Shabana Azmi

पिछले कुछ दशकों से बॉलीवुड में ऐसी फ़िल्में बनी हैं, जिनमें गैंगस्टर या अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में एक्टर को ही बड़े परदे पर दिखाया जाता है. बॉलीवुड के इतिहास में अभी तक बहुत कम फ़िल्में हैं जहां एक्ट्रेसेस को गैंगस्टर के किरदार में दिखाया गया है. खास बात यह कि इन एक्ट्रेसेस ने  अपनी शानदार एक्टिंग से लेडी गैंगस्टर के रोल जान डाल दी. आज हम आपको उन अभिनेत्रियों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने गैंगस्टर की भूमिका को शानदार ढंग से अदा किया.

  1. कंगना रनौत- फिल्म रिवाल्वर रानी
Kangana Ranaut

फिल्म रिवॉल्वर रानी’ में कंगना रनौत ने लेडी गैंगस्टर की भूमिका निभाई थी, बाद में यह लेडी गैंगस्टर बोल्ड पॉलिटिशियन बन जाती है और अपने प्यार को पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने के तैयार रहती है. फिल्म बॉक्स ऑफिस  पर नहीं चली, पर कंगना का यह अंदाज़ दर्शकों को खूब पसंद आया.

2. शबाना आज़मी- फिल्म गॉड मदर

Shabana Azmi

गुजरात के चुनावी पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी ने संतोकबेन जडेजा की भूमिका निभाई. उनका यह किरदार काल्पनिक न होकर वास्तविक था. इस किरदार का नाम था संतोखबेन, जिसे गुजरात के लोग गॉडमदर के नाम से जानते हैं, जो 14 से अधिक हत्या के मामलों में शामिल थी. संतोखबेन मजदूर मिल सरमन मंजू की पत्नी थी और अपने पति की हत्या के बाद अंडरवर्ल्ड में एंट्री करती है. शबाना आज़मी की दमदार परफॉरमेंस की ऑडियंस और क्रिटिक्स दोनों ने खूब प्रंशसा की. इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

3. सुप्रिया पाठक- फिल्म रामलीला- गोलियों की रासलीला “

Supriya Pathak

बॉलीवुड की उम्दा अभिनेत्रियों में सुप्रिया पाठक का नाम आता है. डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म रामलीला- गोलियों की रासलीला ” में सुप्रिया ने लेडी डॉन का किरदार निभाया है. इस फिल्म में उनके किरदार का नाम दंकौर था. अपनी दमदार एक्टिंग से उन्होंने फैंस को हैरान कर दिया. लेडी गैंगेस्टर रोल के इस किरदार की ऑडियंस ने खूब तारीफ की. इस फिल्म में उनकी शानदार एक्टिंग को देखकर लगता है, उनके अलावा ये किरदार कोई अन्य अभिनेत्री इतने बेहतरीन ढंग से नहीं कर सकती थी. उनकी जानदार आवाज़ ने इस किरदार को जीवंत बना दिया है. इस फिल्म के लिए सुप्रिया पाठक ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए कई पुरस्कार जीते.

4. श्रद्धा कपूर- फिल्म हसीना पारकर

Shraddha Kapoor

कुछ समय पहले ही श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘हसीना पारकर आई थी, जिसमें श्रद्धा कपूर ने दाऊद इब्राहिम की बहन की भूमिका निभाई थी. हालाँकि इस फिल्म को दर्शकों का बहुत ज्यादा प्यार नहीं मिला, लेकिन फिल्म में दर्शकों को श्रद्धा कपूर का यह गैंगस्टर अवतार काफी पसंद आया था.

5. नेहा धूपिया- फिल्म फंस गए रे ओबामा

Neha Dhupia

फिल्म इन फंस गए रे ओबामा  में नेहा धूपिया ने मुन्नी मैडम नाम की लेडी गैंगस्टर की भूमिका निभाई है. इस फिल्म में अमेरिका में रहने वाला शख्स जिसकी नौकरी चली जाती है वो मंदी की वजह से भारत वापस आता है. अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर उन पैसों से वापस अमेरिका जाकर रोजी-रोटी की कुछ व्यवस्था कर सके. मगर वो भारत आते ही वो कुछ बदमाश लोगों के चंगुल में फंस जाता है. गैंगस्टर के रोल में नेहा का किरदार काफी दिलचस्प था. उनका दबंग और मज़ाकिया स्वभाव ऑडियंस को बहुत पसंद आया.

6. नंदिता दास- फिल्म सुपारी

Nandita Das

बंगाली ब्यूटी नंदिता दास ने फिल्म सुपारी में एक सोफिटिकटेड़े लेडी डॉन का रोल प्ले किया है. हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास नहीं कर पाई. लेकिन गैंगस्टर के रोल में ऑडियंस ने नंदिता दास को खूब पसंद किया.

7. ऋचा चड्डा-फिल्म फुकरे

Richa Chaddha

फिल्म फिकरे में ऋचा चड्डा ने भोली पंजाबन के रूप में दबंग लेडी का रोल अदा किया है. भोली पंजाबन यानी गीता अरोरा दिल्ली से बाहर देह व्यापार का धंधा करती है. उनके इस दबंग किरदार को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. फिल्म फुकरे में ही नहीं फुकरे रिटर्न्स 2  में ऋचा ने भोली पंजाबन का रोल अदा किया है. इन दोनों फिल्मों को देखने के बाद दर्शकों के इस किरदार की खूब तारीफ की थी.

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बॉलीवुड अभिनेत्रियां अपने किरदार में जान डालने के लिए हर मुमकिन कोशिश करती हैं, फिर चाहे एक्शन सीन हों, डांस हो या किसी किरदार के लिए अपना पूरा गेटअप बदल देना, बॉलीवुड एक्ट्रेस किसी बात में पीछे नहीं रहती. कुछ बॉलीवुड अभिनेत्रियां अपने किरदार में जान डालने के लिए गंजी तक हुई हैं. आइए हम आपको ऐसी अभिनेत्रियों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने अपने किरदार में जान डालने के लिए अपने बाल तक मुंडवा दिए.

Bollywood Actresses Who Went Bald For Roles In The Movies

1) प्रियंका चोपड़ा – फिल्म मैरी कॉम
बॉक्सर मैरी कॉम के जीवन पर आधारित फिल्म ‘मैरी कॉम’ में प्रियंका चोपड़ा ने उनका किरदार निभाया था. इस रोल के लिए प्रियंका ने बहुत मेहनत की, यहां तक कि इस किरदार के लिए प्रियंका ने अपने बाल तक मुंडवा दिए. प्रियंका चोपड़ा अपने हर किरदार को चैलेंज की तरह लेती हैं और उसे पूरी ईमानदारी से निभाती हैं, इसीलिए उनका हर किरदार ख़ास होता है.

Priyanka Chopra from film marry kom

2) अनुष्का शर्मा – फिल्म ऐ दिल है मुश्किल
फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में अनुष्का शर्मा ने एक कैंसर पेशंट का किरदार निभाया था और इस किरदार को रियल लुक देने के लिए उन्होंने अपना सिर मुंडवा दिया था. अनुष्का शर्मा अपने हर किरदार के लिए बहुत मेहनत करती हैं इसीलिए बहुत कम समय में उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली है. फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में अनुष्का शर्मा का किरदार दर्शकों को बहुत पसंद आया था.

Anushka Sharma bald look

3) शिल्पा शेट्टी – फिल्म द डिज़ायर
शिल्पा शेट्टी फिलहाल फिल्मों से दूर हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती हैं इसलिए उनके फैन्स उनसे हमेशा जुड़े रहते हैं. शिल्पा शेट्टी ने उनकी होम प्रोडक्शन फिल्म ‘द डिज़ायर’ के लिए अपने बाल मुंडवा लिए थे. अपने इस रोल के बारे में शिल्पा शेट्टी ने कहा, “मैंने फिल्म के लिए प्रोस्थेटिक मेकअप का विकल्प चुना. गंजा दिखना तीन घंटे का काम था.”

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Shilpa Shetty bald look

4) तन्वी आज़मी – फिल्म बाजीराव मस्तानी
संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में तन्वी आज़मी ने एक मराठा विधवा की भूमिका निभाई और इस किरदार को जीवंत रूप देने के लिए तन्वी वास्तव में गंजी हुईं. बाजीराव मस्तानी फिल्म में तन्वी आज़मी ने रणवीर सिंह की मां की भूमिका निभाई थी.

Tanvi azmi bald look

5) अंतरा माली – फिल्म एंड वन्स अगेन
अमोल पारेकर की फिल्म ‘एंड वन्स अगेन’ के लिए अभिनेत्री अंतरा माली ने अपना सिर मुंडवाया था. इस फिल्म में अंतरा माली ने सिक्किम के एक साधु का किरदार निभाया था, जिसके लिए वो असल में गंजी हुई थीं.

antara mali bald look

6) शबाना आज़मी – फिल्म वाटर
विधवा के जीवन पर आधारित दीपा मेहता निर्देशित फिल्म ‘वाटर’ के लिए शबाना आज़मी ने अपने बाल मुंडवाए थे, लेकिन ये फिल्म उस समय विवादों के चलते नहीं बन पाई और शबाना को इस फिल्म से बाहर होना पड़ा, लेकिन शबाना आज़मी का ये लुक दर्शकों को आज भी याद है.

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shabana azmi bald look

7) नंदिता दास – फिल्म वाटर
नंदिता दास ने भी शबाना आज़मी की तरह फिल्म ‘वाटर’ के लिए अपने बाल मुंडवाए थे, क्योंकि वो भी इस फिल्म का हिस्सा थी. फिल्म वाटर को लेकर विवाद इतना बढ़ गया था कि निर्माताओं को फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी, इसलिए नंदिता दास को भी फिल्म से बाहर होना पड़ा, लेकिन नंदिता दास का ये लुक आज भी दर्शक भूले नहीं हैं.

nandita das bald look

8) लीज़ा रे – फिल्म वाटर
शबाना आज़मी और नंदिता दास के बाद फिल्म ‘वाटर’ के लिए लीज़ा रे को चुना गया. विधवा के जीवन पर आधारित दीपा मेहता निर्देशित फिल्म वाटर की शूटिंग फिर भारत में नहीं हो सकी, बाद में इस फिल्म की शूटिंग श्रीलंका में हुई. फिल्म ‘वाटर’ में विधवा महिला का किरदार निभाने के लिए एक्ट्रेस लीज़ा रे भी गंजी हुई थीं.

Lisa ray bald look

9) तनुजा – फिल्म पित्रुओन
एक्ट्रेस काजोल की मां और हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री तनुजा ने एक मराठी फिल्म ‘पित्रुओन’ में अपने किरदार में जान डालने के लिए अपना सिर मुंडवाया था. इस फिल्म में तनुजा का लुक बहुत पसंद किया गया था.

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tanuja. bald look

10) अभिनेत्री रिंकू कर्माकर सीरियल ‘ये वादा रहा’ के लिए हुई थीं गंजी
फिल्मों के अलावा सीरियल के लिए भी अभिनेत्री रिंकू कर्माकर ने अपने बाल मुंडवाए थे. ज़ी टीवी के शो ‘ये वादा रहा’ में रिंकू कर्माकर ने नेगेटिव रोल निभाया था, जिसके लिए उन्होंने असल में अपने बाल मुंडवाए था. ‘ये वादा रहा’ शो में रिंकू कर्माकर का ये लुक बहुत पॉप्युलर हुआ था.

rinku karmarkar bald look

10 महिला प्रधान फिल्में (Women Oriented Films) हर महिला को जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि इन फिल्मों ने महिलाओं के जीवन के ऐसे कई पहलुओं को उजागर किया है, जिन पर इससे पहले बात तक नहीं की जाती थी. 10 महिला प्रधान फिल्मों ने कई सामाजिक मान्यताओं को तोड़ा है और समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है. यदि आपने अभी तक ये फिल्में नहीं देखी हैं, तो आपको ये महिला प्रधान फिल्में जरूर देखनी चाहिए.

Women Oriented Bollywood Films

1) क्वीन (Queen)
महिला प्रधान फिल्मों की बात हो और कंगना रनौत की फिल्म क्वीन का ज़िक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. क्वीन फिल्म की सबसे बड़ी ख़ासियत है इस फिल्म का मैसेज. इस फिल्म में ये बताया गया है महिलाओं की चाहतें पुरुषों के सहारे की मोहताज नहीं हैं और कंगना रनौत ने अपनी अदाकरी से महिलाओं की भावनाओं को बहुत दमदार तरीके से प्रस्तुत किया है. यदि आपने अभी तक क्वीन फिल्म नहीं देखी है, तो आपको ये फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए.

Queen

2) द डर्टी पिक्चर (The Dirty Picture) 
बॉलीवुड की मोस्ट टेलेंटेड एक्ट्रेस विद्या बालन की बेहतरीन फिल्मों में से एक द डर्टी पिक्चर 80 के दशक की दक्षिण भारतीय फिल्मों की कलाकार सिल्क स्मिता के जीवन पर आधारित थी. द डर्टी पिक्चर फिल्म में रुपहले पर्दे के की चमक के पीछे छुपे अंधेरे को उजागर किया गया. साथ ही महिला के शरीर के प्रति लोगों की मानसिकता को भी दर्शाया गया. इस फिल्म में विद्या बालन की एक्टिंग को खूब सराहा गया.

The Dirty Picture

 

3) लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (Lipstick Under My Burka) 
विवादों से घिरी फिल्म लिपस्टिक अंडर माय बुर्का अलग-अलग उम्र की चार ऐसी महिलाओं को कहानी है, तो अपने हिसाब से आज़ादी से ज़िंदगी गुज़ारने में विश्‍वास रखती हैं. कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह, आहना कुमरा, पल्बिता बोरठाकुर ने लिपस्टिक अंडर माय बुर्का फिल्म में दमदार अभिनय किया है. हालांकि इस फिल्म को रिलीज़ होने से पहले सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के लिए काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा था, लेकिन जब भी महिला प्रधान फिल्म की बात की जाएगी, तो लिपस्टिक अंडर माय बुर्का फिल्म का ज़िक्र ज़रूर होगा.

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Lipstick Under My Burka

4) पार्चड (Parched) 
पार्चड यानी सूखा और इस फिल्म में गांव की तीन स्त्रियों के माध्यम से इस शब्द को भलीभांति प्रस्तुत किया गया है. पार्चड फिल्म में पुरुष प्रधान मानसिकता, महिलाओं पर अत्याचार, बाल विवाह जैसी समस्याओं का कटु सत्य को बहुत तीखे अंदाज़ में पेश किया गया है. पार्चड फिल्म को 24 इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया और इस फिल्म ने 18 अवॉर्ड्स हासिल किए.

Parched

5) ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस (Angry Indian Goddesses)
ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस फिल्म की कहानी पांच लड़कियों के ईर्दगिर्द घूमती है. ये लड़कियां हंसती भी हैं और रोती भी हैं, मस्ती भी करती हैं और दर्द भी झेलती हैं. इस फिल्म में लड़कियों के साथ छेड़छाड़, कोर्ट में इंसाफ न मिलना, मां-बाप का प्यार न मिलना जैसी कई सामाजिक समस्याओं को उजागर किया गया है. महिलाओं को ये फिल्म भी ज़रूर देखनी चाहिए.

Angry Indian Goddesses

6) चांदनी बार (Chandni Bar) 
चांदनी बार फिल्म मुंबई की बार बालाओं के जीवन पर आधारित है. मधुर भंडारकर की फिल्म चांदनी बार में तब्बू ने अपनी दमदार अदाकारी से मुंबई की बार बालाओं के जीवन को बहुत ही सटीक तरीके से प्रस्तुत किया है. चांदनी बार फिल्म के लिए तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला और इस फिल्म को चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले.

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Chandni Bar

7) फायर (Fire)
दीपा मेहता की फिल्म फायर दो महिलाओं के समलैंगिग रिश्तों पर आधारित कहानी है. इस फिल्म को दो साल तक सेंसर बोर्ड की हरी झंडी का इंतज़ार करना पड़ा और दो साल बाद इस फिल्म को एडल्ट कैटेगरी में सिनेमाघरों में दिखाया गया. इस फिल्म में शबाना आज़मी और नंदिता दास की एक्टिंग को बहुत सराहा गया था.

Fire

8) नीरजा (Neerja)
नीरजा फिल्म को सोनम कपूर की बेस्ट फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म में प्लेन हाइजैक के दौरान एक एयर होस्टेस किस तरह बहादुरी से अपनी नैतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाती है, इसका बेहतरीन प्रस्तुतिकरण किया गया है. नीरजा फिल्म की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस फिल्म में कहीं से भी हीरो या अभिनेता की कमी नहीं महसूस होती.

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Neerja

9) मॉम (Mom)
बॉलीवुड की चांदनी श्रीदेवी जी भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी फिल्म मॉम महिलाप्रधाान फिल्मों में खास स्थान रखती है. इस फिल्म में बताया गया है कि एक मां अपने बच्चों के लिए क्या कुछ कर सकती है. पूरी फिल्म श्रीदेवी यानी मॉम के ईर्दगिर्द घूमती है. इस फिल्म में भी हीरो की ज़रूरत महसूस नहीं होती.

Mom

10) पिंक (Pink)
तापसी पन्नू की फिल्म पिंक भी लीक से हटकर थी. इस फिल्म की कहानी तीन महिलाओं के ईर्दगिर्द घूमती है और समाज को महिलाओं के बारे में काफी कुछ सोचने पर मजबूर करती है. फिल्म पिंक में बिग बी अमिताभ बच्चन ने भी दमदार अभिनय किया है.

Pink

बहुमुखी प्रतिभा की धनी शबाना आज़मी का आज जन्मदिन है. वे अपने बेहतरीन अभिनय, बेबाक़ राय और बिंदास अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं. पिछले चार दशक से उनका फिल्मी सफ़र कई ख़ूबसूरत पड़ावों को पार करता हुआ अनवरत चल रहा है. सशक्त अदाकारी से उन्होंने हर किसी को प्रभावित किया है.

Shabana Azmi

* शबाना आज़मी मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मनोविज्ञान में ग्रेज्युट हैं. शायद उनकी इसी पढ़ाई का प्रभाव उनके दमदार अभिनय में भी देखने को मिलता है.

* शबानाजी अपने सशक्त अभिनय और बहुमुखी क़िरदारों को प्रभावशाली अंदाज़ में निभाए जाने के लिए जानी जाती हैं. तभी तो अपनी पहली ही फिल्म अंकुर में राष्ट्रीय पुरस्कार उन्होंने जीता था.

* उसके बाद तो उन्होंने कई फिल्मों के लिए नेशनल अवॉर्ड्स जीते, जिनमें विशेष तौर पर अर्थ, खंडहर, पार हैं.

* शबानाजी के पिता कैफ़ी आज़मी जाने-माने शायर रहे हैं. उन्हीं से लेखनी का सबक सीखने जावेद अख़्तर शबानाजी के घर आया करते थे, तभी ही दोनों एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हुए.

Shabana AzmiShabana Azmi

* लेकिन उनका पहला क्रश हैंडसम-चार्मिंग शशि कपूर थे. दरअसल, पृथ्वीराज कपूर कैफ़ी आज़मी के पड़ोस में रहते थे और अपने पिता से मिलने शशि कपूर अक्सर वहां आया करते थे.

* शबानाजी उनकी इस कदर दीवानी थीं कि एक बार तो उन्होंने उनकी फोटो पर शशिजी का आटोग्राफ भी ले लिया.

* वैसे उनकी दिली तमन्ना उनके साथ बहुत काम करने की थी, पर वे एकमात्र फकीरा फिल्म में ही उनके साथ काम कर पाईं.

* शशि कपूर के अलावा उन्हें शेखर कपूर पर भी क्रश था, पर क़िस्मत ने जीवनभर का साथ जावेद अख़्तर के साथ जोड़ा था.

Shabana AzmiShabana AzmiShabana Azmi

* शबानाजी अपने बिंदास रोल के लिए भी काफ़ी जानी जाती रही हैं. फिर चाहे फिल्मी करियर की शुरुआती दौर में मंडी फिल्म का बोल्ड सीन हो या फिर समलैंगिकता पर फायर मूवी.

* व्यक्तिगत ज़िंदगी हो या फिल्में शबानाजी ने हर भूमिका के साथ न्याय किया. तभी तो जावेद साहब की पहली पत्नी हनी ईरानी के दोनों बच्चों फरहान अख़्तर और ज़ोया अख़्तर के साथ भी उनके उतने ही मधुर संबंध हैं, जितने जावेदजी के साथ है.

* फिल्मों में पर्दापण उन्होंने श्याम बेनेगल की अंकुर फिल्म से की थी. यह हैदराबाद की एक सच्ची प्रेम कहानी पर आधारित थी. इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला, जबकि इस रोल के लिए वे श्याम बेनेगल की पहली पसंद नहीं थीं.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने की ख़्वाहिश उन्हें जया बच्चन के कारण हुई. जब उन्होंने जयाजी को फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की फिल्म सुमन में देखा था.

* शबानाजी की मां शौक़त आज़मी रंगमंच की बेहतरीन कलाकार थीं.

* शबानाजी ने लगातार तीन साल तक यानी 1983 से लेकर 1985 तक राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया था. इसके बाद गॉडमदर के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

Shabana Azmi

* फिल्म वॉटर के लिए शबानाजी ने अपने बाल भी निकलवाए थे और बिना बाल के वे बेहद ख़ूबसूरत भी लगती थीं. लेकिन कुछ कारणवश फिल्म की कास्ट चेंज हो गई.

* आज 70 की उम्र में भी वे अपनी अदाकारी के दमख़म से अच्छे से अच्छा कलाकार को भी कड़ी चुनौती देती हैं. तभी तो जज़्बा फिल्म में एक तरफ़ उनका निगेटिव शेड था, तो दूसरी तरफ़ ऐश्‍वर्या राय बच्चन और इरफान ख़ान की मंजी अदाकारी.

* शबानाजी पांच बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के अलावा पद्मश्री व पद्मभूषण से भी सम्मानित हो चुकी हैं.

Shabana Azmi

* अंकुर, मंडी, अर्थ, खंडहर, पार, गॉडमदर, शतरंज के खिलाड़ी, फायर, मकड़ी, जज़्बा में उनके विविधतापूर्ण सशक्त अभिनय ने हर किसी को प्रभावित किया.

* फिल्म शीर कोरमा में दर्शकों को उनका अलग अंदाज़ दिखा.

* हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में उन्होंने क़रीब 122 फिल्मों में अभिनय किया है.

* मेरी सहेली की तरफ़ से उन्हें जन्मदिन मुबारक! वे यूं ही अभिनय के रंग बिखेरती रहें.

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हिंदी सिनेमा जगत मेंं बेहतरीन अदाकारा में से एक हैं शबाना आज़मी (Shabana Azmi). आज उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कई दिलचस्प पहलुओं के बारे में जानते हैं.

Shabana Azmi

* शबानाजी अपने सशक्त अभिनय और बहुमुखी क़िरदारों को प्रभावशाली अंदाज़ में निभाए जाने के लिए जानी जाती हैं. तभी तो अपनी पहली ही फिल्म अंकुर में राष्ट्रीय पुरस्कार उन्होंने जीता था.

* उसके बाद तो उन्होंने कई फिल्मों के लिए नेशनल अवॉर्ड्स जीते, जिनमें विशेष तौर पर अर्थ, खंडहर, पार हैं.

* शबानाजी के पिता कैफ़ी आज़मी जाने-माने शायर रहे हैं. उन्हीं से लेखनी का सबक सीखने जावेद अख़्तर शबानाजी के घर आया करते थे, तभी ही दोनों एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हुए.

* लेकिन उनका पहला क्रश हैंडसम-चार्मिंग शशि कपूर थे. दरअसल, पृथ्वीराज कपूर कैफ़ी आज़मी के पड़ोस में रहते थे और अपने पिता से मिलने शशि कपूर अक्सर वहां आया करते थे.

* शबानाजी उनकी इस कदर दीवानी थीं कि एक बार तो उन्होंने उनकी फोटो पर शशिजी का आटोग्राफ भी ले लिया.

* वैसे उनकी दिली तमन्ना उनके साथ बहुत काम करने की थी, पर वे एकमात्र फकीरा फिल्म में ही उनके साथ काम कर पाईं.

* शबानाजी अपने बिंदास रोल के लिए भी काफ़ी जानी जाती रही हैं. फिर चाहे फिल्मी करियर की शुरुआती दौर में मंडी फिल्म का बोल्ड सीन हो या फिर समलैंगिकता पर फायर मूवी.

* व्यक्तिगत ज़िंदगी हो या फिल्में शबानाजी ने हर भूमिका के साथ न्याय किया. तभी तो जावेद साहब की पहली पत्नी हनी ईरानी के दोनों बच्चों फरहान अख़्तर और ज़ोया अख़्तर के साथ भी उनके उतने ही मधुर संबंध हैं, जितने जावेदजी के साथ है.

* फिल्मों में पर्दापण उन्होंने श्याम बेनेगल की अंकुर फिल्म से की थी. यह हैदराबाद की एक सच्ची प्रेम कहानी पर आधारित थी. इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला, जबकि इस रोल के लिए वे श्याम बेनेगल की पहली पसंद नहीं थीं.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने की ख़्वाहिश उन्हें जया बच्चन के कारण हुई. जब उन्होंने जयाजी को फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की एक फिल्म में देखा था.

* वैसे शबानाजी की मां शौक़त आज़मी रंगमंच की बेहतरीन कलाकार थीं.

* शबानाजी ने लगातार तीन साल तक यानी 1983 से लेकर 1985 तक राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया था. इसके बाद गॉडमदर के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

* शायद आपको पता न हो कि फिल्म वॉटर के लिए शबानाजी ने अपने बाल भी निकलवाए थे और बिना बाल के वे बेहद ख़ूबसूरत भी लगती थीं. लेकिन कुछ कारणवश फिल्म की कास्ट चेंज हो गई.

* आज 67 की उम्र में भी वे अपनी अदाकारी के दमख़म से अच्छे से अच्छा कलाकार को भी कड़ी चुनौती देती हैं. तभी तो जज़्बा फिल्म में एक तरफ़ उनका निगेटिव शेड था, तो दूसरी तरफ़ ऐश्‍वर्या राय बच्चन और इरफान ख़ान की मंजी अदाकारी.

* शबानाजी पांच बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के अलावा पद्मश्री व पद्मभूषण से भी सम्मानित हो चुकी हैं.

* अंकुर, मंडी, अर्थ, खंडहर, पार, गॉडमदर, शतरंज के खिलाड़ी, फायर, मकड़ी, जज़्बा में उनके विविधतापूर्ण सशक्त अभिनय नेे हर किसी को प्रभावित किया.

* आज शबानाजी का 68वां जन्मदिन है. मेरी सहेली की तरफ़ से उन्हें मुबारकबाद!… वे यूं ही अभिनय के रंग बिखेरती रहें.

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67 की हुईं शबाना आज़मी

हर किरदार को अपना बना लेनी वाली शबाना आज़मी हो गई हैं 67 साल की. अब भी शाबाना फिल्मों में ऐक्टिव हैं. फिल्मों के अलावा सोशल वर्क में भी वो बिज़ी रहती हैं. 18 सितंबर 1950 को शायर व गीतकार कैफ़ी आज़मी और थिएटर अभिनेत्री शौकत आज़मी के घर के घर जन्मी शबाना आज़मी ने जब जया बच्चन की फिल्म सुमन देखी, उन्होंने तब तय कर लिया था कि उन्हें अभिनेत्री बनना है. हालांकि वो थिएटर्स करती थीं. कॉलेज में उन्होंने अपने सीनियर फारुख शेख के साथ मिलकर हिंदी प्ले के लिए मंच भी बनवाया था. कॉलेज की तरफ से उन्हें इसके लिए पैसे नहीं मिलते थे, फिर भी ऐक्टिंग के प्रति शबाना की दिवानगी ने इस मंच को जीवित रखा और उन्होंने और उनके दोस्तों ने मिलकर पैसे लगाए. एफटीआईआई में उन्होंने एडमिशन लिया और उन्हें वहां बेस्ट स्टूडेंट की स्कॉलरश‍िप भी मिल गई.

शबाना को उनकी पहली ही फिल्म अंकुर के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. 1983 से लेकर 1985 तक उन्होंने लगातार फिल्म अर्थ, कंधार और पार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल अवॉर्ड मिला. साल 1999 में फिल्म गॉडमदर के लिए उन्हें 5वां नेशनल अवॉर्ड मिला.

निशांत, स्पर्श, मंडी, मासूम, पेस्टन जी, अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, मैं आजाद हूं  जैसी लगभग 120 हिंदी और बंगाली फिल्मों में बेहतरीन अभिनय करने वाली शबाना आज़मी को पद्मश्री अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है. फिल्म नीरजा में भी उनके अभिनय की सराहना हुई थी.

मेरी सहेली की ओर से शबाना आज़मी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

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