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पहला अफेयर: मुहब्बत उम्र की मोहताज नहीं (Pahla Affair: Mohabbat Umra Ki Mohtaj Nahi)

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पहला अफेयर: मुहब्बत उम्र की मोहताज नहीं (Pahla Affair: Mohabbat Umra Ki Mohtaj Nahi)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

ईश्‍वर ने जब इस सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने सृष्टि की प्रत्येक वस्तु को नियमों में बांध दिया. सूरज के उगने और डूबने का स्थान और समय पहले से निर्धारित कर दिया. जहां पंछियों को उड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, वहीं इंसान आकाश में मुक्त होकर विचरण करने की कल्पना तक नहीं कर सकता. जहां दिन का आगमन रोशनी के साथ होता है, वहीं रात का स्वागत अंधकार करता है. लेकिन स़िर्फ एक ही चीज़ है इस सृष्टि में, जिसको ईश्‍वर ने सभी नियमों से मुक्त रखा है. वह चीज़ है- प्यार!

प्यार किसी को भी, कहीं भी, किसी से भी हो सकता है. यह इस सृष्टि की सबसे रहस्यमयी रचना है. प्रेम में उम्र और जन्म का बंधन कोई मायने नहीं रखता. यही वजह है कि मुझे जिस व्यक्ति से प्यार हुआ, वो मुझसे उम्र में 22 साल बड़े थे. जब इस ख़ूबसूरत एहसास को मैंने पहली बार महसूस किया, उस व़क्त मेरी उम्र मात्र 16 साल थी और वो 38 साल के थे. वो शादीशुदा थे.

मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद है, जब मेरे मोबाइल पर उनका संदेश आया था. मेरे मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से कुछ रोमांटिक पंक्तियां आई थीं. मैंने सोचा कि कोई लड़का मेरे साथ बदमाशी कर रहा है. मैंने ग़ुस्से में आकर फोन लगाया और जमकर उनको बातें सुनाईं, पर उन्होंने मेरी गालियों का ज़रा भी बुरा नहीं माना, बल्कि नम्रतापूर्वक मुझसे आग्रह किया कि मैं उनकी दोस्ती स्वीकार कर लूं.

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पता नहीं, उनकी आवाज़ में क्या जादू था कि मुझ जैसी लड़की, जो हमेशा लड़कों से दूर रहती थी, ने एक अंजान शख़्स के आग्रह को स्वीकार कर लिया. इस घटना के बाद लगभग 20 दिनों तक हम एक-दूसरे से फोन पर बातें करते रहे. इन 20 दिनों में मैं यह तो बहुत अच्छी तरह समझ चुकी थी कि ये वही हंसान हैं, जिसकी मुझे तलाश थी.

इन 20 दिनों के बाद हम कई बार एक-दूसरे से समंदर के किनारे मिले. समंदर के किनारे बैठकर हम दोनों ही आई पॉड पर बजते संगीत का आनंद लेते थे और बिना एक-दूसरे से एक शब्द भी बोले अंधेरा होने तक समंदर को निहारते रहते थे. उस पल मुझे ऐसा महसूस होता था कि काश! ऐसा होता कि मैं अपनी सारी ज़िंदगी इसी तरह उनके साथ समंदर के किनारे बैठकर गुज़ार देती.

ऐसी ही एक ख़ूबसूरत शाम थी, जब उन्होंने मुझे अपनी बांहों में लेकर चूमा था. वो मेरी ज़िंदगी के पहले और आख़िरी पुरुष थे, जिन्होंने मेरे शरीर के साथ-साथ मेरी आत्मा को भी छुआ था. हमें एक-दूसरे से मिले स़िर्फ एक साल ही हुआ था कि उनका तबादला दूसरे शहर में हो गया. उसके बाद हम कभी नहीं मिले.

मेरी तो दुनिया ही वीरान हो गई. इस बीच उनका पत्र मुझे मिला, जिसमें उन्होंने अपने प्रेम का इज़हार किया और इस असफल प्रेम कहानी पर दुख व्यक्त किया. वो मजबूर थे. एक तरफ़ उनकी पत्नी और बेटे की ज़िम्मेदारी थी, तो दूसरी तरफ़ हमारे प्रेम को समाज की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं होती.

आज इस बात को 20 साल हो गए, पर आज भी मैं उनको भूल नहीं पाई. मेरे जीवन का कोई ऐसा दिन नहीं गुज़रता जब मैं उनको याद नहीं करती. ईश्‍वर से यही दुआ करती हूं कि वो जहां भी रहें, हमेशा ख़ुश रहें.

हालांकि मेरी क़िस्मत में उनसे जुदाई ही लिखी है, जिसे मैंने अब स्वीकार कर लिया है, क्योंकि किसी ने सच ही कहा है- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता…

– सोनी दुबे

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पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का… (Pahla Affair: Messagewala Ladka)

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पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का… (Pahla Affair: Messagewala Ladka)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

तुमने उस रोज़ जब नज़रों से छुआ था मुझे, आज भी उस नज़र का असर ये है कि पूरा बदन सिहर उठता है… वो पहली मुलाक़ात थी हमारी… और पहली ही मुलाक़ात में इतने क़रीब आ जाना… न मैंने कुछ सोचा था, न तुमने… हम तो बस सोशल मीडिया के ज़रिये मिले थे, तस्वीरों से ही जानते थे…

मुझे याद है आज भी, तुम्हारा पहला मैसेज… ‘हैलो जी, आप कैसी हो? ठीक-ठाक ही होंगी… ये मेरा नंबर है… आपसे दोस्ती करनी है…’
फिर इसके बाद लगातार न जाने कितनी बार तुम्हारे मैसेजेस आते गए और मैं इग्नोर करती गई… फिर एक रोज़ देश की राजनीतिक स्थिति को लेकर तुमने एक तस्वीर भेजी, मैं ख़ुद को रोक न सकी… जवाब देना ज़रूरी समझा. सो दिया. हमारी राजनीतिक सोच अलग थी. ख़ैर, मुझे कौन-सी तुमसे शादी करनी थी. अगली सुबह तुमने सॉरी लिखा… उसके बाद फिर वही सिलसिला… लगातार मेरी तस्वीरों पर कमेंट और मैसेजेस… पर अब तुम्हारी हिम्मत और बढ़ गई थी… अब तुम सीधे-सीधे आई लव यू… मिस यू… न जाने कितनी गुस्ताखियां करने लगे थे.

पर मुझे क्या हुआ था, मैंने तुम्हें ब्लॉक भी नहीं किया… यह तो मैं जानती थी कि तुम वो नहीं हो, जिसको मैं जीवनसाथी के रूप में देखना चाहूंगी, पर तुम्हारा मैसेज करना अब अच्छा लगने लगा था. हालांकि मैं स़िर्फ इग्नोर कर रही थी कि अचानक तुमने लिखा- ‘मैं तुम्हारे शहर आया हूं, तुमसे मिलने… यह मेरा नंबर है, प्लीज़ एक बार मिल लो. बस, एक बार बात कर लो.’

ख़ैर, मैंने तुम्हें पागल-दीवाना समझकर फिर इग्नोर कर दिया. तुम आहत थे मेरे इस बर्ताव से, लेकिन मैं भी कहां ग़लत थी. मैंने तुम्हें मैसेज भी किया था कि हम एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं, ऐसे कैसे प्यार कर सकते हो तुम मुझसे… तुमने सरलता से जवाब दिया था कि बात ही नहीं करोगी, तो ज़िंदगीभर अंजान बने रहेंगे.

मैंने फिर एक दिन लिखा- ‘आख़िर चाहते क्या हो?’

तुमने फिर सरलता से जवाब दिया- ‘तुम्हें. मुझे क्यों इतना इग्नोर कर रही हो. तकलीफ़ होती है. मुझे प्यार है तुमसे. ज़िंदगीभर साथ निभाऊंगा, बस एक बार भरोसा करके देखो.’

‘प्यार तुम्हें हुआ है, मुझे नहीं. ये तुम्हारी समस्या है. मैं जानबूझकर तुम्हें तकलीफ़ नहीं दे रही. स़िर्फ तस्वीरें देखकर कोई किसी से प्यार नहीं कर सकता.’

‘तो रू-ब-रू मिल लो. मैं तो आया ही था. पर तुमने नज़रअंदाज़ कर दिया. वैसे भी सूरत से कहीं ज़्यादा सीरत मायने रखती है और देखने-दिखाने की ज़रूरत उन्हें होती है, जो डे-टुडे प्यार बदलते हैं…’

‘ये प्यार नहीं, आकर्षण है, लस्ट है… जिसे तुम प्यार समझ रहे हो… बस, मेरा पीछा छोड़ो, वरना ब्लॉक कर दूंगी.’ मैंने ग़ुस्से में जवाब दिया था.

‘मेरे प्यार को वासना का नाम मत दो, बात अगर स़िर्फ जिस्म की है, तो अंधेरी रातों में बाज़ार और मंडियां सजती हैं… अब तुम चाहो, तो मुझे बेझिझक ब्लॉक कर सकती है, पर मेरे प्यार को वासना बोलकर गाली मत दो.’ तुम्हारे इस जवाब ने मुझे शर्मिंदा कर दिया था.

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‘सॉरी, मैंने ग़लत शब्द का इस्तेमाल किया. मैं स़िर्फ यह कहना चाह रही हूं कि आकर्षण को प्यार समझ रहे हो तुम.’

‘तुम मिलना चाहती हो न? चलो मिल लेते हैं एक बार, फिर तुम जो निर्णय लोगी, उसे अपनी तक़दीर मान लूंगा, प्यार न सही, इंतज़ार तो मिलेगा मुझे.’

‘ठीक है, अपना फोन नंबर दो. आज शाम को कॉल करूंगी. लेकिन एक बात याद रखना कि मैं फोन पर ज़्यादा बात नहीं करती और न ही यह पसंद करूंगी कि कोई मुझे बेवजह कॉल करके परेशान करे. ’ मैंने फिर तुम्हें टालने के लिए मैसेज कर दिया.

तुमने नंबर भेजा, मैंने भी सोचा फोन कर लूं एक बार और इस बंदे को निपटाऊं, वरना रोज़-रोज़ परेशान करेगा. तुमसे बात की. क्यूट लगे तुम मुझे. फिर ये बातों का सिलसिला थमा ही नहीं. बात होती रही. मैसेज बढ़ते गए.

मैं हर बार यही कहती कि आसान नहीं है लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप… और तुम यही कहते कि मुश्किल कुछ भी नहीं. आज के ज़माने में सब आसान है…

कुछ दिनों बाद ऑफिस के काम से मुझे दिल्ली जाना था. तुम्हें बताया, तो तुमने कहा कि तुम मिलने आओगे. बहुत डर लग रहा था मुझे. क्या पता सेफ होगा कि नहीं इस तरह किसी अंजान से मिलना, क्योंकि तुमने कहा था कि मॉल में मिलने तो तुम आ सकते हो, पर क्या हम दोनों वहां कंफर्टेबल होंगे? पहली मुलाक़ात की झिझक वैसे भी रहेगी, उस पर इतने लोगों के बीच.

एक तरफ़ तो मुझे लगा कि बात तुम सही कह रहे हो, पर कहीं किसी मुसीबत में न फंस जाऊं. फिर भी हिम्मत करके तुम्हें मैंने अपने होटल रूम में बुला लिया मिलने के लिए, पर एक शर्त भी रखी कि तुम्हारा हेयर स्टाइल मुझे पसंद नहीं, फिर तुम्हें कुछ तस्वीरें भेजीं कि ऐसा हेयर कट करवाओ, तब मिलने आओ.

तुमने कहा कि जानता था कुछ ऐसा ही होगा. तुम्हें तो बस बहाना चाहिए मुझे नापसंद करने का. सारी रात यही सोचती रही कि न जाने कैसा होगा यह लड़का, फोटो को देखकर किसी को जज नहीं किया जा सकता… फिर सोचा मीटिंग कैंसिल कर देती हूं, कोई बहाना बना देती हूं.

तुमको सुबह मैसेज किया कि हम मॉल में ही मिल लेते हैं, रूम में नहीं हो पाएगा. तुमने बुझे मन से कहा कि कोई बात नहीं, मैं आऊंगा मॉल में भी मिलने.

फिर मुझे लगा कि तुम पर भरोसा किया जा सकता है, फिर से मैंने प्लान चेंज किया और तुम्हें कहा कि रूम में ही आ जाना. पर ज़्यादा क्लोज़ होने की कोशिश मत करना.

“तुम अपने ऊपर कंट्रोल रखना, मैं ख़ुद को संभाल लूंगा.” यही जवाब दिया था तुमने. कहीं न कहीं मुझे लग रहा था कि ये मुलाक़ात पहली और शायद आख़िरी होगी.

ख़ैर, सुबह तुम आए, मैंने दरवाज़ा खोला, एक नर्वस-सा लड़का मेरे सामने खड़ा था. तुम अंदर आए और मैं बस तुम्हें देख रही थी और यही सोच रही थी कि इतना हैंडसम लड़का, इससे न मिलना तो बेव़कूफ़ी थी. तुम बहुत ज़्यादा नर्वस थे.

“हेयर कट सूट कर रहा है तुम पर…” मैंने हंसते हुए कहा.

“तुम्हें पसंद आया, बस और क्या चाहिए…” तुमने मुझे निहारते हुए कहा.

मैं कुछ असहज हो गई. फिर मैं इधर-उधर की बातें करने लगी और तुम बस लगातार मुझे निहार ही रहे थे.

टीवी ऑन थी, तो मैंने टॉपिक चेंज करने के लिए कहा, “मुझे ये हीरो बहुत पसंद है.”

“हां, बस मैं ही एक कमीना हूं, जो नापसंद हूं, बाकी तो तुमको सब पसंद हैं…” यह कहते हुए तुम मेरे क़रीब आए. मेरे हाथों को चूमा. मैंने नहीं रोका… फिर न जाने कितने चुंबनों की बरसात तुमने की और मैं प्यार की बारिश में भीगती चली गई. इतनी मदहोशी, इतना हसीन मंज़र ज़िंदगी में पहले कभी नहीं आया था.

मन नहीं था तुमसे अलग होने का, पर वापस तो आना था… वापसी में कई तरह के ख़्याल थे मन में… क्या पता, इसके बाद तुम बातचीत बंद कर दो, बदल जाओ, तुम्हें जानती ही कितना थी मैं… तुम ये भी तो सोच सकते हो कि पहली मुलाक़ात में इतनी कंफर्टेबल होनेवाली लड़की न जाने कैसी होगी… हो सकता है मेरा फ़ायदा उठाना ही तुम्हारा इरादा हो… सुबह से तुम्हारा कोई मैसेज भी तो नहीं आया… हे भगवान! ख़ुद को इतना समझदार समझनेवाली मैं इस तरह बेवक़ूफ़ कैसे बन गई. तुम्हारा फोन भी बंद था.

ख़ैर, घर पहुंचते ही देखा तुम्हारा मैसेज था- ‘विल यू मैरी मी!’

मेरी जान में जान आई… ये दिल भी कितना नादान है… एक पल में लाखों ख़्याल उमड़ने लगते हैं… तुम्हें न कहने का कोई कारण नहीं था… पर मैंने हां नहीं कही थी… तुमने फिर मैसेज किया- ‘जानता हूं अभी तुम्हें मुझे और परखना है… कौन हूं, कैसा हूं, क्या काम करता हूं, कितना कमाता हूं… तुम लड़कियां भी कितना सोचती हो… और हम लड़के बस प्यार और विश्‍वास करते हैं… ख़ैर, तुम्हारी हां के लिए मैं उम्रभर इंतज़ार करूंगा… शहर, दूरियां, धर्म, जाति, बिरादरी, पैसा… इन सबसे कहीं ऊंचा होता है प्यार… और सच स़िर्फ यही है कि मैं तुमसे और तुम मुझसे प्यार करती हो…!
आई लव यू माय लव!’

आज पूरे एक साल हो गए हैं हमें मिले और अब अगली मुलाक़ात में हम हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो जाएंगे. हम लकी हैं कि हमारे घरवाले भी मान गए और हमारे प्यार को समझ पाए और मैं और भी लकी हूं कि तुम जैसा समझदार जीवनसाथी मुझे मिला. मेरा पहला प्यार… पहला एहसास… हमेशा के लिए अब मेरा होगा.

– गीता शर्मा

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मन का रिश्ता: दोस्ती से थोड़ा ज़्यादा-प्यार से थोड़ा कम (10 Practical Things You Need To Know About Emotional Affairs)

Emotional Affairs

रिश्तों का दायरों में कुछ रिश्ते मन के भी होते हैं, जिन्हें कोई नाम तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन इनके अस्तित्व को नाकारा भी नहीं जा सकता. इन्हीं रिश्तों में से एक है शादीशुदा स्त्री और पुरुष का ऐसा रिश्ता, जो दोस्ती से एक क़दम आगे होता है, लेकिन इसे प्यार का नाम भी नहीं दिया जा सकता. क्योंकि ऐसे रिश्ते में बंधे लोग किसी बंधन की चाह नहीं करते, वो बस कुछ समय साथ गुजारना चाहते हैं. क्यों, कब और कैसे बनते हैं मन के रिश्ते? आइए, जानते हैं.

Emotional Affairs

इंसान की ये फितरत है कि उसे जो चीज़ नहीं मिलती, वो उसी को पाना चाहता है. प्यार के मामले में तो ये चाहत और भी बढ़ती चली जाती है. जब लाइफ पार्टनर से मनचाहा प्यार नहीं मिलता, तो वो अपनी इस चाहत को अपने रिश्ते के दायरे से बाहर तलाशने लगता है. और तब बनते हैं मन के भावनात्मक रिश्ते, जिन्हें कोई नाम तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन उनके होने को नकारा भी नहीं जा सकता. मन के रिश्ते में बंधे ऐसे लोग घर-परिवार, करियर, रिश्तेदार, समाज… अपनी तमाम ज़िम्मेदारियां निभा लेने के बाद जो व़क्त बचता है, उसे अपने उस साथी के साथ बिताना चाहते हैं, जिससे कुछ पल बात करके इन्हें नई ऊर्जा मिलती है, ज़िंदगी ख़ूबसूरत नज़र आने लगती है. क्यों बनते हैं ऐसे मन के रिश्ते? समाज ऐसे रिश्तों को किस नज़र से देखता है? क्या हैं ऐसे रिश्तों के पॉज़िटिव और नेगेटिव इफेक्ट्स? आइए, जानते हैं.

क्यों बनते हैं मन के रिश्ते?
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ के अनुसार, ज़्यादातर इमोशल या एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स चालीस की उम्र के बाद होते हैं. इसकी वजह यह है कि इसके पहले इंसान अपनी पढ़ाई, करियर, शादी, बच्चों की ज़िम्मेदारियों में उलझा रहता है. फिर जब उसकी ज़िंदगी में ठहराव आने लगता है, जिसे एमटी नेस्ट सिंड्रोम भी कहते हैं, तो उस खालीपन को भरने के लिए वो किसी ऐसे इंसान से जुड़ जाता है, जिसके साथ व़क्त गुज़ारना उसे अच्छा लगता है.
ऐसा रिश्ता दोस्ती से बढ़कर होता है, क्योंकि बार-बार मिलने, बात करने का मन करता है, लेकिन सेक्स की चाह नहीं होती. ऐसे रिश्ते को प्यार इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ऐसे लोग स़िर्फ कुछ समय साथ रहना चाहते हैं, उन्हें एक साथ दुनिया बसाने की कोई चाह नहीं होती. इमोशनल अफेयर कोई जानबूझकर नहीं करता, इसके होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
* शादीशुदा ज़िंदगी में अच्छे अनुभव भी होते हैं और बुरे भी. पार्टनर भले बुरा न हो, लेकिन उसके साथ गुज़रे बुरे अनुभवों के कारण कई बार रिश्ते में कड़ुवाहट आ जाती है और ऐसा दोनों पार्टनर के साथ होता है. इसके चलते रिश्ते से रोमांस ग़ायब हो जाता है. फिर जब किसी के साथ उनका जुड़ाव होने लगता है, तो वो उस रिश्ते में रोमांस तलाशने लगते हैं.
* शादी के बाद कई महिलाएं अपना ध्यान नहीं रखतीं, ख़ुद को ग्रूम नहीं करतीं, तो पति को उनमें रुचि कम होने लगती है, फिर जब उसे अपने जैसी कोई मिलती है, तो वो उसके प्रति आकर्षित हो जाता है.
* कई कपल ऐसे होते हैं, जो दुनिया के सामने तो ऐसा दिखाते हैं जैसे उनके बीच सबकुछ नॉर्मल है, लेकिन ऐसा होता नहीं. ऐसे में दोनों अपनी-अपनी अलग दुनिया बसा लेते हैं और दोनों अपनी दुनिया में ख़ुश रहते हैं.
* शादी के शुरुआती वर्षों को छोड़ दिया जाए, तो इंसान पूरी ज़िंदगी इस आस में गुज़ार देता है कि कभी तो उसकी ज़िंदगी में रोमांस के पल लौटकर आएंगे, लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता, तो जहां भी उसे अपने लिए प्यार महसूस होता है, वो उसी तरफ़ झुकता चला जाता है.
* चालीस की उम्र के बाद कई महिलाएं एमटी नेस्ट सिंड्रोम की शिकार हो जाती हैं, जब बच्चे अपनी दुनिया में बिज़ी हो जाते हैं और पति अपने काम में, ऐसे में महिलाएं अकेलापन महसूस करने लगती हैं. उन्हें लगने लगता है कि किसी को उनकी परवाह नहीं है. ऐसे में जब कोई उन्हें एहमियत देता है, तो वो उसकी तरफ खिंचती चली जाती हैं.
* जब शादीशुदा रिश्ते में कहीं कोई कमी रह जाती है, हम वैसी ज़िंदगी नहीं जी पाते जैसा हम जीना चाहते हैं, तो ज़िंदगी में एक अजीब-सा खालीपन आ जाता है. फिर जब किसी से मिलने पर वो खालीपन भरने लगता है, तो मन ऐसे रिश्ते से जुड़ता चला जाता है.
* घर-ऑफिस का स्ट्रेस, पारिवारिक कलह, विचारों का मतभेद कई बार पति-पत्नी के बीच इतनी दूरियां ला देता है कि एक छत के नीचे रहते हुए भी वो एक-दूसरे से बहुत दूर होते चले जाते हैं. ऐसे में वो घर में मिलने वाली ख़ुशियां बाहर तलाशने लगते हैं. फिर जब कोई थोड़ा भी सहारा देता है, तो वो उसकी तरफ़ खिंचते चले जाते हैं.
* कई बार ऐसा भी होता है कि कहने को तो रिश्ता तय हो जाता है, शादी भी हो जाती है, लेकिन कपल के विचार आपस में कभी नहीं मिलते. ऐसे में रिश्ता तोड़कर दो परिवारों को दुखी करने की बजाय वो ऐसे रिश्ता तलाश लेते हैं, जो उन्हें समझता हो, जिसका साथ उन्हें अच्छा लगता हो. ऐसे रिश्ते में वो अपनी ख़ुशियां तलाश लेते हैं. घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ वो अपने इस रिश्ते को भी जीते हैं.
* काम के बढ़ते घंटे कलीग को एक-दूसरे के इतने करीब ले आते हैं कि वो एक-दूसरे से अपनी हर बात शेयर करने लगते हैं. रोज़ाना घंटों साथ रहते हुए उन्हें ये पता ही नहीं चलता कि वो कब एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए हैं.
* आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में काम की आपाधापी के चलते पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए टाइम ही नहीं रहता, ऐसे में उनके बीच संवाद की कड़ियां ढीली पड़ने लगती हैं, शरीरिक ज़रूरत से ज़्यादा ऐसे समय में उन्हें इमोशनल सपोर्ट चाहिए होता है और जहां इसकी पूर्ति होती दिखाई देती है, वो उसी तरफ़ मुड़ जाते हैं.
* आजकल एक्सपोज़र इतना बढ़ गया है कि ज़िंदगी की ज़रूरतें भी जैसे बदलती जा रही हैं. अब लोग एक रिश्ते में घुट-घुटकर जीने की बजाय दूसरा रिश्ता तलाशकर अपना सुकून ढूंढ़ लेते हैं और ऐसा करते समय उन्हें कोई अपराधबोध भी नहीं होता.
* कई बार हमें एक ऐसे साथी की तलाश होती है, जिसके पास जाकर हम दुनिया की तमाम तकली़फें, शिकायतें भूल जाते हैं. उस व़क्त हमारे हैप्पी हार्मोन्स पीक पर होते हैं और हमें ज़िंदगी अच्छी लगने लगती है.

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हां, मैं अपने रिश्ते से ख़ुश हूं!
सुरीली (परिवर्तित नाम) कहती हैं. “मैं अमन से चार साल पहले मिली थी जब मैंने अपना नया ऑफिस ज्वाइन किया था. अमन मेरे सीनियर थे इसलिए काम के सिलसिले में उनसे बातें होती रहती थीं. धीरे-धीरे हमें एक दूसरे का साथ इतना अच्छा लगने लगा कि हम घर पहुंचते ही अगले दिन ऑफिस जाने का इंतज़ार करते रहते थे. हमारे बीच एक अनकहा रिश्ता जन्म लेने लगा था. बिना कुछ कहे-सुने हमने एक-दूसरे को अपना सहारा बना लिया. सच कहूं, तो जब से अमन मेरी ज़िंदगी में आए हैं, तब से जैसे मेरी ज़िंदगी ही बदल गई है. अमन का साथ मुझे एक अजीब-सी ख़ुशी और संतुष्टि देता है, जो मैंने अपने पति के साथ कभी महसूस नहीं की. मैं जब कभी अपसेट रहती हूं तो मेरे पति को तो इसकी ख़बर भी नहीं रहती, लेकिन अमन जानते हैं कि आज रात मुझे नींद नहीं आएगी. वो मुझे 2-3 बजे रात में भी मैसेज करते हैं कि अब सो भी जाओ, कल ऑफिस में काम कैसे करोगी. अमन का इस कदर केयर करना मुझे बहुत तसल्ली देता है. अमन के साथ मैं ख़ुद को प्रोटेक्टेड महसूस करती हूं. हमने कभी एक-दूसरे को छुआ भी नहीं है, लेकिन हमारी रूह एक-दूसरे में बसती है. समझ नहीं आता इस रिश्ते को क्या नाम दूं- प्यार, दोस्ती, अफेयर, हमसफर… जो भी है, मेरे लिए हमारा रिश्ता बहुत ख़ास है.”

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इस रिश्ते को क्या नाम दें?
प्राइवेट लंच डेट्स, सीक्रेट मीटिंग्स, उत्तेजक वार्तालाप… पार्टनर के होते हुए जब ये बातें किसी और के साथ शेयर की जाती हैं, तो ऐसे रिश्ते को क्या नाम दिया जाए? कई लोग ख़ुद को समझाते हैं कि जब तक उनके बीच सेक्स नहीं होता, उसे अफेयर का नाम नहीं दिया जा सकता, लेकिन ये सच नहीं है. जिस रिश्ते को आप अपने पार्टनर और दुनिया से छुपाकर रखते हैं, जिसे आप अपना बिल्कुल निजी मामला समझते हैं, उसे अफेयर ही कहा जा सकता है. आप अपनी ढेर सारी इमोशनल एनर्जी अपने अफेयर पर ख़र्च करते हैं, जबकि इस पर आपके पार्टनर का अधिकार है. ऐसे रिश्तों का जब खुलासा होता है, तो सबसे पहले विश्‍वास की दीवार ढहती है और फिर आप गिल्ट में जीते हैं और आपका पार्टनर नफ़रत की आग में.

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इमोशनल अफेयर के साइड इफेक्ट्स
* आप हर समय इस गिल्ट में रहते हैं कि आप अपने पार्टनर को धोखा दे रहे हैं.
* जाने-अनजाने पार्टनर और परिवार की अनदेखी करने लगते हैं.
* एक अनरियलिस्टिक दुनिया में जीने लगते हैं, जिसके परिणाम घातक हो सकते हैं.
* अपने अफेयर से मिलने के लिए पार्टनर से झूठ बोलते हैं.
* पति और परिवार का समय उस शख़्स को देने लगते हैं यानी अपना बेस्ट टाइम उसके साथ गुज़ारते हैं.
* पार्टनर की बजाय अपनी हर बात उस शख़्स के साथ शेयर करने लगते हैं.
* स़िर्फ कुछ समय की मुलाक़ात में सबकुछ अच्छा तो लगता है, लेकिन जब अफेयर की बात खुलती है, तो असल रिश्ते दूर हो जाते हैं.

– कमला बडोनी

 

 

पहला अफेयर: दरमियान (Pahla Affair: Darmiyaan)

Pahla Affair, Darmiyaan
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पहला अफेयर: दरमियान (Pahla Affair: Darmiyaan)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

किस तरह से कोई शख़्स अचानक ज़िंदगी में चला आता है और कब वो मुहब्बत बनकर आपकी रूह को छूकर निकल जाता है, शायद पता ही नहीं चलता. तुम भी तो इसी तरह से आए थे मेरे जीवन में. एक ताज़े, मदमस्त हवा के झोंके की तरह और मैं सूखे पत्ते की तरह बस उड़ती चली गई, किसी पागल नदी की तरह बस बहती चली गई… न धड़कनों पर काबू रहा था, न क़दमों पर… बहकती चली गई, मचलती चली गई… तुम मेरे लिए क्या थे, शायद तुम कभी समझ ही नहीं पाए… या मैं ही इतनी नासमझ थी कि तुमको समझ नहीं पाई…

वो पहली मुलाक़ात अब तक है याद… एक दोस्त की पार्टी में मिले थे हम. वो पूरी रात मैंने बस तुम्हें सोचते हुए काटी थी. कितनी कशिश थी तुम्हारे व्यक्तित्व में, कितना शालीन था तुम्हारा व्यवहार… पहली नज़र में ही मैंने ख़ुद को खो दिया था. पर तुम्हारे दिल में क्या था, मैं नहीं जानती थी.

एक दिन ऑफिस में काम कर रही थी कि अंजान नंबर से कॉल आया, “हाय, मैं विक्रम, विक्रम शर्मा बोल रहा हूं.”

“जी, मैंने आपको पहचाना नहीं, क्या काम है कहिए.” मैंने बेमन से जवाब दिया.

“आप रितु बोल रही हैं न, हम उस दिन पार्टी में मिले थे… इतनी जल्दी भूल जाएंगी आप मुझे, मैंने सोचा नहीं था.”

“ओ माय गॉड! आपका नाम तक भी नहीं जानती थी मैं, इसलिए नहीं पहचान पाई, मेरा नंबर कहां से मिला आपको?”

“ढूंढ़ने पर तो भगवान भी मिल जाता है… मैं सोच रहा था, अगर आप आज शाम मेरे साथ कॉफी पी सकें, तो मेरी लाइफ बन जाएगी.”

“जी, बात अगर आपकी लाइफ की है, तो मैं मना कैसे कर सकती हूं…” न जाने उसकी बातों में क्या जादू था, मैं बस खिंचती चली गई. उसके बाद न जाने ऐसी कितनी ही मदभरी शामें हमने साथ गुज़ारीं. मैंने तो कल्पना भी नहीं की थी कि मेरी पहली नज़र का पहला प्यार मेरे लिए इतना बेक़रार होगा…

लेकिन पता नहीं मन में कहीं न कहीं मुझे यह महसूस होता था कि कहीं कुछ न कुछ सही नहीं है. तुम्हारा अचानक कहीं खो जाना, कुछ कहते-कहते ख़ुद को रोक लेना… फिर मैंने ही एक दिन सोचा कि अपने दिल की बात कह दूं तुमसे कि हां, मुझे प्यार है और तुम ही वो, जिसके साथ मुझे सारी ज़िंदगी बितानी है… इतने में तुम्हारा भी फोन आ गया कि शाम को कुछ ज़रूरी बात करनी है, मैंने सोचा तुम भी मुझे प्रपोज़ करनेवाले हो…

मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन दिन था वो. सोचा था दोपहर को शॉपिंग के बाद तुमसे कॉफी हाउस में मिलूंगी. पर मेरे लिए यह किसी सरप्राइज़ से कम नहीं था कि तुम मुझे शॉपिंग मॉल में ही नज़र आ गए थे.

“हाय विक्रम, देखो हम शाम को मिलनेवाले थे, पर शायद भगवान भी नहीं चाहता कि अब हम और इंतज़ार करें… विक्रम, क्या हुआ? तुम इतने झिझक क्यों रहे हो?” मैं बस विक्रम से बात ही कर रही थी कि एक 7-8 साल का बच्चा वहां आकर विक्रम से लिपटते हुए बोला, “पापा, मुझे प्लीज़ गेम ज़ोन में ले चलो न, मैं यहां बोर हो रहा हूं…” मुझे अपने कानों पर विश्‍वास नहीं हो रहा था. विक्रम शादीशुदा थे. उनका बेटा भी है. ऐसा कैसे हो सकता है. इतना बड़ा धोखा? मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन दिन तो जैसे मेरे लिए जानलेवा साबित हो गया था. किसी तरह ख़ुद को संभाला मैंने और विक्रम को बाय बोलकर चली आई.

एक महीने से ज़्यादा का समय हो गया, तुमने कई बार फोन किया, मैसेज किए, पर मैंने न मैसेज पढ़े, न ही फोन का जवाब दिया. एक धोखेबाज़ शख़्स से मैं कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी. मेरी भावनाओं से खेलकर आख़िर क्या मिला… या यह तुम्हारा शौक़ होगा, लड़कियों को अपने आकर्षण में फंसाकर उनका इस्तेमाल करना.

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काश! मैं समझ पाती पहले, तो वो सब कुछ भी न हुआ होता, जो एक शाम हमारे बीच हुआ था… इतने में ही डोरबेल बजी, दरवाज़ा खोला, तो हैरानी भी थी और ग़ुस्सा भी…

“विक्रम, तुम अब क्या लेने आए हो? तुम्हें जो चाहिए था, वो तो मिल ही चुका न, मेरा शरीर, मेरा जिस्म… बस यही तो चाहते हो तुम मर्द.”

“रितु, मेरे प्यार को वासना का नाम देकर उसे गाली मत दो. तुम्हें मुझसे बात नहीं करनी, मत करना, रिश्ता नहीं रखना, मत रखना… पर एक बार सफ़ाई देने का मौक़ा तो दे ही सकती हो…”

“सफ़ाई, किस बात की, यही कहोगे न कि तुम्हारी शादी कम उम्र में ही गांव की किसी लड़की से हो गई थी, तुम्हारी बीवी से तुम्हें प्यार नहीं, वो तुम्हें समझ नहीं पाती… अक्सर मर्द अपनी कमज़ोरियों को इसी तरह छिपाते हैं. अपनी बीवी को बदनाम करके नाजायज़ रिश्ते बनाते हैं… मैं किसी की रखैल बनकर नहीं जीना चाहती…”

बस करो रितु, यह कहकर विक्रम ने मुझे बांहों में भरकर मेरे लबों को अपने लबों से बंद कर दिया… मैं छूटने की कोशिश करती रही, पर नाकामयाब रही…

“रितु, तुम इतनी ग़ुस्से में हो कि अपने प्यार से ही तुम्हारा मुंह बंद कर सकता था. अब प्लीज़ सुनो मेरी बात… रोहित मेरा बेटा है यह सच है, मैं शादीशुदा हूं यह भी सच है, हां मेरी शादी मेरी अपनी मर्ज़ी से हुई थी और मेरी पत्नी मेरे जीवन का सबसे अनमोल तोहफ़ा थी. बहुत प्यार करता था उससे मैं. लेकिन राहुल के जन्म के व़क्त ही वो हमें छोड़कर दूसरी दुनिया में चली गई. राहुल को उसके नाना-नानी अपने साथ ले गए, क्योंकि मेरे परिवार में कोई बुज़ुर्ग नहीं था और न ही राहुल को संभालनेवाला कोई था. वो छुट्टियों में आता है मेरे पास. उस रोज़ शाम को मैं तुम्हें यही सब बतानेवाला था, ताकि तुम अपना निर्णय ले सको.

सच कहता हूं रितु, तुम्हें जब पहली बार देखा, तो बेहद अपनापन लगा. मुझे लगा मेरी पत्नी नीलू के बाद अगर किसी लड़की ने मेरे दिल को छुआ है, तो वो स़िर्फ तुम हो… जब तुमसे शादी के बारे में सोचता, तो बस राहुल का ख़्याल आ जाता और तुम्हारी प्रतिक्रिया को लेकर थोड़ा डर जाता. लेकिन जिस रोज़ हम और क़रीब आए, उसके बाद मुझे एक अपराधबोध महसूस होने लगा. मुझे लगा तुम्हें अब तक अंधेरे में रखा और तुम्हारे साथ इतना क़रीब आ गया… बस, यही ग़लती है मेरी. अब तुम जो निर्णय लो, मैं तुम पर ज़ोर नहीं डालूंगा… ”

“तुमने मुझे इस काबिल ही कहां छोड़ा कि अब किसी और की हो सकूं…” यह कहते हुए अपने अधरों को मैंने विक्रम के लबों पर रख दिया… उसके बाद स़िर्फ प्यार ही प्यार था हमारे दरमियान… न कोई दीवार, न कोई ग़लतफ़हमी, न कोई शिकवा, न शिकायत…

आज मैं ख़ुश हूं कि जिसको चाहा उसे ही हमसफ़र बना दिया भगवान ने, राहुल जैसा बेटा और रिनी जैसी बेटी के साथ हम एक हैप्पी फैमिली हैं. मेरा पहला प्यार मेरी ज़िंदगी बन गया… आप भी किसी से प्यार करो, तो उस पर पूरा विश्‍वास करो…

– योगिनी भारद्वाज

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पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी (Pahla Affair: Aainewali Almaari)

Pahla Affair, Aainewali Almaari

Pahla Affair, Aainewali Almaari

पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी (Pahla Affair: Aainewali Almaari)

पहले प्यार का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर

आज फिर दोपहर में फुर्सत होते ही ड्रेसिंग रूम में जाकर अलमारी के सामने खड़ी हो गई. कितने घर बदल गए, घर का पूरा फर्नीचर बदल गया, नहीं बदला कुछ, तो यह अलमारी और इससे मेरा प्यार… अपने पहले प्यार की तरंगित मधुर स्मृतियों को क्या कोई अपने आप से दूर कर पाया है? इसके धुंधला चुके आईने में अब भी तुम्हारा प्रतिबिंब झलकता है. इसके भीतर आज भी दो कुंआरे दिलों के प्रेम की प्रथम अनछुई अनुभूति धड़कती है.

सोलह-सत्रह बरस की, ख़्वाबों में खोई रहनेवाली उम्र थी वो. जब एक दिन ढलती सांझ के रंगों में अपने मन की तूलिका से कुछ अनगढ़ से चित्र गढ़ती मैं छत पर खड़ी थी कि तभी पड़ोसवाली छत पर किसी के आने की आहट सुनकर उत्सुकता से उधर देखा. बगलवाला मकान कई दिनों से खाली था, दो-तीन दिन हुए कोई आया था, लेकिन पहचान नहीं हुई थी. देखा, 20-22 बरस का एक लड़का खड़ा था.

पता नहीं उम्र का तकाज़ा था या प्रकृति ने ही कोई संकेत किया था कि आंखें बरबस ही उस ख़ूबसूरत चेहरे पर अटक गईं. ढलती शाम की लालिमा उसके सुंदर, गोरे चेहरे पर छाई थी और तभी उसका ध्यान मेरी तरफ़ गया. मैंने फ़ौरन अपनी आंखें झुका लीं. दिल ज़ोर से धड़क उठा. देर तक मैं छत पर ही खड़ी रही, मन हवा में किसी के साथ को महसूस कर रोमांचित हो रहा था.

स्कूल आते-जाते अक्सर वो दिखाई देता. मेरी आंखें झुक जातीं, हाथ-पैर कांप जाते, चाल लड़खड़ा जाती और वो हौले से मुस्कुरा देता. मेरी शामें अब छत पर ही गुज़रने लगीं और वो तो मुझसे पहले ही छत पर मिलता, दरवाज़े पर नज़रें गड़ाए हुए. दिल से दिल तक प्रेम शायद कुछ तार जोड़ने लग गया था. जल्द ही दोनों घरों के बीच घनिष्ठता हो गई और हमारे बीच भी. हां, दिल की बातें अब भी बस आंखों तक ही सीमित रहती थीं. साल कब बीत गया पता ही नहीं चला.

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एक दिन घर के सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां गए हुए थे कि तभी वो आ गया. यूं एकांत में पहली बार उसके साथ… तभी उसने एक किताब मांगी और मैं कमरे में चली आई. वो भी आकर मेरे पीछे ही खड़ा हो गया. हम दोनों के दिल इतनी ज़ोरों से धड़क रहे थे कि हमें एक-दूसरे की धड़कनें सुनाई दे रही थीं. तभी उसने मेरा दुपट्टा उठाया और मेरे सिर पर ओढ़ा दिया. मैंने सामने आईने में देखा, वो मुस्कुरा रहा था, उसकी आंखों में जैसे सारी क़ायनात का प्यार उमड़ आया था. कितना पवित्र, पावन प्रणय निवेदन था. बिना बोले भी सब कुछ तो कह दिया था. जैसे संपूर्ण अधिकारों के साथ मुझे अपने जीवन में शामिल कर लिया था. मौन घोषणा कर दी थी ईश्‍वर के सामने कि मैं स़िर्फ उसकी हूं. मैं देर तक आईने में हम दोनों की छवि निहारती प्रार्थना करती रही कि यह बंधन सात जन्मों तक अटूट रहे. आईना हम दोनों के प्रणय और युगल छवि का मौन साक्षी बन गया.

किंतु 35 बरस पहले की रूढ़ियों ने हमारे प्यार को विवाह में परिणत नहीं होने दिया और टूटा मन लेकर वह शहर छोड़कर ऐसा गया कि फिर कभी नहीं मिला.

जब विवाह हुआ, तो पिताजी से बस यह अलमारी ही मांग ली थी. आज भी पहले प्यार की वह मधुर छवि इस आईने में ज्यों की त्यों मुस्कुराती हुई दिखाई देती है.

– डॉ. विनीता राहुरीकर

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पहला अफेयर: मेरा प्यार ही मेरी प्रेरणा बन गया… (Pahla Affair: Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya)

Pahla Affair, Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya

Pahla Affair, Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya

पहला अफेयर: मेरा प्यार ही मेरी प्रेरणा बन गया… (Pahla Affair: Mera Pyar Hi Meri Prerna Ban Gaya)

पहले प्यार का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर

सच्चे प्यार का एहसास भटके हुए को सही राह दिखाता है. कभी किसी की कमज़ोरी नहीं बनता, बल्कि किसी की ताक़त बन उसे जीने की प्रेरणा देता है. ऐसी प्रेरणा, जो उसके जीवन को किसी मुक़ाम तक पहुंचाए. मीना भी मेरे जीवन की वह प्रेरणा है, जिसने  मुझे नई राह दिखाई. इस मुक़ाम तक पहुंचने में मेरी प्रेरणा बनी.

बात उन दिनों की है, जब मैं कॉलेज में पढ़ता था. मीना नाम की बेहद ख़ूबसूरत लड़की मेरी क्लास में पढ़ती थी. उसकी नीली, झील-सी आंखों में ऐसी कशिश थी कि मैं उसमें बंधता जा रहा था. धीरे-धीरे आलम यह हो गया कि उसे देखे बिना मेरा दिन कटना मुश्किल होता जा रहा था. पढ़ने में मेरा मन बिल्कुल नहीं लगता था. बस, हर पल आंखों में उसी की तस्वीर रहती थी. सच पूछो तो मैं उसके प्यार में अंधा हो गया था.

एक दिन मीना से मैंने अपने प्यार का इज़हार कर ही दिया. मेरी बात का कोई उत्तर दिए बिना वो चली गई. अगले दिन उसने क्लास में खड़े होकर कहा, “आज सर नहीं आए, तो क्यों न एक परिचर्चा पर विचार-विमर्श हो जाए.” पूरी क्लास ने एक स्वर में कहा, “आइडिया अच्छा है. पर विषय तो बताओ?”

मीना बोली, “हमारी कॉलेज लाइफ़ और प्यार. अब आप लोग इस पर अपने विचार व्यक्त करें.” पीछे की बेंच पर बैठे लड़के चिल्लाए, “बहुत ज़रूरी है प्यार लाइफ़ में…”

नेहा नाम की एक दबंग लड़की बोली, “प्यार का मतलब बकवास है. इसका फेवर वे लोग ही करेंगे, जो कॉलेज को मौज-मस्ती का अड्डा मानते हैं.” यह सुनकर लड़के होहल्ला मचाने लगे. यह सुनकर मीना ने सबको शांत किया और क्लास के सबसे बुद्धिमान लड़के
राकेश की ओर मुखातिब होकर बोली, “तुम अपने विचार व्यक्त करो.”

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राकेश बोला, “प्यार वह ख़ूबसूरत एहसास है, जिसके बिना ज़िंदगी जीना संभव नहीं. सबसे पहला और अद्भुत प्यार तो वात्सल्य होता है, जो जन्म से ही हमें माता-पिता से मिलता है. यह प्यार निस्वार्थ और निष्कपट होता है, जो जीवन के अंतिम पड़ाव तक हमें संरक्षण प्रदान करता है. प्यार का दूसरा रूप है- स्नेह. यह हमें अपने भाई-बहनों, गुरुजनों, मित्रों-रिश्तेदारों से मिलता है. यह प्यार हमें अपने गुणों और अच्छे व्यवहार के कारण मिलता है. हां, यदि परिचर्चा का विषय प्रेमी-प्रेमिका वाले प्यार सेे है, तो उससे तो तौबा-तौबा, क्योंकि अभी हमारे पढ़ने की उम्र है. बीता व़क़्त तरकश से निकले तीर की तरह होता है, जो दोबारा लौटकर नहीं आता. कॉलेज लाइफ़ का एक-एक दिन क़ीमती है. हमें ऐसे प्यार के चक्कर में न पड़कर अपना भविष्य संवारना चाहिए.”

मीना के चेहरे पर एक विशेष प्रकार की संतुष्टि थी, वो मेरी तरफ़ मखातिब होकर बोली, “ओमेशजी, क्या आप भी राकेशजी के विचारों से सहमत हैं?” मेरे मुंह से बस इतना ही निकला, “हां, पूरी तरह से.”

उस दिन यदि मीना ने मुझे सही राह न दिखाई होती, तो मैं आज जिस मुक़ाम पर खड़ा हूं, वहां तक कभी न पहुंच पाता. पहले प्यार के एहसास जब याद आते हैं, तो आज भी आंखें उसके प्रति श्रद्धा से झुक जाती हैं.

– डॉ. ओ. पी. दास गुप्ता

 

 

पहला अफेयर: अधूरे ख़्वाब (Pahla Affair: Adhoore Khwab)

Pahla Affair, Adhoore Khwab
Pahla Affair, Adhoore Khwab
पहला अफेयर: अधूरे ख़्वाब (Pahla Affair: Adhoore Khwab)

व़क्त गुज़र जाता है, लेकिन उसकी कुछ यादें दिल के किसी कोने में हमेशा मौजूद होती हैं, जिनमें डूबकर कभी लगता है बहुत हसीन है यह ज़िंदगी, मगर कुछ बेरहम भी है, क्योंकि इनमें तुम्हारी जुदाई के वो कराहते लम्हे ही अधिक हैं… जिनके पार उतरना बहुत असंभव है.
जीवन के संघर्षमय सागर में मुझे अकेला छोड़कर जब तुम चले गए, तो ऐसा कोई नहीं था, जो मेरे जलते हुए निर्विश्राम जीवन पर सांत्वना की दो बूंद छिड़क दे, फिर भी मैं व्यथित नहीं हुई… सर्वथा आमोद-प्रमोद की लहरों में पड़ी रही… मेरा ही दुखी मन और मैं ही समझानेवाली थी. वेदना के शोलों पर मुस्कुराहट की राख बिखेरते हुए हर तरह से मन के भावों को कुचलने की चेष्टा में तुम्हारा इंतज़ार करती रही.

जब तक तुम थे, तभी तक ज़िंदगी थी मेरे आस-पास… लेकिन जब तुम जॉब करने अचानक जर्मनी चले गए, तब मैंने देखा था कैसे किसी शख़्स का चले जाना वीरान कर जाता है सारा शहर!

तुम्हारी योग्यताओं को देखते हुए वहां तुम्हें बहुत बेहतरीन जॉब का ऑफर मिला था, इसलिए वहां तुम्हें जाना पड़ा और तुम चले गए. तुम्हारे इस तरह चले जाने के बाद तुम्हारे ग़म में डूबी मैं ढूंढ़ती रही हूं अपने को! क्योंकि मेरा वजूद तो तुम थे. तुम्हारे बिना मैं आज भी अधूरी हूं.

यह प्यार भी एक अलौकिक सज़ा है… ग़म देनेवाला एक मज़ा है और इसका सिरा मैं कहीं न कहीं से ढूंढ़ ही लेती हूं.

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मेरा ये पहला प्यार ही मेरे लिए सारा जीवन है. मेरी जिन आंखों में आज आंसू ही आंसू हैं, कभी इनमें वो सपने हुआ करते थे, जिन्हें प्यार की राहों में तुम्हारे साथ चलते हुए मेरी पलकों ने सजाया था. हमारे वो सपने कभी आकाश के तारों से रौशन हुआ करते थे और ये सर्द हवाएं हमारे लिए प्यार के तराने गाया करती थीं. महकते फूलों का संगीत उन रास्तों को जगाया करता था, जिन राहों पर एक-दूसरे की बांहों का सहारा लेकर हम रखते थे अपने क़दम!

बचपन के साथी थे हम, लेकिन हमारे बचपन की कहानी ज़माने से कोई अलग नहीं थी. वही साथ-साथ खेलना… नदी के उस पार की बगिया से आम व अमरूद तोड़कर एक साथ पहाड़ों पर चढ़ते-उतरते हमारा बचपन कैसे बीत गया, हमें पता भी नहीं चला.

तीन वर्ष हो गए तुमको यहां से गए हुए और अब ग़मों से घिर गई हूं मैं. कहां हो तुम? बड़ी वीरान हैं उम्मीदों की राहें… चले आओ मेरी आंखें तुम्हें देखने की चाह में कुछ और देखना ही भूल गई हैं… अपने जल्द आने की बात कहकर भी तुम नहीं आए… न जाने इतना धैर्य तुममें कहां से आ जाता है? लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है. मेरे साथ पूरा परिवार है और मेरे साथ-साथ मेरे पूरे परिवार ने भी तुम्हारा इंतज़ार किया था. फिर एक दिन रीति-रिवाज़ों के बंधन में बंधकर मैं किसी और की हो गई!

जो प्यार मैंने तुमसे किया और तुम्हारे प्यार ने मुझे जो एहसास, जो यादें दीं शायद इसे ही पहला प्यार कहते हैं… तुम्हारा यही प्यार आज भी ज़िंदा है मेरे मन में. तुम्हारे इस एहसास के साथ-साथ मुझे ‘अधूरे ख़्वाब’ दिखाने के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया!

– दिशा राजवानी

पहला अफेयर: रूठ गया वसंत… (Pahla Affair: Rooth Gaya Vasant)

Pahla Affair, Rooth Gaya Vasant

 

पहला अफेयर: रूठ गया वसंत… (Pahla Affair: Rooth Gaya Vasant)

क्यों रूठा हमसे बसंत
हमने तो सुदूर नीलांबर के इंद्रधनुष में
प्यार के कुछ रंग भरने चाहे थे
ज़माने की आंधी चली कुछ ऐसी
ज़िंदगी में हमेशा के लिए पतझड़ छा गया

फिर वसंत आ गया. बसंत का यह मौसम दिल में एक अजीब-सी हूक जगा देता है. कॉलेज के वो दिन आंखों के सामने घूम जाते हैं, जो मेरी ज़िंदगी में बहार लेकर आए थे.

मेरे लिए यह शहर भी अजनबी था और यहां के लोग भी. मैंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था. कॉन्वेंट स्कूल के सख़्त अनुशासन के पश्‍चात् यहां का सहशिक्षा वाला वातावरण उन्मुक्त प्रतीत हुआ. शुरू-शुरू में थोड़ी मुश्किलें ज़रूर आईं, पर जल्दी ही मैंने नए माहौल में अपने आप को ढाल लिया, कई साथी भी बन गए.

कॉलेज में सांस्कृतिक सप्ताह का आयोजन होनेवाला था. मेरे एक सहपाठी ने मुझसे उसके साथ युगल गान प्रतियोगिता में भाग लेने का अनुरोध किया. मैंने उससे स्पष्ट कहा कि मुझे गीत-संगीत सुनने का शौक़ तो बहुत है, किंतु मैं स्वयं अच्छा नहीं गा पाती हूं, इसलिए वह कोई और पार्टनर चुन ले. गायन प्रतियोगिता वाले दिन उस छात्र को जब एक ख़ूबसूरत छात्रा के साथ स्टेज पर गाते देखा तो न जाने क्यों कुछ अच्छा नहीं लगा. मुझे ईर्ष्या का अनुभव हुआ. फिर तो मैं भी नृत्य, नाटक, लेखन आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगी और इसके लिए अनेक पुरस्कार भी जीते. धीरे-धीरे मैंने उस लड़के से दोस्ती भी बढ़ा ली.

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हम दोनों में ख़ूब पटने लगी. एक गहरे आकर्षण के मोहपाश में हम बंधते चले गए. जूही-चंपा व गुलमोहर से हरी-भरी कॉलेज की बगिया हमारी मुलाक़ातों की मौन साक्षी बनी. एक-दूसरे के साथ के सिवाय हमें कुछ अच्छा ही नहीं लगता. साथ उठते-बैठते, लड़ते-झगड़ते कब हम भावी जीवन के मधुर स्वप्न देखने लगे, पता ही नहीं चला. मगर ख़्वाब देखते हुए शायद हम ये भूल गए कि हमारे समाज में जाति-पाति, वर्ग-भेद बहुत गहरा पैठा हुआ है.

परिवार की रज़ामंदी तो दूर, हमारे प्रेम पथ पर दुखों के कांटे बिछा दिए उन्होंने. जीवनभर अपने प्रियजनों से अलगाव झेलने का सामर्थ्य नहीं था हममें, न ही आर्थिक रूप से हम सक्षम थे कि समाज से दूर अपनी नई दुनिया बसा पाते. कठोर यथार्थ के दानव ने हमारा स्वप्न-लोक नष्ट कर दिया. हमारे ख़्वाब अधूरे रह गए. मेरा राजकुमार स़फेद घोड़े पर सवार हो मुझे ब्याहने नहीं आ पाया. अश्रुओं का अथाह सागर अंदर ही शुष्क हो गया. मैंने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया और मेरे इस निश्‍चय को कोई नहीं डिगा पाया.
मेरा प्यार कहां है, कैसा है, यह जानने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाई मैं. नेह के गुलाबों की सुरभित पंखुड़ियां मेरी स्मृतियों की क़िताब के पृष्ठों के बीच आज भी दबी हुई हैं. कभी अनजाने में मेरे पहले और अंतिम प्यार ने गीत गाते हुए जीवन की सच्चाई बयां कर दी थी.

जीवन के सफ़र में राही
मिलते हैं बिछड़ जाने को
और दे जाते हैं यादें
तन्हाई में तड़पाने को.

– डॉ. महिमा

जानें सेक्स से जुड़े दिलचस्प सर्वे (Interesting Sex Survey)

Interesting Sex Survey
सफल सेक्स लाइफ़ पर हुए रिसर्च के अनुसार सेक्स लाइफ एंजॉय करने के लिए डेली एक्सरसाइज़ और हेल्दी डायट बहुत ज़रूरी है. आइए जानते हैं कुछ इंटरेस्टिंग सेक्स रिसर्च की रिपोर्ट्स की संक्षिप्त जानकारी.

Interesting Sex Survey

– एक सर्वे के अनुसार, 60% पुरुष चाहते हैं कि सेक्स के लिए औरत पहल करे.

सप्ताह में दो या तीन बार सेक्स करनेवाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है.

सेक्स के दौरान हार्ट अटैक से मरनेवाले पुरुषों में से 85% पुरुष ऐसे होते हैं, जो अपनी पत्नी को धोखा दे रहे होते हैं.

जिन लोगों को अनिद्रा की शिकायत हो, उनके लिए सेक्स से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता, क्योंकि सेक्स के बाद अच्छी नींद आती है. रिसर्च के अनुसार, ये नींदवाली दूसरी दवाओं की तुलना में 10 गुना ज़्यादा कारगर है.

हर पुरुष हर सात सेकंड में कम से कम एक बार सेक्स के बारे में ज़रूर सोचता है.

20% पुरुषों को ओरल सेक्स से आनंद आता है, जबकि 6% महिलाओं को ये महज़ फोरप्ले का हिस्सा लगता है.

अमेरिका में 12-15 साल के किशारों में ओरल सेक्स का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और मज़ेदार बात तो ये है कि वो इसे सेक्सुअल क्रिया मानते ही नहीं.

25 % महिलाएं सोचती हैं कि पुरुष रुपएपैसे से सेक्सी बनता है.

ज़्यादा सेक्स करनेवाले पुरुषों की दाढ़ी अपेक्षाकृत तेज़ी से बढ़ती है.

लेटेक्स कंडोम की औसत लाइफ़ 2 साल होती है.

रोमांटिक उपन्यास पढ़नेवाली औरतें ऐसे उपन्यास न पढ़नेवाली औरतों की तुलना में सेक्स का ज़्यादा आनंद उठा

सकती हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर्स के मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार, पुरुष किसी भी दूसरे रंग के मुक़ाबले लाल रंग के परिधान में महिलाओं की ओर ज़्यादा आकर्षित

होते हैं.

हाल ही में हुए शोध के अनुसार, जिन महिलाओं में इमोशनल इंटेलिजेन्स (अपनी भावनाओं को समझने के साथसाथ अपने आसपास रहनेवाले लोगों की भावनाओं व ज़रूरतों की समझ) बेहतर होती है, वे सेक्स में उतनी ही अच्छी पार्टनर साबित होती हैं.

अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं को सेक्स के लिए उत्तेजित होने में कम से कम 20 मिनट का समय लगता है, परंतु शोध से पता चला है कि किसी पुरुष की कल्पना और फोरप्ले से उत्तेजित होने में उन्हें मात्र 10 मिनट लगता है.

पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही एक दिन में कई बार ऑगैऱ्ज्म का अनुभव कर सकते हैं.

अगर किसी महिला में सेक्स उत्तेजना उत्पन्न नहीं होती, तो एक बार ङ्गबर्थ कंट्रोल पिल्सफ को बदलकर देखें, क्योंकि कई बार अलगअलग पिल्स में पाए जानेवाले हार्मोंस सेक्स की उत्तेजना को प्रभावित करते हैं. इन्हें बदलने से समस्या हल हो सकती है.

कई बार सीमेन (वीर्य) से ब्लीच जैसी गंध आती है. इससे कोई हानि नहीं है. यह प्राकृतिक डिसइं़फेक्टेंट होता है एवं स्पर्म्स को योनि में पाए जानेवाले एसिड के बुरे प्रभाव से बचाता है.

एंकलबोन के नीचे एड़ी में सर्कुलर मसाज करने से सेक्सुअल उत्तेजना बढ़ती है.

पुरुष रात्रि की नींद के दौरान औसतन 4 या 5 बार इरेक्शन अनुभव करते हैं.

रिसर्च द्वारा पता चला है कि जो लड़कियां साइकिल रेस में हिस्सा लेती हैं या हर हफ़्ते 100 मील साइकिल चलाती हैं, उनकी बाह्य जननेंद्रियों का सेंसेशन कम हो जाता है.

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पेनिस की लंबाई का ऑर्गैज़्म से कोई संबंध नहीं होता, क्योंकि योनि का केवल 1/3 भाग ही संवेदनशील होता है. अगर सेक्स पोज़ीशन सही हो, तो छोटा पेनिस भी ऑर्गैज़्म दे सकता है.

जर्मन शोधकर्ताओं के अनुसार, सुरक्षित रिलेशनशिप में महिलाओं की सेक्सुअल इच्छा कम हो जाती है. 4-5 साल साथसाथ रहने के बाद महिलाएं पुरुषों की इच्छानुसार सेक्स करती हैं.

ऐसे पुरुष, जिनके अनेक स्रियों से संबंध होते हैं, वे सेक्स को बहुत महत्वपूर्ण तो समझते हैं, परंतु अपने रिलेशनशिप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते.

एक सर्वे के अनुसार, सेक्स के लिए कपल्स की सबसे पसंदीदा जगह बेडरूम के अलावा कार होती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रॉम्प में हुए रिसर्च के अनुसार, नीली आंखोंवाले पुरुष अक्सर नीली आंखोंवाली स्री को ही पसंद करतेे हैं. यदि उनका बच्चा भूरी आंखोंवाला हुआ, तो वे सोचते हैं कि उनकी पत्नी ने उनके साथ धोखा किया है. वैसे आनुवांशिकता का नियम भी यही कहता है.

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महिलाएं पीरियड्स के दौरान या उसके ठीक पहले ज़्यादा सुखद ऑर्गैज़्म का अनुभव करती हैं. ऐसा उनके पेल्विक एरिया में रक्तसंचार के बढ़ने के कारण होता है.

सेक्स के दौरान पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज़्यादा कल्पनाशील हो जाती हैं. इस तरह की सेक्सुअल फेंटेसी से उन्हें संतुष्टि तो मिलती ही है, आपसी संबंध भी मज़बूत होते हैं.

जो पुरुष ज़्यादातर सेक्सुअल फेंटेसी में रहते हैं, वे अपने रोमांटिक रिलेशनशिप से कम संतुष्ट रहते हैं.

कई पुरुषों में स्खलन (इजाक्युलेशन) के बाद भी पेनिस में इरेक्शन रहता है, जो बहुत दर्दनाक होता है. इसे प्रीएटिसिज़्म कहते हैं.

एक रिसर्च के अनुसार, कॉलेज के दौरान जो लड़के सेक्स में लिप्त रहते हैं, वे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं, जबकि सेक्स न करनेवाले विद्यार्थी नॉर्मल रहते हैं.

 कुछ महिलाओं को सीमेन (वीर्य) से एलर्जी होती है. सीमेन में मौजूद प्रोटीन के कारण उनके जननांग एवंं शरीर के अन्य हिस्सों पर जलन व खुजली की समस्या हो जाती है.

अध्ययन बताते हैं कि सेक्स से सिरदर्द व जा़ेडों का दर्द दूर होता है. वास्तव में ऑर्गैज़्म के तुरंत बाद ऑक्सीटोसिन हार्मोन का लेवल 5 गुना बढ़ जाता है, जिससे एंडॉरफिन हार्मोन का स्राव होता है. यह दर्द को दूर भगाता है.

सामान्यतः ऐसा समझा जाता है कि प्रेग्नेंसी से सेक्स की इच्छा मर जाती है, परंतु ऐसा नहीं है. गर्भावस्था के दौरान ज़्यादातर महिलाओं की सेक्स की इच्छा या तो बढ़ जाती है या पहले जैसी ही होती है.

रिसर्च के अनुसार, सिगरेट नहीं पीनेवालों की सेक्स की इच्छा, आनंद व संतुष्टि सिगरेट पीनेवालों की अपेक्षा ज़्यादा होती है.

जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च के अनुसार, कपल्स सामान्य तौर पर फोरप्ले में 11 से 13 मिनट लगाते हैं.

एक सर्वे के अनुसार, हफ़्ते में 3 या 4 बार सेक्स करने की इच्छा रखनेवाले पुरुषों व महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.

जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.

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शादीशुदा से प्यार अब परहेज़ नहीं (Having An Affair With Married Man?)

Having An Affair With Married Man
बदलते ज़माने के दौर में बहुत कुछ बदला है. पर सबसे अधिक जीने के नज़रिए में बदलाव आया है. एक व़क़्त था, जब शादीशुदा के प्यार के बारे में ख़्याल को भी ग़लत माना जाता था, पर अब ऐसा नहीं रहा. आइए, इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालें.

Having An Affair With Married Man

  • एक का हो गया, वह दूसरे का नहीं हो सकता. एक ज़माने में लोग ऐसा ही सोचते थे. इसीलिए एकदो दशक पहले तक ऐसी घटनाएं कम ही देखने को मिलती थीं कि किसी लड़की को शादीशुदा पुरुष से प्यार हो जाए. उस ज़माने में लड़कियों के बुनियादी स्त्रियोचित गुणों में सौतिया डाह का स्थान सर्वोपरि था. यह कल्पना करना मुश्किल था कि अविवाहित लड़की किसी अन्य स्त्री के पति के साथ प्यार की पींगे बढ़ा सकती है.
  • लेकिन स्त्री और पुरुष की इस बनावट और उनके संबंधों की बुनावट में पिछले कुछ अरसे से काफ़ी बदलाव आया है. आज लड़कियां न केवल शादीशुदा पुरुष को प्यार के क़ाबिल समझ रही हैं, बल्कि समाज भी ऐसे संबंधों पर ऐतराज़ करता नज़र नहीं आ रहा. समाज और जीवन के ये फ़लस़फे यूं ही नहीं बदल गए. इनके लिए देशदुनिया में हो रहे तमाम परिवर्तन ज़िम्मेदार हैं.

लड़कियों का कामकाजी होनाः शादीशुदा पुरुष के प्रति लड़की के झुकाव, लगाव और प्यार की सबसे बड़ी वजह आज के ज़माने में लड़कियों का कामकाजी होना है. किसी ऑफ़िस में काम करती लड़की सुबह 10 से शाम 5 बजे तक का समय अपने पुरुष सहकर्मी के साथ बिताती है. लंबे समय तक साथ काम करना, चाय पीना, लंच करना, हंसीमज़ाक जैसी रोज़मर्रा की घटनाएं चाहेअनचाहे दिलों को क़रीब लाती हैं. काम के दौरान एकदूसरे का सहयोग करने, सीखनेसिखाने, सुखदुख बांटने का सिलसिला कब प्यार में तब्दील हो जाता है, पता ही नहीं चलता. इसके अलावा करियर की सीढ़ियां चढ़ने की चाहत भी प्यार का चोला पहनकर आती है.

सीरियल, हॉलीवुड व बॉलीवुड का असरः भारतीय महिलाओं की मनःस्थिति में आए इस बदलाव में धारावाहिकों की भी ख़ास भूमिका रही है. आजकल हर धारावाहिक में मसाला डालने के लिए जो तानेबाने बुने जाते हैं, उनमें विवाहित पुरुषों से रिश्ते बनानेवाली नायिकाओं ने आम युवतियों को भी प्रेरित किया है. आज लड़कियां शादी से पहले अथवा शादी के बाद भी अपनी मर्ज़ी से ऐसा कोई क़दम उठाने में नहीं झिझक रही हैं.

भारतीय महिलाओं के मन को इस रूप में ढालने में दूसरी सबसे अहम् भूमिका बॉलीवुड और हॉलीवुड के सितारों की भी रही है. नायकनायिकाओं को अपनी पसंद की ज़िंदगी जीने और अपनी पसंद की स्त्री/पुरुष को चुनने की आज़ादी ने धारावाहिकों में चल रही काल्पनिक कहानियों पर सच्चाई की मुहर लगा दी है. बदलाव आपके सामने है. आज से दो दशक पहले कोई युवती शादीशुदा पुरुष के साथ संबंध बनाकर अपने घर तो क्या, दूर किसी शहर में भी रहने की नहीं सोच सकती थी जबकि आज ऐसे रिश्ते के बावजूद लड़कियां अपने परिवार में ही रह रही हैं और कहीं से भी विरोध के स्वर उठते नहीं दिखते.

ग्लोबलाइज़ेशन व सूचना क्रांतिः सूचना क्रांति और वैश्‍वीकरण ने सारी दुनिया को एक गांव की शक्ल दे डाली है. दुनिया की सारी संस्कृतियां एकदूसरे को काफ़ी नज़दीक से देख रही हैं. टीवी चैनलों पर दूरदराज़ की ख़बरें पलभर में हर जगह पहुंच जाती हैं. ऐसे में पश्‍चिमी सभ्यता के खुलेपन का असर भारतीय समाज पर भी पड़ा है और भारतीय युवाओं और युवतियों के मन में भी खुली हवा में सांस लेने की चाहत जागी है. वह अपनी पसंद के पुरुष के साथ जीवन जीना चाहती है. वह पुरुष अविवाहित है या विवाहित, इससे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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Having An Affair With Married Man
बड़े धोखे हैं इस राह में

नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत जयचंद विवाहित है. उसकी पत्नी और बच्चे गांव में हैं. वह और उसके साथ काम करनेवाली वर्षा एक ही बिल्डिंग में रहते हैं. एक ही ऑफ़िस में साथसाथ काम करते हुए और एक ही बिल्डिंग में रहते हुए वर्षा न जाने कब जयचंद के मोहपाश में बंधकर उससे प्रेम करने लगी, वह जयचंद को अपना सर्वस्व मानने लगी. लेकिन क्या ऐसा जयचंद के साथ भी है? क्या वह भी वर्षा को उसी शिद्दत के साथ चाहता है? नहीं! वर्षा अब यह अच्छी तरह जान चुकी है. जिस प्रेम ने उसके अंदर कभी उमंगें भरी थीं, वह अब एक बोझ बनकर रह गया है. वर्षा इस असहनीय स्थिति से छुटकारा पाना तो चाहती है, लेकिन जयचंद से अलग होकर जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. इसलिए इस कशमकश भरे रिश्ते को प्यार के नाम पर निभाए जा रही है.

यह मात्र एक वर्षा और जयचंद की कहानी नहीं है. ऐसी न जाने कितनी वर्षाएं अपने प्यार से न जाने कितने जयचंदों की दुनिया हरीभरी कर रही हैं. लेकिन क्या उनकी अपनी दुनिया हरीभरी है, वे ख़ुद भी आश्‍वस्त होकर नहीं कह सकती हैं.

ज़ाहिर है, शादीशुदा पुरुष से प्यार की राह पर ख़तरे तो हर क़दम पर हैं, लेकिन ज़िंदगी की अजीब दास्तां का क्या ठिकाना? वह ऐसे मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां कोई ऐसा मिल जाए, जो हो तो चुका हो किसी और का, पर बना आपके लिए है. ऐसे में क्या करेंगी आप? क्या ज़िंदगी जीने के लिए कभीकभी ख़तरों से नहीं खेलना पड़ता?

भ्रमित जीवन की शिकार

दरअसल अविवाहित लड़कियां अपने प्यार को चाहे जितना सच्चा मानें, ख़ुद को चाहे जितना स्मार्ट समझें, शादीशुदा पुरुष की निगाह में वे बस इच्छाओं की पूर्ति का एक साधन होती हैं. अपनी समझ से जब वे प्यार कर रही होती हैं, तब वस्तुतः वे शिकार बन रही होती हैं. इसके कई कारण हैं

कम उम्र वाली लड़कियों की चाहत होती है कि पुरुष उन पर ध्यान दें, उनके काम की प्रशंसा करें, उनकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ करें. शादीशुदा पुरुष की अनुभवी आंखें उनकी इन चाहतों को बख़ूबी भांप जाती हैं. मन में तरहतरह के मंसूबे बांधे हुए पुरुष बाहरी तौर पर तो अच्छा बनते हुए व मदद करते हुए बड़े सहज भाव से लड़की की इच्छाएं पूरी करता है, पर साथ ही प्यार के नाम पर इसकी क़ीमत भी वसूलता जाता है.

स्त्री पुरुष से अपना पूरा वजूद, सारी भावनाएं जोड़ लेती है, लेकिन पुरुष इसका बस दिखावा करता है. स्त्री के दिल व भावनाओं से खेलते हुए पुरुष की असल ज़रूरत महज जिस्मानी होती है. स्त्री को इसका पता तब चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है. उसके सारे सपने चूरचूर हो जाते हैं और वह डिप्रेशन से घिर जाती है.

अपने प्रेम या यूं कहें कि प्रेमी की ख़ातिर स्त्री को जितना सहना पड़ता है, उसके मुक़ाबले शादीशुदा पुरुष को कोई त्याग नहीं करना पड़ता. प्रेम का खुलासा होने पर लड़की को परिवार, पैरेंट्स की नाराज़गी के साथ समाज की तोहमत और बदनामी भी झेलनी पड़ती है, जिससे आगे चलकर शादी में अड़चनें भी आती हैं. इतना सब कुछ झेलने के बाद आख़िर स्त्री को मिलता क्या है? दोहरी ज़िंदगी जीनेवाले फरेबी पुरुष का दिखावटी और झूठा प्रेम. ऐसा प्रेम जो दूर से तो नज़र आता है, लेकिन नज़दीक जाने पर मृगमरीचिका साबित होता है.

इंडियन साइको सोशल फ़ाउंडेशन की सायकोलॉजिस्ट डॉ. समीक्षा कौर शादीशुदा पुरुषों से बढ़ते प्यार के लिए करियर को लेकर आई जागरूकता और इसके कारण शादी में देर, दहेज व वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भागने की प्रवृत्ति को मानती हैं. वे इसे परिस्थितिवश हुआ समझौता करार देती हैं और कहती हैं, ”जहां तक पुरुषों की बात है, तो पार्टनर से विचारों में तालमेल का अभाव, पत्नी का गैरज़िम्मेदाराना रवैया जैसी चीज़ें उन्हें दूसरी स्त्री, ख़ासकर अपनी कलीग की ओर खींचते है. वहीं युवतियों में करियर को लेकर आई जागरूकता व वैवाहिक जीवन के झंझटों से दूर स्वच्छंद जीवन जीने की चाह ने ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं. करियर की भागमभाग में युवतियों को मानसिक, शारीरिक तृप्ति के लिए सुरक्षित बांहों की तलाश होती है, जहां उनकी महत्वाकांक्षाएं प्रभावित न होती हों. ऐसे में उन्हें साथ में काम करनेवाले विवाहित पुरुष ज़्यादा उपयुक्त दिखते हैं.”

डॉ. कौर ऐसे संबंधों में ठगे जाने की बात को भी स्वीकारती हैं. ”स्त्री पहले प्यार करती है और बाद में शारीरिक संबंधों के लिए तैयार होती है, जबकि पुरुष पहले शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में वह भावनात्मक रूप से जुड़ भी सकता है, नहीं भी. ऐसी युवतियां ऐसे क़दम उठा तो लेती हैं, लेकिन उनकी सुख की तलाश ख़त्म नहीं होती, क्योंकि उनकी कल्पना में जो प्रेम होता है, वह दूसरी स्त्री के रूप में कभी हासिल नहीं होता. उन्हें सौतिया डाह तो नहीं होता, मगर अपने साथी की पत्नी को नीचा दिखाने की चाह ज़रूर होती है. ऐसे संबंधों को अब मौन सामाजिक स्वीकृति भी मिल चुकी है. अभिभावक तो नहीं, पर भाईबहन ऐसी बातें आपस में शेयर कर ही लेते हैं. कुछ मामलों में मांबाप भी इन संबंधों को स्वीकार कर लेते हैं.”

संजय श्रीवास्तव

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पहला अफेयर: वो मेरी तक़दीर बन गया… (Pahla Affair: Wo Meri Taqdeer Ban Gaya)

Wo Meri Taqdeer Ban Gaya

Wo Meri Taqdeer Ban Gaya

पहला अफेयर: वो मेरी तक़दीर बन गया… (Pahla Affair: Wo Meri Taqdeer Ban Gaya)

वो मेरी तक़दीर बन गया…
बरसात में हम पानी बनकर बह जाएंगे
पतझड़ में फूल बनकर झर जाएंगे
क्या हुआ आज तुम्हें इतना तंग करते हैं
एक दिन बिना बताए इस दुनिया से चले जाएंगे.

उसने तो शायरी की चंद पंक्तियां सुनाकर सबकी वाहवाही लूट ली. लेकिन मेरा दिल उन ल़फ़्ज़ों की आंच से धीमे-धीमे पिघलने लगा. कई दिनों से वह मेरा पीछा कर रहा था. वह मुझे अपनी हरकतों से इस अंदाज़ से छेड़ता कि मैं चाहकर भी कुछ न कह पाती. मन ही मन उसकी अदाएं, बदमाशियां और उसका इस तरह से मुझे छेड़ना अच्छा भी लगता, लेकिन मैं यह बात उस पर ज़ाहिर न होने देती. एक दिन वह अचानक मेरे सामने आ खड़ा हुआ और कहने लगा, “आख़िर आप मुझसे बात क्यों नहीं करना चाहती हैं? मैं एक शरीफ़ और अच्छे घर का लड़का हूं. आपको पसंद करता हूं, इसलिए आपसे दोस्ती करना चाहता हूं.”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और पलटकर चल दी. कई दिनों तक वो कोशिश करता रहा कि मैं एक बार नज़र उठाकर उसकी तरफ़ देख लूं. मन तो मेरा भी चाहता था कि सबकी नज़रें चुराकर उसकी एक झलक देख लूं, लेकिन एक अनजाना डर हमेशा मुझे इस बात से रोक देता था.

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मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करती थी और नहीं चाहती थी कि मेरा कोई भी ग़लत क़दम मुझे उनसे अलग कर दे. हालांकि उसकी लगातार मेरे क़रीब आने और बात करने की कोशिशों से मेरा दिल विद्रोही हो उठा था और बगावत करने पर उतारू हो गया था. लेकिन मैं तो जैसे दिल की बात सुनने को तैयार ही नहीं थी. मैं प्यार के चक्कर में पड़ना नहीं चाहती थी. इतना तो मैं जानती थी कि ख़ुशनसीब होते हैं वो लोग, जिनका प्यार सही अंजाम तक पहुंचता है. मैं प्यार का दर्द लेकर जीना नहीं चाहती थी. इसलिए मैंने उससे दूर रहना ही ठीक समझा.

एक दिन पापा ने मुझसे कहा, “बेटे आज एक पार्टी में जाना है, जहां लड़केवाले आएंगे. मैं चाहता हूं तुम उन लोगों से मिलो. लड़के से भी बात करके देख लो. हमें जल्दी ही तुम्हारी शादी का फैसला लेना है.” मैंने भी पापा की बात को सहमति देते हुए कहा, “पापा, जैसा आप ठीक समझें. मुझे पता है, आपका फैसला ग़लत नहीं होगा.”

जब हम पार्टी में पहुंचे तो मैं सबसे औपचारिक बातें करने में मशग़ूल थी कि माइक पर आवाज़ गूंजी,
अजनबी लोग भी देने लगे इल्ज़ाम मुझे
कहां ले जाएगी तेरी पहचान मुझे
भुलाना चाहूं तो भुलाऊं कैसे,
लोग ले ले के बुलाते हैं तेरा नाम मुझे.

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जो चेहरा मेरे सामने आया, वो उसका ही था. मैं मुड़कर जाने ही लगी कि पापा बोले, “बेटे, यही मधुर है, जिसे हमने तेरे लिए चुना है. अब फैसला तुझे करना है.” मेरी आंखें छलक पड़ीं. जब पलकें उठाकर उसे मुस्कुराते देखा तो मैं रोते-रोते मुस्कुरा उठी और अपनी क़िस्मत पर इतराने लगी-

जिस प्यार को मैं ठुकरा रही थी
वही मेरी क़िस्मत बन गया
जिसे ज़ुबां पर लाना मुश्किल था
वो नाम मेरे माथे का सिंदूर
मेरी तक़दीर बन गया…

– वीना साधवानी

हर कपल को जानने चाहिए सेक्स से जुड़े ये 10 सवाल-जवाब (10 Sex Q&A’s Every Couple Must Know)

Sex Q 7 A, Every Couple Must Know

कहने को तो हर कोई सेक्स के ख़ूबसूरत एहसास में हर समय डूबा रहना चाहता है, लेकिन जिस तरह हर चीज़ के नियम बनाए गए हैं, उसी तरह सेक्स को लेकर भी कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं. सेक्स किस समय करना चाहिए, किस स्थिति में करना चाहिए और किस दिन करना चाहिए आदि को ध्यान में रख कर जो सेक्स करता है वह चरम आनंद प्राप्त करता है और उसकी सेहत अच्छी बनी रहती है. सेक्स जहां हर इंसान की एक ज़रूरत है, वहीं एक सुंदर एहसास भी है और उसे अच्छी भावना के साथ करना भी ज़रूरी है. आनंददायक सेक्स के लिए सेक्स के प्रति समर्पण के साथ-साथ आपके साथी का सहयोग और सहमति भी ज़रूरी है. अगर वह अनिच्छा दिखाए तो उस दिन सेक्स न करें. याद रखें, सेक्स का मतलब आपसी प्यार दर्शाना होता है, न कि ज़बर्दस्ती करना.

1. किन परिस्थितियों में सेक्स करने से बचना चाहिए और क्यों?

बहुत से दंपत्ति इन बातों को प्रायः नहीं जानते कि कब सेक्स किया जाए और कब नहीं. कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जब सेक्स से परहेज़ करना ज़रूरी हो जाता है. अगर ऐसे में सेक्स किया जाता है तो सेक्स का पूरा सुख नहीं मिलता, साथ ही स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है. अत: जहां तक संभव हो, शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता की स्थिति में सेक्स करने से बचना चाहिए-

2. शारीरिक तकलीफ़, विशेषकर दिल के दौरे के बाद सेक्स करना क्यों वर्जित है?

जब आपको या आपके साथी को कोई भी शारीरिक या मानसिक तकलीफ़ या परेशानी हो तो उस दौरान सेक्स न करें, विशेषकर तब जब डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह दी हो. दिल के दौरे जैसी किसी भी तकलीफ़ के समय जब सचमुच आराम की ज़रूरत होती है, ऐसे में कोई भी सेक्स क्रिया दिल पर दबाव डालकर आपको परेशानी में डाल सकती है.

3. मानसिक बीमारी की स्थिति में सेक्स क्यों नहीं करना चाहिए?

सेक्स न सिर्फ शरीर का, बल्कि मन का भी मिलन है. कोई भी मानसिक रोग आप या आपके साथी के लिए सेक्स का आनंद उठाने में बाधा बन सकता है. आप में से किसी एक को मानसिक रोग- डिप्रेशन, तनाव, नर्वस ब्रेक डाउन जैसी कोई भी शिकायत हो, तो सेक्स की इच्छा ख़ुद-ब-ख़ुद मर जाती है. ऐसे में बोझिल मन से सेक्स करना ठीक नहीं होगा और न ही ऐसे में आप सेक्स का सुख उठा पाएंगे.

4. सर्जरी के कितने दिनों बाद सेक्स करना चाहिए?

किसी भी सर्जरी के बाद यह बेहतर होता है कि आप सेक्स से परहेज़ करें. जब तक डॉक्टर सही तरह से आपका परीक्षण कर आपके पूरी तरह से ठीक होने का आश्‍वासन न दे दे. ताज़ा सर्जरी के बाद सेक्स करने से आपके टांके खुलने या खून बहने से लेकर गंभीर दर्द जैसी कोई भी घटना हो सकती है जो आपको मुसीबत में डाल सकती है.

5. एस टी डी (सेक्सुअल ट्रांसमीटेड डिसीज़) होने की स्थिति में सेक्स करने पर क्या पार्टनर को भी यह रोग हो सकता है?

एस टी डी जैसे किसी भी संसर्गजन्य रोग के होने पर इसे फैलने से रोकने का एकमात्र उपाय है सेक्स को टालना. एचआईवी, एड्स जैसी गंभीर बीमारी भी सेक्स के ज़रिए एक साथी से दूसरे साथी को मिल सकती है. इसलिए ऐसी स्थिति में सेक्स करने से बचें. डॉक्टर तो इस तरह के रोग की आशंका होने पर जब तक सच्चाई की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक शारीरिक संबंधों से दूर रहने की सलाह देते हैं.

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6. कभी-कभी इंटरकोर्स के समय साथी को दर्द की शिकायत होती है ऐसी स्थिति में सेक्स से बचना क्यों ज़रूरी है?

जब इंटरकोर्स के समय साथी (पत्नी) को दर्द महसूस हो रहा हो तो समझ लीजिए कि ये खतरे की घंटी है. ऐसे में सेक्स करने से बचें. अगर दर्द लगातार हो तो तुरंत पत्नी के साथ अपने डॉक्टर से संपर्क करें. दर्द भरा सेक्स शारीरिक तकलीफ़ के साथ-साथ मानसिक तकलीफ़ में भी डाल सकता है. आपके लिए यही सही होगा कि आप अपने साथी के दर्द का ख़याल रखें और दर्द के बग़ैर सेक्स का आनंद उठाएं.

7. कुछ लोगों का कहना है कि गर्भावस्था में सेक्स नहीं करना चाहिए, जबकि कुछ लोगों की मान्यता है कि गर्भावस्था में सेक्स किया जा सकता है. वास्तविकता क्या है?

गर्भावस्था में सेक्स को लेकर अक्सर उलझन रहती है कि गर्भावस्था के दौरान सेक्स किया जाए या नहीं. विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्भावस्था के छठे हफ्ते से लेकर बारहवें हफ्ते तक सेक्स नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस दौरान गर्भपात की संभावना बनी रहती है. यही नहीं, गर्भधारण के आखिरी दो महीनों में भी सेक्स करना ख़तरनाक हो सकता है. गर्भधारण के चौथे और सातवें महीने में ही सेक्स किया जा सकता है.

8. ऐसा कहा जाता है कि सेक्स करने से पति-पत्नी के आपसी झगड़े सुलझ जाते हैं, लेकिन जब मानसिक स्थिति ठीक न हो तो क्या सेक्स का आनंद उठाया जा सकता है?

अधिकतर लोग समझते हैं कि सेक्स पति-पत्नी के आपसी झगड़ों को निपटाने का एक कारगर तरीक़ा है. तुरंत सेक्स कर लेने से आपसी टकराहट दूर हो जाती है लेकिन यह सही नहीं है, क्योंकि सेक्स के लिए तन और मन का एक होना ज़रूरी है. ऐसी किसी भी टकराहट की स्थिति में सेक्स न करें. अगर मन में कड़ुवाहट हो और तन से आप सेक्स कर रहे हों तो यह सिर्फ एक काम होगा, जिसे जबरन निपटाया जाएगा. इसमें कोई भावना नहीं होगी तो चरम आनंद कैसे प्राप्त होगा. याद रखें, सेक्स के लिए आपको शरीर और मन से एक होना पड़ेगा तभी आप सही अर्थों में सेक्स का आनंद उठा पाएंगे.

9. क्या पुरुषों की तरह महिलाएं सेक्स के बारे में कभी नहीं सोचतीं?

हम ये कह सकते हैं कि पुरुषों के मुक़ाबले महिलाएं सेक्स के बारे में कम सोचती हैं, मगर ये कतई नहीं कह सकते कि महिलाएं सेक्स के विषय में सोचती ही नहीं हैं. रिसर्च की मानें तो न स़िर्फ पुरुष, बल्कि महिलाएं भी सेक्स के बारे में सोचती हैं, लेकिन ऐसा उस वक़्त होता है, जब वो हार्मोनल बदलाव के दौर से गुज़रती हैं.

10. अगर पहली बार आप सेक्स में असफल हो जाते हैं, तो क्या इसका मतलब आपमें कमी है?

ये एक ग़लत धारणा है. जिस तरह हर चीज़ की प्रैक्टिस ज़रूरी होती है, उसी तरह बेहतर सेक्स का आनंद भी कई बार प्रैक्टिस करने के बाद मिलता है. हो सकता है, शुरुआती दौर में आप सेक्स को उस तरह एंजॉय न कर पाएं, जिस तरह कई बार प्रैक्टिस के बाद.

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