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जानें कंसीलर लगाने का सही तरीक़ा (How To Apply Concealer)

How To Apply Concealer

चेहरे के दाग़-धब्बों को छुपाने के लिए हम सभी कंसीलर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यदि कंसीलर को सही तरीके से अप्लाई न किया जाए तो चेहरा पैची व भद्दा नज़र आने लगता है. कंसीलर का बेस्ट रिज़ल्ट पाने के लिए कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान अवश्य रखें.

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1. हमेशा अपनी स्किन टोन से मैच करता हुआ कंसीलर ही चुनें. इसके लिए कंसीलर ख़रीदते समय नैचुरल लाइट में उसका शेड देख लें.
2. यदि आप पहली बार कंसीलर लगा रही हैं तो सबसे पहले अपनी उंगली पर निकालें और आंखों के नीचे निकालकर हल्के हाथों से मसाज करें. मसाज अंदर से बाहर की तरफ़ करें.
3. कंसीलर लगाने के कुछ समय बाद तक कोई दूसरी क्रीम न लगाएं, नहीं तो कंसीलर सेट नहीं होगा.
4. अगर आपकी आंखें घंसी हुई है तो फाउंडेशन से एक शेड लाइट कंसीलर लगाएं.
5. कंसीलर लगाने के बाद उसे हल्के हाथों से अच्छी तरह मिलाएं.
6. यदि आपकी स्किन ड्राई है तो कंसीलर लगाने से पहले चेहरे को मॉइश्‍चराइज़ करें.
7. चेहरे के किसी हिस्से के दाग़ को छुपाने के लिए ढेर सारा कंसीलर लगाने की ग़लती न करें, बल्कि पतली पर्त लगाकर उसे सेट होने दें.
8. यदि आपकी त्वचा तैलीय है व चेहरे के रोमछिद्र बड़े हैं तो क्रीम बेस्ड या स्टिक कंसीलर लगाने से बचें, क्योंकि इससे रोमछिद्र और बड़े दिखाई देंगे. आप लिक्विड कंसीलर का इस्तेमाल करें.
9. मुहांसों को छुपाने के लिए पेंसिल कंसीलर का प्रयोग करें, क्योंकि टिप प्वॉइंटेड होने के कारण उन्हें मुहांसों पर लगाना आसान होता है.
10. आंखों के नीचे कंसीलर लगाने के लिए कंसीलर ब्रश या फिंगर टिप का इस्तेमाल करें. आंख के छोर से दूसरी छोर पर कंसीलर से ट्रैंगल बनाकर ब्लेंड करें.

चुनें सही शेड

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* चेहरे की रेडनेस को घटाने के लिए ग्रीन टिंटेड कंसीलर लें.
* यलो टिंटेड कंसीलर आपके चेहरे को ब्राइट बनाएगा.
* ऑरेंज या रेड कंसीलर का इस्तेमाल डार्क स्पॉट्स को छुपाने के लिए किया जाता है.
* आंखों के नीचे के काले घेरों को ढंकने के लिए अपनी स्किन टोन से 1-2 शेड लाइट कंसीलर ही लगाएं.

7 मज़ेदार वजहें: जानें क्यों होती है कपल्स में तू तू-मैं मैं?(7 Funny Reasons: Why Couples Fight?)

शायद ही कोई ऐसा कपल हो जिनके बीच लड़ाई-झगड़े न हों, क्योंकि जहां प्यार होता है वहीं तक़रार भी होती है, मगर ये तक़रार एक सीमा तक रहे तो ही अच्छा है, वरना रिश्ते में दरार पड़ने लगती है. आमतौर पर किन बातों पर झगड़ते हैं कपल्स? आइए, हम बताते हैं.

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नहीं देते स्पेशल ट्रीटमेंट

अक्सर पत्नियों को ये शिकायत रहती है कि व़क्त के साथ उनके पति बदल गए हैं. रीता कहती हैं, ङ्गङ्घशादी के बाद कुछ महीनों तक मेरे पति कभी अचानक कोई ट्रिप/डिनर प्लान करके या गिफ्ट देकर मुझे स्पेशल फील कराते थे, मगर अब ऐसा नहीं करते. अब तो मुझे ये भी याद नहीं कि पिछली बार उन्होंने मुझे कब गिफ्ट दिया था.फफ दरअसल, महिलाओं को सरप्राइज़ पसंद है, भले ही वो कोई छोटा-मोटा गिफ्ट ही क्यों न हो, इससे उन्हें अपने ख़ास होने का एहसास होता है.
स्मार्ट टिप: यदि आप भी पत्नी को ख़ुश रखना चाहते हैं, तो उन्हें दोबारा सरप्राइज़ देना शुरू कर दीजिए.

छुट्टी के दिन भी बस काम

कई बार डिमांडिंग जॉब या टारगेट पूरा करने के चक्कर में पति महोदय संडे के दिन भी ऑफिस चले जाते हैं और उनकी इस हरक़त पर पत्नी नाराज़ हो जाती है. संजना को भी अपने पति से यही शिकायत है. वो कहती हैं, ङ्गङ्घपूरे हफ़्ते मैं संडे का ही तो इंतज़ार करती हूं ताकि हम दोनों साथ समय बिता सकें. हम दोनों वर्किंग हैं इसलिए हमारे पास बस यही एक दिन बचता है, मगर मेरे पति संडे को भी अक्सर ऑफिस चले जाते हैं. इस बात को लेकर हमारे बीच कई बार झगड़ा हो चुका है.फफ जनाब, यदि आप संडे भी ऑफिस के नाम कर देंगे, तो बीवी का आपसे झगड़ना जायज़ है.
स्मार्ट टिप: काम के साथ रिश्तों को मैनेज करना भी ज़रूरी है. बेहतर होगा कि आप संडे का दिन पत्नी के नाम कर दें, वरना करियर ग्राफ भले ऊपर चला जाए, आपके प्यार का ग्राफ नीचे आ जाएगा.

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सामान इधर-उधर कर देना

ज़्यादातर पुरुषों की आदत होती है कि जो चीज़ जहां से उठाई है, उसे वहीं रखने की बजाय अपनी सुविधानुसार कहीं भी फेंक देते हैं और जब दोबारा ज़रूरत पड़ने पर वो चीज़ नहीं मिलती, तो पत्नी पर चिल्लाने लगते हैं. उनकी इस आदत पर पत्नी चिढ़ जाती है और दोनों में फिर नोंकझोंक शुरू हो जाती है. इसी तरह पति के गीला तौलिया बेड पर रखने और सॉक्स उतारकर किसी कोने में फेंक देने की आदत से भी पत्नी परेशान रहती है.
स्मार्ट टिप: बेहतर होगा कि कोई भी सामान इस्तेमाल करने के बाद उसे वहीं पर रखें, जहां से उठाया था. हर चीज़ को जगह पर रखने से अगली बार उसे ढूंढ़ने में आपको दिक्क़त नहीं होगी और पत्नी भी ख़ुश रहेगी.

प्यार गुज़रे ज़माने की बात हो गई

शादी के कुछ साल बाद अधिकांश पति-पत्नी के बीच झगड़े की एक वजह ये भी होती है कि उनके रिश्ते से रोमांस ख़त्म हो गया है. पत्नी को लगता है कि पति परिवार और ऑफिस के काम के बीच उसे भूल चुके हैं और अब वो प्यार नहीं जताते. शादी के शुरुआती दिनों वाला उनका रोमांटिक पार्टनर कहीं खो गया है. इस बात को लेकर भी अक्सर दोनों के बीच बहस छिड़ जाती है. रूपाली कहती हैं, ङ्गङ्घपहले मेरे पति बहुत रोमांटिक थे, मगर अब तो ऐसा लगता है कि वो मुझपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते. यदि कभी मैं अच्छी तरह तैयार होती हूं, तो भी मुझे नोटिस नहीं करते और न ही कभी उनकी बातों में प्यार झलकता है.
स्मार्ट टिप: माना आपके पास बहुत काम व ज़िम्मेदारियां हैं, मगर रिश्ते की ताज़गी बनाए रखने के लिए आपका रोमांटिक बने रहना ज़रूरी है.

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दोस्तों के साथ ज़्यादा समय बिताना

कई पुरुष छुट्टी के दिन पहले ही दोस्तों के साथ प्लान बनाकर कहीं निकल जाते हैं या फिर उनके साथ कोई गेम खेलते रहते हैं. वे फैमिली के बारे में नहीं सोचते. ये भी नहीं सोचते कि पत्नी और बच्चों को उनके साथ की ज़रूरत है. ऐसे में पत्नी से बहस होना लाज़मी है.
स्मार्ट टिप: आपको दोस्तों के साथ ज़रूर एंजॉय करना चाहिए, मगर पत्नी और बच्चों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी भी याद रखें. अब ये आप पर है कि आप दोस्तों व परिवार के बीच बैलेंस कैसे बनाते हैं.

पैरेंट्स के आने पर मायूस दिखना

पति-पत्नी के बीच लड़ाई की ये भी एक वजह होती है. आमतौर पर पति को लगता है कि उसके माता-पिता या रिश्तेदारों के आने पर पत्नी ख़ुश नहीं होती, वो मुंह लटकाए सब काम करती है. इसी तरह पत्नी को ये शिकायत रहती है कि उसके मायकेवालों के आने पर पति ख़ुश नहीं होते. बस, इसी बात पर हो जाती है दोनों के बीच तू-तू, मैं-मैं.
स्मार्ट टिप: दोनों यदि एक-दूसरे के पैरेंट्स को अपना समझें और उनका दिल से स्वागत करें, तो सारी परेशानी दूर हो जाएगी.

आज फिर से वही खाना

महिलाओं के लिए, ख़ासकर कामकाजी महिलाओं के लिए रोज़ाना लंच और डिनर में क्या बनाएं ये तय करना बहुत मुश्किल काम होता है. कई बार वो समझ नहीं पातीं कि क्या बनाएं और एक ही डिश रिपीट कर देती हैं, तो पति महोदय का मुंह बन जाता है, ङ्गङ्घये क्या, आज भी वही बोरिंग खाना बनाया है तुमने, कुछ और नहीं बना सकती थी?फफ पति की ऐसी बातों पर अक्सर दोनों के बीच बहसबाज़ी शुरू हो जाती है.
स्मार्ट टिप: पति महोदय को ये समझना चाहिए कि हो सकता है, पत्नी थक गई हो या उसका मूड ठीक न हो, इसलिए डिश रिपीट कर दी. अतः इस बात को तूल देने की बजाय नज़रअंदाज़ करना चाहिए.

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टैक्स बचाने के स्मार्ट तरीके (Smart Way OF Tax Saving)

Tax Saving Tips

Tax Saving Tips

हर कोई अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई बचाने का प्रयास करता है, मगर आपने यदि सही तरी़के से, सही जगह पर इन्वेस्टमेंट नहीं किया है, तो टैक्स के रूप में आपकी आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है. अतः अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए ऐसा इन्वेस्टमेंट करें जो टैक्स फ्री हो और आपको रिटर्न भी मिले.

सुकन्या समृद्धि योजना
सरकार द्वारा ख़ासतौर से स़िर्फ बेटियों के लिए शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना से आप बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुलावाई. इसमें आप हर साल कम से कम 1000 और अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं. इस पर 9.2 फीसदी की दर से ब्याज़ मिलता है और बेटी के 21 साल के होने पर ही आप ये पैसे निकाल सकते हैं.

एनपीएस
सेक्शन 80 सी के तहत डेढ़ लाख टैक्स बचाने के साथ ही आप एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम में सालाना 50,000 रुपए तक निवेश करके टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. 2015 के बजट में सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80 सीसीडी के तहत सालाना 50,000 एनपीएस में निवेश को करमुक्त कर दिया.

पीपीएफ
टैक्स बचाने के लिए पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहा है, क्योंकि पीपीएफ में 15 साल का लॉक इन पीरियड होता है, तो इसमें पैसे डालकर आप अपना भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. पीपीएफ में निवेश की गई राशि का 50 फीसदी हिस्सा आप 7 साल बाद निकाल सकते हैं. पीपीएफ में किया गया इन्वेस्टमेंट तो टैक्स फ्री होता ही है, इस पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं लगता. साथ ही मैच्योरिटी के समय मिलने वाली राशि भी करमुक्त होती है.

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इंश्योरेंस प्रीमियम
अपने, पत्नी या बच्चों के नाम पर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर भी आप टैक्स बचा सकते हैं. इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. इश्योरेंस निवेश के हिसाब से बहुत फ़ायदेमंद भले ही न हो, मगर आपात स्थिति से निपटने के लिए ये ज़रूरी है.

मेडिकल इंश्योरेंस
यदि आप अपने, पत्नी या बच्चों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस लेते हैं, तो इस पर भी आप टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80 डी के तहत 25,000 तक का प्रीमियम टैक्स फ्री है. यदि आपने अपने माता-पिता का भी मेडीक्लेम किया है और उनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है, तो 30,000 तक की प्रीमियम राशि करमुक्त होगी यानी साल में आप 55 हज़ार टैक्स बचा सकते हैं.

फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी)
यदि आप ये सोचते हैं कि हर तरह की एफडी टैक्स फ्री है, तो ऐसा नहीं है. 5 साल की लॉक इन पीरियड वाली एफडी ही टैक्स फ्री होती है. आमतौर पर बैंक अधिकतम 10 साल के निवेश की सुविधा देते हैं. ब्याज़ की रकम 10,000 रुपए से अधिक होने पर टीडीएस कटता है. इससे कम राशि टैक्स फ्री है.

होम लोन
यदि आपने घर ख़रीदने के लिए लोन लिया है, तो आपको टैक्स छूट का फ़ायदा मिलेगा. होम लोन के लिए अदा किए गए ब्याज़ पर सालाना 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट है. यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग है, तो दोनों के नाम पर लोन होने से दोनों को टैक्स बेनिफिट मिलेगा.

स्मार्ट टिप्स
* 80 सी के तहत आप कुल डेढ़ लाख रुपए तक टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं.
* बच्चों की स्कूल फीस (ट्यूशन फीस) पर भी टैक्स छूट मिलती है. इसकी लीमिट 2 बच्चों तक है. यदि आप 80 सी के तहत इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाए हैं, लेकिन बच्चे की फीस भर रहे हैं, तो आपको टैक्स छूट का लाभ मिलेगा.
* 80 सीसीडी के तहत एनपीएस के रूप में 50,000 का निवेश टैक्स फ्री है.
* ख़ुद की प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए होम लोन पर दिया गया 2 लाख तक का ब्याज करमुक्त होगा.
* यदि कंपनी आपको ट्रैवलिंग अलाउंस देती है, तो 19,200 रुपए तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा.
* हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए भी टैक्स सेविंग का ज़रिया है. यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो रेंट स्लिप दिखाकर एक निश्‍चित सीमा तक टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं.

– कंचन सिंह

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बच्चों पर हाथ उठाना कितना सही? (Is hitting your child the right decision?)

Parenting Tips

किसी ग़लती के लिए, अनुशासन सिखाने के नाम पर या फिर अपना ग़ुस्सा उतारने के लिए बच्चों पर हाथ उठाना हमारे देश में आम बात है. अभिभावक झट से बच्चों पर हाथ तो उठा देते हैं, लेकिन ये सोचने की ज़हमत नहीं करते कि उनकी मार का बच्चों पर क्या असर होता है? सज़ा या अनुशासन के नाम पर बच्चों पर हाथ उठाना कितना उचित है? इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं का विश्‍लेषण करती पेश है ख़ास रिपोर्ट.

हमारे देश में बच्चों को मारना पैरेंट्स अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं. कभी सामान तोड़ने, कभी होमवर्क न करने, तो कभी ग़लत व्यवहार के लिए पैरेंट्स उनकी धुनाई कर देते हैं. हां, कई देशों में पैरेंट्स ऐसा नहीं कर पाते. नार्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, इटली, आइलैंड जैसे देशों में बच्चों पर हाथ उठाना ग़ैरक़ानूनी माना जाता है. हमारे देश में ऐसा कोई क़ानून नहीं है इसलिए पैरेंट्स बेझिझक बच्चों पर हाथ उठा देते हैं. कई बार तो बच्चा बिना किसी ग़लती के स़िर्फ इसलिए मार खा जाता है, क्योंकि मां का मूड ठीक नहीं और बच्चे ने किसी चीज़ की ज़िद्द पकड़ ली. साइकोलॉजिस्ट पूनम राजभर कहती हैं, “छोटी-छोटी ग़लतियों के लिए बच्चों पर हाथ उठाना सही नहीं है. ये उनका लर्निंग पीरियड होता है. इस समय बच्चे कई चीज़ें सीख रहे होते हैं और सीखने की कोशिश में ही कुछ ग़लत कर बैठते हैं.”

पैरेंट्स क्यों उठाते हैं हाथ?

साइकोलॉजिस्ट पूनम राजभर के मुताबिक, “पैरेंट्स को लगता है कि थप्पड़ मारना बच्चों को सिखाने का शॉर्टकट तरीक़ा है, मारने से वे समझ जाएंगे और दोबारा वही ग़लती नहीं करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. कई बार तो बच्चे ये भी नहीं समझ पाते कि उन्हें मार क्यों पड़ी?” कई बार बच्चे अकारण भी मार खा जाते हैं.
बात-बात पर हाथ उठाने से कुछ बच्चे अग्रेसिव हो जाते हैं, जबकि कुछ हर समय डरे-सहमे रहने लगते हैं. वे किसी से बात करने से भी कतराने लगते हैं. बड़े होने पर ये सारी समस्याएं उनके विकास में बाधक बन सकती हैं.”

यूं करें बच्चे को अनुशासित

* मारने की बजाय बच्चे को प्यार से समझाना चाहिए.
* पैरेंट्स को समझने की कोशिश करनी चाहिए कि किन हालात में बच्चा ग़लती कर रहा है.
* हो सकता है, वो बाहर दूसरे बच्चों को देखकर कुछ ग़लत बातें सीख रहा हो.
* अतः स्थिति को समझना बेहद ज़रूरी है.
* आप उनके साथ सख़्ती से भले पेश आएं, लेकिन जहां तक संभव हो, हाथ उठाने की ग़लती न करें.
* कई बार पैरेंट्स को लगता है कि ज़्यादा लाड़-प्यार से बच्चे बिगड़ जाएंगे, लेकिन ये सोच सही नहीं है.
* कई बच्चे कुछ ग़लत करने से इसलिए डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके ऐसा करने से मम्मी-पापा नाराज़ हो जाएंगे या उन्हें बुरा लगेगा.
* ऐसी भावना उन्हीं बच्चों में आती है जिन्हें पैरेंट्स का भरपूर प्यार मिलता है.
* बार-बार मारने से बच्चों में पैरेंट्स का डर ख़त्म हो जाता है. अतः मारने की बजाय उन्हें तर्क और उदाहरणों से समझाने की कोशिश करें.
* बच्चों पर आपकी बातों का असर ऐसा होना चाहिए कि एक कड़ी नज़र ही उनके लिए काफ़ी हो.

पब्लिक प्लेस पर कैसे रखें अनुशासित?

* कहीं बाहर जाने से पहले बच्चे को अच्छी तरह समझाएं कि उसे क्या करना है और क्या नहीं? बच्चे के लिए एक सीमा (बाउंड्री) बना दें.
* बच्चे से बात करते समय शांत व स्थिर रहें. अगर वो शैतानी करता है या नखरे दिखाता है, तो सबके सामने उस पर चिल्लाने या डांटने की बजाय उसे अकेले में ले जाकर प्यार से समझाएं.
* हर बच्चे का स्वभाव व विकास का तरीक़ा अलग हो सकता है. कुछ बच्चे शांति व प्यार से समझाने पर ही समझ जाते हैं और कुछ को समझाने के लिए थोड़ा डांटना पड़ता है. अतः अपने बच्चे के स्वभाव को जानकर उससे बात करें.
* आलोचना व अपमानित किए बिना बच्चे के ग़लत व्यवहार को सुधारने की कोशिश करें.
* अच्छा व्यवहार करने पर बच्चे की तारीफ़ करें. बच्चों को अपनी तारीफ़ सुनना अच्छा लगता है. अच्छा बर्ताव करने पर उसकी प्रशंसा होगी ये जानकर बच्चा आपके द्वारा सिखाई गई बातों का ध्यान रखेगा.
* अच्छे बर्ताव के लिए न स़िर्फ बच्चे की सराहना करें, बल्कि उसे कुछ इनाम भी दें, मसलन- आप बच्चे को किसी पार्टी में ले गईं और वहां उसने किसी तरह की ऊटपटांग हरकत नहीं की, तो घर आने पर उसे उसकी कोई पसंदीदा चीज़ लाकर दें. इस तरह के इनाम बच्चे को अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेंगे.

स्मार्ट टिप्स

* बच्चे को अनुशासन सिखाने के नाम पर बहुत से लोग आपको सलाह देंगे. ऐसे में नाराज़ होने की बजाय चुपचाप उनकी बात सुन लें, बाद में ठंडे दिमाग़ से उनकी नसीहतों पर गौर करें. यदि आपको वो सही लगती हैं तो अमल करें, वरना भूल जाएं.
* अनुशासन का उद्देश्य बच्चों को सज़ा देना नहीं, बल्कि उन्हें सही-ग़लत की पहचान कराना, अपना निर्णय ख़ुद लेने में सक्षम बनाना, दूसरों का सम्मान और अच्छा व्यवहार करना सिखाना है.

बच्चों को मारने में हाउसवाइफ हैं आगे

हाल ही में मुंबई के एक एज्युकेशन ग्रुप पोद्दार इंस्टिट्यूट ऑफ एज्युकेशन ने मुंबई, पुणे, सूरत, अहमदाबाद, चेन्नई और बेंगलुरु समेत देश के 10 शहरों में एक सर्वे किया, जिसके मुताबिक, घर में रहनेवाली मांएं बच्चों को ज़्यादा मारती हैं. सर्वे में शामिल लोगों में से 65 फीसदी पैरेंट्स ने माना कि वे बच्चों को पीटने से गुरेज़ नहीं करते. मुंबई में 10 में से 7 पैरेंट्स बच्चों पर हाथ उठाते हैं. हैरानी की बात ये है कि 77 प्रतिशत मामलों में मां ही बच्चों को पीटती है. सर्वे में शामिल 4022 परिवारों में से 84 फीसदी लोग ऐसे भी थे जो बच्चों को पीटना नहीं चाहते, लेकिन उनके पास कोई चारा नहीं बचता, इसलिए वे हाथ उठाते हैं. ज़्यादातर पैरेंट्स बच्चों को इसलिए मारते हैं, क्योंकि बच्चे उन्हें परेशान करते हैं और वे अपने ग़ुस्से पर क़ाबू नहीं रख पाते. विशेषज्ञों का मानना है कि हाउसवाइफ ही बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताती हैं इसलिए उनकी ग़लतियों को लेकर वो ज़्यादा सख़्त होती हैं. कामकाजी महिलाओं के पास बच्चों के लिए बहुत कम समय होता है.

– कंचन सिंह

कहीं आप पुशी पैरेंट्स तो नहीं?

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स्कूल खुले नहीं कि पैरेंट्स कमर कस लेते हैं. पिछले साल जो भी परफ़ॉर्मेंस रहा, जैसा भी परिणाम रहा, इस साल तो बस शुरू से ही ध्यान देना है. फिर तो हर दिन की एक्टिविटी, होमवर्क, स्पोर्ट्स हर क्षेत्र पैरेंट्स की दिनचर्या का अहम् हिस्सा बन जाता है. ऐसे पैरेंट्स बच्चों की सफलता व परफ़ॉर्मेंस को लेकर ख़ुद भी स्ट्रेस झेलते हैं और बच्चों पर भी दबाव डालते हैं. क्या यह सही है?

 

क्या कहते हैं साइकोलॉजिस्ट?

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मैडलिन लेविन ने अपनी पुस्तक ‘प्राइस ऑफ़ प्रिवलिन’ में लिखा है कि जो पैरेंट्स अपनी सफलता के लिए बच्चों को पुश करते हैं यानी बच्चों पर बहुत ज़्यादा दबाव डालते हैं, वे अनजाने ही युवा पीढ़ी को स्ट्रेस व डिप्रेशन का शिकार बना रहे हैं. उनकी नज़र में ये पैरेंट्स हमेशा अपने बच्चों को दूसरों से आगे देखना चाहते हैं. चाहे पढ़ाई हो, खेल हो या एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज़ हों, ये हर क्षेत्र में बच्चों को पुश करते हैं. वास्तविकता से दूर जब ऐसा बच्चा माता-पिता की उम्मीदों पर ख़रा नहीं उतर पाता तो वह दुख, मायूसी व दुविधा की स्थिति का सामना करता है.
डॉक्टर लेविन के अनुसार सम्पन्न व धनी परिवार के बच्चों में साधारण परिवार के बच्चों के मुक़ाबले डिप्रेशन व चिन्ता की स्थिति तीन गुना ज़्यादा देखी जाती है. ऐसे बच्चे ग़लत रास्ते पर जा सकते हैं. ड्रग्स का सहारा लेने लगते हैं. कभी-कभी तो बच्चे स्वयं से ही नफ़रत करने लगते हैं. बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जिस वातावरण की ज़रूरत होती है, वह उन्हें नहीं मिल पाता. एक के बाद एक क्लासेस उनकी दिनचर्या बन जाती है. स्कूल के बाद कोचिंग, फिर हर क्लास के होमवर्क के बीच उन्हें अपनी क्रिएटिविटी या टैलेन्ट पहचानने व उसे निखारने का समय बिल्कुल नहीं मिल पाता.

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कैसे जानें कि आप पुशी पैरेंट हैं?

सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ जीवन के प्रति उत्साहित व प्रोत्साहित हों. लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब पैरेंट्स हर क्षेत्र में दूसरों से एक क़दम आगे की अपेक्षा रखने लगते हैं. ऐसे पैरेंट्स ही पुशी पैरेंट्स कहलाते हैं. हर क्षेत्र व हालत में जीतने या सफलता की चाह निश्‍चय ही सुखद उपलब्धि है. लेकिन दबाव इतना नहीं होना चाहिए कि बच्चे टूटने लगें, डिप्रेशन में चले जाएं. मानसिक रोगी बन जाएं. आत्महत्या जैसे अपराध उनकी सोच का हिस्सा बन जाएं अथवा वे बेहद उद्दंड या अनुशासनविहीन बन जाएं. कहीं आप भी अपने पुशी स्वभाव के कारण बच्चे को दूसरों से एक क़दम आगे बढ़ाने की चाह में ऐसा ही तो नहीं कर रहे कि आगे बच्चों के साथ-साथ आप भी परेशानी महसूस करें. सायकोलॉजिस्ट श्रुति भट्टाचार्य के अनुसार, पैरेंट्स को कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए और हर समय बच्चों पर दबाव डालने की बजाय अपने व्यवहार में कुछ इस तरह नियंत्रण व समझदारी लानी चाहिए, जैसे-
मुस्कुराना व ख़ुश रहना बड़ा पॉज़िटिव दृष्टिकोण है. आप मुस्कुराएंगे, तो बच्चा भी वही सीखेगा. उसमें आत्मविश्‍वास और आप पर भरोसा बढ़ेगा कि वो जैसा भी है, आपको प्रिय है.
स्कूल से लौटने पर आते ही पढ़ाई संबंधी बातें जानने की आतुरता न दिखाएं, उसे थोड़ा फ्रेश होने दें. बाद में होमवर्क के साथ बातें की जा सकती हैं.
बच्चे की तुलना किसी भी फ्रेंड या रिश्तेदार से न करें. इससे बच्चे के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है.
बच्चा जब भी आपके पास आकर बैठता है, तो ध्यान दें कि कहीं आप उसकी पढ़ाई को लेकर चिन्तित तो नहीं हो जाती हैं. अपनी मां-बहन या सहेली से बातचीत के दौरान उसकी पढ़ाई की चिन्ता तो व्यक्त नहीं कर रही हैं. यदि ऐसा है तो ये सही एटीट्यूड नहीं है.
एक के बाद एक क्लास ज्वॉइन कराकर आपने सही किया या ग़लत, इसे बच्चे के दृष्टिकोण से भी देखें कि कहीं ऐसा तो नहीं कि देखा-देखी या तुलना के चक्कर में आपने ऐसा किया है.
बातचीत अनेक समस्याओं का हल है. लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि आप बोलती रहें और वो सुनता रहे. यदि ऐसा है, तो निश्‍चित जानिए उसने आपकी बातों पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया है.
मौज-मस्ती भी जीवन का अहम् हिस्सा है. यदि उसकी दिनचर्या में इसकी गुंजाइश नहीं है, तो आपको उसके टाइम टेबल में इसे शामिल करना होगा.
परीक्षा के दिनों में हर समय उसके साथ बने रहने की कोशिश न करें. हर समय का साथ उसके आत्मविश्‍वास को कम कर सकता है. बच्चा रिलैक्स होने की बजाय ज़्यादा प्रेशर में आ सकता है.
अपने बच्चे की क्षमता व सीमा समझे बिना हमेशा आगे और आगे बढ़ने के लिए उसे पुश करने से आप हित की बजाए उसका अहित कर रही हैं. बेहतर होगा कि अपनी सोच में बदलाव लाएं.
उसके भविष्य को लेकर आपके मन में असुरक्षा का भाव स्वाभाविक है. लेकिन आत्मसम्मान की कमी होने से भी पैरेंट्स ख़ुद असुरक्षित महसूस करते हैं और यही भाव वो अपने बच्चों में भी भर देते हैं. ऐसी स्थिति में बच्चा विश्‍वास खोने लगता है. बेहतर होगा कि ख़ुद में व बच्चों में विश्‍वास रखते हुए अपने प्यार व स्नेह की छत्रछाया में उसे सुरक्षा महसूस कराएं.
अनुशासन व आज्ञाकारिता महत्वपूर्ण है, किन्तु समय-समय पर उदारता भी ज़रूरी है. निर्देश देने की बजाय परामर्श दें.
कभी-कभी बच्चों को पूर्ण स्वतन्त्रता देकर उनकी क़ाबिलियत पर भरोसा रखना भी आवश्यक है. संभवतः वे स्वयं ही आगे बढ़ जाएं.
केवल परफ़ॉर्मेंस पर ज़ोर न देकर पढ़ने के सही तरी़के के महत्व को समझें, बच्चों को प्रोत्साहित करें. शिक्षा का सही अर्थ है सीखना व उसे व्यवहार में उतारना.
बच्चे का स्तर दूसरे की योग्यता देखकर निर्धारित न करें, बल्कि उसके अपने स्तर को धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए उत्साहित करें, क्योंकि ‘स्लो एंड स्टडी विन्स द रेस’ यानी धीरे-धीरे धैर्य से चलनेवाला ही अंत में जीतता है.

– प्रसून भार्गव

परफेक्ट लाइफ पार्टनर की तलाश के स्मार्ट फॉर्मूले (Smart formulas to find out perfect life partner)

find out perfect life partner

परफेक्ट जीवनसाथी (find out perfect life partner) और सफल वैवााहिक जीवन की कल्पना तो सभी करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं, जिनका दांपत्य जीवन सुखी है. तलाक़ की बढ़ती तादाद को देखते हुए ही एक अनुसंधान ने कोशिश की है परफेक्ट जो़ड़ों को मिलाने की कुछ सवालों के आधार पर, ताकि  परफेक्टे शादी की कल्पना को पूरा किया जा सके. आइए, डालते हैं इस पर एक नज़र.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने डेटिंग सर्विस देने वाली एक संस्था के साथ मिलकर जीवनसाथी की तलाश आसान बनाने के लिए गुणों के आधार पर जोड़े बनाने का फॉर्मूला खोजा है. इसके तहत किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व विश्‍लेषण की तस्वीर उजागर करने के लिए दोनों ही पक्षों से 256 प्रश्‍न पूछे जाते हैं और इनका लगभग एक समान उत्तर देने वाले स्त्री-पुरुषों को एक-दूसरे का जीवनसाथी बनने के लिए हरी झंडी मिल जाती है.

डॉ. ग्लेन बकवाल्टर का मानना है कि इन 29 गुणों के मिल जाने से लंबे समय तक चलने वाले सुखद भविष्य की 80 प्रतिशत ग्यारंटी दी जा सकती है. उनका यह भी मानना है कि इन गुणों को मिलाने का  उद्देशय है, एक ऐसे व्यक्ति की तलाश, जो भावनात्मक रूप से एक दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें और बिना झगड़े और विचारों की टकराहट के प्रेमपूर्वक रह सकें.

आपका स्वभाव कितना लचीला, कितना हठीला, कितने खुले दिलों दिमाग़ के, दूसरों की बात सहज मान लेने वाले, सहनशक्ति, रुचियां, आदतें इंटर पर्सनैलिटी केमिस्ट्री, आपकी उम्र, आपका व्यवसाय, कितने सचेतन हैं आदि सवाल 29 सूत्रों में शामिल हैं. यदि आपने अपना जीवनसाथी चुन लिया और जल्दी ही विवाह करने का मानस भी बना लिया है तो हमारे चंद सवालों पर ग़ौर फ़रमाएं और यदि आप भी हमारे विचारों से सहमत हैं तो सुखमय वैवाहिक जीवन आपके स्वागत के लिए तैयार है.

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शादी से क्या अभिप्राय है?
  • यह शरीर, मन व आत्मा का मिलन है. दांपत्ति अपना भावी जीवन साथ बिताना चाहते हैं. अपनी समस्याएं, अपने सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाना चाहते हैं. भविष्य को मिलकर उज्ज्वल बनाएंगे.
  • विवाह एक वैधानिक व्यवस्था है जिसमें आप अपना परिवार बढ़ाएंगे. दो लोग साथ रहें और उस प्यार के रिश्ते का वैधानिक नाम है विवाह होना.
  • वैवाहिक संबंध दोनों को संतुष्टि व अपनी अपनी  विषयों को मिल बांट कर ख़ुशी मनाने का मौक़ा दें.
  • यह ज़रूरी है कि पति-पत्नी दोनों मनोवैज्ञानिक दृष्टि से समझदार हों और विवाह से पूर्व दोनों में परस्पर अच्छी समझ हो इसके साथ ही आर्थिक स्थिति भी अच्छी हो और लंबे समय तक साथ रहने का धैर्य भी हो.
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एक दूसरे को कितना समझते हैं?
  • विवाह से पूर्व ही उस सवाल का जवाब जानने का प्रयास करें, आज मैनेजमेंट का ज़माना है. डथजढ (स्ट्रेन्थ, वीकनेस, अपारच्युनिटी और थ्रेट) से सभी परिचित हैं. आपके रिश्ते की ताक़त/ शक्ति और कमजोरियां व रिश्ता किन स्थितियों में टूटने के कग़ार पर आ सकता है. सबसे अवगत होना ज़रूरी है.
  • अपने साथी की उपलब्धियिों व अच्छाइयों पर तो नाज़ कर सकते हैं, पर क्या उसकी कमजोरियों को स्वीकार कर सकते हैं. भविष्य में  निराशा व संघर्ष से बचने के लिए यह ज़रूरी है कि जीवनसाथी को उसकी अच्छाई व कमजोरी दोनों को साथ स्वीकार करना होगा. एक-दूसरे को बदलने के प्रयास करने की बजाय आपकी बातचीत से शांतिपूर्वक अपना पक्ष रखने व दूसरे को सुनने के गुर सीखने होंगे.
  • क्या जीवनसाथी के परिवार व दोनों के साथ तालमेल कैसा है. केवल जीवनसाथी से अच्छे व्यवहार से बात नहीं बनती है. क्या उसके परिवार वालों व दोस्तों को देखकर आपकी भवें तन तो नहीं जातीं? यदि ऐसा है तो अपने आपको सुधार लें. तुम्हारी मां ने ऐसा क्यों कहा? तुम्हारे दोस्त ऐसे या वैसे क्यों हैं? की छोटी छोटी लड़ाइयां रिश्तों को टूटने के कग़ा पर ले आती है. इनसे दोस्ताना व्यवहार आपके रिश्ते को प्रगाढ़ कर आपका ही सामाजिक दायरा बढ़ाएगा.
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क्या मैं शादी के बाद अच्छा पति या पत्नी साबित होऊंगा?
  • आजकल पति पत्नी दोनों कामकाजी हैं और प्रो़फेशनल होने नाते उनकी बड़ी ज़िम्मेदारियां हैं. शादी के बाद सारी घरेलू ज़िम्मेदारियां स़िर्फ पत्नी के हवाले कर देने का ज़माना नहीं है. क्या इस बदली हुई स्थिति को संभालने के लिए आप तैयार हैं.
  •  पत्नी के साथ संग-संग किचन में, बच्चों की बेबी सिटिंग जैसी ज़िम्मेदारियों के लिए अपने को अभी से तैयार कर लें. ङ्गईगोफ को कहीं किसी छुपे कोने में ही छुपा दे जहां से उसे ढूंढा न जा सके.
  • यही नहीं, ख़र्चे भी मिल-बांट कर करने होंगे,  ज़्यादा महाभारत इसी कारण होते हैं.
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विवाह पूर्व हेल्थ चेकअप करना ज़रूरी है?
  • आपके व भविष्य में आपके परिवार के स्वास्थ्य के लिए आपका हेल्थ चेकअप ज़रूरी है. सुखी वैवाहिक जीवन ग्रह नक्षत्रों की दशा पर नहीं आपके स्वस्थ शरीर पर निर्भर करता है. कोई ऐसी बीमारी जो आने वाले समय में आपके बच्चों को प्रभावित कर सकती है के बारे में पहले से जानकर एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की स्थिति नहीं आती है.
  • विवाह के बाद शिशु आगमन के लिए थोड़ा इंतज़ार करें ताकि एक-दूसरे को आप समझ सकें. शिशु के आगमन के लिए शारीरिक व मानसिक  दृष्टि से तैयार हो सकें. शिशु घर में ख़ुशियों का सबब बनकर आये न कि  जी का जंजाल बन जाएं.
  • ख़लील ज़िब्रान ने कहा था कि विवाह के रिश्ते में एक-दूसरे से प्रेम को  बेड़ी मत बनाओ. एक-दूसरे का प्याला तो भरो किंतु दोनों एक ही प्लाले से मत पियो. अपनी रोटी दूसरे को खिला दो, किंतु दोनों एक ही रोटी से मत खाओ. मिलकर नाचो, गाओ और ख़ुशियां तो मनाओ, किंतु अपनी अपनी जगह पर अकेले रहो. वैसे की जैसे वीणा का प्रत्येक तार अकेला रहकर भी एक ही संगीत से झंकृत होता है. एक सुंदर स्वर लहरी निकले आपके मिलन से इसके लिए ज़रूरी है कि कुछ ख़ास बातें याद रखना न भूलें.
  • अदिति

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जानें बैंकिंग के स्मार्ट ऑप्शन्स ( Learn Smart Banking Options)

Smart Banking

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पल-पल स्मार्ट होती टेक्नोलॉजी ने हमारी ज़िंदगी को भी स्मार्ट बना दिया है, तो भला हमारे बैंक क्यों पीछे रहें. अपने ग्राहकों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को और आसान व बेहतर बनाने के लिए ज़्यादातर बैंक लेटेस्ट व स्मार्ट ऑप्शन्स लेकर आए हैं. आपकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए हम कुछ ऐसे ही स्मार्ट बैंकिंग ऑप्शन्स के बारे में आपको यहां जानकारी दे रहे हैं, ताकि आपकी बैंकिंग हो स्मार्ट व ईज़ी.

इंटरनेशनल डेबिट कार्ड युक्त एटीएम कार्ड्स
आजकल ज़्यादातर बैंक अकाउंट खोलते ही एटीएम कार्ड मुफ़्त में देते हैं. ज़्यादातर एटीएम कार्ड डेबिट कार्ड की सुविधा सहित आते हैं, जिनसे आप पैसे निकालने के साथ-साथ बिल का भुगतान, शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, टैक्स पेमेंट आदि आसानी से कर सकते हैं. अपने अकाउंट के हर छोटे-बड़े ट्रांज़ैक्शन की जानकारी के लिए आप एटीएम कार्ड की मदद से मिनी स्टेटमेंट्स भी ले सकते हैं.

सुविधाजनक मल्टीसिटी चेक
ऑनलाइन होने के कारण बैंक की सभी शाखाएं आपस में जुड़ी होती हैं, जिससे ग्राहक अपने शहर के अलावा किसी दूसरे शहर की ब्रांच से मल्टीसिटी चेक के ज़रिए लेन-देन कर सकते हैं. मल्टीसिटी चेक जारी करने के लिए बैंक साधारण फीस लेते हैं. ख़ासकर छोटे-मोटे व्यापारियों के लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.

ऑटो स्वीप से पाएं ज़्यादा इंट्रेस्ट
अगर हर महीने आपके अकाउंट में अच्छी-ख़ासी रक़म रहती है, तो ऑटो स्वीप आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसके ज़रिए आप सेविंग्स अकाउंट पर फिक्स डिपॉज़िट वाला ब्याज़ पा सकते हैं. इसके लिए आपको अपने बैंक अकाउंट में मिनिमम या थे्रशहोल्ड अमाउंट निश्‍चित करना होगा. एफडी के लिए अमाउंट व समय सीमा निश्‍चित करें. बस, हर महीने निश्‍चित तारीख़ को आपकी मिनिमम अमाउंट के अलावा जितना एक्स्ट्रा अमाउंट रहेगा, वो अपने आप एफडी में चला जाएगा और बिना किसी झंझट के आपको मिलेगा एफडी का फ़ायदा.

बेजोड़ है इंटरनेट बैंकिंग
इंटरनेट के ज़रिए आप आसानी से सुरक्षित तरी़के से बैंकिंग कर सकते हैं. न कहीं जाने का झंझट और न ही समय की पाबंदी. बस, एक क्लिक कीजिए और आपका बैंक आपकी सेवा में हाज़िर. इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए आप अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करना, चेकबुक मंगवाना, बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज, टैक्स पेमेंट, इन्वेस्टमेंट, शॉपिंग, ईमेल के ज़रिए अकाउंट स्टेटमेंट मंगवाना और अकाउंट बैलेंस चेक करने जैसे तमाम काम आसानी से कर सकते हैं.

अब करें स्मार्ट मोबाइल बैंकिंग
अगर आपके पास स्मार्टफोन या एंड्रॉइड मोबाइल फोन है, तो आप मोबाइल बैंकिंग सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. जानकारों के अनुसार, मोबाइल बैंकिंग इंटरनेट बैंकिंग से भी ज़्यादा सुरक्षित है. इसकी मदद से आप अकाउंट बैलेंस चेक करना, बिल पेमेंट, फंड्स ट्रांसफर करना, ट्रांज़ैक्शन्स चेक करना, एटीएम कार्ड ब्लॉक करना, चेकबुक ऑर्डर करना, इन्वेस्टमेंट, एटीएम लोकेशन, चेक डिपॉज़िट, डीटीएच रिचार्ज करना, अपने लोन की पूरी जानकारी हासिल करना, मूवी टिकट ख़रीदना आदि काम आसानी से कर सकते हैं.

एसएमएस अपडेट से हर व़क्त रहें अलर्ट
मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट के ज़रिए आपके अकाउंट से जुड़े सभी लेन-देन की जानकारी आप तक चुटकियों में पहुंच जाती है. किसी भी तरह के ट्रांज़ैक्शन पर आपके मोबाइल पर आपको तुरंत मैसेज आ जाता है. इसकी मदद से आप अपने बैंक अकाउंट की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नज़र रख सकते हैं.

ओवरड्राफ्ट की सुविधा 
ओवरड्राफ्ट सुविधा यानी आपके अकाउंट में जितनी रक़म है, उससे ज़्यादा रक़म आप इस्तेमाल कर सकते हैं या बैंक से निकाल सकते हैं. ओवरड्राफ्ट की मदद से नक़दी की समस्या को तुरंत दूर किया जा सकता है. हालांकि ज़्यादातर बैंकों में यह रक़म एक महीने के भीतर जमा करनी होती है. करंट अकाउंट होल्डर्स और
कॉर्पोरेट अकाउंट होल्डर्स जैसे ख़ास अकाउंट होल्डर्स को यह सुविधा दी जाती है. ख़ासकर छोटे व्यापारियों के लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.

ज़ीरो बैलेंस सैलेरी अकाउंट
सैलेरी बैंक अकाउंट में हर महीने आपका एम्प्लॉयर आपकी सैलेरी जमा करता है. वैसे तो यह सामान्य बैंक अकाउंट जैसा ही होता है, पर इसमें बैंक की तरफ़ से ज़ीरो बैलेंस, फ्री इंटरनेशनल डेबिट कार्ड, जमा राशि पर सामान्य से अधिक ब्याज़, क्रेडिट कार्ड, ओवरड्राफ्ट जैसी कुछ अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं.

दूसरे बैंकों में पैसे भेजना आसान
आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी सुविधाएं शुरू कर रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने दूसरे बैंकों में पैसा भेजने की प्रक्रिया को बहुत आसान कर दिया है. आरटीजीएस यानी रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट और एनईएफटी यानी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर ख़ासकर व्यापारियों के बड़े काम आ रही है. देश के ज़्यादातर बैंकों में यह सुविधा मौजूद है. इसके लिए आपके पास उस बैंक का आईएफएससी कोड होना चाहिए, जहां आपको पैसे ट्रांसफर करने हैं. आरटीजीएस के ज़रिए जहां दो लाख से अधिक रक़म ट्रांसफर हो सकती है, वहीं एनईएफटी में कोई सीमा निर्धारित नहीं है. इसके ज़रिए पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है, जिससे काम भी तेज़ी से होता है. ड्राफ्ट की बजाय इससे पैसे भेजना ज़्यादा सुविधाजनक है.

खुल रहे हैं स्मार्ट बैंकिंग ब्रांच
स्मार्ट बैंकिंग ब्रांच एक ऐसा ही स्मार्ट ऑप्शन है, जिसके ज़रिए आपकी बैंकिंग होगी और भी स्मार्ट व ईज़ी. स्मार्ट बैंकिंग ब्रांच सामान्य बैंक ब्रांच से अलग होती है. यहां ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई डिजिटल फीचर्स का इस्तेमाल किया जाता है. इंटरैक्टिव डिजिटल वॉल्स पर पब्लिक के लिए काफ़ी जानकारी दी जाती है. इसमें टच स्क्रीन होता है, जिसके ज़रिए आप किसी भी प्रोडक्ट की जानकारी हासिल कर सकते हैं. वर्क बेंचेज़ के ज़रिए ग्राहक ख़ुद ट्रांज़ैक्शन कर सकते
हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बैंक के कर्मचारियों से अपनी समस्याएं सुलझा सकते हैं.

आया स्मार्ट होम लोन का ज़माना
ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ बैंक स्मार्ट होम लोन लेकर आए हैं. यह आम होम लोन से थोड़ा अलग होता है. इसमें होम लोन को आपके सेविंग्स या करंट अकाउंट से जोड़ देते हैं, जिससे आम लोन के मुक़ाबले ईएमआई की रक़म कम हो जाती है और लोन की समय सीमा भी घट जाती है. अगर आपके सेविंग्स अकाउंट में भी ठीक-ठाक रक़म है, तो आम होम लोन की बजाय स्मार्ट होम लोन चुनना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

– अनीता सिंह

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आज़ादी का ग़लत फ़ायदा तो नहीं उठा रहे आपके बच्चे?

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आज़ादी एक ऐसा शब्द है, जिसे हर कोई महसूस करना चाहता है. आज़ादी के इस माह में इसका मतलब समझना बहुत ज़रूरी है. बच्चों के मामले में ये बात और भी ज़रूरी हो जाती है. आपके बच्चे आप द्वारा दी गई आज़ादी का कहीं ग़लत फ़ायदा तो नहीं उठा रहे? 

 

मॉडर्न ज़माने के पैरेंट्स अपने बच्चों को हर तरह की आज़ादी देना पसंद करते हैं. बच्चा थोड़ा बड़ा हुआ नहीं कि उसे घर में एक स्थान मिल जाता है. उसकी बातों को अहमियत मिलने लगती है, लेकिन इसी अहमियत का बच्चे कई बार ग़लत फ़ायदा उठाते हैं. ऐसे में जब तक पैरेंट्स को इसकी जानकारी होती है, बच्चे बहुत आगे निकल जाते हैं. आपके लाड़ले/लाड़ली के साथ भी कुछ ऐसा न हो जाए, इसके पहले सतर्क हो जाएं और उन पर नज़र रखें कि कहीं वो आप द्वारा दी गई आज़ादी का ग़लत फ़ायदा तो नहीं उठा रहे.

घूमने की आज़ादी

मॉडर्न बनने के चक्कर में पैरेंट्स का सख़्त रवैया अब बच्चों पर नहीं रह गया है. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वो समाज के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएंगे. 13 साल की पूजा की मां नित्या अपनी सहेलियों से बड़े ताव से कहती हैं कि आजकल के बच्चे बहुत समझदार हैं. उन्हें हर बात पर रोकना-टोकना अच्छी बात नहीं. वो जहां जाएं जाने देना चाहिए. इससे बच्चे और पैरेंट्स के बीच बॉन्डिंग बढ़ती है. नित्या की बातें सुनने में अच्छी लग सकती हैं, लेकिन क्या आपको लगता है कि टीनएज में बच्चे इतने समझदार हो जाते हैं कि उन्हें अपने हिसाब से ज़िंदगी जीने के लिए छोड़ दिया जाए! नहीं, बिल्कुल नहीं. ऐसा करने से बच्चों के दिमाग़ में ये बैठ जाता है कि वो जो भी करेंगे अच्छा करेंगे. भले ही आज वो क्लासेस से लेट आएं, लेकिन संभव है कि कल वो क्लासेस छोड़ दोस्तों के साथ कहीं बाहर घूमने निकल जाएं. उनके दिमाग़ में तो आपने डाल ही दिया है कि वो समझदार हैं. ऐसे में उन्हें अपना हर क़दम सही ही लगेगा.

क्या करें?

बच्चों को हर बात पर टोकना सही नहीं है, लेकिन उन पर नज़र रखना और उनकी दिनचर्या के बारे में जानकारी रखना आपका फर्ज़ है.

बोलने की आज़ादी

पहले पैरेंट्स के सामने बच्चों को अपनी बात रखने की आज़ादी नहीं थी. माता-पिता ने जो कह दिया बच्चे उसे फॉलो करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. बचपन से ही पैरेंट्स अपने बच्चे को उसका मत व्यक्त करने की आज़ादी दे देते हैं. इसका बच्चे पर कई बार बुरा असर भी पड़ता है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वो आपकी बात को काटना शुरू कर देता है. उसे लगता है कि वह सही है और आप ग़लत. इतना ही नहीं, जब किसी ग़लत बात पर आप उसे डांटते हैं, तो वो आपको अनसुना कर देता है. कई बार बच्चे ये भी कहते हैं कि पहले तो आप नहीं बोलते थे, फिर अब मैं इस बात पर ग़लत कैसे हो सकता हूं. इस तरह के सवाल आपको उलझा सकते हैं और आप दोनों के रिश्ते में दरार पड़ सकती है.

क्या करें?

बच्चों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौक़ा दें, लेकिन इतना तय कर लें कि वो आपसे बड़े न हो जाएं. आपका निर्णय ही आख़िरी निर्णय हो.

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अपना सर्कल बनाने की आज़ादी

आपने भी कई बार पैरेंट्स को कहते सुना होगा कि बच्चों का अपना सर्कल है. अब उन्हें उनकी दुनिया बसाने का पूरा हक़ है. वो अपने हिसाब से दोस्त बना सकते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तरह के भाव आपके बच्चे के भविष्य के लिए उचित नहीं हैं. बनारस में रहनेवाले निखिल अरोरा (परिवर्तित नाम) के 8 साल के बेटे ने अपने से बड़े लड़कों के साथ दोस्ती कर ली. निखिल और उनकी पत्नी को इन दोस्तों के बारे में भनक भी नहीं थी. कुछ महीनों के बाद निखिल की पत्नी ने अपने बेटे को कुछ ऐसा करते देखा, जो उसकी उम्र के बच्चे नहीं करते. अपने बच्चे को ऐसा करते देख वो सकते में आ गईं. इस बात को उन्होंने अपने पति से शेयर किया. दोनों परेशान हुए, लेकिन बेटे से उस हरक़त के बारे में पूछ भी नहीं सकते थे. ऐसे में उन्होंने चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद ली. पति-पत्नी की बात सुनने के बाद साइकोलॉजिस्ट ने उन्हें बताया कि इस तरह की हरक़त तो स़िर्फ बड़े बच्चे ही कर सकते हैं. मुमक़िन है कि आपके बच्चे की दोस्ती उसकी उम्र से काफ़ी बड़े बच्चों के साथ हो गई है. निखिल ने जब पता किया, तो साइकोलॉजिस्ट की बात सही निकली. किसी तरह दोनों पति-पत्नी अपने बच्चे को उस सर्कल से छुड़ाने में सफल हुए.

क्या करें?

आपका बच्चा अभी माइनर है. ऐसे में उसे कोर्ट भी इजाज़त नहीं देता कि वो अपना फैसला ख़ुद कर सके, फिर आप तो माता-पिता हैं. बच्चा किससे मिलता है, कहां जाता है आदि बातों पर नज़र रखें.

पढ़ाई की आज़ादी

पहले की अपेक्षा आजकल के पैरेंट्स अपने बच्चों को खुलकर जीने देते हैं. वो बच्चे पर किसी तरह की रोक-टोक लगाना पसंद नहीं करते. 13 साल की निकिता के पापा अविनाश को तब आश्‍चर्य हुआ, जब उनकी बेटी ने किसी ख़ास कोचिंग क्लास में एडमिशन कराने की ज़िद्द पकड़ ली. अविनाश के लाख मना करने पर भी उसने उसी क्लास में दाख़िला लिया. अविनाश जानते थे कि वो क्लास बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन वे बेटी को मना नहीं कर पाए. बेटी के एडमिशन के कुछ महीनों बाद अविनाश को पता चला कि उसकी कई सहेलियां उसी क्लास में पढ़ती हैं. तब अविनाश को पूरा मामला समझ आया. साथ ही निकिता की पढ़ाई पर भी इसका असर देखने को मिला. अतः बच्चों को आज़ादी दें, लेकिन एक लिमिट तक. इस उम्र में उनमें इतनी समझदारी नहीं होती कि वो अपना बुरा-भला समझ सकें.

क्या करें?
बच्चों की राय ज़रूर लें, लेकिन निर्णय ख़ुद लें. उन्हें सही तरह से समझाने की कोशिश करें.
पहनने की आज़ादी

वैसे तो हमारे समाज में सबको अपने धर्म और मन-मुताबिक़ पहनने की आज़ादी है, लेकिन छोटी उम्र से ही बच्चों को इसकी आज़ादी देकर आप उनका भविष्य बिगाड़ रही हैं. मनीषा ख़ुद को मॉडर्न मां बताती थीं. अपने बच्चों को मॉडर्न कपड़े पहनाने में कभी पीछे नहीं हटीं, लेकिन जब उनकी बेटी कॉलेज में गई, तो उसने वैसे ही कपड़े पहनना जारी रखा, जो वो बचपन से पहनती आयी है. बड़ी होती बेटी को शॉर्ट कप़ड़ों में देखकर अब मनीषा को थोड़ा अटपटा लगने लगा. कई बार उन्होंने बेटी को इसके लिए टोका, लेकिन बेटी ने सीधा जवाब दिया कि बचपन से तो आप मुझे ऐसे ही कपड़े पहनाती आयी हैं, अब क्या हुआ? आपके सामने इस तरह की स्थिति न आए, इसलिए समझदारी से बच्चों से डील करें.

क्या करें?
किसी भी तरह का आउटफिट ख़राब नहीं होता, लेकिन आसपास के माहौल को देखकर ही इसका निर्धारण करना चाहिए.

 

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स्मार्ट टिप्स 
  • मॉडर्न बनने के चक्कर में अपनी सभ्यता और संस्कृति को दांव पर न लगाएं.
  • बच्चे को बच्चा ही रहने दें. कम उम्र में उसे बहुत होशियार/समझदार बनाने की कोशिश न करें.
  • घर में ऐसा माहौल तैयार करें कि बच्चा आपसे डरे नहीं, लेकिन कोई भी बात आपसे छिपाए नहीं.
  • दूसरों के बच्चे को देखकर अपने घर का माहौल बदलने की कोशिश न करें.
  • कोशिश करें कि बच्चे को सही परवरिश मिले.
    – श्‍वेता सिंह

मोबाइल डाटा बचाने के स्मार्ट टिप्स

 
क्या आप हर महीने के बढ़ते मोबाइल इंटरनेट बिल से परेशान हैं? क्या आपको भी लगता है कि बिना ज़्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल किए, आप उसकी क़ीमत चुका रहे हैं, तो आपको करने होंगे कुछ आसान से उपाय. जी हां, मोबाइल सेटिंग्स में थोड़े बदलाव करके और कुछ लेटेस्ट ऐप्स की मदद से आप अपने मोबाइल का काफ़ी डाटा बचा सकते हैं.

 

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कैसे ख़र्च होता है डाटा?

आजकल लगभग हर दूसरे काम के लिए हम इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इंटरनेट ने हमारे काम को काफ़ी हद तक आसान बना दिया है, पर आपको पता है कि आपकी छोटी-छोटी एक्टीविटीज़ पर कितना डाटा ख़र्च होता है, आइए डालें इस पर एक नज़र.

– अगर आप रोज़ाना ऑनलाइन किसी न्यूज़ वेबसाइट पर 15 मिनट तक कोई न्यूज़ वीडियो देखते हैं, इसके बाद यूट्यूब पर कुछ फनी वीडियोज़ देखते हैं, किसी वेबसाइट पर आधे घंटे का कोई सीरियल देखते हैं, तो महीने में आप क़रीब 1.25 जीबी डाटा ख़र्च करते हैं.

– 30 मिनट की ड्राइविंग के व़क्त ऑनलाइन गाने सुनने भर से आप क़रीब 800 एमबी डाटा ख़र्च कर देते हैं.

– कुछ लोगों को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हर व़क्त फोटोज़ अपलोड करने का बहुत शौक़ होता है. स़िर्फ फोटोज़ ही नहीं, कुछ लोग पूरा का पूरा एलबम अपलोड कर देते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि एक दर्जन हाई रेज़ोल्यूशन फोटो अपलोड करने में क़रीब 400-500 एमबी डाटा ख़र्च होता है. तो सोचिए अगर आप रोज़ाना ऐसा करते हैं, तो लगभग कितना डाटा ख़र्च होगा?

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कैसे बचाएं इंटरनेट डाटा?

– ज़रूरी नहीं कि आपका इंटरनेट डाटा हर व़क्त ऑन रहे. अगर आप ड्राइविंग कर रहे हैं, मीटिंग में हैं, सो रहे हैं, तो उस व़क्त आप इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते, उस व़क्त के लिए डाटा बंद करके न स़िर्फ आप पैसे बचाएंगे, बल्कि मोबाइल की बैटरी भी बचाएंगे.

– आजकल व्हाट्सऐप काफ़ी लोकप्रिय ऐप है. पर जैसा कि आप जानते हैं कि व्हाट्सऐप पर कोई भी इमेज, वीडियो और ऑडियो अपने आप डाउनलोड हो जाता है, जिसमें बेवजह बहुत-सारा डाटा ख़र्च हो जाता है. चैट सेटिंग्स में जाकर मीडिया ऑटो डाउनलोड में अपनी ज़रूरत के मुताबिक ऑटो डाउनलोड बंद कर दें. इससे ऑटो डाउनलोड बंद हो जाएगा और आप अपनी पसंद की इमेज या वीडियो अपनी मर्ज़ी से डाउनलोड कर सकते हैं.

– अक्सर हमें पता भी नहीं चलता और बैकग्राउंड में बहुत-से ऐप्स काम करते रहते हैं, जिससे आपको बिना पता चले आपका क़ीमती डाटा ख़र्च होता रहता है. इससे बचने के लिए सेटिंग्स में डाटा यूसेज़ में जाएं और रेस्ट्रिक्ट बैकग्राउंड डाटा ऑप्शन पर टिक करें. इससे आपका काफ़ी डाटा बच जाएगा.

– जब भी घर पर रहें, तब मोबाइल डाटा ऑफ करके घर का वाई-फाई इस्तेमाल करें. घर पर वाई-फाई लगवाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, इसमें आप एक कंप्यूटर के साथ 2-3 मोबाइल भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

– ग़ैरज़रूरी पुश नोटिफिकेशन बंद करें. आजकल की सोशल नेटवर्किंग साइट्स और मैसेजिंग साइट्स पर ये बहुत ज़्यादा होते हैं, जो बेवजह आकर आपका डाटा ख़र्च करते रहते हैं. मोबाइल के सिस्टम सेटिंग्स में जाकर पुश नोटिफिकेशन का ऑप्शन डिसेबल कर दें.

– गाने सुनने के शौक़ीन हैं, तो ऑनलाइन सुनने की बजाय अपने पसंदीदा गानों को एक बार में ही डाउनलोड कर लें, उसके बाद आप जब चाहें, तब उनका लुत्फ़ उठा सकते हैं.

– ऐप्स को अपडेट करने के लिए उन्हें वाई-फाई अपडेट मोड पर रखें. इसके लिए प्ले स्टोर में जाकर सेटिंग्स पर क्लिक करके ऑटो अपडेट ऑप्शन चेक करें. ऑटो अपडेट ऐप्स ओवर वाई-फाई ओनली सिलेक्ट करें.

– अपने डाटा यूसेज़ पर नज़र रखें. इससे आपको पता चलेगा कि कौन-सा ऐप कितना डाटा इस्तेमाल कर रहा है. इसके बाद आप ऐप्स के मुताबिक लिमिट सेट कर सकते हैं, ताकि वह ऐप उससे ज़्यादा डाटा इस्तेमाल न कर पाए.

– मोबाइल ब्राउज़र का सही चुनाव करके भी आप मोबाइल डाटा बचा सकते हैं. इसके लिए मोबाइल के लिए इस्तेमाल होनेवाले ब्राउज़र्स चुनें, जो ज़्यादा डाटा ख़र्च किए बिना अच्छी स्पीड से काम करते हैं. इसके लिए गूगल क्रोम, ओपेरा मिनी और टेक्स्ट ओनली ब्राउज़र्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.

– अगर आप बहुत ज़्यादा मैप्स यानी ऑनलाइन नक्शों का इस्तेमाल करते हैं, तो ट्रैवलिंग से पहले ही वाईफाई पर गूगल मैप्स डाउनलोड कर लें. बाद में बिना ऑनलाइन गए आप ऑफलाइन भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

– बहुत-से लोग मोबाइल में जगह बनाने के लिए कैश मेमोरी डिलीट कर देते हैं. पर अगर आप इंटरनेट का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसा न करें, क्योंकि कैश में ऐसी कई ईमेजेस डाउनलोडेड होती हैं, जो अगली बार डाउनलोड होने से बच जाएंगी.

– अकाउंट सिंक्रोनाइज़ सेटिंग्स का सही इस्तेमाल करें. फेसबुक और गूगल प्लस की सेटिंग्स में जाकर ऑटो सिंक्रोनाइज़ डिसेबल कर दें. इससे बेवजह ईमेजेस डाउनलोड नहीं होंगी और आपका डाटा कम ख़र्च होगा.

यह भी पढ़ें: ज़िंदगी को आसान बनानेवाले ऐप्स

 

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डाटा बचाने के स्मार्ट ऐप्स

– अगर आप ऑनलाइन मैप्स वगैरह हमेशा देखते हैं, तो Navfree (नेवफ्री) और
Mapswithme Light (मैप्सविदमी लाइट) आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकते हैं, क्योंकि ये ऑफलाइन भी काम करते हैं.

Opera Max (ओपेरा मैक्स): अपने मोबाइल में यह ऐप इंस्टॉल करें. यह आपके वीडियोज़, इमेजेस और वेब पेजेस को कंप्रेस करके आपका डाटा सेव करने में आपकी मदद करता है. इसके अलावा अगर कोई ऐप ज़रूरत से ज़्यादा डाटा इस्तेमाल कर रहा है, तो यह ऐप आपको इसकी जानकारी भी देता है और सबसे बड़ी बात यह है कि फ्री ऐप है.

Onavo Extend (ओनावो एक्सटेंड): फेसबुक द्वारा 2013 में लाया गया यह ऐप आपके मोबाइल डाटा को कंप्रेस करके डाटा सेव करने में आपकी मदद करता है.

Google Chrome (गूगल क्रोम): अगर आप गूगल क्रोम ब्राउज़र का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको अलग से डाटा कंप्रेसर डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि क्रोम में डाटा कंप्रेशन की सुविधा पहले से ही है.

UC Browser HD (यूसी ब्राउज़र एचडी): यह भी काफ़ी लोकप्रिय डाटा कंप्रेशन ब्राउज़र ऐप है. अपने मोबाइल में इसे डाउनलोड कर आप अपना क़ीमती डाटा बचा सकती हैं. इसमें ऐड ब्लॉकर्स की भी सुविधा मौजूद है. आजकल बहुत-सी मोबाइल कंपनियां इसे इनबिल्ट ऐप के तौर पर पेश करती हैं. अगर आप क्रोम इस्तेमाल नहीं कर रहे हो, तो यूसी ब्राउज़र आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है.

What’s Local Today (व्हाट्स लोकल टुडे): यह एक ब्राउज़र ऐप है, जो बैकग्राउंड में काम नहीं करता, जिससे आपका काफ़ी मोबाइल डाटा बच जाता है. यह एक ऑल-इन-वन ऐप है, जिसकी मदद से आप बेवजह के कई ऐप्स को अपने मोबाइल से हटा सकते हैं. इसके इस्तेमाल से मोबाइल की बैटरी भी लंबे समय तक चलती है.

– सत्येंद्र सिंह

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यूं पाएं सर्दी-ज़ुकाम से निजात (Home Remedies for Cold and Cough)

सर्दी-ज़ुकाम होते ही बड़ी आंतों में कब्ज़ रहने लगता है, जिससे भूख कम हो जाती है. इस बीमरी के कारण सिर व कमर में दर्द, शरीर में हल्का बुख़ार व नाक से पानी गिरने लगता है. तेज़ी से छींकें आती हैं, शरीर में थकान व सुस्ती का अनुभव होता है. इसके कारण जब कंठनलिका प्रभावित हो जाती है, तब गले में खराश होना, थूक निगलने और ठोस भोजन करने में कठिनाई होने लगती है.

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घरेलू उपाय

– एक चम्मच शहद में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से ज़ुकाम ठीक हो जाता है.
– अजवायन को पीसकर उसमें प्याज़ का रस मिलाकर शरीर पर लगाने से ज़ुकाम में पसीना आता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है और ज़ुकाम में आराम मिलता है.
– सुबह-शाम अजवायन की फंकी लेने से भी फ़ायदा होता है.
– सोंठ के चूर्ण में गुड़ और थोड़ा-सा घी डालकर उसके 30-40 ग्राम के लड्डू बनाएं. यह लड्डू सुबह-शाम खाने से जुकाम दूर हो जाता है.
– कालीमिर्च का चूर्ण दही व गुड़ के साथ रोज़ सुबह-शाम खाने से पुराने से पुराना ज़ुकाम भी दूर हो जाता है.
– गर्म दूध में कालीमिर्च का चूर्ण डालकर पीने से भी ज़ुकाम व खांसी दूर हो जाती है.
– हर रोज़ थोड़ा-सा खजूर खाने के बाद चार-पांच घूंट गुनगुना पानी पीने से कफ़ पतला होकर बाहर निकलता है, फेफड़े साफ़ होते हैं और सर्दी-ज़ुकाम दूर होती है.
– हींग के घोल को नाक के पास और छाती पर मलें. इस प्रयोग से भी ज़ुकाम शांत होगा. इस घोल को पैर के तलुओं पर भी मल सकते हैं.
– सरसों को कालीमिर्च और दो-चार लौंग के साथ पीसकर लुगदी बनाकर, उसे कपड़े में बांधकर तवे पर गरम करके बार-बार उससे नासिका के संपूर्ण भाग को धीरे-धीरे गरम करें. अवश्य लाभ होगा.
– पीपल के सूखे पत्ते में थोड़ी अजवायन भरकर बीड़ी और सिगरेट की तरह उसका कश खींचने से पुराना से पुराना ज़ुकाम भी ठीक हो जाता है.
– एक बड़ा चम्मच अजवायन थोड़े-से सेंधा नमक के साथ मिलाकर गुनगुने पानी के साथ फांक लेने से ज़ुकाम से मुक्ति मिल जाती है.
– दालचीनी और जायफल दोनों को बराबर मात्रा में स्वच्छ पत्थर पर पीसकर सुबह-शाम चाटने से बार-बार होनेवाले ज़ुकाम से राहत मिलती है.
– पान के दो-चार पत्ते चबा लेने से सर्दी-ज़ुकाम में आराम होता है.
हल्दी और दूध गर्म कर उसमें गुड़ मिलाकर पीने से ज़ुकाम, कफ़ व शरीर दर्द से राहत मिलती है.

सुपर टिप्स
कुछ लोगों को बारहों महीने ज़ुकाम होता रहता है. ऐसे व्यक्तियों को निम्न प्रयोग से लाभ होगा. 1-1 मि.ली. तुलसी व लहसुन का रस और 1 ग्राम कालीमिर्च चूर्ण को पानी में मिलाकर सुबह-शाम पीएं. दो महीने तक इस दवा का सेवन करने से ज़ुकाम से पूर्ण रूप से छुटकारा मिल जाएगा.