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धूम्रपान और सेकंड हैंड स्मोकिंग से होनेवाले ख़तरों के बारे में तो सभी लोग जानते हैं. लेकिन थर्ड हैंड स्मोकिंग से आज भी कई लोग अंजान हैं. इसलिए वे आसानी से इनकी गिरफ़्त में आ जाते हैं. लेकिन एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने थर्ड हैंड स्मोकिंग के ख़तरों के बारे में भी आगाह किया है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन बताता है कि थर्ड हैंड स्मोकिंग से इंसान की डीएनए संरचना को नुक़सान पहुंच सकता है.

थर्ड हैंड स्मोकिंग होता कैसे हैं?
विशेषज्ञ बताते हैं कि सिगरेट पीने के दौरान उससे निकलनेवाला ज़हरीला पदार्थ कपड़ों, दीवार, फ़र्नीचर, कारपेट, बाल, बच्चों के खिलौने आदि चीज़ों पर चिपक जाते हैं. धूम्रपान करनेवाले व्यक्ति की त्वचा और कपड़े निकोटिन और अन्य हानिकारक केमिकल्स के अवशेषों को चिपका लेती है, जो घर से अंदर-बाहर जाने पर भी उसी के साथ चिपकी रहती है. इन्हीं अवशेषों को थर्ड हैंड स्मोक कहा जाता है. जो भी व्यक्ति इसके संपर्क में आता है, ख़ासकर छोटे बच्चे, इसके संपर्क में आने से कई बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं. इसके चलते बच्चों में सांस की बीमारियों के साथ कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी भी हो सकती है. इससे शरीर की आनुवांशिक संरचना को भी नुक़सान पहुंचता है. इससे आनेवाली पीढ़ियां भी प्रभावित हो सकती हैं.

हवा से नहीं हटाया जा सकता
सिगरेट में 4000 से ज़्यादा केमिकल्स होते हैं, जिसमे 50 से ज़्यादा कैंसरकारी तत्व होते हैं. इन केमिकल्स को आसानी से नहीं हटाया जा सकता है. इन केमिकल्स की परतों को पंखे की हवा या खिड़कियों के खोल देने मात्र से नहीं हटाया जा सकता है.

बच्चों को पहुंचता है नुक़सान
सिगरेट के केमिकल्स कमरे में मौजूद ओजोन के संपर्क में आकर ख़तरनाक कैंसरकारी केमिकल कंपाउंड बनाते हैं, साथ ही ये एनएनए का कंपाउंड डीएनए और बच्चों की ग्रोथ को प्रभावित करता है. सभी केमिकल्स बच्चों के खिलौने, कपड़े, दीवार आदि पर फैलने के साथ ही जमा हो जाते हैं. बच्चे खिलौने के साथ खेलते-खेलते उन्हें मुंह में भी ले लेते हैं, वे कारपेट, स्मोक किए हुए व्यक्ति के पास जाते हैं, जिससे बच्चे में कैंसर अस्थमा और सांस संबंधी जैसी कई बीमारियों होने का ख़तरा बढ़ा देता हैं. इसके अलावा गर्भ में पल रहे शिशु को भी यह नुक़सान पहुंचा सकता है.

घर में धूम्रपान न करें…
फर्स्ट व सेकंड हैंड स्मोकिंग के मुक़ाबले थर्ड हैंड स्मोकिंग कितना प्रभावित कर सकता है, इस पर कई शोध किए जा रहे हैं. लेकिन यह साफ़ है कि इसका दुष्प्रभाव होता हैं. कई शोधों में इसकी पुष्टि हो चुकी है. इसलिए लोगों को घर में धूम्रपान करने से ख़ुद को रोकना चाहिए. उन्हें समझना चाहिए कि उनके धूम्रपान करने से उनके आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर पड़ रहा है.
धूम्रपान करके आप तो अपने आप का नुक़सान कर ही रहे हैं. मगर आपके बगलवाला बिना किसी ग़लती के ही अपने स्वास्थ्य का नुक़सान कर रहा है. केवल आपके साथ होने की क़ीमत आपके अपने चुका रहे हैं. शोध के अनुसार, थर्ड हैंड स्मोक करनेवाले को फर्स्ट हैंड स्मोकर माना जाता है.

सावधानी ज़रूरी
दिल्ली स्थित वैदिकग्राम के डॉक्टर का कहना है कि सिगरेट पीना छोड़ देना चाहिए. यदि संभव न हो, तो बंद कमरों और गाड़ियों के अंदर सिगरेट न पीएं. धूम्रपान के बाद बच्चों के संपर्क में आने से पहले कपड़े बदल लें. ऐसा ना करने से बच्चों में कई तरह की परेशानियां हो सकती है.

Third Hand Smoke

जानलेवा…
थर्ड हैंड स्मोक के मामले पर जानवरों पर स्टडी करने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की साइंटिस्ट्र्स मैन्युला मार्टिन्स ग्रीन ने कहा कि स्मोकिंग मत कीजिए और ख़ुद को सेकंड हैंड और थर्ड हैंड स्मोक के ख़तरे से भी बचाइए, क्योंकि ये भी फर्स्ट हैंड स्मोक की तरह जानलेवा है. थर्ड हैंड स्मोक, मानव शरीर पर क्या प्रभाव डाल सकती है इसके लिए चूहों पर स्टडी की गई, पता चला कि इस तरह के स्मोक का असर लीवर और फेफड़ों पर काफ़ी ख़तरनाक होता है.
अगर स्मोक करनेवाले इस लत से तौबा कर लें, तो अपनी जान के साथ-साथ वह कई ज़िंदगियों को भी बचा सकते हैं. धूम्रपान छोड़ने के तमाम तरकीबें बताई जाती रही है. लेकिन सबसे अच्छा तरीक़ा है, दृढ़ इच्छाशक्ति. इसके बिना कोई भी तरकीब काम नहीं करेगी.
ऐसे कई उदाहरण है, जिन्होंने अपनी धूम्रपान की आदत छोड़ दी. जो लोग थोड़ी देर भी धूम्रपान के बिना नहीं रह पाते थे, जब उन्होंने इस लत से किनारा कर लिया, तो फिर आप क्यों नहीं कर सकते हैं. अपने मन से इस बात को निकाल दीजिए कि यह लत आपसे नहीं छूटेगी, क्योंकि दुनिया में कोई ऐसी बुरी आदत नहीं जो इंसान चाहे, तो छोड़ नहीं सकता. बस ठान लेने की ज़रूरत है.

यदि आप स्मोकिंग नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो कम-से-कम इतना ज़रूर करें
• बच्चे, गर्भवती महिलाओं, पालतू जानवर, ऑफिस, बंद कमरे में, कार में स्मोकिंग करने से बचें.
• स्मोकिंग के बाद हाथ धोकर कपड़े बदल लेने के बाद ही बच्चे को गोद में उठाएं. नहीं तो इससे थर्ड हैंड स्मोकिंग का ख़तरा बढ़ जाता है.
• अगर आपके आसपास ऐसा कोई व्यक्ति खड़ा है, जो स्मोकिंग नहीं करता है, तो प्लीज़, सिगरेट सुलगाने से पहले एक बार उनसे इजाज़त ले लें. अगर उन्हें ऐतराज़ है, तो स्मोक कहीं और जाकर करें.
• सिगरेट पीते समय आप इतनी दूरी बनाकर खड़े हो कि सामनेवाले को धुआं न लगे.
• कभी भी आंखें बंद कर सिगरेट की राख को न झाड़ें और न ही उसके फिल्टर को यहां-वहां फेंके. इसके लिए ऐश-ट्रे का ही इस्तेमाल करें.
• कभी भी किसी को सिगरेट पीने के लिए बाध्य न करें.
• यदि किसी को आपके सिगरेट पीने से प्राॅब्लम है, तो उसे साॅरी ज़रूर बोले.
•ध्यान रहे कि आपके स्मोकिंग का धुआं किसी के चेहरे पर न पड़े.

मिनी सिंह

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हमारी लाइफस्टाइल से ही जुड़ी कुछ ऐसी ग़लत आदतें हैं, जिनका फर्टिलिटी पर काफ़ी बुरा असर पड़ता है. इन आदतों को अगर समय रहते सुधारा न गया, तो आप माता-पिता बनने के सुख से वंचित हो सकते हैं, इसलिए समय रहते इनमें सुधार लाएं और फिट रहें.

habits can kill your fertility

1. ग़लत खानपान: शरीर को ठीक प्रकार से काम करने के लिए कई तरह के पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है. अगर आप सही प्रकार का आहार नहीं लेते हैं, तो इसका असर फर्टिलिटी पर पड़ सकता है. तीखे, खट्टे, गर्म और नमकीन पदार्थों का ज़्यादा सेवन करने से पित्त कुपित होकर वीर्य व अण्डाणु का क्षय करता है, जिससे नपुंसकता पैदा होती है.

2. नींद की कमी: अगर आप रोज़ाना 8 घंटे की पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो शरीर में हार्मोंस का असंतुलन हो जाता है, जो इंफर्टिलिटी का कारण बनता है. आपकी देर रात तक जागने की आदत आपकी फर्टिलिटी के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है, इसलिए इस आदत को जल्द से जल्द छोड़ दें.
3. मोबाइल फोन या लैपटॉप का अत्यधिक इस्तेमाल: हाल में हुए कुछ शोधों के आधार पर पुरुष बांझपन और सेल फोन के बीच संबंध को लेकर कई रोचक बातें सामने आई हैं. इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. गौरी अग्रवाल के अनुसार, बांझपन की समस्या के लिए मोबाइल फोन और लैपटॉप का ठीक प्रकार से इस्तेमाल न करना भी बड़ा कारण है. शर्ट की जेब में दिल के पास और पैंट की जेब में रखने पर मोबाइल से निकलनेवाली रेज़ फर्टिलिटी के लिए ख़तरनाक साबित होती हैं. यह पुरुषों के शुक्राणुओं पर बुरा प्रभाव डालती हैं और उनकी संख्या व क्षमता में बीस से तीस प्रतिशत तक की कमी कर देती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि अपनी गोद में रखने की बजाय लैपटॉप को मेज़ पर रखकर इस्तेमाल करें.
4. दिन-ब-दिन बढ़ता तनाव: एसीआई अस्पताल, दिल्ली के कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. गौतम बग्गा के अनुसार, अत्यधिक तनाव कुछ हार्मोंस पर प्रभाव डालता है, जो स्पर्म बनाने के लिए अनिवार्य होते हैं. तनाव पुरुष को मानसिक व शारीरिक रूप से शिथिल कर देता है, जिससे उनमें इंफर्टिलिटी का ख़तरा बढ़ जाता है. वहीं आईवीएफ एक्सपर्ट शैली गुप्ता के अनुसार, तनाव से महिलाओं के मस्तिष्क, पिट्यूटरी ग्लैंड और ओवरीज़ के बीच कम्यूनिकेशन बिगड़ जाता है. तनाव के दौरान शरीर में कई तरह के
न्यूरोकेमिकल परिवर्तन होते हैं, जो महिलाओं को इंफर्टिलिटी का शिकार बनाते हैं.
5. धूम्रपान: स्मोकिंग से शरीर का रक्तसंचार धीमा पड़ जाता है. जहां एक ओर यह पुरुषों के शुक्राणुओं पर बुरा प्रभाव डालता है, वहीं
महिलाओं में गर्भपात, अण्डाणुओं को नुक़सान पहुंचाना, सर्वाइकल कैंसर व फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी समस्याएं आदि पैदा करता है. इसलिए स्मोकिंग करना छोड़ दीजिए, जिससे शरीर में अच्छी तरह से ब्लड सर्कुलेट होना शुरू हो सके और आप इंफर्टिलिटी से बच सकें.
6. अल्कोहल: बेबी जॉय, दिल्ली के आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. जगजीत सिंह के अनुसार, यदि आप 60 मि.ली. से अधिक मात्रा में
अल्कोहल लेते हैं, तो आप इंफर्टिलिटी के शिकार हो सकते हैं. ज़्यादा शराब पीने से अक्सर लोगों को कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है, परंतु उन बीमारियों में से इंफर्टिलिटी की जानकारी बेहद कम लोगों को होती है. शराब के कारण शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम होने लगता है, जिसके कारण पुरुषों में शुक्राणु उत्पादन की क्षमता कम हो जाती है. वहीं एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि हफ़्ते में 3-4 बार अल्कोहल का सेवन करनेवाली महिलाओं को कंसीव करने में सामान्य से कहीं अधिक समय लग जाता है.
7. बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ या वर्कआउट: फिट व हेल्दी रहने के लिए एक्सरसाइज़ बेहद ज़रूरी है, पर जिस तरह अति किसी भी चीज़ की हानिकारक होती है, ठीक उसी तरह बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ आपकी फर्टिलिटी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है. रोज़ाना 1 घंटा और हफ़्ते में 7 घंटे से ज़्यादा एक्सरसाइज़ आपकी फर्टिलिटी के लिए ख़तरनाक हो सकती है. बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ का ख़ामियाज़ा बहुत-से एथलीट्स को भुगतना पड़ता है, जो इंफर्टिलिटी की समस्या से जूझते हैं.
डॉ. जगजीत सिंह के अनुसार, जो पुरुष स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर बॉडी बनाते हैं, उनके शुक्राणुओं पर उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और परिणामस्वरूप उनके पिता बनने की संभावना न्यूनतम रह जाती है.
8. ओवरईटिंग या बहुत ज़्यादा जंक फूड का सेवन: ओवरईटिंग का सीधा असर मोटापे के रूप में दिखाई देता है, जो आपकी फर्टिलिटी के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है. जंक फूड का सेवन शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ा देता है और यह समस्या का कारण इसलिए बन जाता है, क्योंकि इंसुलिन और फर्टिलिटी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.
9. अनसेफ सेक्स: अनसेफ सेक्स के कारण कई सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ (एसटीडी) होने की आशंका बढ़ जाती है. महिलाओं में इंफर्टिलिटी का एक कारण एसटीडी भी है. पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज़ के कारण महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब्स ब्लॉक हो जाती हैं, जो उनकी फर्टिलिटी में बाधक बनती हैं. अनसेफ सेक्स पुरुषों की फर्टिलिटी को भी प्रभावित करता है, पर जल्द लक्षण दिखने के कारण उनका इलाज जल्दी हो जाता है, जो महिलाओं के मामले में देरी से होता है.
10. बहुत ज़्यादा कैफीन का सेवन: चाय, कॉफी, चॉकलेट का सेवन इंफर्टिलिटी का कारण नहीं बनता, पर अगर आप इनके आदी हैं और इनके बिना आपकी ज़िंदगी रुक जाती है, तो आपको इस बारे में थोड़ा सोचना होगा. कुछ स्टडीज़ में यह बात सामने आई है कि अत्यधिक कैफीन का सेवन करनेवाली महिलाओं को अन्य महिलाओं के मुक़ाबले कंसीव करने में अधिक समय लगता है यानी अगर आप जल्दी ही मां बनना चाहती हैं, तो कैफीन का सेवन कम कर दें.
11. बॉडी फिट कपड़े पहनना: यदि आप बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनते हैं, तो इसके कारण आपको फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. बॉडी फिट कपड़े ब्लड सर्कुलेशन में परेशानी उत्पन्न करते हैं, जिसका असर नसों पर काफ़ी गहरा पड़ता है और इस कारण इंफर्टिलिटी की समस्या बढ़ जाती है.
12. बॉडी हीट: बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनना, ज़्यादा व लगातार बाइक चलाना या फिर बहुत गर्म पानी से नहाना आदि टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ाता है, जिससे स्पर्म काउंट भी घटता है और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. महिलाओं के शरीर में अत्यधिक गर्मी उनकी फर्टिलिटी को प्रभावित करती है.

 

पुरुषों में बढ़ती इंफर्टिलिटी
आंकड़ों के मुताबिक भारत के 9 करोड़ पुरुष इंफर्टिलिटी के शिकार हो चुके हैं. इस आंकड़े को बढ़ते देख मेडिकल कंपनियां इन्हें एक बड़े उभरते हुए बाज़ार के रूप में देख रही हैं. अनुमान के आधार पर विशेषज्ञ कहते हैं कि देश में बांझपन के इलाज के लिए उपयोग होनेवाली दवा का कुल कारोबार क़रीब 90 करोड़ से एक अरब तक का हो चला है. दवा का यह बाज़ार फल-फूल रहा है. इसके साथ ही इसके उपचार का कारोबार हर साल 20 से 30 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है.

– सुमन बाजपेयी

 

थायरॉइड को जड़ से ख़त्म करने के घरेलू उपाय (Tips for Treating Thyroid Problems Naturally)

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अच्छी सेहत के लिए समय पर खाना और पौष्टिक आहार लेना ही काफ़ी नहीं. आहार का पचना और उसके पोषक तत्वों का शरीर को मिलना भी ज़रूरी होता है. कई बार ऐसा हो नहीं पाता, वजह हो सकती है खाने के बाद आपकी कुछ आदतें. ज़रा नज़र दौड़ाइए उन आदतों पर, जो आप खाना खाने के बाद करने के आदी हों. इन आदतों का ख़ामियाज़ा आपकी सेहत को भुगतना पड़ सकता है. आइए, जानते हैं ऐसी ही कुछ बुरी आदतें, जो दबे पांव आपको कर रही हैं बीमार.

चाय या कॉफी पीने की आदत

खाने के बाद अक्सर लोग चाय या कॉफी पीना पंसद करते हैं. धीरे-धीरे उन्हें इसकी आदत हो जाती है. अगर ऐसी आदत है, तो इसे तुरंत बदलें.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* चाय में पॉलिफिनॉल्स और टेनिंस नाम के केमिकल्स होते हैं, जो खाए गए आहार के पोषक तत्वों को ख़त्म कर देते हैं.
* कॉफी में कैफीन होता है, जो आयरन को ख़त्म कर देता है.
* एनीमिया के मरीज़ों के लिए ये आदत ख़तरनाक हो सकती है.
* चाय की पत्तियों में काफ़ी मात्रा में एसिड होता है, जो आहार में मौजूद प्रोटीन को नुक़सान पहुंचाता है, जिससे खाना पचने में द़िक्क़त होती है.
* अगर चाय या कॉफी पीनी हो, तो खाने के एक घंटे बाद पीएं.

फल खाने का समय हो सही

खाने के तुरंत बाद मीठा खाने के शौक़ीन कई बार ये ग़लती कर बैठते हैं. मीठा खाने के चक्कर में वो फल खाना पसंद करते हैं. यूं तो फल को सेहत के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है, लेकिन खाने के तुरंत बाद फल खाना नुक़सानदेह हो सकता है.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* खाया हुआ आहार पेट में तब तक रहता है, जब तक पाचन की प्रक्रिया पूरी न हो जाए. इस प्रक्रिया के बीच अगर तुरंत फल खा लिया जाए, तो पेट पर  अधिक भार पड़ने लगता है.
* इससे अपच, पेट में भारीपन या जलन, एसिडिटी की शिकायत हो सकती है.
* फल खाने के साथ चिपक जाता है और उसेे आंतों तक पहुंचने में देर लगती है. ऐसे में फल के सारे पोषक तत्व शरीर को नहीं मिल पाते.
* फल में बड़ी मात्रा में एसिड, ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़, स्टार्च आदि होते हैं, जो खाना पचाने की प्रकिया को धीमा कर देते हैं.
* अंगूर, पेर, संतरा जैसे फलों में फ्लैवोनॉइड होता है. पेट में मौजूद बैक्टीरिया इसका विभाजन कर थायोसायनिक एसिड में बदल देते हैं, जो थायरॉइड  ग्रंथि को कार्य करने से रोकता है. लंबे समय तक ऐसा होने से ग्रंथि में बीमारियां पनपने
लगती हैं.
* खाने से दो घंटे पहले या दो घंटे बाद फल खाएं.
* वैसे सुबह के समय खाली पेट फल खाना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.

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धुम्रपान करना

धुम्रपान करना वैसे भी सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है. खाने बाद धुम्रपान करना ज़्यादा नुक़सान पहुंचा सकता है.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* खाने के बाद एक सिगरेट पीना, दस सिगरेट पीने के बराबर है. यानी दस गुना ज़्यादा घातक हो सकती है सिगरेट.
* खाने के बाद आहार को पचाने के लिए शरीर में रक्त का संचार तेज़ हो जाता है. सिगरेट पीने से उसमें मौजूद निकोटिन और टॉक्सिन्स रक्त में 10 गुना  तेज़ी से रिसता है, जिससे पाचक ग्रंथि, किडनी, दिमाग़, दिल और फेफड़ों को नुक़सान पहुंचता है.
* कैंसर का ख़तरा और भी बढ़ जाता है.
* खाने के तुरंत बाद धुम्रपान करने से एसिडिटी और गैस्ट्रिक जैसी समस्या हो सकती है.

खाने के बाद नहाना मना है

खाने के बाद नहाने के शौक़ीन लोग ज़रा सावधान हो जाएं, क्योंकि ये आदत भी हो सकती है ख़तरनाक.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* खाने के बाद रक्त का संचार पेट की तरफ़ ज़्यादा होता है, जहां आहार को पचाने की प्रक्रिया चल रही होती है.
* नहाने से शरीर का तापमान बदल जाता है और तापमान पर नियंत्रण करने के लिए रक्त का प्रवाह शरीर के बाक़ी हिस्से, जैसे- हाथ, पैर की तरफ़ बढ़  जाता है.
* इसकी वजह से पेट के आसपास रक्त की मात्रा कम हो जाती है और पाचन तंत्र की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.

वॉक पर चले जाना

वॉक करना यूं तो अच्छी आदतों में शुमार है, लेकिन खाने के बाद तुरंत वॉक पर निकलना सेहत कि लिए हानिकारक है. दोपहर के खाने के बाद आराम और रात के खाने के कुछ देर बाद हल्क़ी सी वॉक आपको स्वस्थ रखती है.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* खाने के तुरंत बाद वॉक पर जाने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और पाचन तंत्र आहार में से पोषक तत्व एब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाता.
* वॉक करने से कई बार अपच की शिकायत भी होती है.
* खाना खाने के आधे घंटे बाद वॉक पर जाएं.
* 20 मिनट से ज़्यादा वॉक न करें.

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बिस्तर पर चले जाना

खाने बाद आलस आने लगता है और बस आराम करने का मन करता है. लेकिन ये आदत भी है बुरी.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* खाने के बाद तुरंत बेड पर चले जाने से या सो जाने से खाना अच्छे से डायजेस्ट नहीं हो पाता और फैट्स में बदल जाता है.
* फैट्स की वजह से मोटापा बढ़ जाता है.
* डायजेशन सही न होने की वजह से आंतों में इंफेक्शन भी हो सकता है.

बेल्ट ढीली करना

स्वादिष्ट खाना देखते ही कई लोग पेट में जगह बनाने के लिए अपनी बेल्ट को लूज़ करने लग जाते हैं, पर ये आदत भी सेहत के लिए सही नहीं.
क्यों छोड़ें ये आदत?
* बेल्ट ढीली करने का मतलब है कि आप ज़रूरत से ज़्यादा खानेवाले हैं. ओवरईटिंग से बचने के लिए इस आदत को छोड़ दें.
* बेल्ट लूज़ करने से बेहतर है, कम खाएं. वैसे भी जितनी भूख लगी हो, उससे कम ही खाना चाहिए, वरना अपच की शिकायत हो जाएगी.

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ठंडा पानी न पीएं

खाने के बीच-बीच में और तुरंत बाद पानी पीना सेहत के लिए ठीक नहीं है और ठंडा पानी, तो बिल्कुल भी उचित नहीं है.

ब्रश कीजिए लेकिन ज़रा रुककर

खाना खाने के बाद ब्रश करना वैसे अच्छी आदत है, लेकिन खाने के तुरंत बाद ब्रश करना सही नहीं. अगर खट्टा आहार खाया हो, तो ब्रश करते व़क्त इनैमल यानी दातों की ऊपर की परत निकल सकती है. इसलिए ब्रश करें पर कुछ देर बाद.

सुबह की ताज़ी हवा में दौड़ना (Brisk Walk) सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है. यह एक ऐसा व्यायाम है, जिसके लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती. मोटापा घटाने के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से संबंधित अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए भी जॉगिंग बेस्ट है.

Morning Brisk Walk Benefits

स्ट्रेस को दूर करता है

जॉगिंग या तेज़ चलने से स्ट्रेस दूर होता है, क्योंकि दौड़ने के कुछ ही सेकंड के भीतर दिमाग़ एक हार्मोन रिलीज़ करने लगता है, जिससे नेचुरल तरी़के से मूड फ्रेश हो जाता है.Morning Brisk Walk Benefits

 

स्मोकिंग की लत से छुटकारा

दौड़ने से आत्मविश्‍वास बढ़ता है. सोच पॉज़िटिव होती है और स्मोकिंग जैसी बुरी लत से मन हटने लगता है.

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डायबिटीज़ का रिस्क हो जाएगा कम

हफ़्ते में 4-5 दिन तक 30 मिनट की दौड़ डायबिटीज़ का रिस्क 12 फ़ीसदी तक कम कर देती है.

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वज़न पर कंट्रोल

दौड़ना एक बेस्ट कैलोरी बर्नर है. हफ़्ते में कम से कम 5 दिनों तक 30 मिनट दौड़ने या तेज़ चलने से 340 कैलोरी बर्न होती है.weight loss

याददाश्त होगी तेज़

कई रिसर्च कहते हैं कि हफ़्ते में 4 दिन अगर 30 मिनट दौड़ा जाए, तो न स़िर्फ याददाश्त तेज़ होती है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ती है.improve-memory

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दिल का ख़्याल

एक रिसर्च कहती है, जो लोग हफ़्ते में 6 किलोमीटर चलते हैं, उन्हें दिल की बीमारी का ख़तरा 45 फ़ीसदी तक कम रहता है.healthy-heart

हड्डियों को देता है मज़बूती

दौड़ने से हड्डियों पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से ज़रूरी मिनरल्स हड्डियों तक पहुंचते हैं और हड्डियां मज़बूत बनती हैं.Calcium-and-Strong-Bones

उम्र बढ़ेगी

रिसर्च के मुताबिक़ हफ़्ते में एक घंटे की दौड़ जीवनकाल का औसतन तीन साल बढ़ा देती है.positive_life_long_Live_long_healthy

कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण

दौड़ने या तेज़ चलने से गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है.

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ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

दौड़ते व़क्त धमनियां फैलती व संकुचित होती हैं. इससे धमनियां स्वस्थ रहती हैं और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है.

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आराम की नींद

दौड़ने से नींद झट से आ जाती है. नींद की गुणवत्ता में भी इज़ाफ़ा होता है.

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नोट

जिन्हें घुटनों में दर्द है, उन्हें दौड़ने की बजाय आराम से चलना चाहिए.

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