Smita Bansal

‘बालिका वधू’ शो में सुमित्रा का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस स्मिता बंसल को इस सीरियल ने एक नई पहचान दी और इसके बाद वो घर-घर में मशहूर हो गईं. स्मिता को ‘बालिका बधू’ सीरियल के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला है. इसके अलावा स्मिता ने कोरा काग़ज़, अमानत, आशीर्वाद, सरहदें, नच बलिए 5, जाना ना दिल से दूर आदि शोज़ में भी काम किया है. स्मिता बंसल ने सिद्धार्थ निगम के साथ सुपरनैचुरल शो ‘अलादीन- नाम तो सुना ही होगा’ में भी काम किया, इस शो में स्मिता का किरदार बहुत अलग था और इस शो में उनके काम को काफी पसंद किया गया. दो बेटियों की मां स्मिता बंसल घर और करियर दोनों की ज़िम्मेदारियां बख़ूबी निभा रही हैं. जब हमारी स्मिता से मुलाक़ात हुई, तो हमें उनकी ज़िंदगी के कई अनछुए पहलू जानने को मिले:

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1) आपके लिए डेली सोप में काम करते हुए घर और करियर दोनों को संभालना कितना चैलेंजिंग होता है?
हां, मुश्किल काम तो है, लेकिन इस मामले में मैं लकी हूं, क्योंकि मैं जॉइंट फैमिली में रहती हूं और मुझे मेरी सासूमां का बहुत सपोर्ट है. वो घर में सब कुछ इतनी अच्छी तरह मैनेज कर लेती हैं कि मुझे कोई दिक्कत नहीं होती. वर्किंग वुमन के लिए परिवार का सपोर्ट होना बहुत ज़रूरी होता है, वरना काम के साथ-साथ बच्चों की परवरिश आसान नहीं है.

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2) क्या वर्किंग वुमन के मन में बच्चों को कम समय दे पाने का अपराधबोध रहता है?
मैं ऐसा नहीं मानती, मेरे ख़्याल से बच्चों को क्वांटिटी टाइम की बजाय क्वालिटी टाइम देना ज़्यादा ज़रूरी है. चाहे वर्किंग वुमन हो या होममेकर, बच्चों की परवरिश पर दोनों को बहुत ध्यान देना पड़ता है. आजकल एक्सपोज़र इतना ज़्यादा हो गया है कि बच्चों को अच्छी-बुरी दोनों जानकारियां मिल रही हैं. वर्किंग वुमन को बाहर की दुनिया की जानकारी रहती है इसलिए वो अपने बच्चों को अच्छी तरह गाइड कर पाती है. मैं अपने बच्चों को बहुत टाइम नहीं दे पाती, लेकिन शाम को जब मैं काम से घर लौटती हूं, तो उसके बाद सारा टाइम अपनी बेटियों के साथ रहती हूं. उस समय हमारे बीच कोई नहीं होता, फोन, टीवी, गेम्स कुछ भी नहीं. उस समय मैं उनकी दिनभर की बातें सुनती हूं, उनसे उनकी पढ़ाई, फ्रेंड्स और अन्य एक्टिविटीज़ के बारे में जानती हूं और उन्हें भी ये सब अच्छा लगता है.

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3) क्या आपको दोनों बेटियों के बीच सिबलिंग राइवलरी की समस्या देखने को मिलती है?
मेरी दोनों बेटियों के बीच नौ साल का फर्क है इसलिए उनके बीच सिबलिंग राइवलरी जैसी कोई समस्या देखने को नहीं मिलती, उल्टे मेरी बड़ी बेटी अपनी छोटी बहन का बहुत ध्यान रखती है. दोनों के व्यवहार में भी बहुत फर्क है. मेरी बड़ी बेटी जितनी शांत है, छोटी उतनी ही शरारती है, उसे हर व़क्त अटेंशन चाहिए होता है और इसके लिए वो अलग-अलग तरह की शरारतें करती रहती है.

4) अपनी बड़ी बेटी के साथ आपका रिश्ता कैसा है?
सच कहूं तो मेरी बड़ी बेटी स्टाशा अब मेरी बेस्ट फ्रेंड हो गई है. मैं जब भी स्टाशा के साथ होती हूं तो मुझे किसी फ्रेंड की ज़रूरत महसूस नहीं होती. हम दोनों साथ मिलकर शॉपिंग, फिल्म, रेस्टॉरेंट वगैरह जाते हैं और मुझे उसका साथ बहुत अच्छा लगता है. वो एक फ्रेंड की तरह मेरे मन की बात पढ़ लेती है. जब कभी मेरा मूड ठीक नहीं रहता, तो वो अपनी छोटी बहन को कमरे से बाहर लेकर चली जाती है. वो समझती है कि मम्मा थकी हुई हैं और उन्हें इस समय आराम करना चाहिए. उसे भी जब मुझसे कुछ कहना होता है, तो मैं उसकी बॉडी लैंग्वैज से समझ जाती हूं कि वो मुझसे कुछ कहना चाहती है. स्टाशा मुझसे अपनी हर बात शेयर करती है.

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5) क्या आपका अपनी मां से भी ऐसा ही रिश्ता है जैसा आपकी बेटी का आपसे है?
हां, मैं भी अपनी मां के बहुत क्लोज़ हूं और मैंने उनसे कभी कोई बात नहीं छुपाई. मां भी मुझसे हर बात शेयर करती हैं. टीनएज में प्युबर्टी पीरियड शुरू होने से पहले ही मां ने मुझे समझा दिया था कि अब तुम्हारे शरीर में ये बदलाव आएंगे और मुझे भी मां के मुंह से ऐसी बातें सुनने में कोई हिचक महसूस नहीं हुई. जब मैं अपने करियर के सिलसिले में मुंबई आई, तो दूर रहते हुए भी मैं अपनी हर बात मां से शेयर करती थी. अंकुश से मेरे अ़फेयर की बात भी मैंने सबसे पहले अपनी मां को ही बताई थी. जिस तरह मैं अपनी मां से हर बात शेयर करती हूं, स्टाशा भी उसी तरह मुझे अपनी हर बात बताती है. शायद हर मां-बेटी की बॉन्डिंग ऐसी ही होती है.

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6) मां बनने के बाद औरत की ज़िंदगी में क्या बदलाव आते हैं?
मां बनकर मुझे जो ख़ुशी मिली, वो किसी और चीज़ से कभी नहीं मिल सकती. मां बनने का एहसास औरत को कंप्लीट बनाता है. उसे लगता है कि उसकी ज़िंदगी के कुछ मायने हैं. मां बनने के बाद औरत डिप्रेस्ड नहीं रहती, हर चीज़ को पॉज़िटिव तरी़के से देखने लगती है. एक औरत अपने बच्चे के लिए जो करती है, वो शायद किसी और के लिए न कर पाए. उसके सारे सपने, सारी ख़ुशियां उसके बच्चों तक ही सिमट जाती हैं. उसे हर वो काम करना अच्छा लगता है, जो उसके बच्चे को ख़ुशी दे, जिसमें उसके बच्चे की भलाई छिपी हो.

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7) क्या अब आपकी बेटी आपकी चीज़ें शेयर करती है?
मेरी बेटी स्टाशा जब भी कहीं बाहर जाने के लिए तैयार होती है, तो अपने छोड़कर मेरे फुटवेयर पहन लेती है. मैं चाहे उसे कितने भी फुटवेयर दिला दूं, फिर भी उसकी नज़र मेरे फुटवेयर्स पर ही रहती है. सच कहूं, तो बेटी के साथ अपनी चीज़ें शेयर करना अच्छा लगता है. मेरी ही तरह अपने बढ़ते बच्चों के साथ अपनी चीज़ें शेयर करना शायद सभी पैरेंट्स को अच्छा लगता होगा.

8) जब आप पहली बार मां बनीं तो वो अनुभव कैसा था?
मेरी सिज़ेरियन डिलीवरी हुई थी (जयपुर में यानी स्मिता के मायके में) और जब मुझे होश आया तो मैंने डॉक्टर से पूछा कि मुझे बेटा हुआ है या बेटी, जब डॉक्टर ने बेटी कहा, तो मैंने तुरंत पूछा, “गोरी है ना?” मेरे सवाल पर डॉक्टर और मेरी मां मुझे हैरानी से देखने लगे. इतना पूछकर मैं फिर बेहोश हो गई थी, लेकिन मेरे घर वाले आज तक मुझे इस बात के लिए चिढ़ाते हैं. कहते हैं, लोग पूछते हैं कि बच्चा हेल्दी है या नहीं, लेकिन तुम पूछ रही हो, बच्ची गोरी है या नहीं.

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9) आप किस तरह के रोल करना पसंद करती हैं?
मां बनने के बाद मैं रोल सिलेक्ट करते समय अपने बच्चों के बारे में सोचती हूं. मैं इस बात का ध्यान रखती हूं कि मैं ऐसा कोई रोल न करूं, जिससे मेरे बच्चों को ये लगे कि अरे, मम्मा ये क्या कर रही हैं. अब मैं बहुत सोच-समझकर अपने रोल सलेक्ट करती हूं.

10) आपका ब्यूटी सीक्रेट क्या है?
मेरी मुस्कान ही मेरा ब्यूटी सीक्रेट है. चेहरे पर हमेशा प्यारी-सी मुस्कान ज़रूरी है. आपकी मुस्कान आपको दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत औरत बना देती है.

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11) आप किस तरह के कपड़े पहनना पसंद करती हैं?  
मैं इंडियन और वेस्टर्न दोनों आउटफिट पहनना पसंद करती हूं. मैं ओकेज़न के हिसाब से आउटफिट सलेक्ट करती हूं.

12) क्या आपको शॉपिंग करना पसंद है?
मुझे शॉपिंग करना पसंद है, लेकिन मैं अपनी लिमिट अच्छी तरह जानती हूं. ऐसा नहीं है कि मैं शॉपिंग के बिना रह ही नहीं सकती.

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13) आपका फेवरेट फूड क्या है?
मुझे प्योर देसी खाना पसंद है और मैं पूरी ज़िंदगी इंडियन फूड ही खाना चाहूंगी.

14) आपका फेवरेट हॉलिडे डेस्टिनेशन क्या है?
पेरिस मेरा फेवरेट हॉलिडे डेस्टिनेशन है.
– कमला बडोनी 

दिव्यांका की फैन फ़ॉलोइंग बहुत ज़्यादा है और हो भी क्यों ना वो टीवी की आदर्श बहू जो हैं. बचपन से ही दिव्यांका बहुत बहादुर थीं. वो मिस भोपाल भी रह चुकी हैं. देखें उनकी अनसीन तस्वीरें अभी से लेकर बचपन तक की इस वीडीयो के ज़रिए.

जेनी टीवी इंडस्ट्री की सबसे चहेती स्टार हैं. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि आज इतनी हॉट दिखनेवाली जेनिफ़र बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट भी काफ़ी काम कर चुकी हैं और आप उन्हें उनके कैरेक्टर के नाम से पहचानते भी हैं. देखें उनका रिवाइंड लुक अभी से लेकर बचपन तक की इन अनदेखी तस्वीरों में.

दिया और बाती हम में भाभो के किरदार से मशहूर नीलू राजस्थान से हैं और कई राजस्थानी फ़िल्मों में काम भी कर चुकी हैं. देखें इस टैलेंटेड एक्ट्रेस का रिवाइंड लुक- कैसी दिखती थीं वो यंग एज में और अपनी शादी के वक़्त!

स्मिता बंसल को आज बालिका वधू की प्यारी सासू मां के रूप में सब जानते हैं लेकिन वो काफ़ी अरसे से टीवी में काम कर रही हैं. देखें उनका रिवाइंड लुक.

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बच्चे को खाना खिलाना और उनकी सेहत का ध्यान रखना मम्मियों के लिए बहुत बड़ा काम होता है. खाने की हर चीज़ को देखकर उनकी ना-ना से यदि आप भी परेशान हो चुकी हैं, तो समझिए आपकी समस्या हल हो गई. टेलीविज़न की सेलिब्रिटी मॉम बता रही हैं बच्चों के बहानों से निपटने के साथ ही उन्हें हेल्दी व टेस्टी खाना खिलाने के कारगर उपाय.

Celebrity Mom Share Diet Tips To Kids

काम्या पंजाबी (Kamya Punjabi)  
मेरी बच्ची आरा खाना न खाने के हजारों बहाने बनाती है. कभी कहती है “मम्मी, मुझे अपनी फ्रेंड के घर जाकर खाना है.” तो कभी कहती है, “अरे मम्मा, स्कूल में तो टिफिन खाया था, कितना यमी टिफिन बनाया था आपने.” कई बार आरा को खाना खिलाने से पहले मुझे उसका माइंड डाइवर्ट करना पड़ता है, कभी टीवी पर उसका फेरवेट शो लगाकर, तो कभी उसके हाथ में लेपटॉप या मोबाइल थमाकर. गेम खेलते-खेलते वो खाना खा लेती है. आरा खाना खाए इसके लिए मैं कार्टून कैरेक्टर मिकी माउस, कैट, एंग्री बर्ड आदि के शेप की रोटियां भी बनाती हूं. ऐसी रोटियां वो ख़ुशी-ख़ुशी खा लेती है.

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गौतमी कपूर (Gautami Kapoor) 
मेरा बेटा अक्स खाने से इस कदर जी चुराता है कि उसे अगर मैं लगातार दो दिन तक खाना न दूं, तब भी उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. खाना न खाने का उसका सबसे ईज़ी बहाना है, “खाना बहुत तीखा है.” जबकि हमारे घर में तीखा खाना बनता ही नहीं. खाना खाने से बचने के लिए वो एक रोटी खाकर कहता है पेट भर गया, फिर दस मिनट बाद भूख लगी है कहकर स्नैक्स खाने लगता है. सब्जियां उसे ज़रा भी अच्छी नहीं लगतीं इसलिए मैं उसे स्मार्टली सब्ज़ियां खिलाने की कोशिश करती हूं, जैसे- कभी सब्ज़ियों को बारीक़-बारीक़ काटकर या कद्दूकस करके स्टफ परांठा बनाती हूं. इससे वो समझ नहीं पाता कि परांठे के अंदर कौन-सी सब्ज़ी है. उसे पनीर पसंद है, इसलिए मैं उसे पनीर-गाजर की सब्ज़ी बनाकर देती हूं. उसे फिश भी पसंद है, तो फिश के साथ मैं सलाद परोस देती हूं.

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स्मिता बंसल (Smita Bansal)
मेरी बेटियां खाना न खाने के नए-नए बहाने बनाती रहती हैं, जैसे- “मम्मा, मेरे पेट में दर्द हो रहा है, मुझे उल्टी जैसा महसूस हो रहा है…” जब मैं समझ जाती हूं कि वो बहाना बना रही हैं, तो मैं ग़ुस्से से कह देती हूं कि अगर आपने खाना नहीं खाया तो मैं आपको खेलने नहीं जाने दूंगी, न ही टीवी देखने दूंगी. कभी प्यार से भी समझाती हूं कि बेटा, अगर आप खाना नहीं खाओगे तो आपको एनर्जी नहीं मिलेगी. आप बहुत जल्दी बूढ़े हो जाओगे. ऐसा कहने से वो ख़ुशी-ख़ुशी तो नहीं, पर खा ही लेती हैं. उन्हें जो सब्ज़ी पसंद नहीं आती, मैं उसकी प्यूरी बना देती हूं, ताकि उनकी समझ में न आए कि वो सब्ज़ी खा रही हैं.

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गौरी प्रधान तेजवानी (Gauri Pradhan Tejwani) 
कात्या और नेवन दोनों जुड़वां हैं, इसलिए आदतों के साथ-साथ उनकी पसंद-नापसंद भी काफ़ी मिलती-जुलती है. (हंसते हुए) खाने के बहाने भी दोनों मिलकर बनाते हैं. शुरुआत से ही दोनों को मीठा खाना बिल्कुल पसंद नहीं, इसलिए मैं उन्हें बाकी मम्मियों की तरह खाना खाने के लिए चॉकलेट का लालच भी नहीं दे पाती. हां, उन्हें फिश बहुत पसंद है, इसलिए मैं उन्हें लालच देते हुए कहती हूं कि अगर तुम दोनों ने आज और कल दोनों टाइम अच्छी तरह खाना खाया, तो परसों मैं तुम दोनों के लिए तुम्हारी पसंद की फिश बनाऊंगी. ऐसा कहने पर बेमन से ही सही पर दोनों प्लेट का सारा खाना चट कर जाते हैं. उन्हें पोटैटो चिप्स खाना भी पसंद है इसलिए जब दोनों अच्छी तरह खाना खा लेते हैं, तो ईमान के तौर पर मैं दोनों को 2-2 चिप्स देती हूं.

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