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बच्चों को कहां लेकर जाएं? (Where can you take your children along?)

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ज़्यादातर पैरेंट्स मानते हैं कि जब तक बच्चे उछलकूद करने लायक नहीं हो जाते, उन्हें साथ लेकर घूमना-फिरना आसान होता है, लेकिन एक्सपर्ट्स इस धारणा से सहमत नहीं. वे मानते हैं कि नवजात शिशु के साथ बाहर जाने पर अपेक्षाकृत ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. छोटे बच्चों को किन जगहों पर ले जाना ठीक नहीं और उन्हें ले जाते समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

 

पिक्चर हॉलः अपने छोटे बच्चे के साथ पहली बार फ़िल्म देखने जाते समय अक्सर मांओं को लगता है कि पिक्चर हॉल में अंधेरा होता है, इसलिए बच्चे को आराम से नींद आ जाएगी और वे इत्मिनान से फ़िल्म देख सकेंगी.
एक्सपर्ट्स कहते हैं- यह धारणा बिल्कुल ग़लत है. घर में वैक्यूम क्लीनर, मिक्सर आदि की आवाज़ ही जब छोटे बच्चे को परेशान कर देती है, तो अंदाज़ा लगाइए कि थियेटर का तेज़ साउंड बच्चे को कितना बेचैन करेगा. एक्सपर्ट्स के अनुसार, 90 डेसीबल या उससे तेज़ आवाज़ बच्चे की सुनने की शक्ति पर बुरा प्रभाव डालती है. आजकल तो बच्चों की फ़िल्मों में भी 130 डेसीबल तक का साउंड होता है. ऐसे में बच्चे का रोना लाज़मी है, जिससे आपके साथ-साथ आपके आसपास बैठे दर्शकों को भी परेशानी होती है.

क्या करें?

* छोटे बच्चे के साथ थियेटर जाने से परहेज़ करें. फ़िल्म की डीवीडी आने का इंतज़ार करें.

* अगर फ़िल्म देखने की बहुत इच्छा हो रही हो तो बच्चे की सेहत को ध्यान में रखते हुए ऐक्शन और स्पेशल इ़फेक्ट वाली फ़िल्मों के बजाय डायलॉग बेस्ड फ़िल्म देखें.

* इससे बच्चे को कम परेशानी होगी. हो सके तो थियेटर में पीछे व कोने की सीट की टिकट ख़रीदें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर बच्चे को लेकर आसानी से बाहर निकला जा सके.

शॉपिंग: बच्चे व अपने लिए नए कपड़े या अन्य सामान ख़रीदने के लिए अक्सर महिलाएं नवजात शिशु को स्ट्रॉलर में लिटाकर शॉपिंग के लिए निकल पड़ती हैं.
एक्सपर्ट्स कहते हैं- छोटे बच्चे के साथ शॉपिंग करने में कोई बुराई नहीं है. हां, इसके लिए थोड़ी प्लानिंग ज़रूर करनी चाहिए.

क्या करें?
* ऐसे मॉल का चुनाव करें जहां भरपूर खुली जगह हो और ड्रेसिंग रूम भी बड़ा हो, ताकि ज़रूरत पड़ने पर बच्चेे के कपड़े, डायपर आदि आसानी से बदले जा सकें.

* बच्चे के साथ पहली बार शॉपिंग थोड़ी मुश्किल हो सकती है, लेकिन इससे घबराएं नहीं.

* दो-तीन बार साथ जाने के बाद आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि बच्चा कितनी देर तक उस माहौल को एंजॉय करता है और कितनी देर बाद रोना शुरू कर देता है.

* शॉपिंग के दौरान ही अगर बच्चा रोना शुरू कर दे और उसके चुप होने के आसार नज़र न आएं तो मां के लिए घर लौटने में ही भलाई है.

शादी का फंक्शनः पैरेंट्स सोचते हैं कि बच्चे को परिवार के सभी सदस्यों और दोस्तों को दिखाने का इससे अच्छा मौक़ा हो ही नहीं सकता.
एक्सपर्ट्स कहते हैं- शादी-ब्याह के घर में चहल-पहल और हंसी-मज़ाक होना आम बात है. ऐसा माहौल बच्चे को रास नहीं आता और वो परेशान होने लगता है. साथ ही क़रीबी रिश्तेदार बच्चे को गोद में लेकर किस (चुंबन) करते रहते हैं. इससे न स़िर्फ बच्चे को इंफेक्शन का ख़तरा रहता है, बल्कि इतने सारे अनजान चेहरे देखकर वह डर भी सकता है.

क्या करें?

* बच्चे के साथ बहुत ज़रूरी फंक्शन में ही जाएं.

* साथ ही खुले मैदान में होने वाले फंक्शन में जाने से परहेज़ करें.

* घर में होने वाले फंक्शन में जाएं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर बच्चे को लेकर अलग रूम में जाया जा सके.

* अगर समय या मौसम बच्चे के अनुकूल नहीं है तो अकेले जाने के बजाय साथ में किसी और को भी ले जाएं, जो बच्चे की देखभाल में मदद कर सके.

रेस्टॉरेंटः अधिकतर पैरेंट्स को लगता है कि बच्चे के मुंह में दूध की बोतल डालकर परिवार या दोस्तों के साथ आराम से बातें करते हुए खाने का लुत्फ़ उठाया जा सकता है.
एक्सपर्ट्स कहते हैं- रेस्टॉरेंट के शोरगुल भरे माहौल और खाने की महक के कारण अक्सर बच्चा बेचैन होकर रोने लगता है.

क्या करें?
* रेस्टॉरेंट जाने का मन है तो कम भीड़भाड़ वाले समय में जाएं.

* बच्चे का खिलौना साथ रखना न भूलें. नॉर्मल चेयर के बजाय थोड़ी गद्देदार कुर्सी पर बैठें.

* ऐसा खाना ऑर्डर करें जिसे एक हाथ से आसानी से खाया जा सके, ताकि दूसरे हाथ से बच्चे को पकड़ कर रखा जा सके.

* हो सके तो रेस्टॉरेंट जाने से पहले फ़ोन पर मैनेजर से पूछ लें कि छोटे बच्चों के लिए वह जगह उपयुक्तहै या नहीं.

– अमज़द हुसैन अंसारी

अन्य पेरेंटिंग संबंधित जानकारी अथवा टिप्स के लिए यहाँ क्लिक करे – Parenting Tips

हेल्दी शॉपिंग के 28 टिप्स (Money-Saving Shopping Tips)

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स्वस्थ रहने की शुरुआत होती है, हेल्दी शॉपिंग के साथ. बड़ा आसान-सा फिटनेस मंत्र है कि हेल्दी खरीदेंगे, तो हेल्दी खाएंगे. सुपरमार्केट जाने से पहले तैयार कीजिए सेहतभरी एक लिस्ट और अपनी शॉपिंग को बनाइए आसान और स्वस्थ.healthy grocery shopping

 

शॉपिंग की योजना बनाएं

– शॉपिंग पर जाने से पहले क्या ख़रीदना है, कितना ख़रीदना है, यह तय करना ज़रूरी है. इसलिए आराम से बैठकर एक लिस्ट तैयार कर लें.
– शॉपिंग की सूची में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स, लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स, फल, हरी सब्ज़ियों आदि को जगह दें.
– जो लिस्ट बनाई है, उस पर कायम रहें, ताकि शॉपिंग के दौरान आपका समय बचे और आप कंफ्यूज़ न हों.

शॉपिंग पर जाने से पहले

– हेल्दी शॉपिंग का पहला रूल है कि कभी भी भूखे पेट शॉपिंग करने न जाएं.
– एक रिसर्च के मुताबिक़, जो भूखे पेट शॉपिंग करते हैं, वो ज़रूरत से ज़्यादा सामान ख़रीद लेते हैं, जिनमें ज़्यादातर जंक फूड्स होते हैं.
– सवाल उठता है, क्या खाकर शॉपिंग करें? इसका जवाब ये है कि जब कुछ खाना ही है, तो क्यों न कुछ लाइट और पौष्टिक खाएं, जैसे- फल.
– विदेश में हुई एक स्टडी की मानें, तो जो पौष्टिक चीज़ें खाकर शॉपिंग करते हैं, उनकी ट्रॉली में सेहदमंद आहार ज़्यादा नज़र आता है.
– बच्चों को साथ न ले जाएं. बच्चे आपको जंक फूड की ओर खींचेंगे और मजबूरन आपको कुछ न कुछ ख़रीदना पड़ेगा.
– अपने साथ किसी ऐसी सहेली को ले जा सकती हैं, जो फिटनेस फ्रीक हो. वह आपको सही और पौष्टिक खाद्य पदार्थ चुनने में मदद कर सकती है.

शॉपिंग मॉल में

– शॉपिंग मॉल में अपनी ट्रॉली के साथ पहले एक चक्कर लगाएं, ताकि आपको पता हो कौन-सी चीज़ कहां मिल रही है? और किस पर क्या ऑफर चल रहा है?
– इसी बहाने आपकी अच्छी-ख़ासी वॉक भी हो जाएगी.
– एक पर एक फ्री के चक्कर में न पड़ें. ऐसे ऑफर्स अक्सर जंक फूड्स पर होते हैं. फ्री के चक्कर में आप जंक फूड घर ले आएंगी.
– सस्ता ख़रीदने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता न करें.
– रंग-बिरंगी ताज़ी सब्ज़ियां और हर तरह के फल ख़रीदें. रंगीन होने की वजह से ये फाइटोन्यूट्रिशियन से भरपूर होते हैं, जो कैंसर और दिल की बीमारी से बचाता है.
– हरी सब्ज़ियों को भी ट्रॉली में ख़ास जगह दें, क्योंकि इनमें मिनरल, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो दिल की बीमारी से बचाने में सहायक होते हैं.
– प्रोटीन के लिए अंडा, ताज़ी मछली और बिना स्किनवाला चिकन अच्छा ऑप्शन है.
– होल ग्रेन से बने ब्रेड, पिज़्ज़ा, पास्ता, सीरियल्स ख़रीदें.
– गेहूं, चावल के साथ अलग-अलग तरह की दालें ख़रीदें. वैसे नॉर्मल चावल की जगह बजट के अनुसार ब्राउन राइस भी ख़रीदा जा सकता है.
– कैल्शियम, विटामिन डी के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स ख़रीदना आवश्यक है. मार्केट में आजकल लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स भी उपलब्ध हैं, जैसे- 1% या 2% फैट स्कीम मिल्क, लो फैट चीज़, बटर, पनीर आदि.
– वेजीटेबल ऑयल, जैसे- कैनोला, जैतून या सरसों का तेल ख़रीदें, इसमें मोनोअनसैचुरेडेट फैट्स भरपूर मात्रा में होता है.
– अगर कोई पैक्ड फूड ख़रीद रही हों, तो एक्सपायरी डेट चेक कर लें.
– खाद्य पदार्थ पर लिखे न्यूट्रिशनल लेवल को ज़रूर पढ़ लें.
– पैकेट पर उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी, फैट्स, शुगर, सोडियम से संबंधित जानकारियां लिखी होती हैं.
– कई प्रोडक्ट्स पर फैट फ्री लिखा होता है, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि वह कैलोरी फ्री भी होगा. कई बार ऐसे प्रोडक्ट्स में कैलोरी और शुगर की मात्रा ज़्यादा हो सकती है.
– प्रीज़र्व्ड, फ्रोज़न, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ से दूरी बनाएं, क्योंकि इनमें शक्कर और नमक ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा में होते हैं.
– हाई कैलोरीवाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, पेस्ट्रीज़, केक्स, फ्राइड फूड, फ्रूट फ्लेवर्ड ड्रिंक्स न ही ख़रीदें, तो बेहतर होगा.
– कैश काउंटर के पास जाकर भी ख़ुद पर संयम रखें और वहां रखी हुई चॉकलेट्स, चिप्स न ख़रीदें.
– आकर्षक पैकिंग से कतई प्रभावित न हों.

रोचक जानकारियां

  • यूरोप में हुए एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि सालभर में महिलाएं शॉपिंग करके लगभग 48000 तक कैलोरी कम कर लेती हैं.
  • हेल्दी शॉपिंग के लिए प्लास्टिक की थैलियों के बजाय कपड़े की थैली का इस्तेमाल करें. रिसाइकल न हो पाने की वजह से प्लास्टिक की थैलियां बढ़ती जा रही हैं. इन थैलियों को जब कचरे के साथ जलाया जाता है, तो इसमें से एक्रेलिमाइट जैसे तत्व निकलते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं. वैसे भी 1 जनवरी 2015 से 40 माइक्रोन से कम की पॉलिथीन बैन कर दी गई है.