Tag Archives: Sunny Deol

फ्रेंड के लिए रैपर बने सनी देओल के बेटे करण देओल, देखें वायरल वीडियो (Karan Deol rapping at best friend’s wedding is breaking the internet. Watch viral video)

यह तो हम सभी जानते हैं कि सनी देओल (Sunny Deol) के बेटे (Son) करण देओल (Karan Deol) जल्द ही बॉलीवुड में एंट्री करनेवाले हैं. लगता है कि बड़े पर्दे पर पदार्पण के लिए करण ने कमर कस ली है और इसकी पूरी तैयारी की है. जी हां, करण एक्टिंग के साथ-साथ दूसरे हुनर में भी माहिर दिख रहे हैं.

Karan Deol

हाल ही में करण देओल के बेस्टफ्रेंड यश डोंगरे शादी के बंधन में बंधे. यश डोंगरे मशहूर फैशन डिज़ाइनर अनीता डोंगरे के बेटे हैं. शादी के अवसर पर करण अपने फ्रेंड के लिए रैप करते हुए स्पीच दी और अपने दोस्त के बारे में रैप करते हुए अपने दिल की बात कही.

यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. करण ने यश के लिए रैप करते हुए बहुत-सी बातें कहीं. वहां मौजूद सभी लोगों ने उनके इस स्टाइल को बहुत पसंद किया और इसका वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. करण ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा,” तुम्हारे नए जीवन की शुरुआत के लिए मेरे पास देने के लिए प्यार के सिवा और कुछ नहीं है यश. मैं तुम्हें तबसे जानता हूं, जब हम बहुत छोटे थे और अब मैं तुम्हें मैरिड मैन बनते हुए देख रहा हूं. इस रैप में इस्तेमाल किए गए सभी शब्द मायने रखते हैं. मैं बेस्ट मैन बनकर बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं.”

Pal Pal Dil Ke Paas

काम की बात करें तो करण जल्द ही फिल्म पल पल दिल के पास फिल्म के साथ सिल्वर स्क्रीन पर डेब्यू कर रहे हैं. इस फिल्म के डायरेक्टर उनके पापा सनी देओल हैं. पिछले महीने सनी देओल ने पल पल दिल के पास का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा था कि एक पिता के लिए अपने बच्चे को उसका लक्ष्य प्राप्त करते हुए देखना बेहद गर्व की बात होती है.

Sunny Deol With Karan Deol

इस फिल्म का टाइटल करण के दादा धर्मेन्द्र की फिल्म ब्लैकमेल के गाने से लिया गया है और यह फिल्म इस साल जुलाई में रिलीज़ होनेवाली है.

ये भी पढ़ेंः अर्जुन कपूर से शादी को लेकर मलाइका ने पहली बार कही ये बड़ी बात (Malaika Arora Statement On Marriage With Arjun)

 

मूवी रिव्यू: सनी के दम पर भैयाजी सुपरहिट (Movie Revie: Bhaiaji Superhit- Sunny Deol Surprises With A Goofy Flick)

Bhaiaji Superhit Review

इन दिनों सनी देओल की कई सालों से अटकी फिल्में सिलसिलेवार आ रही हैं. पिछले हफ़्ते मौहल्ला अस्सी आई, जो काफ़ी समय से बन रही थी. अब आज भैयाजी सुपरहिट सिनेमा के पर्दे पर आ पाई है. दोनों ही फिल्मों में अभिनय के मामले में सनी देओल ने काबिल-ए-तारीफ़ अभिनय किया है.

भैयाजी अपनी पत्नी सपना के छोड़कर चले जाने से परेशान हैं. वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पत्नी को वापस लाना चाहते हैं. इसके लिए फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आना, अभिनय करना, कुछ पुराने दुश्मनों से भिड़ना आदि चलता रहता है. इसमें निर्देशक व लेखक के रूप में अरशद-श्रेयस की जुगलबंदी देखते ही बनती है.

भैयाजी सुपरहिट में भी सनी देओल दबंग के क़िरदार में अपना दबदबा दिखाने में सफल रहे हैं. वे अपनी पत्नी सपना (प्रीति ज़िंटा) को बेइंतहा चाहते हैं और उससे डरते भी हैं. सपना के क़िरदार में प्रीति ने बेहतरीन काम किया है. वे बोलती कम और गोली ज़्यादा चलाती हैं. हमेशा शरारती-चुलबुली अंदाज़ में दिखनेवाली प्रीति एक नए ही अंदाज़ में सपना के रूप में चटक साड़ियों, भरी चूड़ियों में प्रभावशाली पत्नी के ज़बर्दस्त रोल में नज़र आती हैं. लंबे समय बाद प्रीति ज़िंटा को पर्दे पर देखना सुकून की तरह रहा. जब-जब पर्दे पर अरशद और श्रेयस की एंट्री होती है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. दोनों ही कलाकारों की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है. कह सकते हैं कि प्रीति ज़िंटा के अलावा अन्य सभी कलाकारों यानी अमीषा पटेल, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती, मुकुल देव, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, प्रकाश राज, एवलिन शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है.

नीरज पाठक का निर्देशन स्तरीय है. थोड़ी-सी और मेहनत करते तो फिल्म के सभी उम्दा कलाकारों से और भी बढ़िया काम करवा सकते थे. निर्माता चिराग धारीवाल और फौजिया अर्शी के साहस की दाद देनी होगी कि इतने सालों बाद ही सही फिल्म रिलीज़ तो हुई. साजिद-वाजिद, संजीव-दर्शन, जीत गांगुली, राघव सच्चर, अमजद नजीम, फौजिया अर्शी जैसे संगीतकारों का जमावड़ा है, पर एक भी गाना दिलोदिमाग़ पर ठहर नहीं पाता है. सुखविंदर सिंह, असीस कौर, यासेर देसाई के गाए गीत बस थोड़ी-सी राहत भर दे पाते हैं. फिल्म में एक्शन, कॉमेडी के साथ ईमोशंस भी है. भैयाजी सुपरहिट  होगी की नहीं पता नहीं पर भैयाजी तो हमेशा ही हिट हैं.

– ऊषा गुप्ता

यह भी पढ़ेदेखें Top 10 सुपरहिट पंजाबी गानें (Superhit Punjabi Songs)

मूवी रिव्यू: मोहल्ला अस्सी/पीहू- दो ख़ूबसूरत प्रस्तुति- एक व्यंग्यात्मक तो दूसरी में मासूम अदाकारी (Movie Review: Mohalla Assi/Pihu- Remarkable Performances And Thought Provoking Scripts)

 

 Mohalla Assi/Pihu
मोहल्ला अस्सी- धर्म, संस्कृति, राजनीति पर करारा व्यंग्य

एक ओर सनी देओल अलग व दमदार अंदाज़ में नज़र आते हैं मोहल्ला अस्सी में, तो वहीं पीहू में दो साल की बच्ची की मासूम अदाकारी बेहद प्रभावित करती है.

हिंदी साहित्यकार काशीनाथ सिंह की काशी का अस्सी पर आधारित मोहल्ला अस्सी फिल्म धर्म, राजनीति, आस्था, परंपरा आदि के माननेवाले को बहुत पसंद आएगी. भारतीय सोच पर भी करारा व्यंग्य किया गया है. वैसे भी जो मज़ा बनारस में वो न पेरिस में है, न फारस में… इसी चरितार्थ करती है फिल्म. निर्माता विनय तिवारी की यह फिल्म चाणक्य सीरियल व पिंजर मूवी फेम डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी  के बेहतरीन निर्देशन के कारण बेहद आकर्षक व ख़ास बन गई है. बनारस के निवासी, गंगा नदी, घाट, गली-मोहल्ले, वहां के तौर-तरी़के, लोगों की विचारधारा, राजनीति का प्रभाव, धर्म, कर्मकांड सभी का ख़ूबसूरत चित्रण किया गया है.

कहानी बनारस के मोहल्ला अस्सी की है, जहां पर धर्मराज पांडे यानी सनी देओल ब्राह्मणों की बस्ती में अपनी पत्नी साक्षी तंवर और बच्चों के साथ रहते हैं. वे जजमानों की कुंडली बनाते हैं और संस्कृत भी पढ़ाते हैं. अपने धर्म व उससे जुड़ी अन्य बातों को लेकर वे इतने सख़्त रहते हैं कि अपने मोहल्ले में विदेशी सैलानियों को किराए पर घर रहने के लिए नहीं देते और न ही अन्य लोगों को ऐसा करने देते हैं. उनका मानना है कि विदेशियों के खानपान व आचरण के सब गंदा व अपवित्र हो रहा है. लेकिन हालात करवट बदलते हैं और उन्हें आख़िरकार न चाहते हुए वो सब करना पड़ता है, जिसके वे सख़्त ख़िलाफ़ थे. फिल्म में पप्पू चाय की दुकान भी है, जो किसी संसद से कम नहीं. जहां पर वहां के लोग हर मुद्दे पर गरमागरम बहस करते हैं, फिर चाहे वो राजनीति का हो या फिर कुछ और.

सनी देओल अपनी भाव-भंगिमाएं व प्रभावशाली संवाद अदाएगी से बेहद प्रभावित करते हैं. उनका बख़ूबी साथ देते हैं साक्षी तंवर, रवि किशन, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, मिथलेश चतुर्वेदी, मुकेश तिवारी, सीमा आज़मी, अखिलेंद्र मिश्रा आदि. अमोद भट्ट का संगीत स्तरीय है. विजय कुमार अरोड़ा की सिनेमाटोग्राफी क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

Mohalla Assi/Pihu

Pihu

 

पीहू- नन्हीं बच्ची का कमाल

निर्देशक विनोद कापड़ी की मेहनत, लगन और धैर्य की झलकियां बख़ूबी देखने मिलती है पीहू फिल्म में. आख़िरकार उन्होंने दो साल की बच्ची से कमाल का अभिनय करवाया है. कथा-पटकथा पर भी उन्होंने ख़ूब मेहनत की है. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर, रोनी स्क्रूवाला व शिल्पा जिंदल बधाई के पात्र हैं, जो उन्होंने विनोदजी और फिल्म पर अपना विश्‍वास जताया. बकौल विनोदजी यह सच्ची घटना पर आधारित है और इस पर फिल्म बनाना उनके लिए किसी चुनौती से कम न था.

फिल्म की जान है पीहू यानी मायरा विश्‍वकर्मा. उस नन्हीं-सी बच्ची ने अपने बाल सुलभ हरकतों, शरारतों, मस्ती, सादगी, भोलेपन से हर किसी का दिल जीत लेती है.

कहानी बस इतनी है कि पीहू की मां (प्रेरणा विश्‍वकर्मा) का देहांत हो चुका है और उनकी बॉडी के साथ वो मासूम बच्ची घंटों घर के कमरे में अकेले व़क्त बिताती है. उसे नहीं पता कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वो मासूम उनसे बात करती है, घर में इधर-उधर घूमती है, भूख लगने पर गैस जलाकर रोटी भी सेंकने की कोशिश करती है, घर को अस्त-व्यस्त, उल्टा-पुल्टा कर देती है. सीन दर सीन उत्सुकता, डर, घबराहट, बेचैनी भी बढ़ती जाती है. कम बजट में विनोदजी ने लाजवाब फिल्म बनाई है.

– ऊषा गुप्ता

यह भी पढ़े: Deepveer Wedding: शादी में दीपिका ने ओढ़ी ख़ास चुनरी (Deepika Wore Special Chunni On Wedding)

ही मैन धर्मेंद्र हुए 82 साल के, जानें ये रोचक बातें और देखें उनके हिट गाने (Top 10 Songs: Happy birthday Dharmendra)

Happy birthday Dharmendra

बॉलीवुड के ऐक्शन किंग और ही मैन कहे जाने वाले धरम पाजी (Dharam Paji) यानी कि धर्मेंद्र (Dharmendra) हो गए हैं 82 साल के. लेकिन उनकी फिटनेस देखकर कौन कहेगा कि वो 82 साल के हो गए हैं. धर्मेंद्र का एक आम इंसान से सुपरस्टार बनने का सफ़र बेहद ही रोचक रहा है.Happy birthday Dharmendraउनका जन्म 8 दिसंबर, 1935 को पंजाब में हुआ था. गांव में ही उन्होंने पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की थी. उनका पूरा नाम धरम सिंह देओल (Dharam Singh Deol) है. उनकी पहली शादी तब हो गई थी, जब वो केवल 19 साल के थे. फिल्मों में काम करने से पहले धर्मेंद्र रेलवे में क्लर्क थे और उन्हें सवा सौ रुपए सैलरी मिलती थी.

फिल्मफेयर का टैलेंट अवॉर्ड जीतकर धर्मेंद्र मुंबई आ गए और फिल्मों में स्ट्रगल करने लगे. विवाहित होने की वजह से उन्हें फिल्में मिलने में काफ़ी दिक़्कते आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धर्मेन्द्र की पहली फिल्म थी दिल भी तेरा हम भी तेरे, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फिल्म के प्रीमियर पर धर्मेन्द्र को किसी ने नहीं पहचाना और ग़ुस्से में वो ट्रेन से घर चले गए थे. फिल्म अनपढ़ और बंदिनी से उन्हें पहचान मिली. फिल्मों में शुरुआत में उनकी छवि एक रोमांटिक हीरो की थी, लेकिन फूल और पत्थर, धरम वीर, चरस, आज़ाद और शोले ने उन्हें एक्शन हीरो बना दिया. आज भी धरम पाजी का अंदाज़ उनके फैन्स पसंद करते हैं. फिल्मों में उनकी दूसरी पारी को भी पसंद किया गया.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से धर्मेंद्र को ढेरों शुभकामनाएं.

गरम-धरम कहे जाने वाले धरम पाजी के डायलॉग्स बोलने का अंदाज़ दमदार और डांस की अदा अलग थी. आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके 10 फेमस गाने.

फिल्म- लोफर

फिल्म- ब्लैकमेल

यह भी पढ़ें: Unseen Pics: मनीष मल्होत्रा की बर्थडे पार्टी में दिखा फिल्मी जलवा 

फिल्म- बहारें फिर भी आएंगी

फिल्म- प्रतिजा

फिल्म- शालीमार

फिल्म- दोस्त

फिल्म- मेरा गांव मेरा देश

फिल्म- जुगनू

फिल्म- चरस

फिल्म- शोले

[amazon_link asins=’B00D873JPK,B00JGSXSK6′ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’66cd3ce9-db37-11e7-9fc1-5fcb13f6e928′]

फिल्म रिव्यू: ‘डैडी’ में अर्जुन की दमदार ऐक्टिंग, ‘पोस्टर बॉयज़’ देगी एक ख़ास संदेश (Movie Review: Daddy And Poster Boys)

फिल्म रिव्यू, डैडी, दगड़ी चाल, अरुण गुलाब गवली, अर्जुन रामपाल, फिल्म,पोस्टर बॉयज़, Movie Review, Daddy, Poster Boys

फिल्म: डैडी

स्टारकास्ट: अर्जुन रामपाल, फरहान अख्तर, राजेश श्रिंगारपुरे, निशिकांत कामत, ऐश्वर्या राजेश, आनंद इनागले, 

निर्देशक: आशिम अहलूवालिया

रेटिंग: 3.5 स्टार

फिल्म रिव्यू, डैडी, दगड़ी चाल, अरुण गुलाब गवली, अर्जुन रामपाल, फिल्म,पोस्टर बॉयज़, Movie Review, Daddy, Poster Boys

अर्जुन रामपाल एक अलग अंदाज़ में नज़र आ रहे है फिल्म डैडी में. फिल्म एक पॉलिटिकल ड्रामा है. अर्जुन न सिर्फ़ फिल्म में अभिनय कर रहे हैं, बल्कि वो इस फिल्म के को-राइटर भी हैं. आइए, जानते हैं कैसी है डैडी.

कहानी

कहानी है दगड़ी चाल में रहने वाले अरुण गुलाब गवली (अर्जुन रामपाल) की. फिल्म की शुरुआत होती है 70 के दशक से जब मुंबई की मिल्स पर ताला लग जाता है और मिल में काम करने वाले लोग बेरोज़गार हो जाते हैं. पैसों के लिए फिर वो धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड की तरफ़ बढ़ने लगते हैं. ऐसे में एक गैंग बनती है, जिसका नाम होता है बीआरए गैंग और इसके मुख्य सदस्य होते हैं, अरुण, बाबू (आनंद) और रामा (राजेश). फिल्म में मुंबई पर राज करने वाले अरुण गवली का केवल गैंगस्टर से पॉलिटिक्स तक पहुंचने का सफ़र ही नहीं दिखाया गया है, बल्कि एक पति, पिता और बाद में अपने अपराध के लिए सज़ा काटने की भी कहानी भी नज़र आएगी.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म की यूएसपी है अर्जुन की ऐक्टिंग. अर्जुन का लुक और डायलॉग बोलने का अंदाज़ बेहद प्रभावी है. फिल्म का पहला पार्ट अरुण गवली के डॉन बनने के सफ़र पर है, तो वहीं दूसरा भाग में परिवार और नेता बनने की कहानी दिखाई गई है.

70 के दशक को अच्छे ढंग से पर्दे पर उतारा गया है.

अशिम आहलुवालिया का निर्देशन और बेहतर हो सकता था.

स्क्रिप्ट में कमी रह गई थी, जो फिल्म में साफ़ नज़र आ रहा है.

मकसूद के किरदार में फरहान अख़्तर का अभिनय ठीकठाक है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं

अगर आपको क्राइम या अंडरवर्ल्ड पर बनी फिल्में पसंद है, तो आप ये फिल्म देखने जा सकते हैं.

फिल्म: पोस्टर बॉयज़

स्टारकास्ट: सनी देओल, बॉबी देओल, श्रेयस तलपड़े, सोनाली कुलकर्णी,

निर्देशक: श्रेयस तलपड़े

रेटिंग: 3 स्टार

पोस्टर बॉयज़ इसी नाम पर बनी मराठी फिल्म की रीमेक है. कॉमेडी और ठहाकों के बीच फिल्म में एक ख़ास संदेश भी है, जिस पर शायद ही कोई खुलकर बात करता है. नसबंदी जैसे विषय को बड़े ही मज़ाकिया अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की गई है फिल्म में.

कहानी

फिल्म शुरू होती है जंगेठी गांव से, जहां रहने वाले जगावर चौधरी (सनी देओल), विनय शर्मा (बॉबी देओल) और अर्जुन सिंह (श्रेयस तलपडे)अपनी तस्वीर नसबंदी के सरकारी पोस्टर पर देखकर झटका खा जाते हैं. तीनों में से किसी की भी नसबंदी नहीं हुई है. लेकिन इस ऐड की वजह से तीनों की ज़िंदगी में भूचाल आ जाता है. जगावर की बहन की शादी रुक जाती है. विनय की बीवी छोड़कर चली जाती है और अर्जुन शादी टूट जाती है. उनकी तस्वीर किसने इस सरकारी पोस्टर पर छापी है, इसका पता लगाने के लिए तीनों कमर कस लेते हैं. अब इस नसबंदी के पोस्टर की वजह से तीनों की लाइफ में क्या-क्या होता है और वो कैसे इससे निपटते हैं, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म की यूएसपी है फिल्म का मज़ेदार सब्जेक्ट. सनी देओल, बॉबी देओल और श्रेयस तलपड़े की कॉमिक टाइमिंग ज़बरदस्त है.

फिल्म के वनलाइनर्स कमाल के हैं. कॉमेडी के डबल डोज़ के साथ सबसे ख़ास बात यह है कि ये फिल्म एक ज़रूरी संदेश भी देगी कि नसबंदी करवाना कोई ग़लत बात या कलंक नहीं है.

फिल्म के सभी कलाकारों का अभिनय अच्छा है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं

अगर आपको कॉमेडी फिल्में पसंद हैं, तो ये फिल्म बिल्कुल न छोड़ें. सनी, बॉबी को एक बार फिर पर्दे पर साथ देखना वाक़ई दिलचस्प है. इसे पैसा वसूल फिल्म कहा जा सकता है.

मिलिए ‘पोस्टर बॉयज़’ से, सनी, बॉबी देओल और श्रेयस तलपड़े छपे पोस्टर पर! (Fresh! ‘Poster Boys’ Trailer Out)

पोस्टर बॉयज़

पोस्टर बॉयज़

मिलिए नए पोस्टर बॉयज़ से, सनी देओल, बॉबी देओल और श्रेयस तलपड़े पोस्टर पर लग रहे हैं कमाल. सिर पर पगड़ी बांधे और हाथों में डबल्स पकड़े तीनों का ये पोस्टर जितना फनी है, उतना ही फनी है फिल्म का ट्रेलर भी. इस पोस्टर पर लिखा है हमने नसबंदी करवा ली है… आप भी करवा लो… दरअसल फिल्म में तीनों की फोटो नसबंदी वाले गलत विज्ञापन में छप जाती है और इसके पोस्टर जगह-जगह लगा दिए जाते हैं, जिसके बाद शुरू होती है इनकी लाइफ में प्रॉब्लम्स. नसबंदी के विज्ञापन के पोस्टर बॉयज़ बने तीनों को देखकर आप हंसे बिना रह नहीं पाएंगे.

लंबे समय बाद सनी देओल और बॉबी देओल बड़े पर्दे पर साथ नज़र आएंगे साथ ही श्रेयस तलपड़े इस फिल्म से डायरेक्शन में डेब्यू भी कर रहे हैं.

ये फिल्म श्रेयस की ही ओरिजनल मराठी फिल्म पोस्टर बॉयज़ की हिंदी रीमेक है. फिल्म 8 सितंबर को रिलीज़ होगी. देखें ट्रेलर.

यह भी पढ़ें: जग्गा जासूस की नाकामी के लिए ऋषि कपूर ने अनुराग बासु को कोसा 

बॉलीवुड और टीवी से जुड़ी और ख़बरों के लिए क्लिक करें.

फादर्स डे पर विशेष- पापा कहते हैं… (Father’s Day Special- B-Town Celebs ‘Love Messages’ For Their Fathers)

फादर्स डे
main_image-169696priyankaSunny-Deol-nice-hd-wallpapersalia-bhatt-12a160489-shahid-kapoorvivek oberoi
पिता- एक आधार, विश्‍वास, आदर्श, प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक, बेस्ट फ्रेंड, सुपर हीरो… हर शख़्स के दिल में अपने पिता के लिए जाने कितनी ही तरह की भावनाएं बहती रहती हैं. फिल्मी सितारे भी इससे अछूते नहीं हैं. देखें, अपने पिता के बारे में क्या कहते हैं कलाकार.

 

मिस यू…
मेरे पिता एक हैंडसम पठान थे. तमाम ख़ूबियों के बावजूद वे सादगीभरा जीवन जीने में विश्‍वास करते थे. वे मुझसे व मेरी बहन से दोस्ताना व्यवहार करते थे. बड़े-बुज़ुर्ग को मान-सम्मान देना, कड़वी बातों को भूल जाना व हालात कैसे भी हों, सच का दामन नहीं छोड़ना, ये हमने उनसे ही सीखा है. मैंने बहुत पहले उन्हें खो दिया था. आज भी उन्हें मिस करता हूं. फादर्स डे पर अपने पिता के बारे में सोचकर काफ़ी दुखी हूं कि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, पर अपने बच्चों के बारे में सोचकर काफ़ी ख़ुश हूं कि उन्हें उतना भरपूर प्यार दे पा रहा हूं, जितना मेरे वालिद मुझे दिया करते थे.

– शाहरुख ख़ान

मेरे पापा मेरे हीरो…
सभी को फादर्स डे मुबारक हो! मेरे पापा मेरे हीरो रहे हैं. मेरी ज़िंदगी में उनकी जो जगह रही है, उसे न कोई ले सकता है और न ही कोई उनकी कमी को पूरा कर सकता है. उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा, समझा व जाना है. वे मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी थे. थैंक यू पापा.

– प्रियंका चोपड़ा

पापा पर हमें नाज़ है…
मेरे डैडी ऊपर से जितने मज़बूत दिखते हैं, अंदर से उतने ही नरम दिल इंसान हैं. मुझे इस बात की बेहद ख़ुशी होती है, जब लोग कहते हैं कि मैं अपने डैडी की तरह हूं. मेरा यह मानना है कि यदि मैं अपने डैडी की तरह पचास प्रतिशत भी हूं, तो मैं सफल अभिनेता हूं. डैडी को मेरा अभिनय इतना अच्छा लगता है कि यदि कोई मेरी आलोचना कर दे, तो नाराज़ हो जाते हैं.

– सनी देओल

जीने का नज़रिया डैड से सीखा…
मेरे डैड के ही कारण मैं यह समझ सका कि ज़िंदगी में आगे बढ़ना, सफल होना आसान नहीं होता, इसके लिए आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. डैड अपने काम के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं व उनमें धैर्य भी बहुत है. मैंने सही मायने में ज़िंदगी जीने का नज़रिया अपने डैड से ही सीखा है. मैं चाहता हूं कि मैं भी उनकी तरह एक नेक दिल इंसान बनूं.

– रितिक रोशन

उनके ख़्वाब को पूरा कर सका…
मैं आज जो कुछ भी हूं, उसमें मेरी मेहनत के अलावा मेरी मां-पापा की दुआएं भी शामिल हैं. मेरे पापा हमेशा कहते थे कि एक दिन मैं उनका नाम ज़रूर रोशन करूंगा. मुझे इस बात की ख़ुशी है कि इसमें मैं कुछ हद तक सफल रहा और उनके ख़्वाब को पूरा कर सका. पापा ने हमेशा ही मुझे सीख दी कि कामयाबी की बुलंदियों को छूना है, तो हमेशा सिंपल रहो यानी सफलता का गुरूर ख़ुद पर न होने दो.

– शाहिद कपूर

उनकी बेटियां सदा उनके पास रहें…
हर पिता की तरह मेरे पापा भी मेरी शादी नहीं करना चाहते हैं. पापा नहीं चाहते कि मैं और मेरी बहन शाहीन उन्हें छोड़कर कहीं जाएं. वे बहुत ही भावुक क़िस्म के इंसान हैं. वे तो हमारी शादी भी नहीं करना चाहते. उनकी बस यही चाहत है कि उनकी बेटियां सदा उनके पास रहें.

आलिया भट्ट

ख़ुद को सौभाग्यशाली मानता हूं…
पापा को अपने जीवन में पाकर मैं ख़ुद को बेहद सौभाग्यशाली मानता हूं. उन्होंने हमेशा ही न स़िर्फ मेरा मार्गदर्शन किया, बल्कि जीवन से जुड़ी खट्ठी-मीठी सच्चाइयों के बारे में बताया. उनकी ईमानदारी मुझे छूती है. वे कभी भी दिखावा नहीं करते. जब उन्होंने बर्फी देखी थी, तो उन्हें मेरा काम व फिल्म अच्छी लगी, पर उनका कहना था कि मैं आर्ट टाइप की फिल्में न करूं, क्योंकि वो सिनेमा थोड़ा अलग होता है. मैं उनकी सलाह का सम्मान करता हूं. वे बॉम्बे वेल्वेट में मेरे काम से ख़ुश हैं, जो मुझे और भी बेहतरीन करने के लिए प्रेरित करता है.

– रणबीर कपूर

भरपूर प्यार-प्रोत्साहन मिला…
मेरे पिता नंबर वन हैं. उन्होंने हम सभी के लिए अपनी ज़िंदगी में अब तक जो कुछ भी किया है, उसका कोई मोल नहीं है. उन्होंने हमेशा ही मेरा हौसला बढ़ाया है. मैंने अपने पिता को अपना आइडियल मानते हुए ही स्टंट हीरो के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी. जितना प्यार और प्रोत्साहन मुझे अपने डैडी से मिला, उतना किसी से नहीं मिला. मुझे उन पर गर्व है.

– अजय देवगन

मैं भी उनकी तरह सुपरस्टार बनूं…
डैडी मुझे बेहद प्यार करते हैं. मेरी मुस्कुराहट व ख़ुशी के लिए न जाने कितने जतन करते हैं. डैडी का इतना प्यार देखकर मुझे लगता है कि दुनिया की सारी ख़ुशियां उनके क़दमों में लाकर रख दूं. मैं चाहता हूं कि मैं भी उनकी तरह ही सुपरस्टार बनूं, ताकि उन्हें भी मुझ पर वैसे ही गर्व हो, जैसे मुझे उन पर होता है.

– अभिषेक बच्चन

पिता को याद करता हूं, तो सुकून मिलता है…
मेरी ज़िंदगी में मेरे माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं रहा, इसलिए मैंने हमेशा वही किया, जिससे उन्हें दिली ख़ुशी मिले. मेरे पिता हमेशा
चाहते थे कि मैं एक सफल अभिनेता बनूं, क्योंकि उन्होंने मुझे फिल्मों के लिए भटकते व ख़ूब संघर्ष करते हुए देखा था. लेकिन हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते रहते थे और कहते थे कि मैं एक दिन ज़रूर कामयाब कलाकार बनूंगा. उनकी दुआओं का ही असर था कि मुझे न स़िर्फ फिल्में मिलीं, बल्कि सफल भी रहीं.

– गोविंदा

डैडी को हमेशा मुस्कुराते देखा…
अपने डैडी पर मुझे गर्व है. मैंने उनसे ही सीखा है कि यदि इरादे बुलंद हों, तो रास्ते अपने आप बनते जाते हैं. बस, आपमें कुछ कर दिखाने का जज़्बा होना चाहिए. संघर्ष के दौर में भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी व इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई. हालात चाहे जैसे भी रहे हों, मैंने उन्हें हमेशा मुस्कुराते हुए देखा. अपने पिता की तरह मैं भी कुछ ऐसा ही करना चाहता हूं.

– विवेक ओबेरॉय

पापा को मुझ पर फ़ख़्र महसूस हो…
मेरी हमेशा यह ख़्वाहिश रहती थी कि मैं कुछ ऐसा कर दिखाऊं, जिससे मेरे पापा को मुझ पर फ़ख़्र महसूस हो. वे सख़्त स्वभाव के ज़रूर थे, पर उनका दिल बहुत कोमल था. वे जानते थे कि मैं कामयाब बन सकता हूं, पर वे चाहते थे कि मैं अपने बलबूते पर कुछ बनकर दिखाऊं. इसलिए मानसिक तौर पर भले ही उन्होंने मेरा साथ दिया, पर हीरो बनने के लिए मेहनत व संघर्ष मुझे ही करना पड़ा, लेकिन उनके इस नज़रिए ने मुझे हमेशा ही प्रभावित व प्रेरित किया.

– आमिर ख़ान

आई लव यू पापा…
मेरे पिता मेरे हीरो हैं. उनके जैसा कोई नहीं है. मुझे उनकी बेटी होने पर गर्व है. आई लव यू पापा.

– सोनम

amitabh

अमिताभ बच्चन- परिवार को जोड़े रखती हैं बेटियां…
बेटियां पिता की कमज़ोरी होती हैं व हमेशा रहेंगी. परिवार में बेटी के होने का आनंद उठाएं. बेटियां बहुत ख़ास होती हैं और वे परिवार को जोड़े रखने में भी मदद करती हैं. वे घर की आत्मा बन जाती हैं. वे उस प्यार, स्नेह व अपनेपन से हम सभी को अपना बना लेती हैं. वे विश्‍लेषण करती हैं, हिदायत देती हैं, रक्षा करती हैं, नियम बनाती हैं व उस नाज़ुक धागे को आगे बढ़ाती हैं, जो पूरे परिवार को एक साथ बांधे रखता है. वे सलाहकार हैं, ख़्याल हैं, पथ-प्रदर्शक हैं, वाक़ई में वे सर्वोच्च हैं.

– ऊषा गुप्ता