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ख़ुद बनाएं अपनी वसीयत, जानें ज़रूरी बातें (Guidelines To Make Your Own Will)

Guidelines To Make Your Own Will
आपकी वसीयत न स़िर्फ एक महत्वपूर्ण क़ानूनी दस्तावेज़ है, बल्कि यह आपका वह मालिकाना हक़ है, जिसके ज़रिए आप अपनी संपत्ति का सही तरी़के से बंटवारा कर सकते हैं. हालांकि जानकारी के बावजूद बहुतसे लोग इसे अनदेखा करते हैं. वसीयत न होने की स्थिति में आपके बाद आपकी प्रॉपर्टी को लेकर कई क़ानूनी उलझनें पैदा हो सकती हैं, जिन्हें वसीयत के ज़रिए आप बड़ी आसानी से सुलझा सकते हैं. तो क्यों न आप भी अपनी वसीयत बनाएं और अपनों को इन उलझनों से बचाएं.

 

Guidelines To Make Your Own Will

हम सभी वसीयत के बारे में जानते हैं, पर ज़्यादातर लोग वसीयत नहीं लिखते/बनवाते, क्योंकि कहीं न कहीं लोगों में एक धारणा बन गई है कि जिसके पास बहुत ज़्यादा धनदौलत है, वही वसीयत बनवाता है, जबकि ऐसा है नहीं. आप जब चाहें, जितनी संपत्ति की चाहें, वसीयत बना सकते हैं. इस विषय पर हमें अधिक जानकारी दी बॉम्बे हाईकोर्ट के एडवोकेट अरुण कुमार ने.

क्यों ज़रूरी है वसीयत?

 आपके न रहने पर आपकी संपत्ति के सही बंटवारे के लिए यह सबसे ज़रूरी दस्तावेज़ है.

आप अपनी चीज़ों को अपने मन मुताबिक़ बांट सकते हैं.

अपने मालिकाना हक़ का पूरा इस्तेमाल कर पाएंगे.

वसीयत न होने की स्थिति में आपकी संपत्ति सक्सेशन लॉ के मुताबिक़ आपके क़ानूनी वारिसों में बराबर बांट दी जाएगी. हो सकता है आप किसी ख़ास को कुछ ज़्यादा और किसी सक्षम व्यक्ति को कम देना चाहते हों, जो नहीं हो पाएगा.

कब बनाएं?

– ज़्यादातर लोग यही सोचते हैं कि जब बुज़ुर्ग हो जाएंगे या तबीयत ख़राब रहने लगेगी, तब अपनी वसीयत बनाएंगे, पर ऐसा ज़रूरी नहीं है. 21 साल की उम्र के बाद आपको जब भी लगे, आप अपनी वसीयत बना सकते हैं.

वसीयत के लिए क्या है ज़रूरी?

वसीयत बनाने के सबसे ज़रूरी स़िर्फ दो चीज़ें हैं

वसीयत बनानेवाला बालिग हो और

उसके नाम स्थायी या अस्थायी

संपत्ति हो.

कैसे बनाएं ख़ुद अपनी वसीयत?

लोगों में यह एक बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है कि यह एक क़ानूनी दस्तावेज़ है, तो इसे वकील से ही बनवाना चाहिए. आप अपनी वसीयत ख़ुद बना सकते हैं. हालांकि वसीयत के लिए किसी फॉर्मैट की ज़रूरत नहीं होती, फिर भी वसीयत बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें.

किसी प्लेन पेपर पर सबसे पहले दाईं तरफ़ तारीख़ लिखें, क्योंकि इसी से लेटेस्ट विल का पता चलेगा.

आपके हस्ताक्षर के बिना विल का कोई मतलब नहीं, इसलिए साफ़सुथरी हैंडराइटिंग में विल लिखकर नीचे साइन ज़रूर करें. ध्यान रहे, आपका हस्ताक्षर क्लीयर होना चाहिए.

आपकी वसीयत की प्रामाणिकता को सिद्ध करने के लिए दो गवाहों के हस्ताक्षर बहुत ज़रूरी हैं. हो सके तो अपने डॉक्टर और वकील को गवाह बनाएं. जहां डॉक्टर के हस्ताक्षर से यह सिद्ध हो जाएगा कि जिस व़क्त आपने यह वसीयत बनाई, आप अपने पूरे होशोहवास में थे, वहीं वकील को आप बतौर एक्ज़ीक्यूटर भी अपॉइंट कर सकते हैं.

अगर आप चाहें तो किसी भी भरोसेमंद व्यक्ति को एक्ज़ीक्यूटर अपॉइंट कर सकते हैं, जिसकी ज़िम्मेदारी आपकी विल को सही तरी़के से लागू करने की होगी.

अपनी पूरी प्रॉपर्टी का ब्योरा सहीसही व पूरी डिटेल्स के साथ लिखें, शॉर्टकट में न निपटाएं, जैसेफलां जगह के इतने एरिए का प्लॉट या फ्लैट आदि.

वसीयत बनाते समय एक बात का और ख़्याल रखें कि जो लोग इस दुनिया में हैं, स़िर्फ उन्हीं को आप अपनी वसीयत में शामिल कर सकते हैं. जो बच्चे इस दुनिया में आए भी नहीं, उन तक आप अपनी संपत्ति का मालिकाना हक़ नहीं पहुंचा सकते. मसलन, मेरी बेटी के बाद जो भी उसकी संतान होगी, उसे सारा मालिकाना हक़ मिले.

बैंक अकाउंट की रक़म वसीयत में लिखते समय बैंक अकाउंट की विस्तृत जानकारी दें. बैंक का नाम, अकाउंट नंबरब्रांच आदि.

अपने क़ानूनी वारिसों के बारे में साफ़साफ़ और पूरी जानकारी लिखें यानी उसका पूरा नाम, जिस नाम से वो ज़्यादा मशहूर हो (निक नेम), आपके साथ संबंध आदि.

अगर आप कुछ चैरिटी या दानधर्म करना चाहते हैं, तो किसे और कितनी रक़म देना चाहते हैं, उसकी पूरी जानकारी लिखें.

इसके अलावा अगर आपने किसी से कर्ज़ लिया है, तो उसे भी अपनी वसीयत में लिखें कि आपने फलां व्यक्ति से इतने पैसे उधार लिए हैं, जो आपके क़ानूनी वारिस को चुकाने होंगे. अगर वसीयत में दो क़ानूनी वारिस हैं, तो रक़म उनमें बराबर बंट जाएगी.

अपनी वसीयत को कोर्ट में रजिस्टर करें. मेट्रो शहर में रहते हैं, तो हाईकोर्ट, वरना डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में विल रजिस्टर करें.

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Guidelines To Make Your Own Will

किन बातों का रखें ख़्याल?

जब भी नई विल बनाएं, तो यह लिखना न भूलें कि यह आपकी लेटेस्ट और फाइनल विल है और इसके पहले की सभी विल्स अमान्य होंगी.

एक बात ध्यान रखें कि आप अपने किराए के मकान या दुकान को अपनी वसीयत में शामिल नहीं कर सकते.

वसीयत में आप स़िर्फ अधिकार ही नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारियां भी बांट सकते हैं. अगर आपके बच्चे छोटे हैं, तो अपनी विल में किसी भरोसेमंद व्यक्ति को उनका गार्जियन नियुक्त कर उन्हें ज़िम्मेदारी दे सकते हैं.

विल की दो कॉपीज़ बनवाएं और दोनों को दो अलग व सुरक्षित जगह रखें.

अगर आप जॉइंट फैमिली में रहते हैं, तो प्रॉपर्टी में आपका जितना हिस्सा है, स़िर्फ उतनी ही प्रॉपर्टी आप अपनी वसीयत में लिख सकते हैं.

बचें इन ग़लतियों से

अगर आपने वसीयत बना ली और न ख़ुद हस्ताक्षर किए और न ही गवाहों के हस्ताक्षर लिए, तो भला वो किस काम की. तो आप ये ग़लतियां न करें, वरना आपकी विल किसी काम की नहीं रहेगी.

तारीख़ के बिना वसीयत का कोई महत्व नहीं.

अपनी संपत्ति में होनेवाले अपडेट्स को वसीयत में भी अपडेट करना न भूलें.

वसीयत में सिर्फ़ निक नेम लिखने की ग़लती न करें, बल्कि व्यक्ति का पूरा नाम लिखें.

संपत्ति के बंटवारे के लिए सही अनुपात न लिखना भी एक ग़लती है यानी संपत्ति कितने प्रतिशत किसे मिलेगी या बराबर मिलेगी आदि लिखें.

भविष्य में आनेवाली पीढ़ी को वसीयत में शामिल नहीं किया जा सकता यानी अपनी संपत्ति को पीढ़ी दर पीढ़ी ट्रांसफर नहीं कर सकते.

जॉइंट अकाउंट को इग्नोर करने की ग़लती अक्सर लोग करते हैं. अगर बैंक में आपका जॉइंट अकाउंट है, तो उसके मुताबिक़ ही वसीयत बनाएं.

यूं बनाएं ई-विल

किसी भी ऑनलाइन वेबसाइट पर रजिस्टर करें.

यहां आप 3000 से 5000 में वसीयत बना सकते हैं.

वेबसाइट पर फॉर्म भरें और सारी सही जानकारी दें.

पूरी जानकारी कंप्लीट होने पर सबमिट बटन पर क्लिक करें.

आपकी विल का ड्राफ्ट तैयार हो गया है. इस ड्राफ्ट को वेबसाइट से जुड़े वकील की मदद से पूरा किया जाएगा, ताकि कहीं कोई चूक न हो.

वेबसाइटवाले आपको एक रफ ड्राफ्ट भेजेंगे, ताकि कोई ग़लती हो, तो आप उसे सुधार सकें.

आपके द्वारा भेजे गए फाइनल ड्राफ्ट को अमलीजामा पहनाकर हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी दोनों आपको भेजी जाएगी.

जब आपको विल मिल जाए, तो दो गवाहों की मौजूदगी में उस पर हस्ताक्षर करें.

एनएसडीएल (NSDL) का ईज़ी विल (Easy Will), एसबीआई कैप ट्रस्टी कंपनी आदि ईविल सर्विस मुहैया कराती हैं.

अनीता सिंह

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महिलाएं डर को कहें नाः अपनाएं ये सेल्फ डिफेंस रूल्स (Safety Rules: Women’s Self Defence Tips)

Women's Self Defence Tips
तमाम एहतियात और शोर-शराबे के बावजूद महिलाओं के साथ अपराध और यौन शोषण की घटनाएं कम नहीं हो रहीं. लेकिन डर के साथ तो जीया नहीं जा सकता ना, ना ही दुर्घटना होने का इंतज़ार किया जा सकता है. इसलिए बेहतर होगा कि हर महिला अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ख़ुद ले. हमेशा सतर्क रहे और हर स्थिति से लड़ने के लिए तैयार भी.

Women's Self Defence Tips

अलर्ट रहें

  • हमेशा अलर्ट रहें. ये सोचकर लापरवाह न बनी रहें कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
  • अजनबी लोगों पर कभी भरोसा न करें. ऐसे लोगों के साथ ट्रैवल भी न करें. ये आपके लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं.
  • जब भी अकेली हों, सावधान रहें. आपकी बॉडी लैंग्वेज और चाल में भी कॉन्फ़िडेंस होना चाहिए.
  • रात में अकेले बाहर जाना रिस्की है, इसलिए हमेशा ग्रुप में ही बाहर जाएं.
  • शॉर्टकट के चक्कर में सुनसान रास्ते पर जाने से बचें. यहां दुर्घटना होने का ख़तरा ज़्यादा होता है.
  • अगर रात में लिफ्ट में जाना सेफ नहीं लग रहा, तो बेहतर है सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें.
  • अगर आपको लगे कि कोई आपका पीछा कर रहा है, तो फ़ौरन रास्ता बदल दें. किसी भीड़भाड़वाले रास्ते पर मुड़ जाएं.
  • किसी अजनबी से लिफ्ट लेना भी रिस्की हो सकता है. ऐसा न करें.
  • रास्ते में मोबाइल पर बातें करते हुए या म्यूज़िक सुनते हुए न चलें. आपके आसपास कौन क्या बातें कर रहा है, उसके प्रति अलर्ट रहें.
  • ख़ुद ही अपने को प्रोटेक्ट करें. भीड़ से बचने के लिए अपना बैग, बुक्स या फोल्डर को शील्ड के तौर पर इस्तेमाल करें.
  • ज़्यादातर अपराधी अपराध करने के पहले कुछ दिनों या कुछ महीनों तक अपने टारगेट पर नज़र रखते हैं, ताकि उसका रूटीन जान सकें. इसलिए किसी भी अनहोनी से बचने के लिए बेहतर होगा कि अपना रूटीन थोड़े-थोड़े दिनों में बदलते रहें. स्कूल-कॉलेज जाने का रास्ता हो, जिम-ऑफिस का या फिर शॉपिंग का- हमेशा एक ही रास्ते पर न जाएं. थोड़े-थोड़े दिनों में अपना रूट और टाइम बदलती रहें.
  • कभी-कभी अपने फ्रेंड्स या ग्रुप को भी साथ ले जाएं, ताकि किसी को ये न लगे कि आप अकेली हैं.

अगर अकेले ट्रैवल कर रही हैं

  • अपना ट्रिप एडवांस में ही प्लान कर लें और जहां जा रही हैं, जिस होटल में रुक रही हैं, वहां की सेफ्टी के प्रति पूरी तरह आश्‍वस्त हो जाने के बाद ही ट्रिप फाइनल करें.
  • आजकल कई टूऱिज़्म कंपनियां अकेली महिलाओं के लिए अलग से टूर पैकेज देती हैं, जिसमें उनकी सुरक्षा की एक्स्ट्रा केयर की जाती है. बेहतर होगा कि आप भी ऐसा ही कोई पैकेज लें.
  • ट्रैवलिंग के दौरान किसी अजनबी या सहयात्री से अपना फोन नंबर या कोई और डिटेल शेयर न करें, भले ही आपकी उससे कितनी भी अच्छी दोस्ती क्यों न हो गई हो. ये कई बार रिस्की भी हो सकता है.
  • हमेशा एक्स्ट्रा पैसे साथ में ज़रूर रखें. ये इमर्जेंसी में आपके बहुत काम आएंगे.
  • इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स की एक लिस्ट अपने पास रखें. मोबाइल फोन के अलावा इसे एक या दो जगह और नोट करके रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप इसका इस्तेमाल कर सकें.
  • बहुत ज़्यादा एडवेंचर के चक्कर में न पड़ें. रात में अकेले अनजान जगह पर घूमने का साहस न दिखाएं. जहां भी घूमना चाहती हैं, दिन में ही घूम लें. आपकी सेफ्टी के लिए ये ज़रूरी है.

ऑफिस से लेट नाइट निकल रही हों

  • अगर कोई पिकअप करने आ रहा है या आपने कोई गाड़ी बुक की है, तो उसके पहुंचने तक इनडोर ही इंतज़ार करें. ऑफिस गेट से बाहर इंतज़ार न करें.
  • सिक्योरिटी गार्ड से कहें कि वो सारी लाइट्स ऑन ही रखे.
  • अगर कोई घूरते हुए या संदेहास्पद स्थिति में नज़र आए, तो फ़ौरन एक्शन लें. पर्स में पेपर स्प्रे भी साथ रखें.
  • ऑफिस के किसी कलीग का बर्ताव भी ठीक न लगे, तो चुप बैठने की ग़लती न करें. तुरंत उसकी शिकायत टॉप ऑथोरिटीज़ से करें. ऐसा करके आप दूसरी महिलाओं की सेफ्टी भी सुनिश्‍चित कर सकेंगी.

रात में अकेले टैक्सी या ऑटो से सफ़र कर रही हों

  • सबसे पहले परिवार के किसी सदस्य या फ्रेंड को बता दें कि आप कहां जा रही हैं और कब तक लौटेंगी.
  • गाड़ी में बैठने से पहले ही टैक्सी ड्राइवर और टैक्सी के नंबर प्लेट की फोटो क्लिक कर लेें और उसे परिवार या फ्रेंड को भेज दें. ध्यान रखें कि ड्राइवर को पता चलना चाहिए कि आप ऐसा कर रही हैं.
  • फोन पर ज़ोर से बात करते हुए बताएं कि आप कहां पहुंची हैं, कैसे ट्रैवल कर रही हैं आदि. इससे ड्राइवर आपको किसी भी तरह का कोई नुक़सान पहुंचाने की हिम्मत नहीं करेगा.
  • जिस रास्ते से परिचित हों, ड्राइवर से वही रूट अपनाने को कहें. किसी शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें. अगर आपको रास्ता नहीं पता है तो किसी ऐप की सहायता लें. जीपीएस ऑन रखें. ये आपको एकदम सही रूट की ओर गाइड करेगा.

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अगर अकेली रहती हों

कभी करियर की चाह, तो कभी पढ़ाई के लिए कई बार अकेले रहना मजबूरी बन जाता है. ऐसी स्थिति में बड़ी चुनौती है अपनी सेफ्टी यानी आत्मरक्षा. ये उतना मुश्किल भी नहीं बशर्ते आप कुछ एहतियात बरतें.

  • अकेली रहने के लिए सबसे पहले तो जिस एरिया में घर लेने जा रही हैं या रह रही हैं, उसका सुरक्षित होना ज़रूरी है. अच्छी तरह तहक़ीक़ात करने के बाद ही घर फाइनल करें.
  • ये भी सुनिश्‍चित कर लें कि आपकी सोसाइटी द्वारा अपॉइंट किए गए सिक्योरिटी गार्ड्स का बैकग्राउंड वगैरह चेक करने के बाद ही उन्हें अपॉइंट किया गया है या आपकी सोसाइटी ने लाइसेंस्ड सिक्योरिटी सर्विस की ही सेवा ली है.
  • घर के कामों के लिए मेड रखते समय उसकी भी ठीक से जांच-पड़ताल कर लें और उससे संबंधित सारी जानकारी पुलिस में रजिस्टर कर दें.
  • सेफ्टी डोर ज़रूर लगवाएं.
  • किसी अजनबी को घर में न आने दें, ख़ासकर तब जब आप घर पर अकेली हों.
  • पड़ोसियों से मधुर संबंध बनाकर रखें. कुछ इमर्जेंसी पड़ने पर सबसे पहले पड़ोसी ही सहायता के लिए पहुंचते हैं.
  • सोसाइटी में सीसीटीवी कैमरे लगवाएं. इसमें थोड़ा ख़र्च ज़रूर लगेगा, लेकिन आपकी सेफ्टी के लिए ये ज़रूरी है.

सीखें सेल्फ डिफेंस

  • सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा के कुछ तरी़के सीख लें.
  • किसी हमले की हालत में अटैकर की आंखों में उंगलियों से वार करें.
  • हथेली का कप बनाकर कानों पर मारें या उसके घुटनों पर किक करें.
  • कभी किसी के चेहरे पर मुक्के से न मारें. उसके दांतों से आप ख़ुद घायल हो सकती हैं. इसकी बजाय कुहनी का इस्तेमाल करें.
  • इन ट्रिक्स को आज़माएंगी, तो आपको इतना टाइम मिल जाएगा कि आप वहां से बच निकलें.

सहायता के लिए फोन करें

  • मोबाइल फोन हमेशा चार्ज रखें. किसी भी इमर्जेंसी की स्थिति में आप फोन करके सहायता मांग सकती हैं.
  • कुछ इमर्जेंसी कॉन्टैक्ट को स्पीड डायल में सेव करके रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर तुरंत फोन कर सकें.
  • 100 नंबर पर कॉल करें. कई हेल्पलाइन भी ख़ास आपकी मदद के लिए बनाए गए हैं. इन्हें अपने मोबाइल में सेव करके रखें.

चुप न रहें, आवाज़ उठाएं

अगर कोई आपको परेशान कर रहा हो, तो चुप न बैठें, न ही ये सोचें कि चुप बैठने या कोई एक्शन न लेने से मामला ख़ुद सुलझ जाएगा. ये भी न सोचें कि आप उसे अकेली हैंडल कर लेंगी. ऐसी स्थिति में अपनी सोसाइटी, टीचर्स, पैरेंट्स, फैमिली, ऑफिस और आवश्यक हो, तो पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराएं. किसी अनहोनी के होने का इंतज़ार न करें. फ़ौरन एक्शन लें.

लें सेल्फ डिफेंस टेस्ट

आप अपनी सुरक्षा को लेकर कितनी जागरूक हैं और मुसीबत के समय हालात से लड़ने के लिए कितनी तैयार,  ये जानने के लिए इस क्विज़ में हिस्सा लें.

  • क्या आप अपने साथ हमेशा पेपर स्प्रे, स्विस नाइफ या कोई और सेल्फ डिफेंस टूल कैरी करती हैं?
  • क्या आपको कोई ऐसा वुमन हेल्पलाइन नंबर याद है या आपके फोन में सेव है, जिसका इमर्जेंसी के समय आप इस्तेमाल कर सकती हैं?
  • क्या आपके मोबाइल फोन में कोई लेटेस्ट सेफ्टी ऐप इंस्टॉल है?
  • आप अपने घर के दरवाज़े का लॉक हमेशा बदलती रहती हैं या आप बेहतर लॉकिंग सिस्टम लगाने की सोच रही हैं?
  • घर में अकेली होने पर आप सेल्समैन, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर या किसी अजनबी को घर में आने की इजाज़त नहीं देतीं.

जानें अपना स्कोर- अगर आपके तीन या उससे ज़्यादा के जवाब ‘हां’ हैं, तो आप अपनी सेफ्टी को लेकर काफ़ी अलर्ट हैं. अगर तीन से कम ‘हां’ है, तो अब भी देरी नहीं हुई है. आपको अपनी सेफ्टी को लेकर एक्स्ट्रा केयरफुल होने की ज़रूरत है और इसकी शुरुआत आपको आज से ही करनी होगी.

क्या काम करने के इन 5 नियमों को जानते हैं आप? (5 Work rules for career growth)

Career growth

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करियर में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है कि आप ऑफिस में बताए गए सभी रूल्स को फॉलो करें. वर्क रूल्स फॉलो करने से आपका काम भी ठीक रहेगा और ऑफिस का माहौल भी. ऐसे में तरक्क़ी करने के चांस भी ज़्यादा होंगे. वर्कप्लेस पर अपना रूल्स न बनाएं. इससे बॉस और आपको दोनों को नुक़सान होगा. ऑफिस चाहे छोटा हो बड़ा, उसके नियमों का पालन आपको करना ही चाहिए. वहां काम करने के रूल्स को आप बदल नहीं सकते. हां, अगर आपको किसी चीज़ से परहेज़ है, तो उसके लिए बॉस से बात करें. क्या हैं ऑफिस में काम करने के नियम? आइए, जानते हैं.

रूल नं 1- माइंड योर बिज़नेस
जी हां, वर्कप्लेस पर काम करने का पहला रूल है कि आप अपने काम से काम रखें. किसी दूसरे के काम में टांग अड़ाने की ज़रूरत नहीं है. इससे आपका ही नुक़सान होता है. एक तो आपकी रेप्युटेशन ख़राब होती है और दूसरे आपका काम पीछे रह जाता है. दूसरे आपसे आगे निकल जाते हैं.

रूल नं 2- अपनी पोस्ट का ख़्याल
आमतौर पर ऑफिस के प्यून भी जब आपस में बात करते हैं, तो ख़ुद को बॉस ही समझते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि बॉस को उनके हिसाब से चलना चाहिए. आपकी मानसिकता भी अगर कुछ ऐसी ही है, तो इससे बचिए. जिस पोस्ट पर काम कर रहे हैं, उसके हिसाब से ही बात कीजिए. अपने सीनियर्स की बुराई कीजिए, लेकिन ऐसा कभी मत कहिए कि सारा काम तो आप ही करते हैं, वो तो बस गॉसिप करते हैं.

रूल नं 3- सेल्फ मार्केटिंग
अगर आपको लगता होगा कि अपनी सेल्फ मार्केटिंग करके आप बॉस के दिमाग़ में अपनी अच्छी इमेज डाल देंगे, लेकिन कुछ समय के बाद आपके बार-बार ऐसा करने पर सबको आपकी सच्चाई पता चल जाती है. अगर आप काम में अच्छे हैं, तो भी सेल्फ मार्केटिंग इतनी मत कीजिए कि कंपनी का प्रोफाइल आपसे नीचे हो जाए.

रूल नं 4- नो वर्क प्रेशर
ऐसा नहीं है कि सारे वर्क रूल्स आपको ही फॉलो करने होते हैं. ऑफिस के सीनियर्स के लिए भी रूल्स हैं. उन्हें भी इसको फॉलो करना चाहिए. ऑफिस में वर्क प्रेशर न बनाना, वर्क रूल्स का अहम हिस्सा है. प्रेशर में न तो काम किया जा सकता है और न ही किसी से काम कराया जा सकता है

रूल नं 5- ब्रेक टाइम
हर ऑफिस का अपना नियम होता है. आप जहां भी काम करें उसके अनुसार ही करें. ख़ुद को ऑफिस रूल्स से बढ़कर न समझें. ऑफिस में लंच ब्रेक, टी ब्रेक आदि का एक टाइम निश्‍चित होता है. आपको उनके अनुसार ही काम करना चाहिए. कभी भी इस टाइम को क्रॉस न करें. इससे आपकी रेप्युटेशन डाउन हो सकती है.

क्या आप जानते हैं?
नौकरीपेशा लोगों के लिए पुर्तगाल किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां के एंप्लॉयमेंट लॉ में किसी एंप्लाई को टर्मिनेट करने का क़ानून नहीं है. बॉस वहां से किसी को फायर नहीं कर सकता. हां, अगर किसी एंप्लॉई के साथ नहीं जम रही है, तो कंपनी को उसे एक हैंडसम रेज़िगनेशन पैकेज ऑफर करना होता है.

– श्वेता सिंह

रेज़्युमे लिखने के 5 रूल्स (5 Amazing and useful resume writing rules )

resume writing rules

resume writing rules
नई नौकरी पाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि एक परफेक्ट बायोडाटा बनाया जाए. बायोडाटा सही न होने पर कई बार इंप्रेशन अच्छा नहीं पड़ता और नौकरी मिलते-मिलते रह जाती है. क्या आप भी नई जॉब के लिए ट्राई करनेवाले हैं. ऐसे में बायोडाटा अपडेट करना बहुत ज़रूरी है. रेज़्युमे अपडेट करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. क्या हैं वो रूल्स? आइए, जानते हैं.

1. शार्ट
सबसे पहली शर्त है कि बायोडाटा बहुत लंबा नहीं होना चाहिए. इससे आपका इंप्रेशन अच्छा नहीं पड़ता. हो सके तो एक ही पेज का बायोडाटा बनाएं. जानबूझकर स्पेस न रखें. फॉन्ट मीडियम रखें. पेज पर ज़्यादा गैपिंग न दिखे. एक पेज में ही सारी जानकारी लिख दें. इससे बायोडाटा पढ़नेवाला कम समय में आपके बारे में ज़्यादा जानकारी पा जाता है.

2. डिटेल में लिखें
बायोडाटा जब किसी के सामने जाता है, तो पेपर पर आपकी पूरी जानकारी होनी चाहिए. ऐसा न करें कि कुछ बातें लिखें और कुछ न लिखें. अपनी क़ाबिलियत की पूरी जानकारी उसमे ुंलिख दें, क्योंकि ये बायोडाटा ही आपकी छवि उपस्थित करता है. ऐसे में कुछ भी बाद के लिए न रखें.

3. लिखावट का रखें ध्यान
आमतौर पर रेज़्युमे अंग्रेज़ी में ही लिखा जाता है. ऐसे में अगर आपकी अंग्रेज़ी ठीक नहीं है, तो किसी एक्सपर्ट से बनवाएं. लिखते समय टेंस की ग़लती न करें. बहुत ज़्यादा क्रिएटिव बनने के चक्कर में ग़लती हो सकती है. एक बार बायोडाटा बनाने के बाद किसी ऐसे दोस्त को दिखाएं, जिसे अंग्रेज़ी आती हो सके, तो ऑनलाइन कुछ रेज़्युमे सैंपल देखें.

4. सेविंग का सही तरीक़ा
रेज़्युमे बनाने के बाद उसे जब सेव करें, तो सही नाम दें. कई बार सीवी सेव करते समय हम कुछ भी नाम दे देते हैं. ऐसे में जब वही बायोडाटा आप मेल में अटैच करते हैं, तो नाम अलग जाता है. इससे बता नहीं लग पाता कि रेज़्युमे किसका है. जब भी फाइल अटैच करें, उसका सही नाम दें. बेहतर होगा कि अपना फर्स्ट नेम और लास्ट नेम के नाम से फाइल सेव करें.

5. सिंपल इंग्लिश
रेज़्युमे बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि बहुत डिफिकल्ट इंग्लिश न लिखें. बहुत ज़्यादा फ्रेज़ का यूज़ न करें. जो भी लिखना चाहते हैं, उसे सिंपली ही लिखिए. जितनी सिंपल लिखावट होगी, उतनी ही इंप्रेशन लोगों पर पड़ेगा. ऐसा न लिखें कि पढ़नेवालों को डिक्शनरी लेकर बैठना पड़े.

स्मार्ट टिप्स
 वर्ड फाइल भेजने की बजाय पीडीएफ फाइल बनाकर भेजें.
  बुलेट्स और नंबर का यूज़ करें.
  बोल्ड, इटैलिक यूज़ करें.
  बायोडाटा में आई, मी, माई का कम यूज़ करें.

श्वेता सिंह 

33 स्मार्ट होम डेकोर रूल्स (33 Smart Home decor Rules)

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यह बात सच है कि हमें अपने घर में जो सुकून मिलता है, वो दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलता. ऐसे में हम सभी चाहते हैं कि हमारा घर हो कुछ ख़ास, कुछ अलग. तो बिना देर किए ये ईज़ी होम डेकोर रूल्स अपनाइए और अपने घर को सबसे हसीं बनाइए.

 

* घर में बहुत सारा फ़र्नीचर न इकट्ठा करें, इससे घर म्यूज़ियम नज़र आने लगता है.

* यदि घर छोटा है, तो पेंटिंग आइडियाज़ से आप घर को बड़ा लुक दे सकते हैं. लिविंग रूम की सारी दीवारें और सीलिंग व्हाइट रखें. चाहें तो फ्लोरिंग  भी व्हाइट ही रखी जा सकती है.

* व्हाइट कलर के साथ ब्लू, पिंक, ऑरेंज, रेड, सिल्वर, ब्लैक आदि में से किसी एक कलर का कॉम्बिनेशन ट्राई करके कमरे को अलग थीम भी दे  सकते हैं.

* कुशन, कर्टन, सोफ़ा कवर आदि के प्रिंट्स व डिज़ाइन्स बहुत बड़े नहीं होने चाहिए. हमेशा छोटे प्रिंट्स ही सिलेक्ट करें, क्योंकि छोटे प्रिंट्स के प्रयोग    से कमरा बड़ा नज़र आता है.

* होम डेकोर में कुशन, कर्टन, बेड कवर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि इनसे आप कम समय में घर का मेकओवर कर सकते हैं,  इसलिए अलग-अलग ओकेज़न के लिए इनका ख़ास कलेक्शन रखें.

* ट्रांसपरेंट कर्टन भी घर को रिच लुक देते हैं.

* कर्टन की लंबाई सीलिंग से फ्लोर तक रखें. इससे रॉयल लुक मिलता है.

* बेडशीट्स के लिए ब्राइट और बोल्ड कलर अच्छा ऑप्शन है.

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* एथनिक फ्रेमवाला बड़ा-सा आईना आपके वॉल डेकोर को न्यू लुक दे सकता है.

* अगर दीवारों पर सॉफ्ट कलर का पेंट है, तो एक्सेसरीज़ ब्राइट कलर की रखें. और अगर दीवारों का कलर हाईलाइट करना हो, तो एक्सेसरीज़ सॉफ्ट  रखें. इससे घर को बैलेंस्ड लुक मिलता है.

* अगर आप घर को कंटेम्प्रेरी लुक देना चाहते हैं, तो रॉट आयरन के फर्नीचर का ज़्यादा से ज़्यादा प्रयोग करें.

* जूट के फर्नीचर भी घर को कंटेम्प्रेरी लुक देने में आपके काम आ सकते हैं.

* लाइट कलर की प्लेन दीवार पर ब्राइट कलर का ट्रेडिशनल वॉल पीस सजाएं.

* घर छोटा है, तो सेमी प्राइवेट एरिया क्रिएट करने के लिए बीडेड कर्टन का प्रयोग करें.

* घर में बेकार पड़ी बॉटल्स को मनपसंद डिज़ाइन में ब्राइट कलर्स से पेंट करें, फिर इनके अंदर प्लेन व्हाइट या मनपसंद कलर की कैंडल्स जलाएं और   घर के एक कॉर्नर पर सजा दें.

* अगर डेकोर को रोमांटिक लुक देना हो, तो किसी फैब्रिक पर पार्टनर और अपनी फोटो प्रिंट करवाकर उसका कुशन कवर बनवा लें.

* कमरे में भीनी-भीनी ख़ुशबू के लिए गुलाब, लिली और ट्यूलिप फ्लावर्स के बंच सजाकर रखें.

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* लाइटिंग का चुनाव करते वक़्त भी ज़रूरत और ओकेज़न का ख़्याल रखना ज़रूरी है. रेग्युलर यूज़ के लिए सॉफ्ट लाइटिंग का प्रयोग करें, ताकि आंखों   पर ज़ोर न पड़े.

* मूड लाइटिंग के लिए लेड का प्रयोग करें, क्योंकि ये कम पावरवाले होते हैं.

* ख़ास मौक़ों के लिए डेकोरेटिव लाइटिंग का प्रयोग करें. इसके लिए वॉल लाइट्स या टेबल लैंप का प्रयोग किया जा सकता है.

* डिमर्स का प्रयोग भी किया जा सकता है. यह आपको एक ही लाइटिंग अरेंजमेंट में अलग-अगल इफेक्ट व मूड का मज़ा दे सकते हैं.

* फर्नीचर या डेकोरेटिव एक्सेसरीज़ को हाईलाइट करने के लिए हेलोजेन लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है.

* कुछ अलग करने के लिए दो या ज़्यादा तरह की लाइट्स का प्रयोग करें. ऐसा करते समय कलर कॉम्बिनेशन का ख़ास ध्यान रखें, ताकि लाइट का  ख़ूबसूरत इ़फेक्ट देखने को मिले.

* आप टेबल डेकोर से भी लुक बदल सकते हैं. फॉर्मल लुक के लिए लिनेन के एम्ब्रॉयडर्ड टेबल क्लॉथ का प्रयोग किया जा सकता है.

* एलिगेंट टेबल मैट्स, नैपकिन रिंग, कैंडल स्टैंड आदि से डायनिंग टेबल को न्यू लुक दिया जा सकता है.

* डायनिंग टेबल पर डेकोरेटिव कैंडल्स, फ्रेश फ्लावर्स आदि का प्रयोग भी किया जा सकता है.

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* बच्चों के कमरे को डेकोरेट करने के लिए भी आपको थोड़ा क्रिएटिव होना पड़ेगा. बच्चे बहुत इमैजिनेटिव होते हैं, इसलिए उनके कमरे को उनकी  पसंद के अनुसार सजाएं.

* बच्चों के कमरे में पेंट कराते समय ब्राइट कलर्स, जैसे- ब्लू, पिंक, यलो, पर्पल, ऑरेंज आदि को प्राथमिकता दें.

* बच्चों के कमरे की दीवार पर उनकी पसंद के कार्टून कैरेक्टर के स्टिकर भी लगाए जा सकते हैं.

* बच्चों के कमरे की किसी एक दीवार पर पॉज़ीटिव मैसेज या जानकारी देनेवाले संदेश लगाएं, इससे उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि जागेगी और जानकारी  भी मिलेगी.

* बच्चे के कमरे की एक दीवार पर उसकी बहुत सारी तस्वीरें फ्रेम करके लगाएं.

* बच्चों के कमरे में कम से कम फ़र्नीचर रखें, ताकि उन्हें खेलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.

* बच्चों की बेडशीट के लिए एनिमल, फ्लोरल, ग्राफिक डिज़ाइन्स या राजस्थानी प्रिंटवाले बेडशीट अच्छे होते हैं.

वर्क फ्रॉम होम के लिए 6 रूल्स (6 rules for work from home)

work from home

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घर से काम करना धीरे-धीरे ट्रेंड बनता जा रहा है. लोग ऑफिस में 8 घंटे वेस्ट करने की बजाय ऐसे काम को ज़्यादा पसंद करने लगे हैं, जो घर से हो सके. ऐसे में उनका बहुत सारा समय बचने के साथ-साथ घर के काम भी हो जाते हैं. वर्क फ्रॉम होम ख़ास तौर से महिलाओं के लिए ईज़ी और बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. क्या आप भी वर्क फ्रॉम होम में विश्‍वास करते हैं? अगर हां, तो घर से काम करते समय ध्यान रखें इन बातों का, ताकि काम हो परफेक्ट और आप रहें रिफ्रेश.

फुल फ्रेशनेस
अगर आप सोच रहे हैं कि घर से काम का मतलब है कि बिना ब्रश किए, बेड पर पड़े ही काम शुरू कर दें, तो ये भले ही आपका समय बचाएगा, लेकिन आपका माइंड पूरी तरह से फ्रेश नहीं रहेगा. काम में परफेक्शन और फ्रेशनेस के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप सुबह अपना रुटीन फॉलो करने के बाद ही काम शुरू करें.

वेल ड्रेसअप
पढ़कर भले ही आपको हंसी छूट रही हो, लेकिन ये सच है. ज़रा सोचिए, ऑफिस जाते समय आप कितनी बार मिरर में ख़ुद को देखते हैं और एक नहीं, बल्कि कई बार तो 2-3 ड्रेस बदलकर भी देखते हैं. ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह से आप फ्रेश और एनर्जेटिक रहते हैं. फुल मोटीवेशन के साथ काम शुरू करते हैं. मन में उत्साह रहता है, जिसका असर काम पर दिखाई देता है. अगली बार जब भी घर से काम करने की सोचें, तो इस बात को फॉलो करके देखें. काम पर इसका असर दिखेगा.

राइट प्लेस
ऑफिस में हर एंप्लॉई की एक जगह होती है. जब तक आप काम करते हैं एक ही डेस्क पर. ऐसे में आप उस जगह से फेमिलियर हो जाते हैं. वहीं बैठते ही आपको काम करने की आदत अपने आप आ जाती है. इसी तरह घर पर भी एक जगह निश्‍चित कर लें. बार-बार जगह बदलने से काम सही समय पर पूरा नहीं होता और साथ में आप डिस्टर्ब भी होते हैं.

नो घर का काम
जी हां, ऑफिस का काम घर से शुरू करना इतना आसान नहीं होता. परिवार बार-बार आपको डिस्टर्ब कर सकता है. महिलाओं के मामले में ये और भी मुश्किल हो जाता है. महिलाएं घर से काम करने पर ज़्यादा समय घर के काम के बारे में सोचती रहती हैं. काम के बीच में उठकर कभी वो कपड़े धोने की सोचती हैं, तो कभी ख़ुद के लिए चाय बनाने की, ये छोटे-छोटे काम बहुत डिस्टर्ब करते हैं. आप इन चीज़ों से बचें.

ज़रूरी है लंच टाइम
जिस तरह से ऑफिस में काम करते समय एक सही समय पर आप लंच ब्रेक लेते हैं, ठीक उसी तरह घर पर भी आपको काम के बीच में लंच ब्रेक लेना चाहिए. इससे आपका काम बाधित नहीं होता. बिना टाइम के लंच ब्रेक न लें.

टेम्पटेंशन को रखें साइड में
ये बहुत ही प्रैक्टिकल है. घर से काम करने पर बगल में ही स्नैक्स का डिब्बा रखने वालों में से हैं, तो घर से काम करना आपके लिए ठीक नहीं है. ऐसा करने से आप ज़्यादा खा लेते हैं और इसका असर आपकी बॉडी पर पड़ता है. इतना ही नहीं कुछ लोग तो काम पर कम और फ्रिज के पास ज़्यादा दिखते हैं. कभी सॉफ्ट ड्रिंक्स, कभी वेफर्स, तो कभी फ्रूट जूस. इन चीज़ों से आप बचें.

इन 6 रूल्स को फॉलो करके आप वर्क फ्रॉम होम में सफल हो सकते हैं. तो देर किस बात की, बस अपनाइए ये रूल्स और घर बैठे करिए काम.

श्वेता सिंह 

बदल गए हैं वैवाहिक जीवन के नियम (The Changing Meaning Of Marriage)

Changing Meaning Of Marriage

कहने को तो आज भी कहा यही जाता है कि Marriage यानी शादी जन्म-जन्मांतर का साथ है, लेकिन सच्चाई यही है कि व़क्त के साथ इस सोच में बदलाव (Changing Meaning Of Marriage) ज़रूर आया है. अब जन्मों की बातें लोग नहीं सोचते, कोशिश यही होती है कि इस जन्म में सच्चे दोस्त व समझदार साथी के रूप में हंसी-ख़ुशी जीवन बीते. मॉडर्न होते समाज में अब विवाह व वैवाहिक जीवन के नियमों को भी काफ़ी हद तक बदल दिया है. कैसे? आइए जानें-

Changing Meaning Of Marriage
– पारंपरिक सोच यह होती थी कि लड़के की बजाय लड़के के घर व खानदान को देखा जाता था. लड़का अगर नौकरी नहीं भी कर रहा, तो उसके खानदान व घर को देखकर शादी तय कर दी जाती थी, लेकिन आज सबसे पहले लड़के का काबिलीयत देखी जाती है.

– लड़का अच्छी नौकरी पर है कि नहीं, पढ़ा-लिखा व समझदार है, तो भले ही घर से उतना संपन्न नहीं है, तब भी बेझिझक शादी तय हो जाती है.

– पैरेंट्स की बजाय लड़के-लड़कियों की मर्ज़ी व पसंद-नापसंद का ख़्याल अब रखा जाता है.

– लड़कियां भी अब खुलकर अपनी सोच व पसंद रखने लगी हैं.

– शादी के बाद अब ज़िम्मेदारियां व काम का बंटवारा समान रूप से किया जाता है.

– अगर कुछ ग़लत है, तो बहुएं अपने हक़ के लिए आवाज़ भी उठाती हैं और संघर्ष भी करती हैं.

– आज कपल्स विवाह को भावनात्मक पूर्ति का साधन अधिक मानते हैं, बजाय परंपरा या शारीरिक पूर्ति का ज़रिया समझने के.

– शादी में अब किसी एक पार्टनर का आधिपत्य नहीं रह गया है, दोनों समान रूप से अपनी अहमियत दर्शाते व समझते हैं.

– शादी में भी पर्सनल स्पेस को अब महत्व दिया जाता है. कपल्स भी समझते हैं कि दो जिस्म एक जान का कॉन्सेप्ट अब पुराना हो गया. दो जिस्म हैं, तो दो जानें और दो अलग-अलग सोच भी होगी. ऐसे में पर्सनल स्पेस दोनों ही के लिए कितना ज़रूरी है यह सभी जानते हैं और उसका सम्मान करते हैं.

– अगर दो अलग-अलग माहौल में पले-बढ़े लोग एक साथ जीवन गुज़ारेंगे, तो ज़ाहिर है झगड़े व विवाद भी होंगे. इसे अब कपल्स समझदारी से लेते हैं. वे जानते हैं कि ये वैवाहिक जीवन का हिस्सा है.

– इन विवादों को निपटाने के लिए वो परिपक्व सोच रखते हैं.

– शोषण के ख़िलाफ़ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी अपनाते हैं, फिर चाहे वो शारीरिक शोषण हो, भावनात्मक हो, मानसिक हो या सेक्सुअल.

– सेक्सुअल इंटिमेसी को भी महत्व देते हैं. अपनी इच्छाओं को अब लड़कियां भी दबाती नहीं हैं. सेक्स पर खुलकर बात करती हैं. पार्टनर को बताती हैं कि वो क्या चाहती हैं. पुरुष भी इसे अब ग़लत नहीं मानते. वो भी पत्नी का पूरा सहयोग चाहते हैं.

– कम्यूनिकेशन को महत्व देते हैं. बात मन में दबाकर रखने की बजाय बोल देने को ज़्यादा ज़रूरी मानते हैं.

– अलग-अलग छुट्टियां मनाने को ग़लत नहीं मानते. अगर कपल्स हनीमून पर नहीं हैं, तो उन्हें कोई समस्या नहीं कि दोनों पार्टनर अपने दोस्तों या अन्य रिश्तेदारों के साथ अलग-अलग हॉलीडे, शॉपिंग, डिनर या मूवी प्लान करे.

– हाल ही में एक शोध से यह बात सामने आई है कि जॉइंट बैंक अकाउंट के बदले अब वर्किंग अलग-अलग अकाउंट्स रखना कपल्स अधिक पसंद करते हैं. ऐसा नहीं है कि उन्हें एक-दूसरे पर भरोसा नहीं, बल्कि आर्थिक मामलों में अब कपल्स स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं, उनके निर्णय भी स्वतंत्र होते हैं और बेवजह का हस्तक्षेप नहीं करते.

– अगर रिलेशनशिप में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा हो, तो प्रोफेशनल्स व एक्सपर्ट्स की मदद लेने से पीछे नहीं हटते.

– दोनों ही इस बात को जानते-समझते हैं कि डिवोर्स एक ज़ायज़ तरी़के ज़रूर है, लेकिन वो सबसे आख़िरी ऑप्शन होना चाहिए.

ये बातें बेटी को ज़रूर सिखाएं
  • ससुराल के प्रति कर्त्तव्य व अधिकार दोनों ही बताएं.
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता का अर्थ ईगो बढ़ा लेना नहीं है. ये बात समझाएं.
  • बेटी को कहें कि स्वाभिमानी बने, लेकिन अभिमानी नहीं.
  • यदि अन्याय हो रहा हो, तो बेझिझक आवाज़ उठाए. अन्याय सहते रहना भी गुनाह है.
  • सास-ससुर को भी अपने पैरेंट्स जैसा ही सम्मान देना ज़रूरी है.
  • ख़ुद पहल करने से रिश्ते मधुर और बेहतर बनते हैं, इसलिए किसी भी मामले में पहल करने से पीछे न हटे.
  • अपनी कमाई का कुछ हिस्सा सास-ससुर को भी दे, क्योंकि इससे वो सम्मानित महसूस करते हैं.
  • बहुत ज़्यादा उम्मीदें पालकर ससुराल न जाए. प्रैक्टिकल अप्रोच रखे.
  • ससुरालवालों की भी उम्मीदें इतनी न बढ़ा दे कि बाद में भारी पड़ने लगे यानी हर काम, हर ज़िम्मेदारी का बोझ ख़ुद पर न डाले.
  • परफेक्ट बहू बनने की बजाय बेहतर बहू बनने की कोशिश करे.
  • पति से भी इतनी अपेक्षाएं न रखे कि वो पूरी न हो सके. सपनों के राजकुमार की बजाय पति में सच्चा हमसफ़र या बेहतर दोस्त ढूंढ़े.

– विजयलक्ष्मी

बचपन की आदतें भी प्रभावित करती हैं रिश्तों को (Childhood habits can effect your relationships)

Childhood habits can effect your relationships

बचपन के गलियारों से गुज़रते हुए जब हम युवावस्था की दहलीज़ पर पहुंचते हैं, तो हमारे संग होती हैं, कई अच्छी व बुरी आदतें (Childhood habits can effect your relationships). आदतें जो हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा होती हैं और जिनका हमारे रिश्तों पर गहरा असर पड़ता है. ऐसी ही कुछ आदतें हैं, जो हमारे वैवाहिक जीवन को कभी कड़वा, तो कभी मधुर बनाती हैं. इस बारे में हमने बात की मनोचिकित्सक डॉ. अणुकांत मित्तल से. आइए जानें, बचपन की आदतें जो प्रभावित करती हैं आपके वैवाहिक रिश्ते को.

Childhood habits can effect your relationships

आदतें और हम
बचपन से ही हम अपने आस-पास कई चीज़ों को देखते-सुनते हुए बड़े होते हैं और धीरे-धीरे उसे अपने व्यवहार में लाने की कोशिश करते हैं. चाहे-अनचाहे ये आदतें हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती हैं  और इन आदतों के कारण हम पहचाने जाने लगते हैं.

कहां से सीखते हैं आदतें?

– 0-6 साल तक के बच्चों पर उनके पैरेंट्स का बहुत प्रभाव रहता है. अपने पैरेंट्स को कॉपी करके बच्चे बहुत-सी आदतें सीखते हैं.

– 6-12 साल के बीच के बच्चों में कई आदतें विकसित होने लगती हैं. इस दौरान वो स्कूल में जो कुछ भी सीखते हैं, चाहे अच्छी आदतें या बुरी, अगर उन्हें उसमें बढ़ावा मिलता है, तो वे उसे अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेते हैं.

– 12-18 साल तक के बच्चे अपने दोस्तों की तरफ़ ज़्यादा अट्रैक्ट रहते हैं. उनके बीच एडजस्ट होने के लिए और पॉप्युलर बने रहने के लिए वे कई नई आदतें अपनाते हैं, तो कई पुरानी आदतें छोड़ भी देते हैं. चाहे आदतें जैसी भी हों, उनके लिए अपने पीयर ग्रुप में फेमस होना ही सबसे बड़ी बात होती है.

– 18 साल की उम्र तक बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो जाता है. हर चीज़ के प्रति उनका अपना नज़रिया होता है, जिसे बाद में बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में यह पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है कि 18 साल तक की उम्र के बच्चों को सही परवरिश दें, ताकि जीवन के प्रति उनका नज़रिया सकारात्मक व उत्साहवर्द्धक हो.

Childhood habits can effect your relationships

आदतें व उनके नकारात्मक प्रभाव

शेयरिंग न करने की आदत: बच्चे स्कूल में दोस्तों के बीच और घर में भाई-बहनों के साथ शेयरिंग की आदत सीखते हैं. लेकिन कुछ बच्चे इस आदत को अपना नहीं पाते, क्योंकि दूसरों के लिए त्याग करना या अपने अहं को छोड़ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता.

क्या प्रभाव पड़ता है: शादी के बाद अपने पार्टनर के साथ भी वे चीज़ें शेयर करना पसंद नहीं करते. पार्टनर का उनकी चीज़ों पर अधिकार जमाना उन्हें नागवार गुज़रता है, जिससे उनकी मैरिड लाइफ में प्रॉब्लम्स आती हैं.

झूठ बोलने की आदत: ग़लती करने पर अपनी ग़लती को छुपाने के लिए अगर बचपन से ही बच्चे को झूठ बोलने की आदत पड़ जाती है, तो वह उसके रिश्ते को भी प्रभावित करती है.

क्या प्रभाव पड़ता है: शादी के बाद पति-पत्नी अपनी छोटी-छोटी ग़लतियों को स्वीकार नहीं करते और अक्सर झूठ बोलते हैं. जो पार्टनर ख़ुद झूठ बोलता है, उसे लगता है कि दूसरा पार्टनर भी झूठ बोल रहा है और ऐसे में वो न कभी उस पर और न ही रिश्ते पर विश्‍वास कर पाता है.

परिवार के नियमों को ताक पर रखना: जिन बच्चों को बचपन से ही समाज और परिवार की सीमाओं और मर्यादाओं को टेस्ट करने या चुनौती देने की आदत होती है, वे बड़े होकर उन सीमाओं और मर्यादाओें को नहीं मानते.

क्या प्रभाव पड़ता है: अगर बचपन से ही बच्चे को रात में समय पर घर आना, सबके साथ खाना खाना, अपने कपड़े-जूते ख़ुद रखना जैसी आदतें न सीखने की बजाय अपनी मनमर्ज़ी करने देते हैं, तो शादी के बाद भी ये आदतें उनके वैवाहिक जीवन में खलल डाल सकती हैं. उनका जीवन अनुशासित नहीं होता.

उल्टा जवाब देने की आदत: बच्चों को बचपन से ही तहज़ीब और तमीज़ सिखाई जाती है. किससे किस तरह बात करनी चाहिए, किससे क्या कहना है, क्या नहीं कहना है, किसके साथ कैसा व्यवहार करना है? यदि ये आदतें न सीखने की बजाय बच्चा बदतमीज़ी से बात करना और उल्टा जवाब देना सीखेगा, तो शादी के बाद अपने पार्टनर से भी उसी तरह का व्यवहार करेगा.

क्या प्रभाव पड़ता है: पार्टनर को उल्टा जवाब देना, उसे नीचा दिखाने की कोशिश करना और अपनी बात को ऊपर रखना- ऐसे लोगों की आदतों में शामिल हो जाता है.

फैंटसी में जीना: बचपन की कहानियां सुनकर सपनों का राजकुमार और ख़्वाबों की मल्लिका की चाह रखनेवाले बच्चे फैंटसी में ही जीना पसंद करते हैं. हक़ीक़त से कोसों दूर उनके सपनों की एक दुनिया होती है, जिसे वे सच मानते हैं.

क्या प्रभाव पड़ता है: शादी के बाद अपने पार्टनर में अपने ख़्वाबों का हमसफ़र न मिलने पर ये पार्टनर को अपने सपनों जैसा बनाने की कोशिश करने लगते हैं. अपने पार्टनर पर अपनी पसंद-नापसंद थोपने लगते हैं, जिससे पार्टनर की भावनाएं आहत हो सकती हैं. पार्टनर को अपने अनुसार ढालने की कोशिश में अक्सर वे उसकी भावनाओं को अनदेखा भी कर देते हैं.

अकेले व चुपचाप रहना: जिन बच्चों में आत्मविश्‍वास की कमी होती हैै और दूसरों पर विश्‍वास नहीं कर पाते, ऐसे बच्चे चुपचाप और अकेले रहना पसंद करते हैं, जो धीरे-धीर उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है.

क्या प्रभाव पड़ता है: ज़रूरी नहीं कि रिश्ते पर इसका नकारात्मक प्रभाव ही पड़े. अक्सर देखा गया है कि शादी के बाद ऐसे लोगों में पार्टनर का साथ व प्रोत्साहन पाकर उनमें आत्मविश्‍वास पैदा होता है और वे एक दूसरों पर विश्‍वास करना भी सीखने लगते हैं.

कमियां व नुक्स निकालना: दूसरे बच्चों की कमियां निकालकर उन्हें नीचा दिखाना अक्सर बहुत-से बच्चों की आदत होती है.

क्या प्रभाव पड़ता है: यह ऐसी आदत है, जो किसी भी रिश्ते में दरार डाल सकती है. हर व़क्त पार्टनर की कमियों को गिनाने से उसका आत्मविश्‍वास टूटने लगता है.

नोट: ज़रूरी नहीं कि बुरी आदतों का आपके वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव ही पड़े. अक्सर हालात के बदलने और सही पार्टनर के मिलने से भी पार्टनर की आदतों को सुधारा जा सकता है. ये आदतें हमारे वैवाहिक जीवन के साथ-साथ हमारे बाकी के रिश्तों को भी उतना ही प्रभावित करती हैं.

Childhood habits can effect your relationships

अच्छी आदतों का सकारात्मक प्रभाव

समझौता करने की आदत: जिन बच्चों में बचपन से ही समझौता करने की आदत होती है, वे हर हाल में ख़ुश रहते हैं. शादी के बाद जब पति-पत्नी दो अलग-अलग लोग एक साथ एक परिवार बनकर साथ रहने लगते हैं, तो अक्सर उनकी आदतें, पसंद-नापसंद टकराती हैं, ऐसे में जो चीज़ उनके रिश्ते को संभालती है, वो है समझौता या कॉम्प्रोमाइज़ करना. दोनों अगर थोड़ा-बहुत समझौता करें, तो उनके दांपत्य जीवन में समस्याएं नहीं आतीं.

दूसरे की बातों को अहमियत देना: यह एक बहुत अच्छी आदत है, जो बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है और उसके सोचने का तरीक़ा भी अलग होता है, फिर कोई कैसे उम्मीद कर सकता है कि दूसरा व्यक्ति आपके अनुसार सोचेगा. ऐसे में यह आदत आपके दांपत्य जीवन पर हमेशा सकारात्मक प्रभाव डालती है.

आत्मनिर्भरता: जिन बच्चों में आत्मनिर्भर रहने की आदत होती है, उनमें बाकी बच्चों की तरह झुंझलाहट या चिड़चिड़ापन नहीं होता. शादी के बाद वे अपने पार्टनर पर निर्भर नहीं रहते, जिससे उनके बीच अपना काम पूरा न होने के लिए लड़ाई-झगड़े नहीं होते. ऐसे में वैवाहिक रिश्ता उन्हें कहीं से भी बोझ नहीं लगता.

ग़लतियों को सुधारना: जिन बच्चों में बचपन से ही अपनी ग़लती मानने और उसे सुधारने की आदत होती है, उनका कभी किसी से मन-मुटाव नहीं होता. शादी के बाद अपनी ग़लती को मानने और उसे सुधारने से उनका रिश्ता और मज़बूत होता है. जीवन के हर क्षेत्र की तरह उनका वैवाहिक जीवन भी सफल रहता है.

– अनीता सिंह

पति की ग़लत आदतों को यूं छुड़ाएं (Make Your Husband Quit His Bad Habits)

रोड सेफ्टी रूल्स

चाहे पैदल यात्री हों या वाहन चालक, सड़क संबंधी नियमों का पालन सभी के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचा जा सके. ऐसे में ज़रूरी है कि आप न स़िर्फ रोड सेफ्टी रूल्स के बारे में जानें, बल्कि इनका पालन भी करें.
एक नज़र इन आंकड़ों पर डालें-

– भारत में हर साल 1,20,000 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और 12,70,000 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं.

– अगर आंकड़ों की बात करें, तो भारत में हर छह मिनट में एक मौत सड़क दुर्घटना में होती है और वर्ष 2020 तक यह आंकड़ा हो जाएगा- हर 3 मिनट में एक मौत.

– यह आंकड़े भी स़िर्फ उन दुर्घटनाओं के हैं, जिनके बारे में रिकॉर्ड रहता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में कई दुर्घटनाओं के बारे में पता तक नहीं चलता, जिसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि सही आंकड़े इससे कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं.

– पूरे विश्‍व के मुक़ाबले अकेले भारत में 10% मौतें सड़क दुर्घटनाओं में होती हैं.

– नेशनल ट्रांसपोर्टेशन प्लानिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनटीपीआरसी) के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विकसित देशों के मुक़ाबले भारत में सड़क दुर्घटनाएं 3 गुना अधिक होती हैं. आंकड़े और भी बहुत हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन दुर्घटनाओं को कम कैसे किया जाए?

– सबसे ज़रूरी है कि सड़क से संबंधित मूल नियमों का ईमानदारी से पालन किया जाए, चाहे वो सड़क पर चलनेवाले लोग हों या वाहन
चालक. यदि सभी नियमों का सही तरी़के से पालन करेंगे, तो दुर्घटनाएं कम होंगी.

– सुरक्षा नियमों का पालन बच्चों को सिखाना बहुत ज़रूरी है और यह तभी संभव है, जब पैरेंट्स और टीचर्स ख़ुद इन नियमों का पालन करें.

– चलते व़क्त हमेशा फुटपाथ का उपयोग करें. जहां फुटपाथ न हों, वहां सड़क के एकदम बाईं ओर ही चलें.

– कभी भी धैर्य खोकर जल्दबाज़ी न दिखाएं. सिग्नल तोड़कर या सामने से गाड़ी को आता देख भागकर रोड क्रॉस कभी न करें.

– सड़क क्रॉस करते व़क्त ज़ेब्रा क्रॉसिंग सिग्नल, सब-वे, फुट ओवर ब्रिज का उपयोग करें. जिन जगहों पर ये सुविधाएं न हों, वहां सुरक्षित जगह देखकर क्रॉस करें.

– ग्रीन सिग्नल के व़क्त ही रोड क्रॉस करें या फिर यदि वहां ट्रैफिक पुलिस है, तो उसके निर्देशों के अनुसार सड़क क्रॉस करें.

– जो लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी भागकर बस न पकड़ें.

– हमेशा कतार में रहें और उसी के अनुसार बस में चढ़ें. हैंडल पकड़कर रखें.

– उतरते व़क्त भी बस के पूरी तरह से रुकने पर ही उतरें, चलती बस से कभी न उतरें.

– सड़क क्रॉस करते व़क्त या सामान्य रूप से सड़क पर चलते व़क्त भी मोबाइल या हैंड्स फ्री का इस्तेमाल न करें. यदि बात करनी है, तो एक सुरक्षित जगह देखकर, रुककर बात करें.

– हैंड सेट को तेज़ वॉल्यूम पर रखकर गाने सुनते हुए न चलें, इससे गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ वग़ैरह आप सुन नहीं पाएंगे.

– सड़क क्रॉस करते समय दोनों तरफ़ अच्छी तरह देखकर ही क्रॉस करें.

यह भी पढ़ें:‘वाहन’ से जानें किसी भी वाहन की जानकारी

 

जो लोग गाड़ी चलाते हैं-

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– कीप लेफ्ट यानी बाईं ओर ही वाहन चलाएं.

– बाईं ओर से टर्न लेना हो, तो टर्न लेने के बाद भी बाईं ओर ही गाड़ी चलाएं.

– लेन को कट-क्रॉस न करें, जैसे- आपको बाईं तरफ़ टर्न लेना है, तो गाड़ी को दाहिनी तरफ़ रखकर फिर बाईं ओर मुड़ने का जोख़िम न उठाएं. शुरू से ही बाईं ओर गाड़ी रखें.

– अगर दाहिनी ओर मुड़ना है, तो पहले सड़क के बीच सुरक्षित तरी़के से आएं, फिर दाहिनी ओर पहुंचें. टर्न लेने के बाद गाड़ी वापस सड़क की बाईं तरफ़ ही रखकर ड्राइव करें.

– यू टर्न लेते व़क्त भी इंडिकेशन ज़रूर दें और जहां यू टर्न की अनुमति नहीं है, वहां से यू टर्न कभी न लें.

– वन वे में कभी भी रिवर्स या अपोज़िट डायरेक्शन में गाड़ी न चलाएं.

– यदि इंडिकेशन व ब्रेक लाइट्स काम नहीं करें, तो जब तक वो रिपेयर न हो जाएं, तब तक हाथों के साइन्स का प्रयोग करें.

– इन साइन्स को आप इन स्थितियों में ज़रूर इस्तेमाल करें- जब गाड़ी धीमी कर रहे हों, गाड़ी रोक रहे हों, जब राइट या लेफ्ट टर्न ले रहे हों या साइड की गाड़ी को ओवरटेक कर रहे हों, जब पीछेवाली गाड़ी को यह इशारा देना हो कि वो आगे निकलने के लिए सुरक्षित है.

– कभी भी यह सोचकर गाड़ी न चलाएं कि आप किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं और सड़क के बाकी लोग आपके प्रतियोगी हैं, जिनसे आपको आगे निकलना है.

– बेवजह के स्टंट्स न दिखाएं. यही सोचें कि जान से ज़्यादा क़ीमती कुछ भी नहीं.

– अपने वाहन की नियमित सर्विसिंग करवाएं.

– बेवजह हॉर्न न बजाएं.

– कर्कश या तेज़ आवाज़वाले हार्न का इस्तेमाल न करें.

– अपने सभी ज़रूरी काग़ज़ात साथ ही रखें, जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस और टैक्सेशन के पेपर्स, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन संबंधी काग़ज़ात.

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फोर व्हीलर वाले क्या करें?

– सीट बेल्ट्स हमेशा बांधें. अगर साथ में कोई है, तो उसे भी कहें बेल्ट बांधने को.

– 4 साल तक के बच्चों के लिए चाइल्ड सीट का ही प्रयोग करें.

– ट्रैफिक सिग्नल्स को कभी भी अनदेखा न करें.

– वाहन की रफ़्तार से संबंधित नियमों को कभी न तोड़ें.

– पैदल चलनेवालों को पहले रोड क्रॉस करने दें.

– एमर्जेंसी गाड़ियां, जैसे- एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड को पहले जाने दें.

– लेन बदलते व़क्त हमेशा इंडिकेटर्स और रियर व्यू मिरर्स का प्रयोग करें.

– चौराहे पर हमेशा गाड़ी की रफ़्तार कम कर दें.

– आगे वाली गाड़ी से हमेशा सुरक्षित दूरी बनाकर रखें.

– हमेशा अपनी लेन में ही गाड़ी चलाएं. ओवरटेक के चक्कर में लेन तोड़ने की कोशिश न करें.

– मोबाइल का उपयोग न करें.

क्या न करें?

– सिग्नल न तोड़ें.

– ड्रंक-ड्राइव से बचें यानी शराब पीकर गाड़ी न चलाएं.

– शहर में 60 कि.मी. प्रति घंटे की रफ़्तार से अधिक पर गाड़ी न चलाएं.

– 18 से कम उम्रवाले ड्राइव न करें.

– व्यस्त सड़कों पर गाड़ी पार्क न करें.

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टू व्हीलर वाले क्या करें?

– अच्छी क्वालिटी का फुल मास्क हेलमेट पहनें.

– आगे और पीछे की लाइट्स काम कर रही हैं कि नहीं, इसका ध्यान हमेशा रखें.

– मुड़ते व़क्त इंडिकेशन ज़रूर दें.

– आगे और पीछे दोनों ब्रेक्स का इस्तेमाल एक साथ सही ढंग से करें.

– सुरक्षित दूरी बनाकर ही ड्राइव करें.

क्या न करें?

– कभी भी टेढ़े-मेढ़े यानी ज़िग-ज़ैग तरी़के से ड्राइव न करें, जो अक्सर टू व्हीलर वाले करते हैं.

– बहुत तेज़ रफ़्तार से बचें.

– अचानक ब्रेक न लगाएं.

– ग़लत साइड से ओवरटेक न करें.

– फोन का इस्तेमाल न करें.

– शराब पीकर ड्राइव न करें.

– बहुत ज़्यादा वज़न लेकर ड्राइव न करें.

चाहे पैदल यात्री हों या वाहन चालक, आप हमेशा यह बात याद रखें कि आपकी जरा-सी लापरवाही न स़िर्फ आपकी, बल्कि दूसरों की भी जान ले सकती है. कोशिश करें कि ज़िम्मेदार नागरिक बनें और नियमों का उल्लंघन न करें.

बच्चों को सिखाएं रोड सेफ्टी रूल्स
बच्चों के लिए स्कूल की तरफ़ से ही बहुत-सी वर्कशॉप्स होती हैं, जिसमें उन्हें इन नियमों के बारे में बताया व समझाया जाता है. इसी क्रम में हाल ही में इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने वहां के स्कूली बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी कि क्या करें, क्या न करें. ट्रैफिक पुलिस की रोड सेफ्टी कमिटी ने 20 स्कूल्स के 350 बच्चों को यह जानकारी दी कि रोड कैसे क्रॉस की जाए और स्कूल बस में भी चढ़ते-उतरते व़क्त क्या सावधानियां बरती जाएं. इसमें विद्यार्थियों को सेफ्टी मैन्युल दी गई, जिसमें सही और ग़लत दोनों बातों का उल्लेख है, जैसे- ज़ेब्रा क्रॉसिंग का इस्तेमाल, सिग्नल संबंधी नियम, फुटपाथ का प्रयोग आदि.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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स्टीम रूम के 10 रूल्स! (10 Rules of the Steam Room)

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स्टीम (Steam Room) लेना हर मौसम में फ़ायदेमंद रहता है. इससे शरीर की थकान मिटती है, विषैले तत्व पसीने के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं और रोम छिद्र खुल जाते हैं, इम्युनिटी बढ़ाता है. लेकिन स्टीम लेने से पहले और बाद में कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, ताकि आप इसका सही फ़ायदा उठा सकें. चलिए, आपको बताते हैं, स्टीम रूम के कुछ रूल्स.

रूल नंबर 1 – कम खाएं

– जब भी स्टीम बाथ लेने की सोचें, तो उससे एक या दो घंटे पहले बहुत ज़्यादा या मुख्य आहार
न खाएं.
– स्टीम लेते व़क्त रक्त के संचार में परिवर्तन होता रहता है, जिससे खाना पचने में द़िक्क़त हो
सकती है.
– कई बार पेट में असहज ऐंठन भी हो सकती है.

रूल नंबर 2 – ज्वेलरी पहनकर न जाएं

– स्टीम रूम में ज्वेलरी पहनकर न जाएं.
– बेहतर होगा कि आप ज्वेलरी घर पर ही छोड़ दें.
– मेटल की चीज़ें आपकी त्वचा से ज़्यादा गर्म हो जाती हैं, जिससे त्वचा जल सकती है.
– कई बार स्टीम लेने से स्किन थोड़ी-सी फूल भी जाती है, ऐसे में टाइट ज्वेलरी और भी टाइट हो सकती है और आपको चोट पहुंच सकती है.
– अगर कॉन्टैक्ट लेंस पहना हो, तो उसे भी निकाल दें, क्योंकि गर्मी का लेंस पर बुरा असर पड़ता है और आंखों में जलन हो सकती है.

रूल नंबर 3 – तौलिया साथ ले जाएं

– स्टीम रूम में कपड़े पहनकर न जाएं.
– बड़ा-सा तौलिया अच्छी तरह से लपेटकर स्टीम रूम में जाएं.
– आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि स्टीम आपके शरीर पर अच्छी तरह लगे.

रूल नंबर 4 – शॉवर लें

– घर से सीधे आकर स्टीम रूम में न चले जाएं.
– 5 से 10 मिनट तक रिलैक्स करें या 10 मिनट तक ट्रेडमिल पर चलें.
– इसके बाद ठंडे पानी का शॉवर लें और फिर स्टीम रूम में जाएं.

रूल नंबर 5 – पानी पीएं

– स्टीम रूम में जाने से पहले और आने के बाद भरपूर पानी पीएं, क्योंकि जब पसीना अधिक निकलता है, तब शरीर में पानी की कमी हो जाती है.
– अल्कोहल या किसी प्रकार की दवाएं, जिससे आपको गर्मी का एहसास हो, वह लेकर स्टीम रूम में न जाएं.

रूल नंबर 6 – खुशबूवाला तेल या परफ्यूम लगाकर न जाएं.

– स्टीम रूम पूरी तरह से बंद होता है. किसी भी तरह की सुंगध या दुर्गंध रूम के अंदर ही रह जाती है और भाप के साथ मिलकर सांस लेने में द़िक्क़त पैदा कर सकती है.
– सुगंधवाला तेल या परफ्यूम लगाने से स्टीम रूम में मौजूद दूसरे लोगों को भी तकलीफ़ हो
सकती है.
– दूसरों की सुविधा का भी ख़्याल रखें.

रूल नंबर 7 – स्टीम ज़्यादा देर तक न लें

– ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि ज़्यादा देर तक स्टीम रूम में रहने से आपको ज़्यादा फ़ायदा होगा.
– एक हेल्दी व्यक्ति को 10 से 15 मिनट से ज़्यादा स्टीम नहीं लेनी चाहिए.
– अपने शरीर के सिग्नल्स को पहचानें. अगर चक्कर, उल्टी, सांस लेने में द़िक्क़त महसूस हो, तो तुरंत बाहर आ जाएं.

रूल नंबर 8 – स्टीम से निकलने पर शरीर का तापमान सामान्य होने दें

– स्टीम से बाहर आने के बाद तुरंत स्नान करने न जाएं.
– स्टीम रूम से बाहर आकर कुछ देर तक इंतज़ार करें. शरीर के तापमान को कमरे के तापमान पर सामान्य होने दें.
– फिर ठंडे या गुनगुने पानी से नहा लें.

रूल नंबर 9 – बीमार हैं, तो बिना डॉक्टरी सलाह से स्टीम न लें.

– अगर ब्लडप्रेशर, अस्थमा, हृदय रोग के मरीज़ हैं तो स्टीम बाथ लेने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह लें.
– प्रेग्नेंट महिलाओं को स्टीम नहीं लेना चाहिए.
– अगर बुख़ार हो तो भी स्टीम बाथ न लें.

रूल नंबर 10 – एक्स्ट्रा कपड़े साथ ले जाएं.

– एक्स्ट्रा कपड़े ज़रूर साथ ले जाएं.
– स्टीम लेने के बाद स्नान करके दोबारा वही कपड़े न पहनें, जिसमें आपने एक्सरसाइज़ की थी.

नोट

अगर आप पहली बार स्टीम ले रहे हैं, तो हफ़्ते में एक या दो बार केवल पांच मिनट के लिए ही स्टीम लें.