sex myths

सेक्स प्यार का ही एक स्वरूप है और आपके रिश्ते को जोड़े रखनेवाली मज़बूत कड़ी व नींव भी है. यदि यह नींव किन्हीं कारणों से कमज़ोर पड़ गई, तो इसका सीधा असर आपके रिश्ते पर ही पड़ेगा. सेक्स को लेकर आज भी बहुत सी भ्रांतियां व डर हैं हमारे समाज में, जो आपके रिश्ते पर नकारात्मक असर डालते हैं. क्या हैं ये मिथ्स और क्या है सच्चाई यह जानना ज़रूरी है, ताकि आपका रिश्ता बना रहे व मज़बूती से टिका भी रहे.

रोज़ाना सेक्स नहीं करना चाहिए

यह मात्र ग़लतफ़हमी है. आप दोनों अगर रोज़ाना सेक्स करने की इच्छा रखते हो, तो ख़ुद को रोके रखने में समझदारी नहीं. पति का मन है, लेकिन पत्नी के मन में यह बात घर कर गई है कि यह रोज़ करनेवाली क्रिया नहीं है. ऐसे में पति का नाराज़ होना जायज़ है. बेहतर होगा कि इस बात को मन से निकाल दें और अपनी सेक्स लाइफ को क्रिएटिव बनाने की तरफ़ ध्यान दें.

दिन में बस एक बार ही सेक्स करना चाहिए

यह दूसरी सबसे बड़ी भ्रांति है. भूल जाइए कि आपके दोस्त व रिश्तेदार क्या कहते हैं, क्योंकि ऐसा कोई फिक्स नंबर नहीं है और न ही कोई मैजिक नंबर है, जो आपको पता चल जाए और आप उसको फॉलो करें. सेक्स हमेशा सहज और स्वाभाविक होना चाहिए. कपल जब भी एक-दूसरे के लिए यह महसूस करें, उन्हें सेक्स करना चाहिए और यदि दोनों में से एक का भी मन न हो, तो इंतज़ार करना ही बेहतर होगा, क्योंकि यह किसी एक को ख़ुश व संतुष्ट करने की क्रिया नहीं, बल्कि आपके रिश्ते को और भी ख़ूबसूरत बनाने की क्रिया है, तो यह जितना सहज होगा, उतना
बेहतर होगा.

सेक्स के लिए नियम नहीं बनाना चाहिए

जी नहीं, आप इसका टाइम टेबल ज़रूर बना सकते हो और यह आपको फन का एक्सपीरियंस देगा. यह सच है कि सेक्स सहज होना चाहिए, लेकिन याद करें रिश्ते के शुरुआती दिन, जब आप बन-ठनकर, कैंडल्स जलाकर, सेक्सी ड्रेस पहनकर मूड ऑन करते थे. तो क्यों न अपने कैलेंडर पर नए तरी़के से काम करें और सेक्स के लिए भी टाइम टेबल बनाकर रिश्ते में नयापन व ताज़गी लाएं.

सभी पुरुष रोज़ सेक्स करने की चाह रखते हैं

अधिकांश महिलाएं पुरुषों के बारे में यही राय रखती हैं. उन्हें लगता है पुरुष हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहते हैं और यदि उन्हें ख़ुश न रखा गया, तो वो रिश्ते से बाहर सेक्स व प्यार ढूंढ़ने लगते हैं. जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं. पुरुष ही नहीं, बहुत सी महिलाएं भी हैं, जिनके सेक्स की चाहत अपेक्षाकृत अधिक होती है. यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उसकी सेक्स की इच्छा कब और कितनी होती है.

महिलाएं सेक्स को एंजॉय नहीं करतीं

यह भी बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है और इसका शिकार भी सबसे ज़्यादा महिलाएं ही हैं. महिलाओं को ख़ुद लगता है कि सेक्स स़िर्फ पुरुषों को ख़ुश करने के लिए होता है. ऐसे में वो सेक्स में पहल करने से भी कतराती हैं और सेक्स की इच्छा या अनिच्छा होने पर व्यक्त भी नहीं कर पातीं. वो अपने पार्टनर के मन व मूड के अनुसार सेक्स करती हैं. लेकिन इस तरह का सेक्स मशीनी प्रक्रिया से अधिक कुछ नहीं होगा. सेक्स भावना है, कोई रूटीन काम नहीं, जिसे बस निपटाना है. इस भावना को जब तक महसूस नहीं करेंगे, तब तक पार्टनर से कैसे जुड़ाव महसूस करेंगे?

उम्र बढ़ने पर सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, इसलिए ख़ुद पर कंट्रोल रखना चाहिए

अधिकांश भारतीयों में यह सोच होती है कि बच्चे बड़े हो रहे हैं, तो ऐसे में यह सब शोभा नहीं देता. सेक्स से उम्र या बच्चों का कोई लेना-देना नहीं होता. आप जब तक हेल्दी हैं और जब तक आपकी इच्छा है आप सेक्स कर सकते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है.

मेरे पार्टनर को पता होना चाहिए कि मुझे सेक्स के दौरान क्या पसंद है, क्या नहीं

सबसे पहले तो यह जान लें कि आपका पार्टनर माइंड रीडर नहीं है. जब तक आप दोनों कम्यूनिकेट नहीं करेंगे, तब तक किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. आप दोनों बस अंदाज़ा ही लगाते रह जाओगे. जिस तरह रिश्ते की मज़बूती के लिए कम्यूनिकेशन ज़रूरी है, उसी तरह अच्छी सेक्स लाइफ के लिए भी कम्यूनिकेशन बेहद ज़रूरी है. आप दोनों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए. अपनी फैंटसीज़, अपने प्लेज़र पॉइंट्स आदि बताने चाहिए, ताकि सेक्स आप दोनों के लिए संतोषजनक हो.

शादीशुदा कपल पारंपरिक सेक्स ही करते हैं

अधिकांश कपल्स की सेक्स को लेकर कई तरह की फैंटसीज़ होती हैं. उनकी कल्पना का सेक्स अलग ही होता है, जबकि हक़ीक़त इससे कोसों दूर होती है, क्योंकि सेक्स को लेकर आपके मन में बहुत से मिथ्स होते हैं. आपको लगता है कि शादी के बाद सेक्स में ज़्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते हैं. जबकि आप अपनी फैंटसीज़ एक-दूसरे के साथ डिसकस कर सकते हैं और जितना संभव हो, उन्हें पूरा करने का प्रयास भी कर सकते हैं. चाहे सेक्स पोज़ीशन की बात हो या नई जगह पर सेक्स करना… आप सब कुछ ट्राई कर सकते हो. ज़रूरी नहीं कि आप अपनी सेक्स लाइफ को पारंपरिक सेक्स का नाम देकर बोरिंग बना दें और अपने रिश्ते को कमज़ोर करने की नींव रख दें.

बढ़ती उम्र के साथ फोरप्ले और नॉटी बातें कम होती जाती हैं

यह सच नहीं है. आपकी उम्र से इन सब बातों का कोई लेना-देना नहीं होता. फोरप्ले हमेशा ही ज़रूरी होता है और नॉटी बातें आपके रोमांस को बरक़रार रखती हैं. बेहतर सेक्स व रिलेशनशिप के लिए दोनों का ही नॉटी होना बेहद ज़रूरी है, चाहे आपकी उम्र कितनी भी हो.

किसी यंग के साथ सेक्स का अनुभव बेहतर होता है

यह भी बहुत बड़ी भ्रांति है. सेक्स अनुभव व उम्र के साथ बेहतर होता जाता है और आप दोनों ही समय के साथ एक-दूसरे को बेहतर समझने लगते हैं. ऐसे में उम्र का सेक्स के अनुभव व बेहतर सेक्स से कोई लेना-देना नहीं होता. यह कतई ज़रूरी नहीं कि यंग पार्टनर के साथ सेक्स का अनुभव ज़्यादा अच्छा रहेगा. यहां मामला उल्टा भी हो सकता है.

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पत्नी को ऑर्गैज़्म न मिला, तो वो पति को कमज़ोर समझेगी

यह सोच पुरुष व महिलाएं दोनों में होती है. यदि सही तरी़के से फोरप्ले किया जाए, तो दोनों को ही एक साथ ऑर्गैज़्म मिल सकता है. लेकिन यदि इस क्रिया में कभी ज़्यादा एक्साइटमेंट के चलते या कभी अन्य कारणों से कोई एक जल्दी स्खलित हो जाए, तो इसका यह कतई अर्थ नहीं कि वो कमज़ोर है. ऐसा होना स्वाभाविक है. समय के साथ-साथ जब आप दोनों की कंपैटिबिलिटी व समझ बढ़ेगी, तो सेक्स को लेकर सहजता भी बढ़ेगी और आपका अनुभव बेहतर होता जाएगा. कई बार तो पत्नियां भी मात्र इस बात का प्रदर्शन करती हैं कि उन्हें ऑर्गैज़्म मिला है, पर बेहतर होगा सेक्स को लेकर खुलकर बात करें. इससे आपका रिश्ता भी बेहतर होगा, वरना कुंठाएं जन्म लेंगी.

सेक्स से कमज़ोरी आती है

यह सोच आज भी है. लंबे समय तक एथलीट्स को भी यही सलाह दी जाती थी कि अपनी परफॉर्मेंस से पहले की रात वो सेक्स न करें. इस सोच के पीछे की धारणा यह होती थी कि सेक्स न करने से आपकी ऊर्जा बचती है और वो एग्रेशन आप अपनी परफॉर्मेंस में देते हैं, जिससे आपका प्रदर्शन बेहतर होता है. पर अब कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि इसमें सच्चाई कम ही है. बेहतर सेक्स आपके प्रदर्शन को बेहतर करता है, न कि कमज़ोर.

पोर्न फिल्म्स से आप अपनी सेक्स लाइफ में नई ताज़गी ला सकते हैं

बहुत से लोग यह सोचते हैं कि इस तरह की फिल्म्स में जो दिखाया जाता है वह सच में संभव है, जबकि यह मात्र सेक्स को ग़लत संदर्भ में ग़लत तरी़के से दिखाती हैं. यह स़िर्फ पैसे कमाने की इंडस्ट्री है, इसे आपकी सेक्स लाइफ या आपको एजुकेट करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती. ये आपको वही दिखाती हैं, जो आपको अधिक उत्तेजक लगे, लेकिन यथार्थ में वह संभव नहीं हो सकता. कई लोग जब अपने पार्टनर पर पोर्न फिल्म देखकर उसी तरह परफॉर्म करने का दबाव बनाते हैं, तो रिश्तों में दूरियां व दरार आने लगती है. बेहतर सेक्स के लिए पार्टनर की भावनाओं का ख़्याल रखना सबसे ज़रूरी है. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि पोर्न देखने की लत से आपका सेक्स जीवन पूरी तरह से ख़त्म होने की कगार पर आ सकता है, क्योंकि उसके बाद आपको रियल सेक्स बोरिंग लगने लगता है और आपको वो नकली दुनिया ज़्यादा हसीन व रंगीन नज़र आती है. बेहतर होगा कि इन फिल्मों की लत से बचें.

अल्कोहल सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर करता है

शुरुआती दौर में आपको ऐसा लगता है, लेकिन अल्कोहल आगे चलकर आपकी परफॉर्मेंस व सेहत दोनों को ख़राब ही करता है. साथ ही यह रिश्तों पर नकारात्मक असर डालता है. इसलिए कभी-कभार इसका सेवन आपका मूड बेहतर कर सकता है, पर इसकी भी लत अच्छी नहीं और इसे लेकर यह भ्रम ख़तरनाक है कि आपकी सेक्सुअल परफॉर्मेंस इससे बेहतर होगी.

सेक्स को लेकर क्यों हैं इतने मिथ्स?


– हमारे समाज में सेक्स पर आज भी अधिक कम्यूनिकेशन या बातचीत नहीं की जाती. इस वजह से बहुत से सवाल मन में ही रह जाते हैं.
– ग़लत जगह से जानकारी हासिल करना भी मिथ्स को बढ़ाता है.
– दोस्तों व सहेलियों की सेक्स को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने की आदत मन में कई ग़लत धारणाएं बना देती हैं.
– घर-परिवार में भी सेक्स की बातें करने की मनाही होती है.
– लड़कियों को हमेशा ही सेक्स की इच्छा को दबाकर रखने की सीख दी जाती है.
– उनकी परवरिश के दौरान उन्हें यही सिखाया जाता है कि सेक्स बुरी चीज़ है, जिसे ख़राब चरित्र के लोग ही तवज्जो देते हैं.
– बेटियों को यही बताया जाता है कि पति को ख़ुश करना ही उनके लिए सेक्स का उद्देश्य होना चाहिए.
– पर्सनल व सेक्सुअल हाइजीन व सेफ सेक्स की बातों को बताना ज़रूरी नहीं समझा जाता.
– रिलेशनशिप एक्सपर्ट या सेक्स थेरेपिस्ट के पास जाने की सलाह कभी नहीं दी जाती.
– रिश्ते की मज़बूती के लिए किस तरह से सेक्स को लेकर मैच्योरिटी होनी चाहिए इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता और न ही इसे महत्वपूर्ण माना जाता.
– लड़कों की परवरिश काफ़ी लापरवाही से की जाती है, जिसमें उनको यह भ्रम हो जाता है कि महिलाएं मात्र उनकी संतुष्टि का ज़रिया हैं.
– उन्हें महिलाओं की सेक्सुअल ज़रूरतों का ध्यान देने की हिदायतें कभी नहीं दी जातीं.
– सेक्स और भावनाओं के समन्वय को समझाया नहीं जाता.

कैसे दूर हों ये मिथ्स?

– ज़रूरी है सही समय पर सेक्स की सही शिक्षा.
– लिंग के आधार पर सेक्स की ज़रूरतों व ज़िम्मेदारियों को न बांटा जाए.
– सेक्स को लेकर बात करने में बच्चे सहज हों, पैरेंट्स को यह बच्चों को समझाना व ख़ुद भी समझना चाहिए.
– सेक्स को बुरा काम बताने की ग़लती न करें.
– यह एक सहज व प्राकृतिक क्रिया है, यह समझें व समझाएं.
– सेक्स को लेकर अपनी सोच में मैच्योरिटी लाएं. ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह लेने से न हिचकें.
– पैरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे ग़लत जगहों से जानकारी न लें.
– अलग-अलग तरीक़ों से उन्हें एजुकेट करें.
– रिश्ते की मज़बूती के लिए सेक्स व सेक्स को लेकर सही सोच के महत्व को समझाएं.
– कोई सेक्सुअल समस्या हो, तो उसे शेयर करने में न तो कमज़ोरी होगी, न ही बुराई.इसे छिपाना सेहत व रिश्ते के लिए घातक हो सकता है.

– विजयलक्ष्मी

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कई बार ऐसा होता है कि एक पार्टनर सेक्स (Sex) चाहता है, लेकिन दूसरे की इसमें कोई दिलचस्पी नहीं होती. ऐसे में कई बार हफ़्तों व महीनों तक कपल्स सेक्स लाइफ़ (Sex Life) को एन्जॉय नहीं कर पाते. अगर आप भी इस तरह की समस्या से गुज़र रहे हैं, तो कामेच्छा में कमी के सही कारण और उससे जुड़ी ग़लतफ़हमियों की जानकारी रखना आपके लिए आवश्यक है. जानिए कामेच्छा (Libido) में कमी से जुड़े कुछ मिथकों (Myths) की सच्चाई.

Sex Myths

 

 

मिथक 1- बहुत ज़्यादा तनाव से सेक्सुअल डिज़ायर (कामेच्छा) में कमी आती है.

सच्चाई- यह बात पूरी तरह सच नहीं है. वैसे इस कॉम्पिटीशन के युग में स्ट्रेस से बचना मुश्किल है. काम का लोड, बॉस की झिड़की, प्रेजेंटेशन का प्रेशर, उस पर लंबे वर्किंग आवर्स तनाव को काफ़ी बढ़ा देते हैं. ऐसे में तनाव को सेक्सुअल डिज़ायर में कमी का कारण मान लिया जाता है. पार्टनर को ग़लतफ़हमी हो जाती है कि ये पहले की तरह मुझसे प्यार नहीं करते और मुझमें इनकी रुचि ही नहीं रह गई है. इसी बात पर कपल्स के बीच झगड़े शुरू हो जाते हैं. इन सब बातों का परिणाम यह होता है कि पुरुष अपनी सेक्सुअल पावर पर ही शक़ करने लगता है और स्थिति बिगड़ जाती है. वास्तव में वैवाहिक जीवन में सेक्स की तीव्र इच्छा में कमी के पड़ाव आते-जाते रहते हैं और इसके लिए तनाव को पूरी तरह दोषी नहीं माना जा सकता. अलबत्ता तनाव के अन्य कारण भी हो सकते हैं. व्यस्त लाइफ़स्टाइल और ख़ानपान की ग़लत आदतें भी सेक्स लाइफ़ पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं. कम्युनिकेशन गैप भी दिलों के बीच दूरियां बढ़ा देती हैं. इसलिए अपने पार्टनर से बात करें, रोज़ कम से कम उन बातों को शेयर करें जो आपको परेशान कर रही हैं. इससे तनाव काफ़ी कम हो जाएगा और आप रिलैेक्स महसूस करेंगे, फिर भी यदि लगे कि स्ट्रेस सेक्सुअल लाइफ़ पर हावी हो रहा है तो काउंसलर या सेक्स थेरेपिस्ट की सलाह लें.

मिथक 2- महिलाओं में कामेच्छा की कमी हार्मोेन्स के कारण होती है.

सच्चाई- अगर आप भी यही सोचते हैं कि महिलाओं के मूड और सेक्स की इच्छा के लिए हार्मोन्स ही ज़िम्मेदार हैं, तो यह ग़लत है. आपसी झगड़े, मनमुटाव और कम्युनिकेशन गैप भी इसका कारण हो सकता है. कामेच्छा में कमी का सबसे महत्वपूर्ण कारण है, नींद की कमी. हर व्यक्ति को कम से कम 6 से 7 घंटे सोना चाहिए. इसके अलावा हमारा मानसिक स्वास्थ्य, ग़लत ख़ान-पान और थकान भी इसके लिए उत्तरदायी हैं. महिलाओं में सेक्स की इच्छा इस बात पर निर्भर करती है कि उनके अपने पार्टनर के साथ कैसे संबंध हैं? जो महिलाएं हीनभावना या नकारात्मक सोच की शिकार होती हैं, उनकी कामेच्छा में कमी पाई गई है. अतः यह पुरुष पार्टनर की ज़िम्मेदारी बनती है कि उनके मन से यह नकारात्मक सोच निकाल फेंकें और उनका आत्मविश्‍वास बढ़ाएं. इसके लिए उन्हें आपस में बैठकर संवाद का पुल बांधना होगा ताकि उनके वैवाहिक संबंधों की गाड़ी आराम से आगे बढ़ सके.

मिथक 3- दवाइयों के प्रयोग से कामेच्छा जगाई जा सकती है.

सच्चाई- दवाइयों को हमेशा अंतिम विकल्प के रूप में रखना चाहिए, क्योंकि कई बार इनका उल्टा असर भी होता है. अतः सबसे पहले समस्या की जड़ तक जाएं. कारण ढूंढ़ें कि समस्या शारीरिक है, मानसिक है, शारीरिक बदलाव के कारण है या अन्य कोई वजह है. कई बार समस्या समझने से ही हल हो जाती है. आजकल की महिलाओं को पर्सनल और  प्रोफेशनल लेवल पर ख़ुद को साबित करना पड़ता है. ऑफ़िस में बॉस और काम का टेंशन, घर में बच्चों को संभालना व गृहस्थी की ज़िम्मेदारी, इन सबको बैलेंस करते-करते वे इतना थक जाती हैं कि सेक्स की इच्छा कहीं दबकर रह जाती है. पार्टनर यदि थोड़ी-बहुत ज़िम्मेदारी उठाए और ढेर सारा प्यार दे, तो समस्या आसानी से सुलझ सकती है. मगर हां, इसके लिए धैर्य ज़रूरी है.

मिथक 4- सेक्स एक अलग ही पावर है. शरीर में होनेवाले बदलावों से इसका कोई संबंध नहीं होता.

सच्चाई- यह धारणा बिल्कुल ग़लत है. वैसे भी पुरुष सेक्स को बहुत महत्व देते हैं. यदि कामेच्छा में कमी आती है तो वे परेशान हो जाते हैं और मूड बनाने के लिए कई बार सिगरेट व शराब का सहारा लेते हैं. दरअसल, इसका सेवन करने से शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिसका असर कामजीवन पर पड़ता है. सिगरेट में अनेक प्रकार के विषैले पदार्थ होते हैं, जो नपुंसकता पैदा करते हैं. इसी तरह शराब के सेवन से भी सेक्सुअल डिज़ायर में कमी आती है, लेकिन अक्सर इन फैक्ट्स को नज़रअंदाज़ किया जाता है. स्वस्थ कामजीवन के लिए बेहतर होगा कि सिगरेट और शराब का सेवन न किया जाए.

मिथक 5- भावनात्मक अंतरंगता (जुड़ाव) हाई सेक्सुअल लाइफ़ के बराबर होती है.

सच्चाई- भावनात्मक अंतरंगता शेयर करनेवाले कपल्स अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन कई बार इमोशनल इंटीमेसी इतनी बढ़ जाती है कि न तो उन्हें सेक्स की ज़रूरत महसूस होती है और न ही उनकी एक-दूसरे के प्रति पहले की तरह कामवासना जागती है. कामेच्छा की कमी की वजह से वे सेक्स का आनंद ठीक तरह से नहीं उठा पाते. यह बस एक रूटीन बनकर रह जाता है. ऐसा न हो इसके लिए दोनों पार्टनर्स को एक-दूसरे की पसंद का ख़्याल रखना होगा, कुछ ऐसा करें कि पार्टनर सेक्सी और रोमांटिक फील करे. बेडरूम का माहौल रूमानी बनाएं, धीमा-धीमा म्यूज़िक, कैंडल्स की हल्की-सी रोशनी और पार्टनर का सेक्सी लिबास एक-दूसरे के क़रीब आने के लिए मज़बूर कर देगा. कुछ दिनों के लिए घर से दूर किसी रोमांटिक जगह पर एक साथ बिताए पल भी जादू बिखेर देंगे.

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Sex Myths in Hindi
मिथक 6- एक पार्टनर सेक्स की इच्छा रखता है मगर दूसरा नहीं, तो दूसरे को अपना प्यार किन्हीं अन्य तरीक़ों से दिखाना चाहिए.

सच्चाई- यह सामान्य-सी समस्या है. पुरुष अक्सर अन्य तरी़के , जैसे- ग़िफ़्ट देकर या मीठी-मीठी बातें कर अपने पार्टनर का दिल बहलाने की कोशिश करते हैं. मगर वे भूल जाते हैं कि स्त्री ग़िफ़्ट से ़ज़्यादा प्यार करने से, बांहों में लेने से और किस करने से ख़ुश होती है. वह पार्टनर का स्पर्श चाहती है, क्योंकि यही स्पर्श उसे प्यार का एहसास कराता है. ध्यान रहे, अन्य किसी भी तरी़के से दिखाया गया प्यार शारीरिक समीपता का पर्याय हो ही नहीं सकता. इसलिए यदि कामेच्छा में कमी या सेक्स संबंधी कोई समस्या हो तो उसे छुपाने की बजाय पार्टनर से खुलकर कहें. इससे ग़लफ़हमियां नहीं होंगी और संबंध मधुर बने रहेंगे. अगर समस्या गहरी हो तो बेझिझक डॉक्टर की सलाह लें.

मिथक 7- एक पार्टनर की कामेच्छा में कमी से दूसरे पार्टनर का उसके प्रति प्यार कम होता जाता है.

सच्चाई- यह केवल वहम् है. ऐसा कुछ भी नहीं होता. समस्या से निबटने के लिए सबसे पहले तो यह पता लगाएं कि सेक्स की इच्छा में कमी के क्या कारण हैं? महिलाएं शादी के कुछ सालों बाद या बच्चे होने के बाद अक्सर मोटी हो जाती हैं और उनका आत्मविश्‍वास कम हो जाता है. उन्हें लगता है कि अब उनकी बॉडी सेक्सी नहीं रही, उनके पार्टनर क्या सोचेंगे? यही नकारात्मक सोच उनकी सेक्स में दिलचस्पी कम कर देती है. कई बार पुरुष भी मोटापे के शिकार हो जाते हैं. इससे उन्हें संबंध बनाने में परेशानी होती है. अक्सर पुरुष पेनिस के साइज़ को लेकर चिंतित रहते हैं. उन्हें लगता है कि वो पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाएंगे, इससे भी सेक्स में रुचि कम हो जाती है. हालांकि मोटापे को डायट और नियमित व्यायाम के ज़रिए कंट्रोल में लाया जा सकता है, जबकि नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए साइको सेक्सुअलथेरेपिस्ट या काउंसलर की सलाह ली जा सकती है.

मिथक 8 – रिलेशनशिप में सेक्स ही प्रमुख है. इसी पर संबंधों का टिकना निर्भर होता है.

सच्चाई- शादीशुदा कपल्स अक्सर ऐसा सोचते हैं और उसी पर ध्यान केंद्रित करते हैं. एक पार्टनर के सेक्स से इंकार करने पर दूसरा पार्टनर नाराज़ हो जाता है, जिससे दोनों में दूरियां आ जाती हैं. हालांकि संबंधों को निभाने में सेक्स की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता परंतु इसके आगे भी कई फैक्ट्स होते हैं जिन पर रिलेशनशिप टिकी होती है, जिनमें भावनात्मक जुड़ाव (इमोशनल क्लोज़नेस) सबसे महत्वपूर्ण है. इसके अलावा एक-दूसरे की अन्य ज़रूरतों का ख़्याल रखना, एक दूसरे के प्रति प्यार और विश्‍वास संबंधों को मधुर बनाते हैं.

मिथक 9 – ड्रिंक करके सेक्स करने से सेक्स का मज़ा दुगुना हो जाता है.

सच्चाई- ड्रिंक करने (शराब पीने) के बाद सेक्स करने से सेक्स का मज़ा बढ़ जाता है, ये बात भी ग़लत है. दरअसल, ड्रिंक से सेक्स का कोई संबंध नहीं होता, बल्कि कई बार शराब का सेवन सेक्स के अनुभव से आपको वंचित कर देता है, तो कई बार शराब पीने से सेक्स का सारा मज़ा किरकिरा हो जाता है.

मिथक 10 – महिलाएं फैंटेसी सेक्स में शामिल नहीं होतीं.

सच्चाई- अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप ग़लत हैं. सर्वे के अनुसार, पुरुष जिस तरह सेक्स क्रिया के दौरान फैंटेसी की दुनिया में खो जाते हैं, उसी तरह महिलाएं भी फैंटेसी की दुनिया में जाकर सेक्स क्रिया को एंजॉय करती हैं. हां, ये कहा जा सकता है कि इस मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है.

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हमारे देश में सेक्स को लेकर आज भी संकोच, ग़लतफ़हमियों, भ्रांतियों की भरमार है. कई बार सेक्स से जुड़े मिथ्स के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में दूरियां तक आ जाती हैं. साथ ही यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं और कई बार तलाक़ तक की नौबत आ जाती है. इसी विषय पर हमने सेक्सोलॉजिस्ट व मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद से बात की.

Sex Myths

–  अक्सर लोग सेक्स से जुड़ी फैंटेसी व कल्पनाओं पर अधिक ध्यान देते हैं, जबकि ज़रूरत है इससे जुड़े हेल्दी व साइंटिफिक पहलुओं पर ग़ौर करने की.

– अधिकतर पुरुष पढ़ी-देखी हुई बातें, किताबें, फिल्में आदि में दिखाई गई अतिशयोक्ति को देख-सुन, उसी को सच समझने लगते हैं.

– उन्हें यह समझना होगा कि जो कुछ भी दिखाया जाता है, उसमें सच्चाई कम और सनसनी पैदा करनेवाली बातें व तथ्य अधिक होते हैं.

– ऐसी उपलब्ध सामग्री के कारण ही पार्टनर के मन में ग़लत धारणाएं विकसित होने लगती हैं और वे दिखाई गई चीज़ों से अपनी ज़िंदगी व अनुभव की तुलना करने लगते हैं.

– कपल्स साइज़ (ब्रेस्ट/पेनिस), सेक्स की अवधि(सेक्सुअल रिलेशन) आदि को लेकर कई तरह के मिथ्स को सच मानने लगते हैं व ग़लत अपेक्षाओं के शिकार हो जाते हैं.

– अक्सर पुरुष यह सोचते हैं कि पेनिस का साइज़ बड़ा होने से वे अपने पार्टनर को अधिक संतुष्ट कर सकते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यहां पर कपल्स का मानसिक व शारीरिक जुड़ाव अधिक महत्व रखता है.

– इसलिए सच्चाई को जानना या समझना ज़रूरी है. सेक्स में साइज़ से अधिक आपसी नज़दीकियां, प्यार, इंटीमेट पल शेयर करना अधिक ज़रूरी है, जो प्यार के हर पल को ख़ूबसूरत व यादगार बनाने में मददगार होता है.

– लेकिन सेक्स से जुड़े तमाम मिथ्स के कारण लोग ग़लत बातों में दिलचस्पी लेने लग जाते हैं.

– दुनियाभर में सेक्स से जुड़ा बिज़नेस, जैसे- ब्रेस्ट साइज़ बढ़ाने के लिए मेडिसिन, पोर्न किताबें-फिल्में, चीज़ें, टॉयज़ आदि का मल्टी मिलियन डॉलर का कारोबार फैला हुआ है. इसी के चलते कंपनियां बहुत-सी ऐसी बातों का प्रचार-प्रसार भी करती हैं, जिनका हक़ीक़त से कोई लेना-देना नहीं रहता.

– लेकिन इन्हीं सबसे प्रभावित हो पुरुष अपने पार्टनर से ग़लत अपेक्षाएं व व्यवहार करने लगते हैं, ख़ासतौर से पति के लिए पत्नी उनकी इच्छाओं को पूरी करनेवाली ऑब्जेक्ट बनकर रह जाती है.

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– पत्नी का पति को ख़ुश करना व संतुष्ट करना परम कर्त्तव्य बन जाता है और जब वह ऐसा नहीं कर पाती है, तब वह पति के रिजेक्शन का शिकार हो जाती है.

– भ्रांतियां ग़लत अपेक्षाओं को जन्म देती हैं… ग़लत अपेक्षाएं असफलताएं पैदा करती हैं… असफलताओं से निराशा पनपने लगती है… और निराशा दुख का नेतृत्व करने लगती हैं… तब अंत में डिप्रेशन… तलाक़ तक स्थिति पहुंच जाती है. इसलिए इन सबसे बचने के लिए ज़रूरी है कि हम मिथ्स की बजाय पार्टनर पर विश्‍वास करें.

– पुरुषों के बीच यह मिथ भी ख़ूब मशहूर है कि कंडोम के इस्तेमाल से सेक्स एंजॉय नहीं कर पाते हैं. जबकि अक्सर सही ढंग से कंडोम का इस्तेमाल न करने की वजह ऐसा होता है. इसलिए इस तरह की ग़लतफहमियों से परे होकर अपने वैवाहिक जीवन को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करें.

– मन में कोई भी भ्रांति, ग़लतफ़हमी हो, तो उस पर खुलकर बात करें. सवालों को मन में ना रखें, पार्टनर से बातचीत करें, क्योंकि मिथ पर विश्‍वास कर हम ख़ुद ही दुख क्रिएट करते हैं. तो क्यों न पार्टनर पर विश्‍वास कर सुख की दुनिया बसाई जाए.

– कई बार तो ऐसा भी होता है कि पति फर्स्ट नाइट पर पति अपनी पत्नी से खुलकर वर्जिनिटी के बारे में बात नहीं कर पाते और जीवनभर मन ही मन आशंकित रहते हैं.

– ऐसे में यह ज़रूरी है कि आप पार्टनर से खुलकर बात करें. सेक्स को लेकर कोई भी दुविधा या परेशानी हो, तो पार्टनर से कहें. स्थिति अधिक गंभीर हो जाए, तो सेक्सोजॉलिस्ट या फिर मैरिज काउंसलर की मदद लेने से भी न हिचकें.

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– आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते पुरुष के साथ-साथ महिलाएं भी सेक्स के बारे में न केवल खुलकर बात करती हैं, बल्कि अपनी पसंद-नापसंद भी पार्टनर को बताती हैं. माना इससे कपल्स की सेक्स लाइफ अच्छी और एंजॉयमेंट से भरपूर हो जाती है, लेकिन यदि पुरुष पार्टनर संकीर्ण विचारों का हो या फिर इन बातों को ग़लत ढंग से ले, तो ऐसे में रिश्तों में तनाव आते देर नहीं लगती. इस तरह की परिस्थितियों से बचने के लिए बेहतर होगा कि पत्नियां पति के स्वभाव व सोच को अच्छी तरह से समझें. फिर धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार पहल करें. कोई भी बदलाव तुरंत नहीं आता, उसके लिए धैर्य, अपनापन व सूझबूझ की बेहद ज़रूरत होती है.

– पुरुषों के बीच सेक्स को लेकर और भी ऐसी कई भ्रांतियां हैं, जिनके कारण वैवाहिक जीवन प्रभावित होने लगता है, जैसे-

– कई पुरुषों का मानना है कि जिस लड़की के पेट का निचला हिस्सा निकला हुआ होता है, वो वर्जिन नहीं होती…

– सेक्स से लड़कियों के कूल्हे बड़े हो जाते हैं…

– पहली बार सेक्सुअल रिलेशन होने पर ब्लड निकलना ज़रूरी है, ये लड़की के वर्जिन होने का प्रमाण है.

– जिन महिलाओं ने शादी के पहले सेक्स किया होता है, उनके स्तन ढीले पड़ जाते हैं…

– जो महिला मास्टरबेशन करती है, वो मां नहीं बन सकती…

ऐसी तमाम बातें हर पल पुरुषों को अपने पार्टनर को लेकर सशंकित करती रहती हैैं. इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि कपल्स हर पहलू पर खुलकर बात करें. रिश्ते में पारदर्शिता रिश्तों को मज़बूत बनाने का काम करती हैं. यह न भूलें कि आप दोनों का ज़िंदगीभर का साथ है, इसलिए जो भी परेशानी, ग़लतफ़हमियां, भ्रांतियां, शंकाएं हों, पार्टनर से ज़रूर कहें. उन्हें अपनी अपेक्षाएं और इच्छाओं से भी रू-ब-रू कराएं, ताकि दोनों ख़ुशहाल सेक्सुअल लाइफ एंजॉय कर सकें. अक्सर न कहने और मन ही मन कुढ़ते रहने के कारण भी रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं. अतः ऐसा न करें.

डिफरेंट स्ट्रोक्स

– एक रिसर्च के अनुसार, जिन्हें इज़ैक्युलेशन (शीघ्रपतन) की शिकायत है, वे यदि सेक्स करने के दो घंटे पहले मास्टरबेशन (हस्तमैथुन) करें, तो यह समस्या दूर हो सकती है.

– पहली बार सेक्स कर रहे हैं, तो डरे नहीं, बल्कि खुले दिमाग़ से पार्टनर को सहयोग दें.

– एक रिसर्च के अनुसार, 14 % पुरुष हर सात मिनट में सेक्स के बारे में सोचते हैं, पर इसका यह मतलब नहीं है कि वे हमेशा सेक्स करने के लिए तैयार रहते हैं.

– ऊषा गुप्ता

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सेक्स से जुड़े मिथक किसी पहेली से कम नहीं. कोई इन्हें सच कहता है, तो कोई सरासर झूठ. ऐसे में क्या है सच और क्या है मिथक?

 

Sex Myths Busted

मिथकः सेक्स फूड खाने से सेक्स का मूड बन जाता है.

सच्चाईः ऐसी बातें महज़ क़िताबों तक सीमित होती हैं, असल ज़िंदगी में लागू नहीं होतीं. हां, ये कहा जा सकता है कि रोज़ाना या नियमित रूप से सेक्स फूड, जैसे- अनार, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, गाजर, किशमिश, लहसुन आदि का सेवन सेक्स लाइफ को हेल्दी बनाता है, मगर सेक्स फूड के सेवन के तुरंत बाद सेक्स का मूड बन जाता है, ये स़िर्फ एक भ्रम है.

मिथकः पुरुषों की तरह महिलाएं सेक्स के बारे में कभी नहीं सोचतीं.

सच्चाईः हम ये कह सकते हैं कि पुरुषों के मुक़ाबले महिलाएं सेक्स के बारे में कम सोचती हैं, मगर ये कतई नहीं कह सकते कि महिलाएं सेक्स के विषय में सोचती ही नहीं हैं. रिसर्च की मानें तो न स़िर्फ पुरुष, बल्कि महिलाएं भी सेक्स के बारे में सोचती हैं, लेकिन ऐसा उस वक़्त होता है, जब वो हार्मोनल बदलाव के दौर से गुज़रती हैं.

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मिथकः महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं.

सच्चाईः पॉर्न मूवी के नाम पर भले ही हमेशा से पुरुषों को बदनाम किया जाता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं. ये बात सर्वे से भी साबित हो चुकी है कि पुरुषों की तरह महिलाएं भी पॉर्न मूवी देखना पसंद करती हैं. हां, पुरुषों की तरह महिलाएं इस बात को स्वीकार नहीं करतीं, इसलिए लोग इस ग़लतफ़हमी में रहते हैं कि महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं.

मिथकः सेक्स के दौरान महिला पार्टनर अगर सुखद आवाज़ें न निकाले, तो इसका मतलब वो सेक्स क्रिया को एंजॉय नहीं कर रही.

 

Sex Myths Busted
सच्चाईः ये बात शत-प्रतिशत झूठ है. सेक्स के दौरान, ख़ासकर
ऑर्गेज़्म के वक़्त कुछ महिलाएं सुखद आवाज़ें निकालती हैं, मगर ये ज़रूरी नहीं कि सारी महिलाएं ऐसा ही करें. अगर वो ऐसा नहीं करतीं, तो वो सेक्स क्रिया को एंजॉय नहीं कर रही हैं, ऐसा नहीं है. विशेषज्ञों की मानें तो हर कोई अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करे, ये ज़रूरी नहीं, कई महिलाएं चुप रहकर ही सेक्स क्रिया का आनंद लेती हैं.

मिथकः सेक्स पोजीशन में बदलाव महिलाओं को प्रेग्नेंट होने से बचाता है.

सच्चाईः कई लोग इस बात को सच मानते हैं, लेकिन ये सरासर ग़लत है. प्रेग्नेंसी का संबंध स्पर्म से होता है न कि सेक्स की किसी ख़ास पोजीशन से. कोई भी महिला तभी प्रेग्नेंट होती है, जब वो पुरुष स्पर्म के संपर्क में आती है. ऐसे में सेक्स पोज़ीशन कैसी थी, कैसी नहीं, प्रेग्नेंसी के लिए ये बात मायने नहीं रखती.

मिथकः सुरक्षित सेक्स के लिए दो कॉन्डम का इस्तेमाल बेहतरीन विकल्प है.

सच्चाईः सेक्स के दौरान कॉन्डम फटने की वजह से लोग ऐसा सोचते हैं, लेकिन ये सच नहीं है. दो कॉन्डम का इस्तेमाल करने से इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कॉन्डम को क्षति नहीं पहुंचेगी. हो सकता है, दो कॉन्डम इस्तेमाल करने पर भी वो फट जाएं.

मिथकः सेक्स के बाद अगर महिला प्रेग्नेंट होती है, तो प्रेग्नेंसी के लक्षण तुरंत दिखाई देते हैं.

सच्चाईः इस बात में ज़रा भी सच्चाई नहीं है. सेक्स के तुरंत बाद तो क्या, कई बार कई महीने बीत जाने पर भी प्रेग्नेंसी के लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ मामलों में एक महीने के अंदर महिलाओं में ये लक्षण दिखने लगते हैं. विशेषज्ञों की मानें, तो ये बात महिलाओं के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है.

मिथकः सेक्स पुरुष प्रधान क्रिया है.

सच्चाईः ये सोच सरासर ग़लत है कि सेक्स पुरुष प्रधान क्रिया है. सेक्स की न स़िर्फ इच्छा, बल्कि ज़रूरत भी स्त्री-पुरुष दोनों को होती है. हां, ये बात और है कि पुरुष अपनी इच्छा ज़ाहिर कर देते हैं, मगर महिलाएं कभी संकोचवश, तो कभी शर्म के मारे सेक्स की पहल नहीं करतीं, लेकिन सेक्स में उनकी रुचि नहीं होती, ऐसा नहीं कह सकते.

मिथकः ड्रिंक करके सेक्स करने से सेक्स का मज़ा दुगुना हो जाता है.

सच्चाईः ड्रिंक करने (शराब पीने) के बाद सेक्स करने से सेक्स का मज़ा बढ़ जाता है, ये बात भी ग़लत है. दरअसल, ड्रिंक से सेक्स का कोई संबंध नहीं होता, बल्कि कई बार शराब का सेवन सेक्स के अनुभव से आपको वंचित कर देता है, तो कई बार शराब पीने से सेक्स का सारा मज़ा किरकिरा हो जाता है.

मिथकः महिलाएं फैंटेसी सेक्स में शामिल नहीं होतीं.

सच्चाईः अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप ग़लत हैं. सर्वे के अनुसार, पुरुष जिस तरह सेक्स क्रिया के दौरान फैंटेसी की दुनिया में खो जाते हैं, उसी तरह महिलाएं भी फैंटेसी की दुनिया में जाकर सेक्स क्रिया को एंजॉय करती हैं. हां, ये कहा जा सकता है कि इस मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है.

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मिथकः अच्छे फिगर वाली महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं.

सच्चाईः पुरुषों में ख़ासकर ये ग़लत धारणा होती है कि अच्छे फिगर वाली महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं, लेकिन ये ज़रूरी नहीं है. सर्वे के ज़रिए कई पुरुषों ने इस बात को साबित कर दिया है कि सेक्स क्रिया के दौरान उनका ध्यान पार्टनर के फिगर पर नहीं, बल्कि सेक्स क्रिया पर होता है.

मिथकः अगर पहली बार आप सेक्स में असफल हो जाते हैं, तो इसका मतलब आप में कमी है.

सच्चाईः ये एक ग़लत धारणा है. जिस तरह हर चीज़ की प्रैक्टिस ज़रूरी होती है, उसी तरह बेहतर सेक्स का आनंद भी कई बार प्रैक्टिस करने के बाद मिलता है. हो सकता है, शुरुआती दौर में आप सेक्स को उस तरह एंजॉय न कर पाएं, जिस तरह कई बार प्रैक्टिस के बाद.