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शक्कर मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित करता है? (How Does Sugar Affects Our Brain?)

यह तो हम सभी जानते हैं कि ज़्यादा शक्कर (Sugar) हमारी सेहत (Health) के लिए हानिकारक (Harmful) होती है और अत्यधिक मात्रा में शक्कर का सेवन करने से मोटापा, डायबिटीज़, दांत ख़राब होना जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता है कि ज़्यादा शक्कर खाने से हमारे मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर भी बुरा असर पड़ता है. बहुत से शोधों से इस बात की पुष्टि हुई है कि शक्कर का हमारे मूड, सीखने की क्षमता और जीवनशैली पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. सबसे महत्वपूर्ण बात शक्कर, मेपल सिरप जैसे हाई फ्रूक्टोज़ युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन हमारे मानसिक स्वास्थ्य को काफ़ी हद तक प्रभावित करता है.

Sugar

डिप्रेशन और स्किज़ोफ्रेनिया
जो लोग डिप्रेशन और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं, उन पर शक्कर का नकारात्मक प्रभाव अन्य लोगों की तुलना में ज़्यादा पड़ता है, क्योंकि ब्लड शुगर में बार-बार उतार-चढ़ाव होने से मूड डिसऑर्डर की समस्या बढ़ जाती है. एक शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि हाई शुगर से डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ जाता है. आपको बता दें कि आंकड़ों के अनुसार, जिन देशों के लोग ज़्यादा शक्कर का सेवन करते हैं, वहां डिप्रेशन के केसेज़ ज़्यादा देखने को मिलते हैं. स्किज़ोफ्रेनिया से ग्रस्त लोगों पर इसका असर और भी ज़्यादा होता है.

तनाव
हालांकि शक्कर खाने से तनाव नहीं होता है, लेकिन जो लोग अत्यधिक शक्कर का सेवन करते हैं, उनमें तनाव से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. खाने में शक्कर की मात्रा घटाकर आप तनाव से बेहतर तरी़के से डील कर सकते हैं. इसके साथ ही कम शक्कर का सेवन आपके मूड को भी बेहतर बनाने में मदद
करता है.

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लत
बहुत से अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई कि शक्कर में ऐसे गुण होते हैं, जिनके कारण लोगों को इसकी लत पड़ जाती है. ड्रग्स और शक्कर का सेवन करने से मस्तिष्क में फील गुड हार्मोन डोपाइन का स्राव बढ़ जाता है. एक शोध के दौरान पाया गया कि चूहों ने कोकीन की बजाय शक्कर को प्राथमिकता दी और उनमें शक्कर की लत के लक्षण भी दिखें.

याद्दाश्त और सीखने की क्षमता प्रभावित
शक्कर के सेवन से याद्दाश्त पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. चूहों पर हुए एक शोध में पाया गया कि 6 हफ़्तों तक फ्रूक्टोज़ का सेवन करने के बाद चूहे अपने बिल का रास्ता भूल गए. शक्कर के अत्यधिक सेवन से ब्रेन सेल्स के कम्यूनिकेशन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे सीखने की क्षमता और याद्दाश्त पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

Health Problems From Sugar

शक्कर का सीमित सेवन

1. अत्यधिक शक्कर वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज़ करें. ज़्यादातर प्रोसेस्ड फूड्स में शक्कर होता है, इसलिए कोई भी प्रोसेस्ड फूड ख़रीदने से पहले लेबल को ध्यान से पढ़ें.
2. अगर कुछ मीठा खाने का मन कर रहा है तो मिठाई या आइसक्रीम की बजाय फल खाएं.
3. सोडा और आर्टिफिशियल फ्रूट जूस न पीएं.
4. डायट सोडा और आर्टिफिशियल स्वीटनर से भी परहेज़ करें.प फ्लेवर्ड योगर्ट न खाएं, क्योंकि उसमें भी शक्कर होता है. इसकी बजाय सादी दही में फल और 1-2 बूंद वेनिला एक्सट्रैक्ट मिलाकर खाएं.

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इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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Amazing Health Benefits: शुगर, कोलेस्ट्रॉल के साथ ही इन बीमारियों में भी फ़ायदेमंद है दालचीनी (Amazing Health Benefits of cinnamon)

Cinnamon Health Benefits

Cinnamon Health Benefits

सब्ज़ी का स्वाद बढ़ानेवाली दालचीनी सेहत के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद है. (Amazing Health Benefits of cinnamon)

 

ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है
दालचीनी के नियमित उपयोग से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. यह टाइप 2 डायबिटीज़ में बहुत उपयोगी साबित होती है.

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल
बॉडी में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा कम होने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने लगता है. दालचीनी कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करती है. 2 चम्मच शहद, 3 चम्मच दालचीनी पाउडर 1/2 लीटर गरम पानी के साथ ले. इससे कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है.

उल्टी-दस्त में कारगर
बहुत ज़्यादा उल्टी-दस्त होने पर घरेलू उपचार में दालचीनी का उपयोग करें. इससे बहुत जल्द आराम मिलेगा. इसके लिए 1 ग्लास पानी में दालचीनी पाउडर उबालें फिर उसमें शहद मिलाएं और धीरे-धीरे पीएं. जल्द फ़ायदा मिलेगा.

Cinnamon Health Benefits

अस्थमा से राहत
अस्थमा की समस्या होने पर दालचीनी पाउडर को गुड़ के साथ मिक्स करके गर्म पानी के साथ लें. इससे आराम मिलेगा.

कोल्ड-कफ में राहत
दालचीनी में एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो कोल्ड एंड कफ होने पर राहत पहुंचाते हैं. शहद के साथ दालचीनी पाउडर मिलाएं और गर्म पानी के साथ लें. जल्द आराम मिलेगा.

सिरदर्द से राहत
काम के प्रेशर से अगर सिर में अचानक से दर्द शुरू हो गया है, तो तुरंत दवाई खाने से बचें. दालचीनी पाउडर को गरम पानी में मिलाकर पेस्ट बनाएं और उसे माथे यानी फोरहेड पर लगाएं. 10 मिनट बाद बाद धो लें. आराम मिलेगा.

कान के दर्द से निजात
अगर कान में तेज़ दर्द हो रहा हो या कम सुनाई पड़ता हो, तो दालचीनी के तेल की कुछ बूंदें कान में लेने से बहुत फ़ायदा होता है.

गैस से राहत
गैस की समस्या हो तो दालचीनी का उपयोग फायदेमंद हैं. इसके लिए 1 चम्मच दालचीनी के पाउडर में 1 चम्मच शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ इसका सेवन लाभप्रद होता है.

 

Cinnamon Health Benefits

जॉइंट पेन से राहत
जोड़ो के दर्द को कम करने के लिए दालचीनी बहुत ही फ़ायदेमंद है. गुनगुने पानी में दालचीनी पाउडर और थोड़े-सा शहद मिलाकर शरीर में दर्द वाले अंग पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें. बहुत जल्द फ़ायदा होगा. एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से भी जोड़ों के दर्द से निजात मिलती है.

स्किन प्रॉब्लम से छुट्टी
त्वचा की समस्या होने पर भी दालचीनी बहुत फायदेमंद है. त्वचा में खाज और खुजली होने पर दालचीनी पाउडर तथा शहद बराबर मात्रा में लेकर पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट को लगाने से त्वचा की यह समस्या दूर होती है. दालचीनी के पाउडर में थोड़ा सा नीबूं का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से कील मुंहासे दूर होते हैं.

दिल को रखे सेफ
आजकल की बिज़ी और स्ट्रेस भरी लाइफ में हमारा दिल कमज़ोर होता जा रहा है. ऐसे में इसकी हिफाज़त के लिए दालचीनी का सेवन करें. रोज़ाना शहद में दालचीनी मिलाकर खाने से फ़ायदा होगा.

क्या होता है दालचीनी में?
– विटामिन ए
– विटामिन बी6
– कैल्शियम
– आयरन
– मैग्नीशियम
– फाइबर

डायबिटीज़ से निजात पाने के घरेलू उपाय (Home Remedies To Get Rid Diabetes)

शक्कर के हेल्दी विकल्प ( Natural Substitutes for Sugar)

Natural Substitutes for Sugar

Healthy sugar

Natural Substitutes for Sugar

अक्सर लोग ख़ुशी के मौके पर कहते हैं कि कुछ मीठा हो जाए. लेकिन अगर आप मीठी खाने की सोच रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं. शक्कर सेहत के लिए किसी मीठे ज़हर से कम नहीं है. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर शक्कर न खाएं तो फिर अपनी शुगर क्रेविंग्स को कैसे कंट्रोल करें. कौन से दूसरे विकल्प हैं शक्कर. चलिए, आपकी इस मुश्किल को हल करते हैं और जानते हैं चीनी के हेल्दी विकल्प (Natural Substitutes for Sugar).

 

खजूर
* खजूर एक नेचुरल स्वीटनर है और इसे न्यूट्रिशन का पावरहाउस माना जाता है.
* इसे आप शक्कर की जगह आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें पोटैशियम, विटामिन बी6 व कैल्शियम होता है
* यह शुगर क्रेविंग्स आसानी से कम कर देता है. इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होती है, जिससे एनर्जी मिलती है.
* इसे खाना खाने के बाद मीठे के तौर पर भी खाया जा सकता है.
* इसे ब्राउन शुगर का अच्छा सब्सिट्यूट माना जाता है.
* मिल्क शेक, दही, बेकिंग, शुगर फ्री खीर, केक, पुडिंग आदि में चीनी की जगह खीर का इस्तेमाल किया जा सकता है.

Natural Substitutes for Sugar

गुड़
* गन्ने से बना गुड़ चीनी से बेहतर है, क्योंकि चीनी की तरह इसे कई रिफाइनिंग प्रोसेस से होकर नहीं गुज़रना पड़ता है और इसमें मौजूद मिनरल्स  बरकरार रहते हैं.
* गुड मीठी तो होती ही है, साथ ही यह शरीर की सफ़ाई भी करती है
* गुड़ से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है. चाय में शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल फ़ायदेमंद होता है.
* गुड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फाइबर इसे एक स्वास्थ्यवर्धक स्वीटनर बनाता है.

Natural Substitutes for Sugar

शहद
* इसमें फ्लेवोनॉइड होता है. इसके अलावा यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है.
* यह दूसरे नेचुरल स्वीटनर से ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है. इसमें फ्रक्टोज़
* चाय, दूध, नींबू पानी आदि में चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है.
* चीनी खाने से वज़न बढ़ जाता है, जबकि शहद न केवल वज़न को कंट्रोल करता है, बल्कि इसे बढ़ने से भी रोकता है.

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गन्ने का जूस
* शक्कर से बेहतर है गन्ने का जूस, क्योंकि इसे शक्कर की तरह रिफाइनिंग प्रोसेस से होकर नहीं गुज़रना पड़ता है. इसकी वजह से इसमें मौजूद  पोषक तत्व, जैसे- विटामिन बी,सी, कैल्शियम आयरन और मैगनीज़ इसमें बरकरार रहते हैं.
* गर्मियों के मौसम में गन्ने का एक ग्लास जूस आपको स्फूर्ति देगा.

Natural Substitutes for Sugar

फल
* सभी तरह के फलों में भी प्राकृतिक मिठास होती है.
* मिल्क शेक बनाना हो या जूस नेचुरल स्वीटनर होने की वजह से इनमें शक्कर डालने की ज़रूरत नहीं होती है.
* एप्पल खीर के अलावा फलों से अलग-अलग तरह के डेज़र्ट्स भी बनाए जा सकते हैं, जिनमें शक्कर डालने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं होती है.
* अंगूर भी ग्लूकोज़ अच्छा स्रोत माना जाता है.

Natural Substitutes for Sugar

स्टेविया
* यह एक पौधा होता है, जिसकी पत्तियां मीठी होती है. इस पौधे को मीठी पत्तियां भी कहा जाता है.
* इस पौधे की पत्तियों में शक्कर से 300 गुना ज़्यादा मिठास है.
* इसमें कार्ब्स और कैलोरी भी कम होती है.

Natural Substitutes for Sugar

क्यों ख़तरनाक है शक्कर?
* चीनी में कोई पोषक तत्व नहीं होते हैं. चीनी बनाने में रासयनिक प्रक्रिया के दौरान उसमें मौजूद सारे पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं और केवल कैलोरी रह जाती है.
* ज़्यादा शक्कर इम्यून सिस्टम पर असर डालता है.
* चीनी को पचाने में शरीर को काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है.
* एक रिसर्च के मुताबिक़, फ्रक्टोज और ग्लूकोज का ज़्यादा मात्रा में सेवन करने से लिवर पर टॉक्सिक असर होता है.
* ज़्यादा मीठा खाने से मोटापा तो बढ़ता ही है साथ ही टाइप-2 डायबिटीज़ और हाई ब्लडप्रेशर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
* ज़्यादा मीठा दिमाग़ को नुक़सान पहुंचाता है, जिससे याद्दाश्त कमज़ोर हो जाती है.
* यह शरीर में अतिरिक्त इंसुलिन बनाती है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का ख़तरा बढ़ जाता है और हार्टअटैक और स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है.

Natural Substitutes for Sugar

क्या कहती है रिसर्च?

* वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के दिशा निर्देशों के मुताबिक़, रोज़ाना ली जानेवाली कैलोरी में शक्कर की मात्रा 10 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए और भविष्य में इसे 5 फ़ीसदी तक लाने की कोशिश करनी चाहिए. ध्यान रखें की केवल चीनी ही नहीं, बल्कि रोज़ाना खाए जानेवाले ब्रेड, चावल, आलू, सोड़ा, कूकीज़, केक, फल आदि में भी मिठास होती है.
* अगर पूरे दिन में केवल 25 ग्राम शुगर का सेवन किया जाए तो स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव नहीं पड़ेगा. लेकिन ब्रेड, पैक्ड जूस, प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड्रिंक्स आदि में शक्कर काफी होती है. इनका सेवन करते समय ध्यान रखें, ताकि अतिरिक्त चीनी न खा लें.
* डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़ डायबिटीज़, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से बचना है तो शक्कर कम खाएं.
* एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि चीनी या मीठे का सेवन अल्कोहल और धूम्रपान की ही तरह एक नशा है.

चीनी की चेतावनी

कई विशेषज्ञों का मानना है कि जिन प्रोडक्ट्स में चीनी अधिक इस्तेमाल की गई हो, उसके पैकेट या बॉटल पर सिगरेट की पैकेट की तरह चेतावनी लिखी होनी ज़रूरी है कि चीनी की लत भी लगती है और यह स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं.