School

Neha Kakkar

नेहा कक्कड़ एक कामयाब सुरीली गायिका, ख़ूबसूरत अदाकारा, ज़बर्दस्त परफॉर्मर के साथ-साथ सबसे बढ़कर एक बेहतरीन इंसान हैं. नेहा ने अपनी बातों, काम और भावनाओं से यह ज़ाहिर किया है कि वे किस कदर ज़मीन से जुड़ी हुई हैं. इन दिनों वे टीवी शो इंडियन आइडल के जज के रूप में विराजमान हैं. इसी शो में उन्होंने एक बार फिर अपनी सादगी और अपने बातों से सभी का दिल जीत लिया.
उन्होंने अपने स्कूल के दिनों को याद किया. अपनी दो फेवरेट टीचर रविंद्र मैम और रोजी मैम का ज़िक्र किया. कैसे वे दोनों शिक्षिकाएं उन्हें प्रोत्साहित करती थीं. दोनों बेहद प्यारी थीं और नेहा को ख़ूब प्यार करती थीं. आगे बढ़ने के लिए हौसला बढ़ाती थीं. दिल्ली की न्यू होली पब्लिक स्कूल की ये टीचर्स हमेशा उन्हें आगे बढ़ो नेहा… तुम कर सकती हो… कहकर कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए हौसलाअफजाई करती थीं. इससे उनके सभी परफॉर्मेंस बेहद सफल होते थे. इसी से उनका आत्मविश्‍वास भी बढ़ा. इसके अलावा उन्होंने अपने स्कूल में पढ़ाई के बारे में भी बताया.
नेहा कक्कड़ का परिवार रातभर जगराता करके गाना गाकर अपनी रोजी-रोटी चलाते था. यह बात उनकी स्कूल के प्रिंसिपल को पता थी. इस कारण नेहा अपने स्कूल में अधिक उपस्थित भी नहीं हो पाती थी. उनकी प्रजेंटेशन भी काफी कम रहती थी. उन्होंने यह भी कहा कि वह एग्जाम देने यानी परीक्षा देने भर ही जाती थीं. उनके प्रिंसिपल अजय सर और टीचर्स सभी ने उन्हें काफ़ी सहयोग दिया और उनका हौसला बढ़ाया. इसके लिए नेहा ने सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया.
हाथ जोड़कर सभी को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि उनके जीवन में आगे बढ़ने में इन सभी शख्सियतों का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है. नेहा से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए कि अपने टीचर्स, गुरु, शिक्षक को कभी नहीं भूलना चाहिए. जब भी वक़्त और मौक़ा मिले, तो उनके सम्मान में उनकी याद में बातें ज़रूर कहनी चाहिए. यह नेहा की भलमनसाहत है कि वह अपनी सभी बातों को बड़ी संजीदगी से और सरलता से कह देती हैं. फिर बचपन की बातें हो, उनके संघर्षों से जुड़ी बातें हो… हर बात को स्पष्टता से रखती हैं बिना लाग लपेट के. तभी तो वह आज इतनी कामयाब और मशहूर हैं. हर कोई उन्हें पसंद करता है. उनके सभी गाने सुपर-डुपर हिट रहते हैं.
आज तो डबल धमाका करने जा रही हैं. एक तो टीवी के शो में जज के तौर पर उनके ज़बर्दस्त और मज़ेदार कमेंट्स देखने और सुनने मिलेंगे. साथ ही कपिल शर्मा शो में भी धमाल होगा. ख़ास बात यह है कि अपने पति रोहनप्रीत सिंह के साथ नेहा पहली बार टीवी के किसी शो में नज़र आएंगी.
नेहा ने हमेशा अपने गानों, लाइव शो, परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीता है. उनका हर गाना, हर अदा सभी के दिल को छू जाता है. आइए ऐसे कुछ उनकी तस्वीरें और वीडियोज़ देखते हैं, जिसमें नेहा अपने बेमिसाल और लाजवाब अदाओं का नज़ारा पेश कर रही हैं.


यह भी पढ़ें: Bigg Boss 14: बिग बॉस में आया नया ट्विस्ट, शो में अब एक्स कंटेस्टेंट भी जीत सकते हैं ट्रॉफी (Bigg Boss 14: Rakhi Sawant, Vikas Gupta, Kashmira Shah, Arshi Khan To Bring New Challenges For Contestants, Ex Contestants Can Win Bigg Boss 14 Trophy)

Neha Kakkar
Neha Kakkar
Neha Kakkar

Exclusive Interview, Bharti Trivedi
हमें बहुत-सी शिकायतें रहती हैं… अपनी ज़िंदगी से, अपने आसपास के लोगों से और ऊपरवाले से भी… न हम किसी चीज़ से संतुष्ट होते हैं और न ही शिकायतें करते-करते कभी थकते हैं… लेकिन इन शिकायतों के बीच क्या कभी उन मासूम बच्चियों पर नज़र पड़ती है, जिनके तन पर एक कपड़ा तक नहीं होता, क्या कभी भूख से तरसते वो रूखे चेहरे नहीं दिखते हमें, जिनके लिए सूखी रोटी भी अमृत का काम करती है… कभी उन ग़रीब-मजबूर लोगों को नहीं देख पाती हमारी आंखें, जो दिनभर मेहनत करके भी अपने परिवार के लिए छोटी-सी ख़ुशी भी नहीं जुटा पाते… शायद नहीं, हम तो अपनी शिकायतों में ही इतने व्यस्त रहते हैं कि हम यह सोच भी नहीं पाते कि इस समाज के प्रति भी हमारे कुछ कर्त्तव्य हैं…
लेकिन कुछ लोग होते हैं, जो हमसे अलग सोचते हैं, उनके जीने का उद्देश्य ही होता है दूसरों के लिए कुछ कर गुज़रना… ऐसी ही एक शख़्सियत हैं भारती त्रिवेदी. उनकी मुहिम ही अब उनके जीवन का उद्देश्य है, क्योंकि उनका कहना है कि ङ्गहम योगी तो नहीं हो सकते, लेकिन समाज के लिए उपयोगी तो हो ही सकते हैं…फ जिनकी सोच इतनी पाक हो, उनकी मुहिम कितनी सशक्त और सार्थक होगी, यह समझा ही जा सकता है. क्या कहती हैं भारतीजी ‘कवच’ के बारे में और अपने ट्रस्ट नर्चरिंग माइंड्स के विषय में, आइए जानें.
“सबसे पहले तो मैं यह चाहती हूं कि लोग थोड़े संवेदनशील बनें, ख़ासतौर से हमारी बच्चियों के विषय में. हमारे ट्रस्ट द्वारा चलाई जा रही मुहिम ‘कवच’ इसी संवेदनशीलता से उपजी है, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य है बच्चियों को सेक्सुअल डिसीज़, रिप्रोडक्टिव डिसीज़, मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक शोषण से बचाना.

  • हम बच्चियों को साफ़-सफ़ाई, सेक्सुअल हाइजीन, प्राइवेट पार्ट्स की केयर और सेक्स एजुकेशन की जानकारी देते हैं, ताकि वो अपनी सेफ्टी और हाइजीन के महत्व को पहचान सकें.
  • हम मुंबई व आसपास के इलाकों में कई वर्कशॉप्स कर चुके हैं, जहां हम बच्चों को और ख़ासतौर से लड़कियों को हाइजीन और सेफ्टी के तौर-तरी़के सिखाते-समझाते हैं. हालांकि हम जानते हैं कि यह काम सागर में बूंद समान है, क्योंकि यदि हम चाहते हैं कि समाज के हर तबके के बच्चे एक बेहतर ज़िंदगी जी सकें, तो अभी बहुत कुछ करना बाकी है.”
    क्यों ज़रूरत पड़ी कवच की?
    “मैं आपको एक बेहद मार्मिक तथ्य बताने जा रही हूं. सुनकर शायद आप विश्‍वास भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि जब मेरे सामने यह घटना हुई, तो मैं अंदर तक हिल गई थी.
  • आप यह तो समझ ही सकते हैं कि अंडरगार्मेंट्स हमारी ज़िंदगी का महत्वपूर्ण व ज़रूरी भाग हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते इस ज़रूरत को पूरा न किया जा सकना और इसी वजह से आगे भी कई तरह की द़िक्क़तों का सामना करना बेहद चौंकानेवाली बात थी. हाल ही में मैं एक म्यूनिसिपल स्कूल में गई थी, वहां मैंने सुना कि एक बच्ची प्रिंसिपल को अपनी परेशानी बयां कर रही थी कि उसे पीरियड्स हो गया है और वो घर जाना चाहती है. स्कूल की ओर से जब उसे सैनिटरी नैपकिन देने की बात कही गई, तो उसने बताया कि वो इसका इस्तेमाल नहीं कर सकती, क्योंकि वो आमतौर पर अंडरवेयर नहीं पहनती.
  • अंडरगार्मेंट न स़िर्फ आपको बीमारियों, इंफेक्शन्स से बचाता है, बल्कि वो बैड टच और शोषण की संभावना को भी कुछ हद तक कम करने में सहायक है. लेकिन बहुत-सी बच्चियां हैं, जो आर्थिक तंगी के चलते पैंटी नहीं पहनतीं. यहां तक कि कुछ लड़कियां तो घर में पैंटीज़ शेयर करती हैं, उनकी मम्मी भी पति के अंडरवेयर से काम चलाती है और फिर समय व ज़रूरत के हिसाब से उसी का इस्तेमाल बच्चियां भी करती हैं.
  • लेकिन इस तरफ़ किसी का ध्यान तक नहीं जाता और न ही इस विषय पर इतनी बात की जाती है. मुझे इस घटना ने इतना हिला दिया था कि मैंने यह निर्णय लिया कि मैं इन बच्चियों को पैंटीज़ प्रोवाइड करूंगी. समस्या यह थी कि मेरे पास भी इतने पैसे नहीं थे, लेकिन जब आपके इरादे पुख़्ता हों, तो रास्ते बन ही जाते हैं. मुझे कई लोगों से मदद मिली. मैंने अंडरवेयर का इंतज़ाम किया, लेकिन फिर सवाल उठा कि अंडरगार्मेंट्स तो ठीक है, सैनिटरी नैपकिन्स भी तो ज़रूरी हैं, क्योंकि इन्हीं बेसिक चीज़ों की कमी से इंफेक्शन्स जैसी समस्या उभरती है. उसके बाद अपरोक्ष रूप से शोषण व प्रताड़ना भी बढ़ती है. सैनिटरी नैपकिन के लिए भी मैं चाहती तो थी कि कोई स्पॉन्सर मिल जाए, लेकिन बात अब तक नहीं बनी, फिर भी हमारे प्रयास रंग लाए और उनका भी इंतज़ाम हो गया. फिर लगा कि नहीं, स़िर्फ इन दो चीज़ों से काम नहीं चलेगा, तो हमने एक सोप और टॉवेल भी इसमें रख दिया… इस तरह धीरे-धीरे हमारे कवच का किट तैयार हुआ.

यह भी पढ़ें: नेशनल गर्ल चाइल्ड डे: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ!

  • कुछ लोगों को लगा कि लड़कों के लिए भी तो किट ज़रूरी है, क्योंकि वो भी उसी आर्थिक तबके से आते हैं, तो हमने उनके लिए भी अलग से एक किट तैयार किया, जिसमें साबुन, टॉवेल और इसी तरह की बेसिक चीज़ें हैं, जो बेसिक हाइजीन के लिए ज़रूरी होती हैं.”
    पैरेंट्स को भी एजुकेट करना उतना ही ज़रूरी है!
    “हमारे समाज में सेक्स शब्द पर ही सबको आपत्ति है, तो यहां सेक्स एजुकेशन के महत्व को समझाना बहुत ही मुश्किल काम है. लेकिन हमें तो यह करना ही है, वरना इसी तरह हमारे बच्चे शोषित होते रहेंगे, तो हम बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स की भी काउंसलिंग करवाते हैं, उन्हें एजुकेट करने की कोशिश करते हैं कि सेक्स एजुकेशन और पर्सनल हाइजीन का मतलब यह नहीं कि बच्चे सेक्सुअली एक्टिव हो जाएंगे, बल्कि वो सतर्क हो सकेंगे और अपने ख़िलाफ़ हो रही ग़लत चीज़ों पर आवाज़ उठाने से नहीं झिझकेंगे.
  • हम बच्चों को बताते हैं कि जैसे आपका मोबाइल फोन या आपकी कोई भी पर्सनल चीज़ को कोई हाथ लगाता है, तो कितना बुरा लगता है, उसी तरह यह शरीर आपका है, अगर आपको किसी का टच बुरा लग रहा है, तो बोलो और डरो मत, चाहे वो कोई भी हो. ऐसे भी अनेक केसेज़ हमने देखे हैं, जहां पिता ही बच्चियों का शोषण कर रहा होता है, कहीं किसी स्कूल का कोई कर्मचारी इसमें लिप्त होता है, तो ऐसी घटनाओं को रिपोर्ट करवाना बेहद मुश्किल होता है. लोग इसे इज़्ज़त व समाज से जोड़कर देखने लगते हैं, लेकिन हम अपने स्तर पर प्रयास करते हैं कि हमारे बच्चे जितना संभव हो सुरक्षित हो सकें.
  • एक समय था, जब मैं अध्यात्म की ओर बढ़ना चाहती थी, लेकिन सांसारिक दुनिया में आने के बाद योगी नहीं बन सकी, पर मैंने सोचा समाज के लिए उपयोगी तो बना ही जा सकता है. यही मेरी साधना है. यह भी एक ज़रिया है ईश्‍वर को, समाज को कुछ वापस देने का. मैं चाहती हूं और भी लोग हमारी मुहिम से जुड़ें और हम अपने इस काम को और आगे तक ले जा सकें, ताकि हमारा समाज एक ऐसी दुनिया इन बच्चों को दे सकें, जहां वो हर तरह से और हर स्तर पर मह़फूज़ हों!”

  • अधिक जानकारी के लिए यहां संपर्क करें:
  • फोन: 9930910388
  • ईमेल: [email protected]

– ब्रम्हानंद शर्मा

Abhishek Bachchan, Reply Tried To Troll Aaradhya

अभिषेक बच्चन के लिए उनका परिवार पहले है. परिवार को लेकर किसी भी तरह का मज़ाक वो बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. तभी तो अभिषेक ने एक ट्रोलर को दिया करारा जवाब. टि्वटर पर ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या को एक महिला ने निशाना बनाया.

हाल ही में ऐश्वर्या और आराध्या मैंगलुरु शादी अटेंड करने गए थे, जिसकी पिक्चर्स वायरल हुई थीं. इन पिक्चर्स को देखकर शेरीऍन पेटाडीन नाम की महिला ने टि्वटर पर अभिषेक को टैग करते हुे लिखा, “जूनियर बच्चन क्या आपकी बेटी स्कूल नहीं जाती है? मुझे आश्चर्य इस बात पर होता है कि ऐसा कौन सा स्कूल है जो बच्चे को मां के साथ लॉन्ग ट्रिप पर जाने की परमिशन देता है. या आप दिमाग घर पर रख कर जाते हो? बच्चे का सामान्य बचपन नहीं दे रहे हो.”

@juniorbachchan is ur child not going to school? I do wonder What school gives permission to take a out a kid when u like to go a a trip with mom. Or are u guys going for beauty without brains. Always hand in hand with a arrogant mom. Not having a normal childhood

— Sherien Patadien (@shirjahan) December 4, 2017

इस महिला के इस ट्वीट के बाद अभिषेक बच्चन ने इसका एक करारा जवाब दिया. अभिषेक ने लिखा, “मैम जहां तक मुझे जानकारी है ज़्यादातर स्कूल्स वीकेंड पर बंद होते हैं. वह वीकडेज़ में स्कूल जाती है. आपकी स्पेलिंग को देखते हुए मुझे लगता है कि आपको भी स्कूल में जाना चाहिए.”

यह भी पढ़ें: बेटे के जन्मदिन पर श्वेता तिवारी ने लिखा इमोशनल लेटर 

इस ट्वीट के बाद उस महिला ने अभिषेक को बताया कि वो भारत से नहीं है उसे पता नहीं था कि वीकेंड्स में स्कूल बंद होते हैं. अभिषेक के इस ट्वीट के बाद उनके फैंस ने उनका साथ देते हुए कई मज़ेदार ट्वीट्स किए और महिला को जवाब दिया.