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मसाज थेरेपी फॉर बेटर सेक्स (Massage Therapy For Better Sex)

Therapy For Better Sex

मसाज द्वारा सेक्स लाइफ़ के कई ख़ूबसूरत पलों का आनंद उठाया जा सकता है. मसाज थेरेपी (Therapy For Better Sex) सेक्सुअल पावर को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को चुस्त-दुरुस्त व तनावमुक्त रखने में भी अहम् भूमिका निभाती है.

Therapy For Better Sex
सेक्सुअल(Therapy For Better Sex) पावर को बढ़ाने में मसाज अहम् भूमिका निभाता है. वैज्ञानिक शोधों से भी यह बात प्रमाणित हुई है कि शरीर के अंग विशेष का मसाज करने से वहां की स्नायु प्रणाली अत्यंत मज़बूत और क्रियाशील होती है. इससे शरीर में उमंग-उत्साह का संचार होता है और व्यक्ति विशेष की सेक्स क्षमता में वृद्धि होती है. मसाज से रक्तसंचार एकाएक बढ़ जाता है, जिससे सेक्स उत्तेजना में गज़ब की बढ़ोत्तरी होती है.

ऑयल मसाज के फ़ायदे
मसाज करने के लिए नारियल, जैतून, तिल के तेल के साथ-साथ अन्य सुगंधित तेलों का इस्तेमाल करें. ख़ुश्बू वाले ऑयल का उपयोग करने से दोहरा लाभ होता है. यह मसाज थेरेपी का काम तो करता ही है, साथ ही सुगंधित होने के कारण यह सेक्सुअल पावर को भी बढ़ाता है. यदि किसी व्यक्ति को सेक्स संबंधी कोई समस्या है, तो ऑयल मसाज(Therapy For Better Sex) से वह भी दूर हो जाती है.

मसाज थेरेपी का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
तनाव का सेक्स जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, लेकिन कई शोधों और अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि मसाज से चुटकियों में तनाव दूर हो जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, मसाज(Therapy For Better Sex) के कारण त्वचा के भीतर रक्तप्रवाह तीव्र गति से शुरू हो जाता है, जिससे यौनांगों व मांसपेशियों को नया ख़ून और पोषण मिलता है. मसाज को वैज्ञानिक रूप देनेवाले स्वीडन के डॉ. पीटर हेनरी ने इसे तीन भागों में बांटा है- सक्रिय अंग विक्षेप, निष्क्रिय अंग विक्षेप और दुष्क्रिय अंग विक्षेप. आज की वैज्ञानिक मालिश में प्राय: इन्हीं विधियों का समावेश है.

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सक्रिय अंग विक्षेपः इस मसाज प्रक्रिया में घर्षण (Friction) का विशेष रूप से प्रयोग होता है. दोनों हाथों से मांसपेशियों को रगड़ना घर्षण कहलाता है. इससे रक्तसंचार तेज़ होता है और मांसपेशियों तथा ऊतकों को शक्ति मिलती है.

निष्क्रिय अंग विक्षेपः इस मसाज थेरेपी में हल्की-हल्की थपकी, कम्पन, ताल आदि का प्रयोग होता है. यह उंगलियों या हथेली से पूरे शरीर अथवा किसी एक अंग में दिया जा सकता है. इस प्रकार का मसाज मूत्राशय व प्रजनन अंगों की कमज़ोरी में विशेष रूप से फ़ायदेमंद होता है. महिलाओं की माहवारी संबंधी गड़बड़ी, स्नायुशूल, अजीर्ण, कब्ज़ आदि समस्याएं इससे दूर होती हैं. मुक्की (Beating) भी एक प्रकार की थपकी है. नितंब पर बंद मुट्ठी करके मुक्के मारने से महिलाओं का कमज़ोर प्रजनन अंग मज़बूत होता है. इस मसाज थेरेपी में जिस तरह आटा गूंधते हैं, उसी तरह शरीर की मांसपेशियों को गूंधा जाता है. इससे शरीर के विभिन्न प्रकार के रोगों के अलावा सेक्स संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है.

निष्क्रिय मसाजः इसे एक तरह से पैसीव एक्सरसाइज़ अर्थात् निष्क्रिय व्यायाम भी कह सकते हैं. अत: जो लोग एक्सरसाइज़ के लिए व़क़्त नहीं निकाल पाते, उनके लिए निष्क्रिय मसाज(Therapy For Better Sex) बेहद फ़ायदेमंद होता है. मसाज करने से त्वचा का रक्तसंचार बढ़ता है और दिलोदिमाग़ में तरोताज़गी छा जाती है.

दंपतियों के लिए मसाज टिप्स
मसाज पति-पत्नी में मुहब्बत के एहसास जगाता है. इससे शरीर और त्वचा दोनों में ही निखार आता है.

टच थेरेपीः सेक्स में टच यानी स्पर्श ख़ास रोल अदा करता है. आपके प्यार से छूने भर से सिहरन-सी पैदा हो जाती है साथी के दिलोदिमाग़ में. धीरे-धीरे सहलाने और स्पर्श करते रहने से प्यार के साथ-साथ सेक्स की इच्छा बलवती होने लगती है. अतः जब भी पति-पत्नी अकेले में हों, तो ख़ामोशी के आलम के साथ स्पर्श के जरिए एक-दूसरे की भावनाओं को जानें-समझें. इससे मन में एक रोमांच-सा पैदा होने लगता है. कभी-कभी यह स्थिति आपको ऑर्गे़ज़म तक भी पहुंचा देती है.

एक-दूसरे का मसाज करनाः मसाज आपके मूड को बनाने के साथ-साथ सेक्स की चाह को भी बढ़ाता है. यदि ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे का मसाज करें तो यह बॉडी पर जादू-सा असर करती है. इससे दोनों के बीच की दूरियां दूर होने के साथ-साथ नीरसता भी छंटती है. उनमें आपसी प्रेम मज़बूत होता है. वे इमोशनली एक-दूसरे के क़रीब आते हैं. आपसी समझदारी और केयर की भावना भी बढ़ती है.

फ़िट व हेल्दी रहने का फॉर्मूला
मसाज थेरेपी स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रखती है. यदि आप मोटी हैं या फिर शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ गयी है, तो इसे दूर करने के लिए आप मसाज थेरेपी की सहायता ले सकती हैं. अध्ययन द्वारा यह भी देखा गया है कि मोटापा सेक्स लाइफ़ को प्रभावित करता है. ऐसे में मसाज थेरेपी द्वारा आप ना केवल ख़ुद को हेल्दी रख सकती हैं, बल्कि सेक्सुअल लाइफ़ का भी भरपूर आनंद उठा सकती हैं.

मसाज करने का तरीक़ा
हमेशा मसाज इस तरह करें कि रक्त का प्रवाह ऊपर की ओर होता रहे, ताकि रक्तशुद्धि का कार्य भी होता रहे. मसाज की शुरुआत पैरों से करें. फिर शरीर के अन्य भागों का मसाज करते जाएं. ध्यान रखें, मसाज शरीर में होनेवाले रक्तसंचार की विपरीत दिशा में कदापि न करें. पैर के तलुओं से प्रारंभ करके क्रमशः पैर की उंगलियों, पिंडलियों, जंघा, इसके बाद दोनों हाथों, भुजाओं, पेट, छाती, पीठ और फिर कंधों की मालिश करनी चाहिए.

जांघों के अंदरूनी भाग पर, छाती के ऊपर, गर्दन के पीछे, नितंबों के ऊपर, हाथ-पैरों की उंगलियों के मध्य, स्तनों के आस-पास मसाज करने से सेक्स उत्तेजना अप्रत्याशित रूप से तीव्र हो उठती है. अपनी क्षमता व उम्र के अनुसार 15-20 मिनट तक  मसाज करना चाहिए. इससे यौनांगों में तीव्र उत्तेजना उत्पन्न होती है.

मसाज करने के लिए पहले सुगंधित तेल हथेलियों पर लगाकर जिस अंग का मसाज करना हो, उस जगह पर हाथ फिराकर तेल लगाएं. इसके बाद हथेलियों का हल्का-हल्का दबाव डालकर तब तक मसाज करें, जब तक कि  शरीर तेल सोख न ले. इस प्रकार तेल की भीनी-भीनी ख़ुश्बू रोमछिद्रों एवं नाक के माध्यम से मस्तिष्क में पहुंचकर संपूर्ण शरीर में मादकता और मस्ती भर देते हैं. इससे सेक्स संबंधी संवेदनाओं का नियंत्रण भी होता है. परिणामस्वरूप व्यक्ति सेक्स के समय जल्दी स्खलित नहीं होता. मसाज थेरेपी शीघ्रपतन के मरीज़ों के लिए एक वरदान है.

– भावना

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लें सेक्सुअल लाइफ का हेल्थ टेस्ट (Health test for sexual life)

Health test for sexual life

जिस तरह हेल्दी बने रहने के लिए हम समय-समय पर ज़रूरी हेल्थ चेकअप्स (Health test for sexual life) कराते हैं, ठीक उसी तरह अपनी सेक्सुअल लाइफ को भी हेल्दी बनाए रखने के लिए हमें कुछ हेल्थ टेस्ट्स कराने चाहिए. इन टेस्ट्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने बात की सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोसले (एमडी, ऑनरेबल प्रोफेसर एंड एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन, केईएम हॉस्पिटल, मुंबई) से.

Health test for sexual life

सेक्सुअल हेल्थ चेकअप्स

हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए आपका सेक्सुअली हेल्दी रहना बहुत ज़रूरी है. अगर आप सेक्सुअली एक्टिव नहीं हैं या किसी रिलेशनशिप में भी नहीं हैं, फिर भी ये हेल्थ चेकअप्स आपके लिए उतने ही ज़रूरी हैं.

कब कराएं चेकअप?

अगर आप सेक्सुअली एक्टिव हैं, तो आपको नियमित समय पर सेक्सुअल हेल्थ चेकअप्स कराते रहना चाहिए. अपनी लाइफस्टाइल और सेक्सुअल एक्टिविटी के आधार पर तय करें कि आपको कितने अंतराल पर टेस्ट कराने चाहिए. अगर इसमें से कोई भी स्थिति हो, तो सेक्सुअल हेल्थ टेस्ट कराएं-

– अगर आपको आशंका है कि आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) हो सकता है.

– अगर आपने अनसेफ सेक्स किया हो और अच्छा फील न कर रहे हों.

– सेक्स के दौरान कंडोम फट या फिसल गया हो.

– आपके एक से अधिक पार्टनर से संबंध हैं.

– आपके पार्टनर के एक से अधिक पार्टनर हैं.

– आपको शक है कि बिना स्टरलाइज़ किया हुआ इंजेक्शन आपको लगाया गया है.

सेक्सुअल हेल्थ टेस्ट्स दो तरह के होते हैं-

1. लैंगिग क्षमता या क़ाबिलीयत को जाननेवाले टेस्ट

2. यौन संक्रमण या यौन रोगों की जांच के लिए टेस्ट

डॉ. राजन भोसले के अनुसार, अगर आपको कोई सेक्सुअल प्रॉब्लम है, गुप्तांगों में दर्द है या फिर आपको लगता है कि शायद आप सेक्सुअली फिट नहीं हैं, तो ये टेस्ट्स ज़रूर कराएं.

लैंगिग क्षमता परखनेवाले टेस्ट्स- महिलाओं-पुरुषों दोनों के लिए

सीरम टेस्टोस्टेरॉन लेवल: टेस्टोस्टेरॉन लेवल टेस्ट के ज़रिए ब्लड में मौजूद टेस्टोस्टेरॉन लेवल के बारे में जानकारी मिलती है. टेस्टोस्टेरॉन सेक्स हार्मोन है, जो महिलाओं और पुरुषों दोनों में होता है.

एसएचबीजी: सेक्स हार्मोन बाइंडिंग ग्लोबुलिन के ज़रिए जहां पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन की कमी की जांच की जाती है, वहीं महिलाओं में इसकी अधिकता के बारे में पता लगाया जाता है. इसकी कमी और अधिकता दोनों ही आपकी सेक्सुअल लाइफ के लिए हेल्दी नहीं.
सीरम प्रोलैक्टिन: यह एक तरह का ब्लड टेस्ट है, जिससे ब्लड में प्रोलैक्टिन के लेवल की जांच की जाती है. महिलाओं और पुरुषों दोनों के रिप्रोडक्टिव हेल्थ में यह अहम् भूमिका निभाता है. इसलिए बेवजह के सिरदर्द और सेक्सुअल ड्राइव में कमी की शिकायत पर डॉक्टर आपको इसकी सलाह दे सकते हैं.

एफएसएच टेस्ट: फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट महिलाओं और पुरुषों के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में अहम् भूमिका निभाता है. महिलाओं में अनियमित पीरियड्स और इंफर्टिलिटी प्रॉब्लम्स और पुरुषों में लो स्पर्म काउंट और टेस्टिकुलर डिस्फंक्शन के लिए यह टेस्ट कराया जाता है.

एलएच टेस्ट: ल्युटिनाइंज़िंग हार्मोन टेस्ट ब्लड या यूरिन के ज़रिए किया जाता है. महिलाओं व पुरुषों के रिप्रोडक्टिव सिस्टम की जांच और ओवरी से निकलनेवाले एग्स का विश्‍लेषण किया जाता है. अगर कोई महिला कंसीव नहीं कर पाती है, तो पति-पत्नी दोनों को यह टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है.

टी3, टी4, टीएसएच: थायरॉइड की जांच के लिए ये टेस्ट्स कराए जाते हैं. थायरॉइड रिप्रोडक्टिव सिस्टम को बाधित करता है, जिससे महिलाएं कंसीव नहीं कर पातीं. बहुत से मामलों में महिलाओं को थायरॉइड होता है, पर उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वो कंसीव नहीं कर पातीं. ऐसे में थायरॉइड लेवल की जानकारी किसी के लिए भी बहुत ज़रूरी हो जाती है.

ब्लड शुगर: ब्लड शुगर जहां आपकी कामोत्तेजना में कमी लाता है, वहीं सेक्स के प्रति रुचि कम होने लगती है. ब्लड शुगर पुरुषों व महिलाओं दोनों में सेक्सुअल डिस्फंक्शन का कारण बनता है. ऐसे में अगर आपको लगता है कि आपकी कामोत्तेजना में कमी आ गई है, तो डॉक्टर की सलाह पर अपना ब्लड शुगर ज़रूर चेक करें.

लिपिड प्रोफाइल: कोलेस्ट्रॉल लेवल महिलाओं और पुरुषों में सेक्सुअल फंक्शन्स को प्रभावित करता है. कोलेस्ट्रॉल जितना आपके हार्ट के लिए नुक़सानदायक है, उतना ही आपकी सेक्सुअल लाइफ के लिए भी. ऐसे में अपनी सेक्सुअल लाइफ को हेल्दी बनाए रखने के लिए नियमित समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना ज़रूरी हो जाता है.

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पुरुषों के लिए

पेनाइल डॉपलर स्टडी: गुप्तांग में रक्तसंचार के बारे में जानने के लिए यह टेस्ट किया जाता है. इस टेस्ट की मदद से पुरुषों में सबसे आम समस्या इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बारे में पता चलता है.

टेस्टिकल्स चेकअप: समय-समय पर पुरुषों को अपने टेस्टिकल्स की जांच कराते रहना चाहिए. इससे किसी भी तरह की असामान्य गांठ या सूजन होने पर आपको तुरंत पता चल जाएगा. यह इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि यह टेस्टिकल कैंसर का कारण भी हो सकता है. अगर आपको कुछ भी असामान्य लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

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महिलाओं के लिए

एस्ट्रोजेन व प्रोजेस्टेरॉन: ये दोनों ही हार्मोंस महिलाओं के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं. महिलाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने के साथ-साथ उनकी सेक्सुअल लाइफ को हेल्दी बनाने में ये अहम् भूमिका निभाते हैं.

यूटरस और ओवरीज़ की सोनोग्राफी: सोेनोग्राफी के ज़रिए यूटरस और ओवरीज़ की सही तरी़के से जांच हो पाती है, जिससे उनमें होनेवाली किसी भी तरह की समस्या की जांच की जा सकती है. महिलाओें की सेक्सुअल हेल्थ के लिए सोनोग्राफी के ज़रिए इनकी नियमित रूप से जांच ज़रूरी है.

गुप्तांगों की जांच: अगर आपको लगता है कि आपकी सेक्सुअल लाइफ में समस्या आ रही है, तो किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलकर फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन करा लें.

Health test for sexual life

यौन संक्रमण या यौन रोगों की जांच के लिए टेस्ट

एसटीआई स्क्रीनिंग: यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसके ज़रिए सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन्स की जांच होती है. अगर आपमें भी निम्नलिखित लक्षण नज़र आते हैं, तो एसटीआई स्क्रीनिंग ज़रूर कराएं. अगर आपके गुप्तांग से डिस्चार्ज हो रहा हो, पेशाब करते समय दर्द हो, गुप्तांग में फुंसी या छाले हों, खुजली हो, सेक्स के दौरान दर्द हो, तो ये टेस्ट ज़रूर कराएं.

एचआईवी1 और एचआईवी2: जैसा कि सभी को पता है कि एड्स के लक्षण दिखाई नहीं देते और सालों बाद जब वे हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर कर देते हैं, तब इनके बारे में पता चलता है. ऐसे में इनके प्रति सतर्कता ही आपको इनसे बचा सकती है. एचआईवी टेस्ट्स कराना आपके लिए ही फ़ायदेमंद होगा.

हर्पिस: यह एक आम सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ है. आमतौर पर इसके लक्षण दिखाई ही नहीं देते, जिससे व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसे हर्पिस है. संक्रामक होने के कारण इसकी जल्द से जल्द जांच ज़रूरी हो जाती है. अगर आपके गुप्तांगों में घाव हो, तो डॉक्टर को इस बारे में बताएं, वो एचएसवी1 और एचएसवी2 टेस्ट की सलाह देंगे.

वीडीआरएल: सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का पता लगाने के लिए यह टेस्ट किया जाता है.

पुरुषों के लिए
प्रोस्टेट स्क्रीनिंग: प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए प्रोस्टेट स्क्रीनिंग बहुत ज़रूरी है. उम्र बढ़ने के साथ ही प्रोस्टेट कैंसर की संभावना भी बढ़ने लगती है, ऐसे में यह टेस्ट ज़रूरी हो जाता है. फैमिली हिस्ट्रीवाले पुरुषों को ख़ास ध्यान रखना चाहिए. अगर आपको यूरिन पास करने में तकलीफ़ हो, यूरिन या सिमेन में ब्लड आए, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें.

महिलाओं के लिए
सर्वाइकल स्मीयर टेस्ट: स्मीयर टेस्ट को पैप टेस्ट भी कहते हैं. सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा कितना हेल्दी है जानने के लिए ही यह टेस्ट किया जाता है. यह टेस्ट कैंसर की जांच के लिए नहीं है, पर इसकी मदद से कैंसर को टाला जा सकता है. 25-60 साल की सभी महिलाओं को हर 3-5 साल में यह टेस्ट कराना चाहिए.

ब्रेस्ट्स की जांच: ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए नियमित रूप से ब्रेस्ट्स का सेल्फ एक्ज़ामिनेशन बहुत ज़रूरी है. हाल ही में हुई स्टडीज़ में यह बात पता चली है कि ब्रेस्ट कैंसर शहरी महिलाओं में मौत का प्रमुख कारण बन गया है. ऐसे में ब्रेस्ट्स की जांच बहुत ज़रूरी हो जाती है. ब्रेस्ट्स में सूजन या गांठ का महसूस होना, ब्रेस्ट्स के आकार व रंगत में बदलाव, निप्पल्स का अंदर की तरफ़ घुसा हुआ होना ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. हर महीने पीरियड्स के बाद सेल्फ ब्रेस्ट एक्ज़ामिनेशन ज़रूर करें.

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सेक्सुअल हेल्थ टिप्स

– 40 की उम्र के बाद सभी महिलाओं को सालाना मैमोग्राफी करानी चाहिए.

– 40 की उम्र के बाद सभी पुरुषों को सालाना प्रोस्टेट स्क्रीनिंग नियमित रूप से करानी चाहिए.

– महिलाओं को किसी भी तरह का डिस्चार्ज होने पर तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए.

– किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचने के लिए सेक्सुअल हाइजीन का ध्यान रखें.

– सेक्सुअल हेल्थ के लिए लो फैट व हाई फाइबर डायट लें.

– डायबिटीज़ और ब्लडप्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए खाने में शक्कर और नमक की मात्रा कम रखें.

– सेक्सुअल फिटनेस के लिए कंप्लीट बॉडी फिटनेस बहुत ज़रूरी है, इसलिए हफ़्ते में 5 दिन 40 मिनट तक ब्रिस्क वॉक (तेज़ चलना) करें.

– अनीता सिंह