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पैरेंटिंग गाइड- बच्चों को स्ट्रेस-फ्री रखने के स्मार्ट टिप्स (Parenting Guide- Smart Tips To Make Your Kids Stress-Free)

Parenting Guide, Smart Tips, To Make Your Kids Stress-Free

Parenting Guide, Smart Tips, To Make Your Kids Stress-Free

स्ट्रेस, ये शब्द जितना छोटा है, सेहत के लिए उतना ही ख़तरनाक. आपको जानकर हैरानी होगी कि हमेशा मौज-मस्ती में चूर रहनेवाले नटखट बच्चे भी स्ट्रेस का शिकार हो रहे हैं. एक सर्वे के मुताबिक 100 में तक़रीबन 13 बच्चे किसी ना किसी तरह के स्ट्रेस में रहते हैं. बच्चों को कैसे रखा जाए स्ट्रेस से दूर, ताकि उनका बचपन रहे ख़ुशियों से भरा, ये बता रहे हैं सायकियाट्रिस्ट एंड काउंसलर, डॉक्टर पवन सोनार.

क्यों होता है स्ट्रेस?

बच्चों में स्ट्रेस के कई कारण हो सकते हैं. तनाव किसी भी उम्र में हो सकता है. 1 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चों में तनाव के कारण अलग-अलग हो सकते हैं.

1-2 साल की उम्र

  • ये उम्र तनाव लेने की नहीं होती और ना ही बच्चा समझ पाता है कि वो किसी तरह के स्ट्रेस में है.
  • इस उम्र में स्ट्रेस का कारण हो सकता है, मां के प्रति उसका लगाव.
  • अगर मां किसी और बच्चे को गोद में लेती है, तो मां का प्यार बंटने के डर से भी बच्चा रोने लगता है.
  • मां का डांटना भी बच्चे को पसंद नहीं आता. कई बार बच्चे इतने तनावग्रस्त हो जाते हैं कि दूध पीना छोड़ देते हैं और उनकी नींद भी कम हो जाती है.

3-6 साल की उम्र

  • तीन साल का बच्चा ख़ासा समझदार होता है. इस उम्र में तनाव की सबसे बड़ी वजह होती है स्कूल.
  • भारत में तीन साल की उम्र से स्कूलिंग शुरू हो जाती है.
  • बच्चा जब नर्सरी में क़दम रखता है, तो उसका सबसे बड़ा डर होता है मां से अलग होने का.
  • तीन घंटे स्कूल में बिना मां के अनजान लोगों के बीच रहना बच्चे के लिए किसी जंग से कम नहीं होता.
  • तीन साल तक बच्चे ख़ुद को पढ़ाई, स्कूल और टीचर्स के अनुसार ढालने में रह जाते है

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7-11 साल की उम्र

  • इस उम्र में तनाव की सबसे बड़ी वजह है पढ़ाई.
  • बच्चों के सिर पर स्कूल के बैग से लेकर अच्छे मार्क्स लाने का बोझ होता है, ऐसे में भला बच्चे कैसे तनाव से बच सकते हैं.
  • माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए बच्चे अपनी क्षमता से ज़्यादा मेहनत करने लगते हैं.

12-15 साल की उम्र

  • ये उम्र बेहद ही नाज़ुक उम्र होती है. 12-15 साल में बच्चा ख़ुद को बहुत बड़ा समझने लगता है.
  • किसी तरह की रोक-टोक पसंद नहीं करता.
  • कठिन सेलेबस पूरा करने का प्रेशर, स्कूल में दूसरे बच्चों से आगे निकलने की होड़, उसे स्ट्रेस का शिकार बना देती है.
  • इस उम्र में कई शारीरिक बदलाव भी आते हैं, जैसे- लड़कियों के पीरियड्स शुरू हो जाना, स्तन का विकास होना, जबकि लड़कों का लिंग बढ़ने लगता है.
  • इन बदलावों के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए काफ़ी स्ट्रेसफुल हो जाता है.

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तनाव के और भी कारण हैं

माता-पिता का तलाक: बच्चा माता-पिता के साथ सुरक्षित महसूस करता है. तलाक की वजह से उसे दोनों में से एक को चुनना पड़ता है. किसी एक की भी कमी बच्चे के तनाव का कारण बनती है.

मृत्यु का असर: बच्चा घर में जिससे अधिक प्यार करता हो या फिर माता-पिता में से किसी की मौत हो जाने का असर उसके मस्तिष्क पर पड़ सकता है. हमेशा के लिए किसी प्रियजन से बिछड़ने का ग़म बच्चे को तनाव में ले जाता है.

गैजेट्स से भी होता है तनाव: आजकल बच्चे काफ़ी टेक्नोफ्रेंडली हो गए हैं. ज़्यादा वक्त मोबाइल या कंप्यूटर पर बिताते हैं. वीडियो गेम्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने दोस्तों से आगे निकलने की होड़ भी उन्हें स्ट्रेस देने लगती है.

पारिवारिक झगड़े: परिवार में कलह, माता-पिता के बीच लड़ाई-झगड़ा, चीखना-चिल्लाना, इन सब बातों का असर भी बच्चे के दिमाग़ पर पड़ता है. ऐसे माहौल में वह अकेला महसूस करने लगता है.

नई जगह का असर: बच्चे कई बार नई जगह को भी अपना नहीं पाते, फिर चाहे वो नया स्कूल हो या नया घर और नए दोस्त. पुराने घर और दोस्तों की यादों से बाहर निकलने में उन्हें व़क्त लगता है.

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स्ट्रेस-फ्री रखने के स्मार्ट टिप्स
  • बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त उनके माता-पिता ही बन सकते हैं. बच्चा अपने पैरेंट्स के सबसे क़रीब होता है. विपरीत हालात से कैसे निपटना है, ये बातें पैरेंट्स ही बच्चे को समझा सकते हैं.
  • अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा स्ट्रेस में है, तो उसके साथ ज़्यादा से ज़्यादा व़क्त बिताएं, उसके पास बैठें, उससे बात करें, सिर पर प्यार से हाथ फेरें, बच्चा रो रहा हो, तो उसे अपनी गोद में बिठा लें ताकि वो अकेला ना महसूस करे.
  • बच्चे को स्पेशल फील कराना ज़रूरी है.
  • उनकी पसंद-नापसंद को महत्व दें. जैसे, उनसे पूछें कि वो पहले खाना पसंद करेंगे या खेलना? ऐसे सवाल पूछने से बच्चों को लगता है कि घर में उनकी राय की भी अहमियत है.
  • अपने बच्चे की क्षमता को समझें. दूसरे बच्चों से उसकी तुलना ना करें.
  • बच्चा खेलकूद या पढ़ाई में जैसा भी है उसकी सराहना करें.
  • दूसरों से तुलना करने की बजाय बच्चे की कमज़ोरी को समझें और उसका हौसला बढ़ाएं, ताकि ख़ुद के प्रति बच्चे में आत्मविश्‍वास बढ़े.
  • बच्चे अक्सर टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल पर गेम्स खेलते रहते हैं या फिर सोशल साइट्स पर बिज़ी रहते हैं. गैजेट्स से बच्चे को दूर रखें. तनाव का एक कारण ये गैजेट्स भी हैं.
  • टीचर्स को भी बच्चे को डांटने की बजाय उसकी मनोदशा समझ कर सही काउंसलिंग करनी चाहिए.
  • बच्चों के दिमाग़ और शरीर को आराम की ज़रूरत होती है, इसलिए उनको 8-10 घंटे की नींद ज़रूरी है.
  • पैरेंट्स अगर स्ट्रेस में होंगे, तो बच्चों पर भी इसका असर होगा, इसलिए पहले ख़ुद तनावमुक्त रहें. घर की समस्याओं या आपसी झगड़े से बच्चों को दूर रखें.
  • बच्चों में तनाव का एक कारण है ग़लती हो जाने का डर. पैरेंट्स को बच्चों को बताना चाहिए कि ग़लती से बिल्कुल नहीं डरें, बल्कि उससे सीख लें.
  • ग़लती हो जाने पर तनाव लेने या डरने की बजाय उस ग़लती को सुधार कर आगे बढ़ने की कला सिखाएं.
  • जब बच्चा तनाव में होता है, तो बहुत ज़्यादा खाने लगता है, मोटापे की वजह बन सकता है. ऐसे में सबसे पहले बच्चे को जंक फूड से दूर रखना आवश्यक है.
  • उसकी सेहत ख़राब ना हो, इसके लिए उसे बैलेंस डायट दें. ज़्यादा शक्कर या कैफीनयुक्त आहार से दूर रखें.
  • कई बच्चों को पालतू जानवर पसंद होते हैं. उनके लिए ख़ास पालतू जानवर घर ले आएं, जिनके साथ वो व्यस्त रहें.
  • बच्चे को बाग़वानी सिखाएं, नया पौधा लगाना सिखाएं और उसे पौधे में रोज़ाना पानी डालने का काम दें. जिस काम में बच्चे का मन लगे, वो उसे करने दें.

– अंशी

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

कहीं आपको भी तनाव का संक्रमण तो नहीं हुआ है? (Health Alert: Stress Is Contagious)

Stress Is Contagious

जी हां, सुनने में अटपटा ज़रूर लग सकता है, लेकिन तनाव संक्रामक होता है. यक़ीन न हो, तो आज़माकर देख लीजिए.

Stress Is Contagious

आप बहुत ही हंसमुख और ज़िंदादिल इंसान हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से आप काफ़ी चिड़चिड़े हो गए हैं. छोटी-छोटी बात पर ग़ुस्सा करने लगे हैं. क्या है इसकी वजह? कहीं आपकी संगत तो नहीं? क्या आपका कोई अपना इन दिनों बहुत तनावग्रस्त है और उसका तनाव अब आपको भी संक्रमित करने लगा है?

संगत का असर
यदि आप लगातार किसी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के साथ रहते हैं, तो जाने-अनजाने आपमें भी थोड़ी-बहुत निगेटिविटी आ ही जाती है. आसपास के माहौल की तरह ही हमारे साथ रहने वाले लोग भी हमारे व्यवहार पर बहुत असर डालते हैं.

यूं होता है असर
एक जानी-मानी एमएनसी में कार्यरत, हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाले कार्तिक (परिवर्तित नाम) का व्यवहार शादी के बाद धीरे-धीरे बदलने लगा. वजह थी, पत्नी का शक़ करना और दिन-रात उसकी जासूसी करने में लगे रहना. वो कहां जाता है, किससे मिलता है, किससे बात करता है… पत्नी हर बात की ख़बर रखती थी और ज़रा-सा भी शक़ होने पर सवाल पूछ-पूछकर कार्तिक का जीना दूभर कर देती है. पत्नी के व्यवहार से आहत कार्तिक अब लगातार तनावग्रस्त रहने लगा है.

शोधकर्ताओं के अनुसार तनाव निम्न कारणों से संक्रमित हो सकता हैः
* तेज़ आवाज़ में बात करना
* चेहरे की भाव-भंगिमाएं
* शारीरिक हाव-भाव
* यहां तक कि शरीर की गंध भी तनाव का कारण हो सकती है.

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क्या आप भी इनमें से एक हैं?
* परीक्षा के दौरान कई मांएं अपने बच्चे पर पढ़ाई का इतना प्रेशर डालती हैं कि बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं.
* ऑफिस में रोज़ाना अपना दुखड़ा सुनाने वाले सहकर्मी तनाव संक्रमित करते हैं.
* पज़ेसिव गर्लफ्रेंड अक्सर तनाव बढ़ा देती है.
* अपने अहम् की संतुष्टि के लिए रौब झाड़नेवाले बॉस तनाव फैलाते हैं.
* ईर्ष्यालु दोस्त, रिश्तेदार भी ताने मार-मारकर तनाव बढ़ाते हैं.

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कैसे बचें तनाव के संक्रमण से?
* संवेदनशील लोग तनाव से जल्दी संक्रमित होते हैं, इसलिए ऐसे लोगों को तनाव बढ़ाने वाले व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए.
* हर बात को पर्सनली न लें, क्योंकि हर बात आपके लिए नहीं कही जाती.
* दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं, हम सभी को संतुष्ट नहीं कर सकते, इसलिए सबको ख़ुश करने की कोशिश न करें.
* अपनी ख़ूबियों व कमियों का ख़ुद आकलन करें, दूसरों की बातों में न आएं.

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फैक्ट फाइल
सेंट लुइस यूनिवर्सिटी, यूएस के मनोवैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने ये दावा किया है कि कुछ स्थितियों में तनाव संक्रामक होता है और कई बार हम अजनबियों द्वारा भी तनाव से संक्रमित हो जाते हैं.

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एग्ज़ाम टाइम को न बनाएं स्ट्रेस टाइम (How To Deal With Exam Stress?)

Exam Stress

 

Exam Stress
अक्सर एग्ज़ाम के समय स्टूडेंट्स बहुत अधिक तनाव से घिर जाते हैं. इसकी कई वजहें होती हैं, जैसे- सही प्लानिंग न करना, समय पर कोर्स पूरा न होना, पैरेंट्स का दबाव आदि. ये सभी प्रॉब्लम्स न हों, इसके लिए ज़रूरी है पैरेंट्स की समझदारी व अन्य ज़रूरी तैयारियां. आइए, इसी से जुड़ी छोटी-छोटी बातों के बारे में जानते हैं.

परीक्षाएं नज़दीक आने पर पढ़ाई का स्ट्रेस जितना बच्चों पर होता है, उतना ही पैरेंट्स पर भी बनना शुरू हो जाता है. ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि बच्चे व पैरेंट्स में बेहतर तालमेल हो. इसी संबंध में हमने कई छोटी-छोटी, पर महत्वपूर्ण बातों को बताने की कोशिश की है. साथ ही जसलोक हॉस्पिटल की सायकोलॉजिस्ट डॉ. माया कृपलानी ने भी इस बारे में उपयोगी जानकारी दी है.

पैरेंट्स वर्सेस बच्चे

* पैरेंट्स सकारात्मक सोच रखें और बच्चों को हमेशा शांत व प्यार से ही समझाएं.
* उन्हें कभी भी डांट-डपटकर न सिखाएं.
* बच्चों के सामने पैरेंट्स झगड़ा न करें.
* कभी भी पढ़ाई के लिए दबाव न बनाएं.
* दूसरे बच्चों के साथ तुलना न करें, ऐसे में बच्चों में हीनभावना उत्पन्न हो जाती है.
* कभी भी पढ़ाई को लेकर बच्चे को मारे-पीटे नहीं.
* पढ़ने के लिए बच्चे को हमेशा प्रोत्साहित करते रहें.
* बच्चा जिस विषय में कमज़ोर है, उस विषय पर अधिक ध्यान दें.
* हमेशा बच्चे के अंदर सकारात्मक सोच पैदा करते रहें.
* बच्चे को अधिक से अधिक समय दें.
* पढ़ाई के समय बच्चों को हैवी भोजन न दें. भोजन हल्का पर पौष्टिकता से भरपूर हो.
* बच्चों को आसान तरी़के से कमज़ोर विषयों को सिखाने की कोशिश करें.
* बच्चों को हमेशा रोचक विषयों की जानकारी देते रहें.
* अच्छे प्रेरक प्रसंग, कहानियां सुनाते रहें, जिससे बच्चे के अंदर आत्मविश्‍वास पैदा हो.
* यदि घर पर मेहमान हमेशा आते रहते हों, तो बच्चों की परीक्षाओं के समय मेहमानों को कह सकते हैं कि बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए जब भी वे आएं, तो कृपया फोन करके सूचित कर दें या फिर एग्ज़ाम के बाद आने के लिए कहें.

बच्चों के लिए एग्ज़ाम टिप्स

* एग्ज़ाम को लेकर अपने टीचर्स द्वारा बताए गए इम्पॉर्टेंट पॉइंट्स को हमेशा ध्यान में रखें.
* उनके द्वारा बताए गए प्रश्‍नों और पेपर पैटर्न से जुड़ी बातों को गंभीरतापूर्वक फॉलो करें.
* परीक्षा की तैयारी के लिए एक बैलेंस टाइम टेबल बनाएं.
* टाइम टेबल बनाकर पढ़ने से आपको किस विषय को कितना समय देना है, समझ में आ जाएगा. साथ ही डेली शेड्यूल भी बन जाएगा.
* इन सबसे स्ट्रेस कम होता है और आपको पता रहता है कि कौन-सा चैप्टर कब कंप्लीट करना है.
* आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है, इसे आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता, इसलिए अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
* आप किस समय पूरी तरह से कॉन्संट्रेशन के साथ पढ़ पाते हैं, जैसे- सुबह, शाम, रात, तो डिफिकल्ट सब्जेक्ट की पढ़ाई करने के लिए वही समय चुनें.
* भरपूर और अच्छी नींद लेने के साथ-साथ ही ख़ुश व तनावमुक्त रहें.
* अपने खानपान व डायट पर ध्यान दें.
* ख़ुद को प्रोत्साहित करें व शाबासी दें.
* पढ़ाई के समय मोबाइल फोन, चैटिंग, सोशल मीडिया आदि से दूर रहें.
* यदि इसके एडिक्ट हैं, तो कुछ समय तक मोबाइल में रिचार्ज ही न कराएं.
* स्वच्छ व शांत वातावरण में पढ़ाई करें.
* जब पढ़ने बैठें, तब डिफिकल्ट सब्जेक्ट को पहले पढ़ें, क्योंकि उस समय आपका मूड फ्रेश और कॉन्संट्रेशन लेवल हाई रहता है.
* पढ़ाई को गेम की तरह लें यानी जिस तरह गेम में कोई लेवल पार करने के बाद अवॉर्ड मिलता है, उसी तरह ख़ुद को पुरस्कृत करें.
* टेबल और डेस्क पर ही पढ़ाई करें. यदि चाहें, तो बीच-बीच में आराम करते रहें.
* गंभीरतापूर्वक पढ़ाई करें और अनुशासित रहें.
* अपने को शाबाशी दें, इनाम दें और ख़ुद से वादा करें कि इस निश्‍चित समय तक पढ़ाई कर लेने के बाद ब्रेक लेकर कुछ मनोरंजन करेंगे या फिर थोड़ी देर के लिए बाहर टहलने जाएंगे.
* यदि आप चाहें, तो बीच-बीच में थोड़ी-थोड़ी देर पर ब्रेक लेते रहें. फिर भी कम से कम आधे घंटे तक लगातार एकाग्र होकर पढ़ें. उसके बाद चाहें, तो थोड़ी देर के लिए टहलें या फिर जूस, शरबत, चाय-कॉफी आदि लेकर दोबारा पढ़ने के लिए बैठें.
* कोई चैप्टर कई बार कोशिश करने पर भी समझ नहीं आ रहा हो, तो टीचर्स, फ्रेंड्स या फिर इंटरनेट पर सर्च करके उसे समझने की कोशिश करें.
* ख़ुद को हमेशा बेहतर करने का चैलेंज देते रहें. दूसरों से तुलना करने की बजाय ख़ुद से तुलना करें.
* योग, प्राणायाम, मेडिटेशन, वर्कआउट्स आदि करते रहें. इससे एकाग्रता बढ़ती है.
* पॉज़िटिव रहें. सकारात्मकता आपको स्ट्रेस व घबराहट से बचाती है.

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ये न करें

* दूसरों की बनाई रूपरेखा के भरोसे रहना.
* टाइम टेबल फॉलो न करना.
* एग्ज़ाम के एक दिन पहले रात में अधिक देर तक पढ़ना.
* लंबे समय तक बिना ब्रेक के लगातार पढ़ते रहना.
* अधिक चाय-कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स लेना.

रीविज़न के लिए टिप्स

* रीविज़न के लिए पर्याप्त समय रखें, जिससे आख़िरी समय में स्ट्रेस न हो.
* इससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा.
* इसके लिए एक टाइम टेबल बनाएं, ताकि आप अपनी तैयारी का अवलोकन कर सकें. थोड़ा समय बाकी चीज़ों के लिए भी रखें.
* अलग-अलग तरी़के से रीविज़न करें, जिससे आपको भी पढ़ने में मज़ा आए.

एग्ज़ाम के समय

* परीक्षा देने के एक दिन पहले अच्छी नींद ज़रूर लें.
* परीक्षा देने से पहले कुछ खाकर जाएं और एग्ज़ाम हॉल में समय से थोड़ा पहले पहुंचें.
* एग्ज़ाम के समय टेंशन न लें. रिलैक्स और कूल रहें.
* यदि असहज महसूस कर रहे हों, तो थोड़ी देर के लिए मन को शांत करें. गहरी सांस लें और छोड़ें.
* पेपर मिलते ही शांत मन से एक बार उसे अच्छी तरह से पढ़ लें.
* प्रत्येक प्रश्‍न के लिए समय बांट लें और कोशिश करें कि निर्धारित समय में उसे पूरा कर सकें.
* टॉपिक के मेन पॉइंट्स, सब हेडिंग को ज़रूर लिखें व हाइलाइट करें.
* जब समय कम हो और उत्तर अधिक लिखने हों, तो नए तथ्यों को संक्षिप्त में लिखकर जवाब समाप्त करें.
* पेपर में न पूछे गए सवालों के जवाब न दें यानी अपने मन से अन्य बातों को न लिखें.
* उत्तर को पैराग्राफ में न लिखें.
* शॉर्ट फॉर्म का इस्तेमाल न करें, जो पढ़नेवाले को भी पता न हो.
* उत्तर के बीच में ही निष्कर्ष न दें. क्रमानुसार प्रश्‍नों का उत्तर दें.

– ऊषा गुप्ता

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