Tag Archives: Success Story

रीना धर्मशक्तू: स्कीइंग करते हुए अंटार्टिका साउथ पोल पहुंचनेवाली पहली भारतीय महिला (Reena Dharmshaktu: First Indian Woman To Ski To South Pole)

Reena Dharmshaktu, First Indian Woman, Antarctica South pole

कहते हैं, शादी के बाद लड़की के करियर पर फुलस्टॉप लग जाता है, लेकिन रीना के साथ ऐसा नहीं हुआ, बल्कि शादी के बाद उनके करियर को नई ऊंचाई मिली. रीना धर्मशक्तू स्कीइंग करते हुए अंटार्टिका साउथ पोल पहुंचनेवाली पहली भारतीय महिला हैं और ये गौरव उन्हें शादी के बाद हासिल हुआ. कैसा था ये ऐतिहासिक सफ़र, राह में क्या-क्या रुकावटें आईं, उनका सामना कैसे किया..? ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानने के लिए हमने बात की रीना धर्मशक्तू से.

Reena Dharmshaktu, First Indian Woman, Antarctica South pole

क्या आपने कभी सोचा था कि आप इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर लेंगी?
सच कहूं तो ये मेरा बचपन का सपना था. बचपन में जब मैं कंचनजंघा की ख़ूबसूरत चोटी को निहारा करती, तो सिक्किमवासियों की तरह मैं भी इस पर्वत को दैवीय रूप समझती थी. ये मेरी दिली ख़्वाहिश थी कि एक दिन मैं भी माउंटेनियर बनकर इन शिखरों को छू सकूंं. इसके लिए मैंने हिमाचल, लद्दाख, उत्तराखंड में ट्रेनिंग ली. अंटार्टिका पहुंचने से पहले मैं कैलाश, गंगोत्री-1, प्लूटेड पीक शिखरों पर चढ़कर लौट चुकी हूं. मुझे लगता है, जीवन में आगे बढ़ने या बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए हमें अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलना चाहिए. जो हम आसानी से कर सकते हैं, उसे करने की बजाय जो करना मुश्किल है, उसे करने का जोखिम उठाकर ही हम कुछ नया कर सकते हैं. मैं ख़ुशक़िस्मत हूं कि मैं अपने सपने को साकार करने में क़ामयाब रही.

आपने अपने सपने को सच कर दिखाने की पहल कब की?
मेरा बचपन दार्जलिंग में बीता और तभी से मुझे पर्वतों से प्यार हो गया. पापा आर्मी में थे इसलिए मुझे देश में कई जगहों पर रहने का मौक़ा मिला. बचपन जब मैंने हिलेरी (एंडमंड हिलेरी और नोर्वे तेनजिंग सबसे पहले एवरेस्ट पर पहुंचे थे) को दार्जलिंग में देखा, तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न था. उनसे मिलकर ऐसा लगा जैसे मैं इतिहास से मिल रही हूं. मैं तेनजिंग से तो नहीं मिल पाई, लेकिन उनके माउंटेनियर बेटे जिमलिंग से ज़रूर मिली थी. उनसे उनके पिता के बारे में बहुत कुछ जानने का मौक़ा मिला.

साउथ पोल मिशन में शामिल होने का ख़्याल कैसे आया?
जब मैंने अंटार्टिका साउथ पोल मिशन के बारे में सुना तो ख़ुद को अप्लाई करने से रोक नहीं सकी. इसके लिए लगभग 130 भारतीयों ने अप्लाई किया था. मैं शारीरिक-मानसिक रूप से उनकी कसौटी पर फिट थी इसलिए मेरा सलेक्शन हो गया. सलेक्शन के बाद क्या खाएं, स्टेमिना और स्ट्रेंथ को कैसे बढ़ाएं आदि की ट्रेनिंग दी गई.

सिलेक्शन के बाद लक्ष्य तक पहुंचने का अनुभव कैसा था?
वो बहुत ही लाजवाब अनुभव था. अलग-अलग देश की महिलाएं, रहन-सहन, भाषा, परवरिश सब कुछ अलग, लेकिन सभी का लक्ष्य एक था.
सफ़र आसान नहीं था, लेकिन हमें हर हाल में अपने लक्ष्य तक पहुंचना था. हम 8 महिलाओं ने सफ़र शुरू किया था, लेकिन पहुंची स़िर्फ 7, एक को लौटना पड़ा, जिसका हम सभी को बहुत दुख हुआ. हमारे साथ कोई गाइड नहीं था, हम सब कुछ ख़ुद ही करते थे. वहां का तापमान माइनस 10 से 35 डिग्री सेल्शियस तक रहता था और हवा भी बहुत तेज़ चलती थी. शुरुआत में हम 10-12 किलोमीटर ही स्कीइंग कर पाते थे, लेकिन कुछ ही दिनों में हम 15-30 किलोमीटर रोज़ाना स्कीइंग करने लगे थे. उस बर्फीले सफ़र में अपना वज़न खींचना ही मुश्किल होता था, उस पर हमें अपना सामान ख़ुद ढोकर ले जाना होता था. हमें एक के पीछे एक चलना होता था. सबसे आगे वाले के हाथ में नेविगेशन की कमान होती थी. डेढ़ घंटे स्कीइंग करने के बाद हम सात मिनट रेस्ट करने के लिए रुकते थे, उससे ज़्यादा रुकने पर शरीर अकड़ने लगता था. (हंसते हु) उतनी ठंड में यदि शरीर हलचल न करे, तो जम जाएगा. पानी तो वहां होता नहीं था इसलिए हम बर्फ को पिघलाकर पीते थे. फिर उस पानी को हम थर्मस में जमा कर लेते थे, ताकि वह फिर से बर्फ न बन जाए. शाम को हम जहां पहुंचते, वहां टैन्ट लगाकर रात गुजार लेते थे. ठंड के मारे हाथ-पैर बुरी तरह दर्द करते थे, लेकिन मुश्किलों का भी अपना मज़ा है.

यह भी पढ़ें: देश की पहली महिला ब्लैक बेल्ट (ताइक्वांडो) किरण उपाध्या से सीखें सेल्फ डिफेंस की टॉप १० टेक्नीक्स

Reena Dharmshaktu, First Indian Woman, Antarctica South pole

साउथ पोल पहुंचकर कैसा लग रहा था?
वहां पहुंचने का अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. नीचे दूर-दूर तक पसरी बर्फ की चादर और ऊपर कभी न ख़त्म होने वाला आसमान. ऐसा लगता था बस, थोड़ी देर बाद ही क्षितिज तक पहुंच जाएंगे, हमें धरती का कोना मिल जाएगा. आसमान, धरती, चांद-तारे.. वहां से हर चीज़ ख़ूबसूरत नज़र आती थी, हर चीज़ को निहारने का अलग ही अनुभव होता था. वहां पर कोई जीवन नहीं है, लेकिन उस जगह पर ग़ज़ब की एनर्जी है. इतनी शांति मैंने कभी महसूस नहीं की. यकीन ही नहीं होता था कि ये भी धरती का ही एक हिस्सा है. एक अलग ही दुनिया थी वहां, जिसकी स़िर्फ कल्पना की जा सकती है, जिसे स़िर्फ महसूस किया जा सकता है. मैं ख़ुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे वहां जाने का मौका मिला. सच कहूं तो मुझे फिर वहां जाने की इच्छा होती है.

आपने साउथ पोल मिशन कितने दिनों में पूरा किया?
हम 7 देशों की 7 महिलाएं अपने लक्ष्य को पाने के लिए जी जान से मेहनत कर रही थीं और आख़िरकार 29 दिसंबर 2009 के दिन हमें मंज़िल मिल ही गई. अंटार्टिका के तट से 900 कि.मी. स्कीइंग करके जब हम साउथ पोल पहुंचे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि हमने ये कर दिखाया है. 38 दिनों तक लगातार स्कीइंग करते हुए अंटार्टिका पहुंचना आसान काम नहीं था. हम सब एक-दूसरे से गले लगकर रो रहे थे. साउथ पोल पहुंचकर हम वहां दो दिन ठहरे थे. वो दो दिन मेरी ज़िंदगी के बेशक़ीमती दिन हैं. ़कुदरत का इतना ख़ूबसूरत नज़ारा शायद ही कहीं देखने को मिले. हमसे पहले भी कई लोगों ने वहां पहुंचने की कोशिश की, लेकिन क़ामयाब नहीं हो पाए.

साउथ पोल मिशन में आपके पति ने आपको कितना सपोर्ट किया?
मेरे पति लवराज भी माउंटेनियर हैं इसलिए वो मुझे और मेरे काम को अच्छी तरह समझते हैं. लवराज अब तक पांच बार एवरेस्ट होकर आए हैं (उन्होंने इतनी सहजता से बताया जैसे एवरेस्ट न हुआ गली का नुक्कड़ हुआ) और एक बार कंचनजंघा भी पहुंचे हैं. लवराज को 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. मेरे अंटार्टिका जाने के ़फैसले और तैयारी में उनका बहुत बड़ा योगदान है. जब मैं अंटार्टिका के मिशन से लौटी, तो लवराज दिल्ली एअरपोर्ट पर बैंड-बाजा के साथ मेरे स्वागत में खड़े थे. शादी के बाद पार्टनर का सपोर्ट बहुत ज़रूरी होता है. मैं ख़ुशनसीब हूं कि लवराज क़दम-क़दम पर मेरे साथ होते हैं.

आप और आपके पति एक ही प्रोफेशन में हैं, आपकी लवराज से पहली मुलाक़ात कब और कैसे हुई थी?
लवराज से मेरी पहली मुलाक़ात लेह में हुई थी, जब वो पहाड़ चढ़कर लौट रहे थे और हम पहाड़ चढ़ने जा रहे थे. फिर मुलाक़ातों का सिलसिला बढ़ा. हम दोनों के शौक़, जीने का तरीक़ा, प्रोफेशन एक जैसे थे इसलिए जल्दी ही हम ये महसूस करने लगे कि हम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं. हमने हमेशा रोमांचक यात्राओं को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है. (हंसते हुए) शादी के बाद भी घर में रोमांस का कम और प्रकृति का ज़िक्र ज़्यादा होता था.

यह भी पढ़ें: मिलिए भारत की पहली महिला फायर फाइटर हर्षिनी कान्हेकर से 

Reena Dharmshaktu, First Indian Woman, Antarctica South pole

अब आपके आगे के क्या प्लान्स हैं?
प्रकृति ने मुझे बहुत कुछ दिया है, अब मैं प्रकृति का कर्ज़ चुकाना चाहती हूं. मैं पर्यावरण के लिए काम कर रही हूं, लोगों को पर्यावरण का महत्व और उसे बचाए रखने के बारे में बताती हूं, ग्रुप माउंटेनियरिंग के लिए जाती हूं, आगे भी बहुत काम करना चाहती हूं. मेरी ख़्वाहिश नॉर्थ पोल (उत्तरी ध्रुव) तक पहुंचने की भी है. मैंने दुनिया के एक छोर को छू लिया है, अब दूसरे छोर को छूना चाहती हूं.

आप एक मां भी हैं, क्या कभी मातृत्व आपके करियर के आड़े आया है?
मां बनने के बाद कुछ समय के लिए मैंने अपनी गतिविधियां कम कर दी हैं, ताकि अपने बेटे को पर्याप्त समय दे सकूं. अभी वो छोटा है इसलिए उसे मेरी ज़रूरत है और उसके साथ रहना मुझे बहुत अच्छा लगता है. फिलहाल मैं स्कूल, इंस्टिट्यूट्स में पर्यावरण और एडवेंचर स्पोर्ट्स पर लेक्चर देने जाती हूं. मेरे लिए एक और ख़ुशी की बात ये है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा जल्दी ही मुन्स्यारी (पिथौरागढ़) में पंडित नैनसिंह माउंटेनियरिंग इंस्टिट्यूट शुरू होने जा रहा है, जिसका ओएसडी मुझे नियुक्त किया गया है.

रीना धर्मशक्तू और उनके पति लवराज की उपलब्धियां
* रीना को वर्ष 2010 में राष्ट्रपति द्वारा तेज़िंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड मिला है, ये अवॉर्ड अर्जुन अवॉर्ड के समान ही है. लवराज को यही अवॉर्ड वर्ष 2003 में मिला है.
* लवराज को वर्ष 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है.

– कमला बडोनी

 

10 छोटी बातों में छुपी हैं 10 बड़ी ख़ुशियां (10 Little Things Can Change Your Life)

Little Things Can Change Your Life

आजकल लोग समय की कमी का रोना रोकर जीवन की छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हाथ धोने लगे हैं, जबकि सच्चाई ये है हम जिस चीज़ को ज़रूरी समझते हैं उसके लिए समय निकाल ही लेते हैं. अतः जिंदादिली से जीने के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करें और उनके अनुरूप अपने समय को विभाजित करें, क्योंकि यही है जीने की सही कला. साथ ही इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर रहें ख़ुश, संतुष्ट और ऊर्जावान.

1) अक्सर लोग क़ीमती चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ते हैं और उनकी चाह में दुखी रहते हैं, जबकि सच्चाई ये है कि सर्वश्रेष्ठ चीज़ें अक्सर मु़फ़्त ही मिलती हैं. प्रेम, वात्सल्य, संतान, हवा, पानी आदि के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन इन्हें पाने के लिए हमें पैसे ख़र्च नहीं करने पड़ते, ये तमाम चीज़ें हमें मु़फ़्त मिलती हैं. अत: छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ें, फिर बड़ी ख़ुशियां आपके पास अपने आप आ जाएंगी.

2) हम ख़ुद अपनी शक्ति को नहीं पहचानते इसलिए कोई भी नया या चैलेंजिंग काम करते समय ख़ुद को कम न आंकने लगते हैं. आप ऐसा न करें. यदि आपकी सोच सकारात्मक है और आपको ख़ुद पर विश्‍वास है, तो आपकी आंतरिक शक्ति भी खुलकर सामने आएगी और आप बड़े से बड़ा काम कर पाएंगे.

3) दूसरों को समझने या उनसे प्यार करने से पहले ख़ुद से प्यार करें. यकीन मानिए, ज़िंदगी को देखने का आपका नज़रिया ही बदल जाएगा.

4) जिन चीज़ों से आपको चिढ़ है या जो चीज़ें आपके व्यवहार को नकारात्मक बनाती हैं, उनसे उलझने की बजाय उनसे किनारा कर लें. उनके बारे में सोचना ही छोड़ दें. इससे आप बहुत हल्का महसूस करेंगे.

5) समय सदा एक-सा नहीं रहता, ये सोचकर जीवन में आए हर बदलाव को बेख़ौफ़ स्वीकारें और परिस्थिति के अनुरूप ख़ुद को ढालने की कोशिश करें. ऐसा करने से आपको कठिनाइयों से जूझने की शक्ति मिलेगी.

यह भी पढ़ें: शरीर ही नहीं, मन की सफ़ाई भी ज़रूरी है

6) आपके पास क्या नहीं है, उसके बारे में सोचकर कुढ़ने की बजाय आपके पास क्या है, उसे देखकर ख़ुश होएं और आगे बढ़ने की कोशिश करते रहें. ऐसा करके आप जीवन का पूरा लुत्फ़ उठा पाएंगे.

7) हमारे शौक हमारे लिए टॉनिक का काम करते हैं. इनसे हमें ख़ुशी मिलती है और हम जीवन को नए उत्साह से जीते हैं. अतः अपने शौक़ के लिए ज़रूर टाइम निकालें.

8) हम जैसा सोचते हैं, जैसी भावना रखते हैं, हमारा शरीर, हमारी त्वचा भी वैसा ही रूप लेने लगती है. अतः अच्छा सोचें और स्वस्थ व ख़ूबसूरत नज़र आएं.

9) महान व कामयाब व्यक्ति एक दिन में उपलब्धि हासिल नहीं कर लेते, इसके लिए वो लगातार मेहनत करते हैं. अत: आप भी जीवन में आगे बढ़ने के लिए रोज़ थोड़ी मेहनत करें. परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, आप हार न मानें. आपका ख़ुद पर विश्‍वास ही आपको आगे बढ़ाएगा.

10) कुछ पाने से पहले देना सीखें. प्रकृति का ये नियम है कि हम जो देते हैं, वही पाते हैं. जब आप देना सीख जाते हैं, तो आप में संतुष्टि का भाव आ जाता है और आप विनम्र बन जाते हैं. यही विनम्रता ही आपको जीवन में आगे ले जाती है.

यह भी पढ़ें: भावनाएं भी चुराती हैं ख़ूबसूरती 

[amazon_link asins=’8192910962,8182748267,9352643925,817992985X’ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’aa67ad53-0cc2-11e8-ace1-f17cd05e279e’]

हेमा मालिनी… हां, सपने पूरे होते हैं…! देखें वीडियो (Hema Malini… Yes, Dreams Do Get Fulfilled…! Watch Video)

Hema Malini

कौन कहता है आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों

हां, मैंने भी कुछ हसीन सपने देखे थे और ज़िंदगी ने मुझे ड्रीम गर्ल का ख़िताब दे डाला. मैंने आसमान छूने की ख़्वाहिश की और मेरे चाहनेवालों ने मुझे फलक पर बिठा दिया. मैंने ज़िंदगी में अपने हर क़िरदार को पूरी शिद्दत से निभाया और ज़िंदगी ने हमेशा मुझे मेरी ख़्वाहिश से ज़्यादा ही दिया है. हम दुनिया में आते हैं… बड़े होते हैं, फिर आंखों में कई नए-नए सपने पलने लगते हैं… उन्हें देखते हैं और जुट जाते हैं उन्हें पूरा करने में… दिल में कई अरमान जागते हैं… हम भागने लगते हैं उन्हें मुकम्मल करने के लिए… हसरतों के दायरे फिर हमें धीरे-धीरे कैद करने लगते हैं अपनी परिधि में… ये तो है इंसानी फ़ितरत, लेकिन इसमें भी यदि हम बात करें एक औरत की, तो उसके दायरे तो व़क्त के साथ-साथ और भी सिमटने लगते हैं… लेकिन जहां तक मेरी बात है, तो मुझे न तो अपने दायरे समेटने पड़े और न ही सपनों पर पाबंदी लगानी पड़ी, क्योंकि मेरे प्रयास सच्चे थे और मुझे अपनों का भी भरपूर साथ मिला.

Hema Malini

मैं यही कहूंगी कि बेशक, हर सपना पूरा होता है, यदि आप सही दिशा में काम कर रहे हों और आपने अपने सपने को पूरा करने की हर मुमकिन कोशिश की हो. यदि हम अपने अतीत पर नज़र डालेंगे, तो पाएंगे कि आज हम जो कुछ भी हैं, वो अतीत में हमारे द्वारा किए गए प्रयासों का ही नतीजा है.
ख़्वाहिशें, अरमान, अपेक्षाएं, इच्छाएं… ये तमाम तत्व इंसानी फ़ितरत का हिस्सा हैं. ख़्वाहिशें रखना ग़लत भी तो नहीं है. किसी चीज़ को पाने की ख़्वाहिश रखना बहुत अच्छी बात है और ये भी सच है कि आप पूरी ईमानदारी के साथ जितने बड़े सपने देखते हैं, ज़िंदगी आपको उससे कहीं ज़्यादा देती है, लेकिन उसके लिए आपका अपने सपनों के प्रति ईमानदार होना ज़रूरी है. जैसे आप यदि मर्सिडीज़ ख़रीदने का लक्ष्य रखते हैं, तो उसके बाद आपका मस्तिष्क उसी दिशा में सोचना शुरू कर देता है, आप उसे पाने के रास्ते तलाशने लगते हैं, आपके हालात भी उसी के अनुरूप बदलने लगते हैं और आख़िरकार आप मर्सिडीज़ ख़रीद लेते हैं. इसलिए जीवन में लक्ष्य का होना बहुत ज़रूरी है.

Hema Malini dreamgirl

हमें बचपन से अपने बच्चों को ये बात सिखानी चाहिए कि बड़े लक्ष्य रखो, बड़े सपने देखो और उन्हें पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत करो, फिर आपको वो चीज़ पाने से कोई नहीं रोक सकता. अक्सर मैं लोगों को देखती हूं, जिन्हें ज़िंदगी से बहुत शिकायत रहती है… बहुत कुछ होने के बाद भी वो संतुष्ट नहीं होते. उन्हें शायद ख़ुद भी यह नहीं पता होता कि उन्हें आख़िर क्या चाहिए. यही वजह है कि न तो उनके पास कोई लक्ष्य होता है और न ही उसे हासिल करने के लिए कोई प्रेरणा. मन की चंचलता उन्हें ताउम्र असंतुष्ट रखती है और वो भटकते रहते हैं, इसलिए सबसे ज़रूरी है कि आपके मन में यह बात पूरी तरह से साफ़ होनी चाहिए कि आपकी मंज़िल क्या है और आपको उस तक किस तरह से पहुंचना है. आपके प्रयास किस तरह के होने चाहिए और आपके त्याग कितने बड़े हो सकते हैं.

Hema Malini award
अगर मैं अपनी बात करूं, तो मैं भी एक बेहद आम-सी लड़की थी, लेकिन मेरी मां ने मेरे लिए बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने के लिए मुझे सही दिशा दी. अगर मेरी मां कोई और होती, तो शायद मैं आज यहां न होती. मेरी मां ने मेरी ज़िंदगी को सही दिशा दी और मुझे उसके लिए मेहनत करने की हिम्मत भी दी. आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें मेरी मां का बहुत बड़ा रोल है.

यह भी देखें: हेमा मालिनी …और मुझे मोहब्बत हो गई… देखें वीडियो

Hema Malini daughters
आज जब मैं अपने बचपन को याद करती हूं, तो पाती हूं कि मेरी परवरिश बहुत अच्छे माहौल में हुई. मेरी मां ने मुझे कला के प्रति समर्पित होना सिखाया, इसीलिए मेरी कला आज मेरी पहचान बन गई है. मां ने मेरे लिए जो सपने देखे थे, उन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने मुझे सही राह दिखाई, इसीलिए आज मैं यहां पहुंच पाई हूं. बचपन में जब मैं अपनी खिड़की से बाहर देखती थी कि मेरे फ्रेंड्स बाहर खेल रहे हैं और मैं घर में डांस की प्रैक्टिस कर रही हूं, तो मुझे मां पर बहुत ग़ुस्सा आता था, लेकिन आज जब मैं देखती हूं कि वो लड़कियां कहां हैं और मैं कहां हूं, तब समझ में आता है कि मेरी मां ने मेरे लिए कितने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने के लिए कितनी मेहनत की. आज मैं जो कुछ भी हूं, अपनी मां की वजह से हूं. बच्चों को प्यार देना जितना ज़रूरी है, उन्हें अनुशासन में रखना भी उतना ही ज़रूरी है. मां ने मेरे साथ भी ऐसा ही किया, उन्होंने मुझे सिखाया कि आपके पास यदि हुनर है, तो उसे इतना निखारो कि आपका हुनर ही आपकी पहचान बन जाए. मैंने यदि कला की साधना की है, तो कला ने भी मुझे नाम-शोहरत सब कुछ दिया है.

यह भी देखें: हेमा मालिनी का पॉलिटिकल करियर

hema malini dance
हर पैरेंट्स को अपने बच्चों को सपने देखना और गोल सेट करना सिखाना ही चाहिए, फिर उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. वैसे भी आजकल इतने
छोटे-छोटे बच्चे रियालिटी शोज़ में कितना कुछ कर दिखाते हैं, उनके इस टैलेंट के पीछे उनके पैरेंट्स की मेहनत साफ़ दिखाई देती है. बच्चा पढ़ाई में ही अच्छा हो ये ज़रूरी नहीं, बच्चे के टैलेंट को पहचानें और उसे उसी फील्ड में आगे बढ़ने दें.यक़ीन मानिए, आप जिस भी चीज़ को शिद्दत से चाहते हैं, वो आपको मिलती है, आपको बस मेहनत करते रहना चाहिए.

हेमा मालिनी के बारे में और ज़्यादा पढ़ने के लिए क्लिक करें