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होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स(Top Home Decor Myths And Facts)

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

हर साल घर का रेनोवेशन कराना आसान नहीं है. लेकिन यदि घर की सजावट में थोड़ा-सा बदलाव किया जाए, तो घर को न्यू लुक ज़रूर दिया जा सकता है. पर अधिकतर लोगों के मन में होम डेकोर व डिज़ाइन्स को लेकर कई मिथ्स होते हैं, जिसके कारण वे डेकोर संबंधी सही निर्णय नहीं ले पाते. जाने ऐसे ही कुछ मिथ्स की हक़ीक़त.

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

मिथ: छोटे कमरे में छोटा फर्नीचर रखें.
यह केवल एक अवधारणा है. छोटे कमरे में छोटा फर्नीचर रखने से बेशक वह कम जगह घेरते हैं, लेकिन ऐसा करने से आपको स्वीट होमवाली फीलिंग नहीं आएगी. यदि आप अपने छोटेे कमरे को बड़ा लुक देना चाहते हैं, तो 1-2 ब़ड़े फर्नीचर, जैसे बड़ी चेयर/सेटी भी रख सकते हैं.

 

मिथ: घर के हर कमरे की सीलिंग पर व्हाइट पेंट कराना चाहिए.
घर को सजाने का यह तरीक़ा अब पुराना हो गया है. हर कमरे की सीलिंग पर व्हाइट कलर कराना बोरियत का एहसास कराता है. सीलिंग कमरे के 1/6 हिस्से को दर्शाता है. इसलिए इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. सीलिंग की टाइप और ऊंचाई को ध्यान में रखकर कमरे को क्रिएटिव लुक दिया जा सकता है. जैसे- दीवारोें को डार्क कलर से और सीलिंग पर लाइट कलर करके कमरे को स्पेशियस और ब्राइट लुक दिया जा सकता है.
– सीलिंग और दीवारों पर एक ही कलर का पेंट करके कमरे का लुक बदल सकते हैं, चाहें तो मोल्डिंग से सीलिंग लाइन भी बनवा सकते हैं.
– बड़े कमरे में डार्क कलर की सीलिंग कमरे को स्मॉल लुक देती है.
– कैबिनेट, फर्नीचर, कारपेट आदि के कलर से मैच करती हुई सीलिंग भी रखी जा सकती है.

 

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मिथ: छोटे कमरों में केवल व्हाइट या पेल जैसे न्यूट्रल कलर का चुनाव करें.
आजकल मार्केट में न्यूट्रल कलरवाले शेड कार्ड्स मिलते हैं, जिनमें न्यूट्रल कलर के अनेक शेड्स दिए रहते हैं. आप उनमें से अपने फेवरेट कलर का चुनाव कर सकते है. चाहें तो न्यूट्रल कलर में दूसरे कलर्स को मिक्स-मैच करके कमरे को स्पेशियस लुक दे सकते हैं. इसके अलावा कमरे का साइज़, फर्नीचर का साइज़, फर्नीचार अरेंजमेंट और वॉल कलर से भी आप छोटे कमरे का बड़ा लुक दे सकते हैं.

 

मिथ: न्यूट्रल कलर से नीरसता/बोरियत महसूस होती है.
ऐसा नहीं है. लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अब पेंट बनानेवाली कंपनियां न्यू कलर स्कीम्स निकालने लगी हैं, जिसमें अनगिनत शेड्स दिए रहते हैं. इन शेड्स में से आप अपनी पसंद के कलर का चुनाव कर सकते हैं. यदि आप न्यूट्रल या मोनोक्रोमेटिक कलर का चुनाव कर रहे हैं, तो 2-3 कलर को मिलाकर नए कलर को चुनें.

 

मिथ: फर्नीचर, वॉल कलर, फैब्रिक्स आदि सभी मैचिंग होने चाहिए.
यदि सभी चीज़ें मैचिंग की होंगी, तो घर का डेकोर आपको बोरियत का एहसास कराएगा. फर्नीचर और वॉल कलर से मैच करते हुए डेकोरेटिव आइटम्स को लगाना ग़लत नहीं है, बस आसान-सा उपाय है घर को सजाने का, लेकिन पहले से डिज़ाइन की गई जगहों पर मैचिंग का फर्नीचर आदि लगाने की बजाय एंटीक आइटम्स (स्टैचू, बड़े वास आदि) का प्रयोग करें, जिससे कमरे का लुक अलग लगे. मैचिंग की तुलना में आप के द्वारा किया गया यह एक्सपेरिमेंट घर को क्लासी लुक देता है. मैचिंग का ट्रेंड अब पुराना हो गया है, विशेष रूप से फर्नीचर के मामले में.

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

मिथ: बेज कलर फर्नीचर, रग्स, एक्सेसरीज़ आदि के साथ आसानी से मैच हो जाता है.
यह पूरी तरह से सही नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेज भले ही न्यूट्रल (सॉफ्ट) कलर है और आसानी से अन्य एक्सेसरीज़ से मैच भी हो जाता है, लेकिन ऐसा करने से घर में डल फीलिंग आती है. इसलिए बेज कलर का चुनाव अन्य एक्सेसरीज़ से मिक्स और मैच करते हुए करेंगे, तो घर को न्यू व स्टाइलिश लुक दे सकते हैं. इसके अलावा यदि आप घर की दीवारों पर न्यूट्रल कलर कराने की सोच रहे हैं, तो बेज कलर को छोड़कर अन्य न्यूट्रल कलर भी ट्राई करें. आजकल मार्केट में बेज के
साथ-साथ अन्य बहुत सारे न्यूट्रल शेड्स उपलब्ध हैं, जिनसे आप अपने घर के डेकोर को नया लुक दे सकते हैं.

 

मिथ: पैटर्न (कलर और शेप) और प्रिंट्स (लैपर्ड, जेब्रा, स्पॉटेड एंड स्ट्राइप्स, ज्यामैट्रिकल) को एक साथ मैच न करें.
ज़्यादातर लोगों को यह भ्रम होता है कि पैटर्न और कलर्स को एक साथ मैच नहीं करना चाहिए. लेकिन इस भ्रम को
थोड़ी-सी क्रिएटिविटी के द्वारा तोड़ा जा सकता है. जैसे- कलर स्कीम और मेन पैटर्न को ध्यान में रखते हुए स्ट्राइप्स, स्क्वेयर और स्मॉल प्रिंट्स का सिलेक्शन कर सकते हैं. इसी तरह से यदि फैब्रिक का चुनाव कर रहे हैं, तो सॉलिड कलरवाले टैक्स्चर और स्क्वेयर पैटर्न का चुनाव करें.

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मिथ: डेकोर और डिज़ाइनिंग के बारे में इंटीरियर डिज़ाइनर द्वारा बताए गए रूल्स को फॉलो करें.

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए डेकोर और डिज़ाइनिंग संबंधी सारे पुराने नियमों में बदलाव लाएं. यदि आप अपने घर का डेकोर बदल रहे हैं, तो सबसे ज़रूरी बात है आपका पर्सनल टेस्ट और स्टाइल, जो आपकी पर्सनैलिटी को प्रतिबिम्बित करता है. डेकोर और डिज़ाइनिंग का पहला नियम यह है कि आपको घर का लुक किस तरह का चाहिए- क्लासिक या मॉडर्न? आपका फेवरेट कलर कौन-सा है? आपको किस तरह का आर्ट वर्क पसंद है? आदि. दूसरे शब्दों में कहें तो, घर का स्टाइल और डेकोर आपकी पसंद का होना चाहिए, न कि अन्य लोगों की.

 

मिथ: घर का डेकोर बदलते समय लेटेस्ट ट्रेंड को फॉलो करें.
एक्सपर्ट के अनुसार, घर का डेकोर इस तरह का होना चाहिए, जो आपको वॉर्म फील कराए. यदि आप अपने घर को कंटेम्प्रेरी लुक देना चाहते हैं, तो लेटेस्ट ट्रेंड को फॉलो करें. वैसे भी ट्रेंड समय-समय पर बदलते रहते हैं. अच्छा यही होगा कि आप अपने घर को क्लासी लुक दें. क्लासी लुक को फॉलो करते हुए आप अपने घर पर ट्रेंडी सामान/चीज़ों को रख सकते हैं, कुछ समय बाद आप उन्हें आसानी से बदल या हटा सकते हैं.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

रेनोवेशन मिस्टेक्स और उनसे बचने के ईज़ी टिप्स(Renovation Mistakes And Easy Tips To Avoid Them)

अक्सर लोग घर को रेनोवेट कराते समय छोटी-छोटी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है. हम यहां पर ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण ग़लतियों के बारे में बता रहे हैं, जिससे बचकर आप अपने घर को परफेक्टली रेनोवेट करा सकते हैं.

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न्यूयॉर्क बेस्ड एक इंटीरियर कंपनी द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार, लगभग 85% लोगों को घर ख़रीदने से ज़्यादा तनावपूर्ण काम घर का रेनोवेशन कराना लगता है. इस तनाव का कारण है- बजट की कमी, मटेरियल ख़रीदना और सही कॉन्ट्रैक्टर का चुनाव न करना आदि. यदि आप भी अपने घर को तनावरहित होकर रेनोवेट कराने की सोच रहे हैं, तो यहां पर बताई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखें.
– बिना बजट प्लान किए घर के रेनोवेशन का काम शुरू करने की ग़लती कभी न करें.
– रेनोवेशन के लिए बजट बनाने से पहले आर्किटेक्चर, इंटीरियर डिज़ाइनर और कॉन्ट्रैक्टर से मिलकर बजट का आइडिया ले लें.
– बजट का लेखा-जोखा करते समय कॉन्ट्रैक्टर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन आदि की फीस, मटेरियल का ख़र्च आदि अनुमानित ख़र्चों की लिस्ट बनाएं.
– इस बजट के अलावा एक एमर्जेंसी रिज़र्व फंड बनाएं. उसका उपयोग तभी करें, जब आपको उसकी बहुत ज़्यादा जरूरत हो.
– मास्टर प्लान बनाए बिना घर का रेनोवेशन आरंभ करने की भूल न करें.
– मास्टर प्लान बनाते समय कॉन्ट्रैक्टर को पहले से ही अपनी रिक्वायरमेंट बता दें.
– मास्टर प्लान के अनुसार काम शुरू होने के बाद बार-बार बदलाव न करवाएं.
– बार-बार आर्किटेक्चरल चेंजेस (तोड़-फोड़) करने से मटेरियल का नुक़सान तो होगा ही, आपका बजट भी बिगड़ेगा. इसलिए आर्किटेक्चर या कॉन्ट्रैक्टर के साथ मिलकर पहले ही मास्टर प्लान फाइनल करें.
– रेनोवेशन का काम आरंभ करने से पहले 2-3 कॉन्ट्रैक्टर्स से मिलकर अनुमानित बजट का आइडिया ज़रूर लें.
– कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करने से पहले सारी डिटेल्स- हार्डवेयर, केबिनेट्स, फ्लोरिंग व उनका मेहनताना आदि टर्म्स और कंडीशन्स को लिखित में लें.
– रेनोवेशन के लिए ऐसे एक्सपर्ट व प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्टर का चुनाव करें, जो आपको डेकोर स्टाइल, डिज़ाइन और काम पूरा होने की अनुमानित अवधि के बारे में विस्तार से बताए और वित्तीय हानि होने से भी बचाए.
– रेनोवेशन के दौरान मटेरियल की क्वालिटी के साथ समझौता करने की ग़लती न करें.
– बजट को नियंत्रित रखने के लिए केबिनेट्स के हैंडल्स, लाइटिंग, स्विच आदि एक्सेसरीज़ रिटेलर से ख़रीदने की बजाय होलसेल मार्केट से ही ख़रीदें.
– रेनोवेशन कराते समय अपनी पसंद को ध्यान में रखते हुए कलरफुल ग्लास, टाइल डिज़ाइन आदि सामान पर अधिक ख़र्च न करें.
– कॉन्ट्रैक्टर को पूरा पेमेंट करने से पहले सारे घर का रेनोवेशन, फिक्स्चर्स और फिनिशिंग को अच्छी तरह से चेक करें.

किचन रेनोवेशन मिस्टेक्स

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– किचन में रेनोवेशन कराते समय सिंक, फ्रिज और गैस को एक ही दिशा में रखने की ग़लती न करें, बल्कि उन्हें ट्रायंगल शेप में रखने की व्यवस्था करें.
– किचन में लीकेज से बचने के लिए सिंक को पानी की पाइपलाइन के क़रीब और सही तरी़़के से लगवाएं.
– पाइपलाइन की फिटिंगवाली जगह को कवर करना न भूलें.

ये भी पढें: क्या कहता है घर आपके बारे में? https://www.merisaheli.com/what-your-home-tell-about-you/
चेयर सिलेक्शन ट्रिक्स https://www.merisaheli.com/home-decor-chair-selection-tricks/

– किचन अप्लायसेंस और बर्तनों के रखने के लिए जहां तक हो सके, अधिक से अधिक स्टोरेज बनाएं.
– किचन को रेनोवेट करते समय काउंटर टॉप/स्लैब पर पर्याप्त खुली जगह छोड़ें, ताकि काम करते समय किसी तरह की परेशानी न हो.
– सही वेंटिलेशन न होने के कारण किचन में काम करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. अत: किचन को रेनोवेट कराते समय किचन चिमनी/एग्ज़ॉस्ट फैन लगाना न भूलें.
– लाइटिंग की भी उचित व सही व्यवस्था करें.

बाथरूम रेनोवेशन मिस्टेक्स

– बाथरूम में बाथरूम फैन/एग्ज़ॉस्ट फैन को नज़रअंदाज़ करने की ग़लती न करें. सही वेंटिलेशन न होने के कारण फ्लोर पर नमी जमी रहती है, जिसके कारण पेंट भी ख़राब होता है.
– तोड़-फोड़ शुरू करने से पहले बाथरूम में लीकेज चेक करना न भूलें. कई बार बजट व मटेरियल की कमी के कारण लीकेज की तरफ़ हमारा ध्यान नहीं जाता.
– टे्रंडी व ब्रांडेड बाथरूम फिटिंग्स व फिक्स्चर्स (वॉश बेसिन, शावर, टॉयलेट पॉट और टैप्स आदि) ख़रीदने के चक्कर में बजट बिगाड़ने की भूल न करें.
– रेनोवेशन कराते समय वायरिंग केसाथ-साथ पुरानी लाइट्स भी बदलें. इसके लिए एनर्जी सेविंग लाइट्स बेस्ट ऑप्शन हैं.
– बाथरूम के लिए ऐसी फ्लोरिंग का चुनाव करें, जो ड्यूरेबल और वॉटर रेज़िस्टेंट हो.
– छोटी, लेकिन अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे घर का रेनोवेशन कराने के चक्कर में हम अक्सर
छोटी-छोटी चीज़ों को चेक करना भूल जाते हैं, जैसे- लाइट, नल, शावर और पानी की फिटिंग आदि. इसलिए कॉन्ट्रैक्टर के घर से निकलने से पहले पूरे घर की फिटिंग व फिक्स्चर्स ज़रूर चेक करें. तभी कॉन्ट्रैक्टर को फाइनल भुगतान करें.

– अभिषेक शर्मा