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मुफ़्त के सलाहकारों से रहें सावधान (Stay Away From Free And Unwanted Advises)

अगर आपको शारीरिक (Physical) या मानसिक कष्ट (Mental Distress) हो या वैवाहिक जीवन की बढ़ती मुश्किलें, या फिर किसी भी तरह की अन्य समस्या (Problem) हो, तो फ़िक्र न करें, आपकी समस्या के समाधान के लिए आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं, घर बैठे और राह चलते आपको आपकी समस्या के मिलेंगे सैकड़ों उपाय, वो भी मुफ़्त में. जी हां, हमारे देश में मुफ़्त के सलाहकारों की बड़ी तादाद है, आपसे भी ये यक़ीनन हर रोज़ टकराते होंगे. तो क्या आपने कभी सोचा कि लगभग कितने तरह के सलाहकार हैं हमारे आसपास और क्यों देते हैं वो इतनी सलाहें, नहीं न, तो हम बताते हैं.

Unwanted Advises

सलाहकारों की क़िस्में

इस दुनिया में हर क़िस्म के लोग होते हैं. हर फील्ड में भी हर क़िस्म के लोग पाए जाते हैं, तो भला ऐसा कैसे हो सकता है कि मुफ़्त के सलाहकारों की क़िस्में न हों. यक़ीन मानिए इन्हें आप भी जानते हैं, बस कभी ग़ौर नहीं किया.

मुफ़्त के डॉक्टर

शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो, आपको बस बोलने भर की देर है, हर दूसरा आदमी ख़ुद पर आज़माया हुआ बेहतरीन नुस्ख़ा आपको बताएगा, भले ही आपके बॉडी टाइप और उसके बॉडी टाइप में कितना ही फ़र्क़ क्यूं न हो. यह तो कुछ भी नहीं, कुछ लोग तो अस्पताल में भर्ती मरीज़ को देखने कम उसकी रिपोर्ट्स और एक्स-रे देखने ज़्यादा जाते हैं. ऐसे लोगों को मेडिकल साइंस का एम भी पता नहीं होता, पर एक्स-रे की रिपोर्ट इतनी गंभीरता से देखते हैं, जैसे इनसे बड़ा कोई डॉक्टर नहीं. साथ ही डायटीशियन बनकर मरीज़ को डायट आदि के ढेरों टिप्स भी देकर आते हैं.

सावधान: सेहत बहुत ही गंभीर मामला है, बिना सही जानकारी के किसी तकलीफ़ के लिए किसी को मुफ़्त सलाह देना उसके लिए नुक़सानदायक भी हो सकता है.
– हर व्यक्ति का बॉडी टाइप अलग-अलग होता है, ज़रूरी नहीं, जो नुस्ख़े आप पर कारगर रहे हों, वही दूसरों पर भी कारगर साबित होंगे. इस बात का ध्यान रखें और न मुफ़्त के डॉक्टर बनें और न ही मुफ़्त की सलाहों पर ग़ौर करें.
– किसी भी तरह की तकलीफ़ में एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क करें.

मुफ़्त के रिलेशनशिप एक्सपर्ट

शादी के बाद पति को मुट्ठी में रखना है, वरना ससुराल में तुम्हारी कोई अहमियत नहीं होगी… सास-ससुर की बहुत ज़्यादा जीहज़ूरी न करना, वरना ज़िंदभीगर उनकी ग़ुलामी करनी पड़ेगी… ननद और जेठानी से ख़ुद को आगे रखना… लड़कों को ससुरालवालों का ज़्यादा ख़्याल नहीं रखना चाहिए, वरना उनकी वैल्यू कम हो जाती है… से लेकर पति-पत्नी का रिश्ता कैसा होना चाहिए, उन्हें बच्चे कब पैदा करने चाहिए… जैसे विषयों पर अक्सर लोग सलाह देते रहते हैं. ज़रूरी नहीं कि सभी सलाहें ग़लत ही हों, पर ज़्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि ऐसे विषयों पर मुफ़्त सलाह बांटनेवालों का निजी अनुभव कटु होता है, जिसके कारण वो ऐसी सलाहें देते हैं.

सावधान: जिस तरह हर व्यक्ति अलग होता है, उसी तरह हर घर का माहौल भी अलग होता है. ज़रूरी नहीं, जो बातें एक घर में होती हों, वो दूसरे घरों में भी हो. इसलिए किसी को भी कोई भी सलाह देने से पहले इन पहलुओं पर सोच लें.
– लोग हमेशा अपने अनुभव के आधार पर सलाह देते हैं, जो ज़रूरी नहीं कि आपके लिए सही ही हो, इसलिए किसी विश्‍वासपात्र से ही अपनी समस्या बांटें.
– पति-पत्नी का रिश्ता, बच्चे पैदा करना, न करना, कब करना, जैसे विषय बेहद निजी हैं, जिन पर दूसरों की दख़लंदाज़ी लोगों को पसंद नहीं.
– ऐसे रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स से हर कोई दूर भागता है, इसलिए अगर आपको भी मुफ़्त सलाह देने की आदत हैं, तो इससे बचें.

मुफ़्त के लवगुरू

आज का ज़माना प्यार का कम और अफेयर का ज़्यादा है. आपको अपने स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या आस-पड़ोस में ऐसे मुफ़्त के लवगुरू बहुत मिल जाएंगे, जिनका काम ही अफेयर करनेवालों को मुफ़्त सलाह बांटना है. इन लवगुरुओं की तादाद फिल्मों और मोबाइल फोन ने कुछ ज़्यादा ही बढ़ा दी है. इनके टिप्स से कुछ लोगों को फ़ायदा भी होता है, पर फेल होनेवालों की संख्या ज़्यादा है. प्यार-मोहब्बत टिप्स से नहीं, जज़्बात से होते हैं.

सावधान: हो सकता है कि किसी के बताए गुरु मंत्रों से एक बार आप किसी का दिल जीत लें, पर आपका प्यार अगर सच्चा नहीं, तो टिक नहीं पाएगा और अगर सच्चा हो, तो उसे किसी टिप्स की ज़रूरत नहीं.
– रोमियो-मजनू बनने के चक्कर में बहुत-से यंगस्टर्स पढ़ाई-लिखाई, करियर, रिश्ते-नाते सब दांव पर लगा देते हैं, जो कहीं से भी सही नहीं.
– प्यार इंसान को एक और बेहतर बनाता है, पर अक्सर देखा गया है कि ज़्यादातर यंगस्टर्स को प्यार नहीं अफेयर करना होता है.

मुफ़्त के करियर काउंसलर्स

कहते हैं हमेें वह काम करना चाहिए, जिसमें हमारा पैशन हो, पर आजकल ज़्यादातर लोग हमें यही सलाह देते हैं कि काम वो करना चाहिए, जिसमें पैकेज अच्छा मिलता है. आपके रिश्तेदारों में चाचा, मौसा, मामा या भइया, ज़रूर ऐसे होंगे, जिन्होंने अपना करियर बनाने के लिए इतने पापड़ बेले होते हैं कि उनका अनुभव अच्छा-ख़ासा होता है. अक्सर देखा गया है कि मुफ़्त की सलाह देनेवाले ये करियर काउंसलर्स ज़िंदगी में ख़ुद कोई ख़ास मुकाम हासिल नहीं कर पाते, पर दूसरों से बड़ी अपेक्षाएं रखते हैं. किस स्टूडेंट को कौन-सा कोर्स करना चाहिए, यह निर्णय लेने का हक़ ये अपने पास रखना पसंद करते हैं.

सावधान: करियर से हमारी रोज़ी-रोटी ही नहीं, हमारा पैशन भी जुड़ा होता है.
– करियर का चुनाव किसी के भी पसंद और पैशन के अनुसार होना चाहिए.
– अच्छे पैकेज के लालच में भले ही आप किसी करियर का चुनाव कर लें, पर एक समय के बाद वही काम आपके तनाव का कारण बनने लगता है.
– एक करियर के फेलियर पर दूसरा करियर शुरू कर पाना इतना आसान नहीं होता, इसलिए कोई भी करियर चुनने में किसी की सलाह के बजाय अपने दिल की सुनें.

मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट्स

आज की भागदौड़ और तनाव भरी ज़िंदगी में हर कोई हेल्थ और फिटनेस से जूझ रहा है. ऐसे में बहुत-से लोग मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट्स बने फिरते हैं. रोज़ाना पुशअप किया करो…क्रंचेज़ मारा करो… कार्डियो किया करो… 2-4 योगासन किया करो… सलाह मिली और आप लग गए फिटनेस बनाने और दो दिन बाद पता चला शरीर के सारे पुर्ज़े तकलीफ़ देने लगे. मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह ने आपको डॉक्टर के पास पहुंचा दिया.

सावधान: एक्सरसाइज़ और योग ऐसे विषय हैं, जो हमेशा सही एक्सपर्ट्स की निगरानी में किए जाने चाहिए. इसलिए बिना सोच-समझे किसी की भी फिटनेस सलाह न मान लें.
– फिटनेस एक्सपर्ट्स व योगा टीचर्स हर किसी के बॉडी टाइप और हेल्थ कंडीशन्स को देखकर उन्हें एक्सरसाइज़ और योग की सलाह देते हैं.
– योग व एक्सरसाइज़ के डायट व लाइफस्टाइल से जुड़े अपने कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना बहुत ज़रूरी होता है, जो आपके मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट को कभी पता नहीं होंगे.
– एकसरसाइज़ या योग के लिए किस समय करें, उससे पहले या उसके बाद कितने अंतराल पर खाएं-पीएं आदि का बहुत ध्यान रखना पड़ता है.
– हेल्थ और फिटनेस के मामले में कभी भी बिना सोचे-समझे किसी की सलाह न मानें. आप अपनी सेहत के प्रति जागरूक हैं, तो सही एक्सपर्ट्स से मिलिए, वरना मुफ़्त में तो लेने के देन पड़ सकते हैं.

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Unwanted Advises

मुफ़्त के फाइनेंशियल एडवाइज़र्स

कम समय में दुगुना फ़ायदा मिलेगा, पैसे जमा कर दो… लोन लेकर फलां जगह इन्वेस्ट कर दो, फ़ायदे में रहोगे… ऐसी स्कीम दोबारा नहीं आएगी, कहीं से भी जुगाड़ करके पैसे भर दो… शेयर मार्केट अच्छा चल रहा है, इन्वेस्ट करो… मेरे दोस्त के दोस्त ने फलां स्कीम ली थी, तुम भी ट्राई करो… रिस्क लोगे, तभी तो फ़ायदा मिलेगा… जैसी तमाम सलाह देनेवाले हमारे मुफ़्त के फाइनेंशियल एडवाइज़र्स होते हैं, जो कहीं दूर से नहीं बल्कि हमारे पड़ोस या रिश्तेदारों में से एक होते हैं. अगर आपका कोई रिश्तेदार इंश्योरेंस एजेंट है, तो ज़रूरत हो न हो, बेवजह के इन्वेस्टमेंट और प्लान आपकी झोली में डालकर वह अपना टारगेट ज़रूर पूरा करेंगे.
सावधान: फाइनेंशियल एडवाइज़र्स हमेशा यही सलाह देते हैं कि कोई भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले यह देखें कि वह आपके लिए कितना ज़रूरी है, उसके अच्छे रिर्ट्न्स कब तक मिलेंगे, इन्कम टैक्स रिटर्न में कितना फ़ायदेमंद साबित होगा आदि.
– शेयर मार्केट और म्यूच्युअल फंड में निवेश रिस्की होता है, बिना सही जानकारी के आप अपने पैसे डूबो देंगे.
– लोन लेकर इन्वेसट करनेवाले अक्सर दोहरी मार खाते हैं. एक तरफ़ बिना सोचे-समझे इन्वेस्टमेंट में नुक़सान तो दूसरी तरफ़ लोन भरने का बोझ आपकी फाइनेंशियल स्थिति को डगमगा सकता है.
– कोई फलां बिज़नेस में अच्छे पैसे कमा रहा है, तो ज़रूरी नहीं, आप भी कमा लें. बिज़नेस एक हुनर है, जो हर किसी में नहीं होता.
– कभी भी अपने मुफ़्त एडवाइज़र की बातों में आकर या किसी की देखा-देखी फाइनेंस के ़फैसले न लें.
– कम समय में ज़्यादा पैसे कमानेवाले स्कीम्स के अक्सर भंडाफोड़ होते हैं, फिर भी लोग ऐसी लुभावनी स्कीम्स में पैसे लगाने से ख़ुद को रोक नहीं पाते.
– अगर लोगों को समझ में आ जाए कि कोई बिना कुछ किए उन्हें इतने सारे पैसे भला क्यों और कहां से लाकर देगा, तो ऐसी घटनाएं ही न हों.
– जैसे अपवाद हर जगह होते हैं, वैसे ही हो सकता है, आपके मुफ़्त फाइनेंशियल एडवाइज़र की मुफ़्त सलाह से आपको फ़ायदा भी हो जाए. पर कोई भी काम हमेशा सोच-समझकर करें.

क्यों है सलाहकारों की इतनी भरमार?

– आदत से मजबूर

अब सवाल उठता है कि आख़िर हमारे देश में लोगों को मुफ़्त सलाह देेने की इतनी अच्छी आदत क्यों है? और जो जवाब सबसे पहले सूझता है, वो है आदत. कुछ लोगों की आदत ही होती है, मुफ़्त में सलाह देने की. आप सलाह मांगो न मांगो, वो आपको ज़रूर देकर जाएंगे.

– ज्ञान बघारने का शौक़

यह भी काफ़ी देखा जाता है कि लोगों को अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने का बहुत शौक़ होता है. आप उनसे किसी विषय पर बात छेड़कर तो देखिए, आपको ऐसे-ऐसे लफ़्ज़ सुनने को मिलेंगे, जो शायद एक्सपर्ट्स भी इस्तेमाल न करते हों. अपने ज्ञान प्रदर्शन के लिए ही ज़्यादातर लोग सलाह बांटते रहते हैं.

– सामाजिक दायित्व

मुफ़्त के सलाहकारों की बढ़ती तादात के ज़िम्मेदार कहीं न कहीं हम भी हैं. हम भी तो अपना रोना किसी के भी सामने लेकर बैठ जाते हैं, ऐसे में हमें उस दुख से उभारना वह अपना सामाजिक दायित्व समझते हैं और भरसक प्रयास करते हैं, आपको उस दुख से उबारने का.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने का मौक़ा

सबके सामने ख़ुद को बेस्ट साबित करने के लिए कुछ लोग बेवजह दूसरों से उनके बारे में पूछ-पूछकर सलाह देते रहते हैं. यदि किसी विषय पर चर्चा हो रही हो, तो इनकी सलाह का पिटारा जल्दी बंद नहीं होता.

मुफ़्त की सलाह के साइड इफेक्ट्स
भले ही हमें ऐसा लगता हो कि मुफ़्त की चीज़ हमेशा फ़ायदेमंद होती है, पर ऐसा है नहीं. इसके भी साइड इफेक्ट्स हैं और कुछ तो बहुत ही गंभीर होते हैं.

ज़िंदगीभर की लत

– अंबिकाजी की उम्र क़रीब 45 साल है. उन्हें मसूड़ों और दांतों में दर्द की शिकायत होने लगी, तो उन्होंने डेंटिस्ट को दिखाने की बजाय अपनी सहेलियों से इस बात का ज़िक्र किया. जैसा कि अपेक्षित था, सबने अपने-अपने तजुर्बे के मुताबिक उन्हें ढेरों मुफ़्त की सलाहें दे दीं, पर उसमें से एक सलाह उन्हें जंच गई, जो थी, कच्ची तंबाकू को थोड़ी देर के लिए दांतों के नीचे दबाकर रखने की. अंबिकाजी ने इसे आजमाना शुरू किया और उन्हें दर्द में राहत महसूस हुई और फिर क्या था,
धीरे-धीरे उन्हें इसकी लत लग गई. यह समझने के बावजूद कि तंबाकू से कैंसर होता है, वो इस लत से ख़ुद को आज़ाद नहीं कर पा रहीं.

– अनीता सिंह

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रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

कहते हैं ‘शब्दों के दांत नहीं होते हैं, लेकिन शब्द जब काटते हैं, तो दर्द बहुत होता है.’ कुछ ऐसी ही कैफ़ियत होती है उनके साथ, जिनके रिश्तेदार कभी अनजाने में, तो कभी जानबूझकर ऐसी बातें या सवाल पूछ बैठते हैं, जो अक्सर उन्हें चुभ जाती हैं या असहज बना देती हैं. इसलिए ज़रूरी है कि रिश्तेदारों से बात करते व़क्त हम कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि बातें बुरी नहीं, बल्कि अच्छी लगें और रिश्ते भी मधुर रहें.

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं इसलिए उन्हें बहुत ही प्यार व सावधानी के साथ संभालकर रखते हैं, क्योंकि रिश्तों में पड़ी छोटी-सी दरार भी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकती है. अक्सर रिश्तेदारों के बारे में सबकुछ जानने की उत्सुकता में लोग ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो आमतौर पर नहीं पूछनी चाहिए. हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, जिसे हर किसी को याद रखनी चाहिए और ऐसी बातें अवॉइड करनी चाहिए, ताकि आपके रिश्ते न प्रभावित हों और न ही दूसरों को दुख पहुंचे.

1. बेटी की शादी की बात

अगर किसी के घर में शादी के लायक बेटी हो, तो मां-बाप को बेटी की शादी कब कर रहे हैं? कब तक घर में बिठाकर रखेंगें, जैसी बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं. भले ही आप यह सवाल अपने होने के अधिकार से पूछते हैं, पर कहीं न कहीं यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगती, क्योंकि जितनी फ़िक़्र आपको है, उससे कहीं ज़्यादा वो इस बात के फ़िक़्रमंद होंगे, क्योंकि वो उनकी बेटी है. आजकल लड़कियों का अपने पैरों पर खड़े होना बहुत ज़रूरी हो गया है, जिसे सभी मां-बाप समझते हैं और यही वजह है कि उन्हें जल्दी शादी के लिए बाध्य भी नहीं करते. इसलिए इस विषय को न छेड़ना ही ज़्यादा अच्छा होगा.

2. गुड न्यूज़ की बात 

शादी को सालभर हुए नहीं कि रिश्तेदार ख़ुश ख़बरी की बात करने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब सुना रहे हैं? यह सवाल आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. जहां एक ओर प्रेग्नेंसी किसी भी व्यक्ति का बहुत ही निजी मामला होता है, जिसकी प्लानिंग का अधिकार पति-पत्नी को है, वहीं दूसरी ओर बदलते समय और लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. हो सकता है, शादी के बाद भी कंसीव न कर पाने के कारण कपल पहले से ही परेशान हो और ऐसे में रिश्तेदारों का बार-बार इस विषय में पूछना उन्हें और परेशान करता हो. एक शुभचिंतक होने के नाते अपने रिश्तेदारों से इस विषय पर ज़्यादा सवाल कभी न करें.

3. फैमिली इन्कम की बातें

घर में कौन कितना कमाता है? यह रिश्तेदारों के लिए हमेशा ही कौतुहल का विषय होता है. दरअसल, सैलरी की जानकारी से वो फैमिली इन्कम का अंदाज़ा लगाते हैं, ताकि दूसरे रिश्तेदारों से तुलना कर सकें. बेटों-बेटी की इन्कम में लोगों को ज़्यादा दिलचस्पी रहती है, ताकि अपने बच्चों से तुलना करके जान सकें कि किसके बच्चे ज़्यादा सफल हैं, ताकि सबके सामने शो ऑफ का एक और मौक़ा मिल सके. हर किसी के फाइनेंशियल हालात दूसरों से अलग होते हैं, ऐसे में ज़्यादातर लोग फैमिली इन्कम के बारे में डिस्कस करना उचित नहीं समझते. इसलिए समझदारी ऐसे विषयों को न छेड़ने में ही है.

4. बेटे की नौकरी की बात

आपके बेटे की नौकरी कहीं लगी कि अभी भी घर पर ही है? ये सवाल उन रिश्तेदारों से अक्सर पूछे जाते हैं, जिनके बच्चे स्ट्रगल कर रहे होते हैं. हर मां-बाप की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे जो भी करें, उसमें उन्हें कामयाबी मिले. अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता, इसलिए ऐसी चुभनेवाली बातें हमेशा अवॉइड करें. अगर आप सचमुच में फ़िक़्रमंद हैं, तो अपनी बात को सही तरी़के से पूछें.

5. रोमांटिक या पर्सनल लाइफ की बातें

पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेदकर पूछना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. ख़ुद को उनका ज़्यादा क़रीबी जताने के चक्कर में रिश्तेदार अक्सर ऐसे सवाल
पूछ बैठते हैं, जिन्हें प्राइवेसी में दख़लंदाज़ी माना जाता है. रोमांस पति-पत्नी के बीच का बहुत ही निजी मामला है. ऐसे सवाल पूछकर आप अपनी इमेज ख़ुद ख़राब करते हैं, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना कोई पसंद नहीं करता. नतीजतन लोग आपसे कतराने लगते हैं. अगर आप नहीं चाहते कि लोग आपके साथ भी ऐसा व्यवहार हो, तो अपने रिश्ते की अहमियत बनाए रखें और ऐसी बातों से हमेशा बचें.

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Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives
6. बहू के मायकेवालों की बातें

हमारा समाज भले ही कितना भी मॉडर्न क्यों न हो जाए, पर बहुओं के लिए लोगों की सोच अभी भी पुरानी ही है. उसके मायकेवालों के बारे में जानना ज़्यादातर रिश्तेदारों का प्रिय शगल होता है. उन्हें हमेशा इस बात की फ़िक़्र लगी रहती है कि बहू  की बहन की शादी हुई या नहीं, उसका भाई काम पर लगा या नहीं और उससे भी ज़्यादा त्योहार या शादी-ब्याह के मौक़ों पर बहू के मायके से कितना सामान आया. तोहफ़ों का लेन-देन हो या फिर अपनों के बारे में तीखी बातें सुनना, किसी भी बहू को पसंद नहीं आता. हर लड़की चाहती है कि ससुराल के लोग उसके परिवार का सम्मान करें और उन्हें भी वही इज़्ज़त मिले, जो दूसरों को मिलती है. एक लड़की के लिए उसका परिवार उसका सम्मान होता है, ऐसे में उन पर तीखे सवाल उसके सम्मान को चोट पहुंचाते हैं, जो आजकल की आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बहुएं बर्दाश्त नहीं करती और यही वजह है कि रिश्तों में मनमुटाव बढ़ने लगता है. ऐसे में रिश्तों को बचाना आपके अपने हाथ में है.

7. प्रॉपर्टी के बंटवारे की बातें

जितनी दिलचस्पी रिश्तेदारों की फैमिली इन्कम में होती है, उतनी ही प्रॉपर्टी के बंटवारे में भी होती है. प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?, किसको क्या देने की सोच रहे हैं?, वसीयत बनाई या नहीं? जैसी बातें लोग केवल परिवार या बेहद क़रीबी लोगों से ही शेयर करते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राइवेट होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग गोपनीय रखना पसंद करते हैं. इसलिए उनकी गोपनियता में कभी सेंध न लगाएं. अगर वो आपको इस लायक समझेंगे, तो ख़ुद ही सारी बातें शेयर करेंगे. पर अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आप ख़ुद से ऐसे निजी मामलों को न कुरेदें. सभी रिश्तेदारों को अपने रिश्तों की सीमा पता होनी चाहिए और यह भी कि किससे क्या पूछना है और क्या नहीं.

8. पुराने हादसों की बातें

रिश्तेदारों से बातचीत करते व़क्त ज़्यादातर लोग औपचारिकता का ध्यान ही नहीं रखते और अक्सर कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग भूलने में ही भलाई समझते हैं. जाने-अनजाने किसी पुराने हादसे या ज़ख़्मों को कुरेदना अच्छी बात नहीं. ऐसी बातों से सभी को बचना चाहिए.

9. दूसरी शादी हो, तो पहली शादी की बातें

हर कोई चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन ख़ुशहाल हो, पर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. अक्सर हादसे ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं और इंसान को अपनी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देना पड़ता है. ऐसे में दोबारा नई गृहस्थी की शुरुआत करनेवालों से कभी भी उनकी पिछली शादी के बारे में नहीं पूछना चाहिए. तुम्हारी पहली शादी क्यों टूटी? जैसे सवाल करके किसी की दुखती रग पर हाथ न रखें.

रिश्तों में लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी है

साइकोलॉजिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी के अनुसार, “दूसरों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की उत्सुकता हर इंसान में होती है. हमारे समाज में बड़े-बुज़ुर्ग छोटों से निजी से निजी सवाल पूछना अपना हक़ समझते हैं और साथ ही यह भी जताने की कोशिश करते हैं कि हमें तुम्हारी कितनी परवाह है. दरअसल, वो ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आस-पास वही देखा है और बचपन से वही सीख पाई है, जबकि आज ज़माना बदल रहा है. नई पीढ़ी कुछ मामलों में दख़लंदाज़ी पसंद नहीं करती है और वो कहीं न कहीं सही भी है, क्योंकि कुछ मामले इतने निजी होते हैं कि उनके बारे में दूसरों द्वारा बार-बार टोका जाना किसी को भी पसंद नहीं होता. इसलिए बदलते ज़माने के साथ आज हमें अपनों की
प्राइवेसी का भी सम्मान करना चाहिए और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी हो गया है. हालांकि अभी भी 1-2% लोग ही हैं, जो सेंसिटिव होते हैं और जिन्हें ऐसी बातें बुरी लगती है, वरना 98% तो मानकर ही चलते हैं कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएंगे और वो इसके लिए तैयार रहते हैं. पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्हें ऐसी बातें बुरी नहीं लगती, पर वो उनसे निपटना सीख जाते हैं.”

जहां ज़्यादातर लोग कौतुहलवश ऐसे सवाल करते हैं, वहीं कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो केवल अपनी महत्ता दिखाने के लिए, दूसरों पर दबाव बनाए रखने व कंट्रोल करने की भावना से ऐसा करते हैं. इसलिए बातों से बढ़कर ये बातें कभी-कभी तानों और कटाक्ष में तब्दील हो जाती हैं. ऐसे लोगों के साथ आपको डील करना सीखना होगा. उनकी बातों पर कभी भी न ग़ुस्सा करें, न अपना मूड ख़राब करें और न ही दुखी हों, क्योंकि यह उनकाव्यक्तित्व है, जिसे आप बदल नहीं सकते. ऐसे सवाल ज़्यादातर महिलाओं से ही पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हें सॉफ्ट टारगेट माना जाता है और जो बातें महिलाओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, वो बच्चों व तलाक़ से जुड़ी होती हैं. इसलिए महिलाएं अपने आप को मना लें कि ऐसा तो होना ही है. ख़ुद को मानसिक तौर पर हमेशा तैयार रखें, ताकि ये बातें न आपको प्रभावित करें, न ही आपके रिश्ते को.

– सुनीता सिंह

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दूसरों की ज़िंदगी में झांकना कहीं आपका शौक़ तो नहीं? (Why Do We Love To Gossip?)

Why Do We Love To Gossip

Why Do We Love To Gossip

अरे सुनो, वो जो पड़ोस की वर्माजी की बेटी है न, वो रोज़ देर रात को घर लौटती है, पता नहीं ऐसा कौनसा काम करती है…?

गुप्ताजी की बीवी को देखा, कितना बनठन के रहती हैं, जबकि अभीअभी उनके जीजाजी का देहांत हुआ है…!

सुनीता को देख आज बॉस के साथ मीटिंग है, तो नए कपड़े और ओवर मेकअप करके आई है

इस तरह की बातें हमारे आसपास भी होती हैं और ये रोज़ की ही बात है. कभी जानेअनजाने, तो कभी जानबूझकर, तो कभी टाइमपास और फन के नाम पर हम अक्सर दूसरों के बारे में अपनी राय बनातेबिगाड़ते हैं और उनकी ज़िंदगी में ताकझांक भी करते हैं. यह धीरेधीरे हमारी आदत और फिर हमारा स्वभाव बनता जाता है. कहीं आप भी तो उन लोगों में से नहीं, जो इस तरह का शौक़ रखते हैं?

क्यों करते हैं हम ताकझांक?

ये इंसानी स्वभाव का हिस्सा है कि हम जिज्ञासावश लोगों के बारे में जानना चाहते हैं. ये जिज्ञासा जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती है, तो वो बेवजह की ताकझांक में बदल जाती है.

अक्सर अपनी कमज़ोरियां छिपाने के लिए हम दूसरों में कमियां निकालने लगते हैं. यह एक तरह से ख़ुद को भ्रमित करने जैसा होता है कि हम तो परफेक्ट हैं, हमारे बच्चे तो सबसे अनुशासित हैं, दूसरों में ही कमियां हैं.

कभीकभी हमारे पास इतना खाली समय होता है कि उसे काटने के लिए यही चीज़ सबसे सही लगती है कि देखें आसपास क्या चल रहा है.

दूसरों के बारे में राय बनाना बहुत आसान लगता है, हम बिना सोचेसमझे उन्हें जज करने लगते हैं और फिर हमें यह काम मज़ेदार लगने लगता है.

इंसानी स्वभाव में ईर्ष्या भी होती है. हम ईर्ष्यावश भी ऐसा करते हैं. किसी की ज़्यादा कामयाबी, काबिलीयत हमसे बर्दाश्त नहीं होती, तो हम उसकी ज़िंदगी में झांककर उसकी कमज़ोरियां ढूंढ़ने की कोशिश करने लगते हैं और अपनी राय बना लेते हैं.

इससे एक तरह की संतुष्टि मिलती है कि हम कामयाब नहीं हो पाए, क्योंकि हम उसकी तरह ग़लत रास्ते पर नहीं चले, हम उसकी तरह देर रात तक घर से बाहर नहीं रहते, हम उसकी तरह सीनियर को रिझाते नहींआदि.

कहीं न कहीं हमारी हीनभावना भी हमें इस तरह का व्यवहार करने को मजूबर करती है. हम ख़ुद को सामनेवाले से बेहतर व श्रेष्ठ बताने के चक्कर में ऐसा करने लगते हैं.

हमारा पास्ट एक्सपीरियंस भी हमें यह सब सिखाता है. हम अपने परिवार में यही देखते आए होते हैं, कभी गॉसिप के नाम पर, कभी ताने देने के तौर पर, तो कभी सामनेवाले को नीचा दिखाने के लिए उसकी ज़िंदगी के राज़ या कोई भी ऐसी बात जानने की कोशिश करते हैं. यही सब हम भी सीखते हैं और आगे चलकर ऐसा ही व्यवहार करते हैं.

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Why Do We Love To Gossip

कहां तक जायज़ है यूं दूसरों की ज़िंदगी में झांकना?

इसे जायज़ तो नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन चूंकि यह इंसानी स्वभाव का हिस्सा है, तो इसे पूरी तरह से बंद भी नहीं किया जा सकता.

 किसी की ज़िंदगी में झांकने का अर्थ है आप उसकी प्राइवेसी में दख़लअंदाज़ी कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल ग़लत है.

न स़िर्फ ये ग़लत है, बल्कि क़ानूनन जुर्म भी है.

हमें यह नहीं पता होता कि सामनेवाला किन परिस्थितियों में है, वो क्या और क्यों कर रहा है, हम महज़ अपने मज़े के लिए उसके सम्मान के साथ खिलवाड़ करने लगते हैं.

ये शिष्टाचार के ख़िलाफ़ भी है और एक तरह से इंसानियत के ख़िलाफ़ भी कि हम बेवजह दूसरों की निजी ज़िंदगी में झांकें.

जिस तरह हम यह मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी पर हमारा हक़ है, किसी और को हमारे बारे में राय कायम करने या ग़लत तरह से प्रचार करने का अधिकार नहीं है, उसी तरह ये नियम हम पर भी तो लागू होते हैं.

लेकिन अक्सर हम अपने अधिकार तो याद रखते हैं, पर अपनी सीमा, अपने कर्त्तव्य, अपनी मर्यादा भूल जाते हैं.

यदि हमारे किसी भी कृत्य से किसी के मानसम्मान, स्वतंत्रता या मर्यादा को ठेस पहुंचती है, तो वो जायज़ नहीं.

किसने क्या कपड़े पहने हैं, कौन कितनी देर रात घर लौटता है या किसके घर में किसका आनाजाना लगा रहता हैइन तमाम बातों से हमें किसी के चरित्र निर्माण का हक़ नहीं मिल जाता है.

हम जब संस्कारों की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने ही संस्कार देखने चाहिए. क्या वो हमें यह इजाज़त देते हैं कि दूसरों की ज़िंदगी में इतनी

ताकाझांकी करें?

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Why Do We Love To Gossip

कैसे सुधारें ये ग़लत आदत?

किसी के बारे में फ़ौरन राय न कायम कर लें और न ही उसका प्रचारप्रसार आसपड़ोस में करें.

बेहतर होगा यदि इतना ही शौक़ है दूसरों के बारे में जानने का, तो पहले सही बात का पता लगाएं.

ख़ुद को उस व्यक्ति की जगह रखकर देखें.

उसकी परवरिश से लेकर उसकी परिस्थितियां व हालात समझने का प्रयास करें.

दूसरों के प्रति उतने ही संवेदनशील बनें, जितने अपने प्रति रहते हैं.

अपनी ईर्ष्या व हीनभावना से ऊपर उठकर लोगों को देखें.

यह न भूलें कि हमारे बारे में भी लोग इसी तरह से राय कायम कर सकते हैं. हमें कैसा लगेगा, यदि कोई हमारी ज़िंदगी में इतनी ताकझांक करे?

सच तो यह है कि वर्माजी की बेटी मीडिया में काम करती है, उसकी लेट नाइट शिफ्ट होती है, इसीलिए देर से आती है.

गुप्ताजी की बीवी सजसंवरकर इसलिए रहती है कि उसकी बहन ने ही कहा था कि उसके जीजाजी बेहद ज़िंदादिल और ख़ुशमिज़ाज इंसान थे और वो नहीं चाहते थे कि उनके जाने के बाद कोई भी दुखी होकर उनकी याद में आंसू बहाये, बल्कि सब हंसीख़ुशी उन्हें याद करें. इसलिए सबने यह निर्णय लिया कि सभी उनकी इच्छा का सम्मान करेंगे.

– सुनीता का सच यह था कि आज उसकी शादी की सालगिरह भी है, इसलिए वो नए कपड़े और मेकअप में नज़र आ रही है.

ये मात्र चंद उदाहरण हैं, लेकिन इन्हीं में कहीं न कहीं हम सबकी सच्चाई छिपी है. बेहतर होगा हम बेहतर व सुलझे हुए इंसान बनें, क्योंकि आख़िर हमसे ही तो परिवार, परिवार से समाज, समाज से देश और देश से दुनिया बनती है. जैसी हमारी सोच होगी, वैसी ही हमारी दुनिया भी होगी. अपनी दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सोच को भी बेहतर बनाना होगा.

विजयलक्ष्मी

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जब अपनों को दें उधार 7 बातों का रखें ध्यान (7 Tips Keep In Mind While Giving Loans to Dear One)

giving loans to dear ones

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हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है जब उसे अतिरिक्त पैसों की ज़रूरत पड़ती है और तब मदद के लिए उसके दिमाग़ में सबसे पहले दोस्त व रिश्तेदार ही आते हैं. यदि आपका भी कोई दोस्त/रिश्तेदार आपसे पैसों की मदद मांगे, तो उनकी मदद ज़रूर करें, मगर कुछ बातों का ध्यान रखें. आमतौर पर लोग रिश्तेदारी में पैसों के लेनदेन से बचते हैं क्योंकि कई बार पैसा बेहद क़रीबी रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देता है. इसलिए लोग दोस्त/रिश्तेदारों के साथ बिज़नेस पार्टनरशिप करने से भी बचते हैं, मगर बावजूद इसके कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपका कोई क़रीबी आपसे मदद मांगता है और आप रिश्तों का लिहाज़ करके ना नहीं बोल पातें. अपनों की मदद करना अच्छी बात है, मगर पैसों के मामले में थोड़ी एहतियात भी बरतनी चाहिए, यदि आपको किसी अपने को उधार देना ही पड़ें, तो इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

परिस्थितियों का आकलन करें
किसी अपने को उधार देने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह से विश्‍लेषण कर लें, साथ ही मामले की गंभीरता को भी समझने की कोशिश करें. क्या सामने वाले को सचमुच किसी बेहद ज़रूरी काम के लिए पैसे चाहिए या फिर बस अपना कोई शौक़ पूरा करने लिए वो आपसे पैसे मांग रहा है. हालांकि इस मामले में बहुत ़ज़्यादा पूछताछ न करें, मगर इतना ज़रूर जानने की कोशिश करें कि उसे किस काम के लिए पैसे चाहिए? हो सके तो उसे तुरंत पैसे देने की बजाय कोई दूसरा रास्ता सुझाएं. यदि फिर भी बात न बनें और पैसे देने ही पड़े, तो अच्छी तरह से उसकी ज़रूरत की पड़ताल करने के बाद ही पैसे दें, कहीं ऐसा न हो कि वो आपके पैसों का ग़लत इस्तेमाल करें जिससे भविष्य में आपके रिश्ते में दरार पड़ जाए.

शर्त और नियम पर चर्चा कर लें
पैसों के मामले में भावनाओं को दूर ही रखें. आपकी क्या शर्तें और नियम है इसकी लिस्ट बना लें, जैसे- वो कितने दिनों में आपके पैसे लैटाएगा, पेमेंट कैसे करेगा? यदि ज़्याद अमाउंट है तो इंस्टॉलमेंट कितनी होगी आदि. ये सारी चीज़ें सामने वाले से डिस्कस कर लें ताकि भविष्य में किसी तरह की ग़लतफ़हमी की गुंजाइश न रहे. एक बात याद रखिए कि एक बार पैसे देने के बाद उससे बार-बार ये न पूछे कि उसने पैसों का क्या किया, कैसे ख़र्च किए. आपके बार-बार पूछने से रिश्ते में तनाव और दरार आ सकती है. यदि बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं, तो उसका लिखित सबूत (प्रूफ) ज़रूर रखें.

अपनी सहूलियत देखें
‘अरे चाचा जी ने आज पहली बार मुझसे पैसे मांगे है, अब तो किसी भी तरह से पैसों का इंतज़ाम करना ही पड़ेगा…’ अपने किसी क़रीबी द्वारा उधार मांगने पर क्या ऐसा रिएक्शन आपको ही मुश्किल में डाल देगा. मान लीजिए आपने अभी तो अपनी क्षमता से बाहर जाकर अपने किसी दोस्त या कलीग से पैसे मांगकर उन्हें दे दिए, लेकिन यदि सामने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाएं तब आप क्या करेगें. दोस्तों के बीच आपकी क्या इज़्ज़त रह जाएगी? अतः यदि आपके पास पैसे नहीं है तो इनकार करने में संकोच न करें. अपनी ज़रूरते पूरी होने के बाद यदि आपके पास अतिरिक्त पैसे हैं तो ही किसी को उधार दें. यदि आपको दोस्त/रिश्तेदार ने जितने पैसे मांगे है आपके पास उतना नहीं है, तो उनसे साफ़ शब्दों में कह दीजिए की आपके पास फिलहाल उतने पैसे नहीं हैं और जितना आपसे बन पड़े उतने ही पैसे दें.

पैसे वापस करने का समय निश्चित करें
चूंकि आप किसी अपने को ही उधार दे रहे हैं, ऐसे में शायद आपको लगे कि पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपकी ये सोच सही नहीं है. आप चाहे किसी को भी उधार दें, पैसे देते समय ही उसे वापस करने का समय भी तय कर लें. इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाला भी समय तय करने की ज़रूरत को समझें. दरअसल, ऐसा करना उसके लिए भी फ़ायदेमंद ही रहेगा क्योंकि समय तय करने से उस पर निश्‍चित तारीख़ तक पैसे देने का दबाव बढ़ेगा और आपके पैसे चुकता करने के लिए सेविंग करने में जुट जाएगा. जहां तक संभव हो कम पैसों के लिए ज़्याद लंबा समय न रखें. हां, यदि पैसे ज़्यादा दिए हैं, तो आप साल दो साल का समय तय कर सकते हैं. आपने कितना उधार दिया है, ये ज़रूर याद रखें.

ब्याज न वसूलें
आपने कोई बिज़नेस डील नहीं की है और न ही किसी बैंक या फायनेस कंपनी में निवेश किया है कि आपको ब्याज मिले. अपने किसी सगे-संबंधी को दिए पैसों पर ब्याज वसूलने की ग़लती न करें, हो सके उस व़क्त वो शख़्स आपकी बात मान लें, मगर आगे चलकर निश्‍चय ही आपके रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी. एक बात याद रखिए कि उन्होंने बैंक या किसी फायनेंशियल कंपनी की बजाय आपसे पैसे इसलिए मांगे क्योंकि उन्हें आप पर विश्‍वास है कि आप उनकी मजबूरी समझेंगे और उसका नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाएंगे.

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उधार को न बनाएं आदत
हालांकि आप अपने किसी क़रीबी को पैसे देकर उसकी मदद कर रहे हैं, मगर उधार देने को अपनी आदत में शुमार न करें. वरना सामने वाला व्यक्ति आपको ग्रांटेड लेने लगेगा. वो पैसों की अहमियत भी नहीं समझेगा क्योंकि उसे पता है कि जब उसे ज़रूरत होगी तो आप तो हैं ही उसकी मदद करने के लिए और ये हालात आपके लिए ख़तरनाक हो सकते हैं. क्योंकि लंबे समय पैसे न चुकाने पर यदि आप उससे बार-बार तकादा करते हैं, तो वो अपमानति और असुरक्षित महसूस करने लगता है. इस स्थिति में कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति आपके साथ कुछ ग़लत भी कर सकता है. ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां उधार लेने वाले व्यक्ति ने तंगहाली के कारण पैसे देने वाले को ही रास्ते से हटा दिया है.

पहचान वालों को बनाएं गवाह
आप जो उधार दे रहे हैं यदि उसके लिए कोई लिखित सबूत नहीं है, तो कभी भी अकेले में पैसे उधार न दें भले ही वो आपके भाई/बहन ही क्यों न हो. जहां तक संभव हो ऐसे कुछ लोगों (2-3) के सामने पैसे दें, जो आप दोनों को जानते हों. इससे पैसे लेने वाले को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रहेगा और वो जल्द पैसे वापस करने की कोशिश करेगा. इसी तरह इन्हीं जानकार लोगों के सामने पैसे वापस लौटाने पर उधार वापस करने वाले को भी तसल्ली रहती है.

मैंने अपने एक रिश्तेदार को 2-3 बार उधार दिए और उसने समय पर पैसे लौटा भी दिए, मगर एक बार उनके कहने पर मैंने 1 लाख रुपए 1 साल के लॉकिंग पिरियड पर उन्हें इन्वेस्ट करने के लिए दिए, मगर इस इनवेस्मेंट का उन्होंने मुझे कोई प्रूफ नहीं दिया. वो बेहद क़रीबी और विश्‍वसनीय रिश्तेदार थे इसलिए मैंने भी उनसे दुबारा प्रूफ के बारे में नहीं पूछा, मगर एक साल बाद जब मैंने उनसे पैसों के बारे में पूछा तो हर बार नए-नए बहाने बनाकर वो पैसे देने से बचते रहें. तब मुझे एहसास हुआ कि रिश्तेदारी में पैसे देकर मैंने कितनी बड़ी ग़लती की है. उनके बार-बार के झूठ से तंग आकर एक दिन मैंने उन्हें बहुत भला-बुरा सुनाया फिर क़रीब 6 महीने बाद उन्होंने पैसे तो लौटाए, मगर जिस इंटरेस्ट रेट की बाद करके उन्होंने पैसे निवेश करवाए थे वो इंटरेस्ट नहीं दिया. कम से कम मुझे मेरे मूल पैसे तो मिल गए इसी बात की तसल्ली है. इस वाक़ये के बाद से मैंने दुबारा अपने किसी रिश्तेदार से पैसे की लेन देन नहीं की और नही भविष्य में करूंगी.
नेहा शर्मा, दिल्ली

– कंचन सिंह

जब अपनों को दें उधार 7 बातों का रखें ध्यान (7 Things keep in mind while lending money to relatives)

उधार

उधार

हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है जब उसे अतिरिक्त पैसों की ज़रूरत पड़ती है और तब मदद के लिए उसके दिमाग़ में सबसे पहले दोस्त व रिश्तेदार ही आते हैं. यदि आपका भी कोई दोस्त/रिश्तेदार आपसे पैसों की मदद मांगे, तो उनकी मदद ज़रूर करें, मगर कुछ बातों का ध्यान रखें. आमतौर पर लोग रिश्तेदारी में पैसों के लेनदेन से बचते हैं क्योंकि कई बार पैसा बेहद क़रीबी रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देता है. इसलिए लोग दोस्त/रिश्तेदारों के साथ बिज़नेस पार्टनरशिप करने से भी बचते हैं, मगर बावजूद इसके कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपका कोई क़रीबी आपसे मदद मांगता है और आप रिश्तों का लिहाज़ करके ना नहीं बोल पातें. अपनों की मदद करना अच्छी बात है, मगर पैसों के मामले में थोड़ी एहतियात भी बरतनी चाहिए, यदि आपको किसी अपने को उधार देना ही पड़ें, तो इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

परिस्थितियों का आकलन करें
किसी अपने को उधार देने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह से विश्‍लेषण कर लें, साथ ही मामले की गंभीरता को भी समझने की कोशिश करें. क्या सामने वाले को सचमुच किसी बेहद ज़रूरी काम के लिए पैसे चाहिए या फिर बस अपना कोई शौक़ पूरा करने लिए वो आपसे पैसे मांग रहा है. हालांकि इस मामले में बहुत ़ज़्यादा पूछताछ न करें, मगर इतना ज़रूर जानने की कोशिश करें कि उसे किस काम के लिए पैसे चाहिए? हो सके तो उसे तुरंत पैसे देने की बजाय कोई दूसरा रास्ता सुझाएं. यदि फिर भी बात न बनें और पैसे देने ही पड़े, तो अच्छी तरह से उसकी ज़रूरत की पड़ताल करने के बाद ही पैसे दें, कहीं ऐसा न हो कि वो आपके पैसों का ग़लत इस्तेमाल करें जिससे भविष्य में आपके रिश्ते में दरार पड़ जाए.

शर्त और नियम पर चर्चा कर लें
पैसों के मामले में भावनाओं को दूर ही रखें. आपकी क्या शर्तें और नियम है इसकी लिस्ट बना लें, जैसे- वो कितने दिनों में आपके पैसे लैटाएगा, पेमेंट कैसे करेगा? यदि ज़्याद अमाउंट है तो इंस्टॉलमेंट कितनी होगी आदि. ये सारी चीज़ें सामने वाले से डिस्कस कर लें ताकि भविष्य में किसी तरह की ग़लतफ़हमी की गुंजाइश न रहे. एक बात याद रखिए कि एक बार पैसे देने के बाद उससे बार-बार ये न पूछे कि उसने पैसों का क्या किया, कैसे ख़र्च किए. आपके बार-बार पूछने से रिश्ते में तनाव और दरार आ सकती है. यदि बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं, तो उसका लिखित सबूत (प्रूफ) ज़रूर रखें.

यह भी पढ़ें:  फायनेंशियल प्लानिंग शादी से पहले और शादी के बाद

अपनी सहूलियत देखें
‘अरे चाचा जी ने आज पहली बार मुझसे पैसे मांगे है, अब तो किसी भी तरह से पैसों का इंतज़ाम करना ही पड़ेगा…’ अपने किसी क़रीबी द्वारा उधार मांगने पर क्या ऐसा रिएक्शन आपको ही मुश्किल में डाल देगा. मान लीजिए आपने अभी तो अपनी क्षमता से बाहर जाकर अपने किसी दोस्त या कलीग से पैसे मांगकर उन्हें दे दिए, लेकिन यदि सामने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाएं तब आप क्या करेगें. दोस्तों के बीच आपकी क्या इज़्ज़त रह जाएगी? अतः यदि आपके पास पैसे नहीं है तो इनकार करने में संकोच न करें. अपनी ज़रूरते पूरी होने के बाद यदि आपके पास अतिरिक्त पैसे हैं तो ही किसी को उधार दें. यदि आपको दोस्त/रिश्तेदार ने जितने पैसे मांगे है आपके पास उतना नहीं है, तो उनसे साफ़ शब्दों में कह दीजिए की आपके पास फिलहाल उतने पैसे नहीं हैं और जितना आपसे बन पड़े उतने ही पैसे दें.

पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करें
चूंकि आप किसी अपने को ही उधार दे रहे हैं, ऐसे में शायद आपको लगे कि पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपकी ये सोच सही नहीं है. आप चाहे किसी को भी उधार दें, पैसे देते समय ही उसे वापस करने का समय भी तय कर लें. इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाला भी समय तय करने की ज़रूरत को समझें. दरअसल, ऐसा करना उसके लिए भी फ़ायदेमंद ही रहेगा क्योंकि समय तय करने से उस पर निश्‍चित तारीख़ तक पैसे देने का दबाव बढ़ेगा और आपके पैसे चुकता करने के लिए सेविंग करने में जुट जाएगा. जहां तक संभव हो कम पैसों के लिए ज़्याद लंबा समय न रखें. हां, यदि पैसे ज़्यादा दिए हैं, तो आप साल दो साल का समय तय कर सकते हैं. आपने कितना उधार दिया है, ये ज़रूर याद रखें.

ब्याज न वसूलें
आपने कोई बिज़नेस डील नहीं की है और न ही किसी बैंक या फायनेस कंपनी में निवेश किया है कि आपको ब्याज मिले. अपने किसी सगे-संबंधी को दिए पैसों पर ब्याज वसूलने की ग़लती न करें, हो सके उस व़क्त वो शख़्स आपकी बात मान लें, मगर आगे चलकर निश्‍चय ही आपके रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी. एक बात याद रखिए कि उन्होंने बैंक या किसी फायनेंशियल कंपनी की बजाय आपसे पैसे इसलिए मांगे क्योंकि उन्हें आप पर विश्‍वास है कि आप उनकी मजबूरी समझेंगे और उसका नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाएंगे.

उधार को न बनाएं आदत
हालांकि आप अपने किसी क़रीबी को पैसे देकर उसकी मदद कर रहे हैं, मगर उधार देने को अपनी आदत में शुमार न करें. वरना सामने वाला व्यक्ति आपको ग्रांटेड लेने लगेगा. वो पैसों की अहमियत भी नहीं समझेगा क्योंकि उसे पता है कि जब उसे ज़रूरत होगी तो आप तो हैं ही उसकी मदद करने के लिए और ये हालात आपके लिए ख़तरनाक हो सकते हैं. क्योंकि लंबे समय पैसे न चुकाने पर यदि आप उससे बार-बार तकादा करते हैं, तो वो अपमानति और असुरक्षित महसूस करने लगता है. इस स्थिति में कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति आपके साथ कुछ ग़लत भी कर सकता है. ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां उधार लेने वाले व्यक्ति ने तंगहाली के कारण पैसे देने वाले को ही रास्ते से हटा दिया है.

पहचान वालों को बनाएं गवाह
आप जो उधार दे रहे हैं यदि उसके लिए कोई लिखित सबूत नहीं है, तो कभी भी अकेले में पैसे उधार न दें भले ही वो आपके भाई/बहन ही क्यों न हो. जहां तक संभव हो ऐसे कुछ लोगों (2-3) के सामने पैसे दें, जो आप दोनों को जानते हों. इससे पैसे लेने वाले को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रहेगा और वो जल्द पैसे वापस करने की कोशिश करेगा. इसी तरह इन्हीं जानकार लोगों के सामने पैसे वापस लौटाने पर उधार वापस करने वाले को भी तसल्ली रहती है.

मैंने अपने एक रिश्तेदार को 2-3 बार उधार दिए और उसने समय पर पैसे लौटा भी दिए, मगर एक बार उनके कहने पर मैंने 1 लाख रुपए 1 साल के लॉकिंग पिरियड पर उन्हें इन्वेस्ट करने के लिए दिए, मगर इस इनवेस्मेंट का उन्होंने मुझे कोई प्रूफ नहीं दिया. वो बेहद क़रीबी और विश्‍वसनीय रिश्तेदार थे इसलिए मैंने भी उनसे दुबारा प्रूफ के बारे में नहीं पूछा, मगर एक साल बाद जब मैंने उनसे पैसों के बारे में पूछा तो हर बार नए-नए बहाने बनाकर वो पैसे देने से बचते रहें. तब मुझे एहसास हुआ कि रिश्तेदारी में पैसे देकर मैंने कितनी बड़ी ग़लती की है. उनके बार-बार के झूठ से तंग आकर एक दिन मैंने उन्हें बहुत भला-बुरा सुनाया फिर क़रीब 6 महीने बाद उन्होंने पैसे तो लौटाए, मगर जिस इंटरेस्ट रेट की बाद करके उन्होंने पैसे निवेश करवाए थे वो इंटरेस्ट नहीं दिया. कम से कम मुझे मेरे मूल पैसे तो मिल गए इसी बात की तसल्ली है. इस वाक़ये के बाद से मैंने दुबारा अपने किसी रिश्तेदार से पैसे की लेन देन नहीं की और नही भविष्य में करूंगी.
नेहा शर्मा, दिल्ली

– कंचन सिंह

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बच्चों को सिखाएं फैमिली बॉन्डिंग (Educate your child on family bonding)

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न्यूक्लियर फैमिली के बढ़ते चलन के कारण पारिवारिक रिश्तों का दायरा सिकुड़ता जा रहा है. आजकल परिवार स़िर्फ मां-बाप और बच्चों तक ही सिमट कर रह गए हैं. ख़ासतौर पर बच्चों को मां-बाप को छोड़कर अन्य क़रीबी रिश्तों की जानकारी तक नहीं होती. बच्चों को रिश्तों का महत्व समझाने और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जोड़े रखने के लिए पैरेंट्स को क्या करना चाहिए? 

दादा-दादी, नाना-नानी, चाची, बुआ, मौसी जैसे रिश्ते अब बीते व़क़्त की बात बनकर रह गए हैं. बच्चों की नज़र में अब ये रिश्ते अजनबी बनते जा रहे हैं. बहुत से घरों में तो बच्चे इन रिश्तों के नाम से भी वाकिफ़ नहीं. ऐसे परिवेश में रहने वाले बच्चे रिश्तों में प्यार, लगाव व अपनेपन को बिल्कुल भी समझ नहीं पाते. ऐसी स्थिति से बचने के लिए और बच्चों को पारिवारिक रिश्तों का महत्व समझाने के लिए पैरेंट्स को क्या करना चाहिए? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

छोटी उम्र से ही करें शुरुआत

* रिश्ते-नाते जैसी नाज़ुक बातों का महत्व एक ही दिन में नहीं समझाया जा सकता. अत: बचपन से ही बच्चे को इनके बारे में बताना शुरू कर दें. * बच्चे को रिश्ते-नातों की दुनिया में प्रवेश कराने के लिए चार साल का उम्र सही होती है, क्योंकि इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बच्चे अपनों व गैरों के बीच फ़र्क़ समझने लगते हैं और रिश्तेदारों को भी पहचानने लगते हैं. * साथ ही उनमें हर व्यक्तिकी पर्सनैलिटी को आइडेंटिफ़ाई करने की क्षमता भी विकसित हो जाती है.
* यदि इस उम्र से ही बच्चे को अलग-अलग रिश्ते के बारे में समझाया जाए तो वह उनकी तस्वीर दिमाग़ में उतार लेते हैं.
* अत: इसी उम्र से बच्चे को रिश्तेदारों के क़रीब लाने की कोशिश शुरू कर दें.
* उसे बात-बात में परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में बताती रहें.
* उसे यह भी समझाने की कोशिश करें कि पापा-मम्मी के अलावा भी कई लोग हैं, जो उसकी केयर करते हैं और उसे प्यार करते हैं. आपकी कोशिश अवश्य रंग लाएगी.

रिलेशनशिप मेंटेन करें

* बच्चे में क़रीबी रिश्तेदारों के प्रति प्यार व अपनेपन का भाव पैदा करने के लिए समय-समय पर उनसे मिलते-जुलते रहना बहुत ज़रूरी है.
* इसके लिए यदि रिश्तेदार पास में रहते हैं, तो ह़फ़्ते में कम से कम एक बार बच्चे को साथ लेकर उनसे मिलने जाएं.
* यदि चचेरे भाई-बहन पास में रहते हैं तो उन्हें एक साथ पिकनिक पर ले जाएं.
* इससे बच्चे एक-दूसरे की कंपनी एंजॉय भी करेंगे और उनके बीच आपसी बॉन्डिंग भी बढ़ेगी.
* यदि रिश्तेदार दूर रहते हैं तो बच्चे को उनसे फ़ोन पर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें.
* इसके अलावा रात में सोने से पहले बच्चे को किसी न किसी तरह उनकी याद दिलाते रहें, जैसे- उससे कहें, “ सोने से पहले दादा-दादी को याद करके गुड नाइट कहो” या “आज पिंकी ने नई डॉल ख़रीदी है, अगली बार जब उसके घर जाओ तो उसके साथ खेलना.” इस तरह बच्चा हर रिश्ते से जुड़ा रहेगा.

कहानी को बनाएं माध्यम

* बच्चों को कहानियां सुनना बहुत अच्छा लगता है और उन्हें कहानियां ज़्यादा दिनों तक याद भी रहती हैं.
* अतः बच्चे को स्टोरी के रूप में रिश्ते समझाने की कोशिश करें, जैसे- जब दादाजी पहली बार स्कूल गए तब क्या हुआ? या उसके कज़िन का निकनेम कैसे रखा गया?
* इस तरह की बातें बच्चे को दिलचस्प भी लगेंगी और उसे ज़्यादा दिनों तक याद भी रहेंगी.
* स्टोरी सुनाने का समय फ़िक्स रखें. साथ ही जो स्टोरी आपने सुनाई है, वही कहानी कभी उसे सुनाने के लिए कहें.
* उदाहरण के लिए- बच्चे से कहें कि दादाजी या बुआजी वाली कहानी कौन सुनाएगा? इस तरह बच्चों का मनोरंजन भी होगा और उन्हें रिश्ते भी याद रहेंगे.

फैमिली एलबम बनाएं

* परिवार के सभी सदस्यों के फ़ोटोग्रा़फ़्स कलैक्ट करके फैमिली एलबम बनाएं तथा समय-समय पर बच्चों को पूरे परिवार का एलबम दिखाती रहें. * साथ ही उन्हें हर सदस्य के बारे में दिलचस्प बातें भी बताती रहें.
* इससे बच्चे रिश्तेदारों को चेहरे से पहचान लेंगे और अचानक मिलने पर वे अजनबियों की तरह व्यवहार नहीं करेंगे.
* इसके अलावा बच्चों को अपनी पुरानी फ़ोटो भी दिखाएं और बताएं कि पापा जब छोटे थे तो ऐसे दिखते थे या मम्मी नानी की गोद में थी तो कैसी लगती थी? इत्यादि.

गेट-टुगेदर आयोजित करें

* फैमिली गेट टुगेदर का कोई मौक़ा हाथ से न जाने दें.
* छुट्टियों में बच्चे को रिश्तेदारों के यहां घुमाने ले जाएं या रिश्तेदारों को अपने घर बुलाएं.
* इससे बच्चे का समय भी अच्छे से कट जाएगा और वो रिश्तेदारों से घुल-मिल भी जाएगा.
* हो सके तो बच्चे के चचेरे भाई-बहन को बुलाकर स़िर्फ उनके लिए कज़िन कैम्प रखें, जिसमें स़िर्फ वे लोग ही शामिल हों.
* इस कैम्प में बच्चों को पूरी आज़ादी दें. वे जिस तरह से रहना चाहें उन्हें रहने दें.
* इसके अलावा उन्हें मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करें, जैसे- टेबल पर खाना लगाना, पानी देना, एक-दूसरे की मदद करना आदि.
* ये बातें दिखने में भले ही छोटी-छोटी सी लगें, लेकिन भविष्य में बच्चों को आपसी रिश्ते बनाने में बहुत मददगार साबित होंगी.

– योगेश शर्मा