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छोटे-छोटे निवेश से करें बड़ी बचत (Small Investments, Big Returns)

छोटे-छोटे निवेश, बड़ी बचत, Small Investments, Big Returns

छोटे-छोटे निवेश, बड़ी बचत, Small Investments, Big Returns

बच्चों की ट्यूशन फीस, उनके लिए कंप्यूटर व लैपटॉप की ख़रीददारी, घर की मरम्मत करवानी हो या फिर घर के लिए ज़रूरी कोई सामान ख़रीदना हो… कई ऐसे ख़र्चे हैं, जो गाहे-बगाहे सामने आ ही जाते हैं. इस तरह के आकस्मिक ख़र्चों को पूरा करने के लिए एक ‘स्पेशल बचत/फंड’ की ज़रूरत होती है, जिनसे इन आकस्मिक ख़र्चों की पूर्ति की जा सके. आइए जानें, निवेश करने के ऐसे ही कुछ ख़ास तरीक़ों के बारे में.

मुंबई के एक पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत प्रमोदिनी कदम के अनुसार, “पोस्ट ऑफिस में समय-समय पर अनेक शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट स्कीम्स निकलती रहती हैं, जिनकी अवधि एक साल, 2 साल, 3 साल या 5 साल की होती है. इस तरह की स्कीम्स में छोटे-छोटे निवेश करके आप बड़ी बचत कर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा भी कर सकते हैं.”

पोस्ट ऑफिस
छोटे-छोटे निवेश करने के लिए पोस्ट ऑफिस सबसे अच्छा विकल्प है. अन्य वित्तीय संस्थानों और बैंकों की तरह पोस्ट ऑफिस भी अपने कस्टमर्स को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए समय-समय पर अनेक स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स निकालते रहते हैं. जैसे- पोेस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम्स: इस स्कीम के अंतर्गत जमाकर्ता को एक निश्‍चित जमाराशि एक नियत समय के लिए जमा करनी होती है. अवधि पूरी होने पर जमाकर्ता को ब्याज सहित पूरी जमाराशि मिल जाती है. इस स्कीम के तहत जमाकर्ता कम से कम 200 और अधिकतम अपनी इच्छानुसार जमा करा सकता है. इस योजना के अंतर्गत 1 साल में 8.2%, 2 साल में 8.2%, 3 साल में 8.4% और 5 साल में 8.5% ब्याज मिलता है. 6 महीने के बाद कभी भी इस योजना को एनकैशमेंट करा सकते हैं. कम अवधि के लिए निवेश करनेवाले जमाकर्ताओं के लिए यह बहुत लाभकारी योजना है. इस योजना में आयकर छूट भी उपलब्ध है.

पोस्ट ऑफिस मंथली इन्कम स्कीम: इस योजना के तहत जमाकर्ता को शुरुआत में 6,000 का निवेश करना पड़ता है. 5 साल की अवधि वाली इस योजना में 8.4% की दर से प्रति माह ब्याज़ मिलता है. इस योजना के तहत जमाकर्ता 1 साल के बाद कभी भी अपनी जमाराशि निकाल सकते हैं. 1 से 3 साल के बीच जमाराशि निकालने पर कुल राशि का 2% पैनल्टी काटकर बाकी की जमाराशि वापस मिल जाती है. 3 से 5 साल से पहले जमाराशि निकालने पर 1% की पैनल्टी लगती है.

और भी पढ़ें: टॉप 10 सुपर सेविंग ट्रिक्स

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स: छोटे-छोटे निवेश के तौर पर जमाकर्ताओं के लिए नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स भी एक अच्छा विकल्प है. ये सर्टिफिकेट्स 2 तरह के होते हैं. पहला- वे सर्टिफिकेट्स- जिनकी अवधि 10 साल की होती है. दूसरा- जिनकी अवधि 5 साल की होती है. 5 साल की अवधि वाले इन सर्टिफिकेट्स पर जमाकर्ता 100 से लेकर इच्छानुसार अधिकतम निवेश कर सकते हैं. जमाकर्ता को इन सर्टिफिकेट्स पर 8.5% का ब्याज मिलता है. इन पर आयकर छूट भी उपलब्ध है. इन सर्टिफिकेट्स का प्रीमेच्योर एनकैशमेंट केवल कुछ विशेेष परिस्थितियों (जैसे डेथ) में ही हो सकता है.

पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉज़िट स्कीम: पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी की गई इस शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट प्लानिंग से जमाकर्ता अपने सपनों को आसानी से पूरा कर सकते हैं. इस योजना में जोख़िम की कोई संभावना नहीं होती. इस योजना के तहत जमाकर्ता को एक निश्‍चित राशि जमा करानी होती है. न्यूनतम राशि 10 से लेकर अधिकतम अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं. 5 साल की अवधि वाली इस योजना में ब्याज की दर 8.4% है.

पिग्गी बैंक: निवेश करने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा निकाली गई किसी स्कीम में इंवेस्ट करें. घर बैठे-बैठे, बिना कोई अतिरिक्त ख़र्च किए भी आप थोड़ा-थोड़ा निवेश कर सकते हैं पिग्गी बैंक के ज़रिए. पिग्गी बैंक आकस्मिक ख़र्चों को पूरा करने के लिए एक अच्छा फाइनेंशियल रिसोर्स (आर्थिक साधन) है. इसमें जमा करना अन्य विकल्पों की अपेक्षा बहुत ही आसान है. बस, आपको यह तय करना है कि आपको पिग्गी बैंक में हर महीने कितनी राशि डालनी है. यदि आरंभ से ही निर्धारित जमाराशि नियत समय पर डालते रहेंगे, तो एक बड़ी जमाराशि जोड़ लेगें.

और भी पढ़ें: इन्वेस्टमेंट से जुड़ी 10 ग़लतियां

किट्टी बैंक: निवेश करने का एक और अच्छा तरीक़ा है किट्टी बैंक. पिग्गी बैंक की तरह किट्टी बैंक में भी निवेश करना बहुत आसान है. किट्टी बैंक डालने के लिए कम से कम 12 सदस्यों की ज़रूरत होती है (सदस्यों की संख्या कम या ज़्यादा भी हो कर सकते हैं). आपसी सहमति से प्रति सदस्य फंड की राशि और किट्टी बैंक की तारीख़ तय कर सकते हैं. किट्टी बैंक के लिए एक कॉर्डिनेटर की ज़रूरत भी होती है, जो सब सदस्यों से निर्धारित तारीख़ पर फंड जमा करें. इसके बाद सारे सदस्यों के नाम की परची डालकर उसमें से किसी एक के नाम की परची निकाल लें. जिसके नाम की परची निकलेगी, किट्टी उसी को ही मिलेगी. किट्टी बैंक के 2 लाभ है, पहला- इस तरी़के से निवेश करना बहुत आसान है और दूसरा- दोस्तों आदि के साथ एंजॉय करने का मौक़ा मिल जाता है.

शॉर्ट टर्म्स इन्वेस्टमेंट्स बॉन्ड्स: यह भी ‘छोटे निवेश’ फंड का एक अहम् भाग है. जिसमें बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां निवेशकों को लुभाने के लिए अपनी कंपनी के नाम ‘शॉर्ट टर्म्स इन्वेस्टमेंट बॉन्ड्स’ इश्यू करती हैं. इन बॉन्ड्स की अवधि 1 से लेकर 4 साल तक की होती है. इन बॉन्ड्स में जोख़िम की संभावना कम होती है. इस तरह के बॉन्ड्स में निवेश करने के पीछे जमाकर्ता का उद्देश्य अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के साथ-साथ अतिरिक्त बोनस/प्रीमियम प्राप्त करना होता है.

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– पूनम नागेंद्र शर्मा

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मनी सेविंग के 7 अमेज़िंग टिप्स (7 amazing tips for money saving)

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किचन के डिब्बे, बच्चों की गुल्लक में पैसा जमा करना पुराना और फ्लॉप आइडिया है मनी सेविंग का. सेविंग के ये तरी़के आज की मॉडर्न और हाइ प्रोफाइल लाइफ में नहीं चलेगा. आपको स्मार्टली मनी सेविंग ट्रिक्स आनी चाहिए.

डेली बेसिस बजट
मंथली बजट बनाने के साथ ही आप डेली बेसिस पर बजट बनाएं. उदाहरण के लिए प्रतिदिन आपके घर का कितना ख़र्च है, हर दिन कौन-सी चीज़ें आप मंगाते ही हैं, बच्चों पर हर दिन कितना ख़र्च हो जाता है आदि का बजट बनाएं. इसी सिलसिले में हर दिन कुछ अमाउंट सेव करें.

RD है बेस्ट ऑप्शन
घर पर पैसे रखने से पैसे ख़र्च हो जाते हैं, इसलिए आप बैंक में आरडी अकाउंट खुलवाएं. हर माह कुछ पैसे इसमें जमा करते रहें. हो सके तो इसको अपने सैलरी अकाउंट से सीधे कनेक्ट करें. इससे ये फ़ायदा होगा कि महीने की एक तारीख़ को अपने आप सैलरी का एक हिस्सा आरडी में जाता रहेगा.

प्री शॉपिंग लिस्ट
स्मार्ट बायर बनिए. किसी भी व़क्त शॉपिंग के लिए निकलना बेवकूफ़ी है. इससे पैसे ज़्यादा ख़र्च होते हैं. पहली बात तो ये कि जब भी शॉपिंग पर जाएं, एक लिस्ट पहले ही बना लें. जो ख़रीदना है, उसकी लिस्ट जब आपके पास रहेगी, तो ज़्यादा ख़र्च से बचेंगे. ऐसे में आप उन्हीं चीज़ों की शॉपिंग करेंगे, जिसकी ज़रूरत है. ये ट्रिक आपको पैसा बचाने में कामयाब बनाएगी.

रेड्यूस इलेक्ट्रीसिटी बिल
पैसे बचाने का ये नायाब तरीक़ा है. आमतौर पर लोगों का ध्यान इस पर नहीं जाता. स्मार्ट बनिए और घर का बिजली का बिल कम करिए. बेकार में जली रही लाइट्स, चल रहे पंखे आदि बंद रखें. स़िर्फ एक महीने स्मार्ट सिटिजन बनकर पावर सेव कीजिए, बिजली का बिल अपने आप कम हो जाएगा.

इंटरनेट मेनिया
इंटरनेट का यूज़ करके भी आप पैसे बचा सकते हैं. उदाहरण के लिए न्यूज़ पेपर पढ़ने की बजाय ई पेपर पढ़ें. महीने में जो भी मैगज़ीन मंगाते हैं, उसे बंद करके ऑनलाइन ई मैगज़ीन पढ़ें. इससे हर महीने न्यूज़ पेपर और मैगज़ीन पर होनेवाले ख़र्च बंद हो जाएंगे और पैस बचेेंगे.

प्राइवेट नहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट
अपनी कार/बाइक से ऑफिस जाने की बुरी लत से बचिए. बेहतर होगा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का फ़ायदा उठाएं. इससे आपकी जर्नी भी सेफ होगी और पैसे भी सेव रहेंगे.

नो क्रेडिट ओन्ली कैश
क्रेडिट कार्ड का यूज़ आपको ज़्यादा ख़र्च करने पर बाध्य करता है. इसका मुख्य कारण है कार्ड. फिज़िकली आपको पैसा पे नहीं करना होता. इससे आपके दिमाग़ में ख़र्च का खाका नहीं बनता. अब से जब भी पे करना हो, तो क्रेडिट कार्ड के बदले कैश पे करें.

– श्वेता सिंह

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15 इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स महिलाओं के लिए (15 Investment options for women)

Investment options

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रिटर्न्स तो हर इन्वेस्टमेंट से मिलते हैं, लेकिन हमारे लिए क्या सही है, ये जानने के लिए ज़रूरी है इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स को जानना. मीनाक्षी ओस्तवाल बता रही हैं महिलाओं के लिए इन्वेस्टमेंट के 15 ऑप्शन्स, ताकि आप चुन सकें अपने लिए निवेश का सही विकल्प. निवेश करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ होती है निवेशक की रिस्क कैपेसिटी यानी निवेशक कितना रिस्क ले सकता है, क्योंकि इसी पर काफ़ी हद तक रिटर्न्स निर्भर होते हैं. तो आइए, इन्वेस्टमेंट के विकल्पों को लो रिस्क और हाई रिस्क के अनुसार वर्गीकृत करके जानते हैं. (Investment Options)

लो रिस्क लो रिटर्न इन्वेस्टमेंट्स
लो रिस्क वाले इन्वेस्टमेंट ज़्यादातर गवर्नमेंट बॉन्ड या पोस्ट ऑफ़िस इन्वेस्टमेंट होते हैं. इनमें रिस्क काफ़ी कम होता है और साथ ही रिटर्न्स भी. यदि आप सेफ़र साइड रहकर रिटर्न से ज़्यादा फ़्यूचर के लिए जमा करने में यक़ीन रखती हैं, तो ये इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स आपके लिए बेहतर साबित होंगे.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ़)
पीपीएफ़ 15 वर्ष के एन्युटी टर्म (मैच्योरिटी पीरियड) के साथ होता है. इसमें आप प्रति वर्ष न्यूनतम 500 रु. तथा अधिकतम 70,000 रु. तक इन्वेस्ट कर सकती हैं. 70,000 रु. से अधिक निवेश करने पर एक्स्ट्रा राशि बिना किसी ब्याज के लौटा दी जाती है. पीपीएफ़ में निवेश करने पर डबल टैक्स बेनिफ़िट मिलता है. इस पर मिलने वाला 8% वार्षिक ब्याज तो टैक्स फ्री है ही, इसके अलावा इसमें जमा की गई राशि पर आप सेक्शन 80 ङ्गसीफ के तहत डिडक्शन (छूट) भी क्लेम कर सकती हैं. इसके अलावा आप पीपीएफ़ में जमा की गई राशि पर लोन भी ले सकती हैं. सातवें वर्ष की शुरुआत से 50% तक राशि विदड्रॉ भी करवा सकती हैं. मगर ये विदड्रॉवल आप साल में केवल एक बार ही कर सकती हैं.

भविष्य निर्माण बॉन्ड्स
भविष्य निर्माण बॉन्ड्स 10 साल के ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स होते हैं. ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स यानी इन बॉन्ड्स पर आपको कोई इन्ट्रेस्ट नहीं मिलता. ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स कम क़ीमत पर इश्यु करके ज़्यादा क़ीमत पर रिडीम किए जाते हैं. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बॉन्ड 9000 रु. में इश्यु करके 20,000 रु. में रिडीम होता है तो निवेशक को 11000 रु. का फ़ायदा होता है यानी 8.31% का रिटर्न. भविष्य निर्माण बॉन्ड की इश्यु प्राइज़ (जारी करने की क़ीमत) नाबार्ड (नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट) द्वारा पब्लिश की जाती है. चूंकि ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स पर कोई इंट्रेस्ट नहीं मिलता, अतः इस पर टैक्स भी नहीं लगता, किंतु इसके रिडम्शन प्राइज़ पर होने वाले प्रॉफ़िट पर कैपिटल गेन टैक्स पे करना पड़ता है. यह टैक्स अमाउंट इंडेक्शन बेनिफ़िट्स के बाद हुए कैपिटल गेन का 20% होता है.

नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (एनएससी)
एनएससी ही एक मात्र ऐसा इन्वेस्टमेंट है, जिसमें आप को निवेश के साथ-साथ ब्याज पर भी 5 साल तक डिडक्शन मिलता है. एनएससी की कालावधि 6 वर्ष की होती है. इसमें 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिलता है. एनएससी को गिरवी रख कर आप इस पर लोन भी ले सकती हैं. एनएससी अब डीमेट फ़ॉर्मेट में भी उपलब्ध है.

सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम 
यदि आप की उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है तो आप सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम में इन्वेस्ट कर सकती हैं. इसका इन्ट्रेस्ट रेट (ब्याज दर) 9% प्रति वर्ष होता है. आप इसमें कम-से-कम 1000 रु. या 1000 रु. के मल्टीपल्स (गुणांक) में इन्वेस्ट कर सकती हैं. इसमें कोई टैक्स बेनिफ़िट नहीं मिलता. यदि इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम सालाना 10,000 रु. या अधिक होती ़़है तो इस पर 10.30% की दर से टीडीएस भी कटता है. वीआरएस सिस्टम के तहत रिटायर हुए लोगों के लिए इस स्कीम में इन्वेस्ट करने के लिए न्यूनतम उम्र 60 वर्ष नहीं, बल्कि 55 वर्ष है. जबकि रिटायर्ड ड़िफेंस सर्विस ऑफ़िसर्स के लिए कोई एज लिमिट नहीं है.

किसान विकास पत्र (केवीपी)
मैच्योरिटी पर किसान विकास पत्र की रकम दोगुनी हो जाती है. पहले केवीपी का मैच्योरिटी पीरियड 7 वर्ष 8 महीने था, पर मार्च 2003 में इसे बढ़ाकर 8 वर्ष 7 महीने कर दिया गया यानी मार्च 2003 से ख़रीदे गए केवीपी को मैच्योरिटी के लिए 8 वर्ष 7 महीने तक होल्ड करना होगा.

आरबीआई टैक्सेबल सेविंग बॉन्ड्स
आरबीआई टैक्सेबल सेविंग बॉन्ड्स नॉन-सीनियर सिट़िज़न्स के बीच बहुत पॉप्युलर है. इसका इन्ट्रेस्ट रेट 8% है. ये बॉन्ड्स 4 साल के लिए होते हैं. इसमें आप कम-से-कम 1000 रु. या 1000 रु. के मल्टीपल्स में अनलिमिटेड इन्वेस्ट कर सकती हैं. ये बॉन्ड्स स्टॉक सर्टिफ़िकेट के रूप में इश्यु किए जाते हैं. यदि आप चाहें तो इनका क्रेडिट बॉन्ड लेज़र अकाउंट यानी बीएलए में भी ले सकती हैं. बीएलए में स्टॉक सर्टिफ़िकेट के बजाय अकाउंट स्टेटमेंट इश्यु किए जाते हैं. यदि इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम सालाना 10,000 रु. या इससे अधिक होती है तो इस पर 10.30% की दर से टीडीएस भी कटता है. ये बॉन्ड्स डीमेट अकाउंट में भी रख सकती हैं. इन्हें ट्रान्सफ़र या गिरवी नहीं रखा जा सकता और न ही किसी को ग़िफ़्ट में दिया जा सकता है.

बैंक डिपॉज़िट्स
बैंक डिपॉज़िट इन्वेस्टमेंट का एक अच्छा और सेफ़ ऑप्शन है. आप बैंक एफ़डी या आरडी में इन्वेस्ट कर सकती हैं. अपने इन्वेस्टमेंट की कालावधि अपनी सहूलियत के अनुसार तय कर सकती हैं. एफ़डी और आरडी का इन्ट्रेस्ट रेट सालाना 8 से 10.5 % तक होता हैं. अलग-अलग बैंकों का इन्ट्रेस्ट रेट अलग-अलग होता है.
हालांकि यदि इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम सालाना 10,000 रु. या इससे अधिक होती है तो इस पर 10.30% की दर से टीडीएस भी कटता है और साथ ही बैंक डिपॉज़िट्स में टैक्स बेनिफ़िट्स नहीं मिलते, पर पांच वर्ष से अधिक कालावधि की एफ़डी में निवेश करने से आप इन्वेस्टमेंट अमाउंट पर डिडक्शन क्लेम कर सकती हैं.

पोस्ट ऑफ़िस मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस)
पोस्ट ऑफ़िस मंथली इनकम स्कीम में आप अपनी सुविधा के अनुसार हर महीने एक फ़िक्स अमाउंट जमा कर सकती हैं. इस पर 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिलता है. आप इसमें न्यूनतम 1000 रु. से लेकर अधिकतम 3 लाख तक इन्वेस्ट कर सकती हैं. ज्वॉइंट अकाउंट की दशा में लिमिट 6 लाख तक होती है. एमआईएस अकाउंट ओपन करने के एक साल बाद आप इसे मैच्योरिटी पीरियड से पहले ही विदड्रा करवा सकती हैं.

हाई रिस्क हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट्स
यदि आप अपने निवेश पर ज़्यादा रिटर्न चाहती हैं तो थोड़ा रिस्क भी लेना चाहिए. आइए, नज़र हालते हैं हाई रिस्क हाई रिटर्न वाले इनवेस्टमेंट ऑप्शन्स पर.

शेयर्स
शेयर यानी स्टॉक मार्केट में निवेश करने से जितने अच्छे रिटर्न मिलते हैं यह उतना ही रिस्की भी है. किंतु यदि आप हाई रिस्क लेने में यक़ीन रखती हैं तो स्टॉक मार्केट फटाफट पैसा कमाने का अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है. इसके लिए किसी भी कंपनी के शेयर्स ख़रीदते समय केवल ब्रोकर पर भरोसा न करके अपनी तरफ़ से कंपनी का पास्ट परफ़ॉर्मेंस ज़रूर चेक कर लें. साथ ही शेयर को लॉन्ग टर्म तक होल्ड करने की आदत डालें, क्योंकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी एक साल से ज़्यादा समय तक होल्ड करने पर होने वाला प्रॉफ़िट टैक्स फ्री है, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स लगता है.

म्यूचुअल फंड
यदि स्टॉक मार्केट पर नज़र बनाए रखना आपके लिए संभव न हो, तो म्यूचुअल ़फंड्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. म्यूचुअल फंड में आपका पैसा मार्केट एक्सपर्ट की निगरानी में स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट किया जाता है. इस निवेश पर होनेवाले प्रॉफ़िट में से म्यूचुअल फंड प्रदाता कंपनी अपने चार्जेज़ काट कर बाक़ी रकम आपके अकाउंट में जमा कर देती है. म्यूचुअल फंड्स की कई अलग-अलग स्कीम्स मार्केट में उपलब्ध हैं, जैसे- डेब्ट फंड्स, इक्विटी फंड्स, बैलेंड्स फंड्स आदि. म्यूचुअल फंड में होने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ्री होता है, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स पे करना होता है.

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम म्यूचुअल फंड्स का ही एक प्रकार है. यह 3 वर्ष के लॉक इन पीरियड के साथ होता है. इसमें अच्छे रिटर्न मिलते हैं, क्योंकि इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में 80% तक इक्विटी मार्केट में इन्वेस्ट किया जाता है. यह इन्वेस्टमेंट ऑप्शन टैक्स प्लानिंग के लिए बेस्ट माना जाता है, क्योंकि इस इन्वेस्टमेंट में सेक्शन 80 C के तहत डिडक्शन मिलता है. 3 वर्ष के लॉक इन पीरियड के कारण लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होता है, जो कि टैक्स फ्री होता है.

गोल्ड
यदि गोल्ड में इन्वेस्ट करना चाहती हैं, तो गहनों के बजाय गोल्ड कॉइन्स, बार्स और गोल्ड बुलियन्स ख़रीदें. गोल्ड कॉइन्स या बार ख़रीदते समय यह ज़रूर ध्यान रखिए कि इन पर हॉलमार्क लगा हो. गोल्ड रेप्युटेड ज्वेलर्स या बैंक से ही ख़रीदें. गोल्ड में इन्वेस्ट करने के लिए गोल्ड ख़रीदने के बजाय आप गोल्ड ट्रेडेड फंड या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में भी निवेश कर सकती हैं. गोल्ड में हुए कैपिटल गेन पर शॉर्ट टर्म यानी 3 साल से कम पर 10 प्रतिशत और लॉन्ग टर्म यानी 3 साल से ज़्यादा पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है.

प्रॉपर्टी
ज़मीन की क़ीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी के मद्देनज़र प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट आजकल काफ़ी पॉप्युलर हो रहा है. इसमें आपको टैक्स बेनिफ़िट्स भी मिलता है. उदाहरण के लिए यदि आप कोई घर ख़रीदती हैं तो उस घर पर अदा की गई स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्जेज़ को डिडक्शन के रूप में क्लेम कर सकती हैं. प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट पर होने वाले कैपिटल गेन पर लॉन्ग टर्म में 20% और शॉर्ट टर्म में 10% टैक्स पे करना पड़ता है. प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करते समय प्रॉपर्टी के लोकेशन का अच्छे से मुआयना कर लें.

यूलिप
यूलिप में हाई रिटर्न्स के साथ-साथ लाइफ़ कवर भी मिलता है. यूलिप का मैच्योरिटी टर्म 10 से 15 वर्ष का होता है. इसमें आप प्रति वर्ष न्यूनतम 15000 रु. और अधिकतम 5 लाख रु. तक इन्वेस्ट कर सकती हैं. साथ ही इन्वेस्टमेंट अमाउंट पर डिडक्शन भी क्लेम कर सकती हैं. यूलिप में आप अपनी सहूलियत के मुताबिक़ इंस्टॉलमेंट में भी इन्वेस्ट कर सकती हैं, पर पैसे विदड्रॉ करवाने के लिए कम-से-कम 7 साल का इंतज़ार करना होता है. यूलिप में निवेश की गई राशि का 60% हिस्सा गवर्नमेंट डिपॉज़िट्स और 40% हिस्सा स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट होता है. यानी शेयर्स और इक्विटी ओरियंटेड म्यूचुअल ़फंड्स के मुक़ाबले ये कम रिस्की होते हैं.

डेरिवेटिव्स
निवेश करने के लिए डेरिवेटिव्स यानी कोमोडिटी मार्केट एक अच्छा विकल्प है. शेयर्स की तरह इन्हें भी आप ओपन मार्केट में ख़रीद-बेच सकती हैं. इनका डिलिवरी पीरियड एक महीना होता है. यानी ख़रीदने के एक महीने के अंदर आपको इन्हें क़ीमतें बढ़ने पर बेचना होता है. चूंकि ये कोमोडिटीज़ कई किलो और टन में होती हैं, अतः इनकी फ़िज़िकल डिलिवरी लेना संभव नहीं होता है. अतः इनके ट्रांजेक्शन को डीमेट अकाउंट में रखा जाता है.

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ट्रैवलिंग में कैसे करें बचत? (How to save money during travelling)

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क्या आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें हमेशा यात्रा करनी पड़ती है? कभी ऑफिस का काम, तो कभी फैमिली ट्रिप. अब ऐसे में आपकी जेब पर भार तो पड़ेगा ही, लेकिन कुछ स्मार्ट तरी़के से आप इससे बच सकते हैं. बढ़ती महंगाई में बचत करने की आपकी आदत को तब क्या हो जाता है, जब आप टूर पर निकलते हैं. सालभर की बचाई रकम यूं मिनटों में एक ही ट्रिप पर उड़ा देना समझदारी नहीं है. असली बचत तो तब होगी, जब आप ट्रैवलिंग में भी बचत कर सकें. चलिए, जानते हैं क्या हैं वो टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप स्मार्ट ट्रैवलर बन सकते हैं.

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ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें
किसी भी जगह का टूर प्लान करते समय ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें. जिस तरह आप शॉपिंग करने के लिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, ठीक उसी तरह ट्रैवलिंग के लिए ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें. इसे आप बैंक के ज़रिए बनवा सकते हैं. बेहतर होगा कि जिस बैंक में आपका अकाउंट है, उसी बैंक से ट्रैवल कार्ड बनवाएं. इस ट्रैवल कार्ड की ख़ासियत यह है कि ज़रूरत पड़ने पर आप इसे रिचार्ज भी करा सकते हैं. हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए आपको कैश देने की ज़रूरत नहीं. इससे आप टेंशन फ्री रहेंगे और सफ़र का आनंद भी उठा पाएंगे.

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अपने वॉलेट में ज़्यादा पैसे न रखें
आमतौर पर किसी भी ट्रिप पर जाने से पहले लोग अपने पर्स में एक्स्ट्रा अमाउंट रख लेते हैं. वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि इमर्जेंसी के व़क्त अगर कोई एटीएम मशीन आसपास न दिखे, तो वो इस कैश का इस्तेमाल कर सकें. हो सकता है, आपकी आदत भी कुछ ऐसी ही हो, लेकिन ये सही तरीक़ा नहीं है. इस तरह आपका पूरा ध्यान आपके पर्स पर ही रहता है और आप घूमने का आनंद नहीं ले पाते.

बैंक को इंफॉर्म करें
ट्रैवलिंग में पैसे बचाने का ये एक बेहतरीन तरीक़ा है. ट्रैवलिंग के बारे में अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनी को जानकारी दें. पूरा ट्रैवल प्लान बताएं. ऐसे में ग़लती से अगर आपका कार्ड खो जाता है, तो बैंक उसे ब्लॉक करके आपको दूसरी आईडी मुहैया कराती है ताकि आप आसानी से अपनी ट्रिप एंजॉय कर सकें. कई बार बैंक के पास घूमने के अच्छे प्लान होते हैं. ऐसे में आप काफ़ी पैसे बचा सकते हैं.

फ़र्जी एटीएम से बचें
आप अपने साथ चाहे जितना भी कैश ले जाएं, लेकिन यात्रा करते समय पैसों की कमी हो सकती है. ऐसे में पैसों को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी एटीएम मशीन से पैसे नहीं निकालें. उसी एटीएम से पैसा निकालें जिस बैंक के बारे में आपको जानकारी हो. कोशिश करें कि जिस बैंक में आपका अकाउंट है, उसी बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करें.

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पब्लिक कंप्यूटर का यूज़ न करें
कई बार ऐसा होता है कि सफ़र के दौरान हमें नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना पड़ता है. ऐसे में आप अपना लैपटॉप लेकर जाएं. कभी भी होटल या साइबर कैफे के कम्प्यूटर का इस्तेमाल न करें. आपके नेट बैंकिंग की निजी जानकारी आसानी से कोई भी हैक कर सकता है, इसलिए पब्लिक कंप्यूटर से नेट बैंकिंग न करें. प्रकित नंदी जो एक एडवर्टाइज़िंग कंपनी में काम करते हैं, उनका कहना है कि एक साल पहले वो अपने परिवार के साथ सिंगापुर छुट्टियां बिताने गए थे. वहां उन्होंने होटल के कंप्यूटर से नेट बैंकिंग की. जब वो सफ़र से वापस आए, तो कुछ दिनों बाद उन्हें पता लगा कि उनके अकाउंट से 15,000 रुपए किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हुए थे. आपके साथ ऐसा कुछ न हो, इसलिए सतर्क रहें.

स्मार्ट टिप्स

  • सफ़र के दौरान अपने बैंक का पासवर्ड, एटीएम पिन आदि की जानकारी फोन पर किसी को न दें.
  • सफ़र पर जाने के बाद अगर बैंक का कस्टमर केयर आपसे आपका पासवर्ड मांगे, तो भूल से भी उन्हें अपना पासवर्ड या एटीएम पिन न बताएं. ये फ़र्जी कॉल हो
    सकता है.
  • अगर आपको और पैसों की ज़रूरत लगे, तो आप मनी ट्रांसफर में जाएं और अपने किसी ख़ास दोस्त या रिश्तेदार को पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहें.
  • बहुत से देशों में अपने राष्ट्रीयकृत बैंक आपको मिल जाएंगे. उन्हीं बैंकों से पैसे निकालें. ऐसा करने से पहले एक बार छानबीन अवश्य करें.
  • अगर दूसरे देश में कोई आपको आपकी करेंसी के बदले उनकी करेंसी देने को कहे, तो भूलकर भी ऐसा न करें. वो आपको धोखा देकर फेक करेंसी दे सकता है.

– सुषमा विश्वकर्मा

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इन्वेस्टमेंट करें टैक्स बचाएं

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बचत न स़िर्फ आपके सुरक्षित भविष्य के लिए ज़रूरी है, बल्कि बचत करके आप टैक्स भी बचा सकते हैं. टैक्स सेविंग के लिए कौन-सा इन्वेस्टमेंट होगा आपके लिए फ़ायदेमंद? आइए, हम बताते हैं.

बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट
यदि आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो साधारण फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी) की बजाय 5 साल के लॉक-इन पीरियड वाली एफडी करवाएं. इस पर बैंक अच्छा रिटर्न देते हैं साथ ही टैक्स की भी बचत होती है.

  • इसमें आप न्यूनतम रू.100 से लेकर अधिकतम रू.1,00,000 तक का निवेश कर सकते हैं, कुछ बैंकों में न्यूनतम राशि रू.1000 है.
  • आमतौर पर बैंक अधिकतम 10 साल के निवेश की सुविधा देते हैं. ब्याज़ की रकम रू. 10,000 से अधिक होने पर टीडीएस कटता है. इससे कम राशि टैक्स फ्री है.
  • लॉक-इन होने की वजह से 5 साल से पहले आप पैसे नहीं निकाल सकते हैं. साथ ही इस पर आपको लोन भी नहीं मिलता है. जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते उनके लिए ये अच्छा विकल्प है, क्योंकि टैक्स बचाने के साथ ही ये सुरक्षित है और रिटर्न भी सुनिश्‍चित मिलता है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
ये सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित टैक्स सेविंग विकल्प है. इसमें निवेश की हुई रकम पर टैक्स रिबेट मिलता है. साथ ही इंटरेस्ट भी टैक्स फ्री है और आप अगर कुछ पैसे निकालते हैंं तो उस पर भी टैक्स नहीं लगता.

  •  पीपीएफ में आप एक साल में 1.5 लाख रुपए तक का निवेश कर सकते हैं.
    साल में कम से कम 500 रूपए का निवेश करना ज़रूरी है, ऐसा न करने पर बैंक पेनल्टी चार्ज करता है.
  •  पीपीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है. हालांकि ज़रूरत पड़ने पर आप 5 साल बाद पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन ये रकम चौथे साल के आख़िर या पिछले साल के बैलेंस के 50% में से जो भी कम हो,  उतनी ही हो सकती है.
  •  किसी फायनांशियल ईयर में आप इसमें से एक बार ही पैसे निकाल सकते हैं. इस पर मिलने वाला ब्याज़ टैक्स फ्री होता है.
  •  पीपीएफ पर आप लोन भी ले सकते हैं, मगर ये पिछले बैलेंस के 25% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
ये डाक विभाग द्वारा जारी निवेश प्रमाण-पत्र होता है जिसकी अवधि 5 और 10 वर्ष की होती है यानी इस अवधि के पहले आप पैसे निकाल नहीं सकते. पीपीएफ की तरह इस पर मिलने वाला ब्याज़ भी टैक्स फ्री होता है. पीपीएफ में आप हर साल अपनी सहूलियत के हिसाब से पैसे डाल सकते हैं, मगर इसमें ये सुविधा नहीं है. इसमें एकसाथ ही निश्‍चित समयावधि के लिए निवेश करना होता है.

इंश्योरेंस प्लान
इंश्योरेंस पॉलिसी को हालांकि विशेषज्ञ निवेश का बेहतर विकल्प नहीं मानते, मगर जीवन से सुरक्षा के साथ ही ये आपको टैक्स बचाने में भी मदद करता है. पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. आपात स्थिति से निपटने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी है.

होम लोन
कुछ लोग ज़रूरत के लिए नहीं, बल्कि इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी ख़रीदते हैं. दरअसल, टैक्स छूट का फ़ायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश बहुत लोकप्रिय विकल्प है. होम लोन के लिए अदा किए गए प्रिंसिपल अमाउंट (मूलधन) पर 1 लाख रुपए और इंटरेस्ट पर डेढ़ लाख रुपए तक छूट मिल सकती है. यदि पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं, तो ज्वाइंट लोन लेकर दोनों टैक्स बेनिफिट ले
सकते हैं. प लॉक-इन होने की वजह से 5 साल से पहले आप पैसे नहीं निकाल सकते हैं. साथ ही इस पर आपको लोन भी नहीं मिलता है. जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते उनके लिए ये अच्छा विकल्प है, क्योंकि टैक्स बचाने के साथ ही ये सुरक्षित है और रिटर्न भी सुनिश्‍चित मिलता है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
ये सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित टैक्स सेविंग विकल्प है. इसमें निवेश की हुई रकम पर टैक्स रिबेट मिलता है. साथ ही इंटरेस्ट भी टैक्स फ्री है और आप अगर कुछ पैसे निकालते हैंं तो उस पर भी टैक्स नहीं लगता.

* पीपीएफ में आप एक साल में 1.5 लाख रुपए तक का निवेश कर सकते हैं.

* साल में कम से कम ञ्च्500 का निवेश करना ज़रूरी है, ऐसा न करने पर बैंक पेनल्टी चार्ज करता है.

* पीपीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है. हालांकि ज़रूरत पड़ने पर आप 5 साल बाद पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन ये रकम चौथे साल के आख़िर या पिछले साल के बैलेंस के 50% में से जो भी कम हो, उतनी ही हो सकती है.

* किसी फायनांशियल ईयर में आप इसमें से एक बार ही पैसे निकाल सकते हैं. इस पर मिलने वाला ब्याज़ टैक्स फ्री होता है.

* पीपीएफ पर आप लोन भी ले सकते हैं, मगर ये पिछले बैलेंस के 25% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
ये डाक विभाग द्वारा जारी निवेश प्रमाण-पत्र होता है जिसकी अवधि 5 और 10 वर्ष की होती है यानी इस अवधि के पहले आप पैसे निकाल नहीं सकते. पीपीएफ की तरह इस पर मिलने वाला ब्याज़ भी टैक्स फ्री होता है. पीपीएफ में आप हर साल अपनी सहूलियत के हिसाब से पैसे डाल सकते हैं, मगर इसमें ये सुविधा नहीं है. इसमें एकसाथ ही निश्‍चित समयावधि के लिए निवेश करना होता है.

इंश्योरेंस प्लान
इंश्योरेंस पॉलिसी को हालांकि विशेषज्ञ निवेश का बेहतर विकल्प नहीं मानते, मगर जीवन से सुरक्षा के साथ ही ये आपको टैक्स बचाने में भी मदद करता है. पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. आपात स्थिति से निपटने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूरी है.

होम लोन
कुछ लोग ज़रूरत के लिए नहीं, बल्कि इन्वेस्टमेंट के लिए प्रॉपर्टी ख़रीदते हैं. दरअसल, टैक्स छूट का फ़ायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश बहुत लोकप्रिय विकल्प है. होम लोन के लिए अदा किए गए प्रिंसिपल अमाउंट (मूलधन) पर 1 लाख रुपए और इंटरेस्ट पर डेढ़ लाख रुपए तक छूट मिल सकती है. यदि पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं, तो ज्वाइंट लोन लेकर दोनों टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं.

– कंचन सिंह

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टैक्स बचाने के स्मार्ट तरीके

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हर कोई अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई बचाने का प्रयास करता है, मगर आपने यदि सही तरी़के से, सही जगह पर इन्वेस्टमेंट नहीं किया है, तो टैक्स के रूप में आपकी आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है. अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए कैसा इन्वेस्टमेंट करें जो टैक्स फ्री हो और आपको रिटर्न भी मिले? आइए, जानते हैं.

सुकन्या समृद्धि योजना
सरकार द्वारा ख़ासतौर से स़िर्फ बेटियों के लिए शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना से आप बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुलवाएं. इसमें आप हर साल कम से कम 1000 और अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं. इस पर 9.2 फ़ीसदी की दर से ब्याज़ मिलता है और बेटी के 21 साल के होने पर ही आप ये पैसे निकाल सकते हैं.

एनपीएस
सेक्शन 80सी के तहत डेढ़ लाख टैक्स बचाने के साथ ही आप एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में सालाना 50,000 रुपए तक निवेश करके टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. 2015 के बजट में सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80 सीसीडी के तहत सालाना 50,000 रुपए एनपीएस में निवेश को करमुक्त कर दिया.

पीपीएफ
टैक्स बचाने के लिए पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहा है, क्योंकि पीपीएफ में 15 साल का लॉक इन पीरियड होता है, तो इसमें पैसे डालकर आप अपना भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. पीपीएफ में निवेश की गई राशि का 50 फ़ीसदी हिस्सा आप 7 साल बाद निकाल सकते हैं. पीपीएफ में किया गया इन्वेस्टमेंट तो टैक्स फ्री होता ही है, इस पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं लगता. साथ ही मैच्योरिटी के समय मिलने वाली राशि भी करमुक्त होती है.

इंश्योरेंस प्रीमियम
अपने, पत्नी या बच्चों के नाम पर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर भी आप टैक्स बचा सकते हैं. इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. इंश्योरेंस निवेश के हिसाब से बहुत फ़ायदेमंद भले ही न हो, मगर आपात स्थिति से निपटने के लिए ये ज़रूरी है.

मेडिकल इंश्योरेंस
यदि आप अपने, पत्नी या बच्चों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस लेते हैं, तो इस पर भी आप टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80डी के तहत 25,000 रुपए तक का प्रीमियम टैक्स फ्री है. यदि आपने अपने माता-पिता का भी मेडिक्लेम किया है और उनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है, तो 30,000 रुपए तक की प्रीमियम राशि करमुक्त होगी यानी साल में आप 55 हज़ार टैक्स बचा सकते हैं.

फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी)
यदि आप ये सोचते हैं कि हर तरह की एफडी टैक्स फ्री है, तो ऐसा नहीं है. 5 साल की लॉक इन पीरियड वाली एफडी ही टैक्स फ्री होती है. आमतौर पर बैंक अधिकतम 10 साल के निवेश की सुविधा देते हैं. ब्याज़ की रकम 10,000 रुपए से अधिक होने पर टीडीएस कटता है. इससे कम राशि टैक्स फ्री है.

होम लोन
यदि आपने घर ख़रीदने के लिए लोन लिया है, तो आपको टैक्स छूट का फ़ायदा मिलेगा. होम लोन के लिए अदा किए गए ब्याज़ पर सालाना 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट है. यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो दोनों के नाम पर लोन होने से दोनों को टैक्स बेनिफिट मिलेगा.

स्मार्ट टिप्स
– 80सी के तहत आप कुल डेढ़ लाख रुपए तक टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं.

– बच्चों की स्कूल फीस (ट्यूशन फीस) पर भी टैक्स छूट मिलती है. इसकी लिमिट 2 बच्चों तक है. यदि आप 80सी के तहत इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाए हैं, लेकिन बच्चे की फीस भर रहे हैं, तो आपको टैक्स छूट का लाभ मिलेगा.

– 80 सीसीडी के तहत एनपीएस के रूप में 50,000 का निवेश टैक्स फ्री है.

– ख़ुद की प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए होम लोन पर दिया गया 2 लाख तक का ब्याज करमुक्त होगा.

– यदि कंपनी आपको ट्रैवलिंग अलाउंस देती है, तो 19,200 रुपए तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा.

– हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए भी टैक्स सेविंग का ज़रिया है. यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो रेंट स्लिप दिखाकर एक निश्‍चित सीमा तक टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं.

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