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समीरा रेड्डी ने शेयर की बेटी की ‘क्यूट पिक’, दिया यह पावरफुल मैसेज (Sameera Reddy Shares Cute Pic Of Daughter With This Powerful Message)

Sameera Reddy's Pic Of Daughter

महिलाओं के लिए यह समय कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाज़ा आप उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बढ़ते पावरफुल मैसेजेस से लगा सकते हैं. आज की महिलाएं नारीत्व को गौरवांन्वित करने के साथ ही मातृत्व को भी एक नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं. इसी सिलसिले में आपको दिखाते हैं, बॉलीवुड एक्ट्रेस समीरा रेड्डी की वह पोस्ट, जो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेेयर की.

समीरा रेड्डी ने अपनी बेटी की एक बहुत ही प्यारी ही तस्वीर शेयर करते हुए बेटियों की तारीफ़ में जो लिखा है, वो साकई काबिले-तारीफ़ है. समीरा ने लिखा है कि मुझे समझ नहीं आता कि कैसे पहले के लोग बेटियों को बोझ मानते थे, जबकि बेटियां तो ख़ुशियों का दूसरा नाम हैं. मैंने पहले के लोगों के लिए इसलिए कहा, क्योंकि मैं उम्मीद करती हूं कि अब लोगों की सोच में बदलाव आया होगा. मैं आज भी सुनती हूं कि किस तरह बड़े घरों में भी लोग चाहते हैं कि उनके यहां पहला बच्चा लड़का ही हो. लेकिन मैं आपसे कहना चाहती हूं कि हमारे घर में हम तीन लड़कियां थीं और आज हम जिस मुकाम पर हैं, वो किसी भी लड़के से ज़्यादा ही है.

Sameera Reddy's Pic Of Daughter

समीरा अपने बच्चों की फोटोज़ हमेशा सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी बेटी का एक बड़ा प्यारा-सा वीडियो भी शेयर किया. आप भी देखें यह वीडियो.

Sameera Reddy's Pic Of Daughter

Sameera Reddy

मुसाफिर, रेस, वन टु थ्री और दे दना दन जैसी फिल्मों समीरा रेड्डी ने बेहतरीन एक्टिंग की थी. हम उन्हें और भी फिल्मों में देखना चाहते हैं, पर फिलहाल उनका पूरा ध्यान अपनी नन्ही परी पर है. फोटोज़ देखने के साथ ही उनके दिए संदेश पर भी सभी को ग़ौर करना चाहिए.

– अनीता सिंह

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गुम होता प्यार… तकनीकी होते एहसास… (This Is How Technology Is Affecting Our Relationships?)

अभी कुछ दशकों पहले तक हाल यह था कि त्योहारों की आहट सुनाई देते ही घर-परिवार, समाज- हर जगह रौनक़ की झालरें लहराने लगती थीं, ख़ुशी, उमंग और ऊर्जा से भरे चेहरों की चमक व उत्साह यहां-वहां बिखर जाता था. क्या करना है, कहां जाना है, किसे क्या उपहार देने हैं और रसोई में से कितने पकवानों की ख़ुुशबू आनी चाहिए- सबकी सूची बनने लगती थी. महीनों पहले से बाज़ार के चक्कर लगने लगते थे और ख़रीददारी का लंबा सिलसिला  चलता था.

Technology and Relationships

समय बदला, हमारी परंपराओं, संस्कृति और सबसे ज़्यादा हमारी सोच पर तकनीक ने घुसपैठ कर ली. हर समय किसी-न-किसी रूप में तकनीक हमारे साथ रहने लगी और फिर वह हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. अब आलम यह है कि त्योहारों का आगमन होता है, तो माहौल में चहल-पहल बेशक दिखाई देती है, पर उसमें से उमंगवाला अंश गायब हो गया है और तनावभरा एक शोर यहां-वहां बिखरा सुनाई देता है. दूसरों से बढ़-चढ़कर दिखावा करने की होड़ ने त्योहारों के महत्व को जैसे कम कर दिया है. त्योहार अब या तो अपना स्टेटस दिखाने के लिए, दूसरों पर रौब जमाने के लिए कि देखो हमने कितना ख़र्च किया है, मनाया जाता है या फिर एक परंपरा निभाने के लिए कि बरसों से ऐसा होता आया है, इसलिए मनाना तो पड़ेगा.

फॉरवर्डेड मैसेजेस का दौर

पहले लोग त्योहारों की शुभकामनाएं अपने मित्र-संबंधियों के घर पर स्वयं जाकर देते थे. बाज़ारवाद के कारण पहले तो इसका स्थान बड़े और महंगे ग्रीटिंग कार्ड्स ने लिया, फिर ई-ग्रीटिंग्स ने उनकी जगह ली. ग्रीटिंग कार्ड या पत्र के माध्यम से अपने हाथ से लिखकर जो बधाई संदेश भेजे जाते थे, उसमें एहसास की ख़ुशबू शामिल होती थी, लेकिन उसकी जगह अब फेसबुक और व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजे जाने लगे हैं. ये मैसेज भी किसी के द्वारा फॉरवर्ड किए हुए होते हैं, जो आगे फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. कई बार तो बिना पढ़े ही ये मैसेजेस फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. उनमें न तो कोई भावनाएं होती हैं, न ही भेजनेवाले की असली अभिव्यक्ति. ये तो इंटरनेट से लिए मैसेज ही होते हैं. इसी से पता लगाया जा सकता है कि तकनीक कितनी हावी हो गई है हम पर, जिसने संवेदनाओं को ख़त्म कर दिया है.

रिश्तों की गढ़ती नई परिभाषाएं

परस्पर प्रेम और सद्भाव, सामाजिक समरसता, सहभागिता, मिल-जुलकर उत्सव मनाने की ख़ुुशी, भेदभावरहित सामाजिक शिष्टाचार आदि अनेक ख़ूबियों के साथ पहले त्योहार हमारे जीवन को जीवंत बनाते थे और नीरसता या एकरसता को दूर कर स्फूर्ति और उत्साह का संचार करते थे, पर आजकल परिवार के टूटते एकलवाद तथा बाज़ारवाद ने त्योहारों के स्वरूप को केवल बदला नहीं, बल्कि विकृत कर दिया है. सचमुच त्योहारों ने संवेदनशील लोगों के दिलों को भारी टीस पहुंचाना शुरू कर दिया है.

सोशल मीडिया के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने जहां हमारी एकाग्रता को भंग किया है, वहीं सामाजिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं. फोन कर बधाई देना भी अब जैसे आउटडेटेड हो गया है. बेवजह क्यों किसी को फोन कर डिस्टर्ब किया जाए, इस सोच ने मैसेज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाकर सामाजिकता की अवधारणा पर ही प्रहार कर दिया है. लोगों का मिलना-जुलना जो त्योहारों के माध्यम से बढ़ जाता था, उस पर विराम लग गया है. ज़ाहिर है जब सोशल मीडिया बात कहने का ज़रिया बन गया है, तो रिश्तों की संस्कृति भी नए सिरे से परिभाषित हो रही है.

हो गई है सामाजिकता ख़त्म

‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है’, यह वाक्य हमें बचपन से रटाया गया, परंतु तकनीक ने शायद अब हमें असामाजिक बना दिया है. सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व ने मनुष्य की सामाजिकता को ख़त्म कर दिया है. देखा जाए, तो सोशल मीडिया आज की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है. व्हाट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और न जाने क्या-क्या? स़िर्फ एक टच पर दुनिया के इस हिस्से से उस हिस्से में पहुंचा जा सकता है. देश-दुनिया की दूरियां सिमट गई हैं, लेकिन रिश्तों में दूरियां आ गई हैं.

संवादहीनता और अपनी बात शेयर न करने से आपसी जुड़ाव कम हो गया है और इसका असर त्योहारों पर पड़ा है. माना जाता था कि त्योहारों पर सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते थे. एक-दूसरे से गले मिलकर, मिठाई खिलाकर मन की सारी कड़वाहट ख़त्म हो जाती थी. पर अब किसी के घर जाना समय की बर्बादी लगने लगा है, इसलिए बहुत ज़रूरी है तो ऑनलाइन गिफ़्ट ख़रीद कर भेज दिया जाता है.

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Technology and Relationships
रसोई से नहीं उठती ख़ुशबू

आजकल प्रत्येक क्षेत्र में बाज़ारवाद हावी हो रहा है. इस बनावटी माहौल में भावनाएं गौण हो गई हैं. ऑनलाइन संस्कृति ने अपने हाथों से उपहार को सजाकर, उसे स्नेह के धागे से बांधकर और अपनी प्यार की सौग़ात के रूप में अपने हाथों से देने की परंपरा को पीछे धकेल दिया है. बाज़ार में इतने विकल्प मौजूद हैं कि ख़ुद कुछ करने की क्या ज़रूरत है.

एक समय था कि त्योहारों पर घर में न जाने कितने तरह के पकवान बनाए जाते थे. न जाने कितने नाते-रिश्तेदारों के लिए लड्डू, मठरी, नमकपारे, नमकीन, बर्फी, गुलाब जामुन और न जाने कितने डिब्बे पैक होते थे और यह भी तय किया जाता था कि कौन किसके घर जाएगा.

पर एकल परिवारों ने त्योहारों की रौनक़ को अलग ही दिशा दे दी. महंगाई की वजह से त्योहार फ़िज़ूलख़र्ची के दायरे में आ गए हैं. ऐसे में मिठाइयां या अन्य चीज़ें बनाने का कोई औचित्य दिखाई नहीं पड़ता. पहले के दौर में संयुक्त परिवार हुआ करते थे और घर की सारी महिलाएं मिलकर पकवान घर पर ही बना लिया करती थीं. लेकिन अब न लोगों के पास इन सबके लिए व़क्त है और न ही आज की हेल्थ कॉन्शियस पीढ़ी को वह पारंपरिक मिठाइयां पसंद ही आती हैं.

कोई घर पर आ जाता है, तो झट से ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर उनकी आवभगत करने की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाता है. कौन झंझट करे खाना बनाने का. यह सोच हम पर इसीलिए हावी हो पाई है, क्योंकि तकनीक ने जीवन को आसान बना दिया है. बस फ़ोन पर एक ऐप डाउनलोड करने की ही तो बात है. फिर खाना क्या, गिफ़्ट क्या, घर को सजाने का सामान भी मिल जाएगा और घर आकर लोग आपका हर काम भी कर देंगे. यहां तक कि पूजा भी ऑनलाइन कर सकते हैं. डाक से प्रसाद भी आपके घर पहुंच जाएगा. हो गया फेस्टिवल सेलिब्रेशन- कोई थकान नहीं हुई, कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी- तकनीक के एहसास ने मन को झंकृत कर दिया. बाज़ार से आई मिठाइयों ने मुंह का स्वाद बदल दिया और बाज़ारवाद ने उपहारों की व्यवस्था कर रिश्तों को एक साल तक और सहेजकर रख दिया- नहीं हैं इनमें जुड़ाव का कोई अंश तो क्या हुआ, एक मैसेज जगमगाते दीयों का और भेज देंगे और त्योहार मना लेंगे.

– सुमन बाजपेयी

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Entertainment: मॉनी रॉय का यह कूल साड़ी लुक लगा रहा है इंटरनेट पर आग… (Mouni Roy’s Cool Saari Look)

Mouni Roy

Entertainment: मॉनी रॉय का यह कूल साड़ी लुक लगा रहा है इंटरनेट पर आग… (Mouni Roy’s Cool Saari Look)

ग्लैमरस गर्ल मॉनी आजकल सोशल मीडिया पर अपनी जो भी पिक्चर्स शेयर करती हैं, वो उनके फैंस के होश उड़ा देती हैं, क्योंकि मॉनी ट्रेडिशनल आउटफिट्स को भी इतने मॉडर्न, बोल्ड और ग्लैमरस अंदाज़ में पहनती हैं कि उनका कूल लुक बन जाता है सुपर हॉट! तो आप भी देखें उनके ये डिफरेंट साड़ी लुक्स…

Mouni Roy

Mouni Roy

Mouni Roy

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बिग बी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया फनी वीडियो, देखकर आप भी हंसे बिना नहीं रह पाएंगे (Amitabh Bachchan Shares Funny Video On Social Media)

बॉलीवुड के शहंशाह अभिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहते हैं. वे अपने बिज़ी शेड्यूल से समय निकालकर अपने प्रशंसकों से जुड़ने के लिए आए दिन अपने वॉल पर कुछ न कुछ ज़रूर शेयर करते हैं. वे अक्सर अपने अकाउंट पर फनी वीडियोज़ शेयर करते रहते हैं.

Amitabh Bachchan

आज सुबह उन्होंने दो बच्चों को एक मजेदार वीडियो शेयर किया, जिसमें वे चिप्स खा रहे हैं. यह वीडियो इतना मजेदार है कि बिग बी खुद अपनी हंसी नहीं रोक पाए. चिप्स के पैकेट पर सॉस की फोटो बनी हुई है. सॉस नहीं होने के कारण वे बच्चे चिप्स को पैकेट पर बने सॉस की पिक्चर से टच करके चिप्स खा रहे हैं. अमिताभ बच्चन ने इस वीडियो को कैप्शन दिया है, आदत से मजबूर. वाकई में आजकल के बच्चों को सॉस की इतनी बुरी आदत है कि सॉस के बिना उनका काम ही नहीं चलता. ऐसे में ये बच्चे स्मार्टनेस दिखाते हुए सॉस की बजाय सॉस के पिक्चर से ही काम चला रहे हैं. आप भी देखिए फनी वीडियो…

 

इस वीडियो को देखकर यूज़र्स तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. लोगों को यह वीडियो काफी पसंद आ रहा है. एक यूजर्स ने तो अभिताभ की ही एक पिक्चर शेयर करके लिखा आदत से मजबूर. इस पिक्चर में अमिताभ खुद चिप्स या नमकीन खाते नज़र आ रहे हैं.

Amitabh Bachchan

काम की बात करें तो कुछ दिनों पहले ही अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति के साथ छोटे पर्दे पर वापसी की है. यह शो हमेशा से ही दर्शकों का पसंदीदा शो रहा है. इस शो में बिग बी का अंदाज़ लोगों को काफी पसंद आता है. फिल्मों की बात करें तो अमिताभ बच्चन की अपकमिंग फिल्में ब्रह्मास्त्र, गुलाबो सितारो और चेहरे हैं. इसके अलावा झुंड और लक्ष्मी बम जैसी फिल्मों में भी दिखाई देंगे.  कुछ दिनों पहले ही फिल्म गुलाबो सितारो में अमिताभ का लुक सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था. जो लोगों को बहुत पसंद आया. आपको याद दिला दें कि बिग बी अंतिम बार बड़े पर्दे पर बदला फिल्म में दिखे थे. तापसी पन्नू और अमिताभ द्वारा अभिनीत फिल्म दर्शकों को बहुत पसंद आई थी.

Amitabh Bachchan Family Photo

आपको याद दिला दें कि 1-2 दिन पहले बिग बी की प्रॉपर्टी से जुड़ी खबर भी हर ओर छाई हुई थी. खबरों के अनुसार, अमिताभ ने यह घोषणा की है कि उनके मरने के बाद उनकी प्रापर्टी पर दोनों बच्चों का हक होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, एक सवाल का जवाब देते हुए अमिताभ बच्चन ने ‘हमने पहले भी कहा है और आज भी कह रहे हैं कि जब भी हम मर जाएंगे तो जा कुछ भी हमारा है, जो कुछ भी थोड़ा बहुत हमारे पास है वो हमारी संतान हैं एक बेटा और एक बेटी आधा- आधा देंगें दोनों को, दोनों को बराबर मिलेगा,चाहे जो भी हो. अमिताभ के इस खुलासे के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग उनकी  प्रॉपर्टी को लेकर चर्चा कर रहे हैं. अमिताभ का यह फैसला निसंदेह बेहद प्रेरणास्पद है. इससे लोगों में बेटियों के अधिकारों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ेगी और वे इससे सीख लेकर अपनी बेटियों को संपत्ति में अधिकार देने के बारे में विचार करेंगे.

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एक इंस्टाग्राम पोस्ट के लिए इतने करोड़ चार्ज करती हैं प्रियंका चोपड़ा (Know the amount Priyanka Chopra charges for ONE Instagram post)

प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) के नाम एक और उपलब्धि. जी हां, उन्होंने इंस्टाग्राम रिच लिस्ट 2019 (Instagram Rich List 2019) में जगह हासिल की है और ऐसा करनेवाली वो एकमात्र बॉलीवुड सेलेब्रिटी हैं. प्रियंका बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी लोकप्रिय हैं और ऐसा कहना ग़लत न होगा कि वे ग्लोबल आइकॉन बन चुकी हैं. प्रियंका ने बहुत मेहनत से सफलता की सीढ़ियां चढ़ी हैं और यह उपलब्धि उनकी सफलता का एक और नमूना है. यह तो आपको पता ही होगा कि प्रियंका चोपड़ा सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती हैं और वे अक्सर अपने प्रोफेशनल कंमिट्मेंट्स को प्रोमोट करने के लिए इंस्टाग्राम व ट्विटर का प्रयोग करती हैं. इंस्टाग्राम पर प्रियंका के 43,038,343  फॉलोवर्स हैं, इसलिए प्रियंका प्रोफेशनल पोस्ट के लिए तगड़े पैसे वसूलती हैं.

Priyanka Chopra

हूपर एचक्यू, द्वारा शेयर की गई इंस्टाग्राम रिच लिस्ट के अनुसार, प्रियंका चोपड़ा को एक इंस्टाग्राम पोस्ट के लिए तकरीबन 1.87 करोड़ रुपए मिलते हैं. सुनकर दंग रह गए ना आप. आपको बता दें कि इस लिस्ट में प्रियंका 19 वें स्थान पर हैं. पहले पायदान पर अमेरिकी मॉडल, बिजनेसवुमन व सोशलाइट केली जेनेर हैं, जो एक पोस्ट के लिए  8 करोड़ 70 लाख के करीब चार्ज करती हैं.

Priyanka Chopra

प्रियंका के अलावा इस लिस्ट में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने जगह बनाई है, जो एक पोस्ट के लिए 1 करोड़ 35 लाख रुपए के करीब चार्ज करते हैं. विराट के इंस्टाग्राम पर 36,159,776 फॉलोवर्स हैं. प्रोफेशनल पोस्ट के लिए जितनी राशि ये सेलेब्रिटी चार्ज करते हैं, क्योंकि उनकी पहुंच बहुत ज़्यादा लोगों तक है.

Virat Kholi

प्रियंका के काम की बात करें तो उनकी अगली फिल्म स्काई इज़ पिंक है.सोनाली बोस द्वारा निर्देशित यह मूवी आयशा चौधरी के जीवन पर आधारित है. इस फिल्म में प्रियंका के अलावा फरहान अख़्तर और ज़ायरा वसीम भी हैं. यह फिल्म 11 अक्टूबर को रिलीज़ होने वाली है.

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मोबाइल फोन की लत कैसे छोड़ें (How To Beat Mobile Phone Addiction)

मोबाइल फोन (Mobile Phone) आज हम सबकी ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है. आपको अपने आसपास ऐसे कई लोग मिल जाएंगे, जो हम पांच मिनट में अपना फोन चेक करते हैं, कई लोग अपने दिनभर का अधिकतम समय फोन पर ही खर्च कर देते हैं. मोबाइल फोन की लत (Mobile Phone Addiction) के कारण कई लोग मानसिक रोगों के शिकार तक होने लगे हैं. मोबाइल फोन की लत कैसे छोड़ें, बता रही हैं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ.

Mobile Phone Addiction

मोबाइल फोन एडिक्शन से बचने के 5 आसान उपाय

1) ऑनलाइन गेम इन दिनों बच्चों और युवाओं के बीच पहुत पॉप्युलर हो रहे हैं. अत: सबसे पहले अपनी ऑनलाइन गेम खेलने की लत पर कंट्रोल करें. माना आपके लिए ये काम आसान नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे गेम खेलने का टाइम कम करते जाएं. ऐसा करके आप इस लत से बच सकते हैं.

2) सोशल मीडिया के लाइक्स और कमेंट्स के चक्कर में लोग अपने आसपास के लोगों को भूल जाते हैं इसलिए सोशल मीडिया के लिए भी टाइम फिक्स करें और उससे ज़्यादा समय सोशल मीडिया पर न बिताएं.

3) जब परिवार के सभी सदस्य घर पर हों, तो फोन से जितना हो सके दूर रहें और अपने परिवार के साथ समय बिताएं.

4) रात में सोने से कुछ घंटे पहले ही फोन को खुद से दूर कर लें. ऐसा करने से आप जल्दी सो जाएंगे और आपकी नींद पूरी होगी.

5) जिस तरह आपकी हफ्ते में एक दिन छुट्टी होती है, वैसे ही अपने फोन को भी हफ्ते में एक दिन छुट्टी दें और बहुत ज़रूरी हो तो ही फोन को हाथ लगाएं.

 

मोबाइल फोन की लत कैसे छोड़ें, जानने के लिए देखें वीडियो:

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सेल्फी की लत से कैसे बचें (Side Effects Of Selfie Addiction)

सेल्फी (Selfie) लेना जब तक शौक है तब तक तो ठीक है, लेकिन सेल्फी लेना जब आपकी लत (Addiction) बन जाए, तो ये चिंता का विषय है. क्या आप भी किसी रेस्टॉरेंट में खाना चखने से पहले उस डिश के साथ सेल्फी लेती हैं, कहीं घूमने जाने पर उस जगह की सैर का लुत्फ़ उठाने के बजाय हर व़क्त स़िर्फ सेल्फी लेती रहती हैं, सोशल मीडिया पर एक सेल्फी पोस्ट करने के लिए क्या आप 10-20 सेल्फी लेती हैं और जो बेस्ट है उसे पोस्ट करती हैं, सेल्फी लेने के लिए क्या आप बार-बार मेकअप करती हैं, नए-नए कपड़े ख़रीदती हैं, जबकि आपको इतने कपड़ों की ज़रूरत नहीं है…? सेल्फी का भूत यदि आप पर भी इसी तरह सवार है, तो समझ लीजिए सेल्फी की लत आपको भी बीमार कर सकती है.

Selfie Addiction

सेल्फी एडिक्शन से बचने के लिए क्या करें?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर व़क्त सेल्फी लेना एक तरह का मनोरोग बनता जा रहा है. सेल्फी का एडिक्शन लोगों को सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस चमकाने के लिए उकसाता है. ऐसे लोगों को यदि उनकी सेल्फी के लिए लाइक्स या कमेंट्स नहीं मिलते तो, वो स्ट्रेस में आ जाते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास के करीबी लोगों पर ध्यान नहीं देते, उनके साथ समय नहीं बिताते, लेकिन सोशल मीडिया के अजनबी लोगों के सामने अपनी इमेज चमकाने के लिए बेस्ट से बेस्ट सेल्फी लेने की कोशिश में लगे रहते हैं. सेल्फी लेते हुए कई लोगों ने अपनी जान तक गवां दी है. अत: सेल्फी के एडिक्शन से बचना बेहद ज़रूरी है. सेल्फी एडिक्शन के साइड इफेक्टस से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं, बता रही हैं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ.

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सेल्फी की लत से कैसे बचें, जानने के लिए देखें वीडियो:

डॉल के बाद अब मार्केट में तैमूर के फोटो वाली बिस्किट (After Doll, Taimur Ali Khan Cookies Hit Market)

सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और करीना कपूर (Kareena Kapoor) के बेटे (Son) तैमूर अली खान (Timur Ali Khan) सोशल मीडिया पर कितने लोकप्रिय हैं, यह हम जानते हैं. ऐसा  कोई दिन नहीं होता जब तैमूर की कोई नहीं तस्वीर न आए . इसके अलावा वहीं इंस्टाग्राम पर तैमूर के कई फ़ैन क्लब भी मौजूद हैं. ये कहना कही से ग़लत नहीं होगा कि तैमूर  सोशल मीडिया पर अपने मम्मी पाापा से ज़्यादा फ़ेमस है. यही वजह है कि पैपराजी भी तैमूर की तस्वीर के लिए घंटो इंतज़ार में खड़ी रहती है.

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Taimur Ali Khan
Taimur Ali Khan
Taimur Ali Khan
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 तैमूर की इस पॉपुलारिटी का हर कोई फ़ायदा उठाना चाहता है. हाल ही में मार्केट में तैमूर के नाम पर डॉल बनाकर बेचे जाने की ख़बर चर्चा में थी. लेकिन अब तो तैमूर के नाम बिस्किट भी बेची जा रही है.
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एक अखबार में छपी खबर के अनुसार, कस्टमाइज कुकीज बना कर बेचने वाली एक बेकरी तैमूर की कुकीज बना कर बेच रही है. इस बेकरी ने एक अवॉर्ड फंक्शन में आने वाले मेहमानों को भी ये कुकीज उपहार के रूप में गिफ्ट की थी. हालांकि इस मामले में अभी तक करीना या सैफ़ का रीऐक्शन सामने नहीं आया है. तैमूर की डॉल के वक़्त सैफ़ ने जहां  इस पर ख़ास प्रतिक्रिया नहीं दी थी. वही करण जौहर के शो में आयी करीना ने उस डॉल को बकवास बताया था. करीना ने कहा था कि डॉल उनके बेटे से कही से भी नहीं मिलती है.

नोटबुक का पहला गाना ‘नहीं लगदा’ शेयर किया सलमान खान ने… (Nahi Lagda… Salman Khan Shares First Song From Notebook)

Song From Notebook

नोटबुक का पहला गाना ‘नहीं लगदा’ शेयर किया सलमान खान ने… (Nahi Lagda… Salman Khan Shares First Song From Notebook)

फिल्म नोटबुक (Notebook) का सॉन्ग (Song) सलमान खान (Salman Khan) ने सोशल मीडिया पर शेयर किया. यह रोमांटिक सॉन्ग है और सलमान की मानें, तो फैंस को यह गाना सुनकर महसूस करना चाहिए. यह एक रोमांटिक सॉन्ग है और नोटबुक सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म है. इस फिल्म से डेब्यू कर रहे हैं एक्टर ज़हीर इकबाल और मोहनीश बहल की बेटी प्रनूतन. यह एक रोमांटिक मूवी है और सबको प्रनूतन की सिल्वर स्क्रीन पर एंट्री का भी बेसब्री से इंतज़ार है.

 

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यूं रीस्टार्ट करें अपनी डिजिटल लाइफ (Restart Your Digital Life Now)

हमारी वर्क लाइफ (Work Life) हो या पर्सनल लाइफ (Personal Life) सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है. रोज़ नए-नए ऐप्स हमें बहुत कुछ सिखाने के लिए आतुर रहते हैं. हमारी डिजिटल लाइफ दिन-ब-दिन एडवांस होती जा रही है, तो क्यों न इस साल बची-खुची कसर भी पूरी कर दें और नए साल में अपनी डिजिटल लाइफ (Digital Life) को रीस्टार्ट करके ख़ुद को दें बेस्ट न्यू ईयर गिफ्ट. 

Digital Life

रीस्टार्ट करें डिजिटल लाइफ

अभी कुछ दिन पहले ही एक बहुत सुंदर-सी पंक्ति पढ़ी, जिसमें लिखा था- ‘सेल्फी ने झूठा ही सही, मगर लोगों को मुस्कुराना सिखा दिया.’ पढ़कर लगा भले ही हम डिजिटल लाइफ को कुछ भी कहें, पर आज यह हमारी पहचान बन चुकी है.

–   ऑनलाइन दुनिया में हमारा अपना एक डिजिटल आईडी कार्ड है ये डिजिटल लाइफ. फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर, स्नैप चैट जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हमारी डिजिटल लाइफ की झलक देखने को मिलती है.

–     कभी ख़ुशी-कभी ग़म, कभी नखरे, कभी जलन, कभी भावुक होना, तो कभी ग़ुस्सा करना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमारी डिजिटल लाइफ कई रंगों से गुज़रती है. भले ही सोशल मीडिया पर बहुत कुछ बनावटी होता है, पर हमारी असल ज़िंदगी की एक झलक तो सभी को मिल ही जाती है.

चेहरे पर मुस्कान लाती है डिजिटल लाइफ

ज़रा सोचिए आजकल हमारे चेहरे पर मुस्कान कब आती है-

–     जब कोई अपना हमें व्हाट्सऐप पर याद करता है.

–     जब कोई दोस्त फेसबुक की फोटो पर ईमोजी या कमेंट शेयर करता है.

–    कोई रिश्तेदार अपनी बहुत पुरानी फोटो शेयर करता है, जिसमें हम भी हों.

–    कोई आपके स्टेटस की तारीफ़ करता है.

–     कोई वीडियो कॉल करके कुछ स्पेशल शेयर करता है.

हमारी डिजिटल लाइफ ने हमें एक नया जहां दे दिया है, जहां लोग अपनी लाइफ को उस नज़रिए से सबके सामने रखते हैं, जैसा वो दिखना चाहते हैं. अपनी हसरतों को सबके सामने रखने का प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया ने ही तो दिया है. इस डिजिटल लाइफ को नए साल में यूं रीस्टार्ट करें.

अपलोड करें फ्रेशनेस

–     एक और नया साल अपने साथ कई नए मौ़के लेकर आया है, तो इस बार इन्हें अपने हाथ से न जाने दें. फेसबुक पर अपने बचपन या स्कूल के दिनों के पुराने दोस्तों को ढूंढ़ें. नए साल में पुराने दोस्तों का साथ आपकी डिजिटल लाइफ में नई फ्रेशनेस भर देगा.

–    अब तक आप सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बहुत कम शेयर करते थे, जैसे- महीने में एक बार प्रोफाइल पिक्चर चेंज करना, सालों तक एक ही कवर लगाए रखना आदि, शुरुआत यहीं से करें.

–    बीच-बीच में कभी कुछ स्टेटस डाल दें. कभी कोई बात, कभी कोई फोटो हमें बहुत अच्छी लगती है. उसे दूसरों के साथ शेयर करेंगे, तो उसके रिएक्शन हमें अलग ही ख़ुशी देते हैं.

–     नई-नई कम्यूनिटीज़ से जुड़ें, ताकि आपको कुछ नया जानने को मिले.

–     अपनी हॉबी से जुड़े पेजेज़ को लाइक और फॉलो करें, ताकि हर दिन आप अपनी हॉबी से जुड़े रहें.

–    अगर आपको लगता है कि कई सालों से आपका एक ही पासवर्ड है, जो दूसरों को भी पता है, तो नए साल में उसे भी नया कर दें. यह आपकी डिजिटल सेफ्टी के लिए भी बहुत ज़रूरी है.

डिजिटल कचरा साफ़ करें

–     फेसबुक के ऐसे दोस्तों को ब्लॉक कर दें, जिनकी पोस्ट आपको अच्छा फील नहीं कराती.

–     थोड़ा समय निकालकर अपनी फ्रेंड्स लिस्ट देखें और ग़ैरज़रूरी दोस्तों को लिस्ट से छांट दें. थोड़ा डिजिटल कचरा आपकी लाइफ से साफ़ हो जाएगा.

–    ऐसे कुछ लोग होते हैं, जिन्हें हम कॉमन फ्रेंड के ज़रिए जानते हैं और वो अक्सर अपनी फोटो डालकर भी 20 लोगों को टैग कर देते हैं. ऐसे लोगों से दूरी ही अच्छी.

–     व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर न जाने कैसे-कैसे फोटोज़ और वीडियोज़ आते रहते हैं, इसलिए ऐप में जाकर ऑटो डाउनलोड बंद कर दें, ताकि उन्हें बैठकर डिलीट न करना पड़े.

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Digital Life
अपडेट करें स्टाइल और ट्रेंड

–     इस साल अपनी डिजिटल लाइफ को थोड़ा अलग बनाएं. पुराने और बोरिंग स्टाइल को कहें बाय-बाय.

–   डिजिटल लाइफ के प्रोफाइल से लेकर अपने पर्सनल प्रोफाइल तक में कुछ नया करें.

–     नया साल आपके लिए एक नया मौक़ा लेकर आया है, लीक से हटकर कुछ अलग करने के लिए. रोज़मर्रा के अपने बोरिंग रूटीन को बदलने के लिए.

–     नए साल में नए-नए गैजेट्स और स्मार्टफोन्स भी आपको लुभाएंगे, तो अपने स्मार्टफोन को अपडेट करने का समय भी आ गया है.

–     जो कुछ भी करें, यह याद रखें कि आपको अपनी लाइफ को बेहतरीन बनाना है.

रीचार्ज करें पर्सनल लाइफ

हमारी डिजिटल लाइफ सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं है. हमारी पर्सनल और वर्क लाइफ में भी यह काफ़ी मायने रखती है.

–     इस धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसे यह पता हो कि वो ईश्‍वर से कितने सालों का रीचार्ज करवा के आया है, पर इतना यक़ीन है कि यह अनलिमिटेड नहीं है. तो हर पल ख़ुश रहें और अपनों को भी ख़ुश रखें, क्योंकि ख़ुशियां ही आपकी ज़िंदगी को रीचार्ज करती हैं.

–    हेल्थ और फिटनेस सबसे ज़रूरी है, इसलिए एक अच्छा-सा फिटनेस ऐप डाउनलोड करें. योग व एक्सरसाइज़ न स़िर्फ आपकी सेहत को रीचार्ज करेंगे, बल्कि आपकी डिजिटल लाइफ भी अपडेट हो जाएगी.

–     लाइफ को रीचार्ज करने का बेस्ट तरीक़ा है, ऐसे लोगों के साथ रहें, जो आपसे प्यार करते हैं और इसके लिए व्हाट्सऐप से बेहतर क्या हो सकता है.

–    व्हाट्सऐप की मदद से आप अपनों से 24 घंटे जुड़े रहते हैं. दिल में जो आया शेयर कर दिया, आपके अपनों के लिए इससे अच्छा क्या होगा कि आप उनसे 24ु7 जुड़े रहेंगे.

–    हर रोज़ कुछ नया सीखने की कोशिश करें. आप चाहें, तो कुछ ऐप्स डाउनलोड करें और उनके नोटिफिकेशन आपको हर रोज़ कुछ न कुछ नया सिखाएंगे. यूट्यूब और पिनट्रेस्ट पर भी आपको बहुत कुछ रोज़ाना सीखने को मिलेगा.

–     गेम्स आपकी क्रिएटिविटी और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाते हैं. इसलिए नए साल में कुछ ऐसे डिजिटल और आउटडोर गेम्स को अपनी लाइफ में शामिल करें, जो डीस्ट्रेस करने के साथ-साथ आपके माइंड को शार्प भी बनाएंगे.

–     डायटिंग कर रहे हैं, तो ऐसा ऐप डाउनलोड करें, जो आपको बता सके कि आपने कितनी कैलोरीज़ खाई. इससे आप सचेत हो जाएंगे.

–    पढ़ने के शौक़ीन हैं, तो बुक्स के बहुत से ऐप्स ऑनलाइन मौजूद हैं. बस, उन्हें डाउनलोड करें और अपनी मनपसंद कहानियों व उपन्यास में खो जाएं.

–     कोई बिरला ही होगा, जिसे म्यूज़िक का शौक़ न हो. नए साल में अपने मनपसंद गानों का मज़ा लेना चाहते हैं, तो कोई म्यूज़िक ऐप डाउनलोड करें.

अपग्रेड करें वर्क लाइफ

–     बिज़नेस प्लान बनाना हो या लेटेस्ट प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने के लिए भी आइडियाज़ की ज़रूरत हो, डिजिटल वर्ल्ड में ये चीज़ें चुटकी बजाते हो जाती हैं.

–     ऑफिस के काम को मैनेज करने के लिए आपका स्मार्टफोन आपकी काफ़ी मदद कर सकता है. दरअसल, आप अपनी फील्ड से संबंधित ज़रूरी ऐप्स डाउनलोड करके भी अपनी वर्क लाइफ को अपग्रेड कर सकते हैं.

– संतारा सिंह

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सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

 Social Media Relationships
सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

डिजिटल (Digital) होती दुनिया में रिश्ते (Relationships) भी डिजिटल हो चुके हैं. अब तो पति-पत्नी भी आसपास बैठकर सोशल मीडिया (Social Media) के ज़रिए ही एक-दूसरे से बात करते हैं. वहीं दूसरी ओर रियल लाइफ से दूर अब हमारे डिजिटल रिश्ते (Digital Relationships) भी बहुत सारे बन गए हैं, जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण भी हो गए हैं, क्योंकि उनमें अलग तरह का आकर्षण है. वहां रोक-टोक नहीं है, वहां हर बात जायज़ है… ऐसे में हमें वो भाते हैं और बहुत ज़्यादा लुभाते हैं.

–    सोशल मीडिया एडिक्शन की तरह है, यह बात शोधों में पाई गई है. यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.

–    यहां पनपे रिश्ते शुरुआत में बेहद आकर्षक और ख़ूबसूरत लगते हैं, क्योंकि सबकुछ एकदम नया लगता है.

–    अंजान लोग दोस्त बनते हैं और उनके बारे में सबकुछ जानने को आतुर हो जाते हैं.

–    न स़िर्फ उनके बारे में हम जानना चाहते हैं, बल्कि अपने बारे में भी सबकुछ बताने को उतावले रहते हैं.

–    यहां हमें इस बात का आभास तक नहीं होता कि इनमें से कौन, कितना सच बोल रहा होता है? अपने बारे में कौन किस तरह की जानकारी साझा कर रहा होता है और उनका इरादा क्या होता है.

–    डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का होता है. यहां कोई भी आपको आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है.

–    दरअसल, जो सोशल मीडिया के रिश्ते हमें इतने भाते हैं, वो उतने ही अधूरे होते हैं. कई बार तो साल-दो साल गुज़रने के बाद पता चलता है कि जिससे हम बात कर रहे थे, वो तो ये था ही नहीं.

–    इतने फेक अकाउंट्स, इतनी फेक आईडीज़, इतना दिखावटी अंदाज़… पर यही सब हमें इतना रियल लगता है कि अपने रिश्तों में दूरियां बढ़ाकर हम इन नक़ली रिश्तों के क़रीब जाते हैं.

–    एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और डिप्रेशन महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है. यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा की गई थी.

–    आपसी रिश्तों में हम पर बहुत सारी ज़िम्मेदारियां और जवाबदेही होती है, जबकि सोशल मीडिया रिलेशन इन सबसे मुक्त होते हैं, तो ऐसे में ज़ाहिर है ये रिश्ते हमें अच्छे लगने लगते हैं.

–    इन रिश्तों का मायाजाल ऐसा होता है कि हम इन्हें अपने पल-पल की ख़बर देना चाहते हैं और अपनी लाइफ को बहुत हैप्पनिंग दिखाना चाहते हैं, जबकि रियल रिश्तों में हमारी दिलचस्पी कम होने लगती है.

–    हम भले ही डिजिटल रिश्तों में अपनी ख़ुशियां ढूंढ़ने की कोशिश करें, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ये सबसे अधूरे रिश्ते होते हैं, क्योंकि ये झूठ की बुनियाद पर अधिक बने होते हैं.

–    इनमें कई आवरण और नक़ाब होते हैं, जो परत दर परत धीरे-धीरे खुलते हैं और कभी-कभार तो हमें पता भी नहीं चलता और हम फरेब के मायाजाल में फंसते चले जाते हैं.

–    रियल रिश्तों में हमारा कम्यूनिकेशन कम होने लगता है और प्यार की गर्माहट भी घटती चली जाती है. जब तक होश आता है, तब तक बहुत कुछ हाथ से निकल चुका होता है.

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इस तरह छलता है सोशल मीडिया का रिश्ता…

मुंबई की रहनेवाली 35 वर्षीया आशा यूं तो अपनी  ज़िंदगी से और शादी से ख़ुश थी, पर कहीं न कहीं उसे सोशल मीडिया की ऐसी लत लग गई थी कि वो वहां अपनी ज़िंदगी के अधूरेपन को कम करने की कोशिशों में जुट गई थी. उसे हमेशा शिकायत रहती थी कि उसका पति उसे पूरा समय नहीं दे पाता. वो उसको पहले की तरह पैंपर नहीं करता… ऐसे में वो एक लड़के के संपर्क में आई. उसका नाम राजेश था. उसकी राजेश से रोज़ बातें होने लगीं. ये बातें अब इतनी बढ़ गई थीं कि मुलाक़ात करने का मन बनाया.

आशा का 5 साल का बेटा भी था, पर उसने किसी तरह अपने पति से झूठ कहा कि वो ऑफिस की तरफ़ से ट्रेनिंग के लिए दूसरे शहर जा रही है. वो राजेश के साथ होटल में रहने गई, तो उसे पता चला कि वो अकेला नहीं आया. उससे मिलने उसके साथ उसके दो दोस्त भी हैं.

ये पहला झटका जो आशा को लगा. उसके बाद राजेश ने उसे समझाया कि वो सब अलग कमरे में रहेंगे. आशा मान गई. राजेश उसको शहर में साथ घूमने के लिए कहता, तो आशा मना करती, क्योंकि इसी शहर में वो पति से झूठ बोलकर रह रही है, तो एक डर था मन में कि कहीं कोई देख न ले.

अगले ही दिन राजेश के साथ आशा की बहस हो गई. आशा को महसूस होने लगा कि राजेश की सोच बहुत पिछड़ी हुई है. वो चैटिंग में भले ही मीठी-मीठी बातें करता था, पर अब

रू-ब-रू उससे मिलकर अलग ही व्यक्तित्व सामने आ रहा है. राजेश का सोचना था कि जो वो बोले, आशा को आंख मूंदकर वही करना चाहिए.

आशा आत्मनिर्भर महिला थी. उसे इस तरह के व्यवहार की आदत भी नहीं थी, क्योंकि उसका पति बेहद सुलझा हुआ और शालीन था. अब आशा को महसूस हुआ कि उससे इस झूठे, अधूरे-से रिश्ते के लिए अपनी शादी को दांव पर लगा दिया. आशा को यह भी डर था कि कहीं राजेश उसे ब्लैकमेल न करे, पर उसने राजेश से बात करके अपने सारे रिश्ते ख़त्म किए और अपने घर लौट आई.

इस घटना ने आशा को बुरी तरह हिला दिया, लेकिन उसे यह बात समझ में आ गई कि रियल और डिजिटल रिश्तों में कितना अंतर होता है.

पति भले ही व्यस्तता के चलते समय न दे पाते हों, पर वो एक भले इंसान हैं और आशा का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, जबकि राजेश एक दंभी पुरुष था, जो स़िर्फ आशा का फ़ायदा उठाना चाहता था.

कुछ इसी तरह का केस मालिनी का भी था, लेकिन वहां मालिनी के पति ने उसका झूठ पकड़ लिया था और मालिनी का तलाक़ हो गया था. उसके बाद जिस लड़के की वजह से मालिनी ने पति से फरेब किया था, उस लड़के ने भी मालिनी से पल्ला झाड़ लिया. जबकि मालिनी का कहना है कि वो पहले कहता था कि दोनों शादी कर लेंगे.

इस तरह के तमाम वाकये इस तरह के रिश्ते के अधूरेपन और रियल रिश्तों में बढ़ती दूरियों का संकेत देते हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि संतुलन व सामंजस्य बनाकर ही हर चीज़ का इस्तेमाल किया जाए, वरना जो चीज़ वरदान है, उसे हम ख़ुद ही अपने लिए अभिशाप बना लेंगे.

– शौर्य सिंह

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