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15 इफेक्टिव रेज़ोल्यूशन हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए (15 Most Effective Resolution for Happy Married Life)

Married Life

कल थे अजनबी, आज हमसफ़र हैं… दिलों की नज़दीकियां हैं, तो सोच के फ़ासले भी कम नहीं… क्यों न कुछ ऐसा करें, कुछ तुम बढ़ो, कुछ हम बढ़ें… इसके लिए आपको कुछ रिज़ोल्यूशन यानी संकल्प भी बनाने होंगे, ताकि वैवाहिक जीवन ताउम्र ख़ुशहाल बना रहे.

 

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ज़िंदगी के सफ़र में आपके हाथों में किसी का हाथ हो और हर क़दम किसी का साथ मिल जाए, तो ज़िंदगी कितनी ख़ुशगवार हो जाती है. अब इसे प्रकृति का नियम कहें या हमारी ज़रूरत, लेकिन ज़िंदगी जीने के लिए हर किसी को एक साथी की ज़रूरत होती है. और यदि अपने जीवनसाथी के साथ ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन बिताना है, तो कुछ रिज़ोल्यूशन भी बनाने होंगे. यहां पर हम आपको ऐसे ही 15 रिज़ोल्यूशन बता रहे हैं, जिन्हें निभाने के बाद आपके रिश्तों में जीवनभर मिठास बनी रहेगी.

1. शादी के सातों वचन निभाने का रिज़ोल्यूशनः अपनी शादी के दिन को कभी न भूलें. यह आपको हमेशा याद दिलाएगा कि आपने शादी के समय क्या वचन लिए थे. उन सातों वचनों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहें. ख़ुद से वादा करें कि मैं अपने साथी के साथ किए गए विवाह की वजह अर्थात् प्रेम को कभी नहीं भूलूंगा या भूलूंगी. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि अपनी शादी का वीडियो साथ बैठकर देखें.

2. कम्युनिकेशन बनाए रखने का संकल्पः संवाद स़िर्फ शादीशुदा रिश्ते के लिए ही नहीं, बल्कि हर रिश्ते के लिए जादू का काम करता है. रिलेशनशिप एक्सपर्ट रेवा जोशी बताती हैं कि संवादहीनता वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी समस्या है. यदि आप अपने पार्टनर से नाराज़ हैं या उनसे आपकी कुछ अपेक्षाएं हैं, तो अपने साथी से प्रत्यक्ष बात करें. उनसे जुड़ी अपनी शिकायतें उनसे ही शेयर करें. उन्हें किसी और के साथ न बांटें, वरना आप दोनों के बीच में ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी. वैवाहिक जीवन में छोटे-मोटे झगड़े-शिकायतें सामान्य हैं और इन्हें बातचीत द्वारा ही सुलझाया जा सकता है, पर संवादहीनता धीरे-धीरे आपके रिश्ते मेें बिखराव उत्पन्न कर देती है.

3. अपने साथी को समय देनाः आज की जीवनशैली में यह रिज़ोल्यूशन सबसे महत्वपूर्ण है, वहीं इसे निभा पाना शायद आपके लिए सबसे ज़्यादा मुश्किल होगा. शहरी कपल्स की यह बहुत बड़ी समस्या है. यह सच्चाई है कि करियर व पैसे की भागदौड़ में दोनों को साथ बैठकर बातें करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, लेकिन शायद आप नहीं जानते कि आप इसकी क्या क़ीमत चुका रहे हैं? आप दोनों के बीच समय की कमी मीलों के फ़ासले बना रही है. स़िर्फ साथी को समय देना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसे क्वालिटी टाइम देना भी ज़रूरी है. अर्थात् जब आप अपने साथी के साथ हों, तब आप अपने तनावों के साथ न बैठें,बल्कि अपना पूरा ध्यान उसी पर केंद्रित करें. पार्टनर को ऑफ़िस ड्रॉप करें, उसे लेने जाएं या छुट्टी का पूरा दिन साथ बिताएं. अपने हर पल में अपने साथी को शामिल करने की कोशिश करें.

4. झगड़ों के समय संयम न खोनाः झगड़े वैवाहिक जीवन का अभिन्न अंग हैं, पर झगड़े के समय अपना संयम और विवेक न खोएं. ज़्यादातर समस्याएं इसलिए होती हैं, क्योंकि झग़ड़ते समय हम क्या कह रहे हैं, इस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता है. लेकिन बाद में जब झगड़ा ख़त्म हो जाता है या यूं कहें कि हम शांत हो जाते हैं, तो हमें अपने किए पर पछतावा होता है. झगड़ते समय साथी या उसके रिश्तेदारों को अपशब्द न कहें, न ही किसी प्रकार की मार-पीट करें. नोंक-झोंक आपके रिश्ते में नमक का काम करती है, जो आपके रिश्ते का स्वाद बढ़ाती है, पर अगर नमक ज़रूरत से ज़्यादा पड़ जाए, तोे पूरा स्वाद ख़राब हो जाता है.

5. स्पर्श का जादू चलाने का वादाः व्यस्तता के बावजूद छोटे-छोटे पल चुराकर अपने साथी को स्पर्श करना न भूलें. यकीन मानिए, आपकी इस तरह की शरारतों का पार्टनर कभी भी बुरा नहीं मानेंगे, बल्कि मन ही मन ख़ुश होंगे. याद रखिए, आपके द्वारा दिया गया एक आलिंगन या उंगलियों की छुअन आपके साथी को आपके प्यार के बंधन में बांधे रखेगी और हर तनाव से मुक्त कर नया आत्मविश्‍वास पैदा करेगी.

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6. मान-सम्मान देनाः आप हमेशा अपने साथी से मान-सम्मान की अपेक्षा करते हैं, पर इसके लिए आपको सबसे पहले अपने साथी को भी आदर देना होगा. उसकी भावनाओं का सम्मान करना होगा. उससे जुड़े अन्य लोगों का भी सम्मान करना होगा.

7. ग़लती को माफ़ करनाः यदि आपका साथी अपनी किसी ग़लती को स्वीकारने आपके पास आया है, तो कभी भी उसे रिजेक्ट करने या उस पर ग़ुस्सा करने की ग़लती न करें, क्योंकि आपके ऐसा करने पर वह फिर कभी भी आपसे सच कहने या माफ़ी मांगने की हिम्मत नहीं कर पाएगा. उसे समझें और माफ़ कर दें. यह न भूलें कि क्षमा करके जीवन में आगे बढ़ जाने में ही समझदारी है.

8. अभिमान न करनाः वैवाहिक जीवन में अभिमान या ईगो कभी न आने दें. चाहे आप अपने साथी से ज़्यादा कमाते हों, ज़्यादा सुपीरियर हों, ज़्यादा पढ़े-लिखे हों, पर किसी बात का ईगो न पालें, न ही घमंड करें. ईगो प्रेम और विश्‍वास को ख़त्म कर देता है.

9. शक न करनाः यदि आपके साथी का कोई स्त्री या पुरुष मित्र है, तो परेशान न हों. अगर किसी वजह से पार्टनर को ऑफ़िस से आने में देरी हो जाए, तो तुरंत अपने शक की सुई उसे न चुभोएं. रिएक्ट करने से पहले देरी से आने की वजह सुन लें. शक करना बहुत आसान है, पर विश्‍वास करना बहुत ही मुश्किल, लेकिन याद रखें विश्‍वास आपको ख़ुशहाल ज़िंदगी की ओर ले जाएगा.

10. अपमान न करनाः आप दोनों के रिश्ते के उतार-चढ़ाव नितांत निजी हैं. उसे बाकी लोगों के सामने न आने दें. अपने साथी को कभी किसी के सामने अपमानित न करें. ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे उनका स्वाभिमान आहत हो. आपको एक-दूसरे का साथ देना है, न कि लोगों के सामने एक-दूसरे को नीचा दिखाना है. यदि आप अपने साथी को उनकी किसी ग़लती का एहसास कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें लोगों के सामने शर्मिंदा न करें, बल्कि अकेले में बताएं.

11. ज़िम्मेदारियों से न बिदकने का संकल्पः शादीशुदा ज़िंदगी में स़िर्फ पति-पत्नी ही नहीं होते, बल्कि धीरे-धीरे कई सारी ज़िम्मेदारियां भी आ जाती हैं, जैसे- बच्चों की ज़िम्मेदारी, माता-पिता की ज़िम्मेदारी आदि. ऐसी कोई भी ज़िम्मेदारी आने पर पीछे न हटें, बल्कि उन्हें निभाने में अपने साथी का साथ दें.

12. छुट्टियों पर जानाः अपनी व्यस्त जीवनशैली से कुछ समय निकालकर कुछ दिन अपने साथी के साथ छुट्टियों पर ज़रूर जाएं. सेकंड हनीमून प्लान करने में भी कोई बुराई नहीं है.

13. पार्टनर को नज़रअंदाज़ न करनाः अपने जीवन के हर छोटे-बड़े ़फैसले में अपने साथी को शामिल करें. कहीं पर या कभी भी उसे नज़रअंदाज़ न करें. उन्हें बताएं कि आपके लिए वे कितने महत्वपूर्ण हैं.

14. बहुत प्यार करने का वादाः याद रखिए, चाहे जितने झगड़े या वाद-विवाद हों, दिन के आख़िर में जीत आपके प्यार की होनी चाहिए. अपने आपसी मतभेद सोने से पहले सुलझाने की कोशिश करें. कभी भी अपने झगड़ों के साथ सोने न जाएं. याद रहे, आपके प्रेम से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है.

15. सारे रिज़ोल्यूशन निभाने का रिज़ोल्यूशनः यह संकल्प सबसे ज़रूरी है. हमेशा ख़ुद से किए हर वादे या संकल्प को याद रखें और उसे पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करें.

– विजया कठाले निबंधे

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7 टाइप के किस: जानें कहां किसिंग का क्या होता है मतलब?(7 different Kisses and their hidden Meaning)

प्यार के इज़हार का ख़ूबसूरत तरीका है किस यानि चुंबन. लेकिन क्या आप जानते हैं चुंबन की भी ज़बान होती है. आप किस अंग पर किस करते हैं, उससे आपकी फीलिंग का पता चलता है.

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माथे पर चुंबन

माथे पर चुंबन आपकी घबराहट दूर करता है और आपके अंदर आत्मविश्वास जगाता है. इसलिए रिश्तों के आरंभ में आत्मीयता बढ़ाने के लिए लोग अपने साथी का माथा चूमते हैं.

गाल पर चुंबन

गाल पर चुंबन का मतलब शारीरिक संबंध की ओर बढ़ना नहीं, बल्कि प्रेम और वात्सल्य का इज़हार भी होता है. इसीलिए गाल पर मर्यादित चुंबन किसी के प्रति आपका स्नेह दर्शाता है.

कॉलरबोन पर चुंबन

कॉलरबोन यानी गले और छाती के जोड़ पर चुंबन आत्मीयता का प्रतीक माना जाता है. इसका मतलब यह भी होता है कि रिश्ते को अगले चरण में ले जाने के लिए मन से पूरी तरह तैयार है.

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कान पर चुंबन

कान पर चुंबन यानी रिश्ते के अगले चरण में पहुंच जाना है, जहां आप अपने साथी से हास-परिहास कर सकते हैं. इस तरह के चुंबन में एक तरह से अक्सर शरारत का भी आभास होता है.

हाथ पर चुंबन

हाथ पर चुंबन जिसे आप प्रेम करते हैं, उसके हाथ पर होंठ रखकर चुंबन लेते हैं. हाथ पर चुंबन किसी की प्रशंसा में भी लिए जाते हैं. कभी-कभी अच्छी भावना व्यक्त करने के लिए हाथ चूम लेते हैं.

होंठ पर चुंबन

होंठ पर चुंबन बेहद संवेदनशील होता है. आमतौर पर आप जिसे प्रेम करते हैं उसके होंठों का चुंबन लेते हैं. इसके अलावा किसी दोस्त के होंठ का चुंबन लेने का मतलब आप उसके साथ डेट पर जाने के लिए तैयार हैं.

चुंबन व टाइट आलिंगन

चुंबन व टाइट आलिंगन जिसे दिलोजान से चाहते हैं उसका करते हैं. होंठों का गहरा मिलन और साथी का कसकर आलिंगन यह भी इंगित करता है कि आप मोहब्बत के चरम अवस्था पर जाने के लिए तन और मन से तैयार हैं.

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किस थेरेपीः Kiss के 11 Amazing हेल्थ बेनीफिट्स (Kiss therapy: 11 Amazing Health Benefits of Kiss)

मुहब्बत के इज़हार का ख़ूबसूरत तरीका है किस यानि चुंबन. किस दो प्यार करनेवालों को और क़रीब लाने में मदद करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं किस के कई हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं और कई शोधों से ये बात साबित भी हो चुकी है.

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1. स्ट्रेस दूर करता है

किसिंग के दौरान स्त्री-पुरुष शरीर में कोर्टिज़ोल हार्मोन का स्तर कम होता है और दिमाग़ में सेरोटोनिन हार्मोन में बढ़ोतरी होने लगती है. चूंकि स्ट्रेस के लिए ये दोनों हार्र्मोेन्स ज़िम्मेदार होते हैं, इसलिए कोर्टिज़ोल हार्मोन के कम होने और दिमाग़ में सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ने से शरीर का तनाव दूर हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इतना ही नहीं, चुंबन तनाव के लिए ज़िम्मेदार ऑक्सीटोसिन हार्मोन के स्तर को कम करके चिंता को भी दूर कर देता है.

2. दिल को रखे तंदुरुस्त

चुंबन के दौरान शरीर में एड्रेनालिन नाम का हार्मोन बनता है जो दिल के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है. चुंबन रक्त में एपिनेफ्रीन भी छोड़ता है, जिसके कारण दिल में रक्त का संचार बहुत तेज़ी से होता है. चुंबन पूरे शरीर में रक्त संचार के लिए दिल की मदद करता है. इससे ब्लडप्रेशर कम करने और शरीर में रक्त संचार ठीक रखने में मदद मिलती है. तो अब न सिर्फ़ दिल को ख़ुश करने, बल्कि इसे सेहतमंद रखने के लिए किस करें.

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3. इम्यूनिटी को सुधारे

चुंबन संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबॉडीज़ बढ़ाता है, जिससे रक्त में हिस्टामाइन भी बढ़ता है. यह छींक व आंसू या सूजन के रूप में दिखता है. इन क्रियाओं का मतलब शरीर वायरस या बैक्टीरिया से लड़ रहा है. इससे इम्यून सिस्टम बहुत मज़बूत होता है. यह महिलाओं को मसाइटोमेगालोफ वायरस से बचाने में मदद करता है जो गर्भावस्था में शिशु को जन्मजात अंधा बना सकता है. यह वायरस केवल गर्भवती महिलाओं को नुकसान पहुंचाता है.

4. रखे हमेशा फिट

जब स्त्री-पुरुष के होंठ एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं, तब दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो जाती है. उस समय दिल एड्रेनालाइन हार्मोन या एपिनेफ्रीन के साथ न्यूरोट्रांसमीटर रक्त में रिलीज़ करता है. एड्रेनालाइन के स्तर में बढ़ोतरी से मेटाबॉलिज़्म दर भी बढ़ती है, जो ज़्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करता है. क़रीब एक मिनट के किस के दौरान दो से तीन कैलोरी बर्न होती है. हर पैशनेट किस से 8 से 16 कैलोरीज़ बर्न की जा सकती है.

5. चेहरे पर ग्लो लाता है

एक किसिंग सेशन से टिश्यूज़ टाइट व टोन्ड होते हैं और पूरे चेहरे में रक्त संचार तेज़ी से होता है. इसके फलस्वरूप त्वचा ख़ूबसूरत हो जाती है. किस सेशन के समय ओर्बिचुलारिस ओरिस नाम का हार्मोन सबसे ज़्यादा सक्रिय रहता है जो चेहरे से जुड़े अंगों को टोन करते हैं, जिससे आप लंबे समय तक यंग नज़र आते हैं.

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6. दांतों को बनाए चमकीला

चुंबन दांतों की सफ़ाई करने का सबसे सहज, सरल और नैसर्गिक तरीक़ा है. किस सेशन के दौरान मुंह के अंदर जो लार बनती है, वह अपने एसिडिक गुणों के कारण दांतों पर जमे प्लाक को तोड़ने और दांतों में कैविटी बनने से रोकता है, क्योंकि लार आपके दांतों में फंसे खाने के टुकड़ों को साफ़ करके दांतों को सड़ने से रोकता है. जो लोग मोतियों जैसे सफ़ेद दांतों की ख़्वाहिश रखते हैं, उनके लिए किस फ़ायदेमंद है. किस दांतों मेें कैविटी भरते हैं और बैक्टीरिया ख़त्म करते हैं.

7. दर्द को करे कम

किस से शरीर में एड्रेनालाइन हार्मोन बनता है जो दर्द की कम करने में मददगार होता है और इसके साथ-साथ शरीर एंडोर्फिन नामक नेचुरल केमिकल को शरीर में छोड़ता है जो दर्द कम या दूर करने के लिए मॉर्फिन जैसी नशीली दवाई से ज़्यादा पावरफुल होती है.

8. लंबी उम्र के लिए करें किस

हर महिला अपने पति को सुबह के समय गुडबाय किस देकर उनकी ज़िंदगी के पांच साल बढ़ा सकती है. जर्मन चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के समूह ने दावा किया है कि शादीशुदा पुरुष अगर सुबह के समय अलविदा किस अपने पार्टनर को दें, तो उनका जीवन उन शादीशुदा पुरुषों से ज़्यादा लंबा होता है जो सुबह के समय अपने पार्टनर को अलविदा किस नहीं देते.

9. मनोदशा में सुधार

चुंबन डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे मूड अच्छा होता है और भावनात्मक उथल-पुथल शांत होती है. अगर आपका मन ठीक नहीं है, तो अपने पार्टनर के साथ जमकर एक किस सेशन कीजिए. आप फ्रेश फील करने लगेंगे.

10. संबंधों में प्रगाढ़ता

चुंबन दो लोगों के आपसी रिश्ते को बहुत ज़्यादा मज़बूत और मधुर बनाता है. इसीलिए जब भी हम चुंबन लेते हैं, तब पुरुष और महिला दोनों के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन बहुत तेज़ी से बनता है. इसीलिए इस हार्मोन को लव हार्मोन भी कहते हैं, क्योंकि यह अपोज़िट सेक्स के बीच रिश्ते को और गहरा करता है. संबंध अच्छे होने पर आदमी ख़ुश रहता है और स्वस्थ रहने के लिए ख़ुश होना पड़ता है.

11. दांपत्य जीवन करे सफल

पति-पत्नी के बीच मन-मुटाव के बाद सुलह के लिए किस सबसे बढ़िया ज़रिया है. जो दंपति हमेशा एक-दूसरे को किस करते रहते हैं, उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत अच्छी चलती है. जब चुंबन लेते हैं, तब दोनों के शरीर एक-दूसरे के साथ संवाद करने लगते हैं. विवाह के लिए और विवाह के बाद हेल्दी बच्चों के लिए भी किसिंग सेशन बहुत ज़रूरी है.

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सेफ सेक्स के 20 + असरदार ट्रिक्स (20 + Effective Tricks For Safe Sex)

सेफ सेक्स न सिर्फ आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ से बचाता है, बल्कि आप अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी से भी सुरक्षित रहती हैं, इसलिए ज़रूरी कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल.

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– सेफ सेक्स के लिए कंडोम को सबसे बेहतरीन उपाय माना जाता है. कंडोम न केवल आपको अनचाहे गर्भ से बचाता है, बल्कि इंफेक्शन, एचआईवी/एड्स या फिर अन्य सेक्सुअल डिसीज़ से भी आपका बचाव करता है.
– यदि सेक्सुअल रिलेशन में लुब्रिकेटेड कंडोम का इस्तेमाल करें, तो ज़्यादा अच्छा है. लुब्रिकेशन न केवल कंडोम को फटने से बचाता है, बल्कि इसे इस्तेमाल करना भी आसान होता है.
– ध्यान रहे कि एक समय में एक ही कंडोम पहनें, दो कंडोम पहनने से आपको नुक़सान हो सकता है.
– ओरल सेक्स से बचें, क्योंकि इससे कई तरह के इंफेक्शन्स होने का ख़तरा रहता है. कई ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जब ओरल सेक्स से व्यक्ति को कैंसर व सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ हुई हैं.
– यदि आप गर्भनिरोधक के रूप में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही हैं, तो इसे कभी भी मिस न करें. यानी इसे रेग्युलर नियत समय पर लेना न भूलें. हां, यदि कभी एक दिन मिस हो जाए, तो दूसरे दिन दो पिल्स एक साथ ले लें. फिर दोबारा नियमित रूप से पिल्स लेती रहें.
– आमतौर पर पीरियड्स के दौरान सेक्स करना सेफ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कंसीव करने के चांस कम होते हैं. लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता है, ख़ासतौर से तब जब आपका मेन्स्ट्रुअल साइकल छोटा हो. इसलिए महिलाएं पीरियड्स के सर्कल को समझते हुए दिनों को कैलकुलेट करके अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रह सकती हैं.
– सेफ सेक्स के रूप में कुछ कपल्स एक तरीक़ा ऐसा भी अपनाते हैं, जिसमें मेल पार्टनर ऑर्गेज़्म के समय बाहर ही डिस्चार्ज कर देता है. लेकिन यह तरीक़ा भी अधिक सुरक्षित नहीं है. कई बार पुरुष एक्साइटमेंट के समय यह जान ही नहीं पाते कि उनके प्राइवेट पार्ट के आगेवाले हिस्से पर वीर्य गिर चुका होता है व उसमें शुक्राणु हो सकते हैं, जिससे शायद प्रेग्नेेंसी भी हो सकती है.
– सेफ सेक्स के रूप में गर्भनिरोधकों के बारे में तो सभी बहुत कुछ जानते होंगे, पर कुछ ऐसे गर्भनिरोधक भी हैं, जिनका इस्तेमाल अनसेफ सेक्स के बाद भी प्रभावकारी होता है, जिसे इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव कहते हैं.
हाल ही में हुए रिसर्च में 59% महिलाओं ने माना कि उन्हें इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव की बहुत कम जानकारी है, जबकि 12% महिलाएं इनके बारे में जानती तक नहीं हैं.

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तो आइए, सेफ सेक्स के रूप में इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव के बारे में जानते हैं.
– यूं तो अनसेफ सेक्सुअल रिलेशन के बाद गर्भनिरोध के रूप में सबसे अधिक भरोसा इमर्जेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स पर किया जाता है, पर इनके अलावा भी कुछ विकल्प हैं, जो पूरी तरह से सेफ हैं.
– ऐसे में इमर्जेंसी इंट्रायूटेराइन डिवाइस (आईयूडी) का इस्तेमाल भी बेहतर विकल्प हो सकता है.
– आईयूडी प्लास्टिक या तांबे का बना छोटा-सा उपकरण होता है, जिसे अनसेफ सेक्स के बाद भी महिलाएं यूटेरस में फिक्स करवा सकती हैं. एक बार लगाया गया आईयूडी कम से कम 5 से 10 साल तक गर्भनिरोध में मदद करता है.
– अक्सर हिलाएं यह सोचकर इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव्स का सेवन नहीं करती हैं कि इससे उनकी फर्टिलिटी कम हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं है. हां, यह ज़रूर है कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के इस्तेमाल से उस महीने के पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं, पर ये इंफर्टिलिटी की वजह नहीं होता है, अतः इनका इस्तेमाल सेफ समझा जाता है.
– ध्यान रहे कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल सामान्य इस्तेमाल के लिए नहीं है. इसका इस्तेमाल उसी स्थिति में करते हैं, जब सामान्य कॉन्ट्रासेप्टिव लेने से चूक जाएं. वैसे बेहतर तरीक़ा यह भी हैै कि आप किसी डॉक्टर से इनके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी पहले ही ले लें.
– रिसर्च में पाया गया कि 50% महिलाओं के बीच यह मिथ है कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल एबॉर्शन के लिए किया जाता है, जो कि ग़लत है.
– इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का काम एबॉर्शन करना नहीं है. इनके सेवन से अंडाशय में बन रहे अंडकोष का निर्माण रुक जाता है या वो गर्भाशय में नहीं जाते, जिससे प्रेग्नेंसी हो ही नहीं सकती.
– इस बात का भी ख़ास ख़्याल रखें कि इमर्जेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल केवल इमर्जेंसी में ही लें, क्योंकि इनका नियमित रूप से इस्तेमाल करना नुक़सानदायक हो सकता है.
– यह एक मिथ है कि असुरक्षित सेक्सुअल रिलेशन होने के तुरंत बाद या फिर 24 घंटों के अंदर ही इनका सेवन लाभदायक हो सकता है, जबकि हक़ीक़त में ऐसा नहीं है.
– असुरक्षित सेक्स के 72 घंटों यानी 3 दिनों के अंदर तक इसका इस्तेमाल प्रभावकारी होता है. वैसे आप जितनी जल्दी इसका इस्तेमाल करेेंगी फ़ायदा उतना ही जल्दी होगा.
– सेक्स के दौरान अनचाहे गर्भ से बचने के लिए न अब महिलाओं को कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की ज़रूरत है और न ही पुरुषों के लिए कंडोम ही एकमात्र विकल्प है, क्योंकि अब पुरुषों के लिए भी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल तैयार किया जा रहा है, जो उनके पुरुषत्व को भी प्रभावित नहीं करेगी. ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने फैमिली प्लानिंग के लिए पुरुषों की कॉन्ट्रासेप्टिव पिल को तैयार कर ली है, जो जल्द ही बाज़ार में उपलब्ध होगी.

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सेक्स अलर्ट

– गर्भनिरोध के लिए प्रचलित तरीक़ों में जो महिलाएं गर्भनिरोधक इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं, वे अलर्ट हो जाएं, क्योंकि हाल ही में हुए एक रिसर्च के अनुसार, जो महिलाएं
कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन का इस्तेमाल अधिक करती हैं, उन्हें दूसरों की अपेक्षा एचआईवी इंफेक्शन का ख़तरा 40% अधिक होता है.
– दुनियाभर में 14.4 करोड़ महिलाएं हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन को अधिक महत्व देती हैं, जिनमें क़रीब 4.1 करोड़ महिलाएं कंट्रासेप्टिव इंजेक्शन का इस्तेमाल करती हैं, जबकि 10.3 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं.
– पुरुष प्रजनन क्षमता को अवरोध कर उन्हें कंट्रोल कर सकनेवाली मेडिसिन एच2-गैमेंडाजोल व जेक्यू1 पर भी रिसर्च चल रहा है. ये मेडिसिन शरीर में स्पर्म बनाने की प्रक्रिया को ब्लॉक कर देंगी और भविष्य में सेफ सेक्स के रूप में इनका भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.
– अपने पार्टनर के साथ ईमानदार रहकर न केवल आप अपनी सेक्सुअल लाइफ अच्छी तरह से एंजॉय कर सकते हैं, बल्कि सेक्सुअल डिसीज़ के ख़तरों को भी कम कर सकते है.

कुछ दिलचस्प बातें

– अक्सर पुरुष नसबंदी कराने से कतराते हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण यह मिथ है कि इससे उनमें कमज़ोरी आ जाती है, जबकि ऐसा नहीं है.
– स्पर्म की संख्या पूरे वीर्य में 1 फ़ीसदी से भी कम होती है. 99 फ़ीसदी वीर्य प्रोस्टेट (30%) व शुक्राशय (69%) से ही बनता है.
– कई पुरुषों को ऐसा लगता है कि उनके पुरुषत्व का प्रमाण प्रजनन क्षमता पर ही आधारित है. ऐसे लोगों को अपना शक दूर करने के बाद ही नसबंदी करानी चाहिए.
– नसबंदी कराने के बाद वीर्य की दो रिपोर्ट स्पर्म निगेटिव होनी ज़रूरी है. इसके बाद आप नॉर्मल सेक्स लाइफ एंजॉय कर सकते हैं.

– रेषा गुप्ता

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जानें सेक्स लाइफ के 8 Interesting रिसर्च रिपोर्ट्स (Know 8 Interesting Sex Research Reports)

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सफल सेक्स लाइफ़ पर हुए रिसर्च के अनुसार सेक्स लाइफ एंजॉय करने के लिए डेली एक्सरसाइज़ और हेल्दी डायट बहुत ज़रूरी है. आइए जानते हैं कुछ इंटरेस्टिंग सेक्स रिसर्च की रिपोर्ट्स की संक्षिप्त जानकारी.

 

Sex Research Reports

 

1. नियमित दौड़ से सेक्स पावर में वृद्धि

जो लोग नियमित तौर पर दौड़ लगाते हैं, उनका यौन जीवन उन लोगों की अपेक्षा ज़्यादा सक्रिय होता है, जो दौड़ नहीं लगाते. हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक हर 10 में से एक दौड़ लगानेवाले (जॉगर्स) ने कहा कि वह अपने दैनिक जीवन में कम से कम एक बार यौन संबंध स्थापित करता है, जबकि 3 फ़ीसदी जॉगर्स का कहना है कि वे दिन में 2 बार यौन क्रिया का लुत्फ़ उठाते हैं.
एक मशहूर समाचार पत्र में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक इस शोध के दौरान उन लोगों से भी बात की गई, जो दौड़ नहीं लगाते हैं. दौड़ नहीं लगानेवाले ऐसे चार में से एक व्यक्ति का कहना था कि वह महीने में स़िर्फ एक बार ही यौन संबंध स्थापित
करता है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यौन सक्रियता के लिए ज़रूरी सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा दौड़ से बढ़ जाने के कारण ही उक्त फायदा जॉगर्स पुरुषों में देखा गया. यह तो सभी जानते हैं कि टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन का संबंध यौन क्रियाकलापों, रक्त संचरण और मांसपेशियों के परिणाम के साथ-साथ एकाग्रता, मूड और याद्दाश्त से भी होता है.

2. अनार के रस से बढ़ती है कामशक्ति

अगर आम फलों का राजा है, तो अनार की भूमिका उस डॉक्टर जैसी है, जिसके पास तमाम रोगों की दवा है. अनार की इसी उपयोगिता के कारण ही ङ्गएक अनार सौ बीमारफ वाली कहावत इतनी मशहूर है. अभी हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि अनार के रस में कामशक्तिवर्द्धक अद्भुत क्षमता है. कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक महीने तक लगातार एक ग्लास अनार का रस पीना किसी भी पुरुष के लिए कामोत्तेजक औषधि वियाग्रा जैसा काम करता है, क्योंकि अनार के रस से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट बढ़ता है और यौनांगों में रक्तसंचार तेज़ होता है. इससे व्यक्ति सेक्स क्रिया में अधिक सक्रिय होता है.

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3. सेक्स की कमज़ोरी में मछली का तेल

अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक शोध के अनुसार मछली का तेल स्त्री व पुरुष की अनेक सेक्स संबंधी कमज़ोरियों को दूर करता है. आज के युवा अपने पार्टनर को पूरी तरह से सेक्स संतुष्टि प्रदान करने में अक्षम होते जा रहे हैं, जिससे विवाह के कुछ दिनों बाद ही तलाक़ की नौबत आ जाती है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे पुरुष मछली का एक चम्मच तेल रोज़ाना भोजन में उपयोग करके अपने सेक्स की कमज़ोरी से निजात पा सकते हैं. हाल ही में कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने 50 स्त्री-पुरुषों के जोड़ों पर इसका प्रयोग किया और पाया कि तीन माह पहले, जो लोग सेक्स से बचते थे, वे तीन महीने बाद प्रसन्नता से सेक्स में दिलचस्पी लेने लगे.

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4. कॉफी से यौन सक्रियता

एक अध्ययन से पता चला है कि लगभग पचास वर्ष की उम्र के बाद भी जो लोग कॉफी का सेवन करते रहते हैं, वे कॉफी न पीनेवालों की अपेक्षा सेक्स क्रिया में अधिक सक्रिय होते हैं. ब्राज़ील में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि कॉफी पीने से शुक्राणुओं में क्रियाशीलता आती है और सुस्त पड़े शुक्राणु फुर्तीले बन जाते हैं.
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कॉफी में पाए जानेवाले रासायनिक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट शुक्राणुओं के अंडाणुओं से मिलने की संभावना को भी बढ़ा देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गर्भधारण होता है. अधिक आयु के दंपतियों में सेक्स सक्रियता के लिए कॉफी का सेवन बहुत ही लाभप्रद होता है. अधिक उम्र में कॉफी पीने से सेंट्रल नर्वस सिस्टम (स्नायु तंत्र) की सक्रियता बढ़ जाती है और कुछ ख़ास मांसपेशियां सेक्स के अनुकूल हो जाती हैं.

5. वियाग्रा से गर्भधारण की क्षमता में कमी

एक समाचार के अनुसार, सेक्स पावर बढ़ाने के लिए वियाग्रा का सेवन करने से प्रजनन शक्ति प्रभावित होती है. हाल ही में ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अनुसंधान से यह बात सामने आई है कि वियाग्रा का सेवन करनेवाले लोगों के शुक्राणु एंजाइम के अंडाणुओं की बाहरी परत हटाने से पहले ही बिना निषेचन किए ही लौट जाते हैं, जिससे प्रजनन चक्र पूरा नहीं होता है और महिलाएं गर्भधारण करने से वंचित रह जाती हैं.
अनुसंधान के लिए वैज्ञानिकों ने कई लोगों के शुक्राणुओं के सैंपल लिए और उनकी जांच की, तो पाया कि लगभग 80% शुक्राणु वियाग्रा से कुछ ज़्यादा सक्रिय हो जाते हैं. वियाग्रा के कारण कुछ शक्राणु ही कभी-कभी अंडाणु को विकसित कर पाने में सक्षम होते हैं. इससे पता चलता है कि वियाग्रा का प्रयोग पुरुषों का सेक्स पावर बढ़ाने के लिए तो किया जा सकता है, लेकिन परिवार बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

6. पीरियड्स के दौरान कामोत्तेजना अधिक

वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि पीरियड्स के दिनों में स्त्री के एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंस का स्तर बहुत तेज़ी से बदलता रहता है, जिससे वो इन दिनों अधिक कामोत्तेजना का अनुभव करती हैं. साथ ही सेक्स में ऑर्गेज़्म के कारण गर्भाशय में होनेवाली ऐंठन व दर्द में भी उसे राहत महसूस होती है, परंतु इस समय कंडोम का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि यह न स़िर्फ हाइजीन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इस समय भी गर्भधारण की दो प्रतिशत संभावना होती है, जिससे बचाव होता है. इसके अलावा महिलाएं भी हाइजीन की दृष्टिकोण से डायफ्राम का इस्तेमाल कर सकती हैं.

7. मोबाइल के अधिक प्रयोग से संभव है नपुंसकता

एक वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि जो लोग मोबाइल फ़ोन का अधिक प्रयोग करते हैं, उनके शुक्राणुओं की न स़िर्फ संख्या कम होती जाती है, बल्कि उनमें असामान्यता के लक्षण भी पाए जाते हैं. शोध के अनुसार, जो पुरुष मोबाइल फ़ोन का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें शुक्राणुओं की 30% तक की कमी पाई जाती है और बाकी शुक्राणुओं में भी असामान्यता के लक्षण पाए जाते हैं. विश्‍व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल फ़ोन की रेडियो फ्रीक्वेंसी फील्ड शरीर के ऊतकों को गहराई से प्रभावित करती है.

8. हेल्दी सेक्स लाइफ़ से दिल की बीमारियां कम

एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण से पता चला है कि हेल्दी सेक्स लाइफ़ से दिल की बीमारियों का ख़तरा कम रहता है. इस सर्वेक्षण में 42 से 50 साल की महिलाओं को शामिल किया गया. इससे पता चला कि वैवाहिक जीवन से संतुष्ट महिलाओं में दिल की बीमारी की आशंका अन्य महिलाओं के मुक़ाबले एक तिहाई कम थी. विधवा महिलाओं में तो दिल की बीमारियां उत्पन्न होने की आशंका साढ़े पांच गुना अधिक पाई गई, जबकि तलाक़शुदा व अकेली रह रही महिलाओं में यह आशंका हेल्दी सेक्स लाइफ़ बिता रही महिलाओं की तुलना में दुगुनी थी.

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सेक्सुअल फिटनेसः क्या आप सेक्सुअली फिट हैं?(Sexual fitness: Are you sexually fit?)

Sexual fitness

सेक्स को लेकर आज भी लोगों के मन में भ्रांतियां और ग़लतफ़हमियां हैं, क्योंकि सेक्स (Sexual fitness) को लेकर कुछ खुलापन भले ही आ गया हो, लेकिन मैच्योरिटी अब भी नहीं आई है. ऐसे में यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या हम सेक्सुअली फिट हैं?

Sexual fitness
– एक सामान्य इंसान को सेक्स की ज़रूरत और चाहत होती है.
– यह चाहत व ज़रूरत अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकती है. किसी को कम, किसी को ज़्यादा.
– इसी तरह आकर्षण होना भी स्वाभाविक है.
– फैंटसीज़ यानी कल्पना करना, जैसे- किसी ख़ास व्यक्ति की ओर यदि हम आकर्षित होते हैं, तो उसके बारे में सोचना और कल्पना में उसके साथ सेक्स करना भी स्वाभाविक व सामान्य है.
– सेक्स (Sexual fitness) की चाह होने पर मास्टरबेट करना भी हेल्दी माना जाता है.
– यदि आप में ऊपर बताए तमाम लक्षण मौजूद हैं, तो आप सेक्सुअली फिट हैं और यदि आप में सेक्स ड्राइव यानी सेक्स की चाह कम है या कम हो रही है, तो आपकी सेक्सुअल फिटनेस कम है.
– अगर आप शादीशुदा हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ कितनी अच्छी है?
– क्या सेक्स से आपको और आपके पार्टनर को पहले जैसी संतुष्टि नहीं मिलती?
– क्या सेक्स से आपको ऊब और बोरियत होने लगी है?
– क्या यह महज़ शारीरिक क्रिया बन गया है आपके लिए या अब भी भावनात्मक रूप से आप इसे आनंददायक क्रिया मानते हैं?
ये तमाम सवाल ख़ुद से और अपने पार्टनर से करें, तो आप ख़ुद जान जाएंगे कि आप सेक्सुअली कितने फिट हैं.
व्यस्त ज़िंदगी में भी अगर सेक्स आपकी प्राथमिकताओं में से बाहर हो गया है, तो सचेत हो जाइए. शोधों में भी यह बात कई बार साबित हो चुकी है कि शादीशुदा लोग कुंवारे लोगों की अपेक्षा अधिक हेल्दी और लंबी ज़िंदगी जीते हैं. ऐसे में सेक्स के महत्व और सेक्सुअल फिटनेस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
सेक्सुअल फिटनेस को आप इस तरह से बांटकर देख सकते हैं-

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भावनात्मक पहलू:

अगर आपका अपने पार्टनर से भावनात्मक लगाव है, तो ज़ाहिर है सेक्स लाइफ बेहतर बनेगी, लेकिन अगर आप दोनों ही मशीनी ज़िंदगी जीने के आदी हो चले हैं, तो सेक्स की चाह भी कम होती चली जाएगी यानी आपकी सेक्सुअल फिटनेस कम
होती जाएगी.
स्पेशल टिप: ऐसे में ज़रूरी है पार्टनर के साथ समय बिताएं. प्यार भरी बातें करें, एक-दूसरे को सहयोग करें, जिसका सीधा प्रभाव आपकी सेक्स लाइफ पर पड़ेगा.

मानसिक स्थिति:

मानसिक तनाव, काम का बोझ और घरेलू ज़िम्मेदारियां भी आपको सेक्स के प्रति उदासीन बना देती हैं. बेहतर होगा कि अपने काम का तनाव बेडरूम में न ले जाएं. आप मिल-जुलकर हर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं, इसलिए अपने रिश्ते और सेक्स लाइफ पर इन रोज़मर्रा की बातों का असर न पड़ने दें.
स्पेशल टिप: पुरुषों की 90% सेक्स समस्या, जैसे- शीघ्रपतन आदि मानसिक अवस्था से ज़्यादा जुड़ी होती है, बजाय शारीरिक
समस्या के.
ठीक इसी तरह महिलाओं में योनि में सूखापन, दर्दयुक्त सेक्स आदि भी सेक्स के प्रति उदासीनता की वजह से हो सकता है.

शारीरिक पहलू:

सेक्सुअल फिटनेस बहुत हद तक आपकी शारीरिक फिटनेस से भी जुड़ी होती है. अगर आपको कोई सेक्सुअल या शारीरिक समस्या है, तो काउंसलर या एक्सपर्ट की मदद लेने से परहेज़ न करें.
स्पेशल टिप: योग व एक्सरसाइज़ को भी अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं. साथ में जॉगिंग या योगा क्लासेस जॉइन करें, इससे आप दोनों में नज़दीकियां बढ़ेंगी, जिसका सकारात्मक असर आपकी सेक्सुअल फिटनेस पर पड़ेगा.

नकारात्मक सोच से बचें

मन में बैठी भ्रांतियों व ग़लतफ़हमियों के कारण अपनी सेक्सुअल फिटनेस कम न होने दें-
अधिकतर लोगों को लगता है कि फैंटसाइज़ करना, मास्टरबेट करना या किसी की तरफ़ आकर्षण महसूस करना ग़लत है. जबकि ये तमाम चीज़ें आपकी सेक्सुअल फिटनेस का अहम् हिस्सा हैं और आपकी फिटनेस को दर्शाती हैं.

सामाजिक व पारिवारिक पहलू

जहां तक महिलाओं की बात है, तो बचपन से ही पालन-पोषण अलग ढंग से होने के कारण या अन्य कारणों से भी वो सेक्स को लेकर उतनी उत्साहित नहीं रहतीं. उन्हें लगता है कि सेक्स के बारे में बात करना ग़लत है या चाहत होने पर भी सेक्स के लिए पहल न करना ही सही है, क्योंकि स्त्रियों को शर्मीला होना चाहिए और यही शर्मीलापन उनके संस्कार व चरित्र की सही व्याख्या करेगा. तमाम ऐसी बातें महिलाओं को सेक्सुअली अनफिट बनाती हैं और वो अपने पार्टनर को ठीक से सहयोग नहीं करतीं.
इसके अलावा वो अपनी बॉडी को लेकर भी काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं, उन्हें लगता है कि उनका फिगर या उनकी शारीरिक
ख़ूबसूरती उनके पार्टनर को आकर्षित करने के लिए नाकाफ़ी है.
स्पेशल टिप: इस तरह की नकारात्मक सोच न रखें. फिज़िकल फिटनेस पर ध्यान ज़रूर दें, लेकिन मानसिक रूप से भी पॉज़ीटिव बनी रहें. आपका सहयोग और आपका प्यार आपकी शारीरिक ख़ूबसूरती से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है रिश्ते व सेक्स लाइफ को हेल्दी बनाए रखने के लिए.

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क्या करें?

– फोरप्ले ज़रूर करें. अच्छे सेक्स के लिए अच्छा फोरप्ले बहुत ज़रूरी है.
– इसी तरह से अच्छे सेक्स के लिए रोमांस होना भी बहुत ज़रूरी है, इसलिए व्यस्त दिनचर्या से रोमांटिक पलों को ज़रूर चुराएं.
– खान-पान हेल्दी हो. फिज़िकल फिटनेस आपको सेक्सुअली भी फिट रखेगी.
– सेक्स बूस्टर फूड को अपने डायट का हिस्सा बनाएं, जैसे- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फ्लैक्स सीड(अलसी), सोयाबींस, सनफ्लावर सीड्स, सी फूड, नट्स, ताज़ा फल, ख़ासकर विटामिन सी युक्त आदि. साथ ही एक्सरसाइज़ भी करें.
– जंक फूड, अल्कोहल का सेवन कम करें.
– तनाव से दूर रहें.
– अगर कोई समस्या हो, तो काउंसलर व एक्सपर्ट से सलाह लें.

– योगिनी भारद्वाज

 

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