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7 रिलेशनशिप रेसिपीज़, जो बनाएंगे आपके रिश्ते को ख़ूबसूरत(7 Relationship Recipes For Happy Love Life)

जिस तरह खाना बनाना एक कला है, ठीक उसी तरह रिश्तों को बनाए रखना भी एक कला है. रिश्तों की यह रसोई हमें हमारे दुख के समय सांत्वना देती है और ख़ुशियों के समय जीवन में मिठास भर देती है. हमारी कामयाबी पर हमारी पीठ थपथपाती है, तो हार पर हमारा सिर सहलाती है. रिश्तों की यह रसोई अपने स्वाद की विविधता के कारण हमेशा ही ख़ूबसूरत बनी रहेगी, पर आपको एक कुशल रसोइया बनना होगा. 

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गर आपसे यह कहा जाए कि रिश्ते भी पकते हैं, उबलते हैं, कभी गर्म होते हैं, तो कभी आइस्क्रीम से ठंडे, तो क्या आप यक़ीन करेंगे? यह रिश्तों की रसोई भी बड़ी अजीब है. तरह-तरह के रिश्तों के पकवान रोज़ बनते हैं, तो कभी-कभी बिगड़ भी जाते हैं. रिश्तों की यह रसोई किसी कुशल हाथों में पड़ जाए, तो आप इन पकवानों के स्वाद का मज़ा लेते नहीं थकेंगे, पर वहीं रिश्ते अगर किसी नौसिखिए के हाथ पड़ जाएं, तो पूरी रसोई जलने का ख़तरा है.
इस रसोई का एक नियम है कि अगर कभी कोई पकवान बिगड़ भी जाए, तो उसे समय रहते ठीक करना रसोइए को आना चाहिए. रिश्तों की रसोई में नई-नई रेसिपीज़ बनाने वाले रसोइये का अनुभवी, समझदार, संवेदनशील व संयमी होना आवश्यक है. इसी रसोई से हमारा
घर-परिवार, समाज ख़ुशहाल है. इससे ही हमारे सगे-संबंधी हमसे जुड़े हुए हैं.

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आजकल इस रसोई में रिश्तों के कुछ नए पकवान भी बन रहे हैं, पर पकवान चाहे कितने ही नए क्यों न हों, उन्हें स्वादिष्ट बनाने की रेसिपी वही पुरानी है. कहने का तात्पर्य यह है कि जिस तरह घर की रसोई के बिना हमारा घर चलना मुश्किल है, उसी तरह रिश्तों की रसोई के बिना या रिश्तों के बिना हमारा परिवार, समाज और हमारा जीवन चल पाना मुश्किल है, तो आइए ज़रा इस रसोई में झांकते हैं और देखते हैं कि आख़िर क्या है रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाए रखने की रेसिपी.
हम कोई मशीन नहीं हैं, इसलिए हमेशा ग़लतियों की गुंजाइश बनी रहती है. हममें ग़ुस्सा, द्वेष, ईर्ष्या आदि सभी अवगुणों का भी समावेश है. इन सब का असर हमारे रिश्तों पर भी पड़ता है. रिश्ते बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है, उन्हें संभालकर रखना. जिस तरह आप खाने को रुचिकर बनाए रखने के लिए अलग-अलग रेसिपीज़ बनाते रहते हैं, उसी तरह हमारे रिश्तों को रुचिकर बनाए रखने के लिए भी कई रेसिपीज़ अर्थात् तरीक़ों का उपयोग करना पड़ता है.
जिस तरह खाने में हल्दी, नमक, मिर्च, मिठास सबका सही अनुपात में होना ज़रूरी है, ठीक उसी तरह रिश्तों में भी प्रेम की मिठास, नोकझोंक की मिर्च और रूठने-मनाने का नमक होना आवश्यक है. कोई भी रिश्ता कभी भी हमेशा अच्छा ही अच्छा नहीं हो सकता, उसमें थोड़ी-सी कड़वाहट तो आती ही है, तो क्या हमें अपने रिश्ते को उसी कड़वाहट के साथ छोड़ देना चाहिए या उसमें कुछ बदलाव लाकर उसे नया स्वरूप देना चाहिए. नोकझोंक, ग़ुस्सा अगर मर्यादा में रहे, तो आपके रिश्ते चटपटे बन जाएंगे. तो आइए सीखें रिश्तों की कुछ नई रेसिपीज़.
1. रिश्ते से बाहर निकलकर सोचें रिश्ते के बारे में
क्या हुआ, कुछ अजीब लगा, पर यह बड़ा कारगर उपाय है. अक्सर ऐसा होता है कि कुछ समय के बाद कितने भी सुमधुर रिश्ते क्यों ना हों, पर उसमें एक ठंडापन आ जाता है. तो अगर आपका कोई भी रिश्ता इस ठंडेपन से गुज़रने की कगार पर हो, तो अपने
रिश्ते पर थोड़ा-सा नींबू निचोड़ें. ख़ुद को उस रिश्ते से थोड़ा-सा दूर कर लें, पर याद रहे, इस प्रक्रिया में अपने आपको रिश्तेदारों से दूर ना करें. इस उपाय में नींबू का खट्टापन आपके रिश्तों की खटास दूर कर देगा.
2. तोड़ दें सन्नाटे की ब़र्फ
कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ रिश्ते हमसे रूठ जाते हैं. तब दो लोगों के बीच एक अनजानी-सी दीवार खड़ी हो जाती है. एक
अजीब-सी चुप्पी आ जाती है. ना किसी से कोई कुछ पूछता है और ना ही कोई कुछ बताता है. हालांकि यह दीवार दिखती नहीं है, पर होती है, तो इस ब़र्फ पर भावनाओं और संवाद का गर्म पानी डालें और इस ब़र्फ को पिघला दें.
3. अनुभवों का मसाला डालना ना भूलें
यह मसाला अगर हम समय-समय पर अपने रिश्तों में डालते रहें, तो रिश्तों का स्वाद हमेशा बना रहेगा. यह मसाला हमें हमारी
दादी-नानी के पास मिलेगा. समय-समय पर अपने बुज़ुर्गों से रिश्तों के बारे में थोड़ा-बहुत ज्ञान लेते रहना चाहिए. समय की कमी के चलते हमें बड़े-बुज़ुर्गों के पास बैठने का समय कम ही मिलता है, पर हमारे रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाने के लिए यह बहुत ज़रूरी है. दादी-नानी की कहानियां स़िर्फ दिल बहलाने के लिए नहीं होतीं, उनमें कुछ ना कुछ सीख छुपी होती है. तो इन पुराने मसालों के
डिब्बों को खोलिए और अपने रिश्तों को नया ज़ायका दीजिए.

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4. नोकझोंक का नमक और मनमुटाव की मिर्च
जिस तरह किसी भी खाने में नमक-मिर्च का होना बहुत आवश्यक है, उसी तरह किसी भी रिश्ते में नोकझोंक और मनमुटाव का होना आम है और कुछ हद तक ज़रूरी भी, क्योंकि यह तो हम सभी जानते हैं कि मनाने का मज़ा तभी आता है, जब कोई रूठा हुआ हो. इस रूठने-मनाने में रिश्ते की मिठास बनी रहती है. पर याद रहे, यह नमक-मिर्च स्वादानुसार ही होनी चाहिए, मतलब यह कि यह नोकझोंक और मनमुटाव सीमा में हो. इससे आपके रिश्ते को कोई स्थायी क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए. ऐसी कितनी ही मीठी नोकझोंक और मनमुटाव हमारे समाज और परिवारों में प्रचलित हैं, जैसे- देवर-भाभी, सास-बहू, ननद-भाभी, जीजा-साली, भाई-बहन आदि.
5. धीमी आंच पर पकने दें
जब नए रिश्ते बनें या पुराने रिश्ते को ही आप नया रूप देना चाह रहे हों, तो उन रिश्तों को थोड़ा समय दें. उन्हें प्रेम और भावनाओं की आंच पर धीरे-धीरे पकने दें. उसका अर्थ यह है कि किसी भी रिश्ते से उसके शुरुआती दौर में बहुत सारी अपेक्षाएं रखना ग़लत है. पहले उसमें विश्‍वास और प्रेम उत्पन्न होने दें. अपेक्षाएं उस रिश्ते को एक झटके में ख़त्म कर देंगी. यह ठीक उसी प्रकार है, जैसे आप रसोई जल्दी बनाने के लिए आंच को बहुत बढ़ा दें, जिससे आपका खाना ही जल जाए. रिश्ते एक दिन में नहीं बनते. इसमें समय लगता है, तो इसमें कोई जल्दबाज़ी ना करें.
6. दर्शनीय हो रिश्तों की परोसी गई थाली
खाना चाहे कितना भी स्वादिष्ट हो, पर जब तक उसे सलीके से परोसा ना जाए, तब तक उसे खाने का मन नहीं करेगा. उसी प्रकार आप किसी रिश्ते को बहुत गंभीरता से लेते हैं. किसी से बहुत प्यार करते हैं, किसी को लेकर चिंतित हैं, तो याद रखें कि आपकी कोई भी भावना व्यक्त किए बग़ैर सामनेवाले के पास ठीक तरी़के से नहीं पहुंचेगी. अपनी भावनाओं को सामनेवाले पर अच्छे से ज़ाहिर करना बहुत ज़रूरी है.
7. आख़िर में ज़रूरी है स्वीट डिश
चाहे खाना अच्छा बने या फिर बेस्वाद, पर अगर अंत में मीठा हो जाए, तो खाना कंप्लीट हो जाता है. कहने का तात्पर्य यह है कि अपने जीवन में रिश्तों की मिठास को ना तो भूलें और ना ही नज़रअंदाज़ करें. किसी भी बिगड़े रिश्ते को छोड़ देना हमेशा सबसे आसान विकल्प होता है, पर ध्यान रखें कि किसी भी रिश्ते को काटकर फेंकने से आपका जीवन अपंग हो जाता है, तो चाहे आपका कोई भी रिश्ता कितनी ही कड़वाहट से गुज़र चुका हो, पर उसमें अपनेपन की मिठास मिलाइए और अतीत की सारी कड़वाहट
भूल जाइए.

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– विजया कठाले निबंधे

बचें इन छोटी-छोटी बातों से, जो बिगाड़ सकती हैं आपका रिश्ता (Some Common Habits That Can Ruin Your Relationship)

किसी भी रिश्ते में आए फासले या बिखराव का विश्‍लेषण किया जाए, तो कोई बड़ी वजह कम ही सामने आएगी. दरअसल, रिश्तों में दूरियां अक्सर उन छोटी-छोटी बातों के कारण आती हैं, जिन्हें हम या तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं या फिर हमें पता ही नहीं होता.

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हम अपने रिश्तों की मज़बूती और प्यार के लिए न जाने क्या-क्या करते हैं. शादी की सालगिरह याद रखते हैं, अपने साथी को महंगा तोहफ़ा देते हैं, शानदार पार्टी का आयोजन करते हैं, साल में दो-तीन बार बाहर घूमने जाते हैं आदि. लेकिन इन सब के बावजूद कई बार रिश्ते में नीरसता आने लगती है. और फिर एक समय ऐसा आता है कि रिश्ते बिखर जाते हैं. रिश्तों में बड़ी-बड़ी बातों को चाहे तो आप भूल जाएं, पर रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें आपके रिश्ते की ना स़िर्फ उम्र, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी बढ़ा सकती हैं. तो आइए, जानें रिश्ते से जुड़ी उन छोटी-छोटी बातों को, जिन्हें अपनाकर आप रिश्तों को और बेहतर बना सकते हैं.

ख़ुशगवार शुरुआत

– क्या आपको याद है कि आख़िरी बार कब आप सुबह-सुबह मुस्कुराकर उठे थे.
– चाहे बात आपको छोटी लगे, पर इसका आपके रिश्ते पर बहुत असर पड़ता है.
– यदि अपने साथी के साथ आपकी सुबह चिड़चिड़ी या बुझी-सी होती है, तो समझ लीजिए कि यह छोटी-सी बात पहला क़दम है आपके रिश्ते के बीच आनेवाले फासलों का.

तुलनात्मक रवैया

– जब रिश्ते की उम्र एक पड़ाव पार कर लेती है, तो वह स्थिति आती है, जब साथी एक-दूसरे में कुछ नया ढूंढ़ने की कोशिशें छोड़ देते हैं.
– इसकी बजाय वे एक-दूसरे में क्या नहीं है, उसे ढूंढ़ने में लग जाते हैं.
– तब होने लगती है तुलना. ङ्गतुमने देखा रवि का थोड़ा पेट बढ़ा, तो वह फ़ौरन जिम जाने लगा और एक तुम हो जो कुछ करते ही नहीं.
र्ीं सीमा ने देखा बालों में स्ट्रेटनिंग करवाई है, तुम ऐसा कुछ ट्राई क्यों नहीं करती?
– इस तरह की तुलनाएं धीमे ज़हर की तरह होती हैं.
– आपको ऐसा लग रहा होगा कि यह छोटी-सी बात है, पर जनाब यही हल्की दरार अगर समय रहते ना भरी गई, तो खाई बन जाती है.

जीतने की कोशिशें

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– आपकी लाइफ को थोड़ा रिवाइंड करते हैं और उस समय में जाते हैं, जब आप अपने साथी को छुप-छुपकर देखा करते थे.
– किसी ना किसी तरी़के से उसके प्यार को जीतने की कोशिश करते थे.
– लेकिन जैसे-जैसे आपका प्यार आपको मिलता जाता है, वैसे-वैसे कोशिशें कम हो जाती हैं.
– एक समय ऐसा भी आता है, जब यह दिल जीतने की कवायद पूरी तरह से ख़त्म हो जाती है.
– हम यह भूल जाते हैं कि चाहे पेड़ कितना ही बड़ा क्यों ना हो जाए, उसे पानी और धूप की ज़रूरत हमेशा रहती है.
– यदि आप अपने साथी की तरफ़ ध्यान नहीं देते या उसके प्रति उदासीन हो गए हैं, तो रिश्ते को उदासीन होने में समय
नहीं लगेगा.

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रुचियों का ख़त्म होना

– चाहे रिश्ते कितने ही मज़बूत क्यों ना हों, छोटे-मोटे तनाव तो होते ही हैं, पर आगे का रिश्ता इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस मनमुटाव को कितना जल्दी भूलकर फिर से एक साथ आते हैं.
– अब ऐसी किसी भी विकट परिस्थिति में आपका ख़ुशमिज़ाज होना आपकी मदद करेगा.
– इसके लिए आपके शौक़ मददगार सिद्ध होंगे.
– फिर वह चाहे गाना-बजाना हो, डांस हो या फिर कुछ और, यह आपके व्यक्तित्व को नए आयाम देता है और तनाव को कम करता है.
– यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो तनाव कम होने की बजाय बढ़ता ही जाएगा.

पैसों की चर्चा

– यह बात सच है कि गृहस्थी व जीवन को
चलाने के लिए पैसे की ज़रूरत होती है, पर इसे ही सब कुछ मान लेना सही नहीं है.
– इसके लिए दिन-रात अपने साथी के सामने घर के बजट व पैसों को लेकर बात करेंगे, तो उसका आपसे विरक्त हो जाना तय है.
– आपको शायद लगेगा कि यह बात आप अपने परिवार के लिए ही तो कर रहे हैं, पर ऐसा बार-बार करने से आपके साथी की आपमें रुचि कम हो जाएगी.
– इसलिए पैसों की चिंता को अपने रिश्ते के बीच की दीवार ना बनने दें.

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समर्पण की अति

– अक्सर ही हम कहते हैं कि रिश्ते में समर्पण होना चाहिए, पर सवाल यह है कि कितना होना चाहिए.
– क्यों आप चौंक गए न, हां यह सही है कि किसी भी रिश्ते में ज़रूरत से ज़्यादा समर्पण अच्छा नहीं होता.
– जहां ज़रूरत से ज़्यादा समर्पण होता है, वहां आप अपना ख़ुद का व्यक्तित्व खो देते हैं.
– अपनी एक अलग पहचान को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है.
– दूसरे को प्यार करने का मतलब यह नहीं होता कि आप ख़ुद से प्यार करना बंद कर दें.
– अक्सर ही यह देखा गया है कि किसी दूसरे की पसंद-नापसंद का ख़्याल रखते-रखते हम अपनी पसंद को भूल ही जाते हैं.
– ऐसा अक्सर महिलाओं के साथ होता है, पर अगर हम देखें, तो पाएंगे कि आप जब ख़ुद को महत्व देना बंद कर देते हैं, तब आपका साथी भी आपको तवज्जो नहीं देता.

ज़िम्मेदारियों की झिकझिक

– कभी-कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ रिश्तों की नाज़ुक डोर को संभाल नहीं पाता.
– हमेशा अपने साथी से किसी न किसी काम या ज़िम्मेदारी को लेकर नोंक-झोंक रिश्ते में रूखापन ले आती है.
– ज़िम्मेदारियां हमेशा बांटनी चाहिए, पर उन्हें निभाने के लिए किसी के पीछे लग जाना या हमेशा यह याद दिलाते रहना कि उसने कोई काम नहीं किया, यह उन जिम्मेदारियों को बोझिल बना देता है.
– किसी भी काम को अपने रिश्ते से ज़्यादा महत्व देना लंबे समय में रिश्ते के लिए ख़तरा है.

नियंत्रण की कोशिश

– रिश्ते में कुछ समय के बाद हम अपने साथी को नियंत्रित करने की कोशिश करने लगते हैं.
– और यह अक्सर ही अनजाने में होता है, इसलिए अपने बर्ताव पर हमेशा ख़ुद की ही कड़ी नज़र रखें.
– ख़ुद को अपने साथी पर कभी भी हावी ना होने दें.
– यदि नियंत्रित करना ही है, तो परिस्थितियों को करें.

कहीं का ग़ुस्सा, कहीं पर

– यदि यह आपकी आदत है, तो चाहे यह आपको कोई बड़ी बात ना लगे, पर आपके साथी को यह रिश्ते से दूर करने के लिए काफ़ी है.
– बाहर के तनाव के कारण घर आकर अपने साथी पर बरसना रिश्ते में दूरियां लाने का काम करता है.
– अपने तनावों के लिए अपने साथी को दोष देना रिश्ते को गर्त में धकेलना है.
– आपसी प्यार व सामंजस्य न केवल रिश्तों को मज़बूती देते हैं, बल्कि उसकी गर्माहट को भी बनाए रखते हैं. इसी के साथ उपरोक्त छोटी-छोटी बातों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए, तो आपके रिश्ते में दूरियां कभी भी पनपने नहीं पाएंगी.

– विजया कठाले निबंधे

सेविंग्स स़िर्फ पैसों की ही नहीं, रिश्तों की भी करें (Save Not only Money but Relationship Too)

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अक्सर हम शुरुआत से ही ज़िंदगी में बचत को काफ़ी अहमियत देते आए हैं. हमें बचपन में भी बचत के कई फ़ायदों के बारे में बताया व समझाया जाता है… इन सबमें भी पैसों की बचत का ख़ास महत्व है. पैसे बचाने ज़रूरी होते हैं, क्योंकि बुरे व़क्त में जब कोई काम नहीं आता, तब ये पैसे ही हमारे काम आते हैं… वगैरह… वगैरह!

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वैसे पैसे बचाना कोई बुरी बात भी नहीं है, आज के दौर में जहां पैसों का इतना महत्व है, तो यह और भी ज़रूरी हो जाता है, लेकिन कहीं न कहीं इस चक्कर में हम अपने रिश्तों को भूलते चले जाते हैं. पैसे तो बचा लिए, लेकिन क्या रिश्ते बचाए? क्या उन्हें बचाने के इतने प्रयास किए, जितने पैसे बचाने के लिए किए? क्या रिश्तों को उतनी अहमियत दी, जितनी पैसों को दी…?
जवाब यही होता है कि नहीं, लेकिन बेहतर यही होगा कि व़क्त रहते हम संभल जाएं और पैसों के साथ-साथ अपने रिश्तों को भी बचाएं.

 

क्यों ज़रूरी है रिश्ते बचाना?

– जिस तरह से आड़े व़क्त में हमें लगता है कि पैसे ही काम आएंगे, उसी तरह बुरे व़क्त में पैसों से भी कहीं ज़्यादा हमारे रिश्ते काम आते हैं.
– वो हमें आर्थिक मदद के साथ-साथ मानसिक संबल भी देते हैं.
– हमें सहारा देते हैं.
– भावनात्मक रूप से हमें मज़बूत बनाते हैं.
– जो ख़ुशियां पैसों से नहीं मिलतीं, वो हमें रिश्तों से मिलती हैं.
-अपनों के साथ व़क्त बिताना, हंसना-खेलना हमें हेल्दी और ख़ुश रखता है.
– आपसी प्यार व सामंजस्य से ज़िंदगी आसान हो जाती है और हर संघर्ष का सामना हम बेहतर तरी़के से कर पाते हैं.
– फैमिली में ख़ुशियां व ग़म बांटने से आप डिप्रेशन का शिकार नहीं होते और अगर होते भी हैं, तो उससे बाहर आसानी से निकल आते हैं.

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कैसे करें रिश्तों की बचत?

– अपनों को व़क्त दें, आपका समय वो काम कर सकता है, जो महंगे से महंगा तोहफ़ा भी नहीं कर पाएगा.
– उन्हें यह महसूस कराएं कि आपको उनकी कद्र भी है और ज़रूरत भी.
– उनकी अहमियत आपकी ज़िंदगी में कितनी है, यह उन्हें हर पल महसूस होना चाहिए.
– चाहे कितने भी बिज़ी क्यों न हों, उन्हें फोन करके हालचाल पूछें, जो लोग दूर रहते हैं, उनसे मिलने ज़रूर जाएं.

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– साथ में घूमने जाएं, छुट्टियां प्लान करें.
– कभी भी रिश्तों के बीच पैसों को न आने दें. इसके लिए आपको कुछ प्लानिंग करनी होगी.
– चाहे पैरेंट्स हों, भाई-बहन हों या फिर पार्टनर आपको पैसों के मामले में कुछ निर्णय लेने होंगे, ताकि वो आपके रिश्तों के बीच न आए.
– सब लोग मिलकर अपना बजट प्लान करें और किन-किन फ़िज़ूलख़र्ची से बचा जा सकता है, इसकी भी लिस्ट बनाएं.
– अपने-अपने बैंक अकाउंट्स पर ध्यान दें. पार्टनर्स को चाहिए कि वो एक जॉइंट अकाउंट भी रखें और अपना सेपरेट अकाउंट भी रखें.
– जॉइंट अकाउंट में जो भी लेन-देन हो, उसे बांट लें और ध्यान रहे कि आपस में एक-दूसरे को ज़रूर इंफॉर्म करें, वरना ये ज़रा-सी बात झगड़े की वजह बन सकती है.
– अपने रिश्तों की बचत में आपसी बातचीत भी महत्वपूर्ण पहलू है. बिना कम्यूनिकेशन के हेल्दी रिलेशन संभव नहीं.
– कई बार स़िर्फ कम्यूनिकेशन गैप की वजह से ही बिना कारण ही रिश्तों में दूरियां पैदा होने लगती हैं, तो आप इस बात का ध्यान रखें कि अपने किसी भी रिश्ते में कम्यूनिकेशन की कमी को दरार की वजह न बनने दें.
– पर्सनल स्पेस ज़रूर दें. ऐसा न हो कि रिश्तों में आपको घुटन महसूस होने लगे. जिस तरह आप पैसों की सेविंग्स के लिए बजट बनाते हैं, उसी तरह से रिश्तों की सेविंग्स के लिए भी कुछ रूल्स बनाएं.
– कुछ पैसे आप स़िर्फ अपने शौक़ पूरा करने के लिए यूं ही ख़र्च कर देते हैं, तो उसी तरह से अपने रिश्तों को भी कहीं न कहीं खुला छोड़ें, सामनेवाले को उसकी मर्ज़ी से भी कुछ चीज़ें करने दें, ताकि वो घुटन महसूस न करे.
– सेल का हमेशा आप इंतज़ार करते हैं, जहां कुछ चीज़ों में आपको छूट मिलती है, इसी तरह से रिश्तों में भी कभी न कभी कुछ नियम तोड़कर कुछ चीज़ों की छूट दें एक-दूसरे को, जैसे- आज की शाम तुम अपने फ्रेंड्स के साथ स्पेंड करो, चाहे मूवी देखो या पार्टी करो… या फिर आज का दिन तुम अपनी पसंद की डिशेज़ बनाओ या आज खाना घर पर न बनाकर बाहर से मंगाओ, वो भी अपनी पसंद का… ये छोटी-छोटी छूट रिश्तों में बड़ी बचत करती हैं.
– केयरिंग और शेयरिंग की आदत कभी न छोड़ें, क्योंकि अक्सर हम यह महसूस करते हैं कि एक समय के बाद हम रिश्तों को कैज़ुअली लेने लगते हैं और भले ही हम मन ही मन अपनों की फ़िक्र करें, लेकिन उसे दर्शाना ज़रूरी नहीं समझते. हमें लगता है कि सामनेवाले को तो पता ही है कि हमें उनकी फ़िक्र है, लेकिन यह ध्यान में रखें कि कभी-कभी प्यार दिखाना और ज़ाहिर करना भी ज़रूरी हो जाता है.
– रोज़ नहीं, लेकिन बीच-बीच में ऐसा कुछ ज़रूर करें कि आपके अपनों को लगे कि आपको उनकी कितनी परवाह है और आप उनसे कितना प्यार करते हो.
– इस तरह रिश्तों की बचत करते आप बहुत कुछ कमा सकते हैं.

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– विजयलक्ष्मी

हैप्पी लाइफ के लिए दबाएं ज़िंदगी का रिफ्रेश बटन(25 Easy Ways to Refresh Your Life)

अगर आप भी हर रोज़ ही ज़िंदगी से नाख़ुश रहने लगे हैं, तो यही समय है अपनी ज़िंदगी से स्ट्रेस और निगेटिविटी को डिलीट करें और ख़ुशहाल ज़िंदगी का रिफ्रेश बटन दबाएं.

 

 

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छोटे-छोटे रिफ्रेशिंग बटन्स

– बचपन में जिन चीज़ों से आपको ख़ुशी मिलती थी, कभी-कभार उन चीज़ों को दोबारा करें, जैसे- झूला झूलना, फनी वीडियोज़ देखना, पेंटिंग करना आदि.
– टीनएज के दौरान जो फेवरेट गाने या वीडियोज़ थे, उन्हें सुनें या देखें.
– स्कूल या कॉलेज के व़क्त का फोटो अलबम निकालकर देखें. पुरानी यादें ताज़ा होने से चेहरे पर मुस्कुराहट अपने आप आ जाती है.
– सुबह या शाम जब भी व़क्त मिले, थोड़ी देर टहलें. टहलने से न स़िर्फ तनाव दूर होता है, बल्कि सेहत भी दुरुस्त रहती है.
– आप जिस इलाके में रहते हैं, कभी यूं ही उसे देखने निकल जाएं, देखें तो आख़िर वहां क्या-क्या है? ऐसा करने से न सिर्फ़ आपका रूटीन बदलेगा, बल्कि आपकी लाइफ में फ्रेशनेस भी आएगी.
– मूड बदलने के लिए म्यूज़िक से बेहतर भला क्या हो सकता है. अपने मनपसंद गाने सुनें और अपने फेवरेट सिंगर का कलेक्शन अपने फोन में रखें.
– अगर आपको डांस करना पसंद है, तो यह बहुत अच्छा तरीक़ा हो सकता है, लाइफ में फ्रेशनेश लाने का. जब भी, जहां भी मौक़ा मिले, मेक योर मूव्स.
– आपको जो भी पसंद हो, चाय, कॉफी या जूस कप में लेकर सोफे पर बैठ जाएं. घूंट-घूंट पीकर उसके स्वाद का आनंद लें. अक्सर हम जल्दबाज़ी में खाते-पीते हैं, जिससे छोटी-छोटी ख़ुशियों को एंजॉय नहीं कर पाते. यक़ीन मानिए, आपको बहुत अच्छा फील होगा.
– लाइफ को रिफ्रेश करने के लिए योग एक बहुत अच्छा ऑप्शन है. योग व मेडिटेशन आपके मस्तिष्क को शांत रखेगा, जिससे आप अच्छा महसूस करेंगे. अगर रोज़ाना मुमकिन न हो, तो हफ़्ते में तीन दिन ज़रूर ट्राई करें. योग हमेशा एक्सपर्ट्स की देखरेख में करना चाहिए, इसलिए ख़ुद से कोशिश करने की बजाय योगा क्लासेस जॉइन करें.
– रोज़ाना की बोरिंग लाइफ के रूटीन को तोड़ने के लिए कमरे में सेंटेड कैंडल जलाएं और जो जी चाहे, वो करें. आप चाहें, तो किताब पढ़ सकते हैं या तो गाने सुन सकते हैं या फिर अपनी फेवरेट मूवी दोबारा देख सकते हैं. ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी लाइफ को रिफ्रेश कर देंगे.
– रोज़ाना हमारी ज़िंदगी में कुछ न कुछ ख़ास होता है, पर ग़ुस्से और चिड़चिड़ेपन के कारण हम उसे अनदेखा कर देते हैं. रात को सोने से पहले दो मिनट का समय निकालकर वो तीन बातें लिखें, जिसके लिए आप शुक्रगुज़ार हैं. ऐसा करने से आपको दिन के सफल होने का एहसास होगा और आप सुकून से सो पाएंगे और अगली सुबह ख़ुशी महसूस होगी.

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– ज़िंदगी का रिफ्रेश बटन दबाने के लिए छुट्टी का दिन सबसे बेस्ट है. उस दिन ख़ुद को सुबह देर तक सोने की आज़ादी दें. हफ़्तेभर की थकान मिटाने का यह सबसे अच्छा तरीक़ा है. एक बार आपकी थकान दूर हो गई, तो आप ख़ुद हल्का और ख़ुश महसूस करेंगे.
– अगर आपको पौधों का शौक़ है, तो कोई ख़बसूरत-सा पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें. अगर बालकनी या गार्डन नहीं है, तो कोई इंडोर प्लांट लगाएं. बढ़ता हुआ पौधा आपकी लाइफ में रोज़ाना रिफ्रेशमेंट भरेगा.
– रोज़मर्रा के रूटीन को तोड़ने के लिए बाहर से अपनी फेवरेट डिश मंगवाएं या बाहर डिनर पर जाएं.
– अगर कुछ अलग करना चाहते हैं, तो अपनी मां की फेवरेट रेसिपी बनाकर मां को खिलाएं. उनके चेहरे की चमक आपकी लाइफ में ताज़गी भर देगी.
– कहते हैं, किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. अगर लाइफ बोरिंग हो गई है, तो कोई कहानी या प्रेरणादायी किताबें मंगाकर पढ़ें, इससे आपकी सोच बदलेगी और ज़िंदगी की तरफ़ देखने का नज़रिया बदलेगा.
– अपनी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के लिए सरप्राइज़ प्लान करें. अचानक उनके ऑफिस पहुंचकर डिनर पर ले जाएं या घर पर बुके या कोई गिफ्ट भेजकर उसे ख़ुश कर दें.
– किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार से फोन पर बात करें, जिससे आपने कई महीनों से बात न की हो. हो सकता है आपका यह फोन कॉल आपकी लाइफ को इंट्रेस्टिंग बना दे.

कुछ नया ट्राई करें

– कुछ दिनों की छुट्टी पर घूमने चले जाएं. कोई ऐसी जगह चुनें, जहां आप कभी नहीं गए. और ऐसी जगह पर अकेले जाएं, ताकि नई जगह पर नए-नए लोगों से मिल सकें. नए दोस्त हमारी ज़िंदगी में अक्सर बदलाव लाते हैं.
– कोई नई हॉबी ट्राई करें. बचपन से आपके दिल में कोई न कोई ऐसी हॉबी होगी, जिसे आप सीखना चाहते थे, तो उसे अभी करें.
– अगर अपनी जॉब से आप बोर हो चुके हैं या कई सालों से एक ही जगह काम करने के कारण ऊब गए हैं, तो तुरंत नई जॉब ढूंढ़कर वहां से निकल जाएं.
– किसी एनजीओ से जुड़कर उनके लिए कुछ काम करें. अपने फ्री टाइम में दूसरों की मदद करने से भी आपकी ज़िंदगी में फ्रेशनेस आएगी. किसी की मदद करनेवाली फीलिंग्स इंसान को हमेशा ख़ुश और उत्साहित रखती हैं.
– अपने घर के इंटीरियर को चेंज करें. घर में छोटे-मोटे बदलाव करने से भी लाइफ में बड़े बदलाव आते हैं. माहौल बदलेगा, तो आपका मूड अपने आप बदलेगा.
– कुकिंग का शौक़ है, तो कोई रेसिपी सीखें और घरवालों को खिलाकर वाहवाही लूटें.
– एक बात याद रखें, जितना हो सकता है, उतना ही काम करें, चाहे घर हो या ऑफिस. जिन कामों के कारण आपको बेवजह का तनाव हो रहा है, उन्हें किसी और को करने के लिए दे दें.
– सकारात्मक सोच की शक्ति बढ़ाएं. नुक़सान होने पर घबराएं नहीं, बल्कि सोचें कि जो हो रहा है, उसके पीछे ज़रूर कुछ अच्छाई छिपी है.

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– अनीता सिंह