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पासवर्ड सिलेक्ट करते समय न करें ये ग़लतियां (Avoid These Password Selection Mistakes)

 

पासवर्ड यानी कुछ नंबर, कुछ अक्षर और सांकेतिक चिह्नों का मिला-जुला कॉम्बिनेशन. पासवर्ड बनाते समय अक्सर आप यही सोचते होंगे कि आपके द्वारा बनाए गए पासवर्ड को कोई हैक नहीं कर सकता, लेकिन ऐसा हो सकता है. कई बार पासवर्ड बनाते समय हम छोटी-छोटी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा हैकर्स उठाते हैं. अगर आप हैकर्स से सावधान रहना चाहते हैं, तो पासवर्ड बनाते समय इन
ग़लतियों से बचें.

Password Selection Mistakes

कैसा हो पासवर्ड?

–     अगर आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो इंटरनेट बैंकिंग का य़ूजर आईडी और पासवर्ड गोपनीय रखें.

–     समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहें. लंबे समय तक एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करते रहने से उसके क्रैक होने की संभावना अधिक होती है.

–     एक अकाउंट के लिए केवल एक पासवर्ड का प्रयोग करें.

पासवर्ड बनाते समय रखें कुछ बातों  का ख़ास ख़्याल

–     अपनी व्यक्तिगत जानकारी- नाम, मोबाइल नंबर, एडे्रस आदि कभी किसी के साथ शेयर न करें.

–     मकान नंबर, जन्मदिन, शादी की सालगिरह, मोबाइल नंबर, पत्नी व बच्चों के नाम के आधार पर पासवर्ड बनाने की ग़लती न करें. आपका जान-पहचानवाला कोई भी व्यक्ति इन सूचनाओं के आधार पर आपका अकाउंट हैक कर सकता है.

–     अपने फेवरेट स्टार्स और प्लेस के नाम पर  भी पासवर्ड न बनाएं.

–     उपरोक्त व्यक्तिगत जानकारी के अलावा अपनी मां का सरनेम भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें. इसका कारण है कि यूज़र अपने डेबिट कार्ड का पासवर्ड रिसेट करता है, तो सिक्युरिटी क्वेश्‍चन में सबसे पहले आपकी मां का सरनेम या पेट नेम पूछा जाता है.

–     बैंक अपने ग्राहकों को समय-समय पर मैसेज भेजकर सचेत करते रहते हैं कि अगर कोई आपसे व्यक्तिगत जानकारी मांगे, तो उनसे शेयर करने की बजाय तुरंत बैंक को सूचित करें.

–     एक ही पासवर्ड को अलग-अलग अकांउट के लिए यूज़ करना ज़ोख़िम भरा हो सकता है. यदि हैकर्स आपके एक अकाउंट का पासवर्ड जान लेता है, तो उसे अन्य खातों को साइन इन करना आसान हो जाएगा.

–     एक बार साइन इन करने के बाद हैकर्स आपके ईमेल और एड्रेस से आपके बैंक अकाउंट को भी एक्सेस कर सकता है.

–     ईज़ी पासवर्ड बेशक याद रखने में आसान होते हैं, लेकिन इन्हें बनाने से अकाउंट हैैक होने का ख़तरा बढ़ जाता है, क्योंकि हैकर्स सरल पासवर्ड को आसानी से क्रैक कर लेते हैं.

–     पासवर्ड बनाते समय ऐसी निजी जानकारी शेयर न करें, जिसे अन्य लोग आपके बारे में जानते हों, जैसे- आपका निक नेम, आपके घर की गली व रोड का नाम व नंबर, मोबाइल नंबर, आपके पेट एनिमल का नाम आदि.

–     पासवर्ड बनाते समय आसान शब्दों (जैसे- रिीीुेीव) और वाक्यों, कीबोर्ड पैटर्न (जैसे- िुंशीींू या रिंूुीु) और अनुक्रम (जैसे- रललव या 1234) का इस्तेमाल करने से बचें.

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के लिए वाक्यों व मुहावरों का प्रयोग करें. वाक्य या मुहावरे ऐसे होने चाहिए, जिसे दूसरे लोग नहीं जानते हों.

–     अपने पर्सनल और प्रोफेशनल अकाउंट के पासवर्ड अलग-अलग बनाएं. यदि आपका प्रोफेशनल अकाउंट हैक हो गया या फिर प्रोफेशनल स्तर पर आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो आपका पर्सनल इंफॉर्मेशन भी लीक हो जाएगा.

स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के लिए क्या करें?

–    अगर आप कुछ वर्णों को जोड़कर पासवर्ड बना रहे हैं, तो उस पासवर्ड में 8 या उससे अधिक वर्ण होने चाहिए.

–     अक्षर, अंक और प्रतीक चिह्नों का संयोजन करके पासवर्ड बनाएं.

–    पासवर्ड बनाते समय अक्षरों को अंकों के साथ बदलें.

–     पासवर्ड हमेशा लंबे बनाएं. लंबे यानी जिनमें कम से कम 10 अक्षरों, अंकों व प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल किया गया हो.

–     लंबे पासवर्ड बनाने का एक फ़ायदा यह भी है कि ये पासवर्ड स्ट्रॉन्ग होते हैं, जिन्हें हैक करना मुश्किल होता है.

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड को याद रखना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए आप पासवर्ड मैनेजर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं.

–     यह ऐप आपका पासवर्ड सेव कर लेता है, जिसे सिंगल पासवर्ड या ओटीपी से एक्सेस किया जा सकता है.

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Password Selection Mistakes
कैसे रखें अपना पासवर्ड सुरक्षित?

–     स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाने के बाद उसे पर्स, वॉलेट या डेस्क आदि जगहों पर लिखकर रखने की ग़लती न करें. कोई भी इस पासवर्ड को चोरी करके आपके अकाउंट को साइन इन कर सकता है.

–     अपने महत्वपूर्ण अकाउंट, जैसे- ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड बनाएं. कुछ वेबसाइट्स ओटीपी का ऑप्शन देती हैं, जिससे आपकी सिक्योरिटी और मज़बूत हो जाती है.

–     अगर आप अपना पासवर्ड भूल जाते हैं, तो पासवर्ड मैनेजर ऐप्स की सहायता से इस परेशानी से निजात पा सकते हैं.

–     हमेशा पासवर्ड मैनेजर ऐप्स डाउनलोड करने से पहले इनका रिव्यू चेक कर लें.

कब ज़रूरत है पासवर्ड रिसेट करने की?

–     अगर आप अपना पासवर्ड भूल गए हैं या आपका पासवर्ड लॉक हो गया है, तो अपने अकाउंट को दोबारा ओपन करने के लिए आपको अपना पासवर्ड रिसेट करना पड़ेगा.

–     यदि आपको ऐसा महसूस हो कि कोई अन्य व्यक्ति भी आपके अकाउंट को एक्सेस कर रहा है, तो तुरंत अपना पासवर्ड रिसेट करें.

–     यदि आप अपना अकाउंट किसी कारण से साइन इन नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको पासवर्ड रिसेट करने की आवश्यकता है.

– नागेश चमोली

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ट्यूशन फीवर (How to get rid of tution fever?)

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एक समय था जब ट्यूशन पढ़ने की ज़रूरत स़िर्फ उन बच्चों को पड़ती थी, जो स्कूल की पढ़ाई के साथ कोपअप नहीं कर पाते थे, लेकिन आज पैरेंट्स अपने मंथली बजट में बच्चों की स्कूल फ़ीस के साथ-साथ ट्यूशन फ़ीस भी शामिल करना नहीं भूलते. बच्चों के लिए भी ट्यूशन जाना अब उनकी एज्युकेशन का अहम् हिस्सा बन चुका है. पैरेंट्स और स्टूडेंट्स के बीच ट्यूशन के इस ट्रेंड की ज़रूरत और इससे जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में बता रही हैं सरिता यादव.

 

इस बार अच्छे मार्क्स नहीं लाओगे तो अगले सेशन से ट्यूशन जाना होगा… लेकिन मुझे वहीं ट्यूशन जाना है, जहां मेरा बेस्ट फ्रेंड नैतिक जाता है… नहीं, तुम वहीं ट्यूशन जाओगे जहां दीदी जाती है… पढ़ाई के दौरान पैरेंट्स और बच्चों के बीच इस तरह के संवाद होना आम बात है. मुद्दा होता है स़िर्फ और स़िर्फ परफ़ॉर्मेंस का, जिसके लिए ट्यूशन जाना ज़रूरी समझा जाता है. हमारी यही सोच ट्यूशन फ़ीवर को बढ़ावा दे रही है, जिसके चलते ट्यूशन्स की मांग तेज़ी से बढ़ती जा रही है.

ट्यूशन्स ऑन डिमांड

अनऑफ़िशियल इंडस्ट्री के तौर पर दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही ट्यूशन इंडस्ट्री आज स्टूडेंट्स और पैरेंट्स दोनों के बीच ऑन डिमांड है. पिछले 5 सालों में ट्यूशन्स की मांग 40 से 45% बढ़ गई है. 70% स्टूडेंट्स मैथ्स, केमिस्ट्री, फ़िज़िक्स जैसे सब्जेक्ट्स के लिए ट्यूशन्स पर ही आश्रित होते हैं.

क्या हैं वजहें?

मुंबई स्थित एक मशहूर कोचिंग क्लासेस के एकॅडेमिक मैनेजर सतीश ऑडोबा बताते हैं, “हमने देखा है कि 85 % स्टूडेंट्स स्कूल एज्युकेशन से ख़ुश नहीं होते. हमारे पास अधिकतर ऐसे पैरेंट्स आते हैं, जो बच्चों को उन सब्जेक्ट्स में स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं, जिनमें वे पहले से कमज़ोर हैं.” ट्यूशन्स पर निर्भरता का आलम ये है कि 5वीं कक्षा तक पढ़ रहे बच्चों को पैरेंट्स एज्युकेशन बेस मज़बूत करने के लिए ट्यूशन भेजते हैं और इसके बाद क्लास में अच्छे मार्क्स और बेहतर करियर के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस के रूप में भी यह सिलसिला चलता ही रहता है.

ट्यूशन्स की बढ़ती मांग के पीछे अच्छे परफ़ॉर्मेंस के अलावा और भी कई कारण हैं, जैसे-
* 65% पैरेंट्स वर्किंग होने के नाते बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते इसलिए वे अपने बच्चों को ट्यूशन भेजते हैं.
* ओवर ऐम्बिशियस पैरेंट्स अपने एवरेज बच्चों को रैंकिंग लिस्ट में सबसे ऊपर देखने की उम्मीद में बच्चे केलिए ट्यूशन का सहारा लेते हैं.
* कई पैरेंट्स का मानना है कि ट्यूशन उनके बच्चे को बिज़ी रखता है और पढ़ाई के लिए उन्हें रेग्युलर और पंचुअल बनाता है.
* कई पैरेंट्स तो स़िर्फ दूसरे बच्चों के पैरेंट्स से कॉम्पिटीशन के चलते अपने बच्चों को ट्यूशन भेजते हैं.
* ऐसे पैरेंट्स भी हैं, जो अपने चंचल बच्चों को हैंडल नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें ट्यूशन भेज देते हैं.
* मार्केट में इंग्लिश की बढ़ती डिमांड भी बच्चों को ट्यूशन जाने के लिए मजबूर कर रही है, क्योंकि जो पैरेंट्स इंग्लिश नहीं जानते, उन्हें इंग्लिश मीडियम से पढ़ रहे बच्चों को पढ़ाने में द़िक़्क़त होती है और ट्यूशन का सहारा लेना ही पड़ता है.

स्टूडेंट्स की नज़र में कितना ज़रूरी है ट्यूशन?

* ऐसा नहीं है कि स़िर्फ पैरेंट्स ही बच्चों को ट्यूशन भेजने के लिए परेशान रहते हैं, कई बार स्टूडेंट्स ख़ुद भी ट्यूशन जाने का निर्णय लेते हैं.
* अच्छे परफ़ॉर्मेंस के लिए कई स्टूडेंट्स ट्यूशन के नोट्स और ट्यूटर के साथ अपनी अंडरस्टैंडिंग को अहम् मानते हैं.
* 71% स्टूडेंट्स मानते हैं कि ट्यूशन्स से पढ़ाई में एक्स्ट्रा हेल्प मिलती है जो अच्छे मार्क्स पाने के लिए ज़रूरी है.
* वहीं 85% स्टूडेंट्स ये मानते हैं कि ट्यूशन्स में पढ़ाई फास्ट होती है. ट्यूशन में स्कूल से पहले पढ़ाया गया टॉपिक जब स्कूल में पढ़ाया जाता है तो ख़ुद-ब-ख़ुद माइंड में उसका रिविज़न हो जाता है.
* ज़्यादातर स्टूडेंट्स स्कूल टीचर से ज़्यादा ट्यूशन टीचर के साथ कंफ़र्टेबल महसूस करते हैं.
* चौंकानेवाली बात ये है कि एक तरफ़ जहां पैरेंट्स बच्चों के अच्छे परफ़ॉर्मेंस के लिए पैसे ख़र्च करने में पीछे नहीं हटते, वहीं 65% स्टूडेंट्स स़िर्फ, इसलिए ट्यूशन ज्वाइन करते हैं, क्योंकि उनके फ्रेंड्स भी ट्यूशन जाते हैं और इस मामले में वे ख़ुद को पीछे नहीं देखना चाहते.
* मात्र 22% स्टूडेंट्स ही ऐसे हैं जो ट्यूशन में लगने वाली फ़ीस को वेस्टेज ऑफ़ मनी मानते हैं.

कैसे करें ट्यूशन सलेक्शन?

* आप जो भी ट्यूशन सलेक्ट कर रहे हैं पहले उस टीचर के नोट्स की अन्य ट्यूशन टीचर के नोट्स से तुलना कर लें और जो बेहतर लगे उसे चुनें.
* ट्यूशन टीचर एक्सपीरियंस्ड, क्वालिफ़ाइड और अपने काम के प्रति ईमानदार हो, ये पहले जान लें.

* आपका बच्चा जिस सब्जेक्ट के लिए ट्यूशन जा रहा है उस सब्जेक्ट की टीचर को सही नॉलेज है या नहीं, यह भी ज़रूर पता करें.
* स्कूल टीचर को ही ट्यूशन टीचर बनाने से बचें, क्योंकि वो आपके बच्चे के लिए अगर सही टीचर होते तो आपके बच्चे को ट्यूशन की ज़रूरत ही नहीं पड़ती.

ट्यूशन के साइड इ़फेक्ट्स

वुमन एंड चाइल्ड साइकियाट्रिस्ट शरीता शाह बताती हैं, “हाल में ही मेरे पास एक ऐसी पेशेंट आई थी, जो 10वीं कक्षा में पढ़ रहे अपने बच्चे की ट्यूशन फ़ीस न भर पाने की वजह से इतनी चिंतित थी कि उसके कारण वह डिप्रेशन में आ गई और हो भी क्यों न, उसके बच्चे की ट्यूशन फ़ीस 1,90,000 रुपये जो थी.” शरीता कहती हैं,“ पहले पैरेंट्स स्कूल की पढ़ाई को प्राथमिकता देते थे और बच्चे को ट्यूशन तभी भेजते थे, जब उसे एक्स्ट्रा हेल्प की ज़रूरत होती थी, लेकिन आजकल स्कूल जाने से पहले ही बच्चे ट्यूशन जाना शुरू कर देते हैं और स्कूल की पढ़ाई को एक्स्ट्रा एज्युकेशन समझने लगते हैं. इस सोच के विकसित होते ही उनके एकेडेमिक करियर में ट्यूशन अपनी ख़ास जगह बना लेता है.”

हेल्दी नहीं है पढ़ाई का प्रेशर

मुंबई के एक म्युनिसिपल स्कूल में बतौर टीचर काम कर रही मयूरी चंद्रा दूसरे पैरेंट्स की तरह ही अपने बच्चे के कम मार्क्स से परेशान थीं. उन्होंने एक अच्छे ट्यूटर की तलाश की, लेकिन 6 महीने ट्यूशन पढ़ने के बावजूद उनके बेटे के मार्क्स काफ़ी कम आए. मयूरी तुरंत समझ गईं कि बेटे का समय ट्यूशन में बर्बाद करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा. उनके बेटे को अपना समय अपनी दूसरी प्रतिभाओं को निखारने में लगाना चाहिए. उनका बेटा मोनो एक्टिंग में माहिर है और अब मराठी नाटकों में काम करके वाहवाही बटोर रहा है. बेटे की एक्टिंग से मिलनेवाली तारीफ़ों में मयूरी यह भूल गई हैं कि उनका बच्चा स्कूल के क्लास रूम में एक एवरेज स्टूडेंट है. मयूरी कहती हैं,“ मैंने अपने बेटे को वैसे ही स्वीकार कर लिया है जैसा वो है, इसलिए मैं पढ़ाई के लिए उस पर ज़्यादा दबाव नहीं देती. हां, समय-समय पर उसे एज्युकेशन के महत्व और ज़रूरत के बारे में ज़रूर बताती रहती हूं.”
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हर बच्चा क्लास का टॉपर हो यह ज़रूरी नहीं, लेकिन हर बच्चे में कुछ ख़ासियत ज़रूर होती है. क्लासरूम का एक एवरेज स्टूडेंट अन्य ऐक्टिविटीज़ में अपने क्लासमेट से बहुत आगे हो सकता है. पैरेंट्स इस बात का ध्यान रखें कि आज स़िर्फ एज्युकेशन में ही नहीं, अन्य एक्टीविटीज़ में भी बहुत प्रतियोगिता है. अत: अपने बच्चों को सही तरह से समझ कर ही उन पर एज्युकेशन संबंधी प्रेशर बनाएं, वरना स़िर्फ पढ़ाई के प्रेशर में बच्चों की क्रिएटिविटी नष्ट हो सकती है.

स़िर्फ ट्यूशन ही नहीं है विकल्प

* पैरेंट्स की व्यस्तता और स्कूल में बच्चे पर अच्छे परफ़ॉर्मेंस के प्रेशर ने पैरेंट्स के पास ट्यूशन के अलावा दूसरा कोई विकल्प छोड़ा भी नहीं है, लेकिन जो पैरेंट्स बच्चों की ट्यूशन फ़ीस पर बड़ी रकम नहीं ख़र्च कर सकते, उनके लिए ये ऑप्शन बेहतर साबित हो सकते हैं.
यदि दोनों पैरेंट्स वर्किंग हैं, तो आपस में तय करके कोई भी एक पार्टनर प्रतिदिन दो घंटे बच्चे को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी ले.
* अगर आप बच्चे को ट्यूशन नहीं भेज सकते, तो घर के किसी भी शिक्षित और सक्षम व्यक्ति को बच्चे की पढ़ाई की ज़िम्मेदारी सौंप सकते हैं.
* अपने बच्चों को उनके स्कॉलर फ्रेंड्स के साथ ग्रुप में पढ़ाई करने की सलाह दें.
* ज़्यादा फ़ीस से बचने के लिए प्राइवेट ट्यूशन के बजाय अपनी कॉलोनी या सोसायटी के बच्चों के साथ ग्रुप ट्यूशन रखें.

ट्यूशन्स की हक़ीक़त बयां करते आंकड़े

* एसोचेम के सोशल डेवलपमेंट फ़ाउंडेशन के रिसर्च बताते हैं कि 38% पैरेंट्स हर महीने प्राइमरी लेवल के ट्यूशन पर 1000 रुपये और सेकेंडरी लेवल के ट्यूशन पर 3500 रुपये एक बच्चे पर ख़र्च करते हैं.
* मिडल क्लास फैमिली के पैरेंट्स अपने हर महीने की इन्कम का 1/3 हिस्सा बच्चों के प्राइवेट ट्यूशन्स पर ख़र्च करते हैं.
* सामान्यत: प्रतिमाह 25000 रुपए तक सैलरी पाने वाले 60% पैरेंट्स अपने 2 बच्चों के प्राइवेट ट्यूशन पर 8000 रुपये प्रति महीने ख़र्च करते हैं.

शरीता शाह के अनुसार, इन बातों पर ग़ौर करके आप ये समझ सकते हैं कि आपके बच्चे को ट्यूशन की ज़रूरत है या नहीं.
* जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्लास में टॉप रैंकर्स की लिस्ट में आता है या उसका परफ़ॉर्मेंस ऐवरेज है. इसके आधार पर तय करें कि उसे ट्यूशन की ज़रूरत है या नहीं.
* बच्चे से पूछें कि उसे किस सब्जेक्ट में एक्स्ट्रा हेल्प की ज़रूरत है. उसकी ज़रूरत के हिसाब से ही ट्यूशन सलेक्ट करें.
* आपका बच्चा अगर पढ़ाई में कमज़ोर है और कड़ी मेहनत के बाद भी अच्छे मार्क्स नहीं ला पा रहा, तो उसे सच में गाइडेंस की ज़रूरत है. अत: उसे ट्यूशन ज़रूर भेजें.
* पढ़ाई के मामले में अगर बच्चा आपकी बात नहीं सुनता, तो एक सही ट्यूटर आपकी मदद कर सकता है.
* कुछ पैरेंट्स अपने बच्चे के लिए एक्सपीरियंस टीचर के बजाय सीनियर स्टूडेंट्स को प्रीफ़र करते हैं. यह निर्णय बच्चे की क्षमता के आधार पर ही लें.
* कुछ टयूशन सेंटर्स में बच्चों पर ज़रूरत से ज़्यादा होमवर्क और प्रोजेक्ट्स का प्रेशर डाल दिया जाता है. ऐसे में बच्चे पढ़ाई से भागने लगते हैं. अतः ट्यूटर की बिहेवियरल जानकारी ज़रूर रखें.

स्मार्ट सोफा सिलेक्शन आइडियाज़ (Smart sofa selection ideas)

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सोफा न स़िर्फ हर घर की ज़रूरत है, बल्कि इससे आप अपने आशियाने का मेकओवर भी कर सकती हैं. बाज़ार में उपलब्ध सोफा की ढेरों वैरायटी में से आप अपनी पसंद और कमरे की साइज़ के मुताबिक स्टाइलिश सोफा ख़रीदकर अपने ड्रीम होम को दे सकती हैं न्यू लुक.

 

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बनें क्रिएटिव
मल्टी सिटर सोफा के साथ सेम डिज़ाइन के दो सिंगल सोफा वाला क्लासिक अरेंजमेंट तो आपने हर घर में देखा होगा, ये बहुत कॉमन स्टाइल है. यदि आप कुछ डिफरेंट करना चाहती हैं, तो मल्टी सिटर सोफा के दोनों साइड रखे जानेवाले सेम डिज़ाइन के सिंगल सोफा की बजाय डिफरेंट डिज़ाइन का सोफा रखें या फिर मल्टी सिटर और सिंगल डिज़ाइन को एक जैसा ही रहने दें और सिटिंग एरिया में उसके आसपास डिफरेंट स्टाइल में चेयर अरेंज करें. आप चाहें तो उस एरिया को आकर्षक बनाने के लिए कुछ डेकोरेटिव आइटम्स का भी इस्तेमाल कर सकती हैं, मगर ध्यान रखें कि वो सोफा से मैच करता हुआ न हो.

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एल शेप भी है अच्छा ऑप्शन
ये न स़िर्फ स्टाइलिस्ट दिखता है, बल्कि जगह भी कम लेता है. टिपिकल सोफा की बजाय ये आरामदायाक और फ्लेक्सिबल होता है. साथ ही इसपर ज़्यादा लोग एडजस्ट भी हो सकते हैं. इन दिनों बाज़ार में एल शेप सोफा के ढेर सारे डिज़ाइन्स उपलब्ध है. आप अपने घर की जगह और बजट के मुताबिक सोफा ख़रीद सकती हैं.

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सिंगल सिटर का विकल्प
यदि आपका कमरा बहुत छोटा है, तो बड़े साइज़ का सोफा ख़रीदने से बचें. छोटे कमरे में कंफर्टेबल सीटिंग अरेंजमेंट के लिए स्टाइलिस्ट सिंगल सिटर सोफा बेहतरीन विकल्प है. ये टू सिटर या फिर सिंगल होते हैं. कमरे के कॉर्नर स्पेस का उपयोग करने के लिए आप वहां भी डिज़ाइनर सिंगल सिटर रख सकती हैं. वैसे छोटे कमरे में मेहमानों के बैठने के लिए स्लिम सिंगल सिटर सोफा की बजाय आप एक छोटी कॉफी टेबल और चेयर भी रख सकती हैं.

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दीवान
यदि आप बेडरूम के लिए सोफा ख़रीदने की सोच रही हैं, तो नॉर्मल सोफा की बजाय दीवान आपके लिए बेस्ट रहेगा. ये बेंच की तरह होता है यानी इसके पीछे सपोर्ट नहीं रहता. बैठने के साथ ही आप इसमें कपड़े, बेडशीट, एक्स्ट्रा कपड़े आदि भी स्टोर कर सकती हैं. इसमें ऊपर की सीट हटाने पर अंदर स्टोरेज की व्यवस्था होती है, जिससे आप अपने अस्त-व्यस्त बेडरूम को सहेज सकती हैं.

 

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सोफा कम बेड
यदि आपके घर में अक्सर मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है या फिर घर छोटा है तो, नॉर्मल सोफा की बजाय सोफा कम बेड बेहतरीन विकल्प होगा. वैसे भी अब थ्री सिटर टिपिकल सोफा कम ही पसंद किया जाता है. मेट्रो सिटिज़ में कमरे छोटे होने के कारण सोफा कम बेड ज़्यादा पसंद किया जाता है.

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ख़रीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

* सबसे पहले उस जगह का मेज़रमेंट कर लें जहां आप सोफा रखने वाली हैं, इससे आप आसानी से डिसाइड कर पाएंगी कि आपके लिए 3-4 सिटर या  फिर सिंगल सोफा परफेक्ट है.

* सोफा ख़रीदते समय सबसे ज़्यादा अहमियत कंफर्ट को दें.

* यदि आप बेडरूम के लिए सोफा ख़रीद रही हैं, तो बहुत बड़ा सोफा ख़रीदने से बचें. हां, यदि कमरा बहुत स्पेसियस है, तो बड़ा सोफा ख़रीद सकती हैं.

* अपने होम डेकोर को डिफरेंट टच देने के लिए आप अलग-अलग डिज़ाइन के कुशन कवर का इस्तेमाल कर सकती हैं.

* सोफा का फैब्रिक ऐसा होना चाहिए जो आपके लाइफस्टाइल से मैच हो. कॉटन, सिल्क, सिंथेटिक आदि का चुनाव कर सकती हैं. वैसे यदि आप सोफा  और घर दोनों को स्टाइलिश लुक देना चाहती हैं, तो सिल्क बेस्ट रहेगा.

* सोफा का कलर सिलेक्ट करते समय अपनी पसंद के साथ ही कमरे के रंग भी ध्यान रखें.

* मार्केट में कई शेप व डिज़ाइन के सोफा उपलब्ध है, अपने घर की सजावट और जगह को ध्यान में रखकर शेप डिसाइड करें.

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ताकि सोफा बना रहे नया
सोेफा ख़रीदने के बाद कुछ दिनों तक तो वो बहुत अच्छा लगता है, मगर धूल-मिट्टी के कारण बहुद जल्दी ही वो पुराना दिखने लगता है. ऐसे में अपने सोफे को नए जैसा बनाए रखने के लिए यूं करें उसकी सफ़ाई.

* वैक्यूम क्लीनर से आप सोफे की सफ़ाई कर सकती हैं. इसके लिए सोफे पर से कुशन आदि हटा लें. सोफे को अच्छी तरह साफ़ करने के लिए सॉफ्ट    ब्रश का इस्तेमाल करें.

* यदि सोफा कवर निकलने वाले है, तो उसे साफ़ करने से पहले उसपर लिखे निर्देशों को ज़रूर पढ़ें. आमतौर पर हर फैब्रिक को अलग तरी़के से धोया  जाता है. कुछ के लिए गरम पानी ज़रूरी है, तो कुछ के लिए ठंडा.

* यदि सोफा का कवर रिमूवेबल नहीं है, तो उस पर लगे दाग़ को निकालने के लिए गुनगुने पानी में डिटर्जेंट मिलाकर नरम कपड़े से पोछें, मगर पहले  सोफे के पिछले हिस्से पर लगाकर ट्राई कर लें कि कहीं इससे फैब्रिक ख़राब तो नहीं हो रहा.

* यदि आपके पास लेदर सोफा है, तो सबसे पहले नरम कपड़े से धूल-मिट्टी साफ़ कर लें. फिर विनेगर या पानी स्प्रे करके तुरंत साफ़ कपड़ें से पोछ दें.

– कंचन सिंह

33 स्मार्ट कर्टन सिलेक्शन आइडियाज़ (33 Smart Curtain Selection Ideas)

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अपने आशियाने का मेकओवर करना चाहती हैं, तो कलर, फर्नीचर बदले बिना स़िर्फ परदे बदकर भी इसे आकर्षक बना सकती हैं. अपने ड्रीम होम के लिए कैसे सिलेक्ट करें बेस्ट कर्टन? आइए, हम बताते हैं.
कर्टन आइडियाज़

* गर्मियों के लिए शीयर कर्टन्स (फाइन फैब्रिक्स वाले पर्दे, जैसे- लिनेन, लाइट वेट सिल्क फैब्रिक) बेस्ट ऑप्शन हैं. ये ज़्यादा महंगे भी नहीं होते.

* शीयर कर्टन्स लगाने से घर में वेंटिलेशन बना रहता है, लेकिन बेडरूम और बाथरूम के लिए शीयर कर्टन्स उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि इनमें प्राइवेसी  नहीं होती.

* लेसवाले शीयर कर्टन्स लगाकर आप अपने घर को न्यू व ट्रेंडी लुक दे सकते हैं.

* वेलवेट, स्यूड आदि थिक फैब्रिकवाले परदे कमरे में तेज़ रोशनी को आने से रोकते हैं और कमरों के तापमान को भी नियंत्रित करते हैं. इसलिए    सर्दियों में थिक फैब्रिकवाले कर्टन्स लगाएं.

* चिक पैटर्न व डिज़ाइनवाले कलरफुल परदे लगाकर लिविंग रूम को मॉडर्न व स्टाइलिश लुक दे सकते हैं.

* घर को रॉयल लुक देने के लिए कस्टम ड्रेप्स लगाएं. इन ड्रेप्स की क़ीमत फैब्रिक और डिज़ाइन पर निर्भर करती है यानी आप जिस तरह के डिज़ाइन   और फैब्रिक का चुनाव करेंगे, क़ीमत उसी के अनुसार होती है.

* परदे की लंबाई फ्लोर लेवल तक रखें. अधिक लंबे परदे देखने में ख़राब लगते हैं

* अलग-अलग कमरों के लिए अलग-अलग प्रिंट और डिज़ाइनवाले परदों का चुनाव करें, इससे घर के हर कमरे को अलग व न्यू लुक मिलेगा.

* छोटे-से घर को स्पेशियस लुक देने के लिए वॉल कलर से मिलते-जुलते कलरवाला परदा लगाएं.

* इसी तरह छोटे-से कमरे में वर्टिकल स्ट्राइप्स वाले कर्टन्स लगाएं. इससे सीलिंग ऊंचाई पर महसूस होगी और कमरा भी बड़ा दिखेगा.

* आजकल मार्केट में विभिन्न कलर और स्टाइल वाले रेडी-टू-यूज़ ड्रेप्स पैनल्स मिलते हैं. अपनी पसंद के अनुसार इनका सिलेक्शन करके घर को न्यू   लुक दे सकते हैं.

* बोल्ड कलर्स और डिज़ाइनवाले कंटेम्पे्ररी कर्टन्स लगाकर घर का मेकओवर कर सकते हैं.

* यदि आप अपने घर को लग्ज़री लुक देना चाहते हैं, तो डायमंड पैटर्नवाले रेमिंगटन कर्टन्स लगाएं. येे घर को ब्यूटीफुल और क्लासिक लुक देते हैं.

* परदों के लेटेस्ट पैटर्न, डिज़ाइन्स और फैब्रिक के बारे में अधिक जानकारी के लिए होम डिज़ाइन वेबसाइट्स, ब्लॉग्स और मैगज़ीन देखें.

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फैब्रिक आइडियाज़

* परदों का फैब्रिक तीन तरह का होता है- लाइट वेट कर्टन्स (शीयर व कॉटनवाले परदे), मीडियम वेट (ब्रोकेडवाले परदे) और हैवी वेट (वेलवेट, डेनिम,  ट्वीड फैब्रिकवाले परदे). इसलिए फैब्रिक का चुनाव अपनी पसंद व बजट के अनुसार करें.

* फैब्रिक घर के डेकोर और घरवालों के मूड को प्रभावित करता है. जैसे- टे्रडिशनल रूम के लिए थिक फैब्रिक का चुनाव करें, जबकि लिविंग रूम के  शीयर व लाइट वेटवाले परदों का चुनाव करें.

* शीयर कर्टन्स के फैब्रिक बहुत महीन होते हैं, इसलिए परदे ख़रीदते समय फैब्रिक की क्वालिटी का विशेष ध्यान रखें.

* वेलवेट और हैवी सिल्क टेक्स्चर के परदों को केवल ड्राय क्लीन ही करवाना पड़ता है. जो ख़र्चीला होता है. इससे बचने के लिए ऐसे फैब्रिक का  सिलेक्शन न करें.

* मटेरियल की दृष्टि से ऐसे परदों का चुनाव करें, जो लाइटवेट हों. इन परदों को लगाने से घर में रोशनी भी अधिक आती है और इनको धोने में भी  आसानी होती है.

* मौसम के अनुरूप परदों के फैब्रिक व कलर का चुनाव करें. समय-समय पर परदे बदलते रहने से घर को नया लुक मिलता है.

* घर को क्रिएटिव लुक देने के लिए पैटर्न फैब्रिकवाले कर्टन्स लगाएं. होम डेकोर के अनुसार इन पैटर्न फैब्रिक का सिलेक्शन करें. पैटर्न फैब्रिक्स, जैसे-  फ्लोरल, स्ट्राइप्स और एनीमल प्रिंट आदि. जैसे बच्चों के कमरे में जंगल बेस्ड थीम है, तो एनीमल प्रिंटवाले कर्टन्स लगाएं.

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कलर/ पैटर्न आइडियाज़

* परदों का कलर कॉम्बिनेशन घर की फर्निशिंग से मैच करता हुआ होना चाहिए. जैसे वॉल कलर, फर्नीचर आदि.

* मार्केट में कई ट्रेंडी, ब्राइट व पेस्टल कलर्स के परदे मिलते हैं. इन कलर्स का चुनाव होम डेकोर को ध्यान में रखकर करें.

* अगर आपके घर में पैटर्न्ड फर्नीचर और बेड है, तो घर में सॉलिड कलरवाले परदे लगाएं.

* इसी तरह यदि आपके घर में सॉलिड कलर वाला फर्नीचर और बेड है, तो पैटर्न्ड कर्टन्स (फ्लोरल, स्ट्राइप्सवाले परदे) लगाएं.

* परदों की लंबाई अधिक रखने से सीलिंग भी अधिक ऊंचा लगता है, जबकि परदों का कलर, प्रिंट और पैटर्न इस तरह का होना चाहिए कि कमरा बड़ा  और सुंदर दिखे.

* कलर स्कीम का सिलेक्शन ध्यान से करें. यदि कमरे को बड़ा लुक देना चाहते हैं, तो प्राइमरी कलर्स के परदों का चुनाव करें.

* यदि कमरे को स्मॉल लुक देना चाहते हैं, तो पेस्टल कलरवाले परदों का चुनाव करें.

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कर्टन सिलेक्शन करते समय

  •  घर को स्टाइलिश लुक देने के लिए परदों के नए-नए डिज़ाइन, प्रिंट, पैटर्न व कलर का भी ध्यान रखें.
  • परदों का चुनाव करते समय घर की खिड़कियों व दरवाज़ों की संरचना को ध्यान में रखें. उनकी संरचना के अनुसार ही परदों के डिज़ाइन और स्टाइल का चुनाव करें.
  • परदों की लंबाई-चौड़ाई दरवाज़े और खिड़कियों के फ्रेम के अनुरूप होनी चाहिए. इसलिए कर्टन स्टोर/शॉप से किसी एक्सपर्ट को बुलाएं, जो सही माप लेकर कर्टन सिलें.
  • स्टोर या दुकान से कर्टन ख़रीदते समय कर्टन का डेमो करके देखें कि लगाने के बाद कैसा लुक आता है. क्योंकि ऊंचाई (खिड़की) पर लगाने के बाद हर फैब्रिक अलग लुक देता है.
  • ट्रेंडी एक्ससेरीज़ और ट्रिम्स प्लेन व सिंपल परदों को भी ख़ूबसूरत बना देते हैं. इसलिए कर्टन्स ख़रीदते समय उससे मिक्स एंड मैच करती हुई एक्ससेरीज़ और ट्रिम्स ख़रीदें.

– देवांश शर्मा

एक्सक्लूसिव डिज़ाइन- स्मार्ट सिलेक्शन (Exclusive Design- Smart selection)

स्मार्ट वेव्स
सामग्रीः 100 ग्राम लाइट ग्रे रंग का ऊन, 50 ग्राम डार्क ग्रे ऊन, 25-25 ग्राम पिंक, पिस्ता, क्रीम और स़फेद ऊन, सलाइयां, बटन.
विधिः आगे का भागः ब्राउन ऊन से 150 फं. डालकर 2 उल्टी धारियां बुनें. दोनों किनारे के 8-8 फं. हर बार सादे ही बुनें. 8 फं. के बाद बुनाई डालें- 3 फं. का 1, 8 सी., 1 जाली, 1 सी., 1 जाली, 8 सी., 3 का 1, 8 सी.- इसी तरह पूरी सलाई बुनें. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. चित्रानुसार रंग बदलते हुए बुनें. 16 इंच लंबाई हो जाने पर दोनों किनारों पर 1-1 फं. घटाते हुए बुनें. 12 इंच बाद घटाना बंद कर दें. 26 इंच लंबाई हो जाने पर मुड्ढे घटाएं. 3 इंच और बुनने के बाद बीच के 6 फं. बटनपट्टी के डार्क ग्रे से बुनें. गोल गला घटाएं.
पीछे का भागः आगे के भाग की तरह बुनें. पीछे के भाग में गला नहीं घटाना है. कंधे जोड़कर बटनपट्टी बनाएं. गले के फं. उठाकर पट्टी बुनें.
आस्तीनः 48-48 फं. डालकर आगे के भाग की तरह डिज़ाइन डालते हुए 23 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 7वीं सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें. बटन टांकें.

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शॉपिंग टाइम
सामग्रीः 550 ग्राम पिंक रंग का ऊन, थोड़ा-सा क्रीम ऊन, सलाइयां.
विधिः आगे का भागः 120 फं. क्रीम रंग से डालकर 2 फं. सी., 2 उ. की रिब बुनाई में 3 इंच का बॉर्डर बुनें. दोनों तरफ़ से 10 फं. बढ़ा लें. अब बुनाई डालें. 2 सलाई
सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में बुनें. 2 फं. उ., 1 सी., 2 उ. फं., 5 सी. फं. में शुरू के 2 फं. व बाद के 2 फं. को केबल की तरह पलटकर बुन दें. बीच का फं. सीधा बुनें. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. ये दो सलाइयां एक बार और दोहराएं. अब इन्हें एक-दूसरे पर पलटकर बुनते जाएं. 19 इंच लंबाई हो जाने पर मुड्ढे घटाएं व बीच के उ. फं. एक साथ बंद कर दें. अब 10 इंच का मुड्ढा बुनें और आगे वी आकार में गला घटाते जाएं.
पीछे का भागः आगे के भाग की तरह बुनें. मुड्ढे घटाएं, कंधे जोड़ें. गले के फं. उठाकर 2 सी., 2 उ. का बॉर्डर बुनें. क्रीम रंग में पिंक रंग की धारी डालकर कॉलर बुनें.
आस्तीनः 50-50 फं. डालकर आगे-पीछे के भाग की तरह बुनते हुए 22 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 5वीं सलाई में 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.

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पिंक पैशन
सामग्रीः
200 ग्राम पिंक रंग का ऊन, 200 ग्राम पेस्टल ग्रीन ऊन, सलाइयां, कुंदन.
विधिः आगे-पीछे का भागः पिंक रंग से 115 फं. डालकर उल्टी धारियों का बॉर्डर बुनें. 2 सलाई सीधी-उल्टी बुनाई में बुनें. ग्रीन रंग से भी 2 सलाई सीधी-उल्टी बुनें. दोनों किनारों पर 6-6 फं. उल्टी धारी के बुनते जाएं. 3 फं. को एक साथ उ. बुनें, 1 सी. फं. को 3 बार बुनें, ताकि 3 फं. बन जाएं. पूरी सलाई ऐसे ही 3 का 1 जोड़ा व 1 के 3 फं. बुनते हुए पूरी करें. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. ग्रीन रंग से बुनें. 11 इंच लंबा बुनने के बाद 2 फं. सी., 2 उ. से ऊपर का पूरा भाग बुनें. 21 इंच लंबाई हो जाने पर मुड्ढे घटाएं. एक भाग में बीच में बटनपट्टी बना दें. 23 इंच बाद गोल गला घटाएं. कंधे जोड़कर गले के फं. उठाएं. 2 फं. सी. 2 उ. की बुनाई में गले की पट्टी बुनें.
आस्तीनः 50-50 फं. डालकर बॉर्डर बुनें. 6 इंच तक बुनाई डालते हुए बुनें. ऊपर 2 फं. सी., 2 उ. की बुनाई करते हुए 22 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 5वीं सलाई में 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.

सनस्क्रीन सिलेक्शन टिप्स

ऐ हुस्न बेपरवाह, मुझे है तेरी चाहत का नशा… गुलाब भी मांगते हैं रंगत तुझसे, ऐसी है कुछ तेरी अदा… तू चलती है जहां, धूप खिलती है वहां… और जो छिप जाती है तू, तो वीरान हो जाता है समां… कभी आंखों में ले जाती है तू ज़माने का नूर छिपाकर, तो कभी आसमान से सपनों को तोड़कर सहलाती है अपनी पलकों पर बैठाकर… साहिल की रेत पर लिखती है तू हुस्न की दास्तान और मैं लहरों-सा मिलता हूं तुझसे होकर तेरे इश्क़ में फ़ना… ये हसरतें मेरी तन्हा-तन्हा सी, तेरी तमन्नाओं में ढलकर पूरी होना चाहती हैं… और चांद की डोली पर सवार होकर, रेशमी तारों से तेरी मांग भरना चाहती हैं…

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सनस्क्रीन लगाना न स़िर्फ गर्मियों में, बल्कि हर मौसम में ज़रूरी है, क्योंकि यह आपको सनटैन, सनबर्न और प्रीमैच्योर एजिंग से प्रोटेक्शन देता है. इसके अलावा इसे अप्लाई करने से स्किन कैंसर होने की संभावना भी कम हो जाती है. लेकिन सनस्क्रीन सिलेक्ट करते व़क्त कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, ताकि आपको मिले कंप्लीट प्रोटेक्शन.

– सनस्क्रीन में सबसे महत्वपूर्ण होता है एसपीएफ. कितने एसपीएफ का सनस्क्रीन सिलेक्ट करना है, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे- आपकी स्किन टाइप, आपके शहर का मौसम और तापमान आदि. भारत चूंकि गर्म प्रदेश है, तो यहां एसपीएफ 30 ही इफेक्टिव होता है.

–  एसपीएफ 15 आपको अधिक से अधिक दो-तीन घंटों तक का ही प्रोटेक्शन दे सकता है.

–  गर्मियों में जब धूप तेज़ होती है, तो बेहतर होगा कि सनस्क्रीन को साथ में कैरी करें.

–   जब बाहर धूप में हों, तो हर 3-4 घंटे में सनस्क्रीन अप्लाई करें.

–  फेस के लिए अलग सनस्क्रीन लें. अगर आपकी स्किन ऑयली है, तो ऑयल फ्री सनस्क्रीन लें. इसी तरह सेंसिटिव स्किन के लिए भी अलग से सनस्क्रीन लें.

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–   आमतौर पर सनस्क्रीन लगाने के बाद आपकी त्वचा हल्की-सी डार्क पड़ जाती है, इससे बचने के लिए बाहर जाने से लगभग 15 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं, ताकि बाहर जाने तक त्वचा का रंग सामान्य हो जाए.

–  सनस्क्रीन लगाने के बाद अगर आप यह सोचेंगे कि अब आप दिनभर कड़ी धूप में भी रह सकते हैं, तो आप ग़लत सोच रहे हैं. बेहतर होगा कि जहां ज़रूरत न हो, वहां धूप से बचा जाए.

–  अतिरिक्त बचाव के लिए सनग्लासेस और हैट ज़रूर पहनें.

–  सनस्क्रीन ख़रीदते समय उसकी कंसिस्टेंसी भी ज़रूर देखें.  स्प्रे की बजाय क्रीम सनस्क्रीन अच्छे होते हैं.

–  हां, अगर आप क्रीम सनस्क्रीन अप्लाई करके उस पर स्प्रे भी करते हैं, तो सनस्क्रीन का असर ज़्यादा देर तक रहता है.

 

–  अपने स्काल्प के लिए भी अलग से सनस्क्रीन ख़रीदें, क्योंकि वहां धूप डायरेक्ट और तेज़ लगती है. यह स्काल्प को जला सकती है.

–  क्रीम सनस्क्रीन ड्राई स्किन के लिए बेस्ट होता है, जेल सनस्क्रीन स्काल्प के लिए और जहां-जहां बाल हों, जैसे- पुरुषों के सीने पर लगाने के लिए अच्छा होता है. स्टिक्स में उपलब्ध सनस्क्रीन को आप आंखों के आसपास लगाने के काम में ला सकते हैं.

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–  स्प्रे सनस्क्रीन लगाने में आसान ज़रूर होता है, लेकिन उसमें डर होता है कि वो आंखों में, सांस के द्वारा फेफड़ों में या फिर मुंह में जा सकता है.

–  आप सनस्क्रीन में मॉइश्‍चराइज़र भी मिक्स कर सकते हैं. यह और भी प्रभावी होगा.

–  स़िर्फ खुले हिस्से पर ही सनस्क्रीन लगाना है और बाकी पर नहीं, यह धारणा ग़लत है. पूरे शरीर पर लगाएं, क्योंकि आपके कपड़े आपको उतना प्रोटेक्शन नहीं देंगे, जितना सनस्क्रीन लगाने के बाद मिलेगा.

–  ध्यान रहे, तेज़ धूप में यदि बिना सनस्क्रीन के आप बाहर जाएंगे, तो आपकी स्किन जल सकती है, रैशेज़ आ सकते हैं और यहां तक कि ऊपरी त्वचा की परतें भी निकल सकती हैं.

–  कभी भी सनस्क्रीन लगाने के बाद आंखों को ज़ोर से रब न करें, क्योंकि आंखों में अगर वो गया, तो नुक़सान कर सकता है.

–  बहुत छोटे बच्चों को सनस्क्रीन न लगाएं, क्योंकि उनकी त्वचा सेंसिटिव होती है. थोड़े बड़े बच्चों को भी ज़िंक ऑक्साइडयुक्त या टाइटेनियम डायऑक्साइडयुक्त सनस्क्रीन ही लगाएं, क्योंकि ये स्किन में समाते नहीं और त्वचा को नुक़सान नहीं पहुंचाते.

–  अगर सनस्क्रीन की मात्रा की बात करें, तो चेहरे, स्काल्प, बांहों और हाथों पर 1-1 टीस्पून सनस्क्रीन अप्लाई करना चाहिए और 2-2 टीस्पून धड़ के हिस्से पर और प्रत्येक पैर पर लगाएं.

– कमलेश शर्मा

ब्रा सिलेक्शन गाइड (Amazing Bra Selection Guide)

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ब्रा ख़रीदते (Bra Selection Guide) समय आप किन-किन बातों का ध्यान रखती हैं? कलर, फैब्रिक, स्टाइल… और फिटिंग..? उसकी कितनी जानकारी है आपको? क्या आप जानती हैं कि लगभग 80% महिलाएं ग़लत माप की ब्रा पहनती हैं. तो कैसे करें सही ब्रा का चुनाव? आइए, जानते हैं.

Bra Selection Guide

कैसे चुनें परफेक्ट ब्रा? 

बहुत टाइट या लूज़ ब्रा पहनने से आउटफ़िट की ख़ूबसूरती बिगड़ जाती है इसलिए सही साइज़ की ब्रा का चुनाव बहुत ज़रूरी है. कैसे करें सही ब्रा का चुनाव? आइए, जानते हैं.

* ब्रा हमेशा ब्रांडेड लॉन्जरी स्टोर से ख़रीदें, उनके पास प्रो़फेशनल होते हैं, जो सही ब्रा चुनने में मदद करते हैं.

* ब्रा ख़रीदते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि आपने कप और बेल्ट का सही साइज़ देखकर ही ब्रा ख़रीदी है, जैसे- यदि आप दुबली-पतली हैं, लेकिन आपका बस्ट साइज़ ज़्यादा है, तो आपके कप और बेल्ट के साइज़ में भी ज़्यादा फ़र्क़ होगा. यदि आप 38 साइज़ की ब्रा पहनती हैं, तो आपको कप के साइज़ के हिसाब से 38 साइज़ में भी ए, बी, सी या डी का चुनाव करना होगा.

* आपकी ब्रा की फिटिंग ऐसी होनी चाहिए कि शोल्डर स्ट्रैप और बेल्ट में से एक-दो उंगली आसानी से अंदर जा सके.

* हैवी बस्ट वाली कई महिलाओं को छोटे साइज़ की ब्रा पहनने की बजाय मिनिमाइज़र ब्रा ट्राई करनी चाहिए.

* इसी तरह छोटे ब्रेस्ट वाली महिलाएं बड़े साइज़ की ब्रा पहनने की बजाय पैडेड, मैक्सिमाइज़र, पुश-अप आदि ब्रा ट्राई कर सकती हैं.

 

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स्मार्ट आइडियाज़ 

* यदि आप बैकलेस या ऑफ शोल्डर वन पीस ड्रेस पहन रही हैं, तो उसके साथ बैकलेस ब्रा कप्स पहनें. ये ब्रेस्ट पर चिपक जाते हैं, जिससे ब्रेस्ट को सपोर्ट और बॉडी को परफेक्ट शेप मिलता है. ऐसे ज़्यादातर आउटफिट्स के साथ कप अटैच्ड होते हैं.

* यदि आपका बस्ट साइज़ छोटा है और आप ऐसी ड्रेस पहन रही हैं, जिसमें क्लीवेज नज़र आ रहा है, तो उस ड्रेस के साथ पुशअप ब्रा पहनें. इससे दोनों ब्रेस्ट के बीच का गैप भर जाएगा और बॉडी को परफेक्ट शेप मिलेगा.

* प्लस साइज़ (मोटी) महिलाओं के लिए कॉर्सेट बेस्ट ऑप्शन है. इवनिंग वेयर्स के साथ कॉर्सेट पहनने से ब्रेस्ट को सपोर्ट और अपर बॉडी का परफेक्ट शेप मिलता है.

* कई ब्रा ऐसी भी होती हैं, जिनके स्ट्रैप को निकाला भी जा सकता है और दुबारा जोड़ा भी जा सकता है, आप अपनी सुविधानुसार ऐसी ब्रा का चुनाव कर सकती हैं.

* ऑफिस में फॉर्मल वेयर्स के साथ हमेशा फुल कप ब्रा ही पहनें. इसके अंडरवायर्ड कप्स ब्रेस्ट को हर तरफ़ से सपोर्ट देते हैं और अपर बॉडी शेप में नज़र आती है.

क्या आप जानती हैं?

* लगभग 80% महिलाएं ग़लत माप की ब्रा पहनती हैं.

* बहुत ज़्यादा टाइट ब्रा पहनने से ब्लड सर्कुलेशन सुचारु रूप से नहीं हो पाता.

* इसी तरह बहुत लूज़ ब्रा पहनने से ब्रेस्ट सुडौल नहीं रह पाते.

* ब्रा को रोज़ाना बारह घंटे से ज़्यादा नहीं पहनना चाहिए.

 

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ब्रा के प्रकार

हर महिला का फिगर तथा कपड़े पहनने का अंदाज़ अलग होता है इसलिए उनकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं. किस आउटफिट के साथ कैसी ब्रा पहननी चाहिए? जानने के लिए आइए, जानते हैं ब्रा के प्रकारः

मैक्सिमाइज़र

* ये ब्रा पुश-अप, पैडेड और अंडरवायर्ड होती है.

* स्मॉल से लेकर मीडियम बस्ट साइज़ वाली महिलाएं क्लीवेज और सपोर्ट के लिए ये ब्रा ट्राई कर सकती हैं.

* इसे आप फॉर्मल, एथनिक, पार्टी वेयर ड्रेस के साथ पहन सकती हैं.

मिनिमाइज़र

* ये फुल कप ब्रा होती है, जिसमें पैड नहीं होता.

* मीडियम से लेकर बड़े बस्ट साइज़ वाली महिलाओं के लिए अच्छा विकल्प है. ये ब्रेस्ट को स्मॉलर लुक देती है.

* रोज़ पहने जाने वाले फॉर्मल व इनफॉर्मल कपड़ों के साथ यह ब्रा पहनी जा सकती है.

अंडरवायर्ड

* ये ब्रा डेमी कप और पैडेड होती है.

* छोटे और मीडियम बस्ट वाली महिलाओं के लिए बेस्ट ऑप्शन है.

* रोज़ पहने जाने वाले फॉर्मल व इनफॉर्मल कपड़ों के साथ पहन सकती हैं, लेकिन अंडरवायर्ड ब्रा को कुछ घंटों के लिए ही पहनें, लंबे समय तक नहीं.

टी-शर्ट

* इस पैडेड ब्रा के स्ट्रैप्स ट्रांसपेरेंट होते हैं.

* छोटे और बड़े दोनों बस्ट साइज़ के लिए ये ब्रा उपयोगी है.

* जिम वेयर, टी-शर्ट, शीयर पार्टी वेयर के साथ  पहन सकती हैं.

यह भी देखें: 13 बेस्ट डिज़ाइनर ब्लाउज़: 13 स्टनिंग लुक्स ये है मोहब्बतें फेम दिव्यांका त्रिपाठी के

स्पोर्ट्स

* ये नॉन-पैडेड और नॉन-अंडरवायर्ड होती है, इसकी स्ट्रैप्स चौड़ी होती हैं.

* ये छोटे और मीडियम ब्रेस्ट के लिए बेस्ट होती है.

* बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाएं एक्सरसाइज़ के दौरान इसे अपनी नॉर्मल ब्रा के ऊपर पहन सकती हैं ताकि ब्रेस्ट को सपोर्ट और प्रोटेक्शन मिल सके.

मेटर्निटी

* मेटर्निटी ब्रा फुल कप और नॉन पैडेड होती है.

* स्तनपान कराने वाली माओं के लिए सही विकल्प है.

* इसे आप नॉर्मल इनफॉर्मल वेयर के साथ पहन सकती हैं.

मल्टीवेयर

* इस ब्रा को आप 5 तरह से पहन सकती हैं- नॉर्मल स्ट्रैप्स, स्टैपलेस, हॉल्टरनेक, क्रॉस स्ट्रैप और ऑफ शोल्डर. ये ब्रा फुल कप, पैडेड और अंडरवायर्ड होती है.

* इसे मीडियम से लेकर बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाएं पहन सकती हैं.

* 5 तरह के विकल्प आपको इस ब्रा को कई तरह से पहनने का मौक़ा देते हैं. आप इसे हर तरह के पार्टी वेयर, फॉर्मल व ऑफिस वेयर के साथ पहन सकती हैं.

डेली वेयर

* डेली वेयर ब्रा नॉन पैडेड और फुल कप होती है.

* ये कंफर्टेबल होती हैं इसलिए इसे सभी महिलाएं पहन सकती हैं.

* रोज़ पहने जाने वाले कपड़ों के साथ पहन सकती हैं. हां, बहुत ज़्यादा ट्रांसपेरेंट कपड़ों के साथ न पहनें.

ट्यूब टॉप

* ये ब्रा स्टैपलेस और नॉन-पैडेड होती है.

* इसे छोटे से लेकर मीडियम ब्रेस्ट वाली महिलाएं पहन सकती हैं.

* इसे आप टी-शर्ट, जिम वेयर, स्ट्रैपलेस पार्टी वेयर के साथ पहन सकती हैं.

यह भी देखें: बनें पार्टी परफेक्ट: 10 चीज़ें अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखें

पुशअप

* ये पैडेड ब्रा स्ट्रैप्स के साथ और स्ट्रैपलेस भी होती हैं.

* छोटे और मीडियम ब्रेस्ट वाली महिलाएं जिन्हें क्लीवेज की ज़रूरत होती है, उनके लिए बेस्ट ऑप्शन है.

* पार्टी ड्रेसेज़ के साथ पहन सकती हैं.

ड्रेस अप

* ये लेसी, डेमी-कप और नॉन पैडेड होती है.

* छोटे और मीडियम बस्ट वाली महिलाएं इसे पहन सकती हैं

* इसमें बहुत ज़्यादा सपोर्ट नहीं होता इसलिए इसे कुछ घंटों के लिए ही पहना जा सकता है. आप इसे हनीमून के दौरान या ड्रेसी फीलिंग के लिए पहन सकती हैं.

डेमी-कप

* ये पैडेड ब्रा अंडरवायर सपोर्ट के साथ मिलती है.

* छोटे से लेकर मीडियम बस्ट वाली महिलाएं इसे  पहन सकती हैं.

* इसे रोज़ पहने जाने वाले फॉर्मल और इनफॉर्मल कपड़ों के साथ पहना जा सकता है.

– कमला बडोनी

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फोटो सौजन्य: enamor