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ब्रेस्ट कैंसर यानी स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में कैंसर के कारण होनेवाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक है. यह महिलाओं को प्रभावित करनेवाला मुख्य कैंसर भी हैं. आइए, इसके बारे में विस्तार से जानें.

एक अध्ययन के मुताबिक़ साल 2016 में देश में तक़रीबन 1,18,000 मामले पाए गए और 5,20,000 से अधिक मामले पहले से ही दर्ज थे. प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर्स में प्रकाशित परिणाम इसकी वास्तविकता पर रोशनी डालते हैं. ग्लोबोकन 2018 आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में दोनों लिंगों में कैंसर के कुल 11,57,294 नए मामले थे, जबकि स्तन कैंसर के मामलों के लिए पांच साल की प्रसार दर 4,05,456 थी. आसान भाषा में कहें, तो स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में कैंसर का सबसे बड़ा प्रकार है. हालांकि इस कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन इसके बावजूद हर साल इससे बड़ी संख्या में मौतें होती हैं. हर साल अक्टूबर माह स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है. इसके बारे में एसआरएल डायग्नोस्टिक्स की डॉ. सिमी भाटिया ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

Breast Cancer

स्तन कैंसर के लक्षण
स्तन कैंसर तब होता है, जब स्तनों के भीतर कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं. ऐसा आमतौर पर दूध बनानेवाली ग्लैण्ड्स यानी लोब्यूल्स या डक्ट में होता है, जो निप्पल तक दूध लेकर जाती हैं. रक्त या लिम्फ के ज़रिए कैंसर स्तनों के बाहर भी फैल सकता है.
अक्सर लंबे समय तक इसका पता नहीं चलता, ख़ासतौर पर भारत में जहां महिलाएं इसके बारे में खुलकर बात नहीं कर पातीं. स्तन कैंसर में स्तनों में गांठ बन जाती है या स्तन के शेप या साइज़ में बदलाव आ जाता है. कुछ अन्य लक्षण हैं, स्तन या बगल में नई गांठ बनना, साइज़ बढ़ना या सूजन, खुजली, स्तनों की त्वचा की परतें उतरना, स्तन के किसी हिस्से ख़ासतौर पर निप्पल में दर्द.

ख़ुद जांच करें
भारत में महिलाएं अक्सर अपने स्तनों में होनेवाली गांठ, इनके शेप या साइज़ के बारे में बात नहीं करना चाहती. इस बारे में वे अपने पति या यहां तक कि परिवार की अन्य महिलाओं से भी बात नहीं कर पातीं. यहां तक कि समाज के ज़्यादातर वर्गों की महिलाएं अपने स्तनों में होनेवाले बदलाव को समझ हीं नहीं पातीं. इसलिए यह बेहद ज़रूरी है कि महिलाएं अपने स्तनों की ख़ुद जांच करना सीखें और कम-से-कम महीने में एक बार ऐसा नियमित रूप से करें.

  • माहवारी की उम्र में महिलाएं पीरियड्स के कुछ दिनों बाद अपने स्तनों की जांच कर सकती हैं. जब स्तन अपनी सही शेप में होते हैं. जिन महिलाओं के पीरियड्स बंद हो चुके हैं, वे महीने का एक दिन इसके लिए चुन सकती हैं.
  • यह जानना ज़रूरी है कि स्तनों का क्षेत्र आपके बगलों के पास से लेकर पसलियों तक फैला होता है. निप्पल के आसपास, बगलों के आसपास किसी भी तरह की गांठ की जांच करें. देखें कि कोई असामान्य गांठ तो नहीं बन रही है.
  • अपनी जांच का रिकाॅर्ड रखें. इससे अगर आपके स्तन के किसी हिस्से में बदलाव आता है, तो आप समझ पाएंगी.

जागरुकता ज़रूरी
अगर आपको स्तनों में कोई बदलाव या गांठ महसूस हो, तो याद रखें कि हर गांठ कैंसर की नहीं होती. वास्तव में दस में से आठ गांठें कैंसर की नहीं होती हैं. हालांकि गांठ कैंसर की है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए डाॅक्टर को बायोप्सी करनी होती है. स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों और इसके कारण बढ़ती मृत्यु दर को देखते हुए स्तन कैंसर के बारे में जागरुकता फैलाना बेहद ज़रूरी है. पुरुषों और महिलाओं दोनों को इसे समझना चाहिए, ताकि समय पर निदान कर उपचार किया जा सके.

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समय पर डायग्नोसिस
स्तन कैंसर को पहचानने में उसके लक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इस बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके डायग्नोसिस में देरी से मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए जैसे ही आपको शक हो, तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें.
डायग्नोसिस का एक तरीक़ा है मैमोग्राफी, जिसमें कम स्तर की एक्स-रे की मदद से स्तनों के टिश्यूज़ में होनेवाले बदलावों को देखा जाता है. अगर मैमोग्राफी में कुछ असामान्यता दिखाई दे, तो स्तन कैंसर की जांच की जाती है, जिसमें विभिन्न कोणों से एक्स-रे लिए जाते हैं और इसके बाद अल्ट्रासाउंड किया जाता है. महिलाओं को 40 साल की उम्र के बाद हर साल मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है, चाहे उनमें स्तनों से संबंधित कोई लक्षण दिखाई दे या न दें.

जांच के अन्य तरीक़े
स्तनों में कैंसर के ट्यूमर की जांच का एक और तरीक़ा है फाइन नीडल एस्पीरेशन सायटोलोजी. इस प्रक्रिया में गांठ में नीडल डाली जाती है और एस्पीरेट ड्रेन किया जाता है. इसके बाद सेल्स को स्लाइड पर ट्रांसफर किया जाता है और माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है.
हिस्टोपैथोलोजी स्लाइड की जांच के लिए उच्चस्तरीय विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है. यह प्रक्रिया बेहद जटिल होती है. कई बड़ी डायग्नाॅस्टिक्स चेन्स आईटी के दिग्गजों के साथ साझेदारी कर रही हैं, ताकि आर्टीफिशियल इंटेलीजेन्स एवं अन्य डिजिटल तकनीकों की मदद से सटीक एवं तीव्र निदान किया जा सके. उदाहरण के लिए डिजिटल पैथोलॉजी में बदलाव लाना माइक्रोसाॅफ्ट एआई फाॅर हेल्थ प्रोग्राम का उद्देश्य है. वर्तमान में यह अपने दूसरे चरण में है. अगर ट्यूमर मैलिग्नेन्ट हो, तो स्तन कैंसर की पुष्टि हो जाती है.

स्तन कैंसर की पांच अवस्थाएं
स्तन कैंसर के बढ़ने के आधार पर इसे पांच अवस्थाओं में बांटा जाता है.
शून्य अवस्था- जब स्तन कैंसर नाॅन-इनवेसिव होता है, इस बात के कोई प्रमाण नहीं कि इस अवस्था में कैंसर आसपास के टिश्यूज़ में फैल सकता है या नहीं.
पहली अवस्था- इसमें कैंसर इनवेसिव हो जाता है, किंतु स्तनों के क्षेत्र में ही सीमित रहता है. आमतौर पर इस समय ट्यूमर का आकार 2 सेंटीमीटर से कम होता है.
दूसरी अवस्था- इसमें दो उप श्रेणियां होती हैं और निम्न फीचर्स होते हैं. पहली श्रेणी में ट्यूमर का अधिकतम आकार 2 सेंटीमीटर हो जाता है और यह बगल में लिम्फ नोड में फैल जाता है या ट्यूमर का आकार 2 से 5 सेंटीमीटर के बीच होता है और यह लिम्फ नोड तक नहीं फैलता. दूसरी श्रेणी में ट्यूमर का आकार 5 सेंटीमीटर से बढ़ जाता है या 2 से 5 सेंटीमीटर तक रहता है और लिम्फ नोड्स तक फैल जाता है.
तीसरी अवस्था- यह कैंसर की स्थानिक एडवान्स्ड अवस्था होती है, जिसे तीन श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी में ट्यूमर का आकार 5 सेंटीमीटर से कम होता है और लिम्फ नोड में फैल जाता है. इसके बाद बढ़ते हुए क्लम्प बनाने लगता है. दूसरी श्रेणी में ट्यूमर किसी भी आकार का हो सकता है, किंतु छाती की दीवार या स्तनों की त्वचा में फैल जाता है. इसमें त्वचा में गांठें बनने लगती हैं और स्तनों में सूजन आ जाती है. तीसरी श्रेणी में ट्यूमर किसी भी आकार का हो सकता है, किंतु लिम्फ नोड तक फैल जाता है और स्तनों की त्वचा एवं छाती की दीवार के आसपास फैल सकता है.
चौथी अवस्था- वास्तव में एडवान्स्ड अवस्था होती है, जिसमें कैंसर स्तनों से शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है.

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इलाज
स्तन कैंसर का इलाज कई तरह से किया जाता है. यह अक्सर कैंसर की अवस्था और इस बात पर निर्भर करता है कि स्तनों में कैंसर के उतकों का विकास कितना गंभीर है. आम तकनीकों में सर्जरी, कीमो थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और हार्मोन थेरेपी शामिल है. मामले की गंभीरता के आधार पर सर्जिकल विकल्प जैसे लम्पेक्टोमी (गांठ को निकालना) या मास्टेक्टोमी (पूरे स्तनों को निकालना) को भी चुना जा सकता है. इसलिए ज़रूरी है कि दूसरी अवस्था से पहले ही मरीज़ का निदान हो जाए.

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हेल्थ अलर्ट
किसी भी बीमारी में रोकथाम करना उपचार से बेहतर विकल्प होता है. हालांकि स्तन कैंसर के प्रत्यक्ष कारण ज्ञात नहीं हैं, किंतु पाया गया है कि सेहतमंद जीवनशैली जीनेवाली महिलाओं में इसकी संभावना कम होती है. स्तन कैंसर की संभावना को कम करने के लिए निम्न बातों पर ध्यान दें.

  • अल्कोहल का सेवन करने से जोख़िम बढ़ता है, इसलिए इसका सेवन ना करें.
  • इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि धूम्रपान से स्तन कैंसर की संभावना बढ़ती है, ऐसा ख़ासतौर पर मेनोपाॅज़ से पहले की स्थिति में देखा गया है. अतः इससे दूर रहना ही बेहतर है.
  • मोटापा या सामान्य से अधिक वज़न से स्तन कैंसर की संभावना बढ़ जाती है. बड़ों के लिए ज़रूरी है कि वे शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. कम-से-कम दो-ढाई घंटे हल्का एरोबिक या पौने घंटे हेवी एक्सरसाइज़ करें.
  • पौष्टिकता से भरपूर भोजन लें.
  • स्तनपान यानी ब्रेस्ट फीडिंग कराने से कैंसर को रोका जा सकता है. साथ ही लंबे समय तक शिशु को स्तनपान कराने से भी अधिक फ़ायदा होता है.
  • उच्च स्तरीय रेडिएशन और पर्यावरणी प्रदूषण से बचें.

स्तन कैंसर का उपचार शत-प्रतिशत संभव है, अगर समय पर निदान कर जल्द-से-जल्द उपचार शुरू कर दिया जाए. हालांकि महिलाओं को सलाह दी जाती है कि सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं, नियमित रूप से अपनी जांच करें, अगर कोई भी संदेह हो, तो तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें. पुरुषों को भी चाहिए कि वे महिलाओं की नियमित जांच, निदान एवं उपचार में सहयोग दें. हालांकि स्तन कैंसर ज़्यादातर महिलाओं को ही होता है, लेकिन पुरुषों को भी हो सकता है. इसलिए इस बीमारी को गंभीरता से लें और यथासंभव एक-दूसरे को सहयोग भी दें.

ऊषा गुप्ता


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Healthy Shiny Hair
ये रेशमी ज़ुल्फ़ें…हेल्दी बालों के लिए स्मार्ट टिप्स (Smart Tips For Healthy-Shiny Hair)

आप भी अपने बालों को रेशमी और घना करना चाहती हैं, तो इन ईज़ी टिप्स को फॉलो करें-आप भी अपने बालों को रेशमी और घना करना चाहती हैं, तो इन ईज़ी टिप्स को फॉलो करें-प हेयर केयर रूटीन फॉलो करें.

कोई रेशम कहता है इन्हें, तो कोई सावन की घटा… कोई ग़ज़ल कहता है इन पर, तो कोई ढूंढ़ता है अपनी वफ़ा… मेरे लिए मुहब्बत की पनाह हैं ये तेरी ज़ुल़्फें, इन्हीं में बसा है मेरी हसरतों का मुकम्मल जहां…

  • बालों को क्लीन रखना बेहद ज़रूरी है.
  • हफ़्ते में 2-3 बार माइल्ड शैंपू से हेयर वॉश करें.
  • कंडीशनर यूज़ करना न भूलें.
  • बाल धोने के बाद हमेशा उन्हें थपथपाकर सुखाएं, रगड़कर न पोंछें,  वरना बाल टूटने लगेंगे.
  • गीले बालों को बांधें नहीं, इससे फंगल इंफेक्शन का ख़तरा हो सकता है.
  • बेहतर होगा नेचुरल तरी़के से ही बालों को सूखने दें.
  • हेयर ड्रायर का अधिक इस्तेमाल न करें.
  • हेयर वॉश से पहले ऑयल मसाज ज़रूर करें.
  • स्काल्प मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है.
  • बहुत अधिक केमिकल्स के प्रयोग से बचें.
  • बाहर जाते समय बालों को धूप से बचाने के लिए स्कार्फ बांधें या छतरी लें.
  • हेल्दी डायट भी हेल्दी बालों के लिए बहुत ज़रूरी है.
  • प्रोटीन, विटामिन ई और सी से भरपूर डायट लें. डेयरी प्रोडक्ट्स, बादाम, फिश, अंडे, साबूत अनाज, गाजर, पालक, आंवला, टमाटर आदि डायट में शामिल करें.
  • दोमुंहे बालों की समस्या से बचने के लिए बालों को नियमित रूप से ट्रिम करवाती रहें.
  • अगर बहुत ज़्यादा स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स और हार्श केमिकल्स के प्रयोग से आपके बाल डैमेज हो गए हैं, तो बनाना और ऑलिव ऑयल का मास्क अप्लाई करें.
  • मिल्क मास्क से बाल सॉफ्ट और शाइनी होते हैं, दूध में अंडा और नारियल तेल मिक्स करके बालों पर अप्लाई करें.
  • दही भी बालों को हेल्दी रखता है. आप उसका भी मास्क यूज़ कर सकती हैं.
  • फ्रिज़ी बालों के लिए एवोकैडो पल्प बेहतरीन मास्क का काम करता है. आप चाहें तो इसमें अंडा या मेयोनीज़ भी मिक्स कर सकती हैं.
  • अगर आपके बाल बहुत ड्राई हैं, तो शहद और नारियल तेल का मास्क आपके लिए परफेक्ट है.
  • स्ट्रॉबेरी हेयर मास्क बालों को मॉइश्‍चराइज़ करेगा और एक स्वीट-सी ख़ुशबू भी बालों को मिलेगी.
  • एलोवीरा पल्प बेहतरीन हेयर मास्क है. इसमें हीलिंग प्रॉपर्टीज़ होती हैं. यह बालों को हेल्दी रखता है.
  • जोजोबा ऑयल से नियमित रूप से स्काल्प मसाज करें. इससे ब्लड सर्कुलेशन तो बढ़ेगा ही, बालों को मॉइश्‍चर भी मिलेगा.
  • आधा कप दही में एक टीस्पून विनेगर मिलाकर बालों में लगाएं. यह डैमेज्ड बालों के लिए बेहतरीन मास्क है. यह बालों से एक्स्ट्रा ऑयल निकालकर उनका चिपचिपापन कम करेगा, डैंड्रफ से भी राहत मिलेगी.
  • बालों में वॉल्यूम और शाइन चाहिए, तो मेयोनीज़ बेहतरीन मास्क है. आधा कप मेयोनीज़ में कुछ बूंदें किसी भी एसेंशियल ऑयल की मिलाकर बालों व स्काल्प में अप्लाई करें. आधे घंटे बाद शैंपू कर लें.

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मेथी
– एक कप मेथी के बीज को रातभर पानी में भिगोकर रखें. सुबह पीसकर पेस्ट बना लें. बालों में लगाकर शावर कैप से कवर कर लें. 40 मिनट बाद बाल धो लें. यह उपाय रोज़ाना 1 महीने तक करें.

रिसर्च: मेथी में एंटीसीडेंट्स नाम का हार्मोन होता है, जो हेयर फॉलिकल्स के निर्माण में मदद करता है और बालों को स्ट्रॉन्ग बनाता है. मेथी में प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड भी होता है, जो हेयर ग्रोथ की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं.

प्याज़

– 1 प्याज़ का रस निकालकर स्काल्प में लगाएं. आधे घंटे बाद शैंपू कर लें.

– 3 टेबलस्पून प्याज़ के रस में 2 टेबलस्पून एलोवीरा जेल और 1 टेबलस्पून ऑलिव ऑयल मिलाएं. इसे स्काल्प में लगाकर आधे घंटे बाद शैंपू कर लें.

रिसर्च: प्याज़ के रस में सल्फर होता है, जो बालों का झड़ना कम करता है, क्योंकि यह हेयर फॉलिकल्स में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, हेयर फॉलिकल्स का पुनर्निमाण भी करता है और इंफ्लेमेशन को भी कम करता है. प्याज़ के रस में मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज़ के चलते यह जर्म्स और जीवाणुओं को ख़त्म करके स्काल्प को इंफेक्शन से बचाता है.

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एलोवीरा

– एलोवीरा जूस या पल्प को स्काल्प पर कुछ घंटों तक लगाकर रखें. गुनगुने पानी से बाल धो लें. यह हफ़्ते में 3-4 बार करें.

– रोज़ाना सुबह खाली पेट 1 टेबलस्पून एलोवीरा जूस पीने से भी बाल हेल्दी रहते हैं.

रिसर्च: एलोवीरा में जो एंज़ाइम्स होती हैं, वो हेल्दी हेयर ग्रोथ के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. साथ ही यह स्काल्प का पीएच बैलेंस भी बनाए रखता है, जिससे बालों का झड़ना कम होता है.

ऑयल मसाज

– कोकोनट, आंवला, ऑलिव, आल्मंड या कैस्टर ऑयल- चाहे जो भी ऑयल आप यूज़ करें, उसमें कुछ बूंदें रोज़मेरी एसेंशियल ऑयल की भी मिक्स कर लें. इससे जल्दी फ़ायदा होगा. हफ़्ते में एक बार इनमें से किसी भी ऑयल से स्काल्प मसाज करें.

रिसर्च: बालों को मसाज करने से स्काल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बाल भी कंडीशन होते हैं, जिससे बालों का झड़ना और टूटना कम होता है.

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बीटरूट

– बीटरूट के पत्तों को उबालकर पीस लें और मेहंदी के साथ मिक्स करके पेस्ट बना लें. 15-20 मिनट तक बालों में लगाकर रखें, फिर धो लें. यह उपाय हफ़्ते में 3-4 बार करें.

– बीटरूट जूस को अपने डायट में शामिल करें. बीटरूट के अलावा आप गाजर व पालक का जूस भी अपने डायट में शामिल करें.

रिसर्च: बीटरूट जूस में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, फॉसफोरस, कैल्शियम और विटामिन बी व सी होता है, जो बालों की हेल्दी ग्रोथ के लिए ज़रूरी है.

फ्लैक्ससीड्स

– हेयर लॉस से निपटने के लिए रोज़ सुबह 1 टेबलस्पून फ्लैक्ससीड पाउडर को पानी के साथ लें. आप चाहें, तो फ्लैक्ससीड को सलाद, दही या किसी भी चीज़ में मिलाकर ले सकते हैं.

– फ्लैक्ससीड ऑयल से बालों में मसाज करने से भी बालों का झड़ना कम होता है.

रिसर्च: फ्लैक्ससीड्स ओमेगा-3 फैटी एससिड से भरपूर होती हैं. ओमेगा-3 फैटी एसिड्स हेयर फॉल को रोककर हेयर ग्रोथ में मददगार होते हैं.

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कोकोनट मिल्क

– कोकोनट मिल्क से स्काल्प मसाज करके 20 मिनट बाद बाल धो लें.

– चाहें, तो इसमें कालीमिर्च पाउडर और मेथी पाउडर भी मिला सकते हैं.

रिसर्च: कोकोनट मिल्क प्रोटीन और एसेंशियल फैट्स से भरपूर होता है, जो बालों का झड़ना कम करके बालों को मज़बूत बनाता है.

 

ख़्वाब हो मेरा या आसमान का चांद हो, जो भी हो तुम… बस मेरा अरमान हो… कभी रह-रहकर क़रीब आती हो, कभी रुक-रुक कर दूर जाती हो… किस बात से तुम घबराती हो… क्यों हर बात पर शरमाती… अब कर भी लो हमसे चाहत का इक़रार कि मेरी ही तरह तुम्हारा दिल भी है बेक़रार…

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चांद जैसी ख़ूबसूरती पाने के लिए ट्राई करें ये ईज़ी नेचुरल स्किन केयर टिप्स

– 1-1 टेबलस्पून ऑरेंज जूस और नींबू का रस, 1 कप दही. सबको मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. 15 मिनट तक चेहरे पर लगाकर रखें. वेट टिश्यू से पोंछ लें. स्किन चांद जैसी निखर उठेगी.

– 1 टीस्पून उड़द दाल और 5-6 बादाम को रातभर पानी में भिगोकर रखें. सुबह पीसकर आधे घंटे तक लगाकर रखें. त्वचा ग्लो करने लगेगी.

– कैस्टर ऑयल को स्किन पर अप्लाई करें. रिंकल्स और फाइन लाइन्स को दूर करने का बेहद प्रभावी उपाय है.

– कच्चे आलू को काटकर स्किन पर रब करें. इससे दाग़-धब्बे दूर होंगे और स्किन ग्लो करेगी.

– ककड़ी का रस, ग्लिसरीन और गुलाबजल को मिलाकर नेचुरल सनस्क्रीन लोशन तैयार कर सकती हैं. इसे चाहें, तो फ्रिज में भी रख सकती हैं.

– चंदन पाउडर में मिल्क क्रीम (मलाई) और गुलाबजल मिलाकर पैक बनाएं. त्वचा खिल उठेगी.

– लैवेंडर ऑयल में हीलिंग प्रॉपर्टीज़ होती हैं. यह दाग़-धब्बों व स्ट्रेच मार्क्स को भी दूर करता है.

– अंगूर को काटकर चेहरे पर उससे मसाज करें. फ्रूट एसिड्स नेचुरल एक्सफोलिएटर होते हैं.

– कोकोनट मिल्क भी स्किन को ग्लोइंग इफेक्ट देता है. कच्चे नारियल को कद्दूकस करके उसका रस (दूध) निकाल लें. चेहरा क्लीन करके कोकोनट मिल्क को चेहरे व होंठों पर भी अप्लाई करें. कुछ देर बाद धो लें. चेहरा चमक उठेगा.

– 1 कप पानी में अदरक का टकुड़ा भिगोकर रखें. 10 मिनट बाद इसमें थोड़ा शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं. यह चाय स्किन को डैमेज होने से बचाती है.

– कच्चा दूध चेहरे पर अप्लाई करें और 10 मिनट बाद धो लें. स्किन सॉफ्ट होकर ग्लो करने लगेगी.

– स्ट्रॉबेरी पल्प में थोड़ा पानी मिलाकर पीस लें. इस पैक को चेहरे पर लगाएं. सूखने पर धो लें. ग्लोइंग स्किन के लिए अच्छा पैक है.

– 2 टीस्पून पके टमाटर का रस में 3 टीस्पून छाछ मिलाएं. आधा घंटे तक इस पैक को लगाकर रखे. फिर धो लें.

– कीवी फ्रूट की प्यूरी में दही मिलाकर पैक बनाएं. इससे मसाज करें और 20 मिनट बाद धो लें.

– मिक्स फ्रूट्स के पल्प को मिलाकर पैक बनाएं. मसाज करें. 15 मिनट बाद धो लें. एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि कोई भी फ्रूट पैक या अन्य पैक भी क्लीन व एक्सफोलिएट की हुई स्किन पर ही अप्लाई करें. इससे उसका असर अधिक होगा.