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शिल्पा शेट्टी ने शेयर की बॉलीवुड में अपने संघर्ष की कहानी, बिना वजह प्रोड्यूसर फिल्मों से निकाल देते थे (Shilpa Shetty on her struggle in Bollywood: Producers threw me out of their films without any reason)

शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) फिल्म इंडस्ट्री की सफलतम अभिनेत्रियों में से एक हैं. हाल ही में शिल्पा शेट्टी के इंस्टाग्राम पर 11 मिलियन यानी 1 करोड़ फॉलोवर्स हो गए. यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. मेन स्ट्रीम सिनेमा से दूर रहने के बावजूद शिल्पा छोटे पर्दे, सोशल मीडिया, वेब सीरीज़ और विज्ञापनों के माध्यम से दर्शकों से जुड़ी रहती हैं, शायद यही वजह है कि इतने सालों तक उन्होंने इंडस्ट्री पर अपनी पकड़ बनाए रखी है. लेकिन शिल्पा का फिल्मी सफर इतना आसान नहीं था. यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया और यह बात ख़ुद उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ शेयर की.

Shilpa Shetty

जी हां, हाल ही में शिल्पा ने ‘ह्यूमन ऑफ बॉम्बे’ के इंस्टाग्राम पेज से बात करते हुए अपने स्ट्रगल की कहानी बताई. इस दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें प्रोड्यूसर किस तरह बिना किसी वजह के अपनी फिल्मों से बाहर कर दिया करते थे.

Shilpa Shetty

शिल्पा ने लिखा, ‘मैं काली, लंबी और पतली थी. जिसकी ज़िंदगी काफ़ी कुछ पहले से ही डिसाइडेड थी. मेरा ग्रैचुएशन करके पापा के साथ काम करना तय किया गया था. लेकिन मैं अंदर ही अंदर कुछ बड़ा करने की ख्वाहिश पाले बैठी थी, कुछ अलग, कुछ बेहतर करना चाहती थी, लेकिन मुझे कभी ऐसा लगा ही नहीं कि मैं कर पाऊंगी.  मैंने एक फैशन शो में सिर्फ मस्ती के लिए पार्टिसिपेट किया तो मैं एक फोटोग्राफर से मिली जो मेरी तस्वीरें लेना चाहता था.  मेरे लिए यह एक बहुत अच्छा मौका था अपने कंफर्ट जोन से बाहर आने का. अच्छी बात यह है कि फोटोग्राफर्स बहुत अच्छे आए.’

यहीं से मैंने मॉडलिंग की शुरुआत की. कुछ भी आसानी से नहीं मिलता है. मैंने कभी भी ये दुनिया नहीं देखी थी और न ही चीजों को समझा था. जब कामयाबी की कसौटी पर कसे जाने का वक्त आया तो मैं तैयार नहीं थी.  जब मैंने इंडस्ट्री में कदम रखा तो मैं सिर्फ 17 साल की थी.  मुझे नहीं पता था हिंदी कैसे बोलते हैं. कैमरा के आगे हिचकिचाती थी. मैंने बहुत कोशिश की लेकिन लगता था कि मैं बस पीछे-पीछे लटकी हुई हूं. एक पल को एन्जॉय करना और दूसरे को इगनोर कर देना आसान नहीं होता है. मुझे याद है कि ऐसे प्रोड्यूसर थे जिन्होंने बेवजह मुझे अपनी फिल्मों से बाहर कर दिया. कोई मेरे पक्ष में नहीं था. मुझे लगातार कोशिश करते रहना था. जो मैं कर रही थी.’

शिल्पा ने इस बारे में और बताते हुए लिखा, ‘मैंने खुद को अलग पहचान देने का फैसला किया और बिग ब्रदर में एंट्री ली. ये मेरे लिए कुछ अलग करने का मौका था. इसके बाद जिंदगी में काफी बदलाव आए. वहां भी लोगों ने मुझे जल्दी स्वीकार नहीं किया क्योंकि मैं भारत से थी. ये मेरे लिए बहुत मुश्किल था. मैं उस घर में अपने में ही रहती थी. लेकिन मैंने हार नहीं मानी. जब मैं ये शो जीती तो लोगों ने मुझसे कहा कि हमें तुम पर गर्व है. इस स्ट्रगल ने मुझे बहुत कुछ दिया.

मैंने अपनी ज़िंदगी के हर एक लम्हें का इंजॉय किया है. आज मैं जो कुछ भी हूं, इसी वजह से हूं. आज मैं स्ट्रॉन्ग इंडिपेंडेंट वुमन, एक एक्टर, एक पत्नी और मां हूं. इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता.

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शहीद भगत सिंह के जन्मदिन पर उनके टॉप 10 अनमोल वचन (Top 10 quotes by Shaheed Bhagat Singh on his Birth Anniversary)

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का नाम सुनकर ही हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है और रग-रग में देशभक्ति की लहर बहने लगती है. महज़ 23 साल की उम्र में देश पर शहीद होनेवाले भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को बंगा गांव, लायलपुर, पंजाब के सिख परिवार में हुआ था. देश की आज़ादी के लिए अपना संपूर्ण जीवन न्योक्षावर कर देनेवाले भगत सिंह आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं. आज भी उनके कहे अनमोल वचन लोगों कोे प्रेरित करते हैं. आइए पढ़ें, उनके कहे 10 अनमोल वचन… bhagat singh

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1. ज़िंदगी हमेशा अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कंधों पर तो बस जनाज़े ही उठाए जाते हैं.

2. बुराई इसलिए नहीं बढ़ती कि बुरे लोग बढ़ गए हैं, बल्कि इसलिए बढ़ती है, क्योंकि बुराई सहन करनेवाले लोग बढ़ गए हैं.

3. जो भी व्यक्ति विकास के लिए खड़ा होगा, उसेे हर एक रूढ़िवादी चीज़ को चुनौती देनी होगी तथा उसमें अविश्‍वास करना होगा.

4. मेरा एक ही धर्म है, देश की सेवा करना.

5. कवि, एक पागल प्रेमी और देशभक्त एक ही चीज़ से बने हैं.

6. हमारे लोगों को मारकर वो कभी हमारे विचारों को नहीं मार सकते.

7. सामान्यत: लोग परिस्थिति के आदी हो जाते हैं और उनमें बदलाव करने की सोच मात्र से डर जाते हैं. अत: हमें इस भावना को क्रांति की भावना से बदलने की ज़रूरत है.

8. मैं एक इंसान हूं और जो भी चीज़ें इंसानियत को प्रभावित करती हैं, मुझे उनसे फ़र्क पड़ता है.

9. क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है. स्वतंत्रता सभी का कभी न ख़त्म होनेवाला जन्म सिद्ध अधिकार है. श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है.

10. कोई व्यक्ति तब ही कुछ कर सकता है, जब वह अपने कार्य के परिणाम को लेकर आश्‍वस्त होता है, जैसे हम असेंबली में बम फेंकने पर थे.

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– सत्येंद्र सिंह