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सिंगर अरिजीत सिंह हुए 29 के, देखें उनके दिल को छू लेनेवाले 10 गाने (Happy Birthday Arijit Singh)

अरिजीत सिंह

QcyLbd4E (1)आज के गायकों की बात की जाए तो उनमें सबसे पहला नाम आता है अरिजीत सिंह का. उनकी आवाज़ दिल को छू जाती है. आज के दौर के फेवरेट सिंगर अरिजीत हो गए हैं 29 साल के. 25 अप्रैल 1987 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जन्में अरिजीत को गायकी विरासत में मिली है. उनके घर में भी संगीत का माहौल रहा है. उनकी दादी गायिका है और मां गायिका होने के साथ तबला वादक भी हैं. घर में मां से संगीत सीखने के बाद उन्होंने म्यूज़िक की पूरी ट्रेनिंग भी ली है. कई सिंगिंग रिएलिटी शो में भाग ले चुके अरिजीत को पहचान मिली मर्डर 2 के गाने फिर मोहब्बत से… इसके बाद आशिक़ी 2 के गाने तुम ही हो… ने उन्हें लोगो का फेवरेट बना दिया. अपने हिट गानों की वजह से अरिजीत आज बॉलीवुड के महंगे सिंगर्स में शामिल हैं.

मेरी सहेली की ओर से अरिजीत सिंह को ए वेरी हैप्पी बर्थ डे.

अरिजीत ने यूं तो कई बेहतरीन गाने गाए हैं, लेकिन हम ले आए हैं उनके ये टॉप 10 गानें, जो हर कोई गुगुना पसंद करता है.

फिल्म- बेफिक्रे

फिल्म- ऐ दिल है मुश्किल

फिल्म- आशिकी 2

फिल्म- रईस

फिल्म- ओके जानू

फिल्म- एयरलिफ्ट

फिल्म- 2 स्टेट्स

फिल्म- ख़ामोशियां

फिल्म- बर्फ़ी

फिल्म- मर्डर 2

सोनू निगम ने क्यों मुंडवाया सिर, जानें क्या है पूरा मामला (Sonu Nigam Goes Bald!)

सोनू निगम

सोनू निगम

सोनू निगम ने मुंडवा लिया अपना सिर. पश्चिम बंगाल के मौलवी की ओर से जारी किए गए फतवे का करारा जवाब देते हुए सोनू ने सिर मुंडवा लिया. अज़ान को लेकर किए गए ट्वीट्स के बाद सोनू के खिलाफ़ फतवा जारी किया गया था, जिसमें ये कहा गया था कि अगर सोनू निगम को गंजा करेगा और पुराने जूते की माला पहनाएगा उसे 10 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा. इसका जवाब सोनू ने ट्वीट करके दिया कि दोपहर 2 बजे अलीम घर आकर मेरा सिर गंजा करेगा, 10 लाख रुपये तैयार रखना मौलवी. इसके अलावा सोनू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई थी.

सोनू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद सिर मुंडवा लिया. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि मैं सोच भी नहीं सकता था कि इतनी छोटी-सी बात उतनी बड़ी बन जाएगी. मुद्दा समझने की बजाय मेरी बातों को पकड़ा गया है. सोनू ने आगे कहा, “मेरा विरोध लाउडस्पीकर को लेकर था, न कि अज़ान को लेकर. मेरा मानना है कि लाउडस्पीकर धार्मिक स्थलों पर नहीं होने चाहिए. मेरे आसपास बहुत से मुस्लिम लोग हैं, मैं मुस्लिम विरोधी नहीं हूं. मेरे लिए यह गुंडागर्दी है कि कोई अपने धर्म को ज़ोर-शोर से प्रचारित करे. मैं कोई नाम नहीं लूंगा पर त्‍योहारों के दौरान ये जो लोग सड़कों पर दादागिरी के साथ नाचते हैं… ए हटो.. ए हटो… करते हैं, उससे पुलिस को परेशानी होती है. वो बेसिकली, धरम के नाम पर शराब पीके नाच रहे होते हैं, फिल्मी गाने बजा रहे होते हैं. क्या ये दादागिरी नहीं है? और अगर मैं यह मुद्दा उठा रहा हूं तो आप बुद्धिजीवियों को यह बात सही तरीक़े से समझकर उठानी चाहिए, क्योंकि आपके बच्चे भी तो उसी देश में, उसी माहौल में बढ़ने वाले हैं. क्या आप उन्हें ऐसा ही माहौल देना चाहते हैं, जिसमें हम इस वक़्त जी रहे हैं.”

कई लोगों को मोहम्मद साहब का नाम मोहम्मद लिखे जाने पर भी आपत्ति थी, जिसका जवाब देते हुए सोनू ने कहा, “ट्विटर पर जगह कम होती है. छोटे से छोटा लिखने की कोशिश होती है, इसलिए मैंने मोहम्मद साहब नहीं लिखा. यह अंग्रेज़ी भाषा की वजह से हुआ है. शिव को इंग्लिश में शिवा, राम को रामा कहा जाता है. ये मेरा उद्देश्य नहीं था कि पैगंबर की निंदा करूं. ट्विटर पर आदमी सोच समझ कर छोटा-छोटा लिखता है.
सिर मुंडवाने की बात पर उन्होंने ने कहा कि मैं यह किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं कर रहा हूं, ना ही किसी मौलाना का चैलेंज पूरा करने के लिए कर रहा हूं. मेरे बाल एक मुसलमान काटेगा. मैंं बहुत सेकुलर हूं.

प्रियंका चोपड़ा को है परिणीति चोपड़ा पर गर्व, जानें क्या किया परिणीति ने (Proud of You Baby- Priyanka Chopra)

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parineeti chopraप्रियंका चोपड़ा इन दिनों परिणीति चोपड़ा पर गर्व महसूस कर रही है. परिणीति ने भी अब ऐक्टिंग के साथ-साथ अपनी बहन प्रियंका की ही तरह सिंगिंग के फील्ड में भी अपना पहला कदम रख दिया है. फिल्म मेरी प्‍यारी बिंदू  के लिए परिणीति ने गाया है एक गाना, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हर कोई परिणीति के इस गाने की तारीफ़ कर रहा है. प्रियंका चोपड़ा ने भी टि्वटर पर परिणीति की जमकर तारीफ़ की है. प्रियंका ने लिखा है, “मुझे तुम पर गर्व है बेबी, तुम्‍हारे पापा को तुम पर गर्व होगा, जैसे मेरे पिता को हुआ था.”

परिणीति ने इसका जवाब देते हुए लिखा है, “थैंक्यू मिमि दीदी, आपके नक्शेकदम पर चलना चाहती हूं!!! पापा ख़ुश हैं.”

ये गाना परिणीति चोपड़ा ने फिल्म मेरी प्यारी बिंदू के लिए गाया है. इस फिल्म में परिणीति के साथ आयुष्मान खुराना भी हैं, जिन्होंने इस गाने को शेयर करते हुए लिखा है, “परिणीति की आवाज़ बिल्कुल मेरी नॉवेल की हिरोइन जैसी है- नरम और सेक्सी!” 

आप भी देखें ये गाना.

 

50 के हुए शंकर महादेवन, देखें उनके ब्रेथलेस गाने ! (Happy Birthday Shankar Mahadevan)

शंकर महादेवन

शंकर महादेवन4 नेशनल अवॉर्ड जीत चुके बॉलीवुड के टैलेंटेड म्यूज़िक डायरेक्टर और सिंगर शंकर महादेवन हो गए हैं 50 साल के. कंप्यूटर साइंस इंजिनियर शंकर संगीत की दुनिया में आने से पहले आईटी इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं. 5 साल की उम्र से उन्होंने क्लासिकल संगीत सीखना शुरू किया था. 1977 में उन्होंने तमिल सिनेमा से अपने करियर की शुरुआत की. शंकर सुर्खियों में तब आए, जब उनका एलबम ब्रेथलेस रिलीज़ हुआ था. 6 मिनट लंबा गाना शंकर ने एक सांस में गाया था. यहीं से शुरू हुआ था सफलता का सफ़र, जो आज तक जारी है.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से शंकर महादेवन को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं. 

देखते हैं उनके 10 गाने.

एलबम- ब्रेथलेस

फिल्म- मिशन कश्मीर

फिल्म- तारे ज़मीन पर

फिल्म- दिल धड़कने दो

फिल्म- दिल चाहता है

फिल्म- दोस्ताना

 

फिल्म- एबीसीडी

फिल्म- लक्ष्य

फिल्म- फिर मिलेंगे

फिल्म- कल हो ना हो

शॉर्ट स्कर्ट के कमेंट पर मोनाली ठाकुर का करारा जवाब, कहा सामने मत आना (Singer Monali Thakur shuts down troll who commented on her short dress)

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मोनाली ठाकुर ने दिया करारा जवाब. शॉर्ट ड्रेस पहनने पर कमेंट करने वाली लड़की को कहा सामने मत आना. मोह मोह के धागे… गाने के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित मोनाली ठाकुर की ड्रेस पर कमेंट किया एक सोशल मीडिया यूज़र ने.

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यूज़र ने मोनाली के इंस्टाग्राम एकाउंट पर लिखा कि वो हमेशा शॉर्ट ड्रेसेस क्यों पहनती हैं. उनकी शॉर्ट ड्रेस कई लोगों को अनकंफर्टेबल महसूस करवाती है. अमिता नाम की इस यूज़र ने लिखा था, ”मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं, मुझे उम्मीद है कि आप बुरा नहीं मानेंगी. आप और आपकी आवाज़ भगवान का एक बेहतरीन गिफ्ट है. आप कलर्स के शो राइजिंग स्टार में अच्छा काम कर रही हैं. लेकिन ईमानदारी से कहूं तो इस शो पर हमें आपका ड्रेसिंग सेंस बिल्कुल पसंद नहीं आता. आप शो पर इतने छोटे कपड़े क्यों पहनती हैं? यह बहुत अनकंफर्टेबल लगता है. आप शो के कंटेस्टेंट्स को पैरेंट्स की तरह गाइड करती हैं. तो प्लीज, अपनी ड्रेस पर भी थोड़ा फोकस करें, क्योंकि लाखों लोग आपको देख रहे हैं. प्लीज इस बात का बुरा मत मानिएगा यह केवल एक रिक्वेस्ट है.”

इस कमेंट का मोनाली ने जवाब देते हुए लिखा, ”तुम्हें ब्लॉक करने से पहले मैं यह बता देना चाहती हूं कि मैं तुम जैसे लोगों के बारे में क्या सोचती हूं. तुम अगर मेरी छोटी ड्रेस से अनकंफर्टेबल महसूस करती हो तो यह तुम्हारी और ऐसी सोच रखने वाले लोगों की परेशानी है. यह मेरी या किसी और लड़की की जिम्मेदारी नहीं है. प्रार्थना करो कि तुम मेरे सामने कभी मत आना, क्योंकि तब मिझे कोई रोक नहीं पाएगा ये दिखाने से कि जिस लेग्स को देखकर तुम अनकंफर्टेबल थी, वो एक किक में क्या कर सकते हैं. एक बार फिर, डोन्ट माइंड हा…!! यह केवल एक रिक्वेस्ट है.”

मोनाली के इस जवाब ने सोशल मीडिया पर सलसनी मचा दी. कुछ देर में सोनाली ट्रेंड करने लगीं.

– प्रियंका सिंह 

लताजी डी. लिट की उपाधि से सम्मानित (Lata Mangeshkar honoured with D. Litt degree)

Lata Mangeshkar
Lata Mangeshkar
लताजी ने पिछले सात दशक से अपने सुमधुर आवाज़ का जादू सभी पर बिखेरा है. भारत रत्न से सम्मानित बहुमुखी प्रतिभा की धनी लता मंगेशकर की उपलब्धियों में एक और सम्मान जुड़ गया है. उन्हें संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया जा रहा है. यह पुरस्कार वाईसीएमओयू (यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्‍वविद्यालय) द्वारा दिया जा रहा है.

– ऊषा गुप्ता

बर्थ डे स्पेशल: आवाज़ ही पहचान है… देखें भूपेंद्र सिंह के 5 गानें (Happy Birthday Bhupinder Singh)

Bhupinder Singh

Bhupinder Singhएक अलग किस्म की खनकती आवाज और गाने का अनोखा अंदाज़, यही पहचान है गायक भूपेंद्र सिंह की. उन्होंने गाया भी है- मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे… यह गीत उन पर बिल्कुल फिट बैठता है. वह बेहतरीन गज़लों और अर्थपूर्ण गीतों के लिए जाने जाते हैं.
किसी नज़र को तेरा इंतजार आज भी है…, होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा… , दिल ढूंढ़ता है फिर वही…, एक अकेला इस शहर में…, जैसे नज़्मों को भला कौन भूल सकता है. भूपेंद्र के गाए गीतों ने संगीत प्रेमियों के दिल पर एक अलग छाप छोड़ी है. 77 साल के हो गए हैं भूपेंद्र जी.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से आवाज़ के इस जादूगर को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

भूपेंद्र का जन्म 6 फरवरी, 1940 को अमृतसर के पंजाब में हुआ था. उनके पिता ने ही उन्हें संगीत की शिक्षा दी. करियर की शुरुआत में भूपेंद्र ने ऑल इंडिया रेडियो पर प्रस्तुति दी. मदन मोहन ने भूपेंद्र को फिल्म हकीकत में मोहम्मद रफ़ी साहब के साथ होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा… गाने का मौका दिया. यह गाना बहुत लोकप्रिय हुआ, लेकिन भूपेंद्र को इससे कोई ख़ास पहचान नहीं मिली. इसके बाद भूपेंद्र ने स्पैनिश गिटार और ड्रम के सहारे कुछ गज़लें पेश कीं. साल 1978 में रिलीज़ वो जो शहर था से उन्हें प्रसिद्धि मिली.

उनके जन्मदिन के मौक़े पर भूपेंद्र सिंह के गाए 5 बेहतरीन नगमें देखते हैं,

फिल्म- किनारा

फिल्म- मौसम

फिल्म- एतबार

फिल्म- घरौंदा

फिल्म- बाज़ार

 

सुरों की मल्लिका कविता कृष्णमूर्ति हुईं 59 की, देखें उनके टॉप 10 गाने (Happy Birthday Kavita Krishnamurthy)

KKS1_H (1)सुरों की मल्लिका कविता कृष्णमूर्ति (Kavita Krishnamurthy) हो गई हैं 59 साल की. बॉलीवुड की कई फिल्मों के गानों को अपनी सुरीली आवाज़ से सजाने वाली कविता हमेशा मुस्कुराती रहती हैं. 25 जनवरी 1958 को दिल्ली के अय्यर परिवार में जन्मीं कविता को गाने का शौक़ बचपन से ही था. आठ साल की उम्र में उन्होंने गाने के एक कॉम्पटिशन में गोल्ड मेडल जीता था. नौ साल की उम्र में कविता को लता मंगेशकर के साथ बांग्ला गीत गाने का मौक़ा मिला. बस, यही वो दिन था जब कविता ने ठान ली कि वो फिल्मों में गायिका बनेंगी. एक से बढ़कर एक कई सुपरहिट गाने गाए कविता ने. बेस्ट सिंगर के लिए चार बार फिल्मफेयर अपने नाम कर चुकीं कविता को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से कविता कृष्णमूर्ति को ए वेरी हैप्पी बर्थ डे. 

आइए उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके 10 सुपरहिट गाने.

फिल्म- ख़ामोशी (1996)

फिल्म- देवदास (2002)

फिल्म- मि. इंडिया (1987)

फिल्म- हम दिल दे चुके सनम (1999)

फिल्म- 1942 ए लव स्टोरी (1994)

फिल्म- मोहरा (1994)

फिल्म- कर्मा (1986)

फिल्म- परदेस (1997)

फिल्म- यारा दिलदारा (1991)

– प्रियंका सिंह

आतिफ़ असलम ने बीच में रोका कॉन्सर्ट, ईव टीज़िंग करने वाले को लगाई फटकार, कहा कभी लड़की नहीं देखी क्या? (Singer Atif Aslam Stops His Concert Midway To Save A Girl From Eve-Teasing)

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पाकिस्तानी सिंगर आतिफ़ असलम (Atif Aslam) ने ईव टीज़िंग करने वाले लड़के को सिखाया सबक. बीच कॉन्सर्ट में लगाई फटकार. जी हां, आतिफ़ असलम के इस कदम की हर जगह तारीफ़ हो रही है. दरअसल आतिफ कॉन्सर्ट कर रहे थे, तभी उनकी नज़र एक लडके पर पड़ी, जो वहां मौजूद लड़की के साथ छेड़छाड़ कर रहा था. बस, फिर क्या था आतिफ़ ने कॉन्सर्ट रोका और कहा, ”तुमने कभी लड़की नहीं देखी है? तुम्हारी मां-बहन भी हो सकती है यहां पर.” आतिफ़ ने वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड्स को बुलाया और उस लड़की को सुरक्षित जगह पर बैठाया. इसके बाद कॉन्सर्ट दोबारा शुरू करने से पहले आतिफ़ ने कहा, ”इंसान का बच्चा बन”

आतिफ़ के इस दिलेरी को देखकर पूरा कॉन्सर्ट आतिफ़…आतिफ़ के नाम से गूंज उठा. इस कॉन्सर्ट का ये वीडियो वायरल हो रहा है. आप भी देखें कि कैसे ईव टीज़र्स को फटकार लगाई आतिफ़ ने.

– प्रियंका सिंह

अब ‘तूफ़ान’ ले आए हैं आमिर खान (Aamir Khan shares Satyamev Jayate water cup- 2 song ‘Toofan aala…’)

Aamir Khan

Aamir Khan

दंगल मचाने के बाद अब आमिर खान लेकर आए हैं तूफ़ान. दरअसल हम बात कर रहे हैं आमिर खान और किरण राव के नए म्यूज़िक वीडियो तूफ़ान आला… की, जिसे दोनों ने बनाया है गावों में जल संरक्षण के लिए शुरू किए गए उनके सत्यमेव जयते वॉटर कप-2 अभियान के तहत.

अजय-अतुल की जोड़ी ने इस गाने को कंपोज़ किया है. गाने की ख़ास बात यह है कि ये गाना मराठी में है और इसे गाया है आमिर की पत्नी किरण राव ने. फिल्म सैराट के निर्देशक नागराज मंजुले ने इस वीडियो का निर्देशन किया है. आप भी देखें ये वीडियो.

हमेशा याद रहेगा पंचम दा का संगीत (Top 10 Songs: Remembering Pancham da)

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संगीत के जादूगर पंचम दा को आज भी म्यूज़िक इंडस्ट्री का गुरु माना जाता है. म्यूज़िक के साथ जो एक्सपेरिमेंट्स उन्होंने किए हैं, वो शायद ही किसे ने किए होंगे. संगीतकार एस. डी बर्मन के बेटे आर. डी बर्मन यानी पंचम दा संगीत की दुनिया में तब क्रांति ले आए, जब उन्होंने गानों में अलग तरह की आवाज़ें, म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स से अलग-अलग तरह की धुनें बनाने लगे. पंचम दा ने ऐसा संगीत बनाया, जिसकी कल्पना किसेे ने नहीं की थी. महज़ नौ साल की उम्र में अपना पहला गाना कंपोज़ करने वाले पंचम दा ने कैबरे को भी अपने गाने के ज़रिए एक नई पहचान दी. उन्होंने अपने 33 साल के करियर में हर तरह का संगीत बनाया और आज की जेनेरेशन के लिए एक मिसाल कायम कर गए. उनकी आख़िरी फिल्म रही 1942 ए लव स्टोरी, जिसके गानों ने सबके दिलों को एक बार फिर छू लिया था. 4 जनवरी 1994 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके गाने हमेशा उनकी याद दिलाते रहेंगे.

आज पंचम दा की पुण्यतिथि है. आइए, उन्हें याद करते हुए उनके कुछ बेहतरीन गाने देखते हैं.

फिल्म- हरे रामा हरे कृष्णा (1971)

फिल्म-  कटी पतंग (1970)

फिल्म-  इजाज़त (1987)

फिल्म-  अमर प्रेम (1972)

फिल्म-  आंधी (1975)

फिल्म- हम किसी से कम नहीं (1977)

फिल्म- कारवां (1971)

फिल्म- शोले (1975)

फिल्म- आप की कसम (1974)

फिल्म- 1942 ए लव स्टोरी (1994)

 

Birthday Special: मोहम्मद रफ़ी साहब को यूं भुला ना पाओगे (Happy Birthday Rafi Sahab)

Mohammed Rafi
Mohammed Rafi
वाकई, आज भी कोई नहीं भुला पाया है गायिकी के सम्राट मोहम्मद रफ़ी साहब को. रफ़ी साहब के गीत आज भी सभी के ज़ेहन में ताज़ा हैं. आज गायिकी के सरताज मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्मदिन है. रफ़ी साहब के सुरीले गानों का नशा चार दशकों तक लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया रहा है और आज भी वो सुरूर कायम है.  
Mohammed Rafi
२४ दिसंबर १९२४ को अमृतसर के नज़दीक, कोटला सुल्तान सिंह में जन्में रफ़ी साहब ने बंटवारे के वक़्त हिन्दुस्तान में रहना पसंद किया.  तेरह साल की उम्र में के. एल. सहगल के गानों के एक कॉन्सर्ट में उन्होंने पहली बार गाना गाया, जिसके बाद उनके करियर की पहली फिल्म रही पंजाबी फिल्म गुल बलोच.  इस फिल्म के बाद रफ़ी साहब को ‘ऑल इंडिया रेडियो – लाहोर’ की ओर से गाने का न्योता मिला और साल १९४४ में रफ़ी साहब मुंबई आ गए. मुंबई में  उनकी पहली मुलाक़ात हुई संगीतकार नौशाद से और आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि नौशाद जी ने रफ़ी साहब को पहले कोरस में गवाया था,  गाना था हिन्दुस्तान के हैं हम…. बतौर गायक रफ़ी जी की पहली हिंदी फिल्म रही गाँव की गोरी… 
नौशाद के साथ रफ़ी जी की जोड़ी ख़ूब जमी और १९५२ में रिलीज़ हुई फिल्म बैजू बावरा ने रफ़ी साहब को एक अलग मुकाम दिया. तलत महमूद को   पसंद करने वाले नौशाद की पहली पसंद बन चुके थे रफ़ी साहब. सिर्फ नौशाद ही नहीं, बल्कि 50 और 60 के दशक में रफ़ी साहब – संगीतकार ओ.पी. नैय्यर, शंकर जयकिशन,  एस. डी. बर्मन जैसे म्यूज़िक डायरेक्टर के भी पसंदीदा गायक बन गए थे. ओ. पी. नैय्यर तो रफ़ी जी की आवाज़ से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने फिल्म रागिनी में किशोर कुमार पर फिल्माए गए गाने भी रफ़ी साहब से ही गवाए. इसके बाद रफ़ी जी ने किशोर कुमार के कई गाने गाए.  किशोर दा से पहले yodelling की शुरुआत रफ़ी साहब ने ही थी. 
Song : दिन ढल जाए… (गाइड)
एस. डी. बर्मन के साथ रफ़ी जी ने देव आनंद के लिए ढेरों गाने गाये…

Song : जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा…(ताजमहल)

शंकर जयकिशन के साथ रफ़ी जी ने शम्मी कपूर और राजेंद्र कुमार के लिए भी बेहतरीन गाने गाए. शम्मी कपूर की मानो आवाज़ ही बन गए थे रफ़ी साहब. रफ़ी जी के इंतकाल पर शम्मी जी ने कहा था कि उनकी आवाज़ आज उनका साथ छोड़ गयी.

Song : इस रंग बदलती दुनिया में… (राजकुमार)

रफ़ी साहब का आखरी गाना रिकॉर्ड करनेवाले लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने अपने करियर की शुरुआत भी उन्हीं के गाने से की थी…

Song : वो जब याद आए… (पारसमणि)

दिल के नेक रफ़ी साहब उन संगीतकारों के लिए भी मसीहा थे, जिनके पास रफ़ी साहब की फीस देने के लिए पैसे नहीं थे.  निसार बज्मी के लिए तो रफ़ी साहब ने सिर्फ एक रुपये में गाना गाया था. उन दिनों रफ़ी साहब के साथी रॉयल्टी की लड़ाई लड़ रहे थे. मगर उदार रफ़ी साहब का नज़रिया उन सब से जुदा था, इसी बात से नाराज़ होकर लताजी ने उनके साथ कुछ अरसे के लिए गाना ही बंद कर दिया था. नतीजा यह हुआ कि रफ़ी जी और आशा जी ने उन दिनों कई गाने साथ गाए.
Song: अच्छा जी मैं हारी पिया… (काला पानी)

 रफ़ी साहब की आवाज़ हर अभिनेता पर ख़ूब जंचती थी, चाहे वो  देव आनंद हों या   दिलीप कुमार.
 
Song: तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूं… (लीडर)

धर्मेन्द्र, जीतेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, हर दौर के हीरो की आवाज़ बने रफ़ी साहब. राजेश खन्ना जिनके लिए आमतौर पर किशोर दा की आवाज़ इस्तेमाल की जाती थी, उनके लिए रफ़ी साहब ने कई गाने गाए.
 
Song: बागों में बहार है… (आराधना)

 रफ़ी जी ने अपनी उम्र में आधे कलाकारों के लिए भी सुपरहिट गाने गाए. वो कई सालों तक ऋषि कपूर की आवाज़ भी बने रहे.
Song : दर्द-ऐ-दिल… (क़र्ज़)

रफ़ी साहब जैसा वर्सिटाइल गायक शायद कोई रहा हो. वो हर तरह का गाना बहुत ही सरलता से गा लेते थे. उन्होंने हिंदी के अलावा कई भाषाओं में गाने गाए हैं. ये रफ़ी साहब की गायिकी का ही जादू था कि उन्हें भारतीय सरकार की तरफ से पद्मश्री से सम्मानित किया गया. रफ़ी साहब को पांच बार नेशनल अवार्ड्स और ६ बार फिल्मफेयर अवार्ड से नवाज़ा गया. पहला नेशनल अवार्ड रफ़ी साहब को मिला था फिल्म नीलकमल के गाने के लिए. रफ़ी साहब बाबुल की दुआएं गाने को गाते वक़्त रो दिए थे, क्योंकि अगले दिन उनकी बेटी की शादी थी.
Song : बाबुल की दुआएं… (नीलकमल)

साल १९५०-१९७० तक रफ़ी जी का ही राज रहा. रमज़ान के मुबारक महीने में वो सभी को अलविदा कह गए और छोड़ गए अपनी दर्द भरी आवाज़ और अपने दिलकश गाने. रफ़ी साहब तो नहीं रहे, मगर उनकी पुर नूर आवाज़ उनके लाखों चाहने वालों को सुकून पहुंचाती रहेगी.

– प्रियंका सिंह