले, उसके बाद मैं खाऊंगी वाला एटीट्यूट बदलें. नियमित समय पर खाना खाएं. ओवरईटिंग से बचें.

– अपने लुक्स के प्रति लापरवाह न हों.

– स्ट्रेस ईटिंग से बचने के लिए ख़ुद को ख़ुश रखें.

– एक-दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने के लिए योगा क्लासेस या जिम जॉइन करें.

– अनीता सिंह     

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पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

Pahla Affair

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

क्यों इस तरह अधूरा छोड़कर चले गए तुम मुझे… मुकम्मल होने को बेक़रार था इस बार मेरा तन-मन, तुम्हारे साथ, तुम्हारी उस छुअन की वो सिहरन… तुम्हारा यूं लगातार मुझे देखते रहना… अपने हाथों से मुझे खाना खिलाना… इतना सारा व़क्त हमने एक साथ गुज़ारा… फिर ये कैसी प्यास जगाकर मुझे तन्हा छोड़ दिया… जानती थी कि तुमको तो लौटना जाना है एक दिन अपने लोगों के बीच… अपनों में… पर मेरा क्या… मुझे अपना बनाकर क्यों बेगानों में यूं छोड़ गए?

तुमने तो कहा था कि इस बार जब मैं आऊंगा, तो तुमको अपने साथ ही लेकर जाऊंगा… फिर क्यों इस तरह बिना हमारी ज़िंदगी का फैसला किए तुम चले गए… कितने दिन बीत गए, न तुमने कोई फोन किया, न तुम्हारी कोई ख़बर आई…

मुझे लगने लगा है अब तो जैसे ये रिश्ता, ये प्यार बस एक फरेब था… तुम्हें जो चाहिए था, वो तुमने पा लिया… अब पीछे मुड़कर देखने के लिए क्या बचा था तुम्हारे लिए… अगर मेरी परवाह होती, तो ज़रूर हमारे प्यार का सिलसिला आगे बढ़ता…

मेरी ज़िंदगी तो रुकी हुई है अब भी उसी मोड़ पर, बस किसी तरह धक्का मारकर चला रही हूं… पर अब जो सच सबके सामने आएगा, उसका सामना मैं कैसे करूंगी… मैं प्रेग्नेंट हो गई हूं… और मेरे बच्चे को कौन अपनाएगा? यही सोच-सोचकर परेशान हूं… स़िर्फ रितिका को इस सच के बारे में पता है…

“हैलो, प्रिया… कैसी हो…?”

“रितिका, मैं कैसी हो सकती हूं तुम ही बताओ… मैं कुछ डिसाइड ही नहीं कर पा रही.”

“तुम इस बच्चे को जन्म देने के बारे में सोच भी कैसे सकती हो, जो इंसान तुमको मंझधार में छोड़कर चला गया, तुम उसके बच्चे को दुनिया में लाने के लिए सबसे दुश्मनी ले लोगी?”

“ये बच्चा स़िर्फ उसका ही नहीं, मेरा भी है… पर शायद तुम सच कह रही हो, बस, कल तक मैं कोई न कोई निर्णय ले लूंगी.”

आज ऑफिस में भी मन नहीं लग रहा… डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लेती हूं, भला मैं उस धोखेबाज़ इंसान के लिए अपनी ज़िंदगी दांव पर क्यों लगाऊं…

“प्रिया… सुनो, हैलो… प्रिया शर्मा!”

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अपना नाम सुनकर मैं चौंक गई, पीछे मुड़कर देखा, तो ये क्या… “विक्रम, तुम आज अचानक यूं? मैं तो समझी थी कि तुम अब तक भूल चुके होगे कि प्रिया नाम की भी कोई लड़की थी तुम्हारी ज़िंदगी में…”

“प्रिया, मुझे पता है, तुम मुझे फरेबी, धोखेबाज़ और न जाने क्या-क्या समझ रही होगी… पर मेरी मजबूरी थी…”

“ऐसी क्या मजबूरी थी विक्रम कि तुम एक फोन या एक मैसेज तक नहीं कर पाए?”

“प्रिया, हम किसी कॉफी शॉप में बैठकर बात करें?”

“बात करने के लिए अब बचा ही क्या है… मुझे डॉक्टर के पास जाना है, जो कहना है, यहीं कहो…”

“ठीक है प्रिया, दरअसल मैं जिस कंपनी में जॉब करता था, वहां बहुत बड़ा फ्रॉड हुआ था, जिन्होंने फ्रॉड किया था, उन्होंने मुझे बुरी तरह फंसा दिया था, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले ही उनकी शिकायत कंपनी के ओनर से की थी. मैं छुट्टी पर था, तो उन्होंने मौक़ा देखकर मुझे ही फंसा दिया और पुलिस में शिकायत तक दर्ज करवा दी.

मेरे घर वापस जाते ही पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार कर लिया और मैं इन सबके बीच तुमसे कोई संपर्क न कर सका…
मेरे दोस्तों ने सच्चाई का पता लगाया और पुलिस की जांच के बाद सारा सच सामने आ गया. मैं अगर मुजरिम हूं, तो बस तुम्हारा… और अब तुम्हारा ये मुजरिम तुम्हारे सामने है, जो सज़ा दोगी, मैं सहने को तैयार हूं.”

मेरी आंखों से आंसू बह निकले… कभी-कभी छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियां बड़े-बड़े रिश्ते तोड़ देती हैं…

“प्रिया, क्या सोच रही हो… और तुम डॉक्टर के पास क्यों जा रही हो? सब ठीक तो है न…?”

“विक्रम, आज तुम अगर नहीं आते, तो मुझसे बहुत बड़ा पाप हो जाता… क्या हम कॉफी शॉप पर चलकर बात करें…”

विक्रम और मैंने कॉफी शॉप में ढेर सारी बातें कीं…

“प्रिया, मैं पापा बननेवाला हूं, इससे बड़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है? चलो, आज ही घरवालों से चलकर बात करते हैं… मेरे घर में सभी तैयार हैं, मैं तुम्हारी लिए ही यहां आया था.”

“विक्रम, अगर तुम सही व़क्त पर न आते, तो मैं ख़ुद को कभी माफ़ नहीं कर पाती…”

“अब तो मैं आ गया न… तुम्हारा मुजरिम… तो जो हो सकता था वो मत सोचो, अब जो ख़ुशियां आनेवाली हैं हमारी ज़िंदगी में उनका स्वागत करो…”

– गीता शर्मा

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भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

Domestic Violence
भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

बेटी होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन हमारी सामाजिक सोच ने इसे भी किसी अपराध से कम नहीं बना रखा है… बेटियों को हर बात पर हिदायतें दी जाती हैं, हर पल उसे एहसास करवाया जाता है कि ये जो भी तुम पहन रही हो, खा रही हो, हंस रही हो, बोल रही हो… सब मेहरबानी है हमारी… घरों में इसी सोच के साथ उसका पालन-पोषण होता है कि एक दिन शादी हो जाएगी और ज़िम्मेदारी ख़त्म… ससुराल में यही जताया जाता है कि इज़्ज़त तभी मिलेगी, जब पैसा लाओगी या हमारे इशारों पर नाचोगी… इन सबके बीच एक औरत पिसती है, घुटती है और दम भी तोड़ देती है… भारत के घरेलू हिंसा व उससे जुड़े मृत्यु के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं…

वो कहते हैं तुम आज़ाद हो… तुम्हें बोलने की, मुस्कुराने की थोड़ी छूट दे दी है हमने… वो कहते हैं अब तो तुम ख़ुश हो न… तुम्हें आज सखियों के संग बाहर जाने की इजाज़त दे दी है… वो कहते हैं अपनी आज़ादी का नाजायज़ फ़ायदा मत उठाओ… कॉलेज से सीधे घर आ जाओ… वो कहते हैं शर्म औरत का गहना है, ज़ोर से मत हंसो… नज़रें झुकाकर चलो… वो कहते हैं तुमको पराये घर जाना है… जब चली जाओगी, तब वहां कर लेना अपनी मनमानी… ये कहते हैं, मां-बाप ने कुछ सिखाया नहीं, बस मुफ़्त में पल्ले बांध दिया… ये कहते हैं, इतना अनमोल लड़का था और एक दमड़ी इसके बाप ने नहीं दी… ये कहते हैं, यहां रहना है, तो सब कुछ सहना होगा, वरना अपने घर जा… वो कहते हैं, सब कुछ सहकर वहीं रहना होगा, वापस मत आ… ये कहते हैं पैसे ला या फिर मार खा… वो कहते हैं, अपना घर बसा, समाज में नाक मत कटा… और फिर एक दिन… मैं मौन हो गई… सबकी इज़्ज़त बच गई…!

 

घरेलू हिंसा और भारत…
  • भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस व प्रताड़ना के बाद महिलाओं की मृत्यु की लगभग 40% अधिक आशंका रहती है, बजाय अमेरिका जैसे विकसित देश के… यह ख़तरनाक आंकड़ा एक सर्वे का है.
  • वॉशिंगटन में हुए इस सर्वे का ट्रॉमा डाटा बताता है कि भारत में महिलाओं को चोट लगने के तीन प्रमुख कारण हैं- गिरना, ट्रैफिक एक्सिडेंट्स और डोमेस्टिक वॉयलेंस.
  • 60% भारतीय पुरुष यह मानते हैं कि वो अपनी पत्नियों को प्रताड़ित करते हैं.
  • हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों में भारत अब पहले स्थान पर पहुंच चुका है. हालांकि इस सर्वे और इसका सैंपल साइज़ विवादों के घेरे में है और अधिकांश भारतीय यह मानते हैं कि यह सही नहीं है…
  • 2011 में भी एक सर्वे हुआ था, जिसमें यूनाइटेड नेशन्स के सदस्य देशों को शामिल किया गया था, उसमें पहले स्थान पर अफगानिस्तान, दूसरे पर कांगो, तीसरे पर पाकिस्तान था और भारत चौथे स्थान पर था.
  • भारतीय सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि 2007 से लेकर 2016 के बीच महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में 83% इज़ाफ़ा हुआ है.
  • हालांकि हम यहां बात घरेलू हिंसा की कर रहे हैं, लेकिन ये तमाम आंकड़े समाज की सोच और माइंड सेट को दर्शाते हैं.
  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़, प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट के पास होने के बाद से (2005) अब तक लगभग दस लाख से अधिक केसेस फाइल किए गए, जिनमें पति की क्रूरता और दहेज मुख्य कारण हैं.
मानसिकता है मुख्य वजह
  • हमारे समाज में पति को परमेश्‍वर मानने की सीख आज भी अधिकांश परिवारों में दी जाती है.
  • पति और उसकी लंबी उम्र से जुड़े तमाम व्रत-उपवास को इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि यदि किसी घर में पत्नी इसे न करे, तो यही समझा जाता है कि उसे अपने पति की फ़िक़्र नहीं.
  • इतनी तकलीफ़ सहकर वो घर और दफ़्तर का रोज़मर्रा का काम भी करती हैं और घर आकर पति के आने का इंतज़ार भी करती हैं. उसकी पूजा करने के बाद ही पानी पीती हैं.
  • यहां कहीं भी यह नहीं सिखाया जाता कि शादी से पहले भी और शादी के बाद भी स्त्री-पुरुष का बराबरी का दर्जा है. दोनों का सम्मान ज़रूरी है.
  • किसी भी पुरुष को शायद ही आज तक घरों में यह सीख व शिक्षा दी जाती हो कि आपको हर महिला का सम्मान करना है और शादी से पहले कभी किसी भी दूल्हे को यह नहीं कहा जाता कि अपनी पत्नी का सम्मान करना.
  • ऐसा इसलिए होता है कि दोनों को समान नहीं समझा जाता. ख़ुद महिलाएं भी ऐसा ही सोचती हैं.
  • व्रत-उपवासवाले दिन वो दिनभर भूखी-प्यासी रहकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस करती हैं कि अब उनके पति की उम्र लंबी हो जाएगी.
  • इसे हमारी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यह लिंग भेद का बहुत ही क्रूर स्वरूप है.

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Domestic Violence

कहीं न कहीं लिंग भेद से ही उपजती हैं ये समस्याएं…
  • महिलाओं के ख़िलाफ़ जितने भी अत्याचार होते हैं, चाहे दहेजप्रथा हो, भ्रूण हत्या हो, बलात्कार हो या घरेलू हिंसा… इनकी जड़ लिंग भेद ही है.
  • बेटा-बेटी समान नहीं हैं, यह सोच हमारे ख़ून में रच-बस चुकी है. इतनी अधिक कि जब पति अपनी पत्नी पर हाथ उठाता है, तो उसको यही कहा जाता है कि पति-पत्नी में इस तरह की अनबन सामान्य बात है.
  • यदि कोई स्त्री पलटवार करती है, तो उसे इतनी जल्दी समर्थन नहीं मिलता. उसे हिदायतें ही दी जाती हैं कि अपनी शादी को ख़तरे में न डाले.
  • शादी को ही एक स्त्री के जीवन का सबसे अंतिम लक्ष्य माना जाता है. शादी टूट गई, तो जैसे ज़िंदगी में कुछ बचेगा ही नहीं.
शादी एक सामान्य सामाजिक प्रक्रिया मात्र है…
  • यह सोच अब तक नहीं पनपी है कि शादी को हम सामान्य तरी़के से ले पाएं.
  • जिस तरह ज़िंदगी के अन्य निर्णयों में हमसे भूल हो सकती है, तो शादी में क्यों नहीं?
  • अगर ग़लत इंसान से शादी हो गई है और आपको यह बात समय रहते पता चल गई है, तो झिझक किस बात की?
  • अपने इस एक ग़लत निर्णय का बोझ उम्रभर ढोने से बेहतर है ग़लती को सुधार लिया जाए.
  • पैरेंट्स को भी चाहिए कि अगर शादी में बेटी घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है या दहेज के लिए प्रताड़ित की जा रही है, तो जल्दी ही निर्णय लें, वरना बेटी से ही हाथ धोना पड़ेगा.
  • यही नहीं, यदि शादी के समय भी इस बात का आभास हो रहा हो कि आगे चलकर दहेज के लिए बेटी को परेशान किया जा सकता है, तो बारात लौटाने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए.
  • ग़लत लोगों में, ग़लत रिश्ते में बंधने से बेहतर है बिना रिश्ते के रहना. इतना साहस हर बेटी कर सके, यह पैरेंट्स को ही उन्हें सिखाना होगा.
सिर्फ प्रशासन व सरकार से ही अपेक्षा क्यों?
  • हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम हर समस्या का समाधान सरकार से ही चाहते हैं.
  • अगर घर के बाहर कचरा है, तो सरकार ज़िम्मेदार, अगर घर में राशन कम है, तो भी सरकार ज़िम्मेदार है…
  • जिन समस्याओं के लिए हमारी परवरिश, हमारी मानसिकता व सामाजिक परिवेश ज़िम्मेदार हैं. उनके लिए हमें ही प्रयास करने होंगे. ऐसे में हर बात को क़ानून, प्रशासन व सरकार की ज़िम्मेदारी बताकर अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेना जायज़ नहीं है.
  • हम अपने घरों में किस तरह से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, हम अपने अधिकारों व स्वाभिमान के लिए किस तरह से लड़ते हैं… ये तमाम बातें बच्चे देखते व सीखते हैं.
  • बेटियों को शादी के लिए तैयार करने व घरेलू काम में परफेक्ट करने के अलावा आर्थिक रूप से भी मज़बूत करने पर ज़ोर दें, ताकि वो अपने हित में फैसले ले सकें.
  • अक्सर लड़कियां आर्थिक आत्मनिर्भरता न होने की वजह से ही नाकाम शादियों में बनी रहती हैं. पति की मार व प्रताड़ना सहती रहती हैं. बेहतर होगा कि हम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं और बेटों को सही बात सिखाएं.
  • पत्नी किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है, सास-ससुर को भी यह समझना चाहिए कि अगर बेटा घरेलू हिंसा कर रहा है, तो बहू का साथ दें.
  • पर अक्सर दहेज की चाह में सास-ससुर ख़ुद उस हिंसा में शामिल हो जाते हैं, पर वो भूल जाते हैं कि उनकी बेटी भी दूसरे घर जाए और उसके साथ ऐसा व्यवहार हो, तो क्या वो बर्दाश्त करेंगे?
  • ख़ैर, किताबी बातों से कुछ नहीं होगा, जब तक कि समाज की सोच नहीं बदलेगी और समाज हमसे ही बनता है, तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी.
बेटों को दें शिक्षा…
  • अब वो समय आ चुका है, जब बेटों को हिदायतें और शिक्षा देनी ज़रूरी है.
  • पत्नी का अलग वजूद होता है, वो भी उतनी ही इंसान है, जितनी आप… तो किस हक से उस पर हाथ उठाते हैं?
  • शादी आपको पत्नी को पीटने का लायसेंस नहीं देती.
  • अगर सम्मान कर नहीं सकते, तो सम्मान की चाह क्यों?
  • शादी से पहले हर पैरेंट्स को अपने बेटों को ये बातें सिखानी चाहिए, लेकिन पैरेंट्स तो तभी सिखाएंगे, जब वो ख़ुद इस बात को समझेंगे व इससे सहमत होंगे.
  • पैरेंट्स की सोच ही नहीं बदलेगी, तो बच्चों की सोच किस तरह विकसित होगी?
  • हालांकि कुछ हद तक बदलाव ज़रूर आया, लेकिन आदर्श स्थिति बनने में अभी लंबा समय है, तब तक बेहतर होगा बेटियों को सक्षम बनाएं और बेटों को बेहतर इंसान बनाएं.

– गीता शर्मा

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रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

कहते हैं ‘शब्दों के दांत नहीं होते हैं, लेकिन शब्द जब काटते हैं, तो दर्द बहुत होता है.’ कुछ ऐसी ही कैफ़ियत होती है उनके साथ, जिनके रिश्तेदार कभी अनजाने में, तो कभी जानबूझकर ऐसी बातें या सवाल पूछ बैठते हैं, जो अक्सर उन्हें चुभ जाती हैं या असहज बना देती हैं. इसलिए ज़रूरी है कि रिश्तेदारों से बात करते व़क्त हम कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि बातें बुरी नहीं, बल्कि अच्छी लगें और रिश्ते भी मधुर रहें.

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं इसलिए उन्हें बहुत ही प्यार व सावधानी के साथ संभालकर रखते हैं, क्योंकि रिश्तों में पड़ी छोटी-सी दरार भी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकती है. अक्सर रिश्तेदारों के बारे में सबकुछ जानने की उत्सुकता में लोग ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो आमतौर पर नहीं पूछनी चाहिए. हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, जिसे हर किसी को याद रखनी चाहिए और ऐसी बातें अवॉइड करनी चाहिए, ताकि आपके रिश्ते न प्रभावित हों और न ही दूसरों को दुख पहुंचे.

1. बेटी की शादी की बात

अगर किसी के घर में शादी के लायक बेटी हो, तो मां-बाप को बेटी की शादी कब कर रहे हैं? कब तक घर में बिठाकर रखेंगें, जैसी बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं. भले ही आप यह सवाल अपने होने के अधिकार से पूछते हैं, पर कहीं न कहीं यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगती, क्योंकि जितनी फ़िक़्र आपको है, उससे कहीं ज़्यादा वो इस बात के फ़िक़्रमंद होंगे, क्योंकि वो उनकी बेटी है. आजकल लड़कियों का अपने पैरों पर खड़े होना बहुत ज़रूरी हो गया है, जिसे सभी मां-बाप समझते हैं और यही वजह है कि उन्हें जल्दी शादी के लिए बाध्य भी नहीं करते. इसलिए इस विषय को न छेड़ना ही ज़्यादा अच्छा होगा.

2. गुड न्यूज़ की बात 

शादी को सालभर हुए नहीं कि रिश्तेदार ख़ुश ख़बरी की बात करने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब सुना रहे हैं? यह सवाल आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. जहां एक ओर प्रेग्नेंसी किसी भी व्यक्ति का बहुत ही निजी मामला होता है, जिसकी प्लानिंग का अधिकार पति-पत्नी को है, वहीं दूसरी ओर बदलते समय और लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. हो सकता है, शादी के बाद भी कंसीव न कर पाने के कारण कपल पहले से ही परेशान हो और ऐसे में रिश्तेदारों का बार-बार इस विषय में पूछना उन्हें और परेशान करता हो. एक शुभचिंतक होने के नाते अपने रिश्तेदारों से इस विषय पर ज़्यादा सवाल कभी न करें.

3. फैमिली इन्कम की बातें

घर में कौन कितना कमाता है? यह रिश्तेदारों के लिए हमेशा ही कौतुहल का विषय होता है. दरअसल, सैलरी की जानकारी से वो फैमिली इन्कम का अंदाज़ा लगाते हैं, ताकि दूसरे रिश्तेदारों से तुलना कर सकें. बेटों-बेटी की इन्कम में लोगों को ज़्यादा दिलचस्पी रहती है, ताकि अपने बच्चों से तुलना करके जान सकें कि किसके बच्चे ज़्यादा सफल हैं, ताकि सबके सामने शो ऑफ का एक और मौक़ा मिल सके. हर किसी के फाइनेंशियल हालात दूसरों से अलग होते हैं, ऐसे में ज़्यादातर लोग फैमिली इन्कम के बारे में डिस्कस करना उचित नहीं समझते. इसलिए समझदारी ऐसे विषयों को न छेड़ने में ही है.

4. बेटे की नौकरी की बात

आपके बेटे की नौकरी कहीं लगी कि अभी भी घर पर ही है? ये सवाल उन रिश्तेदारों से अक्सर पूछे जाते हैं, जिनके बच्चे स्ट्रगल कर रहे होते हैं. हर मां-बाप की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे जो भी करें, उसमें उन्हें कामयाबी मिले. अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता, इसलिए ऐसी चुभनेवाली बातें हमेशा अवॉइड करें. अगर आप सचमुच में फ़िक़्रमंद हैं, तो अपनी बात को सही तरी़के से पूछें.

5. रोमांटिक या पर्सनल लाइफ की बातें

पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेदकर पूछना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. ख़ुद को उनका ज़्यादा क़रीबी जताने के चक्कर में रिश्तेदार अक्सर ऐसे सवाल
पूछ बैठते हैं, जिन्हें प्राइवेसी में दख़लंदाज़ी माना जाता है. रोमांस पति-पत्नी के बीच का बहुत ही निजी मामला है. ऐसे सवाल पूछकर आप अपनी इमेज ख़ुद ख़राब करते हैं, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना कोई पसंद नहीं करता. नतीजतन लोग आपसे कतराने लगते हैं. अगर आप नहीं चाहते कि लोग आपके साथ भी ऐसा व्यवहार हो, तो अपने रिश्ते की अहमियत बनाए रखें और ऐसी बातों से हमेशा बचें.

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Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives
6. बहू के मायकेवालों की बातें

हमारा समाज भले ही कितना भी मॉडर्न क्यों न हो जाए, पर बहुओं के लिए लोगों की सोच अभी भी पुरानी ही है. उसके मायकेवालों के बारे में जानना ज़्यादातर रिश्तेदारों का प्रिय शगल होता है. उन्हें हमेशा इस बात की फ़िक़्र लगी रहती है कि बहू  की बहन की शादी हुई या नहीं, उसका भाई काम पर लगा या नहीं और उससे भी ज़्यादा त्योहार या शादी-ब्याह के मौक़ों पर बहू के मायके से कितना सामान आया. तोहफ़ों का लेन-देन हो या फिर अपनों के बारे में तीखी बातें सुनना, किसी भी बहू को पसंद नहीं आता. हर लड़की चाहती है कि ससुराल के लोग उसके परिवार का सम्मान करें और उन्हें भी वही इज़्ज़त मिले, जो दूसरों को मिलती है. एक लड़की के लिए उसका परिवार उसका सम्मान होता है, ऐसे में उन पर तीखे सवाल उसके सम्मान को चोट पहुंचाते हैं, जो आजकल की आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बहुएं बर्दाश्त नहीं करती और यही वजह है कि रिश्तों में मनमुटाव बढ़ने लगता है. ऐसे में रिश्तों को बचाना आपके अपने हाथ में है.

7. प्रॉपर्टी के बंटवारे की बातें

जितनी दिलचस्पी रिश्तेदारों की फैमिली इन्कम में होती है, उतनी ही प्रॉपर्टी के बंटवारे में भी होती है. प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?, किसको क्या देने की सोच रहे हैं?, वसीयत बनाई या नहीं? जैसी बातें लोग केवल परिवार या बेहद क़रीबी लोगों से ही शेयर करते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राइवेट होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग गोपनीय रखना पसंद करते हैं. इसलिए उनकी गोपनियता में कभी सेंध न लगाएं. अगर वो आपको इस लायक समझेंगे, तो ख़ुद ही सारी बातें शेयर करेंगे. पर अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आप ख़ुद से ऐसे निजी मामलों को न कुरेदें. सभी रिश्तेदारों को अपने रिश्तों की सीमा पता होनी चाहिए और यह भी कि किससे क्या पूछना है और क्या नहीं.

8. पुराने हादसों की बातें

रिश्तेदारों से बातचीत करते व़क्त ज़्यादातर लोग औपचारिकता का ध्यान ही नहीं रखते और अक्सर कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग भूलने में ही भलाई समझते हैं. जाने-अनजाने किसी पुराने हादसे या ज़ख़्मों को कुरेदना अच्छी बात नहीं. ऐसी बातों से सभी को बचना चाहिए.

9. दूसरी शादी हो, तो पहली शादी की बातें

हर कोई चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन ख़ुशहाल हो, पर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. अक्सर हादसे ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं और इंसान को अपनी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देना पड़ता है. ऐसे में दोबारा नई गृहस्थी की शुरुआत करनेवालों से कभी भी उनकी पिछली शादी के बारे में नहीं पूछना चाहिए. तुम्हारी पहली शादी क्यों टूटी? जैसे सवाल करके किसी की दुखती रग पर हाथ न रखें.

रिश्तों में लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी है

साइकोलॉजिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी के अनुसार, “दूसरों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की उत्सुकता हर इंसान में होती है. हमारे समाज में बड़े-बुज़ुर्ग छोटों से निजी से निजी सवाल पूछना अपना हक़ समझते हैं और साथ ही यह भी जताने की कोशिश करते हैं कि हमें तुम्हारी कितनी परवाह है. दरअसल, वो ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आस-पास वही देखा है और बचपन से वही सीख पाई है, जबकि आज ज़माना बदल रहा है. नई पीढ़ी कुछ मामलों में दख़लंदाज़ी पसंद नहीं करती है और वो कहीं न कहीं सही भी है, क्योंकि कुछ मामले इतने निजी होते हैं कि उनके बारे में दूसरों द्वारा बार-बार टोका जाना किसी को भी पसंद नहीं होता. इसलिए बदलते ज़माने के साथ आज हमें अपनों की
प्राइवेसी का भी सम्मान करना चाहिए और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी हो गया है. हालांकि अभी भी 1-2% लोग ही हैं, जो सेंसिटिव होते हैं और जिन्हें ऐसी बातें बुरी लगती है, वरना 98% तो मानकर ही चलते हैं कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएंगे और वो इसके लिए तैयार रहते हैं. पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्हें ऐसी बातें बुरी नहीं लगती, पर वो उनसे निपटना सीख जाते हैं.”

जहां ज़्यादातर लोग कौतुहलवश ऐसे सवाल करते हैं, वहीं कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो केवल अपनी महत्ता दिखाने के लिए, दूसरों पर दबाव बनाए रखने व कंट्रोल करने की भावना से ऐसा करते हैं. इसलिए बातों से बढ़कर ये बातें कभी-कभी तानों और कटाक्ष में तब्दील हो जाती हैं. ऐसे लोगों के साथ आपको डील करना सीखना होगा. उनकी बातों पर कभी भी न ग़ुस्सा करें, न अपना मूड ख़राब करें और न ही दुखी हों, क्योंकि यह उनकाव्यक्तित्व है, जिसे आप बदल नहीं सकते. ऐसे सवाल ज़्यादातर महिलाओं से ही पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हें सॉफ्ट टारगेट माना जाता है और जो बातें महिलाओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, वो बच्चों व तलाक़ से जुड़ी होती हैं. इसलिए महिलाएं अपने आप को मना लें कि ऐसा तो होना ही है. ख़ुद को मानसिक तौर पर हमेशा तैयार रखें, ताकि ये बातें न आपको प्रभावित करें, न ही आपके रिश्ते को.

– सुनीता सिंह

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रिश्ते में बर्दाश्त न करें ये 10 बातें (10 Things Never Adjust In A Relationship)

Relationship Goals
रिश्ते में बर्दाश्त न करें ये 10 बातें (10 Things Never Adjust In A Relationship)
माना रिश्ते का मतलब ही होता है एक-दूसरे के साथ एडजेस्ट करना और कुछ बातों को बर्दाश्त भी करना. अपनों से प्यार बनाए रखने के लिए भी यह ज़रूरी है. लेकिन कभी-कभार बात स्वाभिमान की आ जाती है और एक हद से बाहर चली जाती है, तो कुछ बातें हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं करने में ही समझदारी है, वरना पार्टनर आपको कैज़ुअली लेने लगेगा और आपका सम्मान भी नहीं करेगा. कौन-सी हैं ये बातें, आपके लिए जानना ज़रूरी है.

1. एब्यूज़

यह ज़रूरी नहीं कि एब्यूज़ यानी शोषण स़िर्फ शारीरिक ही होता है. यह कई स्तर पर हो सकता है, मौखिक, भावनात्मक, मानसिक, आर्थिक आदि. यदि आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में आपका शोषण हो रहा है, पार्टनर या कोई भी आपको भावनात्मक स्तर पर सपोर्ट नहीं कर रहा, मानसिक यातनाएं दी जा रही हैं, बेवजह गाली-गलौज की जा रही है या आर्थिक स्तर पर परेशान किया जा रहा है, तो बर्दाश्त करने से बेहतर होगा बात करें. अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएं और सामनेवाले को समझाएं कि वो जाने-अंजाने ग़लत कर रहा है.

2. वॉयलेंस

डोमेस्टिक वॉयलेंस वैसे भी अपराध है, फिर भी महिलाएं रिश्ते को बचाए रखने के लिए इसे बर्दाश्त करती हैं. लोगों से इसे छिपाती भी हैं, लेकिन एक स्तर पर जाकर यह सामनेवाली की आदत हो जाती है कि हर छोटी-बड़ी बात पर वो आप पर हाथ उठाना अपना हक़ समझने लगता है. बेहतर होगा देर होने से पहले सतर्क और सजग हो जाएं. हिंसा की किसी भी रिश्ते में कोई जगह नहीं है. यही बात पुरुषों पर भी लागू होती है, क्योंकि कई पुरुष भी रिश्ते में हिंसा व प्रताड़ना के शिकार होते हैं, उन्हें भी यह डर लगता है कि समाज उनकी बात पर भरोसा नहीं करेगा, लेकिन बेहतर होगा आप भी अपने हक़ के लिए लड़ें और ग़लत बातों को बर्दाश्त न करें.

3. डिसरिस्पेक्ट

आपसे उम्मीद की जाती है कि आप अपने पार्टनर को इज़्ज़त दें, लेकिन बदले में आपको सम्मान व समान दर्जा नहीं मिलता, तो तकलीफ़ होना लाज़िमी है. हो सकता है, अंजाने में ऐसा हो रहा हो, तो सही रास्ता यही है कि अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें, ताकि वो आपके पक्ष को समझ सके और आपको कैज़ुअली न ले. लोगों व रिश्तेदारों के सामने उल्टा-सीधा न कहे. आपको सम्मान व समान दर्जा दे.

4. ग़ैरज़िम्मेदारी

भले ही यह छोटी-सी बात लग रही हो, लेकिन इसके परिणाम रिश्ते के लिए भी गंभीर हो सकते हैं. यदि एक पार्टनर भी ग़ैरज़िम्मेदार है, तो इसकी सज़ा पूरे परिवार को भुगतनी पड़ती है. ग़ैरज़िम्मेदाराना व्यवहार हर जगह तकलीफ़ देता है और दूसरों का वर्कलोड भी बढ़ा देता है. धीरे-धीरे दूसरे पार्टनर को इस व्यवहार से खीझ होने लगती है और रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं. कोशिश करें अपने पार्टनर को समझाने की. बेहतर होगा काम व ज़िम्मेदारियां बांट लें, ताकि वो टाल न सके. बीच-बीच में ड्यूटीज़ बदल लें, जिससे बोरियत भी न हो.

5. इग्नोरेंस

आपकी बातों को तवज्जो न देना, महत्वपूर्ण निर्णयों में आपकी राय ही न लेना, आपके कुछ भी कहने पर बात को इग्नोर कर देना या यह कह देना कि तुमको क्या पता इस बारे में… यदि आप यह शुरू से ही बर्दाश्त करते आ रहे हैं, तो संभल जाइए, क्योंकि आगे चलकर आपको अपना अस्तित्व ही रिश्ते में महत्वहीन लगने लगेगा. आपको पार्टनर से बात करनी होगी कि आप इग्नोर्ड फील करते/करती हैं. न स़िर्फ बातें, बल्कि आपकी प्रेज़ेंस को भी यदि इग्नोर किया जाता है, आपको समय नहीं दिया जाता, आपके सुख-दुख के बारे में जानने की कोई ज़रूरत नहीं समझता, तो बर्दाश्त करने की बजाय बात करें.

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Relationship

6. ज़बर्दस्ती

यह ज़बर्दस्ती किसी भी मामले में हो सकती है और अगर यह सेक्स में है, तब तो आपको और भी सतर्क हो जाना चाहिए. रिश्ते में दोनों की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान बेहद ज़रूरी है. यदि आप अपने पार्टनर का सम्मान करते हैं, तो पार्टनर से भी उम्मीद करते होंगे, वो भी उतना ही सम्मान आपको दे. लेकिन जब ऐसा नहीं होता और एक ही पार्टनर हमेशा अपनी इच्छाएं थोपता चला जाता है, तो यह ज़बर्दस्ती घुटन पैदा करती है. घुटने से बेहतर है कम्यूनिकेट करें.

7. अननेचुरल सेक्स

सेक्स हर शादी का अहम् अंग होता है, लेकिन कुछ पुरुष अपने पार्टनर पर अननेचुरल सेक्स के लिए दबाव डालते हैं. दरअसल, वो पोर्न फिल्मों को अपना आदर्श मानते हैं और अपने पार्टनर से उसी तरह के प्रदर्शन की चाह रखते हैं. भारत में एनल सेक्स और ओरल सेक्स ग़ैरक़ानूनी है और अगर आपका पार्टनर कंफर्टेबल नहीं है, तो उस पर दबाव न डालना ही बेहतर होगा. सेक्स में दोनों का सहज रहना ज़रूरी है. यदि कोई समस्या है, तो विशेषज्ञ की राय ली जा सकती है, आप काउंसलर के पास भी जाकर अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के तरी़के जान सकते हैं.

8. इमोशनल ब्लैक मेलिंग

कई महिलाओं की आदत होती है कि वो अपनी बात मनवाने के लिए इमोशनल ब्लैक मेलिंग का सहारा लेती हैं. वो या तो बच्चों को हथियार बनाती हैं या फिर सेक्स के समय पति पर दबाव डालती हैं. पति न माने, तो सेक्स से मना कर देती हैं. इस तरह की बातें आपको थोड़े समय के लिए भले ही फ़ायदा पहुंचाती हों, पर आगे चलकर आपके रिश्ते को कमज़ोर बनाती हैं.

9. दूसरों की दख़लअंदाज़ी

अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने पार्टनर पर भरोसा न करके कई बार दूसरों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं. उनसे सलाह-मशविरा लेते हैं और अपने सीक्रेट्स और पर्सनल बातें भी उनसे शेयर कर लेते हैं. जबकि कई बार दूसरे भी बेवजह अपनी राय देने चले आते हैं. बेहतर होगा कि अपनी निजी बातों को निजी ही रहने दिया जाए. दूसरों का हस्तक्षेप कई बार परिस्थितियों को और भी जटिल कर देता है. अगर कोई समस्या है या आपसी मतभेद है, तो ख़ुद ही आगे बढ़कर पार्टनर से बात करें, न कि किसी अन्य व्यक्ति के पास अपनी समस्या लेकर जाएं.

10. बेईमानी/एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर/शक

रिश्ते का दूसरा नाम ही लॉयल्टी है. ऐसे में बेईमानी बर्दाश्त कैसे की जा सकती है. हां, कभी कोई भूल हो जाए या इंसान भटक जाए, तो माफ़ कर देना ही एकमात्र रास्ता होता है, लेकिन यदि कोई आपके भरोसे का नाजायज़ फ़ायदा उठाता रहे और आप आंखें मूंद लें यह सोचकर कि रिश्ता टूट जाएगा, तो यह ख़ुद के साथ बेईमानी होगी. बेहतर होगा किसी निर्णय पर पहुंचे. बात करें, समस्या का हल निकालें, लेकिन ख़ुद को न ठगें. वरना पार्टनर आपको हल्के में लेगा. उसकी यह सोच बन जाएगी कि मैं चाहे जो भी करूं, उसे बर्दाश्त कर लिया जाएगा, क्योंकि मेरे बिना उसका गुज़ारा नहीं हो सकेगा. बेहतर होगा, पार्टनर के इस भ्रम को तोड़ें और ख़ुद को भी भ्रमित होने से रोकें. इसी तरह से शक्की पार्टनर के साथ रहना भी बेहद तकलीफ़देह होता है. हर बात पर शक, टोका-टाकी करना रिश्ते में चिड़चिड़ापन पैदा कर देता है. शक करने से बेहतर है कि अपने मन के वहम को बात करके दूर कर लें.

– विजयलक्ष्मी

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