shayari

काश कि
कभी तुमने
अपने स्कूल के बस्ते को
घर लौटते वक़्त
मेरे कंधे पर रक्खा होता

काश कि मैंने
तुम्हारे साथ लूडो, सांप-सीढ़ी
इक्खट-दुक्खट और घर-घर खेला होता

काश कि मुझे मौक़ा मिला होता
रेत को अपने और तुम्हारे
हाथों से थपथपाकर
घरौंदे बनाने का

काश कि उस घरौंदे में
दरवाज़ा बनाते हुए
एक तरफ़ से आ रहे तुम्हारे
हाथ को दूसरी तरफ़ से चल रहे मेरे हाथ ने
बालू के भीतर ही छुआ होता

काश कि मेरे भीतर
तुम्हारे हाथों के छू जाने की
सिहरन का एहसास बसा होता

काश कि मुझे
मौक़ा मिला होता
तुम्हारी टूटी हुई चूड़ियां
अपने ख़ज़ाने में छुपाकर
रखने का

काश कि
तुम्हारी भोली सूरत
और कोमल हाथों से
तुम्हारे लंच के कुछ निवाले
मुझे मिले होते

काश कि तुमने मेरे
लंच के डिब्बे को सुंदर और उसके
पराठे को स्वादिष्ट कहा होता
आह!

काश कि
मैं तुम्हारे साथ
बरसात में भीगा होता
और तुम्हें भीगने से
बचाने के लिए मैंने
अपने बस्ते से
तुम्हारा सिर
ढका होता

काश कि
तुम्हारे नोट्स
मांगने के बहाने
मैं तुम्हारे घर आया होता

काश कि
मेरे दिल में क़ैद होती
वो भोली
आंखें और मुस्कान
जो किसी को दरवाजे तक
छोड़ते हुए आती हैं

काश कि
तुम्हारा बड़ा होना,
मेरे साथ हुआ होता
मैंने घंटों निहारी होती
तुम्हारी राह वो एक झलक
पाने को

काश कि
तुमसे बात करने की हिम्मत में
अनेक बार मेरी ज़ुबान
लड़खड़ाई होती

काश कि
कि तुमने भोलेपन
से पूछा होता
हां बोलो ना
और मैं
लाख बातें दिल में होते हुए
हड़बड़ाहट में कुछ बोल न पाता
और कहता
नहीं कुछ नहीं
वो एक दोस्त का इंतज़ार कर रहा था
इतना बड़ा झूठ बोलता ठीक तुम्हारी
गली में तुम्हारे अहाते के सामने खड़े होकर

काश कि
मैं अपने हाथों में गुलाब का फूल
लेकर खड़ा होता
तुम्हारे काॅलेज
जाने के रास्ते में
और महीनों की
हिम्मत के बाद भी
तुम्हें वह गुलाब दे न पाता

काश कि उसे छुपाकर
चुपके से किसी किताब में
रखा होता
हल्की पेंसिल से
आई लव यू लिखकर

काश कि
मैंने हैप्पी बर्थडे का
ग्रीटिंग कार्ड खरीदा
होता और उसे औरों की गिफ्ट के मुक़ाबले
छोटा समझ दे न पाता
उसे छुपाकर रखा होता
फिर किसी दिन
देने के लिए

काश कि
तुम्हारे रिश्ते की बात चलती और
और मैं
मना करता यह कहकर कि
अभी शादी की जल्दी क्या है
थोड़ा इंतज़ार कर लो

काश कि
तुम मेडिकल की तैयारी करती और मैं
तुम्हें देख-देखकर फेल हुआ होता
तुम डाॅक्टर बनती और मैं उस ख़ुशी में
अपने फेल होने का दुख भूल जाता

काश कि मैंने
तुम पर कमेन्ट करनेवाले लड़कों से
लड़ाई की होती

काश की मैं अपनी मां से कह पाता कि
तुम अच्छी लड़की हो

काश कि
तुम्हें जाते हुए देख
मेरी आंखें
आंसुओं से नम होतीं

काश.. काश.. काश..

मैं जानता हूं
वक़्त मुझे यह इजाज़त नहीं देता
उम्र मुझे
यह पाने की
स्वतंत्रता नहीं देती
पर ये दिल है कि
बार-बार सोचता है
काश
और इस सोच में जो उभरती है
तस्वीर वह मुझे
रोमांच से भिगो जाती है
हर काश हकीक़त नहीं होता
पर हर एहसास
छुवन को छोड़कर
ज़िंदगी की हकीक़त के सिवा
कुछ भी नहीं है.. कुछ भी नहीं है..

न जाने कितने स्पर्श के एहसास
वक़्त के साथ खो गए
लेकिन यह जो काश के स्पर्श का एहसास है
वह हर पल हृदय में
सांस की तरह चलता है
क्योंकि
वह जो चलती है तुम्हारी सांस
उसमें मैं अपनी ज़िंदगी देखता हूं

और रोज़ सुबह उठकर
दुआ मांगता हूं
उन सांसों के चलते रहने की
अपनी ज़िंदगी के लिए

वह जो उठती है उमंग की लहर
तुम्हारे सीने में
मुझे अनजाने ही भिगो जाती है
असीम आनंद के सागर में
और इसलिए प्रार्थना करता हूं
प्रभु से
कि हुलसता रहे तुम्हारा हृदय
जिससे आनंदित होता रहूं मैं
न जाने कब और कैसे
मैं अपने अस्तित्व के लक्षण
तुम्हारी संपूर्णता में
देखने लगा हूं
और इसीलिए काश के साथ जीते हुए भी
मैं तुम्हारे एहसास के साथ हूं…

– शिखर प्रयाग

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Kavya

बरखा रानी लगता है तुम, युगों के बाद आई हो
धरती की प्यास बुझाने, कितनी ठंडक लाई हो

मीठी यादें, अल्हड़ सपने, तुम झोली में भर लाई हो
तपते-जलते आकुल मन में, बनके शांति मुस्काई हो

सूरज की तपिश झेलकर, तुम वाष्प बन जाती हो
फिर अंबर के आंगन में, संगठित हो जाती हो

अपने अस्तित्व को खोकर, सबकी प्यास बुझाती हो
परिवर्तन और त्याग ही जीवन है, ये पाठ पढ़ाती हो

भावना प्रकाश

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Kavita- Barkha Rani

बहुत कम लोग जानते हैं कि मशहूर अदाकारा मीना कुमारी को शायरी का भी शौक़ था. शायरी का ये शौक़ ही उन्हें गुलजार के करीब ले गया था. मीना कुमारी के शायराना अंदाज़ और अदाकारी पर गुलजार बहुत फिदा थे. फ़ुर्सत के लम्हों में दोनों शेर-ओ-शायरी पर बातें किया करते थे. फिर एक दिन मीना कुमारी अपनी तमाम निजी डायरियां गुलज़ार को सौंपकर दुनिया से रुख़सत हो गईं. मीना कुमारी की जाने के बाद उनकी लिखी नज़्मों और ग़ज़लों को गुलज़ार ने एक नया कलेवर देकर ‘मीना कुमारी की शायरी’ नामक किताब प्रकाशित करवाई. आप भी पढ़िए मशहूर अदाकारा मीना कुमारी की चुनिंदा शायरी.

Actress Meena Kumari

मशहूर अदाकारा मीना कुमारी की चुनिंदा शायरी
आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा
बुझ गई आस छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआँ तन्हा

यूँ तेरी रहगुज़र से दीवाना-वार गुज़रे
काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे
बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडर सजा कर
शायद इसी तरफ़ से इक दिन बहार गुज़रे

बरसात मुबारक हो, ये साथ मुबारक हो
हर दिन रहे सलोना, हर रात मुबारक हो
सँवलाई हुई शामों को, हर सुब्ह मुबारक हो
हिचकी हो या सिसकी हो, हर नग़्मा मुबारक हो

रूह का चेहरा किताबी होगा
जिस्म का रंग उन्नाबी होगा
शरबती रंग से लिक्खो आँखें
और एहसास शराबी होगा

तेरे क़दमों की आहट को ये दिल है ढूँडता हर दम
हर इक आवाज़ पर इक थरथराहट होती जाती

हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह

कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू
जो मेरी रात थी वो आप का सवेरा है

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फिल्मी दुनिया की सुपरस्टार मीना कुमारी ने अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाकारी से लाखों दिलों पर राज किया, लेकिन असल ज़िंदगी में वो हमेशा अकेलेपन से लड़ती रही और हमेशा प्यार के लिए तरसती रह गई. कमाल अमरोही से लेकर धर्मेंद्र तक सबने मीना कुमारी को प्यार में धोखा दिया ही दिया. बॉलीवुड में ट्रेजेडी क्वीन के नाम से जानी जाने वाली मीना कुमारी का असली नाम महज़बीं बानो था. महज़ चार साल की उम्र से उनके पिता ने मीना कुमारी को फिल्मों में काम करने को मजबूर कर दिया था, फिर उसके बाद मीना कुमारी के संघर्ष का सफर कुछ यूं शुरू हुआ कि उनके इस दुनिया से जाने के बाद ही उनकी रूह को आराम मिला होगा. मीना कुमारी जितनी खूबसूरत थीं, उतनी दी दर्दभरी थी उनकी ज़िंदगी. आइए, हम आपको मीना कुमारी के अधूरे प्रेम की दर्दभरी दास्तान सुनाते हैं. मीना कुमारी ने हर बार टूटकर इश्क़ किया, लेकिन हर बार मोहब्बत में उन्हें धोखा ही मिला. 

Meena Kumari

पिता से लेकर प्रेमी तक, हर किसी ने मीना कुमारी को सिर्फ दर्द ही दिया
मीना कुमारी का बचपन ग़रीबी में गुजरा. मीना कुमारी का परिवार मुम्बई की एक चॉल में रहता था. जब मीना कुमारी का जन्म हुआ, तो घर में पहले से दो बेटियां होने के कारण उनके पिता उन्हें एक अनाथालय के बाहर छोड़ आए, लेकिन कुछ दूर जाने पर उनसे अपनी बेटी का रोना देखा नहीं गया और वो उसे घर ले आए. जब परिवार की तंगहाली और ज़्यादा बढ़ने लगी, तो मीना कुमारी के पिता ने महज़ चार साल की उम्र से ही उन्हें फिल्मों में काम करने को मजबूर कर दिया. महज़बीं उर्फ़ मीना कुमारी के अब्बू उन्हें जबरदस्ती मार-पीट कर फिल्मों के सेट पर ले जाया करते थे. नन्हीं महजबीं पढ़ना चाहती थीं, दूसरे बच्चों की तरह खेलना-कूदना चाहती थी, लेकिन उनके अब्बू ने न तो उन्हें पढ़ने दिया और न ही उन्हें अपना बचपन जीने दिया, उनके अब्बू ने सिर्फ उनसे काम करवाया. इसी वजह से मीना कुमारी को अपने पिता से नफरत-सी हो गई थी.

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जब मीना कुमारी को कमाल अमरोही से हुआ प्यार 
ये उन दिनों की बात है जब ‘महल’ फिल्म को निर्देशित करने के बाद कमाल अमरोही रातोंरात स्टार बन गए. मीना कुमारी ने जब कमाल अमरोही की तस्वीर एक मैगजीन में देखी, तो वो उनसे बहुत प्रभावित हुई. फिर कुछ समय बाद मीना कुमारी किसी मित्र के माध्यम से कमाल अमरोही से मिलीं. इस मुलाक़ात के बाद कमाल अमरोही ने मीना कुमारी को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन किया. ये फिल्म तो नहीं बन पाई, लेकिन इन दोनों की प्रेम कहानी शुरू हो गई. कमाल अमरोही दो शादियां कर चुका थे और तीन बच्चों के पिता थे, फिर भी मीना कुमारी ने उन्हें टूटकर चाहा. जब मीना कुमारी का एक छोटा-सा एक्सीडेंट हुआ और वो उस वक़्त पुणे में हॉस्पिटल में भर्ती थी, तो कमाल अमरोही उनसे मिलने मुंबई से पुणे जाया करते थे. अपने अब्बू के डर से मीना कुमारी ने चुपके से कमाल अमरोही से निकाह कर लिया, जब उनके पिता को इस बात का पता चला, तो उन्हें ये बात बर्दाश्त नहीं हुई. उन्हें ये बात पसंद नहीं थी कि कमाल अमरोही की पहले से दो बीवियां और तीन बच्चें थे और वो मीना कुमारी से उम्र में बहुत बड़े थे. मीना कुमारी के पिता ने उनकी शादी तोड़ने की भी कोशिश की, लेकिन मीना कुमारी पूरी तरह कमाल अमरोही के प्यार में पागल थीं. आखिरकार मीना कुमारी अपनी सारी कमाई अपने अब्बू के घर छोड़ सिर्फ कुछ साड़ियां लेकर रात में  कमाल अमरोही के घर उनके साथ रहने चली गईं. शादी के पहले तक तो सब ठीक था, लेकिन शादी के बाद कमाल अमरोही बदलने लगे, वो अब प्रेमी से पति जो बन चुके थे. मीना कुमारी का करियर बहुत अच्छा चल रहा था, जिसके चलते कमाल अब मीना कुमारी की कामयाबी से जलने लगे थे. साथ ही वो उन पर शक भी करने लगे थे. कमाल अमरोही ने मीना कुमारी को कभी अपने बच्चे की मां नहीं बनने दिया, मीना कुमारी ने अपना प्यार और अपनी गृहस्थी बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन वो कामयाब न हो सकी. आखिरकार हार कर 12 साल बाद मीना कुमारी ने कमाल अमरोही का घर छोड़ दिया.

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Meena Kumari kamal amrohi

मीना कुमारी और धर्मेंद्र की प्रेम कहानी
जब धर्मेंद्र फिल्म इंडस्ट्री में आए, उस समय मीना कुमारी बहुत बड़ी स्टार बन चुकी थीं. मीना कुमारी की सिफारिश पर धर्मेंद्र को कई फिल्मों में काम मिला. दरअसल मीना कुमारी को धर्मेंद्र का मेंटॉर कहा जा सकता है. वो धर्मेंद्र को एक्टिंग की बारीकियां सिखाती थीं. मीना कुमारी ने ही धर्मेंद्र के व्यक्तित्व को निखारा. फिर फिल्मों में साथ काम करते हुए दोनों करीब आ गए, लेकिन मुश्किल ये थी कि वो दोनों ही उस समय शादीशुदा थे इसलिए उनका इश्क़ अधूरा ही रह गया. जानने वाले बताते हैं कि जब मीना कुमारी बहुत ज्यादा बीमार हो गईं, तो आखिर तक जो चंद फिल्मी दोस्त उनसे मिलने आते थे, उनमें धर्मेंद्र भी एक थे. 

Meena Kumari Dahrmender

मीना कुमारी और गुलज़ार की प्रेम कहानी
कमाल अमरोही हमेशा मीना कुमारी पर पहरे लगाकर रखते थे. उनके मेकअप रूम में किसी मर्द को जाने नहीं देते थे, लेकिन पति की ज़्यादतियों से तंग आ चुकी मीना कुमारी अब विद्रोही हो चुकी थी. मीना कुमारी कुछ पल अपने लिए जी लेना चाहती थी. इसी के चलते वो गुलज़ार के भी करीब आईं. उस समय मीना कुमारी और गुलज़ार की प्रेम कहानी का ज़िक्र भी खूब हुआ करता था. ऐसा कहा जाता है कि एक बार मीना कुमारी ने स्टूडियो में गुलज़ार को बुलाया और सबके सामने अपना प्यार ज़ाहिर किया. उसके बाद मीना कुमारी अपने पति के घर से चली गईं, फिर वो अपनी बहन के साथ रहने लगीं. दरअसल, मीना कुमारी को शायरी लिखना बहुत पसंद तह. शायरी का ये शौक़ ही उन्हें गुलजार के करीब ले गया था. मीना कुमारी के शायराना अंदाज़ और अदाकारी पर गुलजार भी फिदा थे. फ़ुर्सत के लम्हों में दोनों शेर-ओ-शायरी पर बातें किया करते थे. मीना कुमारी अपनी तमाम निजी डायरियां गुलज़ार को सौंपकर दुनिया से रुख़सत हो गईं. फिर मीना कुमारी की लिखी नज़्मों और ग़ज़लों को गुलज़ार ने एक नया कलेवर देकर ‘मीना कुमारी की शायरी’ नामक किताब प्रकाशित करवाई, लेकिन डायरियों में लिखा बहुत कुछ कभी बाहर नहीं आ सका.

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Meena Kumari Gulzar

कई लोगों से जोड़ा गया था मीना कुमारी का नाम
मीना कुमारी का नाम कई लोगों के साथ जोड़ा गया था. फिल्म बैजू बावरा के निर्माण के दौरान अभिनेता भारत भूषण भी मीना कुमारी के प्रति अपने प्रेम का इज़हार कर चुके थे. इसी तरह अभिनेता राजकुमार को मीना कुमार से इस कदर मोहब्बत हो गई थी कि वो मीना कुमारी के साथ काम करते हुए सेट पर अपने डायलॉग भूल जाते थे.

Meena Kumari

मीना कुमारी को ऐसे पड़ी थी शराब पीने की लत
फिल्मी करियर में बेहद सफलता मिलने के बाद भी मीना कुमारी को कभी प्रेम नहीं मिल पाया, वो हमेशा तन्हाई से लड़ती रहीं. ऐसा कहा जाता है कि कमाल अमरोही के साथ अपने असफल रिश्ते और धर्मेंद्र के साथ अपने अधूरे प्रेम संबंध की वजह से मीना कुमारी इस तरह डिप्रेशन में चली गईं कि उन्होंने शराब को अपना साथी बना लिया. अभिनय की दुनिया में आसमान-सी ऊंचाई हासिल करने वाली मीना कुमारी अपनी पर्सनल लाइफ से हार गई. मीना कुमारी को शराब की ऐसी लत लगी कि इस लत ने ही उनकी जान ले ली और महज चालीस साल की उम्र में महजबीं उर्फ मीना कुमारी ने ज़िंदगी को अलविदा कह दिया.

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मेरे प्रेम की सीमा

कितनी है, क्या है

तुम्हें क्या पता है?

बहुत छोटी हैं वो

मन की रेखाएं

Kavita

नाराज़ होे तो हंसना

ख़ामोश हो, खिलखिलाना

उदास हो, मुस्कुराना

दुखी हो, ख़ुश होना

 

झगड़े के बाद पूछना

छोड़ो न ग़ुस्सा अब

सह नही सकती

चुप हूं तो कहना

बोलो न क्यूं सताना

रुठो तुम, मेरा मनाना

 

मन नहीं लग रहा

गुमसुम रहना तुम्हारा

भला नहीं लग रहा

यही अंतिम परिधि है

तेरा खिलखिलाना

मुस्कुराना, मान जाना

 

अंत है, यही मेरी

प्रेम, सीमाओं का

नहीं चाहिए, आकाश

कायनात, न ही अनंत

अंतरिक्ष, न अलक्षित

अगणित तारे, न सितारे

 

न रेत के कण

या समय के क्षण

मेरे प्यार की

परिणीति भी

केंद्र भी, बिंदु भी

स़िर्फ इतनी छोटी है

ख़ुशियों की रेखाएं

 

स़िर्फ तुम्हारी हूं

क्यूं हूं कब से हूं

इतना सा सुनो ना

यही हैं सीमाएं,

मेरे प्रेम की

पता है तुम्हें

और कुछ भी नहीं

अनंत प्रेम मेरा

कैसी, क्यूं, कौन-सी

टूट गई बाधाएं

 

आगे बढ़ चुकी हूं

छोड़ सभी सीमाएं

साथ ले असीम आशाएं

हे प्रिय, तुम्ही में समाहित

दसों दिशाएं असीमित

सीमाएं…

– निरंजन धुलेकर

 

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जब ज़िक्र फूलों का आया याद तुम आए बहुत

चांद जब बदली से निकला, याद तुम आए बहुत

Gazal

कुछ न पूछो किस तरह परदेस में जीते हैं हम

ख़त तो आया है किसी का, याद तुम आए बहुत

यार आए थे वतन से प्यार के क़िस्से लिए

दिल है धड़का बेतहाशा, याद तुम आए बहुत

मैं हूं कोसों दूर तुम से उड़ के आ सकता नहीं

जब भी चाहा है भुलाना, याद तुम आए बहुत

जब हवा पूरब से आ सरगोशियां करने लगी

दिल में एक तूफ़ां उठा था, याद तुम आए बहुत

Vedprakash Pahwa

वेद प्रकाश पाहवा ‘कंवल’

यह भी पढ़ेShayeri

खिलौनों की एक ख़ूबसूरत दुनिया होती है. ऐसे में टेडी बियर से तो बच्चे, सितारे, स्टार किड्स के साथ-साथ प्रेम दीवानों का ख़ास लगाव रहा है. वेलेंटाइन वीक का चौथा दिन टेडी डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लव बर्ड्स ख़ासतौर पर एक-दूसरे को टेडी देकर प्यार में बचपना, मासूमियत व चुलबुलेपन को बढ़ाते हैं.

Happy Teddy Day

हिंदी फिल्मों में टेडी से जुड़े न जाने कितने सीन्स, मोहब्बत के इज़हार, दीवानगी, पागलपन देखने को मिलते रहे हैं. मैंने प्यार किया फिल्म का वो सीन भला कोई कैसे भूल सकता है, जब भाग्यश्री प्यार से टेडी को लिए हुए हैं सलमान ख़ान से दोस्ती व प्यार का साथ एंजॉय करती हैं.

Happy Teddy Day

शाहरुख ख़ान की कुछ कुछ होता है में तो शाहरुख अपनी बेटी के लिए टेडी बियर की लाइन लगा देते हैं. अक्सर फिल्मों में प्रेम प्रदर्शन के लिए टेडी का ख़ूब इस्तेमाल हुआ है. ऋतिक रोशन और ईशा देओल की फिल्म ना तुम जानो ना हम में भी टेडी से जुड़े कई ख़ूबसूरत दृश्य देखने को मिलते हैं, ख़ासकर फिल्म का क्लाइमैक्स.

Happy Teddy Day

जाह्नवी कपूर ने अपनी बहन ख़ुशी को टेडी बियर के साथ मिस करते हुए पिक्चर शेयर किए थे, जो फैन्स के बीच ख़ूब वायरल हुए. एक बार सलमान ख़ान हॉलीवुड स्टार जैकी चेन से यूनिसेफ के टेडी के साथ ही मेल-मिलाप करते नज़र आए. यानी बचपन, प्यार, दोस्ती के साथ-साथ टेडी सद्भावना, आपसी जुड़ाव व अर्थपूर्ण संदेश का भी प्रतीक रहा है.

Happy Teddy Day

छोटे पर्दे के सितारे भी अपना टेडी प्रेम दर्शाते रहे हैं. कई सीरियल्स में इससे जुड़े ख़ूबसूरत माहौल मिल ही जाते हैं. तस्वीरों के ज़रिए भी टीवी स्टार्स ने अपने टेडी लव को एक्सप्रेस करते रहे हैं.

Happy Teddy Day

फिल्में, सितारों के साथ-साथ सेलिब्रेटीज़ के बच्चों में भी टेडी को लेकर काफ़ी आकर्षण रहा है. सोहा अली ख़ान और कुणाल खेमू की बिटिया रानी इनाया तो टेडी के पीछे क्रेज़ी है. अक्सर इस लिटिल डॉल की टेडी के साथ मासूम अदाओं वाले फोटोज़ देखे जा सकते हैं.

टेडी को लेकर शायरी, कविताएं, गाने, चुटकुलों की ख़ूब धूम रही है. जिन्हें सुनकर व देखकर आप भी जहां मुस्कुरा देंगे, वहीं रोमानी भी हो जाएंगे.

टेडी बियर से जुड़ा दिलचस्प क़िस्सा

टेडी बियर खिलौने से जुड़ा हुआ एक वाकया आप सभी के साथ शेयर करने की इच्छा हो रही है कि कैसे इसका नाम पड़ा और इसकी कहानी क्या है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट का निकनेम टेडी था और उनके नाम पर यही टेडी बियर मशहूर हुआ. कहानी कुछ यूं है कि साल 1902 में थियोडोर रूजवेल्ट मिसिसिपी में शिकार के लिए गए. उसी दरमियान उनके सहायक ने एक ब्लैक कलर के बियर (भालू) को पेड़ से बांधकर उनके शिकार के लिए पेश किया, लेकिन थियोडोर ने ऐसा करने से मना कर दिया. उनके अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं और यह शिकार के नियमों के विरुद्ध भी है. उनकी यह भलमनसाहत चारों तरफ़ फैल गई. तब कलाकार क्लिफोर्ड बेरीमैन, जो पॉलिटिक्स से जुड़े कार्टून बनाते थे. इसे लेकर एक कार्टून बनाया, जिससे मॉरिस मिचटॉम व उनकी पत्नी रोज़ इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने टेडी बियर स्टफ्ड टॉयज़ बनाने का ़फैसला कर किया. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति रूजवेल्ट से आज्ञा भी ली और इस खिलौने को उनका नाम देकर दुनियाभर में मशहूर कर दिया. आज टेडी बियर विश्‍वभर में बेहद डिमांड में रहनेवाले खिलौनों में से एक है.

सभी प्यार करनेवालों को यह प्यारभरा सप्ताह मुबारक हो. हैप्पी वेलेंटाइन डे इन एडवांस, तो हैप्पी टेडी डे की ढेर सारी बधाइयां!…

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Kavay

मैं तुम्हारी हर चीज़ से

प्यार करती हूं

न चाहते हुए भी

जैसे

तुम्हारे सिगार की महक

बिस्तर पर फेंकी

हुई तुम्हारी टाई

ज़मीन पर पड़े बेतरतीब जूते

बाथरूम में पड़ा शेविंग रेजर

वैसे

तुम्हारी किताब में रखे सूखे

गुलाब भी समझते हैं

मेरे मौन को

और मोबाइल में रखी

ढेर सारी तस्वीरें भी

मुझे परेशान नहीं करती

क्योंकि

तुम्हारा साथ तो पा लिया

पर प्यार नहीं पाया

फिर भी मैं

प्यार करती हूं

तुम्हारी सब

प्रेमिकाओं से

हां

मैं तुम्हारी हर चीज़ से

प्यार करती हूं…

              – नीरज कुमार मिश्रा

यह भी पढ़ेShayeri

नज़रें जो उनकी बदलीं, ज़माने बदल गए

मयखाना तो वही है, पैमाने बदल गए

Kavay

तुम पूछते हो उनके, जाने से क्या हुआ

होंठों के गुनगुनाते, तराने बदल गए

वादा वो करके आए थे, न आए हैं वो अब

हर रोज़ उनके न आने के, बहाने बदल गए

जज़्बा मुहब्बतों का, है पाक आज भी

फिर क्यों मुहब्बतों के, फसाने बदल गए

कहने को क्या नहीं है, अब आदमी के पास

लेकिन अब दौलतों के, ख़ज़ाने बदल गए

नज़रें जो उनकी बदलीं, ज़माने बदल गए

मयखाना तो वही है, पैमाने बदल गए

Dinesh Khanna

  दिनेश खन्ना

यह भी पढ़ेShayeri

Kavay

लिपटकर रो लेती गर तुम होते

ग़म कुछ कम होते गर तुम होते

बांहों में सिमट जाते खो जाते गर तुम होते

तुम्हारे हो जाते गर तुम होते

कल भी पुकारा था दोराहे पर

आंख न नम होती गर तुम होते

हां उसी मोड़ पर जाकर देखा है अभी

साथ-साथ चलती गर तुम होते

मुकम्मल हो जाती मुहब्बत मेरी

हां तुम गर तुम बस तुम होते…

 

– विद्यावती

यह भी पढ़ेShayeri

दग़ाबाज़ दुनिया हसीं दिख रही है

बता साकिया तूने क्या दे दिया है

दराज़-ए-उमर की दुआ देने वालों

न दो बद्दुआएं, बहुत जी लिया है

Shayari

क़यामत बने या 1 हशर वो बला से

हमें क्या, गिरेबान को सी लिया है

 

बहुत देख ली है फ़रेबों की दुनिया

उठा ले ख़ुदाया, बहुत जी लिया है

निगाहों में 2 वहशत, ज़बां बहकी-बहकी

न जाने ‘कंवल’ ने ये क्या पी लिया है

Vedprakash Pahwa

वेद प्रकाश पाहवा ‘कंवल’

  1. मुसीबत 
  2. पागलपन

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Kavay

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