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पहला अफेयर: धुंध के पार (Pahla Affair: Dhundh Ke Paar)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: धुंध के पार (Pahla Affair: Dhundh Ke Paar)

किशोरवय की सुनहरी धूप से भरे वे प्रिय दिन कितने सुहाने थे. मेरे चारों ओर बुद्धि प्रदीप्त सौंदर्य का एहसास पसरा हुआ था. इसी आत्मविश्‍वास के कारण मैं तनिक एकाकी हो गई थी. घर से दूर हॉस्टल में रहते हुए भी मैंने कभी भी स्वछंदता का लाभ नहीं उठाया था.
गीत-संगीत का शौक ही मेरे अकेलेपन का साथी था. मेरा शुरू से ही यह मानना था कि संगीत में जो कशिश है, वो न स़िर्फ तन्हाई को, बल्कि हर मुश्किल को दूर कर सकती है. संगीत से यह गहरा लगाव ही मुझे बेहद ख़ुश रखता था.

उन्हीं दिनों हमारी कक्षा पिकनिक पर गई. हरी-भरी पहाड़ियां, कल-कल बहता स्वच्छ झरना व पास ही दरी बिछा हम छात्र-छात्राएं संकोच से बतिया रहे थे. साथ में लाए टेप-रिकॉर्डर पर मधुर, पुराने फिल्मी गीत बज रहे थे. तभी किसी ने प्लेयर बंद कर दिया. एक सहपाठी के विषय में कहा गया कि वह बहुत अच्छा गाता है एवं क्यों न उससे ही कुछ सुना जाए.

“तेरी आंख के आंसू पी जाऊं…” यह गीत गाते हुए वह गौरवर्ण, सुदर्शन सहपाठी मेरी ओर ही क्यों देखे जा रहा था, यह मैं तब समझ नहीं पाई.

उस दिन के बाद हमारी मित्रता हुई, जो धीरे-धीरे असीम सुकोमल भावनाओं की डोर से हमें बांध गई. पहले प्यार ने हम दोनों को कुछ ऐसा छुआ कि कब साथ जीने-मरने का इरादा कर लिया, पता ही नहीं चला.

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मुहब्बत की इन भावनाओं के बीच हमारी पढ़ाई भी चल रही थी. एमबीबीएस के बाद मेरे उस सुख-दुख के सखा को सुदूर नगर स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए जाना पड़ा.

वियोग के पल कितने निर्मम थे और कितने कठिन भी. तीन वर्ष पत्रों का आदान-प्रदान रहा. फिर समय की धुंध हमारे रिश्ते के बीच छा गई. धीरे-धीरे पत्रों का सिलसिला कम हुआ और फिर बंद ही हो गया. शायद माता-पिता की आज्ञानुसार वह विदेश चला गया.

बचपन से ही शरतचंद, टैगोर पढ़-पढ़कर पली-बढ़ी मैं उस प्रसंग को विस्मृत न कर सकी. सुगंधित पत्रों व जीवंत स्मृतियों का पिटारा अब भी पास था. शायद एक आस थी कि मेरे पहले प्यार की उन सुखद अनुभूतियों का एहसास उसे भी होगा और कहीं न कहीं उसके मन में भी वो तड़प, वो कशिश तो ज़िंदा होगी ही. नहीं जानती थी कि ये मेरा भ्रम था या हक़ीक़त… पर मैं बस उसकी यादों से बाहर नहीं निकलना चाह रही थी.

और आज… उस धुंध के आर-पार, समय की निष्ठुरता को ठुकराती, एक स्नेहिल आवाज़, टेलीफोन के माध्यम से फिर खनक उठी है,
“मैं सदैव के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूं. मेरे मार्ग को अपने ख़ुशी के आंसुओं से सींचे रखना. मुझे पता है कि तुम ख़ुशी में भी ज़ार-ज़ार रोती हो.”

मुझसे पूछे बिना ही उसने जान लिया था कि मेरे नैनों में आज भी उसकी प्रतीक्षा के दीये जल रहे हैं. मेरा इंतज़ार, मेरा प्यार जीत गया था.
मेरी आस ग़लत नहीं थी… मेरी आंखों से सच में आंसू बहे जा रहे थे… पर ये ख़ुशी के आंसू थे, जिनमें ग़मों के सारे पल, जुदाई की सारी रातें और हिज्र के दिनों की सारी शिकायतें धुल गई थीं. अब हमारे दरमियान स़िर्फ प्यार था… बस प्यार ही प्यार…
ख़त्म हो गया था वो इंतज़ार!

– डॉ. महिमा श्रीवास्तव

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20 बातें जो पुरुष स्त्रियों से चाहते हैं (20 Things Men Really Want In A Women)

हर लड़की यह जानने के लिए उत्सुक रहती है कि आख़िर लड़के लड़कियों में कौन-सी ख़ूबी पसंद करते हैं. तो पेश हैं ऐसी ही कुछ ख़ास बातें, जिन्हें पुरुष (Men) स्त्रियों (Women) में देखना चाहते हैं.

Things Men Want In A Women

1. समझदार

पुरुष हमेशा उसी से प्यार करता है, जो उसे और उसकी बातों को समझती और महसूस करती हो. उनकी बातों और ज़रूरतों को समझकर उनके ही तरी़के से उन्हें हैंडल करने की कोशिश करे. जितनी समझदार आप होंगी, उतना ही प्यार पाएंगी.

2. ख़ुशमिजाज़

बातों को हमेशा हंसकर ख़ुशी से स्वीकारें. यदि वे जोेक करते हैं, मज़ाक करते हैं तो आप भी वैसा ही करें. उनकी हर बात का जवाब आपके पास तैयार होना चाहिए. आप हाज़िरजवाब हों, ताकि अपने दोस्तों के बीच वे गर्व महसूस कर सकें.

3. सीधी बात

घुमा-फिराकर, लंबी-चौड़ी बातें करनेवाली महिलाएं पुरुषों को नहीं भातीं, इसलिए जो भी कहें ङ्गशॉर्ट एंड स्वीटफ होना चाहिए. यानी सीधी बात, मगर सौम्यता से.

4. आत्मविश्‍वास

ऐसी महिलाएं, जो घबराती नहीं और हर बात आत्मविश्‍वास से कहती व करती हैं, पुरुषों को बहुत पसंद आती हैं. अतः बातें सहज, पर आत्मविश्‍वास से भरी हों.

5. समर्पण

पुरुष समर्पण चाहता है. घर, बाहर, नाते-रिश्तेदारियां निभाने में और बिस्तर पर भी.

6. लचीलापन

किसी भी परिस्थिति में चाहे वह सुख की हो या दुःख की, बिना किसी शिकायत के ढल जाना पुरुषों को आकर्षित करता है.

7. देखभाल

उनकी, उनके आसपास के लोगों की और बच्चों की देखभाल करना, वो भी अपनी ज़रूरतों को नकारकर उन्हें आपके प्रति भावुक बना देती है.

8. ईमानदारी

अपने रिश्ते में ईमानदारी की उम्मीद हर पुरुष रखता है. ङ्गआप स़िर्फ उनकी हैंफ यह भावना उन्हें बेहद सुकून पहुंचाती है.

9. गर्मजोशी

भले ही आप थकी हों या परेशान हों, वजह जो भी हो, आपसे हमेशा ही गर्मजोशी की उम्मीद की जाती है. ख़ासकर दोस्तों, रिश्तेदारों व मेहमानों के सामने.

10. बुद्धिमानी

यही वह प्रमुख गुण है, जिसके बारे में ़ज़्यादा बात नहीं की जाती. परंतु ध्यान रहे, होशियार व बुद्धिमान महिलाओं से वे जीवनभर प्रभावित रहते हैं.

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Things Men Want In A Women

11. सकारात्मक सोच

जीवन के प्रति सकारात्मक रुख, जो आपके आसपास के व्यक्ति को प्रभावित करता है और ऊर्जा से भर देता है, उन्हें पसंद आता है.

12. प्रेज़ेंटेबल

घर में भी हर समय प्ऱेजेंटेबल रहें. साफ़-सुथरे सली़केदार कपड़े पहनें, जो आंखों को अच्छे लगें. हल्का-सा पऱफ़्यूम लगाएं. इसके साथ हरदम मुस्कुराता हुआ चेहरा उनकी सारी थकान मिटा देगा, यानी अपने आपको संवारकर रखें.

13. सादगी

पुरुष अक्सर महिलाओं की सादगी की ओर आकर्षित होते हैं. उन्हें दिखावा पसंद नहीं. इसलिए अपने व्यवहार में सादगी रखें.

14. मीठे बोल

क़ड़वा कभी न बोलें, न ही ताने मारें. मधुर आवाज़ में मीठी बातें बोलें, ख़ासकर आनेवाले मेहमानों और ससुरालवालों से. इसे अपनी आदत में शुमार कर लें. ऐसी महिलाएं पुरुषों को आकर्षित करती हैं.

15. फ़िटनेस

शरीर का सुडौल होना बहुत ज़रूरी है. कुछ हल्के व्यायाम, योगासन, जिम व डाइट से आप अपने आप को फ़िट रख सकती हैं. सुडौल काया ख़ूबसूरती के साथ तंदुरुस्ती देगी और उनकी तारीफ़ भी.

16. साफ़-सुथरा घर

थके-हारे व्यक्ति को घर में ही सुकून मिलता है, परंतु यदि घर बिखरा हुआ, गंदा हो तो परेशानी व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. साफ़-सुथरा सली़केदार घर सभी को आकर्षित करता है, फिर आपके पति को भी आपकी इस ख़ूबी पर नाज़ होगा.

17. स्वादिष्ट खाना

‘प्यार का रास्ता पेट से होकर जाता है’ यह कोरी कहावत नहीं, बल्कि हक़ीक़त है. खाने में प्यार उड़ेलें, स्वाद अपने आप आ जाएगा.

18. स्पेस बनाए रखें

हर बात में पूछताछ, टोकाटाकी या शक ठीक नहीं, स्पेस दें. ऐसी महिलाएं पुरुषों को अच्छी लगती हैं. अगर आप भी ऐसा करेंगी तो ज़िंदगी मज़े से गुज़रेगी.

19. आदर दें

आपकी बातों व व्यवहार में उनके प्रति सम्मान झलके. यही आदर अपनी सास और अन्य बड़ों के प्रति भी होना चाहिए.

20. उनमें रुचि लें

उनकी बातों व कामों में रुचि दिखाएं, भले ही उसमें आपकी दिलचस्पी न हो. ऐसी महिलाओं से पुरुष बहुत प्रभावित रहते हैं.

– डॉ. नेहा

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Tv News: एक और टीवी कपल की शादी टूटने के कगार पर, जानिए डीटेल (Siddhant Karnick Marriage is in Trouble?)

ग्लैमर वर्ल्ड में जिस तेज़ी से शादियां हो रही हैं, उसी तेज़ी से शादियों के टूटने का सिलसिला भी जारी है. जी हां, खबर है कि जी टीवी के शो एक था राजा और एक थी रानी के अभिनेता सिद्धांत कार्निक (Siddhant Karnick) और उनकी एक्ट्रेस वाइफ मेघा गुप्ता (Megha Gupta) की शादी (Marriage) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और वे अलग रह रहे हैं. आपको बता दें कि सिद्धांत कार्निक और  मेघा गुप्ता की मुलाक़ात साल 2015 में विवियन डिसेना की पार्टी में हुई थी, जल्द ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया था. 1 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद साल 2016 में यह दोनों शादी के बंधन में बंध गए. इन्होंने कोर्ट मैरिज की और बाद में नासिक में प्राइवेट सेरेमनी की.

Siddharth Karnick And Megha Gupta

Siddharth Karnick And Megha Gupta

Siddharth Karnick And Megha Gupta

Siddharth Karnick And Megha Gupta

लेकिन हाल ही में आई खबरों की मानें तो सिद्धांत अपनी पत्नी मेघा से अलग हो गए हैं. यह खबर तब से आई जबसे इन-दोनों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को अनफ़ॉलो कर दिया है. मेघा और सिद्धांत कभी सोशल मीडिया पर अपनी प्यार भरी तस्वीरों को पोस्ट करते नही थकते थे. लेकिन दिसंबर 2018 के बाद से इन-दोनों ने सोशल मीडिया पर साथ वाली एक भी तस्वीर शेयर नही की जिसके बाद से ही यह खबर आने लगी कि इनके रिश्ते में सब कुछ ठीक नहीं है.

एक वेबसाइट ने जब मेघा से इस बारे में जानने की कोशिश की तो उन्होंने इशारों ही इशारों में साफ बता दिया, “मेरे पास कुछ कहने के लिए नहीं है. लेकिन मुझे समझने के लिए आपका शुक्रिया.” मेघा के यह कहने से यह साफ-तौर पर पता लगता है कि मेघा और सिद्धांत की शादी-शुदा जिंदगी में सबकुछ सही नही चल रहा है. खबरों के अनुसार, सिद्धांत कार्निक और मेघा गुप्ता अब साथ में नहीं रहते हैं. एक अखबार ने जब सिद्धांत से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बात को टालते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है. कपल के करीबी मित्रों की मानें तो इनके बीच मे कोई भी समानता नहीं है इसलिए ये अलग हो गए.

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5 ग़लतियां जो महिलाएं सेक्स के दौरान करती हैं (5 Mistakes Women Make In Bed)

हर महिला (Woman) चाहती है कि उसका दांपत्य जीवन रोमांच से भरपूर रहे, लेकिन इसके लिए सारी मेहनत पति (Husband) करें, उन्हें अपनी तरफ से एफर्ट लेना न पड़े. इस चक्कर में उनकी सेक्स लाइफ (Sex Life) भी प्रभावित होती हैं और उनकी अपनी भावनाएं पूरी नहीं हो पातीं. जानें वो कौन-सी ऐसी ग़लतियां (Mistakes) हैं, जो महिलाएं सेक्स के दौरान करती हैं और जिसके कारण उनकी सेक्स लाइफ बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. अगर आप भी ये ग़लतियां करती हैं, तो आज ही इन्हें सुधार लें.

Mistakes Women Make In Bed

1. पति को ख़ुद ही पहल करना चाहिए

अक्सर महिलाएं ये सोचकर पहल नहीं करतीं कि ये तो उनके पार्टनर का काम है. वे सोचती हैं कि सेक्स में वे क्या चाहती हैं, उनके पार्टनर को ख़ुद ही समझ जाना चाहिए और वे अपने दिल की बात कहती नहीं, लेकिन ये सोच बिल्कुल ही ग़लत है. आप क्या चाहती हैं, ये आप जब तक बताएंगी नहीं तब तक वे कैसे समझ पाएंगे? इसलिए बेहतर होगा कि आप खुलकर उन्हें अपनी चाहत के बारे में बताएं. अगर इसमें शर्म महसूस हो तो व्यवहार व इशारों में उन्हें समझाएं.

2. वे आपके दिल की बात नहीं समझते

अक्सर पुरुष सेक्स में जल्दबाज़ी करते हैं और स्त्रियों की चाहत ङ्गकुछ औरफ की होती है. पुरुष फोरप्ले में ़ज़्यादा व़क़्त नहीं लगाते, जबकि स्त्रियों के लिए फोरप्ले ज़रूरी होता है. अगर आपके पार्टनर को ये बात नहीं पता तो उन्हें बताएं कि सेक्स के पहले फोरप्ले आपके लिए कितना आनंददायक होता है. फोरप्ले के दौरान कुछ नया करें और उन्हें बताएं कि उन्हें भी कुछ ऐसा ही करना चाहिए. एक बार उन्होंने आपकी ज़रूरत समझ ली तो यक़ीनन वे आपकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करेंगे और आपका सेक्स जीवन और भी आनंददायक बन जाएगा.

3. अपने शरीर को लेकर हीनभावना

महिलाएं ये बात नहीं मानतीं, लेकिन ये सच है कि वे अपने शरीर   को लेकर हीनभावना से ग्रस्त रहती हैं और सेक्स के दौरान भरसक कोशिश करती हैं कि उनका पार्टनर उनके इन अंगों को देखने न पाए और इस बात से वो कई बार चिढ़ जाता है. अगर आप भी ऐसा ही सोचती हैं और ये आश्‍वासन चाहती हैं कि आपकी बॉडी पऱफेक्ट है तो उनसे खुलकर पूछें कि मैं अपने अंगों को लेकर इनसिक्योर महसूस करती हूं. क्या आपको ये आकर्षक लगते हैं?

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Mistakes Women Make

4. सेक्स के लिए हमेशा नाना कहना

सेक्स के मामले में ये हमारे यहां पहले से ही होता आया है. पुरुष ङ्गहां-हांफ करते जाएंगे और महिलाएं ङ्गना-नाफ. लेकिन सेक्स के लिए हमेशा ऐसा करना ठीक नहीं है, बल्कि कभी-कभी उल्टा भी होना चाहिए. सेक्स की पहल आपकी तरफ़ से भी होनी चाहिए और उस शाम के लिए आपकी तरफ़ से ख़ास तैयारी होनी चाहिए, ताकि वो शाम ख़ास बन जाए.

5. सेक्स के बाद पार्टनर से व्यवहार

अक्सर महिलाएं सेक्स के बाद ङ्गतुम तो बड़े बेशर्म हो….बच्चे इतने बड़े हो गए, लेकिन तुम्हारी आदतें नहीं बदलीं…फ जैसी बातें कहकर अपने पार्टनर का मूड ऑफ़ कर देती हैं, लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं. ध्यान रखें कि सेक्स जीवन का ज़रूरी हिस्सा है और स्वस्थ और आनंददायक जीवन के लिए महत्वपूर्ण भी.

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पहला अफेयर: हां, यही प्यार है! (Pahla Affair: Haan Yehi Pyar Hai)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: हां, यही प्यार है! (Pahla Affair: Haan Yehi Pyar Hai)

प्यार, इश्क़, मुहब्बत, लव, अफेयर… एक ही एहसास के न जाने कितने नाम हैं ये, लेकिन मुझे इस एहसास में डूबने की इजाज़त नहीं थी और न ही चाहत थी, क्योंकि मेरी शादी हो चुकी थी. यह बात अलग है कि मैं उस व़क्त शादी के लिए कतई तैयार नहीं थी. दरअसल, शादी की बातचीत के बीच ही जब मुझे यह पता चला कि लड़केवाले दहेज की मांग करने लगे हैं, तो एक नफरत-सी पाल ली थी मैंने उनके प्रति.

जब अपने होनेवाले पति को देखा, तो मन और भी खिन्न हो गया. सांवला-सा रंग, दुबला-पतला शरीर और उस पर दहेज की मांग. ख़ैर, जैसे-तैसे शादी हो गई. मैं इंकार भी नहीं कर पाई, क्योंकि जिस परिवार में पली-बढ़ी थी, वहां लड़कियों की इच्छा-अनिच्छा को महत्व नहीं दिया जाता था. उस पर पिताजी की आर्थिक स्थिति भी बहुत ज़्यादा अच्छी नहीं थी. पिताजी की इच्छा की ख़ातिर शादी तो मैंने कर ली थी, पर पहले ही दिन अपने पति को सब कुछ साफ़-साफ़ बता दिया कि मुझसे किसी भी तरह के प्यार या अपनेपन की उम्मीद न रखें. उन्होंने हंसकर जवाब दिया कि उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है और अपना बिस्तर अलग लगाकर वो सो गए.

मैं बहुत हैरान हुई, लेकिन मेरे मन में इतनी शिकायतें थीं कि मुझे उनकी हर बात पर चिढ़ होती थी और एक ये थे कि मेरी हर चिढ़ और गुस्से पर बेहिसाब प्यार उमड़ आता था इन्हें. हर बात को प्यार से समझाते, हर व़क्त इनके होंठों पर मुस्कान बिखरी रहती. बहुत संयमित और संतुलित व्यक्ति थे ये. मुझे अक्सर कहते कि कभी न कभी तो तुम मेरे प्यार को समझोगी और तुम भी मुझसे प्यार करने लगोगी.

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एक दिन इनकी मम्मी से मेरी थोड़ी कहा-सुनी हो गई थी और इन्हें भी मैंने दहेज मांगने का ताना दे दिया था. उस पर इन्होंने बताया कि जो भी पैसे दहेज के रूप में मिले, वो मेरे ही अकाउंट में जमा करवा दिए हैं. अपने मम्मी-पापा को वो उस व़क्त नहीं समझा सके थे कि दहेज लेना अपराध है, पर शादी के बाद उन्हें मना लिया.

मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या कहूं और क्या न कहूं? इन्होंने मुझे इतना प्यार दिया, इस तरह संभाला कि न कभी ज़ोर-ज़बर्दस्ती की, न कभी पति होने का हक जताया. इनके प्यार में पवित्रता की महक थी, कभी वासना की की गंध नहीं आई. मैं भूखी रहती, तो बच्चों की तरह खाना खिलाते. घर में कोई टीका-टिप्पणी करता, तो उन्हें भी समझाते कि नए परिवेश में घुलने-मिलने में व़क्त लगता है.

इनकी इसी सादगी, समझदारी और सबसे बढ़कर पवित्र प्यार ने मुझे जैसे अपनी और खींच लिया था. मैं हर व़क्त सोचती कि दुनिया में कोई इतना अच्छा और सच्चा कैसे हो सकता है? मैं वाकई ख़ुशनसीब हूं, जो ऐसा जीवनसाथी मुझे मिला, एक अजीब-सा आकर्षण महसूस करने लगी थी मैं इनकी ओर. सोचा था कभी इश्क़ नामक रोग नहीं लगेगा मुझे, मगर इनके प्यार के एहसास ने मुझे भीतर तक भिगो दिया था.

मेरा जन्मदिन था, इनके आने का इंतज़ार कर रही थी और अपने तोह़फे का भी. ये आए और मैं बस इननकी बांहों में सिमट गई. आंखों ही आंखों में बातें हुईं और मुझे मेरी पहली मुहब्बत का एहसास हुआ. मैं समझ गई कि हां, यही प्यार है! उस रात मैं संपूर्ण स्त्री बन गई थी.

आज सात साल हो गए, हमारे दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं. मैं परिवार में पूरी तरह से घुल-मिल चुकी हूं, लेकिन हमारे प्यार में अब भी वही पहले प्यार की महक और कशिश बरकरार है. सचमुच यही मेरा पहला प्यार था. मैं इनसे यानी अपने पति राजेश से बेहद प्यार करती हूं और मुझे अपने प्यार पर नाज़ है.

– देवप्रिया सिंह

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पुरुषों की चाहत- वर्किंग वुमन या हाउसवाइफ? (What Indian Men Prefer Working Women Or Housewife?)

चूल्हा-चौका देखनेवाली… ऑफ़िस की फ़ाइलें पकड़े घर में बच्चों को संभालनेवाली या फिर कंपनी की मीटिंग में व्यस्त रहनेवाली… आख़िर किस तरह की पत्नी (Wife) चाहते हैं आज के पुरुष (Men)? यह प्रश्‍न आज निश्‍चित तौर पर महत्वपूर्ण है और चर्चा का विषय भी.

Working Women Or Housewife

समाज बदला… परिवार बदले… साथ ही परिस्थितियां भी बदली हैं. इन बदलावों ने समाज में स्त्री की भूमिका ही बदल दी है. आज की स्त्री एजुकेटेड है, स्मार्ट है, करियर वूमन है… अब वो घर की ज़िम्मेदारियों के साथ ही बाहर की ज़िम्मेदारियां भी बख़ूबी निभा रही है, क़ामयाबी की नई बुलंदियों को छू रही है, लेकिन पुरुष को उनका ये नया रूप कितना पसंद आ रहा है? वे वर्किंग पत्नी चाहते हैं या घरेलू पत्नी, ये जानने के लिए हमने कुछ पुरुषों से बातचीत की.

दोनों का काम करना ज़रूरी है

प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहे सुरेश जोशी कहते हैं, “मेरी पत्नी स्कूल में पढ़ाती है. हालांकि यह काम बहुत मुश्किल तो नहीं है, फिर भी समय तो देना ही पड़ता है. वो समय, जो घर-परिवार व बच्चों का है. पर क्या करें, आजकल आर्थिक बोझ इतना बढ़ गया है कि दोनों का काम करना ज़रूरी है. पुरुषों को पसंद हो या न हो, महिलाओं का काम करना आज की ज़रूरत है. फिर भी मेरी व्यक्तिगत राय पूछें, तो मुझे लगता है कि घर-परिवार को बांधकर रखने के लिए स्त्री की ज़रूरत घर में ज़्यादा होती है.”

चाय भी ख़ुद बनानी पड़ती है

ऐसा सोचनेवाले जोशी अकेले नहीं हैं. बैंक में जॉब करनेवाले आदित्य की भी कुछ ऐसी ही सोच है. वे बताते हैं, “आप जब ऑफ़िस से थके-हारे घर आएं और आपको घर का दरवाज़ा ख़ुद ना खोलना पड़े, तो कितना अच्छा लगता है. दिनभर ऑफ़िस की समस्याओं को झेलने के बाद शाम को घर पर पत्नी का मुस्कुराता हुआ चेहरा नज़र आए तो सारी परेशानियां और थकान अपने आप भाग जाती हैं, लेकिन दुख की बात यह है कि आजकल ऑफ़िस से घर आने के बाद चाय भी ख़ुद ही बनानी पड़ती है. ऑफ़िस की चिंताएं, ऑफ़िस की थकान घर आकर भी दूर नहीं होती. दूसरे दिन फिर उन्हीं सारी चिंताओं के साथ ऑफ़िस जाना पड़ता है. पत्नी के लिए भी घर और ऑफ़िस को एक साथ संभालना मुश्किल होता है.”

ज़रूरत न हो, तो बेहतर है स्त्री घर पर ही रहे

इन्हीं विचारों का समर्थन करते हुए मंगेश कहते हैं, “सबसे ज़रूरी बात है स्त्री और पुरुष के बीच संतुलन बने रहना. इसके लिए स्त्री का समझदार होना आवश्यक है. अगर किसी प्रकार की ज़रूरत ना हो, तो बेहतर है कि स्त्री घर पर ही रहे. हाउसवाइफ़ होना कोई शर्म की बात नहीं है. स्त्री को इस मानसिकता से बाहर निकलना  पड़ेगा. वे जो घरेलू काम करती हैं, उस पर उन्हें गर्व होना चाहिए. रही बात उनकी क़ाबिलियत की, तो वे अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का उपयोग घर-परिवार और समाज की बेहतरी के लिए कर सकती हैं. अगर पत्नी-पति में से किसी एक का बाहर जाना ज़रूरी है, तो किसी एक का घर में रहना भी उतना ही ज़रूरी है. स्त्री के बाहर जाने से पुरुषों को घर में कई सारी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है, जिसे कभी-कभी वे हैंडल नहीं कर पाते.”

घर की सारी व्यवस्था चरमरा जाती है

अहमद शेख बताते हैं कि अगर स्त्री घर से बाहर जाती है, तो घर की सारी व्यवस्था ही चरमरा जाती है. घर की देखभाल स़िर्फ और स़िर्फ एक स्त्री ही अच्छी तरह कर सकती है. यह काम किसी पुरुष के बस की बात नहीं है. समाज और घर में स्त्री की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. तो यह था सिक्के का एक पहलू, अगर दूसरी ओर गौर करें, तो चीज़ें काफ़ी अलग दिखाई देंगी. दूसरे पहलू में आप पाएंगे कि पुरुषों ने इस बदलाव में अपने आपको बहुत अच्छी तरह से ढाल लिया है.

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Housewife
महिलाओं की भी अपनी ज़िंदगी है

एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले ए. मुरली कहते हैं, “हमें इस बदलाव को नकारात्मक रूप में नहीं लेना चाहिए. यह एक अच्छी शुरुआत है. हमारी सामाजिक व्यवस्था हमेशा से पुरुष प्रधान रही है. उसे बदलने की ज़रूरत है. बदलते समय के साथ हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी, क्योंकि आज महिलाओं की अपनी ज़िंदगी है, उनका अपना करियर है और उनके अपने सपने भी हैं. केवल अपने आराम के लिए उनके सपनों को दांव पर लगाना तो ठीक नहीं. मैं अपनी पत्नी के बाहर काम करने से बहुत ख़ुश हूं. वह अपने टैलेंट का, अपनी क़ाबिलियत का सही उपयोग कर रही है.”

बदलाव का स्वागत करें

कुछ ऐसी ही सोच रखने वाले पूनेंद्र शाह बताते हैं, “आप दिनभर के लिए घर से बाहर रहते हैं. ऐसे में अगर आपकी पत्नी को बैंक, नेट आदि बाहर के काम आते हों, तो आपका भार काफ़ी हद तक कम हो जाएगा. इस तरह का व्यावहारिक ज्ञान अगर स्त्रियां बाहर जाएं, तो ही उन्हें मिल सकता है. आजकल स्त्रियां भी पुरुषों की तरह शिक्षा प्राप्त करती हैं. फिर घर में रहकर उस शिक्षा को व्यर्थ जाने देना मूर्खता है. समाज में आ रहे इस बदलाव का स्वागत करना चाहिए.”

स्त्रियां कोई रचनात्मक कार्य करें

पवन कुमार के अनुसार, “घर में रहकर सास-बहू सीरियल्स देखकर अपनी मानसिकता ख़राब करने से अच्छा है कि घर से बाहर निकलकर स्त्रियां कोई रचनात्मक काम करें. अपनी बुद्धि की धार को तेज़ करें. हां, इसके लिए हम पुरुषों को घर के कामकाज में उनका हाथ बंटाना पड़ेगा.”

समाज स्त्री और पुरुष दोनों के कंधों पर टिका है

समाजशास्त्री कमल शर्मा के अनुसार, समाज की प्रगति में स्त्री की भूमिका अहम् है, इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता. स्त्री और समाज एक-दूसरे के पूरक हैं . स्त्री के जीवन में आए बदलाव समाज में बदलाव लाते हैं. पिछले कुछ सालों में स्त्री की भूमिका में काफ़ी बदलाव आया है. साथ ही सामाजिक व्यवस्था में भी कई तरह के बदलाव आए हैं. हमारे परिवार संयुक्त से एकल हो गए हैं. ऐसे में परिवार में सदस्य भी कम हो गए हैं. जहां पुरुषों पर आर्थिक भार बढ़ा है, वहीं स्त्रियों पर बाल-बच्चों, पति और घर की ज़िम्मेदारी का बोझ बढ़ा है. ना चाहते हुए भी कभी-कभी स्त्री को बाहर काम करने जाना पड़ता है, पर इसके साथ घर की ज़िम्मेदारियां, तो कम नहीं होतीं. इस भार से स्त्रियों में अवसाद या चिड़चिड़ापन आ सकता है, जो घर और समाज के संतुलन को बिगाड़ सकता है. अगर ऐसे में पुरुष स्त्री का हाथ थाम लें, तो बातें सुलझ सकती हैं. दूसरी बात स़िर्फ अपनी ज़िद या फिर ़फैशन या फिर किसी झूठी स्पर्धा या मान-सम्मान  के लिए बाहर काम पर जाना ख़ुद स्त्री के व्यक्तित्व के लिए भी हानिकारक हो सकता है. समाज स्त्री और पुरुष दोनों के कंधों पर टिका है, इसलिए समाज के इन दोनों ही घटकों को समझदारी से इस साझेदारी को निभाना चाहिए.

 

– विजया कठाले

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कहीं आप कंप्लेन बॉक्स तो नहीं? (Don’t Be A Complain Box)

दुखी आत्मा या फिर रोने की मशीन… अक्सर हमारा सामना ऐसे लोगों से होता है, जो हर व़क्त स़िर्फ शिकायत (Complain) करते रहते हैं. घर-परिवार, दोस्त, रिश्तेदार, ऑफिस कलीग्स से लेकर क़िस्मत और भगवान से भी उन्हें बहुत-सी शिकायतें होती हैं. क्यों करते हैं लोग इतनी शिकायत और क्या होता है इसका परिणाम, आइए जानते हैं..

Complain Box

किसी ने कहा है कि कंप्लेन करना एक संक्रामक बीमारी की तरह है, जो हमारी ख़ुशियों के साथ-साथ  हमारे रिश्ते, सेहत और सफलता को बर्बाद कर देती है. और सबसे बड़ी बात यह कि अक्सर कंप्लेन करनेवाले को यह एहसास ही नहीं होता कि वह एक कंप्लेन बॉक्स बन चुका है.

क्यों करते हैं लोग शिकायत?

शिकायत तो हर कोई करता है, पर जब आपकी हर बात शिकायत और शिकायती लहज़े से शुरू हो, तो आप दूसरों से अलग हो जाते हैं. एक्सपर्ट्स की मानें, तो यह बहुतों की आदत में शुमार होता है. ज़रूरी नहीं कि वो हर व़क्त दुखी हो, पर ख़ुशी के पलों में भी वो किसी अनहोनी की आशंका में ही शिकायत करते रहते हैं.

अटेंशन पाने के लिए

कुछ लोगों को हमेशा सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बने रहना अच्छा लगता है. उन्हें लगता है कि हर कोई स़िर्फ उन पर ध्यान दे, उनके बारे में ही सोचे और बात करे और जब ऐसा नहीं होता, तब वो अपना रोना शुरू कर देते हैं. मेरे पास इसके लिए समय नहीं है, मेरे पास उसके लिए समय नहीं है, मैं क्या करूं? जैसे कि दुनिया के बाकी लोगों के पास रोज़ाना 48 घंटे हैं और इन्हें स़िर्फ 24 घंटे मिले हैं.

ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए

कुछ लोगों को किसी भी चीज़ की ज़िम्मेदारी लेनी ही नहीं होती है. हर काम के लिए इस तरह कंप्लेन करते हैं कि जैसे दुनिया का सबसे कठिन काम उन्हें दे दिया गया हो. काम कर तो देंगे, पर उसकी ज़िम्मेदारी ख़ुद नहीं लेंगे.

अपनी कमियों को छुपाने के लिए

ज़्यादातर लोग अपनी कमियों को छुपाने के लिए कंप्लेन करते हैं. काम समय पर न पूरा होने के लिए पूरे ब्रह्मांड को ज़िम्मेदार ठहरा देंगे कि इसकी वजह से ही ऐसा हुआ, उसकी वजह से वैसा हुआ.

नकारात्मक सोच

ज़्यादा शिकायतें वही लोग करते हैं, जिन्हें सब में कमियां ही दिखाई देती हैं. दरअसल, उनकी सोच ही नकारात्मक होती है, इसलिए उन्हें हर जगह कमी ही नज़र आती है.

आत्मतुष्टि के लिए

शिकायत करनेवाले इसे आत्मतुष्टि का एक ज़रिया बना लेते हैं. ख़ुद को समझाने के लिए कि मेरी कोई ग़लती नहीं, बल्कि सारी ग़लती सामनेवाले की ही है, क्योंकि सारी कमियां उसी में हैं.

वो उससे कहीं ज़्यादा के हक़दार हैं

इन्हें हमेशा इस बात की शिकायत रहती है कि इन्हें बाकी लोगों से बहुत कम मिला है, जबकि वे इससे कहीं ज़्यादा अच्छी सैलरी, ज़्यादा अच्छी जॉब, ज़्यादा ख़ुशियों और सब कुछ ज़्यादा पाने के हक़दार हैं. आप इनके लिए कुछ भी कर दें, फिर भी इन्हें अपना सब कुछ दूसरों से कम ही लगेगा.

मैं ही सबसे अच्छा काम कर सकता हूं

अपने आइडियाज़ को ही सबसे आगे रखना और अपनी बात को सही साबित करने के लिए दूसरों को नीचा दिखाना, दूसरों के आइडियाज़ में कमी निकालना, अपने आगे दूसरों को न गिनना इनकी आदत में शुमार होता है.

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Complain Box

कहीं आप में तो नहीं ये लक्षण?

–     कंप्लेन बॉक्स को ग्लास हमेशा आधा खाली नज़र आता है. क्या आपको भी दूसरों में स़िर्फ कमियां नज़र आती हैं?

–     मज़ाक-मज़ाक में लोग आपको जताने की कोशिश करने लगे हैं कि आप हमेशा शिकायत ही करते रहते हैं.

–     अगर आपके दोस्त आपके साथ समय बिताने से कतराने लगे हैं, तो समझ जाइए कि आपकी कंप्लेन करने की आदत से वो ऊब चुके हैं.

–     आपको अपने चारों तरफ़ स्ट्रगल ही दिखाई देता है.

–     हर तरफ़ रुकावटें आपको आगे बढ़ने से रोकती हैं. अगर आपको लगता है कि आप में भी ये लक्षण हैं, तो अभी इस ओर ध्यान देना शुरू करें.

टॉक्सिक है हर व़क्त का रोना 

–    कंप्लेन करने से चीज़ें बद से बदतर लगने लगती हैं.

–     यह आपकी सेहत के लिए नुक़सानदायक है, क्योंकि आपको मानसिक शांति और सुकून नहीं मिलता.

–     हर व़क्त शिकायत करते रहने से आपकी एनर्जी ख़त्म होती रहती है, जिससे आप थका हुआ महसूस करते हैं.

–     यह आपकी आदत में शुमार हो जाता है.

–     आपका सब कॉन्शियस माइंड आपको हर नई चीज़ में निगेटिविटी दिखाने लगता है.

–     हमेशा शिकायत करते रहने से आप नाउम्मीद हो जाते हैं. हर तरफ़ निराशा नज़र आती है.

–     यह क्रिएटिविटी को बुरी तरह प्रभावित करती है, जिससे आप क्रिएटिव काम करने की बजाय कामचलाऊ काम शुरू कर देते हैं.

–     आप कोई भी नया काम करने से कतराने लगते हैं, इसलिए नए और क्रिएटिव आइडियाज़ को सिरे से ख़ारिज कर देते हैं.

–     यह आपके चेहरे की ख़ुशी और उत्साह-उमंग छीन लेता है.

कैसे कम करें शिकायत करना?

–     अपनी सोच बदलें. हालांकि यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल. भले ही हम एक पल के लिए निश्‍चय करें, पर कुछ देर बाद ही शिकायत करने लगेंगे. इसमें थोड़ा व़क्त लगेगा, इसलिए धैर्य रखें और रोज़ाना प्रैक्टिस करें.

–     शुरू-शुरू में नकारात्मक सोच को कंट्रोल करने में व़क्त लगेगा. लगातार निगेटिव फीलिंग्स को न दबाएं, बल्कि किसी से शेयर कर लें.

–     अपने माइंड और बॉडी को कंट्रोल करने के लिए योग व मेडिटेशन का सहारा लें.

–     कोशिश करें कि लोगों के बारे में बहुत जल्दी राय कायम न करें. दूसरों को जानने-समझने के बाद ही उनके बारे में राय बनाएं.

–     एक लिस्ट बनाएं, जिसमें उन सभी का ज़िक्र करें, जिसके लिए आप ईश्‍वर के शुक्रगुज़ार हैं. इससे आप अच्छा महसूस करेंगे.

–     जिस बदलाव की उम्मीद आप दूसरों से कर रहे हैं, उसकी शुरुआत ख़ुद से करें.

–     अगर कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो या तो उसे सुलझा लें या फिर मान लें कि इस समय इसका हल नहीं निकल पा रहा है. अपने काम की ज़िम्मेदारी लेना सीखें.

–    ख़ुश रहने की कोशिश करें. अगर आपको सबसे अधिक शिकायत अपनी जॉब से है, तो आपको जॉब बदलकर देखना चाहिए, शायद इससे आपको

ख़ुशी मिले.

–     वो सब करें, जिससे आप रिलैक्स होते हैं और आपको अच्छा फील होता है.

–     ख़ुद से यह वादा करें कि आप जब भी बोलेंगे, सकारात्मक ही बोलेंगे. कोशिश करेंगे कि नकारात्मक बातों को ख़ुद पर हावी न होने दें.

–    अगर आप ख़ुद को इससे लड़ने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं, तो किसी एक्सपर्ट की मदद लेने में संकोच न करें.

  – सुनीता सिंह

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जानें सेक्स के 7 हेल्दी कारण (7 Healthy Reasons You Should Have Sex)

अपनी रंगत में निखार लाना चाहते हैं या मूड ठीक करना चाहते हैं या फिर कैंसर और हार्ट अटैक के ख़तरे से ख़ुद को बचाना चाहते हैं, तो उसके लिए सबसे जादुई दवाई है सेक्स (Sex). जी हां, यह हम नहीं कहते, बल्कि स्टडी और रिसर्च ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि सेक्स न स़िर्फ एक बेहतरीन एक्सरसाइज़ है, बल्कि यह आपको कई गंभीर बीमारियों से बचा भी सकता है. आइए जानें कौन-से हैं वो 7 कारण, जो हर कपल को जानने चाहिए.

Healthy Reasons To Have Sex

1. हेल्दी हार्ट के लिए बेस्ट एक्सरसाइज़

अमेरिकन जरनल ऑफ कार्डियोलॉजी में छपी स्टडी के मुताबिक जो लोग हफ़्ते में दो बार सेक्स करते हैं, वो स्ट्रोक और हार्ट अटैक क ख़तरों से उन लोगों से ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं, जो महीने में स़िर्फ एक बार सेक्सुअली इंवॉल्व होते हैं. दरअसल, सेक्स के दौरान औरतन पुरुष एक मिनट में 4 जहां चार कैलोरीज़ बर्न करते हैं, वही महिलाएं तीन कैलोरीज़ यानी आधे घंटे की आपकी सेक्सुअल एक्टिविटी में आप एक ट्रेडमिल पर दौड़ने से ज़्यादा कैलोरीज़ बर्न कर लेते हैं, वो भी फन के साथ. यह बात तो कई रिसर्च में साबित हो चुकी है कि सेक्स एक बेहतरीन एक्सरसाइज़ है, तभी तो हेल्दी हार्ट के लिए इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता.

2. बेहतरीन पेनकिलर का काम करता है

कैलीफोर्निया में हुई यह एक स्टडी में यह साबित हुआ कि दर्द के दौरान अगर पार्टनर की रोमांटिक फोटो दिखाई जाए या किसी हैंडसम अजनबी को देखें, तो दर्द से काफ़ी राहत मिलती है. वहीं दूसरी ओर पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द से राहत पाने के लिए अगर उस दौरान आप सेक्सुअली इंवॉल्व होती हैं, तो दर्द में काफ़ी राहत मिलती है. दरअसल, सेक्स ऑर्गैज़्म एक पेनकिलर की तरह काम करता है, तभी तो सिरदर्द के दौरान अगर सेक्स किया जाए, तो सिरदर्द को छूमंतर होने में व़क्त नहीं लगता.

3. ब्लड प्रेशर को कम करके स्ट्रेस से दूर रखता है

सेक्स के दौरान शरीर में एंडॉर्फिन हार्मोन का स्राव होता है, जो मूड को बूस्ट करने में मदद करता है. स्कॉटलैंड की बायोलॉजिकल सायकोलॉजी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सेक्स के कारण स्ट्रेस के दौरान बढ़नेवाले ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में किया जा सकता है. स्टडी में इस बात पर भी फोकस किया कि ज़रूरी नहीं कि आप सेक्सुअली इंवॉल्व हों, अगर आप मास्टबेशन भी करते हैं, तो भी आपको तनावरहित रखता है, जिससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.

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Healthy Reasons To Have Sex
4. प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे से बचाता है

यूरोपियन यूरोलॉजी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जो पुरुष महीने में 21 बार इजैक्यूलेट करते हैं, वो प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे से उन लोगों से 20% ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं, जो महीने में चार-से-सात बार इजैक्युलेट करते हैं. पुरुषों के लिए इजैक्यूलेशन के मायने कितने हैं यह तो इसी बात से पता चलता है कि यह उन्हें प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे से बचा सकता है.

5. मिलती है सुकूनभरी नींद

नेशनल स्लीप फाउंडेशन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऑर्गैज़्म के बाद हमारे शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे हमें बहुत अच्छी नींद आती है. आपने भी ग़ौर किया होगा कि सेक्सअल एक्टिविटी के बाद आप और आपके पार्टनर कैसे सुकूनभरी नींद के आगोश में समा जाते हैं और अगली सुबह रिफ्रेश व खिले-खिले नज़र आते हैं. इसका दूसरा पहलू यह भी है कि आप जितनी अच्छी नींद लेते हैं, आपकी सेक्सुअल डिज़ायर उतनी ही अच्छी होती है.

6. पाएं ग्लोइंग-यंग स्किन

अगर अब आप सोचते थे कि कपल्स के चेहरे की चमक का कारण स़िर्फ हेल्दी फूड और एक्सरसाइज़ है, तो आपको बता दें कि इसमें बहुत बड़ा योगदान सेक्स का भी है. सेक्स के दौरान ऑर्गैज़्म शरीर में ब्लड फ्लो की मात्रा बढ़ा देता है, जिससे चेहरे में निखार साफ़ नज़र आता है. यह आपके तनाव को दूर करके आपके मूड को बेहतर बनाता है.

7. हैप्पी मूड से बनता है मज़बूत रिलेशन

हेल्दी सेक्स के कारण शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर्स रिलीज़ होते हैं, जिससे आपका मूड बेहतरीन होता है. केमिकल्स और हार्मोंस को छोड़ दें, तो हेल्दी सेक्स आपके रिश्ते को और मज़बूत बनाता है. अपनी मैरिड लाइफ को और ख़ुशहाल और रोमांचक बनाने के लिए हेल्दी सेक्स लाइफ एंजॉय करें.

– अनीता सिंह   

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रिश्तों की बीमारियां, रिश्तों के टॉनिक (Relationship Toxins And Tonics We Must Know)

रिश्ते (Relationships) जीने के आधार हैं… मुहब्बत की शीतल बयार हैं, पर जब इन्हीं रिश्तों में शक, ईर्ष्या, अविश्‍वास की बीमारियां फैलने लगती हैं, तब जीना दूभर हो जाता है. तो क्यों न प्यार, विश्‍वास, समझदारी जैसे टॉनिक से इन बीमारियों को दूर किया जाए और रिश्तों में मुहब्बत की मिठास घोली जाए.

Relationship Toxins And Tonics

आज जहां एक ओर दुनिया सिमट रही है, वहीं दूसरी ओर रिश्ते और परिवार टूट रहे हैं. एक-दूसरे के प्रति हमारी संवेदनाएं कम होती जा रही हैं. हमारी व्यस्तताएं, हमारे अवसादों की छाया हमारे रिश्तों पर दिखने लगी है. नतीज़तन रिश्ते अपना औचित्य, अपनी गरिमा खोते जा रहे हैं. इन सबके बीच हम यह भूल जाते हैं कि स्वस्थ रिश्ते एक परिपक्व समाज की दरक़ार हैं. इसलिए सबसे ज़रूरी यह है कि हम यह जानें कि हमारे रिश्ते किन बीमारियों से जूझ रहे हैं यानी वे कौन-सी भावनात्मक बीमारियां हैं, जो रिश्तों को खोखला कर रही हैं. साथ ही रिश्तों से जुड़े उन पहलुओं के बारे में भी जानें, जो रिश्तों की इन बीमारियों को दूर करने में टॉनिक का काम करती हैं.

रिश्तों की बीमारियां

शक और अविश्‍वास

जी हां, रिश्ते की सबसे बड़ी व भयंकर बीमारी है शक. किसी भी रिश्ते में ख़ासकर पति-पत्नी के रिश्ते में अगर शक पनपने लगे, तो समझ लीजिए कि आपके रिश्ते को आई.सी.यू. की ज़रूरत है. शक या संशय के साथ किसी भी रिश्ते को ़ज़्यादा दिनों तक नहीं निभाया जा सकता. आप जिस व्यक्ति या रिश्ते पर शक कर रहे हैं, उससे आप कभी प्रेम या जुड़ाव नहीं कर पाएंगे. यदि आप किसी रिश्ते से बंधे हैं, तो आपको चाहिए कि उसे पूरे दिल से स्वीकार करें. यदि आपको किसी पर अविश्‍वास है, तो इसका मतलब है कि आपके रिश्ते में खटास है और उस रिश्ते को आपने पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है. अविश्‍वास किसी भी रिश्ते के लिए घातक है. फिर चाहे बात मां-बेटी की होे, सास-बहू की या फिर ननद-भाभी की.

द्वेष या जलन

किसी से द्वेष या जलन की भावना जहां एक ओर आपको आपके प्रियजनों से दूर करती है, वहीं दूसरी ओर आपके व्यक्तित्व को भी ख़राब करती है. किसी से द्वेष या जलन की भावना बीमारी होने से ज़्यादा बुरी है. यह आदत आपके किसी एक रिश्ते को नहीं, बल्कि सारे रिश्तों को बीमार कर सकती है. आप किसी एक से जलना शुरू करेंगे और फिर धीरे-धीरे आप हर किसी से जलने लगेंगे.

बेवफ़ाई

किसी भी रिश्ते में बेवफ़ाई या बेईमानी उस रिश्ते की ज़ड़ों को ही खोखला कर देती है. किसी के विश्‍वास और प्रेम को ठेस पहुंचाकर कोई रिश्ता नहीं निभाया जा सकता.

क्रोध

क्रोध रिश्तों की उम‘ को कम करता है. क्रोध से रिश्तों में दूरियां आती हैं. क्रोधित व्यक्ति अक्सर ग़ुस्से में रिश्तों की मान-मर्यादाओं को भूल जाता है.

अभिमान या ईगो

हमेशा याद रखें कि आत्मसम्मान और ईगो दो अलग-अलग चीज़ें हैं, इसलिए रिश्ते निभाने में किसी भी ज़िम्मेदारी को ईगो या झूठी प्रतिष्ठा से न जोड़ें, जैसे- “हमेशा मैं ही क्यों फ़ोन करूं, वह क्यों नहीं फ़ोन करता या करती.” “हमेशा मैं ही क्यों माफ़ी मांगू.” आदि.

अपेक्षाएं

रिश्तों में अपेक्षाओं का होना स्वाभाविक है और रिश्ते को ज़िंदा रखने के लिए कुछ हद तक ये ज़रूरी भी है. लेकिन अपेक्षाएं जब हद से ़ज़्यादा बढ़ जाएं तो यह किसी बीमारी से कम नहीं. अपेक्षाओं का बोझ बढ़ने से रिश्ते दम तोड़ देते हैं.

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Relationship Tonics

रिश्तों के टॉनिक

प्रेम

जिस रिश्ते में निःस्वार्थ व निश्छल प्रेम है, उस रिश्ते को किसी और टॉनिक की ज़रूरत ही नहीं. जिस रिश्ते में प्रेम है, उस रिश्ते की उम‘ अपने आप बढ़ जाती है. प्रेम हर रिश्ते को ख़ुशनुमा व तरोताज़ा बनाए रखता है.

समय

रिश्तों को समय देना बहुत ज़रूरी है. आप अपने रिश्तों को कितना समय देते हैं, उससे यह तय होता है कि वह रिश्ता आपके लिए कितना मायने रखता है. एक-दूसरे के साथ, परिवार के साथ समय बिताने से रिश्तों में प्रेम व विश्‍वास बढ़ता है.

विश्‍वास

एक समृद्ध रिश्ते के लिए आपसी विश्‍वास होना बेहद ज़रूरी है. विश्‍वास दोनों तरफ़ से होना चाहिए. रिश्तों में विश्‍वास होने का मतलब है कि आपका कोई भी रिश्ता फल-फूल
रहा है.

संयम

रिश्तों को कभी-कभी विषम परिस्थितियों से भी गुज़रना पड़ता है, ऐसे में संयम बरतें. यदि कोई एक अपना विवेक खोता भी है, तो दूसरा अपना संयम बनाए रखे, ताकि आपके रिश्ते में दरार न प़ड़े.

समझदारी

किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए परिपक्व विचारों की आवश्यकता होती है. एक-दूसरे की भावनाओं और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करें. हर साझेदारी को पूरी समझदारी से निभाएं. इस तरह रिश्ते की हर छोटी-मोटी समस्या को आप समझदारी से सुलझा सकते हैं.

स्पेस

कुछ समय पहले तक शायद इस टॉनिक की ज़रूरत रिश्तों को नहीं थी, पर आज के बदलते परिवेश में इसकी ज़रूरत हर रिश्ते में है. हर रिश्ते में एक-दूसरे के स्पेस का हमें आदर करना चाहिए. एक-दूसरे के मामलों में ज़्यादा हस्तक्षेप न करें. आज हर किसी को ख़ुद के लिए कुछ स्पेस की ज़रूरत है और इसमें कुछ ग़लत नहीं है. आप अपने रिश्ते को जितनी स्पेस देंगे, उतनी ही उनमें घुटन कम होगी.

इन सबसे ़ज़्यादा ज़रूरी है कि आप में किसी रिश्ते को निभाने की दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए, ताकि आप उन रिश्तों को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयत्न कर सकें. आप जिनके साथ रिश्ता बांट रहे हैं, उनका आदर, उनकी भावनाओं का आदर, उनके व्यक्तित्व का आदर करें. किसी भी रिश्ते को  टूटने न दें, क्योंकि हर रिश्ता अनमोल है.

– विजया कठाले निंबधे

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प्यार, सेक्स, कमिटमेंट… कितना बदला रिश्ता! (Love, Sex, Commitment- Changing Concepts Of Relationship)

एक लफ़्ज़, जिसकी पाकीज़गी को शिद्दत से महसूस किया जाता था… प्यार! एक एहसास, जिसे मुहब्बत के ख़ूबसूरत स्वरूप के रूप में साकार किया जाता था… सेक्स! एक अनकहा साथ, जिसे ताउम्र ही नहीं, सात जन्मों का बंधन कहा जाता था… कमिटमेंट! लेकिन समय के साथ और बदलते परिवेश ने इन तमाम शब्दों की परिकल्पना और हक़ीक़त को पूरी तरह से बदल डाला है. आज के संदर्भ में प्यार का मतलब आकर्षण! आज की तारीख़ में सेक्स का मतलब शारीरिक भूख! आज के युग में कमिटमेंट का मतलबमहज़ बेव़कूफ़ी!

Relationship

बदलते समाज की बदलती तस्वीर...

जी हां, यही सच्चाई है कि रिश्तों को सार्थक व पूर्ण करते इन तीनों शब्दों का अर्थ आज पूरी तरह बदल चुका है. बीते व़क्त की बात करें, तो काफ़ी कुछ सहज था. सबके काम व ज़िम्मेदारियां भी बंटी हुई थीं. रिश्तों को लेकर भी मर्यादा व अनुशासन था. प्यार को पवित्र अर्थों में देखा जाता था. जिससे प्यार किया, उसके साथ ही सेक्स करने की बात सोची जाती थी और उसी के साथ शादी के बंधन में बंधकर ज़िंदगीभर उस रिश्ते को प्यार से निभाने का संकल्प भी लिया जाता था.

लेकिन आज ऐसा नहीं है. प्यार को लोग महज़ आकर्षण समझते हैं, जो तब तक ही निभाया जाता है, जब तक कि यह आकर्षण एक-दूसरे के प्रति बरक़रार रहता है. सेक्स के लिए भी अब कमिटेड रिश्ते में बंधने की ज़रूरत नहीं है. सेक्स तो शरीर की डिमांड है, जब ज़रूरत हो, तब कर लो. अगर पार्टनर साथ नहीं है, तो जो मन को भा जाए, उसके साथ कर लो. यही हाल कमिटमेंट का है कि रिश्ते तो बनाते हैं लोग, पर नो गारंटीवाले रिश्ते. कब तक चलेंगे, कह नहीं सकते.

इन रिश्तों और शब्दों के मायने बदलने के कई कारण हैं…

–     हमारा समाज बदल चुका है और उसी के साथ लोगों की सोच भी.

–     अब लोग कमिटमेंट करना ही नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें ख़ुद नहीं पता होता कि रिश्ता कब तक चलेगा और कितना टिकेगा.

–     लाइफ फास्ट हो गई है और इस बदलती लाइफस्टाइल का सबसे ज़्यादा असर हमारे रिश्तों पर ही पड़ रहा है.

–     पहले एक-दूसरे के लिए पार्टनर्स एडजेस्टमेंट्स करते थे, अपनी चाहतों को छोड़कर पार्टनर की ख़्वाहिश को पूरा करने की कोशिशें करते थे. उसके सपनों में ही अपने ख़्वाबों को साकार होता देखते थे… और यह सब वो ख़ुशी-ख़ुशी करते थे.

–     वहीं अब सभी लोग सेल्फ सेंटर्ड होते जा रहे हैं. अपनी ख़ुशी, अपने सपने, अपनी ख़्वाहिशें… भले ही वो रिश्ते में भी हों, पर वहां भी अपनी-अपनी अलग ज़िंदगी ही जी रहे होते हैं.

–     स्पेस के नाम पर एक तय दूरी बनाए रखते हैं. कोई किसी के फोन को, ईमेल को या लैपटॉप को खोल नहीं सकता.

–     एक-दूसरे के पासवर्ड्स नहीं पता होते. एक-दूसरे के सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता होता.

–     ऐसे में कमिटमेंट और प्यार की जगह ही कहां बचती है.

–     रही सेक्स की बात, तो अब सेक्स को लेकर भी बहुत कैज़ुअल हो गए हैं. आजकल ज़रूरी नहीं कि पार्टनर के साथ ही सेक्स हो.

–     ज़रूरी नहीं कि शादी के बाद ही सेक्स हो.

–     क्योंकि शादी तक कौन इंतज़ार करे और क्या पता शादी कब और किससे हो?

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Couple Goals

–     ऐसे में सेक्स के एहसास से अछूता क्यों रहा जाए?

–     एक्सपोज़र इतना बढ़ गया है कि आजकल सब कुछ आसानी से उपलब्ध है.

–     बच्चों की परवरिश के तौर-तरी़के भी बदल गए हैं.

–     पैरेंट्स की सोच बदल गई है, तो भला संस्कार भी पहले जैसे कैसे रहेंगे, उनमें भी बदलाव लाज़िमी है.

–     फ्री सेक्स का कॉन्सेप्ट आज की जेनरेशन को ज़्यादा सुविधाजनक लगता है, जिसमें न प्यार की भावनाओं का पहरा और न ही कमिटमेंट का बंधन.

–     भावनाएं और कमिटमेंट में बहनेवालों को आज की तारीख़ में बेव़कूफ़ समझा जाता है और इनसे परे जो लोग हैं, उन्हें स्मार्ट कहा जाता है.

–     ऐसा नहीं है कि स़िर्फ लड़के ही ऐसी सोच रखते हैं, लड़कियां भी इसी तरह की सोच को तवज्जो देती हैं.

–     वो भी प्रैक्टिकल होने और लाइफ के प्रति प्रैक्टिकल अप्रोच रखने में ही ज़्यादा विश्‍वास करती हैं.

–     उनके लिए भी करियर और पैसा, प्यार और कमिटमेंट से ज़्यादा महत्वपूर्ण है. वो रिश्तों में भी भावनाएं नहीं अपनी सुविधाएं ढूंढ़ती हैं.

–     अपनी मर्ज़ी से जीने का शग़ल, न कोई कमिटमेंट, न कोई स्ट्रगल… हां, स्ट्रगल अगर करियर और पैसों के लिए हो, तो कोई बात नहीं, पर रिश्तों के लिए यह वेस्ट ऑफ टाइम है.

–     रिश्ता निभे तो ठीक, वरना उसे लंबे समय तक ढोना समझदारी नहीं.

–     पर रिश्ता निभाने के लिए दोनों ही तरफ़ से कोई अतिरिक्त प्रयास की गुंजाइश आज नहीं है.

–     पहले लड़कियां यह प्रयास करती थीं और आज भी कुछ लोग हैं, जो पूरी तरह प्रैक्टिकल नहीं हुए हैं, पर अब जब लड़कियों के भी प्रयास कम हो गए, तो रिश्तों से प्यार और कमिटमेंट गायब हो गया.

–     लड़कों की ओर से न पहले प्रयास होते थे और न आज ही कोशिशें होती हैं.

–     तो प्यार और कमिटमेंट के बिना अब स़िर्फ सेक्स ही रह गया है, वो भी जब मूड हो और जिसके साथ मूड हो.

–     एक ही पार्टनर के साथ अब सेक्स उबाऊ लगने लगा है. लोग अपनी लाइफ में स्पाइस ऐड करने के लिए शादी के बाहर भी सेक्स करने से परहेज़ नहीं करते.

–     शादी में तो वैसे भी एक्साइटमेंट नहीं रह गया. कुछ समय बाद सब कुछ रूटीन लगने लगता है और फिर उस पर डबल इंकम नो सेक्स का बढ़ता कॉन्सेप्ट, क्योंकि पार्टनर के साथ सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     ऐसे में जब सेक्स का मन हो, तो जो मिले उसके साथ कर लो.

–     ऐसा भी है कि पहले समाज का एक डर और परिवार का बंधन भी था, जो लोगों को मनमानी से रोकता था. यही अनुशासन कहलाता था.

–     पर आज यह डर भी ख़त्म होता जा रहा है, क्योंकि घर, परिवार, पैरेंट्स और समाज ने भी इस बदलाव को कुछ हद तक स्वीकार कर लिया है.

–     यूं भी हर कोई आत्मनिर्भर है, तो वो किसी भी रोक-टोक को अनुशासन न समझकर अपनी निजी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी मानते हैं.

–     सभी का यही कहना होता है कि यह उनकी ज़िंदगी है, चाहे जैसे जीएं.

–     सोशल मीडिया ने भी बहुत हद तक इन रिश्तों और शब्दों के मायनों को बदलने में भूमिका निभाई है. लोग ऑफिस के बाद अब सबसे ज़्यादा यहीं बिज़ी रहते हैं और यहीं सुकून तलाशते हैं. जहां डिजिटल वर्ल्ड और फेक रिश्ते उन्हें ज़्यादा आकर्षित करते हैं. ऐसे में रियल वर्ल्ड के रिश्ते बोरिंग लगने लगते हैं और वहां प्यार और कमिटमेंट की जगह कम ही रह जाती है.

–     ऐसे में प्यार, सेक्स और कमिटमेंट का यह बदलता स्वरूप कुछ समय तक तो यूं ही रहनेवाला है.

यह स्वरूप अब भले ही सुविधाजनक लग रहा होगा, पर भविष्य में इसका ख़ामियाज़ा तो सभी को भुगतना पड़ेगा. जहां कहने को अपना कोई नहीं होगा, ऐसा कोई शख़्स कहीं नज़र नहीं आएगा, जिसके कंधे पर सुकून से सिर रखकर अपने ग़म भुला सकें. व्यावसायिक और ज़िंदगी की चुनौतियों के बीच कभी न कभी तो यह एहसास होगा ही कि कोई ऐसा हो, जिसे अपना कह सकें. जिसके साथ प्यार भी हो, कमिटमेंट भी और सेक्स भी उसी के साथ हो, क्योंकि प्यार और रिश्ते का सही मायनों में भी यही अर्थ होता है, बाकी सब व्यर्थ और अनर्थ ही है.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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साइलेंट मोड पर होते रिश्ते… (Communication Gap In Relationships)

ख़ामोशियां जब बात करती हैं, तो उनमें मुहब्बत की आवाज़ छिपी होती है… ये ख़ामोशियां मन को लुभाती हैं, ये ख़ामोशियां कभी-कभी बहुत भाती हैं, ये ख़ामोशियां गुदगुदाती हैं… लेकिन जब आपका रिश्ता (Relationship) ही ख़ामोश होने लगे, तब ये ख़ामोशियां रुलाती हैं… जी हां, आज के दौर की हक़ीक़त यही है कि हमारे रिश्तों में ख़ामोशी पसरने लगी है… हमारे संबंधों में अजीब-सी वीरानी पनप रही है… आख़िर क्यों साइलेंट मोड (Silent Mode) पर जा रहे हैं हमारे रिश्ते?

Relationships Problems

पहचानें रिश्तों की ख़ामोशियों को…

–     आप दोनों पास-पास होते हुए भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

–     डिनर टेबल हो या चाय का समय, आप दोनों के पास एक-दूसरे से बात करने के लिए कुछ होता ही नहीं.

–     अब न पहले की तरह फोन या मैसेजेस करते हैं, न ही सरप्राइज़ेस प्लान करते हैं.

–     बेडरूम में भी न रोमांस की जगह बची है, न ही पर्सनल बातों की.

–     सेक्स लाइफ भी पहले की तरह नहीं रही.

–     बात भले ही न होती हो, लेकिन वो कनेक्शन भी फील नहीं होता, जो पहले हुआ करता था.

–     एक-दूसरे के प्रति इतने कैज़ुअल हो गए हैं कि किसी के होने न होने से ज़्यादा फ़र्क़ ही नहीं पड़ता अब.

–     लड़ाई-झगड़े, वाद-विवाद भी अब नहीं होते.

–     आख़िरी बार साथ-साथ कहां बाहर गए थे या कौन-सी मूवी देखी थी, वो तक याद नहीं.

–     एक-दूसरे के साथ अब ज़िद भी नहीं करते.

–     पार्टनर की पसंद-नापसंद को अब तवज्जो नहीं दी जाती.

–     इसी तरह की कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जो यह महसूस करने के लिए काफ़ी हैं कि रिश्ते में ख़ामोशी ने जगह बना ली है.

क्या हैं वजहें?

–     लाइफस्टाइल फैक्टर बड़ी वजह है. पार्टनर्स बिज़ी रहते हैं.

–     समय की कमी भी एक कारण है, क्योंकि एक-दूसरे के साथ समय कम बिता पाते हैं.

–     प्राथमिकताएं बदल गई हैं. करियर, दोस्त, बाहरी दुनिया ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

–     सोशल मीडिया भी बड़ा कारण है. यहां का आकर्षण आपसी रिश्तों को काफ़ी प्रभावित करता है.

–    लोग अंजाने लोगों से कनेक्ट करके जो एक्साइटमेंट महसूस करते हैं, जो नयापन उन्हें लगता है, वो आपसी रिश्तों में नहीं महसूस होता. ये रिश्ते उन्हें बोझिल और उबाऊ लगने लगते हैं.

–     आजकल डिनर का टेबल हो या बेडरूम, शारीरिक रूप से वहां मौजूद भले ही हों, मानसिक व भावनात्मक रूप से वो कहीं और ही होते हैं.

–     कभी खाने की पिक्चर्स क्लिक करके शेयर करते हैं, तो कभी सेल्फी को कितने लाइक्स और कमेंट्स मिले, इस पर पूरा ध्यान रहता है.

–     ऐसे में रिश्तों के लिए समय ही नहीं रहता और न ही एनर्जी बचती है.

–     ऑफिस से थकने के बाद सोशल साइट्स उनके लिए रिफ्रेश होने का टॉनिक बन जाती हैं, जहां अपना बचा-खुचा समय व ऊर्जा बर्बाद करने के बाद किसी और चीज़ के लिए कुछ नहीं बचता.

–     इसके अलावा ऑफिस में भी कलीग्स के साथ दोनों समय ज़्यादा बिताते हैं, जिससे उनसे इमोशनल रिश्ता बन जाता है, जो अपने रिश्ते से कहीं ज़्यादा कंफर्टेबल और आकर्षक लगने लगता है.

–     पार्टनर्स को लगता है कि कलीग्स उन्हें बेहतर समझते हैं, बजाय पार्टनर के.

–    कई बार ये रिश्ते भावनात्मक रिश्तों से भी आगे बढ़कर शारीरिक संबंधों में बदल जाते हैं.

–     एक बार इस तरह के रिश्ते में बंध गए, तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल लगता है.

–     शुरुआत में अच्छा और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन आगे चलकर ज़िंदगी में बड़ी परेशानी हो सकती है.

–     ऐसे में अपने पार्टनर की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती, उसकी हर बात बेवजह की रोक-टोक लगने लगती है और फिर आपसी प्यार लगभग ख़त्म ही हो जाता है, रिश्ता एकदम ख़ामोश हो जाता है.

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Relationships Problems
कैसे बचाएं रिश्तों को?

–     सबसे पहले तो यह जानें कि समय रहते इस ख़ामोशी की आहट को पहचान लिया जाए.

–     अगर आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में सब कुछ सामान्य नहीं है, तो पार्टनर से बात करें.

–    सोशल मीडिया, टीवी, फोन और लैपटॉप्स के यूज़ के भी नियम बनाएं.

–     हफ़्ते में एक बार आउटिंग के लिए जाएं. मूवी प्लान करें या डिनर.

–     एक-दूसरे के ऑफिस में सरप्राइज़ विज़िट दें.

–     कभी यूं ही बिना काम के भी फोन या मैसेज कर लिया करें.

–     कभी-कभार स़िर्फ एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ही कैज़ुअल लीव ले लिया करें. इससे एक्साइटमेंट बना रहता है.

–    एक-दूसरे के लिए शॉपिंग या कुकिंग करें.

–     सोशल साइट्स पर भी एक-दूसरे से कनेक्टेड रहें, ताकि आप दोनों को ही पता रहे कि रिश्ते के बाहर आप सोशल मीडिया पर कैसे बिहेव करते हैं.

–     अपने पार्टनर के प्रति कैज़ुअल अप्रोच से बचें. शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद अक्सर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति कैज़ुअल हो जाते हैं, जिससे रिश्ता उबाऊ होने लगता है.

–     पार्टनर को यह महसूस करवाएं कि आपकी ज़िंदगी में उनकी कितनी अहमियत है.

–    उन्हें स्पेशल फील कराने का प्रयास बीच-बीच में करते रहें.

–     यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों हर पल, हर घड़ी बातें ही करते रहें, लेकिन वो कनेक्शन बना रहे, वो नीरस-सी ख़ामोशी न पनपे इसकी कोशिश ज़रूर होनी चाहिए.

–     समस्या चाहे जितनी भी गंभीर हो, कम्यूनिकेशन से बेहतर समाधान कोई नहीं है. बेहतर होगा कि कम्यूनिकेशन और कनेक्शन बना रहे और आपका रिश्ता साइलेंट मोड पर कभी न आए.

–     अपनी सेक्स लाइफ को साइलेंट मोड पर कभी न आने दें. उसमें ऊर्जा बनी रहे, इसकी कोशिश होती रहनी चाहिए.

–     जब भी लगे कि सेक्स लाइफ बोरिंग हो रही है, तो कभी रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर, तो कभी बेडरूम डेकोर चेंज करके, रोमांटिक गानों के साथ पार्टनर का स्वागत करें. इससे आप दोनों को ही नयापन महसूस होगा.

–     नई पोज़ीशन्स ट्राई करें या सेक्स की लोकेशन चेंज करें. वीकेंड पर कोई होटल बुक करके साथ में समय बिताएं.

– विजयलक्ष्मी

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इन 10 तरीक़ों से महिलाएं करती हैं फ्लर्ट (10 Smart Techniques Of Women Flirting)

इशारों-इशारों में किसी का दिल ले लेना तो हर किसी के बस की बात नहीं, मगर इन्हीं इशारों के ज़रिए थोड़े-से ख़ुशगवार पल चुरा लिए जाएं तो क्या बुरा है? जी हां, फ्लर्टिंग (Flirting) की कला न स़िर्फ आपको ऐसे ख़ुशनुमा पलोें को जीने का मौक़ा देती है, बल्कि रिफ्रेश भी कर देती है और इस कला में अब महिलाएं (Women) भी किसी से पीछे नहीं. बस, उनका तरीक़ा पुरुषों से थोड़ा अलग होता है.

Flirting Techniques For Women

आमतौर पर यही समझा जाता है कि पुरुष ही फ्लर्टिंग में माहिर होते हैं और बस लड़कियों को देखते ही फ्लर्ट करने लगते हैं. उन्हें रिझाने के लिए तरह-तरह की बातें और इशारे भी करने लगते हैं, लेकिन हक़ीक़त यह है कि महिलाएं पुरुषों के मुक़ाबले 5 गुना ज़्यादा ऐसे सेक्सी बॉडी सिग्नल्स देती हैं, जिससे पुरुषों को ये इशारा मिल जाए कि वो उन्हें पसंद करती हैं. शोध में वैज्ञानिकों ने यह बात मानी है कि फ्लर्ट करने में महिलाएं भी पुरुषों के मुक़ाबले कहीं पीछे नहीं हैं. महिलाएं भले ही शब्दों के ज़रिए फ्लर्ट न करें, लेकिन वो अपनी बॉडी लैंग्वेज और सिग्नल्स से बहुत कुछ बयां कर देती हैं. तो आइए, उन संकेतों को पहचानें, जो महिलाएं फ्लर्ट करने के लिए इस्तेमाल करती हैं, ताकि पुरुष भी समझें उनकी फ्लर्टिंग लैंग्वेज को.

1. अगर किसी पुरुष से बातचीत के दौरान महिला उसके क़रीब आती है, तो इसका मतलब है कि वो उसे पसंद कर रही है.

2. अगर वो बार-बार अपने बालों को ठीक करे या अपनी लटों में उंगलियां घुमाने लगे तो सीधा संकेत है कि आप उसे आकर्षक लग रहे हैं.

3. हो सकता है वो अपने हाथों को रब करे या अपने शरीर को टच करे, जैसे- गर्दन पर या बांहों पर हाथ फेरे इत्यादि. ये संकेत है कि आप उस शाम उसे कॉफी के लिए आमंत्रित करेंगे, तो आपको निराश नहीं होना पड़ेगा.

4. अगर कोई महिला फ़्लर्ट कर रही हो, तो उसकी आंखेें भी बहुत कुछ कहती हैं. वो आपसे ज़्यादा देर तक आई कॉन्टेक्ट रखेगी और फिर नज़रों को ख़ास अंदाज़ में झुका लेगी.

5. आपसे हर बार सामना होने पर मुस्कुराकर आपका स्वागत करेगी.

6. अगर वो आपको पसंद करती है, तो आप जैसे ही उसे देखेंगे, वो अपने कपड़े ठीक करने लगेगी. अपने टॉप को या कुर्ते के बटन को ठीक करने लगेगी.

7. फ्लर्टिंग में माहिर महिलाएं यह अच्छी तरह से जानती हैं कि पुरुषों को किस तरह से आकर्षित करके अपने दिल की बात उन तक पहुंचानी है.

8. अगर बैठने के दौरान वो आपके कंधे या पैर पर अपना हाथ रख दे या आसपास होने पर ग़लती से बॉडी टच करने का आभास दे, तो ये आपके लिए ग्रीन सिग्नल है.

9. अगर वो फ्लर्टिंग की कला में माहिर है, तो वो बहुत ही स्मार्टली स़िर्फ उतनी ही स्किन रिवील करेगी, जिससे आपका ध्यान उसकी तरफ़ आकर्षित हो और उसके बाद आप ख़्यालों की दुनिया में खो जाएं.

10. फ्लर्ट करनेवाली महिलाएं अपनी आवाज़ का भी बखूबी इस्तेमाल करती हैं. वो आपके कानों के पास आकर सेक्सी अंदाज़ में धीरे से बात करेंगी, ताकि आप ये समझ जाएं कि आप उसे आकर्षक लग रहे हैं.

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Flirting Techniques For Women
क्या कहती हैं महिलाएं फ्लर्टिंग के बारे में?

– फ्लर्टिंग आपको फ्रेश और रोमांटिक बनाए रखती है.

– इससे आपको कॉन्फ़िडेंस मिलता है.

– अगर कोई आपको आकर्षक लग रहा है तो उससे फ्लर्ट करने में बुराई ही क्या है?

– फ्लर्टिंग में दोनों पक्षों के लिए फ़ील गुड फैक्टर जुड़ा होता है.

– हो सकता है, फ्लर्टिंग से शुरुआत हुई बात रोमांटिक रिश्ते में बदल जाए.

– फ्लर्टिंग हमेशा हेल्दी होनी चाहिए.

– कभी-कभार लोग इससे आपके चरित्र को जज करने लगते हैं, ऐसे में फ्लर्टिंग थोड़ा संभलकर और उसके साथ ही करनी चाहिए, जो आप ही की तरह ओपन

मांइडेड हो.

– फ्लर्टिंग ग़लत मकसद से नहीं की जानी चाहिए. फ्लर्टिंग का इरादा स़िर्फ दोस्ती करना और सामने वाले को ख़ुश व अच्छा महसूस कराना होता है.

– फ्लर्टिंग करते वक़्त भी ख़ास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है, क्योंकि फ्लर्टिंग एक कला है. ऐसे में आपका अप्रोच पॉज़ीटिव होना चाहिए.

– अगर कोई पसंद है या किसी का व्यक्तित्व आकर्षक लग रहा है, तो उसकी तरफ़ मुस्कुराकर देखने में क्या बुराई है?

– हां, इशारा इस तरह का न हो कि सामनेवाला कुछ ग़लत समझ बैठे.

– किसी की स्टाइल पसंद हो, तो उसे कॉम्प्लिीमेंट ज़रूर दें.

– हालांकि महिलाओं का एक वर्ग ऐसा भी है, जो फ्लर्टिंग के ज़्यादा पक्ष में नहीं है, उनका मानना है-

– भले ही आपके इरादे कितने भी नेक हों, लेकिन फ्लर्ट करनेवाली महिलाओं को हमारे समाज में अच्छा नहीं समझा जाता.

– इससे आपके चरित्र पर भी सवाल उठ सकते हैैं.

– आपका ग़लत फ़ायदा उठाया जा सकता है.

– हो सकता है कोई भी आपको फिर गंभीरता से न लेकर स़िर्फ मज़े के लिए आपसे बात करे या मित्रता रखे.

– कभी-कभार मज़े के लिए की गई फ्लर्टिंग ख़तरनाक भी हो सकती है. सामनेवाले के इरादे कितने नेक हैं, यह कैसे जाना जा सकता है?

– फ्लर्टिंग करते-करते भावनात्मक लगाव होना भी संभव है, ऐसे में बहुत-सी बातों पर ग़ौर करते हुए ही फ्लर्टिंग की जानी चाहिए, वरना रिश्तों में उलझनें पैदा हो सकती हैं.

– दरअसल पुरुष महिलाओं के फ्लर्टिंग के अंदाज़ को दोस्ती या कुछ और ही समझ बैठते हैं और उनके इशारों को ग़लत दिशा में ले जाते हैं. यही वजह है कि वो दोस्ती और प्यार के बीच उलझ जाते हैं.

ऐसे में बेहतर होगा कि पहले फ्लर्टिंग की कला को जानें, समझें और तभी आगे बढ़ें, क्योंकि फ्लर्टिंग में कोई बुराई नहीं है, लेकिन फ्लर्टिंग अपने आप में एक कला है और किसी भी कला का असर तभी नज़र आता है, जब आप उसमें माहिर हो जाएं.

– गीता शर्मा

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