Tag Archives: sexual harassment

इमोशनल अत्याचार: पुरुष भी हैं इसके शिकार (#MenToo Movement: Men’s Rights Activism In India)

जिस तरह सारे पुरुष बुरे नहीं होते, उसी तरह सारी महिलाएं बेचारी नहीं होतीं. कई महिलाएं पुरुषों को इस कदर प्रताड़ित करती हैं कि उनकी मान-प्रतिष्ठा, नौकरी, पैसा, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक-सामाजिक जीवन… सब कुछ तबाह हो जाता है. हैरत की बात ये है कि पुरुषों को प्रताड़ित करनेवाली ऐसी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. पेश है, महिलाओं द्वारा प्रताड़ित पुरुषों की सच्चाई पर एक स्पेशल रिपोर्ट.

#MenToo

* प्रिया की सौरभ के साथ अरेंज मैरिज हुई थी. शादी के बाद प्रिया की हरक़तों से सौरभ को शक़ हुआ कि उसका किसी के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अ़फेयर चल रहा था. जब एक दिन सौरभ ने प्रिया को रंगे हाथों पकड़ा, तो अपनी ग़लती मानने की बजाय प्रिया ने उल्टे सौरभ पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर दिया. दरअसल, प्रिया के बॉयफ्रेंड ने ही उसे सौरभ से शादी करने को कहा था, ताकि बाद में वो सौरभ पर दहेज प्रताड़ना का केस करके उससे तलाक़ ले ले और साथ में मोटी रक़म भी वसूल ले. सौरभ को पत्नी द्वारा दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप लगाए जाने पर चार महीने जेल में गुज़ारने पड़े, नौकरी से हाथ धोना पड़ा, सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो गई, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया, केस चल रहा है, लेकिन ख़ुद को सही साबित करने की इस लड़ाई में सौरभ से बहुत कुछ छिन गया है.

* आदित्य के ऑफिस में एक नई लड़की रिया ने जॉइन किया. आदित्य का अपने ऑफिस में अच्छा नाम था. बॉस उसके काम से हमेशा ख़ुश रहते थे. रिया ने पहले तो आदित्य से नज़दीकियां बढ़ाने की कोशिश की, काम सीखने के बहाने वो हमेशा उसके आगे-पीछे घूमती रहती थी, लेकिन जब दाल नहीं गली, तो उसने आदित्य पर सेक्सुअल हैरासमेंट का केस दर्ज कर दिया. रिया की इस हरक़त से आदित्य को जॉब से तो हाथ धोना ही पड़ा, ख़ुद को सही साबित करने के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी काटने पड़े, उसके परिवार को जिल्लत झेलनी पड़ी और नई नौकरी पाने के लिए, उसे फिर वो शहर ही छोड़ना पड़ा.

* रोहित और आरती ने अपनी मर्ज़ी से लिव इन रिलेशनशिप में साथ रहने का फैसला किया. कुछ समय तक सब ठीक चला, लेकिन आरती फिर रोहित पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. रोहित ने जब शादी के लिए इनकार किया, तो आरती ने रोहित पर बलात्कार का केस दर्ज कर दिया. रोहित अब ख़ुद पर लगाए गए झूठे इल्ज़ाम के लिए केस लड़ रहा है. रोहित अब किसी भी लड़की पर विश्‍वास नहीं कर पाता.

* मेन टू मूवमेंट के कारण हाल ही में सुर्ख़ियों में रहे टीवी एक्टर, सिंगर करण ओबेरॉय पर एक महिला एस्ट्रोलॉजर ने बलात्कार और वसूली का आरोप लगाया. इस महिला ने जान-बूझकर उस दिन एफआरआई दर्ज कराई, जिस दिन से मुंबई हाईकोर्ट की छुट्टियां शुरू हो रही थीं, ताकि करण ओबेरॉय बेल के लिए अप्लाई न कर सकें. उस महिला के झूठे आरोप के कारण करण को एक महीना जेल में गुज़ारना पड़ा.

ऊपर दिए गए केस मात्र उदाहरण हैं, महिलाओं द्वारा पुरुषों को प्रताड़ित किए जानेवाले मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिसके कारण अब कई पुरुष महिलाओं पर विश्‍वास करने से डरने लगे हैं, उनके क़रीब जाने से डरते हैं. कभी बेचारी समझी जानेवाली महिलाओं का अब एक अलग ही रूप सामने आ रहा है, जिसके परिणाम बहुत घातक साबित हो रहे हैं.

यह भी पढ़ें: रिसर्च- क्या वाकई स्त्री-पुरुष का मस्तिष्क अलग होता है? (Research- Is The Mind Of A Man And Woman Different?)

#MenToo
…क्योंकि ये पुरुषों के हक़ की बात है 
महिलाओं के शोषण के बारे में हम हमेशा से पढ़ते-सुनते आए हैं, लेकिन पुरुषों के शोषण के बारे में आमतौर पर बात नहीं की जाती. पुरुषों के बारे में ये मान लिया जाता है कि वो शारीरिक रूप से महिलाओं से शक्तिशाली हैं, इसलिए उनका शोषण नहीं हो सकता, लेकिन ये सच नहीं है. महिलाएं भी पुरुषों को प्रताड़ित करती हैं और अब ऐसे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. महिलाओं द्वारा पुरुषों को प्रताड़ित किए जाने के केसेस की बढ़ती तादाद को देखते हुए अब ये ज़रूरी हो गया है कि पुरुषों के हक़ की बात भी की जाए. महिलाओं द्वारा पुरुषों की शिकायत दर्ज किए जाने पर अक्सर क़ानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना ही पुरुषों को दोषी मान लिया जाता है, जिसके कारण निम्न समस्याएं सामने आती हैं:

* पुरुषों के शोषण के मामले पुलिस तक बहुत कम पहुंच पाते हैं, क्योंकि पुरुष इस बात से डरते हैं कि उनकी बात की सुनवाई नहीं होगी, इसलिए वो क़ानून की मदद लेने से डरते हैं.

* महिला यदि किसी पुरुष पर झूठा आरोप भी लगा दे कि उसने महिला का बलात्कार किया है, तो बिना जांच-पड़ताल या दोष साबित हुए ही पुरुष को दोषी मान लिया जाता है.

* कई महिलाएं रेप का आरोप लगाने की धमकी देकर पुरुषों को ब्लैकमेल करती हैं और उनसे मोटी रक़म वसूलती हैं. क़ानून महिलाओं की ही तरफ़दारी करता है, इसलिए पुरुष क़ानून का सहारा नहीं लेते और चुपचाप ऐसी महिलाओं की ज़्यादती बर्दाश्त करते हैं.

* झूठा आरोप लगने पर पुरुष की इज़्ज़त, पैसा, समय, नौकरी, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक और सामाजिक जीवन… सब कुछ तबाह हो जाता है. ऐसी स्थिति में कई पुरुष आत्महत्या तक कर लेते हैं.

* रेप का केस दर्ज करानेवाली महिला का नाम तो गोपनीय रखा जाता है, लेकिन पुरुष का नाम सार्वजनिक कर दिया जाता है. बाद में आरोप सिद्ध न होने के बाद भी पुरुष को सामाजिक अवहेलना का सामना करना ही पड़ता है.

यह भी पढ़ें: जब हो सात फेरों में हेरा-फेरी (Matrimonial Frauds In Hindu Marriages In India)

MenToo

क़ानून का दुरुपयोग कर रही हैं महिलाएं
महिलाओं के हक़ में बने क़ानून का ख़ुद महिलाएं ही दुरुपयोग करने लगी हैं. कई महिलाएं क़ानून का धड़ल्ले से ग़लत इस्तेमाल करके पुरुषों को प्रताड़ित कर रही हैं और उनसे पैसे भी वसूल रही हैं.

* कई महिलाएं धारा 498 ए का इस्तेमाल अपने पति व ससुरालवालों को प्रताड़ित करने के लिए करती हैं. ऐसी महिलाएं अपने शादीशुदा रिश्ते से मुक्त होने, बदले की भावना, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर या मुआवज़े के पैसे ऐंठने के लिए धारा 498 ए का ग़लत इस्तेमाल करती हैं. इस क़ानून के बढ़ते दुुरुपयोग पर कई बार सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है.

* दहेज हत्या के मामले में भी पुरुषों के सिर पर तलवार लटकी रहती है. शादी के सात साल के भीतर यदि किसी शादीशुदा पुरुष की पत्नी की अप्राकृतिक तरी़के से मौत हो जाती है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत उसे दोषी करार दिया जा सकता है. ऐसे कई मामलों में निर्दोष होते हुए भी पुरुषों पर दहेज हत्या के आरोप लगाकर उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी जाती है.

यह भी पढ़ें: राइट टु प्राइवेसी के बारे में कितना जानते हैं आप? (All You Need To Know About Right To Privacy In India)

#MenToo

मेन टू मूवमेंट आज की ज़रूरत है – एक्टर, सिंगर करण ओबेरॉय 
मैं ख़ुशनसीब हूं कि मुझ पर लगाए गए बलात्कार और वसूली के झूठे आरोप के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए मेरी बहन गुरबानी, मेरे फ्रेंड्स, एक्टर सचिन श्रॉफ, पूजा बेदी और हमारे बैंड के सभी सदस्य आगे आए और उन्होंने मुझे इंसाफ़ दिलाने के लिए एक साथ मिलकर आवाज़ उठाई, लेकिन हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता है. महिलाओं द्वारा लगाए गए झूठे आरोप के कारण कई पुरुषों की ज़िंदगी बर्बाद हो रही है. जब मैं तलोजा जेल (नवी मुंबई) में था, तब मैंने देखा कि स़िर्फ तलोजा जेल में ही मेरे जैसे 600 मामले हैं, तो ज़रा सोचिए कि पूरे देश में ऐसे कितने मामले होंगे. इसीलिए हमने मेन टू मूवमेंट की शुरुआत की है. ये आज की ज़रूरत है, वरना न जाने कितने निर्दोष पुरुष यूं ही महिलाओं द्वारा लगाए गए झूठे आरोप की सज़ा भुगतते रहेंगे.

#MenToo
अधिकतर महिलाएं आज भी अपने अधिकार नहीं जानतीं- एडवोकेट व सोशल एक्टिविस्ट आभा सिंह, पूर्व ब्यूरोक्रेट
एडवोकेट आभा सिंह कहती हैं, पुरुषों को वही महिलाएं प्रताड़ित करती हैं, जो ख़ुद पावरफुल होती हैं और अपने अधिकार जानती हैं. पुरुषों को प्रताड़ित करने के मामले बड़े शहरों में ज़्यादा पाए जाते हैं, छोटे शहरों की महिलाओं को अपने अधिकारों की ही जानकारी नहीं होती, तो वो पुरुषों को क्या प्रताड़ित करेंगी. आज भी 24 घंटे में 21 महिलाएं दहेज के लिए जलाई जाती हैं. साल में यदि तीन हज़ार से ज़्यादा महिलाएं मर रही हैं और एफआरआई में मौत की वजह किचन फायर (रसोई में आग लग जाने से) लिखी जाती है, तो इसे क्या कहेंगे? किचन फायर से इतनी भारी तादाद में महिलाओं की मौत स़िर्फ भारत में होती है, दुनिया के अन्य किसी भी देश में ऐसा नहीं होता है. यदि सौ प्रतिशत मामलों में क़ानून का दुरुपयोग हो रहा है, तो महिलाओं द्वारा पुरुषों को प्रताड़ित किए जानेवाले मामलों की संख्या आठ से दस प्रतिशत ही है, बाकी केसेस में महिलाओं को ही तकलीफ़ उठानी पड़ती है. गरीब महिलाओं को न अपने हक़ पता होते हैं और न ही उनके पास इतने पैसे होते हैं कि वो वकील रखकर केस लड़ सकें. ऐसे केसेस स़िर्फ बड़े तबके में पाए जाते हैं.

#MenToo

प्रताड़ित पुरुषों के अधिकतर मामले सामने नहीं आते – काउंसलर, साइकोथेरेपिस्ट काव्यल सेदानी 
हम सभी में एक फेमिनिन पार्ट होता है और एक मैस्न्युलन पार्ट. ऐसे में स्त्री-पुरुष में से जिसका, जो पार्ट जितना स्ट्रॉन्ग होता है, वो उतना स्ट्रॉन्ग या डेलिकेट होता है. जिन महिलाओं का मैस्न्युलन पार्ट स्ट्रॉन्ग होता है, वो टॉम बॉय की तरह व्यवहार करती हैं. ऐसी महिलाएं डॉमिनेटिंग और मुखर होती हैं. इसी तरह कई पुरुषों का फेमिनिन पार्ट स्ट्रॉन्ग होता है, इसलिए उनका व्यवहार बहुत सॉफ्ट होता है. ऐसे पुरुष अपनी बात मनवाने के लिए किसी पर दबाव नहीं डाल पाते और न ही किसी से झगड़ते हैं. ऐसे भावुक पुरुष ही अक्सर प्रताड़ित होते हैं. करण ओबेरॉय के मामले में तो सच्चाई सबके सामने आ गई, लेकिन जो पुरुष अपनी बात किसी से कह नहीं पाते, उनकी बात कभी सामने नहीं आ पाती. ऐसे लोग शोषण के शिकार होते चले जाते हैं. मी टू मूवमेंट की तरह ही मेन टू मूवमेंट की भी ज़रूरत है, क्योंकि कई महिलाएं क़ानून का ग़लत इस्तेमाल करके पुरुषों की ज़िंदगी बर्बाद कर देती हैं, झूठे आरोप लगाकर उनका फ़ायदा उठाती हैं, ऐसी महिलाओं का एक्सपोज़ होना ज़रूरी है.

यह भी पढ़ें: घर को मकां बनाते चले गए… रिश्ते छूटते चले गए… (Home And Family- How To Move From Conflict To Harmony)

#MeToo के बाद अब #MenToo  
एक्टर, सिंगर करण ओबेरॉय के केस से मेन टू मूवमेंट की शुरुआत हुई, जिसमें पुरुषों के ख़िलाफ़ झूठा आरोप लगाए जाने पर उनके हक़ के लिए आवाज़ उठाई जाएगी. महिलाओं के लिए शुरू हुए मी टू मूवमेंट की तरह ही पुरुषों के हक़ के लिए अब मेन टू मूवमेंट की शुरुआत हो गई है. पिछले साल मी टू अभियान बहुत ज़ोर-शोर से चलाया गया था, जिसमें दुनियाभर की महिलाओं ने उनके साथ हुए यौन अपराध पर खुलकर बात की थी. इसी तर्ज़ पर इस साल मेन टू अभियान चल रहा है, जिसमें पुरुष अपनी बात खुलकर कह रहे हैं.
– कमला बडोनी 

सेक्सुअल हैरेसमेंट से बचने के लिए अपनाएं ये सेफ्टी गाइडलाइन्स (Safety Guidelines For Sexual Harassment)

पूरे देश में सेक्सुअल हैरेसमेंट (Sexual Harassment) के ख़िलाफ़ मुहिम चल पड़ी है. ऐसे में यह जानना बेहद ज़रूरी है कि घर, बाहर या फिर वर्कप्लेस पर अपनी सेफ्टी को लेकर महिलाएं कितनी सतर्क और जागरूक हैं? क्या उन्हें क़ानून की सही जानकारी है? अपने साथ-साथ बच्चों की सेफ्टी के प्रति भी कितनी जागरूक हैं वो? इन्हीं विषयों पर महिलाओं को जागरूक करने के लिए हम लेकर आए हैं सेक्सुअल हैरेसमेंट से बचाव के बेस्ट सेफ्टी टिप्स (Best Safety Tips) और गाइडलाइन्स.

Sexual Harassment

क्या है सेक्सुअल हैरेसमेंट?

किसी भी तरह के ग़लत इशारे करना, ग़लत व्यवहार या टिप्पणी करना, ज़बर्दस्ती शारीरिक संबंध बनाना या बनाने के लिए कहना, शारीरिक बनावट या कपड़ों पर टिप्पणी करना, कामुक साहित्य दिखाना आदि सेक्सुअल हैरेसमेंट का हिस्सा हैं.

हर महिला को पता हो यह क़ानून

साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने वर्कप्लेस पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशाखा गाइडलाइन्स के नाम से 13 गाइडलाइन्स जारी की थीं, जिन्हें साल 2013 में क़ानून का रूप दे दिया गया. अब ये गाइडलाइन्स सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ वुमेन एट वर्कप्लेस एक्ट, 2013 का रूप ले चुकी हैं. इस एक्ट में सेक्सुअल हैरेसमेंट को परिभाषित किया गया है, साथ ही उससे बचाव और उत्पीड़न की स्थिति में होनेवाली कार्रवाई का उल्लेख किया गया है.

– सबसे ज़रूरी बात, जो हर महिला को पता होनी चाहिए, वो यह कि जिस भी संस्थान में 10 या 10 से ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं, वहां एम्प्लॉयर को इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी (आईसीसी) बनाना अनिवार्य है, जिसमें 50% महिलाएं शामिल हों.

–     इसके अलावा हर ज़िले में लोकल कंप्लेंट्स कमिटी हो, ताकि जिन कर्मचारियों के संस्थान में आईसीसी नहीं है, वो यहां शिकायत दर्ज कर सकें.

वर्कप्लेस पर सेफ्टी के लिए क्या करें महिलाएं?

आजकल शायद ही ऐसा कोई घर हो, जहां कोई महिला कामकाजी न हो. घर से बाहर निकलकर काम करने के लिए उपयुक्त माहौल मिले, इसके लिए उन्हें ही सतर्क और जागरूक रहना होगा.

–     अगर आपको लगता है कि आपके वर्कप्लेस पर कुछ पुरुषों के कारण या किसी एक व्यक्ति के कारण आप असहज महसूस कर रही हैं, तो सबसे पहले उसे ख़ुद आगाह करें.

–     अगर वो फिर भी अपनी हरकतों से बाज़ न आए, तो ऑफिस की इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी (आईसीसी) में शिकायत करने से न हिचकिचाएं.

–     अगर ऑफिस में आईसीसी नहीं है, तो मैनेजमेंट में उसकी शिकायत करें या फिर आप लोकल कंप्लेंट्स कमिटी में भी शिकायत कर सकती हैं.

–     अगर मैनेजमेंट उसी की तरफ़दारी करे, तो ऐसी जगह काम करने से बेहतर होगा कि आप कंपनी छोड़ दें.

–     अगर कोई आपको ग़लत मैसेज भेजता है, तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर रख लें, ताकि शिकायत करते व़क्त सबूत के तौर पर दे सकें.

–    फोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग करके भी आप उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सकती हैं.

–     अपने ऑफिस रूटीन के बारे में पैरेंट्स या पार्टनर को हमेशा बताकर रखें, ताकि कभी देर-सबेर होने पर वो पूछताछ कर सकें.

–     अपने ऑफिस और सहकर्मियों के मोबाइल नंबर पैरेंट्स या पार्टनर के पास भी सेव करके रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर संपर्क किया जा सके.

यह भी पढ़ें: पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट: बुज़ुर्ग जानें अपने अधिकार (Parents And Senior Citizens Act: Know Your Rights)
Sexual Harassment
घर से बाहर सेफ्टी का यूं रखें ख़्याल

–     अजनबी लोगों पर किसी भी तरह का भरोसा न करें. ऐसे लोगों के साथ ट्रैवल भी न करें.

–     जब भी अकेले हों, सावधान रहें. आपकी बॉडी लैंग्वेज और चाल में भी कॉन्फिडेंस होना चाहिए.

     अगर रात को ऑफिस से निकलने में देरी हो जाती है, तो ट्रैवलिंग के लिए हाई हील्स न पहनें. ऐसे जूते या चप्पल पहनें, जिनमें मुसीबत के व़क्त भाग सकें.

–     अगर रात को ऑफिस या अपनी बिल्डिंग में लिफ्ट में जाना सेफ नहीं लगता, तो सीढ़ियों से जाएं.

–     कभी किसी अनजान से लिफ्ट न लें.

–     अकेले ऑटो या टैक्सी लेने की बजाय शेयरिंग में जाएं, पर अगर आपको ज़रा भी गाड़ी का माहौल संदिग्ध लगे, तो उसमें बिल्कुल न जाएं.

–     ट्रैवलिंग के दौरान किसी अजनबी या सहयात्री से अपना फोन नंबर या कोई और डिटेल शेयर न करें.

–     रास्ते में पैदल चलते हुए म्यूज़िक सुनना है, तो धीमी आवाज़ पर सुनें, ताकि अगल-बगल में हो रही एक्टीविटीज़ के बारे में पता चलता रहे.

–     अगर रात को देर से ट्रैवल करती हैं, तो अपने पर्स में हमेशा पेपर स्प्रे रखें. अगर पेपर स्प्रे नहीं हैं, तो इमर्जेंसी में आप डियो का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

–     दिन हो या रात, अगर कोई आपका पीछा कर रहा है, तो अपना रास्ता बदल दें और फोन करके तुरंत अपनों को सूचित करें.

–     अपने मोबाइल फोन की बैटरी हमेशा चार्ज रखें, ताकि इमर्जेंसी में संपर्क साधने में द़िक्क़त न हो.

–     हो सके तो पर्सनल सेफ्टी से जुड़े कुछ गुर सीख लें.

–     घर के अंदर भी अगर किसी रिश्तेदार की हरकतें आपको आपत्तिजनक लगती हैं, तो तुरंत पैरेंट्स या पार्टनर को बताएं.

सेक्सुअल हैरेसमेंट क़ानून में है बदलाव की ज़रूरत

–    सबसे पहले तो यह क़ानून केवल महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, जबकि आजकल पुरुषों के उत्पीड़न की ख़बरें समाचार-पत्रों की सुर्ख़ियां बन रही हैं. इसमें पुरुषों की सुरक्षा को भी शामिल करना चाहिए.

–    सेक्सुअल हैरेसमेंट की परिभाषा को विस्तृत करने की ज़रूरत है, क्योंकि बदलती टेक्नोलॉजी के इस दौर में हैरेसमेंट के कई नए-नए रूप देखने को मिल रहे हैं.

–     आज भी बहुत-से संस्थानों में आईसीसी का गठन नहीं किया गया है, लेकिन उसके बारे में पूछनेवाला कोई नहीं है.

–     सोशल मीडिया आज एक प्लेटफॉर्म की तरह काम कर रहा है, ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार की आईटी सेल वहां होनेवाली गतिविधियों पर नज़र रखकर मामले को सही डिपार्टमेंट में पहुंचाए, ताकि मामले की सही जांच हो सके.

–     लोकल कंप्लेंट्स कमिटी के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाई जाए. उसे मज़बूत बनाने के लिए कड़े प्रावधान बनाए जाएं.

–     इसके तहत महिलाओं को छूट दी गई है कि वो कभी भी अपने ख़िलाफ़ होनेवाले अन्याय के लिए आवाज़ उठा सकती हैं. इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन इन मामलों में देरी के कारण अपराध साबित कर पाना पुलिस के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है. इसके लिए भी क़ानून में कोई प्रावधान होना चाहिए.

– अनीता सिंह     

यह भी पढ़ें: 10 क़ानूनी मिथ्याएं और उनकी हक़ीक़त (10 Common Myths About Indian Laws Busted!)

यह भी पढ़ें: महिलाएं जानें अपने अधिकार (Every Woman Should Know These Rights)

 

यौन शोषण पर क्या कहता है भारतीय कानून? (Sexual Abuse Laws In India Every Woman Should Know)

Sexual Abuse Laws

हाल ही में सोशल मीडिया पर आरंभ हुए मीटू कैंपेन के अंतर्गत भारतीय महिलाओं (Indian Women) ने अतीत में अपने साथ शोषण के खिलाफ आवाज़ बुलंद की है. कानून (Law) की कसौटी पर ये आरोप-प्रत्यारोप कितने खरे उतरेंगे, ये तो कोर्ट ही तय करेगा, लेकिन हम यहां पर बता रहे हैं यौन शोषण (Sexual Abuse) से जुड़े कानूनी पहलुओं के बारे में.

क्या होता है यौन शोषण
अधिकतर महिलाओं को इस बात का एहसास तक नहीं होता है कि उनका हैरेसमेंट हो रहा है. कोई व्यक्ति है, जो उनका वर्बली, नॉन वर्बली, फिज़िकली या मेंटली रूप से शोषण कर रहा है. और महिलाएं इसे मज़ाक या व्यंग्य (ताना) समझ कर छोड़ देती है. सेक्सुअल हैरेसमेंट का अर्थ केवल शारीरिक शोषण तो है ही, साथ में अगर किसी महिला के साथ वर्कप्लेस पर किसी भी तरह का भेदभाव, जो किसी पुरूष सहकर्मी द्वारा किया जाए या फिर वह पुरूष सहकर्मी जो आपको वर्बली या नॉन वर्बली तौर पर हानि पहुंचाएं, सिर्फ इसलिए की आप महिला है, तो यह शोषण/उत्पीडन (हैरेसमेंट) कहलाता है.

सेक्शन 354
कुछ वर्षों पहले इंडियन पैनल कोट (आईपीसी सेक्शन- Indian Penal Code) की धारा 354 के तहत यदि शख्स किसी महिला पर यौन शोषण करता था या उस पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता था, उस पर बुरी नज़र डालता था, अश्‍लील मैसेज भेजता था या फिर उसकी अनुमति के बिना कोई ग़लत काम करता था, तो ऐसी स्थिति में वह महिला उस शख्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है. आईपीसी की धारा के तहत एक साल से लेकर पांच साल तक सजा का प्रावधान था, साथ ही जुर्माना भी भर पड़ सकता था.
लेकिन निर्भया कांड के बाद इस कानून में नए बदलाव किए गए. इस नए कानून के तहत इंडियन पैनल कोट 354 को चार भागों में बांटा गया है, जिसके अंतर्गत IPC 354-A , IPC 354-B, IPC 354-C, IPC 354-D है

सेक्शन 354 ए
Sexual Abuse Laws For Woman

इस धारा के तहत अगर कोई शख्स किसी महिला के साथ जबर्दस्ती शारीरिक संबंध बनाना, उसकी टच करना अश्‍लील मैसेज भेजना, गंदे कमेंट करना या अश्‍लील वीडियो दिखाना आता है. इसके अंतर्गत उसे 3 साल की सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी लग सकता है.

धारा 354 ए को भी 4 उपभागों में बांटा गया है-

  • धारा 354 ए- उपभाग 1: यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को गंदी नियत के साथ छूता है, तो इस स्थिती में IPC 354-A उपभाग 1 लगती है तथा आरोपी व्यक्ति को 3 साल की सजा हो सकती है.
  • धारा 354 ए- उपभाग 2: अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहता है, तो ऐसी स्थिति में उसके खिलाफ IPC 354-A उपभाग 2 लगती है और 3 साल की सजा का प्रावधान है.
  • धारा 354 ए- उपभाग 3: यदि कोई पुरुष किसी महिला को उसकी इच्छा के बगैर अश्‍लील वीडियो या मैसेज दिखाता है, तो  इस स्थिती में आरोपी व्यक्ति के खिलाफ IPC 354-A उपभाग 4 लगती है तथा 1 साल की सजा का प्रावधान है.
  • धारा 354 ए- उपभाग 4: यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी महिला या युवती पर गंदे अश्लील कमेंट करता या उसको अश्लील मैसेज भेजता है तो इस स्थिती में आरोपी व्यक्ति के खिलाफ IPC 354-A उपभाग 4 लगती है तथा 1 साल की सजा का प्रावधान है

सेक्शन 354 बी

Sex Abuse Laws
इस सेक्शन के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को नग्न देखना, जबर्दस्ती उसके कपड़े उतरवाना/उकसाना या उस कपड़े उतारने के लिए दबाव बनाना आता है.  इस धारा के तहत आरोपी व्यक्ति को 5-7 साल की सजा जुर्माना दोनो हो सकते है. यह गैरजमानती धारा है. इसके अंतर्गत अपराधी को जमानत नही मिल सकती |

और भी पढ़ें: कितना जानते हैं आप सेक्सुअल हैरेसमेंट के बारे में? (How Aware Are You About Sexual Harassment?)

सेक्शन 354 सी

Sexual Abuse Laws in India

इसके तहत अगर कोई शक्स किसी महिला का अश्‍लील वीडियो बनाता है या उसके किसी प्राइवेट एक्ट की तस्वीर खीचता है, तो सार्वजनिक तौर पर फैलाता है, तो इस मामले में उसे 3 साल तक की सजा हो सकती है. इस सजा के बाद भी अगर वह व्यक्ति दोबारा इस तरह की हरकत करता है, तो उसे 3-7 साल तक की सजा का प्रावधान है.

सेक्शन 354 डी
अगर कोई व्यक्ति किसी महिला से जर्बदस्ती संपर्क बनाए रखना चाहता है या फिर महिला की जानकारी के बिना उसका पीछा करता है, तो यह भी यौन उत्पीडन की श्रेणी में आता है. इस धारा के दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 3 से 5 साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

और भी पढ़ें: हर महिला के फोन में होने चाहिए ये 5 सेप्टी ऐप्स (5 Safety Apps Every Woman Should Download)

– पूनम नागेंद्र शर्मा

यौन उत्पीड़न के आरोपों का एक्टर अली ज़फ़र ने दिया जवाब, पाकिस्तानी सिंगर मीशा शफी ने लगाया था आरोप (Ali Zafar Denied the Allegations of sexual harassment made by Meesha Shafi)

Ali Zafar, Denied the Allegations, sexual harassment, Meesha Shafi

‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ और ‘डियर ज़िंदगी’ जैसी फिल्मों में अभिनय करने वाले पाकिस्तानी एक्टर व सिंगर अली ज़फ़र पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस व सिंगर मीशा शफी ने कई बार यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है. अब अपने ऊपर लगे इन आरोपों का जबाव देते हुए अली ज़फ़र ने एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने मीशा द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत करार दिया है.

Ali Zafar, Denied the Allegations, sexual harassment, Meesha Shafi

इन आरोपों से इंकार करते हुए अली ने कहा कि वो इस मामले को कोर्ट में ले जाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मीशा शफी #Mee Too कैंपेन का गलत इस्तेमाल कर रही हैं. अली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा है कि वो इस कैंपेन के बारे में जानते हैं. वो एक बेटी के पिता है और एक पति भी. ऐसे में इस तरह के आरोपों से वो और उनका परिवार काफ़ी आहत है. उन्होंने मीशा के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि इसकी सच्चाई एक न एक दिन ज़रूर बाहर आएगी.

A post shared by Ali Zafar (@ali_zafar) on

बता दें कि बॉलीवुड की फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ में नज़र आ चुकी मीशा ने #Mee Too कैंपेन से जुड़ते हुए ट्विटर पर अपने साथ हुए इस हैरेसमेंट का खुलासा किया है. मीशा की मानें तो अली ज़फ़र ने एक बार नहीं बल्कि कई बार उनका यौन उत्पीड़न किया है और उनके साथ यह तब नहीं हुआ जब वे इंडस्ट्री में नई थीं, बल्कि ये सब उनके साथ इंडस्ट्री में स्थापित होने और शादी करने के बाद हुआ.

यह भी पढ़ें: एक्स लवर्स रणबीर और दीपिका ने रैंप पर बिखेरा जलवा, एक-दूजे का हाथ थामें नज़र आए