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पहला अफेयर: आईना (Pahla Affair: Aaina)

Pahla Affair

पहला अफेयर: आईना (Pahla Affair: Aaina)

मेरा यह अंतर्मुखी व्यक्तित्व शायद मैंने अपनी मां से जन्मजात पाया है. बहुत कम बोलने तथा अपनी किताबों में खोये रहने का स्वभाव लिए कब मैंने जीवन के इक्कीस बसंत पार कर लिए, इसका एहसास शायद मुझे भी नहीं हो पाया. उन दिनों अपने स्थानीय यूनिवर्सिटी से रसायन शास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल करने के लिए मैंने दाख़िला लिया था.

मेरे अनुभवी गाइड ने पढ़ाई में मेरी रुचि देखकर मुझे कुछ समय के लिए बीएचयू, वाराणसी जाने की सलाह दी, जिससे मैं वहां की लाइब्रेरी में अपने विषय के अनुकूल नए शोध पत्रों को पढ़ सकूं. उनकी आज्ञा शिरोधार्य कर मैंने बीएचयू की लाइब्रेरी में अध्ययन करना प्रारंभ कर दिया. सब कुछ ठीक ही चल रहा था कि एक दिन मैंने एक सुशील से गौर वर्ण लड़के को मेरी सामनेवाली मेज़ पर अपनी किताबों में झुके हुए पाया. यह कोई आश्‍चर्य की बात नहीं थी, पर न जाने क्यों मुझे कुछ अजीब और अटपटा-सा लगा. मैंने उचककर उसकी किताबें देखी की कोशिश की, शायद डॉक्टर बनना था उसे, वह भी दांतों का. उसकी किताबें थीं मानव दांतों के आंतरिक अध्ययन विषय पर और उसे शायद बेचैनी की हद तक यह जानकारी चाहिए थी.

पता नहीं क्या और कैसे हुआ, लेकिन मैंने जब उसे पहली बार देखा, हृदय में कोई जल तरंग-सा बज उठा. मुझे अपनी किताबों के अक्षर जैसे दिखाई नहीं पड़ रहे थे. अब तो मैं बहाने से उसे ही देखती रहती. मेरे हृदय की गति पर जैसे मेरा नियंत्रण ही नहीं रह गया था. शाम को जब मैं वापस हॉस्टल लौटती, तो वहां कोई सखी-सहेली या परिचित तो मिलता नहीं, मैं कमरे में जाकर आईने के सामने खड़ी हो जाती और अपने आप से ही घंटों बातें किया करती. एक दिन मैं आईने से ही पूछ बैठी, ‘इतनी सुंदर तो हूं मैं, ये मुझे देखता क्यों नहीं…’ अगले दिन थोड़ा संवरकर जाती, परंतु वो पाषाण हृदय किताबों में ही घुसा रहता, मुझे देखता ही नहीं. ऐसा एक बार भी संभव नहीं हुआ कि हमारी नज़रें टकरा जाएं.

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धीरे-धीरे मेरा ध्यान अपनी किताबों में न होकर उसकी गतिविधियों में रहने लगा. नज़रें उसके चहेरे पर ही टिकी रहने लगीं और मुझे एहसास होता गया कि मैं उससे प्यार करने लगी हूं. मेरा संकोची, अंतर्मुखी मन मुझे मुंह खोलने नहीं देता और उस बेपरवाह को अपनी पढ़ाई के आगे शायद कोई दुनिया ही नहीं दिखाई देती.

और फिर एक दिन वह नहीं आया. आगे जब तक मैं बनारस की उस लाइब्रेरी में रही, वह नहीं आया. मैंने हिसाब लगाया, पूरे पांच दिन आया था वो और मुझे भटकाकर मीलों दूर न जाने किन ख़ुशबुओं के बगीचे में उड़ा ले गया था. मैं तितली की मानिंद उड़ती फिर रही थी, परंतु वह तो जा चुका था.

अथक प्रयासों से मैंने दोबारा अपनी पढ़ाई ब्रारंभ की, लेकिन मुझमें पहले जैसी एकाग्रता नहीं रही. वह चोर मुझसे मेरा ‘मैं’ ही चुरा ले गया था शायद. उसकी कोई पहचान मेरे पास नहीं थी. न नाम, न पता, सिवाय एक काग़ज़ के पन्ने के, जो उसकी मेज़ से उड़कर मेरी मेज़ के नीचे आ गया था. उस पन्ने पर उसने शायद मानव दांतों से संबंधित चित्र बनाने के लिए आड़ी-तिरछी लकीरें खींच रखी थीं. उसी काग़ज़ के पन्ने को मैंने संभालकर रख लिया था.

कैसा जादुई था यह प्यार का एहसास, जो पूर्णतया एक तरफ़ा तो था, लेकिन मुझे इतराना सिखा गया था और इसमें मेरा साक्षी बना था मेरे हॉस्टल के कमरे में लगा हुआ वह आदमक़द आईना. आज मैं दो बेटों की मां हूं और संतुष्ट भी हूं. सभी को मेरी पीएचडी की डिग्री और मेरे द्वारा किए गए हर एक कार्य पर गर्व है, लेकिन मेरी किताबों के बीच दांतों के चित्रवाला काग़ज़ का वह पन्ना आज भी छुपा बैठा है, जो तब बोल पड़ता है, जब-जब मैं आईना देखती हूं.

– डॉ. कमला कुलश्रेष्ठ

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बोरिंग सेक्स लाइफ में यूं लाएं नया रोमांच (Hot Sex Ideas To Spice Up Your Boring Sex Life)

शादी के शुरुआती साल बेहद हसीन होते हैं. पार्टनर एक-दूसरे को समझने के साथ-साथ एक-दूसरे की कंपनी, क़रीब होने का एहसास और प्यार-मुहब्बत को काफ़ी एंजॉय करते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि धीरे-धीरे ज़िम्मेदारियां बढ़ती हैं और एक्साइटमेंट की जगह रूटीन लाइफ कपल्स (Life Couple) की ज़िंदगी का हिस्सा हो जाती है. इसमें कहीं न कहीं सेक्स (Sex) भी रूटीन सा ही होने लगता है, जिसका असर आपसी रिश्तों (Relationships) पर पड़ने लगता है. बेहतर होगा कि आप अपनी सेक्स लाइफ (Sex Life) को बोरिंग (Boring) न होने दें, ताकि आपके रिश्ते में गर्माहट बनी रहे.

Hot Sex Ideas

  1. साथ बिताने के लिए अगर समय नहीं है, तो ज़ाहिर है भावनात्मक लगाव पर नकारात्मक प्रभाव होगा और बिना भावनात्मक लगाव के सेक्स भी बोरियत का ही एहसास कराएगा.

क्या करें: भले ही आप कितने भी बिज़ी हों, आपको एक-दूसरे के लिए समय निकालना ही होगा. वीकेंड पर बाइक राइड या लॉन्ग ड्राइव पर जाएं. आप बीच, वॉटर पार्क, मूवी या आसपास के गार्डन में भी जाकर कुछ समय एक-दूसरे के साथ बिता सकते हैं. आपस में बिताए इस समय का असर आपकी बेडरूम लाइफ पर काफ़ी सकारत्मक होगा.

2. कुछ साल साथ रहने के बाद सेक्स को लेकर एक्साइटमेंट कम हो जाता है और सेक्स लाइफ बेहद बोरिंग होने लगती है.

क्या करें: कुछ नया करें. बेडरूम में कैंडल्स जलाएं और रोमांटिक माहौल बनाएं. अपने पार्टनर से पूछें कि वो सेक्स में क्या नया चाहते हैं और ख़ुद भी अपनी चाहत के बारे में बताएं. सेक्सी आउटफिट पहनें और सेक्सी बातें करें. इससे नयापन आएगा.

3. अक्सर कपल्स बिज़ी रहते हैं और थक जाते हैं. यही थकान उनके रिश्तों और सेक्स लाइफ में भी नज़र आने लगती है.

क्या करें: अपने रिश्ते को सबसे अधिक अहमियत दें. अपनी प्रायोरिटी लिस्ट में अपने रिश्ते को टॉप पर रखेंगे, तो रिश्ते में थकान कभी नहीं आएगी. इसके अलावा यदि आप एक-दूसरे को अधिक महत्व देंगे और सपोर्ट करेंगे, तो बाकी चीज़ों व समस्याओं से बेहतर तरी़के से निपट सकेंगे. इससे तनाव और थकान दोनों ही नहीं होगी.

4. अक्सर कपल्स एक-दूसरे से कहने में झिझकते हैं कि वो सेक्स लाइफ में बदलाव चाहते हैं और कुछ नया करना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि कहीं पार्टनर बुरा न मान जाए और उसे यह न लगे कि वो उससे संतुष्ट नहीं.

क्या करें: बात करें, लेकिन बात करने का तरीक़ा ऐसा हो कि पार्टनर को बुरा भी न लगे. आप ये न कहें कि आप बोर हो गए/गई हैं, बल्कि यह कहें कि हमको कुछ अलग और न्यू ट्राई करना चाहिए. कम्यूनिकेशन बहुत ज़रूरी है और पॉज़िटिव कम्यूनिकेशन आपकी सेक्स लाइफ और बेहतर बनाता है.

5. रूटीन लाइफ के चलते छोटी-छोटी ख़ुशियों के महत्व को भी आप भूलने लगते हैं. एक-दूसरे को छूना, कॉम्प्लीमेंट देना, गिफ्ट देना, सरप्राइज़ देना आदि एकदम से रिश्ते में से ग़ायब ही हो जाता है.

क्या करें: इन बातों को कभी भी अपने रिश्ते से ग़ायब न होने दें. एक-दूसरे के लुक्स व फिटनेस को सराहें. प्यारभरी शरारतें, एक-दूसरे का छूना, गले लगना, किस करना… इस तरह की तमाम छोटी-छोटी बातें रिश्ते को ताज़ा रखती हैं. कभी एक छोटा-सा मैसेज, एक सरप्राइज़ गिफ्ट किस तरह से आपकी रूटीन लाइफ में ताज़गी भर देगा आप सोच भी नहीं सकता. इन सबका असर आपकी सेक्स लाइफ पर भी ज़रूर पड़ता है.

6. बहुत कोशिश के बाद भी साथ समय नहीं बिता पाते, तो ऐसे में रिश्ते में बासीपन और स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है, जो सेक्स लाइफ को बुरी तरह प्रभावित करता है.

क्या करें: कुछ रोचक व इनोवेटिव सोचें, जहां आप साथ में समय बिता सकें. एक साथ वर्कआउट करेें, जॉगिंग या वॉक के लिए जाएं. स्विमिंग क्लास या डांस क्लास जॉइन करें. ये बातें आपको एक-दूसरे के क़रीब लाएंगी. थोड़ा समय निकालकर एक-दूसरे को सेक्सी मसाज दें, इससे नयापन आएगा और आप दोनों फ्रेश फील करेंगे.

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– विजयलक्ष्मी

शादी मुबारक साइना और पी कश्यप! (Congratulations To Saina Nehwal And P Kashyap On Their Marriage)

Saina Nehwal And P Kashyap
शादी मुबारक साइना और पी कश्यप! (Congratulations To Saina Nehwal And P Kashyap On Their Marriage)

बैडमिंटन सुपरस्टार्स साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पी कश्यप (P Kashyap) बंध चुके हैं शादी (Wedding) के बंधन में. साइना ने सोशल मीडिया पर तस्वीर (Pictures) शेयर करके यह ख़ुशख़बरी अपने फैंस को दी. हमारी तरफ़ से दोनों को शुभकामनाएं!

दोनों काफ़ी समय से रिलेशनशिप में थे और बैडमिंटन की दुनिया में दोनों ने ही अपना ख़ास मुकाम हासिल किया है. सोशल मीडिया पर भी दोनों की साथ-साथ की कई तस्वीरें देखी जाती थीं और फैंस इसी इंतज़ार में थे कि कब दोनों मिस्टर एंड मिसेज़ कश्यप बनें.

सिंपल से आउटफिट्स में दोनों ही बेहद प्यारे और शालीन लग रहे थे.

शादी से पहले ज़रूरी है इन 17 बातों पर सहमति (17 Things Every Couple Must Talk About Before Getting Marriage)

हमारे समाज में शादी (Wedding) को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है, लेकिन शादी को लेकर ज़रूरी बातें, सतर्कता व रिश्तों (Relationships) की मज़बूती के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने की सीख को ज़रा भी महत्व नहीं दिया जाता, क्योंकि हम शादी का अर्थ शायद अब तक समझ ही नहीं पाए. पैरेंट्स को लगता है कि बस ‘किसी तरह’ बच्चों की शादी हो जाए… ये जो ‘किसी तरह’ वाली सोच है, यही समस्या की जड़ है. किसी तरह… जैसे-तैसे… ये तमाम भाव निपटानेवाले हैं, इनमें गंभीरता कहां है?

Things Couple Must Talk Before Getting Married

पैरेंट्स को लगता है कि बात पक्की हो गई है, तो अब शादी होने तक बच्चों को भी ऐसी किसी भी बात से बचना चाहिए, जिससे शादी में अड़चन आए. लेकिन आजकल लोगों की सोच बदल रही है और यह ज़रूरी भी है कि शादी जैसे रिश्ते की गंभीरता को समझकर उससे जुड़े हर पहलू पर विचार किया जाए. यही वजह है कि शादी से पहले ही कुछ बातों पर सहमति अनिवार्य है, ताकि रिश्ते में आगे चलकर समस्या न हो.

1. करियर

दोनों अपने करियर को लेकर क्या सोचते हैं, एक-दूसरे से किस तरह का सहयोग चाहते हैं, किस तरह से शादी के बाद करियर को आगे बढ़ाना है… इन बातों पर आपसी सलाह-मशविरा ज़रूरी है.

2. कंट्रासेप्शन

किस तरह का कंट्रासेप्शन यूज़ करना है, किसे यूज़ करना है, कब तक यूज़ करना है आदि बातें कपल्स पहले ही डिसाइड कर लें, वरना अनचाही प्रेग्नेंसी बहुत से प्लान्स चेंज करवा सकती है.

3. फैमिली प्लानिंग

जैसा कि हमने कहा कि एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी या अनचाहा गर्भ बहुत से अहम् फैसले बदलने को मजबूर कर सकता है, जिसमें करियर से लेकर फाइनेंशियल प्लानिंग तक शामिल है. तो बेहतर होगा कि बच्चा शादी के कितने समय बाद प्लान करना है, इस पर सहमति बना लें.

4. फाइनेंशियल प्लानिंग

आपके जॉइंट अकाउंट्स, इंडिपेंडेंट अकाउंट्स, आपकी सैलरी, सेविंग्स, घर के ख़र्च व ज़िम्मेदारियां किस तरह से पूरी करनी हैं, किसके हिस्से कौन-सी ड्यूटी आएगी, किसको कितना ख़र्च करने के लिए तैयार रहना होगा आदि बातों पर चर्चा करना बेहतर होगा, क्योंकि आगे चलकर यही बातें विवाद का कारण बनती हैं.

5. घर का काम

यदि आप दोनों वर्किंग हैं, तो घर का काम भी मिल-जुलकर करना ज़रूरी है. इससे एक ही व्यक्ति पर ज़्यादा बोझ नहीं पड़ता. इन पहलुओं पर भी चर्चा करें.

6. लड़की अपने मायके की ज़िम्मेदारियों पर बात करे

शादी के बाद भी अपने मायके को किस तरह से आप सपोर्ट करना चाहती हैं और यह कितना ज़रूरी है, यह बात पार्टनर को बताएं, ताकि बाद में कोई विवाद न हो. पार्टनर आपको कितना सहयोग देगा, इस पर भी बात करें.

7. लड़का भी घर की ज़िम्मेदारियों की बात साफ़-साफ़ करे

कोई लोन है या फ्यूचर में आपको लोन लेकर घर या कोई ऑफिस खोलना है, सगे-संबंधियों, भाई-बहनों, माता-पिता से जुड़ी तमाम ज़िम्मेदारियों के बारे में पार्टनर को पहले ही अवगत करा दें, ताकि वो मानसिक रूप से आपका साथ देने को तैयार रहे. ऐसा न हो कि वो फिल्मी सोच के साथ किसी अलग ही दुनिया का सपना संजोकर आए और यथार्थ के धरातल पर आकर उसकी आंखें खुलें.

8. मानसिक-शारीरिक समस्या या बीमारी

यदि आपको किसी तरह की कोई समस्या रही हो या इलाज चल रहा हो, तो इस बात को छिपाएं नहीं. किसी और से पता चलने से विश्‍वास टूट जाता है, बेहतर होगा आप ख़ुद खुलकर बता दें, ताकि आपका पार्टनर निर्णय ले सके कि उसको किस तरह आपका साथ देना है.

9. सेक्स

यह ज़रूरी नहीं कि शादी की पहली रात ही सेक्स किया जाए. आप दोनों कितने सहज हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है. अगर आपके मन में सेक्स को लेकर डर, शंका या संकोच जैसी बात है, तो आप दोनों काउंसलर के पास भी जा सकते हैं.

10. वर्जिनिटी

आपका पार्टनर इस पर क्या सोच रखता है. क्या वो भी इसी के इंतज़ार में है कि शादी की पहली रात सेक्स करने पर आपकी वर्जिनिटी का पता चल जाएगा… अगर उसकी सोच इस तरह की है, तो अलर्ट हो जाएं. आप बातों ही बातों में, किसी सहेली या किसी मूवी का उदाहरण देकर सामनेवाले की सोच को जांच-परख सकती हैं. यह बहुत ज़रूरी है, वरना ये बातें तलाक़ का कारण भी बन जाती हैं.

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 Perfect Partner
11. एक-दूसरे के विचार

यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों के विचार एक जैसे हों और यह संभव भी नहीं, क्योंकि हर इंसान की सोच अलग होती है, लेकिन क्या आप उसकी सोच के साथ निबाह सकते हैं? कहीं होनेवाला पार्टनर बहुत ज़्यादा ईगोइस्ट तो नहीं, कहीं बहुत ज़िद्दी तो नहीं, कहीं बहुत पिछड़े विचारों का तो नहीं, कहीं बहुत ख़र्चीला या बहुत कंजूस तो नहीं आदि बातों पर चर्चा ज़रूरी है.

12. आदतें

बेहतर होगा एक-दूसरे को इंप्रेस करने की बजाय अपनी रियल साइड दिखाएं, ताकि भ्रम की स्थिति न रहे. आप दोनों की आदतें, जैसे- ईटिंग हैबिट्स, हाइजीन से जुड़ी आदतें, पैसों से जुड़ी, सिगरेट-शराब, वर्किंग हैबिट्स कैसी हैं, यह भी ज़रूर पूछें.

13. शौक़

बाद में पता चला कि एक को मूवीज़ का बेहद शौक़ है, तो दूसरा किताबी कीड़ा निकला. एक को बाहर घूमने में मज़ा आता है, तो दूसरे को घर बैठकर टीवी देखने में… ये बातें पहले ही पता चल जाएं, तो एडजेस्ट करने में आसानी होती है. एक-दूसरे के लिए ख़ुद को बदलने का प्रयास भी किया जा सकता है, वरना ज़िंदगीभर ताने सुनते रहना पड़ेगा कि ये कहीं घुमाने नहीं लेकर जाते.

14. ज़िम्मेदार

होनेवाला पार्टनर कितना ज़िम्मेदार है, कितना गंभीर है किसी भी बात या रिश्ते को लेकर. इस पर भी बात करनी ज़रूरी है. लापरवाही भरा रवैया हर रिश्ते में समस्या खड़ी करता है, चाहे यह लापरवाही लड़के की तरफ़ से हो या लड़की की तरफ़ से.

15. दहेज

लड़का या उसके परिवारवाले कुछ ज़्यादा तो एक्सपेक्ट नहीं कर रहे आपके घरवालों से? यह आप बातों ही बातों में पता कर सकती हैं. शादी के बाद क्या फाइनेंशियल प्लानिंग है, कहीं सामनेवाला करियर छोड़कर बिज़नेस की प्लानिंग तो नहीं कर रहा, कहीं किसी बड़ी गाड़ी या बाइक का सपना तो नहीं पाल रहा… आदि.

16. रेस्पेक्ट

एक-दूसरे को ही नहीं, एक-दूसरे की फैमिली को भी आप दोनों कितना सम्मान देंगे, किस तरह एक-दूसरे के परिवारों में किसी समस्या के समय साथ खड़े रहेंगे, एक-दूसरे के बुरे व़क्त में कितना साथ निभाएंगे, शादी स़िर्फ हसीन सपना ही नहीं, बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का नाम भी है. आप दोनों मानसिक व शारीरिक तौर पर कितने तैयार हैं इस ज़िम्मेदारी के लिए, इस पर ग़ौर करें.

17. बदलाव

शादी के बाद सब कुछ बदल जाता है. बैचलर लाइफ से मैरिड लाइफ में आना आसान नहीं है. आज़ादी कम हो जाती है, ज़िम्मेदारियां बदलती व बढ़ती हैं, लापरवाही छोड़कर गंभीर होना पड़ता है. ताने देने की बजाय त्याग करके साथ निभाना पड़ता है. अपने शौक़ हो सकता है बदलने पड़ जाएं, हो सकता है कई बार शौक़ पूरे भी न हो पाएं… तो क्या इन बदलावों को आप दोनों सहर्ष स्वीकार करेंगे? इन पहलुओं पर चर्चा व सलाह करना ज़रूरी है.

इन बातों पर चर्चा करते समय यह न सोचें कि कहीं सामनेवाले को बुरा न लग जाए या शादी टूट न जाए. ग़लत रिश्ते, ग़लत लोगों से रिश्ते या ग़लत जगह रिश्ते जुड़ने से बेहतर है थोड़ा और इंतज़ार कर लिया जाए.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत लम्हा (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Lamha)

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पहला अफेयर: एक ख़ूबसूरत लम्हा (Pahla Affair: Ek Khoobsurat Lamha)

एक बार व़क्त का सबसे ख़ूबसूरत लम्हा गिरा कहीं, उसे देखकर सारी कायनात उसकी दीवानी हो गई और उसके स्पर्श की चाह में सारी हवाओं का रुख़ बदल गया. गुलाब भी उसके होंठों को छूने के लिए तरसने लगे. उस बहार का नाम शैलजा था, लेकिन इस नाम से कभी किसी ने उसे नहीं पुकारा होगा… सभी उसे शैलू कहते थे. अपने इस निकनेम से वह बड़ी मासूम और अल्हड़ लगती थी.

हमारे कॉलेज में आज उसका पहला दिन था और एक बार उसे जिसने भी देखा, वह उसके रूप का दीवाना हो गया. उसे चाहनेवालों की संख्या मतदाता सूची की तरह लंबी थी. जब से शैलू मेरे जीवन में आई थी, मेरी ज़िंदगी का हर लम्हा ख़ुशगवार हो गया था.

साथ पढ़ते हुए अपने कॉलेज की पढ़ाई हमने पूरी कर ली, तो मुझसे लौटकर आने की बात कहकर वह दूसरे शहर अपने घर चली गई. लेकिन उसके बाद लौटकर नहीं आ सकी और मैं न जाने किस उम्मीद पर उसका इंतज़ार करता रहा. व़क्त गुज़रता चला गया, मैं उसे भुला तो न सका, पर ज़िंदगी में आगे ज़रूर बढ़ गया.

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लेकिन इधर कुछ दिनों से अचानक न जाने कितनी बार, कितने ब्लैंक कॉल्स आने लगे और कल रात मैंने उस एक कॉल पर अनायास ही तीन बार फिर से फोन लगाकर जानना चाहा कि यह किसका कॉल था. तीन बार में भी कोई आवाज़ नहीं आई, लेकिन चौथी बार उसकी आवाज़ सुनाई दी. न जाने अंतर्मन ने कैसे जान लिया था कि वह जो बात नहीं कर रहा, वह ज़रूर कोई मेरा अपना ही है और उसकी आवाज़ की कशिश को आज भी मैं नहीं भूल पाया था.

बीस साल पहले मैंने उसे खो दिया और आज इतने सालों बाद रात के दो बजे महज़ वो आवाज़ सुनकर उसके नाम से मैंने उसे पुकारा, तो ख़ुशी के मारे वो भावुक होती चली गई. फिर उसके शब्द भीगने लगे थे. मेरे लिए दुनिया का यह सबसे सुखद आश्‍चर्य था. जाने इन बीस सालों में वह ज़िंदगी के किन हालात से गुज़री होगी और जाने मेरा ये फोन नंबर उसने कहां से, किस तरह से लिया होगा.

और आज एक ही बार की लंबी बातचीत में हमने कॉलेज के अंतिम दिनों के एक-एक पल को न जाने कितनी बार जीया. हम दोनों को अब तक सब कुछ वैसा ही याद था, जैसा हम साथ चलते-चलते पीछे व़क्त की दहलीज़ पर छोड़ आए थे. उसके लहज़े में छिपा दर्द और उदासी मैंने महसूस कर ली थी. एक बेहद अंतरंग रिश्ते के पुनर्जीवित होने की ख़ुशी उसे मुझसे अधिक थी. लेकिन मैं अपनी सुखी ज़िंदगी में व्यस्त था. उसके जीवन के रेगिस्तान को एक क़तरा शबनम भी न दे सका. शायद उसे भी यह एहसास हो गया और वह मुझसे दूर, बहुत दूर चली गई और इस बार मैंने उसे हमेशा के लिए खो दिया था.

कहां मिलता है कोई दिल की गहराइयों से चाहनेवाला…
मेरे पास अब ज़िंदगीभर के लिए उसकी यादों के सिवा कुछ भी नहीं बचा. मैं उसे कभी भुला नहीं सकता था, उसे भुलाने में तो सदियां लग जाएंगी, पर उसकी यादें मेरे जीने का सहारा बनी रहेंगी… ताउम्र!

– तरुण राजवानी

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Relationship Expert: क्या करें जब रिश्ते में आ जाए चुप्पी? (How To Overcome Communication Gap In Your Relationship?)

आजकल हमारी ज़िन्दगी की तेज़ रफ़्तार में रिश्ते (Relationships) भी उलझने लगे हैं. उन्हें सुलझाने के लिए हम लाएं हैं रिलेशनशिप से जुड़े कुछ सवाल-जवाब. यकीन है इससे कुछ लोगों को अपनी रिलेशनशिप की उलझनों को सुलझाने का मौका मिलेगा.

Communication Gap In Relationships

मैं 25 साल की हूं. मेरे पति बहुत ही कम बात करते हैं. पहले मुझे लगता था कि वो शांत स्वभाव के हैं, तो अच्छा ही है, लेकिन अब अक्सर यह महसूस होता है कि रिलेशनशिप में इतनी भी चुप्पी अच्छी नहीं. न कभी कॉम्प्लीमेंट देते और न ही कोई शिकायत करते. क्या करूं कि हमारे बीच कम्यूनिकेशन और प्यार भरी बातें हों?
– विभा सकलानी, मुंबई.

सबसे पहले तो आपको यह जानना होगा कि आपके पति का यह मूल स्वभाव है या फिर वो सभी के साथ इसी तरह से कम बात करते हैं? यदि वो सबके साथ इसी तरह से बर्ताव करते हैं, तो ज़ाहिर है कि वो अंतर्मुखी स्वभाव के हैं और आपको उनके इस मूल स्वभाव को स्वीकारना होगा. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि पति या पत्नी भले ही दूसरों के साथ कम घुलते-मिलते हों, लेकिन जब वे एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल हो जाते हैं, तो आपस में काफ़ी बातचीत करते हैं. ऐसे में आपको ख़ुद प्रयास करना होगा कि वो आपके साथ सहज हो सकें और आप दोनों के बीच अच्छा कम्यूनिकेशन हो पाए. लेकिन यदि वो स़िर्फ आपसे कम बातचीत करते हैं और बाकी सबके साथ नॉर्मल हैं, तो सतर्क होने की ज़रूरत है. शायद कहीं न कहीं उनके मन में कोई बात है, जिसे आप अपने किसी क़रीबी की मदद से जानने का प्रयास कर सकती हैं और अपने पति के साथ बात करके समस्या का समाधान कर सकती हैं.

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Communication Gap Relationships

मैं 28 साल का हूं. शादी को 6 महीने ही हुए हैं. मेरी पत्नी ने मुझे शादी से पहले ही बताया था कि वो एक रिलेशनशिप में थी, उस व़क्त मैं उसकी ईमानदारी से काफ़ी इंप्रेस हुआ था, लेकिन मुझे लगता है कि कहीं न कहीं मेरे मन से वो बात निकल नहीं रही. मैं पूरी तरह से उसे स्वीकार नहीं पा रहा. जबकि वो हर तरह से अच्छी पत्नी का रोल निभा रही है, क्या करूं कि यह बात मन से निकल जाए?
– रितेश सिंह, पटना.

सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा कि आज के ज़माने में हम सभी इस तरह की रिलेशनशिप से गुज़रे होते हैं, ख़ासतौर से आपकी उम्र के युवा लोगों के लिए तो यह सामान्य सी बात है कि आप इस तरह की रिलेशनशिप गुज़रते हैं. ज़रूरी यह है कि आपका रिश्ता किसी झूठ पर नहीं टिका. आपकी पत्नी से आपको सच बताया और उनके लिए इस व़क्त जो ज़रूरी है, वो उस भूमिका को सही तरी़के से निभा रही हैं. ऐसे में आप बेवजह क्यों बीती बात को बेवजह तूल देकर परेशान हो रहे हैं? बेहतर होगा कि अपना दिल बड़ा करें और सोच खुली रखें. अपने रिश्ते को बिना किसी संदेह के स्वीकारें और अपने रिश्ते को एंजॉय करें.

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शादी के बाद निक और प्रियंका जोधपुर से रवाना, देखें पिक्स (Newlyweds Priyanka Chopra And Nick Jonas Left Jodhpur)

प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) और निक जोनस (Nick Jonas) शादी (Wedding) के बाद आज दोपहर जोधपुर से मुंबई के लिए रवाना हो गए. एयरपोर्ट पर इस न्यूली वेड कपल (Newlywed Couple) ने मीडिया का हाथ जोड़कर अभिवादन किया और साथ में पोज़ दिया. प्रियंका ने नई-नवेली दुल्हन की तरह मांग में सिंदूर, हाथों में चूड़ा और ग्रीन कलर की सब्यसाची साड़ी पहन रखी थी. जबकि निक ब्राउन कलर के आउटफिट में नज़र आए. प्रियंका ने लुक को मॉर्डन टच देने के लिए कैट आई सनग्लासेज़ पहन रखे हैं. आपको याद दिला दें कि शनिवार को प्रियंका और निक ने क्रिश्चियन रीति-रिवाज से शादी की थी और बाद में रविवार को हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए थे.  प्रियंका के इस पोस्ट वेडिंग लुक में जिस चीज़ ने सबसे ज़्यादा हमारा ध्यान आकर्षित किया, वो था उनका मंगलसूत्र. उन्होंने हार्ट शेप्ड डायमंड पेंडेंट को चेन में पहना था. आप भी देखिए प्रियंका और निक की नई तस्वीरें.

Priyanka Chopra And Nick Jonas

Priyanka Chopra And Nick Jonas

Priyanka Chopra And Nick Jonas

Priyanka And Nick Jonas

Priyanka And Nick

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पहला अफेयर: इंतज़ार (Pahla Affair: Intezar)

Pahla Affair Kahani

पहला अफेयर: इंतज़ार (Pahla Affair: Intezar)

मुहब्बत इंद्रधनुष की तरह कायनात के एक किनारे से दूसरे किनारे तक फैली हुई है और इसके दोनों सिरे दर्द के अथाह समंदर में डूबे हुए. लेकिन फिर भी जो इस दर्द को गले लगा लेता है, उसे इसी में सुकून मिलता है.

बस, मुझे भी इसका एहसास उस व़क्त हुआ, जब उसकी मासूम आंखें और मुस्कुराते होंठों को मैंने देखा. न जाने कैसी कशिश थी उसकी आंखों में कि डूबता ही चला गया और आज तक उबर ही नहीं पाया.

वैसे तो मैंने उसे कैफे में देखा था, तभी से खो सा गया था, पर आमने-सामने मुलाक़ात कॉलेज के बाइक स्टैंड पर हुई. “ऐ मिस्टर, तुम समझते क्या हो अपने आप को? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी दोस्त से बदतमीज़ी करने की और ये दादागिरी कहीं और जाकर दिखाना.”

मैं ख़ामोश सा बस उसे देखता ही जा रहा था और उसका चेहरा गुस्से में तमतमा रहा था. आंखें चमक रही थीं और माथे पर पसीने की बूंदें थीं. अचानक उसकी सहेली आई और कहने लगी, “ये तू क्या कर रही है, ये वो लड़का नहीं है.”

वो अवाक् सी देखने लगी और कहने लगी, “मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझे लगा कि…”

“कोई बात नहीं, अंजाने में ऐसा हो जाता है.” मेरी बात सुनकर वो तेज़ी से वहां से चली गई.

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लेकिन मैं बुत बनकर वहीं खड़ा रहा, जब तक कि मेरे दोस्तों ने आकर मुझे चौंकाया नहीं. फिर तो बस आते-जाते मुलाक़ातें होने लगीं. पहले-पहले वो सकुचाई सी नज़रें उठाती, फिर बाद में मुस्कुराने लगी. उसकी वो मुस्कुराहट मेरे दिल में उतर जाया करती थी. उसकी बोलती आंखें कई ख़्वाब जगाया करती थी. वो भी मुझे पसंद करने लगी थी, कम से कम मुझे तो यही लगने लगा था. हम क़रीब आने लगे थे.

एक दिन उसने कहा कि वो विदेश जा रही है, आगे की पढ़ाई के लिए. मैंने कुछ नहीं कहा. अगले दिन फिर उसने कहा. मैंने कहा कि ठीक है. वो कहने लगी, “कुछ कहोगे या पूछोगे नहीं?”

मैंने कहा, “तू मुझसे दूरी बढ़ाने का शौक पूरा कर, मेरी भी ज़िद है कि तुझे हर दुआ में मांगूंगा.” वो देखती ही रह गई.

पांच साल में शायद बहुत कुछ हो जाता है, लेकिन मेरा प्यार उसके प्रति बढ़ता ही चला गया… बस फिर वो लम्हा आ गया, जब वो सामने आई, लेकिन बदले हुए रूप में. उसके साथ उसका हमसफ़र था और उसके चेहरे की ख़ुशी देखकर मैं मुस्कुरा दिया. बिना किसी शिकवे-गिले के मैंने उसे विदा किया…

मेरा पहला प्यार अधूरा रह गया… बस उम्रभर का इंतज़ार दे गया… मैं अब भी उसके लिए ख़ुशियों की दुआ मांगता हूं, क्योंकि प्यार का अर्थ स्वार्थी होना नहीं है, प्यार का मतलब समर्पण और त्याग भी तो है.

– वीना साधवानी

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अब बेटे भी हो गए पराए (When People Abandon Their Old Parents)

दिल्ली के एक पॉश इलाके में रहनेवाली 79 वर्षीया कुंती देवी अपने एक रिश्तेदार से मिलने देहरादून गई थीं और वापस आने पर उन्हें पता चला कि उनके बेटों ने उनके घर पर कब्ज़ा कर लिया है. मरने से पहले उनके पति कुंती देवी के नाम पर वह घर कर गए थे और बाकी संपत्ति बेटों और उनमें बांट दी थी. बेटी ने अपना हिस्सा छोड़ दिया था, क्योंकि वह भाइयों से अपने संबंध ख़राब नहीं करना चाहती थी. उनकी बेटी उन्हें अपने साथ ले गई, क्योंकि भाइयों का भरोसा वह नहीं कर सकती थी. मां की देखभाल का ज़िम्मा उसने ले लिया है. कुंती देवी कहती हैं कि आजकल ज़माना बदल गया है. अब बेटी को चाहे विदा कर दो, पर वह फिर भी पराई नहीं होती है, जबकि बेटे तो मां-बाप को ऐसे नकार देते हैं, मानो बड़े होते ही उनसे सारे रिश्ते टूट गए हैं.

Abandon Old Parents

80 वर्षीया स्वर्णलता चंदा पिछले 7-8 सालों से एक ओल्ड एज होम में रह रही हैं. उनका बेटा ज़बर्दस्ती उन्हें वहां छोड़कर चला गया था, क्योंकि उसके फ्लैट में बूढ़ी मां को रखने की जगह नहीं थी. वह कहती हैं कि मुझे ऐसा लगता है कि मेरा बेटा मुझे इस बात की सज़ा दे रहा है कि मैंने उसे जन्म दिया. जब तक पति जीवित थे, बहुत अच्छी ज़िंदगी जी, लेकिन अब तो बेटे के लिए मैं केवल एक बोझ हूं. अपने बेटे को लायक बनाने में मैंने जितनी मेहनत की, उतनी बेटी के लिए की होती, तो कितना अच्छा होता. मेरी बेटी एक फोन करते ही दौड़ी चली आती है और जो हो सकता है करती है.

आज भी बेटे के जन्म पर ही मनाई जाती हैं ख़ुशियां

बेटे के जन्म लेते ही माता-पिता ही नहीं, परिवार के अन्य लोगों के चेहरे पर भी एक चमक आ जाती है. ख़ूब लाड़-प्यार के साथ उसके हर नख़रे को उठाते हुए उसे पाला जाता है. बेटा है, बस इसी ख़्याल से ख़ुश होते हुए माता-पिता उसके चेहरे पर हर समय मुस्कान देखने के लिए अपनी हर इच्छा को न्योछावर करने को तैयार रहते हैं. फिर वह बड़ा होता है, अपना करियर बनाता है, शादी करता है और अपने मां-बाप को छोड़कर चला जाता है. वजहें बहुत सारी होती हैं, लेकिन बेटे की नज़रों में वे सारी वजहें बहुत लॉजिकल होती हैं.

बेटियां तो पराई होती हैं, आज नहीं तो कल दूसरे घर चली जाएंगी, इसलिए जो कुछ है बेटा ही है, यह सोच युगों से कायम है. आश्‍चर्य तो इस बात का है कि इस ज़माने में जब लड़कियां शादी के बाद भी अपने मां-बाप की सेवा करती हैं और बेटों से ज़्यादा उनका ध्यान रखती हैं, फिर भी उन्हें पराया माना जाता है.

बनता जा रहा है ट्रेंड

– बेटों का मां-बाप को छोड़कर चले जाना एक ट्रेंड-सा बनता जा रहा है. एक व़क्त पर आकर बेटों को लगने लगता है कि अब अपने पैरेंट्स से उन्हें कोई फ़ायदा नहीं मिलनेवाला है. ऐसे में वे उन्हें उम्र के उस दौर में छोड़कर चले जाते हैं, जब पैरेंट्स को उनकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता होती है.

– पढ़ाई, नौकरी या फिर शादी के बाद अपनी एक दुनिया बनाने की चाह और भौतिकवादी ज़िंदगी की दौड़ में ख़ुद को शामिल करने की हसरत उन्हें अपने ही पैरेंट्स से दूर कर रही है.

– एक वृद्ध दंपत्ति से जोधपुर जाते हुए ट्रेन में मुलाक़ात हुई थी, उनसे बातचीत करते हुए पता चला कि वे अकेले ही शिमला में रहते हैं. चूंकि उनकी बहू को उनके साथ रहना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए बेटा उन्हें छोड़कर चला गया. रहता वह भी शिमला में ही है, पर कभी मिलने तक नहीं आता, क्योंकि उसकी बीवी को पसंद नहीं. उनका कहना था कि वे नहीं चाहते कि उनका बेटा उनकी वजह से अपनी गृहस्थी में परेशानी खड़ी करे, इसलिए उन्होंने यही सोच लिया कि उनकी एक नहीं दो बेटियां थीं और शादी के बाद वे दोनों विदा हो गईं.

– एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण बुज़ुर्ग लोग अपने बेटों के लिए एक बोझ बनते जा रहे हैं.  बेटों को पैरेंट्स की सेवा करना तो नागवार गुज़रता ही है, साथ ही उन पर पैसा ख़र्च करना भी उन्हें पैसों की बर्बादी लगती है.

– बड़े शहरों में ऐसे अनगिनत मां-बाप या अकेली मां हैं, जो बेटे के घर से निकाले जाने के कारण या तो किसी ओल्ड एज होम में जीवन बिता रही हैं या फिर घर में रखने के लिए गिड़गिड़ाने को मजबूर हैं.

– बेटियां ज़रूर अपने पैरेंट्स की मदद करती हैं, लेकिन सभी के लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं हो पाता, क्योंकि अगर बेटी शादीशुदा है, तो बेटी के ससुरालवाले इस पर आपत्ति उठाते हैं. फिर भी बीमारी में पैसों से उनकी मदद वे ज़रूर करती हैं, जबकि अधिकांश बेटों का मानना है कि उनके पैरेंट्स को उनके जीवन और लाइफस्टाइल में दख़ल देने का कोई हक़ नहीं है.

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Old Parents

रिश्तों में पसरी संवेदनहीनता

नई दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट की सीनियर सायकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी के अनुसार, “मूल्यों या संस्कारों से कहीं ज़्यादा संवेदनाओं में तटस्थता आने की वजह है भारत का बदला हुआ सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रोफेशनल सेटअप. भारत अब एक ग्लोबल कम्यूनिटी बन गया है और उसकी वजह से आपसी संबंधों में एक पृथकता आ गई है. बढ़ते अवसरों और बहुत कुछ जल्दी पा लेने की चाह में गांव, कस्बों और छोटे शहरों में रहनेवाले लोग शहरों या विदेशों का रास्ता पकड़ रहे हैं. बढ़ती भौतिकता के चलते उनकी सोच सेल्फ-सेंटर्ड हो गई है. पारिवारिक मूल्यों और अपनेपन के बदले लालच व पैसों की भूख ने रिश्तों को नकारने और ज़िम्मेदारियों से बचने को उकसाया है. पहले दिल से सोचा करते थे, पर अब दिमाग़ से सोचते हैं और इसलिए रिश्तों में परायापन पसर गया है.”

भाग रहे हैं ज़िम्मेदारी से

नौकरी की मजबूरियां, पत्नी की मम्मी-पापा से नहीं बनती या पैरेंट्स उनकी लाइफस्टाइल में फिट नहीं होते जैसे बहाने परोसते बेटे असल में अपनी ज़िम्मेदारी से भागना चाहते हैं. इसलिए प्रोफेशनल कमिटमेंट या अपनी गृहस्थी बचाने के नाम पर वे आसानी से अपने उत्तरदायित्वों से पल्ला झाड़ अपनी दुनिया में मस्त हो जाते हैं. वे बूढ़े माता-पिता, जो सारी ज़िंदगी अपने बेटे के सुखद भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं, वही एक दिन उनके लिए आउटडेटेड हो जाते हैं और उनसे पीछा छुड़ाने के लिए बेटों के पास मजबूरियों की लंबी फेहरिस्त होती है और माता-पिता तब भी उनके पराएपन को जस्टीफाई कर नम आंखों से यही कहते हैं कि मेरा बेटा ऐसा नहीं है, वह तो उसकी मजबूरी थी, इसलिए हमें छोड़कर जाना पड़ा.

हमें स़िर्फ एक बार कुछ पल सोचना है कि बेटियां पराई होती नहीं, कर दी जाती हैं और बेटे तो स़िर्फ पराए होते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा उड़ने के लिए खुला आसमान मिलता है.

बुज़ुर्ग माता-पिता की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए व बेटों द्वारा उन्हें घर से बाहर निकाले जाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए 2007 में मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न एक्ट नाम से क़ानून पास किया गया था.

क़ानून के मुख्य प्रावधान

–    पीड़ित अभिभावक अपने गुज़ारे भत्ते के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकते हैं.

–   न्यायाधिकरण में दी गई गुज़ारा भत्ता अर्जी पर नोटिस जारी होने के बाद 90 दिनों में मामले का निपटारा कर दिया जाएगा.

–    न्यायाधिकरण द्वारा मंज़ूर गुज़ारा भत्ता 10,000 रुपए प्रति माह होगा.

–    यदि बच्चे न्यायाधिकरण के आदेश का पालन नहीं करते, तो उन्हें एक माह की जेल या तब तक जेल हो सकती है, जब तक कि वे गुज़ारा भत्ते का भुगतान नहीं करते.

–    जिस पर वरिष्ठ नागरिक की देखरेख का ज़िम्मेदारी हो, वह अगर उसे बेसहारा छोड़ दे, तो उसे तीन माह की जेल और 5000 रुपए जुर्माने की सज़ा हो सकती है.

– सुमन बाजपेयी

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शादीशुदा ज़िंदगी में बढ़ता अकेलापन…! (Why Do People Feel Lonely In Their Marriage?)

शादी (Marriage) का मतलब (Meaning) ही होता है कंपैनियनशिप यानी एक साथी, जो सुख-दुख में साथ दे, जिसके साथ शेयरिंग हो, जो केयरिंग हो, व़क्त आने पर न स़िर्फ रोने के लिए कंधा दे, बल्कि हमारे आंसू भी पोंछे… जो हमेशा यह कोशिश करे कि ज़िंदगी का सफ़र उसके साथ हसीन लगे, रास्ते आसान हो जाएं और मुश्किलों से लड़ने का हौसला मिले… लेकिन अगर इंसान अकेला ही है, तो वो अकेले लड़ना सीख जाता है, पर किसी के साथ रहकर अकेलापन जब हो, तो वहां मुश्किलें और सवाल उठने लाज़िमी हैं.

Relationship Problems

जी हां, एक शोध से यह बात सामने आई है कि कम से कम 20% शादीशुदा लोग अपनी शादी में भी अकेलापन महसूस करते हैं. यह बेहद गंभीर बात है, क्योंकि रिश्तों में पनपता अकेलापन आपको कई मानसिक व शारीरिक समस्याएं भी दे सकता है.

क्या हैं वजहें?

–  आजकल लाइफस्टाइल बदल गई है, कपल्स वर्किंग होते हैं और उनका अधिकांश समय ऑफिस में कलीग्स के साथ ही बीतता है. ऐसे में पार्टनर के लिए समय कम होता जाता है.

–   काम का तनाव इतना बढ़ गया है कि कम्यूनिकेशन कम हो गया है.

–   घर पर भी दोनों अपने-अपने कामों में ही व्यस्त रहते हैं.

–   सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने इस बढ़ते अकेलेपन को और हवा दी है, क्योंकि वहां हमें नए दोस्त मिलते हैं, जो ज़्यादा आकर्षित करते हैं. ऐसे में कब हम पार्टनर को इग्नोर करने लगते हैं, पता ही नहीं चलता.

–   साथ में बैठकर बातें करना, एक-दूसरे की तकलीफ़ों को समझना तो जैसे अब समय की बर्बादी लगती है.

–   बात जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती है, तब यह एहसास होता है कि हम कितने तन्हा हैं एक रिश्ते में होते हुए भी.

–   अब तो पार्टनर्स को यह भी नहीं पता होता कि हमारा साथी इन दिनों क्या महसूस कर रहा है या किन तकलीफ़ों से गुज़र रहा है.

–  इस बढ़ते अकेलेपन का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है, साथ ही कम होते सेक्सुअल रिलेशन भी अकेलेपन को बढ़ाते हैं यानी दोनों तरह से इसे देखा जा सकता है.

–   हर व़क्त पार्टनर्स अपने फोन या लैपटॉप में ही बिज़ी रहते हैं, चाहे डिनर का समय हो या बेड पर सोने का टाइम हो. यह वो समय होता है, जो पार्टनर्स एक-दूसरे के साथ प्यार और रोमांस में बिता सकते हैं, अपनी परेशानियां, अपने सुख-दुख शेयर कर सकते हैं, लेकिन वो आजकल ऐसा न करके अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं. बाद में एहसास होता है कि एक-दूसरे से वो कितना दूर हो चुके हैं.

क्या आपके रिश्ते में भी पनप रहा है अकेलापन?

–   कुछ लक्षण हैं, जिन पर यदि आप ग़ौर करेंगे, तो जान पाएंगे कि आपके रिश्ते में भी यह अकेलापन तो घर नहीं कर गया.

–   आप दोनों आख़िरी बार कब क़रीब आए थे?

–  अपनी दिनचर्या साथ बैठकर कब शेयर की थी?

–  कब एक-दूसरे को आई लव यू या कोई प्यारभरी बात बोली थी?

–  कब कहीं साथ यूं ही हाथों में हाथ डाले बाहर घूमने निकले थे?

–  ख़ास दिन यानी बर्थडे, एनीवर्सरी याद रहती है या भूलने लगे?

–  एक-दूसरे से अपनी ज़रूरतों के बारे में बात करते हैं या नहीं?

इन तमाम सवालों पर ग़ौर करें, तो आप स्वयं समझ जाएंगे कि आप किस दौर से गुज़र रहे हैं.

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Relationship Fights

अकेलेपन से होता है स्वास्थ्य पर असर…

–   आप डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं.

–   ज़्यादा अकेलापन महसूस होने पर यह अवसाद आत्महत्या तक ले जाता है.

–   नशे की लत का शिकार हो सकते हैं.

–   याद्दाश्त पर बुरा असर पड़ता है.

–   हृदय रोग हो सकते हैं.

–   व्यवहार बदलने लगता है.

–   स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं.

–   ब्रेन फंक्शन्स पर बुरा असर होने लगता है.

–   निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है.

–   चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है.

–   सोशल गैदरिंग में जाना बंद करने लग जाते हैं.

कैसे दूर करें इस अकेलेपन को?

–   कम्यूनिकेट करें. किसी भी समस्या का हल बातचीत से ही निकल सकता है. आप जो इन दिनों महसूस कर रहे हैं, उसके बारे में पार्टनर को बताएं.

–   अगर व्यस्तता के चलते यह सब हो रहा है, तो आप दोनों को ही हल निकालना होगा.

–   इनिशियेटिव लेकर कुछ सरप्राइज़ेस अरेंज करें और अपने रिश्ते को फिर से ताज़ा करने की कोशिश करें.

–   मैसेजेस करें, रोमांटिक बातें करनी शुरू करें.

–   एक-दूसरे को समय दें और एक रूल बनाएं कि डिनर के समय और बेड पर कोई भी फोन पर समय नहीं बिताएगा.

–   अपनी सेक्स लाइफ रिवाइव करें. कुछ नया ट्राई करें- बेडरूम के बाहर या कोई नई पोज़ीशन वगैरह.

–   ज़रूरत पड़ने पर काउंसलर की सलाह भी ले सकते हैं.

–  यदि आप दोनों के बीच कोई और आ गया है, तो मामला अलग होगा. तब आपको किसी ठोस नतीज़े पर पहुंचना होगा.

–   अगर रिश्ता फिर से जीवित होने की संभावना नहीं दे रहा है, तो अकेलेपन से डरें नहीं, उसे कुछ क्रिएटिव करने का एक अवसर समझें.

–   अपनी हॉबीज़ पर ध्यान दें.

–  दोस्तों के साथ सोशलाइज़ करें. उनके साथ पार्टी या गेट-टुगेदर प्लान करें और एंजॉय करना शुरू करें.

–   करियर पर फोकस करना शुरू कर दें.

–   अपनी सेहत पर ध्यान दें.

–   ख़ुद से प्यार करना सीखें.

– विजयलक्ष्मी

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पहला अफेयर: नीली छतरीवाली लड़की… (Pahla Affair: Neeli Chhatriwali Ladki)

Pyar ki Khaniya

पहला अफेयर: नीली छतरीवाली लड़की… (Pahla Affair: Neeli Chhatriwali Ladki)

प्रतिदिन वो नीली छतरीवाली लड़की घर के सामने से गुज़रती थी. किसी बच्चे को स्कूल बस तक छोड़ने के लिए चौराहे तक जाना उसका रोज़ का काम था. लेकिन आज पहली बार मेरी नज़र उसकी नज़र से टकरा गई. वो हौले से मुस्कुराई और आगे बढ़ गई. उसकी आंखों में ओस की बूंदों के समान चमक थी. मुस्कुराते हुए उसके लब ऐसे लग रहे थे मानो गुलाब की कई कलियां अभी-अभी खिली हों.

उसकी नाज़ुक-सी कलाई में एक ब्रेसलेट था, उसी हाथ से उसने छतरी को पकड़ रखा था, दूसरे हाथ की उंगली को बच्चे ने पकड़ रखा था. उसकी सुराहीदार गर्दन में कोई आभूषण नहीं था और सच पूछो तो उसे किसी आभूषण की ज़रूरत भी नहीं थी, बिन शृंगार के ही बेहद ख़ूबसूरत लगती थी वो. पैरों में सिंपल-सी चप्पल और हल्के रंग की सलवार-कुर्ती पहनकर आती थी वो. वेशभूषा भले ही साधारण थी उसकी, पर व्यक्तित्व असाधारण था. उसमें ग़ज़ब का आकर्षण था, एक कशिश थी, जो मुझे उसकी ओर खींच रही थी. वो किसी मत्स्यकन्या की तरह ख़ूबसूरत थी.

मैं उसके वापस लौटने का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बाद वह वापस लौटी. अब उसकी पलकें झुकी हुई थीं. लजाते हुए वो छुईमुई-सी प्रतीत हो रही थी. उसकी मासूम मुस्कान अब भी बनी हुई थी. उसे देखकर मेरे भीतर हज़ारों फूल खिल गए थे. यह पहली नज़र का प्यार नहीं तो और क्या था? मैंने घड़ी को देखा, तो दस बजने को थे. मैं अब रोज़ साढ़े नौ बजे से ही उसका इंतज़ार करने लगा था.

वो रोज़ मुस्कुराते हुए आती और चली जाती. मैं बस उसे देखता रह जाता. इतना ज़रूर समझ गया था कि वो भी मुझे पसंद तो करती थी, पर क्या प्यार भी करने लगी थी? सोचता था उसका नाम पूछूं, पर कभी हिम्मत ही नहीं जुटा पाया.

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यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा, फिर अचानक उसका मेरी राह से गुज़रना बंद हो गया. मैं परेशान था. मोहल्ले से पता चला कि उसकी शादी तय हो चुकी है. समय बीतता गया, पर 7-8 महीनों बाद वो फिर दिखाई दी. कलाईभर की चूड़ियां पहने हुए थी वो. मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र था. लेकिन ये क्या… उसका सौदर्य यूं मुरझाया हुआ क्यों लग रहा था. उसके चहरे पर पहले-सी आभा नहीं थी. होंठ सूखे और मन उदास लग रहा था. बेहद कमज़ोर और थकी हुई लग रही थी. अब वो मुस्कुराती भी नहीं थी.

वो अक्सर मायके आया करती थी. सुनने में आता कि जाते समय वो मायके से ढेर सारा सामान ले जाया करती थी.

पर कई महीनों से उसके मायके आने का सिलसिला भी ख़त्म हो गया था. फिर एक दिन अचानक ख़बर मिली कि ससुराल ेमं उसकी जलने से मौत हो गई. क्या, कैसे और क्यों हुआ, कोई नहीं जानता… पर अंदाज़ा तो सबको है कि दहेज की बलि चढ़ चुकी थी वो.

इस दुनिया में अब वो नीली छतरीवाली लड़की नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि वो नीली छतरीवाली लड़की आज भी मुझे नीले आकाश से निहारती है और अब हमें कोई जुदा नहीं कर सकता.

– वैभव कोठारी

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हैप्पी फैमिली के लिए न भूलें रिश्तों की एलओसी (Boundaries That Every Happy Family Respects)

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि मर्यादाएं (Limitations) ज़रूरी हैं रिश्तों (Relationships) के दरमियां, जब ये टूटती हैं, परिवार बिखर जाते हैं. हंसी-मज़ाक, छेड़छाड़ और शरारतें तो हर रिश्ते में होती हैं, पर ये चीज़ें मर्यादा में रहें, तभी अच्छी लगती है, क्योंकि हद पार करते ही ये अर्मादित हो जाती हैं. तो क्यों न आप भी समझें रिश्तों की एलओसी, ताकि रिश्तों में कभी कोल्ड वॉर न आए.

Relationships Goals

क्या है एलओसी?

जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे पैरेंट्स, दोस्तों और रिश्तेदारों से हम बहुत कुछ सीखते हैं. रिश्तों को मान-सम्मान देना, प्यार-विश्‍वास, त्याग और समर्पण जैसी कई चीज़ें सीखते हैं. इन्हीं सबको देखकर हम रिश्तों की मर्यादा यानि लाइन ऑफ कंट्रोल ड्रॉ करना भी सीखते हैं. साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती है कि ये चीज़ें हम में पैदाइशी नहीं होतीं, बल्कि समय के साथ धीर-धीरे सीखते हुए आती हैं. बहुत-से लोगों को यह ग़लतफ़हमी होती है कि अगर हम अपनी लाइन ड्रॉ करेंगे, तो लोग उसे दीवार समझकर हमें ग़लत न समझ बैठें, जबकि ऐसा है नहीं. आपको क्या सही लगता है, क्या ग़लत लगता है, बताने से आपके साथ-साथ सामनेवाले का भी मान-सम्मान बना रहता है.

क्यों ज़रूरी है एलओसी ड्रॉ करना?

हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, लेकिन इसे शुरू हमें ख़ुद से करना होता है. यह कोई ऐसी चीज़ नहीं, जो हम दूसरों के लिए करते हैं, बल्कि मर्यादाओं का पालन हम अपनी सुरक्षा और मान-सम्मान के लिए करते हैं.

– रिश्तों में एलओसी या मर्यादा ख़ुद की सुरक्षा के लिए ज़रूरी होती है. अगर आप लाइन ड्रॉ नहीं करेंगे, तो लोग उसे क्रॉस करके आपके
मान-सम्मान को चोट पहुंचा सकते हैं.

– ताकि आप किसी और की ग़लतफ़हमी का शिकार न बनें.

– आप परिस्थितियों का शिकार न बन जाएं.

– इसके बिना लोग आपको फॉर ग्रांटेड लेते हैं.

रिश्तों की बाउंड्रीज़

1. फिज़िकल बाउंड्रीज़़

सबसे पहले जो बाउंड्री हम सीखते हैं, वो है किसी से किसी दूरी बनाए रखें. आमतौर पर बच्चों को सिखाया जाता है कि किसी से भी एक हाथ की दूसरी पर रहकर ही बात करनी चाहिए. ऐसे बहुत-से लोग हैं, जो इस दूरी का ध्यान नहीं रखते, जिससे दूसरे को असहजता महसूस होती है.

– परिवार में भी इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि किसी का भी बार-बार टच करके बात करना सभी को पसंद नहीं आता.

– अगर आपको भी यह पसंद नहीं, तो उससे भागने की बजाय अपनी बात प्यार से समझाएं.

– कुछ दोस्तों को भी हमेशा टच करके बात करने की आदत होती है, आप प्यार से अपने दोस्त को अपनी बाउंड्री के बारे में समझाएं.

2. इमोशनल बाउंड्री

– पैरेंट्स, भाई-बहन, पति या पत्नी से इमोशनली इस कदर जुड़े होते हैं कि उनके बिना रह पाने के बारे में सोच भी नहीं पाते. लेकिन दूसरों से एक भावनात्मक दूरी बनाए रखते हैं.

– हमें इमोशनली इतना मज़बूत होना चाहिए कि किसी भी मुश्किल हालात में डटे रहें.

– किसी पर इमोशनली इतने डिपेंडेंट न हो जाएं कि उसके बिना जीने की कल्पना भी आपको दूभर लगे.

3. डिजिटल बाउंड्री

आजकल रिश्तों में इस बाउंड्री की बहुत ज़रूरत है. आपकी प्राइवेसी आपके अपने हाथ में है. अपनी डिजिटल लाइफ में किससे कितनी
दूरियां-नज़दीकियां रखनी हैं, यह आपको ख़ुद तय करना होगा.

– रोशनी की 17 वर्षीया बेटी ने उसके मोबाइल पर उसके दोस्त द्वारा भेजी ईमोजी देखी. जिसे देखकर उसे ग़लतफ़हमी हो गई कि मम्मी का उनके दोस्त के साथ अफेयर है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था. न रोशनी ने और न ही उनकी बेटी ने डिजिटल बाउंड्री का ख़्याल रखा, जिससे उनके रिश्ते में ग़लतफ़हमी आ गई. डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि हैप्पी फैमिली के लिए ज़रूरी है कि आप एक-दूसरे के मोबाइल चेक न करें. पैरेंट्स का बच्चों पर नज़र रखना अलग बात है, लेकिन हर किसी को अपनी डिजिटल बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

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Relationships Goals
हैप्पी फैमिली टिप्स

– बाउंड्री बनाना सबसे कठिन काम है, इसलिए अचानक से लाइन ड्रॉ न करें, वरना सब आपको घमंडी और मगरूर समझ बैठेंगे. धीरे-धीरे बताएं कि मुझे यह पसंद नहीं.

– परिवार में अगर किसी ने लाइन क्रॉस की है, तो उनकी ग़लती बताने की बजाय, वह आपको पसंद नहीं ऐसा बोलें.

– ‘आप ऐसे कैसे बोल सकते हैं’ कि बजाय ‘मुझे इस बात से तकलीफ़ हुई’ ऐसा बोलें.

हर रिश्ते में हो मर्यादा: माता-पिता, भाई-बहन या फिर पति-पत्नी ही क्यों न हों, सभी को अपने रिश्तों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. पैरेंट्स हों या भाई-बहन हर किसी से बात करते समय मर्यादा का ध्यान रखें.

मज़ाक किसी को शर्मिंदा न करे: मज़ाक अगर किसी के मान-सम्मान को चोट पहुंचानेवाला हुआ, तो वो मज़ाक नहीं रह जाता. ऐसे भी बहुत-से लोग हैं, जो मज़ाक के बहाने कटाक्ष करते हैं और बुरा लगने पर कहते हैं कि वो तो मज़ाक कर रहे थे. ऐसे मज़ाक कभी न करें, जिससे उस व्यक्ति को दूसरों के सामने शर्मिंदगी महसूस हो.

झिड़की और फटकार प्यार नहीं: अक्सर लोग बड़ों से बात करते समय मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, पर छोटो को झिड़कना और फटकारना अपना अधिकार समझते हैं. बच्चों के सम्मान का भी ख़्याल रखें.

दोस्त बनें कॉपीकैट नहीं: दोस्ती का मतलब एक-दूसरे को समझना, बातें शेयर करना और हक़ जताना है, पर कुछ लोग हक़ जताने के चक्कर में वही करने लगते हैं, जो उनका दोस्त करता है. उसी के जैसी हरकतें करना, कपड़े पहनना, सोशल स्टेटस रखना जैसी चीज़ें आपके दोस्त को इरिटेट कर सकती हैं. अपनी दोस्ती की मर्यादा बनाए रखें और दोस्त को कभी कॉपी न करें.

कपल्स भी न भूलें एलओसी

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ ने बताया कि रिश्तों में मर्यादा इसलिए भंग होती है, क्योंकि हर किसी के लिए इसके मायने अलग होते हैं. जो हमारे लिए सही है, ज़रूरी नहीं कि वो पार्टनर को भी सही लगे.

– पति-पत्नी के रिश्ते में लाइन क्रॉस करने के मामले सबसे ज़्यादा होते हैं, क्योंकि एक-दूसरे को कंट्रोल करने की भावना इनमें प्रबल होती है.

– पार्टनर को कितना हंसना चाहिए, कितना बोलना चाहिए, किससे मिलना चाहिए, किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
हैप्पी टिप्स

– प्यार का मतलब कंट्रोल करना नहीं, बल्कि आज़ादी देना है, इसलिए अपने प्यार को कभी कंट्रोल करने की कोशिश न करें.

– आप अपनी लाइन क्रॉस नहीं करेंगे, तो पार्टनर भी अपनी हद का ख़्याल रखेगा.

– शादी से पहले ही इन चीज़ों में क्लारिटी रखें.

– आप जो भी हैं, जैसी भी पार्टनर से उम्मीदें हैं, उनसे शेयर करें.

– पार्टनर के लिए और फैमिली के लिए आप जितना कर सकती हैं, वह अपने पार्टनर को बताएं. अपनी लिमिटेशन्स आपको ख़ुद बतानी होंगी.

– पार्टनर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भले ही कितना भी ग़ुस्सा आए, वो हाथ नहीं उठा सकते, ग़लत बात नहीं कह सकते.

– सुनीता सिंह

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