Shammi Kapoor

सुशांत सिंह राजपूत के यूं अचानक चले जाने से आज भी उनके फैन्स सदमे में हैं. उनके निधन के कुछ दिनों बाद ही उनकी आखिरी फिल्म दिल बेचारा रिलीज़ होनेवाली है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार है. सुशांत की ही तरह बॉलीवुड के कुछ और भी ऐसे सितारे हैं, जो यूं अचानक चले गए और उनकी आखिरी फ़िल्म उनके निधन के कुछ दिन या महीनों बाद रिलीज़ हुई. आइये देखते हैं कौन हैं वो बॉलीवुड के सितारे?

  1. सुशांत सिंह राजपूत
sushant singh rajput

14 जून, 2020 को सुशांत सिंह राजपूत ने अपने बांद्रावाले घर में आत्महत्या कर ली थी, पर आज भी उनके फैन्स उनकी मौत के लिए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि इतना खुशमिज़ाज़ व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है, यह बात आज भी किसी के गले के नीचे नहीं उतर रही है. उनकी फिल्म दिल बेचारा पहले मई, 2020 में थियेटर में रिलीज़ होनेवाली थी, पर देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण रिलीज़ नहीं हो पाई और अब वह 24 जुलाई को डिजिटल प्लैटफॉर्म पर रिलीज़ होनेवाली है. 6 जुलाई को फ़िल्म का ट्रेलर रिलीज़ हुआ था, जिसने कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे. 24 घंटे के भीतर ही ट्रेलर को 5 मिलियन्स से ज़्यादा लाइक्स मिले.

2. श्रीदेवी

sridevi

श्रीदेवी बॉलीवुड की बेहद ख़ूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेसेस में से एक थीं. उनकी मौत भी बॉलीवुड और उनके फैन्स के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी. 24 फरवरी 2018 को दुबई के हॉटेल में बाथटब में डूबने से उनकी मौत हो गई थी. उन्होंने फिल्म ज़ीरो में कैमियो रोल किया था, जो उनकी आख़िरी फ़िल्म साबित हुई.

3. दिव्या भारती

divya bharti

19 साल की महज़ छोटी सी उम्र में अचानक उनकी मौत ने सभी को चौंका दिया था. कुछ ही फिल्मों से सभी के दिलों पर राज करनेवाली दिव्या भारती की मौत 1993 में हुई थी, जो आज भी एक रहस्य बनी हुई है. उनकी आख़िरी फ़िल्म शतरंज उनकी मौत के 9 महीने बाद रिलीज़ हुई थी, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी.

4. राजेश खन्ना

rajesh khanna

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार और ओरिजिनल सुपरस्टार राजेश खन्ना आज भी फैन्स के दिलों में वही अहमियत रखते हैं, जो वो अपने ज़माने में रखते थे. करीब 30 साल तक बॉलीवुड में राज करनेवाले राजेश खन्ना 18 जुलाई 2012 को इस दुनिया को अलविदा कह गए. उनकी आख़िरी फ़िल्म रियासत 2014 में रिलीज़ हुई.

5. शम्मी कपूर

shammi kapoor

70 के दशक में लड़कियों के दिलों की धड़कन बढ़ानेवाले स्टार शम्मी कपूर ने अपनी बेहतरीन अदाकारी और गुड लुक्स से लाखों को घायल किया था. शम्मी कपूर ने 14 अगस्त, 2011 को क्रॉनिक रेनल फेलियर के कारण दुनिया को अलविदा कह गए. उनकी आख़िरी फ़िल्म थी रणबीर कपूर स्टारर रॉकस्टार, जो उसी साल नवंबर में रिलीज़ हुई थी.

6. स्मिता पाटिल

smita patil

नेचुरल ब्यूटी और ऐक्टिंग के लिए मशहूर स्मिता पाटिल ने अपने करियर में ऐसी कई फिल्में की, जिसे लोग आज भी याद करते हैं. 13 दिसंबर, 1986 को उनका निधन हो गया था. उनकी आख़िरी फ़िल्म गलियों के बादशाह 17 मार्च, 1989 को रिलीज़ हुई थी.

7. मधुबाला

madhubala

ख़ूबसूरती की मिसाल मधुबाला के आज भी लाखों दीवाने हैं. ख़ूबसूरती के साथ साथ उनकी चंचल और शोख अदाएं भला कौन भूल सकता है. दिल में छेद होने के कारण 23 फरवरी, 1969 को यह दुनिया छोड़कर चली गईं. उनकी आख़िरी फ़िल्म ज्वाला उनकी मौत के दो साल बाद 1971 में रिलीज़ हुई थी.

8. मीना कुमारी

meena kumari

‘इंडियन सिनेमा की ट्रैजडी क्वीन’ के नाम से मशहूर मीना कुमारी ने कई बेहतरीन फिल्में की हैं. पाकीज़ा जैसी बेहद पॉप्युलर फ़िल्म के दौरान ही मीना कुमारी की तबियत ख़राब होने लगी थी. महज़ 38 साल की उम्र में लिवर सिरोसिस के कारण मार्च, 1972 में उनका निधन हो गया. उसी साल उनकी आख़िरी फ़िल्म गोमती के किनारे रिलीज़ हुई थी.

9. संजीव कुमार

sanjeev kumar

ठाकुर के किरदार के लिए मशहूर बेहद टैलेंटेड एक्टर संजीव कुमार को जन्मजात दिल की बीमारी थी. बॉलीवुड में एक से एक बेहतरीन किरदार निभानेवाले संजीव कुमार का निधन 6 नवंबर, 1985 को हुआ था. उनके निधन के 8 सालों बाद बाद उनकी आख़िरी फ़िल्म प्रोफेसर की पड़ोसन रिलीज़ हुई थी.

10. ओम पुरी

sanjeev kumar

अलग-अलग किरदारों के ज़रिए बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनानेवाले ओम पुरी का हार्ट अटैक के कारण 6 जनवरी, 2017 को निधन हो गया था. निधन के कुछ महीनों पहले ही उन्होंने सलमान खान की फ़िल्म ट्यूबलाइट की शूटिंग ख़त्म की थी. उनके निधन के बाद यह फ़िल्म ईद के मौके पर रिलीज़ हुई थी.

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शम्मी कपूर और गीता बाली की प्रेम कहानी कपूर खानदान की सबसे ख़ूबसूरत और दिल छू लेनेवाली कहानियों में से एक है. दोनों की लव स्टोरी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है. फिल्म रंगीन रातें के शूट पर दोनों एक-दूसरे के करीब आये और वहीं से इस हीरो हीरोइन की ज़िंदगी भी रंगीन हो गई. फिर क्या था 4 महीने में ही उनका प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि दोनों ने मंदिर में जाकर शादी कर ली. कैसे शुरू हुई इनकी प्रेम कहानी, किसने किसे प्रपोज़ किया और कैसे लिपस्टिक से शम्मीजी ने भरी गीता बाली की मांग आइए जानते हैं.

Shammi Kapoor And Geeta Bali marriage pics

शम्मी कपूर और गीता बाली की पहली मुलाकात साल 1955 में फिल्म मिस कोका कोला के दौरान हुई थी. पहली नज़र में ही गीता उन्हें अच्छी लगी थीं, लेकिन सरदारनी का रौब कुछ ऐसा था कि शम्मी जी को हिम्मत नहीं पड़ी कुछ कहने की. शम्मी जी न एक इंटरव्यू में बताया था कि उन दोनों को एक दूसरे को करीब से जानने का मौका फिल्म रंगीन रातें के दौरान मिला. इस फिल्म की शूटिंग रानीखेत में हो रही थी. ख़ूबसूरत वादियों और नज़ारों के बीच दो दिलों में पल रहा प्यार अब हिलोरें मारने लगा था. शाम को शूट के बाद अक्सर दोनों घूमने निकल जाते थे.

Shammi Kapoor And Geeta Bali marriage pics

शूट के दौरान ही शम्मी जी को गीता जी की ज़िन्दगी को करीब से जानने का मौका मिला. तब उन्हें पता चला कि गीता के पापा बहुत कम तनख्वाह में काम करनेवाले एक टीचर हैं, जो अपनी आंखों की रौशनी खो चुके हैं और उनकी मां, बहन और भाई तीनों ही सदस्यों को कम सुनाई देता था, जिसके कारण पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी गीता बाली पर ही थी. इतनी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करनेवाली गीता ने कभी किसी को अपना दर्द ज़ाहिर नहीं होने दिया. शम्मी जी के मन में उनके लिए सम्मान और बढ़ गया. उस समय गीता बाली की 24 साल थी, जबकि शम्मी जी की 23. ख़ुद से उम्र में एक साल बड़ी लड़की के प्रति बढ़ते अपने प्यार को वो रोक न सके.

Shammi Kapoor And Geeta Bali

आपको जानकर हैरानी होगी कि शम्मी कपूर और गीता बाली को करीब लाने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी एक शेर ने. जी हां, यह भी एक बेहद दिलचस्प किस्सा है. दरअसल हुआ यूं था कि शम्मी जी बहुत दिनों से एक शेर की तलाश में थे, जो उनकी नज़रों से ओझल हो गया था. एक रात का वाकया है, जब डिनर करके वो लोग होटल की तरफ़ वापस आ रहे थे. गीता बाली आगे वाली गाड़ी में थीं और शम्मी जी पीछे. एक मोड़ पर पहुंचकर मैंने क्या देखा की गीता की गाड़ी रास्ते के बीच में खड़ी है और वो जीप के बोनट पर चढ़कर चिल्ला रही थी. ”शम्मी, तुम्हारा शेर, वो देखो उधर जा रहा है.” मैं हैरान था, सामने खूंखार शेर है और इस लड़की को डर भी नहीं लग रहा है. उसी समय मैं गीता पर पूरी तरह फ़िदा हो गया.

Shammi Kapoor And Geeta Bali

शम्मीजी ने एक बार बताया था कि गीता और मैं एक दूसरे के प्यार में पागल थे, लेकिन मेरे मन में कहीं न कहीं उम्र का डर था. गीता मेरे पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ और भाई राज कपूर के साथ भी फिल्मों में काम कर चुकी थीं. मुझे नहीं पता था कि हमारे रिश्ते को लेकर परिवार की क्या प्रतिक्रिया होगी. पर मैंने मन ही मन ठान लिया था कि मैं अपनी पूरी ज़िन्दगी गीता के साथ ही गुज़ारना चाहता हूं.

Shammi Kapoor And Geeta Bali

गीता को शम्मी जी ने जब शादी के लिए प्रपोज़ किया, तो गीताजी ने कहा था कि शम्मी, मैं तुमसे प्यार करती हूँ, पर शादी नहीं कर सकती. मुझ पर मेरे परिवार की ज़िम्मेदारियाँ हैं, मैं उन्हें नहीं यूं ही नहीं छोड़ सकती. चार महीने एक दूसरे को मनाते, समझाते-बुझाते, बिछड़ने के दर्द और तड़प के बीच यूं ही बीत गए. और फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था.

Shammi Kapoor And Geeta Bali marriage pics

23 अगस्त, 1955 को हम दोनों बॉम्बे के जुहू हॉटेल में थे. शम्मी जी वहीं रह रहे थे, क्योंकि उनके घर पर कोई नहीं था. सभी लोग पृथ्वी थियेटर के ट्रूप के साथ भोपाल गए हुए थे. मुझे पता था हर बार की तरह गीता फिर से सिर हिलाकर शादी के लिए मना कर देगी, फिर भी यूं ही मस्ती के मूड में मैंने गीता को शादी के लिए प्रपोज़ किया और उनका जवाब सुनकर मैं चौंक गया. गीता बाली ने कहा, ”ठीक है शम्मी, शादी करते हैं, पर शादी अभी करनी होगी.” शम्मी जी हैरान, ”अभी से क्या मतलब है?”, तो गीता बाली ने कहा, ”अभी मतलब अभी से है.” शम्मी जी ये मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे, इसलिए तुरंत बोले, ”ठीक है. चलो अभी करते हैं.”

Shammi Kapoor And Geeta Bali

शम्मी कपूर और गीता बाली अपने दोस्त और मशहूर कॉमेडियन जॉनी वॉकर के पास गए, क्योंकि एक हफ़्ते पहले ही उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड और एक्ट्रेस नूर से भागकर शादी की थी. जॉनी वॉकर ने कहा कि हम तो मुस्लिम हैं, इसलिए हमें सिर्फ़ एक काज़ी साहब को ढूंढ़ना था, पर तुम लोग हिन्दू हो, तो तुम्हे एक मंदिर और और एक पंडितजी की ज़रूरत पड़ेगी. वहां से निकालकर सीधा दोनों अपने दोस्त हरी वालिया के पास गए, जिनके साथ मिलकर दोनों फिल्म कॉफी हाउस बना रहे थे. हरी वालिया उन दोनों को साउथ बॉम्बे के नेपियन सी रोड के पास स्थित बाणगंगा मंदिर ले गए.

Shammi Kapoor And Geeta Bali family pic

शम्मी जी के मुताबिक, उस समय गीता अपने सलवार कमीज़ में थी और मैं कुर्ते पायजामे में. पंडितजी ने मंदिर में शादी कराई. हमने सात फेरे लिए और फिर गीता ने अपने पर्स में से लिपस्टिक निकालकर मुझे दी, ताकि मैं उसकी मांग भर सकूं. बिना परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी के हमारी शादी हो गई. उसके बाद हम सीधा आपने दादाजी का आशीर्वाद लेने माटुंगा गए. उसके बाद मैंने भोपाल में फ़ोन करके अपने पैरेंट्स को अपनी शादी के बारे में बताया. ख़बर उनके लिए चौंकानेवाली थी, पर वो ख़ुश थे. उसके बाद हम गीता के घर गए. वहां हमें देखकर सब चौंक गए थे, पर हमारी ख़ुशी में ख़ुश होते हुए, उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया. मुझे याद है कि उनके घर में कोई मिठाई नहीं थी, तो गीता की बहन हरदर्शन ने शक्कर लाकर सबका मुंह मीठा कराया था.

Shammi Kapoor And Geeta Bali with there two children,

साल 1956 में गीता ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया और उसका नाम आदित्य राज कपूर रखा गया और उसके बाद साल 1961 में उनके घर एक नन्ही परी आई, जिसका नाम उन्होंने कंचन रखा. शम्मी कपूर और गीता बाली की दुनिया ख़ुशियों से भरी थी. मनचाहा जीवनसाथी और बाल बच्चों से भरा पूरा परिवार भला किसी को और क्या चाहिए. दोनों बहुत खुश थे. लेकिन ये खुशियां बहुत दिनों तक टिकी न रह सकीं. नियति ने ऐसा पलटा खाया कि साल 1965 में एक पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान गीता बाली को चेचक हो गया. उन्हें बीमारी ने इस तरह जकड़ा कि उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया और कुछ ही दिनों बाद 21 जनवरी, 1965 को शम्मी कपूर और दो मासूम बच्चों को छोड़कर दुनिया से चली गयीं. महज़ 10 सालों के साथ के बाद वो दोनों हमेशा के लिए बिछड़ गए. हालांकि एक बार एक इंटरव्यू में शम्मी जी ने कहा था कि उन दस सालों के प्यार के सहारे ही मैंने बाकी की ज़िंदगी गुज़ारी है. दोनों की यह कहानी अक्सर प्यार करनेवालों को रुला देती है.

– अनीता सिंह

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‘गोरे रंग पे न इतना गुमान कर… गाना गुज़रे ज़माने की जिस मशहूर अदाकारा पर फिल्माया गया था, वह हैं मुमताज़. मुमताज़ ने अपनी बड़ी-बड़ी आंखों, काले बाल, गोरे रंग और अभिनय की अनोखी अदा से सभी पर अपना जादू बिखेरा. उन्होंने 60-70 के दशक में अपने ख़ूबसूरत अंदाज़ से दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था.
मुमताज़ का नाम बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार है. उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय के जलवे बिखेरे और एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं.
उनका जन्म 31 जुलाई, 1947 को मुस्लिम परिवार में हुआ. घर की माली हालत खस्ता थी, सो महज़ 12 वर्ष की उम्र में उन्हें फिल्मों में कदम रखना पड़ा. अपनी छोटी बहन मलिका के साथ वह रोज़ाना स्टूडियो के चक्कर लगाया करतीं और छोटी-मोटी भूमिका मांगती थीं.

उनकी मां नाज़ और चाची नीलोफर पहले से फिल्मी दुनिया में मौजूद थीं, लेकिन दोनों जूनियर आर्टिस्ट होने के नाते अपनी बेटियों की सिफारिश करने के योग्य नहीं थीं. मुमताज़ ने जूनियर आर्टिस्ट से स्टार बनने का सपना अपने मन में संजोया था और उन्होंने यह सच कर दिखाया.
अपनी लगन और मेहनत से 70 के दशक में उन्होंने स्टार की हैसियत हासिल कर ली. उस दौर के कई नामी सितारे, जो कभी मुमताज़ का नाम सुनकर मुंह बनाते थे, वे भी उनके साथ काम करने को बेताब रहने लगे.
मुमताज़ ने दारा सिंह से लेकर दिलीप कुमार जैसे महान कलाकारों के साथ अभिनय किया. उन्होंने शम्मी कपूर, देवानंद, संजीव कुमार, जितेंद्र और शशि कपूर जैसे सितारों के साथ काम किया, मगर राजेश खन्ना के साथ उनके काम को सबसे ज़्यादा सराहा गया. मुमताज़ और राजेश की फिल्में देखने के लिए सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ती थी.

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मुमताज़ ने लगभग दस साल तक बॉलीवुड पर राज किया है. वह शर्मिला टैगोर के समकक्ष मानी गईं और उन्हें मेहनताना भी उन्हीं के बराबर मिलता था.
सत्तर के दशक तक मुमताज़ का भी स्टार बनने का सपना सच हो गया था. उन्होंने गुजराती मूल के लंदनवासी मयूर वाधवानी नामक व्यवसायी से 1974 में शादी की और ब्रिटेन में जा बसीं. शादी के पहले उनका नाम संजय खान, फिरोज़ खान, देव आनंद जैसे कुछ सितारों के साथ जोड़ा गया था.
मुमताज़ जब 18 साल की थीं, तभी शम्मी कपूर ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज़ किया था. उस समय मुमताज़ भी शम्मी से प्यार करती थीं. शम्मी चाहते थे कि मुमताज़ अपना फिल्मी करियर छोड़कर उनसे शादी कर लें, लेकिन उनके लिए उस समय अपने परिवार को संभालना ज़रूरी थी, इसलिए मुमताज़ ने इनकार कर दिया.शादी के बाद भी मुमताज़ की तीन फिल्में रिलीज़ हुईं, जिनकी शूटिंग उन्होंने शादी से पहले ही पूरी कर ली थी. फिल्मों के प्रस्ताव हालांकि उन्हें शादी के बाद भी मिलते रहे. उन्हें 53 साल की उम्र में ब्रेस्ट कैंसर हो गया था, जिसे उन्होंने मात दी.
साल 1967 की फिल्म राम और श्याम व 1969 की फिल्म आदमी और इंसान के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिग एक्ट्रेस का अवार्ड जीता. साल 1971 में उन्हें खिलौना के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला था.

मेरी सहेली की ओर से मुमताज़ को उनके जन्मदिन पर ढेरों शुभकामनाएं. 

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