smita patil

भारतीय समाज में आज भी गोरे रंग को ही सुंदरता की पैमाना माना जाता है. वैवाहिक विज्ञापनों में भी ‘गोरी और सुन्दर’ वधु की ही डिमांड होती है. और ये हाल सिर्फ इंडियन फैमिली का नहीं है. ‘गोरी और सुन्दर’ वाला फार्मूला बॉलीवुड में भी चलता है. हालांकि पिछले कुछ सालों में लोगों की सोच थोड़ी बदली है, फिर भी ऐसे कई एक्टर एक्ट्रेसेस हैं, जिन्हें डार्क कॉम्प्लेक्शन की वजह से भेदभाव झेलना पड़ा, लोगों के ताने सुनने पड़े.

बिपाशा बासु
Bipasha basu

बिपाशा बासु को भले ही इंडस्ट्री की हॉट एंड सेक्सी गर्ल कहा जाता हो, एक समय था जब लोग उनके सांवले रंग पर बुली करते थे यहां तक कि करीना ने बिपाशा को काली बिल्ली तक कह दिया था. आज भले ही अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत उनके समर्थन में उतरीं करीना ने लिखा हो कि ‘सभी रंग खूबसूरत हैं और हम भले ही अलग-अलग रंगों में पैदा हुए हों लेकिन हम सब एक ही चीज की ख्वाहिश रखते हैं और वो है फ्रीडम और रिस्पेक्ट.’ लेकिन इसी करीना ने बिपाशा पर रेसिस्ट कमेंट करके उनके सांवले रंग को निशाना बनाया था. दरअसल फिल्म अजनबी में बिपाशा और करीना ने साथ काम किया था. उस दौरान खबर थी कि करीना और बिपाशा में कॉस्टयूम को लेकर कुछ विवाद हो गया था. इससे करीना इतनी नाराज हो गई थीं कि उन्होंने बिपाशा को काली बिल्ली कह दिया था और उन्हें थप्पड़ भी जड़ दिया था, ज़ाहिर है ये बिपाशा के डार्क कॉम्प्लेक्शन पर कमेंट था. ये बात और है कि बिपाशा ने कभी किसी कमेंट को सीरियसली नहीं लिया और बॉलीवुड की सेक्सिएस्ट एक्ट्रेस कहलाईं.

प्रियंका चोपड़ा

Priyanka Chopra


प्रियंका खुद कई बार ये कह चुकी हैं कि सांवलेपन की वजह से उन्हें यंग एज में कई बार तकलीफ झेलनी पड़ी. यहां तक कि जब वो यूएस में पढ़ाई के लिए गई थीं तो उनके सांवले रंग को लेकर लोग उनपर कमेंट किया करते थे. एक बार तो प्रियंका की इस बात पर किसी शख्स से लड़ाई भी हो गई थी. एक इंटरव्यू के दौरान प्रियंका ने कहा, “जब मैं बड़ी हो रही थी, तब टीवी पर मैंने कभी किसी को अपने स्किन टोन से मैच करते नहीं देखा. तब कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे शेड्स या प्रोडक्ट्स लाती ही नहीं थीं, जो एशियन या इंडियन स्किन टोन से मैच हो. पता नहीं क्यों सांवली लड़कियों पर सोसायटी का दबाव हमेशा रहता है कि खूबसूरती का पैमाना गोरी त्वचा ही होती हैं.” हालांकि अपने टैलेंट और मेहनत के बलबूते प्रियंका ने इन तमाम बातों को झुठला दिया है और आज बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि हॉलीवुड का भी पॉपुलर फेस बन चुकी हैं.

मलाइका अरोड़ा

malaika arora


मलाइका ने एक शो में खुद खुलासा करते हुए बताया था कि करियर के शुरुआती दौर में डार्क रंग की वजह से उनका खूब मजाक उड़ाया जाता था. इंडस्ट्री में उनके साथ भेदभाव किया जाता था. उन्होंने बताया कि लोग डार्क स्किन और फेयर स्किन के बीच भेदभाव करते थे. मलाइका का इस बारे में कहना है, “मैं उस समय इंडस्ट्री में आई थी जब गोरी त्वचा को ही सुंदर माना जाता था और वहीं सांवली रंगत वाले को काम तक नहीं मिलता था. मुझे हमेशा डार्क कॉम्प्लेक्शन की कैटेगरी में रखा जाता था. त्वचा के रंग को लेकर खुले तौर पर पक्षपात हुआ करता था.”

नवाजुद्दीन सिद्दीकी

Nawazuddin Siddiqui


एक समय ऐसा था जब नवाजुद्दीन के लिए टेलीविजन की दुनिया में भी रोल पाना कितना मुश्किल था. वह काले रंग के कारण लोगों के मजाक और हंसी का पात्र बनते थे. नवाजुद्दीन कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि किस तरह गोरी अभिनेत्रियां उनके साथ काम करने से ही इनकार कर देती थीं और कई प्रोड्यूसर्स उन्हें फेयरनेस क्रीम लगाने की सीख दे देते थे. इसी से दुखी होकर एक बार नवाज ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट करते हुए लिखा था कि मुझे यह एहसास दिलाने के लिए शुक्रिया कि मैं किसी गोरे और हैंडसम के साथ काम नहीं कर सकता, क्योंकि मैं काला हूं और मैं दिखने में भी अच्छा नहीं. लेकिन मैंने कभी उन चीजों पर खास ध्यान ही नहीं दिया. ये ट्वीट उन्होंने फिल्म बाबूमोशाय बंदूकबाज़ के निर्देशक संजय चौहान के उस कथित बयान से दुखी होकर किया था, जिसमें संजय ने कहा था, ‘हम नवाज़ के साथ गोरे और सुंदर लोगों को कास्ट नहीं कर सकते. ये बहुत ख़राब लगेगा. उनके साथ जोड़ी बनाने के लिए आपको अलग नैन नक्श और व्यक्तित्व वाले लोगों को लेना होगा.’ ये बात अलग है कि नवाज ने इन सारी बातों को झुठलाते हुए खुद को बतौर एक्टर साबित किया और आज उनकी गिनती इंडस्ट्री के बेहतरीन एक्टरों में होती है.

शिल्पा शेट्टी

Shilpa Shetty


शिल्पा शेट्टी कुंद्रा आज चाहे फिटनेस और ब्यूटी क्वीन कहलाती हैं, लेकिन एक टाइम ऐसा भी था जब लोग उनके संवाले रंग का मजाक उड़ाते थे. बॉलीवुड में तो उन्हें सांवले रंग पर कमेंट सुनने ही पड़ते थे, आम जीवन में भी वो इसका शिकार हो चुकी हैं. एक बार तो वो सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) एयरपोर्ट पर रेसिज्म (रंगभेद) का शिकार हुई थीं. इस बारे में उन्होंने एक पोस्ट भी शेयर की थी जिसमें लिखा था  ‘इस पर आपको ध्यान देना चाहिए!… मैं सिडनी से मेलबर्न की यात्रा पर गई थी. इसी दौरान एयरपोर्ट पर चेकइन काउंटर पर मुझे मेल नाम की एक एरोगेंट सी महिला मिली. उसका मानना था कि हमसे यानी ब्राउन लोगों के साथ बदतमीजी से ही बात की जाती है.’

स्वरा भास्कर

swara Bhaskar


स्वरा अपने बेबाक बयानों की वजह से सुर्ख़ियों में बनी रहती हैं. स्वरा के डस्की कॉम्प्लेक्शन का भी बहुत मज़ाक उड़ाया गया, लेकिन उन्होंने कभी किसी की बात पर ध्यान दिया ही नहीं. बल्कि उन्होंने तो कई फेयरनेस क्रीम ब्रांड्स के ऐड करने से मना कर दिया और ऐसा आफर लाने वालों को खरी खोटी भी सुना दी. उनका कहना है, ‘हमें गोरेपन की सनक को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. चाहे आप सांवले हों, गेहुआं रंग के या डार्क, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.” 

काजोल

Kajol


काजोल की गिनती भी बॉलीवुड की डार्क एंड ब्यूटीफुल एक्ट्रेसेस में होती है. शुरुआती फिल्मों में उनके कॉम्प्लेक्शन ही नहीं, बल्कि चेहरे पर थ्रेडिंग न करवाने के लिए भी काफी कुछ कहा सुना गया. हालांकि काजोल ने इस बारे में कभी कोई कमेंट नहीं किया, लेकिन बाद में उन्होंने मेलानिन सर्जरी करवा ली, जो स्किन व्हाइटनिंग सर्जरी होती है. इसके बाद काजोल का कम्पलीट मेकओवर ही हो गया.

नन्दिता दास

Nandita das


नन्दिता दास को इंडस्ट्री की ब्लैक ब्यूटी कहा जाता है और अपने लिए ये शब्द ही उन्हें रेसिस्ट कमेंट लगता है,”पता नहीं क्यों जब भी मेरे बारे में कोई कुछ लिखता है, तो ये ज़रूर लिखता है कि ‘ब्लैक एंड डस्की’…क्या ये लिखे बिना मेरी पहचान नहीं हो सकती.” एक इंटरव्यू में अपने सांवलेपन पर नन्दिता ने खुलकर बोला था, “चूंकि मैं खूद सांवली हूं और आप जब खुद सांवले होते हैं तो आपको बचपन से ही कोई न कोई याद दिलाता रहता है कि आपका रंग औरों से कुछ कम है. या आपसे कहा जाता है कि धूप में मत जाओ और गहरी हो जाओगी या यह क्रीम इस्तेमाल करके देखो. कुल मिलाकर खूबसूरती की जो परिभाषा गढ़ी गई है, अगर आप उसमें आप फिट नहीं हो रहे, तो फिर आपका कोई काम नहीं है.” नंदिता दास ने साल 2009 में ‘डार्क इज ब्यूटीफ़ुल’ नाम से एक अभियान की शुरुआत भी की थी और इसी अभियान के तहत रंगभेद की समस्या को केंद्रित करके उन्होंने ‘इंडिया गॉट कलर’ नामक वीडियो भी बनाया था, जिसमें उन्होंने गोरे सांवले मुद्दे को बहुत इफेक्टिवली हैंडल किया था. उनका साफ कहना था कि हमारे समाज में गोरे व सांवले जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना ही बंद हो जाना चाहिए. यह बात समझाना ज़रूरी है कि किसी व्यक्ति की त्वचा  का रंग उसके चरित्र और व्यक्तित्व को नहीं दर्शाता है.

स्मिता पाटिल 

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ये सच है कि स्मिता की फिल्में और उनकी एक्टिंग देखकर उनकी खूबसूरती के बहुत-से दीवाने बने. मगर फिल्मों में आने से पहले लोग उन्हें ‘काली’ कहकर बुलाते थे. मगर इन बातों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था. कॉलेज के दिनों में ही वो मुंबई आ गई थीं. एक दूरदर्शन डायरेक्टर ने उनकी तस्वीरें देखीं और उन्हें ‘मराठी न्यूज रीडर’ की नौकरी दे दी. लेकिन कहते हैं तब उन्हें काली कहे जाने का डर इस कदर परेशान करता था कि पहले वो जींस पहनती थीं, फिर उसके ऊपर साड़ी पहना करती थीं. ऐसा वो अपने सांवले पैरों को छुपाने के लिए करती थीं. लेकिन सारी बातों को झुठलाते हुए अपने टैलेंट के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में ऐसी जगह बनाई कि आज उनकी मौत के इतने सालों बाद भी लोग उन्हें याद करते हैं.

अपने ज़माने की टॉप एक्ट्रेसेज़ में से एक स्मिता पाटिल ने फिल्मी दुनिया में मशहूर होने के लिए हिरोइन के गोरे होने की सोच को बदला था. सांवले-सलोने रंग-रूप और तीखे नैन-नक्श वाली यह बेहतरीन अदाकारा लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करती थी. वो न स़िर्फ अपनी अदायगी के लिए मशहूर थीं, बल्कि अपने विनम्र स्वभाव के लिए भी जानी जाती थीं. महज़ 31 साल की छोटी-सी उम्र में वो इस दुनिया को छोड़कर चली गईं. आइए, इस बेहतरीन अदाकारा के जीवन से जुड़ी कुछ अनजानी बातों से आपको रू-ब-रू कराते हैं.

Smita Patil

 

– बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकाराओं में एक स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर, 1955 को महाराष्ट्र में हुआ था.
– स्मिता पाटिल के पिता पुणे के राजनेता शिवाजीराव गिरधर पाटिल और उनकी मां विद्याताई पाटिल एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं.
– उनका नाम स्मिता रखे जाने के पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है. दरअसल, जन्म के समय उनके चेहरे पर एक मुस्कराहट थी और यही मुस्कराहट देखकर उनकी मां ने उनका नाम स्मिता रख दिया.

Smita Patil

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– स्मिता पाटिल एक एक्टिव फेमिनिस्ट थीं और बहुत-सी महिला संस्थाओं से भी जुड़ी थीं. वो ख़ासतौर से मध्यमवर्गीय महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करती थीं.
– हिंदी और मराठी की 80 से ज़्यादा फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी और अभिनय के ज़रिए वो लाखों दिलों पर राज करने लगी थीं.
– स्मिता ने अपनी पढ़ाई जन्म स्थली पुणे से ही की. यहां पर ही उन्होंने फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से ग्रैजुएशन किया.
– बहुत ही कम लोगों को पता है कि 1970 की शुरुआती दौर में अपने बॉलीवुड डेब्यू से पहले स्मिता पाटिल दूरदर्शन में बतौर न्यूज़ रीडर काम करती थीं. साथ ही वो एक कुशल फोटोग्राफर भी थीं.

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– फिल्म भूमिका के लिए स्मिता पाटिल को नेशनल अवॉर्ड मिला था, जिसकी इनामी राशि उन्होंने नारी सशक्तिकरण के लिए दान कर दी थी.
– स्मिता केवल 10 सालों तक ही फिल्मों में काम कर पाई थीं, लेकिन वो दस साल दर्शकों ने ख़ूबसूरती और अभिनय की एक नई मिसाल देखी.

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– राज बब्बर ने स्मिता पाटिल से शादी करने के लिए अपनी पत्नी नादिरा बब्बर को छोड़ दिया था, जिसके बाद बहुत-सी महिला संस्थाओं ने उन्हें ‘घर तोड़नेवाली’ तक कह दिया था.
– स्मिता और राज बब्बर ने वारिस, आकर्षण, आवाम, मिर्च-मसाला, इंसानियत के दुश्मन और दहलीज़ जैसी फिल्मोें में एक साथ काम किया था. उनकी जोड़ी दर्शकों में काफ़ी पॉप्युलर थी.

 

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– भूमिका, मंडी, चक्र, मिर्च-मसाला, अर्थ, आख़िर क्यों जैसी यादगार फिल्मों में उनके दमदार अभिनय को आज भी दर्शक सराहते हैं. उनके अभिनय के लाखों-करोड़ों आज भी दीवाने हैं.
– स्मिता पाटिल ने अभिनेता राज बब्बर से शादी की थी, लेकिन बेटे प्रतीक बब्बर को जन्म देने के दो हफ़्ते के भीतर ही डिलीवरी के कॉम्प्लीकेशन्स के कारण उनकी डेथ हो गई थी.
– स्मिता पाटिल की अंतिम इच्छा थी कि मरने के बाद उन्हें सुहागन की तरह सजाया जाए. इस इच्छा के पीछे की कहानी यह है कि एक बार स्मिता ने एक्टर राजकुमार को लेटकर मेकअप कराते हुए देखा था, तभी उन्होंने अपने मेकअप आर्टिस्ट को भी ऐसे ही मेकअप करने को कहा था, पर उन्होंने मना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि मुझे ऐसा लगेगा कि मैं किसी मुर्दे का मेकअप कर रहा हूं. लेकिन उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके मेकअप आर्टिस्ट ने सुहागन की तरह उनका मेकअप किया था.

– अनीता सिंह

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  • बोलती आंखें और नपे-तुले अंदाज़ में खिलखिलाते लब… चेहरे का एक-एक भाव मानो दिल में उतर जाए… इतनी सशक्त अदाकारा बेमिसाल स्मिता पाटिल (smita patil) को आज हम नम आंखों और मुस्कुराते होंठों से याद कर रहे हैं उनकी पुण्यतिथि पर.
  • 13 दिसंबर 1986 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था. आंखें नम इसलिए कि वो बेहद कम उम्र में दुनिया छोड़कर चली गईं और मुस्कुराते लब इसलिए कि वो हमें बेहतरीन यादें देकर गईं.
  • 17 अक्टूबर 1955 में जन्मीं स्मिता देश की बेहतरीन एक्ट्रेसेस में से एक रही हैं और उन्होंने 80 से भी अधिक हिंदी-मराठी फिल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया है.
  • अपने करियर में उन्हें 2 नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. साथ ही उन्हें पद्म श्री से भी नवाज़ा गया.

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  • स्मिता ने फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे से ग्रैजुएशन किया और अपने करियर की शुरुआत की श्याम बेनेगल जैसे दिग्गज डायरेक्टर के साथ 1975 में चरणदास चोर मूवी से.
  • समानांतर सिनेमा में उन्होंने अपनी ख़ास जगह बनाई थी और मंथन, मंडी, मिर्च मसाला, भूमिका, अर्थ व आक्रोश जैसी फिल्मों से सबके बीच अपनी विशेष पहचान भी बनाई.
  • इतना ही नहीं, स्मिता महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार अपनी आवाज़ उठाती रहीं व उनके हक़ की लड़ाई में भी काफ़ी सक्रिय भूमिका निभाती रहीं.
  • राज बब्बर से शादी के बाद बच्चे के जन्म से संबंधित कुछ मेडिकल कॉम्पिलीकेशन्स के चलते मात्र 31 वर्ष की आयु में वे दुनिया से चली गईं.

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मेरी सहेली की ओर से इस महान अदाकरा को नमन!

– गीता शर्मा

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अपने सशक्त अभिनय के लिए जानी जाने वाली स्मिता पाटिल का आज जन्मदिन है. 17 अक्टूबर, 1956 को पुणे के एक मराठी परिवार में स्मिता का जन्म हुआ था. उनके पिता शिवाजीराव पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री थे और मां विद्या ताई पाटिल सामाजिक कार्यकर्ता थीं. अपने केवल 10 साल के फिल्मी करियर में स्मिता पाटिल ने अपने अभिनय से वो छाप छोड़ी है, जिसे दर्शक और इनके फैन्स आज भी याद करते हैं. स्मिता पाटिल के जीवन के बारे में लोग कम जानते हैं, क्योंकि वो मीडिया से दूर ही रहती थीं और अपनी लाइफ को प्राइवेट रखना पसंद करती थीं. उनके जन्मदिन के मौक़े पर आइए, जानते हैं उनके बारे में कुछ अनसुनी बातें.

  • उनका नाम रखे जाने के पीछे एक कहानी है. स्मिता का मतलब होता है हल्की-सी मुस्कान, जब उनका जन्म हुआ, तो उनके चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान थी, जिसे देखकर उनकी मां ने उनका नाम स्मिता रख दिया.
  • फिल्मों में आने से पहले स्मिता न्यूज़ रीडर थीं. बॉम्बे दूरदर्शन चैनल पर वो मराठी में न्यूज़ पढ़ा करती थीं.
  • पर्दे पर ज़्यादातर भारतीय कपड़ों में नज़र आने वाली स्मिता को रियल लाइफ में जीन्स पहनना बेहद पसंद था. टीवी पर समाचार पढ़ने के लिए साड़ी पहनना ज़रूरी था, इसलिए स्मिता जीन्स पर ही साड़ी लपेट लिया करती थीं.
  • स्मिता पाटिल के नाम पर आज बॉलीवुड में अवॉर्ड भी दिए जाते हैं ‘स्मिता पाटिल अवॉर्ड’.
  • फिल्म भूमिका और चक्र में दमदार अभिनय के लिए उन्हें दो बार नेशनल अवॉर्ड से पुरस्कृत किया गया. इसके अलावा साल 1985 में उन्हें पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया.
  • प्यारी-सी मुस्कान वाली स्मिता महज़ 31 साल की उम्र में सबको अलविदा कह गईं. 13 दिसंबर, 1986 को बेटे प्रतीक बब्बर को जन्म देने के दो सप्ताह बाद उनका निधन हो गया. उनकी मौत पर रहस्य अब भी बना हुआ है.