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ACT & REACT! अगर आप सेल्फ डिफेंस सीखना चाहती हैं, तो अक्षय और ताप्सी का ये ख़ास मैसेज बिल्कुल मिस न करें (Akshay Kumar and Taapsee Pannu give self defense classes to women)

सेल्फ डिफेंस

सेल्फ डिफेंस

आपके बॉडी पार्ट्स ही आपके सबसे बड़े हथियार है. कोहनी मारें और छेड़ने वाले को मुंहतोड़ जवाब दें. जी हां, ये दमदार मैसेज दे रहे हैं अक्षय कुमार और ताप्सी पन्नू. इंटरनेशनल वुमेन्स डे के मौक़े पर अक्षय और ताप्सी एक ख़ास वीडियो लेकर आए हैं, जिसमें ताप्सी ये सिखा रही हैं कि लड़कियों को छेड़ने वालों को सबक कैसे सिखाया जाए. इस वीडियो में ताप्सी अक्षय के साथ मिलकर बता रही हैं कि जब कोई पुरुष किसी महिला पर हमला करता है, तो उसका मुकाबला कैसे करें.

1 मिनट 24 सेकेंड के वीडियो में ताप्सी ने कह रही हैं, “ख़तरा क़ीमती चीज़ों को होता है, जैसे की लड़कियां, औरतें. हम सब से ज़्यादा क़ीमती भला और क्या है. ख़तरा कहीं भी मिल सकता है, जैसे- रोड़, पार्क, बस, ट्रेन. कोई कहीं भी छू देता है, कुछ भी बोल देता है. पर अब हम चुप नहीं रहेंगे. अब हम जवाब देंगे.”

ताप्सी ने कोहनी मार तकनीक सिखाकर महिलाओं से कहा, “जब कोई छेड़े या बॉडी पार्ट्स को छुए, तो फ्रीज़ न हों, बल्कि रिएक्ट करें, चिल्लाएं, हेल्प के लिए बुलाएं, कुछ नहीं समझ न आए तो पत्थर उठा कर मारो या भाग जाओ, कुछ तो करो. आपके बॉडी पार्ट्स ही आपके सबसे बड़े हथियार हैं, जैसे की आप उसको लात मार सकते हो, कोहनी मार सकते हो. मेरी फेवरेट तो कोहनी है, एक बार जो कोहनी लग जाए ना तो बंदा वापस नहीं उठता है.”

कोहनी मार तकनीक सिखाने के लिए ताप्सी अक्षय कुमार को बुलाती हैं और बताती हैं कि कैसे ख़ुद की सुरक्षा करें. देखे ये वीडियो, ये बहुत काम आ सकता है आपके.

6 स्मार्ट तरीक़ों से रखें डिजिटल वॉलेट को सेफ़? (6 smart tips for safe digital wallet)

digital wallet

digital wallet

घर बैठे-बैठे सिनेमा हॉल की टिकट बुक करना, हॉस्टल में पढ़ रहे बेटे की फीस जमा करना, गांव में पैसे भिजवाना, बिना लाइन में खड़े हुए बिजली का बिल भर देना जैसी सहूलियत आपको ई वॉलेट से ही मिलती है. बिना झंझट और झल्लाहट के आप आराम से घर बैठे कई काम कर देते हैं. घर से बाहर निकलने पर अब आपके पैसे चोरी का डर भी नहीं रहता, क्योंकि अपना बहुत सारा काम आप ई वॉलेट के ज़रिए निपटा देते हैं. डिजिटल हो रहे इस मॉडर्न ज़माने के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलने के लिए आपका भी डिजिटल होना बहुत ज़रूरी है, लेकिन इन सबके बीच सुरक्षा यानी आपके ई वॉलेट की सेफ्टी का इश्यू वैसे ही रह जाता है. आपका हर काम आसान करनेवाले डिजिटल वॉलेट को सेफ़ कैसे रखें? आइए, हम बताते हैं.

फोन लॉक करें
आमतौर पर स़िर्फ एक उंगली की दूरी पर है आपका ई वॉलेट. ऐसे में उसकी सुरक्षा और भी अहम् हो जाती है, इसलिए अपने फोन में लॉक कोड रखें. इतने से ही काम नहीं चलेगा. आप चाहें, तो अपने फोन में फिंगर लॉक रखें. ऐसे में कोई दूसरा आपके फोन को एक्सेस नहीं कर पाएगा.

ऐप लॉक
स़िर्फ फोन लॉक करने से काम नहीं चलेगा. कहीं आपका फोन चोरी हो गया और ग़लती से सामने वाले ने फोन का लॉक खोल लिया, तो आसानी से आपके ई वॉलेट का मिसयूज़ कर सकता है, इसलिए ज़रूरी है कि ऐप पर लॉक कोड सेट करें.

स्ट्रॉन्ग पासवर्ड
ऐप का पासवर्ड रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि वो सिंपल और छोटा न हो. इससे कोई भी आसानी से ब्रेक कर सकता है. बेहतर होगा कि 10 डिज़िट का पासवर्ड रखें. स्पेशल कैरेक्टर के साथ पासवर्ड रखें.

एंटी वायरस डालें
कंप्यूटर, लैपटॉप की तरह मोबाइल में भी एंटी वायरस डलवाएं. ऐसा इसलिए करें, क्योंकि आप अपने मोबाइल का यूज़ एक लैपटॉप की तरह करते हैं. सोशल साइट्स से लेकर कई साइट्स पर जाते हैं. ऐसे में वायरस आपके मोबाइल में एंटर कर सकते हैं.

मिनिमम बैलेंस
अगर आप चाहते हैं कि फ्यूचर में आपको रोना न पड़े, तो अपने ई वॉलेट में कम पैसा रखें. ऐसे में अगर आपका मोबाइल किसी और के हाथ में आ भी गया, तो वो बहुत ज़्यादा पैसे का यूज़ नहीं कर पाएगा.

कार्ड डिटेल सेव न करें
मानाकि कार्ड डिटेल सेव करने से आपको पेमेंट करने में आसानी होती है, लेकिन ये सही नहीं है. ऐसा करना भारी पड़ सकता है. किसी के हाथ मोबाइल लगने पर, वो आपका पूरा पैसा ख़त्म कर सकता है.

इन सेफ्टी ट्रिक्स को अपनाकर आप अपने ई वॉलेट को सेफ रख सकते हैं.

श्वेता सिंह

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रोड सेफ्टी रूल्स

चाहे पैदल यात्री हों या वाहन चालक, सड़क संबंधी नियमों का पालन सभी के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचा जा सके. ऐसे में ज़रूरी है कि आप न स़िर्फ रोड सेफ्टी रूल्स के बारे में जानें, बल्कि इनका पालन भी करें.
एक नज़र इन आंकड़ों पर डालें-

– भारत में हर साल 1,20,000 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और 12,70,000 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं.

– अगर आंकड़ों की बात करें, तो भारत में हर छह मिनट में एक मौत सड़क दुर्घटना में होती है और वर्ष 2020 तक यह आंकड़ा हो जाएगा- हर 3 मिनट में एक मौत.

– यह आंकड़े भी स़िर्फ उन दुर्घटनाओं के हैं, जिनके बारे में रिकॉर्ड रहता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में कई दुर्घटनाओं के बारे में पता तक नहीं चलता, जिसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि सही आंकड़े इससे कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं.

– पूरे विश्‍व के मुक़ाबले अकेले भारत में 10% मौतें सड़क दुर्घटनाओं में होती हैं.

– नेशनल ट्रांसपोर्टेशन प्लानिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनटीपीआरसी) के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विकसित देशों के मुक़ाबले भारत में सड़क दुर्घटनाएं 3 गुना अधिक होती हैं. आंकड़े और भी बहुत हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन दुर्घटनाओं को कम कैसे किया जाए?

– सबसे ज़रूरी है कि सड़क से संबंधित मूल नियमों का ईमानदारी से पालन किया जाए, चाहे वो सड़क पर चलनेवाले लोग हों या वाहन
चालक. यदि सभी नियमों का सही तरी़के से पालन करेंगे, तो दुर्घटनाएं कम होंगी.

– सुरक्षा नियमों का पालन बच्चों को सिखाना बहुत ज़रूरी है और यह तभी संभव है, जब पैरेंट्स और टीचर्स ख़ुद इन नियमों का पालन करें.

– चलते व़क्त हमेशा फुटपाथ का उपयोग करें. जहां फुटपाथ न हों, वहां सड़क के एकदम बाईं ओर ही चलें.

– कभी भी धैर्य खोकर जल्दबाज़ी न दिखाएं. सिग्नल तोड़कर या सामने से गाड़ी को आता देख भागकर रोड क्रॉस कभी न करें.

– सड़क क्रॉस करते व़क्त ज़ेब्रा क्रॉसिंग सिग्नल, सब-वे, फुट ओवर ब्रिज का उपयोग करें. जिन जगहों पर ये सुविधाएं न हों, वहां सुरक्षित जगह देखकर क्रॉस करें.

– ग्रीन सिग्नल के व़क्त ही रोड क्रॉस करें या फिर यदि वहां ट्रैफिक पुलिस है, तो उसके निर्देशों के अनुसार सड़क क्रॉस करें.

– जो लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी भागकर बस न पकड़ें.

– हमेशा कतार में रहें और उसी के अनुसार बस में चढ़ें. हैंडल पकड़कर रखें.

– उतरते व़क्त भी बस के पूरी तरह से रुकने पर ही उतरें, चलती बस से कभी न उतरें.

– सड़क क्रॉस करते व़क्त या सामान्य रूप से सड़क पर चलते व़क्त भी मोबाइल या हैंड्स फ्री का इस्तेमाल न करें. यदि बात करनी है, तो एक सुरक्षित जगह देखकर, रुककर बात करें.

– हैंड सेट को तेज़ वॉल्यूम पर रखकर गाने सुनते हुए न चलें, इससे गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ वग़ैरह आप सुन नहीं पाएंगे.

– सड़क क्रॉस करते समय दोनों तरफ़ अच्छी तरह देखकर ही क्रॉस करें.

यह भी पढ़ें:‘वाहन’ से जानें किसी भी वाहन की जानकारी

 

जो लोग गाड़ी चलाते हैं-

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– कीप लेफ्ट यानी बाईं ओर ही वाहन चलाएं.

– बाईं ओर से टर्न लेना हो, तो टर्न लेने के बाद भी बाईं ओर ही गाड़ी चलाएं.

– लेन को कट-क्रॉस न करें, जैसे- आपको बाईं तरफ़ टर्न लेना है, तो गाड़ी को दाहिनी तरफ़ रखकर फिर बाईं ओर मुड़ने का जोख़िम न उठाएं. शुरू से ही बाईं ओर गाड़ी रखें.

– अगर दाहिनी ओर मुड़ना है, तो पहले सड़क के बीच सुरक्षित तरी़के से आएं, फिर दाहिनी ओर पहुंचें. टर्न लेने के बाद गाड़ी वापस सड़क की बाईं तरफ़ ही रखकर ड्राइव करें.

– यू टर्न लेते व़क्त भी इंडिकेशन ज़रूर दें और जहां यू टर्न की अनुमति नहीं है, वहां से यू टर्न कभी न लें.

– वन वे में कभी भी रिवर्स या अपोज़िट डायरेक्शन में गाड़ी न चलाएं.

– यदि इंडिकेशन व ब्रेक लाइट्स काम नहीं करें, तो जब तक वो रिपेयर न हो जाएं, तब तक हाथों के साइन्स का प्रयोग करें.

– इन साइन्स को आप इन स्थितियों में ज़रूर इस्तेमाल करें- जब गाड़ी धीमी कर रहे हों, गाड़ी रोक रहे हों, जब राइट या लेफ्ट टर्न ले रहे हों या साइड की गाड़ी को ओवरटेक कर रहे हों, जब पीछेवाली गाड़ी को यह इशारा देना हो कि वो आगे निकलने के लिए सुरक्षित है.

– कभी भी यह सोचकर गाड़ी न चलाएं कि आप किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं और सड़क के बाकी लोग आपके प्रतियोगी हैं, जिनसे आपको आगे निकलना है.

– बेवजह के स्टंट्स न दिखाएं. यही सोचें कि जान से ज़्यादा क़ीमती कुछ भी नहीं.

– अपने वाहन की नियमित सर्विसिंग करवाएं.

– बेवजह हॉर्न न बजाएं.

– कर्कश या तेज़ आवाज़वाले हार्न का इस्तेमाल न करें.

– अपने सभी ज़रूरी काग़ज़ात साथ ही रखें, जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस और टैक्सेशन के पेपर्स, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन संबंधी काग़ज़ात.

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फोर व्हीलर वाले क्या करें?

– सीट बेल्ट्स हमेशा बांधें. अगर साथ में कोई है, तो उसे भी कहें बेल्ट बांधने को.

– 4 साल तक के बच्चों के लिए चाइल्ड सीट का ही प्रयोग करें.

– ट्रैफिक सिग्नल्स को कभी भी अनदेखा न करें.

– वाहन की रफ़्तार से संबंधित नियमों को कभी न तोड़ें.

– पैदल चलनेवालों को पहले रोड क्रॉस करने दें.

– एमर्जेंसी गाड़ियां, जैसे- एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड को पहले जाने दें.

– लेन बदलते व़क्त हमेशा इंडिकेटर्स और रियर व्यू मिरर्स का प्रयोग करें.

– चौराहे पर हमेशा गाड़ी की रफ़्तार कम कर दें.

– आगे वाली गाड़ी से हमेशा सुरक्षित दूरी बनाकर रखें.

– हमेशा अपनी लेन में ही गाड़ी चलाएं. ओवरटेक के चक्कर में लेन तोड़ने की कोशिश न करें.

– मोबाइल का उपयोग न करें.

क्या न करें?

– सिग्नल न तोड़ें.

– ड्रंक-ड्राइव से बचें यानी शराब पीकर गाड़ी न चलाएं.

– शहर में 60 कि.मी. प्रति घंटे की रफ़्तार से अधिक पर गाड़ी न चलाएं.

– 18 से कम उम्रवाले ड्राइव न करें.

– व्यस्त सड़कों पर गाड़ी पार्क न करें.

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टू व्हीलर वाले क्या करें?

– अच्छी क्वालिटी का फुल मास्क हेलमेट पहनें.

– आगे और पीछे की लाइट्स काम कर रही हैं कि नहीं, इसका ध्यान हमेशा रखें.

– मुड़ते व़क्त इंडिकेशन ज़रूर दें.

– आगे और पीछे दोनों ब्रेक्स का इस्तेमाल एक साथ सही ढंग से करें.

– सुरक्षित दूरी बनाकर ही ड्राइव करें.

क्या न करें?

– कभी भी टेढ़े-मेढ़े यानी ज़िग-ज़ैग तरी़के से ड्राइव न करें, जो अक्सर टू व्हीलर वाले करते हैं.

– बहुत तेज़ रफ़्तार से बचें.

– अचानक ब्रेक न लगाएं.

– ग़लत साइड से ओवरटेक न करें.

– फोन का इस्तेमाल न करें.

– शराब पीकर ड्राइव न करें.

– बहुत ज़्यादा वज़न लेकर ड्राइव न करें.

चाहे पैदल यात्री हों या वाहन चालक, आप हमेशा यह बात याद रखें कि आपकी जरा-सी लापरवाही न स़िर्फ आपकी, बल्कि दूसरों की भी जान ले सकती है. कोशिश करें कि ज़िम्मेदार नागरिक बनें और नियमों का उल्लंघन न करें.

बच्चों को सिखाएं रोड सेफ्टी रूल्स
बच्चों के लिए स्कूल की तरफ़ से ही बहुत-सी वर्कशॉप्स होती हैं, जिसमें उन्हें इन नियमों के बारे में बताया व समझाया जाता है. इसी क्रम में हाल ही में इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने वहां के स्कूली बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी कि क्या करें, क्या न करें. ट्रैफिक पुलिस की रोड सेफ्टी कमिटी ने 20 स्कूल्स के 350 बच्चों को यह जानकारी दी कि रोड कैसे क्रॉस की जाए और स्कूल बस में भी चढ़ते-उतरते व़क्त क्या सावधानियां बरती जाएं. इसमें विद्यार्थियों को सेफ्टी मैन्युल दी गई, जिसमें सही और ग़लत दोनों बातों का उल्लेख है, जैसे- ज़ेब्रा क्रॉसिंग का इस्तेमाल, सिग्नल संबंधी नियम, फुटपाथ का प्रयोग आदि.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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कितना हेल्दी और सेफ है आपका किचन ?

Kitchen Safety tips

 

किचन में अक्सर कई दुर्घटनाएं होती हैं, जैसे- कटना, जलना, फिसल जाना आदि. अत: किचन में निम्न बातों का ध्यान रखें.

* किचन में एक पोंछने वाला कपड़ा, फर्स्ट एड किट, जिसमें बैंड एड, कटने व जलने की दवा और डेटॉल ज़रूर रखें.

* डोमेस्टिक पॉल्यूशनका दूसरा सबसे बड़ा कारण है कुकिंग. गैस स्टोव से ख़तरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड आदि गैसें निकलती हैं. इनका स्तर कम करने के लिए वेंटीलेशन अच्छा रखें या एग्ज़ॉस्ट फैन लगाएं. इससे किचन में धूल-मिट्टी कम जमती है. एग्जॉस्ट फैन को दीवार की उस दिशा में लगाएं, जहां से विपरीत दिशा से अच्छी हवा आए. फैन को हर छह महीने में मैनुफेक्चरर के निर्देशानुसार क्लीन करें. यदि बाहरी हवा नहीं है तो किचन में भी सिलिंग फैन लगाएं.

* कभी भी गरम कुकर को खिड़की (पिंडी) के पास न रखें, वरना हो सकता है कुकर की हीट से खिड़की का कांच तड़क जाए.

* गैस का सिलेंडर खुली जगह पर रखें. यहां अन्य किसी चीज़ों का अंबार न लगाएं और गैस की पाइप को किसी चीज़ से ढंकें नहीं, अगर कहीं चीरे या कटने का निशान दिखे तो पाइप तुरंत बदलवाएं.

 

Gas Stove,Kitchen safety

* रात को सोने से पहले गैस सिलेंडर का वॉल्व बंद करें.

* घर से बाहर जाते समय चेक कर लें कि सिलेंडर का वॉल्व बंद है या नहीं.

* यदि गैस की गंध आए तो वॉल्व बंद कर दें. खिड़की खोल दें. इलेक्ट्रिक स्विच बंद कर दें और गैस कंपनी में फ़ोन करें.

* किचन में जिस जगह आप काम करती हैं, वहां फ्लोरसेंट लाइट ज़रूर लगवाएं.

* इस बात का ज़रूर ध्यान रखें कि जहां माइक्रोवेव, कुकिंग रेंज या ओवन रखा हो, उसके कम-से-कम एक तरफ 40 सें.मी. चौड़ी जगह हो.

* खाना बनाने का प्लेटफॉर्म इतनी ऊंचाई पर हो कि आपको ज़्यादा झुक कर भी काम न करना पड़े और न ज़्यादा ऊंचे होकर.

* इसी तरह कबर्ड भी इतनी ऊंचाई पर हों कि आप आसानी से उनमें से सामान निकाल या रख सकें. सिंक के मामले में भी यही नियम लागू होता है.

* कुकिंग रेंज इस तरह सेट करें कि गैस पर रखी चीज़ को आसानी से हिलाया जा सके.

* माइक्रोवेव इस तरह रखा जाना चाहिए कि वह आपके आई लेवल पर हो, अन्यथा गर्म खाना आप पर गिर सकता है.

स्मार्ट टिप्स

* घर में ऐसे उपकरण रखें, जो लॉक हो सकें. मार्केट में चाइल्ड लॉक डिवाइस उपलब्ध हैं. यदि आपके घर में बच्चे हैं तो आपके लिए यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगा.

* ऐसी कुकिंग रेंज लें जो ऊपर से ग्लास से बनी हो.

* हमेशा ड्राय पार्ट होल्डर्स का ही इस्तेमाल करें. गीला होल्डर हीट (ऊष्मा) ट्रांसमिट करता है. डिश टॉवेल इतने मोटे नहीं होते कि आपकी सुरक्षा कर सकें.

* इस्तेमाल के बाद टोस्टर को बंद कर दें. यदि स्विच ऑन रह गया तो उपकरण ज़्यादा गरम हो जाएगा या फिर उसमें आग लगने का भी डर हो सकता है. दुर्घटना से बचाव करना है तो इलेक्ट्रिक उपकरण का ध्यान रखें.

* यदि लिक्विड को मिक्सर में ब्लेंड करना है तो ध्यान रखें कि वह गरम न हो. पहले उसे ठंडा कर लें, फिर ब्लेंडर में डालें, वरना ब्लेंड करने के बाद जैसे ही आप जार का ढक्कन खोलेंगी तो हो सकता है वह उड़कर आपके चेहरे पर आ जाए.

* रात को काम ख़त्म करने के बाद किचन की पूरी सफ़ाई करें. झाड़ने-पोंछने के कपड़े (डस्टर) को धोकर रखें. हर हफ़्ते इन्हें उबले हुए साबुन के पानी से धोएं और धूप में सुखाएं. हमेशा डस्टर के दो सेट रखें.

* कभी भी कुकर के पास फ्रिज न रखें, वरना इससे फ्रिज की क्षमता पर फ़र्क पड़ेगा. फ्रिज को रोज़ाना अंदर से पोंछ लें. आइस ट्रे को भरने से पहले सुखा लें. जो खाने का सामान उपयोगी नहीं है, उसे निकाल दें. बचे हुए खाने को एक घंटे के बाद फ्रिज में रख दें.

* सूखे व गीले कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालें. डस्टबिन को भी रोज़ाना साफ़ करें, ताकि गंदगी के कारण जीवाणु न फैलें.

* टूटने वाले सामान, पेस्टिसाइड्स, डिटर्जेंट, माचिस, लाइटर, चाकू व कांटों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें.

* खाना बनाते समय फिटिंग के कपड़े व एप्रेन पहनें. लूज़ स्लीव या दुपट्टा न पहनें. इनमें आग लगने का डर ज़्यादा रहता है.

Kitchen safety_Dish washing_Kitchen Hygiene.

गुड किचन हैबिट्स
* काम ख़त्म होते ही सिंक, प्लेटफॉर्म और गंदे बर्तन तुरंत साफ़ कर लें.

* गंदे बर्तन सिंक में इकट्ठा करने की बजाय तुरंत साफ़ कर लें. अगर तुरंत साफ़ नहीं करना चाहतीं तो बर्तन को कम-से-कम नल के नीचे रखकर पानी डाल दें, ताकि बाद में उन्हें धोना आसान हो सके.

* सब्ज़ी इत्यादि पेपर पर काटें और बचा हुआ कचरा डस्टबिन में फेंक दें.

* ग्रॉसरी शॉपिंग करके आने के बाद चीज़ें तुरंत जगह पर रख दें. खाली कंटेनर तुरंत हटा दें.

हॉस्पिटल में कितने सेफ़ हैं आप? (A Patient’s Guide: How To Stay Safe In a Hospital)

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Patient's Guide, hospital safetyअस्पताल की सबसे पहली ज़िम्मेदारी है, मरीज़ की सही देखभाल करना. हॉस्पिटल की छोटी-सी लापरवाही से मरीज़ की जान जा सकती है. एक अनुमान के मुताबिक़, विकसित देशों में 10 में से एक मरीज़ अस्पताल की लापरवाही का शिकार बनता है. अस्पताल और मरीज़ दोनों को ही सुरक्षा की दिशा में किन बातों का ख़्याल रखना चाहिए? आइए, जानते हैं.

अस्पताल में मरीज़ की सुरक्षा के मुद्दे

– इलाज करने में ग़लती, लापरवाही या अनजाने में इलाज में देरी.
– अस्पताल में मरीज़ के एडमिट होने के दौरान होनेवाली ग़लतियां, जैसे- स्वास्थ्य सेवा देने में कमी जिसकी वजह से मरीज़ किसी इंफेक्शन की चपेट में आ जाए.
– दवाइयां देने में ग़लती या मरीज़ को सही दवा दी हो पर उसका डोज़ ग़लत हो.
– रीएडमिशन यानी मरीज़ को अगर डिसचार्ज के बाद 30 दिनों के भीतर दोबारा अस्पताल लौटना पड़े
– ग़लत सर्जरी साइट यानी शरीर के ग़लत हिस्से पर या ग़लत व्यक्ति पर किया गया ऑपरेशन.
– रोग को लेकर डॉक्टर और मरीज़ या अस्पताल के स्टाफ के साथ हुई बातचीत में कमी.

किन बातों का ख़्याल रखे अस्पताल?

– मरीज़ की पहचान सुनिश्‍चित करें. मरीज़ की कोडिंग और लेबलिंग सही करें, ताकि इलाज किसी ग़लत मरीज़ को न मिल जाए.
– प्रिसक्रिप्शन लिखते हुए संक्षिप्त रूप यानी स्मॉल लेटर्स का प्रयोग न करें. कैपिटल लेटर्स में साफ़-साफ़ लिखें, ताकि मरीज़ पढ़ सके.
– अस्पताल में एक ख़ास ट्रेनिंग प्रोग्राम की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि ऐसी ग़लतियां न हों.
– अस्पताल का इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐसा हो कि मरीज़ को परेशान न होना पड़े. निर्देश या चेतावनी संकेतवाले बोर्ड, जैसे- बिलिंग काउंटर, कैश काउंटर, रिसेप्शन, फार्मसी, रेडियोलॉजी, लैब आदि हर जगह ठीक से लगे हों, ताकि मरीज़ का समय बर्बाद न हो.
– मरीज़ को एडमिट या शिफ्ट करते व़क्त ख़ास ध्यान रखें.
– मरीज़ के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उच्च दर्ज़े की सुविधाएं प्रदान करें.
– बेवजह की दवाओं को प्रिसक्राइब करने की बजाय दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए डॉक्टर्स को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए.

मरीज़ अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें?

– अपनी व्यक्तिगत जानकारियां, जैसे- एलर्जी, खाने-पीने की आदतें, भूतकाल में कोई ऑपरेशन, मेडिकल हिस्ट्री आदि देने के बाद आप अस्पताल के कर्मचारियों से एक बार ये सुनिश्‍चित कर लें कि उन्होंने आपकी जानकारियां सही से लिखी हैं या नहीं.
– डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज से जुड़ी कोई जानकारी अगर आपको समझ न आ रही हो, तो खुलकर सवाल पूछें. अगर डॉक्टर से बात करने में आप कंफर्टेबल न हों, तो अपने साथ किसी दोस्त या रिश्तेदार को ले जाएं.
– इलाज को लेकर किसी तरह का अगर कोई संदेह हो या सवालों के जवाब से अगर आप संतुष्ट न हों, तो सेकंड ओपिनियन (दूसरे डॉक्टर से बात) ज़रूर लें.
– डॉक्टर ने आपके लिए जो भी इलाज या चिकित्सा प्रक्रिया निर्धारित की है, उसके नुक़सान और फ़ायदों के बारे में पूरी जानकारी लें. इलाज से जुड़े साइड इफेक्ट को लेकर स्पष्ट रहें.

यूनिवर्सल सावधानियां

– मरीज़ की जांच करते व़क्त दस्ताने पहनें.
– हाथों की हाइजीन का ख़्याल रखें. मरीज़ के चेकअप के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोकर सैनिटाइज़ करें.
– ज़ब ज़रूरत हो, तब सर्जिकल मास्क अवश्य पहनें.
– उपयोग के बाद दूषित सुई को नष्ट कर दें.
– रोगी की देखभाल के लिए इस्तेमाल होनेवाले उपकरण, किसी दूसरे रोगी पर इस्तेमाल करने से पहले किटाणुरहित कर लें.
– अस्पताल से निकलनेवाले कचरे को ठीक से डिस्पोज़ करवाना भी ज़रूरी है.
– शिष्टाचार से पेश आएं. खांसते व छींकते समय अपने मुंह और नाक पर रूमाल ज़रूर रखें, ताकि आपकी बीमारी दूसरों में न फैले.