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पहला अफेयर: इंतज़ार (Pahla Affair: Intezar)

First Love Story

पहला अफेयर: इंतज़ार (Pahla Affair: Intezar)

मैंने पूछा ऊपरवाले से, क्यों करवाता है तू अपने बंदों से प्यार? जब सारी उम्र उनकी क़िस्मत में दे देता है इंतज़ार… आख़िर ऐसा क्यों होता है, मुहब्बत करनेवालों के साथ?

ये चंद पंक्तियां ही लिखी थीं कि उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा मेरे सामने आ गया, जिसने मेरी रूह को छू लिया था. वो भी इस कदर कि वो तो मुझसे दूर चली गई, लेकिन अपने प्यार से मेरी रूह को महका गई. जब भी सांस लेता हूं, उसकी आंखें, उसकी यादें, उसकी बातें ख़ुशबू बनकर बिखर जाती हैं, हर लम्हा मुहब्बत मेरी निखर जाती है.

हां, उसके दूर जाने के बाद इस दिल में कोई भी समा न पाया. हर पल संग मेरे चलता है उसकी यादों का साया. सुनहरी रात के वो चंद पल मेरे जीवन की सबसे अनमोल पूंजी हैं, जिन्हें मैंने संभालकर रखा है अपने दिल में.

बात उन दिनों की है, जब मेरी कविताएं और रचनाएं लोगों को अपनी-सी लगने लगी थीं और कुछ लोग तो अपनी चाहतों की दास्तान मुझसे साझा करने लगे थे और उनके प्यार की कहानियां सुनकर मैं फिर से कुछ नया लिखने को प्रेरित होता था.

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ऐसे ही एक दिन लिखने बैठा ही था कि मोबाइल की रिंग बजी, जैसे ही आवाज़ सुनी, दिल में अजीब-सी हलचल हुई और कानों में मधुर संगीत घुल गया. मिश्री-सी मीठी आवाज़ ने कहा, “मैं मिस्टर राज से ही बात कर रही हूं ना?” मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरे दिल ने मुझसे ही बगावत कर दी और मैं उसकी तरफ़ खिंचने लगा.

बस, उस दिन के बाद शुरू हुआ बातों का कभी न ख़त्म होनेवाला सिलसिला और पता नहीं कब मेरे जीवन में उसकी मुहब्बत का रंग गहराई से चढ़ गया.

एक दिन अचानक उसने कहा, “मैं तुमसे मिलना चाहती हूं राज.” और वो दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत दिन था, मौसम तो ख़ुशनुमा था ही, पर आसमान ने भी मानो रंग बदल दिया, अचानक प्यार बनके बूंदें बरसाने लगा. काले रंग की साड़ी में वो ऐसे लग रही थी, मानो चांद को काले बादलों ने ओढ़ रखा है, चेहरे पर बूंदों का शृंगार…

आज भी मेरे ज़ेहन में वो तस्वीर ़कैद है, जिसकी मैं पूजा करता हूं और हमेशा करता रहूंगा. तुम्हारे जाने के बाद, इंतज़ार रहता था कि कब तुम्हारा फोन आएगा… पर न जाने क्या हो गया कि न तुम्हारा कोई फोन आया, न ही कोई मैसेज… क्यों तुमने मेरे दिल की मरुभूमि पर मुहब्बत के फूल उगाए?

पर मुझे कोई शिकायत नहीं है, दिल को आज भी तुम्हारा इंतज़ार है और ताउम्र रहेगा. आज सारे लोग मेरी मुहब्बत के पैग़ाम पढ़ते हैं, बस मेरा ही दिल जानता है कि वो किसके लिए तरसता है.

काश! तू भी मेरे लेख या कहानी से जान जाए या कोई पैग़ाम भेज दे, ताकि ये इंतज़ार की घड़ियां थम-सी जाएं और प्यार की बरसात हो जाए.

– वीना साधवानी

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सेक्सुअल समस्या कहीं आपके रिश्ते को प्रभावित तो नहीं कर रही? (Are Sexual Problems Affecting Your Relationship?)

पति-पत्नी का रिश्ता (Relationship) आपसी सामंजस्य, सहयोग और प्यार (Love) का होता है, लेकिन इन सबके बीच इस रिश्ते में सेक्स (Sex) की भी अलग अहमियत होती ही है, क्योंकि सेक्स प्यार के इज़हार का सबसे ख़ूबसूरत ज़रिया माना जाता है. ऐसे में आपसी रिश्ता अच्छा बना रहे, इसके लिए बहुत ज़रूरी है कि आपकी सेक्स लाइफ भी अच्छी हो, वरना रिश्तों में दूरियां पैदा होने में देर नहीं लगती. अक्सर ऐसा होता है कि कभी शर्म, संकोच या फिर डर व झिझक के चलते कपल्स सेक्सुअल क्रिया या उससे जुड़ी समस्याओं (Problems) के बारे में बात नहीं करते, जिससे समस्याएं वहीं की वहीं बनी रहती हैं और रिश्ता प्रभावित होने लगता है. यहां हम ऐसी ही समस्याओं पर बात करेंगे, जो आपके रिश्ते पर असर डाल सकती हैं.

Sexual Problems

प्री-मैच्योर इजैकुलेशन (स्खलन)

काफ़ी पुरुषों में यह समस्या होती है, लेकिन अच्छी ख़बर यह है कि यह इतनी बड़ी समस्या भी नहीं कि ठीक न हो सके. प्री-मैच्योर इजैकुलेशन किसे कहते हैं? क्या आपके पार्टनर को ऑर्गैज़्म तक पहुंचने में एक मिनट से अधिक का समय लगता है या फिर उससे कम? अगर वो एक मिनट से भी कम समय में स्खलित हो जाता है, तो उसे यह समस्या है. ऐसे पुरुष अक्सर सेक्स को लेकर काफ़ी आशंकित रहते हैं. उनका प्रयास रहता है कि वो ऐसी महिला के साथ रिश्ता बनाएं, जिसे सेक्स का अनुभव न हो, ताकि उनकी समस्या के बारे में वो जान न सके. लेकिन कुछ समय बाद ही सही, समस्या तो सामने आ ही जाती है, इसलिए बेहतर होगा कि समस्या को छिपाने की बजाय उसका इलाज करवाया जाए.

पेनफुल सेक्स (सेक्स के दौरान दर्द)

काफ़ी महिलाएं इसे महसूस करती हैं और जब सेक्स एक सुखद अनुभव की बजाय दर्दनाक एहसास बनने लगता है, तो सेक्स से वो कतराने लगती हैं. सेक्स के दौरान दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे- फोरप्ले की कमी, भावनात्मक लगाव की कमी, हार्मोनल बदलाव, मानसिक उलझन, डर, संकोच आदि. कारण जो भी हों, उन्हें नज़रअंदाज़ करना सही नहीं, क्योंकि ये आपके रिश्ते को बुरी तरह प्रभावित करने लगते हैं.

ऑर्गैज़्म का अनुभव न होना

अक्सर महिलाओं को ऑर्गैज़्म का अनुभव नहीं होता. इसकी कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- हार्ड सेक्स, फोरप्ले की कमी, मानसिक रूप से सेक्स के लिए तैयार न होना आदि… पर कभी-कभी बढ़ती उम्र व हार्मोनल बदलाव की वजह से भी ऐसा होता है. ऐसे में सेक्स के प्रति अनिच्छा बढ़ती जाती है और जब आप संतुष्टि व आनंद प्राप्त नहीं करते, तो उसका सीधा असर आपके रिश्ते पर पड़ता है.

सेक्सुअल इच्छा में कमी

पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन की कमी के चलते सेक्सुअल इच्छा की कमी आ जाती है और न स़िर्फ कमी, बल्कि इरेक्शन वगैरह पर भी इसका असर पड़ता है. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव या सेक्स को लेकर बुरा अनुभव उनकी सेक्सुअल डिज़ायर पर असर डालता है. रिश्तों पर इसका सीधा-सीधा असर यह पड़ता है कि आप सेक्स करने से कतराने लगते हैं, ज़ाहिर है कि जब सेक्स लाइफ नहीं होगी, तो रिश्ते पर बुरा असर होगा.

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन

इरेक्शन होने में परेशानी यानी पेनिस का हार्ड न हो पाना, जिससे सेक्सुअल क्रिया नहीं हो पाती, उसे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कहते हैं. कभी दवाओं के साइड इफेक्ट्स की वजह से, कभी मानसिक परेशानी के चलते, तो कभी किन्हीं अन्य वजहों से यह समस्या हो सकती है. इसमें सबसे बड़ी द़िक्क़त यह है कि आसानी से ठीक होने के बावजूद अधिकांश पुरुष अपनी समस्या छुपाते हैं. न वो अपने पार्टनर से, न ही एक्सपर्ट्स से इस बारे में सलाह लेने की पहल करते हैं. इस वजह से रिश्तों पर भी बुरा असर पड़ता है.

सेक्सुअल डिस्फंक्शन

रिसर्च बताते हैं कि 30% पुरुष और 40% महिलाएं सेक्सुअल क्रिया के दौरान सेक्सुअल डिस्फंक्शन का अनुभव करती हैं. सेक्सुअल डिस्फंक्शन का अर्थ है सेक्सुअल क्रिया में सुख या संतुष्टि न मिलना. यह किसी भी स्तर पर हो सकता है, जैसे- उत्तेजना महसूस न होना, सेक्स के लिए तैयार न हो पाना, ऑर्गैज़्म न मिलना, दर्द होना या फिर सेक्स के बाद कोई समस्या होना. सेक्स से जुड़ी कोई भी समस्या इसके अंतर्गत आती है और ये आपके रिश्ते को काफ़ी प्रभावित करती है.

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Relationship Problems
क्या करें?

–     छिपाएं नहीं. समस्या को छिपाना कोई समाधान नहीं है, इससे वो और बढ़ेगी.

–     कम्यूनिकेट करें. अपने पार्टनर से बात करें और अपने डर, झिझक व संकोच के बारे में बताएं.

–     एक्सपर्ट की सलाह लें. यह बेहद ज़रूरी है, क्योंकि ये तमाम समस्याएं इलाज के दायरे में आती हैं. इनका आसानी से इलाज संभव है, पर लोग संकोच के चलते डॉक्टर के पास जाते ही नहीं.

–     अपनी समस्या को स्वीकार करें और उसको सामान्य मानें. अक्सर लोग सेक्स से जुड़ी समस्याओं को सामान्य नहीं मानते. उनको लगता है कि किसी के सामने यह बात आ गई, तो उनकी बेइज़्ज़ती हो जाएगी, इसी चक्कर में वो इलाज भी नहीं करवा पाते.

–     अधिकतर सेक्सुअल समस्याएं वैसे भी मानसिक होती हैं और आसानी से ठीक हो सकती हैं, बेहतर होगा कि उन्हें छुपाएं नहीं. उनके कारणों को जानकर उचित इलाज करवाएं, वरना समय के साथ-साथ आपका रिश्ता प्रभावित होता चला जाएगा.

ईज़ी होम रेमेडीज़

–    तरबूज़ इरेक्शन की समस्या से निजात दिलाता है, क्योंकि इसमें मौजूद सिट्रूलाइन एक तरह का अमीनो एसिड है, जो इरेक्शन को बेहतर बनाता है और पेनिस की तरफ़ ब्लड फ्लो को तेज़ करता है.

–     प्याज़ न स़िर्फ सेक्स की इच्छा जगाता है, बल्कि सेक्सुअल ऑर्गन्स को भी मज़बूती प्रदान करता है.

–     लहसुन का सेवन करें. इसमें कई ऐसे गुण होते हैं, जो न स़िर्फ सेक्स की इच्छा की कमी को दूर करते हैं, बल्कि इरेक्शन की समस्या से भी निजात दिलाते हैं.

–     सेब का सेवन करें. यह सेक्सुअल स्टैमिना को बढ़ाता है.

–     बादाम, अखरोट, पिस्ता, काजू, किशमिश आदि में भी सेक्स बूस्टर तत्व होते हैं. मूंगफली, अखरोट और पिस्ता में मौजूद अमीनो एसिड इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को ठीक करता है.

–     बादाम में ज़िंक, सेलेनियम और विटामिन ई होता है, जो बेहतर सेक्स के लिए ज़रूरी होते हैं. सेलेनियम इंफर्टिलिटी से भी बचाता है और ज़िंक पुरुषों में सेक्स हार्मोंस के निर्माण को बेहतर बनाता है.

–     हरी सब्ज़ियों में सेक्स बूस्टर तत्व भी होते हैं. ये इरेक्शन को लंबे समय तक बनाए रखने में बेहद कारगर हैं, क्योंकि इनमें आर्जिनाइन नामक अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में होता है.

–     तिल में मौजूद ज़िंक सेक्स की इच्छा बढ़ाने में कारगर है.

–     अनार में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो सेक्स ड्राइव को बेहतर बनाता है.

–     गाजर सेक्सुअल एनर्जी के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद है.

–     छुहारा सेक्स के लिए आपको ऊर्जा प्रदान करता है.

–     डार्क चॉकलेट्स भी सेक्स बूस्टर फूड है. इसमें मौजूद कोको में मूड बूस्टिंग हार्मोंस को बढ़ाने की क्षमता होती है.

– विजयलक्ष्मी

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पहला अफेयर: खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… (Pahla Affair: Khila Gulab Ki Tarah Mera Badan)

Pahla Affair

पहला अफेयर: खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… (Pahla Affair: Khila Gulab Ki Tarah Mera Badan)

पहले प्यार (First Love) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

एक अरसे बाद तुम्हें देखा, ज़्यादा नहीं बदले थे तुम… पर हमारा रिश्ता बदल चुका था. वो प्यार का रिश्ता, वो मुहब्बत, वो चाहत अब कहीं मन म दबकर दम तोड़ चुकी थी.

बेइंतहा चाहती थी मैं तुम्हें, पर पता नहीं क्यों तुम पर भरोसा शुरू से ही नहीं था. तुम्हारा वो अजीब-सा व्यवहार… कभी बेहद प्यार और अपनापन, तो कभी अजनबियों सा बर्ताव. हर बार पूछने पर कहते कि एक नई लड़की से दोस्ती हुई है… उसी से बात करता हूं… मैं तुम्हें समझाती कि फ्लर्ट करना एक हद तक ठीक है, लेकिन अगर तुम हमारे रिश्ते को लेकर संजीदा हो, तो यह सब कहां तक जायज़ है और तुम हंसकर कहते, बता तो देता हूं न तुम्हें सबकुछ… ख़ैर इसी तरह से दिन गुज़र रहे थे. पर कुछ समय से महसूस कर रही थी कि तुम कुछ ज़्यादा ही इग्नोर कर रहे थे मुझे. पूछने पर वही टालने वाला अंदाज़… लेकिन मैं अपने रिश्ते को एक नाम देना चाहती थी, पर तुम्हारे साथ कितनी दूर तक जा सकती थी यही सोचकर एक ़फैसला लिया…

“विकास, मुझे नहीं लगता कि तुम मुझे लेकर सीरियस हो. मैं इस रिश्ते को अब और आगे नहीं ले जा सकती…”

“रितिका, मैं टूट जाऊंगा तुम्हारे बिना… ये सब मेरा मस्ती-मज़ाक, इसे इतना सीरियसली क्यों ले रही हो…?”

“मुझे कंमिटमेंट चाहिए, पर मुझे नहीं लगता कि तुम कभी भी ज़िंदगी में एक सच्चे लाइफ पार्टनर बनकर मेरा साथ दे सकोगे. बस, ये आख़िरी मुलाक़ात है हमारी, इसे फाइनल गुड बाय समझो.”

“रितिका, प्यार का रिश्ता इतनी आसानी से स़िर्फ गुड बाय कहने से नहीं टूट जाता. मैं ताउम्र तुमसे प्यार करता रहूंगा और तुम्हारा इंतज़ार भी.”

मैं चली आई थी वहां से. शहर भी छोड़ दिया था. नए शहर में दिन गुज़र रहे थे, पर तुम्हारी यादें पीछा नहीं छोड़ रही थीं. लेकिन व़क्त हर ज़ख़्म को भर देता है और तुम्हारी सोशल साइट्स देखकर कभी लगा भी नहीं कि तुम मुझे मिस करते हो. शायद तुम भी यही चाहते थे.
आज फिर उसी शहर में पूरे 3 साल बाद आना हुआ. तुम्हें पता चला, तो तुमने मिलने की गुज़ारिश की. मैंने भी हां कर दी कि चलो एक दोस्त के नाते ही मिल लेने में हर्ज़ ही क्या है… तुम्हारा घर वैसे भी मेरे होटल रुम के पास ही था.

डोर बेल बजाते हुए हाथ कांप रहे थे. बहुत कुछ चल रहा था मन में. तुमको देखकर सोचा नहीं था धड़कनें इतनी तेज़ हो जाएंगी. क्या मैं अब भी तुम्हें भुला नहीं पाई? क्या अब भी प्यार करती हूं तुमसे? नहीं, मुझे नहीं लगता… पर ये हाल क्यों है फिर दिल का… तुमने वही शर्ट पहनी थी, जो मैंने तुम्हारे बर्थडे पर गिफ्ट की थी.

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“कैसी हो रितु? बहुत क्यूट लग रही हो, हमेशा की तरह…”

“मैं ठीक हूं, तुम कैसे हो?”

“तुम्हारे बिना कैसा हो सकता हूं मैं? एकदम तन्हा और अधूरा हूं. तुम्हारी छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियां हमारे रिश्ते को कहां ले आईं देख रही हो न?”

“मेरी ग़लतफ़हमियां या तुम्हारी आदतें और लापरवाहियां?”

“चलो, मान लिया मैं ही ग़लत था, पर आज भी इन आंखों को तुम्हारा ही इंतज़ार रहता है. मेरी ज़िंदगी में अगर कोई और होता, तो क्यों इस तरह तुम्हारे क़दमों में झुका रहता?”

“तुम्हारी सोशल साइट्स को देखकर तो नहीं लगता कि तुम्हें मेरा इंतज़ार है.”

“रितु, सोशल साइट्स को क्यों तुमने प्यार को परखने का पैमाना मान लिया है. क्या मेरी आंखों में नहीं दिखता तुम्हें?”

“घर काफ़ी अच्छा सजाया है तुमने.”

“तुम्हारे बिना ये घर नहीं स़िर्फ ईंट-पत्थरों का मकान है, रितु मेरी ज़िंदगी में वापस आ जाओ, मेरे इस मकान को घर बना दो प्लीज़…”
यह कहते हुए तुमने मेरा हाथ थाम लिया. तुम्हारी उस छुअन में अजीब-सी कशिश थी. उस गर्माहट में खो सी गई थी मैं. मेरे बदन में सिहरन-सी होने लगी थी. मैंने झटके से हाथ छुड़ा लिया. तुम फिर मेरे क़रीब आए और मुझे गले से लगा लिया. मैं चाहकर भी ख़ुद को तुमसे अलग नहीं कर पाई… तुमने वही मेरा पसंदीदा गाना प्ले कर रखा था… न जाने क्या हुआ, जो तूने छू लिया… खिला गुलाब की तरह मेरा बदन… उस मदहोशी के आलम में किसी भी शिकवे-शिकायत की जगह नहीं थी, बस बेपनाह प्यार था. अब हमें दो से एक होना था. इसी ख़्याल ने मुझे और भी निखार दिया था…

– गीता शर्मा

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पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

Pahla Affair

पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

पहले प्यार (First Love) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

कई बार दिल के डूबने का अंदाज़ भी निराला होता है कि हम परेशानी की वजह ढूंढ़ने में लंबा अरसा लगा देते हैं. आदेश का ख़त हाथ में है और मैं माज़ी के समंदर में गोते लगा रही हूं. पूरे तीन साल तक जिसके नाम की अंगूठी पहने रही, आज हाथ की उंगली पर उसके निशां उसकी बेवफ़ाई की दास्तां कह रहे हैं.

अब तो हाथ की लकीरें भी मुझे मुंह चिढ़ा रही हैं. धीरे-धीरे रंगीन ख़्वाबों की डोर हाथों से छूटने लगी… अब तो आदेश के साथ बंधे रिश्तों में गांठें-सी पड़ गई हैं. ख़त क्या है, सफ़ाई का एक छोटा-सा मज़मून. मैं आवेश में आ ख़त को मुट्ठी में मरोड़ने लगती हूं. बेबस परिंदे से पन्ने, मेरे हाथों में फड़फड़ा रहे हैं. एक झटके में अपने से यूं रिहा करना, मेरे भीतर एक ज्वालामुखी धधक रहा है.

मन में एक युद्ध छिड़ा है. अरे! तेरे पापा इतने भी नासमझ न थे कि दो दिलों की धड़कन न सुन पाएं. बोलो, विजातीय होने से क्या प्यार की पौध नहीं पनपती. सवालों का बवंडर है, जो मेरा चैन छीन रहा है. अतीत से चाहे जितना भागो, लेकिन माज़ी का भूत पीछा कब छोड़ता है. परछाईं-सा संग-संग डोलता है. उसके हर ख़त का इंतज़ार, हर आहट पर चौंक जाना मेरी आदत-सी बन गई. कहीं और गुल सजाना था, तो इस अभागन की पलकों पर सपनों का फरेबी जाल क्यों बिछाया?

अब लग रहा है जैसे आदी शब्दों की भेड़चाल से सभ्यता का दायरा पार कर, मुझसे किनारे का कोई सिरा ढूंढ़ रहा हो. आज मेरे मन को छूकर निकले वो पल रेत से खिसक रहे हैं.

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मैंने फोन पर आदी से मिलने की आख़िरी इल्तिजा की. मैं उसके चेहरे के बदलते रंगों का जायज़ा लेना चाहती थी. साथ ही मन के किसी कोने में भय का भूत कुंडली मारे बैठा था. अगले दिन बाग में हम दोनों मिले. वह हाथ में भुट्टा लेकर मस्त चाल से मेरी ओर मुड़ा. मैं रुंधे गले से केवल इतना कह पाई, “आदेश! ज़रा सोचो, मुझे मझधार में छोड़ तुम किसी का हाथ थाम नई ज़िंदगी बसा लोगे… मेरा क्या…?”

मेरी आवाज़ भर्रा गई. उसके कांधे पर सिर रखकर मैं सिसक पड़ी. मेरी पीठ थपथपाते हुए उसने कहा, “कुछ करता हूं जूही, प्लीज़ रो मत.”
मैं उदास मन से घर लौटी. मां पूछती रह गई. मैं सोचती रही कि निराधार पुरातन संस्कारों तले दबे रहकर अपने प्यार की आहूति क्यों दी जाए?

मेरे घर उसका अक्सर आना-जाना था. मेरे घर में सब राज़ी थे. मेरे पिता तो थे नहीं, मां बेहद कोमल स्वभाव की थीं. मां अक्सर उसका मनपसंद खाना बनाकर उसे चाव से खिलाती थीं, पर सुना था उसके पिता ज़िद्दी स्वभाव के थे.

एक रोज़ चाचा की मौत की ख़बर सुनकर अचानक हमारा गांव जाना हुआ. वापस लौटे, तो ख़त मिला. उसका विवाह हो चुका था. उसके पिता की चाल थी या उसकी भी सहमति… पता नहीं! पर मेरा पहला प्यार अधूरा ही रह गया…

काश! उस पहले प्यार के नक्शे अपने मन की किताब से मिटा पाती… अब मैं हूं, तन्हाई है… वही परछाईं बन मेरे संग-संग डोलती है.

– मीरा हिंगोरानी

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पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

Pahla Affair

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पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

क्यों इस तरह अधूरा छोड़कर चले गए तुम मुझे… मुकम्मल होने को बेक़रार था इस बार मेरा तन-मन, तुम्हारे साथ, तुम्हारी उस छुअन की वो सिहरन… तुम्हारा यूं लगातार मुझे देखते रहना… अपने हाथों से मुझे खाना खिलाना… इतना सारा व़क्त हमने एक साथ गुज़ारा… फिर ये कैसी प्यास जगाकर मुझे तन्हा छोड़ दिया… जानती थी कि तुमको तो लौटना जाना है एक दिन अपने लोगों के बीच… अपनों में… पर मेरा क्या… मुझे अपना बनाकर क्यों बेगानों में यूं छोड़ गए?

तुमने तो कहा था कि इस बार जब मैं आऊंगा, तो तुमको अपने साथ ही लेकर जाऊंगा… फिर क्यों इस तरह बिना हमारी ज़िंदगी का फैसला किए तुम चले गए… कितने दिन बीत गए, न तुमने कोई फोन किया, न तुम्हारी कोई ख़बर आई…

मुझे लगने लगा है अब तो जैसे ये रिश्ता, ये प्यार बस एक फरेब था… तुम्हें जो चाहिए था, वो तुमने पा लिया… अब पीछे मुड़कर देखने के लिए क्या बचा था तुम्हारे लिए… अगर मेरी परवाह होती, तो ज़रूर हमारे प्यार का सिलसिला आगे बढ़ता…

मेरी ज़िंदगी तो रुकी हुई है अब भी उसी मोड़ पर, बस किसी तरह धक्का मारकर चला रही हूं… पर अब जो सच सबके सामने आएगा, उसका सामना मैं कैसे करूंगी… मैं प्रेग्नेंट हो गई हूं… और मेरे बच्चे को कौन अपनाएगा? यही सोच-सोचकर परेशान हूं… स़िर्फ रितिका को इस सच के बारे में पता है…

“हैलो, प्रिया… कैसी हो…?”

“रितिका, मैं कैसी हो सकती हूं तुम ही बताओ… मैं कुछ डिसाइड ही नहीं कर पा रही.”

“तुम इस बच्चे को जन्म देने के बारे में सोच भी कैसे सकती हो, जो इंसान तुमको मंझधार में छोड़कर चला गया, तुम उसके बच्चे को दुनिया में लाने के लिए सबसे दुश्मनी ले लोगी?”

“ये बच्चा स़िर्फ उसका ही नहीं, मेरा भी है… पर शायद तुम सच कह रही हो, बस, कल तक मैं कोई न कोई निर्णय ले लूंगी.”

आज ऑफिस में भी मन नहीं लग रहा… डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लेती हूं, भला मैं उस धोखेबाज़ इंसान के लिए अपनी ज़िंदगी दांव पर क्यों लगाऊं…

“प्रिया… सुनो, हैलो… प्रिया शर्मा!”

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अपना नाम सुनकर मैं चौंक गई, पीछे मुड़कर देखा, तो ये क्या… “विक्रम, तुम आज अचानक यूं? मैं तो समझी थी कि तुम अब तक भूल चुके होगे कि प्रिया नाम की भी कोई लड़की थी तुम्हारी ज़िंदगी में…”

“प्रिया, मुझे पता है, तुम मुझे फरेबी, धोखेबाज़ और न जाने क्या-क्या समझ रही होगी… पर मेरी मजबूरी थी…”

“ऐसी क्या मजबूरी थी विक्रम कि तुम एक फोन या एक मैसेज तक नहीं कर पाए?”

“प्रिया, हम किसी कॉफी शॉप में बैठकर बात करें?”

“बात करने के लिए अब बचा ही क्या है… मुझे डॉक्टर के पास जाना है, जो कहना है, यहीं कहो…”

“ठीक है प्रिया, दरअसल मैं जिस कंपनी में जॉब करता था, वहां बहुत बड़ा फ्रॉड हुआ था, जिन्होंने फ्रॉड किया था, उन्होंने मुझे बुरी तरह फंसा दिया था, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले ही उनकी शिकायत कंपनी के ओनर से की थी. मैं छुट्टी पर था, तो उन्होंने मौक़ा देखकर मुझे ही फंसा दिया और पुलिस में शिकायत तक दर्ज करवा दी.

मेरे घर वापस जाते ही पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार कर लिया और मैं इन सबके बीच तुमसे कोई संपर्क न कर सका…
मेरे दोस्तों ने सच्चाई का पता लगाया और पुलिस की जांच के बाद सारा सच सामने आ गया. मैं अगर मुजरिम हूं, तो बस तुम्हारा… और अब तुम्हारा ये मुजरिम तुम्हारे सामने है, जो सज़ा दोगी, मैं सहने को तैयार हूं.”

मेरी आंखों से आंसू बह निकले… कभी-कभी छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियां बड़े-बड़े रिश्ते तोड़ देती हैं…

“प्रिया, क्या सोच रही हो… और तुम डॉक्टर के पास क्यों जा रही हो? सब ठीक तो है न…?”

“विक्रम, आज तुम अगर नहीं आते, तो मुझसे बहुत बड़ा पाप हो जाता… क्या हम कॉफी शॉप पर चलकर बात करें…”

विक्रम और मैंने कॉफी शॉप में ढेर सारी बातें कीं…

“प्रिया, मैं पापा बननेवाला हूं, इससे बड़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है? चलो, आज ही घरवालों से चलकर बात करते हैं… मेरे घर में सभी तैयार हैं, मैं तुम्हारी लिए ही यहां आया था.”

“विक्रम, अगर तुम सही व़क्त पर न आते, तो मैं ख़ुद को कभी माफ़ नहीं कर पाती…”

“अब तो मैं आ गया न… तुम्हारा मुजरिम… तो जो हो सकता था वो मत सोचो, अब जो ख़ुशियां आनेवाली हैं हमारी ज़िंदगी में उनका स्वागत करो…”

– गीता शर्मा

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5 शिकायतें हर पति-पत्नी एक दूसरे से करते हैं (5 Biggest Complaints Of Married Couples)

5 शिकायतें हर पति-पत्नी एक दूसरे से करते हैं और यही शिकायतें उनके बीच नोकझोंक की वजह भी बनती हैं. वो कौन-सी 5 शिकायते हैं जो हर कपल एक-दूसरे से करता है? आइए, हम आपको बताते हैं.

Complaints Of Married Couples

1) तुम अब पहले जैसे नहीं रहे
शादी के कुछ साल बाद हर शादीशुदा जोड़े की यही शिकायत रहती है. शादी के शुरुआती सालों में तो सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन साल-दो साल में ही मुहब्बत की स्किप्ट कमज़ोर पड़ने लगती है. दूसरे शब्दों में कहें तो तुम्हारे दीदार से सुबह की शुरुआत हो, तुम्हारे पहलू में ही हर शाम ढले के दावे धीरे-धीरे दम तोड़ने लगते हैं. शादी के बाद घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के बोझ तले मुहब्बत अपना असर खोने लगती है और एक-दूसरे में सिर्फ ख़ूबियां ढूढ़ने वाले शख़्स बात-बात पर एक-दूसरे की ख़ामियां गिनाने लगते हैं.

2) तुम अब मुझे पहले जैसा प्यार नहीं करते
शादी के कुछ साल बात पति-पत्नी की एक-दूसरे से शिकायत रहती है कि वो अब अपने पार्टनर को पहले जैसा प्यार नहीं करते. ऐसा क्यों होता है, इसका भी एक वैज्ञानिक कारण है. रॉबर्ट फ्रेयर द्वारा किये गए प्रयोगों के अनुसार, जब किसी को प्यार हो जाता है तो एक ख़ास तरह के न्यूरो कैमिकल फ़िनाइल इथाइल अमीन की वजह से उसे प्रेमी/प्रेमिका में ख़ामियां नज़र आना बंद हो जाता है. लेकिन यह रसायन हमेशा एक ही स्तर पर नहीं रहता. एक-दो बाद साल शरीर में इसका स्तर कम होता जाता है और चार-पांच साल बाद इसका प्रभाव शरीर पर बिल्कुल बंद हो जाता है. अतः इसके उतार-चढ़ाव का प्रभाव प्रेमियों के स्वभाव में भी साफ़ नज़र आता है. यानी जब प्रेम का उफान कम होने लगता है तो एक-दूसरे की ख़ूबियां ख़ामियों में बदलने लग जाती हैं.

3) तुम से कुछ उम्मीद करना ही बेकार है
पति-पत्नी की शिकायतों में से ये भी एक आम शिकायत है. एक-दूसरे पर दोषारोपण की एक ख़ास वजह होती है पति-पत्नी की एक-दूसरे से ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें, जिसमें महिलाएं पुरुषों से कहीं आगे होती हैं. पुरुष पत्नी के साथ वैसा ही व्यवहार करता है, जैसा उसने अपने पिता का मां के प्रति देखा था, लेकिन पत्नी उसे एक अच्छे दोस्त, बहुत प्यार करने वाले प्रेमी, जिम्मेदार पिता के रूप में देखना चाहती है. क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सीमा हिंगोरानी कहती हैं, हमारे पास ऐसे कई केस आते हैं जहां बीवी की शिक़ायत होती है कि पति उसका हाथ नहीं पकड़ते, ऑफ़िस जाते समय उसे किस नहीं करते. जबकि पुरुष की शिकायत होती है कि बीवी ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीदें रखती है. दरअसल, स्त्री-पुरुष के ब्रेन की वायरिंग ही अलग-अलग होती है. पत्नी चाहती है कि पति उसे दिन में 2-3 बार फ़ोन करे, एसएमएस करे, जबकि पति को लगता है कि जब शाम को घर ही जाना है तो फ़ोन या एसएमएस की ज़रूरत क्या है.

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4) तुम्हें तो मुझमें स़िर्फ कमियां नज़र आती हैं
शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी हर बात में एक-दूसरे की कमियां गिनाने लगते हैं. ऐसा वो जानबूझकर या सोच-समझकर नहीं करते, लेकिन फिर भी उनकी शिकायतें बनी रहती हैं. एक ऐड एजेंसी में कार्यरत मेघना पुरी कहती हैं, पुरुष समझते हैं कि पत्नी को हमेशा उनसे शिकायत रहती है, लेकिन इसके पीछे वजह भी तो साफ़ है, क्योंकि तकलीफ़ पत्नियों को ही ज़्यादा होती है. आज ज़्यादातर औरतें घर, ऑफिस, फायनांस सारा कुछ एक साथ संभाल रही हैं, इसके बावजूद उनकी स्थिति पहले जैसी, बल्कि पहले से बदतर हो गई है. उनकी एडिशनल ज़िम्मेदारियों को तो पति एक्सेप्ट कर लेते हैं, बाहरी दुनिया में उनसे मॉडर्न अप्रोच भी रखते हैं, लेकिन जहां घर की बात आती है तो उन्हें वैसी ही पारंपरिक पत्नी चाहिए होती हैं जैसी उनकी मां या दादी थीं.

5) तुम मुझे चैन से जीने क्यों नहीं देती?
शादी के बाद लगभग हर पुरुष की ये शिकायत होती है कि उनकी बीवी बात-बात में उन्हें टोकती है, उन्हें आज़ादी से जीने नहीं देती. ऐसे में पुरुष या तो पत्नी से झूठ बोलकर मनमानी कर लेते हैं या फिर ढीठ बन जाते हैं. एक प्राइवेट फ़र्म में कार्यरत प्रणव सिन्हा कहते हैं, जहां तक फ्रीडम की बात है तो मुझे इसमें किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं. मैं प्राची (पत्नी) के पर्सनल मैटर में ख़ुद भी हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन जब वो इतनी स्मोकिंग क्यों करते हो, तुम्हारा यूं रात-रात तक दोस्तों से घिरे रहना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं, तुम्हारे ऑफ़िस की लड़कियां इतनी रात गये फोन क्यों करती हैं, इतना वल्गर एसएमएस किसने भेजा जैसी बेहूदा कम्प्लेंट्स करती है तो मैं चिढ़ जाता हूं. भई मैं क्यों किसी के लिए अपनी ख़ुशी को दांव पर लगाऊं, फिर चाहे वो मेरी पत्नी ही क्यों न हो.

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प्यार जताने या एक-दूसरे पर दोषारोपण करने का सभी कपल्स का तरीक़ा भले ही अलग-अलग हो, लेकिन ये बात तो तय है कि जब भी पार्टनर से ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद की जाती है तब रिश्ते में कड़ुवाहट का सिलसिला भी शुरू हो जाता है. प्यार के इतिहास, भूगोल पर टीका-टिप्पणी किये बिना यदि प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो की तर्ज़ पर स़िर्फ महसूस किया जाए या निभाया जाए तो शायद हम प्यार के इस ख़ूबसूरत रिश्ते का उम्रभर लुत्फ़ उठा सकते हैं.

प्यार में आसक्ति ज़रूरी है 
रटगर्स यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता और ‘व्हाई वी लव’ किताब की लेखिका हेलन फिशर के अनुसार, प्यार हमारे पास तीन रूपों में आता है. पहला वासना, दूसरा चाहत और तीसरा आसक्ति. वासना और चाहत तो समय के साथ ख़त्म होने लगते हैं, लेकिन यही चाहत यदि आसक्ति में बदल जाए तो फिर यह बंधन ज़िंदगीभर का साथ बन जाता है.

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सीखें प्यार निभाने के 5 असरदार तरी़के
1) ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षाओं से बचें.
2) प्यार करें, अधिकार जताएं, पर हुकूमत न करें.
3) पति-पत्नी के परंपरागत फ्रेम से बाहर निकलकर अच्छे दोस्त बनें.
4) पज़ेसिव होने से बचें.
5) क़रीब रहें, पर इतना भी नहीं कि सांस लेना मुश्क़िल लगने लगे. रिश्तों के स्पेस को समझें.

– कमला बडोनी

ये प्यार इतना कॉम्प्लिकेटेड क्यों है? जानने के लिए देखें वीडियो:

पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

उस चेहरे को देखने के बाद गौतम को कभी किसी और चेहरे को देखने की चाह नहीं हुई… उसे पहली बार देखते ही गौतम का मन उसकी ओर जाने लगा था. उसने कभी सोचा भी नहीं था कि कभी कोई पलभर में ही इस तरह अपना हो जाएगा… उसके जीवन की वो सबसे सुहानी और सबसे ख़ूबसूरत सुबह थी… जब वो लड़की अपने कमरे की खिड़की के पास हर बात से बेपरवाह होकर अपनी घनेरी ज़ुल्फ़ों को सुलझाने में व्यस्त थी. उस समय सुबह की शीतल हवा के चंचल झोंके उसके ख़ूबसूरत बालों की महकती ख़ुशबू चुराने की चाह में उन्हें और भी बेतरतीब किए जा रहे थे… उसके भीगे सौंदर्य की लावण्यता और भी निखार पर थी.

फिर अचानक ही गौतम को अपनी ओर देखता पाकर उसकी भृकुटि कुछ तन-सी गई और फिर न जाने क्या सोचकर एकाएक बड़ी मोहक अदा के साथ उसके मदभरे होंठों की लाली एक दिलकश मुस्कान बनकर उसके लबों कर खिल उठी… उस समय गौतम कुछ और भी संशय में पड़ गया था. उसकी आंखों में एक नकली रोष था और अपने एक ख़ास अंदाज़ में वह उसे निरंतर देखे जा रही थी, फिर पलक झपकते ही अचानक वह गायब हो गई.

अभी एक माह पहले ही हमारे घर के ठीक सामनेवाले मकान में एक परिवार रहने आया है. मां ने बताया था कि वे उनके मायके अंबिकापुर से आए हैं. इस परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें शालिनी नाम की बहुत सुंदर उनकी एक बेटी है, जो यहां के आई.आई.एम. कॉलेज में पढ़ रही है. शालिनी की मां के साथ उनका हमेशा एक बहन जैसा अपनापन रहा है और वे दोनों कॉलेज के ज़माने से एक-दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त व सहपाठी रही हैं.

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आज सुबह शालिनी का उसे इस तरह देखने का वो रहस्यमय अंदाज़ अब उसकी समझ में आने लगा था और आज सुबह ही अपने ऑफिस जाने के लिए जब वह घर से निकला, तो उसी समय शालिनी भी बड़े बेबाक अंदाज़ में चलते हुए उसके पास आकर रुकी और अपना दायां हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपना परिचय देते हुए कहा, “मैं शालिनी…” तब गौतम ने भी उसके कोमल हाथ को थामकर तुरंत जवाब दिया, “और मैं गौतम…” तब उसका नाम सुनकर उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, मैंने तो सोचा था आपका नाम अक्षय कुमार या रणबीर कपूर होगा…” तब गौतम ने भी जवाब में कहा, “ज़रूर होता, अगर आपका नाम दीपिका पादुकोण या प्रियंका चोपड़ा होता…” इसके पहले कि वो कुछ कहती, गौतम ने घर की ओर इशारा करते हुए कहा, “जाइए, मां घर पर हैं और आपका इंतज़ार कर रही हैं.” अब गौतम की बारी थी उसे हैरान करने की.

आज ही उसे पता चला था कि शालिनी का प्रतिदिन उसके घर में आना-जाना होता है. गौतम की मम्मी के साथ उसका बड़ा गहरा लगाव था. गौतम की मम्मी शालिनी को बेहद प्यार-दुलार करती हैं. गौतम ने जब अपनी भाभी से शालिनी की बात की, तो उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे देवरजी, मम्मी तो उसे अब मेरी देवरानी बनाने जा रही हैं. वो हम सबकी पहली पसंद है.” बस, अब गौतम को कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं थी… इतने में ही शालिनी के खिलखिलाने की आवाज़ उसे अपनी मम्मी के कमरे से आई और वो हंसी सीधे उसके दिल में उतर गई… उसका पहला प्यार हमेशा के लिए उसका होने जा रहा था… गौतम सोचकर मन ही मन मुस्कुरा उठा!

– दिशा राजवानी

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आज फिर वही बारिश है, फिर वही हवाएं, फिर वही मिट्टी की ख़ुशबू… पर एक फ़र्क़ है कि आज तुम नहीं हो… स़िर्फ मैं हूं, मेरी तन्हाई है… आज याद करती हूं तुम्हें, तो बार-बार यही सोचती हूं कि क्यों प्यार करने लगी थी तुमसे… और प्यार करते-करते इतनी गहराई में डूबती गई कि सच्चाई देख भी नहीं पाई… आज भी याद है, वो पहली मुलाक़ात… तुमने निगाहों से छुआ था और मैं सकुचाते हुए निकल गई थी क्लासरूम में. मैं इस कॉलेज में नई आई थी. पापा का ट्रांसफर हो गया था इस दिलवालों की दिल्ली कहे जानेवाले शहर में, जहां मैंने दिल हारा और उसके बाद सब कुछ हार दिया…

कुछ दिनों तक ये नज़रों से बात करने का सिलसिला चलता रहा. फिर एक दिन घर जाते समय मेरी स्कूटी ख़राब हो गई. तुम पीछे से आ रहे थे, मदद की कोशिश की और मैंने मना कर दिया… तुमने कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी, वैसे ये रास्ता है रिस्की…” और तुम आगे बढ़ गए. तुम्हारी इस बात से थोड़ा डर गई थी और मैंने सोचा कहीं ग़लती तो नहीं कर दी तुमसे मदद न लेकर… इतने में ही एक और गाड़ी दिखाई दी, कुछ लड़के बैठे थे, जो मुझ पर फ़ब्तियां कसते हुए जा रहे थे… मैं बुरी तरह घबरा गई थी कि इतने में तुम्हारी बाइक उनकी गाड़ी के पीछे नज़र आई. तुमने गाड़ी रोकी और मैं चुपचाप पीछे बैठ गई.

उस रात मैं सो नहीं पाई. रास्ते में न तुमने कुछ कहा, न मैंने. बस घर जाते समय तुम्हारी उन्हीं गहरी निगाहों में एक बार झांका था, जिनमें मासूमियत, ईमानदारी और मेरी लिए फिक्र झलक रही थी. उसके बाद तो रोज़ का ही यह सिलसिला हो गया था, तुम मुझे घर छोड़ते और मैं रास्तेभर बाइक पर तुमसे लिपटी रहती. देर रात तक हम दोनों एक-दूसरे को मैसेज करते रहते… प्यार में जीने-मरने की क़समें खाते… मुझे अक्सर दूसरों को देखकर लगता था कि कितना बचकाना होता है यह सब, लेकिन जब ख़ुद प्यार के एहसास ने मुझे छुआ, तब जाना कि ये बचकानी बातें कितनी क्यूट लगती हैं.

उस शाम हम समंदर के किनारे बैठे थे. तुमने ढलते सूरज की मदमाती लालिमा में मेरे अधरों पर अपने अधर रख दिए थे. एक नया एहसास था वो… बेहद रूमानी, बेहद हसीन… रातभर उसी एहसास को अपने ख़्यालों में समेटे रही मैं… अब मन में एक और नया ख़्याल जन्म ले रहा था… कब हम ज़माने के सामने एक हो पाएंगे? कब तुम मेरा हाथ थामोगे और मैं तुम्हारी दुल्हन बन तुम्हारी ज़िंदगी में हमेशा के लिए आऊंगी. हमारी परीक्षाएं हुईं. लास्ट ईयर था, तुमने अपने पापा का बिज़नेस भी संभाल लिया था और मैं भी अपने करियर को आकार देने में लगी थी.

फिर एक दिन वो शाम आई, जो ना ही आती तो अच्छा होता. तुम्हारा जन्मदिन था और तुमने कहा कि तुम मेरे साथ अकेले यह ख़ास दिन सेलिब्रेट करना चाहते हो… तुम पर तो ख़ुद से भी ज़्यादा भरोसा था, सो मैं तैयार हो गई. तुम्हारा फार्म हाउस पर शहर से दूर मदमाती शाम को हम दोनों अकेले थे. ज़ाहिर है, प्यार था, तो प्यार से जुड़े सारे आकर्षण भी जवां थे… तुमने मुझे बांहों में लिया और फिर धीरे-धीरे… “ये क्या कर रहे हो राज? ये ग़लत है…”

“सुहानी, इसमें ग़लत क्या है. हम प्यार में हैं और जल्द ही शादी करेंगे.”

“शादी करेंगे, तो शादी तक का इंतज़ार भी तो करना चाहिए न…”

“ये कैसी पिछड़ी हुई बातें कर रही हो सुहानी, प्लीज़ मेरा मूड मत ऑफ करो, कम से कम आज के दिन तो तुम ना नहीं बोल सकती…”

तुम शराब के नशे में थे, उस पर प्यार की ख़ुमारी ने तुम्हारी गुस्ताख़ी बढ़ा दी थी. बहुत मुश्किल हो रहा था तुम्हें रोक पाना… मैंने तुम्हें होश में लाने के लिए एक थप्पड़ जड़ दिया और वहां से किसी तरह चली आई… रोती रही रातभर. फिर यह सोचकर ख़ुद को समझा लिया कि नशा उतरते ही तुम समझ पाओगे…

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सुबह तुम्हें सॉरी का मैसेज किया, तुमने भी बुरा नहीं माना, यह जानकर तुम्हारे प्यार पर और गर्व होने लगा… व़क्त गुज़र रहा था और मैं कई बार तुम्हें कह भी चुकी थी कि घर आकर शादी की बात कर लो… पर न जाने क्यों आजकल मन अनहोनी की आशंका से घबराने लगा था. तुम्हारे मैसेजेस धीरे-धीरे कम होने लगे थे. कभी बिज़ी होने की बात, कभी काम का प्रेशर, कभी बिज़नेस की टेंशन कहकर तुम मुझे टालते रहे और मैं भी ख़ुद को समझाती रही. मुझे लगने लगा था कि तुम्हारी दिलचस्पी मुझमें कम होती जा रही है.

फिर एक दिन तुम्हारा फोन आया, “सॉरी लव, मैं इतना बिज़ी रहता हूं कि तुमसे बात भी नहीं कर पाता, पर बिलीव मी आई लव यूं…”

“मुझे पता है राज, कोई बात नहीं. तुम अपने काम पर ध्यान दो…”

“सुहानी, एक हेल्प चाहिए थी. मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड है, पर मेरा दोस्त उसको चीट कर रहा है. मैंने उसको लाख समझाया, पर वो मान ही नहीं रही.”

“इसमें मैं कैसे हेल्प कर सकती हूं?”

“तुम इतनी ब्यूटीफुल हो, तुम अगर उसके बॉयफ्रेंड से दोस्ती करके उसको अट्रैक्ट करोगी, तो शायद वो समझ जाए.”

“यार तुम कैसी बातें कर रहे हो, तुम अपनी गर्लफ्रेंड से ऐसा काम कैसे करवा सकते हो?”

“सुहानी, तुम भी न, यार सच में अट्रैक्ट

करने को थोड़ी कह रहा हूं, स़िर्फ उस लड़की राधा को समझाने के लिए, ताकि उसके साथ ग़लत न हो…”

“अच्छा ठीक है…” उसके बाद तुमने मुझे समझाया कि कैसे, कब, क्या बात करनी है तुम्हारे दोस्त से और उसका नंबर मुझे दिया. मैंने उससे दोस्ती बढ़ानी शुरू की और बहुत जल्द ही उसकी सच्चाई सबके सामने आ गई. राधा भी जान चुकी थी कि उसका बॉयफ्रेंड ग़लत था.

इस इंसिडेंट के बाद फिर तुम्हारे मैसेजेस कम आने लगे. एक दिन फिर तुम्हारा फोन आया कि राधा मुझसे बात करना चाहती है. मैंने जानना चाहा कि क्यों करना चाहती है, तो तुमने कहा, “तुम्हारी वजह से उसका ब्रेकअप हुआ, तो शायद वो भी बदला ले…” उसके बाद तुम हंसने लगे. राधा का फोन आया और उसने जो कुछ भी कहा, वो सुनकर मेरे होश उड़ गए. “हाय सुहानी, राज से तुम्हारा नंबर लिया, राज बहुत मानते हैं तुम्हें. कहते हैं, तुम उनकी सबसे अच्छी दोस्त हो. इसलिए मैंने सोचा कि तुमसे अपने दिल की बात शेयर करूं.”

“हां, बोलो, क्या कहना चाहती हो.”

“सुहानी, राज ने मुझे तब प्रपोज़ किया था, जब मैं उसके दोस्त को डेट कर रही थी. उसने मुझे लाख समझाया कि उसका दोस्त मुझे चीट कर रहा है, पर मुझे तो अपने प्यार पर विश्‍वास था. राज ने मेरा वो ग़ुरूर तोड़ दिया, पर एक तरह से अच्छा ही हुआ, क्योंकि मैं एक ग़लत इंसान पर भरोसा कर रही थी. सुहानी, तुम सुन रही हो न…”

“हां, तुम बोलती रहो, मैं सुन रही हूं… ज़्यादा बात नहीं करनी आती मुझे…”

“सुहानी, राज बहुत ही अच्छा लड़का है और पता ही नहीं चला कि इस बीच कब मैं भी उससे प्यार करने लगी, तुम उसकी दोस्त हो, तुम्हें क्या लगता है कि मुझे इस रिश्ते में आगे बढ़ना चाहिए?”

“राधा, ये तुम्हारा और राज का निजी मामला है, मैं कैसे सलाह दे सकती हूं. तुम जो ठीक समझो, करो.” यह कहकर फोन काट दिया मैंने, क्योंकि आगे बात सुनने और करने की मुझमें हिम्मत नहीं थी.

अब समझ में आया कि राज स़िर्फ मेरा इस्तेमाल कर रहा था, राधा को पाने के लिए. उसके बाद कई दिनों तक मैंने किसी से बात नहीं की… आज मौसम बदला है… पर मन बेहद उदास है. इतने में ही मेरा फोन बजा…

“हैलो, कौन बात कर रहा है?”

“सुहानी, फोन कट मत करना, मैं राज बोल रहा हूं. जानता था, मेरा फोन तुम नहीं उठाओगी, इसलिए किसी दूसरे नंबर से कॉल किया.”

“राज, मैं किसी की लाइफ में ज़बर्दस्ती नहीं रहना चाहती, तुम राधा के साथ अपनी ज़िंदगी जी सकते हो, मेरी तरफ़ से तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी कभी…”

“सुहानी, तुम्हें राधा पर भरोसा है, मुझ पर नहीं, अपने प्यार पर नहीं. राधा मुझे पसंद करने लगी, तो इसमें मेरा क्या ़कुसूर है? उसने तुम्हें जो भी कहानी सुनाई, तुमने भरोसा कर लिया? हमारा प्यार इतना कमज़ोर है कि बस एक लड़की आकर उसे तोड़कर चली जाए… मुझे बिज़नेस की सिलसिले में बाहर जाना पड़ा. अब लौटा हूं लंबे टूर के बाद तो तुमसे कॉन्टैक्ट ही नहीं हो पाया.

राधा से बात की, तो पता चला उसने तुमसे बात की थी. मुझे लगा कि वो रिश्ता टूटने के दर्द से गुज़र रही है, तो तुमसे शेयर करना चाहती होगी अपने दिल की बात.

“पर राज, तुमने ही तो कहा था कि वो भी बदला लेना चाहती होगी और पता नहीं क्या-क्या…”

“अरे, वो मैंने मज़ाक में कहा था, मुझे क्या पता था कि सच में वो ऐसा ही कुछ करने जा रही है… वो सब छोड़ो, मेरे पापा आज आ रहे हैं तुम्हारे घर पर हमारी शादी की बात करने… अब प्लीज़ मेरे घर, मेरी ज़िंदगी में पूरी तरह से आ जाओ, ताकि फिर किसी को मौक़ा न मिले हमारे बीच आने का. अब फोन रख रहा हूं, बहुत काम है, लव यू.”

मुझे समझ में ही नहीं आ रहा था कि ये सब कुछ क्या और कैसे हुआ… बस, इतना समझ में आया कि मेरा प्यार सच्चा था और अब हम हमेशा के लिए एक होने जा रहे हैं… ये बारिश अब अचानक इतनी रूमानी लगने लगी और मैं प्यार व आंसुओं से सराबोर छत पर जाकर भीगने लगी…

– गीता शर्मा

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ये 7 राशियां होती हैं मोस्ट रोमांटिक (7 Most Romantic Zodiac Signs)

प्यार ख़ूबसूरत एहसास है, जो ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बना देता है. उस पर मोस्ट रोमांटिक लवर का साथ हो, तो ज़िंदगी का हर लम्हा ख़ास बन जाता है. तब यही ख़्वाहिश रहती है कि ताउम्र यूं ही साथ बना रहे. तो चलिए उन सात राशियों के बारे में जानते हैं, जो बेहद रोमांटिक होती हैं.

Romantic Zodiac Signs

सिंह

–     इस राशिवाले बेहद रोमांटिक व इमोशनल होते हैं.

–     इनकी प्यार की अपनी अलग ही दुनिया होती है, जिसमें वे अपने पार्टनर के अलावा किसी की भी दख़लअंदाज़ी बर्दाश्त नहीं करते.

–     ये अपने प्यारभरे अंदाज़ और उमंग-उत्साह के कारण जीवनसाथी को हमेशा प्रभावित करते हैं.

–     पार्टनर की ख़ुशी, भावनाओं व कंफर्ट का पूरा-पूरा ख़्याल रखते हैं.

–     ये थोड़े फिल्मी भी होते हैं. कभी-कभी प्यार में फिल्मी अंदाज़ में पार्टनर को इम्प्रेस करना इन्हें अच्छा लगता है.

–     इन्हें आदर्श प्रेमी कहलाना पसंद है, क्योंकि इनका हर एक्शन इसी तरह का होता भी है.

मिथुन

–     इन्हेें पहली नज़र का प्यार सबसे अधिक प्रभावित करता है.

–     इस राशि के लोग अपने पार्टनर से डर्टी टॉक करने में माहिर होते हैं.

–     इंटिमेसी के मामले में थोड़ी हिचक बनी रहती है, पर अपने सॉफ्ट लव वाले अंदाज़ में सब संभाल लेते हैं.

–     फ्लर्ट के मामले में इनका कोई मुक़ाबला नहीं, जिससे हर कोई प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.

–     अपने फ्लर्टिंग के टैलेंट के चलते जीवनसाथी को भी हमेशा ख़ुश रखते हैं.

–     लेकिन इनकी प्यार की दीवानगी कभी-कभी परेशानी का सबब भी बन जाती है.

मेष

– मेष राशिवाले एनर्जी से भरपूर होने के साथ बेहद रोमांटिक होते हैं.

– चाहत को लेकर इनका बोल्ड अंदाज़ लवर्स को काफ़ी प्रभावित करता है.

– लवमेकिंग के मामले में ये पार्टनर की बजाय ख़ुद ही शुरुआत करना अधिक पसंद करते हैं.

– इनका प्यारभरा अप्रोच पार्टनर को रिलेशन बनाने के लिए प्रेरित करता है.

– प्यार में इनकी पहल इस कदर प्रभावशाली रहती है कि पार्टनर ना नहीं कह पाते.

वृश्‍चिक

– ये लवमेकिंग के मामले में रोमांच व जुनून से भरपूर होते हैं.

– लेकिन ये किसी भी शख़्स के क़रीब तब आते हैं, जब उनसे भावनात्मक रिश्ता मज़बूत हो जाता है.

– इन्हें प्यार में एक्सपेरिमेंट्स करना बहुत अच्छा लगता है.

– इसके लिए ये नए-नए आइडियाज़ अपनाते रहते हैं और पार्टनर को इम्प्रेस करने का कोई भी मौक़ा नहीं चूकते हैं.

– प्यार में विश्‍वास इनके रिश्ते की पहली शर्त होती है. यदि आपसी विश्‍वास नहीं, तो प्यार भी नहीं यानी मुहब्बत में इन्हें ईमानदारी अधिक पसंद है.

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Romantic Zodiac Signs

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वृषभ

– इस राशि के लोग अपने पार्टनर को ख़ुश करने के लिए नए-नए आइडियाज़ खोजते रहते हैं.

– ये रोमांस के साथ-साथ सेक्सुअल रिलेशन को लेकर भी काफ़ी एक्साइटेड व इनोटिव होते हैं, जिसके कारण पार्टनर भी एक्साइटेड

रहते हैं.

– कई बार पार्टनर को रोमांचित करने के लिए हद से आगे भी बढ़ जाते हैं.

– ये प्रेमी हो या लाइफ पार्टनर हर किसी को प्यार में ख़ुश रखने की कूबत रखते हैं.

– इनके जीवन में प्यार ही सब कुछ है. इसके बगैर जीवन की यह कल्पना भी नहीं कर सकते.

कर्क

– इनकी यह ख़ूबी है कि ये अपने पार्टनर की भावनाओं की कद्र करते हैं.

– छोटी-छोटी बातों से प्यार के पल जुटाते हैं.

– कभी-कभी अचानक प्यारभरा सरप्राइज़ देने से भी नहीं चूकते.

– इनका प्यार व जुनून इनकी अनुपस्थिति में भी जीवनसाथी को रोमांचित करता है.

– इनके लिए प्यार के साथ-साथ विश्‍वास भी काफ़ी मायने रखता है.

तुला

–     रोमांस के मामले में ये छुपे रुस्तम होते हैं, क्योंकि इनके स्वभाव को देखते हुए कोई नहीं कह सकता कि ये पर्सनल लेवल पर बेहद रोमांटिक हैं.

–     जीवनसाथी का बहुत ख़्याल रखते हैं और अपने बेपनाह प्यार से उन्हें भावविभोर कर देते हैं.

–     साथ ही पार्टनर की पसंद-नापसंद को भी महत्व देते हैं. ऐसा नहीं कि पार्टनर का मूड नहीं और ये प्यार के पींगे बढ़ा रहे हैं.

–     इनके प्यार की ख़ुमारी का आलम यह होता है कि न दिन देखते हैं, न रात, जब पार्टनर को किसी चीज़ की ख़्वाहिश हुई, उसे जुटाने में रात-दिन एक कर देते हैं यानी ये जुनून की हद तक प्यार करते हैं.

–     पार्टनर के प्रति प्यार में इस कदर वफ़ादार होते हैं कि उनसे अपने जीवन से जुड़ी कोई भी बात नहीं छिपाते हैं.

– ऊषा गुप्ता

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पहला अफेयर: तुम्हारा प्यार मिला… (Pahla Affair: Tumhara Pyar Mila)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम्हारा प्यार मिला… (Pahla Affair: Tumhara Pyar Mila)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

मेरी वफ़ा का सिला मुझको शानदार मिला… गीत की यह लाइन मेरी ज़िंदगी की हक़ीक़त है. आज हमारी प्रीत 45 बरस की हो गई. आज भी तुम्हारे होंठों पर वह क़ातिल मुस्कान है, जो मुझ पर जादू कर गई थी. आज तुम मौन हो, कितने दिनों से तुमने मुझे ‘मन्ना’ कहकर नहीं पुकारा. पहले जब तुम पुकारते मन्ना… तो मिठास घुल जाती वातावरण में. कहनेवाले सच ही कहते हैं कि हाथ में जिसका नाम होता है, उसे ऊपरवाला मिलवा ही देता है. हम भी कुछ यूं ही मिले थे.

सांची हमारे परिवार की पसंदीदा जगह थी. जब भी मन करता मम्मी-पापा और हम दोनों बहनें सांची चले जाते. उन दिनों लड़कियां कार तो चलाती थीं, पर मोटरसाइकिल चलानेवाली लड़कियां बस दीदी और मैं ही थीं. जब हम निकलते, तब उसकी निगाह हम पर होती. दीदी तो न केवल मोटरसाइकिल चलातीं, बल्कि उसको सुधारने में भी माहिर थीं.

बारिश की झड़ी लगी थी. कॉलेज में छुट्टी का माहौल था. मन उकता रहा था. दीदी ने कहा, “चल सांची तक घूमकर आते हैं.” मैंने भी हामी भर दी. पापा की कार पर सवार होकर हम दोनों बहनें चल पड़ीं. रास्ते में एक जगह भीड़ जमा थी. कोई दुर्घटना घटी थी. हम दोनों भी पहुंचे. एक महिला अचेत पड़ी थी और घायल लड़का मदद की गुहार लगा रहा था. फ़ौरन दीदी और मैंने उस अचेत महिला और युवक को गाड़ी में बैठाया और अस्पताल भागे.

महिला और युवक दोनों अचेत थे. हमने पापा को भी ख़बर करवा दी. पुलिस भी आई. उनकी शिनाख्त हो गई. अगले दिन जब हम लोग हालचाल जानने पहुंचे, तो युवक होश में आ चुका था. “हैलो, मैं मनोज शास्त्री, भोपाल में प्रोफेसर हूं.” दीदी और मैंने औपचारिक बातचीत की, फिर लौट आए. यूं मिलने-मिलाने के दौरान मनोज बड़े भले-भले से लगे. एकदम सहज, मुस्कान क़ातिलाना थी, मगर दीदी तो मनोज की फैन हो गईं. आख़िर दोनों ही साइंसवाले थे और मैं इतिहास की स्टूडेंट.

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एक दिन मनोज की मम्मी घर आईं और उन्होंने रिश्ते की बात की. “अपने दोनों बेटों के लिए आपकी दोनों बेटियों का हाथ मांगती हूं.” झटपट सब तय हुआ और फिर जल्द शादी हो गई. बस, हम एक बार ही मिले थे और वो भी कुछ ही पलों के लिए. ससुराल में जब पहली बार हम मिले, तो इन्होंने कहा, “मैं तुम्हें मन्ना ही कहा करूंगा, मेरी मन्ना…” सच, उस दिन के बाद से हर दिन, हर पल तुमने अपनी मन्ना के मन को टूटने न दिया. प्यार का यह एहसास कितना अनमोल था. साल-दर-साल हमारी भूमिकाएं बदलीं, पर तुम्हारा प्यार कभी कम न हुआ. वो बढ़ा, बढ़ता चला गया, बच्चों को भी उनकी मुहब्बत की मंज़िल दिलवाने में तुमने कोई कसर बाकी न रखी.

हमारे बहू और दामाद दोनों अलग-अलग धर्मों के हैं, पर इस कदर वो हम में घुल-मिल गए हैं कि धर्म कहीं पीछे छूट गया है. आज जब मैं लड़खड़ा रही हूं, तो बच्चे मेरा संबल हैं और उनके भीतर छुपा तुम्हारा प्यार!

दो महीने बीत चुके हैं. मुझे अपने प्यार पर यक़ीन है और देखो, आज जब मैं तुम्हारे बाल बना रही थी, तो तुमने हौले से कहा, “मन्ना!” तुम्हारे होंठों को हिलते देखा मैंने. एक दिन तुम होश में आओगे… इस एक्सीडेंट ने तुम्हें भले ही कोमा तक पहुंचा दिया, पर मेरा प्यार तुम्हें मुझ तक वापस पहुंचाएगा… मेरे मन्ना.

– राजेश्‍वरी शुक्ला

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सेक्स से जुड़े 7 मिथक जिन्हें सच मान लेते हैं पुरुष (7 Sex Myths Men Think Are True)

जब कोई पुरुष पहली बार किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाने जाता है तो उसके मन में सेक्स से जुड़े कई सवाल आते हैं. हालांकि अपने मन में उठ रही इन शंकाओं को दूर करने के लिए वो इंटरनेट के अलावा कई माध्यमों से जानकारी भी इकट्ठा करता है. बावजूद इसके जिन लोगों ने पहले कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया है वो सेक्स से जुड़े मिथकों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं. इसलिए जो लोग पहली बार किसी के साथ सेक्स संबंध बनाने जा रहे हैं, उन्हें इससे जुड़े 7 मिथकों की सच्चाई ज़रूर जान लेनी चाहिए.

 

Sex Myths

 

क्यों ज़रूरी है सेक्स?

अपनी सुख-सुविधा वाली चीज़ों को पाकर व्यक्ति जितना ख़ुश होता है, उतनी ही ख़ुशी उसे सेक्स के ज़रिए मिलने वाले चरम सुख से मिलती है. इसलिए सेक्स को इंसान के लिए सबसे आनंददायक चीज़ों में से एक माना जाता है. सेक्स स़िर्फ जिस्मानी नहीं, बल्कि यह एक रूहानी संबंध होता है. यही वजह है कि कई विशेषज्ञ भी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि एक बेहतर और सुखद जीवन के लिए अच्छी सेक्स लाइफ का होना बेहद ज़रूरी है.

1. मिथक- ज़्यादा देर तक इरेक्शन बनाए रखना ज़रूरी है.

सच्चाई- अधिकांश पुरुष या लड़के पहली बार सेक्स करने से पहले कई पोर्न वीडियोज़ देखते हैं, ताकि वो सेक्स के अलग-अलग पोज़ीशन ट्राई कर सकें. इसके साथ ही वीडियो में यह भी देखते हैं कि पुरुष 30-40 मिनट तक नॉनस्टॉप परफॉर्म कर रहा है, लेकिन रियल लाइफ में भी आप ज़्यादा देर तक परफॉर्म कर पाएं, ऐसा होना मुश्किल है. कई अध्ययनों में यह ख़ुलासा हुआ है कि अधिकांश पुरुषों में इरेक्शन 3-5 मिनट से ज़्यादा देर तक बरकरार नहीं रहता है.

2. मिथक- सेक्सुअल इंटरकोर्स के लिए फोरप्ले की ज़रूरत नहीं होती.

सच्चाई- कुछ अध्ययनों के मुताबिक़ महिला पार्टनर को ऑर्गेज़्म का अहसास दिलाने के लिए स़िर्फ वेजाइनल इंटरकोर्स ही काफ़ी नहीं है. सेक्सुअल इंटरकोर्स में फोरप्ले बहुत अहम् किरदार निभाता है. फोरप्ले से दोनों की कामोत्तेजना बढ़ती है और सेक्स का आनंद दोगुना हो जाता है. इसलिए अगर आप एक अच्छा पार्टनर बनना चाहते हैं तो इंटरकोर्स से पहले फोरप्ले करना न भूलें, क्योंकि यह सुखद सेक्स का सबसे बेसिक फंडा है.

3. मिथक- पहली बार में ही बेड पर बेहतर परफॉर्म करना ज़रूरी होता है.

सच्चाई- पहली बार सेक्स करने से पहले अधिकांश पुरुष यही सोचते हैं कि अगर उन्होंने बेड पर बेहतर तरी़के से परफॉर्म नहीं किया तो पार्टनर के सामने उनकी इमेज ख़राब हो जाएगी, लेकिन यह बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं है कि पहली बार के सेक्स से ही आपको बेहतर अनुभव मिल जाए. इसलिए निराश होने के बजाय आपको धैर्य से काम लेना चाहिए, क्योंकि समय के साथ-साथ आपके परफॉर्मेंस में सुधार आएगा और आपको सेक्स का आनंददायक अनुभव भी प्राप्त होगा.

4. मिथक- सेक्स के लिए पेनिस का साइज़ बहुत अहमियत रखता है.

सच्चाई- अगर आपको लगता है कि आनंददायक सेक्स के लिए पेनिस का साइज़ बहुत मायने रखता है तो आप ग़लत हैं. कुछ अध्ययनों में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि सेक्स का भरपूर आनंद उठाने के लिए पेनिस का छोटा या बड़ा होना कोई मायने नहीं रखता. एक अध्ययन के मुताबिक़, माइक्रोपेनिस (यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति के पेनिस का साइज़ 3 इंच से भी कम हो जाता है) होने पर भी आप सेक्स का आनंद ले सकते हैं.

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Sex Myths

5. मिथक- दो कंडोम साथ लगाने से डबल सेफ्टी मिलती है.

सच्चाई- कुछ लड़के या पुरुष ये सोचते हैं कि वो पहली बार सेक्स दो कंडोम लगाकर करेंगे, ताकि उन्हें डबल सेफ्टी भी मिले और अनचाही प्रेग्नेंसी का ख़तरा भी टल जाए, लेकिन हकीकत में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. डबल कंडोम के इस्तेमाल से भले ही प्रेग्नेंसी का ख़तरा टल जाए, लेकिन इसके फटने की संभावना भी डबल हो जाती है.

6. मिथक- हस्तमैथुन करना सेहत के लिए हानिकारक है.

सच्चाई- हस्तमैथुन करना ग़लत नहीं है और यह सेहत के लिए किसी भी तरह से हानिकारक नहीं है. एक अध्ययन के अनुसार, मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन स्ट्रेस दूर करने का एक हेल्दी तरीक़ा है. इससे स्पर्म क्वालिटी बेहतर होती है, तनाव दूर होता है और प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा भी कम होता है.

7. मिथक- पीरियड्स में असुरक्षित सेक्स से कोई ख़तरा नहीं होता.

सच्चाई- इंटरनेट और दूसरे माध्यमों से सेक्स के बारे में जानकारी इकट्ठा करनेवाले कुछ लोग यह सोचते हैं कि पीरियड्स के दौरान असुरक्षित सेक्स में कोई हर्ज़ नहीं है. हालांकि वो इस बात को भूल जाते हैं कि इससे भले ही प्रेग्नेंसी की संभावना थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिज़ीज़ का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है.

डर को दूर भगाएं, आत्मविश्वास जगाएं

पहली बार सेक्स करते व़क्त कई पुरुषों को यह डर भी सताता है कि कहीं उनका शरीर उनके पार्टनर को पसंद नहीं आया तो? लेकिन यकीन मानिए अगर आप यही सोचते रहेंगे तो पार्टनर के साथ सेक्स एन्जॉय नहीं कर पाएंगे. हर व्यक्ति में कोई न कोई ख़ामी होती है इसलिए अपनी बॉडी को लेकर मन में उठ रहे डर को दूर भगाएं और आत्मविश्वास बनाए रखें.

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पहला अफेयर: वो बेपरवाह से तुम…! (Pahla Affair: Wo Beparwaah Se Tum)

Pahla Affair: Wo Beparwaah Se Tum

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पहला अफेयर: वो बेपरवाह से तुम…! (Pahla Affair: Wo Beparwaah Se Tum)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

आज मन अजीब-सी दुविधा से जूझ रहा है… समझ में नहीं आ रहा क्या कहूं तुम्हें और उसको क्या कहूं, जिसकी तरफ़ कुछ दिनों से मन अंजानी डोर-सा खिंचता चला जा रहा है… जानती हूं तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त हो, अच्छे इंसान हो और सबसे बड़ी बात तुम्हारे साथ मुझे वो सारी सुख-सुविधाएं मिलेंगी, वो सम्मान मिलेगा, जो हर लड़की चाहती है… फिर ये दुविधा कैसी?

हालांकि कुछ दिनों से मुझे अंदाज़ा हो रहा था कि तुम्हारे मन में कुछ चल रहा है… तुम्हारा वो मुझे चोरी-चोरी देखना और फिर मेरे देख लेने पर यह जताना कि तुम तो कुछ देख ही नहीं रहे थे… तुम्हारी बातों से भी एहसास हो रहा था कि शायद पहले प्यार की ख़ुशबू ने तुम्हें छू लिया है… मेरी तरफ़ वो अलग-सा आकर्षण तुम्हारा… समझ रही थी मैं… यहां मेरा भी हाल कुछ ऐसा ही था… मेरे मन में भी पहली मुहब्बत ने दस्तक दे दी थी शायद… वो अंजाना-सा लड़का अच्छा लगने लगा था… हां, तुम्हारी तरह न वो सुलझा हुआ था, न वो ज़िम्मेदार था, न उसमें सलीका था, न परिपक्वता, न वो सोफिस्टिकेशन, जो तुम में है… पर दिल की धड़कनें तो उसी को देखकर बेकाबू हो रही थीं…

उसका वो बेपरवाह अंदाज़, वो लापरवाह-सा रहना… न सली़के से वो बात करता था, न ज़िंदगी को लेकर इतना गंभीर… शायद उसकी यही बातें मुझे आकर्षित कर रही थीं… और एक दिन उससे मेरी नज़रें मिलीं… दिल वहीं खो गया… उसने भी मुहब्बत का इज़हार किया… और मैं भी ना नहीं कह सकी… कहती भी कैसे, मैं तो न जाने कब से इसी बात का इंतज़ार कर रही थी.

उसका नाम विक्रांत था. मैं अक्सर विक्रांत को कहती कि इतने बेपरवाह क्यों रहते हो, ज़िंदगी में तुम्हें कुछ बनना नहीं है क्या? और वो कहता नहीं, कुछ नहीं बनना, बस तुमसे प्यार करना है… मुझे हंसी आ जाती उसकी बातों पर…
“लेकिन प्यार से पेट नहीं भरता विक्रांत…”
“प्यार के बिना भी तो ज़िंदगी बेमानी है… अब तुमने मुझसे प्यार किया है, तो मुझे ऐसे ही अपनाओ… मैं तो यूं ही रहूंगा हमेशा…”

कभी-कभी तो लगता कि कितना अजीब है ये लड़का… फिर सोचती उसकी यही बातें तो मुझे अच्छी लगती थीं, पर रिलेशनशिप में आने के बाद मैं प्रैक्टिकली सोच रही थी.

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तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे सागर… और आज तुमने भी जब अपने मन की बात मेरे सामने रखी, तो मन उलझ गया… किसे छोड़ूं, किसे अपनाऊं?… तुमसे लगाव था, पर प्यार नहीं… विक्रांत से प्यार था, पर उसका वो बेपरवाह जीवन…
ख़ैर, सोच रही हूं कि इस उलझन को जल्द ही ख़त्म करूं…

“विक्रांत, हम शादी कब करेंगे?”

“जब तुम कहो बेबी… मैं तो कब से कह रहा हूं…”

“कह रहे हो, पर तुम न कोई काम करते हो, न अपने करियर को लेकर सीरियस हो… शादी के बाद क्या करोगे? कैसे गुज़ारा करेंगे हम?”

“सब हो जाएगा दिव्या, तुम बस मुझ पर भरोसा तो करो…”

“यार तुम्हारी यही बातें मुझे बेचैन करती हैं, तुम सीरियस तो हो न मुझे लेकर?”

“तुम्हें क्या लगता है? आज़माकर देख लो… जान दे सकता हूं…”

“मुझे सागर ने कहा है कि वो भी मुझसे प्यार करता है… क्या करूं तुम ही बताओ?”

“मैं क्या बताऊं? तुम क्या सोचती हो उसके बारे में?”

“वो अच्छा लड़का है, उसे हर्ट नहीं करना चाहती…”

“हा, हा, हा… तो हां कह दो…” तुमने हंसते हुए लापरवाही से कहा…

“तुम सच में पागल हो… मुझे तुमसे शेयर ही नहीं करनी चाहिए बातें…”

“अरे यार, ग़लत समझ रही हो, वो तुम्हारा दोस्त है, तुम उसको हर्ट भी नहीं करना चाहती, तो तुम बेहतर जानती हो कि उसे कैसे टैकल करना है… कैसे ना कहना है… कल अगर मैं तुमसे कहूं कि मेरी फ्रेंड ने मुझे प्रपोज़ किया है, तो तुम्हारा क्या रिएक्शन होगा… तुम मेरी जगह ख़ुद को रखकर सोचो…

मैं जानता हूं, तुम मुझे बहुत लापरवाह समझती हो, तुम्हें लगता है कि मैं सीरियस नहीं हूं, पर मेरा विश्‍वास करो, जब तक सांस है, तुमसे प्यार करूंगा, तुम्हारा इंतज़ार करूंगा… जब तक तुम्हारा हाथ मांगने लायक नहीं हो जाता, तब तक तो तुम इंतज़ार करोगी न मेरा… इतना व़क्त दोगी न…?

मुझे पता है दुनिया बहुत प्रैक्टिकल है, मैं नहीं हूं वैसा, मैं बस ज़िंदगी को जीना चाहता हूं तुम्हारे साथ… ज़्यादा कुछ सोचता नहीं, पर इसका ये मतलब नहीं कि मुझे फ़िक्र नहीं या मैं अपने रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं.”

आज तुम्हें पहली बार मैंने इतनी गंभीरता से बात करते देखा… तुम्हारी आंखें भर आईं थीं… तुम भले ही बेपरवाह नज़र आते हो, पर परिस्थितियों को मुझसे बेहतर तरी़के व परिवक्वता से समझने की क्षमता है तुम में… कितना भरोसा करते हो तुम मुझ पर, न कभी ओवर पज़ेसिव होते हो, न कभी मुझे बेवजह रोकते-टोकते हो…

अक्सर ऐसे मौ़के भी आए, जब मुझे किसी ने कुछ ग़लत कहा हो, तुमने ऐसी नौबत कभी नहीं आने दी कि मुझे किसी को जवाब देने की ज़रूरत पड़ी हो… हालांकि मैं एक इंडिपेंडेंट लड़की हूं, लेकिन जब-जब तुम मुझे प्रोटेक्ट करते हो, मुझे अच्छा लगता है… जब-जब तुम बच्चों की तरह ज़िद करके मुझे आईलवयू टु कहलवाने की ज़िद करते हो, मुझे अच्छा लगता है, जब कभी तुम इमोशनल होकर किसी छोटी-सी घटना पर भी यह कहते हो कि आज मन बहुत दुखी है, तुम्हारी ज़रूरत है… मुझे अच्छा लगता है… अच्छा लगता है तुम्हें सुनना, तुम्हारा मुझे हर व़क्त छेड़ना, मुझे ग़ुस्सा दिलाना और फिर कहना मज़ाक कर रहा हूं डफर…

मन की सारी दुविधाएं दूर हो गई थीं. तुमसे प्यार है, तो तुम्हारे साथ ही ज़िंदगी गुज़ारूंगी… फिर भले ही उसमें संघर्ष हो… इस संघर्ष का नाम ही तो ज़िंदगी है और ज़िंदगी का दूसरा नाम मेरे लिए तुम हो…

– गीता शर्मा

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