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पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

Pyaar Ki Kahaniya

पहला अफेयर: कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… (Pahla Affair: Kahin Door Main, Kahin Door Tum)

प्रेम, प्यार, रोमांस, इश्क़, मुहब्बत… चाहत से लबरेज़ ये शब्द सुनते ही आंखों में अपने आप कई सपने पलने लगते हैं… गालों पर हया की एक लालिमा-सी छा जाती है… मुझे भी इस इश्क़ के रोग ने छू लिया था. 23 साल की थी मैं. नई-नई नौकरी लगी थी. मेरे साथ ही मेरे सहपाठी अभिनव ने भी जॉइन किया था. अभिनव के विभाग में ही उसका एक

शर्मीला-सा दोस्त था पल्लव. अभिनव से मेरा काफ़ी दोस्ताना व्यवहार था, उसी बीच पल्लव का मुझे चुपचाप देखना, आंखें झुकाकर बातें करना और बहुत ही सली़के से व्यवहार करना बेहद भाने लगा था. पल्लव की यही बातें मुझे बार-बार अभिनव के विभाग की ओर जाने को मजबूर कर देती थीं.

आख़िर मेरी क़िस्मत भी रंग लाई और पल्लव का ट्रांसफर मेरे ही विभाग में हो गया. बेहद ख़ुश थी मैं, हद तो तब हो गई, जब हम दोनों को एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने का मौक़ा मिला. अब धीरे-धीरे हमें क़रीब आने का मौक़ा मिला. दोस्ती गहरी हुई और फिर ये दोस्ती प्यार में बदल ही गई. पल्लव ने भी अपने प्यार का इज़हार इशारों-इशारों में कर ही दिया. हां, हमने आपस में कोई वादे नहीं किए थे, पर हमारे प्यार को मंज़िल मिलेगी, यह विश्‍वास हम दोनों को ही था.

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लेकिन नियति पर कब किसी का ज़ोर चला है. मैंने विभागीय परीक्षा दी थी और उसके लिए भी पल्लव ने ही मुझे प्रोत्साहन दिया था. हमने साथ-साथ तैयारी की. दुर्भाग्यवश पल्लव परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया और मैं पास हो गई थी. विभाग में रिक्त पद होने के कारण मेरा अधिकारी पद पर चयन हो गया था. अगली विभागीय परीक्षा को अभी समय था, मैंने पल्लव का हौसला बढ़ाया, लेकिन अब कार्यक्षेत्र में हमारे बीच दूरी बढ़ गई थी और धीरे-धीरे ये दूरियां हमारे संबंधों में भी बढ़ने लगी थीं. मैंने कई कोशिशें कीं, लेकिन पल्लव के मन में हीनभावना ने घर कर लिया था. वो मुझसे नज़रें चुराने लगा था. दूरी बनाए रखने के प्रयास करने लगा था. कुछ पूछती तो यही कहता कि मैं तुम्हारे लायक ही नहीं.

शायद पल्लव जान-बूझकर मुझसे दूर जाना चाहता था. मेरे सामने दूसरी लड़कियों से बातें करता… मेरा सामना तक नहीं करता था अब वो. मैंने फिर कोशिश की, तो उसने कहा, “मैं चाहता हूं तुम मुझे भूल जाओ, मुझसे घृणा करो, क्योंकि मेरा-तुम्हारा कोई मुक़ाबला नहीं. तुम्हें मुझसे बेहतर जीवनसाथी मिलेगा.”

ख़ैर, घर पर भी मेरी शादी की बातें होने लगी थीं और फिर मैंने भी पल्लव के लिए कोशिशें करनी बंद कर दीं, क्योंकि उसने ख़ुद मुझसे दूर जाने का निर्णय कर लिया था. मेरी शादी हो गई. पति के रूप में बेहद शालीन और प्यार करनेवाला साथी ज़रूर मिला, लेकिन मेरा पहला प्यार तो पल्लव था. कुछ समय बाद पता चला कि पल्लव के पिताजी ने काफ़ी दहेज लेकर एक लड़की से उसकी शादी कर दी. मेरा पहला प्यार दम तोड़ चुका था.

कई वर्षों बाद किसी समारोह में अचानक हमारा आमना-सामना हुआ. साधारण-सी औपचारिक बात के बाद हम दोनों अपनी-अपनी राह
चल दिए…

यूं ही अपने-अपने सफ़र में गुम… कहीं दूर मैं, कहीं दूर तुम… मेरा पहला प्यार स़िर्फ एक छोटे-से मेल ईगो की बलि चढ़ गया था, काश! पल्लव तुमने अपना वो झूठा ईगो छोड़ दिया होता… काश!… लेकिन अब कोई फ़ायदा नहीं यह सोचने का, क्योंकि नियति को यही मंज़ूर था!

– अलका कुलश्रेष्ठ

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१० रोमांटिक तरीक़ों से पार्टनर को कहें आई लव यू (10 Romantic Ways To Say I Love You)

प्यार (Love)… किसी के लिए महबूब के साथ ज़िंदगी बिताने का ख़याल है, तो किसी के लिए उसके ख़याल में सारी ज़िंदगी गुज़ार देना. कोई प्यार में जीना चाहता है तो कोई जान तक निसार कर देता है. जनाब प्यार का एहसास ही कुछ ऐसा होता है. एक पल में दुनिया बदल जाती है… बदली हुई फ़िज़ां..बदली हुई रुत… बदला हुआ समा…और तो और चेहरे की रंगत भी… एक गुलाबी निखार… जो बता देता है कि आख़िर आपको प्यार हो ही गया है. लेकिन स़िर्फ प्यार होने से कुछ नहीं होता, माना कि उनसे नज़रें मिलते ही आपका दिल तेज़ी से ध़़ड़कने लगता है, पलकें झुक जाती हैं और चेहरे पर गुलाबी सुर्खी छा जाती है, लेकनि जिससे प्यार हुआ है उससे इसका इज़हार करना भी तो ज़रूरी है, क्योंकि आई लव यू (I Love You) कहना कोई आसान काम नहीं. चलिए, हम आपको बता देते हैं कि प्यार का इज़हार कैसे किया जाए.

Ways To Say I Love You

‘मैं तुम्हें प्यार करता हूं’ मात्र एक वाक्य भी बनकर रह सकता है, अगर उसे सही ढंग से कहना न आए तो! प्यार का इज़हार करने के अनगिनत तरी़के हो सकते हैं. अपने प्रिय से अपनी भावनाओं का इज़हार करते समय कभी भी शब्दों को लेकर न तो कोई कंजूसी करें, न ही स्वयं को सीमित रखें. आपके लिए आपका साथी, आपकी प्रेमिका कितनी ख़ास है, यह जतलाना न स़िर्फ रिश्तों में एक जुड़ाव पैदा करेगा, वरन् इससे जीवन में रोमांस भी बढ़ेगा और त्वचा की रंगत भी… जी हां क्योंकि ये प्यार ही तो है जो चेहरे को सुर्ख गुलाबी निखार देता है.

कुछ यूं कहें दिल की बात-

1. अपने साथी के लिए एक रोमांटिक कविता लिखें. इस बात की चिंता न करें कि उसमें शब्दों और रिद्म का मेल है या नहीं. उसमें ख़ास बात यह है कि उसे आपने लिखा है और वह आपके प्यार की सच्ची अभिव्यक्ति है.

2. आजकल मोबाइल पर एसएमएस के चलन ने प्यार के इज़हार को और भी आसान बना दिया है. अपने साथी को रोमांटिक मैसेज भेजें. हो सकता है यह आपको प्रैक्टिकल न लगे, लेकिन रिश्तों में ख़ुशबू तभी बिखरती है जब फूल खिलाएं जाएं.

3. ये ज़रूरी नहीं कि एक बार प्यार का इज़हार होने के बाद जब रिश्ता जुड़ जाए, पति-पत्नी बन जाएं तो तो फिर आई लव यू कहने की ज़रूरत ही नहीं होती. माना कि आप दोनों के बीच प्यार है, लेकिन समय-समय पर इसे जतलाना भी ज़रूरी है. माना कि हम मुहब्बत का इज़हार नहीं करते. इसका मतलब ये तो नहीं कि हम प्यार नहीं करते. यह बात प्रैक्टिकली लागू नहीं होती.

4. बेशक आप दिन-रात एक ही छत के नीचे गुज़ारते हों, लेकिन कुछ शामें घर से बाहर यह जानने के लिए गुज़ारें कि आपके प्यार की पसंद और आदतें क्या हैं. हर तरह की उलझनों और ज़िम्मेदारियों को कुछ समय के लिए झटक कर उनके साथ एक गुलाबी शाम गुज़ारें यानी उन्हें किसी रेस्तरां या क्लब में जाएं. उसकी आंखों में झांकें और उसके मनपसंद खाने का ऑर्डर देते हुए उसके नखरे उठाएं.

5. आते-जाते यों ही उसे छू लें, बालों पर हाथ फेर दें, आंखों से इशारे करें. शर्म के मारे उनका चेहरा गुलाबी न हो जाए तो कहना.

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Romantic Ways To Say I Love You

6. आप एक दिन के लिए किसी होटल में भी अपने साथी के लिए कमरा बुक करा उसे स्पा या मसाज का मज़ा लूटने का मौक़ा दे सकते हैं. कुछ घंटे टब में स्नान करते हुए बिताएं.

7. रोमांटिक फ़िल्म देखने जाएं. उन लम्हों को साथ जीएं. साथ में घर में बैठकर रोमांटिक गाने सुनें. अगर आप दोनों पढ़ने के शौक़ीन हैं, तो एक दोपहर कोई कविता की क़िताब पढ़ते हुए गुज़ारें. ह़फ़्ते में एक दिन तो कम-से-कम उनकी पसंद के फूलों जैसे- रजनीगंधा या गुलाब का बुके अवश्य लाएं, फिर देखिए उनके चेहरे पर कैसे गुलाबों-सा निखार आ जाता है.

8. अक्सर सुनने में आता है कि शादी के कुछ सालों बाद प्यार ख़त्म हो जाता है, पर सच तो यह है कि पति-पत्नी टेक इट फॉर द ग्रांटेड की तर्ज़ पर जीने के आदी हो जाते हैं. बस थोड़ा-सा नयापन, थोड़ा-सा चुलबुलापन उनकी ज़िंदगी में फिर शुरुआती दिनों का प्यार वापस ला सकता है. जगह-जगह जैसे तकिए के नीचे, ऑफ़िस बैग में, लंच बॉक्स, शर्ट की पॉकेट में ‘आई लव यू’ की स्लिप रख दें. यह बचकानापन नहीं है. इन्हें पढ़ तो नाराज़ साथी भी खिल उठेगा.

9. उसे कहें कि ‘तुम जैसे हो मैं तुम्हें उसी रूप में चाहता हूं.’,  ‘तुम्हारा साथ मुझे ख़ुशी देता है.’,  ‘तुम्हारा मेरी ज़िंदगी में आना, मेरी ख़ुशक़िस्मती है.’

ये शब्द प्यार की डोर को और मज़बूत करते हैं. कॉम्पिलमेंट देना प्यार के बंधन को मज़बूत करता है. वह चाहे रोज़ अच्छा दिखता हो, लेकिन फिर भी रोज़ उसकी प्रशंसा करना न भूलें. अगर आलोचना भी करनी हो, तो यह जताएं कि आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि आपको और संवारना-निखारना चाहते हैं. क्या इससे बेहतर कोई और तरीक़ा हो सकता है प्यार करने का?

10. प्यार का इज़हार करने में स्पर्श भी एक अहम् भूमिका निभाता है. अपने साथी के साथ बैठकर उसका हाथ पकड़ें, उसे अपने सीने से लगाएं या साथ चलते हुए हाथ थाम लेना प्यार को व्यक्त करने का सबसे सहज तरीक़ा है. स्पर्श बिना कहे भी बहुत कुछ कहने की ताक़त रखता है. आपकी छुअन प्यार ही तो है और अपने प्यार का एहसास आपको उनकी हसीं गुाबी रंगत से साफ़ झलकता नज़र आएगा. – आप जिसे प्यार करते हैं, उसके साथ अधिक-से-अधिक समय बिताने की कोशिश करें. जैसे- उसके साथ कभी-कभार डेटिंग पर जाएं, लॉन्ग ड्राइव पर निकल जाएं या फिर शॉपिंग करें. अपने साथी को कुछ ऐसी चीज़ें दें, जो उसे अपने ख़ास होने का एहसास कराए और आपके रोमांटिक होने का भी. प्यार स़िर्फ ख़ूबसूरत एहसास ही नहीं, बल्कि जीने की ज़रूरत भी है. यह मन को स्वस्थ रखता है तभी तो चेहरे पर गुलाबी निखार आता है और आप रहती हैं हमेशा
जवां-जवां…

– संजीव

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पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

उस चेहरे को देखने के बाद गौतम को कभी किसी और चेहरे को देखने की चाह नहीं हुई… उसे पहली बार देखते ही गौतम का मन उसकी ओर जाने लगा था. उसने कभी सोचा भी नहीं था कि कभी कोई पलभर में ही इस तरह अपना हो जाएगा… उसके जीवन की वो सबसे सुहानी और सबसे ख़ूबसूरत सुबह थी… जब वो लड़की अपने कमरे की खिड़की के पास हर बात से बेपरवाह होकर अपनी घनेरी ज़ुल्फ़ों को सुलझाने में व्यस्त थी. उस समय सुबह की शीतल हवा के चंचल झोंके उसके ख़ूबसूरत बालों की महकती ख़ुशबू चुराने की चाह में उन्हें और भी बेतरतीब किए जा रहे थे… उसके भीगे सौंदर्य की लावण्यता और भी निखार पर थी.

फिर अचानक ही गौतम को अपनी ओर देखता पाकर उसकी भृकुटि कुछ तन-सी गई और फिर न जाने क्या सोचकर एकाएक बड़ी मोहक अदा के साथ उसके मदभरे होंठों की लाली एक दिलकश मुस्कान बनकर उसके लबों कर खिल उठी… उस समय गौतम कुछ और भी संशय में पड़ गया था. उसकी आंखों में एक नकली रोष था और अपने एक ख़ास अंदाज़ में वह उसे निरंतर देखे जा रही थी, फिर पलक झपकते ही अचानक वह गायब हो गई.

अभी एक माह पहले ही हमारे घर के ठीक सामनेवाले मकान में एक परिवार रहने आया है. मां ने बताया था कि वे उनके मायके अंबिकापुर से आए हैं. इस परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें शालिनी नाम की बहुत सुंदर उनकी एक बेटी है, जो यहां के आई.आई.एम. कॉलेज में पढ़ रही है. शालिनी की मां के साथ उनका हमेशा एक बहन जैसा अपनापन रहा है और वे दोनों कॉलेज के ज़माने से एक-दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त व सहपाठी रही हैं.

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आज सुबह शालिनी का उसे इस तरह देखने का वो रहस्यमय अंदाज़ अब उसकी समझ में आने लगा था और आज सुबह ही अपने ऑफिस जाने के लिए जब वह घर से निकला, तो उसी समय शालिनी भी बड़े बेबाक अंदाज़ में चलते हुए उसके पास आकर रुकी और अपना दायां हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपना परिचय देते हुए कहा, “मैं शालिनी…” तब गौतम ने भी उसके कोमल हाथ को थामकर तुरंत जवाब दिया, “और मैं गौतम…” तब उसका नाम सुनकर उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, मैंने तो सोचा था आपका नाम अक्षय कुमार या रणबीर कपूर होगा…” तब गौतम ने भी जवाब में कहा, “ज़रूर होता, अगर आपका नाम दीपिका पादुकोण या प्रियंका चोपड़ा होता…” इसके पहले कि वो कुछ कहती, गौतम ने घर की ओर इशारा करते हुए कहा, “जाइए, मां घर पर हैं और आपका इंतज़ार कर रही हैं.” अब गौतम की बारी थी उसे हैरान करने की.

आज ही उसे पता चला था कि शालिनी का प्रतिदिन उसके घर में आना-जाना होता है. गौतम की मम्मी के साथ उसका बड़ा गहरा लगाव था. गौतम की मम्मी शालिनी को बेहद प्यार-दुलार करती हैं. गौतम ने जब अपनी भाभी से शालिनी की बात की, तो उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे देवरजी, मम्मी तो उसे अब मेरी देवरानी बनाने जा रही हैं. वो हम सबकी पहली पसंद है.” बस, अब गौतम को कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं थी… इतने में ही शालिनी के खिलखिलाने की आवाज़ उसे अपनी मम्मी के कमरे से आई और वो हंसी सीधे उसके दिल में उतर गई… उसका पहला प्यार हमेशा के लिए उसका होने जा रहा था… गौतम सोचकर मन ही मन मुस्कुरा उठा!

– दिशा राजवानी

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ये 7 राशियां होती हैं मोस्ट रोमांटिक (7 Most Romantic Zodiac Signs)

प्यार ख़ूबसूरत एहसास है, जो ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बना देता है. उस पर मोस्ट रोमांटिक लवर का साथ हो, तो ज़िंदगी का हर लम्हा ख़ास बन जाता है. तब यही ख़्वाहिश रहती है कि ताउम्र यूं ही साथ बना रहे. तो चलिए उन सात राशियों के बारे में जानते हैं, जो बेहद रोमांटिक होती हैं.

Romantic Zodiac Signs

सिंह

–     इस राशिवाले बेहद रोमांटिक व इमोशनल होते हैं.

–     इनकी प्यार की अपनी अलग ही दुनिया होती है, जिसमें वे अपने पार्टनर के अलावा किसी की भी दख़लअंदाज़ी बर्दाश्त नहीं करते.

–     ये अपने प्यारभरे अंदाज़ और उमंग-उत्साह के कारण जीवनसाथी को हमेशा प्रभावित करते हैं.

–     पार्टनर की ख़ुशी, भावनाओं व कंफर्ट का पूरा-पूरा ख़्याल रखते हैं.

–     ये थोड़े फिल्मी भी होते हैं. कभी-कभी प्यार में फिल्मी अंदाज़ में पार्टनर को इम्प्रेस करना इन्हें अच्छा लगता है.

–     इन्हें आदर्श प्रेमी कहलाना पसंद है, क्योंकि इनका हर एक्शन इसी तरह का होता भी है.

मिथुन

–     इन्हेें पहली नज़र का प्यार सबसे अधिक प्रभावित करता है.

–     इस राशि के लोग अपने पार्टनर से डर्टी टॉक करने में माहिर होते हैं.

–     इंटिमेसी के मामले में थोड़ी हिचक बनी रहती है, पर अपने सॉफ्ट लव वाले अंदाज़ में सब संभाल लेते हैं.

–     फ्लर्ट के मामले में इनका कोई मुक़ाबला नहीं, जिससे हर कोई प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.

–     अपने फ्लर्टिंग के टैलेंट के चलते जीवनसाथी को भी हमेशा ख़ुश रखते हैं.

–     लेकिन इनकी प्यार की दीवानगी कभी-कभी परेशानी का सबब भी बन जाती है.

मेष

– मेष राशिवाले एनर्जी से भरपूर होने के साथ बेहद रोमांटिक होते हैं.

– चाहत को लेकर इनका बोल्ड अंदाज़ लवर्स को काफ़ी प्रभावित करता है.

– लवमेकिंग के मामले में ये पार्टनर की बजाय ख़ुद ही शुरुआत करना अधिक पसंद करते हैं.

– इनका प्यारभरा अप्रोच पार्टनर को रिलेशन बनाने के लिए प्रेरित करता है.

– प्यार में इनकी पहल इस कदर प्रभावशाली रहती है कि पार्टनर ना नहीं कह पाते.

वृश्‍चिक

– ये लवमेकिंग के मामले में रोमांच व जुनून से भरपूर होते हैं.

– लेकिन ये किसी भी शख़्स के क़रीब तब आते हैं, जब उनसे भावनात्मक रिश्ता मज़बूत हो जाता है.

– इन्हें प्यार में एक्सपेरिमेंट्स करना बहुत अच्छा लगता है.

– इसके लिए ये नए-नए आइडियाज़ अपनाते रहते हैं और पार्टनर को इम्प्रेस करने का कोई भी मौक़ा नहीं चूकते हैं.

– प्यार में विश्‍वास इनके रिश्ते की पहली शर्त होती है. यदि आपसी विश्‍वास नहीं, तो प्यार भी नहीं यानी मुहब्बत में इन्हें ईमानदारी अधिक पसंद है.

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Romantic Zodiac Signs

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वृषभ

– इस राशि के लोग अपने पार्टनर को ख़ुश करने के लिए नए-नए आइडियाज़ खोजते रहते हैं.

– ये रोमांस के साथ-साथ सेक्सुअल रिलेशन को लेकर भी काफ़ी एक्साइटेड व इनोटिव होते हैं, जिसके कारण पार्टनर भी एक्साइटेड

रहते हैं.

– कई बार पार्टनर को रोमांचित करने के लिए हद से आगे भी बढ़ जाते हैं.

– ये प्रेमी हो या लाइफ पार्टनर हर किसी को प्यार में ख़ुश रखने की कूबत रखते हैं.

– इनके जीवन में प्यार ही सब कुछ है. इसके बगैर जीवन की यह कल्पना भी नहीं कर सकते.

कर्क

– इनकी यह ख़ूबी है कि ये अपने पार्टनर की भावनाओं की कद्र करते हैं.

– छोटी-छोटी बातों से प्यार के पल जुटाते हैं.

– कभी-कभी अचानक प्यारभरा सरप्राइज़ देने से भी नहीं चूकते.

– इनका प्यार व जुनून इनकी अनुपस्थिति में भी जीवनसाथी को रोमांचित करता है.

– इनके लिए प्यार के साथ-साथ विश्‍वास भी काफ़ी मायने रखता है.

तुला

–     रोमांस के मामले में ये छुपे रुस्तम होते हैं, क्योंकि इनके स्वभाव को देखते हुए कोई नहीं कह सकता कि ये पर्सनल लेवल पर बेहद रोमांटिक हैं.

–     जीवनसाथी का बहुत ख़्याल रखते हैं और अपने बेपनाह प्यार से उन्हें भावविभोर कर देते हैं.

–     साथ ही पार्टनर की पसंद-नापसंद को भी महत्व देते हैं. ऐसा नहीं कि पार्टनर का मूड नहीं और ये प्यार के पींगे बढ़ा रहे हैं.

–     इनके प्यार की ख़ुमारी का आलम यह होता है कि न दिन देखते हैं, न रात, जब पार्टनर को किसी चीज़ की ख़्वाहिश हुई, उसे जुटाने में रात-दिन एक कर देते हैं यानी ये जुनून की हद तक प्यार करते हैं.

–     पार्टनर के प्रति प्यार में इस कदर वफ़ादार होते हैं कि उनसे अपने जीवन से जुड़ी कोई भी बात नहीं छिपाते हैं.

– ऊषा गुप्ता

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दिल की बातें… प्रेमपत्र (Dil Ki Baatein… Prempatra)

Dil Ki Baatein, Prempatra

Dil Ki Baatein, Prempatra
तुम्हें याद है वो बारिश का मौसम, जब मैं तुमसे पहली बार मिली थी. रिमझिम-रिमझिम फुहारें बरस रही थीं रह-रहकर और मैं सड़क के उस ओर खड़ी थी. तुमने चुपके से मेरा हाथ पकड़ा और सड़क पार करके मुस्कुराते हुए चल दिए. पता हैं तब मेरे ह्रदय में मंज़िल फिल्म का गाना बज उठा था- रिमझिम गिरे सावन… लता मंगेशकर की आवाज़ में. मैं खुद को मौसमी चटर्जी और तुम्हें अमिताभ बच्चन समझ रही थी. तुम्हारा कद लम्बा नहीं था, पर तुम्हारे व्यक्तित्व में कुछ बात थी. मैं तुम्हें अपना मानने लगी थी. क्या इसे ही प्यार कहते हैं? चाय कुछ ज्यादा ही मीठी बनने लगी थी और मेरी दुनिया सपनीली होने लगी थी. मुझे नया-नया सोशल नेटवर्किंग करने का चस्का लगा था. और ये क्या तुम मुझे मिल गए थे… बिना नाम जाने? अरे, मैंने तुम्हें अपना अमिताभ माना था. कितने प्यारे लगते हैं ना अमिताभ बच्चन-जया बच्चन इस गाने में- लूटे कोई मन का नगर… गाने में. लगता हैं कितना प्यार उड़ेल दिया था दोनों ने निगाहों में. तुम कहोगे कि मैं कितनी फ़िल्मी बातें करती हूं न? पर पता है मैंने यह गाना सुनाने के लिए कितना रियाज़ किया था. बस तुम्हारे लिए. तुम नाराज़ हुए थे. मैंने भी सोचा था कि एक गाने पर इतना नाराज़. मैं तुमसे कभी बात नहीं करूंगी, पर मैं भी तो अच्छी लगती थी न तुम्हें. तुमने जानने के लिए कॉल किया था कि मैं अब तक नाराज़ हूं, पर मैं कहां नाराज़ रह पाती. तुम्हारी कवितायें सब मैंने पढ़ी थी. मुझे पता था ये मेरे लिए नहीं लिखी गई थी, पर मैंने उसे अपना मानकर ही पढ़ा. पता है, आज फिर बारिश का मौसम हैं… मैं यहां घर पर हूं और तुम दिल्ली… तुम्हारे साथ बारिश में भीगने का मन है, जैसे आशिकी 2 में भीगते हैं न… तुम कहोगे मैं फिर फ़िल्मी हो रही हूं, पर मन का क्या करें… मन तो बेचैन हैं… तुमसे मिलने को बेचैन…

तुम्हारे इंतज़ार में,
तुम्हारी जीवनसंगिनी

– श्रुति

मेरी सहेली वेबसाइट पर श्रुति की भेजी गई रचना को हमने अपने वेबसाइट पर प्रकाशित किया है. आप भी अपनी शायरी, गीत, ग़ज़ल, लेख, कहानियों को भेजकर अपनी लेखनी को नई पहचान दे सकते हैं…

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हैप्पी बर्थडे काका! देखें सुपरस्टार राजेश खन्ना के 10 सुपरहिट गाने (Top 10 Songs: Happy Birthday Rajesh Khanna)

Top Songs Happy Birthday Rajesh Khanna

राजेश खन्ना भले ही हम सब के बीच आज न हो, लेकिन उनकी यादें उनकी सुपरहिट फिल्मों और गानों के ज़रिए सबके ज़हन में अब भी ताज़ा है.  आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं, उनकी फिल्मों के 10 सुपरहिट गाने.

फिल्म- आराधना (1969), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- कटी पतंग (1970), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- मेहबूब की मेहंदी (1971), गायक- मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर

 

फिल्म- अनुरोध (1977), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- दो रास्ते (1969), गायक- मोहम्मद रफ़ी

फिल्म- मेरे जीवन साथी (1972), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- आप की कसम (1974), गायक- किशोर कुमार, लता मंगेशकर

फिल्म- अमर प्रेम (1972), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- सच्चा झूठा (1970), गायक- मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर

फिल्म- द ट्रेन (1970), गायक- मोहम्मद रफ़ी

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बर्थडे स्पेशल: आनंद मरा नहीं… आनंद मरते नहीं, काका के सुपरहिट डायलॉग्स और उनकी दिलचस्प बातें (Birthday Special: Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna)

Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna

Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार, रोमांस के बादशाह, जवां दिलों की धड़कन राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इस लीजेंड की फिल्में और डायलॉग्स आज भी हमें कुछ सिखा जाते हैं. आइए, इस स्पेशल डे पर एक नज़र डालते हैं उनके कुछ फेमस डायलॉग (Famous Dialogues) पर.

  • मैं मरने से पहले नहीं मरना चाहता… ये तो मैं ही जानता हूं कि ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव पर कितना अंधेरा है.
  • बाबू मोशाय, ज़िंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह, उसे ना आप बदल सकते हैं ना मैं. हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिनकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों में बंधी है. कब कौन कहां उठेगा ये कोई नहीं बता सकता.
  • बाबु मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए…लंबी नहीं…
  • मैंने तुमसे कितनी बार कहा पुष्पा मुझसे ये आंसू नहीं देखे जाते. आई हेट टियर्स.
  • एक छोटा सा ज़ख़्म बहुत गहरा दाग़ बन सकता है.
  • इंसान को दिल दे, दिमाग़ दे, जिस्म दे पर कमबख़्त ये पेट न दे.
  • सेठ जिसे तुम ख़रीदने चले हो, उसके चेहरे पर लिखा है नॉट फॉर सेल.
  • किसी बड़ी ख़ुशी के इंतज़ार में हम ये छोटी-छोटी ख़ुशियों के मौ़के खो देते हैं.
  • मैंने मौत को देखा तो नहीं, पर शायद वो बहुत ख़ूबसूरत है. कमबख़्त जो भी उससे मिलते हैं, जीना छोड़ देते हैं.
  • ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं.
  • इस एक ग्लास में एक मज़दूर के एक महीने की रोटी है औऱ परिवार की सांस.

आज भी काका के प्रशंसक उन्हें उतना ही प्यार करते हैं और शायद काका भी ऊपर से ये देख रहे होंगे कि उनके फैन्स उन्हें कितना मिस करते हैं. उनकी फिल्में, गाने, संवाद, स्टाइल और दरियादिली को भुलाया नहीं जा सकता. आप भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अपने फैन्स के दिलों में हमेशा यूं ही छाए रहेंगे, क्योंकि आनंद मरा नहीं… आनंद मरते नहीं.

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राजेश खन्ना… एक रूमानी एहसास

Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna

एक मीठी मुस्कान और न जाने कितनी हसीनाओं के दिल की धड़कनें थम जाती थीं… एक जादूभरी नज़र और न जाने कितनों की रातों की नींदें उड़ जाती थीं… हर दिल उनकी एक-एक अदा पर फिदा था… हर जवां नज़रों में जिसको पाने का ख़्वाब था… वो थे रोमांस के बादशाह, जिनको प्यार से सब कहते थे काका… जी हां, राजेश खन्ना साहब (Rajesh Khanna)… जिनके लिए यह मशहूर था कि ऊपर आका, नीचे काका… ये था उनकी पॉप्युलैरिटी का सबसे बड़ा सबूत…

उनके जन्मदिन के अवसर हम उनकी ज़िंदगी से जुड़े कुछ राज़ आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं…

  • ऐसा माना जाता है कि जब राजेश खन्ना और डिंपल पहली बार मिले थे, तो दोनों ही अपने टूटे दिलों को संभालने की कोशिश में जुटे थे. कहा जाता है कि डिम्पल और ऋषि कपूर बॉबी के दौरान बेहद क़रीब आ गए थे, पर दोनों एक न हो पाए… इसी तरह राजेश खन्ना भी अंजू महेंद्रू के साथ अपनी रिलेशनशिप को एक मुकाम देने में नाकामयाब हो रहे थे. दो टूटे दिल साथ आए और फिर एक हो गए.
  • शादी के व़क्त डिंपल महज़ 15 साल की थीं और राजेश लगभग 31 साल के. शादी के बाद डिंपल का 16वां जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया.
  • दोनों ने अपना हनीमून पोस्टपोन किया था, क्योंकि तब तक डिंपल की डेब्यू मूवी बॉबी कंप्लीट नहीं हुई थी.
  • राजेश खन्ना ने जो उस दौरान स्टारडम देखा था, वो आज तक किसी भी सुपरस्टार ने नहीं देखा. उनके स्टारडम का आलम यह था कि उनकी स़फेद कार लड़कियों के लिपस्टिक के निशान से लाल हो जाती थी.
  • सुपरस्टार शब्द ही उनके स्टारडम की व्याख्या करने के लिए इजाद हुआ था.
  • उस व़क्त मुंबई के बंद पड़े स्टूडियोज़ को फिर से जीवंत कर देने का श्रेय भी राजेश खन्ना को जाता है. उस समय के वो सबसे कम समय में सबसे बिज़ी स्टार बन चुके थे.
  • कहा जाता है कि अपने स्ट्रगल के दौर में भी राजेश खन्ना उस दौर की सबसे महंगी कार में प्रोड्यूसर्स से मिलने जाते थे.
  • राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना था और उन्हें उनके रिश्तेदारों ने गोद लिया था. बचपन में उनके कपड़े विदेशों से ही आते थे और वो काफ़ी लाड़-प्यार में पले-बढ़े थे.
  • किशोर कुमार उनके बेहद क़रीबी दोस्त थे और जो किशोर कुमार अपनी कंजूसी के लिए मशहूर थे, उन्होंने राजेश के लिए उनकी होम प्रोडक्शन मूवी (अलग-अलग) के लिए मुफ़्त में गाने गाए.
  • 1969 से लेकर 1971 के बीच राजेश खन्ना ने बतौर सोलो लीड एक्टर लगातार १५ हिट फ़िल्में दी थीं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इनमें से प्रमुख फ़िल्में थीं- आराधना, बंधन, ख़ामोशी, डोली, आन मिलो सजना, सच्चा और झूठा, आनंद, मेहबूब की मेहंदी, दुश्मन आदि.
  • यूँ तो राजेश खन्ना की सभी को स्टार्स के साथ जोड़ी जमी लेकिन इनमें से सबसे ज़्यादा फिलमें उन्होंने की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के साथ, जी हाँ कुल मिलकर १५ फ़िल्में उनके साथ हैं.
  • गौरतलब है कि मुमताज़ उनकी बेहद क़रीबी को स्टार और दोस्त भी थीं और उनके साथ की सभी ८ फ़िल्में ज़बरदस्त हिट साबित हुई.
  • राजेश खन्ना ने अपनी सुपरहिट फिल्म आराधना में ही इतिहास रच दिया था, फिल्म के मोस्ट रोमांटिक सांग ..रूप तेरा मस्ताना… को सिंगल टेक में ही शूट करनेवाले वो बॉलीवुड के पहले एक्टर बन गए थे.
  • 60 और 70 के दशक में जन्मे कई बच्चों का नाम राजेश रखा गया, ये राजेश खन्ना के स्टारडम का की कमाल था.
  • बहुत काम लोग ही जानते हैं कि फिल्म मिस्टर इंडिया का टाइटल यानि लीड रोल पहले राजेश खन्ना को ही ऑफर किया गया था, लेकिन वो खुद को एक अदृश्य करैक्टर से रिलेट नहीं कर पाए और उन्होंने इस रोल को ठुकरा दिया… बाद में यह रोल अनिल कपूर को मिला, जिसने एक और इतिहास रच दिया.
  • मुम्बई यूनिवर्सिटी में एक लेख राजेश खन्ना के जादुई व्यक्तित्व और करिश्मे पर भी था जो उस वक़्त सिलेबस में शामिल था.
  • अपने करियर में राजेश ने कुल मिलाकर 180 फ़िल्में की. उनके जन्मदिन के अवसर पर हम उन्हें दिल से याद करते हैं और उनकी सबसे जुदा और बेमिसाल अदाकारी व अंदाज़ को सलाम करते हैं.
  • 29 दिसम्बर 1942 में जन्मा ये हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार हमें 18 जुलाई 2012 में अलविदा कह गया. ज़िन्दगी को अपने ही अंदाज़ में जीनेवाले राजेश के आखिरी शब्द थे… टाइम हो गया… पैक अप!

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हिंदी कहानी: …बरसता है (Hindi Short Story: Barasta Hai)

Hindi Short Story
– कुंदनिका कापड़िया

Hindi Short Story

“जब हम सबके बीच होते हैं, तो अकेलेपन के भय से घबरा जाते हैं. पर सचमुच अकेलेपन की स्थिति में प्रवेश करते हैं, तो अच्छा लगता है, आपको कैसा लगता है?” स्त्री हंसी. “ठीक-ठीक पता नहीं. अभी तो नई-नई अकेली पड़ी हूं न.”

दूर से देखने पर लगता था वहां सरू का घना वन है, पर वन के बीचोंबीच आकर खड़े होने पर मालूम हुआ कि वृक्ष एक-दूसरे के उतने पास-पास नहीं हैं, जितने उसने सोचे थे. वे तो खासे दूर-दूर हैं. उनकी डालियां एक-दूसरे से गुंथी हुई नहीं हैं. वे एक-दूसरे से पूरी तरह अपरिचित हों इस तरह खड़े हैं. अपने आप में मगन. उसे थोड़ी हंसी आई. मनुष्य का जीवन भी ऐसा होता है, ख़ासतौर से स्त्री-पुरुष का, पति-पत्नी का जीवन. दूर से देखें, तो लगता है कितने प्रगाढ़ रूप से वे परस्पर आबद्ध हैं. दोनों के स्वप्न, तृप्ति और अनुभूतियां इस तरह एकाकार हो गई हैं कि उनके बीच कोई विभाजक रेखा ही नहीं खींची जा सकती. पर नज़दीक जाकर देखें, तो सरू के इन वृक्षों की ही तरह वे दोनों अलग-अलग और विषाद ओढ़े हों, इस तरह धुंध से घिरे लगते हैं.
शाम अब क्षितिज पर झुक रही थी, अभी कुछ ही देर में सुनहरे रंगों का अंतिम स्पंदन होगा और पूरे आकाश को भर देनेवाला वह बिंब पानी में चू पड़ेगा. पानी के किनारे से सूर्य के टूट पड़ने का यह एक क्षण भव्य विस्मयों से लबालब भरा लगता था. इस नन्हें क्षण में असंख्य विश्वों की असंख्य परिभ्रमणों की गति झलक उठती थी. सूर्यास्त की इस घड़ी की प्रतीक्षा में वह रेत के एक ढूहे पर बैठ गया.
अचानक उसने देखा एक प्रतिबिंब उसके और सूर्य के बीच खड़ा है. उसकी उपस्थिति से अनभिज्ञ एक स्त्री ठीक वहीं, उससे थोड़ा ही आगे समुद्र के पानी के निकट खड़ी थी. उसकी ही तरह वह भी सूर्य की ओर नज़र टिकाए थी. उसके वहां खड़े होने के कारण सूर्य ओट में हो गया था. संतोष ने सोचा उठकर जगह बदल दे, पर उसी समय स्त्री कुछ क़दम आगे गई और सूर्य दिखा, लेकिन फिर पानी में डूब गया. उसके बाद गहरी शांति फैल गई. उस स्त्री ने आगे जाने के पहले अपना मुंह घुमाया. संतोष ने उसका चेहरा देखा. फिर वह उत्तर की ओर पानी के किनारे-किनारे चलने लगा.
वैसे तो आश्चर्य न होता, पर सूर्यास्त के समय लोग आमतौर पर घूम-टहलकर वापस आ जाते हैं, इसके बदले वह घूमने जा रही थी. तिस पर वह अकेली थी. पर उसकी चाल में रंचमात्र भी शिथिलता नहीं थी. इन सारी बातों से संतोष को कौतूहल हुआ. दस वर्ष पहले शायद न होता. अब स्वयं के विस्मित होने, छोटी से छोटी घटना में निहित मधु-बिंदुओं को खोजने का समय था. तिस पर इस स्त्री की तो छटा ही न्यारी थी और वह सूर्य के उस क्षण को देखने के लिए खड़ी थी, जिसे वह स्वयं चिंतन और सौंदर्य का श्रेष्ठ संधिकाल मानता था. इस तरह की सभी, यूं तो छोटी पर आनंददायक बातों के कारण संतोष के मन में एक विचित्र अनुभूति हुई.
रात को वह अपने विश्राम गृह के बरामदे में आराम से कुर्सी डालकर बैठा था और आकाश में बादलों और चांदनी की लीला निहार रहा था. बगीचे में रोशनी कम थी, आकाश में बादलों की ओट में घड़ी में छिपती और घड़ी में बाहर झांकती चांदनी थी, सामने सरू के वृक्ष थे और उसके आगे समुद्र था, जिसके मंद गर्जन से वातावरण मुखरित हो रहा था.
कोई-कोई क्षण अपने आप में पूर्णतः संपूर्ण होते हैं. उनके आगे-पीछे कुछ नहीं होता, स्मरण या आशा या उपेक्षा जैसा कुछ नहीं, मात्र एक अनाम आनंद… ऐसा ही कुछ वह अनुभव कर रहा था कि उसने उस स्त्री को सरू के वन से चढ़ान पर ऊपर जाते हुए देखा और अपनी कुर्सी से उठकर लगभग खड़ा हो गया. प्रकाश की एक रेखा या सुगंध की कोई लहर, आकस्मिक नहीं, बल्कि लंबे समय बाद स्मृति में चढ़ी किसी काव्य-पंक्ति-सी वह स्त्री उसे लगी. क्या वह उसे किसी समय पहचानता रहा होगा? पैंसठ वर्ष के लंबे जीवन में हज़ारों लोगों से मिलना हुआ होगा, उनमें शायद यह स्त्री भी रही होगी. चांदनी के प्रकाश में उसे उस स्त्री का चेहरा अधिक स्पष्ट नहीं दिखाई दिया. फिर भी देखा, नाक सीधी थी, होंठ पतले और थोड़े खुले हुए जैसे कुछ गुनगुना रही हो, बरामदे के क़रीब से गुज़रते समय उसने संतोष की ओर देखा और फिर आगे चली गई. संतोष उसे पीछे से देखता रहा. उसे लगा, सुंदर अलस-भाव से फैली यह नीरवता जैसे अचानक झंकृत हो उठी, मानो कोई प्रिय व्यक्ति अनजाने ही आकर कोई सुंदर भेंट देकर आश्‍चर्य में डाल दे, एक संगीतमय क्षण की भेंट उसे किसने दी?
रात में उसे यही विचार आते रहे कि जीवन को ऐसे महा उपहार देनेवाले हाथ किसके हैं और ये उपहार क्षणिक क्यों होते हैं? और फिर उसे लगा कि क्षणिक तो क्या नहीं होता? शायद यह बात अहम् नहीं थी. उपहार मिलता है, यही सबसे विस्मयकारी, आनंदभरी बात थी.
सुबह वह उठा तो अत्यंत प्रसन्न था. सूरज को निकलने में अभी देर थी. उठकर वह रेत की ढलान से उतरकर सरू के वृक्ष को प्रेम से स्पर्श करता हुआ समुद्र के किनारे खड़ा हुआ कि सुनहरे उजाले का एक बड़ा टुकड़ा समुद्र के जल में तैर उठा. उसने चौंककर ऊपर देखा. ठीक सिर के ऊपर एक बड़ा बादल झिलमिलाता दिखाई पड़ा और फिर नीचे नज़र करने पर उसने उस स्त्री को देखा, घूम-टहलकर वापस लौटती हुई.
‘एक अन्य आश्चर्य उपहार.’ वह मन ही मन गुनगुनाया और बात करने के उद्देश्य से उसकी ओर पलटकर प्रतीक्षा में लगभग खड़ा हो गया. अभी कोई जागा न हो, पवन सोई हो, वृक्ष सोए हों, समुद्र की रेत सोई हो और सूरज अभी मुश्किल से उगनेवाला हो, ऐसे समय घूमना समाप्त करके वापस लौट रही इस स्त्री के विषय में उसे अब सचमुच कौतूहल हो उठा था. क्या और कैसे पूछे, इस पर वह विचार कर ही रहा था कि वह ख़ुद आकर उसके पास खड़ी हो गई. उसके होंठ किंचित् खुले और इसी बीच सिर के ऊपर का वह सुनहरा बादल फट गया और उसमें से प्रकाश का एक प्रपात समुद्र पर ढुलक उठा और वह स्त्री जैसे अपने आपसे कह रही हो, फिर भी संतोष सुन सके इस तरह ज़ोर से बोली, “द लॉर्ड रेइन, लेट द अर्थ रिजॉइस…’
संतोष आनंद से किलकारी मार उठा और उसके आतुर स्वर में साठ वर्ष जाने कहां अदृश्य हो गए. “आप यह पंक्ति जानती हैं?” स्त्री हंसकर बोली, “यह प्रकाश की वर्षा हुई, इसलिए मुझे इस तरह बोलना सूझा… द फ्लड्ज़ लिफ्ट अप देयर वेव्ज़…” संतोष सभी पंक्तियां बोल गया. उसकी आंखों में समुद्र का सुनहरा पानी चमक उठा.
दोनों थोड़ी देर चुपचाप खड़े रहे. सूरज के उजाले की छोटी-छोटी तरंगें बिखरने लगीं और थोड़ी ही देर में आकाश, समुद्र, रेत और सरू के वृक्ष सबके सब सुनहरे हो गए.
“आप विश्राम गृह में ठहरी हैं?”
“हां, तीन नंबर के कॉटेज में. आप पहले कॉटेज में हैं न?”
“हां, कल ही आया. आते ही मुझे यह जगह भा गई. समुद्र के इतने क़रीब मैं इसके पहले कभी नहीं रहा.” वह यूं ही पीछे की ओर घूमा और स्त्री के साथ-साथ चट्टान पर चढ़ने लगा.
“मेरी यहां की यह पहली सुबह है. सब कुछ बहुत ही सुंदर है न?”
“सबसे सुंदर तो है यहां का एकांत. आप विश्वास करेंगे, मैं सुबह जल्दी उठकर तीन मील घूम आई और इतने समय में स़िर्फ एक ही आदमी देखा. वह बैलगाड़ी लेकर किनारे पर खड़ा था और उसमें रेती भर रहा था.”
संतोष का कॉटेज आ गया. कहने न कहने की किसी दुविधा के बिना सरलता से वह बोला, “आ रही हैं? चाय पीकर जाइएगा.”
स्त्री ने उतनी सरलता से इसे स्वीकार कर लिया. “ठीक है, चाय कौन, आप बनाते हैं? आप अकेले आए हैं?”
संतोष ने बरामदे में दो कुर्सियां और एक टेबल लगा दी. “नहीं, मेरे साथ मेरा नौकर है.” और कुर्सी पर बैठते हुए आवाज़ दी, “रंजीत!”
एक छोटा लड़का अंदर से दौड़ता हुआ आया.
“चाय बनाओ, ज़्यादा हां!”
“ठीक है, साहब.” दौड़ते हुए वह अंदर गया.
“दोनों कुर्सी पर बैठ गए. अभी पांच मिनट पहले ही उनकी पहचान हुई थी, फिर भी अपरिचय का भाव उनके बीच से चला गया था. संतोष ने सहज भाव से पूछा, “आप अकेली ही आई हैं?”
“हां, अपने बेटे और बेटी की शादियां एक साथ ही अभी-अभी निबटाई हैं. बेटी लंदन चली गई. बेटा अपनी पत्नी को लेकर कश्मीर गया है. मैं अकेली पड़ गई, इसलिए मैंने सोचा मैं कुछ दिन घूम आऊं.”
‘आपके पति…’ ऐसा कुछ संतोष पूछने जा रहा था, लेकिन इसकी जगह उसने पूछा,
“दोनों बच्चे एक साथ बाहर चले गए, तो घर में आपको बहुत अकेलापन लगा होगा न?”
स्त्री थोड़ी देर चुप रही, फिर से बोली,
“अकेलापन एक तरह से देखें तो वरदान भी माना जा सकता है.”
संतोष उत्तेजित हो गया. “वरदान? आप वरदान में विश्वास करती हैं? कैसी आश्चर्य की बात है. रात में मैं भी वरदान के विषय में ही सोच रहा था…” और फिर वह थोड़ा लज्जित हो गया. उसे लगा, उसने कुछ उतावलापन कर दिया. एक लंबा जीवन जीने के बाद, वह छोटे बच्चे की तरह इतना अधीर, उत्तेजित हो सकता है, इस बात पर उसे आश्चर्य हुआ.
स्त्री मिठास से हंसी. “बेटी के चले जाने पर तो सूनापन बहुत लगा, पर बाद में लगा कि जीवन की एक ऐसी अनुभूति मुझे वरदान स्वरूप मिल गई, जो अब तक अनजानी थी. इसे और संपूर्ण बनाने के लिए मैं यहां आई. नहीं तो आपको मालूम है, अपने सगे-संबंधी ही हमारे एकांत को सबसे अधिक बाधा पहुंचाते हैं. यहां भी किसी सैलानी के साथ बात या परिचय न करना पड़े, इसीलिए मैं भोर में ही घूम आती हूं और रात में देर से घूमने जाती हूं.” संतोष कुछ बोला नहीं.
वही फिर बोली, “मेरे पति सात वर्ष पहले गुज़र गए. उस समय मैं बहुत अकेली पड़ गई थी. पर बच्चे थे, परिवार की ज़िम्मेदारियां थीं. आज सारे काम पूरे हो चुके हैं. अब एक समूचा अकेलापन मिला है. मुझे इसका कौतूहल है कि पथ पर अकेले चलना कितना रमणीय बनाया जा सकता है.” वह हल्के से हंसकर चुप हो गई.
लड़का चाय की ट्रे रख गया. संतोष ने कप में चाय डालकर एक कप उस महिला को दिया और दूसरा ख़ुद लिया. कप के अंदर से निकलती गर्म सुगंधित भाप का वायुमय आकार वह कुछ देर तक निहारता रहा.
फिर बोला, “मैं भी अभी-अभी निवृत्त हुआ हूं. मेरा बिज़नेस था, बच्चों को सौंप दिया. तीन लड़के हैं. तीनों की शादियां हो गई हैं, अब तक बहुत व्यस्त जीवन जिया है, इसलिए मेरे आनंद की बातें प्रायः हाशिये पर रह जाती थीं. अब फुर्सत से कुछ समय अलग-अलग स्थानों पर घूमूंगा, पढ़ूंगा. ख़ूब पढ़ने का मेरा मन है. जब हम सबके बीच होते हैं, तो अकेलेपन के भय से घबरा जाते हैं. पर सचमुच अकेलेपन की स्थिति में प्रवेश करते हैं, तो अच्छा लगता है, आपको कैसा लगता है?”
स्त्री हंसी, “ठीक-ठीक पता नहीं. अभी तो नई-नई अकेली पड़ी हूं न.”
थोड़ी देर तक दोनों चुप रहे, फिर संतोष धीरे-धीरे बोला, “आपने सुबह जो काव्य पंक्तियां बोलीं, उन्हें मैंने बचपन में पढ़ा था. बाद में भूल गया था. कल यहां आते समय ट्रेन में फिर से वो पंक्तियां पढ़ीं, पर वे दूसरी ही तरह हैं.”
“लॉर्ड रेइन- ईश्वर राज्य करता है इस तरह है.”
“पर मुझे लगा ईश्वर बरसता है. लॉर्ड रेइन, प्रकाश के रूप में.”
“भेंट के रूप में?” संतोष हंसा.
स्त्री खड़ी हुई, “मेरा नाम तोषा है. नए ज़माने की छोटी लड़की जैसा नाम है न? पर मेरे पैरेंट्स बहुत नए विचारों के थे. मेरी मां उस ज़माने में एक स्कूल की प्रिंसिपल थीं और विदेश भी घूम आई थीं.” वह सीढ़ियां उतरी. “अच्छा तो…” और विदा में हाथ हिलाती वह अपने कॉटेज में चली गई.
पचपन-साठ की उम्र होगी, पर इतनी लगती नहीं थी. वह उससे पहले कहीं मिला होगा? वह परिचित क्यों लगती थी? या फिर उसकी बातें परिचित थीं? वह मन में ऐसी ही कुछ बातें सोच रहा था. पत्नी की मृत्यु के बाद… पत्नी को बहुत प्यार किया था. बहुत यानी बहुत ही. पत्नी कहती, “दुनिया में कोई पुरुष किसी स्त्री को इतना प्रेम नहीं करता होगा.” उसकी मृत्यु के बाद लंबे समय तक तो ऐसा ही लगा कि उसकी स्वयं की ही मृत्यु हो गई है. कुछ भी ग्रहण करने की संवेदना पूरी तरह नष्ट हो गई थी. यहां तक कि उस अवस्था से बाहर निकलने की इच्छा भी मर गई थी.
बहुत समय के बाद अब कहीं जाकर थोड़ी अकेलेपन में निहित शांति का अनुभव होने लगा था. इस शांति को दूसरी वस्तुओं से भरने की ज़रूरत नहीं थी. उसे अकेला होना अच्छा लगने लगा था. ईश्‍वर ने उसकी प्रिय पत्नी छीन ली थी, पर उसके बीच से वह धीरे-धीरे दूर हटने लगा था. ख़ुद को अच्छी लगनेवाली चीज़ों- पुस्तक, कविता और पानी का समुद्र उनके नज़दीक जाने लगा था. वह मकान समुद्र के इतने नज़दीक था कि उसमें चलते-फिरते, उठते-बैठते समुद्र दिखाई देता. वह दिखाई न देता, तो भी साथ रहता था.
समुद्र तट पर रहनेवालों के लिए समुद्र रोज़ की बात थी. पर उसे तो यह बात बहुत आकर्षक लगती थी. सौंदर्य की अनुभूति मन में हिलोरें लेती रहतीं. समय कोमल क़दमों से बह जाता. और अब यह स्त्री. पत्नी की मृत्यु के बाद पहली बार उसने किसी स्त्री के साथ इतनी निकटता से बात की थी और उसे बहुत अच्छा लगा था.
पैंसठ वर्ष की आयु में आदमी को किस चीज़ की ज़रूरत होती है? वह सोचने लगा. अंतिम घड़ी तक आदमी को किसी न किसी चीज़ की ज़रूरत रहती ही है. अकेले रहना अच्छा लगता था, पर तोषा के साथ बात करना और भी अच्छा लगा था. इसके बाद पूरे दिन उसने तोषा को नहीं देखा. उसे देखने का उसने विशेष प्रयत्न नहीं किया था. सहज ही वह दिख जाएगी, ऐसी उम्मीद भर थी. पर दोपहर-शाम, समुद्र तट या कैंटीन में, कहीं भी वह दिखाई नहीं दी. वह समुद्र तट पर घूमने गया और उसके आस-पास हज़ारों क़दमों के निशान उभर आए. ‘ज्वार आएगा ये सब मिट जाएंगे. कौन कहां चला था, इसकी एक भी निशानी नहीं रहेगी, मृत्यु की तरह वह सब कुछ मिटा डालेगा. मृत्यु ज्वार है या भाटा?’
उसे लगा, तोषा के साथ इस विषय पर बात की जा सकती है. उसने अपने जीवन में कैसे-कैसे अनुभव किए होंगे? इन अनुभवों में हर्ष का अंश अधिक होगा कि शोक का? चेहरे से वह पीड़ित तो नहीं लग रही थी.
दूसरे पूरे दिन भी उसने उसे नहीं देखा, तो वह थोड़ा अधीर हो गया और उसे देखने के लिए हर जगह नज़र दौड़ाता रहा. अंत में शाम को भी जब वह नहीं दिखाई पड़ी, तो वह लगभग व्याकुल हो गया. उस रात हवा ख़ूब खुलकर बह रही थी और हवा ख़ुद समुद्र की तरह जैसे बह रही थी. चांदनी को आर-पार बींधता यह गर्जन बगीचे में, मकानों में, वृक्षों में फैल गया और उसके सामने समुद्र की घनघोर आवाज़ भी मंद पड़ गई. फिर तो संतोष से रहा नहीं गया. वह घर से निकलकर तीसरे नंबर के कॉटेज की ओर चल पड़ा. इस समय सीज़न नहीं था, वेकेशन नहीं था, इसलिए समुद्र तट के इस हॉलीडे होम में सैलानी कम थे. पहले और तीसरे कॉटेज के बीच का निर्जन एकांत पवन के आलिंगन और चांदनी की बरसात में झंकृत हो रहा था.
वह तीन नंबर के कॉटेज पर पहुंचा. दरवाज़ा बंद था. उसने हल्के-से दस्तक दी.
दरवाज़ा खुला. तोषा ही थी. वह कुछ बोली नहीं, केवल दरवाज़े से थोड़ा खिसककर खड़ी हो गई, जिससे संतोष अंदर आ सके. संतोष को देखकर उसे आश्चर्य हुआ हो, ऐसा लगा नहीं. उसके चेहरे पर एक विचित्र भाव था.
कुर्सी पर बैठते हुए संतोष बोला, “आज पूरे दिन आप कहीं दिखाई नहीं दीं, तो मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ. कल भी नहीं दिखाई दी थीं. तबीयत तो ठीक है न?”
तोषा थोड़ी देर चुप रही, फिर उसके होंठों से कुछ इस तरह शब्द बाहर आए, जैसे लंबे अर्से से उसने कुछ बोला न हो, “कल मैं अपने बेटे के कश्मीर पहुंच जाने के तार का इंतज़ार कर रही थी.”
“तार आया?”
तोषा धीरे से उठी. मेज़ पर पड़ा एक काग़ज़ उठाकर संतोष के आगे रख दिया.
संतोष को काटो तो खून नहीं.
वह काग़ज़ दरअसल टेलीग्राम था- बस दुर्घटना में उसके बेटे और बहू के मारे जाने का समाचार.
हृदय एकदम जड़ हो गया.
यह स्त्री. कल यह अकेलेपन की अनुभूति को परिपूर्ण बनाने की बात कर रही थी और आज यह संपूर्ण रूप से अकेली हो गई थी. उसके दाएं-बाएं एक भयानक अकेलापन फैल गया था.
मुझे बहुत अफ़सोस है. बहुत ही अफ़सोस है… संतोष का मन बोलता रहा, पर उसने इन शब्दों को वाणी नहीं दी. वह केवल चुपचाप बैठा रहा.
कल तार आया होगा. तब से लेकर अब तक इस स्त्री ने बिल्कुल अकेले रहकर इस भयंकर आघात को झेला होगा.
खाए-पीए, सोए बिना एक-एक क्षण उसने बिताया होगा. किसी को कुछ बताए बिना, किसी के पास से सहारा पाने की कामना किए बिना.
अचानक उसे कुछ सूझा और वह तेज़ी से उठकर अपने कॉटेज पर गया. वहां जाकर उसने कॉफी बनाई और एक बड़े ग्लास में भरकर, बाहर पागल हवा से उसे बचाता ढांकता तोषा के पास आया. साथ में नींद की गोली भी थी.
“थोड़ी कॉफी पीजिए.” उसने तोषा से
आग्रहपूर्वक कहा और ज़बर्दस्ती ग्लास तोषा के हाथ में रख दिया.
“पीजिए.” उसने फिर आग्रहपूर्वक कहा. “यह गोली ले लीजिए.” उसने लगभग डॉक्टर की तरह आदेश देते हुए कहा.
तोषा ने गोली ली. कॉफी पी. संतोष की ओर उसने पूरी नज़र डालकर देखा. फिर वह एकदम से टूट गई और हिचकी ले-लेकर रोने लगी. काफ़ी देर तक वह रोती रही. संतोष ने उसे रोने दिया. वह बस उसके पास बैठा रहा. बड़ी देर बाद वह थोड़ी शांत हुई.और तब संतोष ने उसके सिर पर हाथ रखा. अचानक उसे लगा वह समझदार परिपक्व स्त्री असल में छोटी, एकदम अकेली पड़ गई एक बच्ची है. इस समय उसे प्रेम और ममता की ज़रूरत है. क्या वह उसे यह दे सकता है? क्या उसके पास किसी व्यक्ति को दी जा सकने लायक उष्मा थी? इतने वर्षों की जीवन-यात्रा के बाद उसने अपने अंदर ऐसा कुछ अर्जित किया था, जो किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन जीने में सहायक हो सके.
वह तोषा के सिर पर हाथ फेरता रहा. जैसे किसी बच्चे के बालों को सहला रहा हो. उन उंगलियों में से झरते आश्वासन से धीरे-धीरे तोषा का थरथराता शरीर शांत हो गया.
“आप सो जाइए. मैं कल सुबह फिर आऊंगा.” संतोष उसे उठाकर, हाथ पकड़कर पलंग के पास ले गया. बत्ती बुझाते हुए वह बोला, “दरवाज़ा अंदर से बंद करके सो जाइएगा.”
उस पूरी रात वह सांय-सांय करती हवा को सुनता, सोचता पड़ा रहा. अभी उसे आए मुश्किल से दो-तीन दिन हुए थे. इतने में ही सब कितना विचित्र घटित हो गया था. पूरे समय वह तोषा के बारे में सोचता रहा. अब वह क्या करेगी? कैसे जिएगी? और सहसा उसे लगा- तोषा की जगह उसकी अपनी ऐसी हालत हुई होती तो? एकाकीपन को लेकर उसके बहुत सुरक्षित विचार थे. उसका ऐसा भयावह रूप उसकी कल्पना के बाहर था. तोषा ने भी अकेलेपन को लेकर बहुत रम्य विचार संजोये थे. जैसे वह आनंद का आधार हो. और अब…? कैसे सहन करेगी वह? कहां जाएगी? बार-बार वह सोचता रहा.
व्यवसाय से निवृत्त होने पर उसे लगा था कि वह पूरी तरह मुक्त हो गया है. उम्र उसे कई मामलों में मुक्ति दे रही थी. भविष्य की चिंता से, योजनाएं गढ़ने से, ज़िम्मेदारी उठाने से मुक्ति. पर मनुष्य जब तक मनुष्य रहता है, ज़िम्मेदारियों से कभी मुक्त हो सकता है भला?
उसके बाद तीन दिन तक वह सुबह, दोपहर, शाम तोषा के साथ रहा. उसकी हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखता रहा. तोषा ने चाय पी कि नहीं, खाना खाया कि नहीं. उसे नींद आई कि नहीं. हल्की-फुल्की जाने कितनी बातें की और सुनीं. बचपन के प्रसंगों… स्मरणों के विस्तृत मैदान पर दोनों ने साथ-साथ यात्रा की और बीच-बीच में उसने तोषा को एकांत में भी हो आने दिया, जहां वह अपनी पीड़ा का समाधान स्वयं खोज सके.
संतोष के जाने का दिन नज़दीक आया. यहां छह-सात दिन रहने की उसकी योजना थी. उसके बाद वह डांग के जंगलों के अंदरूनी इलाकों में जाना चाहता था. वहां की वनस्पतियां देखनी थीं, पक्षी देखने थे, जंगल की निःशब्दता सुननी थी और फिर रात में प्राणियों की दिनचर्या का अवलोकन करना था. चारेक दिन वहां रहने के बाद सीधे नैनीताल जाना था.
पर तोषा का क्या कार्यक्रम था? इतने दिनों में वह यह बात पूछ नहीं सका था. इतने देखभाल, धैर्य और आश्वासनभरी बातों से उसे किनारे पर खींच लाने के बाद अपने जाने की बात कहकर उसे शोक के भंवर में धकेल देना क्या उचित होगा? इसमें कोई शक नहीं कि उसकी उपस्थिति से तोषा को अपार सांत्वना मिलती थी.
अगली सुबह वह तोषा के पास गया, तो वह नहा-धोकर बैठी थी. बहुत दिनों के बाद वह आज कुछ स्वस्थ दिखाई दे रही थी. संतोष को देखते ही वह बोली, “चलिए, समुद्र पर चलेंगे?”
समुद्र में उसे पुनः रुचि लेते देख संतोष को अच्छा लगा. किनारे की गीली रेत पर एक-दूसरे से सटकर वे चुपचाप चलते रहे. तोषा के मन में क्या उथल-पुथल चल रही होगी, संतोष उसका अनुमान करने लगा.
सरू के वृक्ष के नीचे कोरी रेत पर वे दोनों बैठ गए. काफ़ी देर तक दोनों में से कोई कुछ न बोला. स्वयं में पर्याप्त होना अच्छा है, अकेले रह पाने में गौरव है. परंतु एक साथ होना, एक-दूसरे को उष्मा का आधार देना- क्या यह अधिक सार्थकता देनेवाली बात नहीं है?
संतोष चौंक गया. ये विचार उसे किस दिशा में ले जा रहे हैं? पैंसठ की उम्र हुई. तोषा भी साठ की तो होगी ही. हो सकता है एक-दो वर्ष कम-ज़्यादा हो. स्त्री-पुरुष की आवश्यकताओं से वे दोनों दूर निकल चुके हैं, पर प्रेम की आवश्यकता से कोई पूरी तरह मुक्त हो सकता है भला?
इस उम्र में लोग क्या कहेंगे? एक-दूसरे का साथ देने में उम्र बाधक हो सकती है? पर इस उम्र के कारण क्या उसे दूसरों की धारणाओं के अनुसार जीने की बाध्यता से मुक्ति नहीं मिल रही थी? पर तोषा क्या कहेगी?
उसने तोषा की ओर देखा. वह समुद्र पर नज़र टिकाए शांत बैठी थी. सहसा पहले दिन की ही तरह, प्रकाश का एक बादल फटा और सुनहरी बरसात समुद्र पर बरस पड़ी.
एक स्वर्णिम क्षण का आविर्भाव हुआ.तोषा के अधरों पर एक मंद मुस्कान खेल गई. ‘द लॉर्ड रेइन….’ उसने कहा.
हर तरह से यह सही था. यहां मनुष्य की कल्पना का राज नहीं चलता. ईश्वर की इच्छा का राज चलता है. और ईश्वर बरसता है…. सदैव.
सहसा संतोष बोल पड़ा, “मैं यहां से नैनीताल जाने की सोच रहा हूं. आज टिकट लेने जा रहा हूं. दो टिकट लाऊं न?” भावावेश में उसका स्वर कांप उठा, “आप भी साथ चलेंगी न?”
तोषा समझ गई. उसे इस तरह आमंत्रित करने के पहले इस अनजान, मृदु, धैर्यवान, प्रेमालु पुरुष ने किन-किन उधेड़बुन को पार किया होगा, इसका उसे ख़्याल आया.
समुद्र पर टिकी अपनी नज़र उठाकर उसने संतोष पर डाली. उन दो निर्दोष आंखों में उसे खालिस सच्चाई दिखाई दी. उसके भीतर एक स्वर्णिम क्षण का उदय हुआ. उसने धीरे से कहा, “ईश्वर की भेंट बरस रही है.”
संतोष उसे देखकर एक मधुर हंसी हंस रहा था.
                                                                                                                                                अनुवादः त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल

 

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न्यूली मैरिड कपल ज़हीर और सागरिका के रोमांटिक हनीमून पिक्चर्स… (Honeymoon Pictures: Zaheer Khan And Sagarika Getting Cozy In Maldives)

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न्यूली मैरिड कपल ज़हीर और सागरिका के रोमांटिक हनीमून पिक्चर्स… (Honeymoon Pictures: Zaheer Khan And Sagarika Getting Cozy In Maldives)

शादी की सभी सेरेमनीज़ और लोगों की भीड़भाड़ से दूर अब सागरिका और ज़हीर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए मालदीव में अपना हनीमून एंजॉय कर रहे हैं. रोमांटिक डेस्टिनेशन और मालदीव के ख़ूबसूरत नज़ारे इन दोनों लव बर्ड्स को और भी क़रीब ले आएंगे. तो आप भी मिस न करें इनकी ये एक्सक्लूसिव पिक्चर्स

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ज़हीर को सागरिका की रोमांटिक कंपनी कितना रोमांचित कर रही है, इसका अंदाज़ा आप ज़हीर के इस इंस्टाग्राम पोस्ट से ही लगा सकते हैं…

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हाल ही में इस स्वीट कपल ने एक मैगज़ीन के लिए ग्लैमरस फोटोशूट भी करवाया…

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August Born: प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त में जन्मे लोग (What Your Birth Month Says About Your Love Life)

August Born

August Born

प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त (August) में जन्मे लोग

  • इन्हें कैज़ुअल रिलेशनशिप्स पसंद नहीं होतीं.
  • ये शादी की परंपरा पर बेहद विश्‍वास करते हैं.
  • इनकी सबसे बड़ी ख़ासियत यही होती है कि ये अपने पार्टनर की कमियों को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ उनकी ख़ूबियों पर ध्यान देते हैं.
  • इन्हें रोमांस बहुत पसंद होता है.
  • ये अपने पार्टनर के प्रति बहुत ईमानदार होते हैं, साथ ही पार्टनर से भी उसी ऑनेस्टी की अपेक्षा रखते हैं.

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  • बेडरूम में कोई इन्हें समझाए, यह इन्हें पसंद नहीं आता.
  • ये इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि उनके पार्टनर में वो सब कुछ है, जो ये चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं है, तो इन्हें उनसे अलग होकर कोई दूसरा साथी तलाशने में भी देर नहीं लगती.
  • प्यार और सेक्स के मामले में ये थोड़ा ईगोइस्ट होते हैं.
  • सेक्स व प्यार के मामले में ये या तो एकदम ही सेलफिश हो सकते हैं या फिर ये बेहद उदार होते हैं. यानी इनके व्यक्तित्व में ये विरोधाभास हो सकता है.

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वैलेंटाइन डेस्टिनेशन- करें रोमांटिक जगहों की सैर (Valentine destination- Plan a romantic tour)

Valentine Destinations

Valentine Destinations

वैलेंटाइन डे पर सिर्फ़ पार्टनर को डिनर कराने का प्लान है, तो अच्छी बात नहीं. कितना ख़ास दिन है ये. कुछ अलग और नया कीजिए. उन्हें कहीं घुमाने ले जाइए. हो सके तो शहर से बाहर की सैर करवाएं. दिमाग़ काम नहीं कर रहा है, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि इस वैलेंटाइन डे पर कहां जाएं अपने वैलेंटाइन के साथ.

Valentine Destinations

मिनिकॉय

नीला आसमान, नीला समंदर और नेचुरल ब्यूटी के आकर्षण से भरपूर मिनिकॉय या मलिक आपके लिए बेहतरीन रोमांटिक डेस्टिनेशन होगा. पार्टनर के साथ इस साल वैलेंटाइन पर यहां ज़रूर जाएं. लक्षद्वीप का ये दीप ख़ासतौर पर महिलाओं की फेवरेट जगह हैं. अपने पार्टनर को ख़ुश करने के लिए यहां लेकर ज़रूर जाएं.

मेन अट्रैक्शन
– यहां का ब्लू पानी आपको रोमांचित करेगा.
– व्हाइट सैंड पर पार्टनर के साथ कुछ पल ज़रूर बिताएं.
– पेड़ों से ढके छोटे-छोटे कॉटेज में रहने का आनंद ज़रूर उठाएं.

Valentine Destinations
ऊटी

रोमांटिक सफ़र और एक यादगार लम्हा जीना चाहते हैं, तो ऊटी ज़रूर जाएं. वैसे इसे बॉलीवुड में काफ़ी एक्सप्लोर किया गया है. वैलेंटाइन के मौ़के पर देशभर से कपल्स यहां कुछ दिन का स्टे करने आते हैं. बिज़ी लाइफ से थोड़ा समय निकालें और पार्टनर के साथ ऊटी पहुंचे.

Valentine Destinations

मेन अट्रैक्शन
– बोटैनिकल गार्डन में हमसफ़र की बाहों में बाहें डाले ज़रूर घूमें.
– ऊटी लेक के पास एक छोटा-सा पिकनिक प्लान करें.
– पीकारा वॉटरफॉल ज़रूर देखें.
– टॉय ट्रेन राइड का आनंद ज़रूर लें.

Valentine Destinations

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मुन्नार

अपने दिल की धड़कन को क़रीब से महसूस करने, पार्टनर के साथ प्यार का एहसास करने के लिए मुन्नार की सैर करें. इस वैलेंटाइन में अपने प्यार का रिफ्रेश करें मुन्नार जाकर. चाय के बागानों के बीच केरल का एक छोटा-सा हिल स्टेशन मुन्नार समुद्र तल से 1,600 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक हिल स्टेशन है. केरल पूरी तरह से ग्रीनरी से भरा है. मुन्नार उसमें से एक है.

Valentine Destinations

मेन अट्रैक्शन
– इरविकुलम राष्ट्रीय उद्यान
– आनामुड़ी शिखर
– आनामुड़ी शिखर

क्या ले जाएं साथ?
• वेस्टर्न वेयर
• फ्यूज़न वेयर
• स्टाइलिश पार्टी वेयर
• बीच वेयर
• स्पोर्ट्स शूज़
• सनग्लासेस
• सनस्क्रीन
• मेकअप किट
• फर्स्टएड बॉक्स
• एक्सेसरीज़

 

– श्वेता सिंह

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WOW! दिव्यंका त्रिपाठी पति विवेक दहिया के साथ यूरोप में मनाएंगी रोमांटिक हनीमून? (WOW! Divyanka Tripathi and hubby Vivek Dahiya finally to go for honeymoon?)

dibyanka-honeymoon
छोटे परदे की ख़ूबसूरत दुल्हन दिव्यंका त्रिपाठी ने फाइनली हनीमून के लिए समय निकाल ही लिया. ख़बर है कि जुलाई में शादी करने वाले दिव्यंका और एक्टर विवेक दहिया अपने बिज़ी शेड्यूल के चलते शादी के तुरंत बाद ही काम में लग गए, लेकिन चार महीने के लंबे इंतज़ार के बाद इस क्यूट कपल ने अपने हनीमून के लिए व़क्त निकाल लिया है.

 

Divyanka-Vivek-honeymoon

कहा जा रहा है कि दोनों यूरोप की हसीन वादियों में फुर्सत के पल बिताएंगे. हालांकि अभी तक दिव्यांका की तरफ़ से इस मामले में कुछ कहा नहीं गया है. दिव्यंका अपने शो ये है मोहब्बतें से कुछ समय का ब्रेक लेने जा रही हैं, वहीं विवेक ने कवच-काली शक्तियों के शो की शूटिंग ख़त्म कर ली है.
चलिए, हम तो यही उम्मीद करते हैं कि इस क्यूट कपल के हनीमून में अब और देरी न हो.