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Wedding Bell: सत्यव्रत की हुईं साक्षी मलिक (Wrestler Sakshi Malik Gets Married To Wrestler Satyawrat)

Sakshi Malik

हाल ही में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित भारत की स्टार रेस्टलर साक्षी मलिक अपने मंगेतर सत्यव्रत के साथ शादी के बंधन में बंध गईं. साक्षी की शादी की डेट पिछले साल ही निर्धारित कर दी गई थी. रियो ओलिंपिक 2016 में भारत की ओर से पहला मेडल जीतनेवाली साक्षी ने पिछले साल ही सगाई की थी. मीडिया से शादी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा था कि अभी शादी की तारीख़ में देरी है. बहरहाल, साक्षी को मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से शादी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

सत्यव्रत रोहतक स्थित अपने आवास से बरात लेकर पहुंचे. साक्षी वहां तक सिंड्रेला बग्घी में बैठकर आईं. वरमाला की रस्म अदा की गई. इस शादी में किसी तरह की लेन-देन नहीं की गई. सत्यव्रत के अखाड़े में संपन्न हुई टीके की रस्म अदा की गई. दूल्हे सत्यव्रत ने लग्न टीका में महज़ चांदी का एक सिक्का स्वीकार किया. वहीं साक्षी और सत्यव्रत ने मंगलगीत के बीच अपने घरों पर परंपरागत रस्में निभाई.

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मेंहदी लगवाते हुए साक्षी मलिक. इस फोटो को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी शेयर किया था और साथ में मैसेज भी लिखा था. आप भी देखिए, क्या था वो मैसेज.

शादी से पहले साक्षी और सत्यव्रत ने कुछ इस तरह से फोटोशूट कराया. इसमें दोनों एक स्लेट पर लिखी अपनी वेडिंग डेट शो कर रहे हैं. दोनों इस फोटो में बेहद क्यूट लग रहे थे. शादी के पहले अपनी शादी की डेट को कुछ इस अंदाज़ में बयां करना ये अलग अंदाज़ था.

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आप भी देखें शादी की कुछ और फोटोज़.

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प्रो रेसलिंग लीग ऑक्शन- हो जाइए तैयार, होनेवाली है दंगल की शुरुआत! (Pro Wrestling League 2 auctions)

Pro Wrestling League
प्रो रेसलिंग लीग ऑक्शन- हो जाइए तैयार, होनेवाली है दंगल की शुरुआत! (Pro Wrestling League 2 auctions)

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  • कुश्ती के चाहनेवालों के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी यही है कि प्रो रेसलिंग लीग का दूसरा सीज़न जल्द ही शुरू होनेवाला है.
  • इसकी शुरुआत हुई पहलवानों की नीलामी से. शुक्रवार 16 दिसंबर को हुए प्लेयर्स के ऑक्शन में भारत के बजरंग पुनिया सबसे महंगे बिके, उन्हें दिल्ली ने 38 लाख में ख़रीदा.
  • स्टार पहलवान योगेश्‍वर दत्त ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वो इस बार लीग का हिस्सा नहीं होंगे.
  • ओलिंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट व्लादिमेर खिनचेगाशविली (जॉर्जिया) सब पर भारी पड़े और उन्हें 48 लाख में पंजाब की फ्रेंचाइज़ी ने ख़रीदा.
  • बात अगर महिला पहलवानों की करें, तो मारिया स्टैडनिक सबसे महंगी खिलाड़ी रहीं. उन्हें दिल्ली ने 47 लाख में अपनी टीम का हिस्सा बनाया.
  • रियो में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल कर चुकी स्टार पहलवान साक्षी मलिक को 30 लाख में ख़रीदा गया, जबकि रितु फोगट को साक्षी से अधिक दामों पर ख़रीदा गया, उन्हें जयपुर ने 36 लाख में ख़रीदा.

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  • ग़ौरतलब है कि 2 जनवरी 2017 से सीज़न 2 की शुरुआत होने जा रही है और यह 19 जनवरी तक चलेगा.

तो अब हो जाइए तैयार… क्योंकि होनेवाली है दंगल की शुरुआत!

– गीता शर्मा 

लड़की होने का एक्सक्यूज़ मत दो- साक्षी मलिक (don’t give excuse that you are a girl)

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बेटियों के पैदा होने पर भले ही समाज में ख़ुशियां न मनाई जाती हों, लेकिन अपने हुनर से एक दिन बेटियां इस मौ़के को जीने के लिए समाज को अपनी ओर झुका ही लेती हैं. कुछ ऐसा ही हुआ हरियाणा की कुश्ती क्वीन साक्षी मलिक के साथ. रियो ओलिंपिक में जाने से पहले उनकी उपलब्धियों पर लोगों का ध्यान नहीं था, लेकिन जब ओलिंपिक के 12वें दिन देश को पहला मेडल इस बेटी ने दिलाया, तो देश के कोने-कोने से साक्षी मलिक के नाम के नारे लगाए जाने लगे. हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साक्षी मलिक ने हमसे शेयर की कुछ ख़ास बातें.

क्या आपको विश्‍वास था कि आप मेडल ला पाएंगी?
जी हां, मुझे ख़ुद पर विश्‍वास था कि मैं रियो ओलिंपिक में बहुत अच्छा करूंगी. मेडल तो भगवान के हाथ में था, लेकिन मैं जानती थी कि मुझे अपना बेस्ट देना है और वो मैं दूंगी. उससे मुझे कोई रोक नहीं सकता. मुझे मेरे देश के लिए कुछ ख़ास करना है. बस, इसी उम्मीद के साथ मैं खेली और देश के लिए मेडल जीता.

क्या लड़कियों के लिए कुश्ती में करियर बनाना ज़्यादा मुश्किल होता है?
भूल जाओ कि तुम लड़की हो. दुनिया का हर काम लड़कियां कर सकती हैं. लड़की होने का बहाना मत बनाओ. मुझे कभी नहीं लगा कि एक लड़की होने के नाते मुझे किसी तरह की कोई दिक्क़त हुई हो. हां, ये ज़रूर है कि हम लड़कियों की कुछ फिज़िकल प्रॉब्लम होती हैं, लेकिन उसे हम अपने रास्ते की रुकावट नहीं मान सकते. लड़की होना अच्छी बात है.

देश की लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
लड़की होना बहुत अच्छी बात है. इसे एक समस्या की तरह मत लो. तुम वो सब कर सकती हो, जो तुम चाहती हो, इसलिए आगे बढ़ो.

देश के बाहर कोच का साथ न जाना किस तरह से खेल को प्रभावित करता है?
बिल्कुल सही कहा आपने. हर एक गेम में कोच का साथ होना बहुत ज़रूरी होता है. वो हमारी कमियों को बताने और विरोधी खिलाड़ी को किस तरह से मात देनी है, जैसी बातें बताते हैं. उनके साथ न रहने पर हमें बहुत परेशानी होती है. कोच, फिज़ियो आदि हमारे साथ जाने चाहिए.

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क्या मेडल संघर्ष के दिन भुला देता है?
जी… ऐसा नहीं है. कड़ी मेहनत के बाद हम मेडल जीत पाते हैं. हां, ये ज़रूर है कि कुछ पल के लिए हम उन परेशानियों को दरकिनार कर देते हैं, लेकिन हमारे भीतर हमारा संघर्ष जीवित रहता है.

आपको इंस्पीरेशन किससे मिली?
2008 में जब सुशील कुमारजी ने देश को मेडल दिया, तब मुझे लगा कि मैं भी देश को कुश्ती में मेडल दिला सकती हूं. उसके बाद जापान की दो लड़कियों ने मुझे बहुत प्रभावित किया.

क्या स़िर्फ जीत के बाद पैसों की बौछार करना सही है या शुरुआती दिनों में खिलाड़ियों को सारी सुविधाएं प्रोवाइड करानी चाहिए?
जी बिल्कुल, जब हम जीतकर आते हैं, तो सभी बहुत ख़ुश होते हैं और गिफ्ट के तौर पर हमें पैसे मिलते हैं, लेकिन मैं ये कहना चाहूंगी कि इसके साथ ही सरकार और तमाम संगठन को आगे आना चाहिए और नए खिलाड़ियों की आर्थिक मदद करनी चाहिए. उन्हें सही ट्रेनिंग, कोच, डायट आदि उपलब्ध कराना चाहिए. इससे आगे वो प्लेयर देश के लिए ज़रूर अच्छा करेंगे. कई बार आर्थिक रुकावटें कई खिलाड़ियों को आगे नहीं बढ़ने देतीं.

क्या मेडल जीतने के बाद प्रेशर बढ़ गया है?
बिल्कुल सही कहा आपने. मेडल जीतने के बाद प्रेशर बहुत बढ़ गया है. और बेहतर करने का दबाव बढ़ जाता है, लेकिन इससे मैं निराश नहीं हूं. इसे हमेशा सकारात्मक रूप से लूंगी, ताकि आगे और अच्छा कर सकूं.

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कम उम्र में सक्सेस को हैंडल करना कितना मुश्किल/आसान है?
देखिए, ये तो है कि मेडल लाने के बाद लोग मेरी बहुत प्रशंसा कर रहे हैं. कई माता-पिता अपने बच्चों को मेरे जैसा बनने की नसीहत दे रहे हैं. देश-विदेश से बधाइयां मिल रही हैं, लेकिन इसे मैं सही तरह से ले रही हूं. मैं जानती हूं कि मैं कहां हूं, इसलिए हमेशा ज़मीन से जुड़ी रहूंगी.

क्या आप जैसे खिलाड़ियों की कहानी नए खिलाड़ियों को मीडिया के माध्यम से बताई जानी चाहिए?
मुझे लगता है कि ज़रूर बताई जानी चाहिए. संघर्ष, परिश्रम, हार-जीत आदि से जुड़ी कहानी बताई जानी चाहिए. इससे नए खिलाड़ियों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा. उनका मनोबल ऊपर उठेगा और वो बेहतर परफॉर्म कर सकेंगे.

हमें पता नहीं होता कि कौन-सा सप्लीमेंट कब लें
हमारे और विदेशी खिलाड़ियों में एक जो सबसे बड़ा फर्क़ है, वो है उनका हर चीज़ में परफेक्ट होना. उनके कोच, फिज़ियो आदि उनके साथ होते हैं. वो समय के साथ चलते हैं, लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं होता. हमें तो बस सप्लीमेंट दे दिए जाते हैं. अब उसे कब खाना है, कैसे खाना है या कितना खाना है, वो हम पर निर्भर करता है. हमारी डायट का ख़्याल भी हमें ख़ुद ही रखना पड़ता है. इन सब से बहुत फर्क़ पड़ता है.

– श्वेता सिंह

शरम आ रही है ना…? वायरल हुई प्रसून जोशी की ये कविता

पीवी सिंधु, साक्षी मलिक और दीपा करमाकर के रियो ओलंपिक 2016 में शानदार प्रदर्शन के बाद पूरा देश उनकी तारीफ़ कर रहा है. देश की बेटियां मेडल लेकर आई हैं, इस बात से हर देशवासी गर्व महसूस कर रहा है. लेकिन देश में कई ऐसी जगह है जहां महिलाओं को पुरुषों से कम आंका जाता है. ओलंपिक में तिरंगा लहराने वाली बेटियों ने साबित कर दिया है कि वो पुरुषों से किसी मामले में कम नहीं. महिलाओं और लड़कियों के प्रति समाज के दोगले रवैये पर प्रसून जोशी ने अपनी कविता के ज़रिए तीखी प्रतिक्रिया की है. कुछ ही घंटों में ये कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है.

रियो ओलिंपिक – जीत का सिलसिला बरकरार रहे-Rio Olympic

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17 अगस्त, 2016 का दिन भारतीय खेल के इतिहास में, ख़ासतौर पर ओलिंपिक(Rio Olympic) खेलों में भारत की उपलब्धियों के तौर पर सुनहरे अविस्मरणीय यादगर पलों के रूप में हमेशा याद किया जाएगा.

आख़िरकार साक्षी मलिक ने कुश्ती में भारत को ब्रॉन्ज़ मेडल दिलाकर जीत की शुरुआत कर ही दी. अब पी. वी. सिंधू के ज़रिए आज 19 अगस्त को भारत अपना दूसरा मेडल हासिल करेगा.

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यदि इतिहास पर एक नज़र डालते हैं, तो अब तक केवल तीन भारतीय महिलाएं ओलिंपिक में मेडल जीतने में कामयाब रही हैं.

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1. कर्णम मल्लेश्‍वरी

(साल 2000 सिडनी ओलिंपिक में वेटलिफ्टिंग के 69 कि.ग्रा. में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने में सफल रहीं.)

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2. एम. सी. मेरीकॉम

(पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन इस बॉक्सर ने 2012 लंदन ओलिंपिक में 51 कि.ग्रा. में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था)

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3. साइना नेहवाल

(2012 के लंदन ओलिंपिक में इस बैडमिंटन स्टार ने ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था)

Sakshi Malik-रियो ओलिंपिक… जीत की साक्षी… महिला कुश्ती में भारत को मिला कांस्य पदक!

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छा गईं साक्षी मलिक!
  • फ्री स्टाइल महिला कुश्ती में 58 किलोग्राम की वेट केटेगरी में भारत की साक्षी मलिक ने बाज़ी मार ली और इस तरह से रियो ओलिंपिक में भारत को पहला पदक भी मिल गया.(Sakshi Malik)
  • 23 वर्षीय साक्षी(Sakshi Malik) ने बुधवार को हुए कुश्ती के मुकाबले में कज़ाकिस्तान की अइसुलू टाइबेकोवा के पराजित कर कांस्य पदक हासिल किया.

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  • एक समय था जब साक्षी इस मुकाबले में 0-5 से पिछड़ रही थीं, लेकिन साक्षी ने दूसरे राउंड में 8-5 से यह मुकाबला जीत लिया.
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में साक्षी ने कहा कि उनके मन में एक बार भी यह ख़्याल नहीं आया कि वो हार जाएंगी.
  • साक्षी का कहना था, “भले ही मैं पिछड़ रही थी, लेकिन मेरे मन में नकारात्मक ख़्याल नहीं आए. मुझे यही लग रहा था कि यह मेडल मेरा है और देखिए मेरे हाथ में मेडल आ गया. मेरे सपना था कि मैं अपने देश का झंडा लेकर ग्राउंड में सबके सामने गर्व से सिर ऊंचा करके दौड़ सकूं और आज मेरा यह सपना पूरा हो गया.”
  • साक्षी ओलिंपिक में कुश्ती में पदक हासिल करनेवाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. हमें गर्व है देश की बेटी साक्षी पर!!!