Shooting

श्रद्धा कपूर
श्रद्धा कपूर हो गई हैं 30 साल की. अपने 7 साल के करियर में कई बेहतरीन फिल्में करके बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बना ली है. 3 मार्च 1987 को मुंबई में शक्ति कपूर और शिवांगी कपूर के यहां श्रद्धा का जन्म हुआ. इस बार श्रद्धा ने अपना बर्थडे पहले ही मना लिया था, क्योंकि जन्मदिन पर वो शूटिंग कर रही हैं.

 श्रद्धा की अपकमिंग फिल्मों में हसीना द क्वीन और हाफ गर्लफ्रेंड में काम कर रही हैं. टि्वटर पर भी श्रद्धा ने केक कटिंग के पिक्चर्स शेयर किए हैं.

 

आईएसएसएफ (ISSF) वर्ल्ड कप 2017 (इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन) निशानेबाज़ी में भारत के शीर्ष निशानेबाज़ जीतू राय और हीना सिद्धू ने 10 मीटर पिस्टल मिक्स्ड इवेंट में भारत के लिए गोल्ड जीतकर सभी देशवासियों को ख़ुश कर दिया है. इस इवेंट को पहली बार प्रतियोगिता में शामिल किया गया है और ऐसे में मेज़बान भारत ने ही इसे जीतकर देशवासियों को जीत को बेहतरीन तोहफ़ा दिया.

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भले ही भारत ने मिक्स्ड इवेंट जीत लिया हो, पर यह मेडल भारत के खाते में गिना नहीं जाएगा, क्योंकि इस प्रतियोगिता की शुरुआत इसी साल हुई है और अभी इसे ट्रायल बेसेस पर रखा गया है. हांलाकि आईएसएसएफ फेडरेशन कमिटी ने इसे अप्रूव कर दिया है, पर अभी तक इसे ओलिंपिक्स कमिटी ने अप्रूव नहीं किया है. मिक्स्ड इवेंट को लैंगिक समानता से जोड़कर देखा जा रहा है. इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य 2020 में टोक्यो में होनेवाले जेंडर इक्वैलिटी पर फोकस करना है. मिक्स्ड जेंडर इवेंट को शामिल करने की सलाह अभिनव बिंद्रा की अगुवाई वाली आईएसएसएफ की ऐथलीट कमिटी ने दी थी.
मिक्स्ड इवेंट के बाद आई दूसरी ख़बर ने निशानेबाज़ी के शौक़ीनों को और भी ख़ुश कर दिया, जब भारत के स्टार शूटर जीतू राय ने ब्रॉन्ज़ मेडल पर निशाना साधा. जीतू राय से देश को काफ़ी उम्मीदें थीं और वो उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरे हैं. इससे पहले इस प्रतियोगिता में पूजा घटकर ने ब्रॉन्ज़ और अंकुर मित्तल सिल्वर मेडल जीत चुके हैं.

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2008 बीजिंग ओलिंपिक में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाने का गौरव देनेवाले, देश की शान बढ़ानेवाले निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा को मेरी सहेली की ओर से जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. 28 सितंबर 1982 को उत्तराखंड में जन्मे अभिनव ने महज़ 26 साल की उम्र में देश के लिए वो कारनामा कर दिखाया था, जो अब तक किसी ने नहीं किया. बीजिंग ओलिंपिक में देश को 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में जब गोल्ड मेडल मिला था और दुनिया के सामने भारत का तिरंगा लहराया था, उस व़क्त अभिनव की उपलब्धि पर स़िर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्‍व में तहलका मच गया था. अभिनव के जन्मदिन के मौ़के पर एक नज़र डालते हैं उनकी अब तक की उपलब्धियों पर. (Abhinav Bindra)

सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने
अभिनव बिंद्रा के नाम कई रिकॉर्ड हैं. अभिनव भारत के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे, जिन्होंने मलेशिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया. इतना ही नहीं 2000 सिडनी ओलिंपिक में हिस्सा लेनेवाले अभिनव बिंद्रा भारत की ओर से सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे.

म्यूनिख में जब दंग रह गए लोग
2001 म्यूनिख वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर बिंद्रा ने अपनी फील्ड के धुरंधरों के होश उड़ा दिए थे

कॉमनवेल्थ गेम्स में है एकक्षत्र राज
अभिनव बिंद्रा वैसे तो अपने खेल में माहिर हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 2002 से लेकर अब तक के हर कॉमनवेल्थ गेम्स में बिंद्रा ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है. बिंद्रा ने 2002, 2006, 2010 और 2014 में स्वर्ण पदक जीता.

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ओलिंपिक में दिलाया देश को पहला स्वर्ण पदक
ओलिंपिक में देश को इंडिविज़ुअल गेम में पहला स्वर्ण पदक दिलानेवाला कोई और नहीं, बल्कि अभिनव बिंद्रा ही हैं. दुनिया के सामने भारतीय राष्ट्रगान का मान बढ़ाने का कारनामा अभिनव ने 2008 बीजिंग ओलिंपिक में किया था.

2016 ओलिंपिक में कुछ पॉइंट्स से चूक गए थे अभिनव
अब इसे भाग्य का खेल ही कहेंगे कि लगातार दमदार खेल का प्रदर्शन करनेवाले अभिनव जब रियो ओलिंपिक में प्रदर्शन करने उतरें, तो वह कुछ पॉइंट्स से पीछे रह गए और देश को कोई भी मेडल नहीं दिला पाए. इसमें अभिनव के खेल की कोई कमी नहीं थी, बल्कि उनके राइफल के बदलने से ये सब हुआ था.

अवॉर्ड्स की लिस्ट
2000 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से नवाज़ा गया.
2001 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.
2009 में पद्म भूषण अवॉर्ड मिला.

जब माता-पिता ने घर में ही बनवाया शूटिंग रेंज
बचपन से ही होनहार अभिनव के करतब का अंदाज़ा उनके माता-पिता को हो गया था. तभी तो घर में ही उन्होंने शूटिंग रेंज बनवा दिया, ताकि अभिनव अपने अनुसार प्रैक्टिस कर सकें.

शूटिंग को कहा अलविदा
सफलता के शिखर पर पहुंचकर संन्यास लेने की बात करके बिंद्रा ने अपने प्रशंसकों के साथ ही शूटिंग वर्ल्ड को भी चौंका दिया है. हाल ही में अभिनव ने शूटिंग से संन्यास ले लिया. अभिनव ने कहा कि अब इस फील्ड में नए खिलाड़ियों को मौक़ा देना चाहिए. हम आपको बता दें कि भले ही अभिनव शूटिंग ट्रैक पर आपको दिखाई नहीं देंगे, लेकिन वह खेल से जुड़े रहेंगे और उभरते हुए खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे.

– श्वेता सिंह