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हैप्पी बर्थडे काका! देखें सुपरस्टार राजेश खन्ना के 10 सुपरहिट गाने (Top 10 Songs: Happy Birthday Rajesh Khanna)

Top Songs Happy Birthday Rajesh Khanna

राजेश खन्ना भले ही हम सब के बीच आज न हो, लेकिन उनकी यादें उनकी सुपरहिट फिल्मों और गानों के ज़रिए सबके ज़हन में अब भी ताज़ा है.  आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं, उनकी फिल्मों के 10 सुपरहिट गाने.

फिल्म- आराधना (1969), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- कटी पतंग (1970), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- मेहबूब की मेहंदी (1971), गायक- मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर

 

फिल्म- अनुरोध (1977), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- दो रास्ते (1969), गायक- मोहम्मद रफ़ी

फिल्म- मेरे जीवन साथी (1972), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- आप की कसम (1974), गायक- किशोर कुमार, लता मंगेशकर

फिल्म- अमर प्रेम (1972), गायक- किशोर कुमार

फिल्म- सच्चा झूठा (1970), गायक- मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर

फिल्म- द ट्रेन (1970), गायक- मोहम्मद रफ़ी

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बर्थडे स्पेशल: आनंद मरा नहीं… आनंद मरते नहीं, काका के सुपरहिट डायलॉग्स और उनकी दिलचस्प बातें (Birthday Special: Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna)

Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna

Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna

बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार, रोमांस के बादशाह, जवां दिलों की धड़कन राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इस लीजेंड की फिल्में और डायलॉग्स आज भी हमें कुछ सिखा जाते हैं. आइए, इस स्पेशल डे पर एक नज़र डालते हैं उनके कुछ फेमस डायलॉग (Famous Dialogues) पर.

  • मैं मरने से पहले नहीं मरना चाहता… ये तो मैं ही जानता हूं कि ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव पर कितना अंधेरा है.
  • बाबू मोशाय, ज़िंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह, उसे ना आप बदल सकते हैं ना मैं. हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं, जिनकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों में बंधी है. कब कौन कहां उठेगा ये कोई नहीं बता सकता.
  • बाबु मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए…लंबी नहीं…
  • मैंने तुमसे कितनी बार कहा पुष्पा मुझसे ये आंसू नहीं देखे जाते. आई हेट टियर्स.
  • एक छोटा सा ज़ख़्म बहुत गहरा दाग़ बन सकता है.
  • इंसान को दिल दे, दिमाग़ दे, जिस्म दे पर कमबख़्त ये पेट न दे.
  • सेठ जिसे तुम ख़रीदने चले हो, उसके चेहरे पर लिखा है नॉट फॉर सेल.
  • किसी बड़ी ख़ुशी के इंतज़ार में हम ये छोटी-छोटी ख़ुशियों के मौ़के खो देते हैं.
  • मैंने मौत को देखा तो नहीं, पर शायद वो बहुत ख़ूबसूरत है. कमबख़्त जो भी उससे मिलते हैं, जीना छोड़ देते हैं.
  • ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं.
  • इस एक ग्लास में एक मज़दूर के एक महीने की रोटी है औऱ परिवार की सांस.

आज भी काका के प्रशंसक उन्हें उतना ही प्यार करते हैं और शायद काका भी ऊपर से ये देख रहे होंगे कि उनके फैन्स उन्हें कितना मिस करते हैं. उनकी फिल्में, गाने, संवाद, स्टाइल और दरियादिली को भुलाया नहीं जा सकता. आप भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अपने फैन्स के दिलों में हमेशा यूं ही छाए रहेंगे, क्योंकि आनंद मरा नहीं… आनंद मरते नहीं.

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राजेश खन्ना… एक रूमानी एहसास

Top 10 Dialogues Of Rajesh Khanna

एक मीठी मुस्कान और न जाने कितनी हसीनाओं के दिल की धड़कनें थम जाती थीं… एक जादूभरी नज़र और न जाने कितनों की रातों की नींदें उड़ जाती थीं… हर दिल उनकी एक-एक अदा पर फिदा था… हर जवां नज़रों में जिसको पाने का ख़्वाब था… वो थे रोमांस के बादशाह, जिनको प्यार से सब कहते थे काका… जी हां, राजेश खन्ना साहब (Rajesh Khanna)… जिनके लिए यह मशहूर था कि ऊपर आका, नीचे काका… ये था उनकी पॉप्युलैरिटी का सबसे बड़ा सबूत…

उनके जन्मदिन के अवसर हम उनकी ज़िंदगी से जुड़े कुछ राज़ आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं…

  • ऐसा माना जाता है कि जब राजेश खन्ना और डिंपल पहली बार मिले थे, तो दोनों ही अपने टूटे दिलों को संभालने की कोशिश में जुटे थे. कहा जाता है कि डिम्पल और ऋषि कपूर बॉबी के दौरान बेहद क़रीब आ गए थे, पर दोनों एक न हो पाए… इसी तरह राजेश खन्ना भी अंजू महेंद्रू के साथ अपनी रिलेशनशिप को एक मुकाम देने में नाकामयाब हो रहे थे. दो टूटे दिल साथ आए और फिर एक हो गए.
  • शादी के व़क्त डिंपल महज़ 15 साल की थीं और राजेश लगभग 31 साल के. शादी के बाद डिंपल का 16वां जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया.
  • दोनों ने अपना हनीमून पोस्टपोन किया था, क्योंकि तब तक डिंपल की डेब्यू मूवी बॉबी कंप्लीट नहीं हुई थी.
  • राजेश खन्ना ने जो उस दौरान स्टारडम देखा था, वो आज तक किसी भी सुपरस्टार ने नहीं देखा. उनके स्टारडम का आलम यह था कि उनकी स़फेद कार लड़कियों के लिपस्टिक के निशान से लाल हो जाती थी.
  • सुपरस्टार शब्द ही उनके स्टारडम की व्याख्या करने के लिए इजाद हुआ था.
  • उस व़क्त मुंबई के बंद पड़े स्टूडियोज़ को फिर से जीवंत कर देने का श्रेय भी राजेश खन्ना को जाता है. उस समय के वो सबसे कम समय में सबसे बिज़ी स्टार बन चुके थे.
  • कहा जाता है कि अपने स्ट्रगल के दौर में भी राजेश खन्ना उस दौर की सबसे महंगी कार में प्रोड्यूसर्स से मिलने जाते थे.
  • राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना था और उन्हें उनके रिश्तेदारों ने गोद लिया था. बचपन में उनके कपड़े विदेशों से ही आते थे और वो काफ़ी लाड़-प्यार में पले-बढ़े थे.
  • किशोर कुमार उनके बेहद क़रीबी दोस्त थे और जो किशोर कुमार अपनी कंजूसी के लिए मशहूर थे, उन्होंने राजेश के लिए उनकी होम प्रोडक्शन मूवी (अलग-अलग) के लिए मुफ़्त में गाने गाए.
  • 1969 से लेकर 1971 के बीच राजेश खन्ना ने बतौर सोलो लीड एक्टर लगातार १५ हिट फ़िल्में दी थीं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इनमें से प्रमुख फ़िल्में थीं- आराधना, बंधन, ख़ामोशी, डोली, आन मिलो सजना, सच्चा और झूठा, आनंद, मेहबूब की मेहंदी, दुश्मन आदि.
  • यूँ तो राजेश खन्ना की सभी को स्टार्स के साथ जोड़ी जमी लेकिन इनमें से सबसे ज़्यादा फिलमें उन्होंने की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के साथ, जी हाँ कुल मिलकर १५ फ़िल्में उनके साथ हैं.
  • गौरतलब है कि मुमताज़ उनकी बेहद क़रीबी को स्टार और दोस्त भी थीं और उनके साथ की सभी ८ फ़िल्में ज़बरदस्त हिट साबित हुई.
  • राजेश खन्ना ने अपनी सुपरहिट फिल्म आराधना में ही इतिहास रच दिया था, फिल्म के मोस्ट रोमांटिक सांग ..रूप तेरा मस्ताना… को सिंगल टेक में ही शूट करनेवाले वो बॉलीवुड के पहले एक्टर बन गए थे.
  • 60 और 70 के दशक में जन्मे कई बच्चों का नाम राजेश रखा गया, ये राजेश खन्ना के स्टारडम का की कमाल था.
  • बहुत काम लोग ही जानते हैं कि फिल्म मिस्टर इंडिया का टाइटल यानि लीड रोल पहले राजेश खन्ना को ही ऑफर किया गया था, लेकिन वो खुद को एक अदृश्य करैक्टर से रिलेट नहीं कर पाए और उन्होंने इस रोल को ठुकरा दिया… बाद में यह रोल अनिल कपूर को मिला, जिसने एक और इतिहास रच दिया.
  • मुम्बई यूनिवर्सिटी में एक लेख राजेश खन्ना के जादुई व्यक्तित्व और करिश्मे पर भी था जो उस वक़्त सिलेबस में शामिल था.
  • अपने करियर में राजेश ने कुल मिलाकर 180 फ़िल्में की. उनके जन्मदिन के अवसर पर हम उन्हें दिल से याद करते हैं और उनकी सबसे जुदा और बेमिसाल अदाकारी व अंदाज़ को सलाम करते हैं.
  • 29 दिसम्बर 1942 में जन्मा ये हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार हमें 18 जुलाई 2012 में अलविदा कह गया. ज़िन्दगी को अपने ही अंदाज़ में जीनेवाले राजेश के आखिरी शब्द थे… टाइम हो गया… पैक अप!

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Birthday Special: रजनीकांत कुली से बन गए सुपरस्टार (Happy Birthday Rajinikanth)

अपने अनोखे अंदाज़ और बेहतरीन अभिनय से फिल्म जगत में अलग मुकाम हासिल कर चुके सुपरस्टार रजनीकांत एक ऐसा नाम है, जो सभी की जुबां पर चढ़कर बोलता है. उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए काफ़ी संघर्ष किया है.the-hindu (1) (1)

रजनीकांत इतने बड़े सुपरस्टार हैं, लेकिन फिर भी ज़मीन से जुड़े हुए हैं. वह फिल्मों के बाहर असल जिंदगी में एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही दिखते हैं और उनके प्रशंसक उन्हें प्यार ही नहीं करते, बल्कि पूजते हैं. उनका संघर्ष हर किसी के लिए इंस्पीरेशन है कि कैसे एक कारपेंटर और बैंगलुरू परिवहन सेवा (बीटीएस) का मामूली-सा बस कंडक्टर व कुली से सुपरस्टार बन गया. उनका जन्म 12 दिसंबर, 1950 को बैंगलुरू में हुआ. उनका असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है. उनके पिता रामोजी राव गायकवाड़ एक हवलदार थे. मां जीजाबाई की मौत के बाद चार भाई-बहनों में सबसे छोटे रजनीकांत को एहसास हुआ कि घर की माली हालत ठीक नहीं है. बाद में उन्होंने परिवार को सहारा देने के लिए कुली का भी काम किया.

एक कंडक्टर के तौर पर भी उनका अंदाज़ निराला था. वह अलग तरह से टिकट काटने और सीटी मारने के अपने स्टाइल की वजह से यात्रियों और दूसरे बस कंडक्टरों के बीच मशहूर थे. रजनी स्टेज पर नाटक करते थे, उन्हें फिल्मों और ऐक्टिंग का शौक तो हमेशा से ही था. धीरे-धीरे ये शौक जुनून में तब्दील हो गया. उन्होंने अपना काम छोड़कर चेन्नई के अद्यार फिल्म इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया. वहां एक नाटक के दौरान निर्देशक के. बालाचंदर की नजर रजनीकांत पर पड़ी और वो रजनीकांत से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने रजनीकांत को तमिल फिल्म अपूर्वा रागंगाल ऑफर की, जिसमें वो खलनायक की भूमिका में थे. रोल भले ही छोटा था, लेकिन इस रोल ने उन्हें दूसरी फिल्में दिलाने में काफ़ी मदद की. इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया.
उनका फिल्मी करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. करियर की शुरुआत में तमिल फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाने के बाद वह धीरे-धीरे एक अभिनेता की तरह उभरे. तेलुगू फिल्म छिलाकाम्मा चेप्पिनडी में उन्हें मेन लीड निभाने का मौक़ा मिला. उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. कुछ सालों में ही रजनीकांत तमिल सिनेमा के महान सितारे बन गए और तब से सिनेमा जगत में एक मिसाल बने हुए हैं.
बॉलीवुड में भी उन्होंने अपनी फिल्मों- मेरी अदालत, जान जॉनी जनार्दन, भगवान दादा, दोस्ती दुश्मनी, इंसाफ कौन करेगा, असली नकली, हम, ख़ून का कर्ज, क्रांतिकारी, अंधा कानून, चालबाज, इंसानियत का देवता के माध्यम से एक ख़ास मुकाम बनाया है.

साल 2014 में रजनीकांत छह तमिलनाडु स्टेट  फिल्म अवार्डस से नवाज़े गए, जिनमें से चार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और दो स्पेशल अवार्डस सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए मिले. साल 2000 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 45वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (2014) में रजनीकांत को सेंटेनरी अवॉर्ड फॉर इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर से सम्मानित किया गया.

पिछली फिल्म कबाली में नज़र आ चुके सुपरस्टार रजनीकांत जल्द ही तमिल साइंस-फिक्शन फिल्म 2.0 में दिखाई देंगे.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से उन्हें जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

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दे दना दन… रिंग के किंग विजेंदर सिंह- एक्सक्लूसिव और हॉट! (Interaction with Superhit Boxer vijender singh)

vijender singh

मंज़िलें छोटी लगने लगती हैं जब सपने बड़े हो जाते हैं, मुश्किलें गौण हो जाती हैं जब नज़रें आसमान पर होती हैं… जब हथेली में सूरज को कैद कर लेने का हुनर हो और ख़्वाहिशों को अपने क़दमों पर झुका लेने का जिगर, तो हमें समझ जाना चाहिए कि सामने बस एक ही शख़्स है… विजेंदर… विजेंदर और स़िर्फ विजेंदर! पलकों पर सितारों का चमकना और आंखों में चांद का खिलना आसान-सा लगता है और सारी उपमाएं, सारी तारी़फें बेतुकी-सी लगने लगती हैं… इस देसी बॉय के हॉट एंड हिट अंदाज़ के सामने. शब्द बिखर जाते हैं… वक़्त सिमट जाता है और हम बस देखते रह जाते हैं इस टैलेंटेड बॉक्सर के सुपरहिट पंचेज़ को, जिनका जवाब उनका मुकाबला कर रहे विरोधी के पास भी नहीं होता.

vijender singh

विजेंदर के देसी मुक्कों में कितना दम है, ये तो चेका जैसे खूंख़ार बॉक्सर को मात्र चंद मिनटों में चारों खाने चित्त करके ही उन्होंने दुनिया को दिखा दिया था …बड़बोले चेका को घर का रास्ता दिखा चुके विजेंदर ख़ुद क्या कहते हैं और क्या सोचते हैं बॉक्सिंग और उसके फ्यूचर के बारे में आइए विजेंदर (vijender singh) से ही जानते हैं इस दिलचस्प मुलाक़ात में…

vijender singh

सबसे पहले Congratulations आपकी इस बड़ी जीत के लिए और अपने टाइटल (डब्लूबीओ एशिया-पेसिफिक सुपर मिडलवेट) को डिफेंड करने के लिए.
थैंक यू वैरी मच! सच कहूं तो मैं स़िर्फ जीता हूं, इस जीत को बड़ा तो मेरे देशवासियों और आप सबने बनाया है… जो भी स्पोर्ट्स को प्यार करता है, गेम की क़द्र करता है उन सभी को दिल से शुक्रिया कहना चाहता हूं. सबने सपोर्ट किया, हौसला दिया और उनकी दुआओं ने मुझे विनर बनाया.

बॉक्सिंग का फ्यूचर कितना ब्राइट है इंडिया में?
बहुत ही ज़्यादा ब्राइट है… लोग गेम को समझते हैं, इतना प्यार देते हैं, ऐसे में प्लेयर्स को भी बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है. इंडिया में भी अब लोग इस स्पोर्ट्स के महत्व को समझने लगे हैं और उसे गंभीरता से भी लेने लगे हैं.

vijender singh

पिछली बार के मुकाबले इस बार लोगों का और भी अच्छा रेस्पॉन्स मिला… तो अपने फैंस को कुछ कहना चाहेंगे?
सभी को थैंक्स कहूंगा और आगे भी इसी तरह प्यार देते रहें… मुझमें और गेम में विश्‍वास जताते रहें… उनको निराश नहीं होने देंगे हम.

जो युवा बॉक्सिंग को करियर के तौर पर देखते हैं उनको क्या राय देना चाहेंगे?
मेहनत के अलावा आगे बढ़ने का कोई रास्ता या शर्त नहीं है… इसलिए चाहे कोई भी स्पोर्ट्स हो या ज़िन्दगी में आप जो भी करना चाहें, एकमात्र ऑप्शन है तो स़िर्फ और स़िर्फ मेहनत ही है.

vijender singh

अपनी फिटनेस और डायट के लिए क्या ख़ास करते हैं?
जमकर प्रैक्टिस करता हूं. बिना प्रैक्टिस और मेहनत के रिज़ल्ट नहीं मिलता, तो सबसे ज़रूरी है कि इनको नज़रअंदाज़ न करें. डायट में मैं प्रोटीन लेता हूं, क्योंकि फिटनेस बनाए रखने के लिए वो बहुत ज़रूरी है… इसलिए उसे अपने डायट का हिस्सा ज़रूर बनाता हूं.

आप सब विदेशी प्लेयर्स के साथ भी खेलते हैं… उनकी तकनीक और फिटनेस हमसे कितनी बेहतर होती है या क्या कुछ फर्क होता है उनमें और हमारी अप्रोच में?
हम उनसे अच्छे और बेहतर हैं… ये सब स़िर्फ कहने की बात है कि उनका फिटनेस लेवल या टेकनीक हमसे बेहतर होती है, जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है. हमको ख़ुद को कभी भी कम नहीं आकना चाहिए. ख़ुद पर भरोसा रखेंगे, तो बेहतर परफॉर्म करेंगे.

vijender singh

अन्य गेम्स के मुकाबले बॉक्सिंग को कहां देखते हैं जहां तक सुविधाओं और पैसों की भी बात करें तो ?
बॉक्सिंग काफी आगे है, न पैसों की कमी है, न सुविधाओं की… न टैलेंट की कमी है और न ही जज़्बे की… हम तैयार हैं दुनिया की नज़रों में नज़रें डालकर बात करने के लिए…
पैसों की भी बात करे, तो वर्ल्ड का हाइयेस्ट पेड प्लेयर भी एक बॉक्सर ही है, तो इसी से अंदाज़ा लगा लीजिए कि बॉक्सिंग का लेवल कितना ऊंचा है और लोग इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं.

बात करें आपकी हॉबीज़ की तो गेम से हटकर क्या करना भाता है…?
खूब सोना … हां, ये सच है, मुझे सोना बहुत पसंद है और जब भी समय मिलता है, मैं जमकर सोता हूं.

फ्री टाइम में और क्या करना पसंद करते हैं जब सोते नहीं हैं तो ?
आई लव म्यूज़िक. म्यूज़िक का मैं बहुत शौक़ीन हूं. वो एक थेरेपी की तरह काम करता है… मन-मस्तिष्क को सुकून देता है… गीत हों, ग़ज़ल हों, पंजाबी सॉन्ग्स हों… सब सुनता हूं.

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घर से दूर जब होते हैं, तो क्या सबसे ज़्यादा मिस करते हैं?
विदेश में होता हूं, तो अपने देश को मिस करता हूं. अपनी मिट्टी… अपना मुल्क तो सभी को याद आता है…

दोबारा आपको रिंग में कब देख पाएंगे?
मार्च या अप्रैल तक. दूसरे टाइटल्स पर भी हमारी नज़र है कि वो भी हमारे देश के नाम हों, तो तैयारी चल रही है और उम्मीद है बहुत जल्द आप सब मुझे फिर से रिंग में देखेंगे.

शुक्रिया इतने बिज़ी शेड्यूल में भी हमें अपना समय देने के लिए.
थैंक यू.

– गीता शर्मा

मिस यू काका, देखें राजेश खन्ना के टॉप 5 गाने

rajesh-limg1बाबु मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए…लंबी नहीं…वाक़ई ये लाइन बिल्कुल फिट बैठती है स्व. राजेश खन्ना पर, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी ज़िंदादिली से जी है. 18 जुलाई 2012 को महज़ 69 साल की उम्र में काका सभी को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी यादें उनकी सुपरहिट फिल्मों और गानों के ज़रिए सबके ज़हन में अब भी ताज़ा है. बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार थे राजेश खन्ना. काका ने जो स्टारडम देखा है, वो शायद ही किसी एक्टर ने देखा हो….काका की चौथी पुण्यतिथि पर आइए, उनके कुछ सुपरहिट गाने देखते हैं.

फिल्म- आराधना (1969)

फिल्म- महबूब की मेंहदी (1971)

फिल्म- मेरे जीवन साथी (1972)

फिल्म- दो रास्ते (1969)

फिल्म- आराधना (1969)